Birthday Felicitations

New Delhi (भारत)

2000-03-22 Birthday Felicitations, 155' Playlist: Concert 55' English Talk 27' Hindi Talk 2'Download subtitles: EN,TRView subtitles: Add subtitles: Download video (full quality): Listen on Soundcloud: Transcribe/Translate oTranscribe


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Birthday Felicitations (English part), Delhi (India), 22 March 2000.

HINDI TRANSLATION (English Talk) Scanned from Hindi Chaitanya Lahari

है कि किस प्रकार इन लोगों ने विश्व के हजारों सम्माननीय अतिथिगण, सम्माननीय गृहमन्तरी श्री आडवाणी जी. जो कि महान देशभक्त रहे हैं लोगों को आत्मसाक्षात्कार की ज्योति प्रदान की! और उनके देश प्रेम के कारण जिनकी मैं सदैव प्रशंसक रही हूँ। वे अत्यन्त देशभक्त हैं और तरह से कार्य नहीं कर रही। जिस प्रकार ये आप जानते हैं मेरे माता-पिता भी अत्यन्त देशभक्त बधाई सन्देश हमें आए हैं, आप देख ही रहे हैं. थे उन्होंने देश के लिए अपना सर्वस्व बलिदान ये सब इनके प्रयासों का फल है सहजयोगी वास्तव में यही लोग कार्य कर रहे हैं। मैं उनकी कर दिया। देशभक्त होने के कारण उसे समय उनसे मिलते हैं उन्हें सहजयोग के विषय में सबने मेरी भी बहुत भत्संना की। जिस देश में बताते हैं और उन्हें आत्मसाक्षात्कार भी देते हैं। इस प्रकार से इन्होंने इस कार्य को किया है। अतः हमें अपने देश और उसकी गहन सम्बन्ध है। मैने देखा है कि सहजयोग में समस्याओं के विषय में चिन्ता करनी चाहिए। ये आत्मसाक्षात्कार प्राप्त करके परिवर्तित होने के समस्याएं क्यों है? मैं जानती हूँ कि आपकी कामनाएं और प्रयत्न निश्चित रूप से आपके कमी है। सहजयोगी उन कमियों के विषय में देश की स्थिति को सुधारेंगे हर जगह ये घटित बहुत जागरूक हो जाते हैं । मैं हैरान हूँ कि सभी हो रहा है। भारत में भी ये घटित होना चाहिए। मुझे बताते हैं कि उनक दश में क्या कमी है आत्मसाक्षात्कार प्राप्त करने के पश्चात् यह हमारा हम जन्म लेते हैं उससे हमें अवश्य प्रेम करना चाहिए। आपके देश और आपकी आत्मा का पश्चात् लोग जान जाते हैं कि उनक देश में क्या महत्वपूर्ण कर्त्तव्य बनता है कि सर्वप्रथम हम उन्होंने कभी अपने देश की गलतियों तथा अपने समाज को देखें, अपने देश को देखें। आप बुराइयों का साथ नहीं दिया। यह बहुत हैरानी की यदि ऐसा नहीं करते तो आत्मसाक्षात्कार प्राप्त बात है इसके विपरोत उन्होंने कहा कि श्रीमाताजी करने का क्या लाभ है? क्योंकि आत्मसाक्षात्कार एक शक्ति पर आधारित है प्रेम की शक्ति पर तथा एक कला पर आधारित है-निर्वाज्य प्रेम की सुधरने चाहिए; वहाँ के नागरिक सुधरने चाहिए कला। ज्यों ही आप अपने आस-पास के लोगों ताकि वे एक नव-चेतना में उन्नत हो सकें। को, गाँव के लोगों को, आस-पड़ोस के लोगों सभी सहजयोगी इस कार्य में जुटे हैं यहाँ हमारे को अपने नगर के तथा देश के लोगों को देखने सम्मुख विदेशों से आए बहुत कम सहजयोगी हैं। लगते हैं तुरन्त यह निस्वार्थ प्रेम शुरू हो जाता है । तुरन्त आप समझने लगते हैं कि आपके अपने और उसके विषय में क्या किया जाना चाहिए। इन सब देशों को आपकी कृपा की आवश्यकतां ममों है ताकि ये सुधर सकें। वहाँ के राजनीतिज्ञ परन्तु मैं आपकी बताऊंगी कि ये हैरानी की बात

Hindi Translation (English Talk) समाज में क्या समस्याएं हैं। मैंने देखा है कि भी मिलती है आनन्द भी। सहजयोग में आने के पश्चात् लोग अपने समाज के बहुत से दोषों को दूर करने की कोशिश उसके लिए कृपा करके मुझे क्षमा कर दें। मैंने करते हैं। सहजयोग में बहुत से हिन्दू हैं. मुसलमान हैं. इसाई हैं और सभी प्रकार के लोग हैं। परन्तु श्रीमाताजी भूतकाल में मैंने जो भी कुछ किया ” कहा, “क्षमा किया। वर्तमान ही महत्वपूर्ण है और अब तो आप सहजयोगी वत गए हैं। जिस प्रकार आपने मैं एक चीज पर हैरान थी कि आत्मसाक्षात्कार प्राप्त करने के पश्चात् उन्होंने कभी अपने समाज की और धर्म की बुराइयों का साथ नहीं दिया। है वह कहने लगा.” अब मेरे अन्दर शान्ति है, इसके विपरीत उन्होंने इन बुराइयों को सुधारना आध्यात्मिक उत्थान प्राप्त किया है वह प्रशंसनीय आनन्द है और इसे बाँटने के लिए मै अन्य लोगों के पास गया। अपना धन मैं कभी दूसरों के साथ नहीं बाँट सकता था। मैं तो दूसरों से धन छीन लिया करता था।” मैने कहा” मुझे अपराध चाहा और इसके लिए कार्य करना चाहा। इस कार्य को करने का बहुत आसान तरीका है। लोगों को परिवर्तित करने के लिए न तो आपको मर्यादाएं तोड़नी पड़ती हैं न कोई स्वीकृतियों की आवश्यकता नहीं है, सब हो बलिदान करने पड़ते हैं ऐसा कुछ भी नहीं करना गया। सहजयोगी होकर अब आप क्या करेंगे? पड़ता। आज हर व्यक्ति किसी न किसी प्रकार आश्चर्य की बात थी कि वह इतना प्रेममय था। की चिन्ता या समस्या से परेशान है। उन्हें और कहने लगा मैं भारत प्याज भेजूंगा। मैंने कहा. भी समस्याएं हैं। आपको उन्हें बताना होगा कि क्यों? उसने उत्तर दिया. क्योंकि वहाँ घ्याजों का अभाव है। मैंने सोचा इस व्यक्ति को देखो यह कितना सच्चा और मानवीय बन गया है! मैंने कहा ऐसी कोई समस्या नहीं है तुम चिन्ता मत करो। चीजों की ओर देखने का उसका नजरिया स आपका जीवन इस प्रकार से परिवर्तित हो सकता है कि आप इन सब चिन्ताओं से, इन सब समस्याओं से ऊपर उठ जाएंगे। आप पूछ सकते हैं कि ऐसा कैसे हो सकता है। जब आप आत्मसाक्षात्कार प्राप्त करते हैं तो आपका चित्त इतना अच्छा था कि जो व्यक्ति माफिए का आत्मा के प्रकाश से ज्योतिर्मय हो उठता है और मुखिया था वह अत्यन्त अच्छा और सम्माननीय स्वत: ही आप अपनी विनाशकारी आदतों विचारों बन गया था तब उसने नगर पालिका के चुनाव तथा गतिविधियों को त्यागने लगते हैं। अचानक लड़ने चाहे। मैंने कहा अवश्य लड़ो, आप चुने आप सृजनात्मक हो जाते हैं। रूस में जब मैं जाओगे, और यदि न भी चुने गए तो कोई बात तलियाती में थी तो आश्चर्यचकित करने वाली नहीं। परन्तु वह चुनाव जीत गया। एक खबर मुझे मिली कि वहाँ के माफ़िये का मुखिया सहजयोगी बन गया है। इसने मुझे बहुत अत: आप देखें कि आत्मा बन जाने की इच्छा करने वाले व्यक्ति के कार्य किस प्रकार हो जाते हैं । शिवाजी वावा” भविष्य के लिए सन्देश दिया है स्व धर्म जाग वावा अर्थात आत्मा की जागृति। आप आत्मा को जागृत कर द्रवित किया। वह व्यक्ति मेरे पास आया और ने कहा है, स्व धर्म जाग कहने लगा कि मैं ये सब उल्टे सीधे कार्य करता रहा हूँ। इनसे न मुझे कभी सन्तुष्टि मिली न कभी आनन्द। परन्तु सहजयोग से मुझे सन्तुष्टि उन्होंने केवल यही 8. “टि

Hindi Translation (English Talk) लेते हैं और यही उपलब्धि हमें प्राप्त करनी है। क्यों? क्योंकि हममें स्पर्धा की भावना नहीं है शिवाजी क्योंकि स्वयं आत्मसाक्षात्कारी थे इसीलिए इसीलिए सभी लोग हमसे प्रसन्न हैं वास्तविकता उन्होंने कहा कि आपको भी यही करना है, यही है कि जब आप ये महसूस कर लेते हैं कि अपनी आत्मा को जागृत करना है। आत्मा के उस प्रकाश से क्या होता है? आपके समाज में आपको चिन्ता करने की कोई आवश्यकता नहीं क्या दोष हैं? आपके देश में कया दोष हैं? आप क्योंकि सन्तोष तो आपक अन्तर्निहित है। आप हर चीज़ को बहुत स्पष्टत: देखते हैं और आपमें अपने अन्दर इतने शान्त हैं कि भौतिक चीजों के इसे ठीक करने की शक्ति भी हैं । अपनी शक्ति पीछे नहीं भागते। आधुनिक अर्थशास्त्र एक साधारण के प्रति यदि आप जागरूक हैं और इस पर उच्च पद, वैभव, सम्पत्तियाँ पाने के विषय ट तथ्य पर आधारित है कि मानव कभी सन्तुष्ट सम नहीं होता। आज उन्हें एक चीज़ की आवश्यकता स्वामित्व भी आपने प्राप्त किया है तब आप यह न केवल अपने है, सभी कुछ करेंगे और इसे प्राप्त करने के लिए धन खर्चेगे फिर भी सन्तुष्ट न हो पाएगे। कार्य कर सकते हैं। ऐसा आप लिए कर सकते हैं. अपितु अपने परिवार अपने समाज तथा अन्य सभी लोगों के लिए कर सकते किसी और चौज की इच्छा भड़क उठेगी अर्थशास्त्र हैं। मेरे पति कहा करते थे कि तुम समाजवादी हो क्योंकि तुम अकेले चैन से नहीं रह सकते। आधुनिक अर्थशास्त्र। परन्तु सहजयोग भिन्न है. दूसरों के साथ बाँटना तुम्हारे लिए आवश्यक है, सहजयोग का अर्थशास्त्र कहता है कि मुझे तुम सामूहिक हो। हमें समझ लेना चाहिए कि हम सामूहिक हैं। कहीं भी हम अकेले जीवित लोगों में इसे बाँटना है यदि मुझे सन्तोष प्राप्त नहीं रह सकते हम सभी सामूहिक हैं इस बात का हमें ज्ञान नहीं है। जब आपको इसका ज्ञान का यही आधार है, कहने का अभिप्राय है आत्मसाक्षात्कार प्राप्त हो गया है अब मुझे अन्य हुआ है तो अन्य लोगों के साथ भी इसका बाँटा जाना आवश्यक है। सहजयोग में बाँटना अत्यन्त महत्वपूर्ण है हो जाएगा तो आप आश्चर्य चकित होंगे कि आप पूर्ण के अंग-प्रत्यंग हैं अपने समाज में आपको और लोग इस कार्य को बखूबी कर रहे हैं। उस साथी नहीं खोजने पड़ेंगे कुछ भी नहीं आप केवल सहजयोगियों का साथ ही चाहेंगे यह बात पूर्णतः प्रमाणित हो चुको है कि यदि आप बातें कह सकते हैं, प्रेम से लोगों को कुछ दे आध्यात्मिक रूप से जागृत हैं तो आपका किसी सकते हैं उनके साथ कुछ बांट सकते हैं तो यह के साथ कोई झगड़ा नहीं होता, किसी से कोई कार्य बहुत सहज है। ऐसा करना आपके लिए घृणा नहीं होती, किसी से आपकी कोई स्पर्धा कठिन नहीं है क्योंकि आपके पास आनन्द प्रदान नहीं रहती । सहजयोग में मैंने ऐसा किसी को करने के लिए करते नहीं देखा। यही कारण है कि आप दिन मैंने आपको बताया था कि हमें प्रेम करने की कला सीखनी चाहिए। यदि आप कुछ मधुर आपकी आत्मा हैं मैं जानती हूँ कि सहजयोग ने बहुत से चमत्कार किए हैं। रातोंरात लोगों ने नशे छोड़ दिए। अब अमेरिका में हमसे एक नशा उन्मूलन संस्था आरम्भ करने के लिए कहा गया है और सहजयोगियों ने कहा हुए सब लोगों के लिए बाहर की चीजें इतनी अच्छी हो गई हैं। एक महिला राजदूत ने मुझे बताया कि श्रीमाताजी हम बहुत प्रसन्न हैं, मैंने पूछा

Hindi Translation (English Talk) कि हमारे पास दस लाख डॉलर हैं। क्या इतने ज्योतिर्मय हो उठेगा। अपने धर्म के सौन्दर्य को पैसे से हम ये कार्य कर सकेंगे? उन्होंने कहा वे देखेंगे। अपने धर्म की एकरूपता को वे देखेंगे नहीं, नहीं, हम आपको दो सौ दस लाख डॉलर और इस प्रकार एक सार्वभौमिक धर्म स्वीकार कर लिया जाएगा और उसमें सारे धर्मं को ढीक प्रकार से समझा जाएगा। सभी धर्मों के लोग कुछ पथभ्रष्ट हुए हैं और समस्याओं का यही कारण देंगे। मेंने उनसे कहा कि यदि आपको नशा ATA उन्मूलन का ही कार्य करना है तो आप दो सौ दस लाख डॉलर लेकर क्या करेंगे। आवश्यकता तो ये है नशा त्यागन के लिए लोग आपके पास आए। रातों रात वे नशा त्याग देंगे। मैंने ऐसे होते हुए देखा है और उनमें से कुछ लोग यहाँ बैठे हुए हैं। आपकी आत्मा में इतनी शक्ति है। उसमें इतना सौन्दर्य, इतना प्रेम और इतनी शान्ति है। केवल इसे अपने चित्त में रखना होगा क्योंकि है। जब परमात्मा एक है तो धर्म के नाम पर क्या आप युद्ध कर सकते हैं? परन्तु अज्ञानतावश लोग ऐसा करते हैं। मैं उन्हें दोष नहीं देती क्योंकि वे अंधेरे में हैं। एक बार ज्योतित होते ही वे समझ जाएंगे कि सार्वभौमिक धर्म का स्वभाव क्या है? आप हैरान होंगे कि रूस में सहजयोग या विश्वनिर्मला धर्म को धर्म के रूप में मान्यता यह चित्त इधर-उधर भटकता रहता है। आपका चित्त यदि आत्मा के प्रकाश से ज्योतिर्मय हो दी गई है । परन्तु यह और धर्मों की तरह से धर्म जाए तो आप अत्यन्त अद्भुत मानव बन सकते नहीं है। यह बिल्कुल उन जैसा नहीं है। इस धर्म हैं। संस्कृत में जिस प्रकार वर्णित किया गया है में तो हम केवल प्रेम एवं करुणा में विश्वास क्रोध, मद. लोभ. मोह स्वत: ही छुूट जाते करते हैं तथा अपनी शक्ति में भी कि कोई हमें हैं। जो क्रोध, मूर्खताएं और आक्रामक कार्य हम करते हैं वे सब छूट जाते हैं। कुछ सहजयोगियों को मैंने कश्मीर जाकर सहजयोग पफैलाने के लिए कहा है। कश्मीर के लोगों को यदि आप सहजयोगी बना दें तो कश्मीर समस्या का हल काम, छ नहीं सकता। कोई आपकी हत्या नहीं कर सकता। आपको हैरानी होगी कि तुर्की में बहुत बड़ा भूकम्प आया परन्तु किसी भी सहजयोगी को हानि न पहुँची। उनके घर भी ज्यों के त्यों रहे जबकि अन्य लोगों के घर धराशायी हो गए। हो सकता है। कुछ लोग वहाँ जाने के लिए तैयार ऐसा बहुत से स्थानों पर घटित हुआ है। बहुत से भी हैं। कुछ विदेशी सहजयोगियों ने वहाँ जाकर स्थानों पर चक्रवात आए परन्तु किसी सहजयोगी लोगों को परिवर्तित करने के लिए अपनी सेवाएं को हानि न पहुँची। सभी लोग मुझे बताते हैं कि भेंट की हैं। हमने बहुत से लोगों को परिवर्तित श्रीमाताजी सब सहजयोगी बच गए। किस प्रकार वे सब पूरी तरह से ठीक हैं? क्योंकि आपको परमेश्वरी शक्ति की सुरक्षा प्राप्त है। हमें परमेश्वरी सहजयोगी हैं। हजार सहजयोगी हैं तो शक्ति में भरोसा करना चाहिए जिस पर सभी किया है। बेनिन नामक स्थान पर सात हजार मुसलमान लोग कि पहले बहुत धर्मान्ध थे अब तुर्को में दो हिन्दुओं. मुसलमानों, इसाईयों में जो धर्मान्धता इसे भी आसानी से दूर किया जा सकता है। है धर्मों ने भरोसा किया। तब एक अन्य समस्या आती है कि हमें साकार में विश्वास करना चाहिए या निराकार में। आप समझ जाएंगे कि साकार के माध्यम से ही क्योंकि आत्मसाक्षात्कार के पश्चात् वे लोग आत्मा के सौन्दर्य को देखेंगे और उनका अपना धर्म ही 10

Hindi Translation (English Talk) उनके लिए यह स्वयम्मु कर्मकाण्ड मात्र है। वे नहीं समझ पाते कि वे स्वयम्भु हैं या नहीं। सहजयोगी होने के नाते आप लोग जाकर स्वयम्भु देख सकते हैं और इन्हें स्वीकार कर सकते हैं । मैं निराकार को आना जा सकता है। ये चीज़ देख लेना अत्यन्त साधारण बात है। परन्तु अत्यन्त आश्चर्यचकित कर देने वाले उदाहरण के रूप में एक बार मैंने कहा कि मक्का में मक्केश्वर शिव हैं ये बात हमारे धार्मिक ग्रन्थों में लिखी हुई है। जानती हूँ कि सन्त तुकाराम के स्थान पर आप लोग नृत्य कर रहे थे और आनन्द ले रहे थे क्योंकि आप वहाँ चैतन्य को महसूस कर रहे थे. चैतन्य लहरियां का आनन्द ले रहे थे। अत: मैंने तो बस यह बात कह दी थी। परन्तु अव मैंने एक लेख पढ़ा है कि वे सब भगवान शिव के पुजारी थे। परन्तु हैरानी की बात है कि माहम्मद साहब ने कभी किसी धर्म के विपय में पहले आपको निराकार का ज्ञान प्राप्त करना बात नहीं की। किसी ने ये बात नहीं पढ़ी. कुरान चाहिए। तब आपको साकार का ज्ञान प्राप्त में भी नहीं। कुरान पर हमारे यहाँ एक बहुत हो जाएगा इसके विषय में कोई विवाद नहीं है। अच्छी पुस्तक लिखी गई है। नि:सन्देह यह मेरे परन्तु आप यदि साक्षात्कारी नहीं हैं तो आप पथ-प्रदर्शन में लिखी गई है। इसमें स्पष्ट बताया है कि मोहम्मद साहब ने क्या कहा? इस प्रकार लोगों को अपयश मिलता है। आज इसाई लोग जो बात कह रहे हैं वह ईसा ने कभी नहीं कही। हिन्दू भी एसा ही कहते हैं। वे ऐसे कर्म कर रहे हैं जो कभी शास्त्रों में नहीं लिखे गए। धर्माधिकारी हमारे देश में समस्या बना हुआ है और जिसके लोग ही धर्म के प्रतिरूप को बिगाड रहे हैं और विषय में बताने का हमें अधिकार हैं। वह समस्याएं खड़ी कर रहे हैं । मैं नहीं समझ पाती श्रीराम मन्दिर का प्रश्न? क्या श्रीराम वहाँ पर कि वे ऐसा क्यों कर रहे हैं? इसका क्या लाभ पैदा हुए या नहीं। वे वहाँ पर जन्मे इस बात को है। जहाँ तक साकार और निराकार का प्रश्न है आप अपने हाथों पर महसूस कर सकते हैं । किस प्रकार कह सकते हैं कि कौन स्थान स्वयम्भु हैं और कोन सा नहीं। तो सारी समस्या का समाधान हो जाता है। परन्तु पहले आपको ज्ञान प्राप्त करना होगा-चैतन्य लहस्यों का ज्ञान। अब आप यदि मुझसे कोई गम्भीर प्रश्न पूछे जो सवा इसे समझ लेना बहुत सुगम है। आत्मसाक्षात्कार उन्होंने वहीं जन्म लिया। इसके विषय में कोई प्राप्त कर लेने के पश्चात् आप स्पन्द को महसूस सन्देह नहीं है। इस बात को लेकर लड़ने की कर सकते हैं या ये कहें कि आपमें चैतन्य कौन सी बात है? वहाँ चाहे मस्जिद है या कुछ चेतना आ जाती है और इससे आप जान जाते हैं और। श्रीराम ने वहीं जन्म लिया। जो भी हो वहाँ पर चैतन्य लहरियाँ हैं। परन्तु उन्हें गौरवान्वित किसी शराबी द्वारा या धन कमाने की इच्छा से करने के लिए वहाँ मन्दिर अवश्य बनाएं। मन्दिर-मस्जिद एक ही बात है। अगर आप मन्दिर बनाना चाहते हैं तो अवश्य बनाए परन्तु कि सत्य क्या है असत्य क्या है? में कहुँगी कि बनाई गई मूर्ति को पूजा करने में कोई सत्य नहीं। परन्तु बाइवल में भी कहा गया है कि पश्चात् अपमान नहीं होना चाहिए। इन्हें हम स्वयम्भु करें उससे पहले नहीं और उस मन्दिर में पूजा कहते हैं परन्तु जो लोग आत्मसाक्षात्कारी नहीं हैं के लिए केवल आत्मसाक्षात्कारी व्यक्ति को ही आकाश या पृथ्वी माँ द्वारा सृजित चीजों का ऐसा केवल आत्मसाक्षात्कार प्राप्त करने के 11

Hindi Translation (English Talk) रखें। तभी आप श्रीराम की महान आत्मा को कि हमारे इस देश में महानतम ज्ञान विद्यमान है। गौरव प्रदान कर सकंगे। यहाँ पर उपस्थित सभी सहजयोग पूरी तरह से शास्त्र-सम्मत है बह लोग चाहे जिस भी देश से वो हैं श्रीराम को कर्मकाण्ड नहीं है। यह गहन ज्ञान है। सभी सन्तों जानते हैं। केवल इतना ही नहीं, वे जानते हैं कि ने चाहे वो कबीर हों, गुरु नानक या मोहम्मद श्रीराम हमारे अन्दर कहाँ विराजमान हैं और यह भी कि किस प्रकार उनकी पूजा करनी है। ये उन्होंने ऐसा क्यों कहा? इसलिए क्योंकि सत्य. लोग मोहम्मद साहब और ईसा मसीह के विषय पूर्ण सत्य तो अपने अन्दर है और इसी पूर्ण सत्य में भी जानते हैं। उनके विषय में सत्य जानते हैं। अपने अन्दर, अपने शरीर के अन्दर। एक वार साहब, सभी ने कहा है ‘अपने अन्दर खोजो। . से छोटी-छोटी मुर्खताएं दूर होंगी और आप विशिष्ट व्यक्तित्व मानव बन जाएंगे। पूरे विश्व का जब ये ज्ञान सच्चा ज्ञान प्राप्त हो जाएगा तो के लिए परिवर्तित होने का समय आ गया है। झगड़ने के लिए क्या रह जायेगा? हर आदमी को एक ही प्रकार का अनुभव होगा। फिर आप किसलिए झगड़ेंगे। मैं यदि कहती हैँ कि मेरा लिए कार्य करें। जहाँ तक मुझसे हो सका मैंने देश भारत योगभूमि है तो इसके विषय में आप इन लोगों से पूछे चाहें वो किसी भी देश के हों। हुआ। परन्तु आप सब इस कार्य को कर सकते सभी एक ही बात कहेंगे यही कारण जब वे हैं और अपने समाज, अपने देश और फिर पुरे इस देश में आते हैं यहाँ की पृथ्वी को झुककर विश्व को परिवर्तित कर सकते हैं आप एक प्रणाम करते हैं । चाहे आप भारतीय ऐसा न करते दूसरे की सहायता कर सकते हैं। उदाहरण के हों। वो जानते हैं कि यह योगभूमि है और पूरे ब्रह्माण्ड की कुण्डलिनी इस योगभूमि में है। भारतीय विदेशों में जाकर सहायता करें। अब हमारे देश की ये सब महान बातें उन चैतन्य लहरियों के माध्यम से समझी जानी चाहिए जिन्हें आदिशंकराचार्य ने स्पन्द कहा। वास्तव में उड़ीसा गए मैं उनका धन्यवाद करना चाहूँगी उनकी पूरी कविताएँ भी सामान्य लोगों को यह परन्तु इसके लिए आप सबको बहुत सा कार्य करना होगा। मरी आप सबसे प्रार्थना हैं कि मेरे इस कार्य को किया और नि:सन्देह काफी कार्य लिए कुछ लोग विदेशों से भारत आएं और कुछ आप लोग इस ज्ञान में दक्ष हो गए हैं आपको यह कार्य करना चाहिए। आस्ट्रेलिया से जो लोग उन्होंने वहाँ सहजयोग के नौ केन्द्र स्थापित किए, नहीं समझा सकतीं कि वास्तविकता क्या है? यह सब घटित हो रहा है और आप सब इस परन्तु यदि आप इन चीजों की गहनता में उतरें कार्य को कर सकते हैं। आत्मसाक्षात्कार देने की और अपने स्पन्द, चैतन्य लहरियों के माध्यम से योग्यता आप सबमें है। यह वरदान जो आपको पूर्ण ज्ञान को समझें तो आप जान जाएंगे कि सत्य क्या है? असत्य के लिए झगड़ने का क्या और दूसरे लोगों में बांटें। फायदा? यह तो अंधकार से लड़ने जैसा है क्यों न प्रकाश करके स्वयं चीज़ों को देखा जाए? श्री माताजी ने कहा:- श्रीमन, आज मैंने यह सब कहने का दुस्साहस किया है क्योंकि मैं आपको बताना चाहती थी प्राप्त हुआ है, मेरी प्रार्थना है आप इसे आजमाएं हिन्दी भाषा के महत्व पर बल देते हुए ा। थोडा अंग्रेजी में बोले क्योंकि यहाँ बहुत अग्रेजी समझने वाले लोग हैं तो भी आप तो 12

Hindi Translation (English Talk) आप पढ़िए, उसे पढ़ कर आप बहुत आश्चर्य अपनी राष्ट्रभाषा तो आनी ही चाहिए। कहीं से चकित होंगे कि जो सहजयोग में लिखा है वो भी आप आए हों, यहाँ मैं जानती हूँ दक्षण से उसमें भी लिखा है। फिर गर आप हिन्दी नहीं हुए हैं समझ ही गए होंगे। तो भी मैं कहूँगी कि सबको हैं, नेपाल से आए हैं, सब जानते और गर आप अंग्रेजी में ही फैसे भी बहुत लोग आए जगह से लोग यंहाँ आए हैं लेकिन राष्ट्र भाषा को जानना बहुत जरूरी है। मेरी मातृभाषा मराठी है जो कि बहुत बढ़िया भाषा है आध्यात्म के लिए। लेकिन तो भी हिन्दी भाषा, मेरे पिता जी ने कहा कि गर तुम्हें हिन्दी भाषा नहीं आएगी तो बेकार हो। पहली चीज़ अपनी हिन्दी भाषा। तो ये ज्ञान अंग्रेजी में खास है नहीं। क्योंकि अंग्रेजी भाषा के अपने दोष हैं। अंग्रेज़ी में spirit है Spirit का माने शराब, spirit का मतलब भूत और spirit का मतलब आत्मा ऐसी भाषा में आप क्या कर सकते हैं। तो आप लोग कम से कम हिन्दी भाषा सीखिए और इन सहजयोगियों को भी मैं सिखा रही हूँ परदेस में, कि ये एक हिन्दी भाषा सीखने से ये जो ज्ान का भण्डार अपने देश में है उसको ये सीख लें/चाहे संस्कृत न सीखें लेकिन हिन्दी भाषा सीखना बहुत जरूरी शब्द तुम इसलिए हिन्दी भाषा आपको सीखनी चाहिए। हिन्दी भाषा जब आप सीखेंगे तो इससे एक बड़ा भारी लाभ जो आपको होगा वो ये है कि हमारी संस्कृति के बारे में, हमारे गहन ज्ञान के बारे में हिन्दी भाषा में बहुत कुछ लिखा गया है, उसे है। 13