9th Day of Navaratri Celebrations, Eve of Navaratr, Puja & Havan

(Mumbai)

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1979-0930 Last Day Navaratri

अपने भक्तो को सरंक्षित किया. ये बड़ा भारी कार्य एक ज़माने में हो गया जब उनके भक्तो को हर तरफ से दुष्ट राक्षस आदि सैतान के अनुचर सताया करते थे. आज भी संसार में सैतानो की कमी  नहीं है. दुष्टों की कमी नहीं है, राक्षसों की कमी नहीं है. और इनके जो राक्षसी विचार है ,और जो इनके गलत तरीके है इससे आज सारा ही संसार लिप्त नज़र आ रहा है. और इसलिए , इसमें से निकलने के लिये मनुष्य अधिक प्रयत्न कर रहा है. इस नवरात्रि में न जाने कितने ही लोगो का रियलाईजेसन हुआ है और बहोत से लोगो ने इस आत्मज्ञान को पाते वख्त अपने अंदर की जो कुछ भी तकलीफे थी , जो की इस राक्षसी आक्रमण से आ गई थी उससे भी छुटकारा पाया. लेकिन सबसे बड़ी बात ये है की सहज योग में आप स्वयं भी जागृत हो गए. इतने लोगो का जागृत होना कभी भी संभव हो सकता है ऐसे में भी नहीं सोचती थी. और इतने थोड़े समय में इतने लोग जागृत हो गए ये बहोत बड़ी  हम लोगो ने मंझिल पाई हुई है.  इस मंझिल से अब जब देखते है तो ऐसा लगता है की बहोत जल्दी ही, इस साल भर के अंदर ही आप बहोत कुछ काम कर सकते है.

आज में आपसे इसलिये बात कर रही हूँ की आप अब सहजयोगी है सब. आपने योग में पाया है. आप लोग योगी हो. आप लोग अब योगी है आप आर्डिनरी लोग नहीं है , सर्व साधारण लोग नहीं है. आप योग में आ गए. अब आप योगभ्रष्ट नहीं हो सकते. आपको उस योग के मुताबिक चलना होगा.  माने दो चार आप में आदते हो. जरा सा आप विल पॉवर लगाये तो हम शक्ति देने के लिये तैयार है और आप अपनी आदते छोड़ दे. बहोत ज्यादा बोलना, बहोत कम बोलना ये भी ठीक नहीं. सब चीज में बीच बीच में आना है. कोई अति पे नहीं जाना है. कोई आदमी हर दम पैसे की बात सोचता है , हर समय किसी सत्ता की बात सोचता है , उसको भी बीच में लाना चाहिए. अपने मन को बीच में लाना चाहिए. मतलब ये ही निर्विचारिता में आना चाहिए. अपनी निर्विचारिता को आप धीरे धीरे बठाये. जितना निर्विचारिता का विलम्ब का स्थान बढ़ता जायेगा उतनी ही आपके अंदर में परमात्मा की शक्ति ज्यादा बढ़ती जाएगी. यानि की आपका कैलिबर जो है वो वाईडर होते जायेगा. और आपसे ज्यादा शक्ति बहेती जाएगी. अब जब ये ज्यादा शक्ति आपसे बढ़ रही है तब इस शक्ति को भी उपयोग में लाना चाहिए. अगर शक्ति बढ़ती गई और आपने उसको उपयोग में नहीं लाया तो हो सकता है की थोड़े दिन बाद ये केलिबर फिर छूट जाये. अब आपको घर जाके बैठना है और सोचना है , मनन करना है की हम किस तरह से सहज योग को बढ़ा सकते है. किस किस जगह हमारा स्थान है कौन कौन लोग हमें मानते है उनकी लीस्ट बनाए. कौन सी ऐसी एरिया है जिस में हम जा करके उसको प्रस्थापित कर सके. उसके लिये आपकी जो भी जरूरते है उसमे हमारे काफ़ी सेंटर  हो गए है. आज मैंने कोलाबा में भी एक सेंटर खोल दिया है. [नोट क्लियर ] और इस तरह से हर जगह पे एक एक सेंटर आपके लिये हो गया है ,और अगर आप कही खोलना चाहते तो वो भी आप देख लीजिये. आपके रिश्तेदार, आपके पहेचानवाले, आप जहाँ पे कार्यान्वित है वहा, कितने लोगो को आप सहज योग में ला सकते है उनको ला करके और इस संसार का कल्याण करने का काम करे. सारे ह्यूमैनिटी का अपने को कल्याण करना है .और आप जो यहाँ बैठे हुए है ये उसके पाये है. आपकी ज़िम्मेदारी बहोत ज्यादा है. और मेरे ख्याल से सहज योगी अपनी ज़िम्मेदारी नहीं समझते. बीस पचीस आदमी अगर अपनी ज़िम्मेदारी लेके चले तो सहजयोग नहीं चल सकता. हर आदमी को चाहिए की अपनी अपनी ज़िम्मेदारी समझे . अपने अपने विचार से ये तय करले की सहजयोग किस तरह  बढ़ायेंगे और कहा तक लेके जायेंगे.  इसके लिये आप स्वयं प्रबुद्ध हो गए है .आपको मुझे बताने की जरुरत नहीं है. सिर्फ बैठकर इसका विचार करे .  आप जानते है कुछ लोग कभी भी भाषण देना नहीं जानते थे वो लोग भाषण देने लगे. इतनी शक्ति आपके अंदर तब आएगी जब आप दूसरो को देंगे नहीं तो आपकी शक्ति कम हो जाती है . ये सब ने जाना है की आपकी शक्ति कम हो जाती है अगर आप दूसरो को शक्ति ना दे.  में ये नहीं कह रही की आप दूसरो की बीमारिया ठीक करे. बीमारी के लिये आप मेरा फोटो दीजिये.लेकिन औरो से बात करे उनको सहज योग में लाये, उनको रिअलाईजेसन के लिए लाए. फ़ोटो पे बिठा करके रिअलाईजेसन दे. आप जरुरी नहीं की आप फ़ोटो से हटकर रिअलाईजेसन दे. जहाँ तक हो सके फ़ोटो का इस्तेमाल करे जिससे आप पूरी तरह से सरंक्सित रहे. जिससे आपको कोई तकलीफ़ न हो . कोई आपके अंदर ईगो ना आ जाये. कोई गलत चीज ना हो जाये . आपकी निर्मलता बनी रहे. लेकिन कितने लोगो को सहज योग में लाने का है ये बहोत जरुरी है. जितने आप ज्यादा सहज योगीयो को अंदर लाईयेगा उतना आपका सहज योग बलवत्तर होगा. लेकिन इसके लिये एक तो जरुरी है की आप भी पक्के सहजयोगी  हो. नहीं  तो अगर आप ही डामाडोल है तो आपके साथ आये हुए भी बेकार गए. क्योकि जो आपके साथ आये है वो आपके साथ ही गुमेंगे. इसलिए आप भी अपने को पक्का कर लीजिये. अपने को पक्का करना बहोत जरूरी है. अपनी जहाँ कम्युनिटी है , अपने जहाँ लोग है बहोत कुछ हो सकता है की अगर आप बैठे की हमारा ये संग है हमारा ये समाज है. यहाँ पर हम इनके मेम्बर है , हम उनके मेम्बर है. या किसीके आप मेम्बर हो जाइये जहाँ ऐसे ऐसे समाज है . उनसे आप बातचीत करे क्योंकि हमको सारे संसार को बदलना है ये बहोत बड़ा काम है.

दिखने में हम सर्व साधारण लोग है पर हमारे हाथ से अगर ये काम होना है तो हम सबको एकत्रित होना है , एकजुट से रहेना चाहिए. और इसमें पूरी तरह से एकाग्र होना चाहिए. इसके लिये शक्ति तो में आपको दे रही हूँ. जितनी चाहे आप शक्ति ले सकते है ,और मिल सकती है और आपने पाई है. इसको आप पूरी तरह से बढ़ा ले. लेकिन इसकी जो एकनिष्ठता और एकाग्रता जो है वो आपको लानी पड़ेगी.  सबसे बड़ी चीज ये है की सहज योग का एक ही बड़ा लोकिंग पॉइंट है की आप समझ गए होंगे. एक ही इसकी युक्ति है . एक ही इसकी चीज है . कलजुग में जो बहोत सरल भी है और कठिन भी है. वो में आज अपने मुहँ से आपको बताती हूँ. आज तक जितने भी अवतरण संसार में हुए है उसको आपने नहीं माना . नहीं माना ठीक है. चलो जो भी ग़लती हो गई माफ़. लेकिन अगर आपने मुझे अगर नहीं माना है की में एक अवतरण हूँ तो आपका सहजयोग नहीं चल सकता, कुछ नहीं.  ये कम्पल्सन(Complusion – अनिवार्यता) है . पहले से ही कम्पल्सन (Complusion – अनिवार्यता) लगा करके में ये संसार में आई हूँ. और इसी कम्पल्सन(Complusion – अनिवार्यता) को आपको मानना ही पड़ेगा. आपने नहीं माना तो सहजयोग नहीं चलने वाला, कुछ नहीं चलने वाला. सब देव देवता मेरे अंदर बैठे हुए है. ये आप सहजयोगी है इसलिए में खोलके बात बता रही हूँ. सारे अंदर बिठाके में आई हूँई हूँ और आपको इसका पूरा उपयोग कर लेना चाहिए और समझ लेना चाहिए. अगर आपमें ये एकनिष्ठता नहीं रहेगी तो सहजयोग नहीं चलने वाला और आप भी नहीं चलने वाले. और सारा संसार भी डूबनेवाला है. अभी आख़री चांस येसारे संसार को मिला है की एक अवतार जिसके अंदर सारे देवी देवता बिठाये हुए है. और एसा इनकारनेशन जो माँ के रूप में आया है समझा रहा है , बात कर रहा है. आप से बहोत प्रेम से ,सहृदयता से सब कार्य करा रहा है . और बहोत महेनत कर रहा है. रात दिन आपके साथ लगा हुआ है और आप जानते है की अपने शरीर को किसी भी तरह से देखती नहीं हूँ सिवाय के आपके आराम को देखती हूँ. लेकिन आपके अंदर कुछ लोग है जो अभी भी अधमरे है. बहोत से लोग है जिसको मराठी में अर्थावट कहते है माने जिसका दीमाग आधा इधर आधा उधर है. और जिसको क्राइस्ट ने कहा था की “हाल्फ बिलीवर्स (Half Belivers)”. उस तरीके के लोग जो होते है बिलकुल बेकार होते है क्योकि क्राइस्ट ने कहा था ये मर्मर करते रहते है. ये बडबड करते रहते है  और उनकी बडबड में कोई अर्थ नहीं. बेकार की चीज की तरफ़ बहोत लोगो का चित्त जाता है. लेकिन असली चीज की तरफ उनका चित्त नहीं जाता. ये बहोत ग़लत बात है और इसलिये सहज योग के जो नियम है उनको पालना ही चाहिए.

पहले तो ये चीज है की हमारे सहजयोगीऔ में नियम है की आपको , कोई भी, किसीको भी एक भी पैसा सहजयोग के नाम पे लेने का अधिकार नहीं है .  जिस प्रकार आप कोई सा भी काम अनाधिकार करने से नुकशान होता है उसी तरह अनाधिकार एक भी पैसा आपने लिया है तो आपको नुकशान होगा. ये बिलकुल में आपसे बता देती हूँ की सहजयोग में अपने पर्सनल खर्चे के लिये किसीको भी एक पैसा नहीं लेना चाहिए. और आप जानते है की में ख़ुद ही अपना पैसा खर्चा करके इतने काम करते आई हूँ. लेकिन दूसरी बात भी इसकी होनी चाहिए की सहजयोग , हालाकि बगर किसी मूल्य से हर किसी को मिलता है . लेकिन इसका मतलब ये नहीं की ये चिप चीज है.  ये सस्ती चीज नहीं है. बहोत मूल्यवान चीज है. अभी मुझे , मैंने मेहतानी जी से पूछा की यहाँ लोग कितना क्या पैसा देते है. आप जानते है  की हर चीज का पैसा होता है. ये हॉल का खर्चा होता है, उस हॉल का खर्चा होता है . हॉल में प्रोग्राम होता है. अब कल अभी अभिषेकजी साहब ने गाना गाया उसका खर्चा होता है . पूजा का खर्चा होता है. और जो लोग पूजा में भी पैसा नहीं देते है और फिर आके मुझे कहते है मेरा लक्ष्मी तत्व ख़राब है ,तो होगा ही. इस पूजा का आपको पैसा देना चाहिए. आप हिन्दू हो करके इतना भी नहीं समझते क्या? की पूजा का पैसा तो आपको देना ही चाहिए. पूजा भी मुफ़त में करायेंगे? ये तो अगर भिखारियों की अगर जमात लग जाये तो इन भिखारियों से सहज योग नही होगा. कल ही मैंने बताया था , सेल्फ़ रिसपेक्ट होना चाहिए आदमी को.  क्या आपके पास इतने भी पैसे नहीं की आप अपनी पूजा के लिये पैसा दो. तो फिर ऐसे आदमी के लिये कुछ भी नहीं मिल सकता. इसका मतलब आप अपने आत्म सन्मान को बढ़ाये. अपने अंदर आत्मसन्मान होना चाहिए. और सोचना चाहिए . अभी बहुत से लोग, इन्होने कहा है की माँ , “इन लोगो से हम पांच रूपया हर महीना लेते है. “ ऐसे जो भिखारी है जो पांच रूपया महीना भी नहीं दे सकते वो सहजयोग में नहीं चल सकते. क्या आप लोग पांच रूपया महीना भी नहीं दे सकते इन लोगो को. उन्होंने दिखाया. बहोत लोगो उनके आगे लीखा है “नेवर (Never)”. एक पैसा नहीं दिया. कमाल है ! प्रोग्राम में आते है, सब में आते है ,दुनिया भर का फ़ायदा उठाते है , खानापीना  खाते है, सब करते है. ये तो भिखारियों से भी बद्तर हालत है. की नेवर करके दीया है इन्होने. इन्होने  एक पैसा कभी भी नहीं दिया.ये बहोत गलत बात है. हमारे समाज में जो भी कार्य करने पड़ते है उसके लिये पैसा चाहिये ! सिर्फ़ माताजी अपना ही पैसा देगी क्या हमेंशा.? ये अच्छी बात है क्या की आपके कल्याण के लिये में पैसा दूँ ?  या मेरे पति पैसा दे? उन्ही का कल्याण हो रहा है .ऐसा तो उनका ही लक्ष्मी तत्व ठीक हो रहा है, आपका इतना नहीं हो रहा है. अभी भगवान की कृपा से उनको बड़ी तनख्वाह मिल रही है. उनका लक्ष्मी तत्व अच्छा हो रहा है और मेरे बच्चो का सब बेकार जा रहा है. उनके बूते पर तुम लोग अपना लक्ष्मी तत्व अच्छा मत करो. अपनी भी लक्ष्मी खर्चनी चाहिए. अरे भाई! ये पांच रुपया क्या होता है?  पांच रुपया भी कोई चीज होती है? वो भी एक महीने के अंदर पांच रुपया नहीं दे सकते ऐसे अगर कोई सहज योगी है तो ऐसे सहजयोगी आने की जरुरत नहीं. और ऐसे कोई भी सहजयोगी. अगले टाइम कोई भी सहज योगी ने पैसा नहीं दीया उसको में मेरी पूजा में नहीं आने दूंगी. मुझे ऐसे भिखारी नहीं चाहिए पूजा में. मुझे भिखारियों से पूजा नहीं करानी. सबको धर्म से कहेना चाहिए की माँ हम लोग सब अपने ही मन से देना चाहिए. सब लोग अपना नाम लिखाओ और अपने मन से पांच रुपया महीना कम से कम सब आदमी को देना चाहिए. और अगली बार आ करके में लीस्ट देखूँगी. नेवर तो में किसी के ऊपर देखना ही नहीं चाहती.  उससे ज्यादा अगर दे सकते है तो आप दीजिये. क्योंकि आपको मालूम है अपना खर्चा कितना है? हॉल कितना खर्चा है, खाने पीने का कितना खर्चा है.? सब चीजो का खर्चा कितना है ? लोग खाने का भी पैसा देने को तैयार नहीं. मुफ़त में खाना खायेंगे. ऐसे लोग हमें नहीं चाहिए. मुफतखोर लोग सहज योग में चाहिए नहीं. ठीक है, सहज योग एकदम मुफ़त है, एकदम फ्री है. पर मुफ़तखोरो के लिये नहीं है. कहाँ से लाये बताइये इसका पैसा देने का है तो क्या माताज़ी दे? मैंने तो साफ़ मेरे पति से कहा है की एक पैसा आप मत दो नहीं तो उन्ही की तिजोरी भर रही है. और तुम लोग सब गरीब हो जाओगे.

दूसरी बात ये है की हमारा आर्गेनाईजेशन का भी गरबड दिखाई दे रहा है .जब हम एक माँ से पैदा हुए है तो हम सब बच्चो में आपस में प्रेम होना चाहिए. आपस में बहोत प्रेम करना चाहिए. ये सबको समजना चाहिए. बड़ा मजा आता है जरा प्यार करके तो देखों? प्यार का मजा और होता है. और दुश्मनी करने का द्वेश करने का, इर्ष्या करने का, झगड़ा करने का.  आने के साथ ही मुझे कंप्लेंन सुनाई देते है. उन्होंने हमको इन्फॉर्म नहीं किया, उन्होंने हमको नहीं बताया, वो हमसे नहीं बोले ,फलाने ने ये किया. दुसरा आएगा वो बोलेगा इसने  ये किया वो किया. मैंने कहा , “ अरे! बाप रे बाप”. ये हिंदुस्तानी की एक बीमारी है ख़ास , पर सिर्फ मुंबई वालो की भी खास है. जितने ज्यादा मुंबई वाले रोनी सूरत है कभी मैंने पूना वालो से सुना नहीं. वो अपने आप छाँट लेते है जो गंदे होयेंगे लोग. उनको अलग कर लेते है. शिकायते बहूत कम होती है. नहीं तो ये के मुझे इसने मारा,  मुझे उसने मारा, मेरी बिवी ने मारा , मेरे लड़के ने मारा. रात दिन रोनी सूरत. आप लोगो को चाहिए की अपनी प्रतिष्ठा पे खड़े रहे. आप प्रतिष्ठित है. हमने आपको प्रतिष्ठित किया है. आप जानते है आप कौन है?  आपको मैंने वो चीज दी है जो गणेश को दी थी. आप पूजनीय संसार के वर्णीय लोग है और आप कर क्या रहे है? वो अपनी बुरी आदते और पहली आदते भुल जाइये. अब आप राजा हो गए है अभी  भी भिखारियों की तरह झोळी लेके क्यूं घूम रहे है बाबा! आप राजा के लड़के थे , खो गए थे फिर से राजा बना दिया. अभी फिर से वही भिखारी की तरह घूम रहे है. अपनी प्रतिष्ठा पे खड़े रहेना है.

तीसरी चीज ये है की आपके अंदर जो यंग लोग है , पच्चीस तीस जो भी हो , अलग अलग जगह के जहाँ जहाँ रहते है. अपने नाम आज ही देके जाना, में जाने से पहले देखूँगी. और आप सब अपने एक एक सेंटर संभालिये , ऑर्गनाइज करिए. और उनके इंचार्ज जितने भी लोग है उनको संभालिये. बुड्ढे लोग अभी काम नहीं करेंगे. सब ट्रस्टीस को छुट्टी दे दी है मैंने. ट्रस्ट अपना बंध करो अभी. ट्रस्ट की अभी कोई जरुरत नहीं. ट्रस्ट हमने आश्रम के लिये बनाया उससे एक भी रूपया पैसा एक भी कौड़ी नहीं निकलेगा. अभी सब खर्चा आपको करना है. कोई मुश्केल काम  नहीं है. इतने आदमी है क्या मुश्केल है?और हमारा कौन सा बड़ा भारी खर्चा है . आप लोगो को मिल करके खर्चा करना है . ट्रस्ट से एक पैसा नहीं निकालने का है. और मैंने रिज़र्व बैंक के ऑफिसर से पूछा है. उन्होंने कहा की जो ओकेजनल. कोई सा भी इन्कम करते है, ओकेजनल इन्कम पे कोई इन्कम टेक्स नहीं  है. इसलिए वो भी झगड़ा गया. कोई इन्कम टेक्स की जरुरत नहीं कुछ नहीं.

अभी मैंने प्रधान साहेब , जयवंत और नीमा और इनको उमा और महेतानी साहेब की लड़कियां और अपनी ये जरीना इन सब लोगो को बताया हुआ है. ऐसे ही रमेश मोदी बड़े एक्टिव आदमी है .और भी बहोत से लोग एक्टिव है ,जो यंग लोग है , इन सबको इकठ्ठा होना चाहिए. गुडगाव से भी बहोत एक्टिव लोग है , उनको भी लेना चाहिए. मोदी साहेब, इसमें ज्यादा समझते है, उनको लेना चाहिए. इस तरह से यंगर लोगो के एक ग्रुप आप बनाइये. इसमें जिस जिस को नाम देना है आज ही पूजा के बाद जा करके नाम दे दे. आज ही व्रत करे , “ की हम माँ करके दिखायेंगे.और हम समझा देंगे की हम ईतने लोगो को इकठ्ठा कर रहे है” सब लोग  एक एक, जिसको भी जो सोचता है , पच्चीस कम से कम नाम होने चाहिए. ज्यादा भी हो सकते है . जो बुजुर्ग लोग है उनको सताने की जरुरत नहीं. बच्चो को अभी रहने दीजिये. आप जो यंग लोग है वो अपने उपर ले. सब. आप भी ले सकते है. आप भी वहां पर हो सकता है , अपने आपके एरिया में, इस तरह से सब लोग अपने ऊपर ऐसा ले ले. और आपस में ऐसे लोग सब मिला करे , कभी चाय पे मिले , कभी किस तरह से मिले , और में एक साल के बाद आ करके देखना चाहती हूँ की सहज योग कितना फैल गया है . एक बड़ी अछ्छी बात है की  इस वख्त गुरु सिहस्थ आने की वजह से सहज योग बड़े जोर से फ़ैल सकता है. जो आप लोग जरा प्रयत्न करे.

तो इस तरह से हमारी जो बाते है उसको समझ लेना चाहिए. अभी देखिये लक्ष्मी तत्व की बात आपको मैंने  करी. जो दूसरी बात कही मैंने ओर्गनाइजेसन की , ये है सरस्वती तत्व की. इसमें है सारा ओर्गनाइज कैसे करना , लोगो को कैसे बुलाना , किस तरह से उनको चालना देना वो सब समजाना , उनको जोड़ लेना. हर एक सेंटर में, हर एक महोल्ले में , एक एक लीडर बन सकता है. और बहोत अच्छे से ओर्गनाइज कर सकते है . अब लंदन वगेराह में जैसा कर रहे है या जैसे पूना के लोगो ने किया उस तरीके से करना चाहिए. एक आदमी है जो पच्चीस आदमी को जोड़े रखता है. आपस में मिलना जुलना , भाई तुम कैसे हो, तुम कैसे हो. वो तुम्हारा क्या चल रहा है, सब कैसे है  , ऐसे सब आप प्यार से बात करे . दोष नहीं देखने का .उनमे ऐसा है , नहीं तो  उनका मजाक करना. उनका दोष देखना आदि नहीं करने काआप सब आपस में देख ले. इतना मजा आयेंगा दोस्ती में , इतना मजा आयेंगा जिसकी कोई हद नहीं.   वैसे गड़करी बाई भी काफ़ी एक्टिव है पर अभी उनके बच्चे है और उनको अभी प्रॉब्लम है तो उनके बच्चो को ले लो. जैसा भी जहाँ जो हो सकता है , जिसको भी आप ले सकते है उनको ले करके और आप इसको वर्क आउट करे. और में जो जो लोग है उनको पूछूंगी की नेक्स्ट यार क्या किया इन्होंने. रुपया पैसो के लिये एक बार भी [नोट क्लियर] मांगना नहीं पड़ेगा. रूपए पैसो के लिये भी एक पांच छे लोगो की कंपनी बना दीजिये. और वो कह रहे थे की हम ड्रामा कर लेंगे. मैंने कहा, “करो जो  भी करना है”. ओकेजनल जो इन्कम है  तो इसके लिये  इन्कम टेक्स के पास जाने की जरुरत नहीं. ये बिलकुल मैंने पता लगा लिया है. उसका कोई हिसाब लिखने की जरुरत नहीं , कुछ दिखाने की जरुरत नहीं. ओकेजनल इन्कम के लिये. जो रेग्युलर इन्कम होती है उसका इन्कम टेक्स होता है. लाखों रुपे की ओकेजनल इन्कम होती है जैसे कांग्रेस का फण्ड हुआ वो सब फलाना, ओकेजनल इन्कम. तो हमारा तो कोई फण्ड ही नहीं होता है . तो आप लोग अगर इसकी कोशिश करे , और पर मन्थ कम से कम अगर पांच दे, उससे ज्यादा दे, जैसा दे ,वैसा देना चाहिए. अब जो आदमी ज्यादा कमाता है . उसको पांच देने का कोई सेन्स ही नहीं है.

दूसरी बात ये है की पूजा में हमेंशा ऐसे लोगो को बुलाना चाहिए, जो हमेंशा आते है पूजा में और जिनका सहजयोग में कुछ स्थान है. ऐसे लोगो को नहीं बुलाना चाहिए, जो कभी भी आ गये. सहजयोग में ऐसे आधे अधूरे लोग नहीं चल सकते. कम स कम पूजा का वरदान उनको नहीं मिल सकता. सहजयोग में दो तीन रिंग्स चलती है, आपने नोटिस किया होंगा. एक तो पेरिफरी पे होती है जो जन समुदाय है उसमे ज्यादा तर लोग पार नहीं है. उसके अंदर की रिंग होती है जिसमे की लोग पार हो गए. उसके अंदर की रिंग होती है की  जो आते है आधे, आधे नहीं आते. उसमे पार होने पर भी सब लोग आते है, आते है आधे, आधे नहीं आते. उसके अंदर की रिंग होती है जिसके अंदर में लोग हमेंशा आते है. और उसके अंदर की रिंग है जो बहोत ही डेडिकेटेड है. हम सबको जानते है. हमें सर्टिफिकेट देने की जरुरत नहीं.  हम हर एक आदमी को जानते है , आप इसको समझ लीजिये. हमें किसी के बारे में कुछ बताने की जरुरत नहीं है. और शिकायत करने की जरुरत नहीं. इस तरह से आप समझदारी से रहे. क्योंकि ये समझ लेना चाहिए की आप लोग विशेष लोग है. आपको परमात्मा ने विशेष रूप से चूज किया है. आपके उंदर, अंदर कुण्डलिनी जागरण करा दिया. और आपके ऊपर ये सरताज लगाया है की आप योगी बन गए,घर पे बैठे ही. आपको इसके लिये कुछ नहीं करना पड़ा. अब पुरुषार्थ करना होगा. जो पुरुषार्थ करेगा वो बहोत कुछ पा सकता है. और जो नहीं करेगा वो नहीं पायेगा. जो चीज आप देते ही नहीं वो कैसे पा सकते है. अगर आप सरस्वती , आप को कितनी भी हम सरस्वती का ज्ञान दे, एक लड़का है जो पढ़ता नहीं , माँ ये पढ़ता नहीं और उसको ले आये. उसको हमने फर्स्ट क्लास में पास किया. और वो फर्स्ट क्लास में पास होने के बाद भी बेवकुफ की तरह घूमता रहा. और कुछ भी उसने सरस्वती का कार्य नहीं किया. तो उसके पास सरस्वती कितने दिन टिकेंगी. आखिर आप यही बताइये की दीप आप जलाते है तो प्रकाश देने के लिये जलाते है की आप बिठा करके उसको अपने आँचल में छुपा लेते है? आपके दीप जले है उससे अनेक दीप जलने चाहिए. बहोत बड़ी ज़िम्मेदारी है. आप ही मेरे हाथ है और आप ही मेरी आँखे है. आप ही मेरा सबकुछ है. आपके थ्रू ही हो सकता है. मेरे से होता तो क्यों में आपके सामने  गीडगीडाते कहती की ,” बेटे ये चीज को करो” . तुम लोग मेरे हाथ हो हाथ के बिना कोई काम नहीं हो सकता. पर समझदारी से रहेना चाहिए. और अपने अंदर अहंकार आदि जूठी चीजे नहीं लानी चाहिए.

और मुझे कुछ नहीं चाहिए. में सिर्फ ये चाहती हूँ की ये आप लोगो का जो जीवन है , योगियों का जीवन, ये अत्यंत सुंदर जीवन बने , आपके साथ अनेक, आपके कारण कल्याण के मार्ग पर आये. और परमात्मा के साम्राज्य में स्थित हो. ये आखरी काम है हमारा ,इसमें थोड़ा हमारी मदद कर दीजिये, सब काम हो जायेगा. हम आपसे कहते है की आश्चर्य की बात है की इंग्लैंड के लड़के जो है हमारे पास में[नोट क्लियर] उनके मुक़ाबले में उतरना मुश्केल है , जैसी वो लोग महेनत करते है और जिस तरह से ध्यान धारणा करते है, और जितनी एकनिष्ठा उनमे है आप लोगो में आना चाहिए. उनमे पैसा और ये चीजे वो सोचते भी नहीं है और नाही किसी प्रकार से ही वो आलस्य करते है. इतनी महेनत वो लोग करते है, उनको मैंने कहा की आपको सिगरेट छोड़ना पड़ेगा तो सिगरेट तो क्या उन्होंने सिगरेट का कभी दुकान ही नहीं देखा. इतनी एकनिष्ठा  और इतना उनमे महेनत करने की ये है की आपके सामने वाकही एक मिशाल की तरह ये लोग है. की जो इस कदर अनभीज्ञ है अपने धर्म से और अपने तरीको से. उन्होंने मास्टरी कर ली है और उसका आप देख सकते है की एड्वेंट जैसी किताब लिखाई है. और ऐसी कम स कम चार से पांच किताबे अभी आएँगी. बहोत जल्द ही. कम से कम ये एड्वेंट का ट्रांसलेशन कोई अपने ऊपर ले ले , तो ऐसा एक हिंदी भाषा में हो जाये और एक मराठी भाषा में हो जाये तो भी बडा होगा.  यही मेरी पूजा है , यही मेरा सब कुछ है. बाकी सब पूजा में क्या अर्थ है , ये तो सब मंदिरों में हो ही रही है मेरी पूजा ! उससे क्या पाने का है .मेरी पूजा तभी होंगी जब तुम अनेक लोगो को जागृत करोंगे. हज़ारो लोगो को जागृत करोंगे. तब में देखूँगी की ये शक्ति सारे संसार में बह रही है. वही मेरी पूजा असल में होंगी. बाकी सब मेरी पूजा में कोई मुझे अर्थ नज़र नहीं आ रहा है. उसे थोड़े लोगो को फ़ायदा हो रहा है . जरुर है पूजा में आने से आपके चक्र ठीक हो जाते है .पर अगर आप उसको इस्तेमाल नहीं करे , उसका उपयोग नहीं करे ,उसको आगे न बढ़ाये , उसकी प्रतिष्ठा न रखे , उसमे महेनत न करे, अपने जीवन के तरीके न बदले , तो फिर से वैसे के वैसे हो जायेंगे. इसलिए बड़ा मान है आपका की आप पूजा में आये है, तो उस मान को रखना और अगले साल में आने पर , जितने भी लोग यहाँ पर आये है आज मुझे वचन दे. हर एक आदमी, कम से कम दस आदमियो को पार करायेंगा.  हर एक आदमी आज मुझे वचन दे और में आपको शक्ति देती हूँ. और हर एक आदमी इसमें पूरी तरह से हमेशा जहाँ पर भी ध्यान होता है वहा आया करेंगा और ध्यान कराएगा. ये हर एक आदमी को मुझे आज वचन देना चाहिए. तभी में आपको पूर्ण शक्ति दूंगी.

हालांकि आज का दिन आपके लिये भी और मेरे लिये भी बड़ा समारोह है ,बड़ी भारी चीज है,  सारे संसार में आज नवरात्रि का अंतिम दिन बड़े [नोट क्लियर] से माना  जाता है . लेकिन दुःख की भी बात लगती है की इतने बच्चे सामने बैठे हो तो माँ का जी जिस तरह से खींचता है . वो आप देख ही रहे है की कल से मेरा हाल बहोत ख़राब है. और आप लोगो को भी बहोत तकलीफ़ होती है इन सब चीजो से. ये तो है. लेकिन तो भी ये सोचना चाहिये की माँ के और भी बच्चे वहाँ है , ये सोच के की माँ वहाँ जायेंगे तो वे कितने ख़ुश होयेंगे और उनके भी दिल कितने बड़े हो जायेंगे. और अपने दुःख तो आप लोगो को जीत लेना चाहिए. और सोचना चाहिए की माँ जाये . जैसा सुख हमे दिया वैसा सुख उन्हें भी दे और उनको भी ये आनंद मिले और हमारे जैसे वो भी सुखी हो जाये. तो तुम्हारा भी दिल शांत हो जायेगा. और जो ये परेशानी है की माँ आप कब आओगे , कैसे होगा ये सब छुट जायेगा. हर एक चीज के बारे में सबको पता है .अगर एक चीज का प्रॉब्लम हो जाये , समज लीजिये आपको प्रॉब्लम हो जाये , अभी क्या करे? इसमे कैसा सोल्यूशन है ?, क्या है?  तो आपस में पूछ लीजिये. कोई अगर आपसे ऐसा इंसान मिले जिसका सोल्यूशन आपको नहीं समज आता है तो दो चार फ़ोन है आप जानते है , किसीको भी फ़ोन करे. या तो मोदी को कर ले, या चाहे तो महेतानी को कर ले. या जिसको चाहे उसको आप फ़ोन करके पूछ सकते है. पर जहाँ तक हो सके इन बुजुर्ग लोगो को आप छुट्टी दे दीजिये. इनका मैंने बिलकुल ट्रस्ट बंध कर दिया है.  ट्रस्ट को इनको छूने का नहीं. आप लोग अपना पैसा इकठठा करे . जो कुछ आप कार्यक्रम करना चाहे करे. जैसा भी चाहे आप कर सकते है . ओकेजनल इन्कम आपका रहेगा. लेकिन याद रखना की वो भी पैसा है . एक एक पैसा ये पब्लिक का पैसा है उसका बड़ा भारी अर्थ होता है. पब्लिक का पैसा आपको उड़ाना नहीं चाहिए. कभी भी, एक पैसा भी नहीं ,एक बूंद भी नहीं. आप लोग ग़लत चीज के लिये खर्चा करे. नहीं तो हमने बीड़ी पी उसका पैसा , हमने चाय पी उसका पैसा , ये नहीं!  हा! अगर आपको बहोत ही कही जाना हो(और) कुछ खर्चा हो गया तो वो दूसरी बात है .पर अधिकतर आप अपने बस से जाइये. अपने जिस औकात से रहते है उसीसे रहिये. जो आदमी बस से चलता है वो में टेक्सी से गया उसका पैसा वो सब नहीं चलेगा. थोड़ा सा पैसा आपको भी खर्चा करना चाहिए. इस तरह से भी लोग करते है की बड़े बड़े खर्चे बता करके. ये सहजयोग में नहीं चल सकता.  आप अगर ये सहजयोग में करेंगे तो मै उसकी सजा निकालती हूँ आप जानते है! ये चल नहीं सकता सहज योग में. सहजयोग में आपको बहोत पब्लिक के मनी के लिये बहोत ख्याल रखना है. ये पॉलिटिक्स नहीं की आपने पैसा मार लिया और जिसको जैसा कर लिया. ये परमात्मा का साम्राज्य है . और इसके कायदे बहोत कड़क होते है. इसलिए इसमे पैसे वैसे की गरबड एक कौड़ी की नहीं होनी चाहिए. कायदे से आप रखिये. कायदे से रहे. और अपने को जूते मारा करे सुबह से शाम तक अगर दिमाग में ऐसा कोई भी ख्याल आया तो सब ठीक हो जायेगा. आप सबको इन चीजो का बिलकुल अधिकार नहीं है. जब तक ये अधिकार प्राप्त नहीं होता अनाधिकार चेष्टा न करे. और सब चीज बहोत ग्रेसफूली करे. सब चीज में ग्रेस होनी चाहिए. आपस में प्यार होना चाहिए, दुलार होना चाहिए. आपस में मिलो. कितनी ख़ुशी की बात है . देखिये आज ही कहाँ कहाँ से लोग आये है. सब जाती , सब धर्म के लोग आज यहाँ बैठे हुए है. कितने आनंद की बात है .एक दूसरो को पूरी तरह से मदद करो , बीमार हो तो दौड़ के जाओ. देखो! क्या तकलीफ़ है? कितनी अच्छी बात है. आपस में मेल जोल होना चाहिए इसलिए मैंने कहा की आज यहाँ डिनर- लंच करो तो अच्छा है. अभी लंच में पैसा नहीं देंगे .बहोत से लोग ऐसे है की हम लंच में पैसा नहीं देंगे. मैंने कहा जो बहार से आये है वो तो हमारे गेस्ट है. पर जो यहाँ के है उनको तो अपना भी देना चाहिए और दूसरो का भी देना चाहिए. इतना भी एक साल में एक बार भी नहीं दे सकते तो ऐसे भिखारियों को आप दूर करे. ऐसे भिखारी हमें नहीं चाहिए. सबको मिलना जुलना चाहिए. एक बार के खाने का पैसा नहीं दे सकते आप? ऐसे गए बीते लोग है क्या? एक सहजयोग में बहोत बड़ा ड्रा बेक हो गया है की इसमें पैसा ही नहीं लेते है तो बड़ा भारी ड्रा बेक है. पर ये मुंबई में सबसे ज्यादा है मतलब मुंबई में कुछ न कुछ गरबड है. अगर आपको अपना लक्ष्मी तत्व जागृत करना है तो पैसो के मामले में जरा ठिल छोड़े और दूसरा ये है की ईमानदारी रखे. ये दो चीज होनी चाहिए. दानी भी होना चाहिए और इमानदार भी होना चाहिए. इससे सब ठीक हो जायेगा. अगले वख्त में आऊ , इस वख्त मुझे बड़ी ख़ुशी हुई की दादर का प्रोग्राम इतना जबरदस्त हुआ, इतना बढ़िया हुआ है की नेक्स्ट टाइम दादर में तो बड़ा ही जोर का सेंटर बन जायेगा. दादर के उससे में बहोत ख़ुश हो गई हूँ .और आपको अनेक  आशीर्वाद है की दादर में जैसे प्रोग्राम हुए है ऐसे हर एक जगह पे बड़े बड़े प्रोग्राम हो और बड़ी ख़ुशी की बात है. और इससे इतनी ख़ुशी होती है की देखिये बच्चे किस तरह से मेरे बढ़ रहे है और अपना इम्पोर्टनस समज रहे है ,इसको बढ़ाये आगे चलाये जैसे दादर में प्रोग्राम हुए ऐसा हर एक जगह पे आपके प्रोग्राम हो और बड़ा अच्छे से सफ़लता मिले. ये सबको आपको में अनेक आशीर्वाद देती हूँ. हृदय से में आपको अनंत आशीर्वाद देती हूँ .आप समृद्ध हो ! आप समर्थ हो! और आपके अंदर से अनेक शक्तियाँ बहेकरके ये संसार भला करे और कल्याण करे. और माँ की एक ही इच्छा की ये सारा संसार सुख में आ जाये. आनंद में आ जाये .वो तो आप लोग पूर्ण करे.