Sab Chijo me Mahamantra ho New Delhi (भारत)

Sab Chijo me Mahamantra ho, India, 16-03-1977 सब चीज़ों में महामन्त्र हो भारत, १६ मार्च १९७७  कल आपसे मैंने बताया था ध्यान के वक्त कि आप इस तरह से हाथ कर के मेरी ओर बैठें और आपके अन्दर चैतन्य धीरे-धीरे बहता हुआ आपकी कुण्डलिनी को जागृत कर देगा। ये सारी प्रक्रिया ऐसी लगती है जैसे कोई बच्चों का खेल है। और आप लोगों ने इन लोगों को देखा भी होगा जो यहाँ पर सहजयोगी लोग थे कि वो अपने हाथ को घूमा-घूमा कर के और आपको कुछ चैतन्य दे रहे थे और कुछ कार्य कर रहे थे। मामूली तौर से ये चीज़ अगर देखी जाये तो एक बच्चों का खेल लगता है।  जिस वक्त मोहम्मद साहब ने लोगों को नमाज पढ़ने के लिए बताया था तो लोग उनका मज़ाक करते थे और जिस वक्त अनादिकाल में ही होम-हवन आदि हमारे देश में शुरू किये गये थे तब भी ऐसे लोग थे जो सोचते थे कि ये क्या महामूर्खता है? ये क्यों करें? और जब वो बातें रूढ़ीगत हो जाती हैं तब मनुष्य इसको इस तरह से मान लेता है मानो ऐसे कि ये आपके जीवन का एक अंग है। जैसे नमस्कार करना। हम लोग, हिंदुस्तानी आदमी किसी को देखते ही नमस्कार कर लेते हैं। उसके बारे में ये पूछा नहीं करते कि इस तरह से दो हाथ जोड़ के हमने क्यों नमस्कार किया? और पूजा के समय हम इस तरह से आरती क्यों करते हैं और अपना हाथ इस तरह से क्यों घुमाते हैं? साथ में हम दीप ले कर Read More …