What is a Sahaja Yogi, Morning Seminar

Old Arlesford Place, Arlesford (England)

1980-05-17 What Is A Sahaja Yogi, Winchester, Version 2, 55' Download subtitles: EN,ITView subtitles:
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                                     एक सहज योगी क्या है 

 सेमिनार की सुबह, ओल्ड आर्ल्सफ़ोर्ड (इंग्लैंड)

17 मई 1980।

हमें पता होना चाहिए कि सहज योग एक जीवंत प्रक्रिया है। यह उसी प्रकार की प्रक्रिया है जिसके द्वारा एक बीज अंकुरित हो एक पेड़ में परिवर्तित होता है। यह एक जीवंत प्रक्रिया है। तो यह ईश्वर का काम है मेरा मतलब है कि उन्हें यह करना होता है । यह तुम्हारा काम नहीं है। 

बीज अंकुरित करना उनका काम है।

लेकिन समस्या इसलिए आती है, क्योंकि इस अवस्था में जहां मनुष्य बीज रूप है, उसके पास स्वतंत्रता है, उनके पास स्वतंत्रता है। उस स्वतंत्रता के साथ वे ईश्वर की अभिव्यक्ति, उसके कार्य को बिगाड़ सकते हैं।

इसलिए पहली बात यह याद रखनी चाहिए कि हमें इसके बारे में विवेक होना चाहिए। विवेक का पहला बिंदु यह है कि सर्वशक्तिमान परमात्मा इस काम को करने जा रहा है। हम यह नहीं कर रहे हैं। आप बीज को अंकुरित नहीं कर सकते हैं, फिर आप अपने बीज को भी कैसे अंकुरित कर सकते हैं? और उस विवेक में हमें अपने भीतर,एक चीज सीखनी चाहिए और जानना चाहिए, कि आप पूरी प्रक्रिया के अंग-प्रत्यंग हैं। यद्यपि आपकी अपनी स्वतंत्रता है, लेकिन यह स्वतंत्रता भी उसी प्रक्रिया का अंग-प्रत्यंग है। आप परमात्मा से अलग नहीं हैं। आप का कोई अलग अस्तित्व नहीं है। आप उस पूरी प्रक्रिया का अंग-प्रत्यंग हैं। ठीक है? इसलिए यह सोचना कि आपको इसके बारे में कुछ तय करना है, वह भी गलत है। आप उसी एक ही मशीनरी में हैं, इस अवस्था में लाया जाता है जब आपको अपने आगे के विकास के लिए स्वतंत्रता दी जाती है। इसलिए इस स्तर पर, जब आपकी स्वतंत्रता होती है, तो आपको पता होना चाहिए कि स्वतंत्रता आपको स्वतंत्रता के मूल्य को समझने के लिए दी जाती है। और उस स्वतंत्रता में, आपको समझना चाहिए कि आपके लिए क्या गौरवपूर्ण है। एक बार जब आप यह समझ जाते हैं, तो आप खुद से कहते हैं कि, “अब, देखो: मुझे कुछ और बनना है। यही कारण है कि परमात्मा ने ऐसा किया है, केवल एक चीज जो मुझे करनी है, वह है पूरी तरह से समन्वय, सहयोग और उसकी इच्छा के प्रति समर्पण, ताकि मैं बन जाऊं। ” यह पहली तैयारी है जो हमें करनी है। आप सबसे बड़ा काम जो करेंगे वह है समर्पण क्योंकि उसके द्वारा आप उनके काम में बाधा नहीं डालेंगे। जब तक और जहाँ तक आप समर्पण नहीं करते तब तक आपके पास विवेक नहीं हो सकता। तो सबसे पहले आप अपने सीमित विवेक के माध्यम से इसे समझें, और फिर आपके पास पूर्ण विवेक होगा। सबसे पहले,  अपने सीमित ज्ञान से यह समझें कि समर्पण किए बिना, तो आप परमात्मा  के मार्ग में रुकावट डालेंगे। वह जानता है कि आपके लिए क्या अच्छा है। वह आपको वह सर्वोच्च देना चाहता है जिसे आप स्वयं प्राप्त नहीं कर सकते। वह आपको अधिकतम देने वाला है यदि आप इसे खुद से प्राप्त करना भी चाहें, तो भी आप खुद इसे प्राप्त नहीं कर सकते। यह उनका काम है। यह उनका दान (दान) है, जैसा कि आप इसे कहते हैं, उनका उपहार आपको। उस स्थिति में आपको पता होना चाहिए कि इसे प्राप्त करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि उनके कामकाज को कार्यान्वित होने दें । अब जब आप समर्पण करने की सोचते हैं, तो सबसे पहले मस्तिष्क की तरंगे काम करने लगती है। “मैं क्या समर्पण करूं?” तुम सोचते हो तुम्हारा भौतिक धन समर्पण करना। वह यह नहीं चाहता। यह सब धन उसने आपको दिया है। वह इसका क्या करेगा ? यह उसके पैरों के धूल के कण के बराबर भी नहीं है। तो यह कोई मदद करने वाला नही है। कभी-कभी आप महसूस कर सकते हैं कि, “मुझे अपनी बुद्धिमत्ता देनी चाहिए,” या यही कहा जाता है। कोई भी आपके मुर्ख और बेवकूफ लोगों को पाने की इच्छा नहीं करता है! इसलिए आप अपनी बुद्धिमत्ता मत लगाइए ।

फिर कुछ लोग सोचते हैं कि, “मैं अपना दिल देता हूं।” कुछ लोग ऐसा कहते हैं। हमें हृदयहीन लोग नहीं चाहिए।

फिर कुछ लोग कहेंगे कि, “माँ, हम दूसरों के साथ अपने रिश्तों को छोड़ देंगे।” वह भी जरूरत नहीं है। क्योंकि आपका हृदय वहीँ होना चाहिए जहां वह है और प्रकाश को आपके दिल में आना है।

आप किसको अपना दिल दे सकते हैं? अब जिसने आपको दिल दिया है, उनको ही दिल वापस देने का क्या फायदा है? क्या ऐसा नहीं है? जिसने आपको बुद्धिमत्ता दी है, उसे ही इसे वापस देने का क्या उपयोग है?

 उसे देना होगा कुछ ऐसा जो आपने खुद हासिल किया हो। आपने जो हासिल किया है वह आपका अहंकार और आपका प्रति-अहंकार है। आपने जो हासिल किया है वह आपके अहंकार के अलावा कुछ नहीं है। और यह अहंकार तुम्हें छोड़ना होगा, जो एक कठिन काम है।

अहंकार, यदि यह पैसे, भौतिक चीजों से होता है, तो बेहतर है कि आप कुछ भौतिक चीजें ईश्वर को नहीं बल्कि किसी अन्य को दें। यह बेहतर है। अगर भौतिक चीजें उस अहंकार को पैदा कर रही हैं। यदि आपकी बुद्धिमत्ता अहंकार पैदा कर रही है कि आपको लगता है कि आपके पास बहुत अधिक IQ है, तो इसे थोड़ा नीचे लाना बेहतर है। यह आपको समझना और निर्णय लेना है | अपने आप को देखें: मुझे किस कारण से अहंकार आता है?

यदि आप अपने अहंकार को देखना शुरू कर सकते हैं, तो आप आश्चर्यचकित होंगे कि कोई भी निरर्थक चीज़ इसे बढ़ा सकती है और इसे ख़त्म भी कर सकती है। यह बिना किसी कारण के चोट ग्रस्त हो सकता है | यह इतना महत्वपूर्ण हो जाता है।

फिर उसका प्रति-अहंकार  भी आता है। वह भी आपको ही छोड़ना होगा। और प्रति-अहंकार में आप अपने गुरुओं, गलत प्रकार के कामों और बचपन से पली हुई गलत आदतों के कारण अपनी जड़ता बना सकते हैं। जैसे, उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति कैथोलिक है: उसके लिए, पोप सब कुछ है। या कोई हिंदू है: उसके लिए एक विशेष मंदिर ही सब कुछ है। ये सब आदते हैं। उनकी ऐसी आदते क्यों है चूँकि, उनके बारे में सच्चाई का पता लगाए बिना, आपने उन्हें वैसे ही स्वीकार कर लिया है जैसी वह है। यह साधारण बात है।

इसलिए यदि आप इन सभी चीजों के बारे में सच्चाई का पता लगा सकते हैं, तो आप इसे त्याग देंगे। आप कर भी सकते हैं, नहीं भी। ऐसे कई लोग हैं जो सच्चाई जानते हैं, फिर भी वे छोड़ नहीं पाते। आप देखें, मनुष्य जन जटिल व्यक्तित्व हैं। भले ही उन्हें सच्चाई पता हो लेकिन वे त्याग नहीं करेंगे। लेकिन मान लीजिए कि आप इन सभी चीजों के बारे में सच्चाई खोजने की कोशिश करते हैं: तो आप त्याग सकते हैं, नहीं भी त्याग सकते।

लेकिन पूरी चीज़ पर वापस जाकर, हर एक चीज़ का पता लगाने के लिए, पूरी बात का एक शेड्यूल बनाइए कि, ” सुबह का समय मुझे इस बारे में पता करना है , और इस बारे में शाम का समय, “पूरा आपका जीवन तुम एक-एक करके खोजते जाओगे, और अंततः तुम पाओगे कि तुम अब कब्र तक चले गए। तो वह प्रक्रिया भी आपकी मदद करने वाली नहीं है।

परमात्मा की कृपा से आप आत्मसाक्षात्कारी हैं और आप एक सेकंड में पता लगा सकते हैं कि आप आदतों के शिकार हैं या नहीं। अगर आपका बायाँ भाग पकड़ रहा है तो आप आदतों के वश हैं। यदि आपका दायाँ भाग पकड़ रहा है तो आप अहंकार यात्रा पर हैं। ठीक है। तो अब आप जानते हैं कि बहुत सरल विधि यह है कि वायब्रेशन के माध्यम से, आप यह पता लगा सकते हैं की अहंकार है या प्रति-अहंकार अथवा आप डांवा-डौल हैं |

यह सबसे बड़ी चीज है जो हमें मिली है क्योंकि यह मेरी तैयारी है। मेरी तैयारी यह है कि, पहले आपको बोध दिलाया जाए। पहले आपको आत्मसाक्षात्कार दिलाते हैं। एक बार जब आपको बोध हो जाता है तो मुझे बहुत कुछ कहने की जरूरत नहीं है यदि आपको बाईं ओर पकड़  हैं, तो आपको दर्द होगा, ऐसा, वैसे। यदि आप दायीं ओर पकड़ाए हैं, तो आपको स्वास्थ्य या किसी चीज़ की समस्या है। इसलिए तुम मेरे पास आओगे और मैं तुम्हें बता सकूंगी। यह मेरी स्वयं की तैयारी है: आपको सचेत और जागरूक बनाना है ताकि आपके पास चीजों को देखने के लिए प्रकाश हो। अब आपकी तैयारी हर समय इस जागरूकता का उपयोग करने की होनी चाहिए। भविष्य में मैं आपको इस ज्ञान का उपयोग हर समय करने के लिए कहूँगी जो की लोग भूल जाते हैं। तो पहली बात हमें पता होना चाहिए कि यह तैयारी हमारे लिए की गई है। हमें चैतन्य मिला है। हमें सत्यापित करने के लिए ज्ञान मिला है और हमें इसका उपयोग करना चाहिए।

पहली स्वीकृति इस बात की हो कि आप एक नए आयाम में हैं| अगर आपके अंदर वह स्वीकार्यता है तो आपका निर्णय बेहतर होगा। लेकिन वस्तुतःयह स्वीकृति गायब है। अब, संस्कृत में, एक शब्द है , ‘अभ्यास’, तात्पर्य की, वही चीज प्रतिदिन करना उस तरीके से आप याद रखेंगे की आप एक आत्मसाक्षात्कारी है और आप की जागरूकता सामान्य जन की तरह नहीं है |

इसलिए, पहली तैयारी अपने आप को तैयार करने की है, अपने आप को यह समझाना कि आपके भीतर यह नई जागरूकता है, खुद को जताने के लिए है। आप देखते हैं, विश्वविद्यालय में जब आप स्नातक करते हैं, तो उसके लिए एक समारोह आयोजित किया जाता है। आपको एक गाउन पहन कर के जाना होगा और वे आपको एक उचित प्रमाण पत्र वगैरह देंगे। क्यों जरूरी है? क्योंकि आप भूल सकते हैं कि आप स्नातक हैं। (हँसी) हाँ! और वास्तव में आपके साथ ऐसा होता है, कि आप भूल जाते हैं कि आप आत्मसाक्षात्कारी हैं। मेरा मतलब है,इस अर्थ में हमने भी एक समारोह किया है कि हमने हर वह चीज की है यह साबित करने के लिए कि आप आत्मसाक्षात्कारी आत्मा हैं। लेकिन यह हमारे लोगों से गायब है, कि वे यह नहीं समझ पाते हैं कि वे बोध प्राप्त आत्मा हैं, कि वे ऐसी स्थिति के लोग हैं, जैसा दूसरा कोई नहीं | 

आप दो बार पैदा हुए लोग हैं, जो बहुत, बहुत दुर्लभ हैं। बहुत बिरले ही आपको ऐसे लोग मिलेंगे जो दो बार पैदा हुए हैं। मेरा मतलब है,  मेरे सारे जीवन भर, मुझे कोई नहीं मिला – क्या आप कल्पना कर सकते हैं? – सिवाय मेरे पिता और कुछ इधर-उधर के। मेरा मतलब है कि उन्हें नहीं गिना जाना चाहिए क्योंकि ऐसा हुआ की मेरे पिता को मैंने चुना।

इसलिए, सबसे पहले अगर आप खुद को अपनी बुद्धिमत्ता से परिचित कराते हैं कि, “मैं एक आत्मसाक्षात्कारी आत्मा हूँ!” आप देखेंगे  कि आपकी प्राथमिकताएँ बहुत तेज़ी से बदल रही हैं। माना की कोई आप को बहुत बड़ी संपत्ति या दौलत देता है | तुरंत आप इसके प्रति सचेत हो जाते हैं। आप की चाल बदल जाती है। जब आप एक छात्र होते हैं तो आप इस तरह से चलते हैं।  आप डिग्री प्राप्त करते हैं और अचानक आप की चाल बदल जाती है। (हँसी) आप के आत्मसाक्षात्कार के बाद कैसा?

आपको यहां देखकर बहुत खुशी हुई, बहुत खुशी हुई। 

परमात्मा आप को आशीर्वाद दे। अपने बोध के बारे में क्या? क्या आपको अपना आत्मसाक्षात्कार नहीं हुआ? तो फिर उसके बारे में आप कर क्या रहे हैं? स्वयं को एक आत्मसाक्षात्कारी के रूप में पहचानना यही पहली तैयारी है।

हम अब आत्मसाक्षात्कारी हैं इसलिए हमें एक अलग तरीके से बात करनी होगी। हम एक भिन्न ज्ञान के लोग हैं। हम एक अलग जागरूकता के लोग हैं। जैसा कि मैंने आपको बताया। अब इस खूबसूरत इमारत को देखें: हम सभी इससे प्रभावित हैं और यह बहुत सुंदर लग रही है। इसे इतनी अच्छी तरह से बनाया गया है, खूबसूरती से और मनुष्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। ठीक है? लेकिन ईश्वर के लिए यह एक हरी पत्ती पूरी इमारत, और एक साथ ऐसी सभी इमारतों से भी ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। ईश्वर के लिए। क्योंकि वह पत्ती जीवित है और एक पक्षी जो उस पत्ती से अधिक जागरूक है, ईश्वर के लिए अधिक महत्वपूर्ण है। तो फिर आप, इंसान जो अब इस हद तक जागरूक हैं आप ईश्वर के लिए कितने महत्वपूर्ण होंगे? स्वयं भगवान को आप में कितनी रुचि होनी चाहिए? जरा इस बारे में विचार तो करें ! एक बार जब आप इस बिंदु को पहचान लेते हैं, तब अपेक्षाकृत आपको यह भी समझ जाएगा कि आप ईश्वरीय योजना में बहुत महत्वपूर्ण हैं। मैं दुनिया की योजना की बात नहीं कर रही हूं। (हँसी) यह भगवान की योजना है। तो उनके आशीर्वाद की सारी ताकतें और उनकी सारी उदारता, वे सब आपकी मदद करने के लिए हैं, आपका सहारा देने के लिए, जो भी आप चाहते हैं वह प्रदान करने के लिए। आप मंच पर हैं और वे आपकी देखरेख कर रहे हैं। मेरा मतलब है, अब आप मंच पर प्रवेश कर चुके हैं।

लेकिन मैं सहज योगियों को देखती हूँ, एक बार जब वे आत्मसाक्षात्कार पा लेते हैं , तो मुझे नहीं पता कि उनके साथ क्या होता है। यदि वे अपना अहंकार छोड़ देते हैं तो वे ऐसे हो जाते हैं, बिल्कुल, मुझे नहीं पता कि आप उन्हें क्या कहते हैं … केले? (हँसी) आप में से हर एक भगवान द्वारा बनाया गया विशेष है। अब आप खुद देखें, बस अपने बारे में सोचें। मेरा मतलब है, आप ही वे लोग हैं जो जीवन के बारे में बहुत कुछ जानते हैं। यहां तक कि अगर आप को थोड़ी पकड़ है, तो भी कोई बात नहीं है लेकिन आप जानते हैं कि आप को पकड़ है। अब आप ही सोचिए।

अब  दूसरी तैयारी व्यक्ति का यह समझना है, कि स्वयं ईश्वर आपके बारे में चिंतित है। उसने सबको आपकी मदद के लिए भेजा है, “आगे बढ़ो!” इसलिए आपको अपने पैसे के बारे में चिंता करने की ज़रूरत नहीं है, आपको अन्य सभी चीजों के बारे में चिंता करने की ज़रूरत नहीं है। 

तीसरी बात अपने आप आती है कि आपको इन सभी चीजों के बारे में बिल्कुल भी चिंता करने की ज़रूरत नहीं है। उनकी देखभाल की जाएगी आप सभी की देखभाल की गई है, आप जानते हैं कि। सभी की मदद की गई है। लेकिन अगर आप जानते हैं कि वह सर्वशक्तिमान है और वह स्वयं करुण है और आप उसकी कृपा में आ गए हैं – तो सोचिए! उस बिंदु पर खुद को स्थापित करें। यह एक तैयारी है जो किसी व्यक्ति को करना चाहिए की वह विशिष्ट है जिसे यह सब दिया गया है ।

फिर, आधुनिक सहज योगियों को विशेष रूप से आशीर्वाद दिया जाता है क्योंकि उनके पास एक ‘वॉकी-टॉकी’ है। उनकी किसी भी समस्या को उसी रूप में व्यक्तिगत रूप से  संभाला जाता है ! ऐसा आशीर्वाद पहले कभी नहीं था। लेकिन मुद्दा तो अहंकार  है। शुरुआत में अहंकार है। तुमने देखा हुआ है। अगर आपको अहंकार है तो आप स्वीकार नहीं करेंगे कि आप एक आत्मसाक्षात्कारी हैं। सोचिए, यह कितना मूर्खतापूर्ण है! अगर आप को प्रति-अहंकार भी है तो आप उसे पहचान नहीं पाएंगे। आप वापस उसी स्थिति में चले जाएंगे, जहाँ आप थे। यदि आपको प्रति-अहंकार है आप कभी भी स्वीकार नहीं करेंगे कि आप एक आत्मसाक्षात्कारी हैं । आप कभी भी स्वीकार नहीं करेंगे, “ओह, यह कैसे हो सकता है, माँ? आखिरकार मैं एक साधारण इंसान हूं। ” आप उसी तरह से व्यवहार करेंगे, “मैं दूसरों को कैसे ठीक कर सकता हूं? मैं बोध कैसे दे सकता हूं? यह संभव नहीं है।” इस तरह की विनम्रता, निरर्थक चीजें,देखिये । मेरा मतलब है,  ठीक है, मेरा मतलब है कि यह तो ऐसा कहना हो गया की , “ओह, मैं तुम्हें कैसे ठीक कर सकता हूँ?” ऐसा । इसका कोई मतलब नहीं है, इस तरह की विनम्रता का आपके लिए कोई अर्थ नहीं है। “मैं यह कैसे कर सकता हूँ, माँ? मैं क्या कर सकता हूँ? ओह, मैं अच्छा नहीं हूं। मैं किसी काम का नहीं हूँ । ” इस भाषा को छोड़ देना चाहिए। जब यह अहंकार होता है तो और भी बुरा होता है। आप खुद को नुकसान पहुंचा सकते हैं और अति होने पर सहज योग को नुकसान पहुंचा सकते हैं। अहंकारी लोग बेहद कठिन होते हैं, वे ऐसे अवरोध होते हैं, क्योंकि वे अपनी बुद्धिमत्ता और समझ के माध्यम से सब कुछ, ऐसे और वैसे करने की कोशिश करते हैं, और इस तरह की जुगत चलती रहती है, और आप उन्हें फिर वापस लाने की कोशिश करते हैं और वे चले जाते हैं वापस। यह बहुत उबाऊ है, आप जानते हैं। बहुत उबाऊ। क्योंकि आप जानते हैं, मैं नाटक देख रही हूं, माना की, यह एक चाय का कप है और मैं चाहती हूँ की आप इसे पियें | अब कप को होंठों तक लाने के बीच हर बार आप इसे दूर धकेल देते हैं, हर बार आप दूर धकेल रहें हैं, तब मैं कैसे इसे आप के होंठों तक लाऊं ? यह बहुत उबाऊ है!और यह अहंकारी स्वभाव आश्चर्यजनक रूप से पश्चिम देशों में बहुत प्रचलित है, । और मैं समझ नहीं पाती । वे बिना तर्क किये सभी प्रकार की गंदगी, सभी प्रकार की विकृतियों तक ले सकते हैं! बस इसे ले लेते हैं ! किसी भी प्रकार की विकृति – “क्या गलत है?” लेकिन इस तथ्य को स्वीकार करना है कि वे सहज योग के माध्यम से एक आत्मसाक्षात्कारी हैं यह उनके लिए सबसे गलत बात है। वे सत्य के अलावा और सब कुछ लेंगे।यह अहंकार तुम्हारे सिर पर बैठे घोड़े की तरह है। आपको घोड़े पर बैठना है, और घोड़ा आपके सिर पर बैठा है। तुम घोड़े का भार ढो रहे हो – कल्पना करो! ऐसी चीज़ में क्या समझदारी है?

यदि आप खुद का विश्लेषण करना शुरू करते हैं, तो फिर से आप एक अन्य गलती करेंगे। आप बॉक्स में जैक जैसे यात्री रहे हैं | आप देखें। क्योंकि आप गलती करने के बाद गलतियाँ करते रहे हैं, एक प्रकार का स्प्रिंग है। जब आप अपने अहंकार को देखने की कोशिश करते हैं, आप प्रति-अहंकार की गलती पर चले जाते हैं। आप अपने प्रति-अहंकार  को देखने की कोशिश करते हैं और आप अहंकार की गलती करने पर जाते हैं। मेरा मतलब है, एक व्यक्ति जो इस गलती या उस गलती या इस यात्रा या उस यात्रा के लिए हर समय उतावला हो रहा है, वह व्यक्ति जो हर समय यात्रा कर रहा है, यह नहीं जानता कि उसे नीचे उतरना है या आगे जाना है। यह उस तरह से! मन की आदत इतनी अहंकारी होती है कि आप बस किसी बात पर सवार हो जाते हैं। लेकिन बात यह है कि, ऐसा नहीं है कि आप सवारी कर रहे हैं, बल्कि अहंकार आपको सवारी पर ले जाता है। और जब भी कोई ऐसी बात सामने आती है, तो यह आपको पकड़ लेती है। और प्रगति बेहद धीमी है।

अब देवत्व के साथ परेशानी यह है कि इसका अपना प्रोटोकॉल है और यदि राजा को आपके घर आना है, तो आपको राजा को आमंत्रित करना होगा। राजा आपको नहीं लिखते हैं की , “कृपया मुझे अपने घर पर आमंत्रित करें,” क्या वह करते हैं? आखिर,यही कारण है कि वह राजा है,! और वह विनती नहीं करता कि, “कृपया मुझे आमंत्रित करें।”

यह श्रीमान अहंकार उम्मीद करता है कि आपको देव द्वारा आमंत्रित किया जाना चाहिए। परमात्मा तुम्हें लाने के लिए अपने नियम से हट कर कार्य करें। सरल शब्दों में, अहंकार, किसी का स्वयं की कीमत के बारे में बिल्कुल गलत विचारों के अलावा कुछ भी नहीं है: जिसके द्वारा आप सोचते हैं कि, “मैं सब कुछ हूं।” आप क्या हैं? अब  प्रति-अहंकार में  न जाएं। हम हैं क्या ? कुछ भी तो नहीं! हम एक बीज को अंकुरित भी नहीं कर सकते।

हर दिन के जीवन में आप इसे स्पष्ट रूप से देख सकते हैं: अहंकार कैसे कूदता है। किसी का कहना है कि, “अंग्रेजों में ये गुण हैं,” व्यक्ति बहुत खुश लगता है। “ओह, यह कैसी प्रशंसा है! अंग्रेजों की क्या प्रशंसा! ओह, हम ब्रिटिश हैं! ” हाथोंहाथ। कोई कहता है कि, “ब्रिटिश में इन गुणों की कमी है,” समाप्त! आप बिल्कुल … फिर वह व्यक्ति पूरी दुनिया में सबसे बुरा व्यक्ति है। सबसे पहले, आपको पता होना चाहिए कि न तो आप ब्रिटिश हैं, न ही भारतीय और न ही कुछ भी। आप सिर्फ इंसान हैं। इस अहंकार के लिए अज्ञानता जिम्मेदार है। यह आपके बारे में पूर्ण अज्ञानता है जो आपको यह अहंकार देता है। इसलिए एक बार जब हम प्रकाश की ओर जा रहे हैं तो हमें पता होना चाहिए कि हमारी बाधाएं क्या हैं। यह तैयारी है। यह हमारी अपने बारे में अज्ञानता है कि क्यो हम अपने आप को देखने जा रहे हैं। और अज्ञानता के कारण, अहंकार और प्रति-अहंकार दोनों हमारे ऊपर आ गए हैं, इसलिए कम से कम हम इनसे कोई सरोकार नहीं रखेंगे। मान लीजिए आपको हिमालय पर जाना है जहाँ आप एक अभियान के लिए जा रहे हैं। आपसे सबसे हलके सामान के साथ की उम्मीद की जाती है। आप टिफिन के तीन सामान, इस के चार सामान, और उस के पांच सामान, वहाँ एक अच्छा सा बिस्तर सोने के लिए नहीं ले जाते | वह सब आप यहीं छोड़ते हैं। उसी तरह जब आप खुद को जानने के अभियान पर जा रहे हैं, तो अपने आप को लोड देने वाले सभी चीजो को नीचे रखना होगा। तो हम फिर से अहंकार और प्रति-अहंकार पर आते हैं। दरअसल, ये दोनों भयानक हाथी हैं जिन्हें ज़मीन पर रखा जाना चाहिए। इसलिए हम अपना अध्ययन स्वयं करते हैं। इन तैयारियों की जरूरत है क्योंकि हम पहले ही इस तरफ या उस तरफ बहुत ज्यादा जा चुके हैं । तो तैयारी आपको नीचे लाने की है, “यहाँ साथ आओ। अब आप मध्य में खड़े हों ! ” या हम आपको यहां निचे लाते हैं और मध्य में खड़े होते हैं। तैयारी और कुछ भी नहीं है, बस आपको यहाँ नीचे लाने के लिए, यह सब है|

इसलिए अहंकार के साथ हम आगे बढ़ते हैं और देखते हैं कि अहंकार के सूक्ष्म ,अधिक सूक्ष्म,और सूक्ष्मतर रूप क्या हैं। प्रति-अहंकार के भी आपके पास  सूक्ष्म ,अधिक सूक्ष्म,और सूक्ष्मतर रूप होते हैं। अहंकार को समझने के लिए आपको यह देखना होगा कि आप अपने जीवन के बारे में क्या योजना बनाते हैं? यह बहुत आसान है। भावी जीवन के बारे में आपकी क्या योजनाएं हैं? अपने प्रति-अहंकार को समझने के लिए आपको पता होना चाहिए कि आपको क्या प्रभावित करता है, जो आपको बहुत दुखी करता है। या आप कह सकते हैं, जो आपको अधिक प्रसन्न करता है और जो आपको अधिक दुखी करता है। सुख और दुःख दोनों चीजें, इन दो पेड़ों की छाया हैं। एक अहंकार है, दूसरा प्रति-अहंकार है। बस अपने आप को देखो। क्या आपको बहुत खुश करता है? अच्छे कपड़े? अच्छा रहन सहन? या जब आपका नाम “हु ज हु ?” (पुस्तक) में छपता है, या ऐसी सभी निरर्थक बातें जो आपको हँसाती हैं, आप देखें! ये सभी। आप बस देखिए। क्या आपको दुखी करता है? जब किसी प्रकार का दिल टूटता है, और वैसा ही कुछ । इसी प्रकार की सब बकवास। 

ये दोनों चीजें स्वयं आप नहीं हो। वे बिलकुल आपसे बाहर हैं। तो अंदर क्या है, अगर आपको पता लगाना है, तो सबसे बाहरी आवरण दूर हटाना चाहिए। यदि आपको फल का स्वाद लेना है तो आप उसके आवरण को निकल देते हैं, आप उसे छील लेते हैं। उसी तरह, यह छील दिया जाना चाहिए।

अब यह आपको अपने भीतर और बाहर भी देखना चाहिए। आप इसे बहुत स्पष्ट रूप से बाहर भी  देख सकते हैं। यह बहुत आसान है। आप दूसरों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं, वह भी एक मुद्दा है – दूसरों के साथ आपका रिश्ता क्या है। यह  शायद बाहर से जानना आसान है अंदर से जानने की बजाए,। जब आप दूसरों से बात करते हैं, तो उन पर आप से क्या प्रभाव पड़ता है? क्या आप दूसरों द्वारा सराहना पाते हैं या नहीं? तथा सहज योगियों के बीच? आप सहज योगी के रूप में एक दुसरे सहज योगी का सम्मान करते हैं या नहीं? क्या आप उम्मीद करते हैं कि आप जिस भी अवस्था में हैं, दूसरे सहज योगी भी पहुंचेंगे और उन्हें उचित सम्मान दिया जाना चाहिए? यह भी देखना चाहिए कि जब कोई सहज योगी, जिसने कुछ हासिल किया है या जो बेहतर स्तर पर है, तो आपको ऊपर खींचने की कोशिश करता है – क्या आपको यह पसंद है या आप इसका विरोध करते हैं या इसके बारे में परेशान होते हैं? यदि कोई आपसे कहता है, “यह किया जाना चाहिए, वह किया जाना चाहिए,” क्या आप इसे लेते हैं जैसे कि उसने आपसे बुरा व्यवहार किया है? यदि वह आपको सहज योग के बारे में बता रहा है तो आपको सभी सामान्य तरीके से आभारी होना चाहिए। सहज योग से सम्बंधित कोई बात आप मुझे बताते हैं तो, मैं आपकी आभारी हूं। कुछ भी! भले ही आप मुझे बताएं, “माँ अगर आप ऐसा कहो तो शायद यह ठीक नहीं हो | आप देखिए, मनुष्य ऐसे ही हैं , “मैं इसे स्वीकार करती हूं और आपकी इच्छा के अनुसार करती हूं। या आप इसे पसंद करें अथवा नहीं? इस तरह आप अपने अहंकार का पता लगायेंगे। यह केवल आपका मिस्टर इगो है। असल में, तुमसे और तुम्हारे अहंकार से, दोनों से एक साथ लड़ने के लिए दूसरे व्यक्ति का होना बेहतर है।

अगर कोई आपसे कहता है कि, “यह किया जाना चाहिए,” “अच्छा , मैं ऐसा करता रहा हूं। हां ठीक है। तुम आओ और मेरी मदद करो। तुम मुझे खींच लो। इसका हल कर दो। कोशिश करो और मेरी मदद करो। मैं भयानक हूँ! ” यदि आप ऐसा करते हैं, तो यह तरीका है, जिससे कि आप इस अहंकार पर काबू पा सकते हैं। लेकिन दूसरे व्यक्ति को कहना चाहिए, “आप बहुत अच्छे हैं। ठीक है,  आप जैसा चाहते हैं करें, ”और फिर आप खुश महसूस करते हैं। यह व्यक्ति इतना ठीक नहीं है और आप भी इतने ठीक नहीं हैं। क्योंकि आपको लोगों को बाहर निकालना है। उदाहरण के लिए, यदि आप समझते हैं कि आप एक संकट में हैं, आप एक आपात स्थिति में हैं, लोग डूब रहे हैं और कुछ लोग उन्हें बाहर निकालने की कोशिश कर रहे हैं, वे खुद आधे रास्ते नीचे हैं, आधे रास्ते उपर में हैं, वे आपको बाहर खींचने की कोशिश कर रहे हैं, उस समय अगर वे कहते हैं, “अब मेरा हाथ पकड़ो!” यदि आप इसके बारे में परेशान महसूस करते हैं तो आप समझदार नहीं हैं।

सहज योग में अब नेता जैसा कुछ नहीं है। मेरा मतलब है, किसी को नेता के रूप में नियुक्त नहीं किया गया है। कोई भी ऐसा करने की कोशिश करता है, वह नीचे चला जाता है। लेकिन भीतर एक अंतर्जात नेतृत्व का गुण होता है, और ऐसा व्यक्ति बेहद विनम्र और अनुकूल होता है और आकर्षक और प्रभावशाली भी होता है, प्रभावशाली होना ही चाहिए |और उस समय किसी को बुरा नहीं मानना चाहिए, क्योंकि अगर वह कहता है, “जाओ और कुछ चुरा लो,” या “तुम जाओ और इन निरर्थक चीजों में से एक से जुड़ जाओ ” , तो निश्चित रूप से वह गलत है! लेकिन अगर वह ऐसा कह रहा है , “सहज योग में आपको पालन करना है!” यहां तक कि अगर वह दबाव पूर्वक कहते हैं, तो मेरा मतलब है, यह बहुत अच्छी बात है, मैं कहूंगी।

मान लो आपके पड़ोस में कोई है जो हमेशा आलोचना कर रहा है। एक तरह से यह एक आशीर्वाद है क्योंकि अगर कोई है जो हमारी आलोचना कर रहा है तो वह हमें पूर्ण करने की कोशिश कर रहा है। मेरा मतलब है, हमें इसे मान लेना चाहिए। इसके बारे में बुरा महसूस नहीं करना है।

मान ले कोई आपके बारे में कुछ कह रहा है, अगर यह सच नहीं है, तो इसमें बुरा महसूस करने के लिए क्या है? अगर वह आपके बारे में झूठ कह रहा है, तो घबराने की कोई बात नहीं है। अगर वह सच बोल रहा है, तो आपको शुक्रगुजार होना होगा। हालाँकि कभी-कभी सच्चाई बहुत ही असहनीय हो सकती है, बहुत,बहुत खराब हो सकती है। लेकिन अच्छी बात है। मराठी में एक कहावत है, ” जो व्यक्ति आप के दोष बताये, जो निंदक है, उसका घर नजदीक में वहीँ बनाए रखें, ।

ऐसे आदमी का घर अपने नजदीक रखो जो तुम्हारी निंदा करता हो।” ताकि आप अपने दोषों को जाने, आप देखिये, यदि आप अपने आप को सुधार करते हैं तो ,यह एक बुद्धिमान रवैया है। चूँकि  आप अपने आप को सुधार नहीं कर सकते हैं, तब एक दर्पण रखिये , जिसके द्वारा आप अपने आप को ठीक करते हैं।

मेरा मतलब है, आपको ऐसे आदमी को धन्यवाद देना चाहिए कि वह आपकी आलोचना कर रहा है। यदि वह झूठी प्रशंसा द्वारा आपको पूरी तरह से नष्ट करने जा रहा है, तो आपको क्या फायदा होगा? झूठे गुरु यही कर रहे हैं। वे सभी आपको सिर चढ़ा रहे हैं और आपको नष्ट कर रहे हैं और अंततः आपको पता चलता है कि आप मुर्ख बन गए हैं।

इसलिए यदि आप उस स्थिति को स्वीकार करते हैं जिसमें आप कहते हैं, “ठीक है, अगर यह सत्य है, तो यह मेरे अहंकार के लिए बहुत बेहतर है और यदि यह सत्य नहीं है तो इतना महत्वपूर्ण नहीं है?

“यह रवैया सहज योग में बहुत मदद करता है, स्वयं के प्रति बहुत समझदार रवैया है। और जब आप इस रवैये के साथ आगे बढ़ेंगे तो आप आश्चर्यचकित होंगे, लोग आपसे क्या कहते हैं, इस बात से आप आसानी से  आहत नहीं होंगे। आप परेशान नहीं होंगे| आप जानते हैं कि लोग मेरी कितनी आलोचना करते हैं और सभी प्रकार की बातें कहते हैं, मुझसे बहस करते हैं, और मैं परेशान नहीं हूं क्योंकि मुझे पता है कि वे मूर्ख हैं। उसमे क्या है? वे मूर्ख लोग हैं। उसमे क्या है? भले ही वे मेरी प्रशंसा करें, इसमें क्या है? आखिरकार, वे जो कुछ भी मेरी प्रशंसा करते हैं वह मेरा स्वभाव है, इतना महान कुछ भी नहीं। देखिए, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। मैं सिर्फ अपने चक्रों को काम करते हुए देख रही हूं। मैंने इसकी परवाह नहीं की। उसी तरह, यह आपके साथ भी होगा और आप परेशान नहीं होंगे। लेकिन यह आपकी भार उतराई में मदद करेगा। यह आपके भार उतारने में मदद करेगा।

और, इसका दुखद भाग: इसमें हमें खुद को इस तरह तैयार करना चाहिए कि, “कुछ भी मुझे दुखी नहीं कर सकता। अगर मैं एक आत्मसाक्षात्कारी हूँ तो मुझे क्या दुखी कर सकता है? “मान लीजिए, एक ठोस उदाहरण लें – कि आप किसी से शादी करना चाहते हैं – और आप पाते हैं कि उस व्यक्ति के साथ दुर्व्यवहार हुआ है या आप शादी नहीं कर सकते। तो क्या? “मैं यहाँ हूँ। मेरा मूल्य मुझे खुद पता है। ” तो आपका मूल्य, आपका आत्म-सम्मान ऐसा होना चाहिए कि कुछ भी आपको दुखी न करे। यह सब एक नाटक चल रहा है। यह सब एक नाटक है। लेकिन इन चीजों को आपकी महान बुद्धिमत्ता द्वारा स्वीकार किया जाना चाहिए क्योंकि मुझे जो कुछ भी यहां पता चला  है वह ऐसा है की , पश्चिमी दिमाग के साथ कठिनाई यह है कि – यह बहुत अधिक IQ है, बहुत अधिक अति विकसित है। तो यह ऐसी चिकनी सतह है कि कुछ भी नहीं टिकता है, कुछ भी। पहली सरल बात यह है कि आप स्वयं एक बोध प्राप्त आत्मा हैं,जिसे किसी तरह यहाँ स्थापित होना चाहिए, और अपनी बुद्धि को कहना कि आप एक आत्मसाक्षात्कारी हैं। आप सभी को दिल में विश्वास करना है, दिमाग में नहीं। , पहली बात यह है कि आप अपनी बुद्धि को बताएं कि आप एक प्रकाशित-आत्मा हैं। तब फिर आपको अपनी बुद्धिमत्ता को यह भी बताना होगा कि, “कुछ भी मुझे दुखी नहीं कर सकता है और कुछ भी मुझे मुर्ख नहीं बना सकता है।”अगर ये तीन बिंदु आपकी बुद्धिमत्ता पर आकर बैठ जाते हैं तो बाकी सब मैं  देख लुंगी। आप इन तीन बिंदुओं को अपनी बुद्धिमत्ता पर ठीक कर लें, तो आप चकित हो जाएंगे[कि आप एक बहुत ही प्रेम करने वाले व्यक्ति बन जाएंगे, दूसरों के लिए अत्यंत विचारशील। यह सब स्वतः ही कार्यान्वित होगा। क्योंकि जब आपकी बुद्धि ऐसी होती है कि कुछ भी अंदर नहीं जाता है। आप हर समय दूसरों के बारे में चिंतित रहते हैं। या तो आप दूसरों से डरते हैं या आप दूसरों पर आक्रामक हैं। आप सीधे आगे नहीं जा सकते। ऐसा ही होता है। यदि आप इन तीन बिंदुओं को स्पष्ट रूप से समझ सकते हैं।

योगिनी: कोई भी ऐसा नहीं करता है।

श्री माताजी: वह कहती है कि “कोई भी ऐसा नहीं करता है। यही समस्या है।” बिलकुल । वह कितनी व्यावहारिक है।  वह बहुत व्यावहारिक है, आप देखिए। अभी-अभी कार में वह बोली, “हर कोई जो करना चाहिए उससे अलग ही कुछ करता है। जो पहले किया जाना चाहिए वे नहीं करते हैं। ” जैसे उसने कहा, “वे शादी करेंगे, आपको शादी करनी होगी, अपनी पत्नी और अपने पति और अपने बच्चों से आनंद प्राप्त करो। लेकिन वे और सब कुछ करेंगे सिवाय इसके| आप देखिए, ऐसा कोई नहीं करता।  यह बहुत ही व्यावहारिक है यदि आप ऐसा करें तो।

 माताजी को सुनना वह चीज नहीं है जो मैं चाहती हूं,बल्कि मैं चाहती हूँ की आप करें, इसको करना मुख्य है। बैठ कर और अपनी बुद्धिमत्ता को, अपने बुद्धि को, कहो कि, “श्रीमान अकलमन्द, अब सुनो। यह मेरे साथ हुआ है, और ऐसा मैं हूं। मैं एक आत्मसाक्षात्कारी हूं और अन्य किसी चीज से मुझे मुग्ध नहीं होना चाहिए और मुझे कोई भी चीज से  दुखी नहीं होना चाहिए। ” बस इतना ही। “कोई भी मुझे चोट नहीं पहुँचा सकता है।” अन्यथा आप “आआहहहहह, आआआहहहहहहह,” जैसे दो तरह से हो जाते हैं। कभी भी सीधे तरीके से नहीं। जबकी तुम सिर्फ करुणा हो और तुम प्रेम हो। बिलकुल अपने पर निर्भर, बिलकुल। और फिर तुम्हारे पास मैं हूँ। और आप उन ऋषियों के बारे में सोचें जिनके पास मार्गदर्शन करने के लिए कोई नहीं था, कोई भी कुछ बताने के लिए नहीं था, किसी से बात करने के लिए नहीं था। तुम्हारी सारी ग्रन्थियां वगैरह, मैं तोड़ रही हूँ। आपको कुछ नहीं करना है लेकिन केवल एक चीज की आप खुद ही अपनी ग्रन्थियां, अपनी स्वयं की गठाने नहीं बनाए। यदि आप नहीं बनाते हैं, तो चीजें काम करेंगी।

यह एक बहुत ही सरल तैयारी है। इसलिए मुझे आपको यह बताने की ज़रूरत नहीं है,की “अपने भाइयों और बहनों से प्यार करो,” और यह और वह। अन्यथा दुसरे ढंग शुरू हो जाते हैं। लेकिन आप सिर्फ अपनी बुद्धि को कहिये । यह बुद्धि को प्रकाशित करना है। अगर ऐसी  बुद्धि तुम्हारे भीतर आती है तो वह विवेक है। “यह की कोई मुझ पर हंस रहा है या हर कोई मेरा मजाक उड़ा रहा है या कोई भी मुझ पर हावी होने की कोशिश कर रहा है,” ये सभी आशंका या आक्रामकता, चुटकियों में गायब हो जाएगी। ऐसा है कि, अब आप एक फूल हैं और आप सुगंधित हैं और खुशबू बह रही है, और कई मधुमक्खियां आपके पास आने वाली हैं, जो कि आप हैं! यह तो शुरुआत है।

अपने आप को इस तरह बताते जाएं। यदि आप ऐसा कर सकते हैं, यदि आप अपनी बुद्धिमत्ता को इस स्तर पर ला सकते हैं,की बहुत अधिक नहीं, बहुत कम नहीं, लेकिन मध्य में , कुछ ही समय में सब कुछ हल किया जा सकता है। जब मैं अब आप लोगों के साथ रह रही हूं, आपकी कुंडलिनियों के माध्यम से जा रही हूं, यह सब हो रहा है , मुझे बस इस समय पता चला है: कि आप सिर्फ अपनी बुद्धिमत्ता को यह नहीं बता रहे हैं। ताकि आप सभी प्रकार की कट्टरता, सभी भय और यह, और अंधविश्वास और सभी बकवास छोड़ना शुरू कर दें। क्योंकि कुछ भी आपको नुकसान नहीं पहुंचा सकता। कोई भी सितारे आपको नुकसान नहीं पहुंचा सकते, न कि आपका विज्ञान आपको नुकसान पहुँचा सकता है, आप किस समय पैदा हुए थे। अब आपको कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता! आप इससे परे हैं। तो ज्योतिष समाप्त हो गया है। कुंडली समाप्त हो गई हैं। अन्य सभी … आपकी ऐसी अन्य चीजें क्या थीं?

सहज योगी: कर्म।

श्री माताजी: कर्म समाप्त हो गए।

सहज योगिनी: हस्तरेखा विज्ञान

श्री माताजी: हस्तरेखा समाप्त हो गई है।

सहज योगी: जैविक पुनर्जन्म । (बड़ी हँसी]

श्री माताजी:जैविक पुनर्जन्म समाप्त! जैविक पुनर्जन्म समाप्त हो गया है! सभी कि। मेरा मतलब है, आप इससे परे हैं। अब ये सारी चीजें, ऐसी सारी चीजें। फिर उसका दूसरा सिरा । सभी प्रेम प्रसंग समाप्त हो गए। प्रेम संबंधों का सारा डर खत्म हो गया। सब कुछ खत्म, बकवास। यह केवल प्रेम है। अब जो भी आपको मिलेगा, आप उस व्यक्ति को प्रेम करेंगे, वह व्यक्ति आपको प्यार करेगा। यदि वह आपकी देखभाल या आपसे प्यार नहीं करता है, तो भी जब तक तुम प्रेम करते हो, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। समाप्त!

सारी अपेक्षाएं खत्म हो गईं, सारी अपेक्षाएं खत्म हो गईं। खुशी पाने की सभी अपेक्षा। आनंद अकेला और अपेक्षा रहित है। जब आप आनंद में होते हैं तो आप उस अवस्था में होते हैं जब कोई हलचल नहीं होती है। आप बस वहां हैं। तो इन दोनों भावनाओं से छुटकारा पाएं, “मैं अब बहुत खुश हूँ!”“मैं अब आनंद में हूँ। मैं आनंद में स्थापित हूं और यह मुझे अपने भीतर विकसित करना है,ना की मेरे पुराने तरीके। यह मृत है, समाप्त हो गया है। ” जब पेड़ के पत्ते झड़ जाते हैं, तो लोग उनसे दोबारा उठ कर और पेड़ों से चिपक जाने की अपेक्षा नहीं करते हैं? (हँसी)। उसी तरह जो कुछ खत्म हो चुका है और अब खत्म हो चुका है।

अब हमारे भीतर जो नया आ रहा है उसे विकसित होने दो, और इसका पोषण अभी होना है – वह  आनंद, वह गरिमापूर्ण राजसी, आतंरिक सौंदर्य है। तब आप परेशान नहीं होंगे। दूसरों को आपके बारे में क्या कहना है परेशान नहीं करेगा। यह होगा। अगर तुम इसे अपनी बुद्धिमत्ता पर डाल दोगे तो ऐसा होगा। और लोग आप में यह देखेंगे कि आप कुछ भी अजीब नहीं करते, आप कुछ भी गलत नहीं करते। लोग आप को पसंद करते हैं | यहां तक कि जो लोग आत्मसाक्षात्कारी नहीं हैं , वे भी आप में उस गरिमा को देखेंगे, कि आप इतने प्रतिष्ठित हैं क्योंकि आप को आपकी खुद की समझ है। यह बहुत ही साधारण बात है, लेकिन जैसा कि उसने कहा है, कोई भी ऐसा नहीं करता है। अपनी बुद्धि को बताओ। अब भी मैं पाती हूँ की, कुछ लोगों के अंदर वह आनंद रिस रहा है| लेकिन आपको उस में समृद्ध होना है। आपको उसमें आना होगा। वह सब छोड़ देना जो निरर्थक है। नहीं तो तुम ऐसे ही चले जाओगे।

और इसके लिए शायद ही कुछ समय या कुछ अन्य लगता है। जो भी गलत किया जा सकता था,हो चूका है, समाप्त! बस समाप्त होने के लिए क्योंकि यह अब खत्म हो चुका है, तो इसके बारे में क्यों परेशान हो? बस खत्म करने के लिए। क्योंकि अगर मैं आपको कठोर लहजे के साथ कुछ कहूं तो यह वहां पर नहीं टिकेगा। अगर मैं इसे नाजुक ढंग से करती हूं तो भी यह कारगर नहीं होगा, क्योंकि, जैसा की मैंने आपको  बताया, वह एक पॉलिश है। पॉलिश को निकालो, और पॉलिश क्या है? मानदंडों की सभी समझ पॉलिश है, जीवन के मानदंडों की सभी समझ। क्योंकि आपने सोचा था कि अगर आप इस स्थिति में होते तो आप खुश होंगे, इसलिए आप ऐसा कर रहे हैं। क्योंकि आपने सोचा था की , अगर आप ऐसा करते हैं, तो इस बात का अंदेशा है, यह बाईं ओर की समस्या है। लेकिन अगर मन की इस सारी समझ को , यदि आप इसे अपने ज्ञान से, अपने प्रकाश से साफ कर देते हैं,  तो आप चकित हो जाएंगे कि यह बात पूरी तरह से आप में जम जाएगी। यह विवेक आप में चिपक जाएगा।

उस पुरानी बकवास को भूल जाओ। इतनी सारी चीजें तो आप पहले ही खुद ही सुलझा चुके हैं, आप जानते हैं, बहुत सारी बकवास चीजें जो पहले थीं। लेकिन इन सभी विचारों की पहचान हासिल की जानी चाहिए, हासिल की जानी चाहिए, यह बात है। आप जानते हैं कि यह सब निरर्थक है। लेकिन हासिल किया जाना है। वह तैयारी है। आपके पास प्रकाश है, आपके पास अब हलचल है। तुम उसमें जा रहे हो, लेकिन यहां प्रकाश नहीं है। यह डोलता है, कभी-कभी इस तरह गिरता है, उस तरह गिरता है। यदि आप अपने प्रकाश को बस इस समझ से ढंग से स्थिर कर सकते हैं, कि जान जाओ की पहले जो भी मानदंड थे वे अज्ञानता के कारण थे और, अब इस बारे में की सहज योगी क्या है हमें अपने स्वयं के मानदंड  को अपने पास रखना है। और ये मानदंड, मैं आपको यह बताने जा रही हूं कि कैसे ये मानदंड जैसे, आध्यात्मिकता पर पूरी निर्भरता, आपके वायब्रेशन पर पूरी निर्भरता आपके विश्वास में आने वाले हैं। नए जीवन के इन सभी मानदंडों को हमें स्वीकार करना होगा। बल्कि हासिल करना है , मेरा मतलब है कि  उपलब्धि करना है ,देखिये। सिर्फ एक व्याख्यान में समझना ऐसा नहीं है| इसलिए मैं आपको शाम को उस बारे में बताऊंगी, और कल मैं आपको बताऊंगी वास्तविक होने के बारे में , ठीक है? धन्यवाद।

परमात्मा आपका भला करे।

श्री माताजी: अभी कहते जाओ , अब खोल रहे हो?

सहज योगी: (अश्रव्य)

श्री माताजी: आप अपने पद पर स्थिति नहीं होना चाहते ,यही समस्या है बेहतर?यह मैं कह रही हूं, आप देखिए। यह चल रहा है। बस इतना ही कहो, “कुछ नहीं हो सकता। कोई भी भूत मुझे पकड़ नहीं सकता। मैं भूतों को पकड़ सकता हूं। ” यह सच है।डगलस फ्राई: दोपहर का भोजन परोसा जाता है।

श्री माताजी: हँ?

सहज योगिनी: क्या आप यहाँ अपना लंच लेना चाहते हैं?

श्री माताजी: अन्यथा ?

सहज योगिनी: भोजन कक्ष में। यह बहुत अच्छा है..

श्री माताजी: अच्छा या नहीं, मैं इसे आप लोगों के साथ करूंगी।