Public Program, Bholapan, Innocence

(भारत)

Public Program, Bholapan, Innocence

म न आपस बताया था पहल भाषण म पहल चीज़ वह जो सहजयो गय क लए ज र ह, वह ह म। जो आदमी म नह कर सकता वह सहजयोग म उतर नह सकता और म का भी म न साथ म थोड़ा बहत बताया था। उसक बाद म न कहा था प व ता। जो आदमी प व ता क भावना नह रखता ह वह भी आदमी सहजयोग म उतर नह सकता। जो आ द काल स प व ता क भावनाए चलती आई ह वह सब भावनाओ को लकर म न कहा ह । आज तीसर बात बताना ह खा कर realized लोग क लए क realization हमारा नया ज म ह। जब ब चा ज मता ह, कोई सा भी ब चा आप द खए ससार क कौन सी भी जा त का हो, चाह वह जापानी हो, चाह वह अ कन हो, चाह वह अम रकन हो, उस ब च म एक चीज़ सब म होती ह और वह ह उसक अबो धता उसका innocence। ब च क वशषता ह उसका innocence इस लए realized आदमी तभी कहलाया जाएगा जब वो पर तरह स innocence म उतर जाए। वस भी जो बहत चालाक लोग होत ह , यवहार चातर िजनम बहत यादा होती ह और िजनक ब ध बड़ी त लक होती ह और हजार आद मय को ठगान म और झठ बोलन म और चालाक दखान म वह बड़ तरबज़ होत ह ऐस लोग सहजयोग क लए ब कल बकार होत ह । इसस जो लोग काफ ठगाय गए ह द नया म और सताय गए ह वो सहजयोग क लए बहत ठ क ह । ससार म चाह वह बहत यश वी लोग ना हो, ल कन सहजयोग म वो बहत ह यादा यश वी हो सकत ह । अबो धता एक बहत बड़ी दन ह। यह भी ज म ज मातर क खोज स ह मन य पाता ह। आप द खएगा बहत स बजग लोग भी बहत ह अबोध होत ह , बहत भोल भाल, सीध साध। और बहत स छोट ब च भी बड़ चालाक, धत होत ह । आजकल क ज़मान म जो आदमी दो-चार पस म कसी को ठग मार, वो सबस बड़ा यश वी आदमी बन जाता ह। एक उदाहरण क तौर पर, जस एक हमार र तदार थ तो हम उनक घर गए। तो वो बड़ अपन को बड़ भार आदमी समझत थ और वो बड़ व वान समझत ह अपन को। बहत यादा उनका यवहार चातर और बीवी बचार अनपढ़। उसको वो कछ ख़ास समझत नह थ। कहत बवकफ ह य और सारा हमारा पसा लटा दगी। और एक पहल दज क कजस ह वो। अब उनक घर हम गए तो बतान लग गए बड़ उसस क “साहब म न द खय य जो ज़मीन ह, य मकान ह, य परा कराए पर ल लया और 30 साल पहल या 40 साल पहल लया था और इसका म य इसका सौ पया कराया द रहा ह। और य सार जमीन मर क ज म ह और कसी क मज़ाल नह कोई हाथ लगाए”। बठ हए ह आराम स, ना उस जमीन म कछ उपजात ह , ना कछ नह । एकड़ जमीन लकर क बठ हए ह उसी पर धावा लगाकर। और कहन लग, “मर उ ल बीवी ह इसक वजह स मि कल, न जान आज कतन महल म न खड़ा कया होता अभी कराए क मकान म रह रह ह ”। उसको अभी तीन-चार गाल दन म भी उनको कोई हज नह था। ल कन य तो हमार र त म हमार जठ होत थ तो हम चपचाप बठ रह, हम न कहा अब आग या बोल । उसक बाद उनक जो बीवी थी वह बचार चपचाप सन कर रह जाती। इतन म एक आदमी आया, वो कहन लगा क “साहब द खए म घर मा लक क ओर स आया ह और घर माल कन कह रह ह क आपक यहा इतन इमल क पड़ ह , उसम स इस इमल का उ ह इमल बहत पसद आती ह, तो आप क हए तो हम दो पया आपको दत ह और आप हम थोड़ी इमल द द िजए”। तो य बगड़ गए, “वाह! या सोचत हो दो पए क इमल कहा स आएगी? पाच पय दो तो द ग”। काफ झकझक झकझक कर । उसक बाद अपनी बीवी स कहन लग खबरदार य आदमी ऊपर ना चढ़न पाय, यहा क इमल ना उतारन पाय। उसक बचार क सौ पए क मकान म वो बचार क रह रह ह उसको कम स कम कछ नह तो तीन चार हजार का नकसान करा दया। कहन लग, “बड़ा पस वाला ह, द सकता ह सब। अब कहना क ऐसा law (कानन) आन वाला ह य घर मरा ह हो जान वाला ह, मरा ह इस पर क जा होन वाला ह”। इसक वो इतजार म ह बताइए। बहरहाल जब वो चल गए तो उनक बीवी न उस आदमी को अदर बलाया।.कहन लगी, “तमको कौन सी इमल जो मगाए ह वो तोड़ लो िजतना भी तोड़ना ह”,मर ह सामन कहा और उसको जब स पाच पए नकाल कर दए। तो उसन कहा, “पाच
पए य द रह ह मर को? मझह को दना ह आपको पसा”। कहन लगी, “भई तम चढ़, तमन महनत कर , उसक पाच पए और उन को मरा नम त कह दना। जाओ, ल जाओ, भग जाओ और कल अगर और चा हए तो आ जाना, ल कन 12:00 बज क बाद आना तब यह चल जात ह ”। तो उसन य जवाब दया क “म तो इतजार म था क कब खसक ग तो म इमल तोड़गा, म आप को तो जानता ह”। अब वो अपन को बड़ चालाक, हो शयार समझत ह और सब उनपर हसत ह ‘गध कह क’। इस तरह स जो अकलमद लोग ह जो अपन को बड़ चालाक और हो शयार और झठ बोलना, इधर लन-ठन करना, इसम जो अपन को हो शयार समझत ह , य सब हो शयार जो ह जहा क तहा रह जाएगी । और ऐस का सहजयोग नह होन वाला ह और कल अगर सहार श हो गया तो य लोग पहल कट ग। और भोला आदमी हमशा बच जाता ह। भोल आदमी म बड़ी वशषता ह। म
वय बहत भोल ह, बहत लोग मझ कहत ह क…। मर घर म तो सब लोग मझस परशान ह , मर भोलपन स।
मान हमार घर पर ऐसा हआ एक दन क हम द ल म रहत थ, तब क बात ह बहत साल पहल क , तो एक बाजार गए थ द ल क बाजार म । वहा एक आदमी आया, बचारा मझस कहन लगा क ‘मझ बहत चोट लग गई ह और मझ समझ म नह आता म कस क , म कस जीऊ गा?’।म न कहा, ‘अ छा चलो, मोटर म बठो’,उसको घर ल आए। घर पर लाए तो उसको हमन मरहम प ट कर और वस भी हम तो ज रत ह मरहम प ट करन क । हाथ-वाथ फरा बचारा ठ क हो गया। उसको बड़ा मर लए म हो गया। अब वो इतनी सबह स शाम तक, 4:00 बज म उठती थी तो वो भी 4:00 बज उठकर क तबस जो घर म महनत कर। ल कन हमार घर क लोग बहत यवहार चातय । उनका कहना, ‘पता नह कहा स चोट खाकर आया ह? कोई हो सकता ह डाक होयगा’। म न कहा, ‘होगा डाक तब, अब तो बदल गया ह, अब तो उसका कतना वभाव बदल गया ह ना’। म न कहा, ‘उसको व वास तो करक दखो’। कहन लग, ‘नह नह , इसको तो प लस म दना होगा, प लस स पता करना चा हए’। रोज उसक पीछ सब लोग लग रह। हमार भाई साहब भी थ, मर husband भी थ और भी लोग, सब लोग मझस कहन लग, ….. इस तरह कॉ स हो गई इसको बठाना ह चा हए प लस म ……। म न कहा, ‘भई माफ कर दो एक बार, दखो अगर चोर करना होगा तो कर ह लगा, नह होगा तो ठ क ह ह। ऐसी कौन सी बात ह, ऐसा कौन हमार पास बड़ा धन घर क अदर पड़ा हआ ह?’। उनक पीछ य लोग पड़ गए। उन दन एक
दन शाद थी। शाद म हम लोग गए तो उसको बाहर बठाकर गय। अदर घर म नह तो फर चोर कर जाएगा, फलाना होयगा, ठकाना होयगा। म न कहा, ‘अ छा ठ क ह ’। उस दन हम क मती ज़वर-ववर पहन कर गए थ। रात को 2:00 बज क कर ब आय। सब थक गए थ तो मर husband भी सो गए और मर भाई भी सो गए और म भी सो गई। तो म न ज़वर-ववर उठाकर ऐस ह बाथ म म रख दया और सो गई। तब तो कोई सोच नह रहा था क चोर-वोर घर म ह। जब सवर उठ तो हमार husband क पर क च पल गायब, उनका दख रह ह जता गायब, उनका दखा तो उधर स पस गायब, वहा स आग चल तो उनका कोट गायब, आग चल तो मर भाई साहब जो थ उनक पाच सौ पय गायब, उनका जता गायब, उनका कोट गायब, उनका न जान एक ब सा क ब सा ह उठा ल गय। और मर इतन महग ज़वर वहा पड़ हए थ, खानदानी हमार ज़वर, एक भी को भी छआ नह । इनक सब चीज उठा करक वो भागता बना य क उनक लए वो डाक ह था और मर लए वो कछ भी नह था। मरा सब सामान छोड़ गया और इन सबक चीज़ लकर चपत हो गया। तो वो लोग कहन लग, ‘य अ छ रह साहब, हमन तो कछ कया नह ’। हमन कहा ‘तम उसक जान को लग हए थ ना क तम प लस म जाओ, प लस म जाओ, तो दख लो। उस पर व वास करत’। हम घर पर भी नौकर पर करक दखत ह ।
व वास कर , व वास कर , हम व वास इस लए नह करत य क हमारा अपन ऊपर व वास नह ह। द नया म सब पर व वास र खय, िजतना हम व वास करना सीख ग, उतना ह इसान आपको भी व वास करगा। लाख म स एकाध आपको ठगगा; असल म हमको तो कोई ठग ह नह पाता। ठगना भी चाह तो ठग नह जाता । ठगता नह ह हमस और हम पात या ह ? दो- चार पया ह ना, ठग कर या पात ह ; कौन सी गठर ? पाप क तो गठर पात ह । इतनी हो शयार करन वाल……मझस यहा पर भी बहत स लोग ऐस ह , मझस हो शयार दखात ह । कछ ऐस पढ़ात ह बात इधर-उधर क ; िजतनी म भोल ह उतना ह मर जो अदर का ह वो बड़ा धाध ह । म कसी च कर म नह आन वाल । बड़ा मि कल ह मझ कोई च कर म डाल। अब कोई कह वो चीज़ ह,.वो चीज़ ह, च कर म नह आन वाल म , हाला क म ह बहत सीधी। इसक एक वज़ह ह, वज़ह यह ह
क जो आदमी realized होता ह और जो अपन च म ह ल न हए बठा ह वो कह उलझता ह नह । आपन मर साथ चालाक क वो (भोलापन) दसर जगह घमा दगा इधर स उधर हाथ -हाथ। कोई आदमी चालाक करगा भी मर साथ, वो (भोलापन) फट स मझ घमा दगा। इसका एक और उदाहरण ल आप। रामक ण परमहस क प नी न….. दोन आदमी एक बार जगल म स जा रह थ तो य (उसक प नी) ब कल भोल -भाल थी बचार । जगल म स आ रह थ तो जगल म स आत आत ऐसा हआ क रामक ण तो आग चल गए। (य) पीछ रह गई तो चोर न सोचा, चलो कोई औरत मल गई, पकड़ो इसको। तो उसक साथ हो लए। तो उसन कहा, ‘तम आ गए, अ छा हो गए। त हार दामाद जो ह वो सामन चल गए और म अकल रह गई। चलो, तम मर भाई आ गय, मर बाप आ गय, बड़ा अ छा हो गया। मर लए तो कछ आराम हो गया, नह तो म तो सोच रह थी क अकल म म रा ता कस ढढगी। चलो भाई, त हारा या नाम ह? अ छा तम मर भया हो, तम मर बाप हो। वो लोग कहन लग हम तो इसको पकड़ कर ल जान वाल थ और यह तो हमको बाप भाई बना रह ह। उसक सीधपन और भोलपन स इतन र झ गए; उसको अपन घर ल गए और िजदगी भर उसको अपनी लड़क क तरह स बनाया और रामक ण को अपन दामाद जस। वो चोर और डाक लोग भी यार पहचानत ह । साप और शर और गीदड़ य सब यार पहचानत ह य क शर अपन ब च को नह खाता, साप अपन ब च को नह काटता ह । गर हम
भी साप हो जाए तो या साप हम नह पहचानगा? भोलापन हमशा मदद करता ह और जो आदमी भोला होता ह उसको द नया हमशा मदद करती ह। और एक इसका मॉडन एक उदाहरण ह। एक साहब क टम म स आ रह थ। भोल भाल थ; बोलत बहत थ। भोल लोग ज़रा बोलत भी यादा ह कभी-कभी, य क उनम चालाक नह होती ना। अदर म घस क जस बठ नह रहत। कभी बोलत ह , कभी नह बोलत। ल कन य ज र नह क हरक भोला आदमी बोलता ह। चालाक भी कभी-कभी बड़बडात ह बहत। तो यह जो भोलापन था इस आदमी का…. य आकर क उस को बतान लग गया क ‘अर साहब म गया था वहा, वहा स म न लाया हआ ह कमरा। यह क टम ऑ फसर को बता रहा ह। अम रका स आया और क टम ऑ फसर को बताता ह क कमरा लाया ह, ऐसा कमरा
हद तान म नह होगा, तम दख लना। तमको दखना ह, म तमको दखाता ह। यहा लोग तो छपात ह अपना कमरा; इनस बतान लग क म वहा स मालम ह डायमड रग म लकर आया। तमको दखना ह? दखो म लाया ह वहा स। वो जो इतन भोलपन स बोलन लग गया तो क टम ऑ फसर न सोचा क य य ह डग मार रहा ह, इसन लाया होगा काच और मझ बवकफ़ बना रहा ह। नह तो जो असल वाला लायगा वो ऐसी बात य करगा? उसन कहा, भया त जा, मरा सर मत खा। और दसरा आदमी आएगा, छपाकर, इधर-उधर दखत हए…….. तो ‘आइए इधर म टर, आपक पास या ह?’।
भोल आदमी पर वस भी मन य को तरस आ जाता ह। और कोई भोल आदमी को सताता ह तो उसक आह इतनी लगती ह, उस डर स भी आदमी नह सताता भोल आदमी को। और अगर कोई भोल आदमी को सताता ह तो ज म-ज मातर तक उसका उस दना पड़ता ह। इस लए भोला आदमी सबस safe ह। और जो आदमी बहत यादा कसी चीज़ म उलझता ह, अ धकतर आप द खएगा क यादातर ऐसा होता ह क जब भी आदमी को कोई बरा काम करना होता ह वो बड़ा serious (गभीर) हो जाता ह, अ धकतर। हमन ऐस एक साहब को दखा ह, उनक आदत थी bribe ( र वत) लन क । तो हमार husband को तो वो कहत थ, ‘तम तो घ टया type हो तमको तो पसा ह लना नह आता’; ऐस कहा करत थ। ल कन म न दखा ह क उनक अगर कोई आदमी मलन आए और जो पस वस क बात करन वाला हो, मतलब लन दन क , एकदम वो serious हो जात थ; ‘अ छा जी, जरा आइए, तम अदर जाओ’। हसत-हसत एकदम serious हो जाए तो समझ जाओ क कछ ना कछ bribery ( र वत) क बात ह, कोई भी गलत….. । एक साहब थ मझ मालम ह उनको cabaret (क ) म जान का बहत शौक था और जब भी cabaret क बात होती थी बड़ seriously उसको discuss करत थ। ‘हा कहा जान का ह? कस जान का ह? कब जान का ह?’। और समय हसत रह ग ल कन cabaret क मामल म ब कल planning करक serious हो करक cabaret म जाना ह। (मराठ म )। अर आपको अगर serious ह रहना ह तो जाकर कह म दर म बठो; नह वो वहा जाना ह। य क जो आदमी हसता खलता हर समय रहता ह और ह का फ का रहता ह उस आदमी को इसम मजा ह नह आता। कहता ह, ‘ या बवकफ ह? य या बवकफ कर रह ह?’। वो दसर क , भोला आदमी जो ह, वो फट स बवकफ पकड़ लता ह और वो नटखट होता ह। भोला जो आदमी होता ह वो नटखट होता ह, उसका नटखटापन जो होता ह य उसक भोलपन स ह। जस वो कोई ना कोई इधर स उधर छलाग लगा दगा। जस आपको पता ह क एक साहब हमार यहा आए। उनको बड़ा शौक था क डास दखन का। मन बहत स आपको मालम नह होगा क वहा पर न न न य जो होता ह; मतलब रजनीश जी का नह , ल कन और। तो वो कहन लग क साहब…. अब हमस तो कह नह सकत य क र त म हमस बड़ होत थ, तो हमार एक घर म बड़ चहल वाल साहब ह वो ऐस ह नटखट type ह तो उसस कहन लग क (अ प ट) ल च लए, हमको जान का ह। अब वो बजग आदमी ठहर, शतान बहत थ ना। वो ल गए, प लस थान म उनको उतार दया। वो वहा taxi म ल गए और छोड़ दए। कहन लग, ‘म तो आऊगा नह , आप यहा चल जाइए’। अब वो बचार सीध चल गए, वहा जाकर क दख क सब प लस वाल खड़ ह । उ ह न सोचा, बचार आए थ दहात स, उनको तो मालम नह था कहा कस होता ह, तो प लस बाहर लगती होगी। ऐसी जगह ज र प लस होती ह, ऐसी जगह जहा ऐस धध होत ह वहा प लस लगती ह, लगनी पड़ती ह। तो उ ह न सोचा क इस लए यहा प लस ह। अदर गए तो लोग न कहा, ‘साहब आपको complaint ह?’। ‘नह ’ कहन लग, ‘वो जरा हमको दखना ह’। उ ह न कहा, ‘ या?’। ‘अब आप समझ ल िजए जो बात ह तो’। उ ह न कहा, ‘आ खर या बात आपक… ह?’। कहन लग गय, ‘साहब य मजाक कर रह ह ? िजस चीज़ क लय य जगह बनी ह वह हम आए ह ’। तो कहन लग, ‘तो आइए सीध हवालात म ’। कहा, ‘हवालात म ?’। और कहन लग गए, ‘य हवालात म आपको कसन पहचा दया?’। ऐस उनको बवकफ बनाया जाता ह। य जो अपनी वषय क और दौड़न क व ह य आदमी को चालाक बनाती ह य क उस छपान क लए आदमी ज र चालाक बनता ह। वषय क ओर
दौड़न क जो अपनी व या ह बार बार वषय क ओर जो व दौड़ती ह उसको realization क बाद हम (अ प ट) और दख सकत ह , ‘अर वाह बवकफ राम! चल जा रह ह वहा, कहा चल जा रह ह ?’। अपनी ओर हम दख सकत ह ,अपनी बवक फया दख सकत ह , अपन साथ खलवाड़ भी कर सकत ह , अपन साथ नटखटपना कर सकत ह , बहत अपन साथ हम खल कर सकत ह और दख सकत ह क कस बवकफ म फस ह । तो भोला आदमी जो होता ह वो अ ल त हो करक दखता ह मज़ा लक, ‘ या अजीब हालत ह साहब, समझ म ह नह आती’। य भोलपन क नशा नया ह क भोला आदमी जो होता ह उसका च कह ऐसा दौड़ता नह । वो अपन भोलपन म अदर ह। जस छोट ब च उनको आप गर क डास तो छो ड़ए आप कसी ह पी स मला द िजए जोर-जोर स रोना श कर दत ह । उनको बाल-वाल दखक एकदम वो रोना श कर द िजएगा। आप अगर कबर डास म छोट ब च को ल जाइए तो बहत जोर स रोत ह , आप को शश करक द खए। अगर समझदार ब च को आप ल जाय, तीन चार साल क ब च को तो वो जोर-जोर स रोना श कर दगा क यह या ह साहब? ब च क आप हालत द खए क गर उसक सामन कोई भी व पता होती ह तो उसक ओर वो पहल रोन लगता ह। और या तो उसको समझ ह म नह आता, आख फाड़ क दखता ह क य या ह।
या दसरा काम आप यह दख सकत ह कोई सी भी बात हो, सीधी सीधी कह दता ह। उनम कोई भी लगाव, छपाव, बराव कभी नह होता। ऐस तो य ब च श ध ह ह वो हर चीज को दखत रहत ह । जस एक बार कसी न कहा अपन ब च स वो साहब आ रह ह ल कन खात ह घोड़ जस। अब उ ह न वो सन लया। अपनी प नी स उ ह न कहा, उनस (ब च) तो कहा नह कछ। जब वो आकर बठ तो उनक शकल जाकर दख बार-बार ऐस ऐस। उसक बाद कहन लग, ‘म मी यह तो घोड़ जस नह खात, तम कह रह थी क घोड़ जस खात ह ’। मान उसम उनको कोई य नह लगा क भई म कोई बर बात कह रहा ह, कोई अ छ बात कह रह हो, क दख दन वाल बात ह। उनको जो fact दखा वो उ ह न कह दया। सीधी सीधी बात उ ह न कह द क य बात ह। और ब च म य समझ आ जाती ह कसी तरह स क य कस तरह स कर रह ह , उनका या ढ़ग ह, सबक नकल उतार ग, ब च म आदत होती ह। नकल उतारन वाला आदमी भी एक तरह स भोला होता ह य क वह भी नकल तभी उतार सकता ह जब क वो सा ी हो। और खासकर अगर वो अपनी नकल उतार सक तो सबस ब ढ़या। जो आदमी अपन ऊपर हस करता ह वो सबस भोला ह। जो अपनी बवकफ पर हस, “वाह या कहन! हमम भी यह गण ह, हम भी य कर आय”, ऐसा जो आदमी कहता ह वो अपन स अलग हटा हआ अपन को दखता ह। आप लोग भी जब realized ह ग तब….। अपनी ओर नजर कर , “ या साहब! दौड़ चल जा रह ह ,
या कहन आपक, त द आपक नकल हई ह, बाल आपक सफाचट उठ गए,जा कहा रह ह ? जब म पसा नह ह आपक नजर कहा पड़ी जा रह ह? बार-बार आपक नजर कहा उठ रह ह? आपका च कहा जा रहा ह?”। Realization क बाद म जो आदमी इसम लगन स आता ह वो स सग त य ह। य स जन क सग त को जोड़ता ह और जो आदमी इसम गहरा नह उतरना चाहता वो अपना बहाना ढढता ह और दज न क सग त म घमता ह। दसर सग त म घमगा वो, हजार बहान बतायगा क आना नह हो सकता ……. और िजनको आना ह, दवड़ स पछ , बताय ग। दवड़ साहब को कह जाना था। रा त म चलत चलत म न य ह टोक दया। म न कहा, ‘दवड़ साहब हमार साथ च लए’। बठ गए मोटर म , चल दए। उनका कछ और ो ाम था, वो बठ गय मोटर म और चल आए। वहा उनको तीन घटा हमन उनको लगाया। (आ रहा क नह आ रहा)। य क इसम जो मजा आ रहा ह और कसी चीज म नह ह। ल कन जब इसका मजा ह परा नह लया तो च ज र बाहर बाहर दौड़गा। ‘ आज कहा गए थ? आज पाट म गए थ। य साहब? हमको जाना ह पड़ा, बात य ह इसम ऐसा था तो उसम ऐसा था। और जो लोग यहा रोज आत ह उनको या हो गया, उनको स जन क सग त म …..’।
वषय क बात म अब च जाता ह नह , उलझता ह नह , interest नह आता। भागो, ो ाम ह भागो, वहा चलो। वहा स जन का मला बठता ह। स सग त म , ग ओ क सग त म बठ करक जो मजा आएगा, वहा या मजा आन वाला ह? यहा पर जो इतनी खीचती चल आ रह ह , जो दखाई नह दती, य उनको दखाई नह द रह ल कन आ रह ह। यहा पर बरस रह ह सबक ऊपर, हम खीच चल जा रह ह उस परमा मा क म….वहा तक…. बहत मजा आएगा।
माताजी आय चाह नह आय , टक रहो, बठ जाओ। एक दसर realized आदमी को मलन म जो मजा आता ह, ‘आह हा-हा-हा, आ गय, ब ढ़या, काई झाला। वह जो भतवाला आए तो ….(अ प ट) करो। ल कन जो पर
तरह स अभी इसम उतर नह ह वो अब भी भत क तरफ ह दौड़त ह ; ‘ करना पड़ता ह, जाना पड़ता ह, मलना पड़ता ह’। कछ जाना नह पड़ता और करना नह पड़ता और दखना नह पड़ता। अगर आपका च वहा ह तो आप झक मार कर आएग। कल अगर आप शराबी ह तो शराबखान म आय ग, अगर आप realized ह तो आप स जन क सग त म आएग; और जगह आपको जान स मतलब? जब मजा का सारा अथ ह यहा पर ह तो और जगह घमन स मतलब? घर म लोग च लात रह, च लात रह, च ला ल, शराबी जो लोग ह, पर कतना च लात ह , ‘सारा पसा फक आए, शराब मत पी, य ना कर वो ना कर’, वो छोड़ता ह या अपनी बोतल? घर म नह तो बाहर, बाहर नह तो दो त क घर म ,। सीधी-सीधी एक रमी खलन वाला आदमी दख ल िजए जो रमी खलता ह। उसक बीवी च लान लग गई तो वो अपन घर म जाकर खलगा, वहा पर नह हई च लान लग गए तो जाकर क चौपाट पर बठकर खलगा, वहा प लस पकड़गी तो और कह जाकर क खलगा, वो छोड़न वाला नह । लत लगनी चा हए। अगर लत लग गई तो कोई चीज म मजा नह आता। बस यह बात, यह सोचना यह बोलना यह करना िजसस मलो उसस। तो लोग कहत ह , ‘यार त हार तो माताजी स हम बोर हो गए’। ल कन आप बोर नह होन वाल। आप कह , ‘चलो तो, दखो तो, या बात ह’। कोई कसी क भी बात कहगा, आप यह कह ग ‘पहल चलो वहा, पहल उसको दखो, य सब क बात तो बाद म होती रहगी। हमन पाया हआ ह,.हमन अभी जाना ह’। और सार घर वाल को भी आप बदल द ग। घरवाल तो आपको आप पस द कर नह सकत जब तक वो लोग पार नह ह, इसम नाराजगी क जगह कहा, मजा करना चा हए, ठठोल उनक साथ करना चा हए। इसम कोई भी ग सा होन क बात नह ह। एक बार हमार यहा ऐसा ह हो गया क एक साहब हमार ऊपर ग सा हो गए। कहन लग गए, ‘आप बार-बार जाती ह ’; उ ह न सामान फ कना श कर दया तो हमन भी सामान फ कना श कर दया। तो कहन लग, ‘य या?’। हमन कहा, ‘सामान बटो रय तो म भी बटोरती ह सामान’, तो वो सामान बटोरना श कया, हमन बटोर लया। हमन कहा, ‘द खय साहब, आपको िजस चीज शौक ह आप करत ह , हम इस चीज का शौक ह हम करत ह । वो तो आप रोक या नह रो कए हम तो जाना होगा ह । और चाह हम यहा भी बठ रह च तो हमारा वह ह ’। जब इसका मजा लग गया; अब नाटक वाल को िजनको नाटक का शौक होता ह चाह तो जब म पाच पया नह भी हो तो तीन पया का टकट लकर भी जाएग नाटक दखन। हर जगह अपना शौक आप पसा दकर क परा करत ह , य बन पस का इतना बड़ा शौक। रोज नया नया…… या मजा आता ह अदर म । दसर म बट जान म जो मजा आता ह और कसी चीज म नह । लोग हजार पया खचा कर दत ह ,.इसको दान कर रह ह,.उसको दान कर रह ह , दान क मट बनाएग, वहा स बाहर जाकर दान कर रह ह – बा लादश। अर यह दान हो रहा ह बस। अब य छोटा सा ब चा ह, इसको लग गई लत अब। इसक छटन नह वाल ह – लागी नाह छट । पर लगनी तो चा हए, वो जबान म लगती नह य क आपका दल और आपक इ छा पर ह। थोड़ दन तक उसक चटक बठनी चा हए। जो इसका मजा ह वो तो गहराई म जाकर क ह। और वो तभी होता ह जब आदमी िजतना भोला हो जाता ह, कोई उसको बकता रह क कहता रह वो अपनी धन म चलता ह। वो भोलपन स ह बच जाता ह। उसका जो भोलापन ह, सादगी ह उसस बच जाता ह। और आदमी भोला तो तभी होता ह जब परमा मा स हवाल ह य क उसका planning करन वाला वो बठा ह, सब दखन वाला वो बठा ह। ब चा य भोला होता ह य क उसक वो मा क हवाल होता ह। अपन पास तो और भी आयध ह लोग को ठ क करन क लए, आप तो जानत ह बहत सार आयध ह। कोई
बगड़, नाराज हो, घमाओ; ल कन अपन ऊपर पहल घमा ल िजए। हो सकता ह आप ह अपन दमाग स अभी पा रत नह ह। अपना ह दमाग आपको समझा रहा ह ‘य नह हआ तो य, नह नह ऐसा नह ’। जब ब कल सब शात हो जाए, मबई म कोई सनमा ना चलता हो, कोई पाट नह होती हो, कोई शाद न होती हो, घर म कोई महमान ना हो, ऐसा जीऊ तो मर याल स अ त ह मलन पर भी ना हो। ब ध म हम पहच गए तो
फर वसा ह आप पाए भी। िजतनी अदर स मम ता आतता खीचगी और उसको दखना पड़गा, ह अदर। उसक बगर आप पार होन वाल नह ; पछल ज म क ह। और मर चल जान क बाद म खासकर, म जान वाल ह नह , एकाध दो मह न क लए चल जाऊगी, मर तो िज़द ह ह जब तक ह मत ह तब तक िज़द ह, द खए अब या होता ह। ल कन आप लोग म स ऐस कतन लोग ह जो इस बात को सोचत ह , इस बात को कतन लोग सोच रह ह क हमार हाथ स हजार लोग का क याण होन वाला ह, हमार हाथ स हजार लोग पार होन वाल ह और हम जो सी मत अभी थोड़ स ह वो कह अ धक एक एक आदमी हजार आदमी हो सकता ह।
आज ह आपस मर बातचीत हई थी। एक …. साहब थ वो वहा क बात कर रह थ। एक ल मण जी महाराज ह, वहा क मीर म ह, बड़ मान हए ह , सब कछ, म मानती ह। इतन मान हए ह , वो भी आपक जस सफ
realized ह और वो क ड लनी जाग त नह जानत, वो पार करना नह जानत, वो जो उग लय पर छोड़ (छो ड़य) कछ भी नह जानत। पढ़ लख आदमी ह और सफ पार ह। उस पर भी उ ह न अपना मठ खोला ह, सार द नया म लोग – उनस मल, उनस मल। उनस मल क या खाक होन वाला ह? वो या क ड लनी क जाग त जानत ह कछ भी? वो उग लय स अगर क ड लनी क जाग त करना सखा द तो हम जो कह सो मान। पर उनका नाम ह य क वो अपनी मठ बनाकर बठ ह, वहा झडा गाड़कर बठ ह, ल मण जी महाराज। सब द नया उनको मलन आती ह ाइम म न टर मल जाएग…. (अ प ट)। आप म स सब उनस ऊच ह म आपस बता सकती ह। ल कन आपको आप लोग को लगनी चा हए य क आप उगल क इशार पर अपनी, कड लनी दसर क उठात ह आप उनक सार च बता सकत ह । आप उनस प छए वो कसी क च बता द तो म जो कह सो मान। अगर वो बता द क कसका च कहा पकड़ा हआ ह इतना भी बता द । या य भी बता द क इस आदमी क जाग त हई क नह तो म जो कह। उ ह न मझ दखक यह भी नह पहचाना क म realized ह या नह तो आग क बात ह मत प छए। बताइए आप, उ ह न मझ दखकर यह भी नह पहचाना क म realized ह या नह ह तब फर आग क बात कर । और तम लोग या पहचान लोग क नह ? म न उनको दखकर क एक ण म पहचान लया। उनक बाप दादाओ स लकर और ज म ज मातर क हजार साल का सारा इ तहास सामन खोल दया और इन महाशय जी न अभी पहचाना भी नह । और वहा सार द नया उनको जानती ह, बबई शहर म उनका नाम ह , वहा नाम ह- वहा नाम ह और यहा जो हजार ल मण जी स भी कतन ऊच लोग यहा बठ ह उनका कछ भी नह । य क य ससार लोग ह , य ससार म बठ ह ल कन िजस दन आपन ससार ह सब कछ समझ लया सब यथ हो गया हमारा दना और सारा कछ। अपन इसी ससार स उठ करक आपको, जब तक आप पर इस चीज म उतर ग नह और जब तक आप पर तरह स इसम अपना यान लगाएग नह तब तक आपका दना ब कल बकार हो गया, म यह सोचगी क प थर पर फ क दया। एक एक आदमी उन एक महानभाव स बड़ा ह िजनक हजार following आती ह। इसस आप सोच सकत ह क वो मझ नह पहचान पाय क म realized ह या नह । य छोटा ब चा भी बता दना ह क realized ह, बताईय।