Talk to Sahaja Yogis, Kshma Ki Shakti Ka Mahatav, Power of Forgiveness

मुंबई (भारत)

1975-01-20 Power of Forgiveness Hindi, Mumbai, 60'
Download video (standard quality): Transcribe/Translate oTranscribe

Feedback
Share

Kshama Ki Shakti Ka Mahatva IV 20th January 1975 Date : Place Mumbai Seminar & Meeting Type Speech Language Hindi

[Original transcript Hindi talk, Scanned from Hindi Chaitanya Lahari]

कलयुग में क्षमा के सिवाए और कोई भी राक्षस है। आपके चित्त में घुसे हुए हैं । बात समझ बड़ा साधन नहीं है। और जितनी क्षमा की शक्ति में आई? अगर कोई साधु ही सिर्फ हो तो ठीक है। होगी उतने ही आप शक्ति शाली होंगे । सबको क्षमा परित्राणाय साधुनां विनाशाय च दुष्क ताम्। साधु कर दें। क्षमा वही कर सकता है जो बड़ा होता है। के साथ एक दुष्ट बैठा हुआ है तो बहुत ही प्रेम से छोटा आदमी क्या क्षमा करेगा? आज मैंने सवेरे अलग हटाना पड़ेगा कि नहीं? कितना कठिन काम कहा था कि धर्म को जानें, आपके अन्दर जो धर्म है? आप साधुता में खड़े है या आप दुष्टता में खड़े है उसको जानें। धर्म में खड़े हैं, जो आदमी धर्म में हैं यह आप पर निर्भर करता है। अगर आप साधुता खड़ा है उसकी कितनी शक्ति होती है! तो धर्म को में खड़े हैं और कोई दुष्टता चिपक रही है तो जाने। हाँ कितना सुन्दर हम धर्म में खड़े हैं, जो उसको हटा सकते हैं। लेकिन आज ऐसे अधर्म में खड़ा है वह तो अधर्मी है। उसका हमारा कितने हैं संसार में बताईए। Degree का फर्क है कोई मुकाबला नहीं है। वह तो अधर्म में खड़ा है। और जो लोग सधुता की ओर जा रहे हैं वे लोग हम तो धर्म में खड़े हुए है, हमारा तरीका ही और साधुता को बटोरें। उनको उन लोगों से मतलब नहीं है। जो धर्म में खड़ा है उसका तरीका ही और होता रखना चाहिए जो असाधु हैं । जो असाधु हैं, जो चोर हैं, जो अधर्म में होता है उसका कुछ और हैं, बिलन्दर हैं, उनका हमसे क्या मुकाबला? वे चोर हो ता है। धर्मवाले से अधर्म वाले का मेल जोड़ ही हैं और हम वो नहीं हो सकते, वे यह नहीं हो हो नहीं सकता। हमें यहाँ तकलीफें हो रही हैं, परेशानी हो रही है लेकिन हम तो अपने धर्म पर नहीं सकता। वह तो दूसरी line पर चल रहा है, हम जीव 1. शुद्ध | सकते हमसे उनका कोई मुकाबला है? यह हो ही खड़े हुए ह तो दूसरी line पर चल रहे हैं। पर धर्म में ही जागना शक्ति को अन्दर जानो जो सिर्फ धर्म स्वरूप है। सहजयोग का लक्षण है और कोई लक्षण नहीं और धर्म कुछ नहीं सिर्फ प्रेम है और जब प्रेम ही सब कुछ है तो क्षमा उसका एक अंग है। कितना सहजयोग का इन सब चीज़ों से बिलकूल भी कौन जुल्म कर सकता है, देखते हैं हमारे प्रेम के आगे। कितना कौन दुष्टता कर सकता है, कौन प्रकाश को पाना है। अपने को जानना है कोई कितना घर का भेदी होगा, कौन कितनी तकलीफें कहता है माताजी क्या करें। चक्रों को ऐसा चढ़ाएँ। देगा, कौन कितना परेशान करेगा, करने दो। प्यार अंगुली ऐसे घुमाएँ कि वैसा करें सारे यह घुमाने के आगे सब चीज़ झुक जाती है। यही एक तरीका फिराने में आदीगतियां primordial movements है जो कलयुग में बैठता है। और तो मेरी समझ में हैं। यह सारे जो में आपको बता रही हूँ, primordial कुछ नहीं आता। अगर आप सोचते हो कोई पुराने तरीके आप इस्तेमाल कर सकते हो तो यह हो नहीं शुद्ध तरह से चीज़ का प्रवाह होना। अन्दंर से अगर सकता। इसका एक कारण है आप लोग जान mixed चीज़ प्रवाहित है तो जब आप हाथ घुमाते है लीजिए, मैंने पहले भी बताया और मैं फिर बता रही तो उसमें थोड़ा mixed ही घूम रहा है । क्षमा के हूँ, कि पूर्णतया साधु और पूर्णतया सन्त संसार में सिवाय शुद्धता अन्दर नहीं आती और जब शुद्धता नहीं है। हर एक सन्त साधुओं में भी एक एक आएगी तो प्रकाश धर्म का फैलेगा, शुद्ध निर्मल । हैं न यह सबसे बड़ी बात है। अपनी है सहजयोग का सीधा हिसाब किताब है । सम्बन्ध नहीं है अपने धर्म में जागना है, अपने जो बनाई गई। लेकिन उसका अर्थ तभी होगा कि ন

र् अतः जिसके पास धर्म है उसको प्रकाश में आना अच्छी है आज । आपकी भी स्थिति बहुत अच्छी है। होगा, बोलना होगा, बताना होगा। लेकिन उसके हर लेकिन अपने ही साथ छल कपट नहीं करो। अपने व्यवहार में खुद उसको सोचना चाहिए कि धर्म ही साथ छल कपट नहीं करो। सीधा हिसाब है। दिखाई दे रहा है कि अधर्म दिखाई दे रहा है। सहजयोग के साथ आप जो भी कर रहे हैं वे आप इससे पहले, अगर realization से पहले आपको अपने ही साथ कर रहे हैं। हिसाब यह जोड यह Lecture देती तो बहुत गलत काम हो जाता है लीजिए। होँ अब यह प्रश्न बहुत बार हो जाता है क्योंकि conditioning होता है और यही बात है Adminstration में ऐसा प्रश्न होता है कि क्या कि सारे psychologist ने धर्म को खत्म कर दिया करें? यह ठीक है कि नहीं, और इतना आसान कि, और बता दिया कि जितने भी धर्म है, यह सिखाते इतना आसान है कि कोई भी decision लेने से हैं कि यह नहीं करो, वह नहीं करो। इससे पहले निर्विचारिता में जाओ। अपने आप जो decision Conditioning mind की होती है। ठीक बात है। सामने आ जाए वह करिये। कभी गलत हो ही नहीं लेकिन अब यह नहीं होने वाला है। अब आप जो भी सकता। पर decision निविचारिता में Spontaneous चाहे अपने मन से कर सकते हैं। There will be होगा और विचार में अगर आप ने कर लिए तो वह no conditioning at all. ui ego के बीच में आपका चित्त लाकर खड़ा कर biased होगा क्योंकि उसमें आपका ego और दोनों काम करते है। आपका जो कुछ दिया है. धर्म खुद ही उठ रहा है। आप नहीं उठा भी संसार है. आपने जो कुछ भी लौकिक कमाया है रहे उसका मार्ग आप ने चुना है और जो भी वह आपके पीछे में खड़ा रहेगा। लेकिन निर्विचारिता लौकिक जाना है आप ने, जो भी लौकिक जाना है, में करियेगा तो कभी न होएगा, अलौकिक होगा, संसार में ऐसा वैसा है उससे आप अलौकिक को चमत्कारी होगा चमत्कारी होगा क्योंकि हिन्दी में तोल नहीं सकते। अलौकिक का मूल्य उससे आप चमत्कारी का अर्थ होता है बड़ा ऊँचा और मराठी में नहीं जोड़ सकते। अलौकिक की बात मैं कर रही होता है चमत्कारी का अजीब । एक चमत्कारी होगा हूँ। आप लोग लौकिकता से उसको देख रहे हैं । मराठी वाला और एक होगा हिन्दी वाला। जब बात लौकिकता के तीन dimensions खत्म हो गये अलौकिकता की हो रही है तो लौकिकता के जितने चौथे dimension में जिसको ढूंढना है, गहराई से, भी आपके बने हुए मत हैं. preconceived ideas of गम्भीरता से, चौथे dimension में चलने की बातचीत human beings cannot be God. He has his मैं कर रही हूँ। लौकिक चीज़ों से आप अलौकिक own standing, his own being. आप लोग चाहेंगे चीजों का मूल्यांकन नहीं कर सकते। क्या सताया कि भगवान हमारे जैसा हो जाए। यह तो वही चीज लोगों ने? कुछ भी नहीं सताया। हम तो कहते हैं हो गई कि भगवान दो चार रुपए दे दो, उधर मैं कि हम तो बिलकुल आराम से हैं। जैसे हमने लगा देता हूँ आपका वह एक level हो जाएगा। अपनी तकलीफें देखी हैं, जैसे जैसे लोग हमने देखे वह अपना जैसे है प्रकाशित करेगा आप अपने मार्ग हैं कि उनके लिए जोड़े से गालियाँ नहीं मिलेंगी, को खोलते जाइए। अपने धर्म को अपने अन्दर जानिए। अपने धर्म को जानना बहुत ज़रूरी है । ऐसे महादुष्ट थे लेकिन समाज की स्थिति बहुत कितनी सुन्दर चीज़ है अन्दर में । इस नश्वर देह के ego Superego आपको जोड़े से उनका वर्णन नहीं मिलेगा ऐसे

अन्दर कितनी अनश्वर चीज बह रही है। जैसे कि जाएंगे, evolution stage में जैसे chimpanze को लोग जानते हैं कि वह missing link था। Evolution गंगा, यमुना और सरस्वती, तीनों के संगम की यह धारा है । इसलिए जो मिटने वाला है, जो लौकिक में वही लोग साधारण में से चुने जाएंगे। है उससे इस चीज़ को नहीं जान सकते। एक क्षण निर्विचारिता में जाकर के आप किसी भी चीज़ का बने घूम रहे हैं ये कही भी नहीं पहुँचने वाले। आप decision ले लें। आप ऐसे decision लेंगे कि देख लीजिए सब missing link हो जाने वाले हैं बड़े-बड़े लोगों के बस का नहीं, dynamic, और जो बड़े बड़े पदभूषित हैं वे भी कहीं नहीं पहुॅचने ही बहुत normal होना चाहिए। जो बड़े बड़े दण्डे सन्यासी absolutely dynamic । जब चिन्ता, भय क्रोध, वाले । कितनों को Realization दिया हमने, राजे servility, slavishness, inferiority, सारे महाराजे, secretaries, सब अपने पद पर बैठे हुए complexes झड़ झुड़ करके, बो तो अपनी शान में बोलेगा न अन्दर। और उँसकी अपनी नम्रता है, वह मुझे लिखते हैं मुझे बड़ा हैं। किसी को लगता है कुछ कि हमारे अन्दर दीप कहीं जला? चिट्ठियाँ आनन्द आ रहा है। कोई कुछ करने की सोचता है कि हमने लिया, किसी और को भी बाँटें। अपना इतना मं दु है, इतना म दु है कि किस तरह से अन्दर चला जाता है कि पता ही नहीं चलता। जैसे झर के विशेष स्थान जब होता है तो अपने को भी विशेष चाँदनी अन्दर उतर आई हो। और जब आप चुने गए हैं तो आपका महत्व होना पड़ता है। इसी साधारण सामान्य में से ही बहुत ज्यादा है। आप सोचते हैं कि हम तो ०rdinary असामान्य निकलने वाला है वही निखरने वाला आदमी हैं हम कैसे चुने गए? ordinary आदमियों है। धीरे-धीरे अपकी सब समझ आ जाएगा कि यह में से ही चुने जाएंगे और यह जितने भी extraordinary आदमी आपको दुनिया में दिखाई डॉक्टर, क्या करा जाऐ? महामूर्ख हैं; अपने को क्या देते हैं कि यह बड़े बड़े पदभूषित हैं, यह सब करना है? ज़िन्दगी बिता दी इन्होंने missing link हो जाएंगे कल। हमेशा ऐसा हुआ। सब चूल्हे में गया, अपने को क्या करना। अपना Evolution की हर एक stage में ऐसा ही हुआ है स्थान बहुत ऊँचा है और इस चीज़ का कोई अगर आप देखें। जो बहुत ऊँचे mamoth हुए हैं education नहीं हो सकता। आपका कोई जो बहुत physically developed हुए हैं खत्म हो education नहीं हो सकता कि मैं आप को बैठकर चुके। They are missing links। हाथी उनमें से बच गऐ, जो बीच के थे। इसी तरह जो mentally अनुभव से आपको देखना पड़ता है। महामूर्ख है इनसे कौन बात करे। हैं बड़े भारी कुछ नहीं किया के educate करूँ। ABCD सिखाऊँ। यह रोज बहुत developed हुए उनमे से कह सकते हैं कि fox वह missing link में गया और उससे बढ़कर कि सहजयोग में आप समरष्टि में हैं। व्यक्ति में नहीं कुछ लोग हैं। लेकिन उसमें से कुत्ता बच गया, कुत्ता बच गया। इसी तरह मनुष्य में जो साधारण अब गगनगढ़ महाराज हैं बहुत बड़े हैं। आप लोगों में से ही उठेगा। हमेशा उठता रहा साधारण में से से बहुत बड़े, बहुत ऊँचे हैं मान लिया। 21 हजार और so called असाधारण हैं three dimension में, वह कुछ नहीं करने वाले वे missing link हो बार जन्म लिया और परमात्मा के चरणों में गिरे रहे आज सवेरे मैंने बहुत पते की बात बताई है, आप समरष्टि में हैं। यह point आप जान लीजिए। वर्ष झकमारी उन्होंने, खुद कहा उन्होंने । 21 हज़ार

और जंगलों में रहे तब जाकर ये vibrations मिले है, जो गिरने का है वह गिरते जाता है। दोनों एक उनको और आज तुमको खट से क्यों मिल गए ही साथ चलता है जीवन ऐसा ही पनपता है। भई? क्योंकि यह एक नया संसार है, एक नई बात जिसको झड़ने का है वह जीवन अपना ही उसको है। यह विराट के शरीर के रोम-रोम आप लोग हो गिरा देगा । उसको मरने का है, खत्म करने का है गए है। यह एक symbolic आदमी बना दिया। हो वह कर देगा। लेकिन उसका भी storing time है, गया। उनकी बात भूलिए। आप सब समष्टि रूप में उसका storing का इन्तज़ाम है । बो भी जाते हैं, हैं। आपमें से जो भी आदमी समष्टि से हटना और कुछ कुछ तो ऐसे जाते हैं कि वहाँ से लौटकर चाहता है वह पहले जान ले कि वह cancer बन नहीं आते। पशु योनी से मनुष्य बने और क्या जाएगा और खत्म हो जाएगा। कोई बुरा नहीं है, फायदा है कि मनुष्य होने के बाद आप जाकर कीड़े आप में से कोई अच्छा नहीं है । यह अंगुली दुखती बन गए? आप का competition सब धर्म में होगा। है इसको दबाइए, यह हाथ दुखता है इस हाथ से हम क्या धर्म में हैं या नहीं? अपने बारे में यह सोचें इसको दबाइए। आप सब आपस में जुड़े हुए हैं । और दूसरों के बारे में यह सोचें कि वो कितना धर्म आपको मालूम है आप सब आपस में जुड़े हैं। जब में है। हम कितने धर्म में हैं और वो कितने धर्म में आप आपनी बाधाएँ share करते हैं तो आप अपना हैं और अगर वो अर्धम में हैं तो वो क्यों है? उसका 1. धर्म क्यों नहीं share करते? बाधा तो आप फट से कौन सा चक्र पकड़ा है? चक्र की पकड़ की वजह, पकड़ लेते हैं, धर्म क्यों नहीं पकड़ते? क्या वज़ह उसमें कोई और बात नहीं है। निरपेक्षिता से देखिए । है? सारी वजह ये है कि अभी हम चढ़ रहे हैं। छोटे सिर्फ चक्र पकड़ा है न अरे निकाल देंगे चक्र हैं: बड़े हो रहे हैं। छोटे बच्चे है; पहले थोड़ा जलेंगे, उसका भी, अगर बैठे बैठे उसके प्रति सब इच्छा पहले थोड़ा गिरेंगे, एक दिन जब बड़े होंगे तो अपनी करते हैं । अगर बहुत ही गई बीती चीज़़ है तो अंग्नुलियाँ पकड़ करके हजारों को चलाएँगे छोटे हो अभी आप। ठगे जाआगे तो कोई हर्ज नहीं । भोलेपन में रहें। लेकिन जो ठग रहे हैं और वह सहानभूति है. जिसका आपको लगता है कि वह अपने को बहुत अकलमन्द समझ रहे हैं तो उनको ठीक होगा, उसका कुछ हाल ठीक कर सकते हैं, पता होना चाहिए कि cancer बन के निकाल दिए उसके आपके पास हैं तरीके। यह primrodial जाओगे। वह एक मार्ग और भी है जहाँ जो जाता है फिर लौटता नहीं है। नर्क का भी एक मार्ग है,। आपस में share करिए, आपस के चक्र बढ़ाइए, बुरा छोड़िए उसको, cancer हो गया। छोड़िये उसको, दफना दीजिए। लेकिन जिसके प्रति आपको movements है, उनसे आप उनको ठीक करिए। उस रास्ते पर बहुत से लोग चलते हैं, उनको पता नहीं मानिए । बिलकुल भी नहीं बुरा मानना चाहिए । ही नहीं, वे सोचते हैं माताजी के सामने आओ, जिस आदमी ने बुरा मानना जाना है वह उतना ही उनके पाँव छुओ, उनके पाँव धोओ। हो गये बड़े गलत होगा जो दूसरे को दुःखी करता है। बुरा सन्त। वह भी एक मार्ग चल रहा है, साथ ही साथ मानना और दुःखी करना दोनों ही एक चीज़ हैं, एक सब चल रहा है। जब फूल खिलता है तो कली का ही क्रिया के दो अंग हैं। इसलिए बिलकुल भी जो कुछ गिरना है वह गिर जाता है और उसमें से नहीं मानना चाहिए। अगर कोई कहता है कि चक्र सुगन्ध आती है। जो कुछ पनपने का है बुरा पकड़ा है तो उपकार मानना चाहिए भईया तूने बह पनपता

पहचाना, मैंने नहीं। अगर कोई कह दे कि तुम्हारे और हृदय ही से सारा कार्य हम करते हैं और हृदय अन्दर में यहाँ से सॉप काट रहा है तो तुम उसका से ही सम्बन्ध है, तुम्हारा मेरा। इसलिए पहले हृदय उपकार मानते हो। जिसका चक्र खराब हुआ है तो चक्र को पूर्णतया आप लोग साफ करें हम अपनी तरह से चीज सोचते हैं कि यह ऐसी चीज़ है। हृदय उसको भी उपकार मानना चाहिए के यह मेरा चक्र पकड़ा है इसको निकाल दे भई, तू साफ कर दे। की तरह क्यों नहीं? कितना प्रेम हमने दिया? दूसरों कभी बुरा नहीं मानना चाहिए हालांकि और संसार को हमने कितना प्रेम दिया. दूसरों को कितनी से तो आप बड़े हैं ही क्योकिं आपकी vibrations तकलीफ दी मुझे देसाई की चिट्टी और दुनियाँ में कितने लोगों को आ रही हैं। लिए लिखा उन्होंने कि मेरी wife की बड़े मदद इतना बड़ा Pope है उसके भी नहीं है। मैंने देखा करते हैं । मुझे बड़ी खुशी हुई. बाग बाग हो गई मेरी है। बड़े बड़े लोगों से आप बड़े हैं लेकिन हैं तो अभी तबीयत यह सुन कर के। तेरे देसाई की बड़ी बच्चे ही न। सहजयोग में बच्चे हैं। Pope के पास helpless चिट्ठी आई, मेरे wife को ऐसे हुआ। मैंने तो है ही नहीं vibrations। बड़े बड़े जो बने हुए है, कहा, इतने लोगों को मैंने पार किया, यह दिया वो जिनके आगे दुनिया झुकती है और यह शंकाराचार्य दिया, वो बेचारी मर कैसे रही है? मुझे क्या ज़रूरत और ये है, बो हैं, उनके किसी के vibrations हैं है? London से उसे वहाँ vibrations भेजी। क्या, मालूम नहीं। और तुम लोग तो जाग ति भी देते बात-बात पर आपस में मदद करें, आपस में प्रेम हो और पार भी कराते हो। और सबकी कुण्डलिनियाँ करें। ऐसे बन्धन में इक्कठे हो जाएंगे हम लोग कि अंगुलियों पर फिरा रहे हो । कितनी बड़ी बात है! जैसे एक ही शरीर है विराट का और उसके सहस्रार गणेश जी के सिवाए कोई नहीं कर सकता था पे विराज मान हैं आप लोग. विराट के सहस्रार पर पहले । इसलिए गणेश जी के हाथ में वह होता है न बिठाया है आप लोगों को और क्या कर रहे हैं छोटा सा सांप, वह इसका symbolic है कि वह पागल? विराट पुरुष के सहस्रार पे एक हज़ार सबकी कुण्डलिनी घुमाते थे अब तुम्हारे कम से आदमी बिठाने के हैं। और देखने को बड़ी बात कम एक तो हाथ में आ गया है कि कुण्डलिनी तो लगती है। हाँ हाथ में vibrations कितने के आए चढ़ा सकते हैी सबकी! पर लौकिक से बनता नहीं। हैं? आए हैं न? कुण्डलिनी को समझते हैं? उसमे तो वह अलौकिक है. उसका कुछ ठिकाना नहीं है। कोई शंका नहीं आप लोगों को। हमारा क्या, खेती तोड़-फोड़ कर देता है। जितना वो नाजुक है, कर दी है, देखेंगे। सारी दुनिया के लोग करें मुझे जितना वो प्रेममय है उतना ही वो संहारी है । वो तो समझ नहीं आता कि लोग छोटी छोटी चीज़ के अपने तरीके से चलने वाले हैं। आप अपने तरीके से लिए यह नहीं हुआ, वो नहीं हुआ? अरे, यह नहीं सिर्फ इतना करिए। कहाँ है हृदय चक्र? सबसे हुआ, वो नहीं हुआ, क्या होता है? लोग कौन सी पहले हृदय चक्र को ठीक करिए। हमारा हृदय line में चले जा रहे हो और सोच क्या रहे हो? अब आई, उनके 1 1. | तुम तुम साफ है या नहीं? हमारे मन में किसी के प्रति यहाँ से अगर आपको दिल्ली जाना है तो आप क्रोध है क्या? हमारे मन में किसी के प्रति कोई सोचिएगा कि वहाँ आटे का भाव क्या है? लेकिन आशंका है क्या? अपने हृदय से पूछे। सबसे बड़ी आप को जाना है जहाँ आटा वाटा कुछ नहीं चीज़ है क्योंकि हृदय control करता है brain को चलता। धर्म चलता है। वहाँ धर्म का भाव क्या है. अ

यह जानना है। आटे दाल का भाव जानने की क्या रहा है? Now you are growing younger and जरूरत है धर्मिक लोगों को ? वहाँ क्या धर्म है, वहाँ क्या है, यह जानने की जगह वहाँ पर कौन getting younger and younger. Isn’t, हॅँ। जो younger. I am worried about you. She is सा politics पक रहा है? वह चीज़ है यह आप बोलते हैं वह सर के अन्दर से जा रहा है? दिल के जानते हैं। अगर आपके अन्दर vibrations नहीं है अन्दर से जा रहा है? दिल के अन्दर से जाना तो बात अलग है। आप जानते हैं। लेकिन यह चाहिए। सर से जाएगा तो argument करेंगे। | बहना बहुत ही कम चीज़ है, अभी तो कुछ हुआ ही नहीं, अभी तो बच्चे हैं आप। आपकी एक साल की भी साल गिरह मनाने को मैं तैयार नहीं हूँ। अभी तो हृदय चक्र को ही sacred heart कहते हैं। Christian सिर्फ जबरदस्ती का राम राम हुआ है। आप अपनी ओर देखिए कि मैं कुछ बदला कि नहीं, मुझमें कुछ और उसमें भवानी का, दुर्गा का स्थान रखा हुआ अन्तर आया कि नहीं? मेरे अन्दर कुछ शान्ति आई उसका dogma बनेगा। दिल से जाने दीजिए प्रकाश होएगा। प्रेम का मुजा उठाना है तो दिल से जाईये। | लोग जो कहते हैं sacred heart वही हृदय चक्र है है और बहुत बड़ा स्थान है उसका। दुर्गा को समझना कि नहीं? मेरे अन्दर कुछ हुआ? सिर्फ सुषुम्ना की आपके बस का नहीं है । यह जितने भी राक्षस हैं वो भी उसी के बच्चे है। जो कुछ भी संसार है उसी का हमने आपको। एक ही बारीक line पर बिल्कुल ही है। उनको जिन्होंने मारा, तुम्हारे प्यार के पीछे खींचा है, जो की कहना चाहिए कि बाल के बराबर और उनका नाश किया वह उस माँ की ही शक्ति है। सुषुम्ना खुद ही इतनी मोटी है, देखा जाए तो है । अपने ही हाथों को खींचना बहुत मुश्किल हो और वह एक के ऊपर एक चार परते हैं। लेकिन जाता है। अपने हाथ से अपने को injection देना इसी vibrations से लोगों की तबीयत ठीक हो रही बहुत मुश्किल हो जाता है, फिर अपने ही बच्चों को मारना दूसरे बच्चों को बचाने के लिए उससे भी उसका तो चेहरा एकदम अलग दिखाई दिया। वह कठिन बात है लेकिन वह मारना भी एक बड़ी कहने लगी मेरा तो asthama एकदम ठीक हो शक्ति का कार्य है क्षमा का कार्य है, एक बहुत गया है। यह कौन सी बड़ी बात है। वह ठीक हो बड़ी क्षमा का कार्य है लेकिन कलयुग में आप लोगों को कोई भवानी बनने की जरूरत नहीं है। जो अति सूक्ष्म नाड़ी है उसमें से खींचकर निकाला है यह ठीक हो रहा है। एक आई थी Lady गया, वह ठीक हो गया, ये कौन सी बड़ी बात है? इसमें रखा क्या है? cancer ठीक हो गया, इसमें शान्त हो जाइये। अत्यन्त शान्त हो जाइये। अत्यन्त कौन सी बड़ी बात है। यह तो होना ही था घर में शान्त हो जाइए। आपकी शान्ति ही हमारे कार्य को अगर बिजली जल गई तो दिखाई देने ही लगेगा बढ़ाएगी। आप मान लीजिए की लोग कहेंगे सहजयोग कम से कम । अगर बिजली जली तो जली, कि नहीं में हमने ऐसे ऐसे लोग हमने देखें है कि जो क्रोध के जली? कम से कम दिखाई तो देगी सब चीज़। बिलकुल वो थे, servlty के पुतले थे, बिलकुल दबे उसमें कोई विशेष बात नहीं हुई। लेकिन बिजली हुए लोग थे। अजीब अभिनव वो आदमी थे आप ही जलने के कारण आपमें कौन सा ज्ञान आया, आपने लोग हमारे सहारे हैं और कौन है? आप ही से लोग कौन सा New dimension देखा, आपने कौन सी कहें बढ़िया आदमी है, first class. तबीयत का बड़ा चीज़ नई करी। यह विशेषता है। हाँ, कैसा? चल है हर चीज से wide है हो रहा है, काफी हो रहा

है। पहले से बहुत फर्क आ गया है लेकिन जोरों क्योंकि स्वतन्त्रता नहीं है। और राक्षस लोगों को में हो सकता है। देखिए, उनके वो कैसे आपस में करके-आ जुट अब सब आपके ऊपर है जैसे इसको हा-हा! क्या मजा आ रहा है! इसका गला घोटा, सोचे, आपस में समझें, दूसरों की बात सुनें, शान्ति उसको मार डाला, उसकी हालत खराब। सन्तों का पूर्वक दूसरों को समझें, दूसरों को महसूस करें। । गुट जब बनेगा तो सोचिए क्या होगा? सन्तों का गुट तादात्मय पाएं, दूसरों के साथ, जैसे यह हाथ इस कभी बना नहीं है। यह पहली मरतबा हुआ है। 1 हाथ को जानता है। इस हाथ से यह brain भी सन्तों की सन्तता छूट जाएगी तो फायदा क्या ऐसे जानता है और हृदय भी जानता है, और सब चीज़ गुट का? सन्त के सारे ही लक्षण अपने अन्दर से एक साथ चल रही है integrated, ऐसे ही आप दिखने चाहिए। marathi… मैं कह रही हैूँ लाल सबको integrated होना पड़ेगा। तभी वह हजार हाथ तैयार होंगे जो मनुष्य रूपेण इस्तेमाल किए कर लीजिए फिर पूजन करिए। क्योंकि जब चढ़ जाएँगे। वही हज़ार हाथ जो सहस्रार में हैं। वो जाएगा न फिर हम कुछ बोल नहीं पाएंगे । आप मनुष्यों से ही निकलेंगे, वह भी सर्वसाधारण, कोई लोगों की meeting में जो कार्यवाही होती है, बड़े बड़े ऋषि मुनि नहीं चाहिए उसके लिए की बैठा कार्यवाही के लायक रह नहीं जाएंगे। हो गया| अब लिए चक्रों पर। जो बड़े बड़े लोग हैं वह तो चक्रों आप बता दीजिए कोई problem है क्या, बिलकुल साहब, कि आप लोगों की meeting थी पहले वह ह पर बैठे मनुष्य से निकलने वाले हैं। marathi… हूँ। घर में पूजन करिए इत्मिनान से। यह जितना भी गोबर है ही सफाई पहले। मैं कह कर रही हैूँ कि आपस में उसको लपेट कर साफ करके फेंक आएंगे फिर सांसारिक gross सब कुछ बातचीत हो जाए। फिर हुए चला रहे है। सहस्रार में तो यह सामान्य नहलाना शुरू करो vibrations से। Mrs. Lal आप बातचीत होगी दीजिए, ये आपको दें। पहले चक्र आपस में देख किसी में ज़्यादा है तो आप उसकी मदद करके उसे लीजिए फिर बाहर निकलें नहा धोकर, बाहर निकलें, ठीक कर सकते हैं। पर निर्पेक्षता रखिए । निरपेक्षता तैयार, फिर शरद मिलें, शरद की आपको सफाई आवश्यक है। आप आप नहीं है, आप निर्मल अन्दर किया। फिर उन्होंने आपके दो हाथ सफाई किये। हैं, बाहर आपे हैं। ऐसा दूसरा कोई भी है उसका सफाई करते चलिए, हो गया, सब, निर्मल हो गया भी ऐसा ही है। आप निर्ेक्षता से दूसरे के प्रति । बताएँ क्या क्या problem है। अगर मामला। दुनिया में सब आफत मची हुई है और जाग त रहें। अगर किसी में बहुत तकलीफ दिखाई दुनिया में आपको पता नहीं क्या क्या हो रहा है । देती है तो उसे ठीक करें। बुरा न मानें । अगर criminality बिलकुल आने वाली है। आपको पता कोई आदमी बुरा मानता है तो इशारे से कहें। जैसे नहीं है राक्षसों का ऐसा राज्य बना हुआ है। और आप मेरे पैर पर हैं। किसी बात से आप बुरा माने राक्षस लोग ऐसी बातचीत करते हैं कि उनका समझ लीजिए मालूम है हमें, तो दूसरों को उसका आपस में गुट हो जाता है । वे ऐसे चिपक जाते है कुछ सोचना नहीं चाहिए। जैसे कोई आदमी आपस में जैसे कोई glue होता है ना। वो ऐसे बीमार होता है उस तरह तो मैं आपको इशारों में चिपक जाते हैं । और हमारे जो कार्य करते हैं वो बताऊंगी कि आप पैर पर आ गए। समझ गए कहाँ पर हैं चलो निकालो । आपस में मिलकर के बात बात में झट गिर गये। उधर गये, झट गिर गये 8. ho

हम लोग आपस में सफाई करते हैं । प्रश्न-मां आपस में कोई भेद भाव दिखाई कौन कौन बड़े है? कौन जो बड़े बड़े बातें करने पड़ता नहीं है। उत्तरः है नहीं। लेकिन थोड़ा बहुत वाले हैं यह churning चला है जान बूझ करके यह होता है हम लोग पाँच कदम आगे चले और छ: हम कुण्डलिनी उतारेंगे, जान बूझ कर भी। बात यह कदम पीछे, फिर पाँच कदम आगे फिर छः कदम है कि जब तक उतारेंगे नहीं, चढाएंगे नहीं, उतारेंगे पीछे। सवाल उठता है कि कितने साल बाद नहीं चढाएंगे नहीं, तब तक काम नही बनेगा जानबूझ पहुंचेंगे? वे पहुंचेंगे ही नहीं वह तो उधर ही खड़े हैं। कर उतारेंगे। अभी जितने बूढे लोग हैं उन्हें पता प्रश्न: उठते तो हैं लेकिन अखिर जो नतीजा है होना चाहिए कि लौकिकता से आप ही लोग Leader ऐसी कुण्डलिनी पकड़ के रखूँगी नीचे में कि देखेूँगी उसमें भेद भाव नहीं बीच में माताजी: हूँ। वह भी चीज़ है जब आप अपनी आप ही बड़े हैं। इसलिए आपको और भी Better awareness में उतरेंगे तो वह बिलकुल एक साथ होना चाहिए। आप लोग सब एक हो जाएं। बच्चों चलेंगे। एक साथ जैसे की इतना बड़ा समुद्र है को बताएँ, बच्चे हैं आपके, कि यह लौकिकता है। उसकी भी लहर एक साथ चलेगी। एक साथ और अलौकिकता में कोई भी उठ जावे जिसकी सबका आन्दोलन चलना चाहिए। अब यही है कि द ष्टि ऊपर में है जो पहली सीढ़ी में भी खड़ा है तो एक डण्डे से चाहे, अपने को मार लो चाहे दूसरों भी वह चढ़ जाएगा। उतरा तो भी वह बार बार चढ़ को मार लो, बेहतर है अपने को मारो। इसमे बड़ा जाएगा। जो सोच रहा है कि मैं ही बड़ी ऊँची सीढ़ी छोटा कोई है ही नहीं, इसमें कोई seniority का पर पड़ता है। श्री हैं लौकिकता से संसार में आप ही लोग बुजुर्ग हैं, पर हूँ, गलत है। अन्दर में उसको सोचना चाहिए सं्वाल है ही नहीं। इसका reason है न आप लोग और देखना चाहिए कि हम चढ़े और उतरे, चढ़े और लौकिकता से आ रहे हैं जहाँ आपने देखा कि एक उतरे। सबका होता है। क्योंकि मंथन चला हुआ है। बड़ा होता है एक छोटा होता है। एक officer होता मंथन में किसी का कोई र्थान नहीं बना हुआ, यह हैं एक नीचे होता है, एक राजा होता है, एक कंगला हिसाब है। सहजयोग का तरीका बिल्कुल अभिनव होता है, एक साधु होता है, फिर एक सन्यासी होता है, नावीण्यपूर्ण है । आज तक किसी ने किया नहीं है । इसमें कुछ नहीं है सिर्फ एक वह चला हुआ है। है और न कभी मंथन हुआ है। एक आदमी, गगनगढ़ churning को क्या कहते हैं? मंथन है यह । मंथन महाराज सालों तक बेचारे तपस्या करते हुए जंगल चला हुआ है। एक ऊपर एक नीचे, बस मैं मंथन ही में बैठे रहे। उनसे आप लोगों का कोई लेन देन नहीं कर रही हैूं। अब मक्खन कौन चुराएगा वह देखना है। इस मामले में कुछ और आपको समझा नहीं है। अकलमंद जो होगा वह मक्खन चुराएगा यह तो सकूगी। वह उनका मंथन नहीं हुआ। उन्होंने अपने चला ही हुआ है churning. खूब, कभी ठण्डा दम पर अपने को बनाया है अकेले ने उनकी बात आएगा कभी गर्म आएगा। यह चला हुआ है और और है। उनका guidance यह है कि जैसे की मक्खन ऊपर आएगा, और तैर जाएगा मक्खन गणेश जी की guidance है। आपके पास माथा हल्केपन से। कोई ऊँचा नीचा है ही नहीं इसमें । पीटते हैं बहुत बार, भई इनको कैसे समझायें। तुम जिसने सोचा कि मैं ऊँचा हूँ और नीचा हूँ तो फिर गणेश हो। यह गणेश नहीं है, बच्चे हैं। सोचो तुम एक महमाया भी बैठी हुई है, समझ लीजिए। फिर गणेश हो, बहुत बड़े हो माना, लेकिन यह बच्चे हैं

ाभ भ हैर पार हुए हैं बेचारे। उनके एक रहे आपस में। एक आदमी अगर ज्यादा ओलें और समझा रहे हैं तो ठण्डे हो जाओ, ठण्डे हो जाओ, ठण्डे हो जाओ। आपको। एक बात सही है, चाहे व शंकराचार्य हो ठण्डा आता है न। ठण्डा आना भी चाहिए। गर्भ या कोई, vibration के बारे में, इतनी बड़ी बात नहीं, ठण्डे हो जाओ। ठण्डापन, संजीदापन, ठण्डेपन कोई भी नही जानता था। इतनी technicalities, को अन्दर आने दो। धर्म ठण्डा है, absolute zero अभी। और हमारे मंथन में फैसे बीच का जुआ हम ही हैं। primordial movements, सारे कोई नहीं जानता पर, धर्म बसता है absolute zero पर | टण्डा लोग था, चाहे आप शंकराचार्य पर डालिए या कोई और हिमालय पर जाते थे इसी लिए। तुम्हें हिमालय की पर डालिए कहीं भी नहीं लिखा है। पर यही बड़े ज़रूरत नहीं है। आप लोग अपना airconditioner बड़े जीव आए हैं संसार में। मैं आपसे बताती हूैं कि खोल दीजिए इसी वक्त। अपनी ओर सचेत रहें । 1 क्या जीव है एक एक! बाप रे बाप! दस बाहर साल अपने दोषों को देखें, चक्रों को देखें और दूसरों के से तैयारी हो रही है। तैयार हो जाएंगे अन्दर। तब चक्रों में मदद करें, secretly । पहले बाद में बताने तक आप लोग मेरे सब platiorm न तोड़ दीजिए, की ज़रूरत नहीं है secretly जब आप कर सकते कुश्ती कर कर के अगर मेरा platiorm ही तोड़ हैं तो क्या है? रास्ते में चलते ही चलते जब दिया तो मेरे बच्चे क्या करेंगे? संसार में इतना बड़ा जाग तियाँ हो रही हैं तो फिर क्या है? जितना खेल करने को आए हैं थोड़ा बहुत ठीक है। हूँ secretly करेंगे उतना पवित्र होगा, उतना ही प्रेमपूर्वक organisation कैसा है कि सब चीज अपने आप होगा बड़ा अच्छा लगता है कोई काम secretly सहज ही ठीक हो जाएगी जब आपस में आन्दोलन करें।