Spirits of the dead

मुंबई (भारत)

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[Hindi translation from English]

                                   “मृतात्माएं”

 बॉम्बे (इंडिया), 22 दिसंबर 1976

अब, एक आधुनिक व्यक्ति के लिए, सवाल यह होता है कि, यह विश्वास करना है या नहीं कि आत्माएं हैं या नहीं। क्योंकि यह एक बहुत ही अज्ञात क्षेत्र है। और जब तक और जहाँ तक यह पूरी तरह से खोज नहीं लिया जाता है और पता चलता है, अज्ञात क्षेत्र, हमेशा एक मतिभ्रम बनाता है कि यह कुछ दिव्य है। इसलिए हमें आत्माओं के बारे में भी जानना होगा: वे कौन हैं, वे कैसे कार्य करते हैं, और वे कैसे कार्यान्वित होते हैं। अब, कई कहेंगे कि “हम आत्माओं में विश्वास नहीं करते हैं।” चाहे आप इसे मानें या न मानें – लेकिन वे वहीं हैं। ईसा-मसीह, वह झूठे नहीं थे। उन्होंने आत्माओं को निकाल कर और उन्हें सुअर में डाल दिया। और यह वही व्यक्ति हैं जिन्होंने बहुत स्पष्ट रूप से कहा है कि “आत्माओं से दूर रहो।”आत्माएं स्थिति {अस्तित्व}हैं। यदि हम बनना चाहते हैं तो हम कल आत्मा हो सकते हैं। जब हम मरते हैं, तो हम पूरी तरह से नहीं मरते हैं। केवल स्थूल पृथ्वी  तत्व, या स्थूल जल तत्व जिसने हमें … प्रकट होने के लिए बनाया है, – वह हिस्सा केवल मर जाता है, बाकी सब बना रहता है। और यह एक ऐसे क्षेत्र में चला जाता है जिसे हम प्रेतलोक (मृतकों की दुनिया) कहते हैं, जहां यह भ्रूण के आकार में आने तक छोटा और छोटा होने लगता है, या, आप कह सकते हैं, बहुत छोटा भ्रूण।यह वहां इंतजार में होता है।

लेकिन कुछ लोग, जब वे मर जाते हैं, तो वे असंतुष्ट आत्मा होते हैं। संस्कृत में हम उन्हें अतृप्त आत्मा (असंतुष्ट आत्मा) कहते हैं। मतलब, जीवन में वे बहुत ज्यादा चीजों के पीछे भटके हुए हैं, और वे अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाए, और वे मर गए। उदाहरण के लिए, प्रसव पीड़ा के दौरान एक माँ की मृत्यु हो जाती है। उसका बच्चा पैदा हुआ है; वह बच्चे को देखती है और मर जाती है। वह उस बच्चे की देखभाल के लिए चिंतित है। एक पिता की अचानक दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है। उनके बच्चे पीछे रह गए हैं, और वह अपने बच्चों के बारे में चिंतित हैं, जिनकी वे देखभाल करते हैं। कुछ लोग हैं जो जीवन में बहुत महत्वाकांक्षी हैं – बहुत, बहुत महत्वाकांक्षी – और वे अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने से पहले मर जाते हैं। वे भी आत्मा बन जाते हैं। ऐसे लोग हैं जो अत्याचार और परेशानी झेले और मारे गए हैं। वे भी मर जाते हैं, और वे प्रेतलोक में नहीं रहना चाहते हैं, लेकिन वे उन लोगों को परेशान करना चाहते हैं जिन्होंने उन्हें परेशान किया है।

तो विभिन्न प्रकार के लोग हैं जो आत्मा बन जाते हैं। हम उन्हें दो प्रकारों में विभाजित कर सकते हैं। एक प्रकार वह है जो बहुत आक्रामक, महत्वाकांक्षी, अहंकारी, दमनकारी व्यक्ति है, जो मर जाता है और एक प्रेतात्मा बन जाता है। उस क्षेत्र को अधिचेतना क्षेत्र के रूप में जाना जाता है। इतने सारे गुरु और साधु (संन्यासी) जो संसार त्याग कर हिमालय जाते हैं, और अपनी गरदन तोड़ते हैं, और सभी प्रकार की उन्मत्त चीजें करते हैं, जिन्हें हम द्रविड़ प्राणायाम कहते हैं; (कार्यो को घुमावदार तरीके से करना जैसे की दाहिने हाथ को सिर के ऊपर लाकर नाक को पकड़ कर सांस को रोकना) – जब वे बिना आत्मसाक्षात्कार के मर जाते हैं, तो वे भी अवचेतन की बाजू में होते हैं। और वे मनुष्य के दायीं ओर बने रहते हैं। “मानव” क्योंकि मनुष्य एक प्रतिबिंब है या, हम कह सकते हैं, ब्रह्मांड का वही सूक्ष्म रूप है, जो विराट है। इसलिए वे विराट के दाहिनी ओर परिलक्षित होते हैं, और इसलिए हमें कहना चाहिए कि वे हमारे दाहिने ओर उपलब्ध हैं। बाईं ओर … दूसरे, हम कह सकते हैं कि वे … वे दबाए गए लोगों की श्रेणी के हैं, जो कुचले हुए हैं, जो प्रताड़ित हैं, जो सताए हुए ,परेशान हैं, जो निसहाय हैं, जो अपमानित हैं। ऐसे लोग, जब वे मर जाते हैं, तो वे अपने धूर्त तरीकों से अपना बदला लेना चाहते हैं। इसलिए वे विराट के बायीं ओर रहते हैं और इस प्रकार हम में भी सामूहिक अवचेतन में, जो बायीं ओर है,दिखाई देते हैं। मूल रूप से, ये उन दो प्रकार के लोग हैं जो आत्मा बन रहे हैं। लेकिन एक मिलाजुला भी हो सकता है, हर प्रकार की आत्माएं हो सकती है। अच्छी आत्माएं भी हो सकती हैं, अच्छे लोग, जो केवल अपने परिवार और उस जैसी चीजों की मदद करने की कोशिश कर रहे हैं।

ये आत्माएं प्रकट करने की कोशिश करती हैं। उदाहरण के लिए, अवचेतन प्रकार की आत्माएं। लंदन में एक डॉक्टर था, जिसकी मौत हो गई। उसका नाम डॉ। लैंग था। जब उनकी मृत्यु हुई,  उन्होंने बहुत सी चीजों की खोज की थी, और वह लंदन में अपनी प्रैक्टिस जारी रखना चाहते थे – और वह एक सर्जन थे – लेकिन वह ऐसा नहीं कर सके, क्योंकि उनकी अचानक मृत्यु हो गई। तो उसकी आत्मा एक सैनिक में घुस गई जो कि वियतनाम में रह रहा था … जो लड़ रहा था। और जब आत्मा ने उसके भीतर प्रवेश किया और उससे कहा कि, “मैं ऐसा और इस प्रकार का डॉक्टर हूँ, तो आप मेरे बेटे और मेरे भाई से मिलें और उन्हें बताएं कि मैं आपके भीतर हूँ,” सिपाही इस पर विश्वास नहीं कर सकता था, लेकिन फिर उसने कहा कि, “तुम मेरे साथ आओ, और मैं तुम्हें उस जगह पर ले जाऊंगा।” और वह उसे उस अस्पताल में ले गया जहाँ यह डॉक्टर काम करता था। अस्पताल बंद था, सर्जरी बंद थी, इसलिए वह सैनिक जाकर बेटे से मिला, और उसने उसे अपने शरीर में प्रवेश करने वाली इस आत्मा के बारे में बताया। बेटे को यकीन नहीं हो रहा था। तो उन्होंने कहा कि “मैं आपको अपने जीवन के उन सभी रहस्यों को बताऊंगा जो हमने एक साथ बिताए थे और जिसे कोई नहीं जानता है।” और जब उसने उसे ये सारी बातें बतानी शुरू कीं, तो वह चकित रह गया, उसने कहा, “ठीक है, मैं केंद्र खोलूँगा।” इसलिए उन्होंने लंदन में स्व. डॉ लैंग के इंटरनेशनल क्यूरेटिव सेंटर के नाम से एक  संगठन खोला,यह एक बहुत बड़ा-समाचार था ।

अब,  बहुत समय पहले, इस संगठन ने काम करना शुरू कर दिया था, मुझे लगता है, करीब ग्यारह या बारह साल पहले। दरअसल, मुझे इसके बारे में इसलिए पता चला क्योंकि कोई एक इन लोगों के इलाज से पीड़ित थी, वह मेरे पास आयी और उसने मुझे यह सब बताया, और उसने मुझे एक पुस्तिका दी, जिसमें उन्होंने डॉ लेंग के बारे में यह सारी कहानी लिखी थी। और वे क्या कहते थे – कि, “आपको अपनी बीमारी के बारे में हमें लिखना चाहिए चाहे वह कुछ भी हो। और जब आप हमें लिखेंगे, तो हम इसे इस तरह से व्यवस्थित करेंगे कि ऐसे समय में, ऐसे बिंदु पर, ऐसी जगह पर – जो भी जगह का आप सुझाव दे – आपको कुछ हो जाएगा: आप हिलना शुरू कर देंगे शरीर और आप उन आत्माओं को अपने अंदर प्राप्त करेंगे और आप ठीक हो जाएंगे। ” यह इस महिला के साथ हुआ, वह जो मेरे पास पहली बार आई थी जब उसने मुझे बताया था। फिर बाद में मैं उनमें से कई लोगों से मिली, यहां तक ​​कि इंग्लैंड में भी मैं उनमें से कुछ से मिली।

तो,आप देखिये, जब वह मेरे पास आई …, उसकी परेशानी क्या थी … उसने कहा कि, “मुझे थोड़ी परेशानी थी।” मुझे लगता है कि उसे कुछ मामूली परेशानी थी, जो ठीक हो गई थी लेकिन एक तरह से .उसके लिए बहुत असुविधाजनक बात थी – .. यह एक उपद्रव था, परेशानी थी। वह निश्चित रूप से ठीक हो गयी थी। लेकिन उसके बाद, आप देखिये,पाँच, छह साल बाद उसका पूरा शरीर हिलता हुआ रहता था । उसकी घबराहट इतनी थी कि वह मुझे देख नहीं सकती थी। जब वह मेरे सामने बैठी, उसने हिलना शुरू कर दिया, उसके हाथ कांपने लगे, शरीर कांपने लगा जैसे कोई पागल  मेरे सामने होगा। तो मैंने उससे कहा, “देखिए, यह सज्जन पागल-खाने से आए हैं, और वे उसी तरह व्यवहार कर रहे हैं जैसे आप व्यवहार कर रही हैं।” वह बोली, “मुझे पता है। क्योंकि मुझे यहाँ दर्द है, मुझे यहाँ एक समस्या है … और मुझे पता है कि वहाँ कुछ गड़बड़ है। मैं ठीक से सोच नहीं पा रही हूँ, और मुझे कुछ भी याद नहीं है। मैं एक खोई हुई आत्मा हूँ, और मुझे पता है कि मेरे साथ क्या हुआ है। अब आप इसके बारे में क्या कर सकती हैं? “

बेशक, मैंने तब उसे ठीक किया, इसमें कोई शक नहीं। क्योंकि सहज योग में आप कर सकते हैं – प्यार के चैतन्य के माध्यम से, यह दिव्य प्रेम जो मैंने कल आपको बताया था – आप उन आत्माओं को एक बंधन दे सकते हैं। उस बंधन के द्वारा, आप उस आत्मा को प्रेतलोक में डाल सकते हैं, और वे गायब हो जाते हैं।

लेकिन इनमें से कुछ को इन महत्वाकांक्षी तथाकथित गुरुओं द्वारा नियंत्रित किया जाता है। अब, ये तथाकथित गुरु जिन्हें आप जानते हैं – तथाकथित, वे स्वयं को गुरु कहते हैं – वे क्या करते हैं? वे जाते हैं … आप देखते हैं, अगर वे कोई मृत बुरी प्रतिभा को जानते हैं  – वे जानते हैं कि वह एक दुष्ट प्रतिभा है – फिर वे उसके शरीर का पीछा करते हैं, वे एक श्मशान पर जाते हैं, वे उसके शरीर के एक हिस्से को पाने की कोशिश करते हैं, और वे इसे अपने पास रखते हैं। अब, आत्मा, तेरह दिनों तक, शरीर के चारों ओर घूमती है, और यह देखना शुरू कर देती है कि शरीर क्या कर रहा है। इसलिए, जब आत्मा -[ जिसे बाद में फिर से अपने शरीर में बनना है] देखता है कि उसके शरीर का अपना हिस्सा है – इन लोगों के माध्यम से गायब है और वे कुछ कर रहे होंगे, इसलिए यह उनके सामने आता है, और वे लोग उससे बात करना जानते हैं। बात करना आसान है। यहां तक ​​कि साधारण आत्मा वाले व्यक्ति, अगर वह यहां आते हैं, तो मैं उनसे बात करवा सकती हूं, और वे काफी बात करते हैं, सभी प्रकार की बकवास करते हैं, और वे इन लोगों के बारे में भी बताते हैं कि ये लोग क्या कर रहे हैं। तो, उस आत्मा को, आप जानते हैं, इन लोगों द्वारा कब्जा कर लिया जाता है, और वे इन अवचेतन आत्माओं का उपयोग करना शुरू कर देते हैं। ये लोग कुटिल और बहुत बुद्धिमान लोग होते हैं, वे उन लोगों के हाथों में खेलने लगते हैं।

अब, इन आत्माओं को कुछ नाम दिए गए हैं। जैसे, वे उन्हें राम, कृष्ण कह सकते हैं … कुछ लोग ऍम कहते हैं, कुछ ह्रीम कहते हैं, कुछ क्लीम कहते हैं – सभी देवी के नाम, आप देखिये। वे यीशु का नाम या ऐसा कुछ भी दे सकते हैं। तो, क्या होता है – कि, जब … जब आप इन गुरुओं के पास जाते हैं, तब, जब आप उनसे पूछते हैं, तो वे कहते हैं, “हम आपको एक मंत्र देंगे।” अब, आपको लगता है कि मंत्र देना बहुत बड़ी बात है। आप देखिए, इतने लोग आएंगे और मुझे बताएंगे – मराठी में भी, महाराष्ट्रीयन इस में विशेष हैं – कि “माताजी, मुझे गुरु मंत्र (किसी गुरु ने मुझे मंत्र दिया)।” आखिरकार, एक मंत्र दिया जा सकता है … कहते हैं, क्या मंत्र “राम” (क्या होगा यदि मंत्र “राम” दिया जाता है)? आपको यह बताने के लिए गुरु की आवश्यकता क्यों है? अपने दिमाग का उपयोग करें! अब, वे कहते रहते हैं, ‘राम’ और यह साथी उन्हें पहले ही राम से जोड़ चुके हैं, जिन्हें उन्होंने इस साथी में प्रवेश करने के लिए नियुक्त किया है। तो राम इस व्यक्ति के मानस में प्रवेश कर जाते हैं। ज्यादातर ऐसा इस आज्ञा चक्र के माध्यम से होता है, जो मैंने आपको बताया था। कल मैंने पूरी कुंडलिनी और उसके स्थानों और सब कुछ का वर्णन किया। तो यह इस माध्यम से मानस में प्रवेश करता है।

जब यह मानस में दाहिने हाथ की तरफ प्रवेश करता है, तो आप देखते हैं, अहंकार की तरफ यह प्रवेश करता है, और यह आदमी को बहुत अहंकारी बनाने लगता है। वह अपनी पत्नी को पीटता है, वह अपने बच्चों को पीटता है, वह दौड़ता है और प्रलाप या निंदा करता है |दिखावा करने की कोशिश करता है। कभी-कभी ऐसे व्यक्ति को पदोन्नति मिल सकती है, और वह इतना गतिशील हो जाएगा, वह कहेगा … लोग कहेंगे, “ओह, उसके साथ क्या हुआ है?” इस प्रकार और … जैसा कि, आप देख पायेंगे, उसका चित्त, जो … अन्य चीजों को करने में रहता था, को बहुत महत्वाकांक्षी कार्य शैली में बदल दिया जाएगा। अब, वह बहुत महत्वाकांक्षी हो जाता है, लेकिन उसके पास कोई धर्म नहीं है, उसमें कोई प्यार नहीं है, कोई दया नहीं है, लेकिन वह एक बहुत ही सफल व्यक्ति बन जाता है। कुछ सीमित समय के लिए। लेकिन बाद में … मैं दिल्ली में भी उन जैसे कई लोगों से मिली, जो लोग, जो इन स्वामियों और साधुओं को बहुत सारा पैसा देकर “दीक्षित ”  हुए है – और मेरे सामने वे बस इस तरह से काँप रहे थे। और उन्होंने कहा, “माताजी, हम आपके सामने इतना अधिक काँप रहे हैं, लेकिन अगर हम भगवान विराट के नाम पर  उद्बती भी जला कर ले जाते हैं, तो हम एक मंदिर, एक चर्च के पास भी नहीं जा सकते। अगर हम ईश्वर की किसी भी चीज़ को देखते हैं, तो हम इस तरह झनझनाना शुरू कर देते हैं।” और वे सभी अपनी नौकरी से इस्तीफा दे चुके हैं और बेकार लोगों के रूप में बसे हुए हैं। पांच, छह साल के दौरान उनके साथ ऐसा हुआ है। युवा लोग, बहुत युवा। सिंगापुर [नहीं कुआलालंपुर में] मैं एक व्यक्ति से मिली – आपको विश्वास नहीं होगा कि वह केवल बाईस साल का है, और अब वह भी ऐसा ही है। और यह अवचेतन शैली है – वे इसे भावातीत विचार कहते हैं। यह वह सम्मोहन है जिसका वे उपयोग करते हैं।

तो, बस आपको एक नाम देकर – आपको भी सोचना चाहिए! आखिर, आप अपने भगवान, सर्वशक्तिमान को इस तरह पुकार नहीं सकते। सिर्फ एक नाम से ?! आप  कैसे उन्हें इस तरह बुला सकते हैं! क्या वह आपके नौकर है? “राम गारी (साथी, आदमी, नौकर), साथ आओ।” क्या आप उन्हें इस तरह बुला सकते हैं? “तुम मेरा काम कर दो, आप मेरे पिता की देखभाल करो, आप मेरी माँ की देखभाल करो।” तुम कौन हो? क्या आप उस तरह से पुकारने के हकदार हैं? और क्या आप उसे बस ऐसे ही कह सकते हैं कि “आपको करना होगा … आपको हर उस चीज़ की बेहतर देखभाल करनी चाहिए जो मैं आपको कहता हूं, अन्यथा मैं आपको छोड़ दूंगा। मुझे आप पर कोई भरोसा नहीं है। ” अपने अहंकार में पड़ा व्यक्ति इस गलत ढंग से बातों को सोचने लगता है। आपको भगवान के सामने समर्पण करना होगा। आपको उनके साथ एकाकार बनना है, आपको अधिकृत होना है। तभी केवल आप उनसे मदद मांग सकते हैं।

एक और अवचेतन प्रकार के लोग दुसरे प्रकार के हैं … वे इस तरह से काम करते हैं कि, आप देखते हैं, ये लोग हठ योगी हैं – तथाकथित हठ योगी, क्योंकि मैं उन्हें नये-हठ योगी कहती हूं। वे असली हठ योगी नहीं हैं। असली हठ योगी कभी भी मानव के साथ नहीं रहते …  … जिन्हें आप सामान्य मानव कहते हैं … किसी शहर या गाँव के नागरिक। वे गुरुओं के साथ जंगल में रहते हैं। पतंजलि शास्त्र में, जो हठ योग के मूल लेखक हैं, उन्होंने बताया है कि हठ योग करने के लिए छह चीजें करना होती हैं। उसे एक गुरु के साथ जंगल में रहना पड़ता है, जो एक आत्मसाक्षात्कारी आत्मा है, और उसे विवाहित जीवन जीने की आवश्यकता नहीं है, उसे ब्रह्मचर्य, ब्रह्मचर्य का पालन करना होगा। और उसे एक साथ छह काम करने होंगे। उस में, वहाँ ध्यान है, प्राण प्रतिष्ठा (सांस को शांत करना), प्रत्याहार (इंद्रियों को वापस लेना), यम-नियम (“करने योग्य ,न करने योग्य बातों के नियम “) … इन सभी बातों का मतलब है कि उसे अपने जीवन को नियमबद्ध करना है, उसे बहुत शुद्ध और पवित्र जीवन व्यतीत करना है। यह उन लोगों के लिए नहीं है जो गृहस्थ हैं।

यहाँ अब, फैशन के लिए,  सभी लोगों के लिए हठ योग आया है, और सभी हठ योगियों को ऐसे दिल के दौरे पड़ते हैं। हाँ, उन्हें होते हैं। मैं यहाँ एक डॉक्टर से मिली – आप उसे बहुत अच्छी तरह से जान रहे होंगे, वह एक बहुत ही प्रसिद्ध डॉक्टर था – और वह हठ योग का प्रचार कर रहा था, और उसे दिल की बीमारी थी। और वह दिल के विशेषज्ञ थे! और जब मैं उनसे मिली, मैंने उनसे कहा, “डॉक्टर, अपने दिल के बारे में सावधान रहें। आपके हृदय चक्र पर पकड़  हैं। ” उन्होंने कहा, “यह कैसे हो सकता है? मैंने अपना कार्डियोग्राम लिया है! ” मैंने कहा, “डॉक्टर, सावधान रहो और यह हठ योग मत करो।” क्योंकि यह एक चरम प्रकार की साधना (आध्यात्मिक साधना) है, जिसे किसी ऐसे व्यक्ति के सानिध्य में किया जाता है जो आपको संतुलित कर सके, जहाँ अन्य कोई ऊर्जा समाप्त नहीं हो जाती हो, लेकिन केवल एक बात है, यह सिर्फ साधना के लिए किया जाता है, और आपका गुरु यह कार्यान्वित करते है। यह बहुत कम लोगों द्वारा किया जाता है।

लेकिन आजकल हर कोई सिनेमा अभिनेता और सिनेमा अभिनेत्री बनना चाहता है। हर लड़की चाहती है कि निश्चित सौष्ठव हो जो सौन्दर्य प्रतियोगिताओं में वर्णित हैं। मैं आपको बताती हूं, ये अनुपात बिल्कुल शैतानी हैं। मैंने उन अनुपातों को पढ़ा है – वे देवी-देवताओं के अनुपात नहीं हैं। इन सौंदर्य प्रतियोगिताओं में जिन अनुपातों का वर्णन किया गया है, वे बिल्कुल गंदी महिलाओं के हैं। यदि ये अनुपात, किसी भी मनुष्य में मौजूद हैं, केवल खराब चैतन्य ही सामने आएंगे। ऐसा क्यों, आपने देखा होगा, एक बार जब वे उस परीक्षा को जीत लेते हैं, तो आपने देखा होगा कि वे कैसे अजीबोगरीब बन जाते हैं।

ये सभी मानवीय अवधारणाएँ हैं, लेकिन सभी मानवीय अवधारणाएँ ऐसी मूर्खतापूर्ण बातें हैं, जो यह नहीं जानते हैं कि वे शैतानी ताकतों के हाथों में खेल रहे हैं। सिनेमा अभिनेत्रियों के बारे में विचार, आप देखते हैं – सभी महिलाएं, इन दिनों, यहां तक ​​कि लंदन में, यहां तक ​​कि नब्बे वर्षीय महिलाएं भी अभिनेत्री बनना चाहती हैं। क्या वे पागल हैं? वे मां नहीं बनना चाहतीं। और फिर वे सभी तरह के परहेज़ करेंगे, अपने पति को प्रताड़ित करेंगे, और वे करेंगे … मुझे नहीं पता कि वे क्या करना चाह रही हैं। आपको अच्छी पत्नी, सभ्य पत्नियाँ बनना होगा। आपको सबसे पहले अच्छी माँ बनना है। आप विवाहित महिला हैं, आप अभिनेत्री नहीं हैं। और  मुझे नहीं पता,पति भी अभिनेता या और क्या?बनना चाहते हैं, जो कि वे हठ योग में हैं। वे अपने शरीर को उन वर्णित मापदंडों से बहुत परिपूर्ण बनाना चाहते हैं। किसने कहा है कि ये मापदंड सबसे अच्छे हैं? मेरा मतलब है, इन दिनों, जब आप इसे देखते हैं, तो पुरुष, वे पुरुषों की तरह नहीं दिखते हैं, और महिलाएं महिलाओं की तरह नहीं दिखती हैं। महिलाओं ने पुरुषों की तरह या घोड़ों की तरह दिखाई देना शुरू कर दिया है, और पुरुषों ने महिलाओं की तरह दिखना शुरू कर दिया है। यह एक मनहूस प्रणाली है] हमें पूरे तरीके से महिलाएं बनना है, और पुरुषों को पूरे तरीके से पुरुष बनना है। आपने शिवाजी, राणा प्रताप (महान भारतीय योद्धा राजाओं) के बारे में सुना है … आपने उनके व्यक्तित्व को देखा है। आप देखिए, इन  नन्हे-मुन्ने “अभिनेताओं” और “अभिनेत्रियों”, को देखने पर इन सभी विभूतियों की महिमा बहुत भारी पड़ेगी: किसी ने चेहरे पर एक बार थप्पड़ मार दिया, तो पति नीचे गिर कर मर जाता है, और पत्नी एक अन्य आदमी के साथ भाग जाती है  – इस घोर (भयानक) कलियुग में सभी तरह की चीजें चल रही हैं। यह आप केवल शैतानी ताकतों के हाथ में खेल रहे हैं। और कुछ नहीं। लेकिन, मैं तुमसे कहती हूं, ये अवचेतन लोग तुम्हें ये सब सिखा रहे हैं।

फिर यहाँ चरम प्रकृति के लोग हैं, विशेष रूप से जो पतिव्रता महिलाएं हैं (पति के लिए समर्पित हैं), आप देखते हैं। वे भी निरर्थक हैं। क्योंकि, आप देखते हैं, उन्हें लगता है कि वे अपने पति से प्यार करती हैं, इसलिए सभी  देवताओं को उन पर कृपावंत होना चाहिए। बेशक, एक पतिव्रता एक बहुत शक्तिशाली व्यक्तित्व है। लेकिन उसे एक आत्मसाक्षात्कारी होना चाहिए। अन्यथा, वह आत्मसाक्षात्कारी नहीं है, और वह हर समय पति के माथे फंदा [बंधन]बना रही है, – और इसके लिए भगवान का उपयोग कर रही है। बेतुका है! उसे आदमी को सभी स्वतंत्रता देनी चाहिए ताकि,वह जीवन के पुरे खेल को समझे। आप देखिये,ये महिलाएं यहाँ तक की, जब वे मर जाती हैं तो, वे डरती हैं कि उनके पति किसी और से शादी कर सकते हैं या ऐसा ही कुछ । वे केवल पति के सिर पर बैठती हैं

तब माताएँ, कुछ माताएँ जो इतनी लिप्त, स्वार्थी और आत्म-केन्द्रित होती हैं, केवल अपने ही बच्चों से प्रेम करती हैं। वे कहेंगी: “वह मेरे इकलौते बेटे हैं,” “वह मेरी एकमात्र बेटी है।” लेकिन इसका क्या मतलब है? आप क्यों इतनी गलत पहचान रखते हैं? इस दुनिया में आपका जन्म कितनी बार हुआ है? आपके पहले कितने बच्चे हैं? आप इसमें बहुत अधिक शामिल हैं, इतना गलत आधार क्यों है? इसका यह मतलब नहीं है कि आप अपने बच्चों को लात मारें। या तो वे अपने बच्चों को मारेंगे या वे बच्चों द्वारा पूरी तरह से अपमानित होंगे। यह चरम प्रकार का स्वभाव है।

सामान्य लोग, जो अपने बच्चों से प्यार करते हैं, अन्य बच्चों से भी प्यार करते हैं, सामान्य तरीके से जीते हैं, सामान्य, पवित्र विवाहित जीवन जीते हैं, अन्य पुरुषों के पीछे नहीं भागते हैं और अन्य महिलाओं के पीछे नहीं भागते हैं – ये सामान्य लोग, जब वे मरते हैं, तो वे प्रेतलोक में जाते हैं, और फिर वे अच्छे लोगों के रूप में फिर से पैदा होते हैं, और वे, अगर वे आजकल पैदा होते हैं, तो उन्हें आत्मसाक्षात्कार होता है।

यहाँ विभिन्न प्रकार के लोग हैं। मैं इन सभी डरावने लोगों का वर्णन करने में आपका समय और अपना समय बर्बाद नहीं करना चाहती।

लेकिन दूसरी तरफ, बायीं ओर, आधारहीन और धूर्त और भयावह और हत्यारे वगैरहा – वे सभी वहां मौजूद हैं। ओह, ये एक और प्रकार हैं। अब, ये लोग क्या करने की कोशिश करते हैं? आप देखते हैं, कभी-कभी वे कुछ धूर्त चीजें करेंगे। लेकिन जब ये भ्रष्टाचारी लोग आपके मानस में प्रवेश करते हैं, तो आप पागल हो जाते हैं, या कुछ होता है। वे आपको हर तरह की चीजें सिखाते हैं। वे आपको हर चीज़ सिखाएंगे कि कैसे पीना है, ड्रग्स लेना है, इस तरह की चीजों को करना है; या यदि आप शराब पी रहे हैं, तो वे आप में प्रवेश करेंगे। क्योंकि वे शराबी हैं, इसलिए वे अधिक पीना चाहते हैं – इसलिए वे इस तरह पी लेंगे। आप आश्चर्यचकित होंगे, आप विश्वास नहीं कर पायेंगे कि क्यूबा में मैं एक महिला से मिली थी, वह बहुत प्यारी-प्यारी थी और उसने मुझसे कहा कि वह एक व्हिस्की बिना कुछ मिलाये, एक पूरी बोतल ले सकती है। मेरा मतलब है, मैं उस बोतल को देख भी नही सकती जिस तरह उसने मुझे दिखाया था। मैंने कहा, “आप इसे कैसे सहन करती हैं?” और उसके पति ने कहा, “वास्तव में, यह सच है, कभी-कभी वह ऐसा करती है।” तो वह बोली, “क्या आप जानती हैं, एक बहुत बड़ा, विशाल नीग्रो है, जो मेरे शरीर में प्रवेश करता है। और फिर वह पीता है, मैं नहीं। ” वह उसे इस शरीर के अंदर आते हुए देखती है। तो इस प्रकार के लोग दूसरी तरफ हैं, बायीं ओर।

अब, उनमें से कुछ, मिलेजुले प्रकार के भी हैं । आप देखें, वे लोग हैं जो भगवान में विश्वास करते हैं, और उन्होंने भगवान को नहीं पाया है, और उन्होंने बहुत मेहनत की है … इस तरह के लोग। इसलिए वे आपको थोडा, कभी-कभी, आश्वासन देने की कोशिश करते हैं। उदाहरण के लिए, कल एक महिला आई, और उसने मुझसे कहा, “माताजी, अचानक मैंने पाया कि मेरे घर में कुछ चना (छोले) पड़े हुए थे। मुझे लगा कि वे माताजी द्वारा दिए गए होंगे, इसलिए मैंने उन्हें खा लिया, और मैं ठीक हो गया। ” मैंने कहा, “क्या मैं  पागल हूं जो आपको चना और हीरे, यह और वह दूँ ?”

और कुछ गुरु ऐसे भी हैं जो तथाकथित भौतिकता से काम कर रहे हैं। यह कुछ भी नहीं है, आप देखिए। कभी-कभी, आप देखते हैं, आप पाते हैं, बॉम्बे में … अब, आप पाते हैं कि अचानक आपका कुछ गायब है। अधिकांश गायब चीजें आपको वहां मिलेंगी। और ये ऐसी चीजें हैं जो वे इस तरह जादू से लोगों को दे रहे हैं – साथ आओ! ऐसा  है … यह एक पारदर्शी भुत है। यह अपारदर्शी नहीं है, आप इसे देख नहीं सकते। तो, यह आता है, जो मर्जी हो कुछ भी उठाता है, और यह चला जाता है। और यह बस गायब हो जाता है। और यह चला जाता है, और यह वहां कुछ लोगों को दे भी सकता है। और यह सभी भुत विद्या है।

अब, आपको कैसे पता चलेगा कि यह भुत है और भगवान नहीं है? केवल एक प्रश्न पूछें: ईश्वर की हमें इन सभी निरर्थक चीजों को देने में क्या रुचि है जो हम बस यहीं छोड़ जाएंगे? जब हम मर जाते हैं, हमारे सारे हीरे, हमारे सारे गहने – सब कुछ यहीं पड़ा रहेगा। तो भगवान हमें ये चीजें क्यों दें? क्या वह पागल है? आप देखें, यदि वह आपसे प्यार करते है, तो वह आपको सबसे अधिक, शाश्वत, सबसे बड़ा, वह देगे जिसका सभी धर्मग्रंथों में वादा किया गया है। और तुम सारे शास्त्र पढ़ते हो। क्या आपको कहीं भी इस तरह की बकवास लगती है कि कृष्ण आए और उन्होंने कुछ छल्ले निकाले और किसी को दिए? उन्होंने ऐसा नहीं किया। मेरा मतलब है, यह उनके द्वारा किया जा सकता है। अगर वह करना चाहें, तो वह कुछ भी कर सकते है, लेकिन वह चीजों को चोरी नहीं करने वाले है।

तो इस तरह की अवचेतन आत्माएं और ये चीजें मौजूद हैं, मेरा विश्वास करो, वे करते हैं। लेकिन हमारे लिए कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं है, क्योंकि एक भविष्य में मौजूद है और दूसरा अतीत में मौजूद है। हमें वर्तमान, वर्तमान क्षण के प्रति सचेत रहना होगा – और यही सहज योग है। कि अब, इस समय; आपको इस पल की गतिशीलता को समझना चाहिए, इस पल की सहजता। तो अब लोग कहेंगे, “तो इसका मतलब है, माताजी, आप योजना बनाने में विश्वास नहीं करते हैं।” मैं नहीं करती। मैं मानव द्वारा नियोजन में बिल्कुल विश्वास नहीं करती। क्योंकि जब मनुष्य योजना बनाते हैं, तो आप जानते हैं कि वे क्या गडबडी पैदा करते हैं। पूरी दुनिया में हर जगह, जहां भी योजनाकार रहे हैं, क्या किया गया है? मैं आपको एक सरल उदाहरण दूंगी। आप एक शादी की योजना बनाते हैं, ए से जेड। अब, आप  अचानक, पाएंगे, जब दूल्हा को इस जगह से उस जगह पर आना पड़ता है, तो कुछ होगा और वह आगे नहीं बढ़ेगा। उसे बाथरूम जाना पड़ सकता है; शायद वह अपनी माँ से मिलना चाहता है, वह भावनात्मक रूप से बंध जाएगा; हो सकता है कि उसकी माँ वहाँ आए, और वह रोना शुरू कर सकती है … यदि आप इसे एक जीवंत विवाह बनाना चाहते हैं, तो आपको इस तरह की योजना नहीं बनानी चाहिए। आपको सहजता, ईश्वर के आशीर्वाद को काम करने देना चाहिए। एक ढंग से… मैं आपको एक उदाहरण दूंगी। आप देखते हैं, मैं बहुत योजना नहीं बनाती हूं, और इस योजना बनाने  के बारे में इतना परेशान नहीं करती हूं। आज हम यहां बहुत पहले आना चाहते थे। इन लोगों ने कहा कि हमें साढ़े छ बजे वहां पहुंचना चाहिए। मैं बस हंस रही था। मुझे पता था कि जब मुझे पहुंचना होगा तो मैं पहुंचूंगी, क्योंकि वे जो भी कोशिश करें, हम जल्दी नहीं पहुंच सकते। (अस्पष्ट)? और बस मैं नहीं पहुंच सकी । तो चिंता क्यों? क्योंकि मुझे पता है कि हम जल्दी पहुंचने वाले नहीं हैं। बेशक, मेरा मतलब है, आज, यह मान कर की, कि कल मुझे जाना है, इसलिए आज मुझे कल के लिए बस टिकट खरीदना होगा। यहाँ तक सब ठीक है, कोई योजना नहीं है। यह तो आज करना है। लेकिन ए टू जेड आप हर चीज़ की योजना बनाना शुरू करते हैं, और अचानक आपको पता चलता है कि यह गायब है और पूरी बात बंद हो गई। कम से कम मानवीय संबंधों में सहजता को करने दो – क्योंकि आप ऐसे योजनाकार हैं, आप सब कुछ नहीं कर सकते – लेकिन मानवीय संबंध, कम से कम, सहजता को काम करने देने की कोशिश करें।

अब, पश्चिमी देशों में, लोग सहजता के मूल्य को समझ रहे हैं, लेकिन वे मूर्ख लोग हैं, वे यह नहीं जानते कि इसका उपयोग कैसे किया जाए। मैं आपको यह भी नहीं बता सकती कि वे किस मूर्खता पर चलते हैं। अगर मैं आपको बताऊं, तो आप विश्वास नहीं करेंगे। अभी यहाँ छोटे बच्चे हैं, नहीं तो मैंने आपको अभी बताया होता । यह मानना ​​असंभव है कि वे इतने मूर्ख हैं कि वे सहजता में विश्वास करते हैं पर उन्होंने किस तरह की सहजता अपनाई है। सभी विकासशील देश अब विकसित देश बनने के लिए विकसित हो रहे हैं, लेकिन हमें यह भी देखना चाहिए की ये विकसित देश किस संकट में हैं। वे मूर्ख लोग हैं। जहां तक ​​उनके कामकाज का सवाल है, वे सभी सही हैं – वे सभी समय में हैं, उनकी चीजें सभी साफ, सुथरी व्यवस्थित हैं। लेकिन अगर आप देखें, तो उनके परिवार टूट गए हैं। इस हद तक मूर्खता – एक नब्बे साल की महिला का उन्नीस साल के व्यक्ति के साथ प्रेम संबंध है, और सामने वाले पृष्ठ पर उनके प्रेम पत्र छापे गए हैं। आपको हर अखबार में पढ़ना होगा, जो कि पहली ब्रेक की खबर है, और सभी लोग इस “महान” रोमियो-जूलियट पढ़ रहे हैं। मूर्ख, बिलकुल मूर्ख! जब आप उनसे बात करते हैं, तो आप पाते हैं कि वे ऐसे मूर्ख लोग हैं! आपको नहीं पता कि कहां देखना है और क्या कहना है। आपको अंदाजा नहीं है कि वे किस हद तक मूर्खता में गए हैं। बेशक, उनके पास कैडिलैक है, और उनके पास बड़ी कारें हैं, और उनके पास बड़े घर हैं। लेकिन कभी-कभी मुझे लगता है कि इन सुंदर घरों के अंदर रहने वाले गधे हैं। कुछ मामलों में वे बिल्कुल मूर्ख हैं। कुछ मामलों में, बिल्कुल, हम धूर्त हैं। वे निर्दोष हैं, सरल हैं, लेकिन वे मूर्ख लोग हैं। हम कुटिल हैं। अब, मैं उस बिंदु को बाद में स्पर्श करूंगी।

तो, आइए अब हम देखें कि ये दोनों प्रकार की आत्माएं हमारे मानस में कैसे प्रवेश करती हैं। वे इसके माध्यम से प्रवेश कर सकते हैं, वे इस चीज़ को घुमा देते हैं। वे इस हिस्से को मोड़ कर और अंदर डालते हैं। अब, उस आत्मा के साथ क्या होता है? कुछ ऐसे भी हैं – जैसे तब वहाँ रावण था, जो केवल भाषण से वह लोगों को नग्न कर सकता था, बिल्कुल। हमें भी यहां एक मिला है, बिल्कुल उसी प्रकार का। अगर वह भाषण देने जाते हैं, तो लोग अपने कपड़े निकालने लगते हैं। अब, जरा सोचें कि हम कितने मूर्ख हैं जो यह नहीं सोचते हैं: “कपड़े उतारकर, क्या हम ईश्वर के निकट जाने वाले हैं?” मेरा मतलब है, यह किस प्रकार का तर्क है? जब हम नहाते हैं तो हम सब नग्न होते हैं। क्या इस के द्वारा हम परमेश्वर के निकट जाते हैं? सभी तरह की बेतुकी बातें सिखाई जा रही हैं, और लोग स्वीकार कर रहे हैं। हजारो लोग! आपके महान बंबई में, बहुत सारे बुद्धिजीवी हैं, क्या वहाँ नहीं है? ऐसी मूर्खतापूर्ण, बेवकूफी भरी बातें करते।

तब आपको बहुत -बहुत सारे लोग मिलेंगे … संगठित। किस लिए? “ओह, कोई  सज्जन आए हैं, आप जानते हैं, और वह इस विषय पर बहुत अच्छी तरह से बोलते हैं। और वह इस विषय पर बहुत अच्छा है, वह एक बहुत अच्छा वक्ता है। – “वह क्या बोलता है?” – “वह बोलता है कि राधा और कृष्ण एक दूसरे से कैसे प्यार करते थे।” बहुत अच्छा विचार। आप नि: शुल्क कैबरे कर सकते हैं, और आप परमात्मा का अवमूल्यन करते हुए उन्मुक्त निरर्थक बातें कर सकते हैं। ये सभी चीजें इंसानों के लिए इतनी दिलचस्प हैं! क्या वे वास्तव में सच की तलाश कर रहे हैं? क्या वे सच  में वास्तविकता पूछ रहे हैं? वे कभी शंकराचार्य नहीं पढ़ेंगे। कल मैंने तुमसे कहा था। वे कभी जा कर और यह पता नही लगाएंगे कि मार्कंडेय ने क्या लिखा था, उनके पास यह जानने का समय नहीं है कि यीशु का इस बारे में क्या कहना है। वे नहीं जानते कि मोहम्मद साहब ने क्या कहा है। नानक ने इतनी बातें कही हैं, कबीरा ने इतनी बातें कही हैं। वे सभी मूर्ख हैं।

ये बुरे चल-चलन वाले कहीं से हमें उन सभी शैतानी तरीकों के बारे में सिखाने के लिए आए हैं जो वे हम पर लागू करना चाहते हैं। तो खबरदार। सावधान रहे। यह घोर कलियुग है। ये सभी शैतानी ताकतें कार्यरत हैं। कृष्ण ने कहा है कि “जब भी धर्म को स्थापित करने और दुशासनों (बुरे लोगों) को मारने और साधुओं (अच्छे लोगों) को बचाने की आवश्यकता है, मैं बार-बार जन्म लेता हूं।” लेकिन, मुझे लगता है, कौन साधु है और कौन दुष्ट? यह एक ऐसा घालमेल है! शैतान ने सभी साधुओं में प्रवेश किया है, और साधु बिल्कुल संघर्षरत हैं। यही कलियुग है। यह एक बहुत ही नाजुक मामला है।

इसलिए, हमारे अपने अस्तित्व में, जैसा कि मैंने कहा था, दाहिने-हाथ की तरफ, अवचेतन क्षेत्र है, और बाईं ओर के बाजु को हम सामूहिक अचेतन कहते हैं। अपने स्वयं के अस्तित्व में बाईं ओर अचेतन है, जिसे हम मानस भाग के रूप में कहते हैं, जहां हम इस जीवन और पिछले जीवन के जड़, सब कुछ संग्रहीत करते हैं। और दाईं ओर, अचेतन मन है, जिसे हम मन कहते हैं, जिसके द्वारा हम – [मुझे नहीं पता, “मन” भी बहुत भ्रमित करने वाली बात है, लेकिन अंग्रेजी शब्द बेहतर है, “preconscious mind”] – जिसके साथ हम योजना बनाते हैं और जिसके साथ हम सोचते हैं, और इस शरीर की देखभाल और पोषण हमारे दाहिने हाथ की शक्ति के माध्यम से बनाए रखा जाता है। मध्य में, हमें विकासवादी शक्ति मिली है। इस शक्ति से ही हम विकसित हुए हैं, जो चेतन मन है। यह क्षण, अब, इस क्षण में। हम कह सकते हैं कि अतीत और भविष्य इस तरह एक दुसरे को लांघते हैं और मध्य में यह बिंदु है। या हम इस तरह कह सकते हैं:  … भविष्य और अतीत, वे केंद्र में इस तरह से गुजरते हैं, और वे बाहर निकल जाते हैं।

इसलिए अतीत से विचार भविष्य में आते हैं, और भविष्य अतीत से, लेकिन वे सचेत में रह नहीं सकते। उदाहरण के लिए, मैं कहती हूं, “इसी क्षण इसे रोकें |” आप नहीं कर सकते। क्यों? विचारों के कारण विचार उठता है, ऊपर जाता है और नीचे गिरता है, और जैसे गायब हो जाता है। फिर से, एक और विचार उठता है, उगता है और फिर से गिर जाता है, और गायब हो जाता है। अब, आप विचार के उदय को देख सकते हैं, लेकिन आप विचार के गिरने को नहीं देख सकते हैं। इन दो विचारों के बीच में, संस्कृत भाषा में विलंब के रूप में जाना जाता है। वह चेतन मन का बिंदु है। विचार अवचेतन पक्ष से आ सकते हैं, या सामूहिक अचेतन से आ सकते हैं, यहां तक ​​कि अचेतन [PRECONSCIOUS]से आ सकते हैं, या अचेतन से भी आ सकते हैं। ऐसी है विचारों की तरंगें। लेकिन अगर आपको चेतन मन में ही कूदना है – अब, इसी क्षण में – आप ऐसा नहीं कर सकते, क्योंकि उस बिंदु पर कोई विचार नहीं है।

मैं आपको अपने मन से ये सभी बातें नहीं बता रही हूं, क्योंकि यह पहले से ही कई मनोवैज्ञानिकों द्वारा खोजा जा चुका है – कि व्यक्ति को निर्विचार जागरूकता में कूदना है, तथाकथित ट्रान्स [भावातीत]में नहीं बल्कि जागरूकता में, जिसे आप पूरी तरह से जानते हैं, लेकिन अंदर वहां सन्नाटा है। अब, इस मौन का वर्णन सभी शास्त्रों द्वारा किया गया है। और उस में कूदते हुए भी … मनोवैज्ञानिक भी, उनमें से कई ने कहा कि आप एक अचेतन मन में कूदते हैं, जो – “अचेतन” का अर्थ है जो हमें ज्ञात नहीं है, अचेतन मन – जो सामूहिक रूप से जागरूक है, जो सार्वभौमिक है। उदाहरण के लिए, हम कह सकते हैं कि युंग सबसे महान मनोवैज्ञानिकों में से एक है, और मैं उसका बहुत सम्मान करती हूं। उसने अचेतन पर बहुत काम किया है, और उसने हजारों और हजारों लोगों पर प्रयोग करने के लिए कई वर्षों का समय लिया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि अचेतन सपने और प्रतीकों के माध्यम से कैसे काम करता है। अब, उसने सपनों में दिखाई देने वाले कई प्रतीकों का पता लगाया है। उदाहरण के लिए, इस तरह का एक त्रिकोण एक आदमी के सपने में दिखाई देता है, जो नीचे की ओर इशारा करता है। निर्विवाद रूप से सभी मामलों में, जहां भी ऐसा सपना दिखाई दिया है, ऐसे व्यक्ति ने किसी की हत्या कर दी है। या यदि त्रिकोण सिर्फ उल्टा है, मतलब है कि शीर्ष उपर की ओर सूचक है, निर्विवाद रूप से इन सभी लोगों की, जिन्होंने सपने में यह देखा तथा बताया था, हत्या कर दी गई थी। ऐसी कई बातें हैं जो उसने पता की हैं। उसे सार्वभौमिक अचेतन [Universal Unconscious]के बारे में एक और बात पता चली है – कि यह आपको हमेशा एक संतुलन देता है। विभिन्न प्रयोगों द्वारा। अब, चिकित्सा विज्ञान के लोगों ने कई चीजों का पता लगाया है, जिनका वे जवाब नहीं दे सकते हैं। मैंने आपको पहले ही बताया है कि उन्हें पता चला है कि एसिटाइलकोलाइन और एड्रेनालाईन, जो परानुकम्पी एवं अनुकम्पी तंत्रिका तंत्र के माध्यम से कार्य करते हैं, वे शरीर में बहुत ही मजेदार रूप से कार्य करते हैं, और वे नहीं जानते कि वे कैसे ,किसके द्वारा, नियंत्रित होते हैं, और वे क्यों कार्य करते हैं। वे कहते हैं कि इन दो रसायनों की क्रिया का तरीका ज्ञात नहीं है। इसका मतलब है कि एक बात सुनिश्चित है – कि वे समझा नहीं सकते। तो, हमें सोचना होगा: क्यों? एक रसायन को अलग, अलग तरीके से प्रतिक्रिया क्यों करनी चाहिए? क्योंकि उनके भीतर एक देवता बैठा है! एक देवता है, एक जीवित देवता जो रसायनों को उस तरह से संभालता है जैसे वह पसंद करता है। दूसरे दिन भी मैंने आपसे एक सवाल पूछा: एक मेडिकल व्यक्ति, यदि आप जाते हैं और उससे पूछते हैं, “अगर सब कुछ, हर बाहरी वास्तु को शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है, तो कैसे इस भ्रूण को स्वीकार किया जाता है, न केवल स्वीकार पर पोषण भी किया जाता है तन में ?” तो हमें पता होना चाहिए कि एक सार्वभौमिक अचेतन अस्तित्व है, जिसे पश्चिम के कई लोगों द्वारा स्वीकार किया जा रहा है। और इसीलिए वे कहते हैं: “अचेतन को देख भाल करने दो। चलो हम सहजता प्राप्त करें, इसे अनायास काम करने दें। ” लेकिन वे नहीं कर सकते, वे अब बहुत जटिल हैं। उनका ऐसा विश्लेषणात्मक दिमाग है कि वे विश्लेषण पर चले जाएंगे, और वे सहजता को काम करने की अनुमति नहीं दे सकते। वे सहजता से काम करने के लिए अपने सभी तरीकों से कोशिश कर रहे हैं, लेकिन किसी को एक शक्ति देना होगी, उसे ट्रिगर करना होगा , जैसा कि आप कह सकते हैं,शुरूआती धक्का देना होगा । क्योंकि तर्कसंगतता के माध्यम से यदि आप अचेतन में कूदना चाहते हैं, तो आप नहीं कर सकते। तर्कसंगतता बहुत सीमित साधन है। यदि आप किसी ऐसी असीमित और सार्वभौमिक चीज़ पर जाना चाहते हैं – जो सामूहिक रूप से जागरूक है – तो स्वयं आपको असीमित होना सीखना होगा। अब, आप इसे कैसे करेंगे? किसी को इसे ट्रिगर [शुरू]करना होगा। आप एक प्रकाश, एक दीपक, मोमबत्ती देखते हैं जो अभी तक प्रकाशीत नहीं है। यह एक सीमित साधन है। लेकिन जब आप इसे जलाते हैं, तो यह असीमित हो जाता है। लेकिन इस प्रकाश को प्रज्वलित करने के लिए, आपको इसके पास एक और ज्वाला लाना होगा। जब आप इसके पास एक और ज्वाला  लाते हैं, तो यह उत्प्रेरक एजेंट की तरह  होता है। यह बस इसे छूता है, और वह जलने लगता है। इसमें असीमित रोशनी मिलती है।एक सीमित दीप से असीमित प्रकाश हो जाता है। उसी तरह, किसी को यह ट्रिगर [शुरू]करना होगा।

मैं एक बहुत आधुनिक,या समकालीन उदाहरन देती हूं, मुझे कहना चाहिए, लोगों को समझने के लिए बहुत सरल है। आप देखते हैं, हमारे घरों में, हमने इन सभी बॉम्बे गैस लाइटों को देखा है, हमने देखा है कि थोड़ी सी झिलमिलाहट चल रही होती है। उसको कोई नहीं देख सकता। उसी तरह, हृदय में आत्मा है, परमात्मा का प्रतिबिंब है। और गैस का प्रवाह रोक दिया जाता है, तैयार रखा जाता है। उसी तरह, आप में कुंडलिनी रखी जाती है, और किसी को उसे खोलना होता है। और जब इसे खोला जाता है, तो कुंडलिनी उठती है और उस झिलमिलाहट से मिलती है, और प्रकाश फैल जाता है। और यह तब होता है जब प्रकाश फैलता है – कि चैतन्य आना शुरू हो जाता है। इस प्रकार आप अपनी अचेतन जागरूकता में कूद जाते हैं, इसका मतलब है कि आप एक अलग व्यक्तित्व बन गए हैं।जैसा कि मैंने आपको बताया, आप एक कंप्यूटर हैं। लेकिन आप कार्यरत कंप्यूटर नहीं हैं। एक बार जब आप मुख्य स्त्रोत से जुड़ जाते हैं, तो आप एक ऐसे कंप्यूटर बन जाते हैं जो जानकारी दे रहा है; अचानक आप अपनी उंगलियों पर इन सभी चीजों को महसूस करना शुरू करते हैं। आप महसूस करने लगते हैं कि … दूसरे व्यक्ति के  क्या चक्र हैं, क्या काम नहीं कर रहे हैं। और ये चक्र, जैसा कि मैंने कल आपको समझाया था, सभी भौतिक, मानसिक और भावनात्मक पक्ष रखते हैं जिन्हें वे नियंत्रित करते हैं, और आप जान सकते हैं की अमुक व्यक्ति के साथ क्या गलत  हैं। आप उन्हें ये चैतन्य देकर ठीक भी कर सकते हैं। तो, इस कंप्यूटर के माध्यम से, अब आपको जानकारी मिलती है, आप जानकारी देते हैं, और आप इसे सुधार भी सकते हैं। आप जानकारी निष्पादित भी कर सकते हैं। अब, जो हमारे पास  कंप्यूटर  हैं, वे निष्पादित नहीं कर सकते हैं।

(कोई व्यक्ति श्री माताजी को बाधित करता है, और वह उसे बाधित नहीं करने के लिए कहती है।)

आप देखें, दिव्य के बारे में व्याख्यान कई लोगों द्वारा किया गया है। मैं बोध की बात कर रही हूं। तुम वो बन जाओ! अब, हमेशा लोग कहते हैं कि “यह कैसे संभव हो सकता है, माताजी?” मेरा मतलब है, मैं इस सवाल को नहीं समझ सकती। मान लीजिए मैं कहती हूं कि यहां एक हीरा पड़ा है। क्या आप ऐसा प्रश्न पूछेंगे? आप तुरंत इसे लेने आएंगे। मेरा मतलब है, इसके द्वारा आपको कुछ भी छोड़ने की जरूरत नहीं है। आप मुझे कुछ नहीं दे रहे हैं। यह सब मुफ्त है। ऐसा करके, आपने यहां देखा है, लोग निरोगी हो गए हैं। लेकिन एक बार जब आप इसे प्राप्त करते हैं, तो आप में से पचास प्रतिशत बहुत खुश महसूस करेंगे, घर जाकर कहेंगे, “सब ठीक है, इसे भूल जाओ।” एक या दो लोग आलोचना करेंगे: “ओह, माला काइ झाला सेई, हमें कुछ भी महसूस नहीं हुआ,” जैसे कि वे बहुत महान लोग हैं। अगर उन्हें यह नहीं मिला, तो उनके साथ कुछ गड़बड़ है। उन्हें यह मिलना चाहिए। और पचास प्रतिशत इसके बारे में सोचेंगे, बार-बार आएंगे, इस पर काम करेंगे। अब बंबई में उनमें से कुछ हैं, बहुत उच्च दर्जे के सहज योगी हैं, जो लोगों का इलाज कर रहे हैं। उन्होंने कैंसर को ठीक किया है। वे बहुत ही साधारण लोग हैं। हमारे यहां एक है, स्कूल में एक शिक्षक है, और उसने उन लोगों को ठीक किया है, जो एलिफेंटियासिस से, कैंसर से पीड़ित थे, … इतनी सारी चीजें उन्होंने ठीक की हैं। वह जीवन में एक बहुत ही सामान्य व्यक्ति है। ऐसे बहुत सारे हैं जो इसे कर रहे हैं। आप भी कर सकते हैं। लेकिन आप महान बाबू (सम्मानित लोग) हैं, आप महान लोग हैं। इस सबके लिए आपके पास समय नहीं है।जब मैं नहीं रहूंगी, तब आप अपने सिर पीट रहे होंगे की, मुझे पता  होता,: “काश हमने इसके बारे में कुछ किया होता!”

उनमें से कुछ ने निश्चित रूप से कला सीखी है। जैसे, मैंने कहा कि “यहाँ एक पंखा  है। अगर मैं पंखा चालू करती हूँ, तो आपको ठंडी हवा मिलेगी। ” तो आप कहेंगे, “ठीक है। कृपया तुरंत पंखा चलू करें , हम इसे पाना चाहते हैं। ” आमतौर पर लोग यही कहते थे। तब मैं कहूंगी, ” ठीक है, मैं पंखा चालू करुँगी । शांत हो जाओ। अब आपको अच्छा लग रहा है? ” – “हाँ।” फिर मैं आपको बताती हूं कि यह पंखा कैसे बनाया जाता है, बिजली कैसे पैदा की जाती है, यह सब इंजीनियरिंग मैं आपको बताउंगी। लेकिन मैंने आपको इंजीनियरिंग के बारे में कुछ-कुछ बताया भी है। सभी लोग व्याख्यान सुनना चाहते हैं। क्या आप उनसे तंग नहीं आए हैं? आप इसे क्यों नही पा लेते है? यह भगवान का आशीर्वाद है। आपको परमेश्वर के राज्य में कूदना है, और आप बस यह देखते जाएँ कि कैसे आप की सुरक्षा होती हैं, कैसे आपकी देखभाल की जाती है। सात चक्र हैं, और सभी सात आशीर्वाद एक झटके में आपको दिए जाते हैं। हमारे यहां ऐसे लोग हैं जो सहज योग के पहले जीवन में कुछ भी नहीं थे  – यहां तक ​​कि, यह भी मैं आप को इस तरह अरंडी के तेल पर थोड़ा चॉकलेट के रूप में दूंगी  … जैसा कि वे कहते हैं – कि उनकी आर्थिक स्थिति में  भौतिक रूप से बहुत सुधार हुआ क्योंकि यह लक्ष्मी है जो नाभि में बैठी है। यह भारत के कई लोगों को आकर्षित कर सकता है कि लक्ष्मी ठीक हो गई है और आप भौतिक रूप से भी सुधर गए हैं। लोगों को पदोन्नति मिलती है, वे यह-वह  बन जाते हैं, कि … एक उदाहरण हमारे डॉ। नागेन्सी का है। उन्हें अपना आत्मसाक्षात्कार मिला, और देखें कि उसे कहाँ मिला है। बहुत से लोग यह पसंद करते हैं। वह सहज योगी हैं। इतने सारे लोग सहज योगी हैं जिन्होंने जीवन में कुछ हासिल किया है, लेकिन वे व्यस्त लोग हैं, उनमें से कुछ हैं। लेकिन यदि आप साधना के लिए थोड़ा समय दे सकते हैं, और यदि आप यहां आते हैं और खुद को देखते हैं और अधिक देते हैं, तो आप अधिक प्राप्त करते हैं। क्योंकि जब आप उनका उपयोग नहीं करने जा रहे हैं तो ईश्वर आपको हर समय चैतन्य क्यों दे?

यहाँ एक सज्जन बैठे हैं, उनका बेटा बहुत अधिक नशीली दवाओं से पीड़ित था। वह एक युवा स्कूली छात्र था, और उसे धोखा दिया गया था, और गरीब लड़के पर मुकदमा चलाया गया। उन्होंने उसे ठीक करने के लिए बीस हजार रुपये खर्च किए हैं। लोग उसे सिर्फ सोने के लिए ड्रग्स दे रहे थे, केवल नींद की दवाएं। और एक दिन में वह ठीक हो गया, और आज वह बिना कुछ दवाई लिए सो रहा है। वह एक दवाई का परचा [prescription ]लाया था और मुझे दिखाया था, जो कहता है … कीती पैसे बाटा (मुझे बताओ कि यह कितना था)? चार सौ रुपए – चार सौ रुपए गरीब आदमी को देने पड़ते थे। और किस लिए? इलाज के लिए नहीं! जिससे उस लड़के को नींद आ जाए। मेरा मतलब है, यह भी एक तरह की दवा है। और वह लड़का आज इतना सामान्य है।

लेकिन यहां कुछ शैतानी होगी जो आपके लिए समस्या पैदा कर सकती है। इसलिए आप अपने लिए फैसला करें। (श्री माताजी मराठी में एक वाक्यांश कहते हैं।)

(श्री माताजी हिंदी में दर्शकों से उनके प्रश्न पूछने के लिए कहती हैं।)

(साधक एक प्रश्न पूछता है।)

श्री माताजी: यह कैसे हो जाता है, यह नहीं है? सब ठीक है, बैठ जाओ। यही जो मैं कह रही हूं – यह बस काम कर देता है। यह एक सहज घटना है|अब, हम एक बात देखेंगे, कि एक छोटा सा बीज कैसे एक पेड़ बन जाता है? यह एक जीवंत प्रक्रिया है। आप अब इतना कहेंगे कि यह सिर्फ हो जाता है। यह पहले से ही वहाँ है, इसलिए यह सहज है। “सह” का अर्थ है “साथ”; “ज” का अर्थ है “जन्म”। यह बिल्कुल अनायास सहज है। मैं एक प्रबुद्ध व्यक्ति हूं, एक तथ्य है। और जब मैं तुम्हें छूती हूं, तुम आत्मज्ञान पा लेते हो। यह एक बहुत ही साधारण बात है। ठीक है? एक और सवाल? यह एक अच्छा था, क्योंकि हम हमेशा “कैसे” कहते हैं।

साधक: अन्य विधियों के माध्यम से आत्मज्ञान, सिद्धियां (अलौकिक शक्तियों) के साथ।

श्री माताजी: हं?

साधक: सिद्धियों के साथ, जैसा की वे कहलाती हैं।

श्री माताजी: नहीं, नहीं, गलत है। उस पर हमेशा प्रतिबंध लगाया गया है। आप देखिए, पुराने जमाने में भी हम लोगों को गुमराह किया जाता था। वही इतिहास है। कुछ लोग हैं … अब, उदाहरण के लिए, अगर हमारे पास हिटलर था, तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह एक प्रमाण है। अगर हमारे पास रावण जैसी शैतानी ताकत है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह प्रमाण था। हमारे लिए, आदर्श वह है जो उच्चतम हासिल किया जाता है। अतः सदैव श्रेष्ठ ही प्रमाण बने रहते हैं। आप देखिए, ऐसे सभी लोग जो कहते हैं कि यह सिद्धियाँ देता है वे जो तांत्रिक लोग हैं (तंत्र सिद्धांत के अनुयायी)। और वे सब बाहर फेंक दिए गए। ये सभी क्षुद्र (तुच्छता, अर्थहीन ) के रूप में जाने जाते हैं। लेकिन जिन लोगों ने इन चीजों पर किताबें लिखी हैं, उनमें से कुछ को खुद आत्मसाक्षात्कार नहीं है, इस किताब को, उस किताब को पढ़ा है, और फिर उन्होंने कहा है कि उनकी सिद्धियां भी हैं। सिद्धियां कुछ भी नहीं हैं लेकिन आप अपने अवचेतन पक्ष की ओर बढ़ते हैं। और जब आप एक अवचेतन पक्ष की ओर बढ़ते हैं, तो एक आत्मा आपके भीतर आती है। और फिर क्या होता है – आप अपने हाथ से किसी चीज़ को उत्पन्न करना शुरू करते हैं … हमारे सहज योग में एक महिला थी, वह हमारे पास आई थी, और, आप जानते हैं, जब मैं अमेरिका गयी थी, तो उसने सभी प्रकार के चमत्कार दिखाने शुरू कर दिए थे। । उसने लोगों को बताना शुरू कर दिया कि “आपका पैसा कहां खो गया है, आप वहां पा सकते हैं,” इस तरह से । और वह बहुत लोकप्रिय हो गई, और प्रतिदिन एक हजार लोग उसके पास आने लगे थे। और अंत में वह उन्हें घोड़ों के नंबर भी बताने लगी। तो अवचेतन चीजें वैसी भी हो सकती हैं। विशेषत, आप एक अतिसंवेदनशील महसूस करने वाले व्यक्ति  बन जाते हैं, और यह सब एक और भूत के अलावा कुछ नहीं है।

लेकिन इंसान अपनी सोच नही बदलते है। आपको आश्चर्य होगा, अमेरिका से दो महान वैज्ञानिक मुझे सिर्फ मिलने आये थे। किस लिए? उन्होंने कहा, “आप हमें  हवा में कैसे उड़ना सिखाएं|  हम अपना शरीर छोड़ना चाहते हैं। ” मैंने पूछा क्यों? क्या आप पहले से ही हमारे सिर पर नहीं उड़ रहे हैं? अब आप क्या करना चाहते हैं? ” उन्होंने कहा, “अब हम अपने शरीर को छोड़कर हवा में उड़ना चाहते हैं।” तो मैंने कहा, “लेकिन अगर मैं आपको बताऊं कि यह भूतों के माध्यम से किया जाता है, तो क्या आप इसे करेंगे?” – “हाँ, फिर भी हम इसे करना चाहते हैं।” मैंने पूछा क्यों?” उन्होंने कहा, “क्योंकि रूसी वही कर रहे हैं, इसलिए हम करना चाहते हैं।” (श्री माताजी मराठी में एक वाक्यांश कहती हैं।) फिर मैंने कहा … और वे नहीं करेंगे, आप देखें। फिर मैंने उनसे पूछा, “आपको किसने कहा?” तो उन्होंने कहा, “पतंजलि।” आप जानते हैं, पतंजलि एक पत्रकार है। और पतंजलि … मैंने कहा, “इस व्यक्ति को देखो, वह इलाज के लिए आया था क्योंकि वह इस तरह का एक अनुभव प्राप्त करता था … अनुभव जिसके दौरान वह उसके शरीर को छोड़ देता था, और वह ठीक होने के लिए मेरे पास आया था।” और वही उनसे कह रहा है, तुम माताजी के पास जाओ और वह तुम्हें ऐसा बनाएगी! और ये मूर्ख, तुम जानते हो, वे मेरी बात नहीं सुनेंगे!

इसलिए, हमारे पास जो ज्ञान है … हमारे पास सही-गलत की पहचान का एक उचित तरीका नहीं है। हमें पता नहीं है कि पूर्ण ज्ञान क्या है। ये गलत है। उसके लिए, आपके पास चैतन्य  होना चाहिए। चैतन्य के साथ अब आप पूछ सकते हैं, वे सभी जो आत्मसाक्षात्कारी हैं वे लोग, पूछ सकते हैं: “क्या ईश्वर है या नहीं?” आपको जो उत्तर मिलेगा, उसे देखें। (UNCLEAR) का अर्थ है हाँ। सभी उत्तर आते हैं, और आप इसे अपने हाथों पर जान [रिकॉर्ड] सकते हैं। छोटी सी बात पर भी। आपने फड़के को  सुना होगा, आज वह मुझे इस बारे में बता रहा था, कि जब वह … कोई सज्जन कहीं पर था, और उसने कहा कि “आप सिर्फ उसका कंपन पाते हैं।” इसलिए उसने अपने हाथ वहाँ रख दिए, और उन्होने कहा, “आप केवल उनके चैतन्य पता करो ” – और उसने अपने हाथ खोले और कहा कि, मुझे उनके वायब्रेशन देखने दो और, कुछ भी नहीं आ रहा था, और कुछ भी तुम महसूस नहीं कर पा रहे थे, और चक्रों में से कुछ भी नहीं। तो उन्होंने कहा, “वह व्यक्ति वहाँ नहीं हो सकता, क्योंकि मैं कुछ महसूस नहीं कर सकता।” तो, इस आदमी ने उसके बारे में सोचा और कहा कि: “ओह, हाँ, हाँ। उसे हवाई जहाज पर होना चाहिए, वह वहां नहीं है। ” इस हद तक यह जाता है! लंदन में, वहाँ एक सज्जन ने कहा, “माताजी, क्या मैं किसी के वायब्रेशन को महसूस कर सकता हूँ?” मैंने कहा, “आप कर सकते हैं।” – “क्या मैं अपने पिता को महसूस कर सकता हूं?” मैंने कहा हाँ। ठीक है, तुम हाथ खोलो और एक सवाल करो। ” तुरंत ही उनका विशुद्धि चक्र जलने लगा। उन्होंने कहा, “माँ, यह जल रहा है।” मैंने कहा, “आप अभी उसे टेलीफोन करें। पूछें कि वह कैसे है। ” तो उसकी माँ ने कहा, “वह तुमसे बात नहीं कर सकते, उनका गला बहुत खराब है।” और पिता बहुत दूर थे। “वह आपसे बात नहीं कर सकते, उनका गला बहुत खराब है” – विशुद्ध चक्र पकड़ रहा है। सारी जानकारी आपको अपने हाथ पर, आपके वायब्रेशन पर मिलती है। और फिर, जब आप इन पुस्तकों को देखेंगे, तो आपको आश्चर्य होगा कि वे आपके हाथ जलाएंगी। (श्री माताजी हिंदी में एक वाक्यांश कहती हैं।)

आप आश्चर्यचकित होंगे कि आपको कैसे पता चलेगा कि कौन वास्तविक गुरु और कौन अ-वास्तविक गुरु है। यह इस वायब्रेशन के साथ इतना सही बताता है! हमें यहां एक महिला का मामला मिला है। उसने मुझे बताया कि कोई उसे मिलने आया था, और, मेरा मतलब है, कोई उसके साथ रहने के लिए आया था, उसका अपना भाई या कोई बहुत निकट। और वह हर समय जलने लगी, ऐसा और वैसा। तो उसने कहा, “क्या आप सत्य साईं बाबा के पास जाते हैं?” उस ने ना कहा।” उसने कहा, “नहीं, लेकिन यह कैसे हो सकता है? मुझे भयानक जलन हो रही है, जैसा कि मुझे सत्य साईं बाबा के एक शिष्य से मिलता है। आप कहीं न कहीं रहे होंगे। आप रहे होंगे। ” उन्होंने कहा, “मैं कभी नहीं गया।” तो उसने कहा, “सच में?” और वह उसे खोज रही थी, और कुछ भी नहीं था। इसलिए उसने उनका बॉक्स खोला, और बॉक्स में सत्य साईं बाबा की तस्वीर थी। हमारा (UNCLEAR) यहाँ है, आप उससे पूछ सकते हैं। उनकी पत्नी … उनकी बहू लंदन में एक बड़ी समस्या थी। और वे नहीं जानते थे कि कैसे पता लगाया जाए कि वह इस तरह का व्यवहार क्यों कर रही थी और वह उन्हें इस तरह से जला रही थी। उन्होंने एक दिन उसका पर्स खोला और पर्स में वह तस्वीर थी। जिस दिन से उन्होंने इसे फेंक दिया, सब कुछ ठीक है। अन्यथा यह बिना कारण तलाक होने जा रहा था,  – बेचारी महिला उल्टी कर रही थी, ऐसी सभी प्रकार की चीजें कर रही थीं। ऐसे बहुत सारे मामले हैं। मेरा मतलब है, सबूत है।

(श्री माताजी मराठी में कुछ वाक्यांश कहते हैं।)

उन्होंने हमें किसी जगह पर बुलाया जहाँ सत्य साईं बाबा का एक केंद्र था। उन्होंने कहा, “माताजी, आपको उन लोगों को बचाना चाहिए।” जब मैं वहां बैठी, तो बहुत सारे बच्चे करीब-करीब निढाल हो गए। तब उन्होंने हमें बताया कि “ये बच्चे इस तरह निढाल होते रहे हैं। आपको इसके बारे में कुछ करना होगा। और कितने ही बच्चे खो जाते हैं। वे बस चले जाते हैं। भगवान जानता है कि वे कैसे खो गए हैं। ” मैंने उससे कहा, “बाबा, उसका केंद्र, अब उसे ही देख लेने दो। मैं तंग आ गयी हूँ।” अब मैं क्या कर सकती हूँ ? मुझे सबसे पहले कुछ डॉक्टरों, कुछ आत्मसाक्त्काक्षारियों की रचना करनी होगी। जब मेरे पास इस काम को करने के लिए कुछ और लोग होंगे, तो हम इस काम को कर सकते हैं। लेकिन एक बात यह है कि: बोध प्राप्त करने के बाद आपको आना चाहिए, और इसे सीखना चाहिए, और सब में निपुण होना चाहिए। तुम बनो … मैं तुम्हें, कुंडलिनी के बारे में हरेक ,प्रत्येक  बताती हूं, तुम बस इसमें महारत हासिल कर सकते हो। यह बहुत आसान है। यह इतना आसान है और यह आपकी मदद करता है।

तुम जानते हो यह प्रेम की शक्ति है; आपको पता होना चाहिए कि यह कैसे काम करता है। हम नफरत की सारी शक्ति को ही जानते हैं। माना की कोई आप के प्रति  बहुत ही निर्दयी है। मैं आपको अपने पति की सचिव के बारे में बताऊंगी उसे उसका आत्मसाक्षात्कार  हुआ। और उसने कहा, “मुझे पड़ोसी के रूप में कुछ तीन, चार युवा लड़के मिले हैं, और वे भयानक हिप्पी हैं। वे शोर कर रहे हैं, और वे दुखदायी हैं, और वे मुझे एक बूढी मुर्गी कहते हैं। अगर वे मेरा मजाक ही उड़ाते रहते हैं तो मुझे क्या करना चाहिए ? ” मैंने पूछा, “सब ठीक है, तुम क्या करोगे?” उसने कहा, “मैं वास्तव में तंग आ चुकी हूं, मैं घर छोड़ने जा रही हूं।” मैंने कहा, “आप बस ऐसा नहीं करें। आप बस जाओ और उनके घर पर, हर दिन तीन बार इस तरह से एक बंधन डालो , और बस मेरे बारे में प्यार से सोचो। ”  वह कहती है कि अब यह एक गिरिजाघर की तरह शांत है। “वे बहुत शांत हैं। और वे बहुत दयालु हैं, वे मेरे लिए लिफ्ट खोलते हैं । जब मैं जाती हूं, तो वे मेरी मदद करते हैं। ”

(साधक हिंदी में एक प्रश्न पूछता है। श्री माताजी पहले हिंदी में उत्तर देती हैं और फिर अंग्रेजी में जारी रखती हैं।) आप साधन हैं,आप यंत्र हैं, आप दवाई हैं, आप वैद्य हैं, आप डॉक्टर हैं, आप कंप्यूटर हैं, आप सब कुछ हैं। लेकिन आपको अपना स्व बनना चाहिए। आपको अपना स्व बनना है।

(श्री माताजी हिंदी में बोलना जारी रखती हैं।)