Birthday Puja: Guarding Against Slothfulness

London (England)

1980-03-23 Birthday Puja, Guarding Against Slothfulness, London, UK, 47' Download subtitles: EN,IT,PL,PT,SKView subtitles:
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                                                    जन्मदिन पूजा

                    आलस्य एक अभिशाप 

 लंदन (यूके), 23 मार्च 1980।

आपकी माँ का जन्मदिन, और इस तरह के सभी समारोहों का बहुत गहरा महत्व है, क्योंकि ऐसे अवसरों पर वातावरण में विशेष चैतन्य होता है। जब सभी आकाशीय पिंड , शाश्वत व्यक्तित्व, देवता और देवी स्तुति गाते हैं, और इस तरह पूरा वातावरण मृदुल और आनंद से भर जाता है। मानव भी, आभार व्यक्त करता है। कृतज्ञता और प्यार की अभिव्यक्ति अलग-अलग देशों में अलग-अलग तरीकों से की जाती है, लेकिन सार एक ही रहता है और रूप बदल जाते हैं। सत्व समुद्र की तरह है जो तटों की ओर लगातार बहता है और किनारों को छूने वाली लहरें फिर से वापस आ जाती हैं, और एक अच्छा पैटर्न बनता है। यह बात इतनी अनायास है और इतनी सुंदर है, इस तरह के वातावरण में एक सुंदर सरंचना बनाता है। इन सभी तरंगों को जब वे एक साथ प्रेम के पैटर्न बुन कर जो वे मनुष्यों को भिगोते हैं, वे मनुष्यों को मंत्रमुग्ध करते हैं और पूरी बात बहुत आनंददायी होती है।

ऐसे अवसरों पर एक विशेष प्रकार की भावनाएँ विकसित होती हैं, जिन्हें हम शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकते हैं इसलिए अभिव्यक्ति किसी भी रूप में हो सकती है। लेकिन मुख्य बात अभिव्यक्ति है। ईश्वर ने इसे रचना करके, इस रचना को बना कर खुद को व्यक्त किया है। जबकि रचना को उस ईश्वर की महिमा बता कर आभार व्यक्त करना है, और यह नाटक अनंत काल तक चलना चाहिए। यह सबसे सुंदर खेल है। जो लोग इस नाटक में शामिल होते हैं वे एक शाश्वत जीवन जीते हैं। वह जीवन अखंड है, कभी नहीं टूटता है और पूरे ब्रह्मांड को अपने सुंदर संगीत से बांधता है।

आज, विशेष रूप से, मुझे ऐसे लोगों से बात करनी है जो सहज योग का पालन करने में कमजोर महसूस करते हैं, जो चंचल मन के होते हैं, जिन लोगों में ताकत की कमी होती है, जो लोग सहज योग को गंभीरता से लेने से डरते हैं। यह बहुत महत्वपूर्ण है कि चंचल मानसिकता को स्पष्ट रूप से देखा जाना चाहिए – हम चंचल क्यों हैं। अधिकतर यह अहंकार हो सकता है जो आपको कुछ ऐसा करने से रोक रहा है जो बहुत महत्वपूर्ण है।  चंचल मानसिकता हमारे अंदर विभिन्न तरीकों से आती है, जैसा कि मैंने कहा था कि उनमें से एक अहंकार है। एक चंचल दिमाग वाला व्यक्ति अपने स्वयं के अहंकार से भयभीत हो सकता है और वह एक बिंदु तक जाने के बाद सहज योग करना बंद कर सकता है, क्योंकि अहंकार अब कह सकता है, “यहाँ आगे, यदि आप जाते हैं, तो एक सुरंग है जिसमें आप प्रवेश नहीं कर सकते हैं। आपको आगे नहीं जाना चाहिए। यह बहुत खतरनाक है।” यह आपके आलस्य के कारण बर्बाद भी हो सकता है। मुझे लगता है कि सुस्ती इस देश का अभिशाप है। यह सहज योग पर अभिशाप भी है। मुझे नहीं पता कि यह पश्चिमी दुनिया का अभिशाप है, लेकिन सुस्ती कुछ एक शैतान की तरह है जो आपको अपनी स्वयं की स्थिति पर बहुत अधिक चिपकाए रख सकता है और आपको बाहर निकलने की अनुमति नहीं देगा। उदाहरण के लिए सुबह आप जागते हैं और आप सोचते हैं कि, “ओह, यह सब ठीक है, सुबह जल्दी उठने की क्या जरूरत है?”  ध्यान करने की कोई जरूरत नहीं है। मैं इसे कल करूंगा”। अन्यथा आप यह भी सोचने लगते हैं कि, “यह एक महीने के बाद किया जा सकता है, कोई बात नहीं है, माताजी यहाँ हैं, सब कुछ सही होगा।” लेकिन आपको पता होना चाहिए कि आपके भीतर बहुत सारी खामियां हैं, और अगर आप गंभीरता से अब ध्यान नहीं करते हैं,   इसे एक बहुत ही गंभीर चीज के रूप में नहीं लेते हैं तो , आप इतने पीछे रह सकते हैं कि आप बाहर हो सकते हैं।

सहज योग के बाद ध्यान बहुत महत्वपूर्ण है। आप पूरी जिंदगी सोए और सोए रहे। नींद इतनी महत्वपूर्ण नहीं है। आपको आज मुझसे वादा करना होगा कि, कल से आप सभी सुबह उठ कर ध्यान करेंगे। मेरा सुझाव था कि यदि आप सुबह स्नान करते हैं तो बेहतर होगा, ताकि आपकी नींद वाली स्थिति ना हो। सुस्ती एक ऐसी कुटिल चीज है जो आपको दिखाई नहीं देती। यह हर बात का कारण समझाता है। यदि आप कहते हैं, “ओह मैं बीमार हूँ” तो यह कहेगा, “ओह, तुम इतने बीमार हो कि तुम्हें अस्पताल जाना चाहिए”। यदि आप कहते हैं, “मैं थक गया हूँ” तो यह कहेगा, “आप बहुत थक गए हैं”। आपको इतना थका हुआ क्यों होना चाहिए? यह अन्य कुछ भी नहीं है लेकिन आपका आलस्य आपको बता रहा है कि, “आप बेहद थके हुए हैं,  बेहतर है कि तुम ध्यान मत करो। बेहतर है कि तुम कुछ आराम करो ये महत्वपूर्ण है ”।

आलस्य अहंकार और प्रति-अहंकार से भी बदतर है। एक प्रकार की जड़ता है जो आपको नीचे खींचती है, और उस जड़ता को आपको वास्तव में दूर फेंकना है और उससे बाहर निकलना है। क्योंकि यह सब कुछ समझाता है, आप इसे पसंद करते हैं, क्योंकि यह आपको थोड़ा आराम देता है, और आप अपने आलस्य पर भरोसा करना चाहते हैं। लेकिन कृष्ण ने गीता में कहा है, कि इन्सान का जो सबसे बड़ा दुर्गुण हो सकता है वह है सुस्ती। यदि वे आलस्य को अपनाते हैं, यदि वे आलस्य को स्वीकार करते हैं, तो उनके पास आलसी होने के लिए सभी स्पष्टीकरण होंगे। वह, “आलस्य”, वह कहते है, आध्यात्मिक जीवन के किसी भी आकांक्षी के लिए, उनके अनुसार यह सबसे खराब बीमारी है।

आप सोच सकते हैं कि, “आप देखिए कि, अभी मैं ठीक नहीं हूँ” या अन्य कुछ भी, सुस्ती आपको कोई भी विचार दे सकती है। चूँकि मेरे पास यह सब नहीं है, इसलिए मुझे नहीं पता कि यह आपको क्या विचार देता है, लेकिन यह आपको किसी भी तरह का विचार दे सकता है, जो आपको बहुत पसंद आएगा, क्योंकि यह आपके अहंकार को खुश करना जानता है। आलस्य एक अहम्-संतोषजनक चीज है, अहंकार-को सहलाने वाला सामान, और यह आपको महसूस कराता है कि, “ओह आप बहुत थक गए हैं”। आप किस बारे में थक गए हैं? आप सभी युवा हैं, आपको थका हुआ क्यों होना चाहिए? आप इतनी जल्दी थक जाते हैं, और कुछ नहीं बल्कि आपका आलस्य आपको बताता है कि आप थके हुए हैं। आप आश्चर्यचकित होंगे कि, थका हुआ महसूस करने के बाद यदि आप दो मील तक दौड़ते हैं, तो आप दौड़ सकते हैं।

अब आलस्य सहज योग पर इतना प्रतिकूल काम क्यों करता है?  क्यों सुस्ती सहज योग के खिलाफ काम करती है? कारण यह है, क्योंकि हमें अभी तक अपने कल्याण कि पहचान नहीं है। हम ऐसा नहीं सोचते हैं कि,”हमें बेहतर होना है, हमें सुधार करना है, हमें आगे जाना है, एक बड़ा फासला हमें तय करना है” हम अपनी प्रगति के साथ नहीं पहचाने जाते हैं। माना कि, इंग्लॅण्ड में, अगर मैं आपको बताऊं कि, अगर आप हर दिन सुबह दो मील दौड़ते हैं, तो आपको एक सौंदर्य पुरस्कार मिलेगा, इस देश की 99.9% लोग, महिलाएं सुबह जल्दी दौड़ लगायेंगी। मान लीजिए कि अगर कोई पुरुषों से कहता है कि, “आपको मि. यूनिवर्स मिलेगा अगर आप हर दिन सुबह पांच मील दौड़ते हैं”,  तो मुझे नहीं पता, पर वहाँ 99.999% लोग वहाँ इस तरह से दौड़ लगा सकते हैं, क्योंकि हम ऐसी प्रतियोगिता के साथ पहचाने जाते हैं जो बहुत भौतिकवादी है, जिसका कोई मूल्य नहीं है। लेकिन जब आप उस प्रतियोगिता को छोड़ भी देते हैं, तो आप एक अन्य प्रतियोगिता ‘आलस्य की’ में पड़ जाते हैं जिसमे हर कोई एक दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहा है|

वे सुबह उठेंगे, चारों ओर देखेंगे, ” ‘कुली’ अभी भी सो रहा है, ठीक है, मुझे भी सोने दो”। तो ‘कुली’ सोचेंगे, “वह अभी भी सो रहा है, मुझे सोने दो”। इसलिए इस पर एक बड़ी प्रतिस्पर्धा है कि पहले कौन जागने वाला है, कौन ऐसा करने जा रहा है। और अगर कोई उठता है, तो वह दोष ढूंढना शुरू कर देता है, “वह उठा तो क्या? वह सिर्फ चाय ले रहा था ”या“ वह बस बातें कर रहा था ”। तुम्हारे बारे में क्या? तुम तो अभी भी बिस्तर में ही थे! कम से कम वह उठ तो गया था, चलो बातें कर रहा था, कोई बात नहीं। लेकिन वह लात मार रहा था। तुम्हारे बारे में क्या जो अभी भी बिस्तर में लोट लगा रहा था?

अब यह इस तरह की एक बचकानी बात है, मेरा मतलब है,  आप जैसे पढ़े लिखे पदस्थ बुद्धिमानों से इस तरह की बात करना बचकानापन है|  ऐसे महान लोगों की माँ, का आप से  इस तरह की बात करना शोभा नहीं देता है, लेकिन कभी-कभी मुझे लगता है कि मेरे सहज योगी दो साल के बच्चों की तरह हैं, और फिर मुझे उन्हें बताना होगा कि “देखो, अब तुम बड़े हो गए हो”।  तुम इसे समझा सकते हो लेकिन तुम खुद को कैसे समझा सकोगे ? क्योंकि अगर आपको विकसित होना है, अगर आप चाहते हैं कि आपका पेड़ बढ़े, तो आपको अपनी प्राथमिकताएं और अपनी पहचान बदलनी होगी। यदि आपको प्रथम श्रेणी के सहज योगी बनना है, तो आपको अपना चित्त इस ओर लगाना होगा। मुझे नहीं पता कि इसे कैसे ठीक करना है। मान लें कि हम इसे इस तरह से ठीक करें, हालांकि यह बहुत बचकाना है, लेकिन मुझे आपको बताना होगा चूँकि मैंने देखा है कि यह समस्या है, कि, “जिस दिन मैं नहीं उठूंगा, मुझे 10 रुपये का भुगतान करना होगा”, चलिए इसको ऐसा रखते हैं। यदि आपको अधिक वेतन मिल रहा है तो इसे दस पाउंड में रखें। लेकिन ऐसा कुछ। या आप कह सकते हैं कि, “उस दिन मैं अपना एक स्वेटर छोड़ दूंगा”। इसे ऐसे शुरू करें। यह बहुत आसान है। लोग कहेंगे कि, “नहीं माँ, जब मैं ध्यान करता हूं, तो आप जानते हैं, मेरे साथ कुछ गलत हो जाता है” – इसका मतलब है कि आप गलत हैं, आपके साथ कुछ गलत है। इसलिए बेहतर होगा कि आप तरीके से बैठकर ध्यान करें।

अब, मुझे कहना होगा, यदि आप ध्यान नहीं करते हैं, तो आप बहुत स्वार्थी हैं। यह मुख्य बिंदु है क्योंकि ऐसी स्थिति में जब आप यहाँ आते हैं, तो आपके पास से बिच्छू निकलते हैं मेरे पैर काटने के लिए। मेरे पैर काटने के लिए आप में से सांप निकल रहे हैं। क्या आप मेरे साथ ऐसा करना चाहते हैं? या दूसरों को भी। एक अन्य दिन कोई मेरे घर आया और छाया और ये सभी लोग वहाँ थे। वह इतने चक्कर खा का घूम रहे थे और हर कोई इसे बाहर निकालने का काम करने की कोशिश कर रहा था। यदि आप चाहते हैं कि सहज योग इस देश में और पश्चिम में काम करे, तो खुद हमें अपनी कीमत समझनी पड़ेगी, और हमें ही इसे कार्यान्वित होगा।

हर बार अगर आप पकड़ रहे हैं, हर बार जब आप मुझसे मिलते हैं तो आप ग्रसित ही हैं,  तो आप कुंडलिनी को कैसे महसूस करने जा रहे हैं? आपको पता होना चाहिए कि कुंडलिनी अपने भीतर कैसे चलती है। जैसे, कहां है, कितनी दूर चली गयी है। कम से कम उस जैसे कम से कम दस लोग होने चाहिए, क्योंकि मैंने यहां इतनी मेहनत की है। आप नहीं जानते, मैंने भारत में इतने साल काम नहीं किया और कम से कम 80% लोग ऐसे होंगे जो कुंडलिनी कि हलचल महसूस कर सकते हैं – यह यहाँ है, यह वहाँ है। और कुछ लोग अपनी प्रगति से आवश्यकता से अधिक संतुष्ट महसूस करते हैं। यह लोगों के एक पूरे समूह की तरह है, जो एक रस्साकशी कर रहे हैं। यहां तक ​​कि यदि एक व्यक्ति दो कदम आगे बढ़ता है, जहां वह है, पूरी चीज चलती है। लेकिन हम उन लोगों को नहीं देखते हैं जो इसे अपनी ओर खींचे ले जा रहे हैं, हम तो हमेशा यह देखते रहते हैं कि, “हम उस व्यक्ति के साथ प्रतिस्पर्धा कैसे कर सकते हैं जो आगे नहीं बढ़ रहा है? अगर वह दो कदम पीछे चल रहा है, तो हम तीन कदम पीछे हट सकते हैं। इस तरह के रवैये से हमें मदद नहीं मिलेगी। आप जानते हैं कि सहज योग एकमात्र तरीका है, एकमात्र तरीका है जो दैवीय कृपा ने आपको दिया है, जिसके द्वारा आप पूरी दुनिया को बदलने जा रहे हैं, और आलसी लोग कैसे सहज योग की मदद कर सकते हैं?

आलस्य आज सबसे बुरी चीज है। मुझे पता है कि आज ये सब कहने का दिन नहीं है, लेकिन आप सभी को मुझसे वादा करना होगा कि आप अपने आलस्य का त्याग करने जा रहे हैं- स्वाहा । यही मैंने देखा है, जब भी मैं आप लोगों से मिलती हूं तो आप ग्रसित ही पाए जाते हैं। दूसरी बात जो सहज योग के खिलाफ है, मैंने आपको सौ बार कहा है, मुझे नहीं पता कि कितनी बार, अन्य सहज योगियों कि बुराई करना है। हम सभी एक विराट शरीर के अंग-प्रत्यंग हैं, जैसे , कि हम एक हाथ कि सभी उंगलिया हैं। अब अगर यह उंगली दूसरी के बारे में बुराई करने लगती है, तो यह क्या करने जा रहा है? एक-दूसरे के बारे में बुरा बोलना बहुत गलत बात है। इसलिए आज यह भी तय करें कि, “हम कभी किसी और के बारे में ख़राब नहीं बोलेंगे, बल्कि, हम खुद को देखेंगे कि, – हमारी स्थिति क्या है।”

मैंने ऐसे लोगों को अन्य लोगों के बारे में टिप्पणी करते देखा है जो स्वयं बहुत बुरी तरह से ग्रसित हो गए हैं, और खुद के बारे में चिंतित नहीं हैं। अब, ऐसा करके आप कैसे सुधरेंगे? यदि आप स्वयं पर चित्त ना दे कर अन्य लोगों पर चित्त देंगे तो आप अपने में सुधार नहीं कर सकते हैं। तो एक और वादा यह होना चाहिए कि, “हम अन्य सहज योगियों के बारे में ख़राब नहीं बोलेंगे।” लेकिन किसी भी सहज योगी को कुछ भी हलके में नहीं लेना चाहिए। हमें वास्तव में बहुत मेहनत करनी है। तो दूसरे सहज योगियों के बारे में ख़राब बात करने की, यहाँ तक कि ऐसा सोचने दूसरी आदत स्वाहा होनी चाहिए। आप सहज योग के धागे काट रहे हैं, जिसे मैंने बहुत ही मधुर तरीके से बुना है। अब आप मेरे लिए उदार हों, मुझे पता है। आप बहुत उदार हो सकते हैं, आपने मुझे बहुत सुंदर पेंटिंग दिया है, मैं आपकी बहुत आभारी हूं। लेकिन ऐसी उदारता दूसरों के लिए भी करने की कोशिश करें। आपको वास्तव में एक साथ बंधे होना चाहिए और तब आप सुनिश्चित कर सकते हैं कि हम क्या निर्माण कर सकते हैं।

आपने देखा कि हमने प्रदर्शनी कितनी अच्छी तरह से की। हर कोई प्रफुल्लित था। हर कोई बहुत खुश था कि आपने इतना अच्छा किया। यह इतनी खुशी की बात थी और हर कोई बधाई दे रहा था, उन्होंने मुझे फोन किया। उन्होंने कहा, “वे एक साथ कैसे हैं? कोई झगड़ा नहीं, कोई लड़ाई नहीं, कुछ भी नहीं। उन्होंने इसे बहुत अच्छा किया। ” तो अपने मन को बताएं कि, “तुम्हारी किसी सहज योगी के खिलाफ सोचने को जुर्रत कैसे हुई”। क्या आप जानते हैं आप सभी उच्चतम क्षमता के संत हैं? और इस तरह की मनहूस, गैर-संवेदनशील चीज़, इतना निम्न स्तर, आप कैसे कर सकते हैं? मैं दूसरों के बारे में ख़राब बोल सकती हूं, मैं कह सकती हूं कि, “वह बुरा है”, बस आपकी परीक्षा करने के लिए। इसलिए कई बार मैं यह देखने के लिए कि आप किसी के बारे में कैसा महसूस करते हैं। अगर मैं किसी के बारे में कुछ बुरा कहूँ, तो चुप रहिए। इसके दो उद्देश्य होंगे। एक यह होगा कि, यदि आप किसी के साथ सहानुभूति रखते हैं, तो मैं कह रही हूं, “सहानुभूति न रखें” क्योंकि आप एक गलत व्यक्ति के साथ सहानुभूति रखते हैं। या हो सकता है कि मैं सिर्फ आपकी परीक्षा कर रही हूं। तो इसे अपने मन में रखें, अगर मैं कहती हूं कि वह व्यक्ति अच्छा नहीं है, तो इसे अपने मन में रखें कि, “क्या मैं उस व्यक्ति के साथ सहानुभूति रखता हूं?” यह नकारात्मक सहानुभूति बहुत आम है। इसलिए तीसरा वादा यह होना चाहिए कि हम सहानुभूति नहीं रखेंगे। यदि आप सहानुभूति रखते हैं, तो-सिम-पेथाइज़ ’का अर्थ है आप दूसरों के दुःख साझा करते हैं’। आपको बस दूसरे व्यक्ति के आनंद को साझा करना चाहिए। इसलिए हम दूसरों के साथ, किसी के साथ भी सहानुभूति नहीं रखेंगे, लेकिन हम दूसरे व्यक्ति से आनंद साझा करेंगे।  किसी दूसरे व्यक्ति का आनंद वाला भाग, हम साझा करने जा रहे हैं और आनंद के लिए प्रयास करेंगे। अच्छी बातें  देखने की कोशिश करें। कुछ लोग बस देख नहीं पाते कि आप किस तरह एक-दूसरे पर हावी होते हैं। यह एक गलत बात है।

अति महत्वपूर्ण विकास में यह जानना महत्वपूर्ण है कि महत्वपूर्ण भाग क्या हैं। यदि आप एक महत्वपूर्ण हिस्से को दबाने की कोशिश करते हैं, तो भी आप विकसित नहीं हो सकते हैं, क्योंकि आप सभी का आधार एक ही है। तो तीसरी बात यह है – आपको यह वादा करना होगा कि अब आप किसी और के साथ सहानुभूति नहीं रखने जा रहे हैं। आप में से कोई भी उतना प्यार नहीं कर सकता जितना मैं कर सकती हूं। और फिर व्यक्ति को पता होना चाहिए कि अगर आपको सहानुभूति है, तो कोई ज़रूरत नहीं है। लेकिन आप में सभी के लिए भावनाएं होनी चाहिए।

अपने स्व के अलावा, जोकि उसकी आत्मा है, अब हर इंसान का एक चरित्र और स्वभाव है। आत्मा अपने स्वयं के रूप में शुद्ध है, यह आपको केवल वायब्रेशन देता है, आपको दायाँ, बाएं और वह सब बताता है। लेकिन हर किसी का एक चरित्र है, जो कि महत्वपूर्ण है, क्योंकि मोमबत्ती में जलने वाली रोशनी की अलग शैली हो सकती है, एक और अलग शैली। देखने में अच्छा लगता है, विविधता अच्छी लगती है, यह आपको सोंदर्य देती है। तो आपको अपना चरित्र पता होना चाहिए। अपने चरित्र का सम्मान करें और दूसरे व्यक्ति के चरित्र का आनंद लें। मैं वास्तव में आपके चरित्र का आनंद लेती हूं और आप अपने चरित्र के प्रति कितने मधुर व्यवहार करते हैं। लेकिन आपका मिज़ाज आपका स्व नहीं है। तेज़ स्वभाव आप को छोड़ देना चाहिए। गुस्सैल स्वभाव भयावह चीज हैं। आप अपने क्रोधी स्वभाव को त्याग दें लेकिन अपने चरित्र के अनुसार व्यवहार बनाए रखें। एक चरित्र कुछ इतना महान है, क्या कुछ इतना प्यारा है, और मुझे वह चरित्र किसी व्यक्ति में दिखता है, और मुझे ऐसा लगता है – ऐसा कैसे है कि वे अपने चरित्र के साथ नहीं बल्कि अपने मिज़ाज से पहचान पा रहे हैं? उदहारण के लिए किसी व्यक्ति को मूर्खतापूर्ण बात कहने का स्वभाव है – ऐसा स्वभाव है। तो आप सिर्फ यह कहें, “यह क्या चल रहा है? मैं क्यों मूर्खतापूर्ण बातें कह रहा हूं? बेहतर हो कि मैं इस से छुटकारा पा जाऊं ”। किसी का स्वभाव बहुत तेज उबलने वाला होता है – तो आप यह सुनिश्चित करें कि यह स्वभाव आपका चरित्र नहीं हो। लेकिन कुछ लोग इतने निम्न स्तर के होते हैं कि आप पायेंगे कि उनके चरित्र में भी कुछ ना कुछ चलता ही रहता है, जो ऐसा है कि – उनका स्वभाव उनके चरित्र के साथ एक हो गया है। इसलिए उन्हें अलग करने की कोशिश करें। सबसे पहले आप अपने आप को अपने स्वभाव से अपने चरित्र से अलग करें, और उस चरित्र में आप अपने प्रकाश को प्रबुद्ध करें। देखिए कि आप कितने सुंदर होंगे, आप एक-दूसरे का अधिक आनंद लेंगे।

अब जब तुम मेरे साथ हो, बेशक, मुझे तुम्हारे बारे में सब कुछ पता है। हर एक चीज़। आपके दिमाग में, क्या चल रहा है, मैं दिमाग पढ़ती हूं। मैं सब कुछ पढ़ती हूं, लेकिन जो मैं देख रही हूं वह आपका प्रकाश है। फिर जो मैं देख रही हूं वह तुम्हारा चरित्र है। मैं आपके स्वभाव से परेशान नहीं हूं, लेकिन एक समय आता है जब यह स्वभाव अधिक प्रभावी हो जाता है। आप इस के माध्यम से इतने पहचाने जाते हैं,  “मैं ऐसा हूँ! मुझे यह पसंद है! क्या करें? मुझे यह पसंद है! यह मेरे साथ होता है। मैं … मैं … मैं … मैं … मैं। ” तो चौथा संकल्प होना चाहिए – अब और “मैं” नहीं अब हम और अधिक ” मैं ” के बारे में बात नहीं करेंगे| “मैं “, “मुझे लगता है”, “मुझे विश्वास है” | तुम कौन हो? “मुझे विश्वास है”-अब आप कौन हैं? क्या आप जीसस क्राइस्ट हैं, जोकि आपकी मान्यताएं और आपके विश्वास इतने महान हैं? तो हमें कहना चाहिए, “हमें विश्वास है”, “हम उस तरह हैं”। हमारे सब के अलग-अलग चरित्र के साथ हमें अब एक शरीर में गतिशील होना है, कहना होगा  “हम”, “हम जो एक व्यक्तित्व का अंग-प्रत्यंग है”। इसलिए हमेशा “हम” कहें, और यह है कि हमें यह जानना चाहिए कि ये मिज़ाज ही ऐसी चीजें हैं जो हमें हर किसी से दूर रखती हैं। मिज़ाज ऐसा हो सकता है जैसे कि  – कोई रोता हुआ बच्चा है। फिर वह व्यक्ति बहुत देर तक रोता रहेगा, जब तक कि मैं अपना सिर नहीं तोड़ दूं। यदि कोई भयभीत व्यक्ति है, तो वह हमेशा की तरह भयभीत रहेगा। आप कुछ भी कहें – भयभीत। यह किसी काम का नहीं। ऐसा क्यों होना चाहिए? आप सामान्य रहें। यदि आपके पास उस तरह का मिज़ाज है तो यह अच्छा नहीं है, आप सामान्य बने ।

कोई व्यक्ति एक आक्रामक व्यक्ति है, या एक गर्म स्वभाव वाला व्यक्ति है। वह हर समय आपा खो देगा। वह फिर से एक तरह का स्वभाव है, वह उसका चरित्र नहीं है। चरित्र छोटी, छोटी चीजों में दिखता है। मैं आपको एक चरित्र प्रदर्शित करुँगी । अब एक व्यक्ति का एक चरित्र है कि वह बहुत उदार है। वह कुछ कहेगा जो बहुत उदार होगा। एक व्यक्ति जो बहुत प्रेमी है, वह कुछ ऐसा करेगा जिससे पता चलेगा कि वह बहुत प्यार करने वाला है। तो आप पहले यह पता कर लें कि आपका चरित्र क्या है। माना कि आप एक प्यार करने वाले इंसान हैं, फिर एक-दूसरे से प्यार क्यों नहीं करते? प्यार की बात क्यों नहीं करते? दयालु क्यों नहीं बनते? हम उसको दबा देते हैं, और हम अपने स्वभाव को अपना मान लेते हैं। और एक बार जब आप अपने स्वभाव को अपना लेते हैं, तो समस्याएं और समस्याएं और समस्याएं होती हैं। वे बुलबुले की तरह हैं। इन स्वभावों का कोई मूल्य, कोई अस्तित्व नहीं है, बेकार है। और वे आनंद के सबसे बड़े हत्यारे हैं। यदि आपके पास एक व्यक्ति है जो विचित्र स्वभाव का है – [आपके पास था। आप सभी को पता होगा कि इस व्यक्ति का यह स्वभाव है – वे भाग जाएंगे।

लोगों के पास काम करने के अपने-अपने तरीके होते हैं, व्यक्ति को उन्हें समाहित  करना पड़ता है, विराट के समक्ष समर्पण करना पड़ता है। हमें अपनी छोटी चीजों को विराट में पूरी तरह से समर्पण करना सीखना चाहिए, और फिर आपको आश्चर्य होगा कि हम अपने विभिन्न चरित्र के बावजूद इतने सौहार्दपूर्ण , इतने एकीकृत हो जाएंगे। आपको अपना अलग चरित्र, बात करने का अलग अंदाज, चलने का अलग अंदाज, अभिव्यक्ति का अलग अंदाज बनाए रखना होगा। लेकिन चरित्र, अगर इसे आगे नहीं लाया जाता है, तो पूरी बात ही इस तरह से भद्दी और भयानक हो जाती है जैसे इन दिनों बदबू, सड़ांध देती पत्तियाँ। लेकिन अगर आप पत्तियाँ, ये पुरानी पत्तियाँ , ये बेकार पत्तियाँ हटाते हैं, तो आपको नीचे सुंदर घास मिलती है। इसलिए किसी को भी अपने मिज़ाज से अपनी पहचान नहीं बनाना चाहिए। सहज योग के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है। आपको पता होना चाहिए कि लोग मेरे कारण नहीं बल्कि आपके कारण सहज योग में आने वाले हैं। वे मुझे नहीं समझ सकते। मैं उनके परे हूं। मैं सातवीं मंजिल का कुछ कहती हूं। वे बस समझ नहीं पाते हैं वे तुम्हें समझेंगे, मुझे नहीं। यह बहुत महत्वपूर्ण है, शायद आप लोग महसूस नहीं करते हैं। आप, सहज योग को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं, आप इसके बारे में कुछ नहीं कर रहे हैं। आप अभी भी चीजों से बहुत लिप्त हैं। आप ऐसा करने के लिए तैयार नहीं हैं, आप वैसा करने को तैयार नहीं हैं, आप इसे या उस को छोड़ना नहीं चाहते हैं।

 तब लोग कहेंगे, “अरे वह सहज योगी है, ऐसा व्यक्ति है।” वह कैसे हो सकता है? उसने क्या हासिल किया है? ” 

आप ऐसा कह भी सकते हैं कि, “मुझे आनंद मिल गया है, माँ ने मुझे आनंद दिया है”, 

पर वे कहेंगे, “नहीं, हम आपके चेहरे पर यह नहीं देख पाते हैं”। आप अभी भी एक-दूसरे की आलोचना कर रहे हैं। अभी भी आप सोचते हैं कि आपका कोई अंत नहीं है, अभी भी आप यहाँ-वहाँ ग्रसित हैं।

तो यह आप हैं, मैं नहीं अपितु आप सहज योग का प्रतिबिंब हैं। वे जानेंगे, वे देखेंगे, “सब ठीक है, वह बिलकुल ठीक है”। मैंने ऐसे लोगों को देखा है जो मेरे संबंधी हैं, वे कहेंगे, “ओह आप हमारी पहुँच से परे हो। कोई भी आप तक नहीं पहुंच सकता है और इसलिए हम कोशिश नहीं करेंगे। ” लेकिन अगर वे देखते हैं कि कुछ लोग कहीं पहुंच गए हैं, तो वे आएंगे। क्या ऐसा नहीं है? इसलिए आप इस तरह के लोग हैं, माना कि मैं सातवीं मंजिल पर रखी गई हूं और आप सभी पहली मंजिल पर हैं। फिर जब आप तीसरी मंजिल पर पहुँचते हैं तो लोग देखने लगते हैं। पहली मंजिल के लोग सातवीं मंजिल को नहीं देख सकते हैं, लेकिन अगर आप कम से कम तीसरी मंजिल पर हैं, तो वे कहते हैं, “ओह, तीसरी मंजिल पर कुछ लोग हैं, आगे बढ़ो!” यह इस तरह से ही है, क्योंकि लोग वही देखते हैं जो वे देख सकते हैं, जो वे नहीं देख पाते हैं वो वह नहीं देखते हैं। इसलिए जब वे आप में परिवर्तन देखते हैं, वे आप में उस सुंदरता को देखते हैं, तो वे जान जाते हैं कि सहज योग है। तो सहज योग की खातिर हमें कुछ चीजों का त्याग करना होगा और मैंने आपको पहले ही बता दिया है कि हमें अपने द्वारा पकड़ी हुई सभी अजीब आदतों या रवैये का त्याग करना होगा, कि आज आपको यह तय करना है कि, “मैं इसे छोड़ दूँगा”, और यह, आज, जैसा कि मैंने आपको बताया, विशेष आशीर्वाद हैं कि, यह काम करेगा। आपको वास्तव में अच्छा सहज योगी बनना है। अब एक दूसरे के साथ तुलना करके आप नहीं बन सकते। एक दूसरे से बात करके आप नहीं बन सकते। यह आपका अपना है, यह आप को ही प्रमाणित करना है कि, “क्या मैं ठीक हूं? क्या मैं एक अच्छा सहज योगी हूं? क्या मैं वास्तव में प्रगति कर रहा हूं? ”। आपको प्रगति करनी चाहिए, यदि आप प्रगति नहीं करते हैं तो आप विकसित नहीं हो रहे हैं। आप सभी को बढ़ना है, और विकसित होना है और उन्नत होना है।

तो सब से अंत में वह दिन जब आप बहुत प्रसन्न हैं| अब यह पहली बार है जब मेरा जन्मदिन लंदन में मनाया जा रहा है, पहली बार विदेश में, और सभी भारतीय सहज योगियों को मेरी अनुपस्थिति खल रही होगी। मुझे यकीन है, सब जगह पर, वे बहुत कमी अनुभव कर रहे होना चाहिए, इसलिए हमें उनके बारे में भी सोचना होगा। अन्य सहज योगियों के बारे में सोचें, वे क्या कर रहे होंगे। उनके बारे में सोचें – आप खुशी महसूस करेंगे। आप बैठकर दूसरों के बारे में सोचते हैं और आप उन लोगों के बारे में सोचकर बहुत प्रसन्नता महसूस करेंगे क्योंकि वे आपके भाई-बहन भी हैं। और इसलिए अच्छा लगता है कि आपके इतने भाई-बहन हैं जो एक ही भाषा बोलते हैं। इसलिए हमें उस सीमा को पार करना होगा की हम इंग्लैंड में हैं – नहीं, हम हर जगह हैं, और आप अपने ध्यान में हो सकते हैं, उन सभी लोगों के बारे में सोचिए जो वहां मौजूद हैं।

 उनके साथ अपने रिश्ते स्थापित कीजिए। उनके साथ अपनी समझ स्थापित करें। आप उन्हें लिखें। जैसा कि हम अपने कलम-मित्रों को लिखते हैं, आप कुछ कलम-दोस्ती pen friend प्राप्त कर सकते हैं और आप लोगों को लिखना शुरू कर सकते हैं। यह बहुत अच्छा विचार होगा यदि आप ऐसा कुछ शुरू करते हैं। लेकिन पत्र लेखन एक और चीज है जो पूरी तरह से धीमा है। आप देखते हैं कि,  इस तथ्य के बावजूद कि मैं इतनी व्यस्त हूं, मैं किसी भी अन्य जो आप में से कोई भी लिख सकता है, से अधिक पत्र लिखती हूं। आप जानते हैं कि मैं कितनी व्यस्त रहती हूं। उसके बावजूद, मैं पत्र लिखती हूं। लेकिन मैंने देखा है कि अंग्रेज सहज योगियों के पास पत्र लिखने का समय नहीं है। कोई भी विश्वास नहीं कर सकता है कि उनके पास पत्र लिखने का भी समय नहीं है। सबसे पहले हमें यह तय करना चाहिए कि बहुत अधिक, हर बात में  “बहुत अधिक” से बचा जाना चाहिए। जितना हम खाते हैं, एक-दूसरे से बात करते हैं, कितना समय बिताते हैं, आइए हम इसके बारे में फैसला करते हैं, इसके बारे में पता करते हैं, और फिर आप आश्चर्यचकित होंगे कि यदि आप वास्तव में समय का पता लगाते हैं, तो आप देखेंगे कि आपके पास बहुत सारा समय है जो आप बचा सकते हैं। तो ऐसे व्यक्ति के पास जिसके पास सीमित पैसा है, वह बैठ जाता है एक बजट बनाता है। उसी तरह आप अपनी टाइमिंग का बजट बनाएँ। आप हमेशा व्यस्त रहते हैं – करते क्या हैं? तो चलिए हम उस समय का पता लगाते हैं, उस समय का जब आप खुद को विकसित होने के लिए देना होता है, वह समय जो आपके व्यक्तिगत ध्यान के लिए आवश्यक है, जो आपके विकास के लिए आवश्यक है, जो आपको देना चाहिए। यह समय ही बकाया है जिसका कि आपको भुगतान करना पड़ता है चूँकि आप सभी आत्मसाक्षात्कारी हैं इसलिए यह आप कि जिम्मेदारी है।

इसमें सबसे अच्छी बात विवेक का उपयोग करना है। एक बार बैठो और विवेक से इस पर सोचो, “माताजी ने हमें बोध दिलाया है, सब ठीक है। अंकुरण शुरू हो गया है, सब ठीक है। हम कहाँ है? हम कहाँ तक पहुंचे हैं? क्या हमें अपनी जड़ें भी मिली हैं या नहीं? क्या आपको तना प्राप्त हुआ है या नहीं?  हम कहाँ है?”  बस खुद अपने लिए खोज लो। मुझे पता है कि माताजी आप सभी को खींच रही हैं और आप सभी को इसमें खींच लिया गया है। आपको सभी को निश्चित ही गति करना, चलना ही होगा कहीं भी लेकिन अगर आप (आप सभी )अपने प्रेरक बल देते हैं। एक व्यक्ति को भी पीछे नहीं छुट जाना चाहिए, क्योंकि उसका वजन हमें वापस खींचने वाला है? क्या ऐसा नहीं है? इसलिए मैं कहती हूं कि यह स्वार्थ है। अगर कोई पिछड़ जाता है, तो फिर उस वजन को भी हमें फिर से खींचना होगा।

तो क्या होता है, यह उस कहानी की तरह है कि एक व्यक्ति जो तीन कदम आगे और पांच कदम पीछे चलता है। वह कब पहुंचेगा? वह कभी नहीं पहुंचेगा| वह कब पहुंचेगा?  देखिये, यह ऐसा प्रश्न है जो वे गणित में पूछते हैं, “वह कब पहुंचेगा?”  ऐसे लोग जो आगे की ओर से भी तेज़ गति से पीछे की ओर जाते हैं। इसलिए हर किसी को यह तय करना चाहिए कि, “मैं पीछे की ओर जा रहा हूं, मुझे आगे बढ़ना चाहिए।” ऐसा करके आप पूरे विकास में मदद कर रहे हैं, और यह सहज योग के लिए आदर्श चीज होगी। तो आपकी व्यक्तिगत उन्नति सब ठीक होनी चाहिए, और आपकी सामूहिक वृद्धि बिलकुल ठीक होनी चाहिए। इस में कुछ ज्यादा नहीं लगता। आपको ध्यान करना है। तुम्हें निर्विचार में बैठना है। आपको अपनी सोच छोड़नी होगी। निर्विचार में होने की कोशिश करो, निर्विचार में होने की कोशिश करो, और तुम हैरान हो जाओगे कि बात कैसे निखर जाएगी|

अगले साल मैं कई और लोगों को देखना चाहती हूं। इसके अलावा मैं हर किसी को तरक्की करते हुए देखना चाहती हूं। यदि आप हजारों बिना गुणवत्ता के लोग को पाते हैं, तो क्या उपयोग है| हम उनके साथ क्या करेंगे? हमारे पास गुणवत्ता के लोग होना चाहिए, जो लोग इसे कार्यान्वित करेंगे, जो इसे प्राप्त करेंगे। जो पहचाने जाते हैं लेकिन काम नहीं कर रहे हैं वे बेकार हैं। इसलिए हर किसी को इस पर काम करना चाहिए, कड़ी मेहनत करनी चाहिए। दूसरों की आलोचना न करें, सहानुभूति न रखें और अपनी प्रगति के साथ और आगे बढ़ें।

एक अन्य दिन मैं ‘आश्रम’ शब्द का अर्थ ढूंढ रही थी , ‘उसका अर्थ है’ तपस्वियों के रहने का स्थान ‘। आश्रम एक जगह है, अगर आपको वहाँ जाना है, तो अपना सारा सामान वहाँ न ले जाएं। आपको वहां बहुत कम चीजें ले जानी हैं। आपको एक आश्रम में दो या तीन कपड़ों के साथ रहने में सक्षम होना चाहिए। आप देखें, आश्रम एक ऐसी जगह है जहाँ आपको संयमी होने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है, जहाँ आपको प्रशिक्षित किया जाता है कि आप अपनी इंद्रियों को कैसे नियंत्रित करें, कैसे अपने चित्त को नियंत्रित करें। लेकिन वहाँ भी हम करते क्या हैं? आइए जानें, हम अपने चित्त को नियंत्रित करने के लिए क्या करते हैं? सबसे अच्छी बात यह है कि जब आप आश्रम में जाते हैं – अपने आप को कठोर उपचार के लिए ले जाएं, बिल्कुल कठोर उपचार, “अभी हम आश्रम में हैं, चलो सब आगे चलें”। सुबह आप उठते हैं, आप ऐसा करते हैं, आप ऐसा करते हैं, और आप इसे इस तरह से कार्यान्वित करते हैं कि आप इसे सुनिश्चित करें कि एक बार जब आप आश्रम से बाहर निकलें, तो आप बिल्कुल सिद्ध हों। ऐसा वह आश्रम होना चाहिए। जबकि लगता ऐसा है कि आश्रम में, अगर आप जाते हैं, तो लोग बिगड़ जाते हैं। सबसे आश्चर्य की बात है। और यहां तक ​​कि उन्होंने मेरे पति को भी बताया। उन्होंने कहा, “किस तरह के आपके आश्रम  है जो लोग आश्रम में जाते हैं और अधिक ग्रसित होते हैं?” यह किस प्रकार का आश्रम है? ”। इसका कारण यह है कि आश्रम में रहने वाले लोगों को एक निश्चित अनुशासन बनाए रखना चाहिए, और सुबह उठकर बहुत अधिक चाय का सेवन नहीं करना चाहिए।

हर चीज में संतुलन होना चाहिए, कम करते जाएँ। सब कुछ आप कम कर सकते हैं। देखें, यदि आप अपनी चीनी को कम कर सकते हैं तो यह अच्छा होगा। मैं आपको बताती हूं कि चाय कैसे छोड़ना है, बहुत आसान है। आप सबसे पहले चीनी लेना बंद करें – आप में से आधे लोग लेना छोड़ देंगे। फिर आप चाय में कोई भी दूध लेना बंद कर दें – फिर बचे हुए दूसरे आधे छोड़ देंगे, और फिर आप अपनी चाय बंद कर देंगे। इस तरह यह काम करेगा लेकिन किसी को उस अति पर भी जाने की जरूरत नहीं है कि आप चाय छोड़ दें। लेकिन यह भी एक अन्य अति है कि, चाय के बिना आप एक दूसरे से बात  भी नहीं कर सकते, हर बार चाय होनी चाहिए। अब, बस अब आपके पास चाय नहीं है, कुछ भी नहीं, आप अच्छी तरह से बैठे हैं। सुबह से आप उठे हैं, आप बहुत ताजा और अच्छे दिख रहे हैं, कोई भी थका हुआ नहीं है। लेकिन, “मैं थका हुआ हूँ, मेरे पास चाय होनी चाहिए”। ये सभी चीजें एक साथ काम करती हैं। तो सहज योग, और स्वयं का सहज योग से संबंध के प्रति बहुत ही व्यावहारिक दृष्टिकोण रखना होगा। अगले साल मेरी उम्र 58 साल होगी। मुझे नहीं पता कि मैं लंदन में रहूंगी या जहां भी हूं, या हम इसे भारत में मना सकते हैं। हम सभी भारत जा सकते हैं, लेकिन यह अच्छा नहीं लगता अगर यहां से सहज योगी मेरे साथ आते हैं और वहां के सभी सहज योगी चौंक जाएंगे और आपको देखकर कहेंगे, “यह क्या है?” हम समझ नहीं पाते कि,आप ऐसे क्यों हैं”? यह अच्छा नहीं होगा। अब अगली बार हम ऐसा नहीं करेंगे। अगली बार हम वहाँ ज्यादा साफ-सुथरे, ज्यादा बेहतर जाने वाले हैं, । क्यों नहीं इसमें प्रतिस्पर्धा करें? आलस्य के बजाय, प्रतिस्पर्धा क्यों नहीं? अगर वह चार बजे उठ रहा है, तो मैं क्यों नहीं उठ सकता चार से पन्द्रह मिनट पहले ? यदि, कम से कम, चार से पाँच मिनट पहले। आइए हम इन चीजों में प्रतिस्पर्धा करने की कोशिश करें और यह काम करेगा। यदि आप इसे करना चाहते हैं, तो यह करना बहुत आसान है। लेकिन भारत जा रहे हैं और वहाँ हर कोई कह रहा है कि, “लंदन के सहज योगी, हे भगवान! क्या सिरदर्द है, वे अब आ रहे हैं, हमें उन्हें स्वच्छ करना होगा वगैरह। उन्हें अब तक बहुत अजीब अनुभव हुए हैं।

अगली बार मैं आप सभी से निवेदन करूंगी कि एक वर्ष के लिए अपने आप को परिश्रम से तैयार करें। केवल एक वर्ष के लिए प्रयास करें, इससे अधिक नहीं। यदि आपको पढाई करना हो, जैसे चिकित्सा शास्त्र, तो आपको सात साल तक अध्ययन करना होगा। आपको जो कुछ भी करना है आपको सालों तक लगातार अध्ययन करना होगा, आपने अभी किया है! इसलिए एक साल पूर्ण श्रद्दा से आप इसे करिए सुनिश्चित करें कि आप दूसरों के साथ आनंद, खुशी और दोस्ती में रहते हैं, और खुद पूरी तरह से मेहनत से और कठोर कारावास में। केवल तभी यह काम करने जा रहा है। दूसरों के साथ (माँ हँसती है) बहुत सारा प्यार, बहुत सारी दोस्ती, मिठास। अपने आप को पूर्ण सश्रम कारावास के साथ। यदि आप क्रोधी हैं, तो आईने के सामने खड़े हों और जब आप क्रोधित होते हैं, तो अपने आप को देखें – आपको इससे छुटकारा मिलेगा, आप कर के देखें।

फिर, सभी प्रकार की चीजों को ठीक किया जा सकता है। यदि आपको कोई समस्या है, तो मुझे पूछें, मैं आपको बताउंगी कि यह कैसे करना है, अपने अहंकार को कैसे निकल बाहर करना है, सब कुछ मैं आपको व्यक्तिगत रूप से बता सकती हूं। लेकिन आप इन समस्याओं से बाहर आ जाएँ, आप कहें कि , “माँ, यह मेरी समस्या है, यह मेरी समस्या है। मुझे नहीं पता, मैं यह कर रहा हूं, इसे कैसे हल किया जाए? “और यह बात काम करेगी। लेकिन, खुद को धिक्कारने से आप इसे सुलझा नहीं सकते हैं। यह एक और फैशन है, “मैं बहुत बुरा हूं, मैं अच्छा नहीं हूं”, ऐसा कहना भी एक चलन है। आप पूरी तरह से ठीक हैं, आपके साथ कुछ भी गलत नहीं है। केवल एक बात कि आपको इसे कार्यान्वित करना होगा और आपको ऊपर उठाना होगा।

इसलिए एक साल जो खत्म हो रहा है, अगले साल के लिए हमें वादा करना होगा, हमें माताजी के जन्मदिन के दिन वादा करना होगा। आपने मुझे इतनी अच्छी, सुंदर चीजें दी हैं। मैं उनसे प्यार करती हूं, ऐसी अच्छी बातें। लेकिन मुझे आपको बताना है कि इस बार मैं आपको सहज योग का अनुशासन दे रही हूं। खुद को अनुशासित करें। अनुशासन बहुत महत्वपूर्ण है। यदि आप खुद को अनुशासित नहीं करते हैं, तो कोई भी पेड़ जो अनुशासित नहीं है, वह ठीक से विकसित नहीं हो सकता है। आपको खुद को अनुशासित करना होगा। यदि आप अनुशासन करना नहीं चाहते हैं, तो केवल आप मेरे कार्यक्रम में आएँगे और मुझसे कोई फायदा नहीं होगा। आपको अपनी गहराई को विकसित करना होगा, आपको इसमें गहराई तक जाना होगा और इसके लिए काम करना होगा।

इस वर्ष हमारे बहुत से अन्य कार्यक्रम होने वाले हैं जिन के बारे में मैंने पहले ही अन्य लोगों से बात की है। आप उनसे पता लगा सकते हैं। हम पेरिस जा रहे हैं, हम स्विट्जरलैंड जा रहे हैं। हम अमेरिका जा रहे हैं और आपके पास बहुत समय होगा। लेकिन जब आपके पास कोई काम नहीं होता है, तब भी जब आप अकेले होते हैं, तो आप इसे पूरा कर सकते हैं। हर पल आपको इस पर कार्य करना होगा। इस वर्ष आप वास्तव में समर्पित करते हैं, समर्पण का वर्ष, अपने आप को पूरी तरह से सुधारने, इसे पूरा करने, नियमित रूप से मिलने और इसे करने के लिए। केवल लेखन ही नहीं। उदाहरण के लिए, समिति की बैठक में, हर कोई वहाँ है। अब आप सभी चर्चा करते हैं, इसे पेपर में लिखते हैं, ठीक है। “हमें यह करना है, हमें यह करना है, हम सभी चार बजे उठेंगे” और छह बजे तक हर कोई खर्राटे ले रहा है, इस तरह की चीज मदद करने वाली नहीं है। इसलिए हमें इस पर काम करना होगा क्योंकि यही वह चीज है जो हमारे लिए है। यह इतनी सुंदर चीज है थोड़ा प्रयास और कैसा आनंद, थोड़ा प्रयास और कैसा व्यक्तित्व! थोड़ा प्रयास और कितनी शक्ति! थोड़ा प्रयास और क्या एक सामूहिक ताकत!

इसलिए थोड़ा सा प्रयास, “क्या मैं जितना डाल सकता हूं उससे कहीं अधिक मैंने डाला है?” और “मैं थक गया हूँ” के इस विचार को छोड़ दो। किसी को भी दिल का दौरा नहीं पड़ने वाला है, इस का जिम्मा मैं लेती हूँ। किसी को हृदयाघात नहीं होने  वाला, इस कि जिम्मेदारी मैं लेती हूँ| आपके पास बहुत सारी ऊर्जा है, लेकिन इसे सही दिशा में डालें। जो हम सभी की मदद करने वाला है। इसके अलावा, मैं आपसे सुझाव लेना पसंद करुँगी। आप बैठिये, अन्य कार्यक्रमों की व्यवस्था के लिए एक दूसरे से बात करें। मैं ब्राइटन भी जा रही हूं, हमने ब्राइटन के लिए भी उन तारीखों को तय किया है। लेकिन अन्य स्थानों पर, जहाँ भी आप चाहते है कि, मुझे जाना चाहिए| जैसे, एडिनबर्ग या कोई भी जगह। मैं यहीं हूँ जैसे मई, जून, जुलाई में। जब भी आप कहेंगे हम करेंगे, हम इसे तय कर देंगे। लेकिन सप्ताह के दिनों में मैं जा सकती हूं, सप्ताहांत मुश्किल है। हमने पहले ही पेरिस वगैरह के लिए सप्ताहांत की बात तय कर दी है। लेकिन सप्ताहांत मेरे लिए मुश्किल है क्योंकि मुझे कोई अन्य कार्यक्रम में भाग लेना है। इसलिए अब मैं आपके साथ हूं जो भी आप चाहते हैं करें। लेकिन सबसे पहली और महत्वपूर्ण बात यह है कि आपको बिलकुल ठीक होना है।

आपको सहज योग सीखना है, आपको जानना है, आपको विशेषज्ञ बनना है। मैंने ऐसे लोगों को देखा है जो केवल कल आयें हैं, वे महान विशेषज्ञ बन गए जबकि वे जो सात साल से घिसट रहे हैं, वे अभी भी धीमे हैं। इसलिए हम सभी को उस तरह से काम करना होगा और अपने आप पर विश्वास होना चाहिए क्योंकि मुझे आप पर विश्वास है। मुझे आप पर बहुत विश्वास है और मैं उस सुंदर समय को देख पाती हूं जो हम एक साथ व्यतीत करने जा रहे हैं और वास्तव में पूरी तरह से आनंदित होने जा रहे हैं। बिल्कुल हम आनंद लेने जा रहे हैं। आप किसी बात से भयभीत ना हों, कोई भी ऐसा कदम न उठाएं जो दूसरे लोगों के मिज़ाज को बिगाड़ सके।

या तो आप आक्रामक हैं या गैर-आक्रामक हैं। लेकिन ऐसा कभी होता नहीं है। अगर आप आक्रामक हैं तो आप आक्रामकता छोड़ देते हैं तो आप डरपोक व्यक्ति बन जाते हैं। सहज योग में कायरता का कोई महत्व नहीं है। मैं कायर लोगों के साथ क्या करने जा रही हूँ – डरपोक, थका हुआ, निढ़ाल? यदि आप थके हुए हैं, तो कुछ टॉनिक लें, ठीक हो जाएं। आप सभी को अच्छा स्वास्थ्य प्राप्त करना चाहिए, और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आप वास्तव में उस चमकते निखर को प्राप्त करें। आप मानेंगे नहीं कि, आपकी माँ बहुत मेहनत करती है। बहुत कठोर श्रम उसे आप के साथ काम करना है, और मुझे वास्तव में आपको खींचना होता है, वास्तव में आपको खींचना है। लेकिन फिर भी तुम मुझे बहुत खुश पाते हो क्योंकि मैं कुछ ऐसा देखती हूं जो इतना सुंदर है, इतना अच्छा है, इतना प्यारा है, इतना महान है, और जब भी मैं ऐसी कुछ बात देखती हूं तो बस कहती हूं, “यह सब खत्म हो जाएगा सभी सूखे पत्ते हैं, उन्हें जाना होगा, शरद ऋतु खत्म हो जाएगी और वसंत आ जाएगा। ” इसलिए आप देखते हैं, मैं इसे भूल जाती हूं, और मुझे सिर्फ इस बात की परवाह नहीं है कि मैंने कितना काम किया है, मुझे कितना काम करना है।

लेकिन एक-दूसरे पर भरोसा रखें, एक-दूसरे से प्यार करें और अधिक विश्वास और अधिक प्यार और समझ दें और,  किसी भी प्रकार की सहानुभूति न दें। इसलिए मैं नहीं जानती कि उस समारोह को इतना सफल बनाने के लिए आपको बार-बार धन्यवाद कैसे देना चाहिए। लोग इसके बारे में बहुत खुश हैं और हम जा रहे हैं, हम 24 तारीख को आने वाले कल के कार्यक्रम का इंतजार कर रहे हैं और यह वास्तव में हम सभी के लिए बहुत ही भारी दिन है। तो आज की इस बात के बाद, आप जान जाएंगे कि आप अब बहुत बेहतर हैं। इसे बनाए रखें। अपने आप को बंधन में रखो। अपने आप को कमर कस लें, और “ईसा के अग्र सैनिक हों”। यह ऐसा ही है, हमें इसी तरह से रहना है। हम प्यार करने वाले लोग हैं। हम प्यार करते हैं। हम प्यार बांटते हैं। हम प्रेम का उत्सर्जन करते हैं, और हमें वह चित्र और वह छवि बनानी होगी, जब लोग देखेंगे तो वे कहेंगे, “ओह, ये सही प्रकार के लोग हैं”। हमें किसी भी विशेष तरह के कपड़े या कुछ भी पहनने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन केवल आप लोगों कोदेख कर,  इस तरह खिलते हुए लोग देखकर लोगों को यह विश्वास करना पड़े कि आप सभी महान हैं। आपने पहले से ही उस प्रदर्शनी में अपना महान काम दिखाया है और लोगों को अभिभूत किया कि आप लोग कितने रूपांतरित हैं और आप कितने महान हैं। मेरा मतलब है कि वे वास्तव में अभिभूत थे कि आपने पूरे काम को इतनी अच्छी तरह से और व्यवस्थित रूप से कैसे किया। तो फिर से मुझे याद दिलाना है, इस दिन हमें अपनी माँ से वादा करना होगा कि, “माँ, इस साल हम वास्तव में आपसे वादा करते हैं कि हम बहुत मेहनत करेंगे। हम बहुत करुणामय होंगे, दयालुता से भरे। लोगों पर हँसो मत – यह आपका अधिकार नहीं है, ऐसा करना उचित तरीका नहीं है, आप देखते हैं कि आपको हँसना नहीं चाहिए, यह अच्छा व्यवहार नहीं है। बस देखने की कोशिश करो, व्यक्ति क्या कह रहा है। यहां तक ​​कि अगर वह बेवकूफ है, तो भी हंसी का कोई उपयोग नहीं है। बस देखें कि वह क्या कह रहा है, उसका दृष्टिकोण क्या है, और यह सब मेरे सभी बच्चों की एक बहुत ही सुंदर छवि को सामने लाएगा, जिन्हें मैं बहुत पसंद करती हूं। मैं प्यार करूंगी और प्यार करूंगी। जो कुछ भी हो मैं तुम्हारी अपनी रहूँगी। लेकिन फिर भी, मेरे प्यार में मैं आपसे अनुरोध करती हूं कि मैं तब तक प्रसन्नता महसूस नहीं कर सकती जहाँ तक और जब तक मैं आप को अपने जैसा ही नहीं बना देती। ठीक है?

आपका बहुत बहुत धन्यवाद।