Atma Sakshatkar ka Arth (Understand your importance)

Mumbai (India)

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1973-09-03 Atma Sakshatkar ka Arth 1973 Mumbai

इसी तरह से जब आगे हो जाएंगे तो इसमें ना तो कोई शैतान रह जाएगा ना कोई बुरा रह जाएगा | जो आपके सामने आएगा वो आपके प्यार में घुलना ही चाहिए और नहीं घुले तो वो भाग जाए ऐसी जिस दिन दशा आएगी उस दिन फिर आपको इस protection (कवच)की जरूरत नहीं रहेगी | और protection के बहुत सारे तरीके आप ही लोगों ने ढूंढ के निकाले हैं । उसमें से कुछ तरीके जो हैं आप चाहें तो ये लोग बता सकते हैं आपको कोई भी उठ करके जो जो ये लोग इस्तेमाल करते हैं या आप इनसे पूछ सकते हैं । जैसे फोटो पे लेना, पैर से निकालना, पानी से निकालना, अपने ही को अपना बंधन डालना आदि नाम different – different (भिन्न – भिन्न) नाम लेना वगैरह-वगैरह बहुत सारे सब कुछ प्रकार है । उसके मामले में आप चाहें तो इन लोगों से अगर बात करें तो ये लोग सब बता सकते हैं । लेकिन realized आदमी को ध्यान में आते वक्त पहले बैठ करके देखना चाहिए कि माताजी से ये जो आ रहा है उसमें कहीं हमारी कोई पकड़ है क्या ? हमें vibrations (चैतन्य लहरीयाँ )आ रहे हैं या नहीं ? अगर vibrations रुक गए हैं तो उसे निकालने दो । उसको कैसे निकालना चाहिए, क्या करना चाहिए, शरद यह बता सकते हैं । ये लोग बता सकते हैं किस तरह से बंद हुए vibrations निकल सकते हैं । अगर हाथ में थोड़ी सी जलन है तो उसको फूंक कर कैसे निकालना चाहिए । उसको उस वक्त फूंक करके निकाल दीजिए, नाम ले लीजिए, फूंकने से निकल जाएगा, एकदम ऐसा निकल जाएगा कि आपको लगेगा ही नहीं वहां पकड़ के है, atmosphere (वातावरण) में है, हर जगह है आप पकड़ जाते हैं ।

अभी आप की दशा वैसी है जैसी छोटी सी लड़की खाना बनाना सींख रही है । फिर आप जब इस शास्त्र में निपुण हो जाएंगे तभी आप अति योग्य होंयेंगे क्योंकि कुशलता पूरी आ जाएगी, perfect knowledge (सटीक ज्ञान) आ जाएगा और जब perfect (सटीक) इसका knowledge (ज्ञान) आ जाता है तो आप ही knowledge (ज्ञान) हो जाते हैं । माने आप कुछ करते कुछ नहीं वह automatically (स्वतः) ही सब मामला अपने आप चलते रहता है । जैसे कि ये अगर perfect (उत्तम) हो जाएं और इसमें से मेरी आवाज़ अगर perfect (सटीक) अंदर जा रही है तो इसको कुछ नहीं करना पड़ता है, कुछ जानना नहीं पड़ता है, सीधे ही सारे का सारा रिकॉर्ड (record) हो जाता है । क्योंकि बोलने वाला और करने वाला और सब को संभालने वाला पालनहार परमात्मा सब के सर पर मँडरा रहा है । Realized लोगों को एक बात और भी पता होयेगी, ये भी बहुत जरूरी बात है जिसको जान लेने से आपको एक तरह की निर्भरता आ जाएगी । हर एक realized आदमी के ऊपर में देवता मँडराते हैं । जैसे किसी भी कहते हैं दुष्ट आदमी के ऊपर में भूत मँडराते हैं वैसे ही बहुत लालायित हैं सारे देवता लोग उन लोगों की मदद करने के लिए जो realized हैं । उनकों सुगंध आती है और वों बराबर उनके आस-पास मँडराते हैं । आप में से जिन लोगों ने इसका अनुभव लिया होगा अभी कोई बता रही थी उस दिन की उनके देवर पे बाधा थी । उनके भूत की बाधा थी और साढे़ तीन बजे करीब उनकी तबीयत बहुत खराब हो गई और वो लगे चिल्लाने चींखने । बाहर भी आदमी चिल्लाने चिखने लग गया । और उसके बाद में वे कहने लग गए इतनी गंदगी अंदर आई, इतनी बदबू अंदर में आई कि समझ में नहीं आया कि अब क्या करें । उसके बाद इन लोगों ने नाम लेना शुरु कर दिया और उसको vibrations देना शुरू कर दी और जैसे ही वो ठंडे पड़े वैसे ही खुशबू आना शुरू हो गई बहुत जोरों में और वो एकदम ठीक हो गए । आपको भी कितनों ही लोगों में ध्यान में पार होने से पहले या बाद में भी बहुत बाहर सुगंध आती है । तो चैतन्य सुगंध (अस्पष्ट)। चैतन्य बहुत सुगंधित हैं और अत्यंत आह्लाददायी हैं । इसी से आपको सुगंध भी आती है । तो जितना कुछ दुर्गंध है वो अपने आप गिर सकता है अगर आप अपनी ध्यान की दशा ठीक रखें माने आप अपने को स्थित रखें । इसमें कोई बुरा मानने की बात नहीं है । आपने देखा अब शरद हैं, हम कहते हैं शरद काफी ऊंचे हैं, मोदी हैं बहुत ऊंचे हैं, ये ऊंचे हैं, देवड़े है ही, चंदू भाई हैं आदि बहुत सारे लोग हैं आप जानते हैं, अपने शौक साहब भी आगे चले गए, अपने लाल साहब आगे चले गए । बहुत से लोग आगे चले गए ।

अब मैं उनके नाम लूं तो मेरे ख्याल से कि अधिकतर लोग आगे चले गए और तो भी वो सब लोग पकड़ते ही हैं थोड़ा बहुत । किस किस का नाम लें ? सभी लोग थोड़ा थोड़ा पकड़ लेते हैं । शरद ने अभी पकड़ लिया था बुरी तरह से । तीन दिन पहले उन्होंने बहुत बुरी तरह से पकड़ लिया था । ठीक है पकड़ लिया तो पकड़ लिया । लेकिन समझ में आ रहा है पकड़े हैं इसलिए हालत ये हो रही है । पकड़ गए ये समझ में आ रहा है । इसको निकाल डालना बहुत आसान है । Realized आदमी के लिए तो बहुत ही आसान है । उसको किसी तरह से निकाल डालना चाहिए । वो कैसे निकालना चाहिए, क्या करना चाहिए, क्या-क्या विधियां हैं ये लोग सब जानते हैं और अपने ऊपर में experiment (प्रयोग) करो तरह-तरह के । देखो समुंदर में खड़े होकर भी निकल सकता है । बहुत से पहले realized लोग जाकर पानी में बैठ जाते थे, सच्ची बात है । क्योंकि बेचारे इतने परेशान होते थे, उनकी उंगलियां जलने लगती तो यहां जो (अस्पष्ट) महाराज हैं तो वो जब पार हो गए तो उसके बाद वो फिर पानी में बैठतें । उनकी उंगलियां जो है जल-जल करके छोटी-छोटी हो गई । उनमें (अस्पष्ट / creative) power तो आ रहे थे पर उनको यह नहीं मालूम कि उनकी उंगलियां क्यों जल जलकर छोटी हो गई । उनकी उंगलियां जल जलकर के इसीलिए छोटी हो गई क्योंकि आप जानते हैं कि आपके भी हाथ जलते रहते हैं । अब बेचारों को पता ही नहीं था अब बंबई शहर में वो अब आते ही नहीं है अब  क्योंकि बंबई शहर में इतने हाथ जलते हैं । उनके हाथ बहुत ज्यादा जलते होयेंगे । अब उनको पता नहीं था कि किस तरह से इसको ठीक करें तो बेचारे जाकर के वहां बैठ गए (अस्पष्ट)। हाँ वहां जाकर बैठ गए । अब वो पानी में बैठे रहते हैं । क्योंकि अब आपको तो कोई बताने वाला है, कोई जानकार है, समझाने वाला है कि हाथ जल रहे हैं तो कोई हर्ज नहीं, हाँ इस तरह से निकाल डालो । अपने हाथ बचाओ । हमारे देवड़े साहब के हाथ दो चार लोगों से ऐसे बुरी तरह से जले थे कि वो तो किसी किसी को देखके अब वो नर्वस हो जाते हैं कि माताजी इनसे कल जो दाढ़ी वाले वो आए थे उनको देखते ही साथ इनके दोनों हाथ आकाश में घूमने लग गए । तो आप इसको सोच लीजिए कि आपको कोई बताने वाला है, समझाने वाला है कि realization के बाद कितनी dangerous (खतरनाक) रास्ता है । कोई भी आप को पकड़ सकता है आप बिल्कुल छोटे से बच्चे हैं बिल्कुल ।और ऐसे छोटे से बच्चे बहुत जरूरी है कि अपनी स्थिति जो है उसको संभालेे रखना । हमारा तो आप पर सब पर हाथ है ही हर समय और हर समय आपका सबका ख्याल रखते हैं । और अत्यंत प्रेम है सबसे और बड़ा गौरव भी लगता है और बड़ा आनंद भी आता है इतने लोग आज मेरे बेटे हैं, बच्चे हैं । और बड़ी गौरव की बात है माँ के लिए कि आप पार हैं । लेकिन जो पाया हुआ है वो छोटी-छोटी चीजों पर मत खोना।

आप लोगों को सबको इसका अनुभव आया है । कभी आप जाधव से पहुंचे तो जाधव आपको बताएंगे, आपके पाटिल साहब है वो मुझे बता रहे हैं । इधर ladies में कितने ही लोग बता सकती हैं कैसी-कैसी इनको अनुभव आये,  कैसे-कैसे ये ठीक करें । मतलब कोई भी problem हो उसको तो मैं solve कर ही सकती हूँ पर थोड़ा थोड़ा आप भी, आप भी करें, आप भी सीखें जाने इस चीज को। आप ही डॉक्टर हैं और आप ही दवा । आप ही के हाथ से जाने वाला है । आप ही इसको समझने वाले हैं, उसमें थोड़ी सी कहीं चोट वोट लग भी गई तो माँ बैठी ही हुई है ठीक करने के लिए । कोई चिंता की बात नहीं है । ऐसे पहले कहाँ थे लोग जो कि बेचारे, अब जो ऐसे लोग पर भी हुए हैं वो तो कहते कि कहाँ से हम पार हो गए भगवान बचाए रखें । ऐसे ऐसे इसीलिए लोग पहले थे कि पार हो जाते थे तो हाथ में चिमटा लेकर बैठते थे । उनका दोष नहीं था । कोई जो आए तो उसको तड़ातड़ मारते थे । कोई अगर जलाने वाला आता था जिसकी तरफ से ऐसे गरम-गरम भांप आती थी तो उसको लेकर चिमटे से मारते थे, तो उनको चिमटे वाल बाबा कहते थे । हमने अपने बचपन में देखे हैं ऐसे । मैं देखकर हैरान हूँ कि जो आए उसको चिमटे से मारे जिसको देखो उसको ही । मुझे बड़े प्यार से बुला रहे थे । मैंने कभी चिमटे -उमटे से मार नहीं खाया । उनके पास कौन जाये ? तो उसकी वजह ये है कि इन लोग कोई बताने वाला या समझाने वाला कोई था ही नहीं । अब आप कितने लोगों की बीमारियां ठीक करते हैं, कैंसर जैसी बीमारी आपने ठीक की है, इस तरह की सब बीमारियां आप ठीक करते हैं, कितनी ही तरह की बाधाओं को आपने हटा दिया है, इतना अपने कार्य किया हुआ है । जरूरी है कि उसमें आपको कुछ ना कुछ पकड़ेगा ही । लेकिन उसका इलाज उसका भी दवाखाना है । आपका भी दवाखाना है और आपको बताने वाला भी बैठा हैं और सब बारीकी से समझाने वाला बैठा हैं तो डरने की ऐसी कोई बात नहीं है । फिर भी अगर आप डरे  तो इसका मतलब है कि  आप आगे जाने का इस जन्म में नहीं है । यह तो realized लोगों की बात हुई लेकिन एक और बात हम को समझना चाहिए । बहुत से संत साधु ऐसे हैं जो मर चुके है लेकिन वो जन्म नहीं ले पा रहे हैं । कोशिश कर रहे हैं बहुत लोग लेकिन जन्म नहीं ले पा रहे हैं क्योंकि उनको वैसा जीव नहीं मिल रहा है या कुछ और प्रश्न है । तो ऐसे संत साधुओं का भी ऐसा विचार बन रहा है कि हमारे  बीच में जो लोग कभी भी realized नहीं हो सकते, ऐसे बहुत से लोग हैं अपने यहां जो कभी भी नहीं होंगे क्योंकि उन्होंने पहले कुछ ऐसे कर्म किए हुए हैं कुछ ऐसे (अस्पष्ट)  किया है, कुछ किया है, इस तरह के इसमें फंसे हुए रहे या कुछ ऐसी बात है तो वो कहते हैं कि हम इनके अंदर आ जाएं । तो आपको उनके अंदर बाधा सी लगेगी लेकिन वो लोग कोई नुकसान वाले नहीं हैं । उनसे लड़ने की जरूरत नहीं । हालांकि बड़े (अस्पष्ट) लोग जो है उनको अजीब सी बात लगेगी की माताजी ऐसी बात कहतीं हैं, उनको छेड़े नहीं । अगर उनको छेड़ोगे तो ये हो जाएगा कि उनके अंदर भूत भी घुस सकते हैं । क्योंकि उनके अंदर भूत तो घुसे ही हुए हैं, वो नहीं होयेंगे तो संत आ जाएंगे । संत आने से अपना कार्य हो जाएगा । इसीलिए बहुत से लोगों से संत (अस्पष्ट) । उनकी बड़ी इच्छा है उन्होंने ऐसे कहा है मुझसे कि हम चाहते हैं कि हम अपने को लाएं लेकिन अब हम छोटे बच्चे के रूप में आए तो तुम्हें कैसे मदद मिलेगी । इसलिए बेहतर है कि ऐसे लोग तुम्हारे इसमें आते हैं और जो पार होने के में खास उनमें दिखाई नहीं देता; ऐसे बहुत से लोग हैं वो लोग अगर पार भी नहीं हो रहे हैं तो भी आप उनसे भिड़ने की जरूरत नहीं । पर लोग आते रहेंगे वो हमेशा से, वो चार साल आएंगे नहीं तो 6 साल आएंगे, कोई दस साल भी आएंगे कोई नहीं, उनसे भिड़ना नहीं । आ रहे हैं बैठने दो, आपको मालूम है पार नहीं है । जो एक बार पार हो गया वह तो पार होता रहेगा लेकिन जो हुआ ही नहीं पार और डामाडोल चल रहा है उससे भिड़ने की जरूरत नहीं। ये आज आपको मैं एक इस तरह से बता रही हूँ उनपर भी संत ही लोग काम करते हैं क्योंकि बगैर उनके काम नहीं बनने वाला है । क्योंकि भूतबाधा जो है उसको भगाने के लिए संत ही लोग काम करेंगे क्योंकि आप लोगों को वह दिखाई नहीं देता । आप तो परलोक में तो जा नहीं सकते तो उन्हीं को ये कार्य करने दीजिए । तो वो लोग कहते हैं कि हम आ करके इस पर कार्यांवित रहेंगे और आप के कार्य को हम बढ़ाएंगे। वो आपको किसी को ठीक नहीं करेंगे, कुछ नहीं करेंगे पर वो इस तरह का कार्य करेंगे कि वो दूसरों के साथ में जैसे ऐसे लोग हैं वो ज्यादा भाषा प्रवण होयेंगे, वो बोलेंगे अच्छा। लोगों को खींचकर के लायेंगे बहुत से और लोगों का लायेंगे जिनको लाना है । ऐसे हमारे पास में एक साहब थे उन्होंने हमारे ऊपर एक article (लेख) भी लिखा था पर वो कुछ ज्यादा ही (अस्पष्ट) वो भाग गए । उनको कभी वो पार नहीं होने वाले थे । उन पर एक दूसरे संत छा गए तो उन्होंने कहा चलो लिखो अब इनके ऊपर तो वो लिखने लग गए हमारे ऊपर । फिर उसके बाद में वो ज़रा कुछ बेचारे कुछ ऐसे जब चक्कर में फंस गए कि वहां पर कुछ दूसरा ही रंग चल गया तो वो उसी में फंसे रहे । तो ऐसे लोगों का बचाना चाहिए । उन्हें संतों ही के साथ रखो कमसकम सदाचार में रहेंगे और अपने यहां आने से उनके ऊपर कभी भूत बाधा भी नहीं आएगी । उनको शारीरिक पीड़ा नहीं होगी, उनको मानसिक पीड़ा नहीं होगी, उनकी बुद्धि (अस्पष्ट)। क्योंकि संत किसी को सताते नहीं इसलिए उनके अंदर संत ही लोग आएंगे । लेकिन जो महंत है वो भी आपके ऊपर मँडरा रहे हैं, वो आपकी मदद करेंगे । वो भी आपकी मदद कर रहे हैं । वो आपको बहुत सारी बातों से बचाएंगे और आप को बढ़ाएंगे। आपकी शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक protection रहेगा । आपके संसार की जो काम है उसको देखेगा, आपके घर द्वार का जो काम है वो देखेगा, आपके बाल-बच्चों को संभालेंगे, ये सब वो लोग करेंगे । लेकिन आप लोग अपने को पूरी तरह से परमात्मा में समा दें, बहुत बड़ी आप पर ज़िम्मेदारी है । आज मैं चाह रही थी कि अगर किसी को कोई प्रश्न हो कुछ discussion करना हो तो वो करें । दूसरे सौव साहब ने मुझे बहुत अच्छे ये दिए हुए हैं और आप लोग बगीचे में जैसे gardener (माली) होते हैं उस तरह से । आपको इस बगीचे को कैसे, आपको इस बगीचे में कैसे रखना है, इसको किस तरह से ठीक लगाना है, कैसे चलाना है वो सब आपको सोचना है । वो आप सोच कर के आप उसका बताएं कि कैसे है । उन्होंने एक जो बात कहीं वो ठीक है वो कह रहे थे अगर हम लोगों ने realization दिया और उसके बाद हम ने follow-up नहीं किया तो realization खो जाएगा । यह बात सही है अगर हम लोगों ने अपनी जो realization की जो देने पर भी उसको अगर follow-up नहीं किया, उनको protect नहीं किया, उनको आगे हम बढ़ाते नहीं रहे, उनका हमने ख्याल नहीं किया तो हो सकता है कि उनका जो realization है वो खो जाए  । और फिर बहुत देर बाद जागेगा तब तक उनको परेशानी होगी । इसलिए सबको इसमें समेटे रहना है और सब को हर महीने एक बार तो जरूर मिलना चाहिए । हर एक realized आदमी को हर महीने एक बार जरूर मिलना चाहिए । वो ऐसा आप बना लीजिए कि हर महीने, महीने में एक बार सब के पास वो चिट्ठी जाए या कोई ऐसा न्यूज़पेपर बना लीजिए कि जिसको सब लोग पढ़ते हो उसमें 1 महीने के लिए वहां पर दिया जाए जहां पैसा ना लगता हो । पैसा आप लोग कहीं भी मत दीजिए और ना किसी से आप पैसा ले । पैसे के मामले में पड़िए नहीं । आश्रम भी बनाने के लिए जो गवर्नमेंट जमीन भी देगीं उसमें भी कभी इस तरह से विचार न करें कि उसमें आप सब्जी लगाइए । फिर आप सब्जी बेचते रहें, ये सब धंधे करने की कोई जरूरत नहीं । हम लोगों को पैसा नहीं कमाना है । आज आपने पढ़ा होगा कि वो चेयरमैन स्टेट बैंक का क्या हाल हुआ है । वो आश्रम में गए वो नब्बे लाख उनको दिया, बीस लाख उनको दिया,  वहां फर्नीचर बन रहा है । फर्नीचर बनाने का क्या आश्रम में काम करने का होता है अक्कल लगाइए । आप मेहरबानी से अपने इसमें फर्नीचर बनाकर उसको बेचिएगा नहीं, नहीं तो कल देखिएगा कि हम आ रहे हैं पीछे लोग फर्नीचर बना रहे हैं, कोई जरूरत नहीं है । वहां पर आपको मन आए तो gardening (बागवानी) करना नहीं तो gardener (माली) रख लेना । ये सब काम करने के लिए बहुत से लोग हैं । आप लोग कोई विशेष काम के लिए हैं । आप ध्यान में और चैतन्य से और दूसरों के दुख दूर करने में, उनको चैतन्य देने में, उनको जागृति देने में, उनको पार कराने में (अस्पष्ट) लगाइए । और पैसा जहां तक है दूर रहिए । पैसे के मामले में बिल्कुल आप लोग मत पड़़िए । कि पैसा और वो पैसे का इंतजाम होना चाहिए और इतना इतना पैसा लो और उसका हिसाब-किताब रखो कोई जरूरत नहीं । चैतन्य का और पैसे का हिसाब किताब आपने जोड़ दिया तो आप पकड़ जायेंगे हमेशा के लिए । इसलिए पैसा और परमात्मा इसका बिल्कुल कोई संबंध नहीं । कोई आप को मुफ्त में जगह देता है, भले; नहीं देता है तो कोई ऐसी बात नहीं, सब परमात्मा की मर्जी है । आप अगर कहीं बैठे हुए हैं, किसी ने आपको जगह दे दी तो परमात्मा का आदमी था उसने दे दी; नहीं दी, नहीं दी भला । जगह से कोई भी मनुष्य परमात्मा (अस्पष्ट)।  आश्रम बहुत से बने हुए हैं यहां । आज आपलोग आश्रम नहीं बनाया इसीलिये उधर कोई भी दृष्टि न लगाएं । मेहरबानी से अपनी दृष्टि उधर न लगाएं कि आश्रम में हम ये करेंगे, वो करेंगे और आश्रम में हम business (व्यापार) करेंगे, मैं ये चीज कभी चलने नहीं दूंगी । और जब मैं देखूंगी आप लोग इस धंधे में फंसे हुए हैं तो मेरे बस के आप लोग नहीं । फिर मैं आपके लिए कुछ नहीं हूँ । Business आपको बिल्कुल नहीं करना है किसी भी तरह का । पैसा भी आपको इकट्ठा नहीं करना है किसी भी तरह, कोई सी भी चीज के लिए । एक साहब थे वो मुझसे कहने लगे कि मैं आपका फोटो बेचूंगा फिर उनका मैं वो आश्रम को पैसे दूंगा। तो मैंने कहा कौन सा आश्रम, किस को पैसे देने है, किसने कहा तुम्हें ये (अस्पष्ट) ? तुमसे किसने कहा ? इसकी कोई आपको चिंता करने की जरूरत नहीं । इसका करने वाला,  अपने को संभालने वाला वो हैं । हम कोई अपना काम थोड़े ही कर रहे हैं, उसका काम कर रहे हैं । उसको देना हो तो दें, नहीं देना हो तो नहीं दे । और वही काम जो रात दिन हम गोबर खाने का करते हैं वो इसमें आकर भी करने का है तो कोई फायदा नहीं । मुझे इस तरह का सुझाव कोई भी ना दें क्योंकि दो चार ने दिया है इससे मुझे बड़ा जी घबराता है । मेहरबानी से मुझे इस तरह के सुझाव को मैं सुनने वाली नहीं हूँ । ऐसे तो मैं सीधी हूँ और भोली भी हूँ लेकिन ऐसी बड़ी चालाक भी हूँ । इस चक्कर में मैं आने वाली नहीं हूँ । आपको पहले ही मैं बता देती हू्ँ पैसे के चक्करबाजी में आपने अगर मुझे चलाया तो मैं उसमें चलने वाली नहीं । चाहे तो आप लोग उसमें पार हो चाहे नहीं हो, मेरा इससे कोई मतलब नहीं । पहले समझ लेना चाहिए कि पैसे का और इसका कोई भी संबंध कहीं भी किसी जगह भी नहीं है।

दूसरी चीज, राजकारण से इसका संबंध नहीं है । अभी आपको ऐसा भी लोग आयेंगे कि चलो तुम इलेक्शन (चुनाव) में खड़े हो जाओ तुम्हारा इतना following है ।

आप को राजकारण में जाना है तो आप राजकारण में जाये लेकिन राजकारण मनुष्य ने बनाया है, परमात्मा ने  बनाया ? जो परमात्मा की चीज है उसमें जब खड़ा होना है तो इसका राजकारण से और सत्ता से कोई भी संबंध नहीं, ये पहली बात आप समझ लें । और इसका कोई भी पदवी से संबंध नहीं है । अगर आप ये सोचे कि साहब हम बड़े भारी ट्रस्टी हैं । यहां तो दो ही चार लोग हैं बेचारे अभी । लेकिन कोई अपने को सोचे कि मैं बड़ा भारी इसका एक secretary हूँ समझ लीजिए या मैं इसका चेयरमैन हूँ,  मैं क्या सोचूं कि मैं चेयरमैन हूँ तो इसमें चेयर वेयर का कोई भी संबंध नहीं है । और ना इसका कोई आसन है या पीठ है , पहली बात समझ लें आपस में करने की बात है । ना इसका कोई पीठ है या इसका कोई आसन है । (अस्पष्ट / मराठी में) । कोई पीठ निकालने का नहीं, नहीं तो आदि शंकराचार्य की गादी (गद्दी) पर कौन बैठे हैं जो बिल्कुल non-realized लोग हैं, nothing to do (कुछ करने का नहीं) । कोई गादी पर किसी को नहीं बैठने वाला । सब अपनी ही गादी पर बैठे, दूसरें की गादी पर बैठने से हमेशा आपको निकालने का डर रहता है । अपनी-अपनी गादी पर सब लोग बैठेंगे और अपनी ही गादी से अपने पर ही राज करेंगे तो बहुत कुछ हो सकता है ।

तो दो चार चीजों को बिल्कुल  गांठ बांध कर रख ले । तीसरी चीज, जो सत्चरित्र, सदाचार और शुद्धता इसके बगैर आप कुछ भी किसी मार्ग में जा नहीं सकते । अगर आपके अंदर कुछ ऐसे वैसी आदतें हैं उसको आपको छोड़ने का प्रयत्न करना ही होगा मेरे पाँव की कसम लें। असल में बात यह है कि अब आपके अंदर शक्ति है वो छोड़ने की । जैसे हिंदुस्तानियों की खास आदतें यह है कि आपस में बुराई करना । अब आप प्रेम में बंधे हुए हैं । हम लोग सब भाई बहन हैं । आपस में अगर किसी ने कुछ हो भी गया, हो सकता है कोई किसी का पैर दुख भी जाए तो जरूरी नहीं कि उसको जाकर सारे संसार में आप बदनाम करते फिरें कि क्या (अस्पष्ट) । लेकिन जान लेकर के भी अपने भाइयों को बचाने की आप पर पूर्ण जिम्मेदारी है, भाइयों पर और बहनों पर । उसके लिए कुछ भी करना पड़े, हमें उस को बचाना पड़ेगा । लेकिन (अस्पष्ट) मतलब नहीं कि आप अब किसी को पैसा दें, फिर वहीं आदत । आप किसी को पैसा उधार नहीं दें । कोई अगर आपसे पैसा उधार मांगता है तो बिल्कुल एक कोड़ी ना दें, बिल्कुल देने की जरूरत नहीं है । इसमें पैसा उधार देने की जरूरत नहीं । अगर कोई आदमी अपने spiritual life (आध्यात्मिक जीवन) में, कुंडलिनी में उसका पतन हो रहा हो या उसका किसी तरह से गिर रहा है, उसकी कोई आदत पड़ गई है छुटती नहीं, सबको मिलकर के मदद करनी चाहिए । उसके चक्र चलाओ अपने प्यार में । पवित्रता पूरी हमारे अंदर जब तक नहीं आएगी तब तक हमारा कार्य बिल्कुल अधूरा रहेगा । आपको यह पता होना चाहिए कि सारी दुनिया की दृष्टि आपकी ओर ये लगा कर के आप इसकी दीवाली सजा रहे हैं । लोगों को दृष्टि घर पर नहीं होती है, उन दीयों पर होती है जो जलते हैं । आप हरेक के जीवन की ओर संसार की दृष्टि है कि आखिर ये जो बड़े पार हो गए हैं और दुनिया भर की बीमारियां ठीक कर रहे हैं, इनका जीवन कैसा है । इसके बुराई कर, उसकी बुराई कर,  हालांकि अभी तक तो मैंने ऐसा देखा नहीं । अभी तक तो इसकी बुराई नहीं आई है, लेकिन हो सकता है । कोई बात हो, हमसे आकर मिले लेकिन सब नहीं । कमियां हैं, अभी कोई perfect (उत्तम) तो हुआ नहीं, इसलिए जो कुछ भी जिसमें कोई कमी है, जो कुछ भी है वह मुझे आकर बताएं, उसका इलाज मैं खुद ही बैठे बिठाए कर दूंगी । और अपने में जो कमी है वो किसी को कहने में शर्मायें नहीं । सब अपने भाई बहन हैं । जैसे ही आप कह देंगे कि मेरा यह पकड़ा है वैसे ही वो साफ हो सकता है, अगर आप नहीं कहेंगे तो कौन कहने वाला है । इसमें कोई बुरा मानने की बात नहीं है । आप जानते हैं कि सबका ही पकड़ता है, सबको ही होता है । आपस में सभी डॉक्टर हैं, डॉक्टर लोग आपस में free (मुफ्त) हैं । आपस में ही इलाज करते हैं, इसलिए आपका सबका इलाज free हो सकता है । भाईचारा आना चाहिए और अत्यंत पवित्र जीवन की ओर अपनी दृष्टि रखनी चाहिए । तो पवित्रता बहुत जरूरी है, उसके बगैर कार्य इसका बन नहीं सकता । पहले अगर पवित्रता कि मैं बात करती ना तो वहीं perversion की बात आ जाती । ये एक तरह से आप एक चीज़ छोड़ने जाते तो दूसरी चीज पकड़ लेते, दूसरी चीज छोड़ने जाते तो किसी भी चीज पकड़ लेते । लेकिन realization के बाद ये problem नहीं रहती । Realization के बाद में जो यहां पर छेद कर दिया है ना उसके कारण हर एक चीज यहां से निकल जाएगी । आप एक चीज छोड़ेंगे वो यहां से निकल जाएगी, छूटेगी यहां से, पूरी ही निकल जाएगी । इसलिए वह कहीं और जगह नहीं घुसने वाली । यह जो यहां छेद कर दिया है ये उसका फायदा है । जो आदत हो वह विचार मन में ले लें और यहां रख करके उसको निकाले । कहां पर वो आदत है आपको वहीं भारीपन लगेगा । नाभि पर, किसी को खाने की आदत है बहुत ज्यादा, अच्छा नहीं लगता बहुत ज्यादा खाना, नाभि पर विचार रखें । नाभि, नाभि आपकी यूं यूं करें, नाभि से लेकर के उसको धीरे-धीरे धीरे-धीरे करके निकाले, सब निकल जाएगा । सब आपके ही हाथों से निकलेंगे, सब गंदगी यहां से निकलेगी, सब । अब (अस्पष्ट) । अभी गौड़े साहब ने मुझे बताया कि मैं अब यहां से अभी श्वाँस लेता हूँ, सच्ची बात है । श्वाँस, देखना,सुनना, सुँघना,  स्वाद सब यहां से होता है । आखिर सब चेतना की ही वजह से होता है और जब चेतना यहीं पर आ गई तो सब यहीं से होगा । हृदय का स्पन्दन, सारे शरीर का कार्य यही से प्रवण है । इसमें कोई सी भी ऐसी बात जिसको आप निकालना चाहते हैं अपने अंदर से, उसको आप बस दबाकर के और यहां से निकालें । आदतें छूट जाएगी, सारी आदतें आपकी यहां से निकल कर छूट जाएगी क्योंकि ये जो छेद हो गया है ना, बड़ा फायदे का है । ये छेद नहीं था इसलिए इधर से दबाइये तो, जैसे कहते हैं समुंद्र को एक तरफ से दबाईये तो दूसरी तरफ (अस्पष्ट) है । लेकिन उसमें अगर एक (अस्पष्ट)  बना दी जाए तो बह जाएगा । इसमें एक तरफ से अगर दबाईयेगा दूसरे तरफ से निकलेगा नहीं, वो बाहर निकल आएगा । प्रयत्न लेकिन करें और सोचें, अपनी और देंखे कि हमारे यहां क्या अपवित्र चीज है । जैसे हमारी माँ का नाम है ऐसे ही हमें निर्मल होना है । और हमारे अंदर क्या अपवित्र चीज है, दूसरों के अंदर नहीं, फिर यही बात आती है।  हां अभी मैं देख रही हूँ कि किसी किसी को लग रहा है कि हाँ उनमें ऐसा है, उनमें वैसा है । ये नहीं, मेरा मतलब हमारे अंदर क्या है,.मतलब हम जो हैं उस (अस्पष्ट) के अंदर कौन सा है ।  कि हमारे mis- identification (मिथ्या बोध) से कि हमने अपने को समझ लिया है कि हम भी ईसाई हैं, हम मुसलमान, हम हिंदू और बस बाकी सब बेकार । ये mis- identification (मिथ्या बोध) है ।  हम हिंदुस्तानी सबसे अच्छे और बाकी सब बेकार,  ये सब mis-identifications है और सब झूठ है, सब कुछ झूठ है । सच बस एक ही है कि हम मनुष्य है । बिल्कुल उस सच्चाई पर एकदम आ जाए, reality पर । पहली चींज आप उस पर आ जाए तब आपको बाकी चींज सब चीजें समझ में आ जाएगी कि आप सब कुछ (अस्पष्ट) । Mis-identifications अपने जो है उनको देखते रहें पूरी समय,  हर समय देखते रहें । अभी हम क्या सोच रहे हैं । अभी ये सोच रहे हैं कि घर जाकर हमें अभी खाना बनाना है, हैं अभी यहां कुछ ऐसे भी लोग । कुछ लोग यह सोच रहे हैं कि अब ऑफिस से चलकर आए थे क्या हुआ, अब ऑफिस में कल में क्या होगा । तरह –  तरह की बातें लोग सोच रहे है, मुझे सब मालूम है क्या कर रहे है । निर्विचारिता में मेरा भाषण सुनना चाहिए लेकिन पूर्ण विचारों को (अस्पष्ट)। खाना हमारा बनाने वाला बैठा हुआ है, हम नहीं खाना बनाएंगे, आप एक बार यह सोच कर देखिए ।  जब आपके अंदर येे भी चमत्कार हो गया कि आप बैठे बिठाये निर्विचारिता में उतर गए तो ये भी चमत्कार देख लीजिए । क्योंकि matter (तत्व) भी तो उसी चेतन्य शक्ति से चलती है, इसको भी देख लीजिये । खाना बनाने वाला बैठा हुआ है, ऐसे ऐसे आपके प्रश्न जो हैं ऐसे छूट जाएंगे । निर्विचारिता में जाते ही आप समझ जाएंगे कि आप शरणागत परमात्मा के हो गए हैं और निर्विचारिता में उसकी मदद आपके अंदर में आ रही है । आपको कुछ अगर और प्रश्न हो तो मुझे आज पूछ लीजिए और आज ध्यान नहीं करेंगे अब क्योंकि ध्यान का समय पहले हो चुका है काफी तो उसमें सबको ध्यान हो गया है । अगले वक्त में ध्यान होगा । उस वक्त कुछ अगर हो सके तो कुछ मंत्र वगैरा पूजन वगैरा करा जाए जिससे कि आपको विशेष रुप से कवच दिया जाएगा । उससे ये कि आप पर फिर कोई आफत ना आए । बाहर जो शैतान लोग घूम रहे है उससे आप लोग और संकट में नहीं आएंगे, तो जरुर आए । उसके बाद का प्रोग्राम पूना में है जिसको पूना आना है पूना भी आ सकते हैं । लेकिन पूरे हफ्ते का प्रोग्राम इन दो हफ्तों में अगर आप attend  करें तो अच्छा रहेगा । अब जो मैंने बात कही है उस पर विचार करें । अब मेरी बात से आपको conditioning नहीं हो सकता । Conditioningभी यहां से निकल जाएगी, बात का जो सार है वो उतर जाएगा,  conditioning यहां से निकल जाएगी । Realization के बाद सबसे बड़ा फायदा यह है कि कोई चीज आपको चिपक नहीं सकती । इसकी जड़स्व जो है चिपक नहीं सकता और उसका चैतन्य स्वरुप चिपक सकता है । मनें मैं अगर उर्दू में बोलूं, चाहे मैं फारसी में बोलूं, चाहे मैं फ्रेंच में बोलूं,  लेकिन उसकी जो चेतन्य शक्ति बह रही है ना उन शब्दों में से, वो आपके अंदर आ जाएगी । उससे जो सिर्फ vibrations हैं वो आप को पकड़ लेंगे, वो भाषण समझ में आने की जरुरत नहीं जरूरत है । उसका जो प्रेम है ना अंदर से वो आपके अंदर बहेगा । जैसे फूल का आपको नाम नहीं पता हो लेकिन शहद आपके अंदर से बह रहा है, सुगंध आपके अंदर से बह रहा है । सुगंध तो चैतन्य है और फूल का नाम जो हो जाए । तो नाम आपके समझ में नही भी आए सुगन्ध तो हर मनुष्य को आता है, हरेक मनुष्य को सुगन्ध आता है । किसी फूल को रखो तो सब बता सकता है चाहे वह अंग्रेज हो, फ्रेंच हो या Indian हो । सबको सुगंध आता है इसका कोई भाषा कहने की जरूरत नहीं । इसी तरह से है परमात्मा का सुगंध जो यह चैतन्य शक्ति है यह भी हरेक आदमी को आ सकती है चाहे किसी भाषा का हो । इसलिए इस भाषण में जो मुझे कहना था सो दूसरी बात है, लेकिन जो मुझे देना था वह दूसरी बात । वो अंदर आत्मसाध हो गया और उसके साथ जो कुछ अंदर गड़बड़ियाँ हुई है वो यहां से निकाल दे । अंदर (अस्पष्ट)  होगा उसके कारण जो कुछ भी चक्र घूमके फेंकना चाहते हैं उसे फेंकने दीजिए । अपने आप उसको निकाल दीजिए ।  किसी का सर जरा भारी हो गया हो उसे निकाल दें । सर जब भारी होता है एक तो दूसरों का भी पकड़ता है, वैसा अपना भी बचा-कुचा निकल आता है निकाल दें,  इसमें कोई बात नहीं है । ((अस्पष्ट / Left hand (बांया हाथ) से निकाल दें, राइट हैंड (दाया हाथ)मेरी ओर करें ।)) किसी को सवाल पूछना है पूछ लें ।