The Spirit (Location Unknown)

                         [Hindi translation from English]  आत्मा  01 जनवरी 1977।  हमारे ही अंदर आत्मा है जो सबसे कीमती चीज है |  आपकी आत्मा का मोल  अथाह है और इसीलिए इसे अनन्त मूल्य की चीज कहा जाता है – क्योंकि यह अनंत है। आप [इसे] माप नहीं सकते। अब ईश्वर, सर्वशक्तिमान, हम कहते सत-चित-आनंद है । सत का अर्थ है सत्य। मानव शब्दावली में हम जिस सत्य को समझते हैं, वह सापेक्ष है। लेकिन मैं जिस सत के बारे में आपको बता रही हूं, वह पूर्ण है, जहां से सभी संबंध शुरू होते हैं। उदाहरण मैं आपको बताऊंगी कि इसे कैसे समझा जाए: इस पृथ्वी को महासागर और नदियाँ और सभी प्रकार के पानी मिले हैं, आप कह सकते हैं। लेकिन पृथ्वी इन सभी को समेटे है। यदि धरती माता नहीं होती, तो इनमें से कोई भी अस्तित्व में नहीं हो सकता था। इसलिए हम कह सकते हैं कि उन सभी चीजों का जो की उसी पर मौजूद है आधार धरती माँ है। वह हमें समेटे है। परमाणुओं में वह मौजूद है। बड़े पहाड़ों में वह मौजूद है। क्योंकि तत्व उस पृथ्वी का हिस्सा हैं। उसी तरह, सर्वशक्तिमान ईश्वर सर्वशक्तिमान, सत्य का हिस्सा है, उन सभी चीजों का आधार है जो बनाई गई हैं या नहीं बनाई गई हैं। एक और उदाहरण जिसे आप समझने की कोशिश करें कि: कैसे सत,  पुरुष है, ईश्वर है, जो -रचना- में वास्तविक हिस्सा नहीं लेता है, बल्कि एक उत्प्रेरक है। उदाहरण कुछ  इस तरह हो सकता है कि, मैं हर काम कर रही हूं, मैं Read More …