How realisation should be allowed to develop Caxton Hall, London (England)

          बोध को कैसे विकसित होने दिया जाना चाहिए

 कैक्सटन हॉल, लंदन, इंग्लैंड। 15 अक्टूबर 1979।

आप में से अधिकांश यहाँ सहजयोगी हैं।

अब जिन लोगों को साक्षात्कार मिल गया है, जिन्होंने स्पंदनों को महसूस किया है, उन्हें पता होना चाहिए कि वे अब दूसरे ही स्वरुप में विकसित हो रहे हैं । अंकुरण शुरू हो गया है, और आपको अंकुरण को अपने तरीके से काम करने देना चाहिए।

लेकिन सामान्य तौर पर, जब हमें बोध भी हो जाता है, […]