On para-lok Cowasji Jehangir Hall, मुंबई (भारत)

                                    सार्वजनिक कार्यक्रम तीसरा दिवस  

जहाँगीर हॉल मुंबई 24-03-1973

हम जागरूकता पर कुछ प्रकाश डाल सकते हैं। जैसा कि मैंने आपको पहले बताया है – एक बिंदु पर इसकी खोज को यह कहकर रोक दिया कि हम आगे नहीं जा सकते। स्वयं हमारे अस्तित्व में, हमें नकारात्मकता और सकारात्मकता अनुकम्पी और परानुकम्पी तंत्रिका तंत्र में प्राप्त है। यहां तक ​​कि धर्म की खोज में, जब हम इस ओर अपना चित्त ले जाना शुरू करते हैं, तो हम इस की खोज बाहर से शुरू करते हैं। ऐसा इसलिए नहीं है क्योंकि हमारे साथ कुछ गलत है, […]