Shri Ekadasha Rudra Puja: We have to drop out many things

Judy Gaddy’s Apartment, New York City (United States)

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                                             एकादश रुद्र पूजा

 न्यूयॉर्क सिटी (यूएसए) 

17 सितंबर 1983

तो, भारतीय कैलेंडर के अनुसार आज का दिन, ‘परिवर्तनी एकादशी’ है।

अब, आज चंद्रमा का ग्यारहवां दिन है। ग्यारहवां दिन ‘एकादशी’ है। साथ ही, सहज योग में, आप एकादश रुद्र के बारे में जानते हैं, जो यहां (माथा का उपरी भाग ) है; जो अंततः उन सभी चीजों को नष्ट कर देगा जिनकी अब आवश्यकता नहीं है। जो यहाँ स्थित एकादश है, यह ग्यारहवां है।

लेकिन आज एक विशेष दिन है जहां हम एकादश की शक्ति का उपयोग  ‘परिवर्तन’ अर्थात ‘बदलाव करने के लिए करने जा रहे हैं। यह विनाश के लिए नहीं बल्कि परिवर्तन के लिए है। यह न्यूयॉर्क में होने वाला इस प्रकार का एक दिन है, जहां हम मानवों के परिवर्तन के लिए विनाशकारी शक्तियों का उपयोग करते हैं।

तो आज बहुत ही महान दिन है कि हम लोगों को एकादश की शक्तियों कि अभिव्यक्ति द्वारा परिवर्तित करने जा रहे हैं। और वे ग्यारह यहां आपके कपाल पर स्थापित किये गए हैं, और आप जानते हैं कि वे कैसे काम करते हैं।

तो, ये दस भवसागर की विनाशकारी शक्तियों से बाहर आते हैं। भवसागर  को दस विनाशकारी शक्तियां भी प्राप्त हैं। उन दस में से, विनाशकारी भाग यहां स्थापित होता है ( माथे के उपरी भाग की ओर इशारा करते हुए)।

इसलिए जब कोई व्यक्ति अपने विनाश कि तरफ होता है, उदाहरण के लिए कहें कि एक कैंसर अंदर प्रवेश करता है, तो आप अपने भवसागर के शीर्ष पर यहां एक धड़कन महसूस कर सकते हैं, धड़कन। और इसका तार्किक अर्थ यह नहीं है कि अगर वहाँ एक धड़कन है तो कैंसर है, लेकिन अगर वहाँ एक कैंसर है तो यहाँ एक धड़कन चल रही होगी। इसका मतलब है कि जीवन का बल इसे आगे धकेलने की कोशिश कर रहा है। लेकिन वहां स्थित बाधा  (माथा),कपाल के उपरी दोनों तरफ जमा होने लगती है।

और कपाल के उपरी मध्य मे विशुद्धि का केंद्र है, विराट का,  जहां श्री कृष्ण विराट बन गए हैं, महान आदि अस्तित्व हैं। तो यह विनाश की ग्यारहवीं शक्ति (माथे का उपरी मध्य बिंदु ) है। उनके पास ‘शक्ति है जिसे संहार शक्ति’ कहते है जिसके द्वारा वह लोगों का वध करते है।

इसलिए उन्हें मारने और उन्हें खत्म करने से पहले, अपनी माँ की करुणा में, हमें उन्हें परिवर्तित करने की कोशिश करनी होगी। यदि उन्हें परिवर्तित नहीं किया जा सकता है तो यह सब ठीक है, फिर एकादश हावी हो जाते है।

तो इन ग्यारह बहुत महान विनाशकारी शक्तियों का उपयोग कल्कि द्वारा किया जाएगा, जो कि एक सफेद घोड़े पर प्रकट होने वाला है।

इससे पहले, आज एक बहुत ही महान दिन है कि इन शक्तियों को हम परिवर्तन के लिए उपयोग करने जा रहे हैं।

अब परिवर्तन के लिए विनाशकारी शक्तियों का उपयोग कैसे किया जा सकता है?

सबसे पहले, जब लोगों को पता चलता है कि, विनाशकारी शक्तियां प्रकट हो रही हैं, तो वे भयभीत होना शुरू करते हैं, उन्हें डर लगता है कि, “हम नष्ट कर दिए जायेंगे, इसलिए हमें ईश्वर को अपनाना चाहिए!” यह भी तरीकों में से एक है!

दूसरे, अगर किसी व्यक्ति को कैंसर जैसी किसी विनाशकारी बीमारी के बारे में पता चलता है, तो वह किसी विधि का पता लगाना चाहता है, और मानव स्तर पर कोई विधि उपलब्ध नहीं है। तो फिर वह परमात्मा के बारे में सोचता है और परमात्मा के करीब आना चाहता है। डर उसे परमात्मा के करीब लाता है। वह अपनी तर्क शक्ति, अपने अहंकार या प्रति-अहंकार  से अधिक ईश्वर पर निर्भर करता है। और वह उसका उपचार करने या अपने विनाश से बचने के लिए ईश्वर की शक्तियों पर निर्भर रहना चाहता है; क्योंकि वह अब विनाश के कगार पर है। जैसे ही कैंसर स्थापित होता है, वह जानता है कि इसका कोई अंत नहीं है और उसे नष्ट होना है।

तो, यह एक अन्य तरीका है जिससे लोग परिवर्तन को अपनाते हैं, अपने व्यवहार को बदलने के लिए, अपने मूल्य प्रणालियों को बदलने के लिए परिवर्तन लाते हैं। मैंने कई ऐसे पतियों या पत्नियों के बारे में जाना है जिन्हें कैंसर हुआ और उनके जीवनसाथी बहुत ही नाज़ुक, सौम्य, विनम्र, रोमांटिक व्यक्ति बन गए। उन्होंने उस व्यक्ति को प्यार, सारी सुरक्षा, सारी अच्छी चीजें देने की कोशिश की जो अब एकादश कि वजह से मरने वाले हैं। तो एक आदमी में एक तरह का परिवर्तित स्वभाव आने लगता है, कि वह देखता है कि जिस व्यक्ति के साथ वह अपना सारा जीवन बिता चुका है, वह अब नहीं रहने वाला है। तो आपके भीतर जो भी सुंदर है, वह उसे देने के लिए,  व्यक्ति के प्रति एक तरह की सुंदर भावनाएं शुरू होती हैं। और इस प्रकार लोग एक अन्य प्रकार का व्यक्तित्व विकसित करते हैं जो पहले कभी स्पष्ट नहीं था। तो सारी कठोरता और आक्रामकता समाप्त हो जाती है, और सारी मधुरता  डालना शुरू कर देते है। तो व्यक्ति के अंदर करुणा जागृत हो जाती है, जिससे वह परिवर्तित हो जाता है| 

बहुत से लोग, जिन्होंने रिश्तेदार, और परिजनों को खो दिया हैं, बहुत अधिक कोमल, दयालु लोग बन जाते हैं, क्योंकि एकादश ने अपना भयावह रूप  व्यक्त किया है। और लोगों के मन में एक और तरह का डर भी आता है कि, “कल मेरे साथ भी ऐसा हो सकता है! इसलिए मुझे इसके बारे में कुछ करना चाहिए। ” इसलिए इस समय सहज योग उनकी बहुत मदद करता है। वे सहज योग में आते हैं क्योंकि खुद उनके भीतर इस तरह का आपातकाल बनाया जाता है और परिणामस्वरूप वे परिवर्तन के लिए वे सहज योग की तरफ शीघ्र उतारा जाता है।

लेकिन एक अन्य सूक्ष्म तरीके से यह विनाशकारी शक्ति हमारी मदद करती है कि, जो भी हमारे भीतर नकारात्मक है उसे नष्ट करती है। क्योंकि जहाँ  तक और जब तक वह नकारात्मकता हमारे भीतर नष्ट नहीं हो जाती, तब तक हम परमात्मा के राज्य में प्रवेश के योग्य लोग नहीं बन सकते हैं। हमारे पास हमारा अहंकार है, हमारे पास हमारा प्रति-अहंकार हैं और दोनों का प्रतिनिधित्व यहां (एकादश रुद्र में) किया जा सकता है। जब आपको अपना अहंकार, बहुत बड़ा अहंकार होता है, तो आपको इस [बायीं] तरफ से एक बड़ा गुमड जैसा अहंकार निकलता है; एक बहुत बड़ा, यहाँ। या अगर आपको प्रति-अहंकार है तो आप यहां मस्तिष्क पर (दाईं ओर) एक और बड़ी चीज को उभरा हुआ देख सकते हैं।

तो दोनों तरफ आपको दोनों चीजें मिल सकती हैं यदि दोनों तंत्रिका तंत्र आप में अति सक्रिय हैं।

यदि आप बहुत सामूहिक व्यक्ति नहीं हैं, तो आपको यहां (मध्य में) एक गुमड मिल सकता है। तो आपको अपने अहंकार, प्रति-अहंकार से भरी हुई सभी चीजें मिल सकती हैं और यह विराट केंद्र फिर से उभरा हुआ हो जाता है, इस तरह से कि कोई व्यक्ति कभी-कभी एक राक्षस की तरह चेहरा विकसित कर लेता है। यह हिस्सा बहुत बड़ा, बाहर उभरा हुआ मोटा हो जाता है। और वहाँ एक चरित्र है जो मैंने उस तरह देखा है। मुझे लगता है कि यह फ्रेंकस्टीन या कोई है। यह है? फ्रेंकस्टीन; हां, यह अचेतन से आया – फ्रेंकस्टीन चरित्र है। यह सब सूज गया है, उभर रहा है, और यह जगह जैसी है। यह वास्तव में ऐसा है जो इंसान के साथ होता है, जब वह खुद शैतान बन जाता है।

तो इस प्रकार हमारे भीतर एकादश काम करती है, हमारे भीतर की नकारात्मकता को नष्ट करने के लिए।

भारत में, इस दिन कई लोग उपवास करते हैं, प्रायश्चित के लिए, ग्यारस दिन बहुत आम है, आपको एकादशी करना आवश्यक है। सभी हिंदू और ये सभी लोग एकादशी करते हैं। अर्थात ग्यारहवें दिन वे बिल्कुल कुछ भी नहीं खाते हैं। लेकिन अपनी माँ के अवतरण के बाद आपको ऐसा नहीं करना चाहिए, क्योंकि, मैं स्वयं एकादश हूँ! जब मैं आ गयी हूं तो अब आप इसे क्यों करें? यह तब किया गया था जब मैं यहाँ नहीं थी, बस मुझे पुकारने के लिए था, चूँकि वापस अब मैं यहाँ आ गयी हूँ, आपको एकादशी की तपस्या की आवश्यकता नहीं है। लेकिन आपको सावधान रहना होगा।

अब एकादश आते हैं, जैसा कि मैंने आपको बताया, भवसागर से। तो सबसे पहले, यह तब होता है जब आप किसी ऐसे को अपने गुरु के रूप में स्वीकार करते हैं,  जो झूठे हैं, जो भगवान विरोधी हैं, ईसा-मसीह विरोधी हैं। तो आपने इस (दाईं ओर) एक तरह की उभार विकसित किया जब यह वह व्यक्ति है जिसे आप एक गुरु के रूप में पूज रहे हैं, या एक गुरु के रूप में सम्मान कर रहे हैं, एक गुरु के रूप में, जो वास्तव में गुरु नहीं है। तो आप एक प्रति-अहंकार विकसित करते हैं जो इस (दाईं ओर), इस भाग पर प्रदर्शित करता  है।

अब इसका दूसरा पक्ष यह दर्शाता है कि कोई व्यक्ति कहता है, “मैं अपना स्वयं का गुरु हूं, और मैं अपने ही ध्यान का अभ्यास कर रहा हूं। मुझे किसी के मार्गदर्शन से कोई लेना-देना नहीं है। मैं जैसा भी हूं ठीक हूं। ऐसा व्यक्ति दूसरे (बाएं) आधे उभार को विकसित करता है।

तो आपके पास इस वजह से यह आधा भाग का उभार विकसित हुआ है, और यह आधा उस प्रति-अहंकार की वजह से विकसित हुआ है जो आपको इन झूठे और नकली गुरुओं से मिलता है।

अब कभी-कभी ऐसा होता है कि, जब आप इस प्रकार के प्रति-अहंकारी व्यवहार में शामिल हो जाते हैं, उस समय ऐसा होता है कि आप उनसे भी आगे निकल सकते हैं और अपने अहंकार के लिए इसका उपयोग करना शुरू कर सकते हैं। आपके लिए यह सबसे बुरा समय है। उस समय आप जो करते हैं वह खुद शैतानों की तरह काम करना है, और एक बार जब आप ऐसा करना शुरू कर देते हैं, तो आपकी एकादश पूरी तरह बर्बाद हो जाती है। और फिर इससे छुटकारा पाना मुझे नहीं लगता कि आसान होगा। यह बहुत मुश्किल है। लेकिन अगर यह एकतरफा है तो इसे करना काफ़ी आसान है।

तो, आज वह दिन है जिसे ‘एकादशी’ कहा जाता है जो ‘परिवर्तन’ लाने वाला है|

जब आप रूपांतरित होते हैं, तो आपके भीतर बहुत सी चीजें अपने आप नष्ट हो जाती हैं। जैसा कि आप बहुत स्पष्ट रूप से देख सकते हैं कि आपकी सभी गलत पहचान समाप्त हो गई हैं। यह गलत पहचान कि, “मैं एक अमेरिकी हूं”, “मैं ईसाई हूं” या “मैं यहूदी हूं,” “मैं यह हूं, मैं वह हूं।” ये सभी गलत पहचान  आप से बाहर निकल जाती हैं और आप एक खालिस इंसान बन जाते हैं। सबसे पहले आप एक इंसान हैं और फिर बिना अहंकार के एक महामानव हैं,  बिना अहंकार के।

तो तुम्हारा अहंकार नष्ट हो जाता है, तुम्हारा प्रति-अहंकार नष्ट हो जाता है, तुम्हारी जड़ताएँ नष्ट हो जाती है और ज्ञान के बारे में तुम्हारे झूठे विचार नष्ट हो जाते हैं। तो जो बचता है और उभरता है वह वास्तविकता है।

अब देखें कि जब एक फूल फल बन जाता है:  व्यावहारिक रूप से, सब कुछ, फूल से बाहर झड़ जाता है, हम कह सकते हैं। जैसे कैलीक्स बाहर निकल  जाता है, फिर पंखुड़ियां बाहर निकल दी जाती है, और फिर एपिकल को गिरा  दिया जाता है, इसे भी बाहर निकाल दिया जाता है; लेकिन जो बचता है वह बीज है, वास्तव में अगर तुम देखते हो। बीज के चारों ओर ये सभी चीजें विकसित होती हैं और फल बना रहता है, बाकी चीजें बाहर गिर जाती हैं। कुछ फलों में कुछ भाग का उपयोग किया जाता है, कुछ फलों में कुछ भी उपयोग नहीं किया जाता है, फल के रूप में बहुत थोडीसी वृद्धि निकलती है और फल बन जाते हैं जबकि फूल वहीँ होते हैं। वैसा ही हम में भी, जो कुछ भी बनता है, आत्मा वहीँ बनी हुई है, शेष गिर जाता है। और यह ऐसा ही है जिसे  हम एकादश द्वारा लाया गया परिवर्तन कहते है। और किसी व्यक्ति को समझना होगा कि हमें कई चीजों को छोड़ना होगा।

कुछ लोगों को मैंने देखा है वे कहते हैं, “क्या गलत है? मैं धूम्रपान कर रहा हूं, फिर भी मेरे वायब्रेशन ठीक हैं। ” कुछ कहते हैं, “क्या गलत है? मैं पी रहा हूं, अभी भी मेरे चैतन्य जारी है। ” “मैं इस गुरु के पास जा रहा हूँ, अभी भी मेरे वायब्रेशन हैं,” “मैं एक ही प्रकार का घटिया जीवन जी रहा हूँ, फिर भी मेरे वायब्रेशन हैं।” अब यह बहुत लंबा रास्ता तय करता है और वायब्रेशन अभी भी हैं, लेकिन अचानक वे बंद हो जाते हैं, और आप पाते हैं कि आप सीमा से बाहर हैं, आपको पूरी तरह से बाहर फेंक दिया जाता है। लेकिन आपको यह महसूस नहीं होता है कि आपको कैसे बाहर फेंक दिया जाता है। धीरे-धीरे आप पाते हैं, एक स्पर्श रेखा के साथ आप बाहर जाते हैं। और इसलिए उस बारे में सावधान रहना होगा।

तो हमारे भीतर एक बल निहित है जो केन्द्रप्रसारक है और एक अन्य बल है जो कि केन्द्रक है। इसलिए एकादश का बल केन्द्रप्रसारक है: जिसके द्वारा आपको बाहर निकाल दिया जाता है।

सहज योग किसी के पैरों पर नहीं पड़ता है, यह किसी से अनुरोध नहीं करता है, यह किसी की भी चापलूसी नहीं करता है। यदि आप वहां रहना चाहते हैं तो आपको सकारात्मक रूप से वहां रहना होगा, और अगर आप वहाँ नहीं रहना चाहते हैं तो यह आपको आप कि मर्ज़ी से भी ज्यादा गति से बाहर फेंकता है! सहज योग के साथ यह परेशानी है और यह सहज योग की कमी है, जो मुझे आपको एक माँ के रूप में बताना चाहिए: कि यह आपको बाहर फेंकने के लिए बहुत उत्सुक है।

मैं आपको बताती हूँ, जब क्रिस्टीन, अभी-अभी उसने मुझे भी बताया था, माइकल से सगाई कर ली, उनमें से आधे को बाहर फेंक दिया गया, क्योंकि उनके पास एक धारणा थी कि शादी से पहले आपका रोमांस होना चाहिए कि बिना रोमांस के, यदि आप शादी करते हैं तो फिर, फिर शादी नहीं होनी चाहिए। मुझे नहीं पता कि यह किस अवधारणा पर आधारित है। लेकिन अगर आपको शादी से पहले रोमांस करना है, तो शादी करने का क्या मज़ा है? मेरा मतलब है कि यह ऐसा है कि, अगर आपको किसी को उपहार देना है, तो आप इसे छिपाते हैं, आप देखिए,  इसे उस तारीख तक गुप्त रखते हैं, और बच्चों को आश्चर्यचकित करते हैं ! उसी तरह अगर आप पहले से ही रोमांस करते है, तो फिर शादी क्या है? उत्सव किस लिए मनाया जाता है? यह पूरी तरह से अतार्किक है। ऐसे मामलों में कोई रोमांस शेष नहीं रहता है। दरअसल आपने देखा है कि रोमांस के बाद, शादी और फिर तलाक। यह हमेशा इस तरह है। क्योंकि आप बासी हो जाते हैं, और आपको लगता है कि शादी से पहले आप जो रोमांस कर रहे थे वह कोई एक कल्पना थी , जो ख़त्म  हो गई है, और अब शादी के बाद आनंद लेने के लिए कुछ नहीं बचा है, इसलिए आप तंग आ गए हैं और अगले महीने आप तलाक के मामले में हैं !

लेकिन रोमांस के बिना होने वाले विवाह में , सब कुछ एक विशेष दिन के लिए आरक्षित रखा जाता है, बस उस दिन के लिए जब आप असली रोमांस, और एकाकारिता कि असली भावना, सब कुछ करने जा रहे हों। भारत में यह एक बहुत बड़ी बात है, आप देखिये, विवाहित लोगों की पहली रात। और इसीलिए हमारी शादी लम्बे समय चलती है। तुम्हें पता है, मैं कहूंगी, मैं 60 साल की एक बूढ़ी औरत हूँ, मेरे पति 63 साल, और आप देख सकते हैं कि वह अभी भी कितने रोमांटिक है। आप देखिए, रोमांस कभी खत्म नहीं होता। क्योंकि यह शुभ दिन पर सामूहिकता की मंजूरी के साथ शुरू होता है, हर कोई उस रोमांस में दिलचस्पी लेता है। शादी होना बहुत बड़ी बात है, सभी लोग शादी का आनंद ले रहे हैं, और आनंद ले रहे हैं …

तो अब, इस तरह की बात जब [यह] उन लोगों के साथ होती है जो पश्चिमी लोग हैं जो सोचते हैं कि रोमांस बहुत महत्वपूर्ण है। लेकिन मुझे नहीं लगता कि कोई भी पश्चिमी लोगों की शादी प्रणाली से कुछ भी सीख सकता है, क्योंकि उनकी शादी की सभी व्यवस्था पूरी तरह से खराब है। जहां तक ​​इस बात का संबंध है वहां से कुछ भी सीखने जैसा नहीं है। हम कई अन्य चीजें सीख सकते हैं, उदाहरण के लिए हम सीख सकते हैं कि कैमरा कैसे चलाया जा सकता है, लेकिन बेहतर है कि, विवाह संचालित करना आप भारतीयों से सीखें। उनके पास शादी की बहुत ठोस व्यवस्था है। सबसे पहले उन्हें बचपन से प्रशिक्षित किया जाता है: शादी को सफल कैसे बनाया जाए। ऐसा बहुत महत्व दिया जाता है। फिर कुंडली के बिना वे शादी नहीं करेंगे, शुभ दिन के बिना वे शादी नहीं करते। सब कुछ वे इस तरह के विवरण में काम करते हैं, ताकि विवाहित जीवन में विघ्न ना पड़े।

इसके अलावा इसे इतने सामूहिक तरीके से कार्यान्वित किया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि मेरे पति मुझे परेशान करना चाहते है, उदाहरण के लिए कहें, तो मेरे पति की बहन उसे ठीक करने का जिम्मा ले लेगी। अगर वे शादी के खिलाफ कुछ भी करने की कोशिश करते हैं तो हर कोई हस्तक्षेप कर सकता है। जो शादी तोड़ने की कोशिश करता है, परिवार में हर वह व्यक्ति उसके पीछे पड़ेगा। और इसलिए हर कोई जानता है कि अगर उसने तलाक लिया तो वह अलग-थलग रह जायेगा। समाज में ऐसे व्यक्ति को स्थान नहीं है। लेकिन इंग्लैंड में जब हम पहली बार गए तो हम चौंक गए! उन्हें इसके बारे में कोई शर्म नहीं थी, उन्होंने कहा, “मैं पहले से ही तीन बार तलाक ले चुका हूं और यह चौथी महिला है जिसके साथ मैं रह रहा हूं।” हमारे लिए इतना चौंकाने वाला! हे  भगवान्!

हमारे लिए तलाक का मतलब कोढ़ रोग से भी बदतर है! आप तलाकशुदा क्यों हुए ? समस्या क्या है? आपका तलाक कैसे हो सकता है? विवाह ऐसी शुभ बात है ! ऐसा आशीर्वाद है। यह परमात्मा का आशीर्वाद है। आप ऐसा  कैसे कर सकते हैं? यह इतनी बड़ी गिरावट है! और इस तरह यह काम करता है और शादी के मामले में किसी भी तरह से हम आप लोगों से कमज़ोर नहीं हैं क्योंकि हम आप लोगों से ज्यादा बच्चे पैदा कर सकते हैं। और बच्चे केवल भारत में पैदा होना चाहते हैं, कहीं और नहीं। आप हैरान हो जाएंगे। इसी समस्या का हम सामना कर रहे हैं।

हमारी जनसंख्या समस्या इस बिंदु से आती है कि शादियां इतनी सफल होती हैं, लोग इतने शांत होते हैं, कि बच्चे न्यूयॉर्क के बुरे सपने में पैदा होने से नफरत करते हैं। स्वाभाविक रूप में! क्योंकि आप नहीं जानते कि कल माँ कहाँ होगी, और पिता कहाँ होंगे।

अब हम अधिक प्रजनन दर के लिए दोषी हैं, लेकिन क्या करें? बच्चे नहीं सुनते! वे ऐसी सभी जगहों पर नहीं जाना चाहते जहाँ उनके जीवन के लिए कोई स्थिरता नहीं है। विशेष रूप से आत्मसाक्षात्कारी बच्चे, यदि वे बहुत उच्च गुणवत्ता के हैं, तो वे करते हैं – मेरा मतलब है, उन्हें इस जगह जन्म लेकर आने के लिए बहुत साहसी होना होगा ताकि वे कोशिश कर सकें। या फिर शायद आपका फायदा उठाने के लिए असली शैतान हो। लेकिन आम तौर पर, जो लोग जीवन में शांति चाहते हैं, जो जीवन में आनंद चाहते हैं, और अपने माता-पिता का प्यार, भारत में पैदा होना चाहते हैं। और यही कारण है कि हाल ही में आप पाएंगे कि भारत जनसंख्या में इतनी तेजी से बढ़ रहा है कि हमें नहीं पता कि क्या करना है।

इसलिए यह विवाह प्रणाली आ गई, जिसने उन्हें झटका दिया क्योंकि वे समझ नहीं सके कि, वहाँ एक रोमांस होना है, और यह और वह है।

अब एकादश के बारे में अधिक समझ यह होनी चाहिए कि हमें इसे किसी भी तरह से अपने भीतर नहीं बनने देना चाहिए, क्योंकि ये स्वयं को नष्ट करने  वाली चीजें हैं। इसकी शुरुआत शंका से होती है। जब आप सहज योग पर संदेह करना शुरू करते हैं, तो इनका निर्माण शुरू हो जाता है। और संदेह  करना इसका निर्माण करने लगती है, पूरे मेधा में जो यह है, यहाँ प्लेट, आप देखते हैं। और यह वहां एक मोटी बड़ी प्लेट बन सकती है।

जैसे, आज मैंने उस महिला को कहते हुए देखा, “टच वुड !” आप देखें टच वुड  का अर्थ है यह लकड़ी (माँ उनके एकादश को छूती है)। “टच वुड” का मतलब है कि यहाँ कोई लकड़ी नहीं होनी चाहिए, आप देखें। या आप कह सकते हैं, “टच स्टोन।” यदि आप एक डींग मारने जैसा कुछ कहते हैं, तो आप कह सकते हैं, “नहीं, नहीं, टच वुड ! मेरा मतलब यह नहीं है। मेरा मतलब है, लोग काफी सचेत हैं, अनजाने में वे यह कहते हैं, लेकिन वे कुछ ऐसा नहीं कहने के बारे में सचेत हैं, जो ऐसा इशारा करता हो कि, आप घमंडी स्वभाव के, या कुछ डींग मारने, या कुछ बड़ा करने का विचार प्रकट कर रहे हों ताकि यह गलत संकेत ना जाए। तो वे कहते हैं, “टच वुड”। यह लकड़ी है, यह एकादश, इनका मतलब है।

इसलिए हम अपने भीतर इस बल निर्माण के प्रति काफी सचेत हैं। और अब हमें सचेत होना होगा कि यह शक्ति लोगों को परिवर्तित  करने वाली है।

इसलिए आज हम यह प्रार्थना करने जा रहे हैं कि,  इस शक्ति की लोगों को भयभीत करने की अपनी क्षमता के माध्यम से अमेरिका को परिवर्तित 

 करना होगा ताकि वे सहज योग में आएं। क्योंकि जब चीजें अहंकार की इस अवस्था में पहुंच गई हैं,  जब लोग कहते हैं, “क्या गलत है?” जैसे इंग्लैंड में जब मैंने पहली बार बात करना शुरू किया, तो उन्होंने कहा, “यह पुरातनपंथी (विक्टोरियन) महिला है, दकियानूसी है, बिल्कुल बेकार!” मैंने कहा, “सब ठीक है, मैं कुछ भी नहीं कहती, लेकिन आपको ऐसी बीमारियाँ होंगी जिनके कारण आपको वापस आना होगा।” वह समय था जबकि उन्होंने ऐसा कानून पारित किया कि समलैंगिकता को अनुमति दी जानी चाहिए, बे छूट व्यवहार 

 को अनुमति दी जानी चाहिए और इन सभी चीजों को अनुमति दी जानी चाहिए: और अब आपके पास एड्स है! आपके पास अब एड्स है जो पहले से ही संचालित है। अब एड्स ने एकादश का भय दिया है। अब लो, यह! क्या गलत है? इस बारे में क्या ख्याल है?

तो यह विस्मय और यह भय बहुत महत्वपूर्ण है, यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण बात है कि,  हमें विस्मय होना चाहिए और यह भय कि ईश्वर सर्वशक्तिमान है और हम उसके सामने कुछ भी नहीं हैं।

यहाँ हमें यह याद रखना होगा कि हम उस ईश्वर के अंग-प्रत्यंग हैं, और हमें स्वयं को इस चेतना के प्रति जागृत करना है कि वह संपूर्ण है और हम पूर्ण के साथ एकाकार हो गए हैं; इस तरह हम अपने एकादश पर काबू पाने जा  रहे हैं।

इसलिए आज मैं आप सभी को एकादश की शक्ति का आशीर्वाद देती हूं जो परिवर्तन करने जा रहा है।

परमात्मा आप सभी को आपके काम में जो आप अमेरिकियों की भलाई के लिए करने की कोशिश कर रहे हैं, आशिर्वादित करें!  अमेरिका को बचाना आपकी जिम्मेदारी है। आप जानते हैं कि यह विशुद्धि चक्र है और सहज योग की सारी जिम्मेदारी विशुद्धि चक्र पर टिकी हुई है! तो यह कितना महत्वपूर्ण है कि यह परिवर्तन होना है। जहाँ तक और जब तक परिवर्तन नहीं आएगा, तब तक आप देखेंगे, यह कार्यान्वित नहीं होगा। आप लोगों से बात नहीं कर सकते, आप उनके साथ संवाद नहीं कर सकते। इसलिए आपको प्रार्थना करनी चाहिए कि परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए, ट्रिगर होना चाहिए और सरपट दौड़ना चाहिए, और जंगल की आग की तरह फैल जाना चाहिए। आज हमारी यही प्रार्थना होनी चाहिए।

परमात्मा आपको आशिर्वादित करे। परमात्मा आपको आशिर्वादित करे।

और यह तब अंदर स्थापित हो जाता है जब शिव क्रोधित होते हैं क्योंकि शिव ही असली रुद्र हैं और उनकी शक्तियाँ एकादश को दी जाती हैं। शिव ही वास्तविक परम विघटन हैं। वही पूरी दुनिया को नष्ट कर देंगे। लेकिन वह विनाश की इन ग्यारह शक्तियों देते हैं।

उसके पास बारह शक्तियाँ हैं, जिसमें से एक वह अपने लिए परम (विनाश) के लिए रखते हैं और ग्यारह वह एकादश को देते हैं। और जब ऐसा होता है तो एकादश मानव में कार्य करना शुरू कर देते हैं।

इसलिए आज मैं सोच रही थी कि,  आज हम पहले गणेश पूजन और फिर रुद्राभिषेक।

पूजा शुरू होती है।

आप कल समझ गए कि मैंने इनके बारे में क्या कहा कि,  आप देखिए कि,  मनोवैज्ञानिकों ने पहली गलती की है कि यह परतों में है। इन समूहों द्वारा इसका यह लाभ उठाया गया था कि आपको इस सभी बकवास से गुजरना होगा, लेकिन यह परतों में नहीं है उन्हें लंबवत रखा गया है और आपका रास्ता बिल्कुल ठीक से रखा गया है। क्योंकि आपको यह समझना चाहिए कि ईश्वर महानतम संगठक है, महानतम इंजीनियर है। वह कैसे आपको इस तरह परतों में बना सकता है, कि आपको अपने अचेतन में वापस जाना पड़े। तो इन गुरुओं ने, इन भयानक लोगों ने, इसका फायदा उठाया है – आप देखें।