Talk on Attention

Bordi (भारत)

1977-01-26 Collectivity And Responsibility, Bordi (India), 38'
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[Hindi translation from English]

हमें जिम्मेदार होना होगा । मैंने आप लोगों से कुछ भी नहीं कहा है। मुझे आप लोगों से कुछ कहते हुए दुख होता है। मुझे यह पसंद नहीं है। क्योंकि किसी से कुछ भी कहना मेरे लिए अच्छा नहीं है।

मैं कई बार जानती हूं, कई चीजें जानती हूं, क्योंकि इस तरह बात करना मेरे लिए अच्छा नहीं है। आखिर मां और शिक्षक बनना बहुत कठिन है। यह बहुत ही कठिन कार्य है। आप इसकी कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। क्योंकि मैं आपसे बहुत प्यार करती हूँ, इसलिए मैं आपसे कुछ भी कठोर नहीं कह सकती हूँ । मुझे आपको बताना होगा कि अगर मैं कुछ कहूं तो मुझे बहुत दुख होता है और मैं कभी-कभी रोती भी हूं । 

यदि आप हर दिन थोड़ा अधिक जिम्मेदार हो जाएं, प्रत्येक व्यक्ति को यह सोचना चाहिए कि मुझे कम से कम १० व्यक्तियों को सहज योग में लाना चाहिए। यह हमारी जिम्मेदारी है। मुझे दस व्यक्तियों को सहज योग में इस तरह से लाना चाहिए कि वे अच्छी तरह से जम जाएं। वे अच्छी तरह से तैयार हो जाएं। वे तैयार हैं। तरीकों और विधियों का पता लगाएं.. सहज योग की गतिविधियों को कैसे बढ़ाया जाए, इस बारे में मुझे किसी ने कोई योजना नहीं दी है। बैठो, इसके बारे में सोचो। मैं पहले ही एक तरीका बता चुकी हूं कि एक सहज योगी के घर में कार्यक्रम हो और आप सभी वहां जाकर पड़ोसियों को यह कहकर आमंत्रित करें कि हमारे घर में कार्यक्रम होने वाला है। एक छोटी सी हल्दी-कुमकुम में भी आपको कम से कम 500 महिलाएं आसानी से मिल जाती हैं। तो सहज के लिए भी आप कर सकते हैं। और विभिन्न तरीके खोजें। तरह तरह के तरीके खोजें। आप और अधिक लोगों को सहज योग में कैसे ला सकते हैं? एक व्यक्ति दूसरे से ज्यादा जिम्मेदार होता है। ऐसा नहीं होना चाहिए। 

और भी बहुत सी बातें हैं जो आपको भी समझनी चाहिए। उदाहरण के लिए, लोग मुझे बहुत सी चीजों के बारे में पत्र लिखते हैं, मुझे ध्यान करना होता है, मुझे कुछ तपस्या करनी है, मुझे किताब लिखनी है, इस प्रकार मैं व्यस्त हूं। आपको पता है कि मेरे पास ज्यादा समय नहीं है। मैं वापस पत्र नहीं लिखती हूँ । कभी-कभी मैं लिख ही नहीं सकती हूँ। अगर आपको पत्र नहीं मिलता है तो भी आपकी देखभाल की जाएगी। उसे याद रखो। लेकिन आपको पत्र लिखना होगा। ऐसे लोग हैं जो बिल्कुल भी पत्र नहीं लिखते हैं। मैंने देखा है। बिल्कुल भी नहीं लिखते हैं। आपको पत्र लिखना सीखना चाहिए। आज मुझे श्रीमती नाइट और उनके पति का एक बहुत प्यारा पत्र मिला। यह एक पूजा की तरह था। इतना सुंदर था। आपको सुंदर पत्र लिखना होगा। जिम्मेदार होने का यह तरीका नहीं है। बिल्कुल भी नहीं लिखते। कम से कम आपको मुझे पत्र लिखना चाहिए और अन्य सहजयोगियों को भी । मैं कहूंगी कि शरयू बहुत जिम्मेदार है। मैं उसे कभी भी नहीं लिखती, शायद ही कभी मेरे पास समय होता है। वह मुझे लिखती है। उसे बहुत सारी समस्याएं हैं। उसके बच्चे हैं, उसका पति है। लेकिन वह मुझे सुंदर पत्र लिखती है। और अगर मैं उसे न भी लिखूं तो भी वह उसका बुरा नहीं मानती है। [अस्पष्ट] अगर उसने मुझे पत्र नहीं लिखे होते तो वह इतनी सुंदर कविताओं की रचना नहीं करती।

दूसरी राउल बा हैं। मेरे पास शायद ही कभी उसे लिखने का समय होता है। लेकिन वह मुझे लिखती है। अगर मैं आपको जवाब नहीं दे सकती, तो आपको इसके बारे में बुरा नहीं मानना ​​​​चाहिए। यह एक बात है जो आपको तय करनी होगी कि आपकी माँ के पास बहुत काम है और वह बहुत व्यस्त हैं। आपके पत्र निश्चित रूप से मुझे बहुत खुशी देते हैं और आपको मुझे जरूर लिखना चाहिए। लेकिन लोग कम ही लिखते हैं। बहुत कम। बहुत कम लोग वास्तव में मुझे लिखते हैं। देखिए, और उनके पास पत्र लिखने का समय ही नहीं है। यह कोई तरीका नहीं है।

अब मैं आपको रहस्य बताती हूँ। यह बहुत ही सरल है। आपने कितने शास्त्र पढ़े हैं और आपने ईश्वर स्तुति या देवी स्तुति पढ़ी है, ये सब बातें आपने पढ़ी हैं। हम अपने निमंत्रण पत्र पर क्या लिखते हैं? आओ [अस्पष्ट]। “जगदम्बा प्रसन्न।“ अर्थात आप कह सकते हैं, माँ अत्यधिक आनंद में हैं। वे बहुत खुश हुई हैं। या वे इससे बहुत खुश हैं। 

तो आपको बस यह पता लगाना चाहिए कि माँ को क्या प्रसन्न करेगा। मुझे क्या आनंदित करता हैं। जब आप कुछ करते हैं तो बस उसे तोलिए, अगर हम ऐसा करते हैं तो क्या वे खुश होंगी। अगर हम इस तरह बात करते हैं और ऐसी बातें कहते हैं, क्या वे खुश होंगी।? यह बहुत ही सरल है। आप मुझे अच्छी तरह से जानते हैं कि मैं इसे पसंद नहीं करूंगी। मैं इसके बारे में शायद कुछ नहीं कहूँगी, मैं चुप रह सकती हूं। लेकिन मैं इसे पसंद नहीं करूंगी। यह एक बहुत ही अच्छी पहचान है। आप जो करना चाहते हैं और आपको जो पसंद है, वह न करें। यह गलत तरीका है। बिल्कुल गलत। लेकिन आपको वही करना चाहिए जो मैं आपसे करवाना चाहती हूं और आप मुझे अच्छी तरह जानते हैं। और यही होना चाहिए कि “माताजी प्रसन्न”। यह एक प्रकार का प्रमाण पत्र है जिसे हम लेते हैं | जैसे हम लिखते हैं “माताजी प्रसन्न”, हमारे घर में ऐसी-ऐसी शादी होने वाली है कि वे खुश है। इसलिए सब कुछ उनकी अनुमति से करें।

मुझे इस बार कहना चाहिए कि मैं बहुत खुश हूं क्योंकि आप इस बार बहुत कुछ खुल गए हैं  और एक बड़ी प्रगति हुई है। अत्यधिक उन्नति हुई है। लेकिन इसे नियमित रूप से किया जाना चाहिए और इसे बनाए रखना चाहिए। मैं नहीं जानती कि आपको कैसे बताऊं कि वास्तव में आपके साथ क्या हुआ है क्योंकि यह एक बहुत बड़ी प्रक्रिया है जो क्रियान्वित हुई है और सब कुछ बहुत अच्छे से घटित हो गया है। और अब आप अपने चक्रों के छोटे-छोटे दोषों को अपने आप से अलग होकर देखेंगे और आप इनसे परेशान नहीं होंगे। इसलिए, जब आपके चक्रों में कोई समस्या हो तो उन्हें साफ करने की कोशिश करें और उन्हें साफ रखें। और सहजयोगियों के रूप में अपना और अपनी जिम्मेदारियों का सम्मान करें। यह बहुत कम लोगों की बहुत ऐतिहासिक मुलाकात है। और हमने यहां जो कुछ भी किया है वह बहुत ही  मददगार रहा है। 

अपने दिल में कोई द्वेष न रखें लेकिन इस बात का आनंद हो कि आपको एक ऐसा स्थान मिल गया है जहां इतने सारे सहज योगियों, जो आत्मसाक्षात्कारी हैं, की सद्भावना है। और जब उनकी संख्या बढ़ती है तो उनके आस-पास विकसित आत्माओं के अनुपात में कई गुना वृद्धि होती है। या आप कह सकते हैं कि गुणोत्तर अनुपात (Geometric proportion) में, यही सही तरीका है, यह गणित है। तो, जितने अधिक आप होंगे, उतना ही बेहतर होगा और अब यह आपकी ज़िम्मेदारी है बुद्धिमान होने की और कुछ परिणाम दिखाने की, जब तक मैं बॉम्बे में और भारत में हूं। आइए सबको देखतें हैं कि वह कैसा कर रहा है।

इसके अलावा कार्यक्रम भारतीय विद्या भवन में होने जा रहे हैं। कभी-कभी मुझे बहुत आघात  पहुंचता है जब मैं देखती हूं कि बड़े कार्यक्रमों में सहज योगी सबसे आखिर में आते हैं। बाकी सब लोग हैं और सहजयोगी लापता हैं। तो सबसे पहले उन दस लोगों का पता लगाइए जो सहज योग के लिए आएंगे। अगला कार्यक्रम मुझे नहीं पता कि कहाँ है, वो इसकी घोषणा करेंगे कि कहां है हमने अभी तक फैसला नहीं किया है। [भारतीय विद्या भवन में ३ और ४ और घाटकोपर में २-४- मराठी में बातचीत- मराठी में एक अन्य योगी के साथ बातचीत]। भारतीय विद्या भवन में तीन और चार। इसलिए आपको उन लोगों का पता लगाना चाहिए कि वे ऐसा क्यों कर रहे हैं। उन्हें इसमें क्यों नहीं आना चाहिए और आगे बढ़ना चाहिए। मैं जानती हूँ,  जो सहजयोगी खो गए, आप जा कर उनसे बात कर सकते हैं और यदि संभव हो तो इस कार्य को साध्य करें । नहीं तो उन्हें भूल जाओ। नए लोगों को उनसे बात करने दें और उन्हें सहज योग के बारे में बताएं। और मुझे उम्मीद है कि इस तीन और चार को बहुत अच्छे कार्यक्रम होंगे।

अब सबको जिम्मेदार होना चाहिए। पता लगाना चाहिए कि किसी को फूल चाहिए तो कोई फूल ला सकता है। कोई अगरबत्ती ला सकता है, कोई कार्यक्रम के लिए कुछ ला सकता है। और कोई ला सकता है… आप देखिए जब मैं वहां जाती हूं तब रेडियो का समायोजन शुरू होता है और वहां यह चीज और वह चीज और इस तरह समय की बर्बादी होती है और यह अच्छा नहीं है। लेकिन देखिए, हम दूसरों में दोष ढूंढते हैं। हमने कभी खुद को नहीं देखा कि हमने इसके बारे में क्या किया है। आप देखिए, मान लीजिए कि कोई लाउडस्पीकर नहीं लाया है। तो वह व्यक्ति लाउडस्पीकर नहीं लाया है तो यह बहुत गलत है आप देखिए। लेकिन आपने इसके बारे में क्या किया है? क्या आपने इसके बारे में कुछ किया है, क्या आपने इसके बारे में कुछ पता किया है? और अगर हर कोई इस पर काम करता है, कैसे सजाना है, इसे कैसे ठीक करना है और सब कुछ, हम इसे कैसे विस्तारित करने जा रहे हैं, तो चीजें ठीक हो जाएंगी।

एक और कार्यक्रम जो आप सभी को पता होना चाहिए, वह २१ मार्च को है और मैं चाहूंगी कि अन्य सभी लोग भी आएं। राहुरी से भी जो लोग आना चाहते हैं, आप उन लोगों को ला सकते हैं । 21 मार्च। 19, 20 और 21. कम से कम एक दिन के लिए आ सकते हैं तो ठीक है। [दूसरे योगी के साथ बातचीत मराठी में – यदि आप 2-3 दिन के लिए आते हैं तो भी ठीक है कि हम रहने के लिए जगह ढूंढ लेंगे ताकि रहने की समस्या का समाधान हो सके।] 

१९, २०, २१ हम उस स्थान पर नियमित रूप से तीन दिवसीय कार्यक्रम कर सकते हैं। लेकिन जो भी हो हम इस बार 19, 20, 21 कुछ बेहतर आयोजन करते हैं। [अब दिल्ली में हमारा कार्यक्रम है, उन लोगों से पूछो – किसी अन्य योगी से हिंदी में बातचीत]।