Powers Bestowed upon Sahaja Yogis

(भारत)

1980-01-27 Powers Bestowed Upon Sahaja Yogis & How To Maintain Them, Bordi, India, 33' Download subtitles: EN,IT,PL,PT,TRView subtitles:
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                        सहज योगीयों को प्रदत्त शक्तियां 

 बोर्डी (भारत)

 27 जनवरी, 1980

मैंने कल आपसे कहा था, कि हमें अपनी पहले से उपलब्ध शक्ति, और वे शक्तियाँ जो हमें मिल सकती हैं उनके बारे में जानना होगा, । सबसे पहले हमें यह जानना चाहिए कि हमें कौन सी शक्तियां मिली हैं, और हमें यह भी पता होना चाहिए कि हम उन शक्तियों को कैसे संरक्षित करने जा रहे हैं और कौन सी शक्तियां हम बहुत आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।

 पहली शक्ति जो आत्मसाक्षात्कार के बाद आपको मिलती है, वह पृथ्वी की सबसे बड़ी शक्ति है। यह श्री गणेश की शक्ति है। केवल वह ही यह काम कर सकते है जो आप लोग आज कर रहे हैं, और वह शक्ति कुंडलिनी को उठाने की है। अध्यात्म के इतिहास में अब तक किसी ने भी कुंडलिनी को इतने कम समय में नहीं उठाया है जितना आप लोग कर रहे हैं। यह आपकी उंगलियों के अधीन चलती है; यह बिल्कुल श्री गणेश की शक्ति है जो आपको दी गई है।

उस समय जब आप आत्मसाक्षात्कार दे रहे हों, भले ही आप अपने चक्र में से किसी एक में फंस गए हों, या आपको कोई समस्या हो, भले ही आप थोड़ा सा बाधित भी हो, भले ही आप इतने अच्छे सहज योगी न हों, भले ही आप माताजी के सामने इतने समर्पण नहीं कर रहे हैं, भले ही आपको सहज योग के बारे में अधिक समझदारी न हो, फिर भी कुंडलिनी आपकी उंगलियों के अधीन उठती है।

 गणेश की यह विशेषता स्वयं श्री गणेश ने आपको विश्वास दिलाने के लिए,आपके अंदर दी है; आपको यह विश्वास दिलाने के लिए कि आप कुंडलिनी उठा सकते हैं, लेकिन इस गलतफहमी को दिलाने के लिए नहीं कि ‘आप ‘ कुंडलिनी उठा रहे हैं।

यदि आप सहज योग में समर्पण किए बिना चलते चले जाते हैं, तो कुछ समय बाद आप इस शक्ति को बहुत तेजी से खो देंगे।

दूसरी शक्ति जो आपको मिली है की  – किसी की कुंडलिनी के उठने पर, आप इसे नोटिस कर सकते हैं कि, जब कुंडलिनी ऊपर उठती है, उस समय किसी भी तरह की कोई रुकावट नहीं होगी।

आसपास जो कुछ भी अवरोध हो सकते हैं – कहने के लिए,माना कि पास में ही अगले दरवाजे पर एक बाधित व्यक्ति मौजूद भी हो, वह उस समय आपको परेशान नहीं करेगा।आपके परिवार में कोई ऐसा एक नकारात्मक व्यक्ति हो सकता है, लेकिन अगर आप कुंडलिनी उठा रहे हैं, तो उस समय उसे शांत रखा जाएगा।

जिस समय आप कुंडलिनी पर अपना हाथ घुमा रहे हैं, चूँकि उस समय सबसे बड़ी शक्ति का आप उपयोग कर रहे हैं। मैं नहीं जानती की आप को स्वयं पर और आपके पास मौजूद शक्ति पर में कितनी श्रद्धा है। उस समय किसी के द्वारा आपके हाथ पर कोई बाधा नहीं होगी! यहां तक कि गलती से भी, कोई भी आपका हाथ नहीं पकड़ेगा या आपके हाथ को नहीं छूएगा।

दूसरी शक्ति, जो आपको कुंडलिनी उठाने के दौरान मिलती है की, जिस समय, जब आप अपनी कुंडलिनी उठा रहे होंगे, तो आप अपने अंदर स्थित दुसरे व्यक्तित्व का ध्यान पूरी तरह से एक चुंबक की तरह आकर्षित करेंगे, जिससे आपको यह समझना चाहिए कि जब भी आपका मन करे आप अपनी कुंडलिनी उठा सकते हैं। जब आप कुंडलिनी उठा रहे होते हैं, तो मान लेते हैं कि उस जगह बहुत शोर भी हो रहा हो, सभी तरह की समस्याएं चल रही हों| – जैसे मान लीजिए आप ट्रेन में जा रहे हैं,  और आप किसी की कुंडलिनी उठा रहे हों उस समय ट्रेन का शोर भी हो रहा है, या ऐसी कोई चीज हो रही है – लेकिन उस समय आपका ध्यान विचलित नही होगा, साथ ही जो व्यक्ति आप से आत्मसाक्षात्कार ले रहा है, उस समय वह भी बाहर की चीजों से आकर्षित नहीं होगा| 

या – इसका मतलब है कि आप किसी भी समय बोध दे सकते हैं, क्योंकि उस विशेष समय पर आप उस कमल में स्थित होते हैं जो बंद है।

कुण्डलिनी जागृति (जागरण) के समय आपको जो दूसरी शक्ति मिली है, वह यह है कि आपके भीतर कोई भी घटिया भावना नहीं उठेगी। यहां तक कि अगर आप स्वयं एक बाधित व्यक्ति भी हों, तो भी कुंडलिनी जागृति के समय आप को उस व्यक्ति के बारे में जिसे आप आत्मसाक्षात्कार दे रहे हैं  घटिया या अशुद्ध भावनाएं नहीं होंगी।

शायद इस के पहले अथवा बाद में ऐसा होता भी हो, तो भी जब आप आत्मसाक्षात्कार दे रहे हों उस दौरान ऐसा नहीं होगा , ये गंदी भावनाएं स्वतः आपके पास नहीं आएंगी। स्वचालित रूप से यह काम करेगा,आपको अपने दिमाग को रोकना नहीं पड़ेगा। जब आप आत्मसाक्षात्कार दे रहे हों, आप पूरी तरह से संतुष्ट होंगे, भले ही आप भूखे हों, आपको उस समय भूख या किसी शारीरिक ज़रूरत का एहसास नहीं होगा ।

किसी भी प्रकार की कोई व्याकुलता नहीं होगी; अपने हाथ उठाते हुए आप कोई भी अभद्र कार्य नहीं करेंगे ,चूँकि आप गरिमा से आशिर्वादित हैं |

 कुंडलिनी उठाते हुए स्वतः ही आप कभी हंसी, मजाक नहीं करेंगे ना ही आप छिछोरापन करेंगे | 

आप कोशिश कर के देखें: यह काम नहीं करता है|

ये आपकी सहायक शक्तियाँ हैं। मेरे द्वारा बताई गई ये सभी पांच शक्तियां हजारों अन्य शक्तियों में से कुछ हैं, लेकिन ये श्री गणेश की पांच शक्तियां हैं।

यदि आप श्री गणेश का अनुसरण करने का प्रयास करते हैं, तो इन शक्तियों को बनाए रखा जा सकता है। उनकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि वह किसी भगवान या अन्य किसी और को  अपनी माँ से ऊँचा नहीं मानता है। माता के प्रति पूर्ण समर्पण और पूर्ण आज्ञापालन।

मेरा मतलब है, वह उस प्रकार की आज्ञाकारिता से बने है। माता के प्रति पूर्ण प्रेम और स्नेह। वह बहस नहीं करता है, वह सवाल नहीं करता है, वह ऐसा कुछ भी नहीं करता है, और इसीलिए यह शक्तियां उसमे अधिकतम हैं । यदि आप सोचते हैं की मुझ से बहस करके आप प्राप्त कर सकते हैं, तो दुःख के साथ कहना पड़ता है की आप गलती कर रहे हैं। आपको मुझे प्रसन्न रखना है।

यहां तक कि गणेश भी मुझे प्रसन्न रखने के लिए हर पल कोशिश करते हैं। एक तथ्य है। इसलिए, कृपया मुझे अप्रसन्न करने का प्रयास न करें। मैं शायद कुछ नहीं कहूँ , क्योंकि बाहरी तौर पर मैं कुछ भी नहीं कहती, लेकिन आपकी शक्तियां कम हो जाएंगी। गणेश की पांचवीं शक्ति विवेक की शक्ति है और वह जो कुछ भी जानते है वह उसे चित्रित कर सकते है और लिख सकते है। वह शक्ति भी आपको मिल गई है। जब आप कुंडलिनी उठा रहे होते हैं, तो आप व्यक्ति से इस तरह से बात करते हैं कि व्यक्ति विवेकवान हो जाता है। और आप उससे केवल वही बात करते हैं जो सुबुद्धि  है और आप स्वतः उसे वो आंकड़े लिखते या दिखाते हैं जो सही हैं।

यहां तक कि अगर आपको अपने आंकड़े याद नहीं हैं, तो भी वे सही निकलेंगे। अब आदि शक्ति की तीन शक्तियाँ आप में काम करती हैं।

यह आपको अपनी इच्छाओं के बारे में दूर दृष्टी और स्पष्ट विचार देता है। देखिए, यदि आपकी इच्छाएँ उचित हैं, तो आपकी सभी इच्छाएँ इस शक्ति से पूरी होती हैं – आपकी सभी इच्छाएँ, सभी!

लेकिन पहले,व्यक्ति को पता होना चाहिए, कि आपकी इच्छाएं उचित होनी चाहिए। उदाहरण के लिए, अब सहज योगी अपना आश्रम चाहते हैं। वे आश्रम क्यों चाहते हैं? कितने लोग आश्रम में रहने को तैयार हैं? कितने लोग अपने बच्चों को आश्रम में ले जा रहे हैं? कितने लोग अपने विशिष्ट घरों को देने जा रहे हैं और आश्रम में अपनी पत्नियों या पति को जो सहज योगी नहीं हैं ले जा रहे हैं? और उनमें से कितने सिर्फ इसलिए आश्रम चाहते हैं क्योंकि उनके पास सस्ते में रहने के लिए कोई जगह होगी? आश्रम पाने का उद्देश्य क्या है? क्या आपको इसका यकीन है? क्या आप यह पता लगा पाए हैं कि आप आश्रम क्यों चाहते हैं? अगर आपकी इच्छाएँ स्पष्ट हैं, तो वे पूरी होंगी, बिल्कुल सौ प्रतिशत। वह शक्ति आप अपने दिल पर केवल बंधन लगाकर हासिल कर सकते हैं। आपकी जो भी इच्छा है, आप उसे कहें और उसे अपने दिल में रख लें। मतलब आप अपने दिल से पूछ रहे हैं। सात बार, आप इसे केवल एक बंधन देते हैं, और काम पूरा हो जाएगा। लेकिन इसे निरर्थक चीजों के लिए उपयोग न करें, क्योंकि यदि आप इसे निरर्थक चीजों के लिए उपयोग करते हैं, तो यह शक्ति चली जाएगी। उपयोग कुछ विशेष के लिए, उच्च स्तर के लिए करें। अब, अपनी दूसरी शक्ति से आप स्वतः उन लोगों से मिलेंगे जो ज्ञानी हैं और जो सहज हैं। आप ऐसी किताबें भी पढ़ेंगे जो सहज हैं। यहां तक कि अगर आपको कुछ अन्य पुस्तकों को पढ़ना है, तो आप यह जान पाएंगे कि यह सही है या नहीं। और उसके द्वारा तुम अपने बुद्धि को समृद्ध करोगे। जब आप बोलना शुरू करेंगे, तो लोग चकित हो जाएंगे। जो कभी नहीं बोलते थे वे बहुत अच्छा बोलने लगेंगे।

जिन लोगों ने कभी कविता नहीं जानी, वे कविता लिख रहे होंगे। कला के क्षेत्र में भी बहुत कुछ होगा। जो लोग कला नहीं जानते थे, वे कला में अद्भुत रूप से कार्य करेंगे। लेकिन पहली शक्ति से, जो आदि शक्ति की शक्ति है, या महाकाली की शक्ति है, आपको आसपास के सभी लोगों का प्यार मिलता है। हर कोई चुंबकीय रूप से आपकी ओर आकर्षित होगा। और आपको हमेशा महान आत्माओं और देवदूतों द्वारा मार्ग दर्शन मिल जाएगा। यदि आप किसी से भी मिलते हैं जो किसी दुर्घटना से संभावित है, तो आप उस आदमी को उस रास्ते से जाने से रोकेंगे। अगर आप किसी दुर्घटना में हैं, तो हर कोई बच जाएगा। आपके पास शायद ही कभी कोई दुर्घटना होगी – यदि होती भी है, तो आपको ज्यादा चोट नहीं पहुंचेगी। गजब !

ये सभी शक्तियाँ आपके पास आती हैं क्योंकि आप आदि शक्ति की संतान हैं। सूक्ष्म, दैवीय शक्ति का संपूर्ण ब्रह्मांड व्यक्तिगत रूप से आपकी देखभाल कर रहा है। आप सभी चिह्नित हैं, चिन्ह आप पर है, आप चिह्न को धारण किये हैं, और वे आपकी देखरेख कर रहे हैं।

तो यह इच्छा शक्ति ही वह शक्ति है जो आपकी रक्षा करती है। हर संभव तरीके से  यह आपका मार्गदर्शन करती है, यह आपकी देखभाल करती है, यह आपको शांति प्रदान करती है। और यह शक्ति आपको सहज योग में जबरदस्त विश्वास दिलाती है। अंतत: आप सहज योग के आनंद से भर जाते हैं, और आप सहज योग के अलावा और कुछ नहीं करते। आपके लिए, सब कुछ सहज योग है।

लेकिन कभी-कभी, आप जानते हैं, हम अपने अहंकार के साथ जुड़ जाते हैं और हमें लगता है कि हमारा अहंकार सहज योग है, कई बार मैंने ऐसा देखा है।लोग इसे पसंद करते हैं क्योंकि यह उनके अहंकार से जुड़ा है। सहज को उससे अलग किया जाना चाहिए और हमारे जीवन में लाया जाना चाहिए।

हमारे दिन-प्रतिदिन के जीवन में, जब हम एक-दूसरे से मिल रहे होते हैं, जब हम एक-दूसरे से बात कर रहे होते हैं, तो उस आनंद को ऐसे देखना चाहिए, जैसे एक लहर का  गिरना और दूसरी का उठना, दूसरी का गिरना, जैसा कि आप समुद्र में देखते हैं।

एक-दूसरे के साथ रहना।

यह शक्ति आपके भीतर है और यह हर समय काम कर रही है जिसके कारण से आपको प्यार मिलता है और आपकी देखभाल की जाती है।

मध्य की शक्ति द्वारा, मैंने आपको बताया है, आप लोगों को बोध देंगे। आप उनके चक्रों को बता पाएंगे। आप अपने चक्रों को ठीक करने में सक्षम होंगे यह सब आपकी मध्य नाड़ी की शक्ति द्वारा किया गया है।और इस शक्ति के कारण ही आप के पास  इच्छाशक्ति से भी बहुत बड़ी शक्ति है। जैसा आप तय करते हैं वैसे आप बन जाते है, आप होंगे। यदि आप एक खुशहाल व्यक्ति बनना चाहते हैं तो आप होंगे। परिवर्तन कर पाना आपके हाथ में होगा। अगर आप मध्य की महालक्ष्मी शक्ति का उपयोग करें तो, आप बिना किसी कठिनाई के अपने आप को बदल सकते हैं, ।

बेशक, आपको बेहतर नौकरियां, बेहतर पैसा, संभावनाएं मिलेंगी, लेकिन बहुत अधिक नहीं। इतना है, कि आप इसके बारे में बहुत अधिक संतुष्ट महसूस करेंगे, ताकि आपका चित्त मध्य में अधिक रहे। बाद में,महालक्ष्मी की अन्य सभी शक्तियाँ भी आपको प्राप्त होंगी। महालक्ष्मी की कई अन्य शक्तियां हैं जिन्हें आपको प्राप्त करना है, लेकिन इसके लिए आपकी सुषुम्ना को बहुत साफ करना होगा। उसके लिए आपको जीवन में निर्लिप्तता विकसित करना होगी। जब तक आप वैराग्य का विकास नहीं करते हैं, तब तक महालक्ष्मी की गहरी शक्तियां सामने नहीं आती हैं। उदाहरण के लिए, यहां तक कि छोटी चीजों में भी, जैसे कि मेरे साथ संबंध रखना, यह भी निर्लिप्त होना चाहिए।

यहां तक कि आरती करने या कुछ करने, आगे आने के लिए कि, “मुझे करना है।”

यहां तक कि मुझे रात्रि भोज या अन्य चीज के लिए आमंत्रित करने में, कि “मुझे यह करना चाहिए,” भी एक लिप्तता है। अगर यह होता है तो अच्छा और नहीं तो भी अच्छा।

आपको कहना चाहिए कि, “माँ, आप आओ।” लेकिन अगर मैं नहीं आ सकती हूं, तो थोड़ी सी भी भावना और नाखुश नहीं होना चाहिए, लेकिन इसे उसी का एक अंग के रूप में स्वीकार करना चाहिए।

 आपकी महालक्ष्मी शक्ति के लिए इस निर्लिप्तता को विकसित किया जाना है। तब तुम इसके परे हो जाते हो। आपकी लय पूरी तरह से सही तरीके से कार्यान्वित होगी  –  आपको समय नहीं देखना होगा-आपको इसकी आवश्यकता नहीं है। ऐसा समय होगा जो आपका अपना होगा। जब भी आप जाएंगे, आप पाएंगे कि सब कुछ अच्छी तरह कार्यान्वित है। तो, समय की इस शक्ति को संरक्षित करने की खातिर, आपको बहुत जल्दी नहीं करना चाहिए, आपको घड़ियों के दास नहीं होना चाहिए। बस होने दो।किसी भी बात को लेकर कोई जिद न रखें। बस कोई फर्क नहीं पड़ता: अगर यह दस बजे है, तो ठीक है; यदि नहीं, यदि दस के ऊपर पंद्रह मिनट, कोई फर्क नहीं पड़ता। बस अपने आप को सहज योग के प्रवाह के साथ बहने दें। अगर यह अच्छी तरह से काम करता है तो ठीक और अच्छी तरह से काम नहीं करता है, तो भी ठीक है। बस इसे ऐसे ही रखें।

तब  आपको केवल आश्चर्य होगा कि यह महालक्ष्मी शक्ति कैसे सुधरती है, और इस शक्ति का आशीर्वाद जबरदस्त है। जैसे  तुम्हारे भीतर एक हजार एक शक्तियां पहले से ही जागृत हैं।  उदाहरण के लिए,विशुद्धि चक्र पर आपके पास सोलह हजार शक्तियाँ हैं, और जैसे आप हैं, ये सभी सोलह हज़ार शक्तियाँ आप में जागृत हैं,। सोलह हजार शक्तियाँ आप में जागृत हैं जैसे आप आज हैं। लेकिन जब आप बोलते हैं तो आप यह नहीं समझते कि जब आप बोल रहे हैं तो आप सहज योगी हैं, इन सभी शक्तियों के साथ आप बोल रहे हैं। जब आप खाते हैं तो आप यह नहीं समझते हैं कि यह जीभ सहज योगी की है; आपको किसी भी चीज की चाहत नहीं होना चाहिए।

जैसे अगर किसी को चाय पसंद है, तो वह लेता जाएगा पंद्रह कप तक। यह अच्छा नहीं है। यदि वह एक प्रकार के भोजन का शौकीन है, तो वह दूसरा भोजन नहीं लेता। हर समय भोजन के बारे में बहुत अधिक सोचना, भोजन माँगना और हर समय भोजन का आयोजन करना, यह विशुद्धि को बहुत खराब करता है।

फिर किसी के बारे में ख़राब बात करना, मुझसे किसी के बारे में शिकायत करना, आपकी विशुद्धी को बिगाड़ देगा।

अगर कुछ समझदारी की बात है, अगर मैं पूछती हूं, तो ठीक है, लेकिन हर समय एक-दूसरे के बारे में बात करने से आपका विशुद्धी बिगड़ जाएगा।

यदि संभव हो, तो हमेशा दूसरों के बारे में अच्छी बात करने की कोशिश करें । किसी दूसरे व्यक्ति के बारे में अच्छा बताने से आप अपनी और दूसरे व्यक्ति की मदद करेंगे। उदाहरण के लिए, एक मिस्टर एक्स आते है और मुझे मिस्टर वाई के खिलाफ कुछ बताते है – मैं सिर्फ स्तब्ध रह जाती हूं, क्योंकि मिस्टर वाई आ चुके हैं और पहले ही मुझसे कह चुके हैं कि मिस्टर एक्स एक अच्छा आदमी है। इसलिए मैं मिस्टर एक्स से कहती हूं, “आप कैसे कहते हैं ऐसा मिस्टर वाई के बारे में, क्योंकि वह आपकी प्रशंसा कर रहे थे?” तो वह पूरी तरह से अवाक् रह जाता है। जब आप दूसरों को आंकते हो, तो आपको पता होना चाहिए कि आपको भगवान द्वारा आंका जाता है। अगर आप दूसरों को जज कर रहे हैं, तो भगवान ने भी आपको जज किया है।, आप खुद को और दूसरों को जो भी नंबर देते हैं, ईश्वर अपने फैसले में उन पर बिलकुल भी ध्यान नहीं देने वाले हैं । यह उनका निर्णय है जो यह तय करने वाला है कि आप कहाँ तक कैसे  हैं।

जो लोग आज सहज योग में हैं, उनमें से कुछ ऐसे भी हो सकते हैं जो सोचते हैं कि वे महान सहज योगी हैं, बड़े लोग हैं – लेकिन हो सकता है कि वे नहीं हैं। और जो लोग यह नहीं सोचते हैं कि वे किसी भी तरह ऊँचे हैं, वे अपनी शक्ति को बढ़ाना और सुधारना चाहते हैं, वे ऐसे लोग हो सकते हैं जो बहुत ऊंचे स्थानों पर स्थित होंगे। इसलिए, इन परिस्थितियों में किसी को घमंड नहीं करना चाहिए और अपने बारे में गलत, झूठे अनुमान नहीं लगाना चाहिए। यही वह तरीका है जिससे आप अपनी विशुद्धी की शक्तियों को बेहतर बना सकते हैं। यदि आप एक-दूसरे से दूसरों के बारे में बुरी बाते करना शुरू करते हैं – तो मैंने यह भी देखा है कि लोग मेरे बारे में चर्चा करना शुरू करते हैं, और बहुत ही अजीब तरीके से वे ऐसा करते हैं।मुझे लगता है कि समस्या से निपटने का सबसे अच्छा तरीका है की ,आप मेरे बारे में बात नहीं करें, और अगर आपको बोलना ही हो, तो जान लें कि इसे पूरी तरह से सकारात्मक होना चाहिए। अन्यथा आप खुद को नुकसान पहुंचा रहे हैं और आप दूसरों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

फिर आप मुझे इसके लिए दोषी नहीं माने।

इसलिए आपके विशुद्धि चक्र की समस्याएं बढ़ती जा रही हैं, और वे बढ़ती जाती हैं। विशेष रूप से जब आप खुद को भ्रमित करने की कोशिश करते हैं और अपने आप से झगड़ा करते हैं और सोचते हैं कि, आप देखिए, मेरे आने से सहज योग को फायदा हुआ है – आपकी विशुद्धि पकड़ जाती हैं। आपने फायदा लिया है,सहज योग ने नहीं। सहज योग स्वयं शासित है, इसे आपकी मदद की जरूरत नहीं है।

यदि सत्य है, तो सत्य को स्वीकार करने से आप का उत्थान हैं, आपका पद ऊपर चला गया है, सत्य की स्थिति नहीं बदलती।

तो आपके दिमाग से यह विचार एकदम से चला जाना चाहिए – कि आपने सहज योग के उपर कोई उपकार किया है, या आपने ईश्वर के पास आ कर कोई उपकार किया है । यह विचार चले जाना चाहिए।

यह निश्चित रूप से आपके सिर को फिर से नीचा कर देगा, और आपकी कुंडलिनी फिर से अपनी पुरानी स्थिति में चली जाएगी।

तो कई लोगों के अनुसार, अपने विशुद्धी को ठीक रखना भी आसान नहीं है। लेकिन सबसे आसान तब है, जब आप अपने आप को साक्षी की स्थिति में रखते हैं। और यह संभव है यदि आत्मसाक्षात्कार के बाद आप ऐसी आदत विकसित करें की, सब कुछ जो आप करते हैं या चाहते हैं या सामना करते हैं उसे निर्विचारिता में करें,निर्विचार जागरूकता से| यदि आप उस आदत को शुरू करते हैं, तो आप चकित हो जाएंगे – आपकी साक्षी स्थिति में सुधार होगा और आप अपने अस्तित्व में ऊँचे उठेंगे।

यह समझना बहुत महत्वपूर्ण है कि रूपांतरण के बिना, आपका कोई अर्थ नहीं है। तुम जो भी रहे हो, अनुपयोगी रहे हो, किसी काम के नहीं रहे। तुम थोड़े भी रूपांतरित हुए हो तो , तुम कुछ उपयोग के हो। इसलिए जो कुछ भी तुम पहले थे, तुम उसके साथ अपनी पहचान मत बनाओ । लेकिन आपको जो भी होना है, आप वह बनने की कोशिश करेंगे।

और यह शक्ति तुम्हें मिल गई है, कि तुम जो चाहोगे, वही तुम हो जाओगे। लेकिन कुछ लोग इतने अजीब होते हैं कि अगर आप उनसे पूछें, “आप क्या बनना चाहते हैं?” वे कहते हैं कि, “मैं एक गधा बनना चाहता हूँ”। ऐसे सभी सनकी और मूर्ख लोग सहज योग के लिए अच्छे नहीं हैं, आप सभी को हमेशा पता होना चाहिए।

ऐसे मूर्ख लोगों के पीछे पड़ने का कोई फायदा नहीं है जिनके पास कोई समझ नहीं है, और जो इस तरह के गए-बीते मामले हैं। वे बाद में वापस आएंगे। लेकिन अपना ध्यान सकारात्मकता पर लगाएं न कि नकारात्मकता पर।

आम तौर पर मैंने हमेशा नकारात्मक लोगों को अन्य नकारात्मक लोगों की ओर झुकते हुए  देखा है। यदि कोई नकारात्मक व्यक्ति खड़ा है, तो एक व्यक्ति जो नकारात्मक है वह तुरंत जाकर उस व्यक्ति से बात करेगा, उस व्यक्ति के बारे में पता लगाएगा, उसे उस व्यक्ति के प्रति सहानुभूति होगी; वह उस व्यक्ति की तरह होगा; हर तरह की चीजें होंगी। और यह पहला संकेत है कि, ऐसा व्यक्ति पूरी तरह से नकारात्मक पकड़ का शिकार है । ठीक है। अब अगर आपने उस तरह का काम किया है, जिससे आप बाधित है या इन नकारात्मक व्यक्ति से प्रभावित है तो, आप बाहर हैं। या तो आप समुद्र के अंदर में हैं या उससे बाहर हैं। आप कैसे दोनों जगह हो सकते हैं? आप बेहतर तरीके से वहां से निकल जाएंगे और बाकी को बख्श देंगे।

लेकिन अगर आप समुद्र में रहना चाहते हैं, तो आपको पता होना चाहिए कि आपको तैरना जानना होगा, और आपको तैराकी में गर्व करना होगा। अन्यथा इसका कोई अर्थ नहीं है, इससे कोई मदद नहीं है।

अब आपको चिकित्सा की शक्ति मिल गई है, आप जानते हैं कि; आप लोगों का इलाज कर सकते हैं। लेकिन उस झंझट में मत पड़ना, क्योंकि वहां महामाया अपनी भूमिका करती है! यदि आप – अगर मुझे लगता है कि, आप अपने मस्तिष्क में यह विचार कर रहे हैं कि, आप आपके भाई-भाभी, ससुर, सास के विशेष मामले में बहुत अधिक शामिल हो रहे हैं, तो मैं ‘इसे रोक दूंगी, या तुम मुसीबत में पड़ जाओगे। यदि आप इसमें से पैसा कमाना शुरू करते हैं, तो मैं इसे रोक दूंगी । मैं कई ऐसे काम करूंगी जिनके द्वारा मैं इसे रोकूंगी। और तब आप में वह शक्ति नहीं हो सकती। इसके विपरीत, आप काफी पीड़ित होंगे, क्योंकि आप नहीं जानते कि इन सभी बुरी चीजों से खुद को कैसे बचाएं। इसलिए, मेरा आपसे अनुरोध है कि दूसरों को ठीक करने से पहले, आप पहले खुद को पूरी तरह से ठीक कर लें, और अन्य लोगों का इलाज करने के लिए आप मेरी तस्वीरों का उपयोग भी कर सकते हैं।

लेकिन आपको पता होना चाहिए कि इंसानों में एक बहुत ही सूक्ष्म चीज होती है जो वे चाहते हैं कि हर कोई कहे, “ओह, आप महान हैं, आपने बहुत से लोगों को ठीक किया है!” – बहुत सूक्ष्म तरीके से, बहुत सूक्ष्म आधार पर।

तो, इन सभी चीजों के बारे में किसी को विचार नहीं करना चाहिए। इसके बारे में पूरी तरह से निर्लिप्त रहना चाहिए।

क्योंकि एक दो दिन के लिए, या साल भर, लोग आपके पास आयेंगे, “इस आदमी को ठीक करो, उस आदमी को ठीक करो।” और फिर आप पाएंगे कि आपको कुछ भी नहीं मिला है, वे सभी बुलबुले थे, सभी खो गए और पूरी तरह से हवा में गायब हो गए। इसलिए, किसी को ठीक न करें। यदि आपको लोगों को ठीक करना है, तो आप उन्हें फोटो दें और उनको स्वयं पर काम करने के लिए कहें। आपको मेरी तस्वीर को संभालने और दूसरों को देने की शक्ति मिली है।

आपके पास बहुत सी शक्तियां हैं जो आम तौर पर आम लोगों के पास नहीं होती हैं क्योंकि मैं उन्हें कई चीजें नहीं बताती हूं जो मैं आपको बताती हूं। और इस प्रकार आप एक बहुत ही दुर्लभ गुण वाले व्यक्ति और एक दुर्लभ आशीर्वाद पाये हुए व्यक्ति हैं। अब यह लिख लो कि आपको कितनी शक्तियाँ मिली हैं, घर जाओ, और तुम एक पूरी किताब लिखोगे! मुझसे यह वचन ले लो।

परमात्मा आप सबको आशीर्वाद दें।

अपनी सभी शक्तियों को संरक्षित करने का प्रयास करें।

अपनी इज्जत करो। आप एक ऐसा दीपक है जो एक ऐसी ज्योति जला रहे हैं जो दूसरों के मन में प्रकाश डालती है।

यह एक बहुत बड़ी बात है: यहां तक कि ऐसा एक व्यक्ति लाखों और अरबों लोगों में पैदा हुआ था, और अब यहां हमारे पास आपके जैसे बहुत सारे हैं। लेकिन यदि आप  गुणवत्ता के लिहाज से विकसित नहीं होते हैं तो यह एक निराशाजनक बात है। इसलिए आपको अपनी गुणवत्ता में सुधार करना चाहिए।

आप सभी को व्यक्तिगत रूप से अपनी गुणवत्ता में सुधार करना होगा। दूसरों की आलोचना नहीं, दूसरों की ओर देखना नहीं , लेकिन व्यक्तिगत रूप से आपको अपनी क्षमताओं को समझना चाहिए और आपने दूसरों को कितना दिया है, और आपको  जितना कुछ मिला है उसमे से वास्तव में आपने कितना अभिव्यक्त किया है।

आप सूर्य पर, चंद्रमा पर, ज्वार पर और समुद्र पर और उन सभी चीजों पर नियंत्रण रखते हैं – जो आपके पास हैं। लेकिन इसके लिए आपको कुछ और करना होगा, जो मैं आपको किसी अन्य समय बताऊंगी। अभी मैं नहीं चाहती कि आप इन सब चीजों को नियंत्रित करें, और एक पहाड़ी की चोटी पर बैठ जाएं और दिखावा करना शुरू कर दें ! बेहतर यह है कि आप इसे पहले इंसानों पर कार्यान्वित करें, और फिर मैं आपको ये सब प्रदान करुँगी – मैं आपको बताउंगी।

आप पहले से ही इसे जागृत कर चुके हैं, लेकिन मैंने आपको तरकीब नहीं बताई है कि यह कैसे करना है।

इसलिए सबसे अच्छा है, इसे मेरे पास रखना (हँसी)।

परमात्मा आप सबको आशीर्वाद दें।