Christmas Puja

Ganapatipule (भारत)

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Christmas Puja, Ganapatipule (India), 25 December 2001.

2001-12-25 Christmas Puja Talk, Ganapatipule, India

अच्छा लगा क्रिसमस पूजा के दौरान इतने सारे सहज योगियों को यहाँ आया देख कर । ईसाई धर्म दुनिया भर में फैल गया है, और बहुत सारे तथाकथित ‘ईसाई’ हैं जो कहते हैं कि वे ईसा मसीह  का अनुसरण करते हैं – मुझे नहीं पता कौन से विशेष दृष्टिकोण से!

ईसा मसीह परम चैतन्य का अवतार थे, वह ओंकार थे । वह श्री गणेश थे। और जो उनका अनुसरण करते हैं, उन्हें बहुत अलग तरह के लोग होना चाहिए। परन्तु यह हमेशा होता है हर धर्म में, कि वे बिना सोचे समझे विपरीत दिशा में चले जाते हैं, पूर्णतया विपरीत। 

ईसा मसीह के जीवन का सार, निर्लिप्तता और बलिदान था। एक व्यक्ति जो निर्लिप्त है, उसके लिए बलिदान जैसा कुछ नहीं होता है। वह अपने जीवन को केवल एक नाटक के रूप में देखता है। 

ऐसा महान व्यक्तित्व इस पृथ्वी पर आया और इस तथाकथित ‘ईसाई’ धर्म का निर्माण किया, जिसने युद्ध किए और सभी प्रकार की पाखंडी चीज़ें; और अब लोग इसके बारे में जान रहे हैं। 

वह सत्य के लिए खड़े हुए थे और ईसाई नहीं जानते क्या सत्य है। सत्य यह है कि आप आत्मा हैं और, आपको आत्मा बनना है। वे ही हैं जिन्होंने बात की, दूसरे जन्म की, आत्मसाक्षात्कार की। लेकिन वे भूल गए हैं उन्होंने क्या कहा था, उन्हें क्या प्राप्त करना है।

यह इतनी अजीब बात है कि ये सभी महान लोग इस पृथ्वी पर आए और एक उचित धर्म बनाया हमारे उत्थान के लिए; और मैं नहीं जानती कैसे लोग इतने मूर्ख बन गए हैं उनके तथाकथित ‘गुरुओं’ के उपदेशों के द्वारा। यह सब धन-उन्मुख है। इसके अलावा, यह सत्य पर नहीं खड़ा है। मुझे लगता है यह इस धर्म को दूसरी बार सूली चढ़ाने जाने जैसा है। 

ऐसा कोई धर्म नहीं है, जो अनुसरण कर रहा है, वास्तव में, उनके सिद्धांतों का जैसे वे वर्णित हैं। 

मुझे नहीं पता कि वे कैसे सत्य को मोड़ देते हैं इस तरह से – 

केवल कुछ पैसे कमाने के लिए, या कुछ उपद्रव करने के लिए। 

इस तरह के कर्मकांड चल रहे हैं ईसा मसीह के नाम पर । हालाँकि वे कई बार लड़खड़ा चुके हैं, और उन्हें दुनिया पर इस तरह के बुरे प्रभाव का अनुभव था। यह प्रतिक्रिया, हम नहीं जानते क्यों इस तरह की गोल-गोल बातें सामने आ जाती हैं और लोग इसे स्वीकार कर लेते हैं – वे बस स्वीकार कर लेते हैं। आप कोई भी धर्म ले लीजिए। इन दिनों, इस्लाम, बात कर रहा है, मुझे नहीं पता किस बारे में। 

दो महत्वपूर्ण बातें हैं मोहम्मद साहब के जीवन के समय की। पहली को ‘मेराज’ कहा जाता है, जो कुंडलिनी के जागरण के अलावा और कुछ नहीं है, बिल्कुल स्पष्ट रूप से। और जिस दूसरी बात की उन्होंने बात की है, वह है ‘जिहाद’। जिहाद का अर्थ है: “अपनी बुरी चीज़ों को मारना, अपने बुरे स्वभाव को मारना, अपने भीतर के सभी षड्रिपुओं को मारना”। इसका मतलब यह नहीं है कि आप मुसलमान बन जाएं और स्वयं को मार दें। यह सबसे मूर्खतापूर्ण बात है! क्या आप मुसलमान बने हैं केवल स्वयं को मारने के लिए और आत्महत्या करने के लिए?

इसे एक ” धार्मिक क्रिया” बताते हुए, वे कह रहे हैं कि इससे आप जन्नत में जायेंगे, स्वर्ग में। आप कैसे जाएंगे? मुसलमानों के रूप में….? वे धार्मिक नहीं हैं – बिल्कुल नहीं।

और फ़िर इन पापी लोगों को मारकर, आप कैसे स्वर्ग जाएंगे जहाँ आपको जन्नत का आनंद मिलेगा? कोई विवेक-बुद्धि नहीं है। लेकिन इन सभी मौलानाओं ने सबसे पहले, अपनी शिक्षा खत्म कर दी है। अपनी शिक्षा खत्म कर दी है। वे स्वयं को शिक्षित नहीं करते हैं, बिल्कुल नहीं। इसलिए उन्हें पता नहीं है, इस दुनिया में वे कहाँ खड़े हैं, इस पर उनकी क्या विचार पद्धति है। कुछ थोड़े पढ़े-लिखे होते हैं, लेकिन वे भी इन लोगों पर आधिपत्य बनाये रखने के विचार से खो जाते हैं। इतनी शर्मनाक बात है यह करना, ईश्वर के नाम पर और अध्यात्म के नाम पर। अब, हमारा कर्तव्य है उन्हें बताना क्या सत्य है। हमारा कर्तव्य है उन्हें अध्यात्म के उचित मार्ग पर लाना। क्योंकि वे सब खो गए हैं। ईसाई खो गए हैं, मुसलमान खो गए हैं, हिंदू खो गए हैं, वे सभी खोए हुए लोग हैं। उन्हें इस बात का कोई अंदाज़ा नहीं है कि उनका धर्म क्या कहता है और उन्हें क्या करना चाहिए। आख़िरकार, ईसा मसीह को क्रूस पर चढ़ा दिया गया, तो आप देख सकते हैं कैसे, जब सत्य वहाँ था, तो असत्य ने इसे ख़त्म करने का प्रयास किया, वे इसे सहन नहीं कर सके। हमारे पास सुकरात का उदाहरण है। उन्हें मारने की क्या आवश्यकता थी? लेकिन उन्होंने उन्हें मार दिया।

इस तरह, अब तक, हम जानते हैं भूतकाल में सभी लोग जो सत्य के लिए महत्वपूर्ण हैं, समाप्त किए जा रहे हैं, क्योंकि वे सत्य नहीं चाहते हैं। वे किसी धर्म का पालन कर रहे हैं, क्योंकि वे दूसरे लोगों पर शासन कर सकते हैं, धर्म जो उन्होंने बनाया है। मेराज एक कुंडलिनी जागरण है और वे कहते हैं कि मेराज कभी नहीं होगा। बहुत अच्छा। आप में से कई लोगों को आत्मसाक्षात्कार प्राप्त हुआ है। आपको अपना चैतन्य और चैतन्य लहरियां मिली हैं, जो कुरान में वर्णित है, कि आपको ठंडी हवा महसूस करनी चाहिए। लेकिन मुसलमानों को कौन बता सकता है? आप कुछ बात करते हैं – वे आएँगे और आपका गला काट देंगे, बस!

“आप जिहाद में जाओगे!” तो, यह इतनी मूर्खतापूर्ण चीज़ है जो वे कर रहे हैं।

और इस आधुनिक समय में, जैसा कि हम देखते हैं, लोगों ने सभी मर्यादाओं को पार कर लिया है, धर्म की हर एक चीज़ को।

क्योंकि, मैं अमरीका गई और मुझे आश्चर्य हुआ कि कैसे वे नैतिकता के बारे में भूल गए हैं। उन्हें नैतिकता का कोई बोध नहीं है, और वे बस इसे बाज़ार में बेच रहे हैं, इससे पैसा कमा रहे हैं। 

इसके विपरीत, ये मुसलमान, विशेष रूप से वहाबि नामक एक वर्ग है। ये लोग कह रहे हैं कि ये महिलाएं ही हैं जो आपकी नैतिकता को बिगाड़ती हैं, और इसलिए- “उन्हें छिपाओ, उन्हें ढक कर के रखना चाहिए।” कोई भी महिला जो सफेद चप्पल पहने हुए थी, अफगानिस्तान में, वे उसे पीट रहे थे, उन्हें जान से मार देते थे। और बहुत सारे लोगों ने भारत में, विशेष रूप से उत्तर में, इस्लामिक संस्कृति को अपनाया है और वे वास्तव में महिलाओं के साथ बुरा व्यवहार करते हैं, उत्तर में। मेरी शादी उत्तर में हुई थी और मुझे पता है कैसे वे महिलाओं के साथ निर्दयी रहे हैं। तो भारत का उत्तरी भाग पहले से ही इससे दूषित है, और दक्षिण दूषित है कट्टर हिंदुओं द्वारा। 

सभी प्रकार के कर्मकांड, सबसे बुरी तरह के, डाले जाते हैं केवल महिलाओं के ऊपर, दक्षिण में पालन किये जाते हैं। वे एक महिला का सिर मुंडवाएंगे, उसे मंदिर का चक्कर लगवाएंगे, उस पर पानी डालेंगे और वह केवल लुढ़क रही है, वह चल नहीं रही है, और वे उस पर पानी डालते ही चले जाते हैं – मैंने इसे स्वयं देखा है। हमारे यहाँ  सती है, जो है, महिलाओं की हत्या करना उनके पति की मृत्यु के बाद। यह कुछ ऐसा है जिसे कोई नहीं समझ सकता है। सारा धर्म महिलाओं पर क्यों डालना है, पुरुषों पर क्यों नहीं?

लेकिन एक बात अच्छी है, कि हिन्दू धर्म अब इतना पुराने ढंग का हो गया है कि आप इन सभी चीज़ों को सुधार सकते हैं। इतनी सारी चीज़ें सही हुईं हैं मेरे स्वयं के जीवन-काल में, मैं आश्चर्यचकित थी, वे यह कैसे कर सके?

लेकिन मुसलमानों में, इस्लाम में, आप सुधार नहीं  सकते।

ऐसी ‘भयानक’ चीज़ें वे अपनी महिलाओं के साथ करते हैं, और जब भी आप उनकी सहायता करने का प्रयास करते हैं, यह असंभव होता है। उदाहरण के लिए, मैंने एक जगह शुरू की उन महिलाओं के लिए, जो दुनिया में अकेली रह गई हैं, जो अनाथ की तरह हैं, जिनके बच्चे हैं। मैं आश्चर्यचकित थी, उनमें से अधिकतर मुसलमान हैं! और उनके प्रत्येक के आठ से दस बच्चे हैं। इसलिए अब हमें एक अनाथालय भी बनाना होगा। यही है जो वे अपने धर्म से उत्पन्न कर रहे हैं।

आप यह अपने चारों ओर देख सकते हैं। यहाँ तक कि हिंदुओं में भी अजीब व्यवस्था है विधवापन की । यदि वे एक महिला को विधवा करते हैं, यह बहुत बुरा होता है, और वे दीन होती हैं, उनमें से कुछ, उनमें से काफ़ी सारी वृंदावन में रह रहीं हैं। मुझे बताया गया कि उन्हें प्रतिदिन का एक रुपया मिलता है! और वे क्या करती हैं ? वे भजन गाती हैं। एक रुपये में, कैसे आप इस देश में रह सकते हैं? वे माहिर हैं इतने सारे भिखारी और भिखारी-महिलाएं बनाने में । यदि यही  धर्म है, बेहतर है ये ना हो। हमारे लिए यह बस बहुत हो गया है।

सभी प्रकार के कर्मकांड इस ब्राह्मणवाद के माध्यम से। ये ब्राह्मण किसी काम के नहीं है।

जो लोग धर्म सिखाने का प्रयास करते हैं, उन्हें किसी महान स्तर का होना चाहिए। तो सहज योग में, आप सब कुछ छोड़ देते हैं। क्योंकि यह सब, कुछ और नहीं मिट्टी है! और उस मिट्टी में आप समाप्त हो जाएंगे। आपको इसके बारे में लोगों को बताना होगा। वे क्या करेंगे? उन्होंने धर्म का दुरुपयोग किया है सभी प्रकार की बुरी चीज़ों के लिए। जैसे, इंग्लैंड में यदि कोई मर जाता है, तो उन्हें शैंपेन (मदिरा) चाहिए। जब वे दफ़नाने के लिए जाते हैं तो उन्हें शैंपेन चाहिए। मैं आश्चर्यचकित थी, ‘यह कैसे संभव है कि वे इसके लिए शैंपेन पीने जा रहे हैं?’ और ऐसा कैसे है, धर्म से, आप कहते हैं, उनके सभी पादरी भी पीते हैं, कोई प्रश्न नहीं। एक पादरी सहज योग में आया, मैं बहुत खुश थी। लेकिन उसने कहा, “मैं सहज में आऊंगा, लेकिन मैं शराब नहीं छोड़ूंगा।”

मैंने कहा, “क्यों?”, “क्योंकि यह बाइबिल में लिखा है, कि आपको अवश्य पीना चाहिए।” “अच्छा! मुझे नहीं पता था! ऐसा कैसे हो सकता है? ईसा मसीह कैसे कह सकते हैं कि आपको पीना चाहिए? वह न केवल आत्मसाक्षात्कारी थे बल्कि वह स्वयं आत्मसाक्षात्कार थे!” उसने कहा, “उन्होंने कहा है। आप चाहें जो भी कहें, उन्होंने कहा है।”, “कहाँ पे?”,  उसने कहा, “वह एक शादी में गए थे”, “ठीक है।” “उस शादी में, उन्होंने लोगों के लिए शराब बनाई।” मैंने कहा, “उन्होंने नहीं किया। वह वहाँ गए और उस थोड़े से समय में उन्होंने केवल अपना हाथ पानी में डाला और उसका स्वाद अंगूर के रस की तरह हो गया। और हिब्रू भाषा में अंगूर के रस के लिए ‘वाइन’ शब्द है।“ मैंने कहा, “मैं ऐसा कर सकती हूँ”। इसका मतलब यह नहीं है कि मैं चाहती हूँ कि लोग पीएं। मेरा मतलब है, कौन ऐसी मूर्खतापूर्ण बात कह सकता है! यह जागरूकता है, जो महत्वपूर्ण है, चेतना महत्वपूर्ण है। और यदि आप अपनी चेतना को नुक्सान पहुंचाते हैं, तो आप सहज योगी कैसे हो सकते हैं?

उन्हें यह कहना असंभव था कि आप शराब नहीं पी सकते। लेकिन शराब पीना, भारत में भी बहुत आम हो गया है। यह सब ईसाई धर्म के विरुद्ध है, यह हिंदू धर्म के विरुद्ध है, इस्लाम के विरुद्ध है। और यद्यपि यह कुरान में लिखा है, “पीना मत”, वे पीते हैं, वे सभी पीते हैं। और धर्म का पालन करने के बजाय, वे सबसे बड़े पापी बन गए हैं! क्या ईसा मसीह यही चाहते थे कि वे करें?

आपको शुद्ध लोग बनना है। आपमें ‘निर्मल तत्वम’ होना चाहिए। यह वही है। साथ ही मैंने आपको एक कहानी सुनाई थी शालिवाहन के बारे में, जो ईसा मसीह से मिले थे, कश्मीर में । और उन्होंने ईसा मसीह से उनके नाम के बारे में पूछा और उनके देश के बारे में। वह कहते हैं, “मैं एक ऐसे देश से आता हूँ, जहाँ के लोगों में मलेच्छ हैं।” “मलेच्छ?”, इसका का अर्थ है, वो जिनमें, मल की इच्छा है, गन्दगी की। तो उन्होंने उनसे कहा, “आप क्यों नहीं जाते हैं और उन्हें निर्मल-तत्त्वम सिखाते हैं?” शालिवाहन ने कहा। यही निर्मल तत्त्वम आपको मिला है, जो शुद्ध करता है, जो आपको स्वच्छ करता है, जो आपको आनंद, प्रसन्नता और सत्य प्रदान करता है। यही वो है जो आपको मांगना चाहिए। अन्यथा यह सब अंधकार है, आप प्रकाश नहीं देखते हैं । चाहे आप ईसाई, हिंदू, मुसलमान, कोई भी हों, आप सत्य का प्रकाश नहीं देख सकते हैं – और आपको सत्य का प्रकाश लेना होगा।

लेकिन उसके बाद, आपको क्या करना है? आपको इसे दूसरों को देना होगा, आपको दूसरों को बदलना होगा। आपने इसके लिए बहुत मेहनत की है और कभी-कभी मुझे आश्चर्य होता है कैसे ऐसे अच्छे काम करने वाले लोग इतने विनम्र और इतने अच्छे होते हैं। उन्होंने इसे कैसे प्राप्त किया, मैं नहीं समझ सकती। निश्चय ही, कुछ हैं जो धन-उन्मुख हैं, जो सत्ता-उन्मुख हैं, लेकिन ये चीज़ें आनन्द नहीं देती हैं। जो आनंद देता है, वह आपके भीतर के सत्य का प्रकाश है। जो आपके पास है, आप सभी के पास है, जैसा कि आप जानते हैं। आप सभी ने अनुभव किया है। लेकिन मैं कहूँगी कि यह अनुभव दूसरों को देना होगा – यह केवल आपके लिए नहीं है! जितना अधिक से अधिक लोगों को देना संभव हो सके। लेकिन कितने ऐसा करते हैं? कितने लोग ऐसा करते हैं?

हमारे यहाँ सिख समुदाय भी है। वे सहज में आए, लेकिन उन्होंने कहा, “हम देवी की पूजा नहीं कर सकते।” मैंने पूछा “क्यों?”, इस पर आश्चर्य हुआ, क्योंकि श्री गुरु नानक ने देवी के बारे में बात की है, भगवती की। पहला वाक्य उनकी पुस्तक का आद्या है। आद्या आदि शक्ति है। और इसके लिए, यदि सिख मूर्खतापूर्ण रूप से कहते हैं, तो उनके पास चंडीगढ़ क्यों है। वे बहुत मुर्ख भी हैं, वास्तव में तुलना करने के लिए कुछ भी नहीं है।

अब, आपको यह समझना होगा कि क्या आपने वह सब निरर्थकता छोड़ दी है या नहीं अपने जीवन में से? या आप सभी उसी से चिपके हुए हैं? यह बहुत महत्वपूर्ण है। जब तक आप उसी पर चिपके रहेंगे, तब तक समस्या रहेगी। सहज योग इतना कुछ करता है। मुझे आश्चर्य हुआ, अमरीका में ३०० सहज योगी हैं – उन्हें कुछ नहीं हुआ! कुछ टॉवर पर थे, कुछ सड़क पर थे, वे सभी वहाँ थे और उन्हें कुछ भी नहीं हुआ! उनमें से कुछ ने कहा कि, “किसी ने हमें अंदर बताया …” “अंदर कहा कि, ‘भाग जाओ!” और हम दूसरी दिशा में भागने लगे। कुछ को देरी हो गई, मैं नहीं जानती कैसे, ये सभी ३०० लोग बच गए। लेकिन ऐसे शैतान हैं ये लोग, जो सोच रहे हैं पूरे विश्व को नष्ट करने का, चारों तरफ से आ रहे हैं ।  

यही कारण है कि मैं अमरीका गयी। और मैंने उनसे कहा था कि यह युद्ध दिवाली से पहले खत्म हो जाएगा, और यह समाप्त हो गया। “दिवाली से पहले यह युद्ध खत्म हो जाएगा” और यह समाप्त हो गया। कितना मूर्खतापूर्ण है यह सोचना कि वे ईश्वर की रचना को इस तरह नष्ट कर सकते हैं! वे कौन हैं? उन्हें दुनिया को नष्ट करने का अधिकार कैसे मिला है! लेकिन यही एक मानवीय निरर्थकता है।

ईसा मसीह इस पृथ्वी पर आये, उन्होंने लंबे समय तक काम किया और उन्हें क्रूस पर चढ़ाया जाना था, इसलिए वह क्रूस पर चढ़ गए। लेकिन उनका सूली पर चढ़ना हमारे लिए गर्व की बात नहीं है। हमारा गर्व उनका पुनरुत्थान है। कि वह पुनर्जीवित हो गए, इसमें कोई संदेह नहीं है। यह कहना कि यह संभव नहीं है और यह सब – आप ऐसा कहने वाले कौन हैं? आप क्या जानते हैं आध्यात्मिकता के बारे में? आप क्या जानते हैं क्या हो सकता है ऐसे व्यक्ति को जो आध्यात्मिक है, आध्यात्मिक रूप से परिपूर्ण है; उस में क्या कार्यान्वित हो सकता है । जो कुछ भी हम मनुष्यों के बारे में जानते हैं, उसी से हम निष्कर्ष निकालने का प्रयास करते हैं, जो सब गलत हैं। अपने जीवन में देखें। इतने सारे चमत्कार हैं सहज योगियों के जीवन में और मैंने किसी से कहा कि, ” अच्छा होगा आप उन्हें संकलित करें।” तो उसने कहा, “एक महीने के भीतर वे सारे पत्र मेरे सिर तक आ गए।” एक महीने में! तो मैंने कहा, “इसे भूल जाओ, मत लिखो!” यह एक या दो नहीं हैं; दुनिया भर से लोग लिख रहे हैं।

लेकिन वो जो बुद्धिजीवी हैं, बहुत जटिल हैं। उनके मस्तिष्क में यह डालना असंभव है। तो जितना भी संभव है, हमें अपनी ओर से अधिक से अधिक करना होगा। अपना ध्यान उन लोगों पर लगाएं जो इसे चाहते हैं। अब भारत में यह जेलों में चला गया है, यह स्कूलों में और सभी जगह चला गया है। और किसी ने मुझे कुछ दिन पहले बताया कि एक गिरिजाघर में भी वे सहज योग को अपनाने लगे हैं – मुझे नहीं पता कि उनके मस्तिष्क में क्या चल रहा है और वे कैसे इसे संभव कर पाए हैं! लेकिन इसी प्रकार से सहज योग फैल रहा है। लेकिन इसे और अधिक फैलना होगा! आपको, आप सभी को, व्यक्तिगत रूप से, चारों ओर जाना चाहिए और इसे कार्यान्वित करना चाहिए। और इसके बारे में बात करनी चाहिए। लेकिन, सहज योगी थोड़े शर्मीले हैं। एक बार मैं विमान से जा रही थी, और एक महिला बहुत-बहुत गर्म थी। तो मैंने उससे पूछा कि वह किस गुरु का अनुसरण करती है, उसने मुझे नाम बताया। मुझे आश्चर्य हुआ कि उसे आध्यात्मिकता के बारे में कुछ नहीं पता था। और इन लोगों के पास विशाल घर हैं और बड़े मंदिर हैं, सब कुछ, और वह मुझसे अपने गुरु की प्रशंसा कर रही थी। मैंने सोचा, “वह बहुत बेशर्म है। उस में कुछ भी नहीं है, वह इतना अधिक गर्म है और वह इसके बारे में बात कर रही है! ” लेकिन सहज योगी नहीं करेंगे। मुझे आश्चर्य हुआ, क्यों सहज योगी इसके बारे में बात नहीं करते।

लेकिन एक और दिन मैं बाज़ार में किसी के साथ गयी थी और मेरे साथ एक सहज योगी था और मैं आश्चर्यचकित थी, उसने उन्हें मेरे बारे में बताना शुरू कर दिया और वह उन्हें आत्मसाक्षात्कार देने लगा और वे इसके बारे में बहुत खुश थे। आप जहाँ भी जाते हैं आपके पड़ोसी होते हैं, आप बाज़ारों में जाते हैं, हर जगह आपको जाना चाहिए और इसके बारे में बात करनी चाहिए। जैसे वे कैरल गाते हैं – हमारे पास भी भजन और अन्य चीज़ें होनी चाहिएं लोगों को बताने के लिए, हमें उन्हें बताना होगा। आप इतने शर्मीले क्यों हैं? यह शर्मीलापन सहज योग की सहायता नहीं करने वाला है। इसलिए कृपया ध्यान दें कि आप दूसरों को आत्मसाक्षात्कार देने का प्रयास करें। आपके पास शक्तियां हैं, स्वयं पर विश्वास रखें। मुझे लगता है उनमें विश्वास की कमी है, या जो कुछ भी है। बहुत कम लोग हैं जो बाहर निकल कर आते हैं और करते हैं। इटली में मैंने देखा है और ऑस्ट्रिया में भी, ऑस्ट्रेलिया में – सहज योग बहुत फैल गया है, उनके विश्वास के कारण कि, “हमें दूसरों को देना है जो हमें मिला है, हमें उसे साझा करना होगा”।

“ईसा मसीह के जीवन से हमें समझना होगा उनके बलिदान को। यह इतना बड़ा बलिदान है – इस तरह से सूली पर चढ़ाया जाना, चोरों के साथ। लेकिन उन्होंने यह किया! उसी प्रकार, जब आप सब लोग सहज योग का कार्य करना चाहते हैं, तो आपको यह नहीं सोचना चाहिए, “मेरे दादा का क्या होगा, मेरी दादी का क्या होगा?” मेरा मतलब है, जो भी पत्र मुझे मिलते हैं वे सभी इस बारे में हैं। यह बहुत अजीब है। वे केवल कुछ संबंधों के बारे में चिंतित हैं, वे उन संबंधों के बारे में चिंतित भी नहीं हैं जो सारे विश्व में हैं। पत्नी के बारे में चिंतित हैं या बच्चों के, मुझे केवल इसी तरह के पत्र मिलते हैं! कोई भी मुझे नहीं लिखता कि आपने कितनों को आत्मसाक्षात्कार दिया है। वे कभी नहीं लिखते कि वे किस प्रकार से सहज योग का प्रसार कर पाए।  कोई नहीं लिखता है। बहुत आश्चर्य की बात है। आपको मुझे बताना पड़ेगा।

मैं आशा करती हूँ कि आप सभी लोग सहज योग के प्रसार के महत्व को समझते हैं। यदि आप ऐसा नहीं करते हैं, तो आप बिल्कुल बेकार हैं। मेरे लिए सबसे बड़ी बात, जैसे आपके यहाँ बहुत सारी बत्तियाँ हैं, ऐसे ही हमारे पास दुनिया भर में बहुत सारे सहज योगी होने चाहिए, यदि आप इस दुनिया को बदलना चाहते हैं, और यदि आप बचना चाहते हैं निरर्थक जीवन के सभी परीक्षणों और क्लेशों से, जो वे जी रहे हैं- आपको उन्हें बचाना होगा! आपको उन्हें उबारना होगा। यह आपका काम है, यही आपको सहज योग में शुल्क रूप में देना है। अपने लिए नहीं, अपने लिए नहीं। अपने बारे में चिन्ता मत कीजिए। यदि आप उन पत्रों को पढ़ें जो मुझे मिलते हैं, तो आपको घृणा होगी।

अब, एक और तरह के पत्र हैं जो मुझे मिलते हैं, कि वे शादी करना चाहते हैं – ठीक है। कई लड़कियाँ हैं जो दावा करती हैं कि, “हम चार साल से आवेदन कर रहीं हैं, फ़िर भी हमारी शादी नहीं हो पायी है”। सबसे पहले आपको पता होना चाहिए, अनुपात में महिलाएं अधिक हैं। वें बहुत अच्छी हैं। मान लीजिए,  यदि चालीस लड़के हैं, तो कम से कम एक सौ बीस, या हो सकता है एक सौ पचास लड़कियाँ होंगी। तो अब हम किससे शादी करें उन लड़कियों की? ज़रा सोचिए इसके बारे में, लेकिन वे शिकायत के पत्र लिखती हैं कि, “हमने चार बार आवेदन किया है।” हम नहीं कर सकते। हम विवश हैं। तो आप बाहर जाइए और जहाँ कहीं भी आपका मन करे वहाँ शादी कीजिए। या फ़िर आप इंतजार कीजिए और देखिए और अपना जीवन समर्पित कर दीजिए सहज योग को । यह बहुत कठिन काम है जब वे शिकायत करती रहती हैं कि, “मेरी शादी हो जानी चाहिए, और मेरी अभी तक शादी नहीं हुयी है।”

विवाह कभी हमारे विचार में नहीं था। लेकिन फ़िर हमें विवाह की अनुमति देनी पड़ी। और अब यह मुख्य मुद्दा बन गया है सभी के साथ । या तो उनका विवाह नहीं हुआ है; यदि वे विवाहित हैं तो वे प्रसन्न नहीं हैं; यदि वे तलाकशुदा हैं, तो उनकी फ़िर से शादी होनी चाहिए … हर तरह की चीज़ें, जटिलताएं, जिनके लिए मैं तैयार नहीं हूँ। सहज योग उसके लिए नहीं है! यदि आपका विवाह सफल नहीं हुआ, तो यह मेरा काम नहीं है। और यदि ऐसा ही चलता रहा तो हमें शादियाँ रोकनी होंगी।

मैं नहीं चाहती कि आप मुझे ये सारी बातें लिखें। यह दर्शाता है कि आप सहज योग में कितने कमज़ोर हैं। क्यों नहीं मुझे लिखते, कितने लोगों को आपने आत्मसाक्षात्कार दिया है। इससे मुझे प्रसन्नता होगी। बजाय शिकायत करने के अपनी पत्नी के बारे में और… – यह मेरी चिंता नहीं है। जैसे भी हुआ, हमने आपकी शादी करा दी । यदि आप इसे नहीं निभा सकते हैं, तो यह आपका काम है।

और यही सहज योग का रोड़ा है। हर धार्मिक आंदोलन में बहुत सी गलत चीज़ें हुई हैं। जबकि, सहज योग में मुझे लगता है कि विवाह एक बहुत बड़ी बाधा है। इसके अलावा, लड़के नहीं आते हैं; क्योंकि भारत में, लड़कों की शादी करना बहुत आसान है, आप को धन भी प्राप्त हो सकता है, ये, वो। लेकिन लड़कियाँ, पाँच गुना अधिक हैं लड़कों की तुलना में। लड़के शादी नहीं करना चाहते, वे स्वयं अपने विवाह करते हैं, हालांकि वे सहज योगी हैं। तो मुझे समझ में नहीं आता, क्यों, सहज योग में भी, आत्मसाक्षात्कार प्राप्त होने के बाद, उनके लिए विवाह इतना अधिक महत्वपूर्ण मुद्दा है।

सबसे महत्वपूर्ण जो है, वह यह है कि, ‘आप कितने लोगों को आत्मसाक्षात्कार देते हैं’। वही आपका जीवन है। यदि एक कमल है तो वह खिलेगा। लेकिन उसे  सुगंध बिखेरना चाहिए – यहाँ तक कि कमल का भी एक दायित्व है। फ़िर आप लोगों का क्या? मैं यह नहीं कह रही हूँ कि आप ईसा मसीह  की तरह क्रूस पर चढ़ जाइए, नहीं। मैंने कहा कि आप अपने जीवन का आनंद लीजिए – आपके पास शांति हो और स्थिरता हो, संतुलन। लेकिन, साथ ही, आपको सहज योग का प्रसार करना होगा। यही अब आपका काम है। आपका काम महत्वपूर्ण नहीं है; केवल यह महत्वपूर्ण है – आप कितने लोगों को आत्मसाक्षात्कार देते हैं।

यह बहुत बहुत कठिन है, क्योंकि उन्होंने सभी महान अवतरणों को बिगाड़ा है, उन सभी महान सूफियों और संतों को। लेकिन कम से कम आप लोग ऐसा मत करिए। तो कृपया सोचने का प्रयास करें कि आप किसको आत्मसाक्षात्कार दे सकते हैं। आप किनसे सहज योग के बारे में बात कर सकते हैं। आपको प्रचार प्रसार करना होगा। और अगली बार मैं आशा करती हूँ मैं आपसे यह सुनूंगी कि आपने कितने लोगों को आत्मसाक्षात्कार दिया है। यह सबसे महान औचित्य है ईसा मसीह के सूली पर चढ़ने के लिए, उनके जन्म के लिए, इस धरती पर उनके आने के लिए, उनकी आज्ञा। और यदि आपने आत्मसाक्षात्कार दिया है, तो उन्होंने आज्ञा को पार कर लिया है। वे पार होकर निकल गए हैं और वे सहस्रार पर हैं।

तो सहज योग में आप सब कुछ समझते हैं। इसे समझना बहुत आसान है। सहज योग सबसे सरल चीज़ है समझने के लिए – लेकिन आत्मसाक्षात्कार के बाद! इसलिए आपको चारों ओर जाना होगा और देखना होगा, आप कितने लोगों को आत्मसाक्षात्कार दे सकते हैं। सब कुछ ठीक है, आपका सब अर्चन-पूजन ठीक है, आपकी पूजा ठीक है – लेकिन – सबसे महत्वपूर्ण जो है वह है कि आपने कितने लोगों को आत्मसाक्षात्कार दिया है। मैं जानना चाहूँगी कि कितने लोगों ने दिया है।

विशेषकर महिलाओं से। महिलाएं अपेक्षाकृत कमज़ोर हैं आत्मसाक्षात्कार देने में । वे बहुत कुछ कर सकती हैं, मुझे पता है, वे कर सकती हैं। आखिर कार मैं भी एक महिला हूँ। लेकिन किसी न किसी प्रकार से मुझे लगता है कि सहज योग में महिलाएं एक स्तर की नहीं हैं। वे बहुत कुछ कर सकती हैं, और बहुत कुछ, लेकिन किसी कारण से वे अपने जीवन के महत्व को नहीं समझती हैं। आप बहुत महत्वपूर्ण हैं।

ऐसे कितने लोग हैं जिन्हें आत्मसाक्षात्कार मिला है? बहुत सारे सूफ़ी थे जिन्हें आत्मसाक्षात्कार प्राप्त हुआ, उन्होंने कविता लिखी – समाप्त। बहुत सारे संत थे जिन्होंने इतना कुछ किया, इतना कुछ लिखा। भारत में हमारे इतने सारे संत थे; उन्होंने ये सब बातें लिखीं, लोग उन्हें पढ़ेंगे, लेकिन कुछ नहीं होता। आपके पास, आपके पास कला है आत्मसाक्षात्कार देने की । आप कुंडलिनी के बारे में जानते हैं, आप इसके बारे में सब जानते हैं – आगे बढ़ें और लोगों से बात करें।

मैं अकेली थी जब मैंने सहज योग शुरू किया और मैं एक महिला हूँ। तो आप लोगों का क्या ? अब एक चुनौती है आप सभी के लिए! कितने लोगों को आपने सहज योगी बनाया है? यहाँ तक कि आपके परिवार में भी लोग सहज योगी नहीं हैं। आपकी बेटी नहीं है, आपका बेटा नहीं है। तो ईसा मसीह की महिमा गाने का क्या उपयोग है? यदि आप उनकी महिमा गा रहे हैं, तो आपको लोगों को उनकी आज्ञा से पार करवाना चाहिए। वह हमारे भीतर बहुत उच्च स्थान पर स्थित हैं, लेकिन आपने कभी उनका सम्मान नहीं किया है। कि इतने उच्च स्थान पर आसीन व्यक्तित्व को आप पार कर चुके हैं, तो दूसरे क्यों नहीं।

आइए देखते हैं, आज की पूजा से आपमें कितना दृढ़ संकल्प है। आपको पता होना चाहिए कि एक देवी आपकी अपनी इच्छाओं से नहीं आती है, वह स्वयं आती है। उसका अपना समय है। लेकिन यदि आप लोग जो वास्तव में संत बन गए हैं बहुसंख्या में हैं और दूसरों को संत बना रहे हैं – तो मैं आपके लिए हूँ! अन्यथा मैं आपके लिए उपलब्ध हूँ – आप मुझसे चैतन्य ले सकते है, आप मेरा पूजन कर सकते है, इन सभी चीज़ों की अनुमति है, इसमें कोई संदेह नहीं है। लेकिन उसके लिए, आप केवल तभी योग्य हैं, आप केवल इसके लिए तभी हकदार हैं, यदि आप सहज योग कर रहे हैं। यदि आप सहज योग फैला रहे हैं। यदि आप दूसरों को दे रहे हैं। केवल तभी आप देवी के चैतन्य को वास्तव में प्राप्त करने के योग्य  माने जायेंगे।

कुछ देशों में यदि यह इतना शक्तिशाली है, तो अपने देश में क्यों नहीं, अपने आस-पड़ोस में, अपने दोस्तों के साथ, अपने सम्बन्धियों के साथ, यह संभव है। 

इसलिए आज रात आपको यह निश्चय करना होगा कि आप इसे दूसरों को देने के लिए स्वयं को समर्पित करेंगे । यह बहुत आनंद देने वाला है। और सहज योग के बारे में बात करेंगे।

परमात्मा आपको आशीर्वादित करें।