Talk on Attention

Bordi (भारत)

1977-01-26 Collectivity And Responsibility, Bordi (India), 38' Transcribe/Translate oTranscribe

[Hindi translation from English]

                                             ध्यान पर बात

बोर्डी, भारत, 1977-0126  

वे इसे कैसे कार्यान्वित करते हैं। यही कारण है कि जब मोहम्मद साहब आए, तो उन्होंने उपदेश किया कि आपको किसी के सामने नहीं झुकना चाहिए। जो भी हो,क्योंकि झुकने के बारे में, वह जानते थे कि जब वास्तविक व्यक्तित्व आएगा, तो कुछ भी हो आप उसे पहचान ही लेंगे। लेकिन एक सामान्य दृष्टिकोण था, जिसे की यहां तक ​​कि नानक साहिब भी नहीं बदल सके थे। और नानक साहिब ने कई महान आत्माओं के ज्ञान के प्रतीक ग्रन्थ साहिब नामक पुस्तक का आयोजन किया केवल और केवल जिस के प्रति आप झुक सकते हैं अन्य किसी को नहीं। लेकिन अनुयायियों ने हमेशा की तरह, इस तरह की भूल की है कि, ऐसा प्रतीत होता है कि वे अनुयायी नहीं हैं, बल्कि वे इन महान अवतारों के शत्रु हैं।

यह अच्छा है कि सहज योग में, जब आप आत्म-साक्षात्कार प्राप्त करते हैं, तो शुरुआत में नहीं, लेकिन कुछ समय बाद , आप स्वयं पाप और पापियों के संताप की भावनाओं को महसूस करना शुरू करते हैं। इसलिए आप पापी लोगों की संगति से बचते हैं। आपको करना होगा। यदि आप पापी लोगों की संगति में रहते हैं, तो आप जानते हैं कि आपको सिरदर्द होता है, आपको आज्ञा चक्र की समस्या होती है, आपको सभी प्रकार की जटिलताएँ हो जाती हैं और आप ऐसी जगह से भागना चाहते हैं। और कोई भी आपको भागने को नहीं कहता है, पर आप भाग जाते हैं, लेकिन आप भागते हैं क्योकि, आप इसे सहन नहीं कर सकते, आपका शरीर अलग हो गया है।

लेकिन खुद को मजबूत करने का सबसे अच्छा तरीका सहज योगियों के रूप में एक साथ होना है। सामूहिक, आरती या पूजा या ध्यान होने पर आपको कार्यक्रमों में शामिल होना चाहिए। आप देख रहे हैं कि जब आप एक साथ इकट्ठा होते हैं तो आपके साथ कुछ होता है। यदि आप घर पर बैठते हैं और कुछ भी करते हैं, तो कुछ कार्यान्वित नहीं हो पाता है। कहीं भी, जब ध्यान में एक साथ लोग बैठे होते हैं, सहज योग स्वयं प्रकट होता है, क्योंकि यह एक सामूहिक घटना है। यह एक ऐसी सामूहिक घटना है। मैं ग्रीगोइरे का एक उदाहरण दूंगी, एक दिन वह मेरे साथ बैठा था और उसे कोई चैतन्य महसूस नहीं हो रहा था और वह इस बारे में बहुत चिंतित था। मैं खिड़की से बाहर देख रही थी और वह बस मेरे सामने बैठा था, और एक अन्य सहज योगी पहाड़ी से मेरे घर तक आ रहा था। तुरंत उसने कहा मुझे चैतन्य मिल रहे है। उसने कहा कि यह अचानक कैसे चैतन्य शुरू हो गया है? मैंने कहा कि पीछे मुड़कर देखो, कौन आ रहा है। और उन्होंने एक और सहज योगी को पहाड़ी पर चढ़ते देखा। उनकी मौजूदगी, उनके आने से ही उनके स्पंदन में बढोतरी हुई। यह एक सामूहिक घटना है।

यह सामूहिक रूप से कैसे काम करता है, यह सामूहिक रूप से क्यों काम करता है, यह फिर से एक सवाल है जो की मेरा काम है, यह आपका नहीं है। लेकिन मैं कह सकती हूं कि इसके बारे में एक गणित है। इसके बारे में एक गणित है! आपको पता होना चाहिए कि हर चीज के लिए एक गणित होता है। सब कुछ एक गणित में काम करता है। ऐसा क्यों है ? इसे वैसा ही बनाया जा रहा है। और वास्तव में सहज योग  सात से अधिक लोग होने के बाद काम करता है। [मराठी में बात करता है]।

आपको यह समझना होगा कि सामूहिक घटना कैसे काम करती है। यदि कोई आत्मसाक्षात्कारी है, तो वह कम से कम दो या तीन देवों से घिरा होता है, कम से कम। लेकिन कुछ मामलों में जब कोई बोध प्राप्त आत्मा जो अभी तक उतना अच्छा नहीं है हो, उदाहरण के लिए कहें यदि वह धूम्रपान करता है, बस एक उदाहरण के लिए मान लें। और मान लें कि ऐसे व्यक्ति का अनुसरण करने वाला केवल एक ही है। अगर उसके सभी चक्र खराब हैं और वह धूम्रपान करता है , और वह शराब और इस तरह की चीजें भी पीता है, इसके बावजूद। तब शायद केवल एक ही होता है, शायद उसके साथ या कभी-कभी एक भी नहीं हो सकता है। लेकिन ज्यादातर वहाँ कम से कम एक, न्यूनतम एक आप इसे मान सकते हैं। इसलिए हर बोध प्राप्त आत्मा के साथ कुछ लोग मिलते हैं। और उदाहरण के लिए,  अगर कोई थोड़े समय के लिए कुछ पापी कार्य करता है, वह कुछ बुरा करता है, वास्तव में बहुत बुरा। तब वे सभी उस समय विशेष पर उस से अलग चले जा सकते हैं, लेकिन वे फिर से उसके पास आ जाते हैं। अब जब ऐसा व्यक्ति एक अनुभव पाने के लिए संघर्ष कर रहा है, यदि कोई अन्य सकारात्मक व्यक्ति, एक बहुत ही सकारात्मक व्यक्ति सामने आता है, उसके साथ और अधिक देव लोग हो सकते हैं, इसलिए वह अपने कुछ देव लोगों को इस आदमी की सहायता करने के लिए छोड़ने में सक्षम हो सकता है।

तो यह बिलकुल परमाणुओं की संयोजकता की तरह कार्य करता है। लेकिन दोनों में केवल इतना अंतर है कि मनुष्य जितना चाहे उतना संचय कर सकता है, बदल सकता है, लेकिन परमाणु नहीं बदल सकता। वे लोग जो सिर्फ मासूमियत से कुछ गलतियाँ और वैसा कुछ करते हैं और वे सहज योग और अच्छे लोगों में बहुत सक्रिय हैं, वे भी कभी-कभी अपनी आदतों को दूर करना मुश्किल, कठिन,पाते हैं, ऐसा है। तो उन्हें यह पता होना चाहिए कि यदि उस समय वे किसी अन्य सहज योगी के पास जाते हैं, जिन्हें यह आदत नहीं है, एक विशेष आदत, जैसे तम्बाकू खाने ,सूंघने के बारे में। दूसरे व्यक्ति को तम्बाकू या सूंघ लेने की यह आदत नहीं है। तब फिर इस दूसरे व्यक्ति के मार्गदर्शक देव जो उस पर मँडरा रहे हैं, इस आदमी को किसी अन्य व्यक्ति की तुलना में बहुत अधिक मदद कर सकते है, जो सूँघने वाला है और यदि आप उसके पास भी जाते हैं, तो वह पहले से ही शिकार है बाधित है और वह उन तीनों को भी ले जाएगा जो आप के साथ हैं | तो तुम दोनों तम्बाकू लेने लगोगे। देखो। लेकिन,अंतर यह है वे आपके मानस में प्रवेश नहीं करते हैं। वे आपके मानस में प्रवेश नहीं करते हैं, लेकिन वे चारों ओर एक लौकिक परिवर्तन लाते हैं।

लेकिन माना कि कोई व्यक्ति bhoot badha (नकारात्मकता) से पीड़ित है, या वह कुछ गुरुओं से सम्बंधित रहा है, तो गुरु उस व्यक्ति के साथ कुछ भूतों को लगा देगा । वे हमें ऐसा बताते हैं। अब, जब यह कुछ बुरा करने की कोशिश कर रहा है, तो उसे एक और भूत बाधा वाले  (एक नकारात्मक व्यक्ति) द्वारा सहायता कि जाएगी। बिरादरी बहुत मेहनत करती है। आपने हमारे समूहों में इसका उदाहरण देखा है। आप देखते हैं, अगर कोई एक व्यक्ति है, जिसे भूत बाधा है, तो आपको प्रधान से पूछना चाहिए क्योंकि उसका बेटा उससे पीड़ित है। वह ऐसे लोगों में बहुत दिलचस्पी रखता हैं, जिन्हें भूत बाधा  है।तो क्या होता है की जब वह जाता है और अपनी भूत बाधा के बारे में बात करता है , दूसरा व्यक्ति तुरंत उसका समर्थन करने के लिए आएगा। वह मजबूर हो जाएगा। इसमें कोई स्वतंत्रता नहीं होगी। वह बस जाएगा, एक चुंबक की तरह वह उस व्यक्ति की ओर आकर्षित होगा जिसके पास एक भूत बाधा है, तुरंत। और वह कमजोर हो जाता है। इतना ही नहीं, यह हो सकता है कि जिस व्यक्ति को एक मजबूत भूत बाधा हो, वह एक छोटे भूत बाधा के व्यक्ति को आकर्षित करेगा और उस व्यक्ति को प्रभावित और खराब करेगा।

अब क्या फर्क पड़ता है? पहले मामले में आपको सहज योगी की संगत में रहने का चुनाव करना होगा, जिसमें ये आदतें नहीं हैं। उदाहरण के लिए कहें कि कोई गर्म स्वभाव वाला व्यक्ति है। ऐसा आदमी जब वह क्रोधित हो जाता है, अगर वह किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में सोच सकता है जो स्वभाव से बहुत शांत है, तुरंत वह आश्चर्यचकित हो जाएगा, उसका गुस्सा दूर हो जाएगा। अगर कोई आदमी जो इतना चुप है कि वह अपनी माँ का अपमान होने पर भी कुछ करता है और उसे इस बारे में बुरा लगता है कि मैं इसके बारे में कुछ नहीं कह सकता तो ऐसा आदमी, अगर वह किसी ऐसे के बारे में सोचता है जो इस तरह का व्यवहार बर्दाश्त नहीं करेगा तो तुरंत उसे शक्ति मिल जाती है। लेकिन अंतर बहुत बड़ा है। दोनों में जबरदस्त अंतर है। एक आपको आजादी के साथ चुनना होगा, दूसरा आपने इसे मजबूर किया है। लेकिन आपको बहुत सारे सहज योगी भी मिल जाएंगे, वे आसानी से नकारात्मकता की ओर आकर्षित होते हैं। वे नहीं जानते कि कैसे वे उसमें दिलचस्पी लेते हैं, लेकिन सकारात्मकता के लिए उन्हें खुद प्रयास करना होगा। यह एक बात है और यह एक प्रणाली है जो कभी-कभी काम करती है। इसलिए मैं लोगों को बताती हूं कि जिन लोगों को एक जैसी बुरी आदतें होती है, वे आपसी संगत नहीं रखे। जब मैं कहती हूं तप लोगों को कभी-कभी बुरा लगता है। लेकिन आप हमेशा पायेंगे, दोस्ती है

जैसे कि दो सहज योगी हैं जो सहज योग के बारे में बात करते हैं, सुबह से शाम तक सहज योग के दोष खोजते हैं। वे संगती करेंगे क्योंकि वे एक अच्छी कंपनी रखते हैं, आप देखते हैं। एक जैसे स्वभाव, विशेष रूप में एक ही परिवार की तरफ आकर्षित होने की बजाय विभिन्न प्रकार की संगती होना बेहतर है ताकि आप एक दूसरे से बेहतर तरीके से पूरक हों। यह मानते हुए कि वे एक परिवार के लोग हैं, इसलिए आप उनके बीच सहज योग की चर्चा नहीं करते हैं। या तो वे लड़ेंगे या वे सहज योग में एक साथ मिलेंगे।

सहज योग में करने के लिए सबसे अच्छी बात यह है कि सबसे पहले बैठ कर अपने दोषों का पता लगाएं। यह लिखो कि मेरे दोष क्या हैं? ये मेरे दोष हैं। कोई दिखावटी है, वह हर समय दिखावा करता है। आप देखते हैं कि उसे दिखावे के लिए कुछ कहना होगा, अब दुसरे दिखावटी व्यक्ति को उससे दूर ही रहना चाहिए, उसे ऐसे व्यक्ति के साथ बैठना चाहिए जो एक शर्मीला व्यक्ति हो। और यह एक अलग ही शैली है जो नकारात्मक लोगों से बहुत अलग है, क्योंकि नकारात्मकता में, दो नकारात्मक लोगों को वास्तविक नकारात्मक बनने के लिए एक साथ अच्छी तरह जुड़ना पड़ता है । लेकिन सहज योग में अच्छे सहज योगी बनने के लिए दो विरोधी स्वभाव वालों को पूरक बन कर मिलना होगा। लेकिन यह पूरी स्वतंत्रता में, पूरी समझ के साथ किया जाना चाहिए। [मराठी में बातचीत]।

अच्छा सहज योगी होने के दायरे क्या है? एक शब्द में आप समझ सकते हैं। केवल एक छोटी सी बात,” जिम्मेदार होना है” । यदि आप एक जिम्मेदार सहज योगी हैं, तो आप अपना रास्ता खुद पाएंगे। अगर तुम नहीं हो, तो तुम विनाश में जाओगे। क्योंकि अगर आप जिम्मेदार हैं तो स्वयं परमेश्वर ही आपको अधिक देने वाला है। यदि आप गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार करते हैं,  आप गैर-जिम्मेदाराना ढंग से बात करते हैं, अगर आप  नहीं सोचते कि आप सहज योग के लिए क्या कर सकते हैं, तो आप सहज योग पर एक बोझ के रूप में सहज योग में आते हैं, और आप हमेशा उन लोगों की तरह जाते हैं जो वजह हैं … बातचीत मराठी]। उसे करना चाहिए था, मैं क्यों करूँ? मैं क्या कर सकती हूँ? मेरा मतलब है कि वह कौन है, आप कौन हैं? वह सहज योगी हैं, आप भी सहज योगी हैं। जो लोग अपने व्यवहार में हर तरह से जिम्मेदार होते हैं।

मोहम्मद साहब इस बात पर बहुत सजग रहे हैं और उन्होंने बहुत स्पष्ट रूप से कहा था कि परमात्मा की उपस्थिति में नमाज करते समय आप जहां बैठे हैं वहां से  हिलना भी नहीं चाहिए, आपको हिलना नहीं चाहिए, आपकी आंखों को घूमना नहीं चाहिए, आपको जम्हाई नहीं आना चाहिए। बहुत सी बातें हैं यदि आप मुझसे पूछें तो मैं आपको यह भी नहीं बता सकती कि उन्होंने इस पर कितनी बातें कही हैं। व्यवहार के सभी विवरणों के लिए उन्होंने बड़ी अच्छी बातें कही हैं। एक बार जब आप खुद को जिम्मेदार महसूस करने लगेंगे तो आपको पता चल जाएगा कि कैसे व्यवहार करना है, क्या करना है, क्या नहीं करना है। फिर, जब आप जिम्मेदार होते हैं तो आप चकित हो जाएंगे आप अपनी अधिकांश आदतें, स्वचालित रूप से, किसी भी आदत को छोड़ देंगे। माना की कोई बहुत बातूनी व्यक्ति है। यह आदत छूट जाएगी क्योंकि आपको पता चलेगा कि बहुत अधिक बातें करने से कभी-कभी आप गलतियाँ कर रहे हैं। तो यह एक संतुलन में आ जाता है । अगर कोई बिलकुल बात नहीं करता है, तो वह जिम्मेदार हो कर जानेगा कि यह मददगार नहीं है, आपको बात करनी होगी। वह बात करना शुरू करता है। केवल एक शब्द ” जिम्मेदार होना है ” ।

एक बार जब आप सहज योग की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले लेते हैं, तुरंत आपके नए जीवन के सभी आयाम खुल जाएंगे। आप में ज्ञान उमड़ पड़ेगा| आप जीवन से एक नए तरीके से संबंधित होंगे। और समझ की एक नई शैली विकसित होगी। आपके सामने जीवन की सूक्ष्मताएँ खुल जाएँगी। आनंद आप पर बरस जाएगा, जब आप सोएंगे, तो आपको ऐसा लगेगा जैसे गंगा (एक पवित्र नदी) आपके सहस्रार के ऊपर बह रही है, जमुना (एक पवित्र नदी) आपके पैरों को धो रही है। आप वास्तव में ऐसा महसूस करते हैं। लेकिन आपको जिम्मेदार होना होगा। मैं देख रही हूं कि बहुत कम उम्र के लोग भी हैं … हमारा मोर्सको बहुत जिम्मेदार लड़का है, वह बहुत छोटा है। सहज योगियों के लिए वह जो भी संभव है करना पसंद करेगा , वह बहुत युवा है, वह इतना जिम्मेदार है। इसके लिए आपके पास पैसा होना आवश्यक नहीं है,  इसके लिए जिम्मेदार होने के अलावा कुछ भी नहीं चाहिए। इसका मतलब यह नहीं है कि अगर आप दस बार मेरे घर आते हैं और अगर आप मेरे साथ, मेरे बगल के कमरे में हैं, तो आप जिम्मेदार हैं। यह एक गलत विचार है।

जिम्मेदार का मतलब यह भी है कि दूसरों को मौका दिया जाना चाहिए, मुझे क्यों दूसरों को होना चाहिए? और जब आप एक जिम्मेदार सहज योगी जीवन जीने लगते हैं, तो हजारों विकसित आत्माएं आपके आसपास मंडराने लगेंगी। आपके चेहरे पर एक अलग सी रोशनी होगी। तुम चकित होओगे जब तुम बोलोगे तो तुम चकित होओगे कि तुम कैसे बोल रहे हो। चीजें कैसे हो रही हैं, हर पल कैसे चीजें कार्यान्वित हो रही हैं। वैसे ही आप जानने लगते हैं कि चीजे कैसे सहज हो रही हैं, कैसे यह कार्यान्वित है, आप जानते हैं कि यह हर पल काम कर रहा है।

 आप केवल सहज जिम्मेदार होने के लिए मंच पर हैं, अन्यथा उनमें से हजारों आपके लिए काम करेंगे। मंच पर बहुत कम लोग हैं। मंच के पीछे, हजारों हैं। उदाहरण राहुरी (भारत) में इन तीन लोगों का है। वे कितने जिम्मेदार हैं और उन्होंने कितनी जिम्मेदारी से व्यवहार किया है। और जब आप इस ढंग से विचार करना शुरू करते हैं कि, मैं इसके लिए जिम्मेदार हूं, तो बस तौर-तरीके खोजें। यदि आपको लगता है कि आप अपने परिवार के लिए जिम्मेदार हैं, तो आप अपने परिवार को चलाने के सभी तौर- तरीके जानेंगे। लेकिन अब आप सहज योग के लिए जिम्मेदार हैं।

 सहज योग की समस्या यह है कि,जिम्मेदारी की भावना केवल आपकी स्वतंत्रता के माध्यम से आ सकती है । लेकिन एक नकारात्मक व्यक्ति के लिए यह भावना अपने-आप ही अच्छी तरह से आ जाती है। हर एक, यदि इन गुरुओं पर नकारात्मक आरोप लगाया गया है, वह बस इसके बारे में बात करना शुरू कर देता है। उसने अपने गुरु को बिलकुल देखा भी नहीं होगा, हो सकता है उसे एक पाई बराबर चीज़ न न मिली हो,  लेकिन वह इस बारे में बात कर रहा होगा। आप उससे पूछें कि क्या हुआ है, वह किस तरह अच्छा है पर कोई उत्तर नहीं। क्योंकि वह नकारात्मक रूप से आवेशित है, कोई स्वतंत्रता नहीं है। क्या इसका मतलब यह है कि स्वतंत्रता में मनुष्य जिम्मेदार नहीं हो सकता है? क्या यह है कि मनुष्य अभी तक इतना विकसित नहीं हुआ की जिम्मेदार हो सके? कोई उन पर हावी हो या उन्हें चलाये अन्यथा वे कुछ भी जिम्मेदारी से नहीं कर सकते हैं। तो सहज योग में जब हम अपने स्वयं के विकास और अपनी स्वयं की मुक्ति के बारे में सोचते हैं …