Public Program 2, Science, Trigunatmika

मुंबई (भारत)

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Trigunatmika Date 30th March 1975 : Place Mumbai : Seminar & Meeting Type Speech Language Hindi

[Original transcript Hindi talk, Scanned from Hindi Chaitanya Lahari]

अधिकतर प्रगल्भ है. developed है मनुष्य पूरी तरह से इन तीन शक्तियों में पूर्णतया कल मैंने आपसे बताया था, सबको सुनाई दे रहा है या नही ? पीछे में सुनाई दे रहा है ? आपसे मैंने यह बताया था कि मनुष्य का शरीर उसका मन, उसकी बुद्धि, आदि उसका जितना भी पूरा व्यक्तित्व है. उसकी जितनी भी mature हो गया है, बड़ा हो गया है। अब उसकी तैयारी हो गयी है कि उन तीनों शक्तियों का संचय, जो एक शक्ति परमात्मा का प्यार है उनका प्रेम है उसे जाने। जो एक शक्ति ही तीनों में बंट गई है वो एकाकार हो जाए. उस personality है वह सब कुछ तीन तरह के शक्ति से बना हुआ है। एक शक्ति जिससे कि हम अस्तित्व बनकर रहते हैं। वह मनुष्य में प्राण स्वरूप होती है जिसका स्थान हृदय में होता है। दूसरी शक्ति जो कि हमारे पेट में होती है जिसके कारण हमारी आज मनुष्य दशा तक उत्क्रान्ति हुई है, वह है धर्म। और तीसरी शक्ति जो एक चेतनामय है जिससे हमें बुद्धि आदि अनेक चेतना के अवलम्बन मिले हैं। लेकिन यह तीनों ही शक्तियाँ सर्वव्यापी परमात्मा के प्रेम से पाई जाती हैं। परमात्मा बन सर्वव्यापी प्रेम इन तीनों शक्तियों को संचालित करता है, समग्र बनाता है, माने integrate कर देता है। जैसे कि जड़ वस्तु में भी जो vibrations दिखाई देते हैं. जिसे electromagnetic vibrations कहते हैं. वो भी उसी स्थिति स्वरूप, प्राण का ही सोया पीट परम शक्ति का एक थोड़ा सा अंश हमारे अन्दर कुण्डलिनी के रूप में त्रिकोणाकार अस्थि में सोया हुआ रहता है। जिस वक्त कोई भी ऐसा इन्सान जिसने इस प्रेम को अपने अन्दर ले लिया हो और जिसके अन्दर यह शक्ति से समग्र होकर integrate हो बह रही हो, माने कि जो आदमी realised soul हो, वह किसी साधक के ऊपर अनुग्रह करता है तभी कुण्डलिनी, आपकी मां, जागृत होती है । लेकिन वैसा साधक अगर सोचे कि नहीं मैं ही अपनी कुण्डलिनी जागृत करूँगा तो वैसी ही बात हुई है कि जो गाड़ी चलाना नहीं जानता है बह मोटर चला रहा है। जिसको मोटर चलाना नहीं आता है ऐसा अगर आदमी मोटर चलाए तो मोटर का कचरा बन जाता है। इसी प्रकार जो लोग अपनी कुण्डलिनी स्वयं जागृत करना चाहते हैं तो वे अपनी सारी ही कुण्डलिनी की संस्था को उसके सारे instrument को पूरी हुआ स्वरूप है। जब वह जाग जाता है तब वह प्राण हो जाता है। जो एक छोटे से amoeba में पेट में भूख लगती है, वही मनुष्य के अन्दर में धर्म के रूप में जागृत वस्तु मात्र में है। जैसे कि मैंने आपसे बताया था कि सोने का धर्म यह नहीं है कि वह पीला है। हो जाती है । धर्म हर एक तरह नष्ट भ्रष्ट कर देते हैं। अगर कोई अन्जान आदमी इस कुण्डलिनी को जगाना चाहता है तब भी यही हो जाता है। कोई अगर अपवित्र आदमी आपकी माँ के ओर अग्रसर होता है और उसको जगाना चाहता है तब भी ऐसा ही हो जाता है। और कोई अगर आदमी आपको पैसे के लिए आपको उसका धर्म यह भी नहीं है कि उससे आप जेवर बना सकते हैं । लेकिन सोने का धर्म यह है कि वह किसी भी हालत में tarnish नहीं होता, खराब नहीं होता अब जो तीसरी चीज़ है चेतना, वो मनुष्य में, मनुष्य के मस्तिष्क में, सबसे लूटने के लिए, आपको

बेवकूफ बनाकर के कुण्डलिनी पर हाथ डालता है आदमी को चाहिए कि वह अपना समय और किसी तब भी यही काम हो जाता है। वहीं इन्सान जो कार्य में लगाए लेकिन कुण्डलिनी के ऊपर अपना परमात्मा के प्रेम की सर्वव्यापी शक्ति से पूरी तरह हाथ न रखे। कुण्डलिनी जितनी सौम्य है जितनी प्लावित हो, जिसके अन्दर सामूहिक चेतना पूरी कृपालु है, जितनी वरदायनी है. जितनी मातृ हृदय तरह से बह रही हो, इस बात का अधिकारी है कि से प्लावित है उतने ही उसको संभालने वाले गण, कुण्डलिनी पर आमन्त्रण का आरोप करे कुण्डलिनी deity जो कि उसकी रक्षा करते हैं, वह प्रखर और का आमन्त्रण ऐसे वैसे आदमी भेज नहीं सकते। तेजोमय हैं। किसी भी प्रकार का खेल जब और जो इस तरह से भद्दे प्रयत्न करते हैं वह बड़े कुण्डलिनी के साथ होता है, तो वह पूरी तरह से भारी पाप के भागीदार हो जाते हैं। जो दूसरे की कुण्डलिनी की रक्षा में तत्पर रहते हैं और ऐसे लोगों कुण्डलिनी नष्ट कर देते हैं. उनकी स्वंय की को नष्ट भ्रष्ट कर देते हैं। जो इस तरह का पाप कुण्डलिनी जन्म जन्मांतर के लिए नष्ट हो जाती है करते हैं। सबसे बड़ा पाप, संसार में यही है कि और वे कीड़े मकोड़े के जन्म लेते हैं। इसलिए किसी साधक की कुण्डलिनी अनाधिकार चेष्टाओं कुण्डलिनी के साथ खेलने का साहस कभी न करें। से घायल करना। इससे बढ़कर कोई भी पाप बाकी सब चीज़ों में ठीक है आप चोरी करिए, आप संसार में नहीं है माँ की हत्या से भी बढकर यह smuggling करिए कोई हर्ज नहीं लेकिन आप कुण्डलिनी के मामले में मेहरवानी से दूर रहिए। कुण्डलिनी को जागृत करने का अधिकार परमात्मा के सिवाय और कोई नहीं दे सकता। जब तक हुई है और उसे पवित्रता से भरा हुआ है यह सारी स्वयं परमात्मा की शक्ति इसका अधिकार आपको सृष्टि अत्यन्त पवित्र है। उसमें जो कुछ भी अधर्म न दे तब तक यह आपके पास अधिकार नहीं है कि है और बुरा है वह मनुष्य ने ही संचित किया हुआ आप college में जाकर इसकी degree ले लें और कहें कि हम कुण्डलिनी जागृत कर सकते हैं गया जो स्वतन्त्र है। बाकी सारी ही सृष्टि परमात्मा इस तरह के झूठे बहुत लोग आजकल संसार में के इशारे पर नाचती है। एक पत्ता भी उनके इशारे दिखाई दे रहे हैं और वे जान नहीं रहे हैं कि हम के बिना नहीं हिलता। सारी सृष्टि में जो अधर्म से कितना बड़ा घोर, अत्यन्त भयकर पाप कर रहे हैं। अधर्म है, जो न्क से नर्क है जो पाप से बढ़कर पाप कुण्डलिनी का काम अत्यंत कुशलतापूर्वक करना हैं, वह मनुष्य का ही बनाया हुआ है। इसकी रचना पड़ता है। इतना ही नहीं अत्यंत प्रेमपूर्वक करना मनुष्य ही ने की है और ऐसे ही गिरे हुए अधर्म लोग पड़ता है और सबसे बड़ी बात है कि वह प्रेम भी जब अधर्माधम की स्थिति में पहुँच जाते हैं तब वे अत्यंत पवित्र होना पड़ता है। पवित्रता यह धर्म के शैतान के रूप में विचरण करने लग जाते हैं। रोम-रोम में छाई हुई शक्ति। जो आदमी पवित्र शैतान परमात्मा ने नहीं बनाया, उसको मनुष्य ने नहीं होता है, जो दूषित विचारों से भरा रहता है. बनाया है और वह शैतान की पूजा करते हैं क्योंकि जिसका सारा चित्त दूसरों का पैसा, दूसरों की उसने ही उसकी रचना की है। जब तक हम शैतान पत्नी या दूसरों को लूटने की ओर होता है ऐसे को शैतान नहीं कहेंगे, जब तक हम अधर्म को श्र पाप है कि आप किसी की कुण्डलिनी को हाथ लगा रहे हैं अनाधिकार चेष्टा से । परमात्मा ने यह सारी सृष्टि अपने प्रेम से बनाई है क्योंकि मनुष्य ही ऐसा जीव संसार में बनाया 1 3

अधर्म नहीं कहेंगे, जब तक हम बुराई को बुराई अत्यन्त अधर्म कार्य करके जो शैतान तैयार किया नहीं कहेंगे, तब तक हमारे अन्दर अच्छाई जागृत हुआ है उस शैतान के बादल आज भी संसार के नहीं हो सकती। आपने सुना होगा कि जब लोग ऊपर इतनी बुरी तरह से मंडरा रहे हैं कि हो मक्का जाते हैं तब रास्ते में एक वहाँ शैतान की सकता है कि अगर सहज योग पूरी तरह से न मूर्ति बनाकर बिठाई गई है और सब लोग अपने घर पनप पाया तो वह दिन दूर नहीं जबकि इन लोगों से एक पुरानी चप्पल लेकर वहाँ जाते हैं और पहले का सबका सर्वनाश हो जाए और अन्धकार के गर्भ शैतान को मारते हैं, माने कि उसको धिककारते हैं। में हम डूब जाएं। उस अन्धकार में भी सहजयोग में उसको धिक्कारे बगैर परमात्मा आप को स्वीकार जिन जीवों ने परम कार्य किये हुए हैं वो सितारों ही नहीं करने वाले और उनके स्वीकारे बगैर कुछ जैसे चमकेंगे सितारों जैसी उनकी महिमा होगी। भी आप को नहीं मिलने वाला, आप चाहे कुछ भी यह वह बड़ा आपका स्थान है। आज आप इसको कर लीजिए। उनकी मेहर आप पर होनी चाहिए, समझ नहीं पा रहे हैं लेकिन इतिहास में इस बात उनकी दया आप पर होनी चाहिए, उनका प्रेम की चर्चा होगी कि कितने सहजयोगियों ने सत्य पर आपकी ओर उमड़ना चाहिए। वह अल्यंत दयालु, अपने पैर जमा लिए थे। करुणामय शक्तिमान प्रभु परमेश्वर हैं लेकिन अगर आप अधमाधम कार्य में बैठे हुए हैं और आप की ओर उलझने की जरूरत नहीं है। आप बहुत उस शैतान की पूजा कर रहे हैं जिसने संसार में बड़ी चीज़ पर जमे हुए हैं। इतनी बड़ी चीज़ पर एक अजीब तरह का चक्र चला दिया है. जिसने अध जमने वाले लोगों को चाहिए कि छोटी मोटी चीजों र्म का एक चक्र चलाया हुआ है और जिसके बहुत की ओर बिल्कुल भी ध्यान न दें। आपके अन्दर की सारे अनुचर संसार में पैदा होकर अधर्म को फैला भी शक्ति आपकी स्वयं की तैयारी पर ही प्रभावित रहे हैं. जब तक उस शैतान को तुम पूरी तरह से होती है। अगर आपकी तैयारी कम हो तो वह धिक्कार नहीं करोगे तब तक परमात्मा भी आपको शक्ति भी हल्का ही अपना जोर दिखायेगी अगर स्वीकार नहीं करेगा। इस मामले में अगर आधा अड आपकी तैयारी पूरी तरह से है और शैतान को पूरी पूरापन है आपके अन्दर, तो अपने ही साथ छल तरह से धिक्कारने की आपके अन्दर शक्ति है तो कपट कर रहे हैं । उसको आपको पूरी तरह से आप ही में से बड़े-बड़े सन्त और गुरुजन निकलने आपको धिक्कारना होगा उसको पूरी तरह से वाले हैं । एक बड़ी भारी पीढ़ी आज जन्म ले रही आपको छोड़ना होगा नहीं तो जो आपके अन्दर में है। पाँच साल के बच्चे से लेकर आज ऐसे नवोदित मिथ्या है वह आपके अन्दर में बैठा रहेगा जो सत्य बहुत बड़े-बड़े जीवों ने एकदम से संसार में जन्म आपके अन्दर है वह प्रकट नहीं होगा । जब तक ले लिया है जैसे कि ऊपर से कही से सारा उनका आपके अन्दर सत्य प्रकट नहीं होगा, संसार में भी पूरा तबका इकट्ठा ही उतर आया हो। बहुत से सत्य कैसे फैल सकता है। जैसे समझ लीजिए कि बच्चे, मैं देखती हूँ कि वह पार ही पैदा हुए हैं पर आधा अधूरापन छोड़ दीजिए छोटी-छोटी बातों सूर्य पर अगर बादल छा जाएं तो अन्धेरा आ जाता नीव के पत्थर तो आप ही हैं । सहज़योग के नीव है और अगर बादल हट जाएं तो सूर्य फिर से के पत्थर आप लोग हैं आपको मैंने पहले भी चमकने लग जाता है। इसी प्रकार मनुष्य ने ही अनेक बार बताया है कि जो लोग आज धर्म के झूठे

झगड़े खड़े किए हुए हैं, जो आपस में नफरत से आज्ञा चक्र पकड़ा हुआ है। सबके सब बताएंगे, एक एक दूसरे को देख रहे हैं और उसमें धर्म का नाम फर्क नहीं बताएगा, दूसरा फर्क नहीं बताएगा। जो इस्तेमाल कर रहे हैं, यह शैतान के बच्चे हैं, ये कोई भी इस हॉल के इस छत को देखेगा तो यह परमात्मा के भेजे हुए लोग नहीं हैं। परमात्मा ने बताएगा कि यह छत सफेद रंग का है दूसरा रंग कभी भी द्वेष व दुष्टता को मान्यता नहीं दी है। नहीं बता सकता है। जब आप हँसेंगे तो एक ही लेकिन उसका खण्डन किया है उसका संहार ढंग से हँसते हैं, जब आप रोएंगे तो आपकी आँख किया है। जो लोग अपने को बहुत छोटे दायरे में से ऑसू आएंगे और एक ही ढंग से आप रोएंगे। बाँधे हुए हैं कि हम फलाने हैं और ढ़िकाने हैं, वो उससे भी कितना अधिक धर्म का अपना स्वरूप है लोग अनन्त की गोद में नहीं जा सकते। जिसकी जो कि व्यापक है और सबके अन्दर एक है। उस कोई सीमा नहीं है वह असीम में बैठा हुआ है धर्म में झगड़ा होना सम्भव ही नहीं हो सकता, अपनी सीमाएं आपको तोड़नी पड़ेंगी जो आपने कलह होना सम्भव ही नहीं हो सकता। कलह जहाँ मूर्खता से बाँधीं हैं। कोई भी धर्म आपको सीमा में आया समझ लीजिए कि एक अधर्म दूसरे अधर्म से नहीं बाँधना चाहता है लेकिन जो मनुष्य ने मूर्खो लड़ रहा है धर्म कभी धर्म के साथ लड़ नहीं जैसे धर्म बनाए हैं उसका तो कोई इलाज ही नहीं सकता। जो आदमी अपने को धार्मिक कहकर के कर सकते। वास्तव में दो ही धर्म संसार में हैं- एक है धर्म भी धार्मिक लेकिन लड़ लें, वो धर्म को जानता नहीं। और दूसरा है अधर्म। तीसरा कोई धर्म है ही नहीं। सहजयोग में यह किस तरह से होता है, यह एक है धर्म जिसकी धारणा अन्दर होती है और समग्रता कैसे आती है ? कुण्डलिनी का उद्दीपन दूसरा है अधर्म जितने बड़े-बड़े गुरुजन हो गए हैं कैसे होता है ? आदि, सभी कुछ आपको पहले भी वह धर्म के लिए लड़े और उस बक्त जो अधर्म बताया है और फिर भी मैं आपको बताऊंगी किसी में थे उनसे लड़ते रहे – फिर उसका नाम आप और दूसरे को कहता है कि आप भी धार्मिक. हम वक्त। लेकिन यह तो देखने का मजा है जब आप मुसलमान कहिए, चाहे उनका नाम आप हिन्दु खुद ही इस शक्ति को पा लेते हैं जबकि पहली कहिए, चाहे उनका नाम आप Christian कहिए। शक्ति, जो कि आपके हृदय में है जिससे आपके लेकिन उनके जितने भी followers थे, अनुयायी प्राणं हैं, वह प्रेम हो जाती है. और जो आपके पेट थे उन लोगों में वो सत्यता नहीं थी उन्होंने अपने में धर्म है वह सारे संसार की जागृति हो जाती है । छोटे-छोटे group बना लिए और अधर्म के झगड़े और जो आपकी चेतना आपके सर में है वो सारे होने लगे। एक अधर्म से दूसरा अधर्म लड़ने लगा। संसार का ज्ञान हो जाता है। उसी वक्त आप जान धर्म में झगड़ी कोई नहीं होता है । धर्म में कलह सकते हैं कि यह कुण्डलिनी का उद्दीपन आपके नहीं होता है धर्म सब एक हैं। सबके अन्दर एक इन हाथों से कैसे हो रहा है। आप ही के इशारों से है। सबमें एक ही बैठता है । उसमें कोई argument कुण्डलिनी कैसे उठ रही है और आप ही के बंधनों नहीं होता है। जब आप लोग किसी की ओर हाथ में ये अधर्म कैसे चरमरा रहा है। और आप ही के करके खड़े होते हैं तो सभी बताएंगे कि माँ इस खींचे हुए तारों में यह किस तरह से मरा जा रहा आदमी से हमें यहाँ जलन आ रही है,माने उसका है। आप ही देख सकते हैं कि आप के जो दो चार

तीर कमान इस अधर्म को लग जाएं कि यह किस century से लेकर अभी तक पार हुए हैं और अभी तरह से अपना मार्ग छोड़ कर चला जाता है और कम से कम तीन चार century से तो कोई पार ही कुण्डलिनी अपने रास्ते पे अपने आप साफ-साफ नहीं हुआ है। और आप समझ सकते हैं कि यहाँ आ जाती है। किस प्रकार शरीर में छिपी हुई हजारों आदमी पार होते जा रहे हैं । बहुतों को हुआ व्याधियाँ एक दम से नष्ट होकर के कुण्डलिनी है, किसी-किसी को नहीं भी होता है । लेकिन हो सामने ऊपर एक गंगा जैसे भागीरथ ले आए थे, ही जाता है। आज तक ऐसा कोई नहीं है कि वह उसी तरह से उतरती चली आती है। गंगा को लाने आता रहे और उसको न हो। जो भी आया यहाँ के लिए भगीरथ ने अनेक प्रयत्न किए थे और इस बैठा उसने पाने का प्रयत्न किया, सब लोग पार हो कुण्डलिनी को लाने के लिए भी मैंने अनेक प्रयत्न गए। ऐसा हमें आज तक मालूम नहीं जो पार नहीं किए हुए हैं. पूर्व जन्म में भी और इस जन्म में भी। हुआ। लेकिन एक चीज जरूर तैयार करके आना लेकिन अब इसका फल आप लीजिए क्योंकि चाहिए कि शैतान को आपको जूते मारने पड़़ेंगे। आपके दरवाजे पे ही गंगा बह रही है। आपके शैतान को आपको पहचानना पड़ेगा. उसको आपको इशारे पर कुण्डलिनी चलेगी। आप रास्ते चलते हुए छुट्टी देनी पड़ेगी, उसको अपने हृदय से निकाल लोगों को जागृति दे सकते हैं। आपके हाथ से देना पड़ेगा। और कौन शैतान है और कौन परमात्मा अनेक cancer जैसे रोग ठीक हो जाते हैं यह है उसकी पहचान इन्हीं चैतन्य लहरियों से हो बात सही है और होनी ही चाहिए, होते ही है। यह सकती है। अगर आपके पास नहीं हैं तो जिनके सब कैसे हो रहा है ? उसका कारण यह है कि पास है उनकी बात सुनिए. जो इसको जानते हैं आप उस सर्वव्यापी परमात्मा के प्रेम की शक्ति के उनकी बात सुनिए। जिन्होंने इसको पड़ताला है. अंग हो गए हैं जो आप इस्तेमाल कर रहे हैं। उनकी बात सुनिए। इसी प्रकार आप जान सकेंगे आपके अन्दर से वही शक्ति प्रवाहित हो रही है कि कौन शैतान है और कौन धर्ममात्मा, कौन और आप उस शक्ति का कार्य कर रहे हैं। अब असली गुरु है और कौन नकली है। संसार में जैसे होते इसमें झगड़े का कौन सा सवाल उठता है ? क्या असली फूल होते हैं वैसे plastic के भी फूल मेरा यह हाथ इस हाथ से हर समय झगड़ा करता हैं। लेकिन उसकी पहचान आपके ऑँख से, नाक रहता है ? जिस दिन यह झगड़ा शुरू हो जाएगा से, मुँह से, हर एक चीज़ से हो सकती है कि यह तो हम यह कहेंगे कि यह हाथ इससे अलग हो plastic का फूल है या कि सच्ची फूल है । लेकिन गया, यह कोई हमारा हाथ नहीं है। इसी प्रकार धर्म को जानने के लिए सिर्फ vibrations चाहिएं। इस सर्वव्यापी शक्ति को हमारे अन्दर हम पा लेते उसके बगैर आप जान ही नहीं सकेंगे कि यह हैं तो हम सर्वशक्तिमान हो जाते हैं। बहुत से लोगों आदमी पाखण्डी है. कि झूठा है. कि अधर्मी है. यह को पहले भी यह शक्ति मिली है। बहुत कम लोगों राक्षस है। यह आदमी धर्मात्मा है और यह आदमी को कहना चाहिए, क्योंकि जब मैंने पढ़ा जेन को, जेन छठी शताब्दी में जापान में शुरु हुआ था, और बहुत बड़ी शक्ति है। जब तक आपके हाथ में उसमें भी यही कुण्डलिनी जागरण का कार्यक्रम vibrations नहीं आएंगे आप जान नहीं सकते। किया था निकिता माँ ने और कुल 26 आदमी छठी इसीलिए यह चीज सबसे पहले आपको पा लेना परमात्मा है, यह आदमी अवतार है। यह आदमी

चाहिए कि असली vibrations आपके हाथ से नहीं चल सकता, किसी भी तरह का झूठ नहीं चल ठंडे-ठंडे आने चाहिए जैसे कि कोई cooler से आ सकता इसमें। यह सच्चाई होनी चाहिए। आपको रहे हों, इस प्रकार आपके अन्दर से आने चाहिए। खुद अनुभव होना चाहिए। आपके अन्दर दिखाई इसके अलावा आपके विचार आपके काबू में आ देना चाहिए और आपके हाथ से इसका बहता हुआ जाते हैं, आप निर्विचार हो जाते हैं., और विचारों की प्रवाह से दूसरों को भी जागृत करना चाहिए। तभी ओर देखते हैं कि आप निर्विचार हो गए, कोई भी आप पार हुए हैं। हाँ मैं आपको धो पौंछ के साफ विचार नहीं आ रहा है यह असलियत है. यह कर दूंगी, आपको प्यार से साफ कर दूंगी, आपकी सत्य है। इसमें मैं कोई झूठा वादा नहीं कर कुण्डलिनी को समझा दूंगी, सब कुछ कर दूंगी, स कती। मे रे recommendation नहीं है। इसमें कोई झूठी दुनियाभर का पाखण्ड रचते हैं और दुनिया भर की बात नहीं हो सकती। जब तक आप पार नहीं होंगे चीजें करते हैं और बातें बनाते हैं। उसकी मुझे तब तक आप मेरे कुछ नहीं लगते चाहे मेरे कुछ भी परवाह नहीं है। लेकिन तुम लोग भी उसकी परवाह लगते हों। कोई कितना भी रुपया दे मैं पार नहीं न करो और अपना ही कल्याण साधो, अपना मंगल कर सकती चाहे आप कितने भी पढ़े लिखे हों मैं साधो। अपने को सत्य के रास्ते में रखो। चाहे दो पार नहीं कर सकती। आप घर में बैठिए। आप चार लोग कम हों या चाहे हज़ार लोग ज्यादा हों। तभी पार हो सकते हैं जब हो सकते हैं, जब हो गए इससे फर्क नहीं पड़ता । हम लोग अब ध्यान में हों। कोई भी हों आप, मैं मजबूर हूँ। मैं आपको जाएंगे सब लोग इस प्रकार हाथ रखें आँखें अभी ऐसा झूठा certificate नहीं दे सकती इसमें झूठ शुरु में बंद रखें झूठा लेकिन यह होना पड़ेगा। जिनके नहीं होता है वह का को ई