Makar Sankranti Puja पुणे (भारत)

Hindi Talk

आज का दिन पृथ्वी के उत्तर भाग में महत्त्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि सूर्य दक्षिण से उत्तर में आता है। इसलिये नहीं कि ये हम कर रहे हैं। हर साल एक ही तारीख जो कि सूर्य के ऊपर कार्य हम करते हैं,  तो हम लोग उसको क्यों इतना मानते हैं? क्या विशेष बात है कि सूर्य अगर उत्तर में आ गया, तो हम लोगों को उसमें इतनी खुशी क्यों? बात ये है कि सूर्य से ही हमारे सब कार्य जो हैं प्रणीत होते हैं। अँधेरे में, […]

Public Program पुणे (भारत)

Public Program, Pune, India 7th March 2000

सत्य को खोजनेवाले सभी साधकों को हमारा प्रणाम !! 

  आज संसार भर में सत्य की खोज हो रही हैI क्योंकि लोग सोचते हैं जिस जीवन में वो उलझे हुए हैं, वो उलझन इसलिए है कारन वो सत्य को नहीं जानते। अपने देश में शायद ये भावना कम हो लेकिन और अनेक देशों मे ये भावना बहुत जबरदस्त है और अपने देश में भी होनी चाहिए I अब हम रोज अख़बार पढ़ते हैं तो यही सुनते हैं की इतने यहाँ लोग गुंडागर्दी कर रहे हैं, […]

Diwali Puja: Sahaj Yog ki shuruvaat (भारत)

Diwali Puja – Sahajayog Ki Shuruvat Date 29th October 1995 : Place Nargol Puja Type Speech Language Hindi

ये तो हमने सोचा भी नहीं था इस नारगोल में २५ साल बाद इतने सहजयोगी एकत्रित होंगे। जब हम यहाँ आये थे तो ये विचार नहीं था कि इस वक्त सहस्रार खोला जाए। सोच रहे थे कि अभी देखा जाय कि मनुष्य की क्या स्थिति है। मनुष्य अभी भी उस स्थिति पे नहीं पहुँचा जहाँ वो आत्मसाक्षात्कार को समझें। हालांकि इस देश में साक्षात्कार की बात अनेक साधू-संतों ने सिद्धों ने की है और इसका ज्ञान महाराष्ट्र में तो बहुत ज़्यादा है। कारण यहाँ जो मध्यमार्गी थे जिन्हें नाथ पंथी कहते हैं, […]

Public Program, Sarvajanik Karyakram कोलकाता (भारत)

Public Program

सत्य
को खोजने वाले आप सभी साधकों
को हमारा प्रणाम

इस
कलियुग में मनुष्य जीवन की
अनेक समस्याओं के कारण विचलित
हो गया है,
और
घबरा रहा है। कलियुग में जितने
सत्य को खोजने वाले हैं,
उतने
पहले कभी नहीं थे और यही समय
है जबकि आपको सत्य मिलने वाला
है। लेकिन ये समझ लेना चाहिए
कि हम कौनसे सत्य को खोज रहे
हैं ?
क्या
खोज रहे हैं?
नहीं
तो किसी भी चीज़ के पीछे हम लग
करके ये सोचने लग जाते हैं कि
यही सत्य है। इसका कारण ये है, […]

Shri Mahavira Puja (भारत)

श्री महावीर पूजा, नयी दिल्ली, भारत
कह रहे है की आज महावीर जयंती है। बड़ा अच्छा दिन है। और महावीर जी जो थे, वो हमारी इडा नाडी पर उनका राज्य है। और हमारे अंदर जो संस्कार, कुसंस्कार ये सब होते है उसको वो ठीक करते है। और उन्होंने नर्क की व्याख्या की है। नर्क के बारे में बताया की नर्क क्या है। मनुष्य नर्क में जाता है, तो उसका क्या हाल होता है और उसकी क्या दुर्दशा होती है, […]

Shri Mahalakshmi Puja, The Universal Love (भारत)

Shri Mahalakshmi Puja. Kalwe (India), 30 December 1992.

[Translation from English to Hindi]

 आपको किसी भी बात की चिंता करना बंद करना चाहिए. । आपके लिए सब व्यवस्था की हुई है। सब प्रबंध किया हुआ है। किसी भी चीज की चिंता करने की जरूरत नहीं है। अगर आप किसी भी बात की चिंता करते रहते हैं तो मुझे तकलीफ होती है। क्या आप सहज योगी नहीं है? हर बात के हर चीज की व्यवस्था की हुई है। किसी भी बात की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। सहज योगियों ने उस स्तर पर गिरना नहीं चाहिए।सहज योगियों ने इतने साधारण स्तर पर गिरना नहीं चाहिए। आखिर आपको क्या हो सकता है? […]

Birthday Puja Talk (भारत)

Birthday Puja, Delhi, India, 3rd of Octoer, 1991
आज आप लोगों ने मेरा जन्म-दिवस मनाने की इच्छा प्रगट की थी I अब मेरे कम-से-कम चार या पांच जन्म-दिवस मनाने वाले हैं लोग I इतने जन्म-दिवस मनाइएगा उतने साल बढ़ते जाएंगे उम्र के I लेकिन आपकी इच्छा के सामने मैंने मान लिया कि इसमें आपको आनंद होता है, आनंद मिलता है तो ठीक है I
लेकिन ऐसे दिवस हमेशा आते हैं I उसमें एक कोई तो भी नई चीज हमारे जीवन में होनी चाहिए, […]

Public Program Day 2 New Delhi (भारत)

Public Program, Ram Lila Maidan Delhi, India 05th April 1990

सत्य को खोजने वाले आप सभी साधकों को हमारा नमस्कार!

  कल आपसे मैने कहा था कि हमारे अंदर एक बड़ा भारी सत्य है और बाह्य में दूसरा सत्य। पहला सत्य तो ये है कि हम आत्मा हैं, हम आत्मा स्वरूप हैं और दूसरा सत्य ये है कि ये सारी सृष्टि, ये सारा संसार एक बड़ी सूक्ष्म ऐसी शक्ति है, उससे चलता है। और ये शक्ति जो है, […]

Talk मुंबई (भारत)

Public Program,Mumbai , India, 17th December 1982

 The recording of the advice given by Her Holiness Mataji Shri Nirmala Devi ji on 17/12/1982   at Parel on the occasion of Her Felicitation by ‘Swajan’. She has explained the meaning of ‘what is Swajan’

“स्वजन” के सब सदस्य तथा इसके संचालक और सर्व सहज योगी आप सबको मेरा प्रणाम! जैसा कि बताया गया स्वजन शब्द यह एक बड़े ध्येय की चीज़ है। स्वजन ये जो नाम हम लोगों ने बदल के इस संस्था को दिया था, […]

Birthday Puja मुंबई (भारत)

Birthday Puja. Mumbai, Maharashtra (India). 21 March 1979.

[Hindi Transcript]

आज …. (inaudible-Shri Mataji is describing what day it was) है। मेरा मन उमड़ आता है। आज तक लगातार बम्बई में ही ये जन्मदिवस मनाया गया। बम्बई में बहुत मेहनत करनी पड़ी है, सबसे ज्यादा बम्बई पर ही मेहनत की। लोग कहते भी हैं कि,”माँ, आखिर बम्बई में आपका इतना क्या काम है?“ पहले तो यहाँ पर रहना ही हो गया था, लेकिन बाद में भी बम्बई में काम बहुत हो सकता है, […]

Atma Ki Anubhuti (भारत)

Atma Ki Anubhuti, 28th December 1977

[Hindi Transcription]

 ORIGINAL TRANSCRIPT HINDI TALK आपसे पिछली मर्तबा मैंने बताया था, कि आत्मा क्या चीज़ है, वो किस प्रकार सच्चिदानंद होती है, और किस प्रकार आत्मा की अनुभूति के बाद ही मनुष्य इन तीनों चीज़ों को प्राप्त होता है। आत्मसाक्षात्कार के बगैर आप सत्य को नहीं जान सकते। आप आनन्द को नहीं पा सकते। आत्मा की अनुभूति होना बहुत जरूरी है। अब आप आत्मा से बातचीत कर सकते हैं। आत्मा से पूछ सकते हैं। आप लोग अभी बैठे हुए हैं, […]

महाशिवरात्री पूजा-उत्पत्ति, आदिशक्ति और शिव मुंबई (भारत)

1976-02-29 Mahashivaratri Puja: Utpatti – Adi Shakti aur Shiva ka Swaroop, Mumbai, महाशिवरात्री पूजा-उत्पत्ति, आदिशक्ति और शिव मुंबई २९/२/७६

आप से पहले मैने बताया उत्पत्ति के बारे में क्योंकि महाशिवरात्रि के दिन जब शिवजी की बात करनी है तो उसका प्रारंभ उत्पत्ति से ही होता है इसलिए वह आदि है । पहले परमेश्वर का जब पहला स्वरूप प्रगटीत होता है, याने मॅनिफेस्ट होता है जब की वह ब्रह्म से प्रकाशित होते है, उस वक्त उन्हे सदाशिव कहा जाता है । इसलिए शिवजी जो है, […]

Talk to Sahaja Yogis मुंबई (भारत)

1975-0331 Advice at Bhartiya Vidya Bhavan 

आप लोग जो पहले ध्यान में आये थे तो आपसे मैंने बताया था कि परमात्मा के तीन आस्पेक्ट होते हैं,  और इसी कारण उनकी तीन शक्तिया संसार में कार्य करती हैं।  पहली शक्ति का नाम महालक्ष्मी,  दूसरी का महासरस्वती, तीसरी का महाकाली।  उसमें से महाकाली की शक्ति हर एक जड़ जीव,  हर एक पदार्थ में प्रणव रूप से है।  प्रणव रूप से रहती है, माने जिसे हम अभी वाइब्रेशन कह रहे हैं जो आपके हाथ से निकले हैं, इसी रूप में। जो सिर्फ मनुष्य के ह्रदय में और प्राणी मात्र के ह्रदय में ये शक्ति स्पनदित है, पलसेट (pulsate) करती है। जब वो शक्ति जड़ चीजो में रहेती है महाकाली की वो शक्ति जो जड़ चीजो में रहेती है  तो वही प्रणव एलेक्ट्रोमेग्नटिक वाइब्रेशन  (electromagnetic vibration) की तोर पर दिखाई देता है। जब वो शक्ति जिवित चीज में जागृत होती है तब वो स्पंदन पल्सेसन की तरह से दिखाई देता है। (डॉक्टर आप के लिये खास कर बोल रहे हैं,  आज का इधर आइये) पर महाकाली की जो शक्ति है उसी शक्ति से सारी श्रुष्टि का संचार होता है।  […]

Teen Shaktiya मुंबई (भारत)

TEEN SHAKTIYAN, Date: 21st January 1975, Place: Dadar, Type: Seminar & Meeting

[Hindi Transcript]

जैसे कोई
माली बाग लगा देता है और
उस पे प्रेम से सिंचन करता है
और उसके बाद देखते रहता है कि
देखें कि बाग में
कितने फूल खिले खिल
रहे हैं। वो देखने
पर जो आनन्द एक माली
को आता है उसका क्या वर्णन हो
सकता हे! कृष्ण
नाम का अर्थ होता है कृषि से”,
कृषि आप
जानते है खेती को
कहते हैं। कृष्ण
के समय में खेती हुई
थी और क्राइस्ट
के समय में उसके खून
से सींचा गया था। इस संसार की
उर्वरा भूमि को
कितने ही अवतारों
ने पहले संबारा हुआ था।
आज कलियुग में ये समय आ गया है
कि उस खेती की बहार देखें, […]

Public Program (भारत)

1973-0125 Public Program, Bordi (Hindi)

सो आपके स्वादिस्ठान चक्र में अगर कुछ गरबड हो तो आप ये अंगूठे से ठीक कर सकते हो. अंगूठे से. अब आपको अपना महत्व देखना है की आप क्या है.?  आप शीशे के सामने खड़े हो जाये ऐसे पोज करके, आपमें चेंज आना शुरु हो जायेगा. आपका जो रिफ्लेक्सन शीशे में पड रहा है उसीसे आप समझ सकते है की आप क्या चीज है ? अपना खुद ही प्रतिबिंब देखे आप शीशे में और देखते रहे. […]

Unidentified Talk (Extract on Agnya Chakra) (भारत)

1970-0101 Unidentified Hindi Talk (Extract on Agnya Chakra)

बैठे
थे,
प्रोग्राम
में आये थे,
तो
भी कुछ न कुछ अपनी विपदा सोचते
रहे । अरे
!
मेरे
साथ ये हुआ,
मेरे
साथ वो हुआ,
ऐसा
हुआ,
वैसा
हुआ ।
और माताजी से मैं कब बताऊं,
मेरी
विपदा क्या हुई?
माताजी
आप देवी हैं,
मेरी
ये विपदा है|
बजाय
उसके कि जो कहे जा रहे हैं उसको
समझें,
अपनी
ही अंदरूनी बात को ही सोच-सोच
करके आप चली गई उस बहकावे में
।  […]