Seminar for the new Sahaja yogis Day 1

Cowasji Jehangir Hall, मुंबई (भारत)

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          नए सहज योगियों के लिए सेमिनार 

बोरडी शिबिर, महाराष्ट्र, भारत,

 28 जनवरी 1980,

मुझे बताया गया कि मुझे अंग्रेजी भाषा में सभा को संबोधित करना चाहिए। मुझे पता है कि अगर मैं आपको अंग्रेजी में संबोधित करती हूं तो यह कुछ लोगों के लिए ठीक होगा।मुझे लगता है कि हमारे लिए यह सोचने का समय है कि भगवान ने इस खूबसूरत प्राणी, इन्सान को क्यों बनाया है। उन्होंने अमीबा अवस्था से हमें इसे विकसित करने के लिए इतनी परेशानी क्यों उठाई? हमने हर चीज को बहुत हलके में लिया ,यहाँ तक की आधुनिक समय में परमात्मा की बात करना भी, असंभव है, क्योंकि बुद्धिजीवियों के अनुसार, वह अस्तित्व में ही नहीं है। वे जो चाहें कह सकते हैं, लेकिन वह है, और बिलकुल ऐसा है। अब समय आ गया है, सबसे पहले, यह जानने के लिए कि हम यहाँ क्यों हैं? हमारी पूर्ण संतुष्टि क्या है? क्या हम इस दुनिया में सिर्फ पैदा होने के लिए आए हैं, अपना खाना खाने, बच्चे पैदा करने, उनके लिए पैसा कमाने और फिर मर जाने के लिए आए हैं? या क्या कोई खास वजह है कि ईश्वर हमसे इतना प्यार करता था, कि उसने इंसानों की एक नई दुनिया बनाई? यह भी समय आ गया है कि हमें पता चले कि ईश्वर है और उसकी प्रेम की शक्ति विद्यमान है, और न केवल यह, बल्कि वह संगठित करता है, समन्वय करता है, गतिशील है, वह प्रेम करता है और अपने प्रेम में वह हमें मनुष्य के लिए नियोजित उच्चतम परमात्मा का राज्य देना चाहता है। आइए हम अपनी कुंठाओं, उथल-पुथल, और हमारी तथाकथित राजनीतिक, आर्थिक समस्याओं को भूल जाएं, क्योंकि वे वास्तविक नहीं हैं। यह केवल एक मृगतृष्णा है जिसके पीछे हम भाग रहे हैं, हम ऐसे लोग हैं जिन्होंने यह मकड़जाल को बनाया है और इसमें उलझे हुए हैं और जीवन के बारे में चिंतित हैं। परमात्मा, परम शक्तिशाली के लिए चिंता करने की कोई बात नहीं है, वह सब पराक्रमी है, और वह आपको आनंद और प्रसन्नता का उपहार देने के लिए उत्सुक है।

अगर हम बैठ कर समझने की कोशिश करते हैं, तो हम जानेंगे कि ईश्वर ने हमें एक इंसान के रूप में बनाया है, जिसके बारे में हम कुछ भी नहीं जानते हैं। हमें नहीं पता था कि हम बंदरों से इस अवस्था तक कैसे बने। हमें इस बात का कोई अंदाजा नहीं है कि हमें इंसान का यह महान व्यक्तित्व कब मिला। एक इंसान बनने के लिए हमने क्या किया? हमें यह सरल प्रश्न स्वयं से पूछना चाहिए। इतनी आसानी से सांस लेने के लिए ‘हम’ करते क्या हैं? जब हमारा दिल नियमित रूप से धड़कता है तो ‘हम’ क्या करते हैं? कैसे यह लय और चाल करता है! इस तरह के सुंदर शरीर को प्राप्त करने के लिए हमने क्या किया है जो स्वयं काम करता है? आपने अब तक कुछ नहीं किया है। सबसे अधिक हम जो कर सकते हैं वह मृत कार्य है, जैसे हम मृत पत्थरों से एक इमारत बना सकते हैं, या यदि पेड़ मर जाता है तो हम एक अच्छा, सुंदर फर्नीचर बना सकते हैं। लेकिन क्या हमने अब तक जीवित कुछ भी किया है कि हम इतने गर्वित हैं कि हम उस शक्ति का खंडन करते हैं जो जीवन का निर्माण करती है? हजारों फूलों को हर रोज फलों में परिवर्तित कर दिया जाता है, और मैं हजारों कह रही हूं क्योंकि इसका कोई शब्द नहीं है, यह अनंत है। जब यह शक्ति इतनी बारीकी से, असीम रूप से और इतने विस्तार से काम कर रही है, उदाहरण के लिए यदि आपके पास एक आम का पेड़ है, तो आपको केवल एक आम का फल मिलेगा। यदि आपके पास गुलाब की झाड़ी है, तो आपको केवल गुलाब ही मिलेंगे। सब कुछ ठीक से प्रबंधित किया जाता है, सब कुछ इतनी खूबसूरती से किया जाता है। आपको इस धरती माता पर रखा गया है, जो इतनी जबरदस्त गति से आगे बढ़ रही है, और फिर भी आप बस वहां हैं, कोई बात नहीं। ये सब बातें, वे कैसे हो रही हैं? हम सामना नहीं करना चाहते हैं। हम वास्तविकता का सामना नहीं करना चाहते हैं। शायद, हम सोचते हैं कि वास्तविकता समझ के बाहर होगी। लेकिन अब समय आ गया है कि हम वास्तविकता को जान लें क्योंकि यह सबसे खूबसूरत चीज है, और यह कि वास्तविकता और सच्चाई बहुत ही सामान्य चीज है।

सच्चाई यह है कि भगवान ने आप सभी को अपनी शक्ति आपके सामने प्रकट करने के लिए बनाया है। जैसे हमने अपनी आवाज़ प्रसारित करने के लिए इस यंत्र(माइक्रोफोन) को बनाया है, उसी तरह से, भगवान ने आपको इतने सुंदर तरीके से बनाया है कि आप अपने साधन के माध्यम से उनकी शक्ति को प्रकट कर सकते हैं। लेकिन इस यंत्र (माइक्रोफोन)और इस मानवीय उपकरण में केवल यही अंतर है कि आप जागरूक हैं, कि आप सब कुछ जानते हैं, कि आप उस शक्ति को समझने में सक्षम हैं, जो आपके और उसके प्रकटन के माध्यम से प्रवाहित, और प्रयोग हो रही है। और इसका ठहराव तथा, इसका आनंद।

यह विभिन्न शास्त्रों में बताया गया है, विशेष रूप से हमारे देश में, जो ईश्वर के सबसे सुंदर वातावरण के सबसे बड़े आशीर्वाद से संपन्न है। हमें इस देश में रहते समय एहसास नहीं है कि अन्य देशों ने अपने वातावरण में रहने के लिए कितनी मुश्किलों का सामना किया है। कहते हैं, अगर आपको लंदन में रहना है, तो आपको पता होना चाहिए कि आपके पास एक बहुत बड़ी आय होना चाहिए, क्योंकि यह बहुत ठंडा है, आपके पास काम से कम एक घर ऐसा चाहिए जो केंद्रीय रूप से -गर्म हो। यह देश विशेष रूप से एक बहुत ही सरल जीवन के लिए बनाया गया है, प्रकृति के साथ किसी भी मुठभेड़ के बिना। हमने देखा है कि हजारों साल पहले, हमारे इस महान देश में, कई महान संत थे, जो जंगल में चले गए, क्योंकि इस देश में आप बहुत कम भोजन के साथ जंगल में रह सकते हैं,  इस शरीर को नियंत्रित करने वाली अंतर्निहित धाराओं के बारे में पता लगाने के लिए। जबकि पश्चिम में,यहां तक कि वहां रहने के लिए भी एक समस्या थी, सबसे पहले, लोग बाहर की ओर जाते थे, अपने घरों को ठीक से पूरा करने के लिए।  और फिर वे विज्ञान जैसी चीजो के द्वारा बाहर गए, यह देखने के लिए कि वे पदार्थों से किस प्रकार सुविधा जुटा सकते हैं, भौतिक चीजो से क्या मदद मिल सकती है | लेकिन यहाँ लोग अपने भीतर चले गए, उन्होंने अपना ध्यान अपने ही भीतर इस बात पर लगाया कि ऐसी कौन सी अंतर्निहित शक्तियाँ हैं जिन्होंने इस पूरे ब्रह्मांड को बनाया है और इंसान को बनाया है। मान लीजिये कि यहां इस यंत्र में कुछ खराबी है, और आप इसे ठीक नहीं कर सक रहे हैं, तो आप आपूर्ति के स्त्रोत्र के पास जा कर और यह पता लगाएंगे कि क्या मुख्य स्त्रोत्र में कुछ समस्या थी  उसी तरह, कुछ लोग यहाँ काम करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग मुख्य स्त्रोत्र पर काम कर रहे थे। उन्होंने पाया कि हमारे भीतर एक शक्ति निहित है जिसे कुंडलिनी कहा जाता है। यह कुंडलिनी रीढ़ के आधार पर स्थित शक्ति है, हम कहते हैं,त्रिक हड्डी पर, कुछ लोग इसे समझने में गलती करते हैं क्योंकि मैं इसे त्रिकोणीय कहती हूं, क्योंकि यह एक पूर्ण त्रिकोण है, छोटी छोटी हड्डियों को चिकित्सा विज्ञान में त्रिकोणीय हड्डियों कहा जाता है। । मेरा मतलब है कि वह त्रिकोण जिसे आप पीठ पर,हड्डी के आधार पर  महसूस कर सकते हैं, सेक्रम कहा जाता है। अब इस सेक्रम का अर्थ है पवित्र अस्थि। ज़रा सोचिए, लोगों को कैसे पता था कि यह पवित्र हड्डी है और यह भी कहा जाता है कि जब एक आदमी जल जाता है, तो उसका पूरा शरीर जल सकता है, लेकिन यह हड्डी नहीं जलती है।

इस कुंडलिनी को साढ़े तीन वर्तन मिले हैं। साढ़े तीन कुंडल होने का एक विशेष कारण है, क्योंकि यह एक अनन्त अस्तित्व की अभिव्यक्ति देता है, लेकिन इसकी हम कुछ समय बाद चर्चा करेंगे। अब, कुंडलिनी या ऊर्जा अथवा शक्ति  के ये साढ़े तीन कुंडल, यह संपूर्ण मानव को प्रकट करता है, जिसे कि हम पिंड कहते हैं, एक पूर्ण युग्मज इससे निर्मित होता है। वह रचना करती है और फिर भी उसी स्वरूप में बनी रहती है, जैसे माँ एक बच्चा पैदा करती है लेकिन वैसी ही रहती है। यह कुंडलिनी आपकी माता है। वह वही है जो केवल तुम्हारी माँ है। प्रत्येक व्यक्ति को यह माँ मिली है, त्रिकोणीय हड्डी में, प्रत्येक व्यक्ति और यह माँ हर समय रिकॉर्डिंग कर रही है, देख रही है, समन्वय करती है और,आप को सार्वभौमिक अचेतन के प्रतीक को प्रदान करने का प्रयास करती है । वे कहते हैं कि यह कुंडलिनी सो रही है।  एक तरह से ऐसा कहना ठीक है, क्योंकि वह अभी तक व्यवस्थित नहीं है।इस कुंडलिनी के नीचे एक केंद्र है, एक और केंद्र जिसे आप देख सकते हैं, जो पिछले जन्मों में आपने क्या किया है और आज आप क्या कर रहे हैं, इन सभी सूचनाओं को इकठ्ठा करने का केंद्र है। आपकी हर जानकारी को पवित्र हड्डी में टेप की तरह रखा जाता है। अब आप कह सकते हैं कि ” माँ हम कैसे मान लें कि ऐसी ऊर्जा है?” 

हमारे सहज योग कार्यक्रम में कम से कम तीस प्रतिशत लोग ऐसे हो सकते हैं जिन्होंने अपनी खुली आँखों से कुंडिनी के स्पंदन को देखा होगा। आप अपनी खुली आंखों से देख सकते हैं कि कुंडलिनी धड़कती है, और वह उठती है, आप इसे अपनी खुली आंखों से देख सकते हैं। इतना ही नहीं, एक स्टेथोस्कोप के साथ आप उस “लूप डुप” की आवाज को महसूस कर सकते हैं जैसा कि आप अपने दिल की सुनते हैं, या वे कहते हैं कि अनाहत अर्थात टक्कर की आवाज़। यह सब कुछ बहुत पुराने समय में खोजा गया था, लेकिन मुझे नहीं पता कि कितने सालों तक,और क्यों? हमारी सोच बनी की जो कुछ भी भारतीय है उसे बेकार के रूप में छोड़ दिया जाना चाहिए, यह योग का देश है, हम योग केंद्रित लोग हैं। मूल रूप से हम योग-उन्मुख हैं। आप विचारों को बदलने की कोशिश कर सकते हैं, और इस देश में  जो आप को पसंद हो नव स्वातन्त्र्य वगैरह इन निरर्थक चीजों को लाने की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन यह बहुत मुश्किल होने वाला है, क्योंकि इस की  आधात्मिकता के उच्च नेतृत्व के तौर पर देख-भाल की गयी, पोषित किया गया और आगे बढ़ाया गया। आप इस देश पर कोई भी कोशिश करें, कामयाब नहीं होगा क्योंकि यह एक दिन का काम नहीं है, यह दो दिन का काम नहीं है, लेकिन इस देश और इस भाग पर हजार साल से ऋषियों ने काम किया है, और कृपया जाने कि, जहां तक आध्यात्मिकता का संबंध है, आप भारतीयों के रूप में पैदा हुए हैं, आप सबसे महान हैं, । लेकिन दूसरे दिन जब वे मेरा टेलीविजन प्रसारण कर रहे थे, उन्होंने मुझसे एक सीधा सवाल पूछा,

“जो आप के पास पश्चिमी साधक हैं तथा भारतीय साधक हैं उनके बारे में आप क्या सोचती हैं ?”

मैंने कहा, “बेशक पश्चिमी साधक अहं-उन्मुख होते हैं, वे अहंकार की सैर करते हैं , वे एक गुरु से जुड़ेंगे जो उन्हें कुछ वेश-भूषा देगा, या उन्हें कुछ नया नाम देगा, वे कुछ अहंकार संतुष्टि करना चाहते हैं।”लेकिन फिर भी वे एक बहुत लंबे इतिहास के साधक हैं, रहे होंगे, वे शायद दूसरे देश में पैदा हुए इस देश के महान संत रहे होंगे, क्योंकि जिस तरह से वे सहज योग में चले गए हैं और जिस तरह से उन्होंने इसमें महारत हासिल की है, वह कुछ इस तरह इतना उल्लेखनीय है, जबकि हमारे देश के छद्म बुद्धिजीवी बेहद सतही हैं। इस बात पर उन्हें थोड़ा दुख हुआ।

लेकिन मैंने कहा, “मुझे आपको सच्चाई बतानी होगी।”

हम कभी भी इन महान ऋषियों द्वारा खोजे गए निष्कर्षों के विस्तार में कभी नहीं गए हैं, जिन्होंने हमारे लिए बहुत सी चीजें तलाशी  हैं, यह पहले से ही तैयार है, जैसे आपकी कुंडलिनी, आपके पिता, सर्वशक्तिमान परमात्मा ने आप के लिए बनाई और, वहाँ रखी है |अब आपके पास पहला केंद्र है, ये सभी सूक्ष्म केंद्र हैं जिनके बारे में मैं बात कर रही हूं, जो स्थूल रूप से पलेक्सस के रूप में प्रकट होते हैं। लेकिन यहां मैं आपको सूक्ष्म केंद्रों के बारे में बताऊंगी। पहले सूक्ष्म केंद्र को मूलाधार चक्र कहा जाता है। अब आप सभी अगर संस्कृत के इस ज्ञान को जानते हों कि, यह मूलधार जड़ का आधार  है। जड़ क्या है? जड़ कुंडलिनी है, जो उच्चस्थ है, और यह मूलाधार केंद्र है। यह वह केंद्र है जो कुंडलिनी की रक्षा करता है तथा उसे सूचित करता है। अब, इसका हिंदू धर्म या ईसाई धर्म या किसी भी धर्म से कोई लेना-देना नहीं है। हर कोई, चाहे आप लंदन से हों या भारत से या टिम्बकटू से, अगर आप एक इंसान हैं, तो आपके भीतर यह कुंडलिनी है।

अब हम एक दुनिया और एक महान समझ की बातें करते हैं, और यह संभव नहीं है। यह आपने एक असंभव कार्य लिया  है। कारण यह है कि आप सभी लोगों के अंतर्प्रवाह में नहीं गए हैं। दूसरी बात, आपने अपने परम तत्व का पता नहीं लगाया है; यह सभी सापेक्ष शब्दावली है। आपकी सभी आर्थिक समस्याएं, आपके सभी आर्थिक सिद्धांत, और आपकी सभी धारणाएँ, जहाँ तक आपके राजनीति का संबंध है, बिल्कुल अनुपयोगी  हैं, क्योंकि वे पूर्ण तत्व पर आधारित नहीं हैं। आप एक ऐसे विमान पर जा रहे हैं, जिसका कोई आधार नहीं है। कुछ भी निरपेक्ष नहीं है, वास्तविकता यह है कि हम हमेशा अति पर जाते हैं, जैसे, जब हम चर्चा करते हैं, जैसे, राजनीति करते हैं, तो हमारी सभी विचारधाराएं, पूंजीवाद, एक चरम; साम्यवाद, एक और चरम पर काम करती हैं। यह एक चरम है, वह एक दूसरा चरम है। नदी मध्य में बहती है और जितना आप बीच में हैं, उतनी ही गहराई है,  जैसे ही आप अपनी निरपेक्षता को जानते हैं,ये सभी विचारधाराएं, ये सभी समस्याएं और उथल-पुथल खत्म हो जाती हैं, और ये बेकार की वार्ता समाप्त हो जाएगी।

आइए जानें कि हमारे भीतर हमारा परम कहां है? अब, जब मैं आपसे बात करती हूं, तो मैं उन सवालों को जानती हूं, जो सामने आ रहे हैं, इसीलिए मुझे इसका उल्लेख करना पड़ता है चाहे मैं इसके बारे में किसी सन्दर्भ में बात कर रही हूं या अनायास , मैं आपसे जो बात कर रही हूं वो वैज्ञानिक रूप से सच है । यदि आप एक वास्तविक वैज्ञानिक हैं, तो मैं आपसे खुले दिमाग से विचार करने का अनुरोध करूंगी। प्रत्येक वैज्ञानिक को अपने लिए खुले दिमाग से जानना होगा कि, अवोगाद्रो की परिकल्पना को आगे रखा गया था, फिर उसे फिर से हटा दिया गया, फिर से हटा दिया गया और फिर एक बार फिर। उसी तरह, मैं आपके सामने एक परिकल्पना रख रही हूं, और इसे साबित करने के लिए कि आप मुझे एक मौका दें, और तब आपको पता चलेगा कि मैं परम सत्य नियमों की बात कर रही हूं, जिन्हें बदला नहीं जा सकता, भगवान के पूर्ण नियम जो प्रेम की किताबों में लिखे गए हैं। 

यह परम आपके हृदय में आपकी आत्मा के रूप में रहता है, आपकी आत्मा के रूप में। अंग्रेजी भाषा में स्प्रिट, मुझे अंग्रेजी भाषा बहुत पेचीदा लगती है क्योंकि मुझे नहीं लगता कि उनके पास कभी भी इस तरह के ध्यान सम्बन्धी अनुभव थे जैसे कि हमारे पास है। आत्मा तुम्हारे दिल में, परमात्मा का प्रतिबिंब है। हमारे हृदय के भीतर जो आत्मा है, एक टिमटिमाती हुई रोशनी की तरह है, हम कह सकते हैं,गैस की रोशनी जैसी,टिमटिमाती हुई रोशनी है, जो सब कुछ जानती है, जो सब कुछ जानती है, जिसे गीता में क्षेत्रज्ञ कहा जाता है। यह जानती है कि आप क्या कर रहे हैं, आप कहां जा रहे हैं, आपकी योजनाएं क्या हैं, और क्या गलत है और क्या बुरा है। और यही है जिस के बारे में हमें यह ज्ञान नहीं है कि,हमें उसे खोजना है। लेकिन हम जानते हैं कि कोई तो है, जो हमारे बारे में सब जानता है, चाहे आप अंधेरे में जाएं या आप चीजों को छिपाएं, कुछ भी करें, आप जानते हैं कि आपके दिल में कोई है जो आपके बारे में सब कुछ जानता है।लेकिन अब हमें उसके पास जाने के लिए, इसे पाने के लिए, या इसे पूरा करने के लिए क्या करना है ? हमने इंसान बनने के लिए क्या किया है? मैं फिर से वही सवाल पूछती हूं। कुछ भी नहीं, और आत्मा को जानने के लिए भी, आपको कुछ भी करने की ज़रूरत नहीं है। बीज को अंकुरित करने के लिए आप क्या करते हैं, कुछ नहीं। धरती माता, वह इसका ध्यान रखती है। उसी तरह, अपनी कुंडलिनी के उत्थान के लिए, आत्मा से मिलने के लिए, आपको क्या करना है? कुछ भी नहीं, और यह स्वीकार करना मुश्किल होने वाला है कि कुछ भी किए बिना हम इसे कैसे प्राप्त करने जा रहे हैं? यही कारण है कि सहज योग बहुत धीमी गति से चलता है। अगर मैं लोगों को बताती हूं कि आपको इसे पाने के लिए तीन घंटे सर के बल खड़े रहना है तो, यहां दस गुना ज्यादा लोग होंगे। आप इसके बारे में कुछ भी नहीं कर सकते हैं,  एक साधारण चीज जिसे आप जानते हैं की,केवल एक प्रकाशित दीप एक अन्य दीप को प्रकाशित कर सकता है। अगर तुम प्रबुद्ध नहीं हो, तो तुम दूसरे दीप को कैसे प्रकाशित कर सकते हो? आप खुद ब खुद कैसे प्रकाशित हो सकते हैं? और जब यह किसी अन्य दीप को प्रकाशित करता है तो यह करता क्या है? दूसरा दीप भी प्रकाश देता है।यह झिलमिलाहट जो आपके दिल में है, वह आत्मा है, और यह कुंडलिनी वह है, जिसे आप के भीतर एक अंकुर की तरह तैयार रखा जाता है, जो इन छह केंद्रों के माध्यम से धीरे-धीरे उन्नति करती है, और इस क्षेत्र, जो कि तालू  या फोंटानेल क्षेत्र कहा जाता है,से प्रकट होती है | कुंडलिनी तालू  या फोंटानेल क्षेत्र में भेदन करती है।  और जब कुण्डलिनी तालू  या फोंटानेल क्षेत्र से भेदन करती है, तो आपकी आत्मा का आसन यहाँ पर है, आसन यहीं है । आप आश्चर्यचकित होंगे कि आत्मा हर रात करीब बारह इंच आपसे बाहर निकलती है, और यहाँ उसका आसन है और जब कुंडलिनी आसन  को छूती है, तो आपको अपना आत्म बोध प्राप्त होता है। जब आप अपना आत्म बोध प्राप्त करते हैं, तब आप अपना प्रयोजन पाते हैं, इससे पहले इस जीवन का कोई प्रयोजन नहीं है। जैसे, जब तक और जहाँ तक यह माइक  मुख्य स्त्रोत्र से नहीं जुड़ा हुआ है, इसका कोई अर्थ नहीं है।जब हमारी आँखें ही अभी तक नहीं खुली हैं तो ,आप ईश्वर के बारे में क्या लड़ रहे हैं, अगर वह है या नहीं भी, ? यह तो अंधे लोगो का आपस में लड़ना और यह घोषित करना है कि कोई भगवान है या भगवान नहीं है, दोनों ही चीजें एक समान हैं, चाहे वह अंध विश्वास हो या मैं कहूँ, यह बौद्धिक दावे कि कोई ईश्वर नहीं है, बस एक ही बात है, इसका कोई फायदा नहीं है, क्योंकि दोनों ही तरीके में आप ईश्वर से नहीं जुड़े हैं। तो सबसे पहली और महत्वपूर्ण बात यह है कि आपको अपनी आत्मा से जुड़ा होना चाहिए, बाकी सभी, बिल्कुल बेकार। वे लोग जो अन्य अहंकार यात्राओं में लिप्त हो जाते हैं और सोचते हैं कि वे भगवान को उछल-कूद या सभी प्रकार की निरर्थक चीजों से प्राप्त करने जा रहे हैं, वे [?] हैं। इस कुंडलिनी को उठना पड़ता है और आपको आत्म बोध देना होता है। यह बात आदि शंकराचार्य ने कही है, यह वही है जो ईसा मसीह ने कहा है, यह वही है जो हर एक सच्चे माने- जाने वाले व्यक्ति ने कहा है: कि आपको फिर से जन्म लेना है। आप फिर से कैसे पैदा होने वाले हैं? यह वह माता है, जो नीचे बैठकर उस अवसर की प्रतीक्षा कर रही है जबकि इन छः चक्रों के ऊपर उठने और सर्वोच्च केंद्र को छेदने कर , आपको यह आत्मसाक्षात्कार दिलाने के लिए। सबसे निचला चक्र का भेदन नहीं होता है। यह सबसे निचला चक्र है जिसे पेल्विक प्लेक्सस की देख-भाल करनी पड़ती है, और यदि आप पेल्विक प्लेक्सस को जानते हैं, तो यह योन क्रिया की भी देखरेख करता है।मैंने एक हजार एक बार कहा है, सेक्स का कुंडलिनी से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन लोगों को समझने की योग्यता ही नहीं है। वह तुम्हारी माँ है। अब, समझो कि आप सभी भारतीय हैं, अंग्रेज नहीं। आप अपनी माँ के बारे में ऐसी गंदी बात कैसे कह सकते हैं? और यह वही है जिसमें  लोगों ने गुमराह किया है। मैं उन्हें दे दूँगी, क्योंकि मैं एक माँ हूँ, मैं उन्हें संदेह का लाभ भी दूँगी। हो सकता है कि उनसे गलती हुई हो। हो सकता है कि उन्होंने वहां गणेश की सूंड देखी हो और सोचा हो कि यह कुंडलिनी थी क्योंकि उस केंद्र पर शासन करने वाले देवता श्री गणेश हैं।

जब मैं श्री गणेश कहती हूं, तो लोगों को यह नहीं सोचना चाहिए कि यह हिंदू धर्म के बारे में है, श्री गणेश पर किसी का अधिकार नहीं है। वह ऐसे किसी के देवता के रूप में  नहीं है, जो सिर्फ उसे जेब में डालना चाहता है। वह पूरे ब्रह्मांड पर राज करने वाले देव है, और कोई भी यह दावा नहीं कर सकता है कि वे हिंदू या ईसाई या मुस्लिम है। यह भगवान गणेश जिन्हें हम, यहां तक कि डॉक्टर, इंजीनियर, हर कोई पूजते हैं, यह नहीं जानते कि वह इस मूलाधार चक्र में इस तरह रहते है – जैसे कि कीचड़ में कमल,  उस छोटे बच्चे की तरह, जो बेतुके पहलु वाले यौन-सम्बन्ध को नहीं समझता है। जो इतना पवित्र है। वह बच्चा आपके भीतर रहता है, और यहां मैं यह भी स्पष्ट बताना चाहूंगी कि बहुत से लोग सोचते हैं कि इस से परहेज उन्हें आध्यात्मिकता में एक महान ऊंचाई देने वाला है, दुख से कहना है की वे गलत हैं | आप किसी भी चीज से दूर भागना नहीं हैं। आपको बच्चे पैदा करने हैं, आपको सामान्य पति-पत्नी की तरह रहना है। यही है जो हमें सहज योग में पाना है। यदि आप असामान्य रूप से एक तपस्वी जीवन वगैरह होने का व्यवहार कर रहे हैं, मैं आपसे अनुरोध करूंगी कि आप बेहतर तरीके से अपनी पोशाकें बदलें और सामान्य कपड़े पहनकर वापस आएं। सहज योग केवल उन लोगों को दिया जा सकता है जो सामान्य हैं, न कि चरमपंथियों के लिए जो घर से भागने या घर की ओर भागने में बहुत अधिक विश्वास करते हैं। वे लोग जो एक अच्छा जीवन जीते हैं, जो अपने समाज के बारे में भी सोचते हैं और जो मध्य मार्गी अति सामान्य लोग हैं, चरमपंथी नहीं। मध्यम वर्गीय लोग, हमने मध्यम वर्गीय लोगों की कभी चिंता नहीं की है। हम केवल उन गरीब लोगों के बारे में परेशान हैं जो भिखारी हैं या उन लोगों के बारे में चिंतित हैं जो बहुत अमीर हैं। उन्हें भूल जाओ, दोनों एक ही प्रकार के हैं। आप यह सहज योग में जानेंगे कि उनकी गुणवत्ता समान हैं, उनके समान मूल्य हैं, वे समान मानक के हैं। केवल अंतर है एक के पास बहुत अधिक पैसा है और एक के पास नहीं है। आप देखिए, यह पैसा है जो फर्क करता है, लेकिन तथ्य यह जानना चाहिए कि दोनों की एक ही स्थिति हैं।

अब मैं आपको बता रही हूं कि सहज योग केवल उन लोगों के लिए काम करता है जो अति पर नहीं जाते हैं, क्योंकि आप देख सकते हैं कि मेरु दंड मध्य में स्थित है, एक तरफ या दूसरी तरफ नहीं। वे लोग जो साधारण लोग हैं, जो अच्छे, व्यवस्थित धार्मिक जीवन जी रहे हैं, सहज योग के लिए सर्वश्रेष्ठ हैं। कोई प्रयोग करने की जरूरत नहीं है जैसा कि पश्चिमी लोगों ने किया है। उन्होंने वास्तव में अपने समाज को बर्बाद कर दिया है, खुद को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है, समाप्त हो गया है। आप मुझे कह सकते हैं मैं विक्टोरियन, मध्यम वर्ग हूं, क्योंकि बौद्धिक लोगों के पास ऊँचे शब्द हैं, आप देखते हैं, वे किसी को भी ब्रांड करते हैं। लेकिन यह विशिष्ट समय है कि वे महसूस कर रहे हैं कि इस तरह की मूर्खता हमने उस देश में की है। हमने समाज को बर्बाद कर दिया है, हमने अपने बच्चों को बर्बाद कर दिया है, हमने अपने पारिवारिक रिश्तों को बर्बाद कर दिया है, हमने एक पूरे राष्ट्र को कयामत के दिन, पूर्ण कयामत की स्थिति तक बर्बाद कर दिया है। यदि आप जाकर उन देशों को देखते हैं – दयनीय। वे शराब खाने में अपने जीवन को समाप्त करने जा रहे हैं, ऐसा इसलिए है क्योंकि वे जीवन का सामना नहीं कर सकते हैं। जीवन उनके लिए कितना दयनीय है, उनका कोई परिवार नहीं है, कोई संतान नहीं है, पत्नी नहीं है। कहाँ जाना है? इसलिए वे पब जाते हैं।

तो, ये सभी प्रयोग किसी काम के नहीं हैं। एक माँ के रूप में मैं आपको बता रही हूँ, “कृपया रुकें।”

अपनी पवित्रता का सम्मान करके, अपने भीतर अपने भगवान गणेश को जागृत करें। हमारे भारतीय पुरुष सोचते हैं कि उनको पवित्रता की कोई जरूरत नहीं है। केवल महिलाओं को ही पवित्र होना पड़ता है, और पुरुषों के लिए बिल्कुल भी संयम आवश्यक  नहीं माना जाता है, यह अधिक आश्चर्यजनक है। मनुष्य के लिए पवित्रता में होना, मध्य में रहना सबसे महत्वपूर्ण चीज है, क्योंकि यह किसी भी व्यक्ति को प्राप्त श्री गणेश का आशीर्वाद है,  जिसके बाद ही कुंडलिनी केवल उठने वाली है। अब श्री गणेश इस धरती पर  स्वयं भगवान ईसा मसीह के रूप में अवतरित हुए हैं। वह इस चक्र पर भगवान यीशु मसीह के रूप में इस धरती पर आए, जिसे आप आज्ञा चक्र कहते हैं, जहां मैं यह लाल टिका रख रही हूं। लेकिन वह बहुत विकसित हुआ है। ग्यारह रुद्र हैं जैसा कि हम उन्हें कहते हैं, ग्यारह रुद्र हैं जो उनकी शक्तियां हैं। यह सब देवी महात्म्यम, देवी भागवत में वर्णित है। उनका नाम महाविष्णु है। उसे ब्रह्मांड का आधार कहा जाता है। लेकिन देवी भागवत को कौन पढ़ता है? या कौन पढ़ता है, मार्कण्डेय की पुस्तक या आदि शंकराचार्य की पुस्तक? वे कहेंगे कि “हम महान हिंदू हैं,” और उन्होंने आदि शंकराचार्य का नाम भी नहीं सुना है।

मैं केरल गयी और इन अखबारों के लोगों ने मुझे बताया कि, “हमने उन्हें कभी नहीं पढ़ा।”

केरल में, एक ऐसे महान व्यक्ति का जन्म हुआ, आदि शंकराचार्य, मेरा मतलब है कि उन्होंने उनके बारे में पढ़ा भी नहीं है। शंकराचार्य ने कभी किसी हिंदू धर्म का प्रचार नहीं किया, यह एक गलत सोच है।

उन्होंने कहा, “ना योगे ना सांख्ये।”

उन्होंने कहा, “इन दर्शन शास्त्र के द्वारा आप ईश्वर को प्राप्त नहीं कर सकते हैं, लेकिन माँ की कृपा से ही आपको वह स्थिति मिलेगी।”

उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, वह कभी भी इस तरह के धर्मनिरपेक्ष विचार या ऐसे किसी भी विचार पर विश्वास नहीं करते थे जिसका अर्थ हो कि यह भिन्न धर्म है, खुद धर्मनिरपेक्ष शब्द का अर्थ है कि दुसरे धर्म मौजूद हैं। ईश्वर का केवल एक ही धर्म है जो अस्तित्व में है।  कोई सौ धर्म नहीं हैं, जैसा हम उनके बारे में सोचते हैं । वे सभी एक बड़े पेड़ के फूल हैं। हमने इन सभी फूलों को तोड़ लिया है, “यह मेरा है, यह मेरा है।” और फिर आप धर्मनिरपेक्षता की बात कैसे करते हैं? यह एक ही है और इस पर एक शक्ति ने अपने प्रेम से फूल खिलाएं हैं। वे अलग कैसे हो सकते हैं? वे सभी एक हैं, बिल्कुल एकीकृत  हैं। वे पूर्ण आपसी सहमति में हैं और उनके बीच कोई समस्या नहीं है, समस्या हम इंसानों के साथ है। यह मानना बहुत कठिन है, लेकिन यही एक तथ्य है, किसी को आपको यह बताना ही होगा कि यह भगवान गणेश थे जो इस धरती पर भगवान यीशु मसीह के रूप में अवतरित हुए थे और आपने उनके साथ क्या किया ? इस बारे में सोचो। वह केवल चार साल के लिए वहां थे, उन्होंने इस तरह का काम किया और आपने उनके लिए क्या किया? और ऐसा तुमने क्यों किया? क्या कारण था? फिर से,चूँकि आप वास्तविकता का सामना नहीं करना चाहते थे। अब यह समय आ गया है कि आप वास्तविकता से बच नहीं सकते। अगर आप बचते हैं, तो आगे बड़े खतरे इंतजार कर रहे हैं। आपको वास्तविकता का सामना करना होगा। और क्यों? मैं आपको बस यही बताऊंगी|

हमारे भीतर हमारी अनुकम्पी एवं परानूकम्पी  गतिविधियों की अन्तर्धाराएँ है। तीन धाराओं के रूप में, पहली एक, बाएं हाथ की को, इडा नाडी कहते हैं। ये अनुकम्पी तंत्रिका तंत्र के बाएं हिस्से हैं, बाएं अनुकम्पी तंत्रिका तंत्र है लेकिन आप इसे अपनी खुली आंखों से नहीं देख सकते हैं। यह रीढ़ की हड्डी के अंदर है, जबकि अनुकम्पी  तंत्रिका तंत्र बाहर है। दाहिने हाथ की ओर पिंगला नाड़ी स्थित है जो दायें अनुकम्पी तंत्रिका तंत्र को प्रकट करती है। केंद्र में पैरासिम्पेथेटिक तंत्रिका तंत्र है, जो वास्तव में स्वचालित है, और आप इसे नियंत्रित नहीं कर सकते हैं। यह उस सभी ऊर्जा की आपूर्ति करता है जो संवेदी तंत्रिका तंत्र द्वारा उपयोग की जा रही हैं। जब भी आप किसी आपात स्थिति में आते हैं, तो आप अपनी संवेदी तंत्रिका तंत्र का, किसी भी आपात स्थिति में उपयोग करना शुरू करते हैं, जैसे कि दौड़ना। जब आप दौड़ेंगे तो आपका दिल तेजी से धड़कने लगेगा, लेकिन पैरासिम्पेथेटिक इसे सामान्य स्थिति में लाता है। ये छह केंद्र हैं जहां से आपको संवेदी तंत्रिका तंत्र के लिए अपनी ऊर्जा मिलती है। अब जब आप किसी भी गतिविधि को अत्यधिक करते हैं, क्योंकि आप चरम पर जाते हैं, तो वह विशेष केंद्र और भी अधिक ऊर्जा का उत्पादन करने से इनकार करता है और यह थक जाता है क्योंकि आप मुख्य स्त्रोत्र से जुड़े हुए नहीं हैं, और तनाव का निर्माण होता है और यदि आप इसके बावजूद अति करते हैं परिणाम कैंसर है।कैंसर ठीक नहीं हो सकता है, आप इसे आज ही लिख लें, और दस साल से मैं कह रही हूं कि सहज योग के बिना यह ठीक नहीं हो सकता। कैंसर हमारे भीतर क्यों काम कर रहा है क्योंकि हम विभिन्न केंद्रों में अपनी ऊर्जा समाप्त कर रहे हैं और हमारे लिए ऊर्जा वापस लाने का कोई तरीका नहीं है। आपको कुछ विधि प्राप्त करनी होगी जिसके द्वारा आप मुख्य स्त्रोत्र  से जुड़ जाए। उदाहरण के लिए, यदि आप कार से जा रहे हैं, और आपका पेट्रोल खत्म होने वाला है, तो आप सामान्य रूप से चिंता करेंगे। लेकिन यह मानते हुए कि आपके पास मुख्य स्त्रोत्र से जुड़ने का एक तरीका है, और ऊर्जा हर समय आपके भीतर बहती रहती है तब , आप अटूट हैं। आप बिल्कुल शांति से होंगे। यह एक कारण है कि लोग शारीरिक रूप से पूर्ण विनाश की तरफ अग्रणी हैं।

दूसरे, अगर आप ऐसा नहीं करते हैं, अगर आपको कैंसर नहीं होता है, या ऐसी कोई अन्य बीमारी नहीं है, तो आप जीवन में ऊब जाएंगे, आप खुद से ऊब जाएंगे। फिर ऊब पर काबू पाने के लिए, आप पब जाते हैं, आप शराब पीते हैं और ये सब शराबनोशी करते हैं। बेशक, आजकल लोग शराब की प्रशंसा गा रहे हैं। आप इसकी प्रशंसा करते हैं, इस से कोई फर्क नहीं है, मैंने यह नहीं कहा कि आप शराब नहीं पीए, आप सहज योग में आते हैं और आप स्वयं छोड़ देंगे। हजारों लोगों ने शराब पीना छोड़ दिया है, और क्यों? मेरा मतलब है कि मैं उन्हें पीने से मना नहीं कर रही हूँ, बिल्कुल नहीं। मैं कहती हूं कि यहां केवल बोतल ही मत पियो। पिछली बार एक सज्जन ने मुझे मारने के लिए एक बोतल यहाँ लाई थी, लेकिन अगर आप यहाँ आते हैं, तो आप अपने पूर्ण, अपने पूर्ण का आनंद पाते हैं और फिर आप खुद ही पीना नहीं चाहते हैं। यदि आप चाहें, तो भी आप नहीं पी सकते। मैं आपके लिए कुछ नहीं करती, मैं आपको नहीं बताती, मैं आपका ब्रेनवॉश नहीं करती, या मैं निषेध के बारे में कुछ नहीं कहती, किसी भी तरह का कुछ भी नहीं। स्वचालित रूप से, जब आपने खुद को पाया है, तो अब आप  ऊब नहीं सकते हैं, आप अपने भीतर इतने संतुष्ट हैं, और अब आप इसे लेने के लिए तैयार नहीं हैं। यह एक बहुत ही साधारण सी बात है जो हमें जानना है,  और समय आ गया है कि हम अपना आत्मसाक्षात्कार प्राप्त करें, हम सभी के लिए सबसे जरूरी चीज है कि हम अपनी आत्मसाक्षात्कार प्राप्त करें।अब इसके लिए आप भुगतान नहीं कर सकते। मेरा मतलब है, यह बताना इतना बेतुका है, लेकिन लोग इतने पागल हैं कि मुझे ये बातें कहनी हैं। आप अपनी माँ के प्यार का भुगतान कैसे कर सकते हैं? क्या आप अपनी माँ के प्यार का भुगतान कर सकते हैं? मेरा मतलब है कि भारतीय अपनी माँ को समझते हैं। आप उसके लिए भुगतान कैसे कर सकते हैं, क्या आप इसके बारे में बात कर सकते हैं? यह बहुत अपमानजनक है, बहुत अजीब है, लेकिन आप इसके लिए भुगतान नहीं कर सकते, आप भगवान के लिए भुगतान नहीं कर सकते। कोई भी, चाहे वह किसी भी नाम से या किसी भी चीज से खुद को पुकारे, मुझे कोई परवाह नहीं है। लेकिन जो कोई भी ईश्वर का नाम लेता है और पैसे लेता है वह समाज पर एक परजीवी की तरह रहता है, बहुत पापी आदमी है। और जो लोग उन व्यक्तित्वों का अनुसरण करते हैं वे भी उसी तरफ जा रहे हैं जो सीधे नरक में जाता है।आप इस प्रेम के लिए पैसे नहीं ले सकते। यह प्रेम, यह प्रवाह, यह सिर्फ प्रवाह। यह कुछ भी नहीं चाहता है, आप इस का भुगतान नहीं कर सकते। यह सिर्फ प्रकाश की तरह बहता है। इसके लिए किसी भी चीज की आवश्यकता नहीं है, इसके लिए केवल इसके प्रवाह की आवश्यकता होती है। जब तक यह बहता है, यह संतुष्ट है, यह कुछ भी नहीं चाहता है। परमेश्वर को उन मानदंडों से समझने की कोशिश ना करें जो मनुष्य ने अपने बारे में बनाए हैं। वे उसे भी प्रबंधित करने की कोशिश कर रहे हैं, और वे उसे खरीदने जा रहे हैं। मुझे पता है, हर संस्था, तथाकथित धार्मिक संस्थाएँ, जहाँ के लोग सिर्फ परजीवी हैं, वहाँ कोई काम नहीं कर रहे हैं, धर्म के नाम पे पैसा कमा रहे हैं और उनके लिए यह स्वीकार करना बहुत मुश्किल है जब मैं कहती हूँ कि आप इसके लिए भुगतान नहीं कर सकते हैं ।लेकिन मैं आपको बताती हूं कि आपकी मां से, आप जान सकते हैं कि इस मां को आपसे थोड़ा बहुत प्यार है, लेकिन सर्वशक्तिमान ईश्वर का सागर है। आप उस महासागर के लिए भुगतान नहीं कर सकते। बस इसे स्वीकार करें, यह बहेगा, अतिप्रवाह करेगा, आपको समा लेगा और आपको सुंदर बना समय आ गया है कि आप सभी इसे प्राप्त करें।  मुझे लगता है कि आज यह पर्याप्त है, कल मैं आपको सभी केंद्रों के बारे में, और उनके रख रखाव के बारे में विस्तार से बताऊंगी, लेकिन मेरा अनुरोध है कि प्राप्ति के बाद, आपको पता होना चाहिए कि प्रकाशित होने वाला प्रत्येक दीप फिर से बुझ सकता है क्योंकि लोग इसके बारे में लापरवाही कर रहे हैं। तो आपको आत्मज्ञान के बाद पता होना चाहिए कि दीपक की देखभाल कैसे करें। यदि आप इसे कुछ दिनों के लिए भी कर सकते हैं, तो यह दृड़ हो जाता है और फिर आप इसका आनंद लेना शुरू कर देते हैं, और फिर आप एक ऐसे दायरे में प्रवेश करते हैं, जहां आनंद, और हंसी और खुशी और आनंद के अलावा कुछ भी नहीं है, आप यह कहते हुए चकित हैं कि देखें कि आप एक दूसरे से इतने जुड़े हुए हैं जैसे कि उंगली का एक हिस्सा पूरे शरीर से जुड़ा हो।

ऐसा होता है, यह वास्ताविकरण है, यह व्याख्यान नहीं है कि आप भाई-बहन हैं, नहीं। ऐसा होता है, जब कुंडलिनी उठती है, तो आप वह बन जाते हैं,  आपकी उंगलियों पर, आपके अस्तित्व पर बोध, आपको जागरूक करता है कि आप दूसरों के भी अंग-प्रत्यंग हैं। यह आपको बनाता है। आपको खुद को बताने की ज़रूरत नहीं है, आपको अपने आप को शिक्षित नहीं करना है, बस ऐसा हो जाता है, यह वास्तविक घटना है। सामूहिक चेतना तुम्हारा धर्म बन जाती है। यह आपका अस्तित्व बन जाता है, और यही आपको पाना है, और यही आपको हासिल करना है। उसके लिए, किसी भी प्रयास की आवश्यकता नहीं है, और पैसे या किसी भी चीज की आवश्यकता नहीं है, सिवाय इसके कि जब आप इसे प्राप्त करते हैं, तो आपको इसे कुछ समय तक बनाए रखना होगा जब तक कि यह ठीक से प्रज्वलित ना हो जाए।

परमात्मा आपका भला करे!

मुझे लगता है कि हमें अनुभव प्राप्ति  के लिए जाना चाहिए और थोड़ी विनम्रता के साथ इसे स्वीकार करना चाहिए। यदि आप बहुत घमंडी व्यक्ति हैं, तो यह काम नहीं करता है। मैंने ऐसे लोगों को देखा है, जिन्होंने सबसे अहंकारी सवाल पूछे हैं, वे खो जाते हैं और अपना समय बर्बाद करते हैं। मैं आपको विश्वास दिलाती हूं कि इसने अद्भुत काम किया है और यह आपके लिए भी अद्भुत काम करने जा रहा है। आप वैसा रवैया नहीं रखें जैसा कि आप किसी दुकान में रखते हैं। आपने इसके लिए भुगतान नहीं किया है। मैंने तुमसे प्रेम किया है, इसलिए मैं तुम्हारे साथ हूं, और इसके लिए तुम्हें उस तरीके से व्यवहार करना होगा। इसका सम्मान करें और अहंकारी न बनें क्योंकि अहंकार के साथ आप इसे प्राप्त नहीं कर सकते हैं। मैं नहीं चाहती कि आप में से कुछ इसे मिस करें। कृपया मुझे सुनें, मैं आपकी माँ हूँ और फिर भी आप सभी मेरे बच्चे हैं, चाहे आप नब्बे या सौ वर्ष के क्यों न हों। इस लिहाज से आप सभी मेरे बच्चे हैं और आपको मेरी बात माननी होगी, अपना आनंद हासिल करनी होगा, अपनी खुशी हासिल करनी होगी और अपने होने की कुंजी हासिल करनी होगी। आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

परमात्मा आपका भला करे!