Dharm Va Adharm

(भारत)

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Dharm VA Adharm

Part 1

संतोष शांति सहज (uncleared Marathi text 2)ये तीन शक्ति है(Uncleared marathi text 3-4) 

कलीजुग(कलयुग) में क्षमा के सिवाय और कोई भी बड़ा साधन नहीं है मनुष्य के पास में ये जान ले, और जितनी क्षमा की शक्ति होगी उतने ही आप शक्तिशाली सबको क्षमा…  क्षमा वही कर सकता है जो बड़ा होता है छोटा आदमी क्या क्षमा करेगा। आज मैंने कहा सवेरे कि धर्म को जाने! अपने अंदर जो धर्म है उसको जाने, धर्म में खड़े हैं जो आदमी धर्म में खड़ा है उसकी इतनी शक्ति होती है अंदर से उस धर्म को जानिए अहा कितना सुंदर है हम धर्म में खड़े हैं जो अधर्म में खड़ा है उससे हमारा कोई मुकाबला थोड़ी है वह तो अधर्म में ही खड़ा है हम तो धर्म में खड़े हुए हैं हमारा तरीका ही ओर है जो धर्म में खड़ा है उसका तरीका ओर होता है और जो धर्म में होता है उसका ओर होता है धर्म वाले से अधर्म वालो के साथ अपना मेल जोड़ ही नहीं सकता है वो। हमें हर तकलीफ हो रही है परेशानियां हो रही है लेकिन हम तो अपने धर्म पर खड़े हुए हैं ना, यह सबसे बड़ी चीज है। अपनी शक्ति को अंदर जानो जो सिर्फ धर्म स्वरूप है और धर्म कुछ नहीं सिर्फ प्रेम है और जब प्रेम ही सब कुछ है तो क्षमा उसका एक अंग ही हो जाता है। कितना कौन जुल्म कर सकता है देखते हैं हमारे प्रेम के आगे! कितना कौन दुष्टता कर सकता है, कौन कितना घर का भेदी होगा, कौन कितनी तकलीफ देगा, कौन कितनी कृतज्ञनता करेगा, करने दो! प्यार के आगे सब चीज डुब जाती है यही एक तरीका है कलजुग(कलयुग) में बैठता है और तो मेरे कुछ समझ में नहीं आता अगर आप सोचते हो की पुराने कोई तरीके इस्तेमाल करें तो हो नहीं सकता! उसका एक कारण आप लोग जान लीजिए मैंने पहले भी बताया और अब फिर बता रही हूं कि पूर्णतया साधु और पूर्णतया संत संसार में नहीं है हर एक संत साधु में भी इन लोगों ने एक- एक राक्षस है, आपके चित्त में ही घुसे हुए हैं वो लोग! बात समझ में आई, अगर कोई साधु ही सिर्फ हो तो ठीक है “पवित्राणाय साधुनाम विनाशाय च दुष्टता” पर साधु के साथ एक दुष्ट बैठा हुआ है तो बहुत ही प्रेम से उसको अलग हटाना पड़ेगा कि नहीं कितना कठिन काम है बताइए आप! आप साधुता में खड़े हैं कि दुष्टता में खड़े हैं यह आप पर निर्भर है लेकिन आप अगर साधुता में खड़े हैं तो अगर कोई दुष्टता चिपक रही तो उसको हटा भी सकते हैं लेकिन आज ऐसा शुद्ध जीव कितने हैं संसार में बताइए। डिग्रीस(degrees) का फर्क!  और जो लोग साधुता की ओर जा रहे हैं वह साधुता को (बटेरे) बटोरे, उनको उन लोगों से कोई मतलब नहीं रखना चाहिए जो असाधु है, वह असाधु है जो चोर है बिलंदर है उसका हमसे क्या मुकाबला भई वो चोर ही है और हम ये ही। हम वो नहीं हो सकते और वो ये नहीं हो सकता हमसे उनका कोई मुकाबला है!  हो ही नहीं सकता वह तो दूसरी लाइन पर चल रहा है हम तो दूसरी लाइन पर चल रहे हैं। और धर्म में ही जागना सहजयोग का लक्ष्य है और कोई लक्ष्य नहीं सहजयोग का सीधा हिसाब किताब है इसका सहज योग का इन सब चीजों से बिल्कुल ही संबंध हि नहीं होता। अपने धर्म में जागना है, अपने प्रकाश को पाना है, अपने को जानना है। कोई कहता है माताजी क्या करें चक्र को ऐसा चढ़ाएं कि उंगली ऐसा घूमाए कि वैसा करें सारे ये घुमाने फिराने में आदिगतियाॅ है, प्रायर्मोडीयल मूवमेंट्स (primordial movements) है ये सारी जो मैं आपको बता रही हूं! आदिगतियाॅ है प्रायर्मोडीयल (primordial) जो बनाई गई है लेकिन उसका अर्थ तभी ही होगा कि शुद्ध तरीके से चीज का प्रवाह होना अंदर से अगर मिक्सड(Mixed) चीज़े प्रवाहित है तो आप जब हाथ घुमाते हो तो उसके साथ मिक्सड(Mixed) भी घूम रहा है। क्षमा के सिवाय शुद्धता अंदर नहीं आ सकती और जब शुद्धता आएगी तो प्रकाश धर्म का होगा शुद्ध निर्मल! अर्थात जिसके पास धर्म है उसको प्रकाश मे आना होगा, बोलना होगा, बताना होगा लेकिन उसकी हर व्यवहार में खुद उसको सोचना चाहिए कि धर्म दिखाई दे रहा है कि अधर्म दिखाई दे रहा है। इससे पहले रियलाइजेशन(realisation) से पहले मैं आपको ये लेक्चर देती तो बहुत गलत काम हो जाता क्योंकि कंडीशनिंग (conditioning) होता है और यही बात है कि सारे साइकोलॉजिस्ट(psychologist) धर्म को खत्म कर दिया और बता दिया कि जितने भी धर्म ये सिखाते हैं कि यह नहीं करो,वो नहीं करो-वो नहीं करो इससे कंडीशनिंग माइंड का होता है ठीक बात है! लेकिन अब नहीं होने वाला अब जो भी आप चाहेंगे अपने मन से कर सकेंगे there will be no conditioning at all क्योंकि इगो(Ego) और सुपर इगो(super ego) के बीच में आप का चित्त लाके खड़ा कर दिया है। धर्म खुद ही उठ रहा है आपके अंदर, आप नहीं उठा रहे उसका मार्ग आपमे है और जो कुछ लौकिक जाना है आपने, जो कुछ भी लौकिक जाना है संसार में ऐसा है वैसा है वैसा! उससे आप अलौकिक का तौल नहीं कर सकते अलौकिक का मूल्य उससे आप नहीं जोड़ सकते! यह अलौकिक की बात मैं कर रही हूं आप लोग लौकिकता से उसको देख रहे हैं लौकिकता के तीन डायमेंशन(dimension) खत्म हो चुके है चौथे डायमेंशन(dimension) मैं जिसको घूमना है गहराई से गंभीरता से चौथे डायमेंशन में चलने की बातचीत में कर रही हूं। लौकिक चीजों से आप अलौकिक चीज का मूल्यांकन नहीं कर सकते! …..क्या सताया लोगों ने कुछ भी नहीं सताया हम तो कहते हैं हम तो आराम से हैं लेकिन जैसे हमने अपनी-अपनी तकलीफें देखी है और जैसे जैसे लोग हमने देखे हैं कि उनके लिए जोड़े से गालियां नहीं मिलेंगी आपको, जोड़ों से उनका वर्णन नहीं हो सकता, ऐसे ऐसे महादुष्ट लोग। लेकिन समाज की स्थिति बहुत अच्छी है आज, और आपकी भी स्थिति बहुत अच्छी है लेकिन अपने ही साथ छल कपट नहीं करो – अपने ही साथ छल कपट नहीं करो, सीधा हिसाब-किताब है सहजयोग के साथख जो भी आप कर रहे हैं वो आप अपने हि साथ कर रहे हैं हिसाब यह जोड़ लीजिए आप। ….. हां यह प्रश्न बहुत बार हो जाता है एडमिनिस्ट्रेशन (administration) ऐसा प्रश्न होता है कि क्या करें ये ठीक है या नहीं, और इतना आसान है – इतना आसान है कि कोई सा भी डिसीजन (decision) लेने से पहले निर्विचारीता मैं जाओ! अपने आप डिसीजन(decision) सामने जो आ जाए वह करिए कभी गलत हो ही नहीं सकता, पर डिसीजन(decision) निर्विचारीता में स्पॉन्टेनियस(spontaneous) होगा और विचार में आपने अगर कर लिया तो वो बायस्ड(biased) होगा। क्योंकि उसमें आपका इगो(Ego) और सुपर इगो(super ego)दोनों काम कर है आपका जो कुछ भी संस्कार है आप जो कुछ भी लौकिक कमाया हैं वह आपके पीछे में खड़ा रहे, लेकिन अगर निर्विचारिता मे करिएगा तो एक अभिनव होयेगा, एक अलौकिक होगा, एक चमत्कारिक होयेगा, चमत्कार होगा! क्योंकि हिंदी में जो चमत्कारीक का अर्थ होता है वह बड़ा ऊंचा और मराठी में होता चमत्कारिकताजी.…. एक तो चमत्कारिक होएगा मराठी वाला और एक होएगा चमत्कारिक जो है वो हिंदी वाला.. (आइए)! तो जब बात अलौकिकता कि हो रही है तो लौकिकता के जितने भी आप के बने हुए मत है preconceived ideas of human being cannot guide God he has his own(unknown text1) his own being आप लोग चाहे कि भगवान हमारे जैसा हो जाए, तो तो वही चीज हो गई कि जो लोग भगवान को बेचते  है भई ₹4 दे दो उधर में लगा देता हूं आपका वही लेवल (leval) हो जाएगा वो अपना जैसा है प्रकाशित करेगा, आप अपने मार्ग को खोलते जाइए अपने धर्म को अंदर जानिए धर्म को जानना बहुत जरूरी है कितनी सुंदर चीज है अंदर में देखिए। इस नश्वर देह के अंदर कितनी अनिश्वर चीज बह रही है जैसे की गंगा,सरस्वती और यमुना तीनों का संगम होता है धारावह! इसलिए जो मिटने वाला है जो लौकीक है उससे इस चीज को नहीं जान सकते। एक क्षण निर्विचारीता में जाकर के आप किसी भी चीज का डिसीजन(decision) ले ले आप ऐसे ऐसे डिसीजन(decision) लेंगे की बड़े-बड़े लोगों के बस का नहीं होगा dynamic absolutely dynamic कुछ चिंता भय क्रोध servility clevishness inferiority सारे complexes झड़ झुड़ करके वो तो अपनी शान में बोलेगा ना अंदर और उसकी अपनी नम्रता है क्योंकि इतना मृदु है वो इतना मृदु है कि वो किस तरह अंदर चला आता है पता ही नहीं चलता, जैसे झर के चांदनी अंदर उतर आई हो! और जब आप चुने गए हैं तो आप का महत्त्व बहुत ज्यादा है। अब आप सोचते हैं कि आप एक ऑर्डिनरी(ordinary) आदमी है हम कैसे चुने गए,ऑर्डिनरी(ordinary) ही आदमियों में से चुने जाएंगे और ये जितने भी एक्स्ट्राऑर्डिनरी(extraordinary) दुनिया में लोग दिखाई देते हैं आपको जो बड़े-बड़े पदभुषित है ये सब मिसिंग लिंक (missing link) हो जाएंगे हमेशा ऐसा हुआ है। इवोल्यूशन(evolution) के हर एक स्टेज में ऐसा ही हुआ है आप अगर देखें तो, जो बहुत ऊंचे मैमथ(Mammoth) हो ओर बड़े-बड़े जो बहुत फिजिकली डिवेलप(physically develop) हो गए खत्म हो चुके हैं, they were missing link! हाथी उसमे से बच गया जो बीच में,हाथी बचाया। इसी तरह से जो मेंटली (mentally) बहुत डेवेलपड(developed) हुए उनमें से कह सकते हैं आपकी कोहला जिसे कहते हैं फॉक्स(fox) वो मिसिंग लिंक मे आया और उससे भी बढ़कर कुछ लोग हैं लेकिन उनमें से कुत्ता बच गया, कुत्ता बचा। इसी तरह मनुष्य में है जो साधारण में से ही उठेगा हमेशा उठते रहा साधारण में से ही और जो सो कोई असाधारण है थ्री डायमेंशन(3 dimension) में वो कुछ नहीं करने वाले वो मिसिंग लिंक हो जाएंगे इवोल्यूशन(evolution) की स्टेज में लोग उनको जानेंगे जैसे चिंपांजी(chimpanzee) को लोग जानते हैं कि मिसिंग लिंक था। इवोल्यूशन में वही लोग जो साधारण में से ही चुने जाएंगे बहुत ही नॉर्मल(normal) होना चाहिए! जो बड़े-बड़े दंडे संन्यासी बनकर घूम रहे हैं ये कहीं भी नहीं पहुंचने वाले आप देख लीजिएगा सब मिसिंग लिंक मैं जाने वाले और जो बड़े-बड़े पदभुषित है ये भी कहीं नहीं पहुंचने वाले! कितने को रिलाइजेशन(realisation) दिया हमने आपको मालूम है बड़े-बड़े राजे महाराजे सेक्रेटरी फेक्रेटरी क्या किस काम के सब अपने पद पर बैठे! किसी को लगता है कुछ के हमारे अंदर दिप क्यों जला! चिट्टियां मुझे लिखते हैं हमें बड़ा आनंद आ रहा है आनंद आ रहा है कोई कुछ करने की सोचता है कि हमने लिया किसी और को भी बांटे। अपना विशेष स्थान जब होता है तो अपने को भी विशेष होना पड़ता है इसी साधारण सामान्य में से ही असामान्य निकलने वाला है, वही निखरने वाला है धीरे-धीरे आपको खुद समझ में आ जाएगा कि ये महामूर्ख है इनसे कौन बात करें, है बड़े-बड़े भारी डॉक्टर क्या करें महामूर्ख बैठे रहे अपनी जगह पे जिंदगी बिता दी इन्होंने कुछ नहीं किया चलो चूल्हे में गया अपने को क्या करना आज(uncleared Marathi text 2) अपना स्थान बहुत ऊंचा है और इस चीज का कोई इजुकेशन(education) नहीं हो सकता आपका कोई इजुकेशन(education) नहीं हो सकता कि मैं आपसे एज्युकेट(educate) करूं बैठे कर के एबीसीडी(ABCD) सिखाउ नहीं! यह रोज के अनुभव से आपको देखना है और आज जो सवेरे मैंने बहुत पते की बात बताई जो आपको जानना चाहिए कि सहजयोग में आप समष्टी में है व्यक्ति में नहीं,आप समष्टी मे है! ये पॉइंट(Point) आप जान लीजिए। अब गगनगढ़ महाराज है बड़े, बहुत बड़े हैं आप लोग से बहुत ऊंचे पुरुष है मान ले सब कुछ! लेकिन 21000 वर्ष झकमारी उन्होंने बेचारों ने खुद कहा हुआ है 21000 बार जन्म लिया और परमात्मा के चरणों पे गिरे रहे जंगलों में रहे तब जाकर के ये वाइब्रेशनस(vibrations) मिले उनको और आज तुमको खट से क्यों मिल गए भई क्योंकि एक नया संसार है एक नई बात है ये विराट के शरीर के रोम रोम आप लोग हैं वो एक सिंबॉलिक(Symbolic) आदमी बना दिया हो गया उनकी बात भुलिए। आप सब समष्टी रूप में आपमे से जो भी आदमी समष्टी से हटना चाहता है वो पहले जान लें कि वो कैंसर बन जाएगा और वो खत्म हो जाएगा कोई बुरा नहीं है आप में से और कोई अच्छा नहीं पुरा! ये उंगली दुखती है ये उंगली से उसको दबाइये, ये हाथ दुखता है इस हाथ से दबाइये, आप सब आपस में जुड़े हुए है आपको मालूम है आप सब आपस में जुड़े हुए हैं जब आप अपनी बाधाएं शेयर(share) करते हैं तो अपना धर्म क्यों नहीं शेयर(share) करते। बाधा तो आप फट से पकड़ लेते हैं (uncleared Marathi clause) बाधा तो फट से पकड़ लेते हैं धर्म क्यों नहीं पकड़ते। क्या वजह है, सारी वजह यह है कि अभी हम चढ़ रहे हैं, छोटे हैं बड़े हो रहे हैं छोटे बच्चे हैं पहले थोड़े जलेंगे, पहले थोड़े गिरेंगे एक दिन जब बड़े होंगे तो अपनी उंगलीया पकड़ कर के हजारों को चलाएंगे। अभी छोटे हैं-छोटे हैं ठगे जाओगे तो कोई हर्ज नहीं छोटे हैं अभी आप भोलेपन में रहो, लेकिन जो ठगा रहें है वह अपने को बहुत अक्लमंद समझ रहे हैं तो उनको पता होना चाहिए कि कैंसर बन कर निकाल दिए जाएंगे वो एक मार्ग और भी है जहां जो जाता है फिर लौटता नहीं! नर्क का भी एक मार्ग है उस रास्ते पर बहुत से लोग चलते हैं उनको पता ही नहीं है वो सोचते हैं कि माताजी के सामने आओ उनके पाव छुओ उनके पांव धोओ ओहो….हो गए बड़े संत! वो भी एक मार्ग  चल रहा है साथ ही साथ सब चल रहा है जब फूल खिलता है तो कली का जो कुछ गिरना है वह गिर जाता है और फूल खिल जाता है और उसमें से सुगंध आ जाती है जो कुछ पनपने का है पनपता है जो कुछ गिरने का है वो गिरते जाता है दोनों एक ही साथ चलता हैं जीवन ऐसा ही पनपता है जिसको झड़ने का है वह जीवन अपने ही उसको गिरा देगा जो मरने का है खत्म करने का है वो कर देगा लेकिन उनके भी स्टोरींग(storing) का टाइम है उसका भी स्टोरिंग का इंतजाम है वो भी जाते हैं और कुछ कुछ तो ऐसे जाते हैं कि वहां से लौट कर नहीं आते। पशु योनि से मनुष्य बने और क्या फायदा है कि मनुष्य योनि से जाकर आपकी किडे बनिए। आपस का कोंपटीशन(competition) धर्म में रखें,हम क्या धर्म में हैं या नहीं अपने बारे में ये सोचे! और दूसरों के बारे में ये सोचे कि वो कितना धर्म में है। हम कितने धर्म में हैं और वो कितने धर्म है और अगर वह अधर्म में है तो वह क्यों हैं उसका कौन सा चक्र पकड़ा है चक्र की पकड़ की वजह से; उसमें कोई और बात नहीं है निरपेक्षता से देखिए सिर्फ चक्र पकड़ा है ना अरे निकाल देंगे चक्र उसका भी इधर बैठे बैठे उसके गतिसमीक्षा करके उसका चक्र हम निकालेंगे और अगर कोई बहुत ही गई बीती चीज है तो छोड़िए उसे कैंसर हो गया छोड़िए! उसको दफना दीजिए, लेकिन जिसके प्रति आपको सहानुभूति है जिसके प्रति आपको लगता है कि वह ठीक होगा या उसका कुछ हाल ठीक कर सकते हैं, उसको आप आपके पास है तरीके ये प्रायर्मोडीयल मूवमेंट्स (primordial movements) है उनसे आप उनको ठीक करिए। आपस में शेयर(share) करिए,आपस के चक्र बढ़ाइए बुरा नहीं मानना चाहिए बिलकुल नहीं बुरा मानना चाहिए जिस आदमी ने बुरा मानना जाना है वो उतना ही गलत होगा जो दूसरे को दुखी करें। बुरा मानना और दुखी करना दोनों एक ही चीज है एक ही क्रिया है के दो अंग है इसलिए बिलकुल बुरा नहीं मानना चाहिए अगर कोई आपसे कहता है चक्र पकड़ा है तो उसका उपकार मानना चाहिए तूने पहचाना मैंने नहीं पहचाना भैया ठीक कर दे। अगर कोई कह दे कि तुम्हारे अंदर में यहां से सांप काट रहा है तो तुम उसका उपकार मानते हो! जिसका चक्र खराब हुआ है उसको भी उपकार मानना चाहिए कि ये मेरा चक्र पकड़ा है बड़े उपकार; उसको निकाल दे भाई तू साफ कर दे, कभी बुरा नहीं मानना। हालांकि और संसार से तो आप लोग बड़े है ही क्योंकि आपके वाइब्रेशंस(vibrations) आए हैं और दुनिया में कितने लोगों के आए हैं इतना बड़ा पॉप (Pop) है उसके भी नहीं है मैंने देखा हहा…… बड़े-बड़े लोगों से आप बड़े हैं लेकिन है तो अभी बच्चे ना! सहज योग में बच्चे है पॉप(Pop) के तक तो है नहीं वाइब्रेशन बड़े-बड़े जो बने हुए है जिनके आगे दुनिया घूमती है और ये शंकराचार्य वो ढमके वो ठमके और सब के किसी के वाइब्रेशंस(vibrations) क्या है ये मालूम नहीं और तुम लोग तो जागृति भी देते हो और पार भी करा देते हो और सब की कुंडलीनीया उंगलियों पर फिरा रहे हो कितनी बड़ी बात है ये गणेश जी के सिवाय कोई नहीं कर सकता था पहले इसीलिए गणेश जी के हाथ में जो वो होता है ना छोटा सा सांप वो इसका सिंबोलीक(Symbolic) है कि वो सबकी कुंडलिनीया घुमा देते थे अब तुम्हारे कम से कम एक तो हाथ में आ गया कि कुंडलिनी तो चढ़ा सकते हो सबकी(uncleared marathi phrase) वो अलोकिक है-वो अलोकिक है उसका कुछ ठिकाना नहीं तोड फोड के सब ठीक कर डाले। जितना वो नाजुक जितना वो प्रेम-मइ उतना ही वो सहांरी भी। वो तो अपने तरीके से चलने वाली आप अपने तरीके से सीख- सीखना चले (uncleared marathi phrase) सबसे पहले हृदय चक्र को अपने ठीक करें हृदय अपना साफ करें हमारा हृदय साफ है या नहीं हमारे मन में किसी के प्रति क्रोध है क्या, हमारे मन में किसी के प्रति कोई आशंका है क्या! अपने हृदय को चेक(check) करे सबसे बड़ी चीज है क्योंकि हृदय कंट्रोल(control) करता है ब्रेन(Brain) को और हृदय ही से सारा कार्य हम लोग करते हैं और हृदय से ही संबंध है तुम्हारा मेरा पूरी तरह से इसलिए पहले हृदय चक्र को पूर्णतया आप लोग बिलकुल पूर्णतया साफ कर लै। हम अपनी तरह से चीज सोचते हैं कि ऐसी चीज है हृदय चक्र क्यो? कितना प्रेम हमने दिया दूसरे को हमने कितना प्रेम दिया! दूसरे की हमने कितनी तकलीफ दि!  मुझे तेरे देसाई की चिट्ठीया आई इनके लिए लिखा उन्होंने कि मेरी वाइफ की बड़ी मदद करते हैं मुझे बड़ी खुशी… कितनी मेरी तबीयत बाग-बाग हो गई सुनकर करके आहहा.. तेरे देसाई की बड़ी हेल्पलेस चिट्ठीयाॅ आई मेरी वाइफ की ऐसी स्थिति है मैंने कहा इतने लोगों को मैंने बात कि ये दिया वो दिया वो बेचारी मर कैसे रही है मुझे क्या जरूरत है लंदन से वहां वाइब्रेशन को भेजने की तुम लोग किस दिन के लिए बनाए हुए हो और जो दूसरी चिट्ठी आई (uncleared marathi phrase) तबीयत बाग-बाग हो गई।आपस मैं मदद,आपस में प्रेम,ऐसे बंधन में इकट्ठे हो जाएंगे हम लोग बिलकुल एक शरीर है एक ही शरीर है विराट का। और उसके सहस्रार पे विराजमान हैं आप लोग विराट के सहस्त्रार पर बिठाया है आप लोगों को और क्या कर रहे हैं ये पागलपन! विराट पुरुष के सहस्त्रार पे 1000 आदमी बिठाने के अब दिखने को बड़ी बात लगती है हैय। हाथ में वाइब्रेशंस कितनो के आए हैं, आए हैं ना! कुंडलीनी का समझता है वो उसमें तो किसी को शंका नहीं आप लोगों को! हमारा क्या, खेती कर दी है देखेंगे (uncleared marathi paragraph) सारी दुनिया के लोग करें मेरे समझ में नहीं आता पर तुम लोग छोटी छोटी चीज के लिए ये नहीं हुआ वो नहीं हुआ, वो नहीं हुआ अरे ये नहीं हुआ वो नहीं हुआ क्या होता है तुम कौन सी लाइन में चले जा रहे हो और सोच क्या रहे हो। अब यहां से आपको अगर दिल्ली जाना है तो आप सोचिएगा की वहां आटे का भाव क्या है लेकिन आपको वहां जाना है जहां आटा-वाटा कुछ नहीं चलता है धर्म चलता है तो वहां धर्म का भाव क्या है ये जानना। आटे दाल का भाव जानने की क्या जरूरत है धार्मिक लोगों को! कि वहां क्या धर्म है और वहां क्या है ये जानने की जगह वहां पर कौन सा पॉलिटिक्स (politics) पक रहा है, और वो चीज है ये आप जानते हैं मतलब आप के अगर वाइब्रेशंस(vibrations) कह दे तो बात करने की बात नहीं वो तो आप जानते हैं लेकिन यह बहना बहुत ही कम चीज है ये तो कुछ हुआ नहीं अभी! अभी तो बच्चे ही हैं अभी तो आपकी 1 साल की भी सालगिरह मनाने को मै तैयार नहीं हुं। ये तो सिर्फ अभी जबरदस्ती का राम-राम हुआ है। आप अपनी और देखीये मैं कुछ बदला कि नहीं, मुझमें कुछ अंतर आया कि नहीं, मेरे अंदर कोई शांति आई कि नहीं, मेरे अंदर कुछ हुआ।सिर्फ सुषुम्ना की जो अति सूक्ष्म नाड़ी है उसके अंदर से खींच के निकाला है हमने आपको, एक ही बारीक लाइन से बिलकुल खींचा है,जो कि बिलकुल कहना चाहिए कि बाल के बराबर। सुषुम्ना खुद ही इतनी मोटी है देखा जाए तो और एक के ऊपर एक चार परते हैं उसकी; लेकिन इसी वाइब्रेशन से लोगों की तबीयत ठीक हो रही है ये ठीक हो रहा है आज वो एक आई थी  लेडी (lady) उसका एकदम चेहरा ही अलग दिखाई दिया कहने लगी कि बस मेरा तो अस्थमा ठीक हो गया,ये क्या बड़ी भारी चीज है अस्थमा ठीक हो गया वो ठीक हो गया और ढिकाना! इसमें रखा क्या है कैंसर ठीक हो गया, ये हो गया वो, इसमें कौन सी बड़ी भारी बात है ये तो होना ही हुआ है यह तो कोई विशेष बात नहीं हुई अब घर के अंदर में बिजली चल गई अभी तो सब कुछ दिखाई देने ही लगेगा वो तो होना ही चाहिए़। कम से कम अगर बिजली जली तो जली किस दिन के लिए; कम से कम दिखाई तो दे सब चीज, इसमें कोई विशेष बात नहीं हुई लेकिन बिजली जलने के कारण आप में क्या इंतिहान आया,आपने कौन सा न्यू डाइमेंशन देखा,आपने कौन सी चीज नई करी ये विशेषता है। हं.. कैसा… चल रहा है.. now you are going younger and younger, I am worried about you now (maa laughs) She is getting younger and younger (uncleared marathi text)जो बोलते हैं वो सर पे से जा रहा है कि सर के अंदर से जा रहा है कि दिल के अंदर से जा रहा है? दिल के अंदर से जाना। सर से जाएगा तो अरगुमेंट्स(arguments) होंगे उसका डाग्मा बनेगा। दिल से जाने दीजिए प्रकाश होयेगा प्रेम का मजा उठाना है तो दिल पे लाइए!  हृदय चक्र को ही सैक्रेड हार्ट(sacred heart) कहते हैं क्रिश्चियन लोग जो कहते हैं सैक्रेड हार्ट वही हृदय चक्र है और उसमें भवानी का स्थान रखा हुआ है दुर्गा का! और बहुत बड़ा स्थान है उसका दुर्गा को समझना आपके बस का नहीं है (की उस)ये जितने भी राक्षस है वो भी उसी के बच्चे हैं जो कुछ भी संसार है उसी का है उनको जिसने मारा तुम्हारे प्यार के पीछे में और उनका नाश किया उस मां की शक्ति को जानिए अपने ही हाथों को खिंचना बहुत मुश्किल हो जाता; अपने ही आपसे अपने को इंजेक्शन देना बहुत मुश्किल हो जाता है फिर अपने ही बच्चों को मारना दूसरे बच्चों को बचाने के लिए उससे भी कठिन बात है। लेकिन वो मारना भी एक बड़ी शक्ति का कार्य है क्षमा का कार्य है बहुत बड़े क्षमा का कार्य है वो भी उनकी क्षमा है लेकिन कलयुग में अब आप लोगों को कोई भवानी बनने की जरूरत नहीं! शांत हो जाओ अत्यंत शांत हो जाओ, अत्यंत शांत हो जाओ आपकी शांति हमारे कार्य को बढ़ाएगी आप मान लीजिए कि लोग कहेंगे कि सहजयोग में ऐसे ऐसे हमने लोग देखे हैं जो क्रोध के बिल्कुल वो थे सर्विलिटी के बिल्कुल पुतले थे, बिल्कुल दबे हुए लोग थे, एक अजीब अभिनव आदमी थे।आप ही लोग तो हमारे इश्तिहार है और कौन इश्तिहार है। आप ही से लोग कहे बढ़िया आदमी,फर्स्ट क्लास,तबीयत का बड़ा है,हर चीज से वाइडर(Wider); हो रहा है काफी हो रहा है पहले से बहुत फर्क आ गया है लेकिन जोरो में हो सकता है।

Part 2

अब सब आपके ऊपर है जैसा इसको सोचे आपस में समझे, दूसरों की बात सुने, शांतिपूर्वक दूसरों को समझें, दूसरों को महसूस करें, तादाद में पाए दूसरों के साथ! जैसे ये हाथ इस हाथ से जानता है और इस हाथ से ये ब्रेन भी जानता है और हृदय भी जानता है और सब चीज एक साथ चल रही है इंटीग्रेटेड(Integrated) ऐसे ही सब आप को इंटीग्रेट(Integrat) होना पड़ेगा; तभी वह हजार हाथ तैयार होंगे जो मनुष्यरुपेण इस्तेमाल किए जाएंगे वही हजार हाथ जो सहस्त्रार में है विराट! वो मनुष्यों से निकले हैं और सर्वसाधारण, कोई बड़े-बड़े ऋषि-मुनियों नहीं चाहिए उसके लिए वो बिठा दिए चक्रों पे। जो बड़े-बड़े लोग हैं वो बैठ गए चक्रों पर, बैठै वो अपने चला रहे।  सहस्रार में तो यही सामान्य ही मनुष्य निकलने वाला है सामान्य (uncleared marathi paragraph) घर में ही सफाई पहले, मैं कह रही हूं कि आपस में नहलाना शुरू करो वाइब्रेशंस(vibrations) से! Mrs Charles को आप दीजिए और ये आपको दे। पहले चक्र आपस में देख लीजिए फिर बाहर निकले नहा धोकर के तैयार होकर के। फिर शरद मिले शरद के आपने सफाई किया उन्होंने आपके दो हाथ सफाई किए। सफाई करते चलिए, हो गया सब निर्मल हो गया सब मामला! वो दुनिया को सब आफत मची हुई है, दुनिया में आपको पता नहीं क्या-क्या हो रहा है, क्रिमिनालिटि(criminality) बिल्कुल आने वाली है आपको पता नहीं है राक्षसों का ऐसा राज्य बना हुआ है और राक्षस लोग ऐसे बातचीत करते हैं कि उनसे आपस में गुठ हो जाता है वो ऐसे चिपक जाते हैं आपस में कि जैसे कोई ग्लू होता है नी वैसे सब चिपक जाते हैं और हमारे जो कार्य करते है,वो तो बात बात में झप वो गिर गया उधर गए फट वो गिर गया क्योंकि स्वतंत्रता में और राक्षस लोगों को देखिए वो कैसे आपस में जुटकर के आहाहा.. क्या मजा आ रहा, इसका गला घोटा उसको मार डाला उसकी हालत खराब। संतों का गुठ जब बनेगा, तो सोचिए क्या होयेगा! संतों का कभी गुठ बना ही नहीं, ये पहली मर्तबा हुआ है देख लीजिए। अगर संत की संतता छूट जाएगी तो फायदा क्या ऐसे गुठ का; संत के सारे ही लक्षण अपने अंदर से दिखने चाहिए।(uncleared Marathi phrase) मैं कह रही हूं लाल साहब आप लोग की मीटिंग थी वह कर लीजिए, फिर पूजन करिए क्योंकि जब चढ़ जाएगा ना तो फिर हम कुछ बोल नहीं पाएंगे आप लोग की तो मीटिंग कार्यवाही का जो मतलब होता है ना वो कार्यवाही के लायक नहीं रह जाएंगे। …हो गया … अब आप बता दीजिए कोई प्रॉब्लम क्या है बिल्कुल संसारीक रोज सब कुछ बातचीत हो जाएगी और फिर पूजन करें इत्मीनान से ये जितना भी गोबर है इसको लपेट के साफ करके फेंक आएंगे उसके बाद फिर बातचीत होगी बताएंगे (uncleared Marathi text 4) अच्छा किसी में अगर ज्यादा है तो आप लोग उसकी मदद कर के उसको ठीक कर सकते हैं पर निरपेक्षता रखिए निरपेक्षता निरपेक्षता रखिए! आप आप नहीं है आप निर्मल अंदर हें बाहर आप है ऐसे ही दूसरा कोई है उसका भी वैसा ही है आप निरपेक्षता से दूसरे आदमी के प्रति जागरूक रहें अगर किस में बहुत तकलीफ दिखाई देती है तो उसको ठीक करें। बुरा ना माने, अगर कोई आदमी बुरा मानता है तो इशारे से कहें जैसे आप मेरे पैर पे आए हैं अब आप बुरा मान जाए किसी बात का; समझ लीजिए मालूम है हमें, तो उसका कुछ दूसरों को ये नहीं सोचना चाहिए जैसे कि कोई आदमी बीमार होता है ना उस तरह से आप पैर पर आ गए तो इशारों से (बताओं) बता सकते हैं समझ गए कहां पर है सब यही इशारा करेंगे समझ गए कहां पर है चलो निकालो आपस में मिलकर के हम लोग सब आपस में सफाई कर रहे है 

सहज योगी :-आपस में कोई भेदभाव दिखाएं नहीं पड़ता!

श्री माताजी :- है नहीं, है ही नहीं

लेकिन जो कुछ भी थोड़ा बहुत ये चलता है ना वो होता ये की पांच(5) कदम चले और छः(6) कदम पीछे फिर पांच(5) कदम फिर छः(6) कदम और फिर सवाल हुआ कि कितने साल बाद पहुंचेंगे, वो पहुंचेंगे ही नहीं वो तो उधर ही खड़े है यह बात है।

सहज योगी:-होते तो हैं लेकिन आखिर तो जो नतीजा है उसमें भेदभाव कैसे? बीच में जब पड़ता है ।

नहीं! वह भी ठीक है; जब आप अपनी अवेयरनेस(awareness) पे उतरे हैं जब आप अपनी उस पर हैं तो बिल्कुल एक साथ चलिएगा एक साथ। जैसे कि इतना बड़ा समुंदर है उसकी भी लहर एक साथ चलती है। एक साथ सबका आंदोलन चलना चाहिए, अब यही है कि एक डंडे से चाहे अपने को मार लो चाहे दूसरों को मारो; बेहतर है अपने को मारो। कोई इसमें बड़ा छोटा आप में कोई हैय नहीं, इसमें कोई सीनियोरिटी(seniority) का सवाल नहीं! बात इसका रीज़न (reason) है ना कि आप लोग तो लौकिकता से आ रहे हैं ना जहां आपने देखा है कि एक बड़ा होता है एक छोटा होता है एक अफसर होता है एक नीचे होता है एक राजा होता है एक ठमका होता है फिर एक साधु होता है एक दंडे सन्यासी होता है एक होता है। इसमें यह सब कुछ नहीं है आप लोग सब; वौ चला हुआ है क्या (चर्निंग churning को क्या कहते हैं) मंथन…ये मंथन चला हुआ है एक ऊपर तो एक नीचे – तो एक ऊपर तो एक नीचे ऐसा मंथन चला हुआ है ये समझ लीजिए बस मैं मंथन ही कर रही हूं और कुछ कर ही नहीं रही हूं! अब मक्खन कौन चुराता है ये देखने का है। अकलमंद जो होगा वह मक्खन चुराएगा, यह तो चला ही हुआ है चर्निंग(Churning) खूब जोरो में; कभी ठंडा आएगा कभी गर्म आएगा कभी कुछ और। ये चला हुआ है और मक्खन ऊपर आ जाएगा तैर जाएगा मक्खन हलकेपन से। कोई ऊंचा और नीचा हैय नहीं इसमें; कोई भी ऊंचा नहीं नीचा नहीं जिसने सोचा कि मैं ऊंचा हूं और नीचा हूं तो फिर एक महामाया भी बैठी हुई है समझ लेना। वो ऐसे कुंडलिनी को पकड़ कर रखूंगी मैं नीचे की पता देख लूंगी मैं के कौन कौन बड़े है, बहुत बड़े-बड़े दानी बनने वाले हैं। ये चर्निंग(Churning) चला है जानबूझकर के भी थोड़े बार हम कुंडलिनी उतारेंगे,जानबूझकर के भी! क्योंकि बात यह है कि जब तक उतारेंगे नहीं चढ़ाएंगे नहीं उतारेंगे नहीं चढ़ाएंगे नहीं तब तक काम नहीं बनने वाला। जानबूझकर उतारेंगे; अभी जितने बुड्ढे लोग हैं उनको यह पता होना चाहिए के लौकिकता के आप ही लोग लीडर है लौकीकता के संसार में। आप ही लोग बुजुर्ग है, आप ही बड़े हैं इसलिए आपको को तो और भी स्पेशली(specially) बैटर(better) होना चाहिए। आप लोग सब एक हो जाए और बच्चों को बताएं, बच्चे हैं आपके लौकीकता में, और अलौकिकता में कोई भी उठ जावे; जिसकी दृष्टि ऊपर में है वो तो पहली सीढ़ी पर खड़ा हो तो भी वो चढ़ जाएगा। उतरा तो भी उसको जाने का है ना ऊपर तो वो बार-बार चढ़ेगा, लेकिन जो सोच रहा है कि मैं ही बड़ी ऊंची सीढ़ी पे; गलत है अंदर में उसका सोचना चाहिए और देखना चाहिए कि हम चढ़े और उतर गए – चढ़े और उत्तर गए, सबका होता है क्योंकि मंथन चला हुआ है मंथन में किसी का कोई स्थान नहीं है बना हुआ ये हिसाब है। सहजयोग का तरीका अभिनव है और बिल्कुल नाविन्यपूर्ण है आज तक कभी किसी ने किया नहीं है और ना कभी मंथन हुआ है। एक आदमी गगनगढ़ महाराज सालों तक बेचारे तपस्या करते  जंगल में बैठे रहे उनसे आप लोगों का कोई लेनदेन ही नहीं इस मामले में और कुछ वो आपको समझा नहीं सकते क्योंकि वो उनका मंथन नहीं हुआ है, उन्होंने अपने दम पे अपने को बनाया अकेले ने उनकी बात और है! हां उनका गाइडेंस यही है जैसे गणेश जी का गाइडेंस है आपके पास; जो माथा पीटते हैं बहुत बार! भई इनको कैसे समझाए। अभी तुम गणेश हो, ये गणेश नहीं है बच्चे हैं सोचो तुम, तुम गणेश हो बहुत बड़े माना लेकिन ये बच्चे हैं और हमारे मंथन में फंसे हुए हैं बेचारे!ये भी है उनके बीच का दुआ हम हैं और समझा रहे हैं आपको। क्योंकि एक बात सही है कि वो चाहे शंकराचार्य रहे हो चाहे कोई हो वाइब्रेशंस(vibrations) के बारे में इतनी बात कोई भी नहीं जानता था इतनी टेक्नीकालीटिस(Technicalities)  प्राइमोर्डीयल(primordial) सारे मूवमेंट्स(movements) कोई भी नहीं जानता था, आप चाहे शंकराचार्य पर डाले चाहे कोई पड़ डाले; कहीं भी है कहीं लिखा हुआ, कहीं नहीं लिखा हुआ। कलयुगी बड़े-बड़े जीव आए हैं इस संसार में, मैं आपसे बताती हूं 200-250 क्या जीव है एक-एक बाप रे बाप! ये तो 10-12 साल के अंदर में तैयारी हो रही है तैयार हो जाएंगे। पर तब तक आप लोग सब प्लेटफॉर्म नहीं तोड़ दिजीए मेरा, कुश्ती खेल-खेल के आप लोग ने अगर प्लेटफॉर्म ही टूट गया तो मेरे ये बच्चे क्या करेंगे भई! संसार में बड़ा खेल करने को आए हुए हैं थोड़ा बहुत ठीक है पर अंगि तांडव नृत्य नको। ऑर्गेनाइजेशन (organisation) का ऐसा है कि अपने आप सब चीज सुधर हो जाएगी अगर आपस में आंदोलन एक रहे आपस में। एक आदमी अगर ज्यादा बोले तो ठंडे हो जाओ – ठंडे हो जाओ, ठंडे हो जाओ! ठंडा आता है ना ठंडा होना भी चाहिए ना। गरम है ठंडे हो जाओ ठंडापन,संजीदापन,ठंडापन अंदर आने दो। धर्म ठंडा है एब्सल्युट(absolute) 0 पर धर्म बसता है -273° एब्सलूट(absolute) जीरो पे रहता है ठंडे हो जाओ! लोग हिमालय से जाते थे इसीलिए, वो हिमालय की जरूरत नहीं है यही पे सभी आप लोग सब अपना-अपना एयर कंडीशनर(air conditioner) खोल दिजिए। अपनी ओर सचेत रहें। अपने दोषों को देखें अपने चक्रों को देखें और दूसरों के चक्रों की मदद करें; सिक्रेटली पहले बाद में; बताने की कोई जरूरत ही नहीं सिक्रेटली हाथ मार सकते हैं जब तो क्या है रास्ते में चलते ही चलते जब जागृतियॉ हो रही है तो फिर क्या है। जितना सिक्रेटली करेंगे उतना ही वो पवित्र होगा और उतना ही वह प्रेम फुल होगा। बड़ा अच्छा लगता है कोई काम सिक्रेटली हो।