Easter Puja: The Meaning of Easter

London (England)

1980-04-06 The Meaning Of Easter, Dollis Hill Ashram, London, UK, 31' Download subtitles: EN,IT,RO,TRView subtitles:
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                                            ईस्टर पूजा, ईस्टर का अर्थ

 डॉलिस हिल आश्रम, लंदन (यूके)। 6 अप्रैल, 1980

… जैसे आज, मैं एक मुस्लिम लड़के से बात कर रही थी और उसने कहा कि “मोहम्मद साहब अवतार नहीं थे।” 

“तो वह क्या थे?”

 “वह एक इंसान था, लेकिन भगवान ने उसे विशेष शक्तियां दी हैं।”

 मैंने कहा, “बहुत अच्छा तरीका है!” क्योंकि अगर आप कहते हैं कि वह एक इंसान था तो,  इंसानों के लिए, यह कहना बहुत अच्छा हो जाता है कि “वह महज एक इंसान था, वह इस धरती पर आया था और हम उसी के बराबर हैं।” जो कि,  वास्तव में तुम नहीं हो। तो जैसा कि आप इसे कहते हैं, विस्मय और वह श्रद्धा, हमारे अंदर नहीं आती है। व्यक्ति सोचने लगता है कि वह ईसा-मसीह के बराबर हैं, मोहम्मद साहब के साथ, इन सभी लोगों के बराबर! जबकि वे कहां हैं? और हम कहाँ हैं?

जैसे, यहाँ, लोग कैसे ईसा-मसीह के जीवन के साथ कैसे खिलवाड़ कर रहे हैं! वे खुद को ईसाई कहते हैं, और वे उनके जीवन के प्रति कोई सम्मान नहीं दिखाते हैं, क्योंकि उन्होंने जो बातें की वह “कुछ बनने “के बारे में थी। उन्होने इन सभी निरर्थक बातों के बारे में बात नहीं की। दूसरे, हम कोई सम्मान प्रदर्शित नहीं करते हैं। हमारे दिल में कोई खौफ नहीं है कि वह वही है जिसने ब्रह्मांड के बाद ब्रह्मांड बनाए हैं, और हम उसकी तुलना में क्या हैं? हम जजों की तरह उस पर बैठते हैं, उसका आकलन करते हैं। मनुष्य के पास कितना अहंकार है! बुलबुले की तरह।

निश्चय ही, वह स्वयं ब्रह्म तत्व, दिव्य प्रेम से ही बने थे, इसलिए उन्हें मारा नहीं जा सका। इसके अलावा उन्हें कृष्ण के बाद पैदा होना था क्योंकि कृष्ण ने कहा था कि, “भगवान की यह दिव्य शक्ति मरती नहीं है। यह मारा नहीं जा सकता है। ” बस यह साबित करने के लिए, उन्होने यह रूप, ईसा-मसीह का यह साकार रूप लिया और इस धरती पर आये। लेकिन इंसान, कुछ भी देखने के लिए उनके पास कोई दृष्टि नहीं है। वे जानते हैं कि एक हीरा क्या है, वे जानते हैं कि एक कीमती कपड़ा क्या है, लेकिन वे नहीं जानते कि उनका इस धरती पर आगमन यह कितनी कीमती चीज थी। अब तो सोचो! स्थिति भयानक थी। ईश्वर या प्राप्ति के बारे में किसी से बात करने का कोई सवाल ही नहीं। लेकिन यहां तक ​​कि खुद धर्म के बारे में बात करने के लिए, धार्मिकता, बहुत मुश्किल थी। मेरा मतलब है कि उन लोगों को किस अज्ञानता ने ढँक लिया होगा कि उन लोगों ने उन्हें क्रूस पर चढ़ाया!

फिर, शिष्यों ने भी कभी ईसा-मसीह को नहीं पहचाना। जब उन्हें क्रूस पर चढ़ाया गया तो उन्होंने कहा, “अब वह मर चुका है।” फिर जब वह उठे तो किसी को विश्वास नहीं हुआ। कफन के बारे में भी उनके पास सभी प्रकार के सिद्धांत हैं जो उन्हें मिला था। बेशक, एक कपड़ा था जो उसके चेहरे पर बंधा हुआ था जिसे ऊपर खींचा गया था, इसीलिए उसका चेहरा लम्बा और अस्त-व्यस्त लग रहा था। लेकिन वह कपड़ा वहीं रह गया था। मेरा मतलब है, उस कफन के बारे में इतना महत्वपूर्ण क्या है? मैं नहीं समझ सकती यह मसीह का खून है। खुद पर शर्म आनी चाहिए। जिस अज्ञानता से लोगों ने उसे देखा।

आप कल्पना नहीं कर सकते! यदि आप उस दृष्टि कोण से देखते हैं कि कैसे लोग अपने अहंकार के साथ खुद को प्रबंधित कर रहे हैं और पूर्ण अंधकार में रह रहे हैं और स्वयं को प्रमाणित कर रहे हैं कि वे ऐसे लोग हैं जो ईश्वर का भी आकलन कर सकते हैं!

और मुश्किल से ही उन्होंने उसे तीन या चार साल तक जीने दिया। उसने किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया। आप इसके लिए किसी समुदाय को दोष नहीं दे सकते। अगर वह भारत में पैदा होते, तो वे भी ऐसा ही करते। उन्होंने मोहम्मद साहब को क्या किया? एक ही बात।

लेकिन इतने सारे चोर क्यों हैं, जैसा कि उनके जीवन में दिखाया गया है – केवल एक विरोधाभास  – कि को बाहर निकलने की अनुमति थी? यह समझौता क्यों संभव था और ऐसा यह ईसा-मसीह के साथ क्यों नहीं था? क्या आज हम भी हमारे साथ ऐसा ही करते हैं? कि हम खुद,  चोरों के साथ जोकि नकारात्मक लोग हैं, समझौता करते हैं,  और हम मसीह को क्रूस पर चढ़ाने से बुरा नहीं मानते।

अब, जैसा कि आप जानते हैं कि उन्होंने सभी ब्रह्माण्डों का निर्माण किया। ‘ब्रह्माण्ड’ का अर्थ है ‘an universe’’। अब, सूर्य का ब्रह्मांड, उस ब्रह्मांड से पृथ्वी बाहर आ गयी; उसमें से आप बाहर आ गए हैं। और आपके आज्ञा चक्र में उन्होंने जैसा कि वे इसे कहते हैं, एक छोटा विराट बनाया है, । वह आपके आज्ञा चक्र के भीतर मौजूद है।

यह बलिदान अत्यधिक महत्वपूर्ण है। और, यद्यपि यह स्थूल है, हुआ यह सूक्ष्म में है। अपने सूली पर चढ़ाये जाने के द्वारा चेतना को आज्ञा के इस चक्र में से ले जाने का कार्य ईसा-मसीह ने किया था। वह एक सामान्य इंसान की तरह आये, जैसे एक स्थूल व्यक्तित्व। उसका शरीर मरा, लेकिन वह मर नहीं गया, क्योंकि उसका वह शरीर भी उस अविनाशी दिव्य चैतन्य से बना था, जैसा कि आप कहते हैं, इस ब्रह्म की किरणों से। वे नहीं मरे। और इस कारण शरीर की मृत्यु नहीं हुई और वह अपने शरीर के साथ जीवित हो गया। उन्हें यह दिखाने के लिए मरना पड़ा कि हालांकि शरीर मर जाता है, उसे बचाया जा सकता है। इसलिए उसे क्रूस पर चढ़ाया जाना था। अन्यथा वह आपको यह प्रदर्शित नहीं कर सकते थे।

लेकिन वास्तव में, यह वैकुंठ में प्रयोग किया गया था जैसा कि आप इसे कहते हैं: कि वह मर गया और फिर जीवित हो गया; यह दिखाने के लिए कि यह मरता नहीं है। कृष्ण ने कहा है, “नैनम छीदंति शस्त्राणी, नैनम दहति पावकः” (अर्थ) “यह किसी भी हथियार से नहीं मारा जाता है, न तो इसे किसी आग से जलाया जा सकता है, “ना चैनम क्लेदयांता अपो, ना शोषयति मरुतः” (अर्थ) ” न ही इसे किसी हवा से उड़ाया जाता है, न तो, कुछ भी नहीं चूस सकता है।”  वो वह आत्मा है।

जब उन्होंने उसे पुनर्जीवित होते देखा, तो कहने लगे, “ओह! वह वही था!” तब उनके शिष्यों ने उनका विश्वास किया।  कैसा अज्ञान, क्या अंधकार! कैसा अंधकार! यह एक चींटी को मानव सभ्यता के बारे में  बताने के सामान है।

और स्थूल में यह घटना तब घटित हुई, जब सूक्ष्म में भी,  वैसी ही घटना घटित होना पड़ी।

जैसे जब आप कहते हैं कि मूसा ने नदी को पार किया, तो यह आदि गुरु द्वारा भवसागर पार किए जाने वाली घटना थी। तो, जो कुछ भी सूक्ष्म में, किया जाता है वह स्थूल जगत में इस तरीके से व्यक्त किया जाता है। और ठीक यही तब हुआ जब ईसा-मसीह को क्रूस पर चढ़ाया गया था।

लेकिन आप फिर से उन्हें क्रूस पर नहीं चढ़ा सकते। अब वह एकादश रुद्र बन गये हैं, जैसा कि वर्णित है – ग्यारह रुद्र जो आप बहुत अच्छी तरह से जानते हैं। ये सभी शिव की शक्तियां हैं।

अब तक, जब तक वह पैदा नहीं हुआ, तब तक कृष्ण ने उसे अपनी शक्तियां दीं, और इस के द्वारा वह महा विराट बन गये। उन्हें कृष्ण के भी ऊपर स्थापित किया गया। लेकिन अब, जब वह आयेंगे, वह शिव की विनाशकारी शक्तियों से आशिर्वादित होगा, उनमें से ग्यारह। उन में से केवल एक भी सभी ब्रह्मांडों को खत्म करने के लिए पर्याप्त है। और जो ईसा-मसीह के भविष्य में आगमन के रूप में वर्णित है।

अब आप उन्हें क्रूस पर नहीं चढ़ा सकते। और अब हम सभी के लिए वो समय आ गया है कि हम सभी उनके आगमन के लिए तैयार हो जाए। हम अभी तक उनका स्वागत करने के लिए तैयार नहीं हैं। जब तक आपको बोध प्राप्त नहीं हो जाता है, तब तक आप उसे प्राप्त नहीं कर सकते हैं, क्योंकि यदि उन के आने तक आप आत्मसाक्षात्कार प्राप्त नहीं करेंगे, तो आप समाप्त हो जाएंगे, आप समाप्त हो जाएंगे, आप नष्ट हो जाएंगे। वह केवल सभी निरर्थक चीजों को नष्ट करने के लिए आएगा। तो इस कम समय का उपयोग आपकी मुक्ति और आपके विकास के लिए किया जाना चाहिए।

लेकिन जब हम ईसा-मसीह के बारे में सोचते हैं, तो इंसान कि तरह के दिखावे करता है। सभी प्रकार के ढोंग: जैसे वे कार्य करते हैं, वैसा ही कार्य करते हैं कि कैसे मसीह को क्रूस पर चढ़ाया गया। वे सभी सुंदर गहने और सब कुछ पहनेंगे और वे इसका अभिनय करेंगे। यह इसका मजाक बन रहा है।

यदि आपको वास्तव में पुनरुत्थान के लिए आना है तो आपको अपने भीतर आज्ञा  चक्र में ईसा-मसीह को जागृत करना होगा। यदि आप ऐसा नहीं कर सकते, तो यह सब अभिनय, यहां तक ​​कि मैंने स्पेन में कुछ लोगों को देखा है, वे कहते हैं, वे क्रूस पर चढ़ने का अभिनय कर रहे है। मेरा मतलब है, यह इस दुनिया में मजाक चल रहा  है। हम ढोंग और झूठ के साथ जी रहे हैं। ये सभी चीजें हमें कहीं नहीं ले जा रही हैं। हमें खुद का सामना करना होगा। हमें अपने भीतर ईसा-मसीह को जागृत करना होगा। हमें उन के प्रति पूरी समझ के साथ नत होना होगा कि वह कितने महान हैं|

इसके विपरीत, हम हमेशा ऐसे लोगों की तरफ झुकते हैं जो दिखावा करते हैं, जो उस में से एक सर्कस बनाते हैं। ऐसा मज़ाक हर जगह है! यह क्रॉस को ढोना या इसका कोई ड्रामा मेरा मतलब है, यह इतना दुखदायी बात थी। और इस का अभिनय करना  – मुझे नहीं पता कि लोग ऐसा क्यों करना चाहते हैं। मैं अभी नहीं समझ सकती हूँ,  मैं इसे सहन नहीं कर सकती|

लेकिन अगर आपके पास भावनाएं हैं, तो आप स्वयं अपने भीतर देख सकते हैं कि: बलिदान होना और फिर से जीवित होना, यह एक समारोह, एक अनुष्ठान नहीं हो सकता। यह वास्तविकता है, यह बनने की घटना है यह कोई नाटक नहीं है। और लोग चाहते हैं कि ऐसा ही एक ड्रामा देखें और संतुष्ट रहें।

हमारे लिए सहज योगियों के लिए मसीह के जीवन के महत्व को समझना महत्वपूर्ण है। यह कि उनका शरीर ही एकमात्र शरीर था जो इन विकिरणों से बना था। अन्य सभी शरीर मानव शरीर थे। सभी अवतार, यहां तक ​​कि कृष्ण के भी, जब वह इस धरती पर आए थे, तो उनके मानवीय गुण थे – कि उनके शरीर में पृथ्वी माता का अस्तित्व था। अब धरती माँ एक चुंबकीय शक्ति के रूप में मौजूद है, वह एक चुंबकीय शक्ति के अलावा कुछ भी नहीं है। यदि ईसा-मसीह की ऊर्जा का एकमात्र हिस्सा चुंबकीय बल है तो इसे नष्ट नहीं किया जा सकता है।

लेकिन जैसा कि हम इंसान हैं, हम बहुत स्थूल हैं। और हमें धरती माता के चुंबकीय बल का भी ज्ञान नहीं है। हम इसे अपने भीतर महसूस नहीं करते। जिस दिन हम अपने भीतर उस चुंबकीय शक्ति को महसूस करना शुरू कर देंगे, हम इन निरर्थक अतिवादी गतिविधियों को त्याग देंगे। हम अपने गुरुत्वाकर्षण में स्थिर हो जाएंगे। लेकिन हम तो यहाँ तक की पक्षियों के बराबर भी उस चुम्बकीय शक्ति के प्रति संवेदनशील नहीं हैं। आत्मसाक्षात्कार के बाद आप उस चुंबकीय बल को महसूस करने के लिए पर्याप्त रूप से सूक्ष्म हो जाते हैं। और आप धरती माता से अपनी समस्याओं को दूर करने के लिए, अपने पापों को दूर करने के लिए कह सकते हैं – वह शोषित कर लेंगी। बेशक, एक बार जब आप उतने सूक्ष्म हो जाते हैं, तब वह इसे कार्यान्वित करेंगी। लेकिन आपको उतना सूक्ष्म बनना है।

जब तक आप उतने विकसित नहीं हो जाते, तब तक आप उसके सूक्ष्म पक्ष को नहीं छू सकते, जो कि चुंबकीय बल है। जबकि ईसा-मसीह का शरीर स्वयं उसी चुंबकीय शक्ति से बना था।

अब, जब वह पुनर्जीवित हो गये, तो वे रविवार मनाते हैं, क्योंकि जैसा कि आपने देखा है कि उसके पास लाखों और करोड़ों सूर्य हैं और वह सूर्य से बना है। वह सूर्य का सार है। सूर्य को उसके भीतर ऑक्सीजन का बल मिला है, और यह ऑक्सीजन ब्रह्माण्ड के बाद ब्रह्माण्ड बनाने के लिए जिम्मेदार है।

आप देखते हैं कि, जब सूर्य की किरणें पेड़ पर पड़ती हैं – हम हर बात को इतने हलके में लेते है  – पेड़ फलते हैं, फल लगते हैं; फलों में बीज होते हैं और फिर वे पेड़ों में उग आते हैं। सूर्य के बिना इस पृथ्वी पर कुछ भी मौजूद नहीं हो सकता है। और इसीलिए हम रविवार को उनकी पूजा करते हैं, क्योंकि वह सूर्य थे। दरअसल, हम कह सकते हैं, वह सूर्य में रहते हैं।

अब जब हम बायीं तरफ चले जाते हैं, तो वास्तव में हम उनसे बहुत दूर चले जाते हैं, नकारात्मक पक्ष की ओर। हम बहुत नकारात्मक हो जाते हैं, जैसे कि जब हम बायीं बाजू तरफ जाते हैं, जो कि आप जानते हैं, हम उनसे बहुत दूर चले जाते हैं और हमारी आज्ञा, इसका पिछला भाग पकड़ में आ जाता है।यदि आप अपने दायी बाजु तरफ अति में जाते हैं तो आप उनकी अवज्ञा करते हैं, आप अपनी सीमा पार कर जाते हैं। आप उनसे परे नहीं जा सकते। और यह ऐसा होता है कि जब आप दायीं बाजू तरफ जाते हैं तो आप शालीनता, शिष्ट और नम्रता की सभी मर्यादाएं लांघ जाते हैं। तो दोनों तरह से आप विपरीत दिशा में चले जाते हैं, उनसे बहुत दूर।

अहंकार दायीं बाजु गतिविधियों का नतीजा है, क्योंकि ईसा-मसीह का तत्व उन लोगों पर प्रभावी रूप से कार्यशील नहीं होता है जो दायीं या बायीं बाजु तरफ बहुत आगे बढ़ते हैं| तो एक तरफ बायीं बाजु वह प्रति-अहंकार से लड़ता है दूसरी तरफ वह  वह मनुष्य में अहंकार से लड़ाई लड़ता है।

यही कारण है कि आपने देखा है, यदि आप ग्रसित हैं, तो आपको ईसा-मसीह का नाम लेना होगा। केवल उसका नाम ही आपको आपकी बाधाओं से दूर कर सकता है। लॉर्ड्स प्रेयर में सारी बाधाएं दूर करने कि शक्ति निहित है| लेकिन किसी ऐरे,गिरे,नत्थू खेरे द्वारा कही गयी लॉर्ड्स प्रेयर में नहीं। उसे प्रभु यीशु मसीह के साथ जुड़ा होना चाहिए, तभी, यदि आप कहते हैं, इसका प्रभाव है और ऐसा मंत्र एक जागृत मंत्र है।

दायीं बाजु को जब आप गति करते हैं, आपको अपने दिल में विनम्र होना चाहिए, क्योंकि वह आपके दिल में आत्मा के रूप में रहते है, क्योंकि वह आत्मा है। और इस आत्मा का अपमान तब होता है जब आप बहुत ज्यादा दायीं बाजु तरफ जाते हैं। और इसीलिए अहं-उन्मुख लोगों को हृदय रोग \परेशानी हो जाती है।

बाएं हाथ की ओर, प्रति-अहंकार क्षेत्र में ईसा-मसीह एक आतंक है! वे उसके नाम से भयभीत हैं। वे उससे दूर भागते हैं क्योंकि वे एकादश रुद्र को जानते हैं कि वह है। तो एक तरफ इस अर्थ में वह सौम्य है कि, वह उन लोगों से दूर हो जाते हैं जो अहंकारी, अहं-उन्मुख होते हैं। वह मसखरे और बेवकूफों को पसंद नहीं करते हैं। उन्होंने गधों कि सवारी कर के इन गधों कि तरफ इशारा किया है जो अहं-उन्मुख हैं। उन्होंने  गधे को नियंत्रित करने की कोशिश की।

लेकिन बाएं बाजु तरफ के लोग, ये भयानक नकारात्मक लोग हैं, वे उनसे भयभीत रहते हैं। बिलकुल डरे हुए। आप ईसा-मसीह का नाम लेते हैं और वे बस भाग जाते हैं, प्रस्थान करते हैं, “नहीं, कुछ नहीं करेंगे, हम उसका सामना नहीं कर सकते हैं।” हे भगवान, वह आ रहा है! “

अब यह [बिंदी] चिह्न वास्तव में उसके रक्त का संकेत है। और इसीलिए इस चिन्ह का वर्णन इस तरह से है कि, ऐसे व्यक्तियों को, भले ही आप इस रंग को दिखा दें, वे भाग जाते हैं। लेकिन किसी भी व्यक्ति को धैर्य के साथ ईसा-मसीह के महत्व को समझना होगा, विनम्रता के साथ, क्योंकि वे वह है जिन्होंने ब्रह्मांडों के बाद ब्रह्मांड का निर्माण किया है। यहाँ आप लोग साथ में एक टेबल पर नहीं बैठ सकते हैं, “चलो इसे बाहर निकाल दो!” या, देखिये, “चर्चा करते हैं।” यह कोई हठधर्मिता नहीं है वह एक जीवित परमेश्वर है, और मनुष्य द्वारा जीवित परमेश्वर पर चर्चा नहीं की जा सकती है। आपको उस पर चर्चा करने के लिए, उसे समझने के लिए अलौकिक प्राणी बनना होगा। और जितना अधिक आप उत्थान पाते हैं, उतना ही आप विस्मय से भर जाते हैं, “हे भगवान!” और जब आपको अहसास होता है कि वह ब्रह्मांड का आधार हैं, वह हमारा आधार हैं, तब आप बहुत शक्तिशाली महसूस करते हैं कि -यदि वे हमारा आधार हैं तो कोई हम पर हावी नहीं हो सकता।

लेकिन आप ईसा-मसीह को केवल निजी अपना नहीं बना सकते हैं। आप ऐसा नहीं कह सकते, “ठीक है, ईसा-मसीह मेरा है!” कोई भी उनको कब्ज़ा नहीं सकता। आपको उनके प्रति समर्पण करना होगा ताकि आप उसकी संपत्ति बन जाएं, ताकि वह आपकी देखभाल करे।

उनकी महानता को शब्दों में वर्णित नहीं किया जा सकता है। एक बच्चे के रूप में, एक बेटे के रूप में वह आनंद के दाता हैं।  उन्होंने जिस तरह अपनी माँ की देखभाल की कोई उसका वर्णन नहीं कर सकता क्योंकि- यह असंभव है। कोई भी शब्द ईसा-मसीह की अपनी माँ के प्रति समझ का वर्णन नहीं कर सकता: उनका प्यार, उनकी सज्जनता, उनकी देखभाल, उनकी भक्ति, समर्पण, उनकी श्रद्धा। इसका वर्णन नहीं किया जा सकता।

और आप जानते हैं कि वे श्री गणेश के एक विकसित रूप में आये थे। और सर के पीछे कि तरफ वह श्री गणेश है; सामने वह कार्तिकेय है: बहुत शक्तिशाली, ग्यारह रुद्र। और इसने उन्हें सर्वोच्च स्थान दिया है।

इसलिए, इस दिन, हमें यह सोचना होगा कि कैसे वह हमारे लिए पुनर्जीवित हुए। उनसे भी अधिक, उनकी माँ को उनके सूली पर चढ़ने का शिकार होना पड़ा। यह बहुत ज्यादा था। क्योंकि वह उसके बारे में सब जानती थी, वह जानती थी कि यह सब होने वाला है और वह एक माँ के रूप में मानवीय रूप में थी और उसका एकमात्र प्यारा बेटा उसकी उपस्थिति में क्रूस पर चढ़ाया जा रहा था।

हमें केवल इसीलिए क्रॉस का महिमामंडन नहीं करना चाहिए: क्योंकि मसीह को उस पर क्रूस पर चढ़ाया गया था। बल्कि क्रॉस आज्ञा चक्र का भी चिन्ह है। चूँकि उसी चार भुजा वाले  स्वास्तिक को एक विकसित प्रतीक जो एक क्रॉस है के रूप में व्यक्त किया गया है ।

इसलिए जब हम क्रूस का महिमा मंडन करते हैं, तो हम अपने आज्ञा को गौरवान्वित कर रहे हैं, जिसके द्वारा हम समर्पण और बलिदान के जीवन को स्वीकार करते हैं। और अगर हम क्रॉस के बाद आगे दृष्टि डालते हैं तो हमें पता चलता है कि यह पुनरुत्थान है। और वह पुनरुत्थान जो आप इस जीवनकाल में हासिल करने जा रहे हैं।

लेकिन अब अपनी खोज और अनुपयोगी भटकाव के सभी निरर्थक विचारों को छोड़ दें। खोज का मतलब है, किसी चीज के बारे में कुछ न जानना, बल्कि कुछ बनना। उसके लिए ईसा-मसीह ने स्वयं को क्रूस पर चढ़ाया। उन्होंने अपने आप को पुनर्जीवित किया ताकि आप सभी को पुनरुत्थान मिल सके। इसलिए, आपको आज,  पुनरुत्थान की अगुवाई देने के लिए उन्हें धन्यवाद देना होगा। और इस केवल इसी जीवनकाल में आप पुनर्जीवित होने जा रहे हैं और आप अपनी आँखों से अपने स्वयं के पुनरुत्थान को देखने जा रहे हैं जैसे शिष्यों ने मसीह के पुनरुत्थान को देखा। यह सब वादा किया जा रहा है और यह आप सभी को होना ही चाहिए। इसलिए हमें आनन्दित होना चाहिए और प्रसन्न होना चाहिए कि एक बड़े पैमाने पर पुनरुत्थान का समय आ गया है। और उस इतनी बड़ी घटना के हम प्रत्यक्षदर्शी हैं, हम ऐसे भाग्यशाली लोग हैं।

अपने क्षुद्र दृष्टिकोण और हमारी क्षुद्र लिप्त्तायें, हमारे छोटे, छोटे जीवन को छोड़ दें, जिसमें हम मेंढकों की तरह रहते हैं। अपना विस्तार करें और सोचें कि आज आप सामूहिक पुनरुत्थान के खेल के प्रत्यक्षदर्शी हैं। इतना ही नहीं, लेकिन आप इसमें कोशल दिखा रहे हैं।

इसलिए खुशी मनाओ और खुश रहो कि जो ईसा-मसीह ने दो हजार साल पहले  किया था, हम आज इसे करने जा रहे हैं, और इसीलिए ईस्टर हम सभी के लिए एक विशेष दिन है। यह वास्तव में एक बहुत ही खास दिन है क्योंकि हमारे जीवन में मौत कि भी मृत्यु हो गई है और हमारा पुनरुत्थान हो गया।

भगवान आप सबको आशीर्वाद दें!