Deeper Meditation

London (England)

1978-02-20 Deeper Meditation, UK, 32' Download subtitles: EN,RUView subtitles:
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                                               “गहन ध्यान”

 लंदन, 20 फरवरी 1978

कुली (टोनी पानियोटौ) क्या आपने इसे लिखा है?

श्री माताजी: नमस्ते, आप कैसे हैं?

योगी: बहुत अच्छा, धन्यवाद।

श्री माताजी: परमात्मा आप को आशिर्वादित करें ! आप कुर्सी पर बैठ सकते हैं। आराम से रहो।

योगी: ओह, यह आप की बहुत कृपा है!

श्री माताजी: कुली से कहो कि वह स्वयं के लिए लिख ले।

योगी: वह कर रहा है।

नमस्कार! डगलस आप कैसे हैं? क्या हाल है?

डगलस फ्राई: बहुत अच्छा!

श्री माताजी: बहुत बढ़िया लग रही है! एक फूल की तरह सुंदर! देखो, मेरे पास कितने सुंदर बच्चे हैं, बिलकुल यहाँ फूलों की इन पंखुड़ियों की तरह।

क्या आप थोड़ी देर के लिए एक खिड़की खोल सकते हैं। बस पांच मिनट के लिए खिड़की खोलें।

आराम से बैठो। इस तरह सहज रहें। मेरा मतलब। हां, बहुत सहज रहें। एक को बहुत, बहुत सहज, बहुत सहज होना पड़ता है।

मुझे मिलने से पहले ही उसे यह प्राप्त हो गया था ! क्योंकि इससे पता चलता है कि यह हवा में लहरा रहा है।

आज मैं आपको आगे के ध्यान के बारे में बताना चाहती हूं कि: हमें कैसे बढना है और कैसे खुद को समझना है।

आप देखिए अभी तक चीज़ों से व्यवहार करने की आप की आदतें अथवा तौर-तरीके रहे हैं : जिस भी तरह से आपने अपनी सांसारिक,व्यक्तिगत, भौतिक और, शरीर की समस्याओं निपटा है, लेकिन अब जैसे ही आपने परमात्मा के राज्य में प्रवेश किया है और ईश्वर की शक्ति आपके माध्यम से बह रही है, आपको पता होना चाहिए कि आपके समाधान और आपकी शैलियों को अब अलग होना है; यानी कि, आपको अपना चित्त परमात्मा के हवाले रखना होगा, वास्तव में आपके चित्त में उसका प्रकाश भर गया है।

मैं इसे समझाने की कोशिश करूंगी, क्योंकि जो कुछ अभी तक आप को ज्ञात है यह उस के ठीक विपरीत है।

आपने हमेशा सोचा था कि आपको अपना ध्यान एक बिंदु पर रखना है और फिर आपको आगे बढ़ना है, फिर आपको विषय पर धावा बोलना होगा या समस्या पर हमला करना होगा, अपनी सारी ऊर्जाओं को लगाना होगा, इस की तरफ मुड़ना होगा और फिर स्वयं पर जिम्मेदारी लेनी होगी, पूरी चीज़ की पूरी तकनीक, इसे कैसे कार्यान्वित करना है। और यह आपके लिए एक, एक प्रकार का जीवन का अनुभव था। आप अपने सभी अनुभवों का उपयोग करेंगे जो आपको इस तरह की समस्या, एक विशेष प्रकार की समस्या, अन्य सभी जो भी उनको हुई हों, सभी उपलब्ध किताबें और यहां तक ​​कि विशेष समस्या के लिए किये गए इन उद्यमों में से कोई एक। ठीक है। फिर आप उस समस्या पर हमला करें। और फिर आप पाते हैं कि जब आप हमला करने की कोशिश करते हैं, तभी यह आपके हाथों से फिसल जाता है, आप इसे ढूंढ नहीं पाते हैं, और आप यह नहीं समझ पाते हैं कि आपने इसे कैसे खो दिया है।अब, यह सहज एक बहुत ही अलग प्रणाली है। अब आप परमात्मा के राज्य में प्रवेश कर चुके हैं, आप संत हैं, और जो कुछ भी अब तक बनाया गया था वह आपके भले के लिए है।

आपको प्रयोग करना और खुद देखना है। लेकिन बात यह है: आप को इसे एक मौका देना चाहिए। स्वयं आपका चित्त अब प्रकाश से भर गया है। आपको किन्ही पुस्तकों पर नहीं जाना है, आपको कहीं भी नहीं जाना है। स्वयं आपका चित्त उस स्फूर्त प्रकाश से प्रकाशित है। अब, यदि कोई भी चीज़ आपके चित्त में आती है, तो आप बस अपना चित्त ईश्वरीय ध्यान से जोड़ते हैं। कैसे? यह कहकर कि, “ठीक है, ऐसा ही होने दो। इसे आपकी इच्छानुसार होने दें। ”  “Thy will be done!” “परमात्मा की इच्छानुसार हो जायेगा!” ऐसा ही आपको कहना चाहिए: “Thy will be done!””परमात्मा की इच्छानुसार हो जायेगा!”। आप बस यही कहें, आप हैरान रह जाएंगे। और फिर पूरा तंत्र, तुम्हारा प्रकाशित चित्त स्वयं परमात्मा के चित्त का ही अंग है। तो पूरी चीज, पूरी ताकत कार्यान्वयन करेगी । जिस तरह पहले आपने अपनी व्यक्तिगत समस्या के लिए काम किया, अब यह सम्पूर्ण इसे कार्यान्वित करेगा और यह घटित होगा। यह एक अद्भुत बात है।

और चित्त वहां होना चाहिए, सूक्ष्म में होना चाहिए है। क्योंकि आपका चित्त सतही रूप में है इसलिए आप इस तरीके से समस्या पर हमला करते हैं। यदि आपका चित्त किसी ढंग से सूक्ष्म की ओर अधिक आकर्षित किया जाए, तो जो होता है उसका प्रभाव दिखा दिया जाएगा। वैसे भी, आप इसे देखेंगे। लेकिन फिर आप इसे बहुत स्पष्ट रूप से देखेंगे कि यह कैसे कार्य करता है।

उदाहरण के लिए, अब, जैसे, मैं अपने कमरे में आती हूं और आपने इन सभी चीजों को इतनी खूबसूरती से किया है, यह सब काम इतनी अच्छी तरह से किया है, फिर जब मैं यहां आती हूं और मैं वह सब देखती हूं, तो अब मैं हर बारीकी नहीं देखती हूं, मैं यह नहीं देखती कि यह कैसे किया गया है, यह, वह, सब कुछ, लेकिन मैं बस यहीं खड़ी हूं, और मुझे सब कुछ अपने अंदर उफनता हुआ महसूस होता है। यह काम करता है, और यह मुझे खुशी देता है, मुझे आनंद देता है, मुझे प्रसन्नता से भर देता है। मेरे अस्तित्व में, मेरे शरीर में विभिन्न प्रकार का आनंद बहने लगता हैं। मेरी पूरी समझ में यह बह रहा है और यह मुझे खुश कर रहा है। अब मैं इसे उस तरह से नहीं आंकूंगी जिस तरह से लोग जज करते हैं। वे तुरंत आएंगे, माना कि वह दूसरे ही स्तर का व्यक्ति है, वह बहुत स्थूल तरीके से आकर देखेगा। वह कहता है, “यह एक है, यह अच्छा होगा। और यह एक पत्थर है और यह चीज है। ” और “यह यहाँ नहीं होना चाहिए था और वह वहाँ नहीं होना चाहिए था!” और “आपने उसके लिए कितना भुगतान किया है?” और “आपने इतना पैसा क्यों दिया?” ऐसे ही चलता रहता है। लेकिन जो एक दिव्य व्यक्ति है, वह भी उसी तरह से बात कर सकता है जिस तरह से आप बात कर रहे हैं, लेकिन इसमें भी वह खेल रहा है, दिव्य अपनी भूमिका निभा रहा है। यह सिर्फ आपके लिए एक तरह का, छोटा सा, मतिभ्रम बनाने के लिए अपनी भूमिका निभा रहा है। लेकिन भीतर तो उस परमात्मा का प्रवाह सिर्फ तुम्हें आनंद देने के लिए है, तुम्हारी बेहतरी के लिए। यहां तक ​​कि जब ऐसा कोई व्यक्ति आपको डांटे या कहे  यह उसी उद्देश्य से होता है| उसी तरह से यदि आप खुद को बहुत, बहुत सूक्ष्म बना लेते हैं। कैसे? कि कोई भी स्थूल विचार अगर आपके मन में आ जाए तो उस मन को कहें, “तुम बस चुप रहो! मैं तुम्हे पसंद नहीं करता हूँ। ” धीरे-धीरे आपका मन इतना प्रशिक्षित हो जाएगा, मेरा मतलब है, यह सूक्ष्मता के अमृत को इतना समझ लेगा कि यह अपने आप स्थूल विचारों को खारिज कर देगा | आप इस दुनिया के साथ रहेंगे लेकिन आप इसे महसूस नहीं करेंगे, आप इसमें लिप्त नहीं होंगे। आप खाना खा रहे होंगे, सब बहुत अच्छा और बहुत अच्छे ढंग से, यह और वह, लेकिन तब आप यह नहीं जानते कि आप क्या खा रहे हैं। आप उस भोजन में बसे प्यार का आनंद ले रहे हैं।

तो सूक्ष्म होने के लिए और वह प्रेम बनने के लिए, आपका ध्यान प्रेम पर होना चाहिए। यदि आपका ध्यान वस्तु की कीमत, वस्तु की गुणवत्ता वगैरह पर है, तो वह सूक्ष्मता आप में नहीं हो सकती है।

तो सहज योग के बाद सूक्ष्म होना भी एक मानसिक गतिविधि है। अब कई लोगों को लगता है कि सहज एक जड़ चीज़ है, जो सच नहीं है। कभी-कभी आप ‘सहज’ का अर्थ गलत समझते हैं। यह ऐसा है जैसे, पहले मैं कहती हूं कि कार सहज ही शुरू हो जाएगी, ठीक है? लेकिन आप को एक्सीलरेटर दबाना होता है। आपको उस चीज़ का कुशलता से संचालन करना होगा, चूँकि आप एक सहज बन गए हैं इसलिए ऐसा कर पाना आपके लिए सबसे सहज है। यदि आपका चित्त सहज है तो आप स्वचालित रूप से प्रबंधित करेंगे। जब आप कार के संचालन में महारत हासिल कर लेते हैं, तो आप इसे स्वचालित रूप से करते हैं, सहज। लेकिन इतना सहज हो पाने के लिए आपको सबसे पहले प्रयास करना होगा। यदि आप यह नहीं सीखते हैं, तो इसका मतलब यह होगा कि आप बस एक ठहराव पर हैं। “ओह, मैंने इसे सहज पर छोड़ दिया है, जब वायब्रेशन आना होंगे, तब आएंगे!” ऐसा  नहीं होगा ! क्योंकि अभी भी आपके साथ समस्याएं हैं। तुम अभी तक उतने सूक्ष्म नहीं हो। तो उसे दूर करने के लिए, अब आप खुद को सहज बनाने के लिए समस्याओं को निकाल बाहर कर सकते हैं।

अपने आप को पूर्णत: साफ करने के लिए, आपको थोड़ी मेहनत करनी होगी। उदाहरण के लिए, अब इस तरह के वायब्रेशन के साथ आपके शरीर में असंतुलन होता है, आप को इसे हटाना होता हैं। आप जानते हैं कि इसे कैसे निकालना है। ये वो है जो की सहज योग के कारण हुआ है कि, आप जानते हैं कि एक असंतुलन है, आप जानते हैं कि मेरा ऐसा चक्र पकड़ रहा है, कि यह हो रहा है। अब आप इसे सूक्ष्म बिंदु पर लाते हैं, जिसे की सबसे पहले आपको शारीरिक रूप से इस पर काम करना होगा। ठीक है?

अपने आप को बिल्कुल स्वच्छ करने के लिए बहुत सारे तरीके हैं। सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण हाथों के वायब्रेशन  को महसूस करना है, उन्हें देखकर, यह कैसे काम करता है। कौन सा अधिक है, कौन सा कम है, वह कैसे आ रहा है, ऐसी बात क्यों है? तब पता लगाना कि, “कैसे? मैंने इसे कहां से पकड़ा? ” “ठीक है, ऐसे और ऐसे व्यक्ति!” उसकी जूते से पिटाई करना [shoe beat him]।

ये सभी स्थूल चीजें हैं और इन्हें स्थूल चीजों से दूर करना है। तुम उन्हें हराओ। मेरे लिए मुझे किसी की पिटाई या किसी भी अन्य चीज की आवश्यकता नहीं है: बस इसे देखने से ही, यह भाग जाता है।

अगर केवल मैं वहां होती तो खुद ही भाग जाता है । मुझे परवाह नहीं करना होती है  लेकिन आप लोगों के लिए, आप पकड़ते हैं। तो उस कारण से आपको सावधान रहना होगा: शारीरिक रूप से आपको इसे कार्यान्वित करना होगा।

इसलिए बहुत सारे तरीके हैं यहां तक ​​कि, कई लोग अब बोल रहे थे, “ओह हम अब आत्मसाक्षात्कारी हो गए हैं, हमें पानी पैर क्रिया में क्यों बैठना चाहिए?” नहीं! प्रतिदिन, जिस तरह हम स्नान करते हैं, वैसे ही करना पड़ता है। माँ को बहुत सी बातें पता हैं, तुम्हें पता है! यह एक बहुत अच्छा विचार है, आप देखते हैं। बस बचने के लिए, वहाँ क्या है? “अब हम बिलकुल ठीक हैं, आप जानते हैं, हमारे हाथों में चैतन्य आ रहे हैं!” लेकिन आप सूक्ष्मतर नहीं हैं! अब भी आप दूसरों से पकड़ ले लेते  हैं।

तो अभी भी ये सभी भौतिक चीजें की जानी हैं, वास्तव में, क्योंकि अभी भी यह है, हमें कहना चाहिए, ऐसी निर्बलता अभी भी। यह अभी तक पूरी तरह से एक स्वस्थ व्यक्ति नहीं है। इसलिए आपको यह करना पड़ेगा | यह एक बात है। शारीरिक रूप से, आप जो भी भौतिक वस्तु है उसके बारे में आप जानते हैं।

यदि कोई समस्या हो तो, आप चाहें तो इसे आसानी से बाहर कर सकते हैं। अब इस व्यक्ति को लगभग उसी तरह निकाल लिया गया था। आप ऐसा कर सकते हैं! आप इसे बाहर निकालना चाहते हैं। ऐसा होता है! यह वास्तव में कारगर है। आखिर हर क्रिया सहज क्रिया है। अन्य कोई ऐसा नहीं कर पाता है। आप इसे करते हैं। चूँकि  यह गर्म और भयानक है आप इसे बाहर निकाल देते हैं।

यदि आप एक छोटे से नन्हे से आत्मसाक्षात्कारी बच्चे को देखें, तो आप चकित होंगे। वे एक हवाई अड्डे पर जाएंगे, वे इस तरह से जा रहे होंगे। हर समय वे ऐसे ही चलते रहेंगे, अपने दम पर! आपको उन्हें बताना नहीं पड़ेगा लेकिन आपके लिए, आपको यह समझना चाहिए कि, वह अवस्था अभी भी है, ताकि आपको इसे महसूस करना चाहिए। और आपको वास्तव में इसे फेंक देना चाहिए। शारीरिक रूप से यह करना पड़ता है। यह एक अभ्यास है और आप इसके बारे में ‘सहज’ नहीं हो सकते, ‘ नहीं ‘।

मेरे और आपके बीच एक फर्क है, इसलिए आपको इसे पूरी तरह करना ही होगा। जो लोग सोचते हैं, “हम आत्मसाक्षात्कारी हैं इसलिए सब ठीक हो गया है, समाप्त! अब तो हम दुनिया में शीर्ष पर हैं! ” आपको विकसित होना चाहिए, समझ में विकसित होना चाहिए, और खुद का इस तरह सम्मान करना चाहिए कि, “नहीं, हमें अभी भी बढ़ना है और अभी भी ऊँचा उठना है और और भी उठना है।” यह भौतिक पक्ष है जो बहुत महत्वपूर्ण है।

फिर दूसरा पक्ष मानसिक पक्ष है। अब मानसिक रूप से भी हर समय हम पर सभी चीजों से हमला होता है। सुबह आप अखबार पढ़ते हैं! आप को आज्ञा चक्र पर पकड़ आती है, अपने मूलाधार पर पकड़ आती हैं – भयानक बात है। यह एक दुख पैदा करने वाली बात है। यदि आप देखें कि जिस तरह से चीजों का वर्णन किया जाता है की, आपको सिर्फ डर लगता है।

इसलिए आपको क्या करना है की, मानसिक रूप से, आपको समझना चाहिए कि ये डरावनी बातें हैं। अब, आप यह नहीं कह सकते कि, “मैं अबोध हूं, मैं तो बस इसे पढ़ रहा हूं, सब ठीक है!” नहीं, तुम पकड़ में आ जाते हो | तो तुम को जो करना चाहिए की, एक बंधन डाल दिया। और आप अगर आज इसे पढ़ना चाहते हैं, तो आप दो पंक्तियों को पढ़ें, और यदि आप इसे पढने लायक समझते हैं, तो इसे पढ़ें। अन्यथा अश्लील साहित्य पढ़ने का क्या उपयोग है? यह हमारे लिए नहीं है। हम अलग लोग हैं। आपको पता होना चाहिए कि हम एक अलग वर्ग हैं। यह हमारे लिए बिलकुल नहीं है। तो कुछ भी पढ़ने का क्या फायदा जो हमें खुशी नहीं दे रहा है? कुछ सुखद, कुछ अच्छा पढ़ें। जैसे मैं कह सकती हूं सआदत के व्याख्यान, या ऐसा ही कुछ अन्य । यदि आप ऐसी या उस तरह की चीजों में जाते है, तब फिर आप आगे करते रहें। और जब आप इसे पढ़ते हैं तो आप मन से उस व्यक्ति का समर्थन करते हैं। लेकिन अगर आप अश्लील साहित्य पढ़ते हैं, तो आप पकड़े जाते हैं और आप आदतों के कारण, बस पुरानी आदतें, उन जैसे ही एक बन जाते हैं। आप देखिए। ये पुरानी आदतें हैं। जरुरी नहीं है की, जो कुछ भी आप देखते हैं उसे अवश्य पढ़ें? ।

लोगों को रास्ते में सभी विज्ञापनों को पढ़ने की आदत है। यदि वे एक को चूक जाते हैं तो वे यह देखने के लिए घूम जाते हैं कि उन्होंने इसे चूका तो नहीं है। एक और,  वे इसे और उसे देखेंगे, ये हमारी आदतें हैं। इसलिए हमें अपना ध्यान सूक्ष्मतर बनाना होगा:मन को कहें कि, “अरे! तुम कहाँ जा रहे हो?” तो इसके प्रति सतर्क रहें। इसलिए मानसिक रूप से हमें सतर्क रहना होगा।

फिर मानसिक रूप से एक और बात यह देखने की है कि आपको क्या विचार आ रहे हैं। अब भी नकारात्मक विचार आपके पास आते हैं, इस तथ्य से कोई इनकार नहीं करता है। शायद सहज योग के बारे में नहीं भी हों, लेकिन यह कुछ और के बारे में हो सकते हैं, शायद जीवन के किसी अन्य विषय के बारे में हो सकते है। आप ऐसी चीजों के बारे में सपने देख रहे होंगे। उस समय आपको जो करना चाहिए, बैठकर उन्हें  सकारात्मक विचारों की मदद से एक धक्का देना है, जैसा कि मैंने बताया कि एक बहुत अच्छा तरीका है जो वे कहते हैं कि, एक-एक करके अपने आशीर्वादों को गिनें। कहो, “मैं कितना भाग्यशाली हूँ? इस दुनिया में बहुत सारे लोग हैं। उसमें से भी इस लंदन में बहुत सारे हैं। उसमें से मैं ही हूँ जिसने वास्तव में सत्य को पाया है। मैं कितना भाग्यशाली हूँ! और मुझे लगता है की, वह मैं ही  हूं जो सही रास्ते पर चल रहा है। और मैं आगे बढ़ रहा हूं। अगर मुझे इसे इस रास्ते पर प्रगति करना है, तो मुझे बहुत, बहुत सकारात्मक रहने दो। इसलिए मुझे इस रास्ते पर आगे बढ़ने दो। ”

जब आप ऐसा करना शुरू करते हैं तो आप चकित हो जाएंगे कि धीरे-धीरे ये नकारात्मक विचार दूर हो जाएंगे। चूँकि अब भी आप पर हमला किया जाता है। आप पर बहुत हमले हुए हैं। और आपको विचार आते हैं। और फिर, जैसा कि आपकी आदतें हैं, क्योंकि आप सभी होशियार लोग हैं, और इस होशियारी के माहौल में पाला गया है, मैंने ऐसी शैलियों को देखा है। होशियार शैलियों बहुत खतरनाक हैं, वे मूर्ख शैलियों की तुलना में अधिक खतरनाक हैं। होशियार शैली ऐसी है कि, आप इसे इस तरह से लेते हैं कि आप खुद को धोखा देते हैं। हमेशा आप चीजों को स्वीकार करना शुरू करते हैं और आप खुद को धोखा देना शुरू कर देते हैं। और ये विचार धीरे-धीरे आपके अस्तित्व में जम जाते हैं। और अचानक आपको अपने दिमाग में एक बड़ी चीज मिलती है और आप कहते हैं, “ओह, यह कहां से आया है?” मेरी क्या हालत हो गई है?” तो सावधान रहें! क्योंकि धीरे-धीरे इसकी तहें  आपमें बसती चली जाएगी, धीरे-धीरे। और आपको चीजों को करने के बुद्धिमान तरीके की आदतें रही हैं।

जब आप होशियारी करते हैं? वास्तव में, होशियार कर क्या रहा है, कई बार, किसी बात को बस उल्टा पटकना है और इसे अपने अंदर लाना है। आप देख सकते हैं कि यह कुछ इतना मज़ेदार है, लेकिन ऐसा है, कि जब आप किसी चीज़ को होशियारी से निपटाते हैं, तो आप जानते हैं कि किसी चीज़ से कैसे छुटकारा पाया जा सकता है, और इससे कैसे बचा जा सकता है और स्वयं के लिए, कैसे इसे अलग लगने वाला बनाया जा सकता है। आप स्वयं, होशियारी से, अपने आप को धोखा देते हैं और इसे अलग दिखने वाला बनाते हैं और फिर आप उस चीज को स्वीकार करते हैं,  और इस बात की आप को जागरूकता भी नहीं होती है,जबकि यह आप का अंग-प्रत्यंग बन जाता है। क्या ऐसा नहीं है ग्रीगोइरे? यह एक आम शैली है, इसलिए सावधान रहें!

जब आप अपने विशुद्धि भाग को साफ़ करना शुरू करते हैं, तो आपको आश्चर्य होगा कि सूक्ष्मता आप में बहने लगेगी, आपके सामने सूक्ष्मता प्रकट हो जाएगी। सूक्ष्मता एक अवस्था है। यह आपके चित्त की एक स्थिति है।

बाहरी तौर पर आप का चित्त सतही है। अब आप किसी ऐसे चंद्रमा के बारे में कल्पना करें जिसे आप  सिर्फ एक पत्थर कह सकते हैं। फिर वह थोड़ा हिलना शुरू हो जाता है,  मुझे कहना चाहिए, थोडा गतिशील, फिर धीरे-धीरे यह सूक्ष्म हो जाता है। इसका आतंरिक भाग पिघल रहा है, उपरी भाग अभी भी कठोर है। आपका चित्त भी इसी प्रकार है। यह आप में पिघलने लगता है।

अब आप अंदरूनी भाग में हैं, आप बाहर नहीं हैं, लेकिन जब भी आप संपर्क में आते हैं, तो अंदरूनी भाग स्थूल से संपर्क करता है, अचानक आप इसके साथ एकाकार  होने लगते हैं, फिर उपरी सतह कठोर बनने लगता है और आतंरिक भाग मजबूत होने लगता है । फिर से आप अंदरूनी भाग को बढ़ाते हैं, यह फिर से परिधि की तरफ  जाने लगता है और चीजें पिघलने लगती हैं। अगर आप समझ सकें तो ऐसा ही चित्त है । तथा आप में जो प्रकाशित चित्त है उसे हर समय प्रबुद्ध रखा ही जाना चाहिए: ऐसा ना कर पाने का स्वयं का कोई ओचित्य ना बताएं ! ना ही हमें दूसरों को भी न्याय संगत ठहराना चाहिए। सब ठीक है।

आप सोचते हैं कि हमें विकसित होना चाहिए, हमें बिलकुल पूरी तरह ठीक होना चाहिए, हमें बहुत अच्छा होना चाहिए और जब हम पाते हैं कि कोई हमें परेशान कर रहा है, तो इस तरह की बकवास को बर्दाश्त करना मुश्किल है, यह सच है। लेकिन, इसके लिए, मैं यहाँ बैठी हूं, और आप सिर्फ मुझे बताएं और मैं इसका प्रबंध कर सकती हूं! आपने देखा है [कैसे] हमने एक समस्या को बहुत अच्छी तरह से हल किया है, और हम सभी समस्याओं को हल कर सकते हैं। (हँसते हुए) यह बहुत चतुर  तरीका है, क्या यह नहीं है? यह सूक्ष्म तरीका है! यह बस हल हो जाता है!

इसलिए आपको किसी भी चीज़ के बारे में चिंता करने की ज़रूरत नहीं है। आपको सौ बार सोचना नहीं पड़ेगा! हालाँकि मैं ही वह व्यक्ति हूँ जिसने आपको समस्याओं में डाला है! आप देखते हैं, मैं आपको बताती हूँ, “इस तरह से करो! आपको उसी तरह करना चाहिए था! आपको इस तरह से प्रयास करने चाहिए थे! ” लेकिन जो समस्या मैं खुद सुलझा रही होउंगी, आप देखिए। लेकिन यह देखने के लिए मैं तुम्हें ऊपर-नीचे दौड़ लगवा दूंगी। इसके विपरीत जब आप मुझे ऐसा करते हुए देखते हैं तो आपको समझ जाना चाहिए कि ये मैं हूँ और मैं आपके साथ चाल खेल रही हूँ!

अगर आपका ध्यान सूक्ष्म है तो समस्याओं को वैसे ही चुटकियों में हल किया जा सकता है (यदि माँ अपनी उंगलियाँ चटकाती है)। लेकिन अगर यह बुनियादी समस्या नहीं है या आप उस तक पहुँच नहीं सकते। समस्या तक पहुँच तभी संभव है जब आप एक सूक्ष्म व्यक्ति हों। यदि आप सूक्ष्म नहीं हैं तो आप किसी भी समस्या तक नहीं पहुँच सकते।

तो, सूक्ष्म होने के लिए और वहां होने के लिए, दिव्य होने के लिए, आपको स्वयं को घेरे हुए स्थूलता के आवरण को समझना होगा। आप कुंडलिनी के माध्यम से ऐसा कर सकते हैं क्योंकि आप अपनी कुंडलिनी चढ़ा सकते हैं, स्वयं देखें कि यह कहाँ अटकी हुई है। “अब यह यहाँ बहुत भारी है। यह यहाँ एक पत्थर की तरह है यह यहाँ खटखटा रही है। यह सब कुछ कर रही है। ” अब, यह इसे देखने का एक बहुत ही स्थूल तरीका है, इसे देखने का बहुत ही सकल तरीका है। यह आपको कुछ सुझाव दे रही है। तो अब स्वयं आपको सहस्रार में यह देखना है , – जो कि किसी के लिए जगह हमें पता है – तो आप बस बैठ कर कहें, “अब मैंने क्या किया है? मैं खुद ये समस्याएँ  क्यों झेल रहा हूँ? और अगर मैंने ऐसा कुछ किया है, तो कृपया मुझे क्षमा करें! ” यह काम करता है। यह एक सरल तरीका है।

लेकिन सबसे पहले, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि, आपने क्या पूंजी मुझे दी है? क्या यह एक सूक्ष्म पदार्थ है या स्थूल जो बोल रहा है  है? मुद्दा यह है की आप बात किस स्थिति से कर रहे हैं। मान लीजिए कि आप उस स्थिति से बोल रहे हैं, जहां आप गवर्नर जनरल हैं, तो हर किसी को आपकी बात माननी होगी! लेकिन अगर आप उस स्थिति से बोल रहे हैं जहाँ आप एक चपरासी हैं, तो कोई भी आपकी बात मानने वाला नहीं है।

तो मुख्य बात यह है की आपका चित्त कहाँ है।

इसलिए अपने ध्यान में मानसिक रूप से आपको इसे कार्यान्वित करना होगा|अब आप ध्यान के लिए बैठे , ठीक है, ज्यादातर निर्विचार जागरूक होने की कोशिश करें। लेकिन अगर कोई विचार हो, तो आपको यह कहकर उसे शांत करने की कोशिश करनी चाहिए कि, “ मैं कितना भाग्यशाली हूँ कि मैंने इन स्पंदनों को महसूस किया, मैंने इसे महसूस किया। और मैं इसके बारे में कितना खुश हूं! अब सभी नकारात्मक विचारों दूर हो जाओ! ” इस प्रकार आप इससे लड़ सकते हैं। अब आप जो भी करेंगे वह आपको सहज तक ले जाएगा, इससे पहले ऐसा नहीं था । बोध से पहले इसका कोई अर्थ नहीं है। यह वहां खड़ी एक जड़ कार थी, लेकिन अब यह कार चलने लगी है। और आप जो भी कोशिश करते हैं, वह आपको सूक्ष्म और सूक्ष्मतर बना देगा।

घोषणा जैसी सरल बातें, “हाँ, मैं यह करने जा रहा हूँ! मैंने इसे करने का फैसला किया है। ” आपके दिमाग को सकारात्मक सोच में लगा देती हैं : हम क्या करने जा रहे हैं? हम इसे कैसे करने जा रहे हैं? हम इसे कैसे कार्यान्वित करेंगे?

आप हैरान होंगे कि चीजें कैसे आएंगी। लेकिन आम तौर पर हमारी आदतें हमारी सतही समस्याओं के लिए होती हैं।

अब मैं कहूंगी कि बॉम्बे सहज योगी काफी विकसित हैं और वे काफी अच्छे हैं लेकिन फिर भी कभी-कभी वे वास्तव में बहुत बुरी तरह से नीचे गिर जाते हैं। इस बार मैंने सोचा कि वे किसी भी चीज़ की तुलना में थोड़ा घमंड करते हैं चूँकि दिल्ली के लोग कुछ चीजों में इतने अच्छे नहीं थे और आकर उन्हें यह करना पड़ा। और मुझे लगता है कि बॉम्बे के लोगों ने महसूस किया कि एक प्रकार से वे दिल्ली के लोगों की मदद  देने के लिए ही थे। ऐसा घटित हुआ। लेकिन तब उन्होंने खुद को काफी नीचे पाया और वे सभी हम्प्टी डम्पटीज़ जैसे नीचे गिर गए! आप देखते हैं, तो ऐसा हो सकता है।

तो जो कोई भी ऐसा महसूस करता है, “मैंने सब कुछ हासिल कर लिया है!” या, “मैं कहीं भी पहुँच गया हूँ!” एक हम्प्टी डम्प्टी फॉल [गिरावट]हो सकता है। क्योंकि यह बहुत खूबसूरती से खेला गया था। मैं बताती हूँ कि क्या हुआ था: वे लोग आए और फिर पुरानी दिल्ली में हमारे पास रहने के लिए ठीक से कोई जगह नहीं थी इसलिए मैंने कहा, “ठीक है, तुम गेस्टहाउस में मेरे रहने की व्यवस्था करो और वे लड़कों के हॉस्टल और लड़कियां गर्ल्स हॉस्टल में रह सकते हैं। ” उन्होंने कहा, “सब ठीक किया जा सकता है।” तो फिर सतही बात सामने आई: तो उनमें से एक व्यक्ति ने कहा कि, “आप देखते हैं लेकिन उन लड़कों के छात्रावास में भोजन तेल से भरा है और हम वहां कैसे खा सकते हैं?” और मुझे इसके बारे में पता नहीं था, किसी ने मुझे नहीं बताया। और फिर उन्हें इसका किसी के साथ प्रबंध करना पड़ा था और उन्हें अचानक से सभी भोजन और सब कुछ खरीदना पड़ा था और फिर एक कुक की व्यवस्था करनी पड़ी थी और वे किसी के साथ रहे। और जहाँ वे रुके थे वहाँ सब भूतों से भरा हुआ था! और उन सब के सर में पकड़ आ गयी, भयानक और यह और वह और वे मेरे पास आए।

तो उन्होंने कहा, “माँ हमें क्या हो गया है? आखिर हम आए और यह हुआ। अब हम सब उल्टी कर रहे हैं और ऐसा हुआ है। ” मैंने बोला क्यू? आप इन दिनों कहां खा रहे हैं? उस तैलीय जगह पर नहीं?” उन्होंने कहा, “नहीं, हमारे पास अपना रसोइया है, हमारे पास सब कुछ है, लेकिन समस्या यह है की घर भूतों से भरा हुआ है और हम सब उसी के साथ परेशान हो गए हैं!” तो मैंने कहा, “तुमको किसने सुझाव देने के लिए कहा था? क्या आप वह खाना नहीं खा सकते हैं? इतने हज़ार लड़के यहाँ खा रहे हैं। आप सहज योगी हैं जो आप खाना नहीं खा सकते हैं? आपका ध्यान तैलीय भोजन पर है।  आप में ऐसा क्या खास है कि आप नहीं खा सकते? मेरा मतलब है कि आपको पत्थरों को भी खाने में सक्षम होना चाहिए। यही सहज योग है। लेकिन आप साधारण भोजन नहीं खा सकते हैं जो कि सभी हजारों लड़के खा रहे हैं? और आप दूर रहना चाहते थे – खुद का इतना महत्व, इसलिए चलने दो ! ” और यह सब शैतानी ताकतों ने किया था। आपको कम से कम एक बार सोचना चाहिए था कि, “हम यहाँ से उस जगह पर क्यों जाना चाहते हैं? और जहां यह सब व्यवस्था की गई है, हमें यहां रहना चाहिए ! ” यह सहज है। वह हिस्सा भी उन्हें समझ में नहीं आया – भेदभाव यह भी है कि सहज और असहज क्या है? कहाँ आप सहज हैं और कहाँ आप नहीं हैं, आपको इसमें भेद करना चाहिए। कम से कम उस स्थिति  तक पहुंचना चाहिए।

तो तथाकथित, उच्च, उच्च वर्ग सहज योगी नीचे गिर गए – डलाप! – उस तरह, और वे बहुत शर्म और बुरा महसूस कर रहे थे। मैंने कहा, “यह सब ठीक है, तुम चिंता मत करो।” लेकिन यह एक साधारण बात है। यह अब एक सबक है। क्योंकि आप भोजन की समस्या से उबर सकते हैं, लेकिन भूतों का क्या ? आपको किसी ऐसे व्यक्ति के साथ रहने क्यों जाना चाहिए, जो अभी-अभी सहज योग में आया है, और आपको नहीं पता कि वह किस तरह का व्यक्ति है? उन्होंने कहा, “माँ, यह तुम्हारी माया है!” मैंने कहा, “लेकिन तुम्हारा क्या? आप लोग सोच रहे थे कि आप महान हैं और आप अब तक के सबसे महान सहज योगी हैं, और आप सभी दुनिया में सबसे ऊपर हैं! इसलिए ऐसा मत सोचो। ” और यही हुआ।

तो यह आप पर खेलता है, बस आपको परखने के लिए और यह आप पर काम करता है। तो,  सहज ’का अर्थ है कि बेशक,जो भी आपके सामने आता है, आप भी उसे अपनाते हैं,लेकिन यह बहुत आवश्यक है कि, आप इसे सकारात्मकता के साथ करते हैं।। इसका मतलब यह नहीं है कि आप हर चीज़ को ‘ सहज ‘स्वीकार करते हुए चलते हैं: “मेरे ऊपर आने वाले भूतों को मैं स्वीकार कर रहा हूं। सब कुछ जो मुझ तक  आ रहा है उसे स्वीकार कर रहा हूँ ! यह सहज का तरीका नहीं है, यह बात है। जब हम ऐसा करना शुरू करते हैं, तो वास्तव में  सहज ’जो आपको मिलेगा, वह है भूत , और जो आपको मिलेगा वह होगी सभी नकारात्मकता , और आपको रोग , बीमारी, सब कुछ भी मिलेगा। तुम्हें सावधान रहना होगा।

इसलिए मानसिक रूप से आपको सतर्क रहना चाहिए।

शारीरिक रूप से आपको इसे कार्यान्वित करना चाहिए।

और शारीरिक रूप से एक और बिंदु है: यह है कि आपको अपने शरीर की देखभाल करनी चाहिए, शारीरिक रूप से। [यह] बहुत आवश्यक है, क्योंकि यह शरीर भगवान का मंदिर है। यह निश्चित रूप से अब मंदिर है। यह एक तीर्थस्थल है। देखिये आपको कितना सुंदर मंदिर मिला है। और मुझे इस जगह पर रहना पसंद है।

इसे इतना सुंदर होने दो कि भगवान इसमें निवास करें। यह सुंदर तो है। अपने शरीर की देखभाल करें, अपने बालों की देखभाल करें, अपने आप को देखें। यदि आप अपना उपचार करते हैं, तो कोई नुकसान नहीं है। लोग कह सकते हैं कि, “मुझे अपना इलाज क्यों करना चाहिए? मुझे अपने ऊपर सारा बोझ उठाना चाहिए! ” सहज योग के लिए कष्टों के बारे में ये सभी रूढ़िवादी विचार बेकार हैं। किसी को कष्ट नहीं उठाना पड़ेगा। आपको बहुत ही स्वस्थ व्यक्ति बनना होगा।

जैसे किसी ने कहा, “ऐसा क्यों है कि रामकृष्ण परमहंस ने खुद को ठीक नहीं किया?” सबसे पहली बात ,चूँकि वह जानते नहीं थे कि कैसे खुद को ठीक करना है। लेकिन रामकृष्ण ने कहा, “मैं सभी बोझों को अपने सिर पर लेना चाहता हूं।” अगर कोई बीमार है तो आप बीमार नहीं पड़ेंगे; तुम बीमार नहीं पड़ोगे। लेकिन, केवल एक चीज यह है कि, यदि आप अपने शरीर की देखभाल करते हैं, यदि आप अपने शरीर का सम्मान करते हैं, तो आपका शरीर भी आपका सम्मान करता है। तुम्हारा शरीर समझता है ! यदि आप अपने शरीर की देखभाल नहीं करते हैं, आप अपने शरीर की उपेक्षा करते हैं, तो शरीर भी यह कहता है, “ठीक है, मैं अपने ढंग से चलूँगा !”

इसलिए आपको अपने शरीर की देखभाल करनी होगी। आपको यह जानना होगा कि इसे कैसे ठीक रखा जाए। मुझे लगता है कि हमें वास्तव में वे सभी चीजें जो आपके शरीर की देखभाल के लिए की जानी हैं इसे लिख लेना चाहिए। यह बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इन आधुनिक समय में या इन आधुनिक समाजों में, निश्चित रूप से आपने आराम के तरीके ईजाद किए हैं कि, जो आप यहां बटन दबाते हैं, तो आपको हर चीज उतरती हुई मिल जाती है, आप वहां बटन प्रेस करते हैं और आपको अपने पेट के अंदर भोजन मिलता है और वहाँ वह सब कुछ है । हर जगह ऐसा नहीं है! वे इसे कहते हैं, यह सब आरामदायक है, लेकिन मैं इसे काहिली कहती हूँ , या इसे आलस्य कह सकते हैं। यह आपको अच्छा स्वास्थ्य नहीं देने वाला है।

अच्छा स्वास्थ्य केवल तभी संभव है जब आप संतुलन करना समझते हैं और शरीर कैसे काम करता है और शरीर के साथ क्या होता है, इसके बारे में हर समझ है: छोटी, छोटी चीजें जैसे गर्म और ठंडा, ठंडा और गर्म। सहज योग के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है।

सहज योगियों को परिपूर्ण होना होगा, पूरी तरह निपुण। और आपको आधुनिक समय के मानदंडों के अनुरूप नहीं रहना है कि हर किसी को पतला होना चाहिए और हर किसी को बिल्कुल टीबी के रोगियों जैसा बनना जो किसी तरह की ब्यूटी परेड के लिए जा रहे हों !

आपको सभी को बहुत स्वस्थ तथा प्रभावशाली लोग होना चाहिए। जब भी आप वहाँ बैठे तो लोगों को सचमुच आपसे डर जाना चाहिए कि, “ये पहलवान कहाँ से आए हैं?” (हँसते हुए) तो यह संकेत है की आप स्वयं के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान दे रहे हैं। और इसीलिए मैं कहती हूं कि आप जो पढ़ते हैं, देखते हैं, सुनते हैं और, आप उन पर जितना ध्यान देते हैं, उसके प्रति सावधान रहें।

आप देखिये, माना कि अब डेविड जैसा व्यक्ति आता है: आप उस जैसे आदमी पर बहुत अधिक ध्यान देते हैं। हर चीज़ उसी से भर जाता है, पूरा माहौल इसके बारे में बात कर रहा है। हर कोई इसके बारे में चिंतित है, यह सब चल रहा है यह नकारात्मक है। मुझे लगता है कि उस समय आपने मेरे मुकाबले में डेविड की  ज्यादा चर्चा की। चूँकि मैं भी आयी हूं, लेकिन डेविड वहां था। लेकिन इस तरह की बात, ऐसा होता है। क्योंकि हम किसी चीज़ को इस तरह देखने के आदी हैं, जैसे कोई सनसनीखेज़ चीज़ सामने आ रही हो, आप देखते हैं। जैसे अखबार हमेशा कुछ सनसनीखेज प्रकाशित करेंगे। हम सनसनीखेज चीजों के अभ्यस्त हैं, इसलिए श्री डेविड काफी महत्वपूर्ण थे। लेकिन जरा देखें कि वह कितना महत्वहीन था – वह बिलकुल गायब हो गया। इसलिए अगर आपने उसकी उपेक्षा की होती और परवाह ना करते हुए उस पर बहुत ध्यान नहीं दिया होता …

मुझे उम्मीद है कि कुली उस व्यक्ति के साथ बहुत देर तक नहीं है, कृपया उसे फोन करें। आप देखें, मैं नहीं चाहती कि कुली उस का इलाज़ करे और मुसीबत में पड़े। ठीक है।

तो पानी में बैठने की नियमित आदतें और वह सब किया जाना चाहिए।

आपके दिमाग के बारे में नियमित आदतें: यह नहीं पढ़ने की है। बस टाल दो! आप इनमें से किसी भी चीज़ को अब और पढ़ना नहीं चाहते हैं। बहुत सी खूबसूरत किताबें हैं जिन्हें आप पढ़ सकते हैं। अगर आपको पढ़ना ही है और अगर आपको इसकी आदत है, तो आप सुंदर किताबें पढ़ सकते हैं। मैंने तुमसे कहा है कि उनमें से बहुत सारे हैं। आप बाइबल पढ़ सकते हैं और स्वयं देख सकते हैं कि यह सब इसका  हर शब्द सहज है। आप बहुत सारे उद्धरणों और बहुत सी चीज़ों का पता लगा सकते हैं जो इन ईसाइयों को बताने में हमारी मदद कर सकते हैं, अन्यथा वे हमारी बात सुनने वाले नहीं हैं। वे इस तरह की पुष्ट बातें हैं, जिन्हें आपको बाइबल से कुछ बताना होगा। आप कुरान पढ़ सकते हैं, आप खलील जिब्रान और अन्य चीजों को पढ़ सकते हैं, जो आपको समर्थन दे रहे हैं, जो आपकी मदद कर रहे हैं जो आपको विचार दे रहे हैं।

क्या तुम ठीक हो? पक्की बात? मुझे लगता है कि बेहतर ढंग से अपना बायाँ हाथ मेरी ओर और दायाँ हाथ बाहर की ओर रखना चाहिए।

तो आप इसे अभी बंद कर सकते हैं (रिकॉर्डिंग बंद करें)।