Ask for the Truth

London (England)

1978-03-20 1st Public Program London 3ASTP, 44'
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                   सार्वजनिक कार्यक्रम

लंदन 20-03-1970

…यह आपको पता होना चाहिए कि मैं ऐसा कुछ बताने वाली नहीं हूँ जो सत्य नहीं है, क्योंकि मैं यहां किसी राजनीतिक लाभ के लिए, व्यावसायिक लाभ के लिए नहीं हूं। नहीं साहब, मैं यहां स्वयं आपके फायदे के लिए हूं, असलियत के बारे में। यदि आप उपलब्धि चाहते हैं तो इसके बारे में असली बनें।

अब आप खुद ही देख लीजिए कि ऐसा होता है या नहीं। आप अपनी खुली आंखों से देख सकते हैं – इन लोगों ने देखा है – कुंडलिनी को स्पंदित होता हुआ। आप इसे देख सकते हैं। यह धड़कती है। जब लोग मेरे पैर छूते हैं, तो कई मामलों में यह धड़कती है। उन्होंने इसे देखा है। वे सब झूठे नहीं हैं! और उन्हें झूठ क्यों बोलना चाहिए? हासिल करने के लिए कुछ नहीं: पैसा नहीं, सबसे पहले, वही अलग कर दिया है। तो दूसरी बात क्या है?

यह कुंडलिनी उठती है, और आप इसे ऊपर उठते हुए देख सकते हैं, इन सभी चक्रों से होकर गुजरती है, और यह उस स्थान पर रुक जाती है जहां आपको कोई समस्या है। एक अन्य दिन हमारे पास कहीं से एक बहुत बड़ा आदमी था जो मुझसे मिलने आया था, और उसकी कुंडलिनी ऊपर आई, और बस ऐसे ही यहां धड़क रही थी। और यह सारा हिस्सा ऐसे ही धड़क रहा था। मेरा मतलब केवल उस हिस्से से है। तो लोगों ने उससे पूछा, “क्या तुम ठीक हो?” उन्होंने कहा, “हां, मैं ठीक हूं।” “लेकिन क्या आपको लीवर की समस्या है?” “हाँ मुझे है। आपको कैसे मालूम?” आप जान सकते हैं। कुंडलिनी ही सुझाव दे रही है। यह धड़क रही है।

तो तुम्हें जिगर को ठीक करना है, तुम्हें पूरे अस्तित्व को ठीक करना है। आपको बहुत सारी समस्याएं हैं: शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक। लेकिन जो भी समस्या हो, मैंने उन्हें सुलझा लिया है: सभी क्रमपरिवर्तन और संयोजन जिन पर मैंने अभी काम किए हैं ताकि एक को छोड़कर, अब कोई क्रमपरिवर्तन न हो जिस के बारे में मैं कह सकती हूं कि काम नहीं किया गया है: यह सबसे खराब है, गलत पहचान है .

यदि आप गलत पहचान के साथ आगे बढ़ते हैं तो यह आपकी मदद नहीं कर सकता है। आपको पता होना चाहिए कि आपको अपने आप को पहचानना चाहिए और किसी और चीज से नहीं; तभी यह काम करता है। बस यही एक चीज है, किसी भी असत्य के साथ गलत पहचान।

सत्य पाने के लिए प्रार्थना करो, और सत्य तुम्हें दिया जाएगा। लेकिन सत्य की मांग करें।  ‘सच्चाई’ वह नहीं है जिसे तुमने सच बना दिया है। सत्य जैसा है वैसा ही है: तुम सत्य को बना नहीं सकते, तुम उसे रूप नहीं दे सकते। आप यह नहीं कह सकते, “यह सच है,” नहीं! यह जो है सो है। आपको इसे देखना है, आपको वही होना हैं, आपको इसकी कद्र करनी है, आपको वह बनना है।

मूर्ख लोग, वे कैसे ईसा-मसीह पर टिप्पणी करते हैं? यहाँ तक कि मसीह जैसा व्यक्ति भी! हर कोई इतना अहंकारी हो गया है, मेरा मतलब है कि उन्हें लगता है कि उन्हें हर किसी की आलोचना करने का अधिकार है। ईसा-मसीह एक ऐसा व्यक्ति है जिसके बारे में आप सोच नहीं सकते।

सहज योगियों के लिए मैं इसकी चुनौती नहीं दे सकती। वे साक्षात्कारी-आत्मा हैं, इसलिए जब वे ईसा-मसीह के बारे में सोचना शुरू करते हैं तो वे निर्विचार हो जाते हैं। वह सोच से परे है: आप कैसे उनका तार्किक आधार पर मुल्यांकन कर सकते और उन्हें इस स्तर पर ला सकते हैं, और उसे इस स्तर पर ला सकते हैं कि आप बीबीसी में एक आलोचक बन कर, सवाल पूछ रहे हों कि, “तो आपका पुनरुत्थान कैसे हुआ?” आप इसमें से किसी को कैसे समझ सकते हैं? ब्रह्म के बारे में आप क्या जानते हैं? आप ईश्वरीय कार्य के बारे में क्या जानते हैं? उसकी कार्य करने की शैली के बारे में आप क्या समझते हैं? यह नन्हा मानव मन समुद्र में एक बूंद ही बन सकता है। यह समुद्र और उसके काम को नहीं समझ सकता। यही बात हमें समझनी है। और एक बार जब हमें इस बात का अहसास हो जाता है कि हम इस महासागर का हिस्सा हैं, तो हम स्वयं सागर बन जाते हैं।

लेकिन यह व्याख्यान नहीं है – फिर मैं आपको बता रही हूं – यह एक घटना है; आप तुरंत दूसरों को महसूस करने लगते हैं। जब आप समुद्र के बाहर एक बूंद होते हैं, तो आप महसूस नहीं कर पाते कि समुद्र में और कौन सी बूंदें हैं, लेकिन एक बार जब आप समुद्र में कूद जाते हैं तो आप सभी को अपने हाथों में महसूस करना शुरू कर देते हैं – बिल्कुल, तर्कसंगत रूप से, जिसे समझा जा सकता है – उंगलियों में चक्र बह रहे हैं।

अब कुंडलिनी के बारे में यह ज्ञान बड़े से बड़े ऋषियों को भी नहीं पता था, यहां तक ​​कि नारद जैसे लोगों को भी इसका ज्ञान नहीं था। उस समय इसकी जरूरत नहीं थी। समय नहीं आया था।

आप जानते हैं, उदाहरण के लिए, जब बिजली की ही रचना नहीं हुई हो तब उन्हें स्विच के बारे में बताने से क्या फायदा? वे साक्षात्कारी -आत्माएं थे, ठीक है, उनके पास चैतन्य थे, ठीक है, लेकिन वे यह नहीं जानते थे कि चक्र कौन से है, और वे पकड़ते हैं, और इन चीज़ों की कमी हैं वगैरह,। वे नहीं जानते थे। लेकिन मुझे ज्ञान है। उनमें से कुछ वास्तव में आधुनिक लोगों से ईर्ष्या करते हैं। वे सोचते हैं, “इन आधुनिक लोगों ने ऐसा क्या किया है कि उन्हें यह सारा ज्ञान प्राप्त हो जाए?” उन्होंने इंतजार किया, यही मुख्य बिंदु है।

इन लोगों ने इतना दिखावा करने की कोशिश की: ठीक है, चलो! उन्हें कुछ अधिकारी, कहीं इसके प्रभारी, और प्रभारी अधिकारी के रूप में नियुक्त किया जाता है। लेकिन वे विरासत नहीं बनने जा रहे हैं।

उदाहरण के लिए, ये सभी लोग जैसे इंद्र और देवता जो मौसम के प्रभारी इत्यादि हैं, आपके लिए इन चीजों की व्यवस्था करने के लिए परमेश्वर के दाईं ओर बहुत अच्छी तरह से बसे हुए हैं, इस जगह के कार्यवाहक की तरह, लेकिन आप हैं जो लोग इसका फल भोग रहे हैं। हम क्या कर सकते हैं? आपने प्रतीक्षा की, आपको मिल गया, और यदि आप इसे प्राप्त करते हैं, तो यह आपके अधिकार में है।

लेकिन यह मैं आपके अहंकार को दुलारने के लिए नहीं कह रही, कृपया इसे फिर से जान लें। चूँकि, आपको इसे प्राप्त करना है, आपको इसमें स्थापित होना होगा। और आत्म-ज्ञान वह चीज है जहां तुम ठीक मध्य में हो, जहां न तो तुम अहंकार में हो और न ही प्रति-अहंकार में, तुम मध्य में हो।

और आपके माथे पर जगह बनाई जाती है, सहस्रार में, अगर आप देखें, जब कुंडलिनी उठती है, तो इसके बीच की खाई, हरे रंग की खाई, कुंडलिनी के उठने से भर जाती है। वह ऊपर जाती है, और इस सहस्रार को खोलती है, जिसे हम बपतिस्मा कहते हैं। और वहां शीर्ष पर, आप सामूहिक चेतना की उस सूक्ष्म जागरूकता में प्रवेश करते हैं।

लेकिन जैसे ही आपकी कुंडलिनी आज्ञा के इस चक्र को पार करती है, तुरंत आप निर्विचार जागरूक हो जाएंगे: मतलब आप जागरूक होंगे लेकिन कोई विचार नहीं होगा, जिसका वर्णन युंग ने किया है। और उन्होंने उस सामूहिक चेतना की बात की है, जहां से उन्हें चीजों के बारे में विचार प्राप्त होते हैं, वह वह हिस्सा है जिस पर आप पहुंच जाते हैं – यानी वह आपका अपना स्वभाव बन जाता है। यह एक वास्तविकता है, यह बातचीत नहीं है। यह एक वास्तविक घटित होना है। आपका शरीर वह बन जाता है। जैसे, एक इंसान से आप एक अतिमानव बन जाते हैं। जानवर से इंसान की जागरूकता में अंतर जरूर होता है। उसी तरह, एक मानव और एक अति-मानव की जागरूकता में अंतर होता है, लेकिन एकमात्र अपवाद यह है कि आप अपनी चेतना में इसे घटित होते हुए देखते हैं। केवल मनुष्य ही उनके विकास की यात्रा को देख सकते हैं, जानवरों नहीं, क्योंकि आपको यह देखने की स्वतंत्रता दी गई है। लेकिन जिस तरह से आजादी का इस्तेमाल किया गया है, उस पर आप किताबों के कई संस्करण लिख सकते हैं। तो बेहतर होगा कि उस बात पर न जाएं! आइए हम इसके बारे में भूल जाते हैं। अगर हम गलतियों से गुजरे बिना कर सकते हैं, अगर आप इसे प्रबंधित कर सकते हैं, तो बेहतर है की ऐसा कर लें!

लेकिन अगर गलतियां हैं तो हम उन सभी का सामना करेंगे। मैं आपके साथ हूं, बिल्कुल आपके साथ, और इसे काम करना चाहिए।

अब अगर हम कहते हैं कि, “यह गलत है, हमें ऐसा नहीं करना चाहिए,” मुझसे नाराज़ न हों। उदाहरण के लिए किसी दूसरे दिन मैंने किसी से कहा कि, “शराब और शराब पीना सहज के खिलाफ है।” इस पर उसे बहुत गुस्सा आया। मैंने कहा, “क्या आपकी कोई दुकान है? आप मुझसे नाराज़ क्यों हैं?” मेरा मतलब है, यह एक साधारण बात है जो मैं आपको बता रही हूँ! क्या मैं आपको ऐसा बता दूं कि, “तुम जाओ और नशा कर लो !” क्या मुझे तुम्हें ऐसा बताना चाहिए? क्या यह एक अच्छी चीज है? “आप अपने सेक्स के साथ कुछ भी कर सकते हैं,” क्या मुझे आपको ऐसा बताना चाहिए?

अब तुम मुझे एक बात बताओ: इस पूरे संसार में जहां सभी प्रकार की तथाकथित नैतिकताएं हैं, कहीं किसी आदमी को शराबी होने के कारण ताज पहनाया जाता है क्या ? पूरी दुनिया में, मुझे बताओ, कोई भी आदमी को शराब पीने, नशे में होने के कारण उसके नाम पर मूर्ति बनायी गयी या ताज पहनाया गया है? क्या आपने किसी को देखा है? क्या आपने किसी आदमी को देखा है जिसे अनैतिक या स्वेच्छाचारी होने के कारण माला पहनाई जा रही है? यानी सामूहिक रूप से इंसानों ने अब तक इस तरह की बकवास को कभी स्वीकार नहीं किया। मेरा मतलब है कि मुझे नहीं मालूम अगर सामूहिक रूप से हर कोई शैतान बन जाता है तो भगवान ही जाने! लेकिन रोमन साम्राज्य में भी, जब यह उस समय सबसे बुरा था, ऐसा नहीं था।

तो सामूहिक रूप से मनुष्य ने हमेशा पवित्रता, धार्मिकता को एक महान वस्तु के रूप में स्वीकार किया है। और आज भी उन लोगों का सम्मान किया जाता है जो साधारण घरों और झोपड़ियों में रहते थे। और बड़ी-बड़ी, बड़ी-बड़ी संपत्ति का नामकरण उन्हीं के नाम से होता है, क्योंकि वह नाम ही उन्हें शक्तिशाली बनाता है। लेकिन वे इसका दुरुपयोग कर रहे हैं, वे उनका अपमान कर रहे हैं, वे वास्तव में इन सभी महान प्राणियों की आत्माओं को चोट पहुँचा रहे हैं, ऐसी अंतहीन भलाई। पर क्या करें! मनुष्य अपने स्वार्थ के लिए ऐसा करता है, या अज्ञानतावश करता है। यदि वे इसे अज्ञानता से करते हैं, तो इसे क्षमा कर दिया जाएगा, सब कुछ क्षमा कर दिया जाएगा, यह मेरा वादा है, और आप चकित होंगे कि यह कैसे काम करता है।

अब मैं कहूंगी, यदि आपके कोई प्रश्न हैं, तो बेहतर है आप मुझसे पूछ सकते हैं, क्योंकि मुझे लगता है कि मैं अभी भी आपके सभी सवालों का जवाब नहीं दे पायी हूं, जबकि मुझे पता है कि आपके दिमाग में क्या है। इसलिए यदि आप में से किसी के पास कोई प्रश्न है, तो कार्यक्रम शुरू करने से पहले कृपया मुझसे पूछें। लेकिन बहुत ज्यादा नहीं, क्योंकि कुछ लोग बस उस स्थिति में पहुँच चुके हैं और अगर हम अजीब, मूर्खतापूर्ण, बेवकूफाना सवाल पूछते हैं, तो हम उनका चित्त विचलित करने जा रहे हैं। चूँकि हमने इसे हासिल नहीं किया है, हम वहां नहीं हैं, हम अभी भी घबराए हुए हैं, हम कहीं पहुंचे नहीं हैं, इसलिए कृपया दूसरों को परेशान न करें; यह महत्वपूर्ण है। यदि आप ऐसा इसलिए कर रहे हैं ताकि मैं यह सब कुछ समझाऊं, तो आप ऐसा कर सकते  हैं। नहीं तो आप सिर्फ दिखावा करने की कोशिश कर रहे हैं। किसी दूसरे दिन किसी ने कहा, “इस किताब में, यह लिखा है।” अब, क्या मैं उन सभी पुस्तकों का उत्तर देने जा रही हूँ जो लिखी गई हैं? नहीं न! दरअसल, मैं ग्रेजुएट भी नहीं हूं। ईसा-मसीह ने कितना अध्ययन किया?

मैं जिस बारे में बात कर रही हूँ यह एक भिन्न ही ज्ञान है, इसलिए अपनी ऊर्जा और मेरी ऊर्जा और सभी की ऊर्जा को बर्बाद मत करो। और अगर तुम यहाँ दिखावे के लिए आए हो, तो मैं तुमसे विनती करती हूँ कि तुम चले जाओ, क्योंकि यह दिखावे के लिए नहीं है, बल्कि अंदर का दिखाने के लिए है।

तो ऐसे में खुद के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश न करें। मैं बार-बार अनुरोध करती हूं। आपने अपना बहुत सारा जीवन बर्बाद कर दिया है, और समय आ गया है। और ग्रेगोइरे कहते हैं कि आप संत नहीं हैं, लेकिन आप सभी संत हैं, अन्यथा आप वहां नहीं होते, आप किसी डिस्कोथेक में बैठे होते; या नहीं तो कहीं किसी रेसकोर्स में। लेकिन जब आप यहां होते हैं तो आप संत होते हैं। ये संत ही हैं जिन्हें इसे पाने का अधिकार है। लेकिन आपको एक संत होना होगा: इसका मतलब है कि आप को वास्तविक प्रकार की इच्छा करनी होगी। यदि आप वास्तविक और सच्चे हैं तो यह घटित होगा और कार्य करेगा।

मैं चाहूंगी कि आप मुझसे प्रश्न पूछें यदि किसी स्पष्टीकरण की आवश्यकता है या कुछ भी जो आप…

(रिकॉर्डिंग का अंत)

“सत्य के लिए पूछें” पर 2 विचार

1. जॉर्ज बी कहते हैं:

2018/01/07 04:44

डाउनलोड किए गए ऑडियो पर मेटाटैग “1979 05 31 डॉ जॉन्सन हाउस” के रूप में इस भाषण की पहचान करता है

जवाब दे दो

1. जॉर्ज बी कहते हैं:

2018/01/07 05:12

लेकिन 1979-05-31 के भाषण की प्रतिलेख में यहाँ दिखाया गया भाषण शामिल नहीं है, इसलिए अभी भी अज्ञात माना जायेगा  जब तक कि अन्य रिकॉर्डिंग अधूरी न हो और यह उसका हिस्सा होना चाहिए।