Talk about Gandhi

New Delhi (भारत)

1979-03-11 Talk about Gandhi Hindi & English 1979 EN, 21'
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1979-03-11 Talk about Gandhi Hindi & English 1979 HI, 52'
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Talk about Gandhi. Mumbai, Maharashtra, India. 11 March 1979.

बिल्कुल सामने आ रहा है ,जो बताया गया है ,  विशुद्धि चक्र के बारे में I अब इसी विशुद्धि चक्र से ही collective conciousness की  सीढ़ी है Iमैंने कहा था कि कृष्ण को पूर्ण अवतार माने क्योंकि ये विराट है विराट वो शक्ति है जिसमें संपूर्ण समावेश है ह्रदय में शिव जी की शक्ति है और पेट में गुरुओं की शक्ति है और स्वाधिष्ठान चक्र में ब्रह्मा देव शक्ति है ब्रेन में ब्रह्मा देव की शक्ति है आप कह सकते हैं और जब विराट जागृत हो जाता है जब  विराट का सहस्त्रार खुलता है तब इसके अंदर बसे हुए अनेक cell का पेशियों का भी सहस्त्रार खुलता है I

Bible मैं कहा जाता है  परमात्मा ने मनुष्य को अपने जैसा बनाया अपना इमेज बनाया है और ये बात सही है जैसे विराट हैं वैसे ही संपूर्ण आप हैं, फर्क इतना ही है कि वो करता है और आप बनाए गए हैं इतना ही अंतर है उन्होंने बनाया और आप बनाए गए हैं Iअब वो चाहते हैं कि आप उनसे परिचय करें उनकी चाह  है उनकी चाहत में आपको बनाया है Iऔर आप को बनाने के बाद वो चाहते हैं कि आप उन्हें जाने उनकी इच्छा है जब ये उनकी इच्छा है तो वो होकर रहेगी उसके लिए भी उन्होंने पूरी व्यवस्था करके रखी है अपने अंदर पूरा Instrument बनाया है पूरी चीज बनाई है Iमैंने आपको बताई थी आज सवेरे और अब सिर्फ इतना करने का है कि आपको उनसे संबंधित कर देना है जैसे ही आप उनसे संबंधित हो जाते हैं जैसे ही आप की कुंडलिनी उठकर सहस्त्रार भेदन कर देती है वैसे ही आप जानते हैं कि आप अकेले नहीं हैंI

जैसे कि आप लोग अनेक छोटे-छोटे(Disruption among audience) क्योंकि Attention जब Disturb हो जाता है तब कुंडलिनी जिसको हम पकड़े हुए हैं वो  फिसल जाती हैI

ये उनकी इच्छा से ही ये सारी घटना घटित हुई है और उनकी इच्छा से ही आप उन्हें जानेंगे इसीलिए जब मैं कहती हूं कि ये चीज सहज है Effortless ,आप जब Effort  करते हैं तब आप उनकी इच्छा से हट जाते हैं जब आप कोशिश करते हैं तब आप उनकी इच्छा से दूर हो जाते हैं I कोई सी भी इच्छा जब आप करते हैं तब भी आप उनकी इच्छा से दूर हो जाते हैं Iसब कुछ उनकी इच्छा पर छोड़ दिया जाए इसी को हम faith कहते हैंI

अगर मनुष्य ये कर सके ,जो करता है वो तू ही हैIतू ही सब कुछ है अगर ये मनुष्य ये कर  सके तो कोई वजह नहीं के वो सही रास्ते पर चल ना पाए I क्योंकि वाकई में हाथ पकड़कर वो आपको  चलाने वाला है लेकिन आप उसको चाहे के घसीटकर के पास रखें और हम उन पर मेहनत करके उसे पकड़ रखे  सो नहीं हो सकताI उन्हें आप को पकड़ना होगा(We have to hold him) आप अंतर समझ लीजिएI

एक तरीका होता है कि आप जबरदस्ती उनको  थामे रहिए और उनके तरफ दौडिए और पकड़िए वो आपसे     छुटक जाएंगे लेकिन आप छोटे बच्चे जैसे कहे तुम ही मेरा हाथ पकड़ो हमारा हाथ पकड़कर तुम्हीं चलो ;हमारा हाथ आपके हाथ में हैं आप जैसे ले चलिए तब आदमी सही रास्ते पर रहता है और धर्म मेंI

लेकिन जैसे ही वो प्रयत्नशील होता है तो वो गलत रास्ते पर I क्योंकि उसकी आंख नहीं, आत्मा अभी खुली नहीं वो जानता नहीं कहां जाना है जैसे छोटे बच्चे जब  आंख पूरी इतनी खुली नहीं होती पूरी तरह से मां पर निर्भर रहते हैंI वो उनका सब कुछ देखती है उनका खाना पीना हर एक काम वो देखती है बच्चा कब रो रहा है मां को सब मालूम है बच्चा उसको बताएं ना बताएं  उसको सब मालूम है बच्चे की क्या तकलीफ है फौरन वो समझ जाती है क्योंकि बच्चा अभी बिल्कुल अबोध और इनोसेंट( innocent )हैI

हम लोग अपने Innocence को खो देते हैं जिस वक्त हम कार्यशील होते हैं हम ये करेंगे हम  वो करेंगे हम भगवान को पाएंगे हम हिमालय पर जाएंगे और दुनिया भर के आस्तिक( इच्छाएं) इसी सिलसिले में आदमी ने इतनी गलती कर ली इतना विराट से हट गया है I समझ लीजिए हमारी ही शरीर में बसी नाक  सोचे मैं कुछ करके दिखाऊंगी भई आप नाक हैं बैठे रहिए नाक की जगह वह कहेगी नहीं मैं कुछ करके दिखाऊं तो उसकी सूंड नहीं निकल आएगी इसे( Arbitary) आरबिटरी आप कहते हैंI जब आदमी आरबिटरी (Arbitary )हो जाता है जब आदमी अपनी ही तरफ से सोचता है कि मैं ये करके दिखाऊंगा मैं ये करके दिखाऊंगा तो Arbitary  हो जाता है(On my own)I और जब कैंसर की बीमारी होती है वह ऐसे ही सेल्स के वजह से होती है जो Arbitary हो, Maligancy ( हानिकारकता ) आ जाती है I एक cell ये कहे कि मैं ही बढ़ता जाऊं मैं आगे जाऊंगा और मैं जाकर देखूंगा बस वह बढ़ना शुरू हो गया वह सेल maligant cell हो गया उसकी बीमारी दूसरे को लगी वह भी  maligant हो गयाI

जब संपूर्ण से संबंधित आप रख कर के  आ अनूप(Incomparable) मे बैठे हुए हैं I वो हमको जो करना है करेगा इस विचार से जो मनुष्य रहता है वह मध्यम स्थिति में रहता हैI अगर आप कहें कि साहब इसमें बैठे रहिए तो हमारा कुछ भी नहीं होगा Iआपका जो होगा वह किसी का नहीं होगा आपका जितना भला होगा वो किसी का नहीं होगा जितने आप ऊंचे उठेंगे वो किसी का नहीं हो सकताI हर मामले में मैं आपसे कहती हूं कि ये हो सकता है I लेकिन आप तो सोचते हैं कि हम कुछ करके दिखाएं I रामदास स्वामी ने कहा  अल्पधरिष्ठ  पाएं I भगवान  तुम्हारा जो थोड़ा सा धरिष्ठ   है उसे देखता हैI कि भई ,चल भई चल , कह रहा है  ना, मुझे करना है, कर फिर ,आप धड़ धड़ गिरते हैं Iचोट लगती आफत आती  दोष भगवान को जाता कि हमने इतनी मेहनत करी इतना परमात्मा को पुकारा और ये गलती कैसे हो गई मां I आपको किसने कहा था इतनी आफत करने की I अगर एक कपूर के डिब्बे के अंदर आदमी बंद रहे तो चाहिए कि वह चुपचाप बैठा रहे ना कि अंधे जैसे इधर धक्का मार उधर धक्का मार और उसके बाद अपने सर हाथ  फोड़ करके कर के बैठे, उसके बाद मां से आकर कहे कि मां देखो ऐसे कैसे हो गया ?

ये सब चीजें एक आश्चर्य की बात है कि मनुष्य स्वयं तो करता ही है एक इंडिविजुअल( Individual) तरीके से व्यक्तिगत I पर और भी इसका आश्चर्य ये है कि ऐसे लोग एक समूह भी बना लेते हैं I एक बड़ा भारी  उसका आर्गेनाईजेशन( Organization) खड़ा कर देते हैं इसी सिलसिले में आप देखिए कि POPE (पोप) साहब ने बड़ा भारी ऑर्गनाइजेशन खड़ा कर दिया मुसलमानों ने दूसरा कर दिया हिंदुओं ने तीसरा कर दिया फलाने ने चौथा कर  लिया माने maligancy के एक-एक सेल खड़े हो गए और ये मैलिग्नेंट है सारी चीज ये समाज को खा जाएंगी इनको जोड़ने या इनको इकट्ठा करने का कौन सा तत्व है इसका cementing force क्या है नफरत द्वेष घृणा कंपटीशन ईर्ष्या क्योंकि मुसलमान ऐसे हैं ऐसे ही हिंदुत्व को ऐसा होना चाहिए क्योंकि क्रिश्चियन ऐसे हैं मुसलमानों को ऐसा होना चाहिए सब रिलेटिव है I Absolute  कोई path नहीं I और इस तरह कि जब चीजें बन जाती हैं तब विराट में ऐसे सेल्स बन जाते हैं जो maligant है और आज का कलयुग का नक्शा बिल्कुल ये है की सारे विराट में कैंसर है I अगर आपने भारतवर्ष में एक तरह का कैंसर है तो इंग्लैंड में दूसरी तरह का अमेरिका में तीसरी तरह का हर जगह जाइए तो लगता है सब लोग पीड़ित कैंसर से भरे हैंI और ये बनाए हुए छोटे संविधान इस तरह से चल रहे हैं कि आश्चर्य होता है Iकि ऐसी खोखली चीजों पे ऐसी बातें   कैसे खड़ी हैंI POPE(पोप) को देखते ही मुझे आश्चर्य होता है कि जिस ईसा मसीह के पास सिर्फ दो चोगे थे वह यहां वो ां इतने बड़े-बड़े डायमंड लगा करके घूमता है I और अपने को ईसा मसीह का चुनिंदा ये समझता है I हमारे आदि शंकराचार्य महाराज जो हैं वो तो कहीं थे वो तो चले गए बेचारे और जो आज यहां पर बैठे हुए हैं एक शंकराचार्य साहब हैं हमने ये सुना लंदन में कि वो अपने सर पर सोने का ,सोने का छत्र बना रहे हैं I इतने से बटवा मन (short heighted) और  और उस छत्र में वो एक स्पेशल डायमंड लगाना चाहते हैं ,खासकर के बाहर से आने वाले, इन बटवा मन से पूछिए अगर वो छत्र आपके सिर पर गिर जाए तो क्या आप उससे बच सकेंगे Iइस प्रकार की उठ पटांग बातें सदियों से चल रही हैं और उसकी मान्यता हम करते रहते हैं Iसहजयोग क्रांति लाएगा और इन सब झूठी और पुरानी संस्थाओं को तोड़-फोड़ कर इन्हें सत्य के आधार पर खड़ा कर देगा नहीं तो दूसरी चीज जो आज सवेरे बताई थी वो मनुष्य को जानना होगा कि सत्य के सिवाय और कोई भी इस संसार में टिक नहीं सकता I जितनी भी खोखली और थोती( garbage)  चीजों को हमने अपना आया हुआ है और उसके ऊपर हम लोग खड़े हुए हैं और अपने को निश्चिंत समझ रहे हैं , जान लेना चाहिए कि ये मगरमच्छ है I

विराट का जो स्थान है वो  विशुद्धि चक्र का है ये बहुत महत्वपूर्ण है, मैंने कहा है ,क्योंकि मनुष्य ने जब अपनी गर्दन ऊपर उठाई तब वो  मनुष्य बना I और इसमें परमात्मा का बहुत बड़ा हाथ है श्री साक्षात् श्री कृष्ण विराट अपने को एक साधारण चरवाहे के रूप में इस संसार में , सर्व सामान्य लोगों के लिए एक चरवाहा बनकर संपूर्ण अवतार जो परमात्मा का है वो  इस संसार में आया और उन्होंने मनुष्य से ये कहा कि ये सारा संसार एक लीला है आप उसके सिर्फ साक्षी हैं कहां आप उलझे हुए हो ये सब लीला है और उस साक्षी को पाना उस क्षेत्रज्ञ को पाना उस आत्मा को पाना ये एक संदेश उन्होंने सारे संसार में I उन्होंने ये कहा कि ये आत्मा जो है ये किसी तरह से भी नष्ट नहीं हो सकता अमर है I इन कृष्ण के जो विचित्र से चरित्र हैं  जिसके ऊपर लोग बहुत टीका टिप्पणियां करते हैं जैसे कि उनकी 16000 पत्नीया थी I थी उनकी 16000 पत्नीया I ये 16000 पत्नियों कौन थी क्या आप जानते हैं ये इनकी 16000 शक्तियां थी आज मेरी शक्तियां इन सहजयोगियों के अंदर से बह रही है I ये सहयोगी मेरी शक्तियों का वाहन कर रहे हैं उनकी शक्तियां वाहन करने के लिए उस वक्त कौन था? इसलिए उन्होंने इन शक्तियों को जन्म दिया , साकार स्वरूप में  वो जन्म में आई एक राजा ने उनको अपहरण कर लिया उस राजा से उन्होंने बचाकर के उनसे अपना विवाह कर लिया उनके पास 16000 सहयोगी तो पहले ही थे यहां तो रोना पड़ता है 1000 भी सहजयोगी जमा नहीं I उन्होंने पहले ही अपनी व्यवस्था कर ली थी, कि पहले अपने शक्तियों को जन्म देकर के ये कार्य किया और जब उन्होंने ये 16000 शक्तियों को अपने अंदर में स्थित पूरी तरह से कर लिया उस वक्त ही हमारे भी 16000  नाडियाँ स्थापन हुई हमारे अंदर उन्हीं की वजह से हमारी चेतना में ये 16000 नाडियाँ का बंधन शुरू हुआ I आपको आज सवेरे मैंने गीता के बारे में बताया था उसे आप फिर से सुनिए और आप सब समझ सकते हैं कि कितनी बड़ी महान परमात्मा की देन थी जो कृष्ण ये संसार में आए श्रीकृष्ण की जो कुछ भी बातें हैं वो अत्यंत सूक्ष्मता से ही समझी जा सकती है ग्रास लेवल ( gross level) पर आप कृष्ण को नहीं समझ सकते I

जो लोग ग्रासलेवल पर रहते हैं कभी भी कृष्ण को नहीं समझ सकते I उसको समझने के लिए अत्यावश्यक है कि पहले आप पार हो जाए फिर उसकी बारीकी इस चक्र की  सब बारीकी आपको समझ में आएगी आजकल आप सभी लोगों की विशुद्ध चक्र पकड़ है बहुत ज्यादा उसके अनेक कारण है उसमें से पहला कारण तो ये है कि आप की पकड़ होने की वजह से ,हमारी हो जाती है, क्योंकि सारे वाइब्रेशन ( Vibration)यहां रखे हैं अगर आप इसे खींच ले तो हमारा गला खुल जाएगा ये तो कॉमन लोगों को अनुभव है इस चीज का, जब हमारा गला पकड़ जाता है तो उसमें से वाइब्रेशन जा  के आपके गले के ओर I इस विशुद्ध चक्र में कृष्ण का वास, और कुछ कुछ चीजें बिल्कुल वर्जित है विशुद्धि चक्र के लिए उसे समझ लेना चाहिए प्रथम तो जिसे कहते हैं तंबाकू I तंबाकू खाना पता नहीं मनुष्य ने कहां से पता लगाया आदमी की खोपड़ी जो ढूंढ कर निकालें सो कम ,अपने को किस तरह से डिस्ट्रॉय (Destroy) करना चाहिए इसमें आदमी से बढ़ के दूसरा जानवर नहीं मिलेगा I अब ये तंबाकू भगवान ने कोई खाने के लिए कभी नहीं बनाई ये एक इंसेक्टिसाइड(Insecticide) है आप  ये जानते हैं कीड़े मारने की चीज I अब उठा कर के बेवकूफ जैसे उसको खाना शुरु कर दिया उसे खाते हैं या उसे स्मोक (smoke)करते हैं इससे अपना जो ये विशुद्धि चक्र है खराब हो जाता है इससे कैंसर हो जाता है विशुद्धि चक्र में आप जानते हैं विशुद्धि चक्र में कैंसर हो जाता है तो भी आप करते हैं लिखा जाता है कि स्मोक करने से आपका विशुद्धि चक्र खराब हो जाएगा आपको कैंसर हो जाएगा और आप जो भी करते हैं अपने रिस्क पे करें तो भी लोग करते हैं बताइए कि जब मालूम है कि we are destoying it(विशुद्धि) तो आप क्यों करते हैं I

क्योंकि ये सब चीजें हैं ये राक्षसी है और जो राक्षसी चीजें होती है तो वो  आप पे काबू कर लेती है याने मनुष्य बेवकूफ है किसी किसी मामले में कि अगर हम उससे कहे कि शराब पीना गलत है और सिगरेट पीना गलत है तो वो  सोचते हैं कि हम तो उस पे रेस्ट्रिक्शन (restriction)डाल रहे हैं उसकी फ्रीडम (Freedom)हम खा रहे हैंI वो यहां नहीं सोचता कि वो कितनी बड़ी गुलामी में फंसने वाला  है और जब बड़े गुरु और सब लोग बता रहे हैं कि ये चीज ना करें तो वो क्या बेवकूफ थे ? उन्होंने क्यों बताया हजार बार इस बात को बताया है कि कोई भी तरह का नशा करना गलत हैI  नशे का मतलब ही ये होता है कि आप की awareness आपकी चेतना के ऊपर जबरदस्ती कोई चीज ला दी I ये चीजे आपके चेतना के विरोध में पडती हैं इसीलिए बताया गया है कि किसी भी प्रकार के नशा नहीं करना चाहिए I मोहम्मद साहब के जमाने में ये प्रॉब्लम (problem) ही नहीं था लोग स्मोक नहीं करते थे तब कुछ था ही नहीं तब तक गधे इतनी नहीं हुए थे लोग ये तो बाद में नानक साहब ने आ करके बताया कि बाबा कायको नशा करते हो लेकिन उसके बराबर विरोध में हम लोग जाते हैं और वही काम करते हैं जिसको मना कर गए I सीधी चीज है ये पाइजन(poison) है इसको मत लो इससे भी विशुद्धि चक्र खराब हो जाता है I और ये विशुद्धि चक्र खराब हो जाता है अनाधिकार परमात्मा का नाम लेने से I इससे विशुद्धि चक्र बहुत खराब हो जाता है एक तो ये खराब हो जाएगा  जब भी आप कोई सा भी नाम अनाधिकार ,आपको अधिकार क्या है ?आप किसी भी परमात्मा का नाम ले रहे हैं और उसको पुकार रहे हैं बुला रहे हैं क्या आप परमात्मा के साम्राज्य में चले गए हैं आप तो मनुष्य के साम्राज्य में रहते हैं आप किसी पुलिस वाले को बुलाओ ज्यादा से ज्यादा किसी मिनिस्टर(minister) को बुला ले ,उनको आपने (elect) इलेक्ट किया हुआ है आपका परमात्मा से संबंध कब हुआ जो आप परमात्मा को पुकार रहे हैं और परेशान कर दे रहे हैं I मेरी जो आज पोती (grand daughter) आई थी उसका मैं आपको किस्सा सुनाऊँ ये Realized soul है उनके घर एक बार मैं गई थी इनके घर के पास एक मंदिर था और रात में हमारे साथ सो रही थी हम से कहने लगी कि नानी ये जो मंदिर है ना यहां से भगवान कब के भाग गए सुबह शाम तक हरे राम हरे राम करते हैं वो  तो कब के भाग गए अब मैं भी यहां से भाग जाऊंगी खुद ही सोचना चाहिए श्री राम जो सारे संसार के पालनकर्ता उनको क्या इस प्रकार परेशान करना चाहिए I आप अगर ऐसा जाकर के मोरारजी भाई के लिए दो बार दरवाजे पे पुकारिए, ना आप अरेस्ट (arrest) हो जाइए तो बताइएI

इसीलिए जब भी आप नाम लेते हैं  आपने कौन से अधिकार में श्री राम का नाम लिया उनका नाम लेना कोई सरल काम नहीं है श्री राम का नाम उन्हीं से लेना चाहिए जो असल में गुरु हैं जो आपको अधिकार दें जब तक आप पार नहीं होते तब तक आपको कोई भी अधिकार नहीं Iअब आप कहिएगा गुरुओं ने तो लिखा है कि भगवान का नाम लो उन्होंने इसलिए लिखा वे नहीं जानते थे कि आप लोग पार भी नहीं  हुए, बहुत से, मेरे ख्याल से ये विचार है बहुतों को ये नहीं पता था कि मनुष्य अभी तक पार भी नहीं हुआ है, पार होने से पहले आप कोई सा भी नाम नहीं लेने के अधिकारी नहीं अनाधिकार चेष्टा हैI नाम तो लेना दूर रहा नाम को लेकर उसकी चटनी बना दें इससे भी विशुद्धि चक्र खराब हो जाता है और दुनिया भर के मंत्र ,जो देखिए सो ,जो रास्ते पर खड़ा है वो  गुरु कहीं पेड़ पर लटक रहा है वो गुरु दुनियाभर के अजीब-अजीब गुरु इकट्ठे कर लिए और अरे भाई ये तुम्हारे गुरु हुए कैसे उन्होंने हमें नाम दिया नाम देने के लिए गधा भी काफी है उसके लिए गुरु काहे को चाहिए I क्या नाम देना ही एक कार्य गुरु का होता है कि इसके अलावा कोई और चीज होती हैI हां मेरे समझ में आता है गुरु नानक आपको कोई नाम दें भाई वो  थे असल में I एक साहब अभी अफ्रीका से आए उनको कुछ संस्कृत आती नहीं थी वो और भी बढ़िया है वो ऐसे-ऐसे इन लोगों को नाम सिखाएं उसका नाम इंगा पिंगा ढिंगा अभी रख रहे हैं I अब कहिए घंटों ये लोग यही नाम रटते रहते हैं और सबका विशुद्धि चक्र पकड़ता है ये किसने बताया है ये कहां से आप ने जाना कि कौन सा नाम लेना है जिस दिन आपको नाम की पूरी विद्या आ जाएगी  सारी अविद्या छूट जाएगी इसकी विद्या कोई आसान नहीं है कौन सा चक्र पकड़ा है कौन सी स्थिति है कौन सा नाम लेना चाहिए कौन सा उसका उच्चारण होना चाहिए ये सब चीजों का बड़ा ही गहन शास्त्र है जब तक आप की कुंडलिनी जागृत नहीं होती आप कैसे जानिएगा की कौन सा चक्र पकड़ा है आपका या दूसरे का I समझ लीजिए आपका विशुद्ध चक्र पकड़ा हुआ है और आप नाम ले रहे हैं शिवजी का हो गया काम खत्म विशुद्धि चक्र तो वैसे ही गया अनाधिकार चेष्टा की वजह से और शिवजी नाराज हो गए इसलिए हृदय चक्र भी चला गया I ये बड़ा भारी शास्त्र है इस शास्त्र को समझना चाहिए जब मैं ये कह रही हूं इसलिए कह रही हूं कि मैंने अनेकों लोगों को देखा है मंत्र समझकर के वो जिस चीज को कहते हैं निहायत बेवकूफी की चीज है और ये मुझे आप को साफ  कहना पड़ेगा I

एक बार  कबीर ने कहा था करका मनका छाडिए मन का मनका फेर (if the heart of the person chanting doesnot undergo a change , he should leave chanting & change his/her heart) कबीर को तो किसी ने समझा ही नहीं और  पार हुए बगैर कबीर को समझ ही नहीं सकते गुरुनानक को आप समझ नहीं सकते  उन्होंने ही कहा है जब तक आपा को चिन्हा नहीं तब तक भ्रम की काई नहीं जा सकती I ये भ्रम में हम लोग सारे कार्य कर रहे हैं I इसलिए आपकी विशुद्धि चक्र खराब है आप अगर किसी भी देवता का नाम ले रहे हैं तो पहले ये जान लीजिए  के पहले आपका विशुद्ध चक्र खराब जाएगा और उस देवता का जहां राज्य है वो भी जगह खाली हो जाएगी इसीलिए लोग कहते हैं हम बीमार कैसे पड़ गए हमें तकलीफ कैसे हो गई क्योंकि दोनों ही चीज अनाधिकार हैं समझ लीजिए आप डॉक्टर नहीं हैं और आप जाकर के मेडिसिन लेकर के और खाना शुरू कर दिया और फिर कहे की साहब हमने तो दवा ली थी और हम बीमार कैसे पड़ गए आपने कौन सी दवा ली आपने कहां डॉक्टरी पास करी आपने क्या समझा I इस मामले में तो लोग समझते हैं पर धर्म के मामले में लोग सोचते हैं चलो अपने जेब में धर्म है जब चाहे धर्म में किताब लिख डालो जब चाहे तब कुंडलिनी के बारे में लिख दो जब चाहे तब परमात्मा के बारे में लिख दो जिसके बारे में जब बकवास लिखने में क्या जाता है असलियत की तो कोई जरूरत है नहीं ,असल में पाने की जरूरत है (नहीं जो कुछ है नकल में रहे unclear) सहजयोग बहुत बड़ी क्रांति है आपने कबीर को नहीं माना उनको ही  रटते बैठते हैं न सिर्फ सुबह से शाम कबीर को रटने के सिवा लोग करते क्या हैं? लेकिन वो दिन आ गया है अब कबीर जो हैं उनकी कही हुई बात आपके सामने खड़ी हो जाए I zen की जो बड़ी भारी फिलॉसफी (philosophy) उसके ये जापानीस (japanese)गधे कभी समझ सकेंगे उनका ऐसा ठिकाना करके रखा हुआ ,जापान में जाइए तो इन बेवकूफों को लगता है कि अगर zen गिर जाए तो आत्महत्या कर लेते हैं I उसका भी इन लोगों ने सारा आर्टिफिशियल (artificial) सारा मामला बना रखा है कि देख देख के हैरानी होती हैं I सारे जितने बड़े-बड़े हो गए पीर हो गए जो पहुंचे हुए लोग हो गए उनकी यही दुर्गति जब तक वो जीवित रहे उनकी तारणा करी और जब वो मर गए तो इस तरह के उनके तमाशे और इस तरह की चीजें खड़ी कर रहे इसे क्या कहना चाहिए ? आप जानते हैं यहां दिल्ली में ही बहुत बड़े पीर हो गए निजामुद्दीन साहब बहुत बड़े पीर हो गए पीर को जात पात कुछ नहीं होता और उनकी क्या हालत कर दी और जब वो मर गए तब उनके बारे में लोग जिस तरह की एक चीज खड़ी कर  दे पता नहीं जो भी चाहे उनका मन खड़ी कर सकते हैं I जो भी चाहे उनके लिए बकवास बना सकते हैं I क्योंकि अब तो वो मर गए Iये सारा विशुद्ध चक्र का जो खेल है उसको समझना चाहिए विशुद्धि चक्र में जब तक आप सत्य के ऊपर सब चीज नहीं बैठाएंगे तब तक आप की विशुद्धि नहीं ठीक हो सकती I

एक साहब थे वो  सहज योग में बहुत दिलचस्पी लेते थे  पार भी हो गए लेकिन उनसे तंबाकू नहीं छुटी I हालांकि बड़े आश्चर्य की बात है अधिकतर यहां जितने भी लोग बैठे हैं विदेश के ये बहुत बड़े पीने वाले हर तरह की चीज में असली पियक्कड़ जिसे कहते हैं कि आप इनका मुकाबला नहीं कर सकते कुछ- कुछ लोग तो मेरे पास आए थे बिल्कुल बेहोश हालत में इन लोग कुछ हिंदी  भी समझ रहे हैं वो भी जानते हैं मैं क्या कह रही हूं और इन लोगों ने जैसे ही पा लिया अपनी आत्मा को, तो छूट गई हर चीज क्योंकि जब अमृत मिलने लग गया तो कोई ऐसी चीज थोड़ी ना लेगा अपने आप छूट जाती है कुछ लेक्चर देने की जरूरत नहीं ,आप को छुड़ाने जरूरत नहीं ,पर एक उन्होंने नहीं छोड़ा चोरी-छिपे खाते रहते थे बेचारेI  एक दिन आए कहने लगे मां मेरी समझ नहीं आता क्या हो गया जब भी ध्यान में बैठता हूं मेरा मुंह हनुमान जैसा हो जाता है हनुमान जी बड़े मजाकिया हैं सबसे मजाकिया देवता ये हैं उन के तौर-तरीके इतने मजेदार हैं कि पूछिए मत नचा नचा के रख देते हैं मैंने कहा अच्छा, कहने लगे मुझे बस लग रहा हनुमानजी हो रहा हूं अब मैं हनुमान जी हो रहा हूं अब मेरा  आकृत(image) बदल गया है सहजयोग में मेरा क्या हाल होने वाला है ?बेटे जो तुम थोड़ी तंबाकू जो खाते हो वो एकदम चमक गए ,मां आपको कैसे पता ? हमने कहा इसलिए हनुमान जी जो तुमको दिखाई दे रहे हैं वो हम समझ गए ये उन के चक्कर हैं अब आप कान पकड़े हमारे सामने और हमें वचन दीजिए आपका सब कुछ ठीक हो जाएगा अपने आप छूट जाएगा लेकिन इतनी श्रद्धा रखनी चाहिए कि हम जब जागृत हो गए तब अंधकार हमारे  अंदर कैसे रह सकता है इस विशुद्धि चक्र की महिमा जितनी वर्णन करें सब काम है क्योंकि इसी चक्र के बूते पर मैंने कहा कि आपकी गर्दन ऊंची उठी I

अब ये जो सर है किसी के आगे भी झुकाना बड़ी गलत बात है  सिर्फ एक परमात्मा और उसके बंदे के सिवा और किसी के आगे भी ये सर नहीं झुकाना चाहिए लेकिन हमारा सर ये हर जगह झुकता है कल वोट मांगना है तो सबके पास जाएंगे सर झुका आएंगे सजदे हर जगह होते रहेंगे, गलत जगह ,इतना ही नहीं गलत गुरुओं के सामने हमने सर झुकाए हैं जिन्होंने ये सर ऐसे झुका लिए उनके लिए बड़ा मुश्किल है पार होना फिर अगर मैं कहती हूं तुम्हारे गुरु गलत थे तो बहुत लोग नाराज हो जाते हैं नाराज होने की कोई बात नहीं मेरा कोई लेना देना बना है उनसे? मैं तो तुम्हारी भलाई की बात कर रही हूं तुम्हारे गुरु ठीक है तो हमारे सर आंखों पर और वो  ठीक नहीं तो हमारे लिए हम क्या हैं? हमें तो कहना ही हैं जो सही बात है एक मां को कहना है अपने बच्चों से पूरी बात बतानी ही पड़ती है वो क्या छुपाएगी? फर्क इतना ही है कबीर वगैरा ने डंडे ले ले कर बात की थी मैं जरा प्यार से करती हूं I मां हूं ना मां का इसकी अकल ज्यादा होती है कि कैस्ट्रॉल आयल (castrol oil)भी देना है तो चॉकलेट में देना पड़ता है और इसीलिए काम बन रहा है और लोग इसको कर रहे हैं I जो गलत चीज है वो गलत चीज है क्योंकि मनुष्य को अगर परमात्मा को पाना और येी उसका लक्ष्य है और इसी से उसकी क्रांति होने वाली है और ये ही उसके सारे जीवन का अर्थ है और बाकी सब चीज व्यर्थ है I और उसका कोई भी महत्व मनुष्य के जीवन के आगे नहीं अपने जीवन का जब आप महात्मय समझेंगे जब आप समझेंगे कि आप उस महान सागर विराट के एक बड़े भारी अंश जब आप अपनी महत्ता और गौरव को पहचानेंगे जब आप अपनी इज्जत करेंगे तो खुद कुंडलिनी उठ कर के आप को सलाम करेगी और आपको आश्चर्य होगा कि एक क्षण में आप पार हो सकते हैं लेकिन आपने अपनी इज्जत नहीं की आपने अपने को माना नहीं आपने गलत जगह अपने को छुपाया हुआ है एक परमात्मा और उसके परमतत्व के सिवाय अपने को कहीं भी छुपाने की जरूरत नहीं I अब विशुद्धि चक्र के बाद हम आज्ञा चक्र की बात करेंगे I

आज्ञा  चक्र जो है बराबर ऑप्टिक थैलमस के बीच जहां क्रॉसिंग होता है Iजहां ऑप्टिक  नर्व (optic nerve) क्रॉस करती हैं सुक्ष्म बहुत सूक्ष्म अति सूक्ष्म इसी को लोग कहते हैं कि तीसरी आंख खुल गई अब ये तो तीसरी आंख खोलते हैं उन्हें ये नहीं पता कि ये भूत की आंख लिए बैठे हुए हैं इस आज्ञा चक्र के पास  ईगो (ego) और सुपर ईगो जैसे दिखाया हुआ है दोनों भी उसी के साथ में I बहुतों को इस चक्र के बिगड़ने से कभी लाइट कभी कुछ विज़न (vision) कभी कुछ दिखाई देता है लोग सोचते हैं कि वाह वाह हमारे ऊपर मे देव आ गया I ऐसे लोगों का जीवन कोई विशेष नहीं होता जीवन अत्यंत घृणित ,गंदे तरीके से रहते हैं और कहते हैं  हमको विजन हो रहा है हमने परमात्मा को देख लिया हमने ये देख लिया हमने वो देख लिया I आपसे मैंने पहले बताया था कि हमारे राइट साइड (right side) में सारे सुपरा कॉन्शियस (supra concious) और कलेक्टिव सुपरा कॉन्शियस एरिया (collective supra concious area) हैं और हमारे लेफ्ट साइड मे पूरी कलेक्टिव सब कॉन्शस एरिया (collective sub concious area) है तो इस चक्र के प्रभाव में अगर आप ना रहें और इस से जरा भी हट जाए तो फौरन आपका इधर या उधर जा सकता है जैसे ही आप इस तरफ में चलेंगे वैसे ही आपको पांच एलिमेंट्स (elements)में से कोई  सी भी चीज दिखाई देगी आपको मालूम हो गया NSD का एक डऱग(drug) ये विचित्र तरह का डऱग, ये आपको सब कॉन्शियस में नहीं ले जाता ये सुपरा कॉन्शियस में ले जाता है और इस डऱग को पीने से आपको इस तरह के कुछ- कुछ करिश्मे दिखाई देने लगते हैं कि आप आश्चर्य हो जाते हैं कि कौन सी दुनिया में आ गए I अब ये जो मूवमेंट (movement)है ,इस की ये हालत है कि लोग जब मेरे प्रोग्राम में होते हैं NSD लेने वाले हैं उनको मैं दिखाई नहीं देती सनलाइट ही दिखाई देती है क्योंकि मेरा फ्यूचर (future)जो है वो उनको दिखाई देता है किसी को सिर्फ हवा ही दिखाई देती है किसी को सिर्फ सूरज ही दिखाई देती है मैं दिखाई नहीं देती येां तक की ट्रेन  मे चलते वक्त मैं देखती हूं क्योंकि वहां बहुत लोग एनएसडी NSD लेते हैं कभी कोई आदमी एकदम खड़ा हो जाता मुझे देखता रह जाता है अभिभूत होकर जो सब कॉन्शस (sub concious)में होंगे वो पहले लाइफ हमारे देखते हैं कि ये फलाने किंग (king) कि ये थी दोनों ही चीज गलत है जो आज है प्रेजेंट(present) है वो ही महत्वपूर्ण है इसी को देखना चाहिए अगर आप और कोई चीज देखते हैं तो ये गलत है आप बाहर हैं आप बीच में नहीं जब आप बाहर होते तभी ये देखते हैं जब आप अंदर होते हैं तब कुछ भी नहीं देखते लेकिन जो आप देखते जो हैं बाहर ये आपको कोई बाहर ले जाता है आप नहीं जाते इसीलिए संभल कर रहना चाहिए Iइसको ग्रेस (grace) नहीं कहना चाहिए इसको किसी तरह से डिवाइन चीज नहीं  कहनी चाहिए पर ये मूमेंट (movement) है I अपने ही चित्त का अति पर जाने से ये होता है बहुत से लोग हैं उनके हाथ में से कुमकुम निकलता है किसी के हाथ में से रुपया निकलता है किसी के एकदम से घर में गणेश जी आ जाते हैं I मुंबई में एक साहब है नाम मुझे याद नहीं आ रहा है उनके यहां मूर्तियां आ जाती हैं और उसमें हीरे भी लगे हुए मुझसे कहने लगे क्या करें मैंने कहा इस को विसर्जित करो कहने लगे क्यों ?मैंने कहा ये सारी मूर्तियां कोई अतृप्त लोगों की है जिन्होंने उनको पूजा और उनको कुछ नहीं मिला अब सोच रहे हैं कि ये मूर्तियां नेगलेकटेड(neglected) हैं फैमिली में , वही ला कर डालते हैं ये तो काम सारा जिसे कहना चाहिए ना भानुमती का पिटारा है ये चीज उठा कर के यहां रख दें और आप ने हमारा हाथ नहीं देखा और आप सोचते हैं वाह वाह ये भगवान ने काम किया क्या भगवान को और कोई काम नहीं क्या आपको हीरे  जवाहरात और ये फालतू की चीजें बांटते रहें ये पत्थर आपके सामने बिखेरते रहे और उनको कोई अकल नहीं की ऐसी रद्दी चीजें आपके सामने फेंकते रहे जिसका कोई भी मतलब परम से नहीं होगा या तो दूसरे तरह के लोग होते हैं जो कहते हैं सब कॉन्शियस से इनका संबंध होता है कि उनके बदन मे भूत आता है देवी आती और वो आयी हूं-हूं शुरू हो गया कहने लगे देवी आ गई I देवी के पास लोग गए उनको टीका लगाया और उनसे पूछते क्या है ? घोड़े का नंबर बताइए आप सोचिए देवी को और कोई धंधा है कि घोड़े का नंबर बताएगी आपको I इस तरह से कितना अपमानित परमतत्व को किया गया I संसार में लोग तो बड़े-बड़े ऐसे धतिंगो के पीछे घूमा करते हैं हमने देखा है हमारे नागपुर के पास एक साहब हैं उनका नाम है गुलाब बाबा वो महाशय हमारे शिपिंग कॉर्पोरेशन में एक (name of official post;unclear)I उनके पिताजी एक शरीफ आदमी थे वो कुछ काम धाम नहीं करते थे जो उनको (name of official post;unclear) बना दिया I (name of official post;unclear)  बनाने के बाद में वो जब लौट के वहां से आए तो उन्होंने फिर से अपने धंधे शुरू कर दिए इसी बीच उनके पिताजी की मृत्यु हो गई उन्होंने जाकर के अपने मां के जेवर बेचे, अपनी बीवी के जेवर बेचे घर बेचे दिया सब बेचे बाचकर यहां बैठे I उनकी मां आई कहने लगी माताजी बताइए क्या वो जीवित है ? मैंने कहा जीवित तो खुद है ,ये दुष्ट कहां मरने वाला है, तो कहने लगी फिर क्या करें सब चला गया अब हम कहां जाएंगे ? देखो कुछ हो सकता है तो करें , जगह बना ले तुम्हारे लिए( Shri mataji assuring the lady)I उसके बाद 1 साल बाद आयी कहने लगी कि उन्होंने बहुत सा रुपया हमको भेज दिया और हमने घर- वर फिर से वापस ले लिया है और अब हम आराम से हैं लेकिन मुझे ये शंका होती है ये लड़का , है तो कहां है ?जो कि इसको तो कमाने की अक्ल नहीं थी तो मैंने कहा पता करते हैं I उसके दूसरे साल जब हम यहां आए तो उन्होंने बताया” मां ! मैंने कहा कि सारे पैसे वापस ले ले क्योंकि वो कुछ नॉनसेंस(nonsense) कर रहा है “मैंने कहा क्यों ? कहने लगी आजकल गुलाब बाबा बनकर नागपुर के पास बैठा है मैंने कहा अच्छा !  उसका नाम हैं “ छोटू निंबाई “और आपको आश्चर्य होगा बिरला जी के घर की मोटर्स भी उनके यहां जाती हैं यही छोटू निंबाई कर केI ऐसे बेवकूफ लोग दुनिया में हैं जिसकी हद नहीं और मैंने उनसे फिर खबर भेजी कि तुम्हारे गुलाब बाबा को बोलना कि मैं आ रही हूं, नागपुर I तो एक महीना वहां से गायब रहे पता नहीं कहां गायब रहे ,कोई एक अक्षर भी इसमें झूठ नहीं I तो जब लोगों ने बताया कि माताजी निर्मला देवी जी यहां आने वाली है एक महीना वो नागपुर से भाग गए और उनके सारे बड़े-बड़े लोगों की मोटर गाड़ियां सब आ रही हैं ,फल जा रहे हैं ,चांदी के बर्तन जा रहे हैं ये जा रहे हैं वो जा रहे हैं ये सारे भूतों के प्रकार हैं ये हिप्नोसिस हैं ये हिप्नोसिस आप पर करके आपको खूब अच्छे से आपका माल ताल और आपके बीवी बच्चों को ठिकाने लगा देते हैं I

ये चीज़ सब आज्ञा चक्र से हो सकता है बहुत से लोग आज्ञा चक्र को घुमा देते हैं एक साहब और हैं वो  रक्तबीज का अवतरण है, रक्तबीज हैं साक्षात ,वो आपके आज्ञा को घुमा देते हैं आज्ञा में उंगली डाल दी कहने लगे कि डिवाइन लाइट आ गया आपने सोचा स्पार्क(spark) आ गया क्या कहने बाद में वो  स्मगलिंग(smuggling) में पकड़े गए दुनियाभर के धंधे आजकल उनके फोटो छप रहे हैं कोई ज्ञानकी बनकर घूम रहा है I ये रक्तबीज क्योंकि उसके जितने भी शिष्य मेरे पास आए सब को leukamia की बीमारी है ये इसकी पहचान है आप सोचें कि चक्र को घुमाकर के उसके अंदर ऐसा डेविल (devil)डाल दिया ,कि आप  leukamia के हो गएI अब इसका चक्कर मैं बता नहीं सकती कि ये सब होने पर भी उनके बारे में पेपर में छपने के बाद में भी, सब धुन(music;just like powder which is difficult to hold) हो गया तो भी उनके हजारों शिष्य आज भी हैं I

क्या मनुष्य का दिमाग है मेरी समझ में नहीं आता एक से एक महा दुष्ट लोग इनके बारे में सब कुछ छापा गया और सब कुछ बताया गया लेकिन तो भी लोग इन्हीं के पीछे में जाते हैं कि ऐसे लोगों के लिए क्या करना चाहिए इस आज्ञा चक्र की पकड़  तभी हो जाती है जब हम गलत आदमी के सामने अपना सर झुकाते किसी को भी अपना आज्ञा चक्र छूने नहीं देना चाहिए जब तक आपको कोई अनुभव न आ जाए सामूहिक चेतना का I ये सामूहिक चेतना जब आपके अंदर जागृत हो जाती हैं, जब आपके अंदर ये चेतना आ जाती हैं, तब आप महसूस कर सकते हैं ,तब आप दूसरों को महसूस कर सकते हैं ,उन के  चक्र महसूस कर सकते हैं ,अपने चक्र महसूस कर सकते हैं I अब ये आज्ञा चक्र को मैंने इसलिए बताया क्योंकि ये बहुत महत्वपूर्ण है इस आज्ञा चक्र को हम सिंदूर लगा ले I सिंदूर क्यों लगाते हैं ?पंजाब में औरतें आजकल सिंदूर ही नहीं लगाती पता नहीं ऐसा रिवाज क्यों बना लिए और कब से बना लिया ये भी नहीं समझ आता I सिंदूर से क्या होता है ?औरतें मन से ज्यादा कमजोर होती हैं सिंदूर लगाने से आपको मालूम है रेड लाइट जो होती है इससे बहुत ही बचत हो जाती है Iजो कोई देखते हैं इस  रेड लाइट को , जो कि स्पिरिट(spirit) वगैरा होते हैं वो घबरा जाते हैं वो जानते हैं कि मां का मार्ग है और ये चीज संरक्षित है I बाइबिल में तक इसका जिक्र है कि जो लोग चूसन(choosen) होंगे उनके माथे पर मार्क इससे वो जाने जाएंगे I इतना जरूरी है सबके लिए मार्क लगाना ,औरतों को भी इसी से उनकी रक्षा होती है,( satan)शैतान लोग से ,कोई बाइबिल में ऐसा लिखा नहीं है कि आप मत लगाइए उल्टे ये लिखा है कि ये पहचान है उन लोगों की जो choosen हैं अब आपको आश्चर्य होगा कि ये जो चक्र हैं इस चक्र पर साक्षात क्राइस्ट विराजते हैं क्राइस्ट दूसरे-तीसरे कोई नहीं ये श्री गणेश के ही अवतरण हैं इनको किस तरह से बनाया गया था इसको आप कभी भी देवी भागवत में  पढ़ें I मार्कणेय जी का तो आपको पता होगा I ये महाविष्णु के स्वरुप में पहले बनाए गए फिर इनका डिस्क्रिप्शन(description) दिया गया वर्णन दिया गया उसमे बताया गया कि किस तरह सारे संसार के आधार हैं और किस तरह से कृष्ण जोकि उनके पिता हैं ,कृष्ण ही christ के पिता हैं इसीलिए उनको क्राइस्ट कहते हैं( Krrish) कृृष् कहते हैं क्योंकि वो कृष्ण हैं जिसे कहते हैं सरनेम(surname) की तरह से और यशोदा जी की नाम हमारे यहां यशोदा जी को येशु भी कहते हैं इसलिए इनका नाम येशु इस प्रकार राधाजी ने स्वयं रखा था I राधा जी ही इनकी मां है अब झगड़ा किस बात पर क्योंकि कृष्ण ने कहा था ये जो प्रणव है ये जो शक्ति है ये कभी भी नष्ट नहीं होती I इसलिए उन्होंने इस संसार में अवतरण किया था और इस अवतरण में उन्होंने ये दिखा दिया उनके  पुनरुत्थान में कि जब ये प्रणव साक्षात जन्म लेता है तो ये नष्ट नहीं होता बाकी जितने भी बड़ी बड़ी हस्तियां अवतरण यहां आए हैं उन्होंने शरीर धर्म धारण किया था सिवाय इनके ,क्योंकि ये साक्षात प्रणव है, गणेश साक्षात प्रणव ओम हैं जब वो अवतार लेंगे तब वो नष्ट नहीं हो सकते दिखाने के लिए, इसलिए उन्होंने संसार में जन्म लिया था और वो बड़े थोड़े समय के लिए इस संसार में रहकर ही संसार से चले गए I अब ये की क्राइस्ट हैं या नहीं और ये प्रणव है या नहीं ये श्रीगणेश हैं या नहीं इसकी पहचान क्या ? क्योंकि हम कह रहे हैं इसलिए आप हमारा विश्वास ना करें I आप की कुंडलिनी जैसे ही जागृत हो जाए ,और आप देखेंगे ,जब आप दूसरे की कुंडलिनी जागृत करते हैं और (40:03)यहां आकर चक्र रुक जाए तो ईसा मसीह ने सिखाई हुई जो लॉर्ड प्रेयर (lord’s prayer)है वो कहे फौरन यही मंत्र यहां काम करेगा और कहीं नहीं चलेगा I जिस प्रकार से मैंने कहा कि सारे गुरु अपने नाभि चक्र के आसपास गुरु स्थान में बैठे हुए हैं उनका नाम लिए बगैर ये कुंडलिनी नाभिस्थान से ऊपर उठकर के नहीं छेदती है उसी प्रकार जब कुंडलिनी आ के यहां रुक जाती हैं उन्हीं का नाम लेना पड़ता है I अब जो मैंने गांधी जी की बात कही थी उसका आपको सिलसिला बनेगा कि किस तरह से धीरे-धीरे उन्होंने भी यहीं कहीं I अब और दो ,यहां माथे पर बहुत बड़े अवतरण हैं एक तो बुद्ध दूसरे महावीर अब ये विशेष तरह के अवतरण  बनाए गएI

मनुष्य के गाइडेंस (guidance) के लिए ,एक बहुत ही विशेष तरह के, ये दोनों भी लव और कुश हैI  लव और कुश इन्होंने जन्म संसार में बुद्ध और महावीर के नाम से लिया गया दोनों की मात्रा एक है और दोनों ही संसार में पंचक (unclear;of same time)माने जाते हैं ,समकालीन ,ये दोनों का जन्म लव और कुश का, नाभि चक्र के पास चंद्र और सूर्य नाड़ी के साथ हुआ है ये अंदर की घटना  मैं आपको बता रही हूं Iये हुआ कि नहीं ये आप देख सकते हैं जब कुंडलिनी का जागरण होता है I चंद्रनाड़ी और सूर्य नाड़ी पर इनका अलग-अलग जन्म हुआ I सूर्य नाड़ी पर बुद्ध का जन्म हुआ चंद्र नाड़ी पर महावीर जी का जन्म हुआ I इसीलिए महावीर जी ने नर्क आदि के बारे में बहुत कुछ बताया और बुद्ध ने प्रकाश के बारे में बताया इसीलिए उनको लाइट ऑफ एशिया कहते हैं I ये दोनों ही नाड़ियां हमारे अंदर ऊपर चढ़ती हैं और जा कर के एक इधर और एक उधर खत्म हो जाती हैं इसलिए बुद्ध इधर बैठते हैं और इधर में महावीर बसते हैं इन दोनों का स्थान बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि यही दो व्यक्ति ऐसे हैं जो मनुष्य रूप धारण पूर्णतया करके ऊंचे स्थल पर I एक बहुत ही विचित्र अभिनव चीज I पर आपको पता है इन्होंने फिर से संसार में जन्म लिया था क्योंकि जब उन्होंने देखा कि अहिंसा का मतलब इतना विपर्यास  और उसको दूसरे धरातल में लोगों ने पहुंचा दिया और उसको पटक के उसको खत्म कर दिया है I इसका मतलब प्राणी मात्र Iऔर महावीर को आप जानते हैं कि जैनी लोगों का , कि यहां तक कि खटमल को बचाते हैं और खटमल को छोड़ देते हैं कि वो जाकर के एक ब्राह्मण के शरीर के रक्त को पिए और जिस से खटमल बच जाए Iये क्या अहिंसा हो सकती हैं ,आप ही सोचिए कि क्या मैं खटमलों को रियलाइजेशन (Realization)दूंगी या मच्छरों को दूंगी या चिकन को दूंगी मनुष्य को देने का है फिर एक मनुष्य को आप खटमलों से परेशान करते हैं और सोचते हैं आपका धर्म हो रहा है I इस तरह की विचित्र और विकृत कल्पनाएं समाज में फैल गई ,बुद्ध के लिए भी I एक जेन(zen) को छोड़कर के एक विदीतामा (Viditama was the originator of Zen system of religion, who was a realized soul)lथे उनकी बात छोड़ दीजिए I हालांकि उनको तो निकाल ही दिया हिंदुस्तान से बाकी जितने भी बुद्धिस्ट (Buddhist) हैं उन्होंने क्या हालत कर दी जा कर के बाहर आप देखिए कि उनके दांत से लेकर हर एक चीज को पूजने लगे I बुद्ध ने तो यहां तक अनीश्वरवाद की स्थापना करी कि ईश्वर के बात करते ही साथ लोग इस तरह के झमेले में फंस जाते हैं उनका अनीश्वरवाद

ही ठीक है अगर आप रियलाइज (Realize) हो जाए आज यहां और हम आप को ना बताएं कि परमात्मा हैं आप भी अनीश्वरवाद की बात करेंगे I आप भी सिर्फ आत्मपरीक्षा की बात करेंगे आत्म ज्ञान की बात करेंगे क्योंकि आत्मज्ञान की बात करने के बाद ही परमेश्वर के ज्ञान की बात करनी चाहिए इस बात को समझ के ही उन्होंने सिर्फ अनीश्वरवाद कहा था क्योंकि उससे पहले अगर ईश्वर की बात करो तो आप राक्षस को भी पूछते हैं और उसको ईश्वर मानते हैं you may worship a mammal & call it a ईश्वर इसलिए उन्होंने अनीश्वरवाद की बात पहले  कहींI कि मनुष्य जिस लेवल पे है ,बड़ी यथार्थ है सारी चीजें I बड़ी यथार्थ में ,कि उन्होंने अनीश्वरवाद इसीलिए कहा कि जब भी मनुष्य आत्मा की परीक्षा के बगैर, आत्मा को जाने बगैर किसी भी ऐसी चीज को पूजता है तो वो जरूरी है कि गलत रास्ते पे जाकर और गलत चीज को पूजता है Iउसके अनीश्वरवाद में बड़ी ठोस बहुत ही ठोस एक सुझाव एक समझौता एक बड़ी सूझबूझ कि वो समझ गए इंसान किस लेवल पर है उन्होंने ईश्वर की बात की ही नहीं वो तो बाद में होगी पहले self को रियलाइज I क्योंकि इस तरह की बात कहने में एक तो ये हो सकता था कि लोग इनको कहते कि अरे  ये तो ईश्वर में विश्वास नहीं करते Iहटाओ ! फेकों इस आदमी को ये बहुत बड़ी एक संभावना थी I लेकिन जब उन्होंने अपने शिष्यों को देखा इस प्रकार गधा पंथी करते हुए फिर उन्होंने जन्म लिया आपको आश्चर्य होगा और कहां लिया था जन्म ?आप जानते हैं ? क्या आप बता सकते हैं? हसन और हुसैन ये दोनों कर्बला में मारे गए थे वो दूसरे तीसरे कोई नहीं थे हमारे ही महावीर और बुद्ध थे लेकिन ये कहे तो कौन कहे, और समझाएं तो कौन समझाए ? ये आज हमारे ऊपर ही बोझ आ गया है कि हम आपको ये बात बता रहे हैं Iइसलिए बता रहे हैं कि जब आप कुंडलिनी को जागृत करते हैं उस वक्त आपके जब (ego)ईगो और सुपरईगो  को पकड़ लेते हैं तब आपको बुद्ध और महावीर का नाम लेना पड़ता है I ये एकादश रूद्र में के दो रुद्र हैं बहुत बड़े रुद्र हैं और जब आखिरी संहार होेयेगा तो ये बहुत कार्यान्वित रहेंगे I इन दोनों के बारे में तब आप जानिएगा जब आप देखेंगे आपका ईगो आैर सुपर ईगो नहीं छुटता तो अगर आप हिंदू हैं तो आपको हसन और हुसैन इनका नाम लेना पड़ेगा और अगर आप मुसलमान हैं तो आपको बुद्ध और महावीर का नाम लेना होगा उसके बगैर ये दोनों घुटते(meaning:फोडे,boils)नहीं छूटते ये ऐसे जमे रहते हैं कुछ पूछिए मत विशेषकर ईगो(ego) जो है वो तो ऐसा बड़ा घुटा निकाला रहता है लोगों का यहां परI

अब ये दो जो नाड़ियां हैं उसके ऊपर में जो चीज बनती है जिसे हम preconcious mind  कहते हैं इसे चलाने वाले श्री हनुमान जी हैं, उन्होंने तो सूर्य को ग्रास लिया था , राइट साइड में घूमते हैं और जो लेफ्ट साइड में घूमते हैं  वो भैरवनाथ, यही बाइबिल में इनको saint gabriel और saint michael कहां जाता है इन में कोई अंतर नहीं इनकी एकांता , इनकी जो समरसता मैं कह रही हूं  वो आप सहज योग में ही समझ सकते हैं I जो जो बात मैं कहीं उसकी सिद्धता मैं आपको I

इसके बाद अब सहस्त्रार की बात आई ,सहस्त्रार ये 1000 पंखुड़ियों का बना हुआ अपने सर में लिंबिक (limbic) एरिया के चारों तरफ.अब डॉक्टरों का झगड़ा क्या कि 992 nerves  है अब इन्होंने 8 गिनी नहीं तो झगड़ा करने की बात हैI जब ये नाडिया जागृत हो जाती हैं तो जिस तरह से एक बाती जलती है उसमें किस तरह की फलेम(flame) दिखाई देती हैं इसी प्रकार ये बहुत ही  शांत जलने वाली ज्योतियां दिखाई देती हैं अनेक विविध रंगों से बनी हुई अत्यंत सुंदर सी लपकती हुई दिखाई देती हैं और ये लपकती हुई ज्योति के अंदर में आपको पित्त वर्ण का बीच में आपको गाभा दिखाई देता है जो कि हमारे limbic एरिया का  गाभा हैI

और इसके बाद जो सहस्त्रार है उसका मैंने वर्णन किया है और ये लिंबिक एरिया इसके अंदर से जब कुंडलिनी ऊपर की ओर आती है तभी मोक्ष होता है तभी आपका छेदन होता है और यही होना कुंडलिनी का उत्थान है यही होना कुंडलिनी का पार होना है इसी को सुरती कहते हैं ये जब घटित होता है तभी आप उस स्थिति को प्राप्त होते हैं जिसे हम सामूहिक चेतना में अवतरण कहते हैंI  और लिंबिक एरिया( limbic area )यही परमात्मा का साम्राज्य हमारे अंदर है जब ये प्रकट होता है तब ही मनुष्य को बोध होता है ना कि उसे सिर्फ लेक्चर या ज्ञान होता है I बोध (realization) तभी घटित होता है अब ये अति सूक्ष्म चीज है ये घटित होना चाहिए इसकी जो देवता हैं वो आदिशक्ति स्वयं साक्षात आदिशक्ति हैं और इसकी जो शक्ति है वो आदिशक्ति है और इसके जो दैवत्य हैं वो  कल्की हैं जिनको निष्कलंक अवतार मानते हैं वो हैं I उनका अभी अवतरण नहीं हुआ है उसके पहले की तैयारियां आज हो रही है I जब ये तैयारियां पूरी हो जाएंगी तभी उनका अवतरण होगा इस प्रकार मैंने आपको पूरे चक्रो के बारे में ,विस्तार नहीं ,विशुद्ध रूप में जितना बता सकती थी बताया है I और आशा है आप लोग तृप्त होंगे और मैं चाहूंगी हम लोग थोड़ी देर मेडिटेशन भी कर ले और उस मेडिटेशन के बाद में आप लोगों  का रियलाइजेशन हो गया तो बहुत अच्छा है और नहीं हुआ तो भी कोई हर्ज नहीं हम यहां पर कुछ दिनों के लिए दिल्ली में आए हैं और उसके बाद मुंबई जाकर के लंदन वापस चले जाएंगे आप लोग कृपया रोज वहां आए और सुबह शाम दोनो टाइम प्रोग्राम होगा और अपने सहज योग में अपने को पा लें और गहरे उतरे और अगर आपने रियलाइजेशन(realization) इस वक्त कर लिया तो आप से मैं पूर्णतया बता सकती हूं कि आपकी शारीरिक मानसिक बौद्धिक तथा संसारिक भी प्रश्न बहुत से हल हो   जाएंगे और ये अनेकों के साथ हुआ है और ये आपके साथ भी हो जाएगा ये तो एक मां, वही एक चॉकलेट लगाने की बात है वो है, लेकिन असल में जो पाने का है वो परम तत्व है क्योंकि वही सत चित आनंद है उसी को पाना चाहिए बाकी सब कुछ व्यर्थ है परमात्मा आपको सद्बुद्धि दें और आपको वो अनुभव दे जिसके लिए आप अनंत योनियों में से गुजर के आज यहां पहुंचे हैंI