Public Program Bharatiya Vidya Bhavan, मुंबई (भारत)

Updesh – Bhartiya Vidya Bhavan- 1, 17th March 1975 Date : Place Mumbai Seminar & Meeting Type Speech Language Hindi ( … अस्पष्ट) उन सब के बारे में काफ़ी विशद रूप से मैने आपको बताया है। और जिस चैतन्य स्वरूप की बात हर एक धर्म में, हर समय की गयी है उससे भी आप में से काफ़ी लोग भली भाँति परिचित हैं। उस पर भी जब मैं कहती हूँ कि आप गृहस्थी में रहते हो और आप हठयोग की ओर न जायें, तो बहुत से लोग मुझसे नाराज़ हो जाते हैं। और जब मैं कहती हूँ कि इन संन्यासिओं के पीछे में आप लोग अपने को बर्बाद मत करिये और इनको चाहिये की गृहस्थ लोग दूर ही रखें। तब भी आप लोग सोचतें हैं कि माँ, सभी चीज़ को क्यों मना कर रहे हैं।  ऐसे तो मैं सारे ही धर्मों को संपूर्ण तरह से आपको बताना चाहती हूँ। इतना ही नहीं, जो कुछ भी उसमें आधा-अधूरापन भापित होता है उसको मैं पूर्ण करना चाहती हूँ। मैं किसी भी शास्त्र या धर्म के विरोध में हो ही नहीं सकती। लेकिन अशास्त्र के जरूर विरोध में हूँ और अधर्म के। और जहाँ कोई चीज़ अधर्म होती है और अशास्त्र होती है, एक माँ के नाते मुझे आपसे साफ़-साफ़ कहना ही पड़ता है। बाद में आपको भी इसका अनुभव आ जायेगा  कि मैं जो कहती हूँ वो बिल्कुल सत्य है, प्रॅक्टिकल है। जब आप अपने हाथ से बहने वाले इन वाइब्रेशन्स को दूसरों पे आजमायेंगे, आप समझ लेंगे, कि मैं जो कहती हूँ Read More …