Devi Puja: On Leadership (Morning)

Rahuri (भारत)

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अंग्रेजी से अनुवाद
… और यह वह स्थान है जहां मेरे पूर्वज राजाओं के रूप में राज्य करते थे, और उनका एक राजवंश भी था। अब, हम जिस दूसरी जगह पर गए, मुसलवाड़ी, वह जगह है जहां देवी ने सबसे पहले उन्हें एक बीम से मारा था, इसलिए इसे मुसलवाड़ी कहा जाता है। इसका अर्थ है एक बीम, ‘मुसल’ का अर्थ है ‘बीम’। तो यह वह स्थान है जहाँ देवी ने बहुत काम किया है।

एक और जगह है जिसे अरडगांव कहा जाता है जहां वह दौड़ रहा था और चिल्ला रहा था, इसलिए इसे अरड़ कहा जाता है। ‘अरड़’ का अर्थ है ‘चिल्लाना’ (‘गाओ’ का अर्थ है गाँव)।

तो पूरी जगह पहले से ही बहुत चैतन्य पुर्ण रही है क्योंकि नाथ, नौ नाथ – हमने वहां एक गणिफनाथ देखा – लेकिन वे सभी इस क्षेत्र में रहते थे और उन्होने बहुत मेहनत की थी। सबसे अंतिम, साईनाथ, शिरडी में, जैसा कि आप जानते हैं, यहाँ से बहुत निकट था।

तो यह एक बहुत ही पवित्र स्थान और महान पूजा का स्थान है जहाँ कई बार देवी की पूजा की जाती थी। राहुरी ही, यदि आप चारों तरफ घुमें, तो आप पाते हैं कि वहां नौ देवता बैठे हैं। इन्हें भी धरती माता ने ही बनाया है। वे सुंदर चीजें हैं। उनके बारे में कोई नहीं जानता। आप जा सकते हैं और देख सकते हैं। उनमें से नौ हैं और ये देवी के नौ अवतारों या देवी की नौ शैलियों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

अब, इस खूबसूरत जगह में हम यहां हैं, हालांकि यह कई चीजों से खराब हो गया है, लेकिन, जैसा कि आप देख सकते हैं, यहां होना हमारी आत्मा के लिये बहुत सहज है। इस जगह पर मैंने एक नकारात्मकता देखी है, एक तरह की चीज, जिसके बारे में [जो] मैं आज आपको फिर से बताना चाहती हूं। यह हर जगह काम करता है जहां किसी व्यक्ति का नेतृत्व होता है। यहाँ श्री धूमल आए और उन्होंने मेरे निवास पर, बॉम्बे में, उनकी प्राप्ति की। और वह वापस आये और उन्होने इसे यहां कार्यांवित करना शुरू कर दिया। उसका भाई उसे ले आया, लेकिन उसका भाई शुरूआत में काफी नकारात्मक हो गया, और फिर नकारात्मकता काम करने लगी और लोग उसका विरोध करने लगे और उसे परेशान करने लगे और मुझे उस दौरान बहुत कठिन दौर से गुजरना पड़ा।

तो अब, जब आप यात्रा कर रहे हैं, तो मैं आपको बताना चाहती हूं: अपने नेताओं को चुनौती न दें। क्योंकि न केवल यह संगठन को परेशान करता है, बल्कि इसकी अभिव्यक्ति मेरे शरीर पर होती है; मैं शारीरिक रूप से पीड़ित होती हूं। खासकर अगर आप मेरी मौजूदगी में नेता के खिलाफ आकर बातें करते हैं तो मुझे अधिक कष्ट लगता है। और एक बार ऐसा हुआ कि कोई नेता के बारे में बात कर रहा था और मेरी पूरी पीठ इतनी लाल हो गई कि बहुत सारे छाले आ गए, मुझे बहुत दर्द हुआ। इसलिए मैं आपसे विनती करती हूं कि नेताओं के बारे में निर्णय न लें और उनकी आलोचना करने और अहंकार की स्थिति लेने की कोशिश न करें और यह देखने की कोशिश करें कि, “वह ऐसा है, वह गर्म स्वभाव का है” या “वह यह है, वह है।” उन्हें गर्म स्वभाव का होना चाहिए! क्योंकि मैं नहीं हूं। क्योंकि मैं बहुत क्रोधित नहीं हो सकती, उन्हें मेरी रक्षा करनी होगी। मेरी सुरक्षा के रूप में, उन्हें गर्म स्वभाव का होना चाहिए और उन्हें आपको बताना होगा। और अगर वे बताते हैं, तो आपको ऐसा महसूस नहीं करना चाहिए कि वे बॉस हैं या वे ये काम कर रहे हैं और वह सब। असल में जो लोग बॉस प्रव्रुती के होते हैं वे इसे केवल इसलिए महसूस करते हैं, क्योंकि वे यह सहन नहीं कर सकते कि दूसरा कोई उन्हें कुछ भी बता सकता हैं। इसलिए वे सोचते हैं कि दूसरे रौबदारी कर रहे हैं और वे खुद ठीक हैं: ऐसा नहीं है।

तो समस्या यह है कि व्यक्तिको यह समझना चाहिए कि किसी भी व्यक्ती को इस तरह से काम करना है। मुझे पता है कि नेता क्या हैं। जब मुझे लगता है कि नेता गलत हो रहे हैं, तो मैं तुरंत उन्हें ठीक करने की कोशिश करती हूं। लेकिन आपको नेताओं को चुनौती देने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। लेकिन पश्चिम में यह मेरी सबसे बड़ी समस्या थी और बाद में मैंने यहां भारत में भी यही पाया, यह उभरता था। जब भी मैं जाती था, तो यह शुरू हो जाता था: नेता को चुनौती दी जाती थी। जैसे कि मैं नेताओं के बारे में नहीं जानती, जैसे कि मैं उनके बारे में कुछ नहीं जानती, जैसे मुझे बताया जा रहा है, जैसे कि मैं बिल्कुल अज्ञानी हूं।

तो आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है। आपको इसकी चिंता नहीं करनी चाहिए। मैं आपको बताऊंगी कि नेता कौन है और इसे कैसे हल करना है।
बेशक, कभी-कभी ऐसा होता है कि नेता फिसल जाते हैं। मुझे पता है कि वे फिसल जाते हैं। ऐसा होता है कि वे किसी गलत व्यक्ति के जाल में फंस जाते हैं। यह काफी संभव है; आख़िरकार वे मेरी विशेष अनुमति से, तुम्हारे जैसे ही हैं, नेता बन गए हैं। लेकिन सम्भव है ऐसी स्थिति आ सकती है और मैं उन्हें ठीक करना चाहती हूं और मैं हमेशा उनसे कहती हूं कि, “यह एक गलत काम है जो आपने किया है। इसे ठीक किया जाना है।” लेकिन अन्यथा सहज योग का संपूर्ण प्रशासन असंभव है। इसे नेताओं के माध्यम से काम करना होता है। आपको यह नहीं देखना चाहिए कि वे कैसे बात करते हैं, वे आपसे क्या कहते हैं, वे क्या काम करते हैं, बल्कि वही करें जो वे आपको बताते हैं। इसमें आपने कोई स्वतंत्रता नहीं खोई है। आप देखेंगे कि आपकी स्वतंत्रता बनी रहेगी, सम्मान होगा और किया जाएगा।

इसके विपरीत, मैं कहूंगी, जब एक लापरवाह और ढीला नेतृत्व होता है तो यह असंभव होता है। अन्य सभी नेता बन जाते हैं। इंग्लैंड की तरह, हम कह सकते हैं, कि गेविन बहुत, बहुत सौम्य थे और अब बहुत सारे नेता हैं जो सामने आते हैं, बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, “यह करो! वो करें!” मुझे इंग्लैंड में एक बड़ी समस्या है कि इतने सारे मशरूम की तरह अहंकार आ रहे हैं। और वे इतने चंचल और बेतुके हो जाते हैं, और वे सब बकवास बोलते हैं, वे व्याख्यान देना शुरू कर देते हैं, यह, वह। फिर इसे नियंत्रित करना असंभव है। अगर गेविन एक कड़क साथी होता और उसने उन्हें सही रखा होता। लेकिन मुझे लगता है, वह बहुत अच्छा है और बहुत सज्जन व्यक्ति है।
इतनी सज्जनता सहज योग में किसी काम की नहीं है। तो अगर उसने पूरी स्थिति को उस तरीके से संभाला होता, तो वह सब ठीक होता, और बहुत अच्छा काम करता।

लेकिन कभी-कभी तो नेता को चुप रहने के लिए भी कहा जाता है कि, “तुम चुप रहो!” और इसी तरह ही वह चुप रहने लगता है। हर कोई आपस में हाथ मिला लेता है और नेता को चुप करा देता है और नेता बिलकुल बंदगोभी बन जाता है – वह कुछ नहीं कहता। तो यह भी एक बहुत बुरी आदत है किसी को इस तरह कहना कि, “चुप रहो! कुछ मत कहो!” यह तरीका मुझे पसंद नहीं है। अगर कोई मुझसे बात कर रहा है, कोई भी जो मुझसे बात कर रहा है, तो आपको मेरे सामने उसे ऐसा नहीं कहना चाहिए, “चुप रहो!” या उसका हाथ खींचना, या बस उसे मुक्का मारना; और मुझे वह सब बिल्कुल पसंद नहीं है। इससे मुझे दुख होता है। आपको ऐसा कभी नहीं करना चाहिए।

मैंने देखा है कि लोगों की यह बहुत बुरी आदत है, “बोलो कहो!” “बात मत करो!” जैसे कि वे इस तरह की बात कहने वाले सबसे महान, बुद्धिमान लोग हैं: यह एक बहुत ही गलत विचार है और ऐसा नहीं किया जाना चाहिए। मेरी उपस्थिति में ऐसा कभी नहीं किया जाना चाहिए, मुझे यह पसंद नहीं है, यह मुझे चोट पहुँचाता है, और यह शारीरिक रूप से प्रकट होता है। तो ऐसा मत करो, कुछ मत कहो, मत करो! मुझे पता है कि इसे कैसे संभालना है। अगर कोई बहुत अज़ीब है तो मैं उस व्यक्ति से कह सकती हूं, “अब इसे रोको!” मैं यह कर सकती हूं। लेकिन आप इस तरह की चीजों को अपने ऊपर लेने की कोशिश न करें।

बेशक नेता ऐसा कर सकते हैं, नेता, जो बड़े हो गए हैं, परिपक्व लोग, बस उन्हें चुप रहने के लिए कह सकते हैं। लेकिन हर समय कुछ लोगों को “नहीं!” कहने की आदत होती है। और नहीं!” ऐसा करना भूतिया है, मैं कहूंगी। यह वास्तव में भूतिया है। क्योंकि वे मुझे कभी भी वास्तविकता देखने की अनुमति नहीं देते हैं। हमें पता होना चाहिए कि क्या हो रहा है, लोगों का क्या कहना है। मुझे इसके बारे में पता होना चाहिए। इसमें कुछ भी गलत नहीं है।
लेकिन इसके विपरीत, वे आकर मुझसे कहते हैं, “हमारा नेता ऐसा है, हमारा नेता ऐसा है।” इसकी आप चिंता न करें क्योंकिआपके नेताओं पर सबसे ज्यादा मेरा चित्त है। मैं नेता बदलती हूं और गलत होने पर नेताओं को बदल दूंगी। लेकिन फैसला मुझे करने दो। वह निर्णय आप मुझ पर छोड़ दें।

तो यह एक और बात है जो मैं राहुरी के बारे में कहना चाहती थी, जोकि मैंने यहां एक सबक सीखा। फिर एक और बात मुझे पता चली: यहाँ के ग्रामीण बहुत आसानी से आश्वस्त हो जाते हैं, वे सहज योग को बहुत अच्छी तरह से अपनाते हैं। और जबकि शिक्षित लोग सहज योग को अपनाने में समय लेते हैं; स्वाभाविक रूप से क्योंकि उन्हें लगता है कि वे बहुत अच्छी तरह से शिक्षित हैं! और उन्हें अपनी शिक्षा को भूलना और सरल इंसान बनना मुश्किल लगता है।
तो उसी तरह, आप पाएंगे कि साधारण लोग शिक्षित लोगों की तुलना में बहुत तेजी से सहज योग को अपनाते हैं; क्योंकि उनका दिमाग बहुत तेजी से काम करता है, वे वयब्रेशन को पकड़ नहीं पाते हैं। मन तेजी से दौड़ रहा है, वायब्रेशन उनके पीछे दौड़ रहे हैं और यह लुका-छिपी का बड़ा खेल है! लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ता। फिर भी, एक बार वह बुद्धिमान सहज योग में पहुंच जाता है, तो यह अद्भुत काम करता है। एक बार जब वे इसे प्राप्त कर लेते हैं, निस्संदेह, उन्हें समय लगता है। वे समय लगाते है, लेकिन एक बार जब वे इसे प्राप्त कर लेते हैं तो यह अद्भुत काम करता है।

तो कुछ लोग इसे आसानी से अपना लेते हैं, लेकिन वे उसे उतनीअच्छी तरह से कार्यांवित नहीं करते हैं; जो कठिनाई से अपनाते हैं, वे बेहतर काम करते हैं; इस अर्थ में कि वे इसे बुद्धिमानी से अभिव्यक्त कर सकते हैं और लोगों से बात कर सकते हैं और उन्हें इसके बारे में बता सकते हैं।

तो यह एक और बात किसी भी व्यक्ति को याद रखनी है कि: यह समझने की कोशिश करें कि आपने अपनी शिक्षा के माध्यम से कुछ भी नहीं जाना है। चुंकि आपने कभी वायब्रेशन महसूस नहीं किये, आपको पता भी नहीं था कि ऐसा कुछ मौजूद है! यह एक नया ज्ञान है, बिल्कुल नई बात है। बिल्कुल इसका आपकी डिग्रियों से कोई लेना-देना नहीं है, एम.ए.डी. और पीएच.डी. और वे सभी चीजें। यह कुछ और ही है जो अस्तितत्व में है, जिसे आपको महसूस करना है। इसलिए यदि आप वह सरल रवैया अपनाते हैं तो यह एक बेहतर विचार होगा।

अब चौथी चीज जो मुझे परेशान करती है, वह है गुट बनाना, समूह बनाना। एक और बहुत परेशान करने वाली बात एक गुट बनाना है। यह इस स्थान का एक समूह या उस स्थान का गुट है: कौन अमूक स्थान का है। और यह गुट्बाज़ी, एक बार होने के बाद सामूहिकता में एक दरार होती है। जब कोई समूह होता है, जैसे, नाक और आंखें वे एक समूह बना लेते हैं; फिर उनके और हाथों के बीचदरार हो गई है। इसलिए फिर नाक में दिक्कत होने पर हाथ काम नहीं करेंगे। तो पूरी कार्य प्रणाली एक विघटित गतिविधि बन जाती है।

इसलिए कभी भी ग्रुप नहीं बनाना चाहिए। जिन लोगों को समूह बनाने की आदत है, उन्हें पूरी तरह से हतोत्साहित किया जाना चाहिए। वे किसी के खिलाफ कहना शुरू करते हैं, फिर उसके खिलाफ, फिर यह कि, फिर वे एक गुट बनाते हैं, एक समूह इधरवहां जाता है, एक समूह उधर। तो सहज योग में समूह बनाने की अनुमति नहीं है, यह दुर्भावना है। यह दुर्भावना है। अगर यह काम करना शुरू कर देता है, तो आप घातक हो जाते हैं। पूरा समूह घातक हो जाता है और फिर उन्हें ठीक करना एक बहुत ही कठिन समस्या होती है।

और किसी भी प्रकार के ढुलमुल या बहुत हल्के नेतृत्व को भी स्वीकार नहीं करना चाहिए।मैं कहूंगी, कुछ हद तक, एक मजबूत, ज्वाजल्यमान, नेतृत्व को स्वीकार करना चाहिए। वो मददगार होगा। क्योंकि हमारे विचार आपके अब तक के विचारों से बहुत अलग हैं, कि, “नेता हमें प्रसन्न करने वाला होना चाहिए। उनका एक ऐसा व्यक्तित्व होना चाहिए जो बेहद लाड़-प्यार करने वाला टाइप का हो।” ऐसा नहीं है। नेता को ऐसा एक मजबूत, ज्वाजल्यमान व्यक्तित्व होना चाहिए ताकि वह लोगों का सम्मान प्राप्त करे और उन्के अंदर अपने प्रति भय मिश्रित सम्मान पैदा करे। लेकिन चुंकि हमें इतनी स्वतंत्रता मिली हैं तो हम नेता के बारे में टिप्पणी कर सकते हैं और कह सकते हैं, “यह नेता बुरा है, वह नेता बुरा है।” लेकिन यह अच्छी बात नहीं है! यह मदद नहीं करता है। यह मदद नहीं करता है। इसके विपरीत, जैसा कि मैंने आपको बताया, मैले लोग भयानक समस्याएँ पैदा करते हैं! और फिर आपको इतने अहंकारी लोग मिल जाते हैं जो सामने आते हैं। मेरा मतलब है एक ढीठ व्यक्ति, यदि कोई एक ढीठ व्यक्ति है, या जिसने इस तरह के दबाव को स्वीकार कर लिया है, वह यदि एक नेता के रूप में है, तो बाकी सभी लोग, जो उस व्यक्ति के संपर्क में आते हैं, वे भी अहंकारी हो जाते हैं। वे भी ऐसा व्यवहार करने लगते हैं जिसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते। जैसे गेविन एक बहुत अच्छा उदाहरण है: उसने अपने कार्यालय में कुछ लोगों के लिए काम की व्यवस्था की थी। हर कोई जो उसके कार्यालय में काम करता था, इस परेशानी में पड़ गया, चुंकि वह इतना भला था कि उन लोगों ने अपना अहंकार बढ़ा लिया, आप देखिए, चुंकि उनका प्रति-अहंकार था, इसलिए उन्होंने आपके अहंकार का उपयोग करना बेहतर समझा और इस तरह पूरी बात काम कर गई। बेचारे को उन सभी को ऑफिस से बाहर निकलने के लिए कहना पड़ा। तो यह हमारे लिए एक उदाहरण है और इसमे ऐसा कुछ महसूस करने की कोई बात नहीं है कि यह किसी भी चीज की आलोचना है। लेकिन यह काम नहीं करता है, यह प्रणाली काम नहीं करती है। इसलिए आपको ऐसा प्रयास नहीं करना चाहिए कि आप उनकी आलोचना करें।

अब, नेतृत्व के बारे में एक और बात मुझे आपको बतानी है। मान लीजिए कि मैंने क्रिस्टीन को एक नेता के रूप में नियुक्त किया है। वह उत्तरी अमेरिका की नेता है: फिर उसे उत्तरी अमेरिका के लिए निर्णय लेने होंगे। लेकिन किसी और को, यहां तक ​​कि उसके पति को भी कोई फैसला नहीं लेना चाहिए। उसने नहीं करना चाहिए। उसे कुछ नहीं करना चाहिए। उसे पृष्ठभूमि में होना चाहिए। जो भी नेता हो उसे समस्या से निपटना चाहिए। मुसीबत ये है कि, अगर पत्नी वहां है तो पति प्रभारी बन जाता है, पति को मिल जाए तो, फिर पत्नी। जैसे, मुझे कहना चाहिए पूना, पूना, मैंने वहां किसी को नियुक्त किया, उसे रुकावट डाल दी गई और उसकी पत्नी ने प्रभार ले लिया; और पत्नी एक भयानक चीज़ है। मेरा मतलब है, मुझे नहीं पता कि ऐसी चीजों का क्या करें। यह बहुत मुश्किल है कि अगर यह पति है, यह एक पति है, यह एक पत्नी है, यह एक पत्नी है। तब पत्नी थोड़ा हावी हो जाती है, पति वापस आ जाता है और फिर पति शासन करना शुरू कर देता है। तब मेरा ध्यान पत्नी पर होता है, यहीं पति बन जाता है। नेतृत्व में पति-पत्नी जैसा कुछ नहीं होता। उनका कोई लेना देना नहीं है। जो भी हो नेता हो उसे नेता के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए, चाहे वह पति हो या पत्नी। यह एक बात है: सहज योग में स्त्री और पुरुष में कोई भेद नहीं है। ऐसा नहीं है कि पुरुषों को हमेशा शासन करना चाहिए और न ही महिलाओं को शासन करना चाहिए। यह वह है कि जिसे नेता के रूप में नियुक्त किया जाता है वह नेता होता है।

मुझे आपको ये बातें बतानी होंगी क्योंकि ये छोटी, छोटी चीजें पूरे संगठन पर इतना फर्क डालती हैं कि मुझे नहीं पता कि कैसे बताना है। क्योंकि एक नेता के रूप में पति का कोई अधिकार नहीं है। उन्हें एक नेता के रूप में नियुक्त नहीं किया गया है, इसलिए उन्हें एक नेता के रूप में कोई अधिकार नहीं है। अगर आप सभी इस बात को समझते हैं कि नेतृत्व मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यह शरीर के मुख्य अंग की तरह है। और उस नेतृत्व को किसी भी कीमत पर, किसी भी समय चुनौती नहीं दी जानी चाहिए।

जैसे डॉ. सांगवे नासिक के नेता हैं। तो वह नेता है। उन्हे करना है। यह वह है जो निर्णय लेता है, वह वह है जो कहता है। किसी को भी उन्हे चुनौती नहीं देनी चाहिए। तो हमारे पास अलग-अलग जगहों के नेता हैं, अगर आपको यह तय करने में कोई समस्या है कि नेता कौन है, तो आप मुझसे पूछें।

मैं हमेशा एक व्यक्ति को नियुक्त करती हूं। इटली में, ग्रेगोइरे ने, मुझे नहीं पता क्यों, उन्होंने कहा कि दो व्यक्ति होने चाहिए। मुझे नहीं पता कि उसने दो क्यों कहा। लेकिन मैंने उससे कहा, “ग्रेगोइरे, क्या यह गलत बात नहीं है,” लेकिन उसने सिर्फ इतना कहा, “नहीं। आपको अवश्य रखना है।” और दूसरे को इतनी बुरी तरह से बाहर कर दिया गया था, मेरा मतलब है कि उसने वास्तव में हमें नुकसान पहुंचाया है। तो बस मेरी बात सुनो! मुझे पता है, मैं समझती हूँ।

गुइडो बता सकता है कि, इटली में जो हुआ है, ऐसा इसलिए क्योंकि उन्होंने मेरी बात नहीं मानी। यहां हम सभी को खुश करने के लिए नहीं हैं। नहीं, हम यहां कोई वोटिंग या कुछ भी लेने नहीं हैं। हम यहां काम करने के लिए हैं, और काम करने के लिए हमें सही रास्ते, सही तरीके अपनाने होंगे। तो जो लोग सोचते हैं, “ओह, उनमें से तीन रख लो” फिर, “उनमें से पाँच लो!” यह बकवास है! किसलिए? सिर्फ अहंकार बढ़ाने के लिए?

कोई भी नेता उतना ही अच्छा होता है जितना आप लोग, फर्क सिर्फ इतना है कि ‘मेरा ध्यान उस नेता पर है’। इसलिए यह बेहतर तरीके से काम करता है। अपने अहंकार को अपने ऊपर हावी न होने दें। कुछ भी नहीं है। वह क्या करता है? बेचारा, अब नेता है? उदाहरण के लिए, मैं कहूंगी, वॉरेन: उसने इतनी मेहनत की, उसने वास्तव में मेहनत की। और उसने इतनी मेहनत की कि वह इतना बीमार हो गया। मैं चकित हू रही थी। मेरे लिए यह सब ठीक है। आखिर मैं एक आदि शक्ति हूं, इसलिए इससे कोई फर्क नहीं पड़ता (हंसी) मैं कर सकती हूं, मैं मैराथन कर सकती हूं। लेकिन यह साथी मेरे साथ काम कर रहा था। मुझे पता था कि उसे एक बिंदु पर रास्ता देना होगा। यह तो बहुत ज्यादा है। और फिर लोग वॉरेन की आलोचना करने लगते हैं, मुझे समझ नहीं आता। मेरा मतलब है, वह दिन-रात काम कर रहा है। क्या वे यह नहीं देख सकते? उसके बिना हमारा क्या होता?

मेरा मतलब है, जो नेता हैं वे इतनी मेहनत करते हैं, वे इतना करते हैं और फिर आप आलोचना करना शुरू कर देते हैं। यह उचित नहीं है। यह उनके प्रति और मेरे प्रति थोड़ी कृतघ्नता है। इसके विपरीत, मैं उनके लिए बहुत अधिक कृतज्ञ महसूस करती हूं। आखिर यह मेरा काम है। यह ऐसा है कि, मुझे इसके लिए भुगतान किया गया है, मैं कह सकती हूं। तो मैं यह काम कर रही हूँ, ठीक है। लेकिन उनका क्या? वे इंसान हैं, उन्हें उनकी दूसरी चीजें मिली हैं। मुझे पैसे कमाने की ज़रूरत नहीं है, मुझे कोई समस्या नहीं है। तो क्यों? उन्हें परेशान क्यों करें? वे वही हैं जिन्होंने इतना कुछ करते हुए अपना जीवन समर्पित कर दिया है, और फिर आप उनकी आलोचना करने लगते हैं। यह असंभव है। लेकिन अगर वह आपसे कुछ कहता है, “यह मत करो, और वह मत करो!” और कभी-कभी यह मेरे परामर्श से होता है कि वह ऐसा करता है। ऐसी बातें जिन्हे प्रत्यक्ष रूप से मैं नहीं कह सकती, वह अप्रत्यक्ष रूप से आपसे कह सकता है। इसलिए आपको ऐसी चीजों को चुनौती नहीं देनी चाहिए।

यह उन चीजों में से एक है जो आज मैं नेतृत्व के बारे में बात करना चाहती थी, क्योंकि यह एक ऐसी जगह है जहां मुझे नेतृत्व की कुछ समस्याओं का सामना करना पड़ा है। और किसी को यह समझना चाहिए कि यही एकमात्र तरीका है जिससे सहज योग काम कर सकता है। शरीर में भी, जैसा कि आप जानते हैं, ऐसा नहीं है कि, हृदय, जो हृदय है वो संपूर्ण पंपिंग स्रोत है। अब हृदय का कार्य स्वीकार किया जाना चाहिये: कि यह पंपिंग स्रोत है, और यह अन्य सभी अंगों को प्रवाह देता है। तो लीवर लीवर है, ब्रेन ब्रेन है। दिमाग दिल नहीं बनना चाहता, दिल लीवर नहीं बनना चाहता। अब जिगर की कोशिकाएं, अगर वे कहें कि, “अब हम दिल के लिए काम करेंगे!” या “हम एक समूह बनाएंगे!” फिर आप किस प्रकार इसे कैसे कर पायेंगे?

इसलिए चूंकि हमे बहुत महत्वपूर्ण अंग प्राप्त हुए हैं, इसलिए हमारे पास बहुत महत्वपूर्ण नेता हैं। और मुझे पता है कि वे क्या कर रहे हैं, मुझे पता है कि उनके साथ क्या गलत है, इसलिए इसे ठीक करने का काम आप मुझ पर छोड़ दें।

ठीक है, यह आज, विदेशियों के लिए है। क्योंकि अब हम और अधिक कठिन समय में आगे बढ़ेंगे, मुझे लगता है, क्योंकि आपके लिए थोड़ा संयमी जीवन हो सकता है क्योंकि आपने इस की प्रार्थना की थी! आप एक कैंपिंग ग्राउंड बनाना चाहते थे, इसलिए मैंने इसके लिए कैंपिंग ग्राउंड की व्यवस्था की है। तो फिर आपको इसके बारे में यह नहीं कहना चाहिए की नेता “वह कहाँ है? अब उसे बुलाओ! तुमने क्या कर डाला?” यह सब मेरे द्वारा प्रबंधित किया गया है, इसलिए उसे दोष न दें। और खुद आनंद लें। और यह कहने की कोशिश मत करो कि उसे इसकी देखभाल करनी चाहिए थी: उसे इसके लिए भुगतान नहीं किया है। उन्होंने इसके लिए भुगतान नहीं किया है। मुझे इसके लिए भुगतान किया जाता है। वो नहीं हैं। इस अर्थ में मैं भुगतान प्राप्त हूं क्योंकि मैं उसके लिए बनी हूं। यह मेरा कार्यक्षेत्र है। मैं यह कर रही हूं क्योंकि मुझे यही करना है। और मैं इस काम को करने के अलावा और कुछ नहीं कर सकती, अन्यथा मेरा अस्तित्व नहीं रहेगा, आप देखिए।

तो मेरा एक अलग विषय है। लेकिन अगर वह ऐसा कर रहा है, तो यह मेरी जिम्मेदारी है। और एक तरह से मुझे लगता है, और आप सभी को भी, कृतज्ञ महसूस करना चाहिए।

परमात्मा आप सबको आशीर्वादित करें।

मराठी से अंग्रेजी अनुवाद
आप में से अधिकांश लोग अंग्रेजी जानते हैं लेकिन फिर भी मैं आपको कुछ बातें मराठी में बताना चाहूंगी। यदि आप सहज योग में प्रगति करना चाहते हैं तो आपको अपने आप को आत्मनिरीक्षण करने की आवश्यकता होगी, अपने आप से पूछें कि मैंने कहाँ गलत किया, सहज योग में मैं क्या गलत कर रहा हूँ। साथ ही यह भी सोचें कि हमारे भीतर क्या दोष हैं। लेकिन अगर आप सोचने लगें कि आप परफेक्ट हैं, मेरे साथ कुछ भी गलत नहीं है, हम दुनिया में सबसे अच्छे हैं जो गलत है। वे लोग गम्भीर रूप से पकड़े जाते हैं, सिर पर बैठने की कोशिश करते हैं, फिर उसी समूह के कुछ लोग सोचते हैं कि हमें उन्हें कुछ महत्व देना चाहिए, तो इस तरह सभी भूत उनके सिर पर बैठ जाते हैं। फिर इस तरह मेरा सारा काम बर्बाद हो जाता है, उदाहरण के लिए जब आप एक फसल लगाते हैं, तो अचानक एक कीट वहां नष्ट करने के लिए आता है और कहता है कि मैं ही सत्य हूं, मेरे द्वारा विनाश ही रास्ता है। और इस तरह सब कुछ नष्ट हो जाता है। इस तरह हमारा संगठन कई जगहों पर फेल हो गया। ये भूत और अहंकारी लोग सिर उठाना शुरू कर देते हैं और सोचने लगते हैं कि वे महान हैं और उन चीजों पर मेरा चित्तआकर्षित करने की कोशिश भी करते हैं, लेकिन चुंकिमैं पूरी दुनिया पर चित्त देती हूं, जब तक कि चीजें वास्तव में खराब नहीं होतीं, मुझे पता नहीं होता कि क्या हो रहा है .

लेकिन पुणे में श्री गायकवाड़ नेता हैं, मैंने कहा कि वे नेता होंगे लेकिन उनकी पत्नी को लगता है कि वह नेता हैं। फिर मुझे एहसास हुआ कि वह कहीं चला गया और वह (श्री गायकवाड़ और उनकी पत्नी) शो चलाने लगते हैं। मैंने उन्हें कभी पत्र नहीं लिखा कि उन्हें दिल्ली जाना चाहिए और मुझे तब तक कोई पता नहीं था जब तक हरि ने मुझे इसके बारे में नहीं बताया (उन्होंने मुझे इस बारे मे पत्रभेजाऔर आप सभी जानते थे कि यह झूठा था लेकिन आप सभी सोच रहे हैं कि वे सभी महान हैं।

अब हमारे बीच कुछ बातों पर चर्चा करने के लिए कि कल कुलकर्णी पूजा के लिए आया था और वह इतना पकड़ा गया था, उसके जैसा व्यक्ति वह इतना अधिक कैसे पकड़ा गया था, यही मैं आपको बता रही हूं। सावधान रहें, क्योंकि ऐसा ही होता है। तो पूजा में वाकई कुछ गलत था, कोई कीट (कीड़ा) खाने लगा, इसका मतलब है कि उसने पुणे को नष्ट करना शुरू कर दिया है। तो ऐसा तब होता है जब व्यक्ति अहंकारी हो जाता है और सबके सिर पर बैठ जाता है। ऐसा व्यक्ति जो भी भोजन देता है, उसे मत लेना।अब हमारे पास श्रीमती प्रधान है, वह उनमें से एक है। जैसे ही वह बोलती है मुझे लगता है कि मेरे कान में जहर हो गया है। वह बुरी तरह पकड़ी हुई है, उसके परिवार में भूत हैं, उसके बेटे के भी भूत हैं। आपको इसके बारे में पता चल जाएगा, इन चीजों को खुला रखना अच्छा है। पुणे के लोग उसके घर गए और राहुरी से भी और जब वे वापस आए तो वे सब ग्रसित थे। मैंने पूछा “क्या हुआ था? तुम कहां चले गए थे? उन्होंने मुझे बताया कि वे श्रीमती प्रधान के घर गए थे। मैंने पूछा था “तुमने क्या खाया या पिया, उन्होंने मुझे बताया कि उन सभी ने कॉफी पी है, इसलिए मैंने कहा” अभी बाहर जाओ और उन्हें जूता मारो। तो तभी श्रीमती प्रधान ने फोन किया और पूछा, वे खाने के लिए आने वाले थे? मैंने उन लोगों से कहा, जब वो ग्रसित हैं तो तुम्हें पीना भी नहीं चाहिए। जो कोई भी आपको जाने और खाने के लिए बुलाए, बस वायब्रेशन की जांच करें। अब तुम सब संत हो, तुम ऐसा व्यवहार नहीं कर सकते। आप खुद इस स्थिति को अपने ऊपर ले आए, जब वायब्रेशन समाप्त होने लगे तो पता ही नहीं चला कि चक्र कौनसा फंस गया है, उसके जैसे लोग भी उलझ गए (कुलकर्णी के बारे में बात करते हुए) और यह पुण्य का पुणे शहर माना जाता है। अब यहाँ मैं पुणे में एक घर बनाने जा रही हूँ, अब मेरी हालत भी खराब मत करो (वह हंसती है) नहीं तो सब साफ करना होगा। कुछ भी करने से पहले 4 बार सोचे।

वह (श्रीमती गायकवाड़)दिल्ली गई थी और वहां गड़बड़ फैला दी थी और सब को कहा की मैंने उसे ऐसा करने को कहा और उसे एक पत्र लिखा है। मैं उसे जाने और एक पत्र लिखने के लिए क्यों कहूं। उसे कोई चैतन्य नहीं है। वह वहां क्यों गई। हरि के साथ भी ऐसा ही हुआ और उन दोनों की जोड़ी ने वहां इतनी परेशानी और गड़बड़ी पैदा कर दी, माँ और बेटे। इस तरह के लोग जहां भी जाते हैं समस्या खड़ी करते हैं, वे कभी भी स्थिति को बेहतर नहीं बनाते हैं। मुझे दिल्ली से एक पत्र मिला कि इन लोगों ने वहां क्या किया, यह सब हरि का किया धरा है। लेकिन मैं जो कहती हूं वह ऐसा है कि जिसे मैंने नेता बनाया, उसका बेटा गुरु बन गया और उसकी पत्नी नेता बन गई। तो यह क्या है? मैंने मिस्टर गायकवाड़ को नेता बनाया और अगर उन
पर उनकी पत्नी का प्रभुत्व है तो उन्हें नेता होने का कोई अधिकार नहीं है और अगर वह अपनी पत्नी को ठीक कर सकते हैं तो वह नेता के रूप में रह सकते हैं और बेटा वह ठीक है, लेकिन वह भी गया गुज़रा मामलाहै, इसलिए मैं कह रही हूं कि मैं जिसे भी नेता नियुक्त करूं, तुम्हें उसका सम्मान करना चाहिए। तुम्हारी माँ ने कहा तो तुम्हें इसे स्वीकार करना चाहिए। ऐसा मत सोचो कि मैं इन लोगों (अर्थात् पश्चिमी योगी) को डांटती नहीं हूं। मैं हमेशा उन्हें बताती हूं कि उन्होंने क्या गलतियां की हैं लेकिन आपको हमेशा मेरे फैसलों को स्वीकार करना चाहिए। अब वे कह रहे हैं कि ट्रस्टी बनाओ लेकिन यह सिर्फ एक सिरदर्द है लेकिन फिर अधिक समझने की कोशिश करो, सहज योग की इस नाव को अभी भी दूर तक जाना है, और अब जो भी इस नाव पर बैठा है वह नीचे की तरफ कूदना चाहता है, तो मुझ से क्या करने की उम्मीद है?

सो अपने अगुवे की आज्ञा मानो, यदि मैं किसी को अगुवा ठहराऊं, तो उसे मान लेना। अब गायकवाड़, मैं आपके लिए भी एक चैलेंज बता रही हूं। अपनी पत्नी को ठीक करो। उसे सिर पर मत बैठने दो, तो चीजें अच्छी होंगी (?) उसे कोई महत्व मत दो, उसके हाथ का मत खाओ, पहले उसे ठीक होने दो।

अब हमारे पास प्रधान है, वह कभी भी अपनी पत्नी से गोंद की तरह चिपके नहीं रहे, लेकिन यह कहने पर भी कि उनकी पत्नी भयानक है। गाने लगेगी तो सबकी विशुद्धि पकड़ी जाएगी, लेकिन उसे गाना अच्छा लगता है, अब क्या करूं?, जब मैं फोन पर भी बात करती हूं मेरे कान दुखते हैं, तो हम क्या करें? लेकिन प्रधान, उस ने कभी भी उसे सहज योग में सिर उठाने की अनुमती दे कर बिगाड़ा। वह इस तरह सख्त था। मैंने उससे कहा था कि मैं वायब्रेशन के स्तर पर पीड़ित हूं। उसने कहा “हाँ माँ” मैं इसे देख लूंगा। अब तुम लोग उसके घर गए और उसने तुम्हारे लिये कॉफी बनाई। मत बताओ माताजी को कि तुम गए पर मैं माताजी हूँ, तुम नहीं हो। मुझसे अपनी तुलना मत करो, मैं भूतों को खा जाती हूं, मैं श्मशान घाट में भी जा कर बैठ सकती हूं। तो क्या आप भी ऐसा ही करेंगे? तो तुम बहस करने की कोशिश करोगे क्योंकि आप गई थीं इसलिए मैंने ऐसा किया।मेरी आज्ञाकारीता का यह तरीका नहीं है। अगर मैंने तुमसे कहा कि किसी जगह नही जाना, मत जाओ, सावधान रहो! एक दूसरे की आलोचना न करें। यदि आप बाहर के लोगों की आलोचना करने जा रहे हैं। एक संत दूसरे संत की आलोचना नहीं करता। सभी संतों का प्रेम स्वतंत्र रहा है और उन्होने हमेशा दूसरे की महानता को गाया है। संत हमेशा दूसरे की प्रशंसा करेंगे, शैतान भी करेगा। अगर आप न शैतान हैं और न ही संत तो आप एक दूसरे की आलोचना करने लगते हैं..

(तब श्री माताजी पुनः अंग्रेजी में बात करते हैं)।