Preparation for Becoming, Evening Seminar

Old Arlesford Place, Arlesford (England)

1980-05-17 Preparation For Becoming, Old Arlesford, UK, 88' Download subtitles: ITView subtitles:
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                   बनने की तैयारी 

ओल्ड आर्ल्सफोर्ड (इंग्लैंड) में शाम का सेमिनार,

 17 मई 1980।

बनने के लिए खुद का सामना करें। तब कुछ बनने की तैयारी की जाती है और समग्र रूप से, जब आप जानते हैं कि यह आपका अहंकार और प्रति-अहंकार है जो आप पर बोझ डाल रहा है, तो आपको उन्हें वाइब्रेशन की जागरूकता से जाँच लेना होगा।

अब हमें दो तरह से चित्त देना होगा। पहले एक निरंतर चित्त है जो एक सहज योगी की दिनचर्या है, और दूसरा आपातकालीन चित्त है।

मैं कहती रही हूं कि सभी सहज योगियों को अवश्य अपनी डायरी लिखना शुरू करना होगा: पहली, हर दिन के अनुभवों के साथ, यदि आप जानते हैं कि आपको एक डायरी लिखना है, तो आप अपने दिमाग को सतर्क रखेंगे, और दूसरी,जब भी आपको कोई विशेष विचार मिलेगा अतीत या भविष्य का, इसे भी संक्षेप में बताने के लिए। तो, इस तरह, आपके पास दो डायरी होनी चाहिए।

अपने निरंतर चित्त के लिए, आपको कुछ निश्चित बिन्दुओं पर अपने दिमाग को स्थित करना होगा। पहला, जैसा कि मैंने कहा, कि अगर आप एक डायरी रखेंगे तो आपको पता चल जाएगा कि आपको याद रखना है कि, क्या महत्वपूर्ण बातें हुई हैं। तो आपका चित्त सतर्क हो जाएगा और आप ऐसे बिंदुओं की तलाश में होंगे, जहां, जो चीज आप देख रहे हैं। और आप आश्चर्यचकित होंगे, यदि आप अपना चित्त सतर्क रखते हैं, तो कितनी नई चीजें आप तक आती हैं – बहुत ही शानदार सुझाव, और जीवन के चमत्कार और भगवान की सुंदरता और उनकी शुभता, उनकी महानता, उनकी दया, उनके आशीर्वाद के चमत्कार – यदि आप हर दिन यहां तक कि दो पंक्तियों इस बारे में लिखना शुरू करते हैं तो वे कैसे काम करते हैं। यह आपके दिमाग को लगातार इसके साथ जोड़ देगा। यह काम करने की एक मानवीय शैली है।

इसके अलावा आप डायरी में उल्लेख कर सकते हैं कि क्या हुआ: क्या आपने ध्यान किया , क्या आप अपना ध्यान लगा सके? आपको समय अपना ध्यान करने के लिए मिला या नहीं? थोड़ा सा अगर आप किसी तरह की परीक्षा या कोई चीज़ में जा रहे हैं, तो आप इस तरह से एक छोटा नोट तैयार करते हैं: “क्या मैं सुबह उठा था? क्या मैं? ” फिर किसी विशेष रास्ता या मध्य या बाएं या दाएं  की विशेष हलचल का भी उल्लेख किया जाना चाहिए ताकि आप अपने मन पर नजर रखें। डायरी बनाए रखना बहुत अच्छी बात है।इसके अलावा, आप उत्तरोत्तर देखेंगे कि आपके विचार कैसे बदल रहे हैं, नई प्राथमिकताएं कैसे स्थापित हो रही हैं, आप वास्तविक चीजों को कैसे अधिक महत्व देते हैं और असत्य चीजों को बहुत कम। मुझे लगता है कि यह मनुष्य का एक बहुत ही व्यावहारिक पक्ष है कि एक डायरी होनी चाहिए। यही डायरीयां, कुछ समय बाद, ऐतिहासिक चीजें बन जाएगी और लोग यह देखना चाहेंगे कि आप सभी ने क्या लिखा है। इसके बारे में पाखंडी या छुपाने वाला रुख ना हो कर , बल्कि काफी सच्चा और समझदार लेखन होना चाहिए। आपको सोने से ठीक पहले कुछ लाइनों को संक्षेप में लिख देना चाहिए। अब हमें यह देखना होगा कि हमारे पास प्रति-अहंकार और अहंकार की समस्याएं हैं। अब प्रति-अहंकार बाईं बाजु, अंधकार है, तमो गुण और हमारा अतीत है। जिन लोगों को बाईं ओर की समस्याएं हैं, उन्हें भविष्य के बारे में सोचना चाहिए, भविष्य के बारे में सोचने पर उन्हें संतुलन मिलता है। उदाहरण के लिए, एक व्यक्ति जो सुस्त है उसे काम करना चाहिए। भविष्य की योजना बनाने के लिए अपना दिमाग लगाओ: क्या करना है, कहाँ जाना है, कैसे करना है। यह आपको बायीं तरफ खींचे जाने से दूर रखेगा और धीरे-धीरे फिर आप खुद को भी संतुलित कर सकते हैं।

अब किसी व्यक्ति का दाईं बाजु, जब यह बहुत सक्रिय होता है, तो उसे इसे बाईं ओर से नहीं बल्कि मध्य की सहायता से संतुलित करना होता है। अर्थात्, एक व्यक्ति जो बहुत परिश्रमी है उसे एक साक्षी अवस्था विकसित करनी चाहिए। आप एक काम, किसी भी काम को करने की कोशिश एक साक्षी के रूप में विचारहीन जागरूकता में करें। आप जो भी काम कर रहे हैं तब सिर्फ ऐसा कहें की : “यह मैं नहीं कर रहा हूं।” ऐसा आप आत्मसाक्षात्कार प्राप्ति के बाद कर सकते हैं। आप निर्विचार जागरूक हो जाते हैं और अपना काम करना शुरू कर देते हैं। बाईं बाजु का संतुलन  दाईं ओर की गतिविधि से,और दाईं ओर का मध्य में गतिविधि द्वारा किया जाता है। बाईं ओर तमो गुण है, दायीं ओर रजो गुण है, मध्य सत्वो गुण है। लेकिन फिर भी ये तीन गुण हैं। ये वो अवस्था नहीं है जिसे हमें प्राप्त करना है इसके बारे में मैं आपको कल और बताऊंगी, फिर आगे कैसे जाना है।

यह जाँच कर लेने के बाद कि कौन सा पक्ष कमजोर है, आपको अपनी जीवन शैली की योजना बनानी चाहिए।

उदाहरण के लिए, यदि आप बेहद सुस्त हैं, तो आप सुबह उठ नहीं सकते हैं, आपको रात में बहुत नींद आती है, आप सतर्क महसूस नहीं करते हैं, फिर योजना बनाना शुरू करें कि आप क्या करेंगे।आप कैसे जागोगे ? यहां तक कि पूजा एक अच्छा विचार है, हवन एक अच्छा विचार है। कुछ ऐसा करो, जिससे तुम्हें कुछ करना पड़े, जिसे तुम क्रिया कहते हो, एक्शन, कार्य करो| सहज योग और दैनिक जीवन में आप किसी तरह का कार्य करें ,तब आप उस मनोदशा को बदल पाएंगे और दाईं ओर आ जाएंगे और फिर आप को अपनी गतिविधि को सत्वो गुण अर्थात साक्षी भाव की ओर ले जाना चाहिए। 

अब सत्त्वगुण बिंदु पर जब की आप मध्य में हैं, आपको यह देखना होगा कि आप कितने भ्रम में हैं। जैसे, मान लीजिए कि आप बाईं ओर के पहले चरण में हैं, तो आप बस दिवास्वप्न करेंगे, “ ओह! यह व्यक्ति ऐसा है, कि वह एक वैसा है, जैसे कि आप सबसे अच्छे हैं। यह सिर्फ मानवीय स्वभाव है, आप देखें। “ओह, वह व्यक्ति ऐसा है, वह वैसा ही है,  समाज में यह बहुत बुरा है, समाज में ऐसा बुरा हो रहा है। यह बेहतर है… ” फिर हम इस सीमा तक भी जा सकते हैं, “वह गुरु बहुत बुरा है और वह दूसरा पागल है।” उस तरह, आप देखते हैं, पूरे दिवास्वप्न चल रहे है। ऐसा नहीं है की …..यह आपको कितना प्रभावित कर रहा है, आप इससे कितना सुधार कर रहे हैं। यह बस, आप देखते हैं, सोच रहे हैं, विश्लेषण कर रहे हैं। यह एक आलसी बंदा है,  बैठना और सिर्फ विश्लेषण करना, यह एक आलसी व्यक्ति है।

दूसरी बात हो सकती है जब आप इसके दूसरे पक्ष में आते हैं, क्रिया है। तब क्या होता है जब आप इसे करना शुरू करते हैं, तो कम से कम आपका ध्यान इस बात पर होता है जो कि आप कर रहे हैं। यह किसी भी चीज़ में बह जाने की अनुमति नहीं है जो किसी भी बकवास में जाता है और मेरा मतलब है, तब आप यह नहीं जानते कि अजीब विचार कहाँ से आ रहे हैं। तो, आप कुछ करना शुरू करें। आप जा कर कुछ पेड़ लगा सकते हैं या आप  कुछ फूल लगा सकते हैं या यदि आप चाहते हैं कि आप कुछ खाना बना सकते हैं, आप कुछ काम कर सकते हैं।

काम पर लग जाओ! वह आपकी मदद करेगा। कोई भी काम। लेकिन काम करते समय समस्या यह होगी कि आप अहंकार का विकास करेंगे। इसीलिए जब आपका अहंकार विकसित हो रहा हो तो आपको खुद को बताना पड़ता है, “मिस्टर आप नहीं कर रहे हैं, ! यह आप नहीं कर रहे हैं, यह नहीं कर रहा है, आप नहीं कर रहे हैं। ” यदि आप अपने आप को इस तरह का सुझाव देते जाते हैं तो श्री अहंकार नहीं आएगा। और फिर कई चीजें, आप देखते हैं, जो सामान्य रूप से आपको परेशान करती हैं और दूसरों को परेशान करती हैं – जैसे आपने कमरे को साफ किया है, ठीक है। तब अगर कोई आता है और उसे बिगाड़ देता है तो आप उस व्यक्ति से नाराज हो जाते हैं। सहज रूप में! क्योंकि आपको लगता है कि ‘आपने’ ‘कर दिया है’ सबसे पहले आप कमरे की सफाई नहीं करें। यदि आप कमरे को साफ करते हैं तो आप तैयार रहें की , यह गंदा होगा ही , अन्यथा आपको क्यों साफ करना चाहिए? अब, अगर यह गंदा होता है अच्छी बात है , अगर यह गंदा नहीं किया जाता है बहुत अच्छा है |

सत्वो गुण पर जाने के लिए आपको इस प्रकार का रवैया अपनाना चाहिए। सत्त्वगुण पर आप इसे स्वीकार करने लगते हैं। आप बेहद हल्के हो जाते हैं। आप सौम्य व्यक्तित्व बन जाते हैं। फिर उस समय आप इस तरह से चर्चा नहीं करते हैं की , “ओह, मुझे यह पसंद नहीं है; यह गलत था; यह नहीं होना चाहिए था। ”  सत्त्वगुण में आप में ये सब चीजें नहीं आतीं। आप इसे देखना शुरू कर देते हैं । उस समय आप इसे देखते हैं कि, “ठीक है, कोई बात नहीं। यह हो गया, यह हो गया। इसके विपरीत, आप को दुःख होता है, यदि आप एक सत्त्व गुनी हैं, तथा किसी भी उकसावे से आपने अपने अहंकार को बढ़ावा दिया। क्या आपको वह बात समझ में आई ? , मेरा कहने का मतलब है, अगर आप सत्व गुणी हैं तो आपको अपने अहंकार पर शर्म आती है। उदाहरण के लिए, यहां तक कि यह कहने में कि “यह मेरी कार है,” आप शर्म महसूस करेंगे। यह एक सत्व गुणी का प्रकार है। या यहां तक कहने के लिए की, “आपने मेरा कालीन क्यों खराब किया?” मेरा मतलब भारत में कोई नहीं कहेगा, मैं आपको यह बता सकती हूं! यह बुरा शिष्टाचार माना जाता है, पूर्ण ख़राब शिष्टाचार। यदि आपके घर पर कोई भी आता है और कालीन खराब हो जाता है, तो वे कहते हैं, “रहने दो, कोई बात नहीं।” यहां तक कि जल भी जाए, “ कोई बात नहीं,मुझे नहीं पता। कहीं आप तो नहीं जले हो? ” वे कभी यह नहीं कहेंगे कि, “आपने मेरे कालीन को जला दिया है, या मेरा कुछ नुकसान कुछ भी किया है …” यह बुरा शिष्टाचार माना जाता है।

 यहाँ की तरह, आप देखते हैं, अगर कोई नींद ले रहा है और अन्य कोई शोर करता है। जो व्यक्ति सो रहा है वह कभी नहीं कहेगा कि “आप शोर कर रहे हैं,” वह बस उठ जाएगा और पूछेगा, “क्या आपको कुछ चाहिए?” यहां लोगों के लिए यह समझना मुश्किल है क्योंकि बस अहंकार  सिर पर बैठा है। लेकिन वहां यह ख़राब  शिष्टाचार माना जाता है। जब आप भारत जाएंगे तो आपको इसका पता चल जाएगा। ऐसा कहना बुरा व्यवहार हैं। या कहना की, “ओह, मैं, मैं बहुत आराम महसूस करता हूं।” मेरा मतलब है, “मुझे आराम लगता है ” कहना बुरा शिष्टाचार है। मेरा मतलब है, “मुझें यह पसंद है।” ऐसा वे कभी नहीं कहते हैं। तो क्या? ये सभी शब्द कहे जाने वाले नहीं हैं। अगर आप सत्वगुणी हैं तो आप ऐसा बिलकुल नहीं कहेंगे, आप पूछेंगे, “क्या आप इसे पसंद करते हैं? क्या यह आरामदायक है? क्या आप ऐसा करना चाहेंगे?” पूरा ध्यान आपकी तरफ से जाता है। क्या तुम्हें समझ आया? व्यक्ति को इसी शैली को विकसित करना है। तब तुम सत्वगुणी हो। अन्यथा, आप अभी भी अहंकार यात्रा पर हैं। आप देख सकते हैं, जो भी आप सोचें, “मैं ऐसा पसंद नहीं करता हूँ, मैं नहीं  …” “मैं” – आप कौन हैं? सबसे पहले प्रश्न पूछें, “आप कौन हैं?” यदि ईश्वर कहता है, “मैं तुम्हे पसंद नहीं करता हूँ,” मैं अच्छे कारणों से समझ सकती हूँ, लेकिन तुम्हारा कहना की, “मुझे यह पसंद नहीं है” … आखिरकार, तुम इस धरती पर कैसे आए? आपको मानव जन्म कैसे मिला? आपको ये सब चीजें कैसे मिलीं? अब इस तरह ही सोचें। “मैं कौन हूँ? मै कुछ नही।” जो कोई भी सोचता है, “मैं कुछ हूं,” उसे पता होना चाहिए कि वह कुछ भी नहीं है; ईश्वर के लिए कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह मौजूद है या नहीं है, देखिये, वह कुछ भी नहीं,  सिर्फ एक बूंद है।तो, इस बात को अगर आप समझते हैं, कि भले ही आप कुछ भी करते हैं, कोई भी काम जो आप करते हैं या आप जो कुछ भी कर रहे हैं: आप इसे सिर्फ इसलिए कर रहे हैं क्योंकि आप इसे करना चाहते हैं। इसी तरह आप सत्वगुण पर आते हैं। लेकिन आम तौर पर ऐसा नहीं होता है। यह दूसरे तरीके से होता है। उदाहरण के लिए एक व्यक्ति है, कुछ कर रहा है अगर किसी भी संयोग से वह आहत महसूस करता है या वह सोचता है कि उसने जो भी किया है वह अच्छा नहीं है। लोग सराहना नहीं करते हैं, या शायद वह सोच सकते हैं कि, “ओह, यह उत्कृष्ट नहीं हुआ है,” या ऐसा ही कुछ, तो उसके लिए प्रतिक्रिया यह नहीं है कि वह सत्वगुण तक उत्थान की कोशिश नहीं करता है, लेकिन वह वापस तमो गुण में चला जाता है। “ठीक है, मैं ऐसा नहीं करूंगा। मैं इसे अनदेखा करूँगा| उन्हें करने दो, मुझे क्यों करना चाहिए? ” तो जो प्रशिक्षण आपको अपने रजोगुण के माध्यम से होना है वह बेकार चला जाता है। यह सिर्फ एक प्रशिक्षण अवधि है इसलिए आप रजोगुण के साथ हैं। आप कुछ कर रहे हैं। अब इस प्रशिक्षण अवधि में आपको केवल यह सीखना है कि मध्य में कैसे आना है। उदाहरण के लिए, आपको तैरने के लिए पानी की आवश्यकता होती है। यदि कोई पानी नहीं है तो आप तैर नहीं सकते। ठीक है? उसी तरह, सत्वगुण में आने के लिए रजो गुण आवश्यक है। यदि आप कोई काम नहीं करते हैं तो आप सत्वगुण में नहीं आ सकते। इसलिए आप साक्षी बनने के उद्देश्य से, सिर्फ खुद को प्रशिक्षित करने के लिए काम कर रहे हैं। क्या अब आप इस मुद्दे को समझे ? आप ऐसा इसलिए नहीं कर रहे हैं क्योंकि आप किसी खास चीज को पसंद करते हैं, या आप को किसी खास चीज की आदत है बल्कि, चूँकि आप यही बनना चाहते हैं। यह ऐसा नहीं है जैसा लगता है। आप बस यह सीखने के लिए कर रहे हैं कि कैसे धैर्य रखें। अपने धैर्य का अभ्यास करने के लिए। यह देखने के लिए कि आप कितने धैर्यवान हैं।

एक बार जब आप इसे करना शुरू कर देते हैं, तो आप चकित हो जाएंगे कि आप कभी भी काम के बोझ को महसूस नहीं करेंगे। लेकिन ऐसा कभी नहीं होता। अधिकांश लोग, यदि वे पाते हैं कि उनका काम प्रभावी नहीं है, तो वे वापस तमो गुण में चले जाएंगे। कई दृष्टिकोण हैं। जैसे, कोई काम कर रहा है, तो वह सोचता है, “मुझे ही हर काम क्यों करना चाहिए?” दूसरे नहीं कर रहे हैं! ” वह वापस उन लोगों जैसी अवस्था में चला जायेगा। लेकिन जो लोग काम नहीं कर रहे हैं, वे यह नहीं सोचेंगे कि, “यह व्यक्ति काम कर रहा है, मुझे भी काम करना चाहिए।” देखिये,यह दूसरा तरीका है, यह कुछ लोगों का एक तरीका हो सकता है कि “यदि यह व्यक्ति काम कर रहा है, तो उसे काम करने दें।” यह भी एक घटिया व्यवहार है ,बस किसी तरह से बचना । आप एक रेस्तरां में जाते हैं और कोई व्यक्ति पर्स निकाल लेता है, अन्य लोग एक तरफ देखना शुरू कर देते हैं – यह बहुत ही मतलबी तरीका है, फिर आप यह गिनना शुरू नहीं करें की, “मैंने भुगतान क्यों किया?” यह व्यवहार का बहुत ही मतलबी ढंग है। हर किसी को आगे आना चाहिए और एक बार भुगतान करने के बाद, आपने इसे कर दिया तो कर दिया, समाप्त ।

एक बार आप ऐसा करने की कोशिश करें। या कोई भी काम करना हो, इसके लिए आगे बढ़ें, दिल से करें। यदि दूसरों ने ऐसा नहीं किया है तो चिंता न करें। बस इसे अपनी खुशी के लिए करें और आनंद आपको तभी मिलेगा जब आप इसे इस समझ के साथ करेंगे कि यह एक प्रशिक्षण अवधि है, आप दूसरे की तुलना में बेहतर प्रशिक्षित हैं। आप अन्य की तुलना में एक उच्च वर्ग में हैं। इसलिए हमें उच्च स्थिति में भी होना चाहिए। उसके लिए यह सिर्फ एक प्रशिक्षण चल रहा है। और यह कि कैसे हम वास्तव में अपनी तैयारी का विस्तार से अभ्यास यह देखने के लिए कर सकते हैं कि हम अपने अहंकार और प्रति-अहंकार पर कैसे काबू करते हैं।

आज, सुबह, मैंने तुमसे कहा है कि तुम्हारी बुद्धि को इसे अपने भीतर समा लेना चाहिए? और अब मैं आपको कह रही हूँ कि आपके द्वारा किया जाने वाला आपका कार्य,  हर क्रिया, में हर बार आपके द्वारा प्राप्त प्रशिक्षण की छाप होना चाहिए। मान लीजिए कि आपको एक साथ कई मील तक ड्राइव करना है, तो आप अपने धैर्य को आजमा रहे हैं। आप देखिये यह हर चीज में लागू  हैं । जैसे कि उन्हें हेलिकॉप्टर के लिए जाना है, या जैसे कि अगर उन्हें … से ड्रॉप करना है, तो आप उन्हें क्या कहते हैं?

सहज योगियों: पैराशूट्स।

श्री माताजी: पैराशूटर्स! या हेलीकॉप्टर आप ले जाएं या जो भी हो। आप इसे बार-बार करते हैं, क्या ऐसा नहीं है? आप बार-बार इसका अभ्यास करें। आप कई बार कूदते हैं, आप अपने हाथ,पैरों को तुड्वाते हैं, आप ऐसा,वैसा करते हैं और तब तक करते हैं जब तक आप मास्टर नहीं बन जाते। आप मेरी बात समझ गए? ड्राइविंग – उसी तरह, जब तक आप मास्टर नहीं बन जाते, तब तक आप करते हैं। उसी तरह, आप यह काम  अपने धैर्य में सिर्फ महारत हासिल करने के लिए कर रहे हैं।

और फिर आपका प्रेम, यह आपका प्यार है – आप वास्तव में कितना प्रेम करते हैं। यदि आप वास्तव में किसी से प्यार करते हैं, तो आप कभी भी काम करते नहीं थकते। आप काम से कभी परेशान नहीं होते। लेकिन अगर आप प्रेम नहीं करते हैं, तो आप गिनना शुरू करते हैं, “कितना पैसा, कितना काम, कितने घंटे, कितना भुगतान करना है?” सभी कृत्रिमता आती है क्योंकि आपके काम में कोई प्रेम शामिल नहीं है। आप जो भी नहीं करना चाहते हैं, आप शुरू से उसे नहीं करें। शुरुआत में, जो भी आप पसंद ना करते हों उस कार्य को सिर्फ नहीं करें| शुरू-शुरू में | शुरुआत में आप बिलकुल वह काम ना करें जो आप को पसंद नहीं हो -केवल शुरुआत में | लेकिन एक बार जब आप उस पर महारत हासिल कर लेते हैं, तो आपको इस चीज में महारत हासिल करनी होती है कि आप कुछ ऐसा करते हैं जो आपको पसंद नहीं है। मिसाल के तौर पर कुछ भुतिया लोगो से मिलना। आप मिलना नहीं चाहते हैं, आप भाग जाना चाहते हैं, लेकिन आप इस के थोड़ा नजदीक जाते  हैं, आप देखते हैं। तब इन भुतिया लोगों के प्रति एक प्रतिरक्षा विकसित कर लेते हैं। कुछ समय बाद आप को उनकी पकड़ नहीं होगी। हमें प्रतिरक्षा विकसित करनी है, क्या समझे? अन्यथा एक व्यक्ति यहां आता है और सभी का सिर फिर जाता है। साथी में सुधार के बजाय, आप सब बाहर हो जाते हैं ।तो ये सभी चीजें हैं, ये सभी घटनाएं आपके प्रशिक्षण, आपकी प्रतिरक्षा के लिए हैं। आपको प्रतिरक्षा के लिए प्रशिक्षित किया जाना है और जब ऐसा है, जब हम खुद को प्रशिक्षित कर रहे हैं तो हमें इसे नौकरी के रूप में लेना चाहिए। लेकिन दृष्टिकोण बेहद सकारात्मक होना चाहिए, बेहद सकारात्मक और वह सब अनुभव जैसे,चाहे आप अस्वीकृत हो गए या आप परेशान और निराश हो गए, आप इससे दूर भागना चाहते हैं – सभी प्रकार की चीजें आपकी नोटबुक में लिखा जाना चाहिए: । यह केवल आपके मन का एक प्रशिक्षण है। जो भी स्थिति है, जहां भी रहना पड़े , जो भी करना पड़े , हमें करना चाहिए। जो भी परिस्थितियां, स्थितियां हो सकती हैं, आप चकित होंगे, आपको पता भी नहीं चलेगा कि आपने सुबह क्या खाया है, शाम को क्या खाया है, खाया भी है या नहीं, आपको पता नहीं होगा। आप इसके बारे में उपद्रव नहीं करेंगे, आप इसके बारे में चिंता न करेंगे, आप इसके बारे में नहीं सोचेंगे। लेकिन लक्ष्य यह सत्व गुण तक पहुंचना होने से, हर दूसरी चीज शून्य हो जाती है। मैंने यह देखा है की सहज योगियों के लिए सबसे बड़ी बाधा है की, जब वे आयोजित करना शुरू करते हैं। वे कोई चीज आयोजित करना शुरू करते  हैं। अब कोई व्यक्ति कुछ चाहता है, इसलिए वे उस व्यक्ति के लिए उस चीज को लाने  के लिए भागते हैं। अब बस मैंने कहा है कि आपको दूसरों की ज़रूरतों पर ध्यान देना चाहिए, लेकिन अगर मैं यहां बैठी हूं और इस पर व्याख्यान हो रहा है तो बेहतर है की आप सिर्फ मुझे सुने। आप यह भी देखिये की आपकी प्राथमिकताएँ क्या हों, इस समय जब कुछ आप पर काम हो रहा है। यह पहला काम है जो आपको करना है। ऐसा नहीं कि इस समय तुम जाओ और खाना बनाओ। आपने ईसा मसीह की सेवा करती  दो बहनों की कहानी जानी है। ठीक है?तो इस समय, आपका पहला काम क्या है की आप स्वयं को मेरे सामने उजागर करने की कोशिश करो ताकि आप स्वतःअपने सत्वगुण में चले जाए । यह सबसे अच्छा है!

 लेकिन अगर मैं वहां नहीं हूं और जब आप अकेले होते हैं या जब आप अन्य सहज योगियों के साथ होते हैं तो आपको अब ऊंचे और ऊंचे उठने में प्रतिस्पर्धा करनी चाहिए: तमोगुण से रजोगुण और रजोगुण से लेकर सत्वगुण तक। लेकिन वास्तव में आत्मसाक्षात्कार द्वारा आप इन तीनों गुण से आगे निकल गए हैं। आप इससे आगे निकल गए हैं। असल में ऐसा ही आपके साथ हुआ है। लेकिन, बादलों की तरह, वे आपको बार-बार कवर करते हैं। और जब आकाश उन बादलों से आच्छादित होता है, तो आप सूर्य को नहीं देख सकते, आप चंद्रमा को नहीं देख सकते, आप तारों को नहीं देख सकते। इसलिए हमें यह जानना होगा कि ये बादल हमारे अंदर कैसे आ रहे हैं और इस प्रकार हम अपने पूर्ण विश्लेषण में आगे बढ़ते हैं। ये बादल कैसे हमारे पास आ रहे हैं, आप हमारे अलग-अलग चक्रों के बारे में जान सकते हैं। हम कौन से चक्र पकड़ रहे हैं? यहां हमारे चक्रों की ओर हमारा एक और निरंतर चित्त होता है। हमारे वायब्रेशन ठीक हैं या नहीं? क्या हमें अपने वायब्रेशन मिल रहे है? यदि नहीं, तो मैं किस चक्र को पकड़ रहा हूं, क्या होना चाहिए? मुझे अपनी कुंडलिनी उठानी होगी, स्वयं देखना होगा कि पकड़ कहां है। मैं अपना ध्यान करता हूं या नहीं? यदि मैं इसे करता हूं, तो क्या मैं इस में सिर्फ ऊँघ रहा हूं या क्या मैं वास्तव में इसमें हूं? क्या मैं वास्तव में इसे महसूस कर रहा हूं या नहीं? मैं अलर्ट हूं या नहीं? यह सब निष्ठापूर्वक , ईमानदारी से, बिल्कुल, सच्चाई से किया जाना चाहिए। क्योंकि यह आपके स्वयं के अंदर एक प्रक्रिया है – is आतमनेयवा आत्मान तुष्ट ’[आत्मा अपने आप में संतुष्ट है]। आप देखिये, यह बहुत मज़ेदार हैं, यह इतना मज़ेदार रिश्ता है कि यह आत्मा, आत्मा से ही संतुष्ट है! आपको अपने स्व से संतुष्ट होना होगा। अन्य कोई नहीं है, माताजी का कोई संबंध नहीं है, किसी का संबंध नहीं है। यह आप ही हैं जो स्वयं से  संबंधित हैं।

उदाहरण के लिए, आप किसी से पूछते हैं और वह कहता है, “मैं ऐसा हूँ, माँ।” अब मान लें कि आप दो व्यक्तित्व हैं, एक व्यक्तित्व “माँ ” हैं, तथा एक दूसरा व्यक्तित्व है, जैसे, श्री डॉन या किंग्सले या कोई एक्स है। इसलिए जब आप अपने आपको, {इसका मतलब है कि जो माताजी है} , बता रहे हैं कि, “मैं ठीक नहीं हूँ,” तब माताजी को सामने आकर कहना चाहिए, “इसका क्या अर्थ है ?” आप ऐसा क्यों कह रहे हैं ? क्या तकलीफ है?” जब आप अपने बाहर वाले व्यक्तित्व को ऐसा कहते हैं, तो चित्त तुम्हारे उस व्यक्तित्व की और जो की माताजी है, जाने लगता है और आप वह व्यक्तित्व होना शुरू कर देते हैं और आप अपनी आत्मा के माध्यम से देखना शुरू करते हैं। अतः आपके आत्म को केवल आपके आत्म द्वारा संतुष्ट होना है। बीच में कुछ भी नहीं है।  इस दोहरे व्यक्तित्व में, यह केवल आप ही है जिसे अपने आप को संतुष्ट करना है। एक अज्ञान में है, एक ज्ञान में है। अब स्वयं को उस आत्मा{माताजी कहें या कोई XYZ जो भी आप इसे कहें} के रूप में पहचानने की कोशिश करें। और सिर्फ, सिर्फ नाटक के लिए सोचो की आप स्वयं हो ,आत्मा। तो आप अपने आप को कैसे संबोधित करेंगे? चलो देखते हैं। मान लीजिए कि आपको मेरे आसन पर बैठना है, हाँ, इसे एक स्थिति की तरह लें। और फिर तुम मेरे सामने भी बैठे हो, ठीक है? इसलिए तुम यहां भी बैठे हो और वहां भी बैठे हो। ऐसी स्थिति की कल्पना करें। अब आप अपने आप को एक नाटक में रखते हैं और आप स्वयं को संबोधित करने लगते हैं, “तो बाला, आप कैसे हैं?” तो बाला कहता है, “बेहतर,”

तो अगर आप की पहचान अब माताजी के रूप में हैं, तो धीरे-धीरे बाला कम हो जाएगा, ठीक है? लेकिन अगर आप अभी भी बाला के रूप में पहचान पाते है, तो वह बढ़ेगा और यह [माताजी] कम हो जाएगा। आपको अपने स्व को इस प्रकार संबोधित करने की कोशिश करनी चाहिए जैसे कि आप माताजी हैं। यह एक ड्रामा है। तुम दर्पण के सामने बैठो। दर्पण में आप अपना बाहरी रूप देखते हैं और यहां आप बैठे हैं,जो भी आप हैं  उदाहरण के लिए, श्री डॉन हैं। अब मिस्टर डॉन वहां दूसरे डॉन को संबोधित कर रहे हैं, और उन्हें एक भूमिका निभाने दें कि, “मैं आत्मा हूं।” वह कहेंगे, “मैं आत्मा हूं और मैं शाश्वत हूं। मैं यह हूँ। मुझे कोई नष्ट नहीं कर सकता। मैं हर चीज से ऊपर हूं। ” वह चीज नीचे जाएगी। “मैं एक बोध प्राप्त आत्मा हूँ। मुझे पता है कि आत्मा क्या है। आप क्या बात कर रहे हैं?” यह नीचे चला जाएगा।

इस तरह आप आगे बढ़ना शुरू करते हैं। लेकिन यह केवल तभी संभव है जबकि पहले आप सत्वगुणी बनें। यदि आप सत्वगुणी नहीं है तथा अहंकार के साथ, “मैं यह हूँ,” हैं, तो आप गुरु बन जाते हैं और आप धन कमाना शुरू कर देते हैं!

पहले अहंकार को नीचे लाना है। अगर अभी भी अहंकार है, तो बिना आत्मा बने तुम अहंकार बन जाते हो। तो पहले इस यात्रा को सत्वगुण के मध्य में लाया जाना चाहिए। इसलिए मैं कहती हूं कि जब आप बात कर रहे हैं या कुछ भी कर रहे हैं, तो आपको पता होना चाहिए कि यह आपकी आत्मा है जो यह कर रही है। इस प्रकार -पहले चरण में आप अपनी आत्मा को अधिकारी बनाते हैं अथवा कहें की मंच पर लाते हैं | फिर जब आत्मा होती है, तो इस अवस्था से उस अवस्था तक, तब आप कहते हैं कि, “अब मैं आत्मा हूँ।” यदि आपके पास उदाहरण के लिए, एक प्रधानमंत्री और एक उप-मंत्री और एक मंत्री हैं – तीन व्यक्ति, ठीक है? अब, यदि प्रधान मंत्री आपका स्व है और मंत्री को प्रधान मंत्री बनना है, तो उसे पहले उप प्रधान  मंत्री बनना होगा। उप प्रधान मंत्री बनने के बाद उन्हें प्रधान मंत्री बनना है; लेकिन पहले उप प्रधान मंत्री और फिर प्रधान मंत्री। लेकिन माना की यह बंदा इस क्रम पर से छलांग मारना चाहे, यह आकर चोट करेगा और वह कहेगा, “मैं ही वह एक हूँ!”और वह एक है E G O अहंकार।

क्या आप मेरी बात समझते हैं?

इसलिए आप इस के परे नहीं जा सकते। आपको इसे इसमें सम्मिलित करना होगा और फिर इसको इसमें। गति को वैसा ही होना है। लेकिन अगर आप यह बनने की कोशिश करते हैं, तो वास्तव में आप वह बन जाएंगे, यह नहीं, क्योंकि आप यह नहीं बन सकते। क्या आप मेरी बात समझते हैं?

इसलिए, दर्पण के सामने बैठने का अभ्यास करते हुए  और अपने आप को यह बताते हुए कि आप आत्मा हैं, आप विराट का हिस्सा हैं, चूँकि आपकी बूंद महासागर में गिर गई है इसलिए आप अब महासागर हैं। तब आपको ” ज्ञान ”  होना चाहिए कि आपकी बूंद महासागर में गिर गई है। यही कारण है कि आप एक महासागर बन गए हैं यदि वह चरण गायब है, फिर भी आप कह रहे हैं कि आप एक महासागर हैं, तो यह केवल आडम्बर है। और यही कारण है कि किसी को बहुत स्थिर और सावधान रहना पड़ता है, जहां तक खुद के मामले में बिल्कुल स्थिरता चाहिए  है। क्योंकि आप जानते हैं कि यह बुद्धि आपको धोखा कैसे दे सकती है।इसलिए बहुत सावधान रहें, और जब आप अपने साथ व्यवहार कर रहे हों, तो आपको पता होना चाहिए कि आपको पहले  इस अहंकार के परे जाना है। अहंकार को दूर करने के लिए सबसे अच्छी बात अपनी भाषा शैली को बदलना है, तीसरे व्यक्तित्व में बोलना है। बहुत अच्छा तरीका है। जैसे  जब आप अपने बारे में बात कर रहे हैं,आपको कहना चाहिए, “यह माताजी मेरी नहीं सुनेगी । यह माताजी ऐसा नहीं करेगी , “आप देखिये , क्या होता है, यह ‘माताजी’ का अर्थ है, इसका अहंकार वाला भाग, आप देखिए। और एक बार जब आप इस माताजी को अपने आप से दूर करना शुरू कर देते हैं, तो वह अहंकार माताजी गायब हो जाता है। आप समझे?जैसे आप कह सकते हैं, “यह बाला ऐसी ही है। वह नहीं सुनेगा। ” तो जो भी असली बाला तुम्हारे भीतर शेष है वह ठीक है। इस प्रकार आप अपने अहंकार से  मुक्त हो सकते हैं, तथा अपने चक्रों को क्या, कहाँ , और कैसे आप पकड़ रहे है समझकर, ; आपके लिए अपनी समस्याओं से छुटकारा पाना बहुत आसान होगा अब देखते हैं कि सहज योगी क्या करते हैं। मान लीजिए कि पाँच सहज योगी बैठे हैं। मेरा मतलब है कि आप जानते हैं कि मैं हर किसी के बारे में, सब कुछ जानती हूं। मुझे यह पूछने की ज़रूरत नहीं है, “पकड़ कहाँ है?” अब मैं क्यों पूछती हूँ ? मैं पूरी अज्ञानता दिखाती हूं। बहुत स्पष्ट हो की,चूँकि शायद मैं भी कभी नहीं पकड़ती। लेकिन अगर मैं जानना चाहती हूं कि मैं कहां से पकड़ रही हूं तो मैं पता लगा सकती हूं लेकिन मैं नहीं चाहती हूं। तो मैं क्या कहती हूं, “ठीक है, छाया, मुझे बताओ कि वह कहां से पकड़ रहा है।” इस समय एक दृष्टिकोण यह भी हो सकता है कि, “मुझे बताना होगा, अन्यथा माताजी को पता नहीं चलता।” यह बहुत मज़ेदार है। (हँसी) दूसरा एक हो सकता है, और दूसरा वह हो सकता है, कि, “मुझे पता है कि वह कहाँ पकड़ रहा है, और मुझे बताना होगा, और माताजी को भी पता है लेकिन वह मेरी परीक्षा लेना चाहती है। इसलिए मुझे सावधान रहना चाहिए। ” इस बिंदु पर लोग गलतीयां करते हैं। अगर मैं उनसे पूछूं, “यह कहाँ पकड़ रहा है?” “मैं बाएं दिल को पकड़ रहा हूं लेकिन बहुत हल्के ढंग से!” तब खत्म! आपको कम अंक मिलेंगे। [हँसी]। आपको कम अंक मिलते हैं। आप जो भी आप सोचते हैं मुझे वही बताएं, क्योंकि कम से कम आप ईमानदार हैं। जो भी तुम सोचो। मान लीजिए कि साथी को दिल पर पकड़ नहीं है, लेकिन आप दिल को महसूस कर रहे हैं। आप कहते हैं, “दिल” यह ईमानदारी होना है। फिर मैं आपको बताऊंगी कि किसको दिल पर पकड़ रहा है। लेकिन अगर तुम ऐसा करते हो कि, “शायद हाँ, माताजी। नहीं, माताजी, ”तब आपको कम अंक मिलते हैं। यह बहुत अच्छा जवाब नहीं है। “मैं ठीक नहीं हूं, मुझे नहीं पता,” यह एक अच्छा जवाब नहीं है। आपको मुझे बताना होगा कि कौन कहाँ पकड़ रहा है। फिर आप अधिक ध्यान देते हैं चूँकि आपको यह परीक्षा पास करनी है। यह सिर्फ परीक्षण है। क्यों? क्योंकि कल आपको आत्मसाक्षात्कार देना है। आपको गुरु बनना है। आपको यह सब जानना होगा। तो यह सभी प्रशिक्षण अवधि है। मैं आपको केवल प्रशिक्षण दे रही हूं, मुझे बताने के लिए कहकर , लेकिन मैंने लोगों को इसके साथ भी अहंकार करते हुए देखा है। यह आश्चर्यजनक रूप से कभी-कभी होता है। 

मैं पूछती हूं, “ठीक है, तुम मुझे बताओ कि वह कहां पकड़ रहा है?”

यह सोच की ; “मैंने सही बताया है!” 

  ख़त्म ! यह भी लोगों को अहंकार देता है! आप देखिये,मैं कह सकती हूँ यह बहुत ही कठिन अवस्था है, जहां व्यक्ति को स्पष्ट रूप से देखना चाहिए। तो एक सरल व्यक्ति बनो जैसे बच्चे हैं। वे बस आते हैं। यह ऐसा, वह वैसा, ख़त्म। तब वे जाकर बैठेंगे, “अब मैं थक गया हूँ, मैं नीचे बैठा हूँ!” वे परेशान नहीं होते हैं कि उन्हें … उन्हें कुछ कहना चाहिए या कुछ दिखावा करना चाहिए, कुछ भी नहीं। वे जो भी देखते हैं, कहते हैं। बड़े लोग लेकिन कहेंगे कि, “शायद मैं पकड़ रहा हूँ, शायद यह उनका है। मुझे नहीं पता।” ऐसा सब बड़े लोगों द्वारा किया जाता है क्योंकि  संवेदनशीलता अभी भी ठीक है लेकिन उन्हें खुद पर यकीन नहीं है। बच्चे बहुत पक्के होते हैं। वे हर चीज पर सुनिश्चित हैं। आप उनसे कुछ भी पूछें, वे आपको बताएंगे, “हां, यह यही है, यह वैसा है।” लेकिन आप किसी से भी पूछें, “इस चीज़ का रंग क्या है?” वे कहेंगे, “शायद हरा, शायद लाल।” [हँसी।]

जैसे हमारे पास एक वृद्ध सज्जन थे, बहुत वृद्ध नहीं थे, मेरे जितनी उम्र थी  – लेकिन वह मेरे घर आना चाहते थे और उन्होंने मुझे फोन किया।

 उन्होंने कहा, “मैं आपके घर आना चाहता हूं, तो मुझे कैसे आना चाहिए?”

 मैंने कहा, “यह स्थान ओक्सटेड है, आप वहां आ सकते हैं लेकिन अगर आपको टैक्सी नहीं मिलती है तो यह बहुत मुश्किल है, हर्स्ट ग्रीन में आना बेहतर है।

“उन्होंने कहा, “कहां?”

मैंने कहा, “हर्स्ट ग्रीन।”

तो उसने कहा, “हर्स्ट ब्लू?”

 वह नीला को हरा कैसे कह रहा है, मुझे नहीं पता। (नोट: color हर्स ब्लू ’एक प्रसिद्ध रंग है)मैंने कहा, “नहीं, यह हर्स्ट ग्रीन है।”

उन्होंने कहा, “आपने क्या कहा?”

मैंने कहा, “हर्स्ट ग्रीन।”तो वह समझ नहीं पाया। “दूसरा क्या है?”

मैंने कहा, “पत्तियों का रंग क्या है?”

 उन्होंने कहा, “नीला।” (हँसी।)

मैंने यह ग्रीगोइरे को बताया, मैंने कहा, “अब उसे सुनो, वह क्या कह रहा है? पत्तियों का रंग नीला है? “

इसलिए, ग्रीगोइरे ने फोन उठाते हुए कहा, “ठीक है, तुम हर्स्ट ब्लू में आओ।” (हँसी)

तो उन्होंने कहा, “अब कम से कम …”

मैंने कहा, “तुम क्या कह रहे हैं?”

वह बोला, “अब वह नहीं आया, माँ। वह परेशानी दूर हो गई। ”

 ऐसा उलझा हुआ व्यक्तित्व, नीले और हरे रंग के बीच घपला ! आप लड़ रहे हैं। यह वही है। चित्त बहक जाता है। इसलिए यह जानने की कोशिश करें कि कहीं मैं भ्रमित तो नहीं हूँ ,यदि भ्रम है, अपने चक्रों को साफ करके इसे बाहर निकालें। अब हर चक्र, चलो ठीक है, इसका थोड़ा परीक्षण करते हैं? एक एक करके। 

तो कौन सवालों के जवाब देने वाले हैं? चलो देखते हैं। सरल प्रश्न। मास्टरमाइंड नहीं (1970 और 80 के दशक की एक ब्रिटिश टीवी प्रतियोगिता)। बहुत ही सरल प्रश्न।अब बोलो, आपका हंसा चक्र पकड़ रहा है, हमें क्या करना चाहिए? सवाल का जवाब कौन देगा? हंसा चक्र पकड़ रहा है, हमें क्या करना चाहिए? चलो, एक-एक करके देखते हैं|

सहज योगी: हंसा ,हंसा ।

श्री माताजी: यह चक्र का नाम है।

सहज योगी: किसी ने मुझसे कहा कि आप हमसा कहते हैं।

श्री माताजी: नहीं … आप देख रहे हैं कि यह हंसा चक्र है, इसलिए आपको यह कहना होगा कि, “त्वमेव साक्षत, हंसा चक्र स्वामिनी साक्षात्र , श्री माताजी निर्मला देवी नमो, नमः।”

देखो, अभी खुला। अब यह कहो, तुम सब, क्योंकि अभी तुम पकड़ रहे हो। अब इस तरह अपनी उंगली रखें और अब इसे कहें। (सभी मन्त्र कहते हैं )। इसे फिर से कहना। इसे तीन बार कहें। [हर कोई दो बार दोहराता है] देखें? बेहतर।

अब इस केंद्र में ऐसा क्या होता है कि दोनों नाड़ी, हा और ठा, इडा और पिंगला, वे आते हैं और मिलते हैं और वे पार हो जाते हैं। तो, बाई नाडी के लिए, बाईं भाग, यह वाली, दांयी तरफ बहती है और, जो दाईं ओर से आती है,दायीं नदी वह , बाईं ओर बहती है। ये दो केंद्र यहाँ मिलते हैं, मेरा मतलब है कि दो नाड़ी यहाँ वास्तव में मिलती हैं, आज्ञा  के नीचे, यह आज्ञा के नीचे हंसा में, आप देखिये, और समस्याएँ आपके पास दाईं ओर या बाईं ओर से आती हैं।

आप में से अधिकांश लोग यहां ठंड या जो भी कारण हो हंसा को पकड़ते हैं। अब, मैंने आपको कई चीजें बताई हैं, जिनके द्वारा आप अपनी सर्दी को नियंत्रित करते हैं। लेकिन अगर यह बाईं ओर के कारण होता है, बाईं ओर की पकड़  हो तो, बाईं ओर की  हंसा के लिए आपको क्या करना चाहिए? मुझे बताओ।

सहज योगी: अपनी आंखों को जमीन की तरफ, हरे पर रखें।

श्री माताजी: उनमें से एक है, लेकिन एक और बात, मेरा मतलब है कि जहां तक मंत्र का संबंध है कि आप किस मंत्र का उच्चारण करेंगे ..

सहज योगी: एकादश रुद्र।

श्री माताजी: यह बहुत अधिक ऊपर है आज्ञा से भी ऊपर ।

सहज योगी: महाकाली।

श्री माताजी: महाकाली, सही। लेकिन आप इडा, इडा नाडी कह सकते हैं। अब देखिए अभी मैंने आपको बताया है कि यह इडा नाडी है जो बाईं ओर से आती है और दाईं ओर जाती है। तो, आपको महाकाली या इडा नाडी, इडा नाडी स्वामिनी कहना होगा। अब बोलो। बस अब आप बाईं ओर पकड़ रहे हैं।[सहज योगी adi इड़ा नाड़ी स्वामिनी ’का मंत्र लेते हैं।]

श्री माताजी: फिर से।

[सभी लोग मंत्र कहते हैं।]

श्री माताजी: फिर से।

अब, फिर एक और बात, माना की आपके दाहिने भाग की पकड़  है, या आपको यकृत की समस्या है, तो क्या उपयोग किया जाना चाहिए – प्रकाश, सूर्य की किरणें या पानी?सहज योगी: जल।

श्री माताजी: देखिए, दाहिनी ओर गर्मी है, सूर्य नाड़ी है। तो आपको सूर्य नाड़ी की समस्या है – दाईं ओर। इसलिए इसे बेअसर करने के लिए आपको कुछ और इस्तेमाल करना होगा। तो उस समय आपको जो कहना है, वह है – आप कह सकते हैं, आप चंद्र का नाम ले सकते हैं, आप शांत हो जाएंगे। यदि दाहिने हाथ की तरफ गर्मी है, तो आपको चंद्र का नाम लेना चाहिए।यदि यह बायीं ओर पकड़ने वाला है, तो आपको सूर्य का नाम लेना होगा।उदाहरण के लिए, आपके पास है, तो जाओ और धूप में बैठो – सभी भुत भाग जाएंगे। वे सूर्य से दूर भागते हैं। लेकिन मान लें कि आप एक अहंकारी व्यक्ति हैं तो जाकर चांदनी में बैठो। हो सकता है कि आप थोड़े बहुत पगले  हो जाये  (हँसी) यह शब्द ‘लूना’ से आया है, आप देखते हैं? लेकिन अगर आप एक रोने के प्रकार के हैं और हर समय अति-रोमांटिक तो यह चंद्रमा को नहीं देखना बेहतर हैं और बेहतर है की सूर्य को देखें। प्रतिफल को देखें। 

यह बिल्कुल समझने की बात है कि बहुत से लोग, यदि उनको लीवर की समस्या है और वे इसे आग से उपचार करते हैं। अब आग क्या कर सकती है? यहाँ पहले से ही आग लगी हुई है। आग में और भी अधिक आग जोड़ना, आप देखते हैं? लेकिन, व्यक्ति यह भी कर सकता है की इस अग्नि को बाहर निकाल कर इसे दे दें ।अब, तुम कैसे करते हो?

सहज योगी: नींबू?

श्री माताजी: नहीं, नहीं। आग को। मान लिया कि मैं अपने जिगर [लीवर]का इलाज आग से करना चाहती हूं। मैं यह कैसे करुं?

सहज योगी: आप अपनी उंगली वास्तव में लौ पर रख देते हैं ताकि वह जल जाए।

श्री माताजी: नहीं।

सहज योगी: एक सप्ताह से भी बहुत अधिक समय लगेगा! [हँसी]

श्री माताजी: हां, यह सही है लेकिन कुछ चीजो को इसके बारे में कुछ समय लगता है।इस पर सोचें, इसे सोचें, इसे खत्म करें। आप देखते हैं, आपको अपनी गर्मी को बाहर निकालना होगा और इन ऊंचाइयों को देना होगा। आप इसे कैसे करते हो? इस पर विचार। मैं आपको साधारण बात बताऊंगी: यह बायां हाथ माइनस है, यह [दाहिने हाथ] प्लस है, आप इसे इस तरह से ले सकते हैं,ठीक है ? तो आप बाएं हाथ से जो कुछ भी करते हैं, आप उसे खींचते अथवा चूसते हैं। आप दाहिने हाथ से जो कुछ भी करते हैं, उदाहरण के लिए, आप बाहर निकल देते हैं। ठीक है? तो अब अगर आप अब बाहर निकाल देना चाहते हैं, तो आप क्या करें कि, आप बायाँ हाथ अपने ऊपर उस जगह विशेष पर रखें और दाहिने हाथ को बाहर निकलता हुआ रखें। तो वास्तव में यहाँ यह ठंडा करना हुआ है और गर्मी वहाँ बाहर जा रही है। लेकिन अगर आप दूसरी विपरीत तरह करते हैं, तो आप गर्मी चूस रहे हैं।

सहज योगी: हमम..

श्री माताजी: लेकिन बाएं हाथ की तरफ से आप ऐसा करते हैं। बस इलेक्ट्रॉनिक्स, ठीक है, फिर? अब अगर आप यहां जलाते हैं तो एक अच्छा विचार है, बायीं नाभी के लिए बहुत अच्छा विचार है। तो बायीं नाभी गरम हो जाता है।

बाएं बाजु में गर्मी की जरूरत है। दायें पक्ष को ठंडा करने की आवश्यकता है। यह मूल बात है।यदि इस ओर (दाएं) कुछ गलत है, तो आपको इसे ठंडा करना होगा। यदि बाएं तरफ कुछ गलत है, तो आपको इसे गर्मी देना होगा। कुछ लोगों को बहुत अधिक ठन्डे वायब्रेशन होते है। उन्हें बहुत पसीना होगा और ठन्डे होंगे अर्थात बायीं बाजु बुरी तरह ख़राब गई है। अब जहां तक आग का सवाल है, उन्हें क्या करना चाहिए? चलो देखते हैं।

सहज योगिनी: [अश्राव्य] दाहिना हाथ यहाँ

श्री माताजी: उसे पसीना आता है। दिल पर दायां हाथ, बाएं हाथ यहां। अगर किसी को बहुत पसीना आता है, तो इसका मतलब है कि उसका दिल कमजोर है। उस समय दाएं हाथ को यहां दिल पर रखें। गर्मी अंदर आती है। क्या आप इलेक्ट्रॉनिक्स, नहीं, इलेक्ट्रिकल का अनुसरण कर रहे हैं?

सहज योगी: हां, श्री माताजी।

श्री माताजी: इसलिए मूल बातें यदि आप जानते हैं कि बाईं ओर ठंडा पक्ष है, दाईं ओर गर्म पक्ष है। और हाथ के ऊपर, यह माइनस साइड है, यह प्लस साइड है। यहां तक कि आप ऐसा कर सकते हैं और आप खुद को संतुलित कर रहे हैं। यही कारण है कि भारत में हम ऐसा करते हैं, विशेष रूप से यदि आप एक बहुत भुतिया व्यक्ति को देखते हैं, तो आप इस तरह से करेंगे पूरी तरह । आप समझ सकते हैं?

तो, ये दो पक्ष हैं: एक गर्म पक्ष है, एक ठंडा पक्ष है, जबकि सत्वगुण मिलन बिंदु है, गुनगुना है। सत्त्वगुण आपको वह तापमान देता है जो आपका होता है। ठीक है? और ये दोनों आपको बहुत ठंडा या बहुत गर्म देते हैं।

तो हम अब फिर से साइनस पर आते हैं। यह किस बाजु की समस्या है?

सहज योगी: बाएं हाथ की ओर।

श्री माताजी: सही है! बाईं ओर, चूँकि हमारे शरीर में अब तीन चीजें हैं। एक है … आप उसे क्या कहते हैं? Bulgam[कफ]। एक औरBile पित्त है और तीसरा है गैस या वायु। ठीक है? तो बायीं ओर कफ है। ये सभी सर्दी -जुकाम वगैरह बाईं ओर की वजह से होती हैं। और दाईं ओर पित्त है। चर्बी का निर्माण कफ से होता है, जो कि डॉक्टर नहीं जानते हैं। क्या तुम जानते हो? जब दाहिने हाथ की ओर से वसा को गर्म किया जाता है, तो यह घुल जाता है और, वात की गति मध्य में होती है। जब ये पांच प्रकार की वायु, जो हमारे भीतर होती हैं, जब वे सभी एक साथ जुड़ती हैं और आत्मा द्वारा प्रबुद्ध होती हैं, तो आपको ठंडा चैतन्य {कूल ब्रीज} निकलती है।

तो मध्य मार्ग प्राण है। जब यह बिल्कुल गर्म हो जाता है तो तपेदिक [T.B.]जैसे रोग, ये सभी चीजें आ सकती हैं। और जब यह बायीं ओर गर्म हो जाती है तो आपको बहुत अधिक गर्मी के कारण तपेदिक और इन सभी चीजों का सामना करना पड़ता है। जब यह बहुत अधिक गर्म हो जाता है, तो यह दाहिने हाथ की तरफ आता है और आपको यकृत {लीवर] सम्बन्धी बिमारियां  तथा दायीं ओर की गर्मी सम्बन्धी तकलीफे वगैरह मिलती है। तो हालांकि बायीं बाजू ठंडा है, अगर यह गर्म हो जाती है तो बीमारियां भी होती हैं।

अब हमें कभी-कभी विस्तार में जाना होगा कि हमारे शरीर के भीतर क्या, मूल रूप से, हमारे रोग हैं। हमें पता होना चाहिए कि हमारी बीमारी क्या है। सहज योग के अनुसार कभी-कभी साधारण सर्दी होने पर भी यह रोग है। आपको एक सामान्य व्यक्ति होना चाहिए। मान लीजिए आप ग्रसित हैं, भयानक बीमारी, सबसे बड़ा उपद्रव जो की लंदन और इंग्लैंड का आशीर्वाद एक साथ है – सर्दी से। इसे हे फीवर, दिन का बुखार, या कुछ भी कहें! तो इसका कारण क्या है? यह मूल रूप से हमारे भीतर कम प्रतिरोध के कारण है, कोई प्रतिरक्षा शक्ति नहीं होने के कारण। हमारे भीतर कैल्शियम की कमी के कारण कम प्रतिरोध शक्ति रहती है। जिन लोगों ने बचपन में उचित देखभाल की है, जिन्होंने विटामिन ए और डी और अच्छी मालिश कॉड लिवर तेल या जैतून का तेल वगैरह से ली है, और शरीर को उचित सूरज की रोशनी मिली होती है, ऐसे लोग सर्दी से कम पीड़ित होते हैं। यह विशेष रूप से विशुद्धि चक्र की अब वे लोग जो अपने विशुद्धि चक्र के बारे में सावधान नहीं हैं, वे इस बीमारी को अपने भीतर स्थायी कर लेते हैं, लेकिन जब यह बीमारी स्थापित हो जाती है, तो वास्तव में क्या होता है? क्या कारण है, जैसा कि हमने कहा कि यह बाएं हाथ की समस्या है। सर्दी बाएं हाथ की समस्या है। इसका मतलब है कि ठंड का आपके भावनात्मक पक्ष से कुछ लेना-देना है। इसका मतलब है कि आपके साथ भावनात्मक रूप से कुछ गड़बड़ है। तो यह इंगित करता है कि आपको कुछ भावनात्मक समस्या है। सहज योग के अनुसार, सर्दी को दूर करने के लिए अपने आप को इस भावनात्मक जीवन में झांकना चाहिए। आप अपनी भावनाओं के बारे में कर क्या रहे हैं? उदाहरण के लिए, जैसे ही आप भावनाओं से प्रभावित होते हैं, आप रोना या छींकना शुरू कर देंगे। (हँसी)

यह सच है। अगर ये लड़कियां हैं, तो वे रोने लगेंगी। यदि वे पुरुष हैं, तो वे खाँसना या छींकना शुरू कर देंगे। वे बिना कारण खाँसने लगेंगे। आप देखिएगा [श्री माताजी खांसते हैं] वे जाएंगे।[हँसी

]क्या यह एक तथ्य नहीं है? अनावश्यक रूप से वे ऐसा करते रहेंगे।एक भावनात्मक चीज है, शायद ध्यान आकर्षित करने के लिए या जो भी हो। यह कहने के लिए कि वे कितने दया पाने के योग्य हैं, आप देखिए, यह एक ऐसी चीज है जिसके द्वारा हम अपनी दयनीय स्थिति प्रदर्शित करते हैं। आप देखते हैं, एक चीज है, हम अपने आप को उस स्थिति तक गिरा लेते हैं जिसके द्वारा हम प्रयास करते हैं कि, दूसरे व्यक्ति में अपने प्रति दया को उत्पन्न करते हैं।

तो यह सर्दी हमारी भावनात्मक समस्या के कारण है। अब इसलिए हमें देखना चाहिए कि हमारी भावनात्मक समस्या क्या है। हम कितने ‘रोमियो’ हैं [श्री माताजी हंसते हुए ]। और कितना जीवन का आनंद हम इस कारण खो देते हैं। एक बार जब आप यह समझना शुरू कर देते हैं कि आप अपने खुद के रोमियो हैं और आप अपने खुद के जूलियट हैं – तो आप में से अधिकांश को अपनी सर्दी से छुटकारा मिल जाएगा। मुझसे यह वादा ले लो ।

हमें पता लगाना चाहिए कि यह किसी प्रकार की भावनात्मक समस्या है। आपके पिता के साथ की हो सकती है। एक व्यक्ति जो अपने पिता से बहुत लिप्त है। ‘लिप्त’ सबसे अच्छा शब्द है, ठंड से भी जुड़ा हुआ है। माँ से लिप्त होना और भी बुरा है। यदि कोई अपनी माँ से बहुत लिप्त हुआ है, तो आप देखते हैं की,फिर तो सभी विवेक-बुद्धि विफल हो जाती हैं और फिर माँ गलत व्यवहार करती है या कुछ करती है और बच्चे को बहुत चोट लगती है, बच्चा रोता है, उसे सर्दी-जुकाम लग जाता है।  अपनी सर्दी-जुकाम की तकलीफ से छुटकारा पाने के लिए, ऐसा कोई भी लगाव जो आपको मूर्ख बनाता है त्याग देना चाहिए |  मेरा कहने का मतलब है, जो कुछ भी आपको  बेवकूफ, मूर्ख या किसी के प्रति लालायित बनाता है, वह जुकाम जैसी परेशानी पैदा करता है। ‘विशेष रूप से रोमियो फिर बहुत प्यारे बच्चे, प्यारे पिता, प्यारी माँ, तुम देखो, वो लोग जिनके लिए उनकी बेटी या बेटा महत्वपूर्ण है। कुछ लोग अपने बच्चों से बिलकुल प्यार नहीं करते हैं और अगर कुछ लोग प्यार करते हैं तो वे उन्हें हर किसी पर थोप देंगे |

तो इसके ये दो प्रकार हैं । आपको पता होना चाहिए कि आप सिर्फ अपने बच्चे के अमानतदार या संरक्षक  हैं और, जहां तक आपके  रोमियो-पन ’का संबंध है, आपको बस अपने इस रोमियो का नाटक देखना हैं,तब फिर यह निर्लिप्तता घटित हो जाएगी  और सर्दी-जुकाम जैसी एक साधारण बीमारी जो इतनी भयानक, लाइलाज लग रही है, ठीक हो सकती है। यदि आप लोगों को बिना किसी रोमांटिक भावनाओं के सर्दी-जुकाम है, तो यह मुझे भी होता है। इसलिए मैं आपसे अनुरोध करती हूं कि आप इन चीजों से ऊपर उठें और अधिक समझदार बनें, और आपका दृष्टिकोण आपसी समझ, आपसी प्रेम और प्रेमपूर्ण भावनाओं को बढ़ाने वाला होना चाहिए, ना की रोमांटिक भावनाओं वाला ।

लेकिन इससे भी बदतर आप जानते हैं? दायीं बाजू पर भावनाओं का अभाव हैं। फिर अगर आपके गले सूखते है तो आप बोल भी नहीं सकते। अचानक आपको पता चलता है कि, आप सिर्फ इसलिए नहीं बोल सकते क्योंकि आप शुष्क हो चुके हैं। तो दूसरा पक्ष वह है जहां कुछ लोग अपनी पत्नियों या पतियों के साथ कुछ मनोवैज्ञानिक कोशिश करते हैं – जैसे “मैं नहीं बोलूंगा/बोलूंगी “। यह मैं आपको जीवन का सिर्फ एक भावनात्मक पक्ष बता रही हूं। “मैं उससे बात नहीं करूंगा/करुँगी  मैं नहीं बोलूंगा/बोलूंगी मैं इस तरह का व्यवहार करूंगा/करुँगी। ”शुष्कता । वह भी आनंद को मार देता है। एक तरह का व्यक्ति इसकी अति कर रहा है और दूसरा व्यक्ति बिलकुल भी नहीं कर रहा है। आप देखते हैं, या तो आप एक गिलास में एक टन शक्कर लेंगे, या आप बिल्कुल भी शक्कर नहीं लेंगे।  चाय का उचिततम आनंद लेने के लिए, आप एक चम्मच चीनी, न काम ना ज्यादा नहीं लेंगे। देखिये। उसी तरह, जीवन में भी, आपको किसी चीज़ का बहुत अधिक और दूसरी चीज़ का बहुत कम सेवन नहीं करना चाहिए। अब जिन लोगों ने शादी की है, विशेष रूप से, भारतीय महिलाएं, उन के लिए, सबसे महत्वपूर्ण पति हो जाता है, फिर बाकी सब शून्य है। तब ऐसी महिलाएं किसी काम की नहीं, बेकार हैं। या वे पुरुष जिस तरह के मैंने यहां देखे है, वे अपनी महिलाओं पर पागल हैं। उनके लिए भी, जीवन बेकार है।तो उस में पूरी बात का एक संतुलित रवैया अपनाएँ। यह आप में ही वह व्यक्ति है, जो आपकी पत्नी को प्यार कर रहा है, जो की आपके भीतर भी है। तुम ही अपनी पत्नी हो, तुम ही अपने पति हो। अब वह पत्नी जो बाहर आपकी पत्नी है, अगर वह उस पत्नी से जरा भी मेल नहीं खाती है जो आपके मन में है, तो आपको परेशान नहीं होना चाहिए, क्योंकि वह मन वाली पत्नी हमेशा आपके साथ है। एक बार जब यह समझ विकसित हो जाती है, तो आप अपनी साझेदारी देखते हैं – [श्री माताजी एक तरफ किसी अन्य से : वैसे, मैंने आपका पत्र पाया] – पति और पत्नी की साझेदारी बिल्कुल सही हो सकती है।

अब बच्चों के साथ जैसा मैंने कहा -हैलो, आप किस ट्रेन से आए थे?

सहज योगी: अंतिम वाली । [हँसी]

श्री माताजी: वास्तव में  यह लेट थी ! आपके खाने के बारे में क्या?

सहज योगी: हम दोनों ने कुछ लिया था।

श्री माताजी: वाक़ई? कहाँ पे?

सहज योगी: विनचेस्टर में।

श्री माताजी: आप कुछ और बता रहे थे। कहाँ पे? मेरा मतलब है कि अगर आप सच कह रहे हैं तो आप वही बात बताएंगे।

सहज योगी: हमने मछली और चिप की दुकान से कुछ चिकन लिया था।

श्री माताजी: ठीक है। अगर आप चाहें तो कुछ खाना है। कृपया लीजिये |कृपया उन्हें लेने दो… .. हम सिर्फ आप सभी को याद कर रहे थे। हां, बहुत अच्छा, बहुत अच्छा और अच्छा चैतन्य है । अच्छा।

परमात्मा आपका भला करे।

तो तुम जाओ और अपना भोजन करो।

अब, इसे इतना हल्का क्यों बनाया जाता है: आपको यह समझाना कि शादी एक गंभीर समस्या नहीं है। [हँसी] जब तक की आपके पास अपने आदर्श है और आप इसे अपनी पत्नी पर थोपने की कोशिश नहीं करते हैं, या पत्नी अपने  पति पर यह थोपने  की कोशिश नहीं करती है।

पत्नी को पत्नी और पति को पति होने दो। लेकिन पत्नी को पति नहीं बनना चाहिए और पति को पत्नी नहीं बनना चाहिए। अगर ऐसा होता है, तो मुझे नहीं पता कि इसे कैसे ठीक किया जाए, क्योंकि ऐसा होने पर कुछ बेतुका है। अब, उस पर मुख्य बात यह जानना है कि आप बच्चे पैदा करने के लिए शादी कर रहे हैं, रोमियो और जूलियट 

 होने के लिए नहीं | बेहतर है की आप के बच्चे हों। और फिर जो बच्चे सहज योगियों से पैदा होंगे, वे आत्मसाक्षात्कारी होंगे, ऊर्जा के जबरदस्त स्रोत होने जा रहे हैं। यही कारण है कि आपकी  शादी होती हैं, इसीलिए आपके बच्चे होने वाले हैं। फिर अपने बच्चों को सम्मान, ध्यानपूर्वक पाले। उन्हें मत बिगाड़ो! और उन्हें सहज योग के उस प्रेम में विकसित करें। 

अब हमने अपने हंसा चक्र से शुरुआत की। अब देखिये हंसा चक्र बायाँ और दायाँ है। बाईं ओर महिला है, दाएं पुरुष है। वे हंसा में मिलते हैं। तो यह आपके बाएं और दाएं का विवाह स्थान है। अगर दोनों के बीच संतुलन नहीं है, तो एक समस्या है। उन्हें बराबर होना होगा। लेकिन वे समान नहीं हैं। बायाँ बांयी तरफ है।दायाँ दांयी तरफ है। तो दायाँ, दाहिनी ओर होना चाहिए, बायाँ, बाएं हाथ की तरफ होना चाहिए और यहाँ जब वे आते हैं, तो वे शादी करते हैं, और यही वह बिंदु है जो व्यक्ति को जानना चाहिए कि, जो भी पत्नी का कार्य जो है,उसे वह प्राथमिकता से करना चाहिए और, जो भी पति के कार्य है, उसे वे प्राथमिकता से करना चाहिए। और फिर जीवन के अतिरिक्त  कार्यों को साझा और समझा जा सकता है। लेकिन यह संभव नहीं है कि पत्नी काम पर जाए और पति बच्चे पैदा करे। तुम यह नहीं कर सकते! [हँसी] और दूसरा रास्ता नहीं है |

तो जो भी काम है वह इतना महत्वपूर्ण है|  मुझे लगता है, सबसे महत्वपूर्ण है, मां बनना। आप मुझे बताएं, आज अगर आपके पास माँ नहीं होती, तो कौन सा पिता यह काम करता, । कौन सा? क्या आप किसी के बारे में सोच सकते हैं? पिता स्वर्ग में हो सकते हैं, हो सकता है, लेकिन इस पृथ्वी पर सभी सहज योगियों के साथ काम करने वाले  पिता, मैं देखना चाहती हूँ कि कौन? इनमें से कोई भी जो पिता कहलाते हैं। अच्छी तरह से स्वर्ग में बैठ कर सब कुछ देखना, लेकिन काम करने वाला कौन है? माँ गंदे कपड़े, सभी नैपकिन, अन्य चीजों को धोती है। वह प्यार और ध्यान से और देखभाल के साथ ऐसा करती है, और वही है जो अपने बच्चों को विकसित करना जानती है। माँ का काम है। तो माँ का काम माँ ही कर सकती है। पिता स्वर्ग में बहुत अच्छी तरह से बैठ सकते हैं। सभी का धन्यवाद पिता को जाता है। जबकि माँ यहाँ अकृतज्ञ काम कर रही है! ठीक है, कोई बात नहीं है, जो जैसा है वैसा ही स्वीकार किया जाना चाहिए, जो भी स्थिति परिस्थिति हो,।अब हंसा चक्र पर, यह समझ अवश्य आनी चाहिए कि आपको दोनों नाड़ियां, बाएँ और दाएँ दोनों को संतुलित करना चाहिए। अब बाईं और दाईं ओर संतुलन करने के लिए, सबसे अच्छा तरीका है कुछ श्वास की क्रिया करना, हवा को एक नथुने के माध्यम से लेना है और इसे थोड़ी देर रोक कर और फिर इसे दूसरे से बाहर जाने की अनुमति देना है। फिर आप इस दुसरे नथुने से सांस लेते हैं, इसे कुछ समय के लिए यहां रोकते हैं और फिर इसे पहले वाले से जाने देते हैं। लेकिन यह बहुत धीरे-धीरे करना चाहिए| जल्दी में नहीं, बहुत ज्यादा नहीं। केवल तीन बार (3 बार)।

सबसे अच्छी बात जो मैंने आपको बताई है वह है, नेती। यदि ऐसा नहीं है, तो एक और चीज जो मैंने यह देखी है कि जो इनहेलर्स हैं, देखिये, जो कि आप प्राप्त करते हैं, बहुत अच्छे हैं। जो नेती की चीज़ मैंने आपको दी है। यदि आप टोंटी के नीचे तक पानी भर कर उन सूंघने की चीजों में से किसी एक की दो, तीन बूंदें डालें, और उस नेती की टोंटी को केवल एक नथुने में डालें और दूसरे नथुने से निकलने दें। फिर आप आते हैं, इसे यहां लाते हैं, यह ऊपर जाता है और इसे साफ करता है। यह बहुत अच्छा उपाय है। यदि आप इसे हर रात सोने से पहले करते हैं, तो तीन, चार दिनों में आप बिल्कुल साफ हो जाएंगे। लेकिन मुख्य बात यह है: यह हमारे स्वभाव में असंतुलन के कारण आता है। जैसे पुरुष पुरुष है, स्त्री स्त्री है, ठीक है, इसलिए स्त्री पुरुष पर हावी होने लगती है या पुरुष स्त्री पर हावी होने लगता है | संतुलन टूट गया है। एक बार जब आप समझते हैं कि महिला बहुत महत्वपूर्ण है –  महिला के बिना, आप यहाँ नहीं हो सकते थे,असंभव। ठीक है? एक महिला के बिना आप यहां नहीं हो सकते। पुरुष बहुत महत्वपूर्ण है कि पुरुष के बिना स्त्री का कोई प्रयोजन नहीं है। आप देखिए, ईश्वर के बिना शक्ति का कोई उद्देश्य नहीं है। वह किसके लिए काम कर रही है? किसके लिए वह यह सब कर रही है? ईश्वर को प्रसन्न करने के लिए। यदि कृत्य को देखने वाला कोई नहीं है, तो वे  क्यों करें?

तो दोनों का बड़ा लक्ष्य है। और अगर आप समझते हैं कि हमारे भीतर की दोनों हस्ती  संतुलित हैं, समझी गई हैं, ठीक से सम्मानित,साझा और समन्वित हैं, तो उचित समझ, सम्मान और प्यार से व्यक्तित्व, आपका हंसा सुधर जाएगा। आप बेहतर महसूस करेंगे।

इसलिए आपको शादी के बारे में, महिलाओं के बारे में, पुरुषों के बारे में, अपने बारे में अपने विचारों को ठीक करना होगा। यह बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह एक बहुत बड़ी भावनात्मक चीज है और, जैसा कि बाईं बाजु कमजोर है, सभी लोग जो बाएं तरफ कमजोर हैं, उन्हें सर्दी-जुकाम और अन्य सभी तकलीफ जो कफ की वजह से होती हैं  हैं, हो जाती हैं।  वे इसे बलगम कहते हैं, क्या यह है? इसे क्या कहते हैं?

सहज योगी: PHLEGM कफ।

श्री माताजी: कफ। कफ। कफ। इस का आपके कफ से सम्बन्ध है।इसलिए भावनात्मक पक्ष को अच्छी तरह से पोषण और देखभाल करना है और व्यक्ति को यह जानना है कि आपकी गरिमा सबसे महत्वपूर्ण है। कोई भी गरिमा विहीन चीज़ करना प्यार नहीं है। प्यार बहुत गरिमापूर्ण होता है। और यदि आप अपनी गरिमा बनाए रखते हैं, तो आप आश्चर्यचकित होंगे कि आप कुछ समस्याओं को कैसे हल कर पाएंगे।

अब, फिर से मैं आपसे एक प्रश्न पूछूंगी। अब, कितने लोगों ने सवालों के जवाब दिए हैं? उनमें से अधिकांश का आपने बहुत अच्छा उत्तर दिया। अब एक और सवाल मैं पूछूंगी। बहुत सरल, इतना मुश्किल नहीं। वह: एक बाधा और एक भुत में क्या अंतर है? आप कैसे पहचानोगे ? एक अड़चन और एक भूत।

सहज योगी: भूत घूमेंगे।

श्री माताजी: और बाधा ?

सहज योगी: वहीं रहते हैं। केवल वर्णन करता हूँ, यह उस बिंदु पर एक अडचन है।श्री माताजी: हालाँकि यह सही है, [आपने] जो कहा है वह सही है, लेकिन यह बिल्कुल सटीक नहीं है। यह ऐसा है, मैं आपको बताती हूं। यह सही है। मेरा मतलब है कि वह जो कहता है वह सही उत्तर है लेकिन यह इतना सटीक नहीं है।बाधा भी घूम जाएगी। मैं आपको बताऊंगी कि कैसे|  बाधा हमेशा चक्रों पर या आपके अंगों पर होती है, जैसे। यदि यह, उदाहरण के लिए, यकृत [लीवर]में है, तो यह बाधा चक्र में आ सकती है और फिर यह आपके यहाँ से यहाँ तक घूमना शुरू कर देगी, जैसे,जैसे कुंडलिनी चलेगी। ठीक है? लेकिन बाधा का अपना मनमाना भ्रमण नहीं है। जैसे-जैसे आप कुंडलिनी को आगे बढ़ाते हैं, वैसे-वैसे बाधा चलती जाती है। ‘बाध’ का अर्थ है अडचन। ठीक है?लेकिन एक भूत मनमाना है। यह चलता है। यह एक क्षण यहां होगा, अगले क्षण वहाँ होगा। यह इस तरफ जाएगा, यह उस तरफ जाएगा। यह दाहिने हृदय में जाएगा, फिर यह बाएं हृदय में आएगा। यदि यह मनमाना व्यवहार है, तो इसका मतलब है कि यह कुंडलिनी जागरण के माध्यम से आपकी उंगलियों के चलन से नियंत्रित नहीं है, तो आपको पता होना चाहिए कि यह एक भुत है। ठीक है? अब समझें कि मैं निर्णायक बात क्या कह रही हूं, कि, एक बात है मनमानी , अपने आप काम करता है, और दूसरा आपके नियंत्रण में है। आप इसे स्वयं निकाल सकते हैं।

जैसे आप कह सकते हैं कि अगर शरीर में कुछ गांठ है, तो यह घूमना शुरू कर सकता है, जैसे की, रक्तप्रवाह या कुछ, कुछ अन्य बल इस पर काम कर रहा हो,के कारण। लेकिन यह अपने आप से नहीं घूम रहा है। लेकिन अगर कोई कीड़ा, जीवित कीड़ा है, तो वह अपने आप आगे बढ़ जाएगा।

तो आखिरी सवाल यह है कि, आप बाधा या भूत का प्रबंधन कैसे करते हैं? आप खुद को इसमें शामिल किए बिना दूसरे लोगों के भूत कैसे निकालेंगे? वरना जिस व्यक्ति का भूत बाहर निकाला जाना है, वह आप में तीन भूत डालेगा और पाँच दूसरों में।(हँसते हुए)मैंने कई बार देखा है कि वे आएंगे और मुझे बताएंगे,”माँ, वह भूत ग्रस्त है ।” ठीक है। और वे खुद हैं! (हँसी) आप कैसे निकालते हैं? चलो बताओ।

सहज योगिनी: बंधन

श्री माताजी: क्या? बंधन? नहीं!

सहज योगी: आप भूत को मोमबत्ती में फेंक सकते हैं।

श्री माताजी: मेरा मतलब है, मैं एक असली की बात कह रही हूं। वह मोमबत्ती से भी नहीं डरता।

सहज योगिनी 2: मंत्र, मुक्ति देवी का मन्त्र कहें

सहज योगिनी 3: लॉर्ड्स प्रेयर ,प्रभु की प्रार्थना

श्री माताजी: इसके बारे में कोई सामान्य बात नहीं है। ठीक है? सभी उत्तर सही हैं लेकिन वे पूर्ण नहीं हैं। अलग-अलग भूतों के अनुसार तरीके और विधि हैं… (योगिनी के साथ मराठी में)… वे समस्याओं को हल करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उसने कहा की यह मुश्किल है!

अब, सबसे पहले, आप एक व्यक्ति को देखते हैं जो भुत ग्रस्त है। मेरा मतलब है कि आप सुनिश्चित हैं कि वह भूत ग्रस्त है, इसलिए आप ऐसा करते हैं, देखिये। [हँसी]। एक रूप लेते हैं , आप एक मुद्रा में आ जाते हो क्योंकि आपको इससे लड़ना होगा। आप एक आक्रामक रूप लेते हैं।

सहज योगी: कराटे, टोनी के कराटे [टोनी कुली]

।श्री माताजी: कराटे, हाँ। ऐसा कुछ। तो फिर, मेरा मतलब है कि आप आतंरिक रूप से उस व्यक्ति की तुलना में ऊँचे हो जाते है। नहीं तो अगर तुम कमजोर बन कर जाओ (योगियों से हँसी)। कुछ समय बाद (अधिक हँसी)। तो आप उस व्यक्ति पर एक बड़ी शक्ति के साथ जाते हैं। आप बंधन लगाते हैं और कहते हैं, “अब बैठ जाओ।” उससे इस तरह बात करो। तुम जा कर इस तरह मत कहो की, “कृपया बैठ जाओ,” वरना वह चीज आप में आकर बैठ जाएगी। बस कहो, “अब बैठ जाओ।” ठीक है। वहां आपको इस तरह यह कहना होगा जैसे कि, आप इस पर समझौता नहीं कर रहे हैं। कोई समझौता नहीं। फिर आप अपने आप को एक बंधन देने के बाद, यह सत्यापित करने के लिए कि यह किस प्रकार का भूत हो सकता है, व्यक्ति से विभिन्न प्रश्न पूछते हैं। यह सबसे अच्छा है। सबसे पहले आप उस व्यक्ति से पूछे, “क्या आप किसी गुरु के पास गए हैं?” तो अब आप उनमें से कम से कम सोलह को जानते हैं। और आप यह भी जानते हैं कि उन्हें कैसे निकालना है। तो आपको पता चलता है कि वह किस भूत के पास गया। यदि यह एक गुरु है, तो आप उस व्यक्ति से पूछे कि क्या वह अभी भी उस गुरु पर विश्वास करता है। यदि हां, तो आपको उस व्यक्ति से कोई लेना-देना नहीं है। आपका कोई काम नहीं है। आप कहते हैं , “मुझे खेद है, सर” …। माफी नहीं। आप कह दें की , “कृपया चले जाओ।” यदि आप कहेंगे “क्षमा करें” तो वह अंदर आ जाएगा। कोई भी आमंत्रण के शब्द का आपको उपयोग नहीं करना चाहिए। बस कहें, “ठीक है, समाप्त हो गया!” आप उस से बाहर निकल जाते हैं। लेकिन ऐसे मामले में जब वह कहता है, “मैं भूत ग्रसित हूँ । मुझे पता है कि मैं मुसीबत में हूँ, मुझे यह बात समझ में आ गई है “और यह सब, फिर आप उस व्यक्ति को पूछते हैं कि” आपके गुरु का नाम क्या है? आपको मिला कोई मंत्र क्या है? आपको कितने साल हो गए? ”उस तरह, आप सवाल पूछते हैं। अगर वह सच्चा है और अगर वह आप को बताता है, तो आप वास्तव में जानते हैं कि मंत्र कहां है, उसको क्या हुआ है। यदि यह गुरु है, तो इसे भवसागर में होना चाहिए। यदि यह भवसागर में है, तो आप उसे आदि गुरु का मंत्र कहने के लिए कहें, या वह मेरी तस्वीर के सामने यह प्रश्न पूछें की, “माँ, क्या आप वास्तविक गुरु हैं?”हो सके तो अपने चेहरे के सामने फोटोग्राफ को रक्षा कवच की तरह रखें। अपने आप को उजागर करने की अनुमति न दें, बल्कि उस व्यक्ति को तस्वीर दें। आप कहें की, “अब इस तस्वीर से सवाल पूछें।”

अब यदि वह व्यक्ति प्रश्न पूछता है, तो कुंडलिनी “गगरल गगल” करते हुए यहाँ आने लगेगी। वह भी वहाँ की घटना,  ऊपर उठती हुई को देखेगा,  आप देखिए। फिर उसके द्वारा प्रश्न पूछ चुकने के बाद आप उसे कहें कि, “अब आप बोलें कि, ‘आप स्वयं के गुरु हैं’!”

यदि व्यक्ति गुरु से ग्रसित है, तो यदि आप गुरु का नाम जानते हैं, तब आप मंत्र भी जानते हैं। जब वह इन सभी चीजों को कर रहा है, तो आप “नरकासुर मर्दिनी” या “महिषासुर मर्दिनी” या ऐसा ही कुछ कह सकते हैं, जो भी आपको करना है। या “सर्व-असुर मर्दिनी”|  इस चीज़ के लिए, सबसे अच्छी चीज़ है नमक,चेत्न्यित नमक। आप उस व्यक्ति को पीने के लिए पानी के साथ कुछ मिला हुआ वायब्रेट नमक दें। गुरु से छुटकारा पाना आसान नहीं है, इसलिए आप उसे बहुत दृढ़ता से कहें कि वह उन भयानक लोगों में से एक है जिन्हें हमने कभी जाना है, इसलिए आपको इससे छुटकारा पाने के लिए बहुत मेहनत करनी होगी। आप उसे नमक दें, उसे वह सब दें, उसे वह सब करने दे। और जल्दी मत करो। उसे बताएं कि इसमें समय लगने वाला है, यह ठीक हो जाएगा, और लोगों को इससे क्या क्या परेशानी हुई है, उसे कड़ी मेहनत करनी होगी। यह उन कई में से एक प्रकार का भूत है जो आप जानेंगे। फिर आप पाते हैं कि ये गुरु भूत जो  हैं, इसमें समय लगता है, ये बहुत कठिन हैं और ये आपको चुनोती दे सकते हैं, यह बहुत खतरनाक हो सकता है।

परन्तु जैसे, कोई भूत के कारण अंधा हो जाता है। उसकी आँखें खुली हैं और वह अंधा है। तो यह यक़ीनन वह एक भूत की वजह से अंधा है। अंधेपन के दो प्रकार संभव हैं। बायाँ स्वाधिष्ठान पकड़ में आ जाएगा और आप देखेंगे कि यह भूत के कारण है। लेकिन यह बायाँ स्वाधिष्ठान की पकड़ और अंधा हो जाना मधुमेह के साथ हो सकता है। दोनों का मिला-जुला प्रभाव भी हो सकता है। इसलिए आप उससे पूछें कि उसे मधुमेह है या नहीं। यदि व्यक्ति को कोई मधुमेह नहीं है, तो निश्चित रूप से यह भूत है।अब आप उस तरह के भूत को बाहर निकालने के लिए क्या करते हैं?

सहज योगी: आप प्रबुद्ध मोमबत्ती का उपयोग करते हैं।

श्री माताजी: केवल मोमबत्ती ही काम नहीं करेगी। तुम मेरी हथेली लो। फोटो, केवल हथेलियों का। आपके पास मेरे हाथ की तस्वीरें हैं, और उस तस्वीर से सामने एक मोमबत्ती रखो। आपके पास जो मेरी विभिन्न तस्वीरें हैं उनके अलग-अलग तात्पर्य हैं। मोमबत्ती रखो और उसके पीछे हाथ है और व्यक्ति को प्रकाश की तरफ देखने के लिए कहें, यदि वह प्रकाश देख सकता है तो और अच्छा।  आप हैरान होंगे कि धीरे-धीरे,उसको दिखाई देना शुरू होगा। यह प्रयोग किया जाना है | सहज योग में, आप देखते हैं व्यक्ति को अंग्रेजी शब्दों [कानूनों] की तरह सटीक होना चाहिए। यदि आप सटीक हैं, तो यह परिणाम देता है। यदि आप सटीक नहीं हैं, तो आप ऐसे या वैसे  कोशिशें करते हैं, पर यह काम नही करता। लेकिन अगर आपके पास मेरे हाथों की तस्वीर है, तो आपको उस व्यक्ति से प्रकाश में से होते  हुए हाथ की तस्वीर पर दृष्टी डालने को कहना चाहिए। प्रकाश को देखते हुए, धीरे-धीरे व्यक्ति हाथ देखना शुरू कर देगा, और फिर धीरे-धीरे व्यक्ति ठीक हो जाएगा। मैंने एक व्यक्ति को दस मिनट के भीतर आँखें प्राप्त करते देखा है। लेकिन उस में, यदि बायाँ स्वाधिष्ठान पकड़ रहा है, अगर उस व्यक्ति को कोई मधुमेह नहीं है और आँखें खुली हैं, तो यह निश्चित रूप से एक भूत है, और कुछ नहीं। भले ही कुछ लोग कहें, “उसने अपनी आँखें खो दीं, क्योंकि इस लड़की ने अपनी आँखें खो दीं क्योंकि घर में आग लग गई थी।” लेकिन वह घबरा गई और भूत यहाँ बैठ गए और वह अंधी हो गयी। वे दोनों चीजे जुडी हुई हैं। वास्तव में आंखें खुली नहीं रह सकतीं अगर आंखें बाहर से जल चुकी हैं। इसलिए यदि आँखें खुली हैं और देखने में बिल्कुल सामान्य है और व्यक्ति नहीं देख सकता है, रौशनी जा चुकी है,  इसका मतलब है कि वहाँ एक भूत है। तो ये चीजें बहुत आसानी से की जा सकती हैं।

सहज योगिनी [हिंदी में]: आप इसे कैसे करती हैं?

श्री माताजी: इस तरह से फोटो, और उसके सामने प्रकाश। यह आपकी दृष्टि में भी सुधार करेगा। मेरे हाथों का उपयोग किया जाना चाहिए, आंखों के लिए बहुत अच्छा है। मेरे हाथ तुम्हारी आँखों के लिए बहुत अच्छे हैं। यदि आप प्रकाश के साथ मेरे हाथों को देख सकते हैं, तो आपकी आंखों के लिए बहुत अच्छा है।

अब मेरे पैर किस प्रकार अच्छे हैं?

सहज योगी: आज्ञा ।

श्री माताजी: अहंकार के लिए बहुत अच्छा है। और प्रति-अहंकार भी। उन लोगों के लिए बहुत अच्छा है जो अहंकार या प्रति-अहंकार से पीड़ित हैं, मेरे पैर। क्योंकि, ऐसे लोग बहुत सतही होते हैं। और पैर समस्या का समाधान करते हैं। तो बस मेरे पैरों का उपयोग करें।

यदि वे मेरा चेहरा देखते हैं, तो अहंकार अपना काम करना शुरू कर देगा की , “यह चेहरा ऐसा है, यह इस तरह होना चाहिए – यह, वो।” प्रति-अहंकार समस्याएँ दे सकता है। यहां तक कि अवचेतन भी आपको समस्याएं देगा। लेकिन पैर, भले ही आपको अवचेतन की समस्या हों, वे आपकी समस्याओं को ठीक करेंगे। पैर न केवल शक्तिशाली होते हैं बल्कि वे उस स्थूल बिंदु तक जाते हैं जहां आप हैं। किसी भी प्रकार का व्यक्ति। जैसे, एक शराबी, जो भी सभी बुरी चीजें और, एक अपराधी, किसी प्रकार का आदमी है, आप सिर्फ मेरे चरणों का उपयोग करें, वह पूरी तरह ठीक होगा। उसके लिए चेहरा काम नहीं आयेगा।

चेहरा साधकों के लिए है। लेकिन ऐसे सभी लोगों के लिए, जो बिल्कुल सुधरने जैसे नहीं हैं, चरण सबसे अच्छे है। जिनको अति अहंकार है, जिनको अति-प्रति-अहंकार है – अति। पैर बहुत महत्वपूर्ण हैं। तुम भी कभी-कभी मेरे चरण देखो। यह एक बहुत अच्छा तरीका है, अभ्यास करें। अपनी स्थूलता से छुटकारा पाने के लिए मेरे चरण देखें। बस अपनी आँखों से देखो। आप अपने सहस्रार के माध्यम से कैसे देखने वाले हैं ? (हँसी) लेकिन सहस्रार से भी आप देख सकते हैं।

सहज योगी: माँ, क्या आप सोचती हैं कि, अगर हम अख़बार के विज्ञापन में फोटो में आपके पैर का इस्तेमाल करते हैं तो हमें अधिक लोग मिलेंगे?

श्री माताजी: बेहतर विचार होगा।

सहज योगी: हम यही कोशिश करेंगे।

श्री माताजी: लेकिन देखिये, कि मुझे पता नहीं है। (हँसी) कोशिश करो। बहुत अच्छा विचार। आप देखिये, मेरी किताबों और अन्य सभी पर हमने आजमाया हैं। इतनी सारी चीजों पर मैंने कोशिश की है, मेरे चरण रख दिए हैं। भारतीय इसे समझते हैं।सहज योगी: क्या आपको लगता है कि वे अमेरिका में समझेंगे?

सहज योगी: ठीक है, हमें उसी चीज में आप का नाम नहीं बताना है।

श्री माताजी: चलो, मेरे चरण रख दो।

सहज योगी: इसके माध्यम से काम होने देंगे। हम प्रकाशित करेंगे ‘सहज योग’,  हम इस बारे में कुछ नहीं बताएँगे की,  किसके चरण है।

श्री माताजी: कोशिश करो। बहुत अच्छा है। वे जबरदस्त हैं, सभी रोशनी को प्रतिक्रिया करते हुए देखें। आप समझ सकते हैं?

[श्री माताजी हिंदी में बोलती हैं।][कुछ योगी श्री माताजी के पैर रगड़ने लगते हैं।]

पैरों पर लगाना। इसे यहाँ ले आओ। मैं उसे वहां देना चाहूंगी, ठीक है, उसे वहां दे दो ताकि वह बेहतर कर सके।[श्री माताजी हिंदी में बोलती हैं।]Mmm। चेहरा देखिए। अब दूसरों को भी मौका दें।

परमात्मा आपका भला करे।

साथ चलो।