5th Day of Navaratri Celebrations, Guru Tattwa (Mahima) and Shri Krishna मुंबई (भारत)

  [हिंदी प्रतिलेख] 1979-0926-गुरू तत्व और श्रीकृष्ण शक्ति २६ सितम्बर १९७९, मुंबई  गुरू का स्थान हमारे अंदर काफी ऊंची जगह है। गुरु का स्थान हमारे अंदर स्थित है, कोई इसमें नई चीज करने की नहीं है। परमात्मा ने ये जो साधन बनाया हुआ है, यह जो इंस्ट्रूमेंट है इसको बहुत ही सुंदरता से बनाया गया है। इसका एक एक चक्र जोकि हमारे लिए अद्रश्य ही हैं और हमारे अंदर स्थितः है जिससे ये विश्व जगत हमें जान पड़ता है बहुत सुंदरता से रचित है; किन्तु मनुष्य अति मैं रहता है, हमेशा अति पे जाने से उसने अपने इस साधन को बिगाड़ लिया है। उसी प्रकार गुरु का जो स्थान है उसे भी मनुष्य ने बिगाड़ लिया है. गुरु का स्थान हमारे अंदर इस पूरी जगह इस फ्रांस मैं है, इस पूरे देश मैं गुरु का स्थान है। पेट के अंदर चारों ओर नाभि चक्र से जुड़ा हुआ है। अभी तीन दिन पहले मैने नाभिचक्र पर आपसे बात की थी, इस नाभिचक्र पर श्री विष्णु  का स्थान है। विष्णुशक्ति के कारण ही मानव अमीबा से इंसान बने हैं। और उसी शक्ति से ही आप मानव से  अतिमानव बनने वाले हैं। । अब ये जो गुरु की शक्ति हमारे अंदर परमात्मा ने पहले से ही विकसित की हुई है इसके लिए अनेक गुरुओं के पहले अवतरण हुए हैं। अब पहले देखें की यह गुरूतत्व बना कैसे  है इसके लिए समझना चाहिए की गुरुतत्व अनादि है और उसको कैसे बनाया गया। हमारे अंदर  अदृश्य रूप से तीन  शक्तियां कार्यान्वित रहती हैं। प्रथम  शक्ति Read More …