Triguna

New Delhi (भारत)

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Trigun – Bhartiy Sanskruti Ka Mahatva IV Date 3rd February 1978 : Place Delhi : Public Program Type : Speech Language Hindi

[Original transcript Hindi talk, Scanned from Hindi Chaitanya Lahari]

जिस शक्ति को आप इस्तेमाल कर रहे हैं उसे चल रहा है, माताजी थोड़ा म्यूजिक कर दें? हमने Refill कर लेते हैं हम। Modern बीमारी एक और कहा कर दो भाई। ऐसे ही बैठेगें आराम से। हमारे जिसे हम Tension कहते हैं। Tension’ मुझे तो Vibrations चलते रहते हैं, आप Receive करते Tension आ गया, पहले किसी को Tension नहीं रहिए। अब उन्होंने ज़रा लम्बा चौड़ा कर दिया जरा Music, तो लोग कहने लगे अब जरा जल्दी खत्म आता थी। तब तो Tension आना ही हुआ कि आप निकले पुरानी दिल्ली से माताजी के Programme करो, जल्दी खत्म करो। मैंने कहा क्यों भई तुमको में जाने के लिए। अब 6.30 बजे पहुँचना ही चाहिए, मेरा Lecture सुनने का है पर मेरी तो आज तबियत पहले सीट पर बैठना ही चाहिए। देर से जाएंगे, नहीं कर रही। अपने तो तबीयत से चलते हैं, कोई हर्ज नहीं, देर से भी आ सकते हैं। वो समय Temperamental आदमी हैं, अभी आज तो भई आप के आने का था आप आ गए कोई बात नहीं। ऐसी कौन सी आफत मची हुई हैं? भाई मुझे कहाँ भी सुनो मेरे साथ। आराम से क्यों नहीं सुनते? जाने का है और आपको कहाँ जाने का है? आराम अच्छा म्यूजिक चल रहा है, भई सुनो। ऐसी कौन तबीयत हो नहीं रही। तो म्यूजिक ही सुनने दो, तुम | से बैठेंगे दो चार बातें करेंगे, चलो हो गया सहजयोग सी आफत आई है? मेरे तो चल ही रहे हैं Vibrations, पूरा। कौन सी आफत मचाने की चीज है? कोई मैं चाहे भाषण देऊं, चाहे नहीं देऊं, वो तो चल ही नहीं। इतने सरल सहज आराम से बैठिए वैसे ही रहे हैं। हर समय कार्यान्वित हैं एक क्षण भी नहीं आप को सहजयोग प्राप्त होगा। रुक रहे। अरे Lecture ही में क्या रखा है वो मेरी मैं देखती हैं कि सहजयोग में भी लोग इस समझ में ही नहीं आया। सब शान्ति से बैठें। अच्छा तरह से Planning करते हैं। मुझे आती है बड़ी भला म्यूज्कि चल रहा है, बीच में आप क्यों चिल्ला हँसी। जैसे आप ये कहें कि दो दिन बाद यहाँ पर रहे हैं? हम लोगों को आदत ही पड़ गई है। ये फल लगेगा तो मैं मान जाऊं। दो दिन बाद 5 बजे आदतें छूटती नहीं । आराम से पाँच मिनट बैठकर कर 6 मिनट पर यहाँ पर फल लगेगा इस फूल में, के हम लोग किसी से कभी बात नहीं करते। कोई ये अगर आप कह दें और करके दिखा दें तो मैं गर अपने यहाँ दोस्त आया तो कहेंगे चल भई तेरे मान जाऊं। जो लोग जितना Planning करके को खाना खिलाऊँ। बीवी घर के अन्दर खाना यहाँ पर आते हैं उतना उनकी कृण्डलिनी नहीं बनाएगी. आप बैठे हुए वहाँ पर Politics झाड़ेंगे। जागृत होती। सहज समाधि लागो, सहज लगती कुछ भी नहीं हो तो T.V. चला लेंगे सब लोग T.V. है सहज माने बिल्कुल साधारण तरीके से। ऐसे देखो। अरे भई आपस में कुछ आदान-प्रदान करो, ही जो लोग होते है बातचीत करो। उनको ही मिलती है। अब कुछ काहे मार-धाड़ किए हो भाई? ऐसी कौन सी आफत आ गई? अभी मुम्बई में एक Programme बैठे हैं? आपस में अनजाने ही आप चले जाते हैं। हो रहा था तो एक साहब ने कहा चलो भई Music ये फिर दोस्ती नहीं होती, दोस्ती किससे है आपको? आपने बुलाया है दोस्त को, आप T.V. लगा कर

कोई दोस्त ही नहीं है आपका। दोस्ती तो तब नहीं, कोई Friendship नहीं, कोई पहचान नहीं, आती है जब आपस में कोई मजा उठाया जाए। कुछ नहीं। नानी के घर आप जाइए बहाँ पर नानी दोस्ती उसे कहते हैं। आजकल दोस्ती का मतलब कहेंगी कि तू मेरे Telephone के दो पैसे दे, तब तू है कि Business आ गया, नहीं तो फिर ताश घर में पैर रखना। तुमने उस दिन टेलिफोन किया खेलो, ताश खेलने बैठ गए। तब तक भी ठीक है। था, उसके पैसे नहीं दिए थे, पहले उसके दो पैसे दे. फिर रुपया लगाया, काम खत्म। ताश में आप सारी चीज़ यही हो गई। इस तरह के artificial रुपया लगाइए, जिसने ताश में रुपया लगा लिया जीवन में भी imbalance आ जाता है क्योंकि artificiality के साथ रहना पड़ता है। किसी के घर अब हमने ये कहा कि आप balance में रहिये। जाइए साहब खाने पर बुलाते हैं, 8.00 बजे के गर काम खत्म । Balance में रहने का तरीका ये है कि आप जरा 8.30 बज गए तो मार चीखना शुरू कर दिया। क्या बैठिए, ज़रा देखिए, मजा देखिए । सवेरे सूरज अपने घर खाने को नहीं मिलता है क्या? देर हो उगता है, आकाश में देखिए कितने सुन्दर रंग आते गई तो कौन आफत आ गई? आ गए 8.30 आए हैं? यू ही चला जाता है। शाम को सूरज डूबता है चाहे 9.00 बजे आए । क्या हुआ? आओ बैठो आराम इतने सुन्दर रंग उगते हैं, सब वैसे ही चला जाता करो। Punctuality काहे के लिये चाहिए इतनी है। कितने ही खिलते हैं कितनी ही बहार ज्यादा? जरूरत से ज्यादा Punctuality करने की आती हैं, कितने ही रंग बदलते हैं, ऐसे ही सारा जरूरत नहीं। हॉ Punctuality एक चीज़ में होनी फूल काम चला जाता है। कितने ही लोग मिलते हैं चाहिए कि अपने अन्दर जो परमात्मा का call सबसे मिलते हैं और बगैर मिले ही लोग चले जाते है उसकी ओर Punctuality होनी चाहिए । हैं बिल्कुल अजनबी। कभी जाना ही नहीं! कोई मर गया तो उसके लिए फूल भेज दिया, चलो हो गया फौरन ध्यान में चले जाएं। Vibrations आ इस वक्त परमात्मा ने हमें याद किया है काम खत्म। जहाँ सबसे ज्यादा रजोगुण हो गया रहें हैं फौरन ध्यान में चले जाएं। उस मामले है वहाँ तो ये हालत है कि कोई मरता है, बाप भी में नहीं है Punctuality हमारे अन्दर। इससे मरता है तो पेपर में आ जाता है कि भई मर गए। क्या होगा, Punctuality से हुआ क्या? यही suicide वो बाप पहले से ही पैसे दे जाते हैं कि गर मैं मर जाऊँगा तो मेरा एक सूट सिला देना नया, मेरे को जिन देशों ने Punctuality बहुत रखी उन्होंने क्या प्राप्त किया? Punctuality से लोग आत्महत्या करते पहना देना और वहाँ लिखा जाता है कि फलानी हैं, आत्महत्या का भी time लिखते हैं। हमारे यहाँ तारीख को आप देख लीजिए उनकी Body पर | वो Punctuality पहले होती थी। इस तरह से कि हम दिखा देते हैं, देखो भई उनको सूट सिला दिया, पंचांग देखकर के Punctuality बनाते हैं ये महूर्त अब ये मर गए। सब लोग आते हैं, उसमें एक-एक अच्छा है, इस मुहूर्त पर ये कार्य करने से अच्छा है। फूल चढ़ा दिया, चले गए अपने घर। तो ये वहाँ उसमें तो तो आपने Consult किया Superior हालत है। कोई आदान प्रदान नहीं, कोई दोस्ती power को। परमात्मा से कुछ लेन-देन को कुछ

किया, लेकिन ये जो बिल्कुूल हमारी इस चीज़ को। कभी भी मैं बाह्य, इस तरह से दैनंदिन इस तरह की Punctuality और इस तरह छोटे-छोटे घरोंदों में विश्वास नहीं करती। न ही मैं का हम लोगों का बिल्कुल यांत्रिक जीवन हो गया उन भ्रमों में विश्वास करती हूँ जो बिल्कुल ही है इस जीवन से आप लोग ऊब जाएंगें, परेशान हो मनुष्यों ने बनाए हैं ये बिल्कुल ही बेकार के हैं। जाएंगे, घबरा जाएंगे। वही सवेरे उठना, वही दाढ़ी इन सब चीजों को तोड़ फोड़कर के ही अपने बनाना, वही मुँह धोना वही दफ्तर जाना, वही सहजयोग पनपा है। लेकिन धर्म का मतलब ये है आदतें। फिर वही घर पर आना, फिर वही बातें। कि हमारे अन्दर जो Sustenance power है, हमारे आप लोग घबरा जाएंगे घबराहट से फिर शुरू अन्दर जो बसी हुई innate धर्म है, हमारे अन्दर क्या होगा? वही चीज़ जो वहां हो रही है गांजा, एक-एक अंग-प्रत्यंग में जो बनाया गया है, उसको LSD और उससे भी नहीं तो हमेशा बेहोश रहना। जागृत करना चाहिए। इसके बारे में मैंने आपसे 1 मतलब पलायनवाद, भागो, इस दुनिया में जीने की कल बताया था कि अनेक धर्म हैं। उसमें से एक, आपको आश्चर्य होगा, कि सबसे बड़ा धर्म ये है कि सर्वधर्म समान हैं गाँधीजी ने कहा था क्या ज़रूरत है? जब मनुष्य जीवन में बोर हो जाता है तभी वह पलायनवादी जीवन को खोजता है। मनुष्य बोर इसलिए होता है क्योंकि वो अपने को सर्वधर्म समानत्व माने। उसका तत्व एक है ये जानता नहीं। जब वह अपने को जानता है तो समझ लेना चाहिए। पेड़ के अन्दर बहने वाली मस्ती चढ़ती है क्योंकि आप अपने अन्दर इस कदर शक्ति हर जगह जाती है, मूल में जाती है, उसके सुन्दर, इतने व्यवस्थित, इतने मधुर हैं कि फिर तने में जाती है, उसके पत्तों में भी जाती है, उसके ज़रूरत नहीं किसी की आप अपने ही साथ बैठे फूलों में जाती है और फिर वो वापिस लौटकर रहते हैं, बड़ा मज़ा आता है। जब आप अकेले होते वापिस चली आती है कहीं भी लिपटती नहीं। इसी हैं तब सब से अच्छे रहते हैं, बड़ा मज़ा आता है। तरह का निर्वाज्य, इसी तरह से अलग रहने वाला अपने ही जीवन को देखते रहते हैं, अपने ही अन्दर जो प्रेम है और जो शक्ति है, उस शक्ति में जो एक 1 अपने स्वर्ग को देखते रहते हैं। हाँ जब दूसरों से तत्व चारों तरफ घूम रहा है उसी प्रकार सारे ही मिलते हैं तो ये लगता है कि ये भी इस स्वर्ग में धर्मों में एक ही तत्व घूम रहा है । और वो सीधा हमारे साथी हैं। जैसे दो शराबी बैठ जाते हैं तब उन्हें मज़ा आता है, अकेला कोई पीता नहीं। इस स्थापना हमारे अन्दर हो जाती है, जब हम किसी तरह का एक खुमार जिन्दगी भर चढ़ा रहता है। भी धर्म के तत्व से प्लावित हो जाते हैं, उस तत्व को सादा सरल तत्व एक ही है कि जब धर्म की ऐसी बादशाहत गर पानी हो तो ऐसी बादशाहत जब हम अपने अन्दर पूरी तरह से स्थापित कर लेते हैं, तभी हमारा evolution हो सकता है। जैसे कि अन्दर भी आनी चाहिए। अपने अन्दर Balance लाना पड़ता है और ये हिन्दू धर्म के लोगों को एक ही तत्व सीखना चाहिए धर्म से होता है। धर्म से मेरा मतलब कभी भी हिन्दु कि सबके अन्दर एक ही आत्मा का वास है और मुसलमान से नहीं होता है, आप समझ सकते हैं जाति-पाति आदि चीजें ये जन्म से नहीं होती, ये পাu

४ १े ृल े कर्म से होती हैं यही तत्व हिन्दु इसमें दूसरा कोई सा भी तत्व नहीं खोजना है। गर आदर्श है, सबकी सेवा करनी चाहिए, इसकी सेवा इस तत्व को आपने पा लिया तो आप असली हिन्दु करो, उसकी सेवः करो। अब देखिए कि शूद्र क्यों हो गए बाकी तो आप अहिन्दु हैं। चाहे वो अपने को कहा गया, ये सोचने की बात है। बड़े आश्चर्य की मुसलमान कहलाएं चाहे वो अपने को ईसाई कहलाएं। बात है कि कोई किसी की सेवा करे तो वो शूद्र क्यों एक ही शक्ति, हम लोग तो शक्ति के पुजारी हैं न, है? ये सूक्ष्म बात है। इस सूक्ष्म बात को गर आप ही शक्ति सब के अन्दर बसती हैं और जिस समझ लें तो आप हिन्दु धर्म को समझ लें। किसी कर्म में मनुष्य लीन होता है उसी कर्म से वो जाना की सेवा जो करे वो शूद्र है क्योंकि दूसरा कोई है जाए। माने जो ब्रह्म कर्म में लीन है वो ब्राह्मण है, ही नहीं। गर हम आपको ठीक करते हैं, आपकी जितने सहजयोगी हैं सब ब्राह्मण हैं जो ब्रह्म में मालिश करते हैं, आपका सिर ठीक करते हैं तो हम लीन है वो ब्राह्मण है। जो आनन्द को सत्ता में अपने को ही ठीक कर रहे हैं असल में क्योंकि खोजता हैं वो क्षत्रिय है और जो आनन्द को पैसे हमारा ही सिर पकड़ा हुआ है । आपका पकड़ा है, में खोजता है वैश्य है, जो आनन्द को किसी की तो हमारे आप अंग प्रत्यंग हैं, तो हम गर इसे ठीक सेवा में खोजता है वो शूद्र है। आपको आश्चर्य नहीं करेंगे, हमारे अंग प्रत्यंग को तो हमें ही धर्म का है और होगा। हमारे अन्दर सेवा भाव का तो बड़ा भारी एक 5 ॐू ক

सी बात है। इसकी सूक्ष्मता को वो ही तकलीफ होती है। दूसरा कोई है ही नहीं। जिसने बड़ी सूक्ष्म ये ldea ले ली कि मैं दूसरे की सेवा कर रही हूँ पकड़ सकता है जिसमें सूक्ष्म गति है इसलिए जो बहुत ही शूद्र ldea है। जिसने ये सोच लिया कि आदमी ऐसे कहता है कि मैं संसार में बड़ा उपकारी मैंने बड़े भारी अनाथालय बना लिए, मैं जाता हूँ हूँ, मैं बड़ी मिठाइयाँ बाँटता हूँ और मैंने लंगर खोल गरीबों की सेवा करता हूँ। कौन हैं गरीब? आप हैं रखे हैं वो महामूर्ख गरीब। मुझे गरीबी इसलिए अखरती है क्योंकि ये उपकार करने का मनुष्य को कोई अधिकार नहीं है और शूद्र है। किसी पर भी मेरा ही Part and Parcel है अगर कोई इंसान है। उपकार तो एक ही करता है, परमात्मा। बो भी संसार में गरीब है तो ये मेरे लिए insult है, मैं ही अपने ही ऊपर उमकार कर रहा है किसी दूसरे पर गरीब हूँ। इतनी बड़ी उच्च कल्पना को जब आप नहीं। जब वो अपने से नाराज़ हो जाता है तो निम्न दिशा में देखते हैं इसी लिए ऐसा होता है। तहस-नहस कर देता है। जब वो अपने से प्रसन्न कोई भी बादशाह नहीं कहता कि मैं किसी की सेवा होता है तो सब ठीक-ठाक कर देता है और जब करता हूँ। चो देता है उससे बहता है, वो सेवा नहीं किसी पर उपकार करना होता है तो वो सारे संसार करता। सेवा में एक बहुत सूक्ष्म मूर्खतापूर्ण अंहकार को उबार देता है क्योंकि संसार भी परमात्मा ही है। किस पर उपकार आप करने जा रहे हैं? ये सब है, विराट के अंग प्रत्यंग में सारा संसार है। जैसे आपके अंग-प्रत्यंग में हैं और इसीलिए जब आप समझ लीजिए जैसे ये ight हैं परमात्मा की, और collective consciousness में आ जाते हैं तो उसके सामने अगर विराट का चित्र है तो इससे जो आपको आश्चर्य होता है कि किसी की विशुद्धि चैतन्य बाहर आ रहा है उसी में सारा संसार है। चक्र में गर पकड़ है, गर कोई बीमार है तो आप भी अब गर इस विराट में कोई तकलीफ है तो वहाँ पकड़ते हैं। आप कहते हैं माँ इसका विशुद्धि पकड़ दिखाई देगी। गर वहाँ कोई तकलीफ है तो यहाँ रहा है, जल्दी छुडाओ। क्योंकि आप से रहा नहीं दिखाई देगी। उसको ढीक किए बगैर विराट ठीक जाता। वो आपका अंग-प्रत्यंग बन जाता है, कहते नहीं होने वाला, और न उन्हें आरास भिलने वाला # 3TT Id साँ देखों इसका पकड़ रहा है-मतलब आपका है। ये मैं आपसे सच कहती हैं। आपको आश्चर्य खुद पकड़ रहा है। देखिए आप कितने एकाकार होगा एक बार मेरे पैर में लग गई चोट, तो हमारे हो जाते हैं। जैसे अब lecture की बात नहीं होती साथ एक डॉक्टर थे तो उन्होंने कहा कि माताजी किं हो सब धर्म एक हैं। हिन्दु मुसलमान, पारसी, मैं आपको Vibration देती हूँ। मैने कहा अच्छा, इसाई सब एक हैं, ये कहने की बात नहीं होती। ये आओ बेटे दे दो Vibration। जैसे ही उन्होंने मेरे होता ही है। कोई भी आदमी आपके सामने आए पैर पर हाथ रखा बहाँ से धड़-धड़ Vibration आने आप कहेंगे देखिए माँ इसका ये पकड़ रहा है। लगे मतलब जब कहीं चोट लग जाती है तो वहाँ पकड़ आपकी उंगली रही है, आप कहते हैं इसका से double Vibration आने लगती हैं। जब मैं थक पकड़ रहा है। जैसे आपने अपनी उंगली ठीक कर जाती हैं तो तिगुने treble Vibration आने लगती लीं. वो भी ठीक हो गए, आप भी ठीक हो गए। ये हैं जब मैं बीमार हो जाती हूँ तो वहाँ से ऐसे

आएंगी जैसे आप सब लोग बीमार हों। me| अब who are those? मोहम्मद साहब ने भी समझ लीजिए बहुत से लोग दिल्ली शहर में बीमार कहा है खूब कहा है. आप अगर पढ़ें उसको बहुत है बहुत पलू से, तो मुझे भी फ्लू हो जाएगा और उसमें से पैगम्बर आए। इन लोगों ने लगा दिया कि अब से जो Vibration निकलेंगी वो आपके पलू को ठीक इनके बाद कोई पैगम्बर ही नहीं आएगा। करेंगी। वो जब निकल जाएंगे तो मैं भी ठीक हो जाऊंगी। अजीब सी चीज है ये! है ऐसी चीज, path, तो कहा कि ठीक है He is the light He is यही होता है। ये बड़ी सूक्ष्म चीज़ हैं इसे आप क्राइस्ट ने कहा है कि । am the light I am the the path but who is the destination? Who is समझे, इसे आप देखें और इसका साक्षात्कार करें। the beginning? भई ight, है path है उसकी और आपमें से ऐसे भी लोग हैं यहाँ जिन्होंने ये देखा है। भी तो चीज है, आगा-पीछा भी है उसका । कृष्ण ने ऐसा ही होता है। जैसे कि समझ लीजिए अन्दर में कहा सर्व धर्माणाम् परितज्य मामेकम शरणम व्रज, antibodies तैयार होती हैं और वो बहने लग जाती तो लोग कहते हैं कि अब आप सब लोग हिन्दू हो हैं। इसलिए हमारे सन्तुलन में जो हमने पहले ही जाइए। इसका मतलब ये है इतने जड़ हम लोग से कहा है सबसे बड़ी चीज़ है कि हमें धर्म के तत्व हैं। जिसने जो कहा उसको बड़ा ही जड़कर समझ लेने चाहिएं। सर्वधर्म समान हैं बहुत ज़रूरी दिया। हर एक तत्व को जड़ करने में मनुष्य बहुत चीज है। कोई भी यहाँ पर कट्टर हो, उन्होंने बड़े ही होशियार हो गया है । जितनी भी सूक्ष्मता है वो बनाए, कट्टरपना के नमूने बना रखे हैं। हिन्दु धर्म खोती गई है। में बड़ी अच्छाई एक ही है कि उन्होंने कोई एक मनुष्य जाति पर कोई लगाया नहीं कि ईसामसीह के बारे में बताया था। कुण्डलिनी क्या है, वो किस हैं या कोई मोहम्मद साहब ही हैं ये एक अच्छाई तरह से उठती है कैसे चढ़ती है आदि । कुण्डलिनी हो गई, लेकिन उन्होंने सोचा कि भई जब इतने गए सूक्ष्म शक्ति है। वास्तविक सदाशिव की शक्ति तो कोई दूसरा बनाओ, उन्होंने सोचा कि जितने हमारे सिर पर सदा विराजमान रहती है और ईसाई हैं वो पार हो गए या जितने मुसलमान हैं सदाशिव की शक्ति जो है यह ब्रह्मशक्ति हैं। अब उनका ठीक हो गया तो अब उसका कैसे किया सदाशिव कौन हैं उससे पहले की बात करें। तो जाए? तो वो कहते है कि ठीक है., नहीं हो रहा तो ऐसा ही समझ लीजिए कि सदाशिव और शक्ति ये दूसरा इलाज बनाएं। तो क्या इलाज उन्होंने बनाया दोनों एक ही चीज़ हैं जैसे सूर्य और उसका तो जाति पाति ही बना दी। आदमी ऐसा है. किसी प्रकाश लेकिन creation जब करने का हुआ, आपको कुण्डलिनी के बारे में मैंने कल सब चक्रों चीज़ से बाज़ नहीं आता। ईसाई लोग कहेंगे कि अनेक बार हुआ creation, एक बार नहीं अनेक बस ईसामसीह एक आए थे दुनिया में और कोई बार हुआ, तब तक सदाशिव और शक्ति अलग हट नहीं आए। तो ईसामसीह भी काफी उनके मुँह में गए। दो अंग हो गए, शक्ति ये कार्य करती है. बातें डाल दी। लेकिन ईसा मसीह ने खुद ही कहा सदाशिव जो हैं वो साक्षी स्वरूप देखते हैं। शक्ति प me are with का कार्य है। शक्ति कार्यन्वित होती है। अब हम R Those who are not against r

शक्ति को समझते हैं, जैसे कि समझ लीजिए, आज वो सबसे out of best हो गया है। जब ये सहजयोग यहाँ एक शक्ति आई है आपके सामने आप light हमारा इंग्लैण्ड और अमरीका से यहाँ आएगा तो देख रहे हैं। पर आप जानते हैं कि इसी light से लोग समझेंगे। हम लोगों को सीधे समझ में बात आप गैस भी चला सकते हैं, इसी light से चाहे तो नहीं आती। जब English लोग सहजयोग आपको, आप पंखा चला सकते हैं, इसी ight से चाहे तो मेरे पर लिख ही रहे हैं दो आदमी एक English आप convert कर सकते हैं magnet में। पर आप लिख रहे हैं एक फ्रैंच लिख रहे हैं, जब चिट्टियाँ उस शक्ति को नहीं समझ सकते जो शक्ति सारा ले के यहाँ आएंगे तब यहाँ के ladies और यहाँ के कार्य करती है. सारा organize करती है सब gentlemen जो हैं जो सिवाए tailcoat के बाकी cOoperation करती है, integrate करती है और सब अंग्रेज हैं, वो ladies and gentlemen, क्योंकि जो प्यार करती है। आप कोई ऐसी शक्ति नहीं हिन्दुस्तानी यहाँ बहुत कम हैं। सभी वही लोग अभी समझ सकते हैं जो प्यार करती है और प्यार में ही तक हमारा guidance कर रहे हैं। इनका नाम ये सारा कार्य है। प्यार से ही हरेक चीज़ जानती महाकाली, महासरस्वती, महालक्ष्ी ऐसा है। लेकिन है और सारा कार्य करती है। ऐसी शक्ति आप नहीं संस्कृत भाषा की विशेषता ये है कि एक-एक अक्षर समझ सकते। उसी शक्ति की मैं बात कर रही हैूँ मंत्र है। देवनागरी लिपि में एक-एक जो हम अक्षर और वो शक्ति सारी ही शक्तियों का समूह है उसी में electricity है, उसी में magnet है, उसी में light अ+क्षर, जो क्षर नहीं है, जितना हमने अ, आ, इ. ई जो कुछ है वो सारा ही कुण्डलिनी में घूमने वाला हैं, उसी में सारे elements हैं। अब आप यहाँ शब्द है। वहाँ वो शब्द निकलता है। मनन में हम देखिए, ये जो हमने चित्र बनाया है विराट का, लोगों ने इन शब्दों को सीखा है और तब लिखा है। उसके सिर पर सदाशिव की शक्ति है और सदाशिव अंग्रेज लोग कहते हैं, मगर जैसा बोलते हैं ऐसा का पीठ भी है इसलिए उनकी वहाँ शक्ति है। हमने ‘M’ सीखा है। मगर फगर से हमारा कोई इसके तीन अंग हो जाते हैं। आप देखिए ऊपर से, मतलब नहीं है इन्होंने जानवरों से भाषा सीखी है. हमने बताया, वहाँ से जब छूटती है तो एक ऐसे हमने मनुष्य के अन्दर बहने वाली कुण्डलिनी से आती है, एक ऐसे आती है. और एक बीच से आती भाषा सीखी है। जब कुण्डलिनी ऐसे घूमती है तो है और एक जो सदाशिव स्वयं हैं, उनका असर आवाज यूं करती है, श. श, श, यहाँ पर । ठीक है हृदय में आता है। ये जो तीन शक्तियाँ हैं इनको न? हर जगह उसके अलग-अलग शब्द हैं जैसे महालक्ष्मी महासरस्वती और महाकाली, तीन के यहाँ ‘हँ ‘क्षं दो शब्द आते हैं। होते हैं, वो जो हम नाम से कहा जाता है। अंग्रेजी में इस का कोई जिसे ओम करके लिखते हैं, अ जैसे जो लिखते हैं. नाम नहीं है, मैं नहीं जानती अंग्रेजी में इसे क्या जो आप जिसे लिपि में ओम् लिखते हैं वो यहाँ आप कहा जाता है। आप कहेंगे बहुत ही out of date देख सकते हैं कि यहाँ पर ओम् ही रहता है। जब चीज है। क्योंकि जो कुछ सनातन है वो अपने देश कुण्डलिनी जागृत होती है तो यहाँ जब उस पर में out of date हो गया है और जो अंग्रेजों का है light पड़ती है तो ये जो चक्र है यहाँ पर ओम् ऐसा पम

ही लिखा होता है जैसा आप लिखते हैं। और जो संस्कृत भाषा का, कितनी, इसकी बुनियादें देखिए. अ आ इ ई. जो भी लिखा है आप लिखते हैं। कितनी गहरी और कितनी सूक्ष्म है? तो यह तीन, देवनागरी में, संस्कृत भाषा में, वो भी हमारे अन्दर जो मैंने बताया, महाकाली, महासरस्वती, महालक्ष्मी जब कुण्डलिनी वहाँ पर आघात करती है, जिस तीन शक्तियाँ हमारे अन्दर में हैं. इनको ही ऐं री’ वक्त उसके निनाद होते हैं, तब वो निनाद और हीं ऐसे कहते हैं क्योंकि इनका निनाद ‘क्लीं, उसका लिखना भी घटित होता है। कितनी बारीक ऐसा होता है। र ये energy का शब्द है, जैसे चीज़ है? क्या आपकी संस्कृति है और कहाँ से राधा र माने energy. ध माने धारने वाली। राधा, आई है! जो सारी मननों से उतरी हुई है, कोई कृष्ण का अर्थ मैंने आपसे बताया था कृषि से आता हमने बाहर से सीखी हुई. Artificial चीजें नहीं हैं। है अब ‘कृ शब्द कृष्ण कहते साथ विशुद्धि चक्र लेकिन संस्कृत भाषा तो हमारे यहाँ पण्डितों, मूर्खो एक दम असर कर जाता है। कृष्ण ही कहना और गधों की हो गई जिनको कि, उसका उच्चारण पड़ेगा क्योंकि कृष्ण जो हैं इसका यहीं से सम्बन्ध भी नहीं आता। जो उसके तत्व को नहीं समझते! ये सब अंग्रेज हैं, शैली और कीट्स पढ़ते हैं। ये उनका नाम हो सकता है। कितनी Scientific चीज़ भाषा हमारे अन्दर उत्पन्न होती है और लिखित है, ये बताइए और कितनी सूक्ष्म चीज़ है? लेकिन होती है। एक-एक अक्षर लिखने में अर्थ होता है। सहजयोग हमारा प्रेम का मार्ग है और प्रेम में इतनी ओम कैसे बना? इस तरह से ओम की रचना होती गहराई नहीं देखने की ज़रूरत। एक ही अक्षर प्रेम है, बिल्कुल ओम् ही लिखा है। मैं ऐसे अंगुली घुमा का पढ़े सो पण्डित होए। ये हमारा सहजयोग है। रही हूँ, आपका भी आज्ञा घूम रहा है। इतनी कोई जरूरत नहीं आप बड़े पण्डित होइए, पढ़ि पढ़ि scientific चीज़ है क्योंकि इसका सम्बन्ध Reality पण्डित मूर्ख भए, जो पण्डित यहाँ आए उनसे तो से है। इससे बढ़कर और कौन सी चीज scientific भगवान बचाए, कहने लगे कि साहब हमने गुरु ग्रंथ हो सकती है? जब तक आप संस्कृत में श्लोक नहीं साहब सारा रटा हुआ हैं। मैंने कहा अच्छा क्या है? कहते मेरे चक्र चलते ही नहीं हैं, आश्चर्य की बात वो ही जो आप कहते हैं वो ही कहते हैं कि मन में है! पर आप गर अंग्रेजी में कहें तो चलते हैं। सिर्फ ही खोजो। आज्ञा चक्र पर ईसा-मसीह की जो उन्होंने अपनी तो खोजा नहीं न? खोजो? खोजना चाहिए। उसी लिखी है क्योंकि यहाँ ईसा-मसीह का स्थान है प्रकार हो गया कि मन्त्रं अमन्त्रं अक्षरं नास्ति, नास्ति उस पर उनका जो हिब्रू में उन्होंने लिखा हुआ है मूलं अंशनम्, अयोग्यः पुरुषो नास्ति, योजकः सः Lord’s Prayer, वो चलता है, पर इंगलिश में भी दुर्लभम्। वैसे तो हरेक चीज़ में मन्त्र है परन्तु मन्त्र कहें तो चल जाता है। पर यहां पर तो भी क्षमा की योजना आनी चाहिए। तो कोई कोई भूत लोग स्वरूपपिणी, क्षमा ही शब्द कहना पड़ता हैं क्योंकि यहाँ आए हैं राक्षस लोग वो ‘ऐं ‘रीं’ क्लीं का यहाँ ‘क्ष’ शब्द है इसलिए क्षमा कहना चाहिए। सब आपको मन्त्र दे देंगे, ओम बोलो, क्लीं बोलो। पृछो है। विशुद्धि चक्र से ही सम्बन्ध है तो कृष्ण ही मैंने कहा तुमने तो रट रखा है न, तुने कहने पर भी क्षमा कहना पड़ता है। इतना हमारा भई ये है क्या? कुछ नहीं बता पाएंगे। अच्छा बता

भी दिया थोड़ा बहुत, कहीं पढ़ा-बढ़ा होगा, अब चन्द्र नाड़ी को जो कि हमारे अन्दर बसती है उसे आपका चक्र कौन सा पकड़ा हुआ है? आपको ऐं री’ क्लीं का उन्होंने मन्त्र दे दिया, कोई मन्त्र विद्या देखती हैं कि इतना confusion है, इतना confusion का बड़ा भारी शास्त्र है कि कौनसा आपका चक्र है। पकड़ा हुआ है? गर आपकी leift side पकड़ी हुई है कहते हैं, right side की नाड़ी जो है सूर्य नाड़ी है. तो आपको Left Side का मन्त्र देना चाहिए और left side की नाड़ी जो है चन्द्र नाडीं है। इन दोनों आपकी right side पकड़ी हुई है तो right side का का जब संतुलन आप साधते हैं तब आप बीचों-बीच देना चाहिए, वीच की पकडी हुई है तो बीच का देना चाहिए। अब ये जो तीन आपको यहाँ दिखाई जैसे एक जगह गए तो दूसरी जगह को जाना शुरु दे रही हैं उसमें से left side महाकाली का स्थान हैं। ये हमारे तमोगुण को पालती है। तमोगुण बहुत ज्यादा हो गया है विदेशों में तो उन्होंने हमारे अन्दर है। इसे चन्द्रनाड़ी भी कहते हैं। ईड़ा नाड़ी कहते हैं। इसमें भी बड़े घोटाले हैं मैं | Right side में जो नाड़ी है उसे पिंगला नाडी आते हैं। एक extreme में कोई गए तो पैण्डुलम होता है। जैसे कि मैंने बताया था जहाँं रजोगुण तमोगुण में आने की शुरूआत की। जब बहुत अब देखिए कि पृथ्वी की रचना भगवती ने कैसे ज्यादा बढ़ गए तो suicide शुरु हो गए और नहीं की? पहले सूर्य से कुछ हिस्सा भगवतीं ने निकाल तो शराब पीना, गांजा और इस तरह की चीजें लिया। उसके बाद उस हिस्से को बहुत दूर ले गई, जिससे balance आ जाए एक पैण्डुलम इधर सूर्य से बहुत दूर ले गई जिससे वो एक दम ठण्डा गया तो उधर से उधर दौड़ गया। उधर से उधर हो गया, बर्फ की तरह। फिर उसको धीरे-धीरे बीचों बीच संतुलन है, एकदम मध्य में और उसके सूर्य के पास लाई। उससे वो पिघलने लग गया, उसमें पानी का प्रवाह शुरु हो गया। उसके बाद वो ज़ेन system में अगर आप जेन पढ़ें तो पूरा उसे फिर से बहुत दूर ले गई, फिर नजदीक लाकर सहजयोग है. कबीर पढ़े तो पूरा सहजयोग हैं. ऐसा adjust कर दिया कि जिससे वहाँ सृष्टि हो नानक पढ़ें तो पूरा सहजयोग है, कृष्ण पढ़िये तो सके, जिससे वहाँ जीव-धारणा हो सके, ये सारा पूरा सहजयोग है, राम पढिए तो पूरा सहजयोग है। ब्रह्माण्ड जो है Spiral में Move करता है है, कुरान पढ़ें तो में। मैं आपसे बता रही हूँं शायद सौ साल बाद पूरा सहजयोग है। सब सहजयोग है । कहने का लोग कहेंगे बहुत सी बातें जो अभी अभी हमने कहीं ढंग शायद अलग हो जाए पर मजा आएगा वही। थी वो भी अब लोग कहने लग गए हैं । उस Spiral ये जो बीच का void है. ये भवसागर है और इसमें T न। बीच में Gap है, यहीं void है, इसे void कहते हैं। Spiral क्राइस्ट पढ़े तो पूरा सहजयोग के बराबर उस Spiral के Movement से ये होता उठने के लिए कोई सीढ़ी नहीं है समझ लीजिए कि है कि व्यक्ति कभी सूर्य की ओर ज्यादा होता है दो ऐसी सीढ़ियाँ लगी हुई हैं लेकिन बीच वाली कभी चन्द्र की ओर ज्यादा होता है। तो सूर्य नाड़ी सीढ़ी आधी लटक रही है और उस पर चढ़ने का और चन्द्र नाडी हमारे अन्दर दो नाड़ियाँ हैं । stde मे जो नाडी है उसे सूर्य नाड़ी कहते हैं और को, इस bridge को, इस gap को भरना होता है, जो मार्ग है वो नीचे है कुण्डलिनी। इस कुण्डलिनी

बहुत सीधा-सरल है, कोई बहुत दूर नहीं। अब ये कुण्डलिनी आपकी माँ हैं, जन्म-जन्म आपके साथ करने से होता है वो Ego होता है। जो लोग right पैदा हुई, आप ही में र्थित रहती है। मृत्यु के बाद side में कार्य करते हैं, जिन्हें रजोगुणी कहते हैं वो भी जीवात्मा के साथ ऊपर में आत्मा और कुण्डलिनी ego-oriented होते हैं, अपने Ego से कार्य करते दोनों साथ ही साथ रहते हैं। ये हर समय आपमें हैं। और जो 1eft side होता है वो Super Ego स्थित रहती है और यही आपके पास होता है. बहुत से आपमें psychologist होंगे तो Super Ego कहते है और जो right side के कार्य subconscious का पूरा जोखा है। कुण्डलिनी जो आपको समझा देंगे। जैसे कि एक बच्ा है माँ की है ये गौरी है यानि ये महाकाली का एक part में दूध पी रहा है आराम से । आनंन्द में है। उस वक्त उसकी माँ उसको हटाती है. तो उसका होता है. वो कहता है कि ये व्या कर कहते हैं या जिसे हम evolutionary शक्त कहते दिया? माने उसको गुस्सा चढ़ता है। उसकी मां है महालक्ष्मी की शक्ति कहते हैं, वो ये शक्ति नहीं उसको डाँटती है। ऐसा नहीं करना super ego है। गोद महाकाली का एक part है बीच की शक्ति जिसे हम सृजनात्मक शक्ति या उत्क्रान्ति की शक्ति ego जागृत ये आपके subconscious की शक्ति है जो बनता है। कोई करने की इच्छा होना ego से होती अब तक आपको past हुआ, आपका कर्म हुआ, है और जब उस पर दवाव आता है वो शक्ति औ आपका ये हुआ, वो समझ-लेना चाहिए। तो super ego की होती है। हमारे अन्दर इस फकार कुण्डलिनी वो चीज है, उसका हिस्सा है। जो void दो संस्थाएं बनती है Ego और Super Ego । एक है void के अन्दर में सरस्वती का कार्य है । क्योंकि चीज़ से तो हम कहते हैं इसको हम करके दिखाएंगे मैंने आपसे बताया था बीच का जो नाभि चक्र है और दूसरी चीज़ से हम कहते हैं कि नहीं भई ये उसमें से एक कमल का फूल निकलकर के. उसमें नहीं करो। ये हमारे बाप कह गए थे. इसमें फायदा बैठा हुआ ब्रह्मदेव सारी चीज़, रचनात्मक कार्य नहीं होने वाला। अब जरूरी नहीं कि बाप अच्छा ही करता है। इसलिए इस void के अन्दर में रचनात्मक कह गए हैं. कभी अच्छा भी कहते हैं कभी कभी बुरा कार्य की शक्ति है। आप जानते हैं, ये है। ये भी कह जाते हैं इस तरह की दो शक्तियाँ हमारे रचनात्मक कार्य पाँच element के चारे में, उसी से अन्दर काम करती हैं या ऐसा समझा लीजिए कि मन भी तैयार होता हैं मन भी इसी का एक हिस्सा एक से हमारी इच्छा शक्ति और दूसरी से हमारी है। Existence की शक्ति है और वो कार्यान्वित रचना शक्ति। रचना शविति और इच्छा शक्ति गर रहने की रचानात्मक शक्ति हैं। जब वो कार्य करती है तो इस तरह से, एक समझ लीजिए, कि ego जब बराबर आ जाए तो आप देख सकते हैं byproduct होता है किसी factory में किसी कि कुण्डलिनी का उठना कितना आसान हो जाएगा बराबर आ जाए या जिसे कहिए ego और super प्रकार के दो byproduct निकलते हैं, एक क्योंकि सर का बोझा जो है वो एक जैसा हो byproduct जो left side से ऊपर चलता है वो जाएगा बीच में से कुण्डलिनी आसानी से निकल इस side में आ जाता है right side में। इसे जाएगी। इसीलिए संतुलन की बहुत जरूरत है ।

आज मैं संतुलन पर ही बोल रही हूँ, बार बार हो सकते। और ये कहने पर भी लोग कहते हैं, गुणगान करके संतुलन पर आती हूँ। गर आपके नहीं हमारे गुरु बहुत अच्छे हैं। तो सोचते हैं क्या? अन्दर संतुलन नहीं है तो कुण्डलिनी जागृत होकर एकदम भूत-बाधा है, क्या? कितना भी कोई परेशान के ब्रह्मर्त्र से नहीं निकलती। संतुलन का establish होना बहुत जरूरी है। और उस संतुलन के लिए Heart से भी मर जाएं, तो भी माँ, हमारे गुरु बडे ही मैं आप लोगों से कहती हैँ कि आप left से अच्छे हैं इसका कारण क्या है? इसका कारण right को जाएं क्योंकि ego यहाँ पर बढ़ गया है । एक ही सीधा सरल बैठता हैं कि कोई न कोई करें, कुछ भी तकलीफें हों, सारा शरीर भी टूट जाए. रस पूरा ego है। यहाँ का balloon ego ने दबा दिया आपके ऊपर पकड़ है। आप सोचना ही नहीं चाहते है, super ego को नीचे तो आपसे मैं कहती हैं कि असलियत क्या है? अब ego किसी आदमी का कि आप इस तरह से ऊपर उठाइए. super ego बहुत ज़बरदस्त बढ़ा हुआ है, उसके अनेक तरीके हैं फिर आप आपसे मैंने पहले ही बताया है Ego की वीमारी चलती है। गर उठेगा और ego नीचे आ जाएगा| उठाइए फिर आप करिए, धीरे-धीरे करते करते ये ऐसी है कि वो बीमारी पता ही नहीं हो जाएगा कि बीचों बीच आ जाएगा। उसके लिए आपका तमोगुण super ego ज्यादा है, तो उसका बदन टूटेगा, कि माँ मेरा यहाँ दुखता है, मेरे पैर से थोड़े ही कुछ होने वाला है। जैसे बीच में आ पकड़ गए, पता नहीं कोई कभी मेरे गर्दन में बैठ जाएगा तो कुण्डलिनी खट से उठकर ऊपर चली गया है, पता चलता है पर ego तो अपने को ही जाएगी। कुण्डलिनी सब जानती है, समझती है अपने ऊपर बिठाया होता है, घोड़े पर चलता है। आपका सब । उसको Past मालूम है। आपने जो उसके पास आप जाइए तो मेरे को ही lecture देना गलतियाँ करीं, जो कुछ भी आपने अपने साथ शुरु कर देता है अभी गई थी मैं कोई मंत्रियों के ज्यादतियाँ करीं, जैसे आप किसी गुरु के पास गए, पास में उन्होंने मेरे को ही lecture देना शुरु कर कुण्डलिनी आपकी जानती है। उठेगी ही नहीं दिया, इधर आप लोगों का कोई programme होने frozen कुण्डलिनी। इसीलिए आपने देखा होगा वाला था, उसी में मैं lecture सुनती रही, मैंने कहा कि किसी ने बताया मेरे गुरु थे तो मैं सर पकड़ वाह भई वाह! रोज lecture देते हैं अभी इन्हें मैं ही कर बैठ जाती हैं कि गई कुण्डलिनी काम से, अब चाहिए थी lecture सुनाने के लिए? अच्छा भई सुना लो। तुम्हारा भी हो जाएगा, इधर तुम लोग यहाँ बैठे रह गए मैं वहाँ ही बैठे रह गई। इसलिए ego ऐसी चीज है जिसको अहंकार एक बार चढ़ कर दी तुम्हारी तो मैं क्या करूंगी? और दूसरा ये जाए उसको समझाना बहुत मुश्किल होता है। है कि आपका क्या होगा? कितना सर्वनाश है? सूक्ष्म अंहकार भी बहुत होता है, जैसे किसी ने कुछ आप ही सोचो कि आपका कोई उद्धार नहीं, आप पढ़ लिख लिया तो मेरा तो इसमें विश्वास ही नहीं कि माताजी कुण्डलिनी उठाती है। अब साहब भी मेरे ओर हाथ करना पड़ेगा नहीं तो आपके हाथ कदिक तो हाथ जोड़ो इनको भैया। क्या करें? अब लोगों को ये लगता है कि माताजी क्यों गुरुओं को बुरा कहते हैं? क्योंकि कुण्डलिनी ही उन्होंने freeze पार नहीं कर सकते, जन्म जन्मांतर तक भी नहीं

आपका विश्वास ही नहीं रहा। मैं तो विश्वास ही से लेकर के नेपोलियन से लेकर के सबने भगवान नहीं कर सकता, आपका विश्वास किसी चीज़ पर पर भाषण झाड़े, किसी ने छोड़े थोड़े ही सब अपने हैं? आपने क्या जाना, आपने क्या देखा? आप को सोचते हैं कि उनको अधिकार है भगवान पर आइए देखिए। आपका विश्वास नहीं है या है इससे Iecture देने का। इनसे पूछिए, तुमको क्या मालूम क्या फर्क पड़ने वाला है भगवान को? मुझे पूर्ण हैं भगवान के बारे में, तुम क्यों बोलते हो? मैंने विश्वास भगवान पर है. माने आप कहाँ के अफलातून इतनी किताबें लिख डालीं. मैने फलाना पढ़ डाला, हो गए? सृष्टि क्या अपने बनाई थी, या आपके बाप ढिकाना, मैं अमरीका गया था, मैंने इतने lecture ने बनाई थी? इस पेड़ के नीचे जो बैे हुए हो क्या दिए, मैने इतने lecture पढ़ डाले, एक एक एक आपने बनाया? पूर्ण विश्वास परमात्मा पर है, इस एक इस तरह से एक तरह का बड़ा सूक्ष्म तरह से जो मनुष्य बातें करता है वो अति है। aggression है । आप इसको समझ नहीं पाए । ये जिसने सारी सृष्टि की रचना की, जिसने सारा मनुष्य के Intelect पर एक aggression है. आपको संसार बनाया. आपको और आपके बच्चों को बनाया, जो चीज संसार में जगमगा रही है, ये सब जिसकी बातें सुनने लगे आप, बड़े अच्छे बोलते हैं साहब। कृपा दृष्टि से हो रहा है उस पर आप विश्वास कर एक साहब हैं क्या भाषण देते हैं, बस सुनते ही mental feast देते हैं। भगवान की बातें करने लगे, रहे हैं, बहुत आप उपकार करते है। परमात्मा पर रहिए आप पता ही नहीं चलता है time का! अच्छा आपका विश्वास ही नहीं है तो आपसे बढ़कर मनोरंजन हो रहा है । भगवान पे बोलने का हरेक अक्लमंद कौन होगा? ये सब पागलों जैसी बाते हैं। को अधिकार नहीं, गीता पर बोलने का तो किसी मैं जब पैदा हुई तो मेरे को लगा कि मैं कौन से को अधिकार नहीं, गीता के lecture होते हैं। पागलखाने में आ गई? फिर ये कि हाँ मैं तो सब माताजी मैं गीता के lecture में जरा जाता हैूँ और कुछ जानता हूँ माताजी, हाँ मैंने पढ़ा था, सारी माँ आपका आज्ञा चक्र पकड़ा हुआ है। तो मैं गीता के ये किताब पढ़ के आया हूँ उसमें । अब किताब कहीं lecture में नहीं जाऊं? बेटा तुमको जो गीता भी, किसी भी छापे खाने में आप छपा दीजिए, छप समझा रहा है क्या वो पार हैं? पार हुए बगैर जाती है। कोई भी छाप सकता है, जिसका मन हो आपको धर्म पर बोलने का या गीता पर बोलने का छाप दें और भगवान के ऊपर कोई छापे तो उसके कोई अधिकार नहीं। जो मनुष्य पार हुए बगैर कोई लिए कोई नियम नहीं है। कोई कायदा कानून नहीं सा भी Iecture देता है वो ऐसा ही जैसे एक अंधा कि कोई उसको पकड़े कि भई तूने इसको क्यों आदमी आपको रास्ता बता रहा है। लेकिन धर्म में छापा? और कोई कहे कि भगवान का ये हाल है अन्धा कौन है, और देखता कौन है ये जानने का भी तो हाँ भई है। वो कहे कि भगवान का वो हाल है कोई मार्ग नहीं । जो आदमी विरह में बोलता है तो है। उसका कोई ऐसा कहीं कायदा है. कोई उसका तो सुनना भी नहीं चाहिए। विरह के गीत है जहाँ आदमी हाथ पकड़े कि खबरदार गाए उसको क्या सुनना? हम भी विरह में हैं, वो भी कानून भगवान पर बोलने वाले तुम कौन होते हो? हिटलर विरह में है, इसलिए मजा आता है । जैसे सूरदास

जी हैं, सूरदास जी विरह में रोते थे तो सबको मुझे तो घिन चढ़ जाती है जिस तरह से विरह में अच्छा लगता है। ये भी अन्धे, हम भी अन्धे, सब – लोग रोने लग जाते हैं गजलों में बैठकर। ये कोई के मदद की लोगों की बात नहीं। ये सब तमोगुण अन्धे गा रहे हैं! बल्लभाचार्य जी के पास गए, बल्लभाचार्य कहने लगे काहे घिघियावत हो भाई? लक्षण हैं हर समय विरह गाना, रेते रहना, विरह जो आदमी मिलन में बैठता है उसको समझ ही की बात करना। मिलन की बात करो, मिलन में नहीं आता कि विरह की बात क्यों गा रहे हो। आओ और जब समय आ गया तो हमें विश्वास ही सबको अच्छा लगता है ऐसा भजन कि भगवान कब नहीं कि मिलन भी हो सकता है। तो रोते बैठेंगे। मिलेंगे? किसी किसी को ऐसा बेकार का झूठा पहले कहेंगे कि आओ, आओ आओ, जब आकर नाटक भी अच्छा लगता है। बड़ी विरह अवस्था में खड़े हुए तो कहते हैं हमें विश्वास ही नहीं होता कि सब देवदास बने बैठे हैं। देवदास काटे घास, मैं ये वो सच्चा है! ये दुनिया है इसे क्या कहा जाए? अरे कहती हैं। इतनी कविता रुदन की और इतना पहले बुलाया क्यों, जब बुलाया है. जब आ गए तो विरह। हे भगवान! इनको कब बुद्धि आएगी? विरह बोलते हैं कि हमें विश्वास ही नहीं होता है कि आप का मजा बड़ा आता है आदमी को। इसके होते हैं लेकिन जो मिला हुआ है, मिलन में बैठा है, नहीं उनको। जब इनका रोना खत्म होगा तब तक बो विरह के गीत कैसे गाएगा? एक सीधा हिसाब यहाँ से पसार भी हो जाएगा। घण्टों बजाते रहेंगे होता है, जो मिलन में बैठा है वो विरह की बात और पुकारते रहेंगे कि प्रभु तुम आओ, प्रभु तुम आ गए! अभी हमें रोने दीजिए. अभी रोने से फुर्सत काव्य कैसे कहेगा? वो कहेगा। am the light,1 am the आओ दर्शन दो, दर्शन दो हमको, दर्शन दो और path, वो कहेगा कि सर्व धर्माणाम परित्यज्य मामेकम् दर्शन लेकर करने का क्या है? कुछ बनना चाहिए. शरणम् ब्रज । उसके अन्दर authority होएगी। वो होना चाहिए. घटित होना चाहिए। ये तो होने की किसी के बाप से डरने वाला नहीं किसी के सामने बात है, Becoming की बात है. हवाई बातें नहीं। घिघियाने वाला नहीं। आना हो तो आओ नहीं तो लेकिन मनुष्य बड़ा संतोष में रहता है क्योंकि वो है 1 superficial है न उसको इसी में संतोष रहता मजाक उड़ाया सिधुक्कड़ी भाषा करते हैं। हमारे कि कोई इनको रिझाए रखे। बैठे अपने भजन गा यहाँ हिन्दी भाषी लोग उसका बड़ा मजाक बनाते रहे हैं, घण्टों गा रहे हैं, घटही खोजो भाई, घटही हैं उनके पांव के धूल के बराबर भी इनमें से कोई खोजो भाई, घटही खोजो भाई। घटही खोजो भाई, हो तो मुझे बता दीजिए। मार्कण्डेय जी के पीछे पड़ खोजने वाले कौन हैं? किसको lecture दे रहे हो गए। उनमें ये ये दोष है, उनके वाङमय में ये दोष भई? वो तो उन्होंने बताया जो खोज चुके, अब तुम है तो इनके लिए उमरखैय्याम बहुत अच्छे हैं किसको lecture दे रहे हो? वो तो उनको बताया क्योंकि वो पिनक में अपने लिखते रहते हैं । ये लोग था कि तुम घट को खोजो। उनसे कहा था कि सब पिनक में ही लिखते हैं, अधिकतर गजलें जो सरदर्द की ये दवा ले लेना, अब तुम prescription हैं वो मैंने देखा है कि पिनक में ही लिखी हुई हैं। ही रट रहे हो सुबह से शाम तक! इससे क्या लाभ जाओ। उसकी पहचान कबीर है उसका सबने

होने वाला है? इससे किसका भला हुआ है? ऐसे रहते हैं, हे राम, हे राम तो वहाँ से भगवान जी तो भजन गाने से एक भी आदमी को आपने देखा है कबके भाग गए, ये तो मुझे पता है लेकिन अब मैं कि लाभ हुआ? अन्त में वही सिर पैर ऊपर करके भी भाग जाऊंगी। कहने लगी कि इन्हें सुन-सुन नाटक करके चिल्ला रहे हैं सुबह से शाम तक। के तो मेरे कान दुख गए. अब तुम भी भाग जाना Cancer of the Throat हो जाएगा। अब समय ये यहाँ से। ऐसे बेकार लोग हैं। एक छोटा सा बच्चा आ गया है कि ऐसी बेकूफियाँ ज्यादा न करो, नहीं समझता है। वो गए थे लद्दाख उनके पिताजी तो तो Throat Cancer हो जाएगा बेकार में गाते वहाँ एक लामा साहब बैठे हुए थे। देखिए एक छोटा फिरेंगे तो Cancer of the Throat हो जाएगा। सा बच्चा छः साल का, अब सब लोग जाकर, सब लोग जा-जाकर लामा साहब के पैर छु रहे थे । लिए? कि गला फाड़ फाड़ कर गाओ? अरे भई अब ये तो पार हैं, इनको मालूम है कौन पार है, एक बार जब कह दिया हो गया, आ जाओ, आ ही देखा उनकी Mother ने भी पैर छुए, पिता ने भी पैर जाएंगे, इतना गला फाड़ने की और अपना विशुद्धि छुए, तो उससे रहा नहीं गया। फिर वो ही शान आ चक्र इतना सत्यानाश करने की क्या ज़रूरत पड़ी गई उनकी। सामने जाकर उनके खड़ी हो गई, किसने कहा इतने द्राविड़ी प्राणायाम करने के हुई है? मेरी समझ में नहीं आता। यहाँ पर आए, कहने लगी ये क्या सिर मुंडा के. चोगा पहन के माताजी हम ये मंत्र कहते थे कितने बार? रोज़ सबसे पैर छुआ रहे हो? पार तो हो नहीं। सबकी का कम से कम हो जाता था 108 बार। भई किसने हालत खराब, माँ बाप की। ये क्या कर दिया बच्चे कहा 108 बार कहने के लिए? एक बार कह दिया ने? ठीक तो कह रही हूँ, ये क्यों पैर छुआ रहा है? हाथ जोड़ के, श्री राम तुम्हारे शरणागत हैं बस हो तुम लोग इनके पैर क्यों छूते हो? ये तो पार नहीं गया अब वो कोई आपका नौकर है जो आप सुबह है बिल्कुल भी इन्होंने सिर्फ सिर मुंडा लिए हैं और से शाम तक आप उसको Order दे रहे हैं? अब चोगा पहन लिया है और ऐसा मुँह बना कर बैठे हैं। पूरा समय आप किसी को इस तरह करें तो उनको ऐसा मुँह भी दिखा दिया। उनको किसी का भगवान वहाँ से उठ ही जाएंगे। साहब सिर दर्द हो डर नहीं। सरमुंडाने से अगर भगवान मिलते हैं तो जाता है मुझे। अब तीन से चौथी बार कोई माताजी जो ये भेड़-बकरियाँ होती हैं ये पहले भगवान के कहते हैं तो मैं कहती हैँ भई क्या चाहिए आपको? पास पहुँचती। कबीर का Sense of humour जो आप ही सोचिए भगवान की position में जाकर, था वो कमाल का था। और ये रोने की हद इतनी क्या आपको कोई 108 मर्तबा पूरा समय पुकारता पहुँच गई है इन लोगों की कि अब वो हसन हुसैन रहे तो कहेंगे भई चुप भी कर हमारी grand मर गए तो उसके लिए चिल्ला रहे हैं। एक आफत daughter थी हम गए थे वहाँ बिहार में, Realized मचाए हुए हैं, साहब ऐसी रोनी सूरत देख के जी Soul है, बड़ी मजेदार जीव है। होगी कोई पाँच छः साल की, कहने लगी नानी बस यहाँ तो बहुत गड़ भाग जाए। ये कहाँ रोने पीटने वाले लोग? इतने तो घबराता है। कोई आने बाला हो भगवान तो वो भी बड़ हो गया, मन्दिर में ये सब लोग रात-दिन गाते जानवर भी नहीं रोते, कोई नहीं रोता इतना। ये तो

मनुष्य का एक अजीब तरीका है, रोने लग गए तो भी ब्राह्मण कहे चढ़ा दो, चलो ठीक है जितनी श्रद्धा रोने ही लग जाए। अच्छा वो हुआ, उससे भी जब हो ब्राह्मण को दे दो। ब्राह्मणों की तो यहाँ agency चैन नहीं आया तो जिस दिन भगवान का जन्म हुई सबसे तो कमाल ये है कि जब मेरी शादी हुई, जब मेरी शादी हुई यू.पी. में तो हम घर पर गए, तो और किसी का क्या अपमान करेंगे। इससे बढ़कर आपको आश्चर्य होगा, कि शादी में श्राद्धयोग गा और किसी का क्या अपमान होएगा? आप समझ रहे थे! वही मंत्र गा रहे थे! मारे हँसी के मेरी तो लीजिए आपके घर में कोई आदमी आया, कहने हालत खराब और पेट में बल पड़ गया। अब जाऊं लगा मैं तो आज खाना नहीं खा रहा हूँ। वो कहेगा तो जाऊं कहाँ? मैं घर की बहू, नई नई, मारे हँसते भई मैं जा रहा हूँ अपने घर। गर किसी आदमी को हँसते मैंने कहा भई मुझे तो नींद आ रही है। तो आपको भगाना हो घर से तो आप कह दें मैं आज उन्होंने कहा इतने शुभ मुहूर्त पर तुम कहाँ सोने जा खाना नहीं खा रहा हूँ। उसने कहा अच्छा मैं रही हो? मैंने कहा मैं करूं क्या? क्यों हँसी आ रही जाता हूँ होटल, सीधा हिसाब। आपके घर में कृष्ण है? मैं उनको कहूँ तो कहूँ कैसे कि सब उनको होएगा उसी दिन उपवास करेंगे। इससे बढ़कर का जन्म हुआ राम का जन्म हुआ तो भी उपवास थोड़े बहुत वही पितृ पक्ष के थोड़े बहुत मन्त्र मालूम करो। ये कौन सा तरीका है? इससे बढ़कर अपमान थे, वही बोले जा रहे हैं । मैं कहूँ कि ये क्या तमाशा का और कौन सा तरीका है? कल मैं आपके घर में है कि इनको तो कोई श्लोक भी मालूम नहीं? आऊं, समझ लीजिए श्रीमाताजी आपके घर में आते ब्राह्मण हैं और हमारे घर में खानदानी चले आ रहे हैं, मेरा तो उपवास है, तो भैया मेरे को काहे को हैं? तो मैंने कहा इनसे कौन बात करे अब? इन्होंने बुलाया? जब कोई ऐसे आते हैं, ऐसे जन्म होते हैं खानदानी ऐसे ही शादियाँ लगाई होंगी, उनको बड़े तो उस वक्त जश्न मनाना चाहिए, खुशियाँ बरतन भी मिले हुए हैं, उनको गैया भी मिल जाती मनानी चाहिएं. सबको खाना खिलाना चाहिए । गणेश जी को मोदक पसंद हैं तो मोदक बाँटिए। इस तरह के धर्म की चीज़ें बनी हैं इस तरह से उस दिन उपवास करेंगे! और जिस दिन नरक rituals बने हैं! हम लोग क्या सोचते हैं कि पीछा चतुर्दशी है, उस दिन सवेरे चार बजे उठकर नहा छुड़ाओ। श्राद्ध हुआ तो उसने कहा कि भई देखो करके खाने को बैठेंगे। बताइए सब उल्टी चीजें एक गैया देना और एक कपड़ा देना हमें और एक समझ में नहीं आती। ये किसने सिखाई? ये हमारी ब्राह्मणी को साड़ी दे दो, तुम्हारी माँ पहनेगी। ब्राह्मणों ने बेवकूफ बनाया है या तो ये राक्षसों के आपने सोचा, ठीक है इससे पीछा छुड़ाओ, गैया तो धंधे हैं । मेरी तो ये समझ में नहीं आता है कि ये बहुत मुश्किल है उल्टी बातें कहाँ से आ गईं अपने यू.पी. में? और सोचता है कि हम जो कर रहे हैं उसमें हमारा क्या है तो उनके घर में गैया ही गैया हो गई हैं और 1 इसे साड़ी ही दे दो। कोई ये नहीं Northी में तो और भी चौपट हाल है, इतना चौपट हृदय है? क्या करना है, क्या देना है, धर्म में क्या हाल है कि कोई पढ़ा लिखा तो है नहीं यहाँ चीज़ है उसको जानना चाहिए। किस तरह की संस्कृत वंस्कृत। किसी को समझ तो है नहीं, जो बात है? कोई इस तरह से बात को सोचता नहीं है

और इसीलिए ये हमारे अन्दर उसका संतुलन नहीं कि आये यहाँ, जैसे वो ये कि Nescaie फट से बैठता। बस काम चालू, काम चालू, चलते रहो, काफी बन गई, वैसे माँ आप कुण्डलिनी तो जागृत चलाते रहो किसी तरह से। कोई हाँ हाँ भई कैसे करती है. वो तो मैं करती हूँ। जेट कुण्डलिनी का हो अच्छे हो, बैठो, हाँ ठीक ठीक है। उसके बाद वो Set जरूर करती हैँ पर खींचती भी वैसे ही हूँ। है गए. मालूम पड़ा बड़ा बंदमाश है ये। इसने फलाने ना सही बात? आप खा भी देते हैं अपनी Vibrations के घर चोरी की थी, उसने इतना रुपया मारा था। को इसके बारे में जेन System में लिखा हुआ है फिर आए अच्छा पान खा लो भाई। रात-दिन उसको सपोरी कहते हैं कि आदमी जैसा कोई बॉल मनुष्य इसी तरह Superficially रहता रहेगा तो के जैसा होता है, ऊपर जाता है नीचे आता है. ऐसे गहराई उसके अन्दर उतरती नहीं है, और इसीलिए ही डॉवा डोल चलता है। ये, वो होता है। इसलिए कुण्डलिनी जागृत होती नहीं है धर्म के मामले में भी अपने चक्रों को संभालना पड़ता है। अपने को नहीं, search के मागले में भी। परमात्मा को गहराई में उतरना पड़ता है अपना जीवन गहरा खोजने के मामले में भी। जैसे अमेरिका में गुरु बनाना पड़ता है. अब आप पूरा अपना जीवन जो है Shoping होता है वैसे यहाँ भी गुरु Shoping फालतू चीजों में बर्बाद करेंगे सुबह रसे शाम तक । होता है। नहीं मैं सिर्फ गया था, मैंने देखा, मैंने अब करना ही पड़ता है, वया करें, दुनिया ऐसी है. चरण छुए, दर्शन हुए, प्रसाद मांगा, दर्शन करने उसके लिए करना पड़ता है और आपके पास समय गया था माँ मैं तो वहाँ पर वो दर्शन में उन्होंने भी नहीं कि अपने में गहराई उतराए और परमात्मा आपके अन्दर में भूत रख दिए होंगे? में तो दर्शन के साम्राज्य में बैठे रहें तो ठीक है आप जिस चीज के लिए गया था। पर ये कुण्डलिनी तो उठ नहीं की चाहत करेंगे वही होगा, आप जो करना चाहेंगे रही बावा, मैं क्या करू? उनको क्या? ये तो बड़ी वही होगा गहरी सूक्ष्म चीज़ है कुण्डलिनी का उठाना और लीजिए ऐसे ही आपने हजारों जिन्दिगयां काटी, कुण्डलिनी का ऊपर चढ़ना भी अति सूक्ष्म चीज़ है। और एक कट जाएगी, लेकिन ये वाली ज़रा गुश्किल गर आपने इसकी संभाल नहीं करी, गर आपने रहेगा मामला क्योंकि फिर पता होगा बड़ी गलती अपना समय ऐसे हीं बर्बाद आप कर अपना विचार इतना सूक्ष्म नहीं रखा तो चीज़ तो कर गए, सत्य को मना करते करते जो Real रात्य दब गई न। अब भी पार होने के बाद भी आप आ गया उसको भी मना कर गए। बो तो देखना तो देखिएगा कि आपके Vibrations खो जाएंगे, ये तो चाहिए न, समझना तो चाहिए। उसको पाने के बाद सा है ही बात आपको बता दें। लोग कहते हैं गाताजी जो आदमी खो देता है तब तो समझना चाहिए कि दीजिए, तो Permanent दीजिए क्यों साहब आपने उनके लिए ये व्यर्थ ही हुआ। मुझे क्या Permanent दिया है? मैं आपको क्यों दूं Permanent? मैं तो नहीं देने वाली, मैं तो चाहिए कि हर समय काफी लोग पार हो जाते हैं महामाया हूँ। सीधा हिसाव। आप Permanent पर बैठिए तो मैं भी Permanent दूंगी और आप ऐसे हैं। हर कर्यक्रम के बाद एक दो आदमी बच जाने दिल्ली शहर की ये History है ये कहना पर जमते नहीं । जमने वाले बहुत ही कग लोग होते

का १ र ऐ वनी क र हैं। इस प्रकार तीन चार साल से हम आ रहे हें, सच बात है। बहुत लोगों को होने का समय आ कुल मिला करके गर आप देखिए तो जो रोज़ के गया है और ये है ही ऐसी चीज़ कि इतिहास की आने वाले आदमी हैं. जो उतरे हैं, जो कुण्डलिनी दृष्टि से ही वो समय आ गया था कि जहाँ बहुत को मारटर कर चुके, ज्यादा से ज्यादा दस या लोग उसे पाएं। हालांकि बहुत से Realized Souls हैं जिन्होंने जन्म लिया है। बहुत से Realized बारह लोग हैं बस। बड़ी दुख की बात है। इसलिए आपसे, आज आखिरी दिन है, माँ के नाते मैं विनती बच्चे पैदा हुए हैं। दस साल के अन्दर वो तैयार हो करती हूँ और शक्ति के नाते आगाह करती हूँ कि जाएंगे। इसमें कोई शंका नहीं है। स्टाइलर जैसे अपनी गहराई को पाइए। अपनी गहराइयों में आदमी ने इग्लैण्ड में लिखा है कि अब बो समय दूर उतरिए। अपने समय को इस महान शक्ति के लिए नहीं कि बहुत से Realized Soul इस संसार में रखिए। इसमें आप पाइए और दूसरों को दीजिए । जन्म लेंगे ये कलियुग का मामला है, कलियुग में बहुत करने का है। गर हम किसी से दो ही तरह के आदमी जन्म ले सकते हैं । एक तो बडा कार्य कहते हैं कि मुम्बई शहर में और सब शहरों में कीड़े मकोड़े मच्छर लेंगे जो कि हर हालत में ऐसी मिलाकर कोई बारह, दस हजार आदमी हैं. अरे दुर्दशा में रह सकें और ऐसे गन्दे atrmosphere में क्या हुआ, दस हजार आदमी हैं तो क्या हुआ? रह सकें। इसलिए Population भी बढ़ता है।

जितनी देश में गंदगी और दुर्दशा आती है उतना शुद्ध करें और इस वातावरण को शुद्ध करने के लिए ही Population बढ़ता है जैसे गरीबी आ गई, ज़रूरी है कि आप लोग इस शक्ति को वहन करें. गरीबी तो leprosy है, समझ लीजिए, गरीबी से पहली मर्तबा अब मानव अपने व्यक्तित्व से या घबराना चाहिए। ये आदमी गर अपने गरीबी को अपनी शक्ति से ये जो पाँच तत्व हैं उसमें शक्ति लेकर आए कि साहब मैं गरीब हूँ, मुझे दीजिए. तो डाल सकता है इसके बहुत सारे Experiment उसे दो झापड़ दीजिए। गर आदमी कोशिश करे किए हैं। हमारे Scientist लोगों ने बताया किस तो उसको ऐसे लानत वानत जैसे करने जरूरत तरह से हम शक्ति दे सकते हैं इन पाँच तत्वों को। नहीं, बस कोशिश की बात है। इस तरह से हम किस तरह से हम हमारी खेती बढ़ा सकते हैं। ये सोचते हैं कि हम गरीबों के लिए क्या कर सकते लोग Agriculturist हैं Agricultural University हैं। बहुत कुछ कर सकते हैं। किसी आदमी को राहुरी में बड़े बड़े Scientist हैं, आप उनको चिट्ठी आप गरीब देखें तो उसकी आप मदद करे उसको लिखकर सकते हैं, उन लोगों ने जब Vibrated ऊपर उठाने की कोशिश करें हरेक गरीब आदमी पानी दिया तो 2/3, दो तिहाई फसल उनकी को उठाने की कोशिश करें, आपका कर्तव्य होता ज्यादा आई और फूल बड़े आए। और हमने जो वहाँ की चीज़े देखी तो बड़ा आश्चर्य लगा हमें कि करें, उसे बताएं किस तरह से वो अपना जीवन कुछ फल ऐसे कि ऐसे तो फल हमने कभी देखे निर्वाह करे। बहुत ही ज्यादा पैसे की ज़रूरत नहीं थे। उनके रंग, उनका तेज, उनका आकार नहीं। ज्यादा पैसा हो गया तो उसके पैर निकलेंगे। प्रकार एक अजीब तरह की चीज़ थी। इन्हीं चैतन्य जो आदमी शराब पीने लग गया तो अब उसको की लहरियों से आप लोगों की बीमारियाँ मुफ्त में पूछ है। जिस तरह से भी हो सकता है उसकी मदद कहना अब तेरे को पैसा ज्यादा करने की ज़रूरत ठीक कर सकते हैं। आधा प्रश्न तो आपका ठीक हो नहीं। जिसने सिगरेट पी उससे भी कह सकते हैं गया, Health M.nistry बन्द करा सकते हैं। आप कि बस काफी है, जिसने बीड़ी पी उससे कहना का पैसा बचा, डॉक्टरों के जेब आप कुछ कम भरेंगे, अब काफी है। अब तू गरीब नहीं। फिर जो जुआ डॉक्टर लोग इसी से मुझसे घबराते हैं। इसी से खेलता है तो वो कभी भी गरीब नहीं। इतना हो कि बुलाया नहीं। लेकिन ऐसी सब बीमारियाँ थोड़ी बस उसका खाना पीना चले. उसमें कोई सहजयोग से ठीक होने वाली हैं। लेकिन दुनिया विषय-वासना नहीं आए। सो ऐसी जगह ही कीड़े बीमार रहे ऐसी कोई इच्छा डॉक्टर भी नहीं करता मकोड़े पैदा होते हैं और इसीलिए Population ह होगा। मुफ्त में, अब जो लोग हमारे सहजयोग में बढ़ता है। जैसे ही वातावरण अच्छा हो जाता है, आते हैं अधिकतर लोग वो डॉक्टरों के पास नहीं आप जानते हैं कि जहाँ बुरादा होता है जहाँ गंदगी जाते। दवाईयों के खर्चे कम हो गए, डॉक्टरों के होती है, वहीं मच्छर पनपते हैं। जैसे ही सफाई हो खर्चे कम हो गए, नींद की गोलियाँ लेने की ज़रूरत जाती है वहाँ एक ही दो फूल खिलते हैं। इसीलिए नहीं आप आराम से पड़कर सोइए। बहुत सारी बीमारियाँ ठीक हो जाती हैं, कुछ नहीं होती, बहुत जरूरी है कि हम लोग इस वातावरण को

अधिकतर बीमारियाँ ठीक हो जाती हैं कुछ नहीं ईमानदार लोगों का दुनिया में कोई ठिकाना नहीं । होती, अधिकतर बीमारियाँ ठीक हो जाती हैं। ये बेवकूफी की बात है। आप ईमानदार हैं यही तो आपमें संतुलन आ जाता है, आप आनन्द में आ मज़े की चीज़ है। सब केइमान हैं और आप ईमानदार जाते हैं। शराब सिगरेट और जुआ बाज़ी औरतों हैं, ये बड़ी शान की चीज़ है । ये आपका गौरव है, के चक्कर सब छूट जाते हैं। हमारे यहाँ कुछ हिप्पी आपका ताज है उसके लिए आप कहते हैं कि लोग आए. थोड़े दिनों में देखा उनके पास बड़े ईमानदार की कोई दुनियां में पूछ नहीं । पूंछ काहे अच्छे रेडियोग्राम, ये वो। मैंने कहा ये कहाँ से को लगाने को चाहिए? इसकी क्या ज़रूरत है? अरे आए? कहने लगे अब तो हमारे यहाँ पैसे ही पैसे आप ईमानदार आदमी हैं दुनिया में लोग कहते हैं बरस रहे हैं। मैंने कहा ‘कैसे? कहने लगे अब हम कि शास्त्री जी इतने ईमानदार थे कि जब मरे थे तो गांजा नहीं पीते हैं, L.S.D. नहीं पीते, उसमें तो वे कर्जे अपने छोड़ गए। अब वो कर्जे छोड़ गए बहुत पसा लगता है, अब हम शराब नहीं पीते। यही उनका गुण हो गया देखिए सारी दुनिया कहने लगे अब हम कहीं कैबरे में भी नहीं जाते, इन्हीं का उनको गुण दे रही है कि उन्होंने debts डाँस में नहीं जाते, बस इसी में मजा आता है। सब छोड़ दिए। अपने गुणों पर आदमी को आनन्द आता भारतीय रिकार्ड ले लेकर के बजाते रहते हैं। अब आप सोचिए घर में उनके शोभा आ गई, रौनक स्त्री है वो अपने सतीत्व और अपने पतिव्रत्य के आ गई. सब आनन्द से, सब लोग रह रहे हैं, मियां आनन्द में रहती है। अपने गुणों का आनन्द आता बीवी के झगड़े छूट गए, दूसरों की बीवियों के साथ है अपने मज़े का आनन्द आता है। आप कोई भागते नहीं अपनी बीबी को प्यार करते हैं, और शराबी को देखते हैं कि वो शराब पी रहा है तो है, अपने गुण से बो प्लावित होता है । एक सती बीवी भी ठिकाने से आ गई। सब आराम हो गया, आपको उस पर दया लगती है कि भई मैं तो आराम व्यवस्था हो गई, सब राम राज्य आ गया। उसमें से बैठा हूँ, ये कहाँ मरा जा रहा हैं? फिर ये नहीं खर्चे बड़े कम हो जाते हैं। एकदम खर्चे कम हो लगता कि ये शराब पी रहा है और मैं तो बिल्कुल जाते हैं। मनुष्य मौके पर पहुँचता है। जो कुछ ही पुराने ढंग का हूँ। मैं तो बिल्कुल पी नहीं पाता। उसका जितना है Vibrations से देखता है। जो हीन भावना की जगह आदमी को ये लगने लगता आदमी Vibrations में जीता है वो बहुत बड़ा संग्रह हैं कि ये आदमी पता नहीं कहाँ ये दयनीय दशा में नहीं कर पाता। ज्यादा उसके पास चीज़ हो जाती आ गया? उल्टी ही दशा आ जाती है। हँसी आने है तो वह बाँटना शुरू कर देता है संग्रह बहुत लगती है और बेवकूफी पर उसको आश्चर्य लगता ज्यादा नहीं करता, उसको बाँटने का मजा आता है। जब ऐसी कोई बातें करता है तो उसको लगता है, उसको देने का मज़ा आता है। | वो अपनी जो है कि ये कैसा बेवकूफ आदमी हैं? कैसी बात कर Virtues जो Goodness हैं उसको Enjoy करते रहा है? अभी भी लोग मुझसे कहते हैं कि माताजी हैं। वो अगर सच बोलता हैं तो उसका मजा उठाता यहाँ तो ऐसा है कि अगर आप शराब नहीं पिओ तो है आपने से लोग देखे होंगे जो कहते हैं आपकी कोई इज्जत नहीं करता। मैंने कहा सच्ची बहुत

बात है? ऐसा तो कभी हो ही नहीं सकता। Cosmic Change आ जाएगा और आ ही रहा है। वास्तविक में ऐसा नहीं हो सकता। असल में बो उसको आप लोगों को देखना चाहिए और सोचना आपसे इसलिए भिड़ते हैं कि उनको लगता है कि चाहिए कि माँ ये कहती थीं, सच था । और आप मेरी दुम कटी है और इसकी क्यों नहीं कटी? अपनी स्थिति बनाएं इसी चीज में और आप ही इसीलिए आपके पीछे पड़ते हैं। लेकिन गर आप ये वहन करें इस शक्ति को और सारे संसार को भी उनको ज्यादा न जताएं कि हम शराब नहीं पीते हैं दें। उसके लिए आपको रुपया पैसा खर्च करना पर उल्टी तरह से बातें करें। इसमें कृष्ण की नहीं, आपको कुछ भी देने का नहीं, सिर्फ ये कि Diplomacy करनी चाहिए कि ऐसे कहें मैं आजकल आप अपना Instrument ठीक कर लें। इस इतना खुशहाल हूँ बड़ा मजा आता है मुझे। घर में Instrument के लिए आपको ध्यान धारणा आदि आराम से खाता पीता हूँ, मुझे आजकल कोई करना पड़ता है। इसके लिए जो भी ये लोग तकलीफ नहीं। उन्होंने कहा क्यों भई? मैंने कहा Programme करते हैं दिल्ली में, जो भी इनके शराब छोड़ दी न तो वो पैसा सब बच गया। फिर पास सहूलियतें हैं, इनका नम्बर आप फिर से लिख इतना मजा आता है, बच्चों को लेकर मैं घूमता हूँ। लें, E-288 पंडारा रोड, आप वहाँ पर खबर लें E- बड़ी मेरी मजे की जिन्दगी है। वो फिर सोचेगा कि अरे ये तरीके होते हैं। उससे आप दुनिया बदल Friday 6 to 7 वहाँ आप जब भी फोन करें वे सकते हैं। इस तरह से संसार में राम- राज्य आ बताएंगे इस बारे में। आज बहुत दिनों बाद एक जाएगा सतयुग तो शुरु हो ही गया है इसमें किताब भी प्रकाशित हो गई है वो भी आप ले लें। शंका ही नहीं है क्योंकि सतयुग के ही असर आ उसमें भी आप समझ लें कि कुण्डलिनी क्या चीज़ रहे हैं। कोई भी बात छिपने वाली नहीं । कार्टर हैं और उसमें क्या क्या घटित होता है और किस साहब ने एक छोटी सी बात कह दी, वो भी बाहर तरह से ये कार्यान्वित होती है। इसमें कौन सी आ गई कोई किसी की बात छिपने नहीं वाली कौन सी विशेषता है। गर आप इस चीज़ को बिठा सब लोग सामने आ जाएंगे सबका पता हो जाएगा, लें अपने अन्दर समालें, इसमें रजें, तब मज़ा आएगा । कौन कहाँ है क्या है। कौन कितनी गहराई में है रे रजने वाली चीज़ है। अब वो समय आ गया है । सब प्रकाशित हो जाएगा अब वो दिन नहीं रहे कि परमात्मा का साक्षात्, सत्य का साक्षात्, जो कुछ आप कोई भी चीज़ छिपा कर कर लें। एक आदमी लिख गए हैं उसका fullfilment, उसका दूसरे को खींचेगा, एक ईमानदार आदमी होगा Completion, उसकी पहचान, पूरी तरह से आप उसको लोग खींचना चाहेंगे तो वो खिंच नहीं चैतन्य लहरियों से कर सकते हैं क्योंकि आपके पाएगा क्योंकि उसको समाज, जनता उसकी मदद अन्दर एक नई चेतना जिसको वाइब्रेटरी चेतना करेगी। ये सतयुग के लक्षण हैं और ये शुरु हो गए कहते हैं, चैतन्यमय चेतना आ गई है, माने जो भी हैं। कोई भी आदमी बहुत गर दुष्ट हो वो भी चल नहीं पाएगा सबका जिसे कहना चाहिए कि माध्यम से आप सिद्ध कर सकते हैं कि परमात्मा है 288 पंडारा रोड, यहाँ उनसे बातचीत करें Every awareness है उसमें light आ गई है। उसके

गई ये पहचान हो गई कि हम एक ही माँ के बेटे या नहीं, परमात्मा की शक्ति क्या है, किस तरह से चलती है, ये हमारे अन्दर चक्र हैं या नहीं, चक्रों में हैं। चाहे आप अमरीका चले जाओ। एक साहब देवी देवता हैं या नहीं। हम लोगों का किस तरह अमरीका गए उनका भी ऐसा ही हाल हुआ। से उत्थान होता है? किस तरह से हम दूसरों को उन्होंने कहा। was lost, वहाँ एक साहब मुझे मिले ठीक कर सकते हैं, किसमें क्या बीमारी है, अनेक तो उन्होंने कहा कि साहब आपके Vibration आ छोटी छोटी चीजों का आप निर्णय कर सकते हैं। रहे हैं। मुझे भी Vibration आ रहे हैं। कहने लगे जैसे कि एक साहब आये, कहने लगे माँ हम आप माताजी के भक्त हैं? कहने लगे हाँ । तो कहने बाजार गए तो समझ नहीं पाये कि ये चीज़ खरीदें लगे चलो भई, अपने चलें एक साथ। इसी तरह से या नहीं खरीदें। मैंने कहा आप वाइब्रशन देख अनेक काम बनते जाते हैं। जहाँ जाइए वहाँ लेते। एक बार हम जा रहे थे तो किसी ने कहा कि Vibration से पता चलता है, ये सुगन्ध है न। हरेक एकदम हमें वाइब्रेशन आए तो हमने सोचा कि माँ आदमी पहचान लेता है। कुत्ते बिल्लियाँ तक आपको कहीं आयी होंगी और पहुँच गए वहीं पे कहने लगे देखो माँ हमको तो वाइब्रेशन आये, हम पहुँच छोटे छोटे बच्चे भी पहचान लेते हैं। बताते हैं कि पहचान लेंगे कि आप Vibration वाले आदमी हैं। गए यहाँ। स्टेशन पर एक दिन ये परेशान थे कि स्कूल में हमारे यहाँ पाँच लड़के हैं, वो हैं पार । अभी तक पहुँची नहीं माँ, तो उनके एक दम बाकी नहीं हैं। कौन पार है, कौन नहीं, फौरन पता वाइब्रेशन आए कि माँ तो पहुँच गईं। हम भी वही चल जाता है। जो पार है वो हमारा भाई हुआ या पहुँच गए। तो वाइब्रेशन जो हैं वो आपस में बोलते बहन हुई, क्योंकि माँ के ही तो सब बच्चे हैं। ये नई चीज़ अन्दर में आ जाती है । और आप सोचो रहते हैं बताते रहते हैं, बराबर ठीक ठाक करते रहते हैं। इतने कमालात हैं, इतने कमालात हैं कि आपके कितने भाई बहन इंग्लैण्ड अमरीका में हैं। हम आपको बता नहीं सकते। उदाहरण के लिए उस तरह के नहीं जैसे गुरुजी लोगों के होते हैं, साहब यहाँ दिल्ली में आए हमने आपसे बताया, उस तरह के नहीं, ये असली हैं। ये आपके लिए यहाँ आए और उन्होंने कहा कि हम तो जानते नहीं दौड़ेंगे। आपके लिए सब काम करेंगे एक राहब कि दिल्ली में जाएें कहाँ। तो उसने कहा कि माँ राहुरी से जा रहे थे, अपने बोरे ले जा रहे थे, चीनी को याद किया, इतने में सामने देखते हैं कि एक के बोरे ले जा रहे थे, ऊपर से बरसात हो गई। साहब चले आ रहे हैं! तो उन्होंने कहा आप कौन हैं? तो कहने लगे मैं तो माँ का भक्त हूँ मैं भी माँ तब होगा, नहीं तो हमारी तो सारी चीज बेकार हो का भक्त हूँ। उन्होंने उनके Vibration देखे, कहने लगे हम तो आपको जानते हैं। आपको माताजी कहाँ जाएं? जहाँ रुक जाए वहीं रोको । जहाँ रोका निर्मला देवी ने जागृति दी है? कहने लगे हाँ । आपने कैसे पहचाना? कहने लगे Vibration आ रहे उनके सब बोरे भीग गए। उन्होंने कहा कहीं रोकेंगे गई। इतने में जाकर कहने लगे कि अच्छा चलो वहीं पर Vibrations आने लगे। उन्होंने कहा यहाँ कहाँ Vibration? तो देखा। वहाँ रास्ते पर हमारा Board लगा है । कहने लगे यहाँ कहाँ हमारा हैं, आपके भी आ रहे हैं। चलो। दोनों की दोस्ती हो

Original Transcript : Hindi Board लगा है? अन्दर गए तो बंगले के अन्दर में आप अजातशत्रु हो जाते हैं। आपके शत्रु जो हाँ पर हमारा Centrel उन्होंने कहा आओ भई, हैं आपके हट जाते हैं। Private वालों का भी तो उन्होंने कहा हम तो देखते देखते आए, भुलिया फायदा हो जाता है, लेकिन सब से बड़ी चीज़ है में बैठी हुई हैं। जहाँ हम गए उन्होंने हमसे बताया कि अपनी नाभि साफ रखनी पड़ती है आपकी है। फिर उन्होंने हम से पूछा हों वो आए थे हमारे नाभि खराब है और आप चाहें कि लक्ष्मी जी जागृत पास । एक साहब बैठे थे. सर्वरे उठकर देखा तो नहीं हुई और नाभि साफ करने के लिए शुद्धता बोरे-बोरे सब सुखे हुए थे। फिर वो उठ गए, रखनी पड़ती है उसके बारे में सोचना पड़ता हैं। जितना पैसा था उतना मिल गया लक्ष्मी जी की एक साहब थे हमारे यहाँ आए, कहने लगे हमारे कृपा तो बड़ी होती है। इसमें कोई शंका नहीं । यहाँ कोई आता ही नहीं, हमारी दुकान ही नहीं असली होती है। असली लक्ष्मी जी की कृपा होती चलती है। पूने की बात है। तो हमने कहा हम है। एक हमारे पास एक साहब आते थे, बहुत दूर आएंगे हम उनकी दुकान पर गए उनको जागृति से, काल्वा से बड़े शरीफ आदमी परन्तु गरीब थे दी. तो दुकान ऐसे चलने लगी कि अब बहुत ही खेती का काम करने वाले आदमी मैंने उनसे कहा Busy हो गए, अब बो बहुत बड़े आदमी हो गए, हर बार एक-एक हार लेकर आते हो? कितना अब बो हमें मिलने भी नहीं आते। हर बार याद खर्चा पड़ता होगा? क्यों इतनी परेशानी करते हो, करते हैं। अरे फिर इतना Time नहीं मिलता, ये हुए हर बार नहीं करना चाहिए? कहने लगे माँ तुम्हारी Business है वो Business है । हम दो बार पूना कृपा से लक्ष्मी जी की कृपा हो गई। कहने लगे गए मिलने भी नहीं आए। और जब पहली मरतबा हमारा एक खेत था वैसे ही पड़ा रहता था। उसको हम वहाँ गए थे तो वो गरीब थे बेचारे, गरीब माने हम जोतते नहीं थे क्योंकि उसमे मिट्टी ज़रा उनका चलता नहीं था हमें याद है हम रिक्शा में चिकनी ज्यादा थी कोई सिंधी आए, कहने लगे बैठकर गए, मोटर थी नहीं, रिक्शा में बैठकर गए. तुम्हारी मिट्टी बड़ी अच्छी है हमको दोगें? कहने तो पूरी समय रोते गए माँ आप चली जाओगी, लगे, किसलिए? कहने लगे इंट बनाने के लिए। तो हमारा कैसा होगा? अब ये हाल है अब हम वहाँ माई उसको दस गुना दाम उसी मिट्टी का मिलता था, गए तो मिलने भी नहीं आए। तो ऐसे पैसे से भी खेत का खेत उसी तरह बना रहा। अब उसकी क्या फायदा? मतलब क्या है कि समझ में आ मिट्टी उठाकर ले जाने का दस गुना दाम मिला। जाता है. wisdom आ जाता है, संतुलन आ जाता कहने लगे आपकी कृपा से हुआ सहजयोग के हैं क्योंकि आप समझते हैं Vibrations में, आप बाद हुआ, कहने लगे हम कभी सोच भी नहीं सकते चाहते हैं ये चीज़ लें, फिर समझते हैं कि Vibrations थे। ऐसे अनेक लोगों को फायदे हैं। तो आपके ठीक नहीं हैं, छोड़ो। Promotions भी हो जाते हैं, सरकारी नौकरों को साक्षी स्वरूप हो जाता है। देखता है नाटक सब । बहलाने के लिए कह रही हूँ। पहली चीज़ आज कितने लोग पार हुए, देखते हैं, हाथ ऐसे छूटते जाता है, आदमी हुए Promotion होना चाहिए, Promotion हो जाएगा, करें।