Public Program Day 2

Cowasji Jehangir Hall, मुंबई (भारत)

1973-03-24 Public Program Day 2 Cowasji Jehangir Hall Mumbai Pasq HD, 65'
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                     सार्वजनिक कार्यक्रम 

 कावसजी जहांगीर हॉल मुंबई | 

 24-03-1973

श्री माताजी: जब हम कहते हैं कि यह जेट युग है, तो हमारा क्या मतलब है? इसका मतलब है कि हम इंसानों ने जेट के माध्यम से गुरुत्वाकर्षण बल पर विजय पाने का एक तरीका खोजा है। गुरुत्वाकर्षण बल की एक चुनौती को स्वीकार कर अब विजय कर लिया गया है। हमने, इस आधुनिक युग में न केवल एक जेट बनाया है जिसमें एक प्रोपेलर है; यदि प्रोपेलर नहीं, तो सुपरसोनिक व्यवस्था की है – बल्कि हमें अंतरिक्ष यान भी प्राप्त है जो हमें चंद्रमा तक ले जा सकता है। यह हमारी कल्पना से परे एक बहुत ही शानदार अनोखी खोज है।

जब मैं एक छोटी लड़की थी, एक स्कूल में जब सभी लडकियां बैठ कर गणना करती थी की; इंसान को सबसे तेज़ ट्रेन से चाँद पर जाने में कितने साल लगेंगे। या अधिक से अधिक हवाई जहाज में – जो कि हमारे बचपन में था। और अपने जीवनकाल में, मैं देख पाती हूं कि लोग वहां पहले ही उतर चुके हैं। हम विज्ञान की मदद से बहुत आगे बढ़ चुके हैं। बाहर की अभिव्यक्ति शानदार, बल्कि हमारी समझ से परे रही है।

लेकिन समस्या तब पैदा होती है जब पेड़ अपने स्रोतों से परे बढ़ता है;  विशाल और बड़ा, इसके स्रोत की तलाश करनी चाहिए। अन्यथा, यह समाप्त  होने जा रहा है। यह हमारे जेट युग की समस्या है कि हम अपने स्रोतों से बहुत दूर चले गए हैं। और अब हमें उस स्रोत को देखना होगा, जिस पर हम विद्यमान हैं और जिस पर अस्तित्व बनाये रखना है। और हमें उस स्रोत के मूल का पता लगाना चाहिए। ताकि इतनी बड़ी जीव रचना जो अनुपात से ज्यादा विकसित हो गयी है, बच जाए। यदि नहीं, तो पूर्ण विनाश हमारी प्रतीक्षा कर रहा है। दो शक्तियां हमेशा कार्यरत एवं परस्पर प्रभावी  होती हैं। एक रचनात्मक है, दूसरी विनाशकारी है। हमेशा से, जब से मानव – जब वह वास्तव में एक कमजोर चीज था; जंगली जानवरों की दया पर, डर में, विकसित हुआ,  बाद में, एक पराक्रमी शक्ति बन गया। और अब ब्रह्मांड की सारी मिट्टी को जीत रहा है।

ये दो ताकतें, जैसा कि मैं उन्हें सकारात्मक और नकारात्मक कहती हूं, किसी भी विकास के लिए आवश्यक हैं। लेकिन यह हमारे लिए, बुद्धिमान, आधुनिक आदमी के तय करने के लिए है कि क्या हम विनाश के लिए जा रहे हैं। क्या हम इसे रोकने के लिए कुछ भी कर रहे हैं? हम कहाँ जा रहे है? और हम अपने बच्चों को क्या देने जा रहे हैं? अंतरिक्ष यान का संचालन या चंद्रमा पर जाना। क्या यही सब? या ये मृत इमारतें जो सभी जगहों पर उभर रही हैं? जेट युग में एक बहुत बड़ा संदेश है कि मनुष्य की जिम्मेदारी सबसे बड़ी है। जब हम एक साथ काम करते हैं, तो हम एक जेट या एक अंतरिक्ष यान प्रस्तुत करते हैं। हमें एक साथ काम करना होगा, सामूहिकता में उस दैवीय शक्ति के आगमन को सुनिश्चित करना, जिसने हमें पोषण दिया है और आगे [अश्रव्य / चर्चा] के लिए अब इसकी आवश्यकता है। जैसा कि मैंने आपको बताया है, कि मेरा ज्ञान पूरा ही व्यक्तिपरक है। मैंने इन विषयों पर कोई पुस्तक नहीं पढ़ी है, शायद मेरे पास ऐसा करने का समय नहीं है या मुझे ऐसा करने की आवश्यकता नहीं है। बेशक, मुझे उस शब्दावली को जानना होगा जो भले ही मानव निर्मित और कृत्रिम है, लेकिन संवाद करने के लिए, उन शब्दों को जानना होगा। इस व्यक्तिपरक ज्ञान के साथ, अगर मैं आपसे बात करना शुरू करूँ, तो पूरी बात बेहद शानदार लगेगी। क्योंकि आप अभी भी वस्तुपरक हैं। अब आप सभी के लिए समय आ गया है कि आप सभी इस उस महान, गतिशील बल जिसने पूरी रचना को जीवंत किया है के विषय एवं गवाह बनें, । जब मैं आपसे बात करती हूं, तो यह मेरे व्यक्तिपरक ज्ञान के माध्यम से होता है। यह शायद आज आप को  आकर्षित नहीं कर सकता है, लेकिन यह तब होगा जब आप अपना आत्म-साक्षात्कार प्राप्त करेंगे और जो मैं आपसे बात कर रही हूं उसकी गहराई में जाएंगे।

सृजन, इसे कैसे बनाया गया, मैं उस हिंदी सेमिनार में बाद में बोलूंगी। लेकिन आइए देखें कि इंसानों के मामले में क्या हुआ है। मनुष्य के मामले में, मस्तिष्क का त्रिकोणीय आकार होता है। और यह त्रिकोणीय आकार एक प्रिज्म की तरह कार्य करता है जब चेतना की किरण उसकी फॉन्टानेल हड्डी, उसके मस्तिष्क की नोक से गुजरती है, और भ्रूण [जो की भौतिक शक्तियों से बना ]के अपने व्यक्तित्व में प्रवेश करती है। दो शक्तियाँ हैं – भौतिक शक्ति जो भ्रूण को बनाती हैं और चेतन शक्ति अर्थात , प्रणव, जो तीन महीने की उम्र में भ्रूण में प्रवेश करती है। मस्तिष्क से गुजरते समय यह अपवर्तित हो जाता है। आप प्रिज्म से देख सकते हैं कि एक किरण, जब वह सूर्य से आती है, सात रंगों में अपवर्तित हो जाती है। उसी तरह यह चेतना तीन शक्तियों, तीन उर्जा में अपवर्तित हो जाती है। एक ऊर्जा का कार्य हमारे केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रबुद्ध करती है जो हमारे शरीर की देखभाल के लिए आवश्यक है। अन्य दो परानुकम्पी और अनुकम्पी  तंत्रिका तंत्र हैं। parasympathetic nervous system [परानुकम्पी तंत्रिका तंत्र ]अभी तक मेडिकल लोगों के लिए बहुत अधिक ज्ञात नहीं है। जब मैं कुंडलिनी की बात करती हूं, तो मैं parasympathetic nervous system [परानुकम्पी तंत्रिका तंत्र ]की बात करती हूं। ये तीन ऊर्जाएं में से एक -ऊर्जा , जो कि परानुकम्पी है, मध्य भाग से गुजरती है, यहां फॉन्टानेल हड्डी में, मस्तिष्क के आधार के माध्यम से, मस्तिष्क के मध्य भाग से गुजरती है; इसे योग शास्त्र में [अश्रव्य / मुद्रा] के रूप में जाना जाता है। यह वह स्थान है जहां optic chiasm ऑप्टिक चियास्मा बनाया गया है। और रीढ़ की हड्डी में नीचे जा कर कुंडल बनाता है  साढ़े तीन कुंडल त्रिकोणीय हड्डी में। आप आसानी से मुझसे पूछ सकते हैं, “आप ऐसा कैसे कहती हैं?”। लेकिन अब कई डॉक्टर मेरा समर्थन करेंगे। भगवान का शुक्र है कि अब वे भी बोध प्राप्त कर चुके हैं, कि वे इसे महसूस कर सकते हैं और स्वयं अपने अस्तित्व में – काम करने वाली तीन शक्तियाँ देख सकते हैं – । यह एक दीप्ती है जो आत्म-साक्षात्कार के बाद दिखाई देती है जब आप तीसरे चरण में पहुंचते हैं जिसे मैं “सोहम दशा” (सोहम – मैं वह हूं, दशा – स्थिति ) कहती हूं।

यह कुंडलिनी, जब यह त्रिकोणीय हड्डी में बस जाती है; क्यों यह साढ़े तीन कुंडल है और यह सब – का एक बहुत बड़ा अर्थ है। बेशक, मैं एक किताब लिख रही हूं; मैं एक किताब लिखने की कोशिश कर रही हूं। अभी तक मैं इसे भी शुरू नहीं कर पायी हूं। क्योंकि हर बार जब मैंने लिखना शुरू किया, तो मुझे लगता है कि यह एक और बाइबल या गीता बन जाएगी। और लोग इसे दिल से याद करने लगेंगे। और इससे उनका आत्म-साक्षात्कार पूरी तरह से रुक सकता है। यह कुंडलिनी, जब यह त्रिकोणीय हड्डी में बस जाती है, तो यह भ्रूण की जिम्मेदारी ले लेती है और यह उस भ्रूण के विकास तथा पूरे कामकाज के लिए जिम्मेदार है, और हमेशा उस हिस्से में बसने वाली दिव्य शक्ति है। यह कुंडलिनी है। अन्य दो पर मैं कल चर्चा करूंगी जब मैं भारत के सभी गुरुओं  पर चर्चा करूंगी। वे सभी दूसरी चीज़ पर काम कर रहे हैं – यह या वह।

अब, यह कुंडलिनी – अभी-अभी आपने भगवती के बारे में श्लोक सुना है, जो प्रणव रूपा है। वह इस प्रणव नामक जागरूकता का अवतार है। यह सांस, पवित्र आत्मा की पवित्र सांस है जैसा कि बाइबल में वर्णित है। जो अवतार भी ले सकती है और पूरी दुनिया को आपदा से बचाने के लिए कई बार अवतार ले चुकी है। यह कुंडलिनी आपकी माता है। त्रिकोणीय हड्डी में बैठना -एक बहुत महत्वपूर्ण बिंदु है। क्योंकि इसने उन लोगों के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है जो कुंडलिनी के बारे में ज्यादा नहीं जानते हैं और जो अपने आधे ज्ञान का दुरुपयोग कर रहे हैं। कुंडलिनी त्रिकोणीय हड्डी में होती है जो की मूलाधार है जैसा कि हम इसे कहते हैं और बिल्कुल भी सेक्स में नहीं है। यह योग शास्त्र का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो कई लोगों ने छोड़ दिया है – यहां तक ​​कि तांत्रिकों ने भी इसे पूरी तरह से छोड़ किया है। वह आपकी माँ है जो आपको फिर से जन्म देने के लिए त्रिकोणीय हड्डी में बैठी है।

एक अन्य दिन,  एक लड़का किन्ही गुरुजी से मेरे पास आया और उसने मुझसे एक दिलचस्प  सवाल पूछा, जो आपको जानना चाहिए।

 “माताजी, आखिर सेक्स महत्वपूर्ण है। हम सेक्स के लिए इस दुनिया में आए हैं”। मैंने कहा, “मैं सहमत हूं”। अब बावजूद ​​कि यह बयान अजीब है, लेकिन फिर भी मैंने कहा कि मैं सहमत हूं। लेकिन मैंने कहा, “लेकिन क्या आप अपना पुनः जन्म लेना चाहते हैं”।

उसने कहा,  “हाँ”, “मैं अपना पुनः जन्म लेना चाहता हूँ”।

 “अब आप सेक्स करके अपना पुन: जन्म ले सकते हैं? क्या आप अपना जन्म सेक्स करके कर सकते हैं?”

उस ने कहा ” ना”। 

फिर मैंने कहा, “आप सेक्स के माध्यम से कैसे अपना पुनर्जन्म प्राप्त कर सकते हैं?”। 

जरा देखो। अब यह आपकी माँ है जो कि आप त्रिकोणीय हड्डी में बस गई हैं ताकि आपका पुनर्जन्म हो। और मूर्खतापूर्ण ढंग से तुम उस पर सेक्स रख रहे हो। क्या आपकी माँ का इससे बड़ा अपमान हो सकता है? वह होली घोस्ट है।

 यह फिर से इस जेट युग के कारण है; यह भ्रम का युग है। जहां मार्ग ओंर कुमार्ग, धर्म और अधर्म पूरी तरह से भ्रम में है। क्या वे मां के साथ यौन संबंध की अनुशंसा करेंगे? इसीलिए आपको कई किताबें मिलती हैं, जो बताती हैं कि कुंडलिनी क्रोधित हो जाती है। कुंडलिनी एक गुस्से में आ जाती है और वह उठती है, और वह ऐसा करती है – वह आपको जलाती है और वह सभी तरह की चीजें करती है। वह करेगी; कोई भी माँ करेगी अगर वह माँ है। भगवान का शुक्र है, कम से कम भारत में मिस्टर फ्रायड ज्यादा पहुंच नहीं बना पाए हैं। हमारे देश में अभी भी हमारी ममता है। भगवान का शुक्र है कि आपके, इस देश में वास्तव में कुछ महान है। कि एक माँ को सेक्स के स्तर पर लाया जा सकता है, यह कुछ बकवास माना जाता  है। मां माफ कर देगी, भले ही आप उसे मार दें, उसकी हत्या कर दें। लेकिन क्या वह ऐसी बकवास बर्दाश्त कर सकती है? वो नहीं कर सकती।

इस जेट युग में, लोगों को खोज करने की स्वतंत्रता है। और उन्हें जो अच्छा लगे वो करो। उदाहरण के लिए, यदि रावण का जन्म इस देश में होना था, तो वह यहाँ बहुत अच्छी तरह से बस सकता है। और खुद को भगवान कहला कर और इस देश की सभी सीताओं को नष्ट करने के लिए ऐसी भयानक चीजों का प्रचार कर सकता है। जेट युग में यह काफी संभव है; हर किसी को अपनी पसंद की चीज़ करने की आज़ादी है। फ्रायड जैसे व्यक्ति जो भटके हुए युवा थे, वे उस समय दुराचारी घटिया स्वभाव के बहुत विकृत थे। बेशक, उन्हें दूसरे देशों में अमान्य किया गया है। लेकिन उन्होंने समाज पर बहुत बदनुमा दाग छोड़ा है। और अमेरिका में, मैं यह देखकर हैरान थी कि अमेरिकी महिलाओं का मातृत्व कैसे पूरी तरह से त्रस्त है और बस खो गया है। उन्हें अपने मातृत्व पर कोई भरोसा नहीं बचा है।

एक महिला थी, जिसका एक लड़का था जो बारह साल का था, जो ड्रग्स लेने लग गया था। लेकिन जब बच्चा मेरे पास आया था, मैंने मेरे दिल से बच्चे को गले लगाया और मैंने बच्चे को चूमा और मैंने पूछा , ” क्या बात है?”। बच्चा एक [अश्राव्य] की तरह रोया और मुझे बताया कि मेरी माँ ने मुझे कभी इस तरह प्यार नहीं किया है। और माँ ने मुझसे कहा, “आप जानते हैं, हमारे यहाँ ऐसा चलन है की हमारा अपने बच्चों को इस तरह छूना उचित नहीं माना जाता हैं”। मैंने कहा, “आपके यहाँ क्या व्यवस्था है?”। उसने मुझे बताया कि जब बच्चा पैदा होता है, तो उसे दूर रखा जाता है, जबकि कुत्ते और बिल्लियाँ बेडरूम में सोते हैं। और बच्चे, वे अपनी माँ को नहीं जानते हैं, इसलिए जब वे सोलह या सत्रह साल के होते हैं| वे एक साठ साल की महिला से शादी करेंगे। सहज ही। क्योंकि वास्तव में वे अपनी मां की तलाश कर रहे हैं। दूसरों के साथ संबंध आप केवल विवाह के माध्यम से, केवल सेक्स के माध्यम से बना सकते हैं, – अन्यथा, कोई संबंध ही नहीं है। ऐसा यह जेट युग है।

क्या परमात्मा की तरफ उत्थान भी सेक्स के माध्यम से आना है? सेक्स क्या है? यह आपकी नाक और आंखों की तरह ही एक अन्य चीज़ है, यहाँ तक की इससे भी बहुत कम महत्वपूर्ण है। इस निरर्थक बात को मनोविज्ञान में इतना महत्व दिया गया है। अमेरिकी महिलाओं की मातृत्व हत्या के लिए भी जिम्मेदार है। केवल अमेरिका में ही नहीं, अधिकांश पश्चिमी देशों में, जहाँ वे संपन्न हैं।जहाँ तक आध्यात्मिकता का संबंध है,  वे सबसे धनी व्यक्ति हैं। वे ऐसे लोग हैं जो अब भौतिकवाद से परे चले गए हैं और खोजी हैं। लेकिन उनकी यह कमजोरी है, बेचारे  बच्चे – वे अपनी मां को नहीं पहचानते हैं।

जबकि हमारे देश में – आप जानते हैं कि मेरे पति लाल बहादुर शास्त्री के साथ थे। शास्त्रीजी रोज सुबह चार बजे उठते थे, जाते थे और अपनी मां के साथ कुछ देर सोते थे, उन्हें दुलारते थे और फिर अपने काम के लिए निकल जाते थे। वह अपनी माँ के पैर छूए बगैर अपने घर से बाहर नहीं जाते थे। और वह उन्हें उनके माथे पर चुंबन देती ; मैंने इसे अपनी आंखों से देखा है। और वहाँ, महिला मुझे बताती है, माँ मुझे बताती है कि, “मैं एक अपराध बोध विकसित करुँगी”। मैंने कहा, “क्या अपराध बोध है? इसमें क्या अपराध बोध है? आप माँ हैं। आप अपराध से परे हैं ”। लेकिन मनोवैज्ञानिक का यह सम्मोहन – हालांकि वे अब बहुत बुरी स्थिति में हैं, और वे सुधार की किसी भी संभावना से बहुत दूर चले गए हैं; उन्होंने अब इस पर कई किताबें लिखी हैं। लेकिन अभी भी मिस्टर फ्रायड के  [अश्रव्य / नियम राज कर रहे हैं । क्योंकि कुछ निरर्थक बात करना ज्यादा आकर्षक है। लोग इसके प्रति शीघ्र आकर्षित हो जाते हैं और वे इस विचार को छोड़ना नहीं चाहते क्योंकि यह उन को  भी अच्छा लगता है।

लेकिन यह आपकी कुंडलिनी को बिल्कुल भी पसंद नहीं है। और जहाँ भी आपने इतनी बड़ी, बड़ी किताबों में तथा अन्यथा भी लोगों के कुंडलिनी के बारे भयानक अनुभव होने, जलने, गिरने के बारे  में लिखा ,पढ़ा या सुना हो । दरअसल आपकी माँ, कुंडलिनी कभी भी सेक्स से नहीं बल्कि दिव्य प्रेम के लिए उत्साहित होती है; माँ के शुद्ध पवित्र प्रेम के लिए। अब,  आपने देखा कि मैंने आज सुबह बहुत सारे लोगों को “जागृति” (जागरण) और आत्मसाक्षात्कार दिया है। और ऐसा मैंने कई लोगों के लिए किया है। आप सभी स्वयं  देख सकते हैं कि सेक्स का इससे कोई लेना देना नहीं है। अंधेरे को लाने के लिए नकारात्मकता के जो कुछ भी प्रयास हो सकते हैं, यह समझना चाहिए कि ऐसा सिर्फ इसलिए होता है क्योंकि सूर्य को उगना है। रात है क्योंकि दिन होना है। और सुबह आपको परमात्मा का आशीर्वाद देगी।

जेट युग में, सबसे बड़ी समस्या गुमराह सेक्स की है। खबरदार। मैं तथाकथित तप, सन्यास या घर या परिवार से दूर भागने के, दमन के पक्ष में नहीं हूं। यह विकृति का एक और चरम है। यह एक विज्ञापन है कि आप बहुत आध्यात्मिक हैं -आपने यह त्याग किया है; आपने वह त्याग किया है। ये विज्ञापन के दिन हैं। जो विज्ञापन कर सकते हैं वे आकर्षक हैं। चित्त इतना सतही हो गया है कि अगर कोई अच्छी तरह से कपड़े पहने है, तो हम अचानक सोचते हैं कि वह बहुत अच्छा है। अगर किसी ने ठीक से कपड़े नहीं पहने हैं, तो हम उस व्यक्तित्व की सुंदरता को नहीं देख पाते हैं। हम बस नहीं कर पाते। हम इस जेट युग में बेहद सतही हो गए हैं।

लोगों को आत्मसाक्षात्कार दिलाते समय सबसे बड़ी बाधा जो मैं देख रही हूं, वह है कृत्रिम रूप से उत्पन्न अपराध बोध जो कि, इन लोगों के मानस पर भारी है। इसीलिए, जिन देशों में बहुत संपन्नता हैं, वहाँ आप अधिक लोगों को आत्महत्या करते हुए पाएंगे। अधिक लोग वास्तविकता से दूर भागते हैं। या दूसरे चरम संन्यास पर चले जाते हैं। एक अन्य दिन कुछ लोग मुझे मिलने आए और मुझसे कहा, “माताजी, आप विलासिता में जी रही हैं”। मैं नहीं जानती कि क्या विलासिता है। “और आप कैसे कहती हैं कि आप देवी हैं?” वे जानते हैं कि मेरे पति बहुत उच्चस्थ व्यक्ति  हैं। अब, मैं क्या कर सकती हूँ? लेकिन आपको आश्चर्य होगा कि एक व्यक्ति जो दिव्यता से भरपूर है – उसे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह सड़क पर सोता है या सबसे अच्छी जगह पर सोता है। ऐसा व्यक्ति बिना थकान के मीलों तक चल सकता है और अपने खूबसूरत कपड़ों में रानी की तरह सज्जित भी हो सकती है।

लेकिन चूँकि इन लोगों ने अपने पूछने के तरीके से अपमान किया। इसलिए मैंने उनसे कहा, मैं जानना चाहूंगी कि,”आपने धर्म को पाने के लिए क्या किया है – ।” तो वे शुरू हो गए कि, “मैंने अपने परिवार का बलिदान किया है, हमने अपने घरों का त्याग किया है, हमने अपना सब कुछ त्याग दिया है”।

मैंने कहा, ” अगर मैं किसी चीज पर पकड़ नहीं बना रही हूं, तो मैं क्या त्याग कर सकती हूं, आप मुझे बताएं। क्या आप इन चाबियों का त्याग कर सकते हैं? ”। उन्होंने कहा, “हम ऐसा कैसे कर सकते हैं क्योंकि यह हमारी नहीं है”। मैंने कहा, “किसने कहा कि यह तुम्हारी नहीं है?”। केवल इतनी सी बात कि, मूर्खता पूर्वक आपने इसे यहाँ पंजीकृत करा लिया है इसलिए ऐसा है की, यह मेरी है।

कल जब आप मर जाएंगे, तो आप यहां चाबियों के साथ सब कुछ छोड़ जायेंगे,  और सब कुछ फिर से देखभाल करने वाले पर आ जाएगा और जो कि,  आयकर उद्देश्यों के लिए इसका निपटान करेगा। चूँकि, आप उस सूक्ष्म विचार को धारण किये हुए हैं  कि,  मैंने यह किया है, मैंने वह किया है, मैंने यह त्याग किया है, मैं बहुत बड़ा संन्यासी हूं। आप कभी भी उस अंतर स्थित असली खजाने को प्राप्त नहीं कर सकते है।

आपको जीवंत उदाहरण के लिए एक पेड़ देखना चाहिए – कि एक पेड़ बढ़ता है और उसके अंदर के वायब्रेशन जो कि उसे जीवित रखते हैं, ; यह सब ऊर्जा जो इसके भीतर काम कर रही है, बस बह रही है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि फूल कहां आता है, चाहे वह नीला फूल हो या पीला फूल? धर्म के नाम पर कुछ भी करना आप के लिए एक दूसरी ही ऊर्जा लाता है, जैसा कि मैंने आपको बताया, अनुकम्पी तंत्रिका तंत्र। जो दाएं और बाएं है। जो दायें हाथ [right sided ]का है – उसकी बायीं अनुकम्पी सक्रिय है और दायीं बाजू सुप्त है। अब, सौलर प्लेक्सस में, हमारी एक विशेषता है कि सौलर प्लेक्सस दोनों अनुकम्पी तंत्रिका तंत्र से जुड़ा हुआ है। जैसे ही आपका चित्त किसी गतिविधि पर जाता है, आप अनुकम्पी पर जाते हैं। जबकि, माँ,  दैवी माँ, को मध्य मार्ग से गुजरना पड़ता है, जो  “मध्यमार्ग” है – वह परानुकम्पी [parasympathetic ] है।

स्वाभाविक रूप से, धर्म के नाम पर भी आप कुछ करने लगते हैं। और वहां अचानक आप अति-गतिविधि के संपर्क में आ जाते हैं, जिससे असाध्य रोग पैदा होते है, या – आप मृत “परलोक ” के संपर्क में आते हैं; जो बहुत अधिक खतरनाक है। इसलिए, जेट युग में, जब मैं पैदा हुई थी; बचपन से ही मैं इससे पार पाने की विधि खोज रही थी| ताकि, आप सभी को यह समझा सकूँ कि, दरअसल आप कुछ नहीं कर रहे हैं। यह तो मैं हूं जो आपके माध्यम से काम कर रही हूँ और अहंकार आप में जानबूझकर उत्पन्न किया गया है ताकि, – आप यह महसूस करें कि आपको कुछ करना है। और अंततः वही अहंकार तुम्हें तुम्हारी जागरूकता, तुम्हारी चेतना तक ले जाने वाला है, जिसके द्वारा तुम अपना पोषण प्राप्त कर रहे हो। अब जैसे यह माइक पूरी तरह से विकसित हो गया है, उसी तरह एक इंसान भी विकसित है- पूरी तरह से, सम्पूर्णता से। उसका पतन हो सकता है, वह देखेगा, वह सृष्टि को समझता है। और आनंद लेने के लिए। और प्यार की खूबसूरती देखने के लिए।

इस कनेक्शन को मुख्य स्विच के माध्यम से जोड़ कर रखा जाना चाहिए ताकि दिव्य शक्ति काम कर सके]। यही कुंडलिनी योग है, आसान। अब अगर आप मुझसे इस माइक की बनावट का तंत्र पूछें, तो यह बहुत कठिन बात है। क्यो कि इंजीनियरिंग की गई है। मुझे आपके कनेक्शन पता हैं। मुझे इसे परमात्मा से जोड़ना है। इसके लिए, इस जेट युग में, मुझे आपको बताना होगा कि, आपको असमंजस में नहीं रहना हैं। क्योंकि, या तो आप परानुकम्पी [parasympathetic]में आते हैं या आप मृत अथवा अवचेतन मन में चले जाते हैं; जिसका की प्रयास ये सभी गुरु आप पर कर ही रहे हैं। और अन्यथा, आपके बाएं हाथ के अनुकम्पी [sympathatic] तंत्रिका तंत्र के माध्यम से जो आपको कैंसर जैसी बीमारियों को देने जा रहा है।

इसके अलावा, जेट युग की समस्या यह है कि राम के आगमन से पहले, रावण का जन्म हुआ था। और इसी वजह से राम को आना पड़ा। ईसा-मसीह के आगमन से पहले, हेरोड का जन्म हुआ था। कृष्ण से पहले – वास्तव में, कृष्ण को उनका जन्म लेना पड़ा क्योंकि कंस वहाँ था। और भगवती ने हमेशा कुछ राक्षसों को मारने के लिए रूप धारण किए। लेकिन मैं तुमसे कहती हूं, इस वध ने हमारी अधिक मदद नहीं की है, क्योंकि वे सभी फिर से इस कलियुग में वापस आ गए हैं। यह कृष्ण की संहार शक्ति से केवल उनके शरीर मारे गए थे।

और अब वे फिर से, नए बैनर के साथ वापस आ गए हैं। मानो वे देव दूत हैं। एक अन्य दिन महिला ने मुझे बताया कि उसकी शिक्षिका एक देवी है। मैंने कहा, “आप कैसे कहती हैं?” उसने कहा, “हाँ, वह एक दुर्गा देवी है”। मैंने कहा, “तुम्हें कैसे पता?” “जब आप उसे छूते हैं, तो वह नीचे गिर जाती है”। मैंने कहा, “क्या देवी की पहचान का यही तरीका है?  आपको पता लगाना चाहिए कि,सारे शास्त्रों में, उनके बारे में कैसा वर्णन किया गया है । वह एक प्रणव रूपा कुंडलिनी है। इस महिला को यह भी पता नहीं है कि कुंडलिनी क्या है। और फिर भी, वह देवी होने के बारे में बात कर रही है? ”।

कुंडलिनी को आपकी उंगलीयों पर घूमना चाहिए। वह ईश्वर है। देवी माँ की निशानी है। केवल जेट युग में ही, खाली यह घोषित करके कि आप यह हैं और वह – आप धन और प्रचार एकत्र कर सकते हैं और [अश्रव्य] नहीं। क्या आप इंसानों में परिवर्तन ला सकते हैं? लेकिन ऐसा कौन चाहता है? कौन दूसरों को शांति और आनंद देना चाहता है? मानवता से प्यार किसको है? इस जेट युग में हजारों और हजारों लोगों की कुण्डलिनी जाग्रति होने के बारे में कौन सोच रहे हैं? इन सभी राक्षसों का पुनर्जन्म होना भी एक अन्य समस्या है। सारी नकारात्मकता, सारा अंधकार – कलयुग का ही अंधकार है। यह हमारी संरचना के खिलाफ है। और सकारात्मकता की बात करने के लिए, और सकारात्मकता के बारे में सोचने के लिए;  कभी-कभी कोई ध्यान देता है लेकिन हमेशा [अश्रव्य] नहीं।

क्योंकि मुझे पता है कि मैं आप सभी को सामूहिकता में बोध दे सकती हूं, और उस देवत्व का स्रोत आपके अपने सुंदर अस्तित्व में लाया जा सकता है। और हजारों ऐसे लोग हैं जो नकारात्मक हैं लेकिन करोड़ों ऐसे भी हैं जो स्वभाव से सकारात्मक हैं। और  सहज योग जो की मेरी खोज है, उसकी प्रणाली के माध्यम से सकारात्मकता विजयी होने जा रही है। असल में, मैंने इसकी खोज नहीं की है; यह तो वहां था ही लेकिन मुझे यह पता नहीं था कि यह काम कैसे करता है। बहार का समय है, बहुत सारे फूल हैं। और उनको फलों में बदलने के लिए बस मधुमक्खियों को उनके आसपास मंडराना होता है। पूरी बात की योजना तथा क्रियान्वयन परम द्वारा किया जा रहा है। और मुझे इस पर यकीन है कि; संघर्ष और भ्रम का यह युग समाप्त हो जाएगा।

लेकिन कृपया असमंजस में ना रहें। लोग हमेशा मुझे कहते हैं, “माताजी, आप हमें एक भाषण दें”। जब मैं उन्हें भाषण देना शुरू करूंगी, तो वे कहेंगे कि चूँकि, वे भूल जाएँगे इसलिए वे इसे लिख लेंगे। तुम कर क्या रहे हो? मैं कहती हूँ कि, वास्तव में यह एक भाषण की बिमारी है। इस जेट युग में, हर कोई भाषण देना चाहता है। और लोग भाषण सुनने के लिए बहुत उत्सुक हैं, वे ध्यान के लिए नहीं आएंगे – लेकिन वे भाषण के लिए आएंगे। भाषण सिर्फ एक विचार है। यह आपको क्या देने जा रहा है – मेरे भाषण का आपके लिए कुछ भी फायदा नहीं है। यहां तक ​​कि मेरे पैर छूने का भी आप के लिए कुछ मतलब नहीं है क्योंकि आपको बोध प्राप्ती नहीं है।जहाँ तक और जब तक आपको आत्मसाक्षात्कार न हो जाए आप इन पैरों से बहने वाले वायब्रेशन को महसूस नहीं कर सकते। । लेकिन जब मैं लोगों को बताती हूं तो वे कहते हैं – ऐसा कैसे हो सकता है? ऐसा है।

आपको अपना आत्मसाक्षात्कार प्राप्त करना होगा। असमंजस में ना रहें। ऐसा करके आप न केवल अपनी बल्कि समाज की संपूर्ण विकास पद्धति की भी सबसे बड़ी हानि कर रहे हैं। यदि यह प्रयास विफल रहता है, तो हमें ही दोषी ठहराया जाएगा। और महान “संहार ” या विनाश होगा। यदि आपको बोध नहीं मिलता है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि दूसरे इसे प्राप्त नहीं कर सकते। आपको भी मिलेगा, धैर्य रखें।

अब इतने सारे लोगों ने मुझसे पूछा है, “माताजी, इतने सारे आत्मसाक्षात्कार कैसे हो सकते हैं?”। क्यों नहीं हो सकते?

वास्तविकता इसके विपरीत है – नकारात्मकता आप आसानी से पकड़ते हैं। आपको ऐसा क्यों नहीं पूछना चाहिए कि इतने सारे फ्लू के मामले क्यों हैं? यदि आप फ्लू ,सर्दी की पकड़ में आ सकते हैं,  शैतान के वायब्रेशन आप पर बैठे हैं ; तो फिर सकारात्मकता के क्यों नहीं हो सकते?

बहार का समय आ गया है। इस “मायापुरी” (माया का शहर) जो कि बॉम्बे है, में पिछले तीन वर्षों से काम कर रही हूँ। बड़ी मुश्किल से हजार लोगों को आत्मसाक्षात्कार हुआ है। और आत्मसाक्षात्कार का मतलब यह नहीं है कि आप एक आदर्श इंसान बन गए हैं। कि तुम परमात्मा के परिपूर्ण साधन बन गए हो। नहीं, ऐसा होना बाकी है जो शेष है , अच्छा है, ऐसा नहीं है। आपको देखना चाहिए, कि जो कुछ भी है, उसे देखने का एक वैज्ञानिक तरीका है। आत्मसाक्षात्कार होने के बाद आपको पता लगाना चाहिए। यह एक बीज की तरह है जिसे विकसित होना है।

कुछ लोग मुझसे कहते हैं, “माताजी, आप इसे आत्म-साक्षात्कार क्यों कहते हैं?” मैंने कहा, “मुझे इसे क्या कहना चाहिए?”। मान लीजिए एक बच्चे का इंसान का जन्म  हुआ है, क्या मुझे उसे मधुमक्खी कहना चाहिए? इसे विकसित होना है। और फिर आपको संदेह रहित जागरूकता और सोहम अवस्था तक विकसित होना होगा। शुरुआत में, आपको निर्विचार जागरूकता मिलती है, आंतरिक मौन स्थापित होता है। इस आंतरिक मौन के बारे में इतनी सारी किताबें लिखी गई हैं। “क्या आपके कहने का मतलब है, ऐसी इच्छा कभी पूर्ण नहीं होगी?” हां, शांत और शांति प्राप्त हो सकती है  – क्या आपके कहने का मतलब यह है कि भगवान आप पर कभी दया नहीं कर सकते? लेकिन किसी बात को लेकर यह संकोच क्यों। मान लो की कल मैं बताती हूं कि यहां मुफ्त वितरण के लिए एक हीरा है। आप यह भी नहीं सोचेंगे कि, यह हीरा है या नागिन वहां बैठी है। तो प्यार के इस बिल्कुल मुफ्त वितरण में यह कैसा संकोच? हमारे पास समय नहीं है। लोग अपनी घड़ियाँ देख रहे हैं। यह बहुत अच्छी बात है जो हुई है,  लेकिन हमारे पास समय नहीं है। हम अपना समय बचा रहे हैं, निश्चित रूप से। किस लिए बचत कर रहे है?

“हमें समय बचाना चाहिए; हमें घड़ियाँ मिली हैं; हमें समय बचाना चाहिए ”। एक सज्जन थे जो लंदन जाने के लिए बहुत उत्सुक थे। और उन्होंने मुझसे कहा, “मुझे इस तिथि तक जाना चाहिए”। मैंने कहा, “कोई फर्क नहीं पड़ता। कल जाना, कोई फर्क नहीं पड़ता; आपको टिकट नहीं मिला है ”। उन्होंने कहा, “नहीं, नहीं, आप कोई व्यवस्था करवा दीजिये “। मैंने कहा, “यह कुछ ज्यादा ही है, लेकिन फिर भी, आप क्यों जाना चाहते हैं?” तो उन्होंने कुछ कहा, “आप जानते हैं, मुझे एक बॉल डांस में भाग लेना है जो लंदन में है।”

आपने कभी ऐसी डिनर पार्टी नहीं की, ऐसे कार्ड खेल या क्लब में महिलाओं का साथ रखना, जैसा कि हमारे पास जेट युग में है। हमारी माँएँ हमसे कहीं अधिक समझदार थीं। निश्चित रूप से। हमने कभी इन सभी समस्याओं को पहले कभी नहीं देखा था। जिस तरह से हम सब भाग रहे हैं, जैसे पागल लोग हम सुबह और शाम दौड़ रहे हैं, दौड़ रहे हैं और दौड़ रहे हैं और दौड़ रहे हैं – क्या हुआ है? तुम क्यों दौड़ रहे हो? कहाँ भाग रहे हो? ओह, आपको [अश्रव्‍य] के साथ एक समस्या है। अब अमेरिका जाओ, उनसे सीखो – जिन्होंने की अपनी भौतिक समस्याओं को हल कर लिया है वे ईश्वर की चाह कर रहे हैं। [लगभग 20 सेकंड के लिए अश्रव]। क्योंकि वे सीधे नरक जाने के लिए कुछ हेलीकॉप्टर खरीदने के लिए पैसा कमाना चाहते थे। यह ऐसा जेट युग है।

मनुष्य बहुत बुद्धिमान है इसमें कोई संदेह नहीं है, लेकिन उसे किसी भी प्रकार का कोई विवेक नहीं है। उन्हें इस जेट युग में किसी भी प्रकार का कोई विवेक नहीं है। यदि उसके पास विवेक होता, तो वह जानता कि अपनी कुंडलिनी, उसकी शुद्धता और पवित्रता को कैसे संरक्षित किया जाए। अब मनोवैज्ञानिक रूप से भी, जब हम प्रतीकों की बात करते हैं, तो हमें पता होना चाहिए कि जब आपको आत्मसाक्षात्कार  होता है – आप निर्विचार जागरूकता में जाते हैं जो आपको सामूहिक चेतना देता है। आपने सुबह यह देखा होगा जब इतने सारे आत्मसाक्षात्कारी लोग आपकी कुंडलिनी को महसूस कर सकते थे। वे बताते हैं कि मानस भारी था, जल रहा था।

आपको खुद आकर देखना चाहिए। यदि आप सिनेमा के लिए कुछ समय निकाल सकते हैं तो यहाँ आना महत्वपूर्ण है। कृपया आइए और इस पर एक नज़र डालिए। मैं सिनेमा के खिलाफ नहीं हूं। मैं आनंद के खिलाफ नहीं हूं। लेकिन, मैं आपको विश्वास दिलाती हूं आप वास्तव में खुद का, अपनी सुंदर सम्पदा का भी आनंद नहीं ले रहे हैं। 

मैंने एक घर में एक सुंदर पेंटिंग देखी है। और सज्जन मुझे बता रहे थे, “मैंने इसके लिए इतने पैसे दिए हैं, मैंने उसके लिए इतने पैसे दिए हैं”। और मैं बस पेंटिंग का आनंद ले रही थी। क्योंकि पेंटिंग और मेरे बीच कोई विचार नहीं था। पूरा आनंद मेरे अंतर में चैतान्यित हो रहा था।

आप उस संगीत के एक हिस्से का भी आनंद नहीं ले रहे हैं जो आज बजाया गया था या कभी आपके लिए बजाया गया था। क्योंकि [आपके अंदर उसे पाने या रखने सम्बन्धी विचार चल रहे हैं।और पल- पल आपका चित्त दूसरी जगह भटका रहे थे।  मनुष्य जो की सबसे सुंदर रचना है को तो छोड़ ही दें बल्कि पदार्थ की रचना की सुंदरता का भी आप उस तरह आनंद नहीं ले सकते जैसे की एक आत्मसाक्षात्कारी व्यक्ति ले सकता है।

जब किसी व्यक्ति को बोध प्राप्ति हो रही होती है; वे जो आत्मसाक्षात्कारी हैं -जब अपने हाथों को आत्मसाक्षात्कारी की तरफ करते हैं, तो उस खूबसूरत आत्मा से परावर्तित चैतन्य उन्हें बहुत प्रसन्न और आनंदित करते है। वह आनंद जिसका वर्णन नहीं किया जा सकता। और वे कहते हैं, “आह हा हा”, जैसे कि उन्होंने कुछ अति- सुंदर माधुर्य, कुछ सुंदर राग सुना है। और जैसे खूबसूरत इंसान इस जेट युग में बनाए गए हैं, यह विभिन्न प्रकार की, विभिन्न किस्में हैं। और हम किस चीज़ की इच्छा कर रहे हैं?

चलो हम एक मिनट के लिए बैठें और सोचें की, हम चाह क्या रहे हैं? क्या हमें शांति और खुशी मिली है जिसका की इन संपत्ति के साथ वादा किया गया था?  जैसा कि मैंने आपको बताया है, मैं संपत्ति के खिलाफ नहीं हूं। यह केवल एक या दूसरी अति नहीं है, मैं मध्यमार्ग की बात कर रही हूं। लेकिन फिर जिन लोगों ने जाना कि, संपत्ति का कोई फायदा नहीं है, वे हिप्पी बन गए हैं। अब हिप्पीयों को देखें। उन्होंने इसे छोड़ना शुरू कर दिया है। और फिर ड्रग्स तक ले रहे हैं।

यह [अश्रव्य],और स्वीकार करना नहीं है और बल्कि अपने भीतर खड़े होकर देखना कि आप एक सुंदर आत्मा हैं। कि तुम इतने गौरवशाली हो। और तुम सिर्फ उस दिव्य प्रेम के साधन हो जो स्वतः दिव्य प्रेम पाने के इच्छुक व्यक्ति का उपचार उस माँ [जो की दिव्य चैतन्य एवं उत्थान के संकेत की प्रतीक्षा में है] के प्रति जाग्रति द्वारा करता है| यह प्यार उस आदमी में खाली जगह को भरता है जिसे मैं शून्य कहती हूं और शारीरिक रूप से सोलर प्लेक्स के उपर है।

अस्तित्व को प्रेम से, देवीय प्रेम से भरे बिना आप की माँ उठने वाली नहीं है। आपको उसका सम्मान करना चाहिए। आपको उसका सम्मान करना चाहिए। और उस सम्मान के साथ, जब उसे दिव्य प्यार मिलता है, तो वह अपनी गरिमा में उत्थान पाती है। और जब वह उठती है, तो वह आपको थोड़ी सी भी परेशानी नहीं देना चाहती है। [अश्राव्य], वह रुकती है, और [अश्राव्य] वह कहती है, “माँ कृपया मुझे ठीक करो। कृपया मेरे बच्चे का इलाज करें अन्यथा मैं नहीं चदुंगी ”।

कुंडलिनी के रूप में आपके पास कितनी प्यारी एक माँ है। और जब ये सारी बातें उसके खिलाफ कही जाती हैं, तो इससे मेरा दिल जल जाता है। आपकी माँ [अश्राव्य], आपने मना कर दिया है, इस हद तक बिगाड़ा है जो शैतानी है। यह अज्ञानता नहीं है, सकारात्मक रूप से मैं कह सकती हूं, यह शैतानी है।

शैतान के हाथों में मत खेलो। आप स्वयं सबसे शक्तिशाली मानव हैं। मैं क्या करती हूं कि,बस आपको आपकी शक्ति के सागर में फेंक देती हूँ । मैं और कुछ नहीं करती। मैं सिर्फ कुंडलिनी के बीज पर थोड़ा पानी डालती हूं और यह उगता है और विकसित होता है । मेरा काम खत्म हो गया है और फिर आप खुद की सुंदरता पाएं।

सामूहिक चेतना में, आप लोगों को ठीक करते हैं। आधुनिक युग में, आपको सेवा करने का विचार भी आया है। सामग्री में खोज के बाद दूसरों की सेवा करने का विचार है। आपके और मेरे बीच दूसरा कौन है, मुझे नहीं पता। चूँकि आपका चित्त बाहर की तरफ है, इसीलिए आप सभी अलग और विभाजित हैं। लेकिन शाश्वत जो निरंतर है और यदि मेरा [कुछ शब्दों के लिए अश्रव्य], तो दूसरा कौन है? यदि यह हाथ इस हाथ को मार रहा है, तो आप क्या कर रहे हैं? आप कौन सा सामाजिक कार्य कर रहे हैं? सभी [अश्रव्य] कुछ भी नहीं है।

जबकि, बोध प्राप्ति के बाद, आप किसी भी अन्य सक्रिय व्यक्ति की तुलना में बहुत अधिक सक्रिय हो जाते हैं। वे अधिक सक्रिय दिखाई देते हैं लेकिन वास्तव में तनाव अधिक होता है क्योंकि, आप जो विचार कर रहे हैं की आप कर रहे हैं वह बहुत अधिक तनाव जन्य  है। जब आप वायब्रेशन दे रहे होते हैं तब भी आप कहते हैं कि वे गुजर रहे हैं। वे बह रहे हैं। जब ये आपके हाथ हैं, तो आप यह क्यों नहीं कहते कि मैं दे रहा हूं, मैं कर रहा हूं। वह हो रहा है।

तो जिस पहली दशा से आप गुजरते हैं वह है; विचारों के बीच, एक थोडा सा अंतराल निर्विचार जागरूकता का है जिसके माध्यम से आप अपने अचेतन पर कूद सकते हैं। अचेतन चूँकि, पूर्व में यह हमारी जागरूकता में नहीं था।  अचेतन अवस्था से मेरा तात्पर्य ऐसी बेहोशी से नहीं है जहाँ आपको किसी भी चीज़ के बारे में कोई ज्ञान नहीं रहता है, जो की एक अन्य प्रकार की मंत्रमुग्धता है। तो जैसे ही आपका उत्थान निर्विचार जागरूकता में होता है, आपको सामूहिक चेतना मिलती है। और सामूहिक चेतना बिलकुल स्वचालित है। आप स्वतः ही उस व्यक्ति की कुंडलिनी के ज्ञान के प्राप्त करने वाले बन जाते हैं। और आपका मस्तिष्क अपने आप ही अन्य लोगों की कुंडलिनी की तरह हो जाता है क्योंकि आप अचानक दूसरों की कुंडलिनी में चले जाते हैं।

कुंडलिनी के बारे में भय छोड़ देना चाहिए। यह अपनी ही माँ से डरने जैसा है। यदि आप जानते हैं कि माँ क्या है, और उसकी शुचिता और पवित्रता क्या है। और अगर आपको माता सीता याद है; रावण द्वारा उसकी पवित्रता खराब नहीं की जा सकती थी। निष्कलंक गर्भाधान अमेरिकी दिमागों के लिए बोधगम्य नहीं है – नहीं, वे नहीं कर सकते। उन्हें लगता है कि यह मूर्खता है, यह असंभव है – उनके यहाँ ईसा- मसीह जैसे संत कैसे हो सकते हैं? और आधुनिक युग में बहुत से लोग यह नहीं मानते हैं कि महिलाएं भी संत हो सकती हैं और पुरुष शैतान हो सकते हैं। पुरुष शैतान हो सकते हैं, यह संभव है; ऐसे बेकार बंदे। जेट युग में- भले ही राम आए, उन्हें बिल्कुल बेकार माना जाएगा, किसी काम का नहीं ,वह अन्य महिलाओं की तरफ देखता भी नहीं है।

यह वही है जहाँ धर्म और अधर्म के बीच पूरी तरह से भ्रम है। लेकिन सृजन के लिए भ्रम की आवश्यकता है। और भ्रम का हमेशा स्वागत है। कीचड़ में ही, कमल को खिलना है। मुझे उम्मीद है कि इस व्याख्यान के बाद, आप इसे केवल एक व्याख्यान नहीं माने लेकिन एक माँ का अनुरोध जिसने आपको प्यार करने वाले शब्दों के माध्यम से आपसे संपर्क करने की कोशिश की है कि, कृपया खुद को नहीं डुबाये, बल्कि सहज योग के माध्यम से अपने आप को डुबोएं। कोई और योग नहीं है जो इसे कार्यान्वित कर सके, मैं आपको विश्वास दिलाती हूं। अन्य सभी योग आपको अनुकम्पी तंत्रिका तंत्र sympathetic nervous system में ले जाते हैं।

यहां तक ​​कि बुद्ध जैसे व्यक्ति – जो की पूरी दुनिया घुमे, सभी तरह के त्याग वगैरह सब किया। अंतत: वह थक गये और जब वह एक पेड़ के नीचे लेटे हुए थे, उस शिथिल अवस्था में, सर्व-व्यापी माँ ने केवल अपना आशीर्वाद उन पर उंडेला और उन्हें बोध प्राप्त हुआ। लेकिन अब, आपके लिए सामूहिक बोध होना संभव है। अमेरिका में, इसने अद्भुत काम किया है, जैसा कि मैंने आपको कई ऋषियों के बारे में बताया जो यहाँ भारत में रहे थे,उन्होंने वहाँ जन्म लिया है । और जापान और जर्मनी में भी बहुत सफल रहा। इंग्लैंड, मुसीबत यह है कि लोग अभी भी काफी उदासीन हैं। लेकिन मुझे यकीन है कि भावी पीढ़ी वह सब खत्म कर देगी जो अवांछित है। लेकिन, अपने समापन में, वे एक और चरम पर चले गए हैं। वे [अश्रव्य] चले गए हैं।

जो आप करते हैं,या सोचते हैं, वह महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि महत्वपूर्ण वह है जो की आप हैं।

क्या आप स्वयं में स्थित एक बच्चे की तरह हैं? जैसे, कमल के फूल की तरह? कोई  व्यक्ति जो बहुत गंभीर है और उसे अपना बोध नहीं मिलता है – मैं उससे कहती हूं, “जाओ और एक दिन के लिए मनोरंजन फिल्म देखो”। यह सत्य है। आपको बहुत ही हल्के दिल का इंसान बनना होगा। इसका अर्थ मूर्खतापूर्ण होना नहीं है। लेकिन सिर्फ खेल भावना। सिर्फ नाटक देखते हुए। शांत चित्त। मैं एक चुटकुला सुनाती हूं कि कुछ लोग जो हवाई जहाज से जा रहे थे, सामान अपने सिर पर लादे हुए थे। और लोगों ने पूछा कि वे ऐसा क्यों कर रहे थे। और उन्होंने कहा, “हम  विमान पर भार को हल्का करने की कोशिश कर रहे हैं। उसी तरह, हम बहुत गंभीर हैं, शायद कुछ ज्यादा ही  [अश्रव्य वाक्य]। जो विमान आपको ले जा रहा है, वह आप में स्थित पूरे वजन को अपने साथ ले जा रहा है। जिसने आपकी रचना की है वह आपकी देख भाल भी करता है। जो यह आपके दिल में धड़कता है, वही पूरे जीवन के खेल का प्रबंधन करता है।

इस मृत कार्य को अपने सिर पर एक और भार नहीं बनाना चाहिए। बस एक बच्चे की तरह महसूस करें। और कभी-भी ऐसी अवस्था  धारण न करें जहाँ आप कहते हैं कि आप सभी काम करते हैं और पूरे फल प्रभु के चरणों में डालते हैं। आप नहीं कर सकते। मैं अपने मराठी व्याख्यान में  गीता पर भी बोलने जा रही हूं, जहां मैं आपको बताने वाली हूँ कि गीता के बारे में हम क्या गलती कर रहे हैं। गीता और कुछ नहीं बल्कि सहज योग है। लेकिन श्री कृष्ण की कूटनीति देखें, जिसमें घनीभूत सहज योग की संवेदना है, सहज योग है, और यहाँ मैं आपकी माँ हूँ, मैं आपको सब कुछ बता रही हूँ।

गाड़ी घोड़े के पीछे नहीं है; यह स्वयं घोड़े में है। तो कृष्ण ने कहा अगर तुम मेरी बात नहीं मानते हो, तो बस गाड़ी हांकते रहो। जब तक की आप उस स्थिति में नहीं पहुंच जाते, जहां आप समझ जाते हैं कि घोड़े को सामने नहीं लाना ही गलत है। बोध के बाद, यदि आप गीता, या बाइबिल या कुरान, [अश्रव्य] पढ़ते हैं – यहां तक ​​कि वे भी आत्मसाक्षात्कारी थे। वह महान थे। आपको एहसास होगा कि हम अभी तक इन पुस्तकों के वास्तविक अर्थ को समझ नहीं पाए हैं। और न ही हमने “अकार” (रूप), “निराकार” (निराकार), [अश्रव्य] और रूप के बारे में समझा है।

जो लोग इस बारे में चिंतित हैं कि क्या यह एक रूप है, या यह एक अमूर्त है, उन्हें यह जानना चाहिए कि यह दोनों है। जो सामूहिक अचेतन है अमूर्त जब उसे प्रतीक के रूप में व्यक्त करता है जो रूप बन जाता है। उदाहरण के लिए, मूलाधार चक्र में, चक्र जो सेक्स बिंदु है; आप जो देख रहे हैं वह कुंडलिनी नहीं बल्कि श्री गणेश है। कितना सुंदर बच्चा है। श्री गणेश एक शाश्वत बालक हैं। और उस प्रतीक को मूलाधार पर लाकर यह सुझाव दिया जाता है कि आपको अपनी दिव्य माँ को खोजने के लिए एक बच्चे की तरह बनना होगा। लेकिन मूर्ख अधपके लोगों ने, गणेश को देखा – उन्होंने केवल गणेश की सूंड को देखा, जो कुंडलित थी, और उन्होंने कहा, यह कुंडलिनी है।

इस गलती को करके उन्होंने स्वीकार किया कि कुंडलिनी उनके मूलाधार चक्र में पड़ी है। तो जो प्रतीक अमूर्त नहीं हैं, वे भी अमूर्त के विचारोत्तेजक हैं – जैसे फूल शहद के सूचक होते हैं। लेकिन आपको मधुमक्खी बनना होगा; फूलों या शहद के बारे में बात करने का कोई फायदा नहीं।  चूँकि मैं इस पर तुली हुई थी इसलिए आधुनिक युग में, खोज पूरी हो गई । मेरे सारे जन्मों में पहली बार मुझे इसकी आवश्यकता महसूस हुई और मैने इसे कार्यान्वित किया। और मैं कई लोगों के पास गयी जिन्होंने दावा किया कि वे शिष्य हैं। क्योंकि मैंने कभी एक शब्द नहीं कहा। [दो वाक्यों के लिए अक्षम्य]।

और मैंने सहज योग की यह विधि खोज निकाली, जहाँ कुंडलिनी मध्य में उठती है और आपके सहस्रार को तोड़ देती है। बहुत से लोग ध्यान देंगे कि जब आपको बोध प्राप्त होता है, तो आपको आँखों की पुतली का फैलाव होता है, जो कि parasympathetic nervous system.पंरानुकम्पी तंत्रिका तन्त्र  का संकेत है। जिसे आप मेरी मेस्मेरिज्म या अन्य किसी भी विधि से प्राप्त नहीं कर सकते हैं, लेकिन केवल parasympathetic nervous system.परानुकम्पी तंत्रिका तन्त्र की गतिविधि के माध्यम से होता है जो कि आप नहीं कर सकते। मानव द्वारा किसी के परानुकम्पी तंत्रिका तंत्र को फैला पाना असंभव है। यह एक स्थूल अभिव्यक्ति है, लेकिन कई सूक्ष्म अभिव्यक्ति हैं जो [अश्रव्य] हैं।

इसलिए मैं आपको कुछ शब्दों के लिए [अश्राव्य] सुझाव देती हूं और कल ध्यान के लिए आइये , हम भारतीय विद्या भवन में ध्यान करने जा रहे हैं। [अश्रव्य] अपने मानस को हल्का करें और अपने अस्तित्व को हल्का करने की कोशिश करें [अश्राव्य, कम से कम एक मिनट के लिए टेप में गड़बड़ी]।

क्या आप सामान्य जन को सामूहिक आत्मसाक्षात्कार दे सकते हैं? वह जेट युग है जिस पर मनुष्य गर्व करता है। लेकिन देखिए कि हमने खुद को कहां उतारा हैं। यहाँ तक की हम अपने धर्म को जनता में बेच रहे हैं और हम इसे खरीदने की कोशिश कर रहे हैं। जब कुछ अज्ञानी ब्राह्मण ऐसा कर रहे थे, चलो इसकी उपेक्षा भी कर देते। लेकिन अब बुद्धिमान [अश्राव्य] हैं। कृपया [अश्राव्य] और बाद में भारतीय विद्या भवन में आने का प्रयास करें। और जो लोग किसी भी बीमारी से पीड़ित हैं .. [रिकॉर्डिंग का अंत]।