11th Day of Navaratri Campus, Cabella Ligure (Italy)

नवरात्रि पूजा। कैबेला लॅक्गर (इटली), 8 अक्टूबर 2000. आज हम देवी की पूजा करने जा रहे हैं, हम उन्हें अम्बा कहते हैं, और कई अन्य नामों से। वह अंतिमा है, हमें कहना चाहिए, “अवशिष्ट शक्ति”। जब वह सभी कार्य पूर्ण कर चुकी होती है, तब वह कुंडलिनी बन जाती है और आप की त्रिकोणीय हड्डी में बस जाती है। यह मूलाधार चक्र है। लेकिन वास्तव में वह बाईं तरफ अधिक अभिव्यक्त होती है, क्योंकि, उस समय, वह विशुद्ध रूप से अम्बा है। सभी मनुष्यों के लिए यह बाईं बाजू बहुत महत्वपूर्ण है। यदि आपके पास कोई बाईं बाजू नहीं है, तो आप अपने आप को संतुलित नहीं कर सकते, शुरुआत में। और कहा जाता है कि वह आपको सहज योगी का वास्तविक व्यक्तित्व प्रदान करती है। ऐसा है कि, यदि आपकी बाईं नाड़ी कमजोर है, तो आपको उनकी पूजा करनी होगी, और उनसे अनुरोध करना होगा कि: “कृपया हमारी बाईं नाड़ी को समृद्ध करें।” आपकी बाईं नाड़ी को समृद्ध करके, वह क्या करती है, वह सुख प्रदाता है, इसलिए वह आपको क्या देती हैं? सबसे पहले, वह आपको सुख देती हैं। यह कहा जाता है कि वह आपको आराम देती है। ऐसा है कि, वह आपको नींद देती है। यदि आप भविष्य के बारे में बहुत अधिक सोच रहे हैं और आप भविष्य की योजना में बहुत लिप्त हैं, तो आपको कुछ समस्याएं हैं। लेकिन सबसे अच्छी बात यह है, अगर आप सो सकते हैं, तो यह एक बड़ा आराम है, यह आपके लिए बहुत ही सुखद है, कि आप Read More …

8th Day of Navaratri, The Powers of Shri Mahakali Campus, Cabella Ligure (Italy)

                                                नवरात्रि पूजा  कबेला लिगरे (इटली), 17 अक्टूबर 1999 आज रात हम यहां देवी की पूजा करने के लिए एकत्र हुए हैं, जिन्हें की हम महाकाली कह सकते हैं – या दुर्गा। उन्होने कई प्रकार के रूप धारण किए हैं, उन नकारात्मक शक्तियों को मारने के लिए जो परेशान करने या बाधित करने की कोशिश कर रही हैं, या यहां तक ​​कि उन लोगों को विकसित करने के लिए जो सभ्य और अच्छे थे। उसके रूप विभिन्न प्रकार के हैं – जिसके बारे में हम जानते हैं कि, उन्होने कितने राक्षसों को नष्ट किया, उन्होने कितने दुष्टों को नष्ट किया। साथ ही हमें यह भी जानकारी नहीं हैं कि जो हमारे विश्व युद्ध हुए थे, वह सही प्रकार के लोगों की रक्षा के लिए वहां मौजूद थीं। और इस तरह वे सभी बहुत ही क्रूर और दुष्ट लोगों की खून खराबे की योजना, दुष्प्रयोजन से बच गए। दुष्ट लोगों में हर संभव तरीके से घृणा करने और अपनी घृणा व्यक्त करने की क्षमता होती है। वे वास्तव में पैदाइशी दुष्ट हैं और कुछ ऐसे भी हैं जो ‘बुराई’ बन जाते हैं। जब वे दुष्ट पैदा होते हैं, तो आप उन्हें इस तरह पहचान सकते हैं: कि उनकी पूरी शैली अति आक्रामक और चीजों के प्रति इतनी प्रतिशोधी है। लेकिन नफरत की कोई सीमा नहीं है, बिल्कुल कोई सीमा नहीं है। क्योंकि, अगर वे नफरत करते हैं, अगर वे किसी से नफरत करते हैं, तो – बस उस नफरत को सही ठहराने के लिए – वे हर तरह की बातें कहेंगे। सिर्फ Read More …

7th Day of Navaratri, You all should depend on Paramchaitanya Campus, Cabella Ligure (Italy)

                 नवरात्रि पूजा, “शुद्ध ज्ञान”  कबेला (इटली), 27 सितंबर 1998 आप कल्पना नहीं कर सकते कि एक माँ, जिसके इतने सुंदर बच्चे हैं, उन्हें अपने परिवारों के साथ इतनी हर्षित मनोदशा में, अपने बच्चों को अच्छी तरह स्थापित देख कैसा महसूस करती है। आप सभी को इतना आनंद और परमात्मा के साथ पूर्ण एकाकारिता में देखकर बहुत संतोष होता है। किसी व्यक्ति को केवल एक ही बात समझनी है, कि यद्यपि आप बहुत हैं, फिर भी, इस दुनिया की आबादी की तुलना में, हम बहुत कम हैं जो वास्तव में सच्चे ज्ञान, वास्तविक ज्ञान को जानते हैं। बेशक, आप ज्ञानी लोग हैं। लेकिन साथ ही ऐसा ज्ञान जो सत्य से सुशोभित नहीं है, या जो सच्चा ज्ञान नहीं है, अर्थहीन है। वह सब कुछ हवा में गायब हो जाता है क्योंकि यह कृत्रिम है। अपने कुंडलिनी जागरण से, आप सभी ने वह अवस्था प्राप्त कर ली है, जहाँ हम कह सकते हैं, आप जानते हैं। आप जानते हैं कि वास्तविक ज्ञान क्या है। लेकिन उन लोगों के बारे में सोचो जो नहीं जानते कि ज्ञान क्या है। हम, उदाहरण के लिए, हम कहते हैं कि हमारा ज्ञान प्रेम के अलावा और कुछ नहीं है। लेकिन व्यक्ति को विवेकबुद्धि को समझना चाहिए। तुम्हारे भीतर, ज्ञान जो प्रेम है, वह तुम्हारे अस्तित्व से उत्सर्जित हो रहा है। आपको जताने की जरूरत नहीं है। आपको सोचने की जरूरत नहीं है। आपको किसी प्रकार की कविता पढ़ने या किसी प्रकार के प्रेम-प्रदर्शन में जाने की आवश्यकता नहीं है। यह केवल शुद्ध प्रेम है जो उत्सर्जित Read More …

6th Day of Navaratri, Your Beautiful Qualities will prove the Truth of Sahaja Yoga Campus, Cabella Ligure (Italy)

1997-10-05 छठा दिन, नवरात्रि पूजा प्रवचन, कबेला,इटली आज नवरात्रि का छठा दिन है ।  देवी के अनेक अवतरण हुए हैं, विभिन्न विभिन्न उद्देश्यों के लिए। लेकिन महान संतों  ने जब स्वयं का आत्मनिरीक्षण किया, जो मॉं की पूजा कर रहे थे तो उन्हें पता चला कि उन्होंने हमारे लिए क्या किया है । दूसरे दिन मैंने आपको बताया था कि धर्म, मनुष्य का अंतर्निहित गुण है। और वे दस हैं। यह हमारे भीतर पहले से ही स्थापित है, लेकिन हम भटक जाते हैं, धर्म से भटक जाते हैं और सभी समस्याएं सामने आती हैं, क्योंकि धर्म छोड़ना मानव का गुण नहीं है। लेकिन देवी ने खुद हमारे लिए,हमारे भीतर पहले से ही बहुत सारे काम किए हैं, हालांकि हमें इसका बोध नहीं है । कहा जाता है कि “या देवी सर्व भूतेषु”- “वे सब लोग  जिनको आपने बनाया है” – अर्थात ज्यादातर मनुष्य – “आप क्या करती हैं? मनुष्य के अंदर आप किस रूप में मौजूद हैं? अब जरा आत्मनिरीक्षण करें कि आपके भीतर ये गुण हैं या नहीं, क्योंकि ये आपको देवी द्वारा दिए जाते हैं, आपके भीतर की शक्ति के द्वारा । जैसे: “या देवी सर्व भूतेषु शांति रूपेणा संस्थिता” – ये बहुत महत्वपूर्ण है, कि आप मनुष्यों के भीतर शांति के रूप में विद्यमान हैं । क्या आप ऐसे मनुष्य पाते हैं जो भीतर और बाहर शांतिपूर्ण हैं? बहुत मुश्किल है। लेकिन उन्होंने आपको यह दिया है कि, उन्होंने आपको वह शांति दी है जिसे आपको प्राप्त करना है। अब यह होता है, क्योंकि आप अपने मानव Read More …

8th Day of Navaratri: Be Aware Of Your Own State Campus, Cabella Ligure (Italy)

                                                नवरात्रि पूजा  कबेला लिगरे (इटली), 20 अक्टूबर 1996 आज एक विशेष दिन है, जैसा कि आप जानते हैं कि हम देवी की पूजा कर रहे हैं, जो इस धरती पर नौ बार पहले आई थीं, सभी राक्षसों और सभी नकारात्मकता को मारने और सभी भक्तों को आराधना करने के लिए राहत देने के लिए। उसके सभी कार्यों का वर्णन पहले ही किया जा चुका है। इसके बावजूद वे पाते हैं कि, नए प्रकार के शैतान, नए प्रकार के नकारात्मक लोग, वापस आ गए हैं। शायद होना ही था। शायद यही होना था, आखिर यह कलियुग है और जब तक वे ना हों,  कलियुग का नाटक नहीं किया जा सकेगा। तो इस ड्रामा को पूरा करने वे आए थे। लेकिन इस बार बहुत अलग तरह का युद्ध होने जा रहा है। यह शांतिपूर्ण लोगों का युद्ध होने जा रहा है और शांतिपूर्ण लोग जीवन के हर क्षेत्र में सबसे सफल लोग हैं, यहां तक ​​कि युद्ध में भी। पहले ऐसा कार्यान्वित नहीं हुआ करता था। वे कहते हैं कि जब चंगेज खान आया, तो वह गया के पास, बौद्ध के एक बहुत बड़े मठ में गया, और उन सभी को मार डाला, वहां लगभग 30,000 बौद्ध थे, और उन्होंने एक शब्द भी नहीं कहा और वे सभी मारे गए। इसलिए लोगों ने बौद्ध धर्म में अविश्वास करना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा, “यहां किस तरह का बौद्ध धर्म है, बुद्ध ने उन्हें क्यों नहीं बचाया। ऐसी है मानवीय सोच है। बुद्ध को इन 30,000 लोगों को बचाना चाहिए था जो शांतिपूर्ण Read More …

9th Day of Navaratri, Reintrospect Yourself Campus, Cabella Ligure (Italy)

                      नवरात्रि पूजा कबेला (इटली), 24 अक्टूबर 1993। आज हम यहां देवी की पूजा करने के लिए एकत्रित हुए हैं। देवी के कई रूप हैं, लेकिन वह शक्ति का अवतार हैं। आदि शक्ति इन सभी अवतारों को शक्ति देती है और इसलिए हमारे पास कई देवी हैं। अलग-अलग समय पर वे इस धरती पर आए और जो साधक लोग थे उनके उत्थान के लिए वह सब किया जो आवश्यक था। विशेष रूप से जिसे हम जानते हैं, जगदम्बा, दुर्गा। वह सत्य के सभी साधकों की रक्षा करने और सभी बुरी ताकतों को नष्ट करने की कोशिश कर रही थी, क्योंकि मनुष्य अपने उत्थान के बिना सत्य को नहीं जान पाते हैं, और इसलिए वे जो कुछ भी करने की कोशिश करते हैं वह एक मानसिक प्रक्षेपण (कल्पना)है, और यह मानसिक प्रक्षेपण, यदि यह सत्य पर, धर्म पर आधारित नहीं होता है, इसका पतन होता है। संस्कृत में इसे ग्लानी कहते हैं। जब यह ग्लानी होती है, तब अवतारों का जन्म होता है-समस्या को हल करने के लिए। देवी के सभी अवतारों के दौरान शैतानी ताकतों का भी बहुत अधिक अवतार हुआ है, उन्होंने अवतार लिया था, और देवी को उनसे युद्ध करके उन्हें नष्ट करना पड़ा था। लेकिन यह विनाश केवल विनाश की ख़ातिर नहीं था कि बुरी ताकतों को नष्ट कर दिया जाए, बल्कि बुरी ताकतें हमेशा साधकों को नीचे गिराने की कोशिश करती हैं, संतों को नीचे गिराने की कोशिश करती हैं, उन्हें नुकसान पहुंचाने की कोशिश करती हैं, कभी-कभी उन्हें नष्ट भी कर देती हैं। ये सभी विनाशकारी Read More …

1st Day of Navaratri, 10th Position Campus, Cabella Ligure (Italy)

नवरात्रि पूजा कबेला लिगरे (इटली), 27 सितम्बर 1992। आज नवरात्रि का पहला दिन है। और जब मैंने पाया कि बारिश हो रही है और सभी प्रकार की समस्याएं हैं, और विष्णुमाया कुछ सुझाव दे रही थी, तो मैंने जरा कैलेंडर देखा, और आप यह जानकर चकित होंगे कि कैलेंडर में लिखा है कि पांच पैंतालीस तक यह शुभ नहीं है यह अशुभ है। पाँच पैंतालीस के बाद ही उचित शुरूआत होती है, तो ज़रा सोचिए, गणना करके यह कैसे सही था कि पाँच पैंतालीस के बाद ही हमें यह पूजा करनी थी, पाँच पैंतालीस के बाद। यानी इटली में या यूरोप में नवरात्रि का पहला दिन पांच पैंतालीस के बाद शुरू होता है। तो यह कुछ ऐसा है जिस से हमें समझना चाहिए कि चैतन्य सब कुछ कर रहा है, और वह सभी सुझाव दे रहा है; क्योंकि मैंने तो देखा ही नहीं था, जिसे आप तिथि कहते हैं, लेकिन मुझे बस ऐसा लगा, मैंने कहा कि यह हम शाम को रख लेंगे। और जब मैंने ऐसा कहा, मैंने कहा “चलो इसे देखते हैं,” और यही हो गया। हमें कितनी चीज़ें देखनी हैं, कि जो कुछ भी रहस्योद्घाटन तुम्हे हुआ है, तुम उसकी पुष्टि कर सकते हो। उदाहरण के लिए, मैंने बहुत पहले कहा था कि मूलाधार चक्र कार्बन, कार्बन परमाणु से बना है, और यदि आप इसे बाएं से दाएं-नहीं दाएं से बाएं, बाएं ओर देखते हैं तो आपको अन्य कुछ नहीं अपितु स्वास्तिक दिखाई देता है। तो, अब आप बाएं से दाएं देखते हैं, फिर आप ॐ देखते Read More …

6th Day of Navaratri, Recognize Me Campus, Cabella Ligure (Italy)

                                                नवरात्रि पूजा  कबेला (इटली), 13 अक्टूबर 1991 आज हम यहां नवरात्रि पूजा करने के लिए एकत्रित हुए हैं। नौ बार ऐसा हुआ था जब इस ब्रह्मांड की मां के प्रमुख अवतार प्रकट हुए थे। वे एक उद्देश्य के साथ प्रकट होते हैं। वह उद्देश्य अपने भक्तों, अपने शिष्यों, अपने बच्चों की रक्षा करना है। यह एक प्रेम का बंधन था, वह इससे बच नहीं सकती थी। माँ की ममता एक बंधन है, वह उससे बच नहीं सकती। और उसे उसे अभिव्यक्त करना ही होता है, उसे कार्यान्वित करना है और अपने सभी बच्चों को वह सुरक्षा देनी है। आधुनिक समय में इस सुरक्षा ने दूसरा रूप धारण कर लिया है। उन दिनों शैतान उन लोगों को नुकसान पहुँचाने, नष्ट करने की कोशिश कर रहे थे, जो धर्मी थे, जो भक्त थे, जो अच्छे काम कर रहे थे, जो एक बहुत ही धार्मिक जीवन जीना चाहते थे। इसलिए उन्हें बचाने के लिए उन्होंने अवतार लिया। उनकी रक्षा के लिए उन्होंने अवतार लिया। लेकिन वे जानते थे कि क्या अच्छा है, वे जानते थे कि क्या गलत है और वे अपने अच्छे जीवन, अपने कीमती जीवन को संरक्षित करना चाहते थे। उन्हें धन की परवाह नहीं थी, उन्हें सत्ता की परवाह नहीं थी, लेकिन वे सिर्फ अपना जीवन चाहते थे, यानी वे जीवित रहना चाहते थे, देवी की पूजा करना चाहते थे। और जब वे इन शैतानी शक्तियों से परेशान या नुकसान या नष्ट हुए, तो उसे प्रकट होना पड़ा। लेकिन आधुनिक समय में यह बहुत जटिल हो गया है क्योंकि आधुनिक Read More …

Navaratri Puja Geneva (Switzerland)

(नवरात्रि पूजा, देवी देवता आपको देख रहे हैं (आर्जियर जिनेवा ( स्विटजरलैंड), 23 सितंबर 1990) इन नौ दिनों में देवी को रात के समय अपने बच्चों की नकारात्मकता के प्रभावों से रक्षा करने के लिये राक्षसों से युद्ध करना पड़ता है। एक ओर तो वह प्रेम व करूणा का अथाह सागर हैं तो दूसरी ओर वह शेरनी की तरह अपने बच्चों की रक्षा करती हैं। पहले के समय में कोई ध्यान धारणा नहीं कर पाता था, परमात्मा का नाम नहीं ले पाता था और न ही आत्म-साक्षात्कार के विषय में सोच पाता था। लेकिन आज जो यहां बैठे हुये हैं …. आप लोग तो उन दिनों भी यहीं थे… आप लोगों को तो इसी दिन के लिये बचाया गया है ताकि आप अपने आत्म साक्षात्कार को प्राप्त कर लें। उन दिनों में देवी का रूप माया स्वरूपी नहीं था। वह अपने वास्तविक स्वरूप में थीं जो उनके भक्तों के लिये भी अत्यंत विस्मयकारी था। सबसे पहले तो उनकी रक्षा की जानी थी। अतः जिस प्रकार से माँ अपने बच्चे को नौ महीने तक गर्भ में धारण करती है, इन नौ महीनों में …. या मान लीजिये नौ युगों में… आप सब की पूरी तरह से रक्षा की जाती रही है और फिर दसवें माह में आपको जन्म दिया गया है। यह जन्म भी हमेशा नौ महीनों के सात दिन बाद दिया गया है। इसके परिपक्व होने तक कुछ समय तक इंतजार किया गया। अतः नवरात्रि का दसवां दिन वास्तव में आदि-शक्ति की पूजा का है तो आज हम सचमुच आदि-शक्ति Read More …

Birthday Puja, Sahaja Yoga me pragati ki Teen Yuktiyaan New Delhi (भारत)

Janm Diwas Puja Date 30th March 1990 : Place Delhi : Type Puja Speech Language Hindi आज नवरात्रि की चतुर्थी है और नवरात्रि को आप जानते हैं रात्रि को पूजा होनी चाहिए। अन्ध:कार को दूर करने के लिए अत्यावश्यक है कि प्रकाश को हम रात्रि ही में ले आएं। आज के दिन का एक और संयोग है कि आप लोग हमारा जन्मदिन मना रहे हैं। आज के दिन गौरी जी ने अपने विवाह के उपरान्त श्री गणेश की स्थापना की। श्री गणेश पवित्रता का स्रोत हैं। सबसे पहले इस संसार में पवित्रता फैलाई गई जिससे कि जो भी प्राणी, जो भी मनुष्यमात्र इस संसार में आए वो पावित्र्य से सुरक्षित रहें और अपवित्र चीज़ों से दूर रहें। इसलिए सारी सृष्टि को गौरी जी ने पवित्रता से नहला दिया। और उसके बाद ही सारी सृष्टि की रचना हुई। तो जीवन में सबसे महत्त्वपूर्ण कार्य हमारे लिए यह है कि हम अपने अन्दर पावित्र्य को सबसे ऊंची चीज़ समझें| लेकिन पावित्र्य का मतलब यह नहीं कि हम नहाएँ, धोएं, सफाई करें, अपने शरीर को ठीक करें किन्तु अपने हृदय को स्वच्छ करना चाहिए। हृदय का सबसे बड़ा विकार है क्रोध। क्रोध सबसे बड़ा विकार है, और जब मनुष्यमें क्रोध आ जाता है तो जो पावित्र्य है वो नष्ट हो जाता है क्योंकि पावित्र्य का दूसरा ही नाम निर्वाज्य प्रेम है। वो प्रेम जो सतत बहता है और कुछ भी नहीं चाहता। उसकी तृप्ति उसी में है कि वो बह रहा है और जब नहीं बह पाता तो वह कोंदता है, परेशान होता Read More …

8th Day of Navaratri, Talk to English Yogis on Style and Content Butlins Grand Hotel, Margate (England)

नवरात्रि का 8वां दिन  मार्गेट, 6 अक्टूबर 1989 अंग्रेज योगियों से बात, आज देवी पूजा का आठवां दिन है और इस दिन, काली की शक्ति काम करती है और उन्हें संहार काली कहा जाता है, जिसका अर्थ है सभी बुरी शक्तियों को नष्ट करने वाली। तो यह एक बहुत अच्छा दिन है, कि हमारे यहां, इंग्लैंड में, पूजा है। मैं इससे बहुत खुश हूं। मेरा चश्मा?  मुझे लगता है,मेरे पर्स में है। वौ कहा हॆ? उसके पास यह होगा? अब, मैं सोच रही थी कि मुझे यू.के. के सहज योगियों से बात करनी चाहिए, क्योंकि यह बहुत महत्वपूर्ण है। अब मैं यूके में अपने सोलह साल के प्रवास को समाप्त कर रही हूं और मुझे वास्तव में आप लोगों का इतना प्यार और इतनी भलाई मिली है। अब अगले साल, मैं यहां नहीं रहूंगी क्योंकि मेरे पति का तबादला होने वाला है और निश्चित रूप से मैं और भी वापस आऊंगी और एक या करीब एक महीने के लिए, मैं आपके साथ रह सकती हूं, शायद मैं पहले से कहीं ज्यादा जितना अब तक रही हूँ उससे ज्यादा करीब रहूंगी। लेकिन कुछ ऐसा है जोकि मुझे लगता है कि मुझे आप लोगों को चेतावनी देनी चाहिए, क्योंकि अब मुझे गैविन [ब्राउन] के बारे में बहुत सारे पत्र मिल रहे हैं कि, “गैविन ऐसा क्यों हो गया है? उसके साथ क्या गलत हुआ है?” शायद हर कोई इन घटनाओं को,और कुछ अन्य सहज योगियों को भी ऐसा होते देख काफी डरा हुआ लगता है । क्योंकि अन्य देशों में, जब सहजयोगी Read More …

Sixth Day of Navaratri पुणे (भारत)

Navaratri Puja – Hamare Jivan Ka Lakshya Date: October 16th, 1988                      Place: Pune  Type: Puja Speech                                   Language: Hindi आज हम लोग यहाँ शक्ति की पूजा करने के लिए एकत्रित हुए हैं। अभी तक अनेक संत साधुओं ने ऋषि मुनियों ने शक्ति के बारे में बहुत कुछ लिखा और बताया है। और जो शक्ति का वर्णन उन्होंने अपने गद्य में नहीं कर पाये, उसे उन्होंने पद्य में किया। और उस पर भी इसके बहुत से अर्थ भी जाने (अष्पष्ट)।  लेकिन एक बात शायद हम लोग नहीं जानते हैं कि हर मनुष्य के अन्दर ये सारी शक्तियाँ सुप्तावस्था में हैं। और ये सारी ही शक्तयाँ मनुष्य अपने अन्दर जागृत कर सकता है। ये सुप्तावस्था की जो शक्तियाँ हैं उनका कोई अंत ही नहीं है, न ही उन का कोई अनुमान कोई दे सकता है। क्योंकि ऐसे ही पैंतीस कोटी तो देवता आपके अन्दर विराजमान हैं उस के अलावा न जाने कितनी ही शक्तियाँ उनको चला रही हैं। लेकिन इतना हम लोग समझ सकते हैं कि जो हमनें आज आत्मसाक्षात्कार को प्राप्त किया है, तो उसमें जरूर कोई न कोई शक्तियों का कार्य हुआ। उस कार्य के बगैर आप आत्मसाक्षाल्कार को नहीं प्राप्त कर सकते। ये आत्मसाक्षात्कार को प्राप्त करते वक्त हम लोग सोचते हैं कि ये सहज में हो गया। पर सहज में दो अर्थ हैं, एक तो सहज का अर्थ ये भी है कि Read More …

7th Day of Navaratri, Shri Mahadevi Puja कोलकाता (भारत)

Shri Mahadevi Puja Date: 10th October 1986    Place: Kolkata    Type: Puja Speech Language: Hindi आज पूजा में पधारे हुए सभी भाविकों को और साधकों को हमारा प्रणिपात! इस कलियुग में माँ की इतनी सेवा, इतना प्यार, और इतना विचार जब मानव हृदय में आ जाता है  तो सत्ययुग की शुरूआत हो ही गयी। ये परम भाग्य है हमारा भी कि षष्ठी के दिन कलकत्ता में आना हआ। जैसा कि विधि का लेखा है, कि कलकत्ता में षष्ठी के ही दिन आया जाता है। षष्ठी का दिन शाकंभरी देवी का है। और उस वक्त सब दूर हरियाली छानी चाहिये। हालांकि यहाँ पर मैंने सुना कि बहुत जोर की बाढ़ आयी, लोगों को बड़ी परेशानी हुई। लेकिन देखती हूँ कि हर जगह हरियाली छायी हुई है। रास्ते टूटे गये थे, पर कोई पेड़ टूटा हुआ नज़र नहीं आया। मतलब ये कि सृष्टि जो कार्य करती है, उसके पीछे कोई न कोई एक निहित, एक गुप्त सी घटनायें होती हैं। कलकत्ता का वातावरण अनेक कारणों से प्रक्षुब्ध है और अशुद्ध भी हो गया है। इसे हमें समझ लेना चाहिये, ये बहुत जरूरी है। इसीलिये देवी की अवकृपा हुई है या कहना चाहिये कि सफ़ाई हुई है।  कलकत्ते में, जहाँ कि साक्षात देवी का अवतरण हुआ। उनका स्थान यही है, जो कि सारे विश्व का हृदय चक्र यही पे बसा हुआ है।  ऐसी जगह हम लोगों ने बहुत ही अधार्मिक कार्यों को महत्त्व दिया है। और सबसे बड़ा अधार्मिक कार्य तांत्रिकों को मानना है। तांत्रिक तो वास्तविक में माँ ही है जो Read More …

Navaratri, Shri Gauri Puja पुणे (भारत)

Shri Gauri Puja 5th October 1986 Date : Place Pune Type Puja Speech Language Hindi & Marathi पूना शहर का नाम वेदों में, पूराणों में सब जगह मशहूर है । इस को पुण्यपट्टणम कहते है। पुण्यपट्टणम और इस जगह जो नदी बहती है उसका नाम है मूल नदी | जो यहाँ से मूल बहता है, ऐसी ये नदी | यहाँ पर हजारों वर्षों से बह रही है और इस भूमी को पूरण्यवान बना रही है। हम लोगों को पुण्य के बारे में पूरी तरह से मालूमात नहीं है । बहुत से लोग सोचते है अगर हम गरीबों को कुछ दान दे दें या कोई चीज़ किसी को बाँट दें या कभी हम सच बोले या थोडी बहुत कुछ अच्छाई कर लें तो हमारे अन्दर पुण्य समा जाता है। इस तरह का पुण्य संचय होता तो होगा लेकिन वो एक बुँद, बुँद, बुँद बनकर के न जाने कब सरोवर हो सकता है। पुण्य का जो अर्थ है, उसको जैसा जाना गया है कि ऐसे कार्य करना कि जिसे परमात्मा संतोषित हो, जिसे परमात्मा खुष हो ऐसे कार्य हमें करने चाहिए । और जो आदमी ऐसे कार्य करता है वही पुण्यवान आत्मा होता है क्योंकि जब वो परमात्मा को खुष कर देता है, उस पर जो आशीर्वाद परमात्मा के आते है वो उसको पुण्यवान बना देते है। परमात्मा की शक्तियाँ उसके अन्दर आ जाती है वो उसके अन्दर एक नयीं चेतना कहिए या नया व्यक्तित्व कहिए, एक नयी हैसियत कहिए प्रगट करती है। उस हैसियत में मनुष्य ऐसा हो जाता है कि Read More …

6th Day of Navaratri, Complete dedication Weggis (Switzerland)

Navaratri puja. Weggis (Switzerland), 19 October 1985 आज नवरात्रि का महान दिन है। हम छठे और सातवें दिन के मध्य में बैठे हैं। षष्ठी और सप्तमी वह दिन है,जब महासरस्वती ने अपना कार्य संपन्न किया और शक्ति ने इसे स्वयं प्रारंभ किया। इसलिए आज बारह बजे देवी स्वयं शक्ति को धारण करेंगीं। वास्तव में, जैसा आप जानते हैं कि महाकाली और महासरस्वती दोनों श्री सदाशिव की शक्तियां हैं। आदिशक्ति ने सबसे पहले स्वयं को महाकाली के रूप में बनाया ,जो कि इच्छा की शक्ति हैं। लेकिन यह शक्तियां और कुछ भी नहीं है, बल्कि ईश्वर के प्रेम की ही शक्ति हैं। इसलिए इस ईश्वरीय महान प्रेम के क्रम में, आदिशक्ति को सर्वप्रथम इच्छा की शक्ति के रूप में निर्मित होना पड़ा। इसी प्रकार से सहजयोगी, जो इस प्रेम की शक्ति से आशीर्वादित किए गए हैं,उन्हें अपने हृदय में पूर्ण इच्छा रखनी चाहिए। प्रेम करने की इच्छा। वह इच्छा मनुष्य के दूसरे तरह के मानवीय प्रेम से, हम जानते है उस प्रेम से बिल्कुल अलग है। अन्य मानवीय प्रेम के दूसरे तरह के प्रेम में, जब हमारा सम्बन्ध दूसरों के साथ होता है तो हम उनसे उम्मीदें रखते हैं। यही कारण है कि यह बहुत निराशाजनक होता है। हमारी अपेक्षाएं हमेशा हमारी समझ और वास्तविकता से बहुत अधिक होती हैं। यही कारण है कि हम निराशा और कुंठा से ग्रस्त हो जाते हैं। और वही प्रेम जो पोषित करने वाला और परिपूर्ण करने वाला होना चाहिए, वह व्यर्थ हो जाता है। इसलिए जब यह प्रेम मनुष्य में प्रतिबिंबित होता है, तब Read More …

Chaitra Navaratri Puja New Delhi (भारत)

सहजयोगियों के लिये भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति का महत्त्व दिल्ली , २५/३/१९८५ आज नवरात्रि के शुभ अवसर पर सबको बधाई ! सहजयोग के प्रति जो उत्कण्ठा और आदर प्रेम आप लोगों में है वो जरूर सराहनीय है, इसमें कोई शंका नहीं। क्योंकि जो हमने उत्तर हिन्दुस्तान की स्थिति देखी है वहाँ पर हमारी परम्परागत जो कुछ धारणाएँ हैं उसी प्रकार शिक्षा प्रणालियाँ हैं, सब कुछ खोई हुई हैं । बहुत कुछ हम लोगों का अतीत मिट चुका है और हम लोग एक उधेड़बुन में लगे हुए हैं कि नवीन वातावरण, तीन सौ साल की गुलामी के बाद स्वतन्त्रता पाने पर तैयार हुआ, वो एक बहुत विस्मयकारी जरूर है, लेकिन विध्वंसकारी भी है । माने कि जैसे कि हम अपने मूलभूत तत्त्वों से उखड़ से गए हैं। उनका सिंचन नहीं हुआ, ये बात जरूर है, लेकिन जो कि हमारा भी रुझान ज्यादा बाह्य की ओर रहा। ये उत्तर हिन्दुस्तान पर एक तरह का शाप सा है। उत्तर प्रदेश में मैं सोचती हूँ कि सीताजीके साथ जो दुर्व्यवहार किया गया उसके फलस्वरूप अब मेरे ख्याल से धोबियों का ही राज शुरू हो गया है। और बड़ी दुःख की बात है कि जब आप उत्तर प्रदेश में सफर करते हैं तो देखते हैं कि लोगों में उथलापन, अधूरापन, अश्रद्धा, अनास्था आदि इतने बुरे गुण आ गये हैं कि लगता नहीं है कि वहाँ कभी सहजयोग पनप सकता है। बड़ा दूसरी बात बिहार, पंजाब, हर जगह ये पाया जाता है कि हम अपने को कहलाते हैं कि हिन्दू या भारतीय हैं, लेकिन हम अपनी Read More …

8th Day of Navaratri: What We Have To Do Within Ourselves, Talk After the Puja Complexe sportif René Leduc, Meudon (France)

1984-09-30 नवरात्रि पूजा वार्ता: हमे अपने भीतर क्या करना है,पेरिस, फ्रांस  आज नवरात्रि का आठवां दिन है, और यह सहज योगियों के लिए महान दिन है क्योंकि यह सबसे महत्वपूर्ण समय है। यानी हम सातवां चक्र पार कर चुके हैं, और हम आठवें चक्र पर हैं। हमें यह सोचने की आवश्यकता नहीं कि देवी ने आठवें दिन क्या किया, हमें आज यह सोचना होगा कि हमें अपने भीतर क्या करना है। सातवें दिन को पार करने के बाद, सातवें चक्र को पार करने के बाद-जो कि वास्तव में आप का  आध्यात्मिक उत्थान है, हमें आठवें पर क्या करना चाहिए? यह कितना सहज है कि आज अष्टमी का दिन है, क्योंकि इसी दिन देवी ने दुष्टों, शैतानों और राक्षसों का वध किया। उन्होंने यह अपने बल से स्वयं ही किया। अब यह शैतानी शक्तियां  मनुष्य में भी प्रकट हो रही हैं। वह फैल चुके हैं। यह शक्तियां हमारे भीतर हैं। इसलिए हम सभी को अपने भीतर उन ताकतों से लड़ना होगा। युद्ध अपने भीतर है, बाहर नहीं। पहले जब आप सातवें चक्र को पार करते हैं और आप आठवें पर होते हैं, तो आप याद रखें कि पहले आपको स्वयं के भीतर उन ताकतों से लड़ना होगा। आप सब बहुत बुद्धिमान लोग हैं, कभी-कभी कुछ अधिक ही बुद्धिमान। इसलिए मैं जो कुछ भी कहती हूं आप उसे उलट देते हैं, और इसे आप अपनी बुद्धि से उपयोग करने का प्रयत्न करते हैं। लेकिन इसमें आपकी भलाई नहीं है। यह आपके ‘हित’ के लिए नहीं, आपके भले के लिए नहीं है। आप Read More …

Navaratri Puja Hampstead (England)

नवरात्रि पूजा, हैंपस्टड, लंदन 23 सितंबर) हम नवरात्रि का त्योहार क्यों मनाते हैं? हृदय में देवी की शक्तियों को जागृत करना ही नवरात्रि मनाना है… जो शक्ति इन सभी 9 चक्रों में है उसको जानना और जब वे जागृत हो जांय तो आप स्वयं के अंदर उन 9 चक्रों की शक्तियों को किस प्रकार से अभिव्यक्त करना हैं। सात चक्र और हृदय और चांद मिलाकर ये 9 चक्र हुये। परंतु मैं कहूंगी कि ये सात और इनके ऊपर दो अन्य चक्र जिनको विलियम ब्लेक ने भी आश्चर्यजनक व स्पष्ट रूप से 9 ही कहा था। इस समय मैं आपको उन दो ऊपर के चक्रों के विषय में नहीं बता सकती। क्या इन चक्रों की शक्तियों को हमने अपने अंदर जागृत कर लिया है? किस तरह से आप ये कर सकते हैं? आपके पास तो समय ही नहीं है। आप सब लोग तो अत्यंत व्यस्त और अहंवादी लोग हैं इन शक्तियों को जागृत करने के लिये हमें इन चक्रों पर ध्यान केंद्रित करना पड़ता है। जहां भी मैं गई, मुझे आश्चर्य हुआ….. जो प्रश्न उन्होंने मुझसे पूछे …..किसी ने भी मुझसे अपने परिवार, घर, नौकरी या अन्य किसी बेकार बात के बारे में नहीं पूछा …… उन सबने मुझसे पूछा कि माँ हम इन चक्रों की शक्तियों को किस प्रकार से विकसित करें। मैंने उऩसे पूछा कि आप किसी एक चक्र विशेष के बारे में कैसे पूछ रहे हैं तो उन्होंने कहा कि हमारे अंदर अभी बहुत कमियां है … या मेरे अंदर यही चक्र ठीक नहीं है। अब किसी साक्षात्कारी Read More …

1st Day of Navaratri: Innocence and Virginity Temple of All Faiths, Hampstead (England)

                नवरात्रि पूजा, “अबोधिता और कौमार्य” सभी आस्थाओं का मंदिर, हैम्पस्टेड, लंदन (इंग्लैंड) 17 अक्टूबर 1982  आज, यह बहुत अच्छी बात है कि हम इंग्लैंड में वर्जिन (कुँवारी) की पूजा मना रहे हैं। जैसा कि आप जानते हैं, सहज योग के अनुसार, इंग्लैंड हृदय है जहां शिव की आत्मा निवास करती है। और यह कि वर्जिन (कौमार्य) को उच्च मान्यता और सम्मान किया जाना चाहिए और इंग्लैंड में पूजा की जानी चाहिए, मुझे लगता है कि सभी सहज योगियों के लिए यह एक बड़ा सम्मान है। अब किसी को यह सोचना होगा कि कुँवारी को इतना महत्व क्यों दिया जाता है। क्यों एक कुँवारी का उस हद तक सम्मान किया जाता है। कुँवारी की शक्तियां क्या हैं? कि वह उस महिमा के एक बच्चे को गर्भ में धारण कर सकती है जो कि ईसा-मसीह थे, कि वह अपने शरीर से श्री गणेश को बना सके, कि वह अपने बच्चों की अबोध, गतिशील शक्ति की रक्षा कर सके जो निरहंकारी हैं, जो नहीं जानते कि अहंकार क्या है। तो यह महान बल और शक्ति उस शख्सियत में निवास करती है जिसके पास बहुत सारे “गुरु पुण्य” [गुरु गुण] हैं, जिन्होंने पिछले जन्मों में बहुत सारे अच्छे काम किए हैं, जिन्होंने हमेशा यह समझा है कि कौमार्य किसी भी अन्य शक्ति की तुलना में ऊँची शक्ति है और जो कौमार्य और शुद्धता की उसके सभी प्रयासों और देखभाल के साथ रक्षा करेगी। जैसा कि आप जानते हैं कि हमारे शरीर के भीतर उसे कुंडलिनी के रूप में रखा गया है, जिसका अर्थ है Read More …

10th Day of Navaratri Puja & Havan, Just surrender Temple of All Faiths, Hampstead (England)

                                                   नवरात्रि पूजा  हैम्पस्टेड, लंदन (यूके), 19 अक्टूबर 1980। तो आपने जीवन में आज के दिन देवी के महत्व के बारे में तो सुना ही होगा। और आज रावण मारा गया और इस तरह जश्न मनाया गया। “इतिहास अपने आप को दोहराता है।” जैसा कि आप अच्छी तरह जानते हैं कि उस समय जिन शैतानी ताकतों का सामना करना पड़ा था, वे सभी वापस रंगमंच पर वापस आ गई हैं और उन्हें पराजित होना है। आधुनिक समय की सबसे बड़ी समस्या यह है कि इन शैतानी ताकतों ने बहुत सूक्ष्म रूप धारण कर लिया है और वे आपके मानस में और आपके अहंकार में प्रवेश कर गई हैं। और तुम संत हो, तुम भक्त हो, तुम देवी के भक्त हो। यह बहुत ही नाजुक स्थिति है। जब भ्रम होता है, जब संतों पर हमला होता है, तो हमलावर को हटाया जा सकता है, लेकिन संत ही नकारात्मक शक्तियों से मेलजोल में हो जाता है या भ्रमित हो जाता है, इस वजह से उसे प्रकाश दिखाई देना बहुत मुश्किल होता है। और आपने इस स्थिति को बहुत अच्छे से देखा है। और आप जितने सूक्ष्म विकसित होते हो, वे भी उतने ही सूक्ष्म होते गए। और वे तुम्हें ऐसे विचार देने लगते हैं जो इतने नकारात्मक होते हैं, लेकिन तुम उन्हें देख नहीं पाते। इसलिए आज की समस्या बहुत नाजुक है। कोई पूर्ण संत नहीं हैं और कोई पूर्ण बुरे लोग नहीं हैं। ऐसा मिश्रण, एक भ्रम, यही कलियुग है, ये आधुनिक समय है। इनसे छुटकारा पाने का एक ही उपाय है Read More …

9th Day of Navaratri Celebrations, Eve of Navaratr, Puja & Havan मुंबई (भारत)

Sahajayog Ki Ek Hi Yukti Hai (Navaratri) Date : 30th September 1979 Place Mumbai Туре Seminar & Meeting Speech [Original transcript, Hindi talk, Scanned from Hindi Chaitanya Lahiri] आपके अन्दर में परमात्मा की शक्ति ज्यादा बड़ा भारी कार्य एक जमाने में हो गया है जबकि बढ़ती जाएगी। यानि आपका caliber जो है वो wider होते जाएगा और आपके अन्दर ज्यादा शक्ति के अनुचर सताया करते थे। आज भी संसार में बढ़ती जाएगी। अब जब ये ज्यादा शक्ति आपसे बढ़ शैतानों की कमी नहीं है, दुष्टों की कमी नहीं है, रही है तब इस शक्ति को भी उपयोग में लाना चाहिए। अगर शक्ति बढ़ती गई और आपने उसको उपयोग में नहीं लाया तो हो सकता है कि थोड़े दिन बाद ये caliber फिर छोटा हो जाए। अब आपको घर और इसीलिए इनमें से निकलने के लिए भी मनुष्य जाके बैठना है और सोचना है, मनन करना है कि हम किस तरह से सहजयोग को बढा सकते हैं। कितने ही लोगों का Realisation हुआ है और बहुत किस-किस जगह हमारा स्थान है, कौन लोग हमें से लोगों ने इस आत्मज्ञान को पाते वक्त अपने मानते हैं, उनकी लिस्ट बनाइये। कौन-से ऐसे areas हैं जहाँ हम जाकर के इसको प्रस्थापित कर सकते हैं। उसके लिए जो भी आपको जरूरतें हैं, हमारे अलग सेंटर हो गए हैं, आज मैंने कोलाबा में भी एक सेंटर खोल दिया है कफकैसल में। और इस तरह से हर जगह एक-एक सेंटर अब आपके लिए ऐसे मैं भी नहीं सोचती थी और इतने थोड़े समय में हो गया है Read More …

8th Day of Navaratri Celebrations, Poverty Shree Sunderbhai Hall, मुंबई (भारत)

           नवरात्री 8वॉ दिवस, गरीबी, अवतरण संगोष्ठी सुंदरबाई हॉल मुंबई, भारत। 29 सितंबर 1979। श्री माताजी: श्री विजय मर्चेंट, श्री राकुरे, सभी सहज योगी जो यहां मेरे प्रति अपने प्यार का इजहार करने आए हैं और बाकी सभी लोग जो सत्य की खोज में हैं। श्री मर्चेंट की वास्तव में बहुत मेहरबानी रही की वे इस पुस्तक का विमोचन कर रहे हैं। अपने बचपन से मैं उनका क्रिकेट देखती आ रही हूं। मुझे कहना होगा कि मैं खुद काफी बड़ी क्रिकेट प्रशंसक हूं। मुझे लगता है कि क्रिकेट ऐसा खेल है जो वास्तव में सहज है, फुटबॉल के एक चरम और गोल्फ के दूसरे उबाऊ खेल के बीच का। और जिस तरह से वह हमारी टीमों का प्रबंधन कर रहे हैं और वह हमारे देश के लिए इतने अच्छे कप्तान रहे हैं, मैं हमेशा उनकी सराहना करती रही हूं और मैं उनकी प्रशंसा करती रही हूं, जिस तरह से वह क्रिकेट के क्षेत्र में गौरव को संभालने में सक्षम रहे हैं। उसके बाद भी, इस जीवन के अन्य सभी सफल लोगों की तरह सेवानिवृत्ति में अपना जीवन बर्बाद करने के बजाय, वह इतना बड़ा काम कर रहे हैं, और इस देश के सभी दलितों और गरीबों के लिए उनकी ऐसी भावना से पता चलता है कि वे एक बहुत ही महान व्यक्ति हैं। संवेदनशील व्यक्तित्व। जिस तरह से वह हम सभी के प्रति दयालु हैं और यहां आए हैं और अपने काम के बारे में हमसे बात की है, मैं उनकी बहुत आभारी हूं। मैं उनसे पूरी तरह से सहमत हूं Read More …

Navaratri Celebrations मुंबई (भारत)

             कुंडलिनी और श्री कल्कि के बीच संबंध   अंतिम से एक रात पूर्व नवरात्रि  बॉम्बे (भारत), 28 सितंबर 1979। आज मैं आपकी इच्छानुसार अंग्रेजी भाषा में आपको संबोधित करने जा रही हूं। कल भी, शायद, हमें इस विदेशी भाषा का प्रयोग करना पड़ सकता है। आज का विषय है, कुंडलिनी और कल्कि के बीच संबंध| कल्कि शब्द वस्तुत: निष्कलंक का संक्षिप्त रूप है। निष्कलंक का अर्थ, मेरे नाम के समान ही है, अर्थात निर्मला:, तात्पर्य यह बेदाग स्वच्छ है, कुछ ऐसा जो बेदाग हो, निष्कलंक ऐसा स्वच्छ है, जिस पर कोई धब्बा नहीं है। अब इस अवतार का – अनेकों पुराणों में वर्णन किया गया है कि -वे  इस धरती पर सफेद घोड़े पर सवार होकर आएंगे, संभलपुर के एक गांव में, ऐसा वे कहते हैं, संभलपुर। यह बहुत दिलचस्प है कि किस प्रकार लोग हर चीज को इतने शाब्दिक रूप में ले लेते हैं। सम्भाल शब्द का अर्थ इस प्रकार है…, भाल अर्थात माथा, सम्भाल का अर्थ है उस अवस्था में। अर्थात कल्कि आपके भाल पर स्थित है। भाल मतलब माथा। और यहीं उनका जन्म होने वाला है। संभलपुर शब्द का वास्तविक अर्थ यही है। ईसा मसीह और उनके विनाशकारी अवतार महाविष्णु जिन्हें कल्कि कहा जाता है, के बीच में एक काल खंड है जिस में मनुष्य को खुद को सुधारने के लिए समय दिया गया है, ताकि वे परमेश्वर के राज्य में प्रवेश कर सकें, जिसे बाइबिल में लास्ट जजमेंट कहा जाता है कि, तुम्हारा न्याय किया जाएगा, तुम सब का, इस पृथ्वी पर न्याय किया जाएगा। वे ऐसा Read More …

6th Day of Navaratri Celebrations, Shri Kundalini, Shakti and Shri Jesus Hinduja Auditorium, मुंबई (भारत)

Kundalini Aur Yeshu Khrist Date : 27th September 1979 Place Mumbai Туре Seminar & Meeting Speech Language Hindi श्री कुण्डलिनी शक्ति और श्री येशु खिस्त’ ये विषय बहुत ही मनोरंजक तथा आकर्षक है । सर्वमान्य लोगों के लिए ये एक पूर्ण नवीन विषय है, क्योंकि आज से पहले किसी ने श्री येशु ख़्रिस्त और कुण्डलिनी शक्ति को परस्पर जोड़ने का प्रयास नहीं किया। विराट के धर्मरूपी वृक्ष पर अनेक देशों और अनेक भाषाओं में अनेक प्रकार के साधु | संत रूपी पुष्प खिले । उन पुष्पों (विभूतियों) का परस्पर सम्बन्ध था । यह केवल उसी विराट-वृक्ष को मालूम है। जहाँ जहाँ ये पुष्प (साधु संत) गए वहाँ वहाँ उन्होंने धर्म की मधुर सुगंध को फैलाया। परन्तु इनके निकट (सम्पर्क) | वाले लोग सुगन्ध की महत्ता नहीं समझ सके। फिर किसी सन्त का सम्बन्ध आदिशक्ति से हो सकता है यह बात सर्वसाधारण की समझ से परे है । मैं जिस स्थिति पर से आपको ये कह रही हूँ उस स्थिति को अगर आप प्राप्त कर सकें तभी आप ऊपर कही गयी बात समझ सकते हैं या उसकी अनुभूति पा सकते हैं क्योंकि मैं जो आपसे कह रही हूँ वह सत्य है कि नहीं इसे जानने का तन्त्र इस समय आपके पास नहीं है; या सत्य क्या है जानने की सिद्धता आपके पास इस समय नहीं है। जब तक आपको अपने स्वयं का अर्थ नहीं मालूम तब तक आपका शारीरिक संयन्त्र ऊपर कही गई बात को समझने के लिए असमर्थ है। परन्तु जिस समय आपका संयन्त्र सत्य के साथ जुड़ जाता है Read More …

5th Day of Navaratri Celebrations, Guru Tattwa (Mahima) and Shri Krishna मुंबई (भारत)

  [हिंदी प्रतिलेख] 1979-0926-गुरू तत्व और श्रीकृष्ण शक्ति २६ सितम्बर १९७९, मुंबई  गुरू का स्थान हमारे अंदर काफी ऊंची जगह है। गुरु का स्थान हमारे अंदर स्थित है, कोई इसमें नई चीज करने की नहीं है। परमात्मा ने ये जो साधन बनाया हुआ है, यह जो इंस्ट्रूमेंट है इसको बहुत ही सुंदरता से बनाया गया है। इसका एक एक चक्र जोकि हमारे लिए अद्रश्य ही हैं और हमारे अंदर स्थितः है जिससे ये विश्व जगत हमें जान पड़ता है बहुत सुंदरता से रचित है; किन्तु मनुष्य अति मैं रहता है, हमेशा अति पे जाने से उसने अपने इस साधन को बिगाड़ लिया है। उसी प्रकार गुरु का जो स्थान है उसे भी मनुष्य ने बिगाड़ लिया है. गुरु का स्थान हमारे अंदर इस पूरी जगह इस फ्रांस मैं है, इस पूरे देश मैं गुरु का स्थान है। पेट के अंदर चारों ओर नाभि चक्र से जुड़ा हुआ है। अभी तीन दिन पहले मैने नाभिचक्र पर आपसे बात की थी, इस नाभिचक्र पर श्री विष्णु  का स्थान है। विष्णुशक्ति के कारण ही मानव अमीबा से इंसान बने हैं। और उसी शक्ति से ही आप मानव से  अतिमानव बनने वाले हैं। । अब ये जो गुरु की शक्ति हमारे अंदर परमात्मा ने पहले से ही विकसित की हुई है इसके लिए अनेक गुरुओं के पहले अवतरण हुए हैं। अब पहले देखें की यह गुरूतत्व बना कैसे  है इसके लिए समझना चाहिए की गुरुतत्व अनादि है और उसको कैसे बनाया गया। हमारे अंदर  अदृश्य रूप से तीन  शक्तियां कार्यान्वित रहती हैं। प्रथम  शक्ति Read More …

1st Day of Navaratri Celebrations, Shri Kundalini, Shri Ganesha मुंबई (भारत)

Kundalini Ani Shri Ganesha 22nd September 1979 Date : Place Mumbai Seminar & Meeting Type [Hindi translation from Marathi talk] आज के इस के प्रथम दिन शुभ घड़ी में, ऐसे इस सुन्दर वातावरण में इतना सुन्दर विषय, सभी योगायोग मिले हुए दिखते हैं। आज तक मुझे किसी ने पूजा की बात नहीं कही थी, परन्तु वह कितनी महत्त्वपूर्ण है! विशेषतः इस भारत भूमि में,महाराष्ट्र की पूण्य भूमि में, जहाँ अष्टविनायकों की रचना सृष्टि देवी ने (प्रकृति ने) की है । वहाँ श्री गणेश का क्या महत्त्व है और अष्टविनायक का महत्त्व क्यों है ? ये बातें बहुत से लोगों को मालूम नहीं है । इसका मुझे बहुत आश्चर्य है। हो सकता है जिन्हें सब कुछ पता था या जिन्हें सब कुछ मालुम था ऐसे बड़े-बड़े साधु सन्त आपकी इसी सन्त भूमि में हुए हैं, उन्हें किसी ने बोलने का मौका नहीं दिया या उनकी किसी ने सुनी नहीं। परन्तु | इसके बारे में जितना कहा जाए उतना कम है और एक के जगह सात भाषण भी रखते तो भी श्री गणेश के बारे में बोलने के लिए मुझे वो कम होता । आज का सुमुहूर्त घटपूजन का है। घटस्थापना अनादि है । मतलब जब इस सृष्टि की रचना हुई, (सृष्टि की रचना एक ही समय नहीं हुई वह अनेक बार हुई है।) तब पहले घटस्थापना करनी पड़ी । अब ‘घट’ का क्या मतलब है, यह अत्यन्त गहनता से समझ लेना जरूरी है । प्रथम, ब्रह्मत्त्व में जो स्थिति है, वहाँ परमेश्वर का वास्तव्य होता है । उसे हम अंग्रेजी में Read More …