Sahaj Yogiyon Ko Upadesh

Ganapatipule (भारत)

1988-01-02 Evening Program, Ganapatipule, India, DP-RAW, 210' Chapters: Marathi talk, English Talk, Evening Program, Master is a master
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सहजयोगियों को उपदेश

ORIGINAL TRANSCRIPT HINDI TALK सबसे पहले एक बात समझ लेनी चाहिए कि यहाँ जो बंबई वाले और दिल्ली वाले लोग आये हैं ये मेहमान नहीं हैं। मेहमान जो लोग बाहर से आये हैं वो हैं। बसेस उनके पैसे से आयी हैं। आप तो एक पैसा भी नहीं दे रहे उसके लिए। एक कवडी भी नहीं दे रहे हैं। बसेस उनकी हैं, वो सब बसेस मार कर आप लोग यहाँ आ गये। यहाँ | बसेस छोड़ दिये, वो लोग रास्ते में लटक के खड़े हुए हैं। बजाए इसके कि आप उन लोगों का खयाल करें, आप हैं और यहाँ बसेस आराम से यहाँ पहुँच गये। आके आराम से यहाँ बैठ गये हो । और आधे लोग रस्ते में बैठे हुए सड़ रही हैं। आप लोग यहाँ मेहमान के रूप में नहीं आयें, कृपया ध्यान दीजिए । ये अपनी आदतें आप बदलिये। आप यहाँ पर आये हैं सेवा करने के लिए और ये बाहर के जो लोग आये हैं ये मेहमान हैं। आप जिस चाहे बस में चढ़ जाते हैं, जैसे कि आपने बस ली है किराये से। पिछली मर्तबा ४५,००० रू. मैंने भरा आप लोगों के बस में | चढ़ने का। बेहतर है आप सब लोग पैदल आईये और नहीं तो एक चीज़ हो सकती है कि एक बस है सिर्फ आप के लिए। किसी भी टाइम में आप लोग निकलते हैं। आपको कोई टाइम नहीं है, कुछ नहीं है, एक ही बस आयेगी और | वो बस दो मर्तबा आयेगी और उसी बस में आपको बैठने को मिलेगा और किसी बस में आप बैठ नहीं सकते। समझ गये आप! आप तो आराम से बैठ गये और सब लोग वहाँ लटके खड़े हैं अच्छी बात है? उनकी बसेस हैं। उन्होंने इतने पैसे दिये है। इसलिये आज बसेस हैं। उनकी वजह से आज सहजयोग चल रहा है।अब सारी बसेस है भेज दीजिए। एक बस है उसका नंबर यहाँ पे बताया जाएगा । और कोई दूसरे बस में हिन्दुस्थानी आदमी नहीं बैठेगा। एक बस आपके लिए है। वो जाएगी, आएगी, जाएगी, आएगी और अगर आप तैयार नहीं है तो पैदल आईये । यहाँ कोई बस चौबीस घंटे के लिए नहीं लगा सकते। हालांकि हमने इसका इंतजाम कर दिया है। चलो, ठीक है। लेकिन इसका ये तो मतलब नहीं की आप जब इत्मिनान से जब चाहे, जिस वख्त उठे, राजासाहब जैसे, उनकी बसेस लगी चले आयें। ये तो ऐसे हुआ कि दुसरी गाडी मारी और चले आयें। अब एक ही बस आपके लिए है। वो वहाँ जायेगी और आयेगी । अब सबेरे के टाइम, आप लोगों को, ये लोग सबेरे उठ कर ध्यान करते हैं। उनसे कुछ सीखिए। एक तो इनसे सीखना चाहिए कि कायदा-कानून, डिसिप्लिन उनमें कितना है। दुसरी बात ये है कि वो आपका आराम देखते हैं, उनका नहीं देखते। एक बस आपके लिए तय कर ली, बस। उससे ज्यादा हम दे नहीं सकते हैं। पैसा कौन देगा। एक बस का आपको हम नंबर बतायेंगे। वो बस आगे जायेगी, आयेगी । नहीं तो आप पैदल आईये। कौनसी आफ़त है। चलिये थोड़ा, अच्छा है सेहत के लिए। सबेरे के वख्त बस आयेगी। हम चाह रहे हैं कि | सबेरे के बस के वख्त में आप वहीं रहिये। वहीं आप नहा, धो कर तैयार हो जाईये। और वही आपके लिए नाश्ता आ जाएगा। या आप अगर चाहें तो यहाँ आ जाईये। एक बस में, आप ज़्यादा लोग नहीं है, ११० लोग हैं आप सिर्फ। दो बस में आप आ सकते हैं। एक बार बस जायेगी, आ जायेगी, फिर आप जायेंगे, फिर आ जाना। बाकी প ন

Original Transcript : Hindi बसेस को आप मत छुईये। उन सबका मुझे पैसा देना पड़ेगा। आप लोग देंगे क्या ४५,००० रुपया| आपसे किसने कहा इन बसेस में बैठने के लिए। आप उस बस में चढ़ के चले आयें। कोई कायदा-कानून होना चाहिए। पूछना चाहिए कौनसी बस में जायें, कौन से में नहीं जायें ।। अब आप मेहेरबानी करिए, अब सिर्फ जो बस आपके लिए है उसी बस में आप सबेरे के वख्त बैठिये, यहाँ आईये, आपका वहीं नाश्ता आ जाएगा। लेकिन नवाब के जैसे रहने की जरूरत नहीं। सबेरे झट से उठ के नहा-धो लिया, ध्यान कर लिया और ध्यान के बाद में वहीं नाश्ता आ जाएगा। वो नाश्ता आपको साढ़े आठ बजे वहीं मिल जाएगा। ८.३० से ९.३० तक आप वहाँ पर नाश्ता कर के और एक बस है और अगर आप उस बस में नहीं आ सकते तो पैदल आईये मेहेरबानी कर के। बंबई के लोग, पुणे के लोग और दिल्ली के लोग, पुणे और बंबई के लोग तो मालगूंड में रह रहे हैं। आप लोग वहाँ रह रहे हैं कबूल। लेकिन इसका मतलब नहीं कि उनकी बसेस ले के चले आयें आराम से। चाहिये कि कौनसी बस हमारी हैं पूछना और कौनसी बस से हम आयें, पहली बात। दूसरी, कौन से टाइम पे आना चाहिए। अभी वो लोग सब लटके चार घण्टे से बैठे हैं। किसी ने पूछा भी नहीं कि वो लोग आये की नहीं आये? चार घण्टे से वो लोग खड़े हुए हैं। आप बैठ गये। आपको मतलब ही नहीं किसी से। आराम से आ के यहाँ जम गये। आप लोग यहाँ मेहमान नहीं हैं। ये आपका देश है हिन्दुस्थान। यहाँ पर बाहर से लोग आये हुए हैं। हिन्दुस्थान में आप हैं और हिन्दुस्थान के किनारे पर, अभी तक समुद्र में उतरे नहीं। समझ गये न आप! मेहेरबानी करिये, मुझे बड़ा दुःख लगता है सोच कर कि ये लोग बिचारे लटके हुए हैं, चार घण्टे से खड़े हैं। आप लोग पहले चले, घूस घूस के चलो, चलो जल्दी चलो। वो कह रहे हैं, की सब लोग घूस गयें पहले ही, हम क्या करें, जंगली के जैसे। हम लोग सहजयोगी हैं। रास्ते पर के कोई वो तो नहीं, भिखारी लोग । कायदा-कानून कुछ न कुछ होना चाहिए। अब मेहेरबानी से आप लोग किसी के बस में नहीं चढ़ने वाले, सिर्फ आपकी ही एक बस है। एक तो हम ऐसी जगह आये हैं, जहाँ कुछ भी नहीं मिलता है। न कोई खाने-पीने की चीज़ें मिलती हैं न कुछ। सब चीज़ें कोल्हापूर से आ रही है। इसलिये यहाँ आये हैं कि ये हमारे लिए यात्रा है, क्षेत्र में हम आये हुए हैं। और इस जगह हम लोग मेहमान नहीं हैं। ये लोग मेहमान है। वैसे भी मैं देखती हैँ, दिल्ली वाले और बम्बई वाले सामने बैठ जाएंगे, वो लोग अपने पीछे में बैठे हैं। भाई, ये कोई तरीका होता है मेहमानों के साथ ये करने का, व्यवहार करने का? सबसे पहले हम लोग बैठ गये। खाना सबसे पहले हम खाएंगे। वो लोग बाद में खाएंगे । ये कोई तरीका होता है? हम लोग तो मशहूर है दुनिया में मेहमाननवाजी के लिए, तौर-तरीके के लिए। हम लोगों को दुनिया मानती है इस चीज़ के लिए। लेकिन सहजयोग में आते ही उल्टी खोपड़ी क्यों हो जाती है? कल से कायदे से आप लोग बिल्कुल इन के उपर आक्रमण नहीं करने वाले, किसी भी तरह का। और न ही इनके बसेस में घुसने वाले। सिर्फ आपके लिए एक बस रखी है, उनमें आप आईये। नहीं तो मेरे पास उनको इतना देने के लिए पैसा नहीं है। बहुत कुछ सीखने का, यहाँ आप सीखने के लिए आये हैं। अपनी जान बचाने के लिए नहीं आये हैं। पैदल | चलने में क्या हर्ज है, जवान लोगों को? थोड़े पैदल चले तो क्या हर्ज हो जायेगा? आप लोगों के वहाँ नखरे ही नहीं मिलते, सुनते हैं कि एक आदमी, औरतों को तैयार होने में ही चार-चार घण्टे लग रहे है । एक बस रखिए । 3

Original Transcript : Hindi उसमें, एक ही बस आपके लिए है। उस बस से सब लोग आयें और सब लोग जायें। नहीं तो हम चाहते तो हम और कहीं आपको रखते। अच्छा रहता । कल हम सोच ही रहे हैं कि आप लोगों कहीं और रखा जाए। जिससे ये तकलीफ़ नहीं होगी। उनके बसेस उनके लिए है । रहने दीजिए वो आके पड़ी हुई हैं यहाँ बस| वो लोग रस्ते में लटके, चार घण्टे से बैठे हैं। ये कोई अच्छी बात तो नहीं है। पैसे बिचारे देते हैं। उनके पैसे के दम पर सहजयोग चल रहा है। आप जानते हैं। और इन लोग सबको बता रहे थे कि वहाँ से सब ढकेल-ढुकेल के ये लोग बैठ गये आगे । हम लोगों का जगह ही नहीं मिली। और बसेस आ के यहाँ रोक ली और ये भी नहीं सोचा की बसेस वापस गयी की नहीं। वो लोग खड़े हैं वहाँ । अब देखिये, सारी बसेस यहीं पे खड़ी हुई हैं। आ कर बैठ गये आराम से यहाँ पर सब । दिल्ली वाले, बम्बई वाले, पूना वाले। मुझे दुःख ये लगता है, कि ये लोग इतने दुर से आये हैं बिचारे ये सारा महिनाभर प्रवास करते रहे। तकलीफें उठाई हैं। आरामपसंदगी जो है ये सहजयोग का लक्षण नहीं है । जो आदमी आरामपसंद है वो सहजयोगी हो ही नहीं सकता। फिर वो बताएंगे कि हम आये, तो इतनी देर हमको तकलीफ़ हुई, फिर ये हुआ। जो आदमी को तकलीफ़ होती है वो सहजयोगी नहीं है। सहजयोग में आत्मा का आनन्द हैं, उसका आराम है, उसका सुख है। उसके लिए कोई तकलीफ़ नहीं होनी चाहिए। कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। उसी के आनन्द में विभोर रहना चाहिए। मैंने की बहुत झगड़े हो रहे हैं कि कौन डॉर्मेटरी में रहेगा , कोई कहाँ रहेगा , कौन कहाँ रहेगा। ये तो गलत बात है। सुना कम से कम अब जो लोग टेंट में हैं, उनमें से अगर कोई बुजुर्ग हो तो ठीक है। उनको डॉर्मेटरी में जाने दीजिए, बाकी आप यहीं रहिए। अगर आपका शरीर आपको सताता है तो उसको ठिकाने लगाईये। उसको समझाना होगा। कोई आपको मैं हिमालय पे जाने के लिए नहीं कह रही हूँ कि ठंडी हवा में जा कर के आप वहाँ नंगे बदन, आप एक पॉँव पर खड़े होईये, इतनी बात नहीं। लेकिन शरीर के चोचले चलाना बेकार के, सहजयोग में नहीं हो सकता और नहीं होने चाहिए । ऐसी कोई आफ़त नहीं। आप कहीं और जगह जाईये, शत्नोदेवी जाईये, कोई जगह जाईये चढ़ना पड़ता है आपको। सात-सात मील, उसके लिए ठीक है। शरीर को थोड़ासा श्रम देने से कोई आफ़त नहीं आने वाली। और कोई बड़ी भारी श्रम की बात भी नहीं है। अच्छी ठण्डी हवा चल रही है । चले आये टहलते टहलते। और इतनी ज़्यादा तैयारी करने की, इतने सजने-धजने की कोई ज़रूरत नहीं है। आज कोई पूजा नहीं है, कुछ नहीं है, समझ में नहीं आता। वो कह रहे हैं कि कोई भी आदमी टाइम से नहीं आता है। खड़े हैं बस वाले वहाँ। एक भी अभी चढ़ नहीं रहा । ये तो गलत बात है। सामूहिकता कम है, इसलिए ऐसा होता है। अब आपके लिए आपने कहा कि हम एक तारीख को आना चाहते हैं। तो आईये सर आँखों पर आईये। पर इसका मतलब नहीं है कि आप मेहमान होकर आयें। एक तारीख को आये हैं तो व्यवस्था आप करिये। देखिये , क्या हो रहा है? क्या नहीं? आप क्या मदद कर सकते हैं? आप लोगों से कहीं कहीं अधिक इन लोगों ने रुपया दिया हुआ है। और इस बार आठ लाख करीब पैसा बच जाएगा। हर साल इन्ही के पैसे से हम लोगों को फायदे हुए हैं। ये मैं नहीं कहती कि पैसा ही सब कुछ है। पर ये मेहमान हैं। कल अगर आप इनके देश में जाएंगे तो ये कभी ऐसा नहीं करेंगे। आपकी व्यवस्था पहले करेंगे। सब लोग के चले आयें। कल सबेरे, आप लोग सब सबेरे उठ के घुस और आठ बजे तक ध्यान में जायें। ८ से ९ बजे तक ध्यान होने के बाद नौ बजे आपको वहाँ पर नाश्ता मिलेगा। 4

Original Transcript : Hindi अब ये नहीं कि एक बैठे है, दो नहीं बैठे हैं। जिसको नौ बजे वहाँ नहीं आयेगा , उसको नाश्ता नहीं मिलेगा । यहाँ से | नाश्ता वहाँ चला जाएगा। उसके बाद दस बजे तक आप लोग यहाँ तशरीफ़ ले आये। नौ से दस तक आपको टाइम है, आप तब तक नाश्ता कर ले। सब कुछ कर के आप दस बजे वहाँ से चल दे। आपके लिए एक बस हैं। वही बस आयेगी । उससे आप यहाँ पहुँच जाईये। फिर वो बस हम वापस कर देंगे , फिर उससे आप यहाँ आईये। इस तरह से एक ही बस से आप आईये और जाईये। छः बस का पैसा हम लोग नहीं दे सकते। पे उसमें भी और बात है। ग्यारह घण्टे से ज्यादा अगर किसी ड्राइवर काम पड़ा तो उसका डबल पैसा देना पड़ता है। यहाँ पर प्रोग्राम कल से ग्यारह बजे शुरू होगा। ग्यारह बजे सब लोग पहुँच जायें । ग्यारह बजे से एक बजे तक यहाँ प्रोग्राम होगा। उसमें जो भी हम करे, भाषण दे, जो भी करे, करें। कल से ठीक से प्रोग्राम शुरू हो जाएगा । 6. और उसके बाद आपको जरूरत नहीं कि आप जायें । यहीं आप खाना खाईये। और चाहे तो यहीं लेट जाईये। चाय वाय पी के आप चले जाईये। चाय पी कर आप जाईये वहाँ। तैयार हो जाईये शाम के वक्त में और उसके बाद आप वहाँ से, करीबन छ: बजे के करीब, आप चल दीजिए। छः-साढ़े छः। तो यहाँ पर आपका प्रोग्राम छ: बजे से शुरू होगा। छः, सात, ऑठ बजे तक और उसके बाद में नौ बजे तक, साढ़े नौ बजे तक चाहे दस बजे तक आपका खाना-पीना हो के दो घण्टे का म्युझिक प्रोग्राम होगा। इस तरह की व्यवस्था है। है। ज्यादा से ज्यादा यहाँ से वहाँ चल के जाने में आधा घण्टा लगेगा लेकिन अब इस प्रकार काम हो सकता हम लोगों को कुर्सियों की आदत हो गयी, हम चल ही नहीं सकते इतना। बहरहाल मैं नहीं कह रही हूैँ आप चलिये। पर कम से कम ये तो समझ लीजिये की आप हर एक बस में बैठ जायें, तो मेरी तो हालत खराब हो जायेगी। पिछली मर्तबा यही सब कर के बड़े आाफ़त में डाल दिया मुझे। गाडी का नंबर है ७९६५, ड्राइवरसाब का नाम है, मि.पाटील। (ड्राइवर को-तुम्ही आपल्या गाडीत इंडियन्सना घेऊन यायचं, इंडियन्सना आणायचं. त्यांच्या दोन किंवा तीन ट्रीप करायच्या जास्त नाही आणि तुमच्याच गाडीमध्ये इथून ब्रेकफास्ट जाईल. ब्रेकफास्ट झाल्यानंतर तिथेच रहा तुम्ही फक्त इंडियन्सना आणायचं. बरं का! आणि बाकीच्या ड्रायव्हर्सना सांगायचं एकाही इंडियनला घ्यायचंच नाही गाडीमध्ये. कळलं का ? जास्त पैसे द्यावे लागतील आम्हाला.) अब हमें नाराज नहीं करना चाहिए। प्रसन्न करना चाहिए देवी को। प्रसन्न रखना चाहिए और प्रसन्नता होती है मनुष्य में जब तपस्विता आती है। आरामदेह लोग सहजयोग नहीं कर सकते। झगड़ा कर सकते हैं, ऑग्ग्युमेंट कर सकते हैं, बकवास कर सकते हैं, सब तरह की लांछनास्पद बाते कर सकते हैं । लेकिन आरामदेह लोग जो होते हैं सहजयोग नहीं कर सकते। आप लोगों को यहाँ आने के बाद यहीं रहना चाहिए। खाना खाने के बाद यहीं लेट जाईये। चाय पीना हो तो, क्योंकि अब चाय ले कर कौन भागेगा ? तो ये कह रहे हैं कि यहाँ खाना खा के एक बस है वो आपको ले जायेगी, वही बस दसरी पार्टी को ले जायेगी। और उसी के साथ वो चाय भी भेज देंगे । फिर आप वहाँ चाय पी लीजिये। और चाय पीने के बाद उसी बस से आप लोग आईये। और मेरी ताकीद है कि कोई भी इन्सान जो कि हिन्दुस्थानी है, उसको कायदे से एक ही बस में आना चाहिए । नहीं तो ये लोग कल रिपोर्ट करेंगे और बहुत रुपया देना पड़ेगा। ये भी तो आप ही के बस वाले हैं। और आप ही की सरकार हैं और आप ही का खर्चा है। 5

Original Transcript : Hindi इतना बड़ा बड़ा खर्चा मुझे बता देते हैं मैं क्या करू? समझ गये। अब मेहेरबानी करिये, अपने मन से किसी भी बस में बैठने का आपको अधिकार नहीं है। सिर्फ एक बस आपके लिए तय कर ली। उसी का पैसा हम दे देंगे। आपको नहीं देना है तो मत दो। एक बस, समझे ना आप। इनसे कोई एक रुपया लेने की जरूरत नहीं। बेकार है। वो हिसाब हम कर लेंगे। लेकिन जो लोग बस में नहीं आयें वो वहीं रह जाए। वो दुसरे की बस में नहीं आयें, मेहेरबानी करें। एक भी आदमी अगर दूसरे बस में बैठेगा, उसका मुझे बहुत कुछ देना पड़ता है। इसलिए आप मेरे उपर मेहेरबानी करें। पिछली मर्तबे भी ऐसा हुआ था, इस मर्तबा भी ऐसा हो रहा है। जो बुजुर्ग लोग हैं उनको चाहिए कि वो डॉमेटरी में शिफ्ट हो जाए, जहाँ भी जाना है और जो लोग आ रहे हैं वो भी डॉर्मेटरी में रहेंगे। वहाँ पर एक बस रहेगी आपके लिए । उससे आप आईये, जाईये, एक बस काफ़ी है। दिल्ली में भी लाइन से खड़े रहते हैं घंटो। यहाँ पर क्या नवाब साहबी आ गयी क्या? अच्छा, अब जो भी हो, आज अच्छी शुरुआत नहीं हुई। मुझे बहुत दु:ख हो रहा है। बिचारे चार घंटे से वहाँ लटक के खड़े हो गये है। किसी को आपने आने नहीं दिया, और न यहाँ ला कर बस छोड दी। बड़े दःख की बात है। इसलिए आप मन में अब माफी माँगे। और कहिए कि, ‘अगले वख्त से ऐसा काम नहीं करेंगे माँ, ये बड़ी गलत बात हो गयी और इससे बड़ा दुःख होता है। अब अगले प्रोग्राम मैं आपको बताती हैँ। जिसको आप सुन लीजिए। अगले प्रोग्राम में, हम लोगों का प्रोग्राम जो है वो इसी प्रकार होगा जैसे मैंने कहा। सबेरे उठ के मेडिटेशन होगा, फिर आप यहाँ ग्यारह बजे तक आ जाईये। नाश्ता कर के आप यहाँ पहुँच जाईये ओऔर खाना होने तक आप यहाँ रहिये। उसके बाद जाईये, आप आराम करिये, उसके बाद चाय पीजिए और चाय पी कर के और आप फिर से शाम को यहाँ पर आते वक्त याद रखिये की यहाँ छ: बजे तक पहुँच जाना है। तो वहाँ बस आयेगी। पहले बस से छ: बजे आ जाना, फिर दूसरे बस से आ जाना। फिर हम लोग छ:-साढ़े छ: से यहाँ प्रोग्राम में यहाँ शुरू करें। वैसे टाइम ज़्यादा नहीं लगता है। सिर्फ बात ये है कि उसकी परवाह नहीं है आपको। उनकी परवाह करनी चाहिए । पूछना चाहिए, आपने चाय पानी लिया या नहीं लिया। और कल से इसी तरह प्रोग्राम होगा। कल तीन तारीख को और भी लोग आ रहे हैं और तीन तारीख को जिन लोगों को शिफ्ट करना है उनको शिफ्ट कर दिया जाएगा। और आप लोगों के भी जो तंबू है वो यहाँ ला के लगा दिये जाएंगे। इसलिए बेहतर होगा कि आप लोग कल यहाँ पर चाय के बाद, नाश्ते के बाद वहीं रहें। क्योंकि आपके तंबु वहाँ से हटने वाले हैं और आपका जो सामान है, जैसे ये लोग आये परदेसी, तो ये सब सामान अपने हाथ में उठा के ले आये। आप लोगों के लिए टेंपो लाना पड़ा। क्योंकि आप लोग तो हाथ में कभी सामान उठाते नहीं। आज तक तो कभी किया ही नहीं। कुली थोडे ही है। सब हमारे यहाँ तो प्राइम मिनिस्टर है। तो उसके लिए भी आप लोग वो एक जो बस है, बस में आप सामान डाल के इधर ले आयें । यहाँ पर तंबू गाड़ दिये जाएंगी| तंबू कल उघाड़ दिये जाएंगे सबेरे । जब आप मेडिटेशन में जाएंगे उससे पहले तंबू उखाड़ कर के इधर लगा दिये जाएंगे , जिससे आपको बाथरूम की भी सहलियत हो जाएगी। और सारा इंतजाम हो जाएगा। तो यहाँ से खाना खाने के बाद यहाँ से जा कर के वहाँ रहिये। आपका जो सामान है, वो सामान जो है उसको आप को पहुँचाना होगा उन तंबुओं में खाना खाने को जाने से पहले। सो, कल सबेरे के प्रोग्राम

Original Transcript : Hindi में आप लोग एक ही प्रोग्राम करें कि अपनी व्यवस्था वहाँ से हटा कर के तंबुओं में करें। सो, कल सबेरे उठते ही आप लोगों का एक काम होगा की ये लोग जो भी चाहे करें, क्योंकि वो वहीं स्थित हैं, अपना सब सामान बाँध लें, सब ठीक-ठाक कर लें और तैयारी में रहें। कल तंबू गिराये जाएंगे और तंबू इधर डाल दिये जाएंगे। और इस जगह आपका इंतजाम हो जाएगा , जहाँ बाथरूम्स बहुत सारे हैं, आप को परेशानी नहीं होगी। सिर्फ आपको अपना सामान उठा के इधर लाना है। वो आप उठा सकते हैं कि नहीं उठा सकते। अच्छा हाथ उठाओ, जो जो उठा सकते हैं। बस दो ही आदमी, और कोई नहीं। औरतें क्या नहीं उठायेंगी। चलो उठा के लाओ। कोई इंतजाम ही नहीं ना यहाँ पे। सामान उठाने का कोई इंतजाम ही नहीं है, तो क्या किया जाए? तो एक टेंपो आ जायेगा। जो लोग बिल्कुल ही नहीं उठा सकेंगे उनके लिए एक टेंपो आ जाएगा। ऐसे ही फाँरेनर्स भी आपकी मदद कर देंगे। (फारेनर्स को बिनती) 7