Talk To New Yogis, Problems From Fake Gurus

New Delhi (भारत)

1977-02-19 1 Shri Mataji New Yogis 1, 50'
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Naye Sahaj Yogiyose Batchit, New Delhi, 19-02-1977

आप में से बहुत से लोग पार हो गये हैं माने इनके हाथ में से वाइब्रेशन्स आये हैं। मैंने पहले भी चक्रों के बारे में बताया है आपको। और मैं ये मानती हूँ कि आप में से बहुत से लोगों के हाथ में से वाइब्रेशन्स आये। लेकिन ऐसे भी बहुत से लोग देख रही हूँ कि जिनके नहीं आये हैं। अब जो लोग पार हो गये हैं, जिनके हाथ से वाइब्रेशन्स आ रहे हैं और जो निर्विचार हो गये हैं, उनके लिये कोई बात कही जाये, तो उनको भी सुन लेना चाहिये जो अभी नहीं हये हैं। क्योंकि वो भी हो जायेंगे पार। पार तो जितने भी हो सकते हैं होने चाहिये और हो ही सकते हैं अधिकतर लोग पार। लेकिन किसको अगर ये पहले से ही दिमागी जमा-खर्च है बहत सारे और कुछ आयडियाज हैं फंड के बारे में, ये और वो, तो जरा उसको जरा टाइम जादा लगता है। क्योंकि पहले उसको उसके रस्ते पे लाना पड़ता है, जैसे कोई दूसरे रस्ते पे चला गया हो। जैसे अभी आपने मुझे चिठ्ठी दी कि बिल्कुल उल्टा रस्ता है, आपने जो बताया एकदम उल्टा रस्ता। और वो यही धंधे करते आ रहे हैं। हजारों आदमी उनके पास जाते हैं, और इसी तरह से उनका सर्वनाश होता है। और इस सर्वनाश में, मैं हिसाब लगा रही थी, कि इस देश में या समाज में करीबन तीन करोड़ लोगों का सर्वनाश हो गया है, अपने भारत देश में। तीन करोड़ लोगों का व्यवस्थित रूप से सर्वनाश हो चुका। इनका बचना बहुत ही कठिन है। एक तो इनका इधर आना ही मुश्किल है। और आयेंगे तो भी ऐसी हालत में कि बिल्कुल आखरी दफ़ा में आयेंगे । तब उनके बारे में यही सोचना चाहिये कि ठीक है, अगले जनम में होगे। अब आपको जो अनुभव आया है ऐसे ही अनुभव सब को नहीं आयेंगे यहाँ। कुछ लोग इस में संगनमत हो जायेंगे, समरस हो जायेंगे और वो जो चाहेंगे वो काम करेंगे। अब एक बात ये सोचनी चाहिये कि अपने मन की धारणा जो है, सहजयोग के प्रति की हमें कुछ पाने का है। हमें कुछ लेने का है। हमारे अन्दर इस की जरूरत है । इसे हमें पाना है। सत्य को वरण करना पड़ता है। सत्य के लिये ऐसा अगर मनुष्य कहे, कि मैंने सत्य को मान लिया और मैंने सोचा कि इसे अभी आप ….(अस्पष्ट), कि आप पैसा नहीं लेती हैं, और आपकी तरफ मैं आकर्षित हो गया और भी बातें उन्होंने ऐसी ही बतायी। ठीक है आपका कहना कि आप इस की तरफ आकर्षित हैं, आप आये। ये आपने किया। लेकिन ये धारणा ठीक नहीं है मन की, ऐसा है कि जैसे कोई हमारी गरज है। आपकी कोई नहीं। | बातचीत में होना चाहिये कि हमें तकलीफ़ हैं, इसको दूर करिये। ये समझने वाली बात है। या ये हुआ कि हो जाये तो अच्छा है। ये धारणा होनी चाहिये साधारणत: सहजयोग के प्रति। कारण दो चीज़ें हैं, एक तरफ़ आप हैं, एक तरफ़ सारे देवता हैं और देवताओं के अपने अपने स्थान बने हये हैं चक्रों पर। इनको अगर आपने अपमानित किया है, दुखी किया है या उनको इन्जुअर्ड किया है, किसी तरह के आघात पहुँचाये हो, तो उनको जगाने में बहुत कुछ करना होगा। उनको व्यवस्थित लाने में बहुत कुछ करना होगा । और उनको व्यवस्थित लाने के लिये जो भी मेहनत हम कर रहे हैं, उसमें अगर आप सहमत नहीं है, तो वो तो कभी भी नहीं हो सकती। एक और चीज़ है, यहाँ एक मिनिस्टर साहब है। आप उनसे मकान लेना है । सांसारिक लोगों को सांसारिक ।

बातें ज्यादा होती है। अब आपको मिनिस्टर के पास जाना है और उनसे मकान लेना है। इसलिये आपने कोई एक ऐसा इन्सान ढूँढ लिया कि आप मिनिस्टर साहब से कह दीजिये कि हमें मकान दीजिये। लेकिन अगर मिनिस्टर ये जान ले कि आप सहमत ही नहीं है मकान लेने के लिये, तो वो मकान कैसे मिलेगा? और आप जिससे कह रहे हैं,वो भी सहमत नहीं है तब भी मिनिस्टर साहब कैसे माने? इसी तरह से इस चीज़ को समझ लेना चाहिये कि जब आप सहजयोग में आते हैं, तो ये सोचना चाहिये कि सहजयोग एक परमेश्वर की देन है और ये आपके लिये अन्दर में व्यवस्था की गयी है। आपको अपना दीप जलाना है, आप आईये और आप दीप जलाईये। अब उसमें आप बुद्धि से तर्कवितर्क कर के कि भाई, इसमें ऐसा है इसलिये मैं आ रहा हूँ। उसमें वैसा है इसलिये। तो आप बुद्धि के माध्यम से आये। जैसे बहुत से लोग मुझे कहते हैं कि आप सफ़ेद ही साड़ी क्यों पहनती हैं? अगर मैं लाल पहनूं तो पूछेंगे कि की बुद्धि की बात है। क्योंकि सहजयोग की खूबी जो है वो ये है, कि आपकी पूरी लाल क्यों पहनी? ये मनुष्य (अस्पष्ट) है। आप आना चाहे आये, चाहे नहीं आये। आप जाना चाहे आप बाकायदा जाये। कोई उसमें आपको हम रोकने वाले नहीं। एक बार भी हम हाथ पकड़ के बुलाने वाले नहीं हैं। आप अपने शौक से आये हैं तो बैठो, आपको सहजयोग का लाभ होगा। लेकिन आपको अगर जबरदस्ती हम करे तो नहीं होने वाला। ना हम आपको किसी भी तरह का बंधन डालते हैं, कि आप आईये, आप बैठिये। आप हमें छोड़ के जाईयेगा तो आपका भला-बुरा होगा, इससे कोई लेना देना नहीं। आप आईये अपना भला कर लीजिये। आप अगर इस चीज़ पे पहुँच गये कि हमारे लिये कोई भी बंधन नहीं है माँ का। हम यहाँ पर माँ का दर्शन लेने के लिये आये हैं। तो दूसरी बात ये होनी चाहिये कि जब माँ के पास आये हैं तो श्रद्धा जरूर होनी चाहिये कि नहीं? बगैर इसके कि आप कहे कि हम तो कोई, हम आपके लिये कर रहे हैं तो हमें दें। तो हम क्यों दें? सीधा हिसाब हैं। हम तो दे ही दे। क्योंकि माँ का रिश्ता हैं। माँ तो ऐसी हैं, कि कोई एक बार बेटा कह दे तो हो गया। लेकिन और जो बैठे हये हैं आपके बड़े दादा लोग, वो लोग तो इस चीज़ को पहचान लेते हैं। वो फौरन पहचानते हैं कि आप के अन्दर कोई श्रद्धा नहीं। थोड़ी सी श्रद्धा होनी चाहिये । ये मैं आप से अन्दर की बात बताती हूँ। थोड़ी सी तो श्रद्धा देखिये , होनी ही पड़ेगी। और नहीं तो काम नहीं होने वाला। दूसरे ये की आपकी अगर शरीर व्यवस्था ठीक नहीं है, शरीर में कोई दोष है, कोई तकलीफ़ है, अगर आपका मन है, उस पर कोई आच्छादन है। आपके मन में कोई तकलीफ़ है। जैसे कि बहुत से पागल लोग होते हैं। किसी का दिमाग खराब होता है।……(अस्पष्ट) जिनमें बहुत बाधा हो जाती है। और ऐसे भी लोग होते हैं, किसी को तकलीफ़ होती है, तो उनका भी पार होना बहुत मुश्किल होता है। ये मैं आपसे पहले ही कहती हूं। पर सब से मुश्किल, जैसे आपने अभी चिट्ठी दी, इन लोगों का हो गया। मतलब ये लोग बेचारे संसार में फँसे ह्ये हैं। जिनका माथा गलत लोगों के सामने झुक गया। तो ऐसे इन्सान की कुण्डलिनी उठती ही नहीं है। अपनी जगह से वो उठती ही नहीं । और हम कैसे जानते हैं कि गुरु हैं आपके? क्योंकि वो जब कुण्डलिनी बिल्कुल जमी बैठती है तो समझ लें कि भाई, ये जो रूठी बैठी है, तो ये बात है। और अगर आपने अनेक गुरु कर लिये हैं, और अनेकों सामने अपना माथा झुकाया है। तो आप हमारे उपर भी सद्विचार लाने के लिये कहते हैं कि, ‘नहीं, हमें आपको पार कराना है।

ये तो गलत बात है। हम तो ये भी नहीं कहते हैं कि हमारे आगे माथा झुकाओ। बिल्कुल नहीं। रियलाइजेशन से पहले कोई जरूरत नहीं कि हम आपको रियलाइजेशन इसके बगैर नहीं दें। कोई जरूरत नहीं मेरे आगे भी माथा टेकने की। पर अगर आपको रियलाइजेशन हो जाता है, फिर आप देखियेगा कि हमारे पैर पे आये बगैर मज़ा नहीं आने वाला। तब यही मज़ा है। लेकिन ऐसे लोगों को भी पार तो करना ही है। लेकिन उनको थोड़ा समय लगता है। (अस्पष्ट) बहुत जरूरत है पेशन्स रखने की। ये लोग जो होते हैं, ये इस तरह से आपके चक्रों को पकड़ लेते हैं, इन्फर्मेशन होती है और वो उठती ही नहीं है। पूरी तरह से अपने चक्रों पर बाधायें कि कुण्डलिनी को बिल्कुल छोड़ती हैं। जैसे कि इनका नाम अभी आपने बताया। वो पढ़ने में कोई हर्ज न हो तो वो पढ़ के सुनायें। बतायें, जरा | पढ़ के सुनायें। वो चिट्ठी जो आपने दी है। जरा पढ़ के सुनाईये। (लेटर पढना) अब जो लोग पार ह्ये हैं, उनको बता रही हूँ, लेकिन जो नहीं हये हैं वो भी होंगे। हाथ ऐसे करिये। पार कराने के लिये कोई लेक्चर्स नहीं होते हैं यहाँ। सीधा हिसाब हैं। आप पार होते हैं, किसी भी लेक्चर्स से नहीं होते हैं। पर एक्स्पोज करने से होते हैं अपने। क्योंकि ये शक्ति हमारे अन्दर से ऐसी बह रही है। आप सिर्फ अपने को एक्स्पोज कर रहे हैं। जब वो शक्ति आपके अन्दर चली जाती है, अतिसूक्ष्म तरह से, तो आपकी कुण्डलिनी को पता हो जाता है कि आप किस के सामने बैठे हैं। वो हमें जानती है। तब वो खड़ी हो जाती है। और वो उपर आती है। उपर आ कर के आपका ब्रह्मरन्ध्र छेद देती है। तब आपके अन्दर से धीरे धीरे ठण्डी ठण्डी हवा शुरू हो जाती है। इसके बाद आपको पता होता है, कि हमारे अन्दर से एक ठण्डी ऐसी चीज़ बह रही है , पूरी तरह। धीरे धीरे जब आप इसमें बढ़ने लगते हैं। जब आप इसको मास्टर कर लेते हैं सारे शास्त्र को, तब आपको कोई शंका नहीं रह जाती। आप खुद ही इस शक्ति को अपने आप अन्दर पा कर के और सारे संसार का उद्धार करते हैं। हमारे यहाँ ऐसे लोग हैं आप जानते हैं। ये पार हो गये हैं। अनेक कार्य कर रहे हैं और दिल्ली में जो लोग पार हुये हैं, उनमें से बहुत कम लोग आते हैं। ये बड़ी खराब बात है। हमेशा दिल्ली में ऐसा देखा है कि पार होने के बाद खुद पे मज़ा आ रहा है। अब घर जा के थोड़े आराम करते हैं। ये गलत बात है। आपको दुसरों की मदद हमेशा करनी चाहिये । इसलिये होता क्या है कि दिल्ली लोग ट्रेन्ड नहीं हो पाते। और जगह तो लोग हो जाते हैं। लेकिन दिल्ली में बड़ी एक कमजोरी हैं। यही आदत है कि घर जाने के जल्दी होती है। इससे और लोग कोई पार नहीं होते हैं। बम्बई में हजारों लोग हो गयें, और जगह हजारों के तादाद में लोग हैं। सब से कम दिल्ली में है। यहाँ सभी जाती के, सभी प्रांत के, सभी देश के लोग हैं क्योंकि चक्कर ऐसा है इनके साथ, पार होने के बाद मुझे रास्ते में मिलेंगे, कहेंगे कि माताजी, आपका फोटो हमने मोटर में लगा रखा है । हम आपकी रोज पूजा करते हैं। लेकिन कभी नहीं आयेंगे कि चलो, हमारा प्रोग्रॅम जहाँ होता हैं वहाँ आयें। या दूसरों की मदद करें या किसी को ट्रीट करें, कुछ नहीं। अब आप हाथ ऐसा करें तब मैं आपको बताऊँगी। थोड़ा से ये सब लोग जो पार हो गये हैं उनको दिये हैं। और भी ऐसा कर के बैठिये। सब कुछ खास करने का नहीं। सहजयोग में आप जानते हैं कि आपके अन्दर सब व्यवस्था है। सिर्फ इसको जानने की बात है। अपने ही अन्दर कुण्डलिनी हैं। आप जानते हैं कि पूरी व्यवस्था अपने अन्दर बनायी हयी है। और इस प्रकार के सात चक्र आपके अन्दर बैठे हये हैं। और इन सात चक्रों के ही अन्दर जब कोई |

(अस्पष्ट) हो जाता है, तब कुण्डलिनी नहीं उठती। नहीं तो कुण्डलिनी साढ़े तीन कुंडलों में बैठी हई है, अपने आप पूरा कार्य कर रही है। अगर किसी चक्र में खराबी होती है तो उस जगह जाती है, और उसकी मदद करती है। आपने देखा होगा कि बहुतों की कुण्डलिनी जब जगती है उस जगह पे कहीं न कहीं उसका ब्रीदिंग दिखायी देता है। वो ब्रीदिंग ऐसा चलता है, कि जिसका जो भी चक्र पकड़ा हो, वही कुंडलिनी का वही हिस्सा …. (अस्पष्ट) जाता है। अब मैं रियलाइजेशन के बाद की बात बता रही हूँ। इसमें से जो रियलाइज्ड हो गये हैं लोग वो सुन सकते हैं और जो नहीं हुये हैं वो भी सुनेंगे। लेकिन सब लोग इस तरह से हाथ कर के बैठें रहें। सभी। और मैंने आपसे पहले कहा था कि कुण्डलिनी, जैसे कि एक कॉर्ड हैं उस प्रकार आपके अन्दर होती है और आप एक कॉम्प्युटर। आप एक कॉम्प्युटर हैं और आपका कॉर्ड जो हैं मेन्स से लगा दिया है। और ब्रह्मरन्ध्र के अन्दर लगा दिया है। यहाँ पे देखिये। अब जब ब्रह्मरन्ध्र में लग गया तो आपके पास क्या इन्फर्मेशन आ रही है, ..(अस्पष्ट) ने कहा है कि युनिवर्सल अनकॉन्शस है और उसमें से ऐसे ऐसे ….(अस्पष्ट) आते हैं, जो युनिवस्सल होते हैं, जो हमारे जीव में आ कर हमें हार्मनी और संतुलन देते हैं और हमें आदेश देते हैं, फ्यूचर के। वो कहते हैं कि ये कोई तो भी युनिवर्सल अनकॉन्शस नाम की एक शक्ति है, जिसको हम लोग सर्वव्यापी परमात्मा की सर्वशक्ति कहते हैं। युनिवर्सल अनकॉन्शस इसलिये कहते हैं कि ये हमारे कॉन्शसनेस में नहीं है। वो अनकॉन्शस रहते हैं। अचेतन, जो हमारी चेतना में नहीं आया हो । जब आ जाता है तब कॉन्शसनेस आ जाती है। तो इसमें आपको युनिवर्सल कॉन्शसनेस आ जाती है। युनिवर्सल कॉन्शसनेस आ जाती है माने कोई लेक्चर्स से नहीं आती, पर ये घटित होती है। आपके अन्दर ये एक हैपनिंग है जो हो जाती है । आपके अन्दर ये चीज़ बहने लग जाती है। और आप एक नयी, एकदम नयी चेतना में, एक नये अवेअरनेस में आ जाते हैं। जैसे कि अन्धा आदमी है। वो नहीं देखता है। वो देख लेता है। क्या मनुष्य है वो खूबसूरती चीज़ जानता है। इसी उसका भी कोडिंग होना जरूरी है। जैसा कि …. प्रकार एक नये अवेअरनेस में आ जाते हैं। जहाँ कलेक्टिवली कॉन्शसनेस है। माने क्या हो जाता है कि आपके हाथ पर सब के कुण्डलिनी के चक्र दिखायी देते हैं। उसी वक्त,उसी क्षण। जैसे आप पार हो जाते हैं, वैसे अगर आप खुद की ओर हाथ कर के देखें, तो आप फौरन बता सकते हैं कि आप की कौन सी उंगली जल रही है। अब आपका ये जो नॉलेज होता है ये आब्जेक्टिव होता है। दो नॉलेज समझ लीजिये। एक बाहर से जाना जाता है, एक अन्दर से जाना जाता है। जैसे कि हम कहीं के मैनेजर हैं। तो हमें अपने ऑफिस के बारे में सारी मालूमात है। अब बाहर से अगर कोई आदमी जानना चाहता है, कहाँ से आते है? किस चीज़ का है? लेकिन जो अन्दर का आदमी है वो तो सब कुछ जानता है। इसी प्रकार हो जाता है। जब आप किसी की ओर हाथ करते हैं, रियलाइज्ड इन्सान, उसके हाथ से ठण्डी हवा आने लगती है। तो उसके उंगलियों पे ये पाँच चक्र हैं। ये छठा चक्र है और ये सातवाँ (चक्र चार्ट पर दिखा रही है।) । ये पहला वाला मूलाधार चक्र है तुम्हारा। यहाँ दिखाया है। मूलाधार, जिस पे श्रीगणेश का स्थान है। अब एक लेफ्ट हैं और एक राइट है। दो हाथ में, एक लेफ्ट साइड है, एक राइट साइड है। लेफ्ट सिम्पथैटिक नर्वस सिस्टीम है और राइट सिम्परथैटिक नव्वस सिस्टीम है। अब डिकोडिंग बताने वाला कोई चाहिये था, इसलिये हम आये।

क्योंकि कोई आपको डिकोडिंग बतायेगा नहीं तो कॉम्प्युटर को आप कैसे इस्तेमाला करेंगे? अब इस हाथ में यहाँ पर आपको पहले मूलाधार चक्र है। मूलाधार चक्र जो है नीचे में हैं। इसी की चार पंखुड़ियोाँ मैंने आपको बतायी थी। ये श्रीगणेश का स्थान है। अब जो लोग रियलाइज्ड हैं वो पूछे कि, ‘क्या मूलाधार पे श्रीगणेश का स्थान है ? श्रीगणेश के पीछे क्या आपका स्थान मूलाधार चक्र पे है?’ आपके भी ज्यादा आ गये हैं। सब के लिये थोड़ा सा आ जायेगा। क्योंकि प्रश्न बहुत बड़ा है। आ रहा है। हाथ पे कुछ ज्यादा आ रहा है तो। पहले से ज्यादा हुआ है कि नहीं? पूछिये, भगवान से पूछियेगा, यूँ हाथ कर के पूछिये। आ रहा है? (पब्लिक में पूछ रही हैं) जब आप दूसरों पे हाथ रखेंगे तो पता चलेगा । अच्छा, आप जब दूसरों पे ऐसा हाथ करते हैं तो आपको ऐसा लगेगा कि जैसे यहाँ जल रहा है, या यहाँ जल रहा है। अब लेफ्ट और राइट, ये इमोशनल साइड हैं और ये ….(अस्पष्ट) साइड है। अगर आपके यहाँ (इमोशनल साइड) जलन आ रही है, माने ये कि इस आदमी के सेल्फ पर ऐसा आघात किया है, खास कर जितने भी कुण्डलिनी को जागृत करने वाले लोग होते हैं, क्योंकि वो सबलिमेशन ऑफ द … ..| बहुत बड़बड़ करते हैं लेफ्ट हैंड साइड। इसको पकड़ना, जलन सी आती है। और अगर यहाँ जलन आये तो समझना चाहिये कि अगर हमारे फोटो की तरफ़ करते हो, तो समझना चाहिये कि आपके अन्दर कोई तो भी यहाँ दोष आया है। राइट साइड में आ जाये तो हो सकता है कि आप के खुद पे कोई दोष है। अगर ये नंब हो जाये इंपोटेन्स की साइन है। अगर नंबनेस आ जायें तो आप समझ लीजिये कि वो आदमी इंपोटेन्स है। और अगर इसमें इस तरह से उपर में आ जाये, तो ये सोचना चाहिये कि इस आदमी को बहुत कॉन्स्टिपेशन है। करते करते आपके हाथ इतने सेन्सिटिव हो जाते हैं कि ऐसे आप हाथ करते ही एकदम कह सकते हैं। और जो लोग बॉर्न रियलाइज्ड होते हैं वो तो बगैर देखे ही, मतलब ऐसा किये बगैर ही बता देंगे कि इनको ऐसी ऐसी तकलीफ़ हैं। एक जनरल तरीके से मैं बता रही हूँ। उसका बारीक बारीक, जब मैं किताब लिखंगी तो उसका बारीक बारीक लिखूंगी। लेकिन आप खुद ही समझ लेंगे बात। अब ये उंगलियाँ…, अंगूठे की। इन अंगूठों में स्वाधिष्ठान चक्र है। इस चक्र से राइट हैंड साइड में, जैसे मैंने पहले बताया है, क्रियेटिविटी आती है। स्वाधिष्ठान चक्र पे श्रीब्रह्मदेव का स्थान है। और श्रीब्रह्मदेव का स्थान है, उनकी शक्ति सरस्वती जी है। अगर कोई आदमी बहुत, जरूरत से ज्यादा सोचता है तो , प्लॅनिंग करता है, विचार करता है, तो इनकी शक्ति इस्तेमाल करता है। और इसी अंगूठे के अन्दर जो चक्र है, स्वाधिष्ठान चक्र, वहाँ जो दिखायी दे रहा है, इसी को आप देख रहे हैं कि वो चारों तरफ घूमता है। इनसे दूसरा जो कार्य होता है, इनके किनारे पे जितनी भी चीजें हैं, उनके जो ऑर्गन्स हैं उनको ये सप्लाय करता है। याने कि आपकी किडनी, उपर हिस्से का लिवर, (अस्पष्ट) इतनी सब चीज़ों को ये सम्भालता है। और अगर इस चक्र पे आपको बहुत जोरो की पकड़ आ जायें, तो समझ लेना चाहिये कि आपको कोई न कोई, या तो डाइबेटिस की बीमारी हो सकती है। एक्झॅम्पल समझ लीजिये । और या तो कोई स्प्लीन की हो तो इसकी बीमारी हो सकती है। जब ये दोनों ही पकड़ने लग जाते हैं, और बहुत जोरों से अगर जलना शुरू हो तो कैन्सर हो सकता है। ये समझ लेना चाहिये। क्योंकि उसको ज्यादा …..हो जाता है। और अगर उस पे हो जाये तो सोचना चाहिये कि कोई न कोई बाधा, कोई न कोई बाहर की इन्टीटी काम कर रही है। और जो की इन सब पे बैठी हुई है। अब जैसे आप लोगों को विश्वास होने जैसी बात नहीं है।