Diwali Puja: Today is the day to take an oath

Dollis Hill Ashram, London (England)

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                                                दीवाली पूजा

 डॉलिस हिल आश्रम, लंदन, इंग्लैंड। 20 अक्टूबर 1979।

….14वें दिन, षडानन के द्वारा उसका वध हुआ, कार्तिकेय पुत्र थे पार्वती और शंकर के जो रुद्र शक्ति की बहुत शक्तिशाली अभिव्यक्ति थे, जो कि भगवान की मारक शक्ति हैं। और उसकी रचना विशेष रूप से इसी उद्देश्य के लिए, नरकासुर को मारने के लिए की गई थी।

तब – ऐसा था, यह राक्षस, ऐसा खतरा था और उसने कितने लोगों के जीवन को बर्बाद कर दिया था। उसने ऐसा कहर बरपाया है और लोगों को यह नहीं पता था कि सुरक्षा कैसे प्राप्त की जाए।

उस समय, तब शक्ति द्वारा षडानन, कार्तिकेय के रूप में नरकासुर का वध किया गया था, उस समय चारों ओर उत्सव मनाया गया था।

लोगों ने अगली रात मनाई और अगली रात पूरे साल की सबसे काली रात थी, जो कि आज रात है।

घटते चंद्रमा के 15वें दिन को अमावस्या [अमावस्या] कहा जाता है। तो यह सबसे अंधेरी रात है। हर महीने एक बार हमेशा अंधेरी रातें होती हैं, लेकिन यह पूरे साल की सबसे काली रात होती है और इससे ठीक पहले नरकासुर का वध हुआ था। और घर में सारी रौशनी प्रज्वलित की जाती हैं और ढेर सारे दीपक जला दिए जाते हैं।

बेशक बिजली की बत्तियाँ इनसे अलग होती हैं, जैसा कि आप जानते हैं, कि वे हर समय बाधा को जला देती हैं।

इसलिए नरकासुर की मृत्यु के बाद, जब वह बहुत शक्तिशाली था तब उसकी अपनी एक बड़ी सेना थी, और उसने कई लोगों को सम्मोहित कर लिया था, इसलिए बचे हुए लोगों से पूरी तरह छुटकारा पाने के लिए, उन्होंने इन सभी दीपकों को प्रजवलित कर दिया, ताकि वे सभी शैतान जो जो अभी भी घूम रहे थे, वे सब जला दिए जाएं; और आप सहज योग में समझ सकते हैं कि कैसे एक दीपक जलता है और एक दीपक कैसे एक बाधा को दूर करता है।

लेकिन फिर भी घर की सारी बत्तियाँ जलानी चाहिए। क्या तुम जाकर घर की सारी बत्तियाँ जला दोगे।

बाहर और भीतर होना चाहिए, हर जगह रोशनी होनी चाहिए। किसी भी कमरे को अँधेरे में नहीं रखना चाहिए क्योंकि वे अँधेरे में छिप जाते हैं।

इसलिए कोई भी कोना अंधेरा नहीं होना चाहिए।

तब आप जानते हैं कि राम ने बढ़ते चंद्रमा (शुक्ल पक्ष)के दसवें दिन रावण का वध किया था – वह दशहरा था – और वह जला दिया गया था। और फिर वे पुष्पक नामक एक हवाई जहाज से अयोध्या वापस लौटे, अपनी राजधानी में, जहां उन्हें इस दिन राजा के रूप में ताज पहनाया गया था।

अब हमारे पास ज्योतिषीय रूप से, साढ़े तीन शुभ दिन हैं जहाँ आपको ज्योतिष की किसी भी पुस्तक से परामर्श करने की आवश्यकता नहीं है, जिसे पंचांग [हिंदू कैलेंडर] कहा जाता है, यह पता लगाने के लिए कि यह एक शुभ समय है या नहीं। किसी भी पूजा के लिए, किसी भी… अच्छे काम के लिए जो आपको करना है, भारत में लोग पंचांग से सलाह लेते हैं कि कौन सी तिथि शुभ है और कौन सी नहीं।

उन्हीं में से एक है आज का दिन, जिस दिन आप कुछ भी अच्छा कर सकते हैं, आप कुछ भी अच्छा तय कर लें।

आज का दिन शपथ लेने, कुछ महान सोचने, कुछ बड़ी कल्पना करने, वरदान मांगने, बड़ी पूजा करने का दिन है, यह सबसे महान दिनों में से एक है।

उनमें से एक – हम उन्हें मुहूर्त कहते हैं – जहां आप इन पुस्तकों से परामर्श नहीं करते हैं।

और इसलिए राज्याभिषेक, मेरा मतलब है कि श्री राम का राज्याभिषेक इस दिन हुआ था।

तो इसके लिए इतने सारे पहलू हैं, कि राम द्वारा एक और शैतानी बल रावण को मारने के बाद, यह दीवाली मनाई गई।

इसके अलावा यह बहुत पहले मनाया गया था जब नरकासुर मारा गया था।

और इसी तरह हम अपनी आनंद और खुशी व्यक्त करते हैं, ईश्वर के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं कि उन्होंने अपनी शक्ति के साथ हमेशा हमारी रक्षा की है, और इस दुनिया के सभी राक्षसों और सभी बुरी ताकतों को नष्ट कर दिया है।

यह धन्यवाद देने का समय है। इस दिन हमें अपने बड़ों के पास जाना है और उन्होंने हमारे लिए जो कुछ भी किया है उसके लिए उन्हें धन्यवाद देना है।

उन सभी लोगों के लिए जिन्हें हमें आज धन्यवाद देना है, वह दिन है जब हमें इन सभी लोगों को आशीर्वाद देने के लिए ईश्वर से प्रार्थना करनी है।

हमारे लिए भी बहुत हर्षित और बहुत प्रसन्न होने का दिन है, क्योंकि अब मुझे लगता है कि कल से सहज योग नई प्रगति करने जा रहा है।

कल से नया साल शुरू हो रहा है। और शालिवाहन का नया साल, वाहन कैलेंडर – दो कैलेंडर हैं, एक विक्रम है, दूसरा शालिवाहन है – शालिवाहन का।

और वह वंश है, आप जानते हैं कि, वे मेरे पूर्वज थे, जिन्होंने इस शालिवाहन को शुरू किया था।

अब शालिवाहन के बारे में दो कहानियाँ हैं। एक कहता है कि यह सज्जन एक ऐसी डाली को तोड़ रहे थे जिस पर वे खड़े थे, इसलिए उन्हें शालिवाहन कहा गया। लेकिन असल में इसका मतलब शॉल होता है। शाल को मराठी भाषा में शाली कहा जाता है और माता का शॉल धारण करने वाले को शालिवाहन कहा जाता है।

और जब कुछ सहजयोगी भारत गए, यदि आप को याद हो तो, राहुरी में, वह स्थान राहुरी नंदगाँव है, तो आपने मेरे पूर्वज जहाँ रहते थे वह स्थान भी देखा है। उन्होंने तुम्हें पहनने के लिए शॉल दी। और मैंने उनसे पूछा, “तुमने उन्हें शॉल क्यों दी? तो उन्होंने कहा कि ये शालिवाहन हैं। वे सभी अब शालिवाहन हैं। इसलिए हमें उन्हें शॉल देनी होगी।” और ऐसा करके वे बहुत खुश हुए।

तो कल नए साल का दिन है। अब, हमारे जीवन में नए साल का दिन क्यों जरूरी है? क्यों – पिछले साल जिन्हें साक्षात्कार मिला वे बहुत भाग्यशाली लोग थे, लेकिन आत्म-साक्षात्कार के धीमे नीरस प्रतीत होने वाले मार्ग पर चलने वाले व्यक्ति के पास से वह सारा उत्साह और आदर्शवाद खो जाता है, जो उसे प्राप्त होने पर होता है।

आप इसके बारे में बहुत कुछ करने की सोचते हैं। जब आपको यह आत्मसाक्षात्कार होता है कि आप इसमें इतने तल्लीन होते हैं, आप इसमें  इतने आनंदित होते हैं कि आप सोचते हैं कि, “अब मेरे लिए यह और वह और वह करने का समय आ गया है। और मैं अमुक लोगों से संपर्क करने जा रहा हूं, और मैं यह समाचार इन इन शख्स को देने जा रहा हूं, और मैं यह काम करने जा रहा हूं, मैं मां को दिखाऊंगा कि उन्होंने मुझे जो दिया है, मैंने उसे कई गुना बना दिया है।

चूँकि यह एक नया अनुभव था, शानदार अनुभव था, एकमात्र ऐसा अनुभव जिसका आप इंतजार कर रहे थे। और ऐसा भी कि आप यह भी तय कर लेते हैं कि मैं अब इस महान प्रकाश का मशाल वाहक बनने जा रहा हूं जो मुझमें आया है। और मैं इस दीपावली की एक ज्योति बनाने जा रहा हूं। दीपावली, दीप का अर्थ है ये रोशनी, अवली का अर्थ है रोशनी की पंक्ति। तो मैं उनमें से एक बनने जा रहा हूँ। और हम उन लोगों का मार्ग बताने जा रहे हैं जो आत्म-साक्षात्कार चाहते हैं। ये सभी महान विचार हमारे पास तब आते हैं जब हम अपनी गहराई को छूते हैं। और हम शेष सभी मानवता के लिए जिम्मेदार महसूस करते हैं।

लेकिन फिर हम धीरे-धीरे महसूस करते हैं कि हमारे उत्थान, अपने अस्तित्व के साथ बहुत सारी समस्याएं हैं, और कुंडलिनी इसमें वापस जाती है, फिर से उठती है और आपको पता चलता है कि आपको अपने आप को काफी सुधारना है।

फिर यह सुधार वाला भाग शुरू होता है, आप दूसरों के बजाय अपने बारे में ज्यादा सोचने लगते हैं। साथ ही हमारे साथ पहचानी जाने वाली अन्य चीजें जैसे कि हमारी अपनी व्यक्तिगत समस्याएं, हमारे अपने व्यक्तिगत विचार, महत्वाकांक्षाएं, पेशा और वे सभी चीजें, जिनसे हम अब तक आसक्त रहे हैं, हमारे दिमाग में कोंधने लगती हैं। और हम उस पल को भूलने लगते हैं जब हमें अपना आत्मसाक्षात्कार मिला था और हमने अपने आप से वह सब करने का वादा किया था।

तो नया दिन इसलिए आता है आपको याद दिलाने के लिए, जो कुछ भी हुआ, जो हुआ, वह समाप्त हो गया। आज फिर आपके लिए एक नया दिन आ गया है कि आप फिर से वादा करें।

फिर से अपनी यात्रा शुरू करो, जानो सूरज आ गया है, और अब तरोताजा हो जाओ, नयापन जीवन की ताजगी लाता है – और फिर आप नए दिन पर नए उत्साह के साथ, नए विचारों के साथ, नए वादों के साथ, नए संकल्पों के साथ और फिर से शुरू करते हैं सहज योग के बारे में अधिक समझ।

जिन लोगों को अब बोध हो गया है, उन्हें यह जानना होगा कि जैसे-जैसे आप परिपक्व होते हैं, वास्तव में क्या होता है। आप अपना नजरिया बदलने लगते हैं।

आज ही, किसी ने मुझसे एक सवाल पूछा, और आप सभी के साथ ऐसा ही होना चाहिए।

कुछ समय बाद नजरिया बदल जाता है, इतना बदल जाता है कि आप जान जाते हैं कि अब आप खोज नहीं रहे हैं, अब देना ही होगा।

तुम सिर्फ देने की बात करो, और खोजने की नहीं, क्योंकि तुमने उसे पूर्णतया पा लिया है।

जब तक घड़ा भर न जाए, उसमें पानी डाला जा सकता है, जब वह किनारे पर आ जाए, तो कहता है कि नहीं, कुछ भी न डालें। आप जितना अधिक इसमें डालेंगे, दूसरों के पास जाएगा। तो जब यह वृत्ति आपमें विकसित होती है, तो आपको पता होना चाहिए कि आप परिपक्व हो गए हैं।

यह रवैया परिपक्व होने की एकमात्र परीक्षा है। कोई प्रश्न नहीं, कोई समस्या नहीं, वास्तव में केवल यह विचार हमें घेरे रहता  है कि कैसे, दूसरों को दिव्य प्रेम के इस महान स्वर्गीय वातावरण में लाया जाए।

शुरुआत में व्यक्ति को भय रहते हैं, फिर वह सुरक्षा विकसित करता है। वह हर समय अपने आप को बंधन देने के लिए चिंतित है, अपने स्वयं के स्पंदनों की देखभाल करता है। फिर वह पकड़ता है, वह चिंतित होता है, वह कुछ लोगों से मिलना नहीं चाहता, वह दूसरों की निंदा करता है और कहता है कि “तुम ठीक नहीं हो” और वह कुछ लोगों को दूर कर देता है।

ये सब चीजें घटित होती हैं, धीरे-धीरे आप अपनी संतुष्टि से पूर्ण रूप से एक हो जाते हैं। और फिर सवाल शुरू होता है: मुझे इस व्यक्ति से कैसे प्यार करना चाहिए?

मुझे इस व्यक्ति को अपना प्यार कैसे देना चाहिए? मैं कैसे व्यक्त करूं कि वह भी उसी स्वर्गीय आनंद में कूद जाए?

तब ध्यान स्थिर हो जाता है। आप इधर-उधर चित्त नहीं डालते। आपका सारा चित्त इसी पर है। आप इस प्रकार सहज योग के गुरु बनते हैं।

यह सिद्धि तुममें से बहुतों में हुई है।

आपके पास उतार-चढ़ाव थे, इसमें कोई संदेह नहीं है, लेकिन वह सब भूल जाते हैं। और यह देखना इतना सुखद, इतना सुंदर है कि मैंने अपने जीवनकाल में आपके भीतर यह घटना घटित होते देखी है, कि आप इसके प्रति इतने जिम्मेदार महसूस करते हैं।

आप दूसरों को सहज योग के लिए बाध्य नहीं कर सकते। यह आपको पता होना चाहिए। इसमें किसी तरह की कोताही नहीं बरती जा सकती है, लेकिन सिर्फ आपका प्यार ही किसी और को मना सकता है।

आपका प्यार दूसरे व्यक्ति को यह महसूस कराए कि उसे भी उसी रास्ते पर चलना चाहिए जो प्यार के ऐसे खूबसूरत जीवन की ओर ले जाता है।

आपका उदाहरण ही इसे प्रदर्शित करेगा।

सारी प्राथमिकताएं बदल जाती हैं। सारा माहौल बदल जाता है। और तुम कुछ बहुत, बहुत अलग हो जाते हो। यदि कोई पूछे कि जब आप दीप को प्रकाशित करते हैं तो क्या होता है? तब यह प्रकाश देता है। इससे क्या होता है? जब तक यह प्रकाश नहीं दे रहा था तब तक समस्या थी। अब यह दूसरों को प्रकाश देने के लिए प्रबुद्ध है। लेकिन रोशनी शुरुआत में ऐसे ही चलती है।

तो जिन्हें बोध हो गया है उन्हें पता होना चाहिए कि ऐसा होगा। पहली चीज जो घटित होगी वह है शंकाएं कि आप इसमें बन जाते हैं। क्योंकि आप एक ऐसे समाज से ताल्लुक रखते हैं जो हर चीज पर संदेह करता है, खासकर विवेक पर। (हँसी, श्री माताजी हँसते हैं)

और तुम उस पर संदेह करने लगते हो, लेकिन शंका करके अथवा सोच कर आप को यह कभी प्राप्त नहीं हुआ। आपको यह अनायास ही मिला। आपको क्यों मिला? आपको यह इसलिए मिला है क्योंकि किसी ने आपसे बहुत प्यार किया है और दयालु रहा है। क्योंकि आपने अपने पिछले जन्मों में यह खोज की है, जब आपने बहुत सारे अच्छे कर्म किए हैं जिनका पुरस्कार दिया गया है। आपके चेक बैंक में कैश हो गए हैं। आप इसमें कैसे संदेह कर रहे हैं? और इसका मतलब है कि आप खुद पर शक कर रहे हैं, किसी और पर नहीं बल्कि खुद पर, क्योंकि आप विश्वास नहीं कर सकते कि आपको यह मिल गया है।

इसलिए संदेह की दूसरी यात्रा में न जाएं।

संदेह करने से तुम बहुत धीमे चलोगे। और कभी-कभी यह इस हद तक पहुंच जाता है कि मुझे आपकी शक्ति और आपकी क्षमता पर भी संदेह होने लगता है कि आप सहज योग में कितनी दूर जाने वाले हैं।

क्योंकि सहज योग फालतू लोगों का काम नहीं है। उन्हें एक बहुत, बहुत खास प्रकार का होना चाहिए। अगर वे साधारण लोग हैं तो वे कभी भी सहज योग नहीं अपना सकते।

वे थोड़ा ऊपर आएंगे फिर नीचे जाएंगे, वे फिर से ऊपर आएंगे और नीचे जाएंगे। लेकिन एक बार जब आप इसमें आ जाते हैं तो आपको वास्तव में बहुत ज्यादा परेशान नहीं होना पड़ता है – अगर आप इसका आनंद लेना शुरू कर देते हैं तो आप इसके साथ चलते रहेंगे, आप इसे त्याग नहीं सकते। क्योंकि वही सभी आनंद का स्रोत है।

तो आज का दिन आनंद का दिन है।

आइए हम खुश हों कि हमने अपने भीतर के अंधेरे को मार डाला है और दूसरों को प्रबुद्ध करने के लिए, दूसरों को ईश्वर के प्रेम का प्रकाश देने के लिए हमने अपनी रोशनी प्रस्तुत कर दी है।

परमात्मा आप सबको आशीर्वादित करें।

अब, आप क्या करना चाहेंगे? तुम मेरे पैर धोना चाहते हो या कुछ और?

योगी: हम… अगर आप पूजा करते हैं।

श्री माताजी : ठीक है।

योगी: यदि आप गणेश करते हैं।

श्री माताजी : अब जब आप मन्त्र और वह सब पहले बोलेंगे, तब वे भी लेंगे।

अब उनके… अब देखें… मैल्कम नहीं आया है, है न? मैल्कम, क्या आप पहले किसी पूजा के लिए आए थे? नहीं, मैल्कम नहीं आया है। यहाँ और कौन है? आपने कोई पूजा नहीं की है, है ना? आपने नहीं किया है। मैं तुमसे पूछ रही हूँ।