Shri Mahalakshmi Puja, The Universal Love (भारत)

Shri Mahalakshmi Puja. Kalwe (India), 30 December 1992.

[Translation from English to Hindi]

 आपको किसी भी बात की चिंता करना बंद करना चाहिए. । आपके लिए सब व्यवस्था की हुई है। सब प्रबंध किया हुआ है। किसी भी चीज की चिंता करने की जरूरत नहीं है। अगर आप किसी भी बात की चिंता करते रहते हैं तो मुझे तकलीफ होती है। क्या आप सहज योगी नहीं है? हर बात के हर चीज की व्यवस्था की हुई है। किसी भी बात की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। सहज योगियों ने उस स्तर पर गिरना नहीं चाहिए।सहज योगियों ने इतने साधारण स्तर पर गिरना नहीं चाहिए। आखिर आपको क्या हो सकता है? […]

Shri Mahalakshmi Puja Kolhapur (भारत)

Shri Mahalakshmi Puja Date 21st December 1990 : Place Kolhapur Type Puja Speech Language Hind

मैं आपसे बता चुकी हूँ कि महाराष्ट्र में त्रिकोणाकार अस्थि और उसमें कुण्डलाकार में शक्ति विराजती है । महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती और आदिशक्ति इस तरह से साढ़े तीन कुण्डलों में बैठी हुई है। माहुरगढ़ में महासरस्वती हैं जिन्हें रेणुका देवी भी कहते हैं। तुलजापुर में भवानी है जिन्हें महाकाली कहते हैं और कोल्हापुर में महालक्ष्मी का स्थान है। यहाँ से आगे सप्तश्रृंगी नाम का एक पहाड़ है जिस पर आदिशक्ति की अर्धमात्रा है। इस प्रकार ये साढ़े तीन शक्तियाँ इस महाराष्ट्र में पृथ्वी तत्व से प्रकट हुई हैं। और यहीं पर श्री चक्र भी विराजता है। आप सब जानते हैं कि महालक्ष्मी ही मध्यमार्ग है जिससे कुण्डलिनी का जागरण होता है। इसलिए हजारों वर्षों से इस महालक्ष्मी मन्दिर में ‘उदे अम्बे’ […]

Paramchaitanya Puja Taufkirchen (Germany)

परमचैतन्य पूजा 

तौफिरचेन (जर्मनी), 19 जुलाई 1989

[(लाउडस्पीकर से शोर होता है। बच्चे रोने लगते हैं।)

श्री माताजी: मुझे लगता है कि बच्चों को थोड़ी देर के लिए बाहर ले जाना बेहतर है। बस यह बेहतर होगा। नमस्ते नमस्ते नमस्ते! मुझे लगता है कि बेहतर होगा उन्हें थोड़ी देर के लिए बाहर ले जाना। वे पसंद नहीं करते थे बंद हो जाता है। (बच्चे अचानक रोना बंद कर देते हैं। हँसी। श्री माताजी हँसती हैं)]

मुझसे एक प्रश्न पूछा गया, […]

Shri Mahalakshmi Puja: Ganesha Tattwa Kolhapur (भारत)

1983-0101 Mahalakshmi Puja, Kohlapur, Maharashtra, India

[Hindi translation from English]

एक बार पुन आज नववर्ष दिवस है। नववर्ष दिवस आते ही रहते हैं क्योंकि हमने कुछ न कुछ नया प्राप्त करना होता है। इतनी अच्छी व्यवस्था की गई है कि सूर्य को तीन सौ पैंसठ दिन विचरण- करना होता है और एक बार फिर नववर्ष आ गया है। वास्तव में पूरा सौर- मण्डल कुंडल की तरह से चलता है। अतः निश्चित रूप से सौर-मण्डल की एक उच्च अवस्था है| हर वर्ष कुंडल की तरह से यह ऊपर की ओर जाता है| तीन सौ पैंसठ दिन गुजरने के कारण ऐसा नहीं होता, […]