Guru Puja, The Statutes of the Lord Temple of All Faiths, Hampstead (England)

” परमात्मा द्वारा निर्देशित धर्म “, गुरु पूर्णिमा ,लंदन २७ जुलाई १९८०        आज आपने अपने गुरु की पूजा का आयोजन किया है जो आपकी माँ है। शायद आप बहुत ही अद्भुत लोग हैं जिनकी गुरु एक माँ हैं। यह पूजा क्यों आयोजित की गयी है? आपको यह जानना होगा कि यह बहुत महत्त्वपूर्ण है कि प्रत्येक शिष्य गुरु की पूजा करे, लेकिन गुरु को एक वास्तविक गुरु होना चाहिए, न कि वह जो केवल शिष्यों का शोषण कर रहा है और जो परमात्मा द्वारा अधिकृत नहीं है।        इस पूजा का आयोजन इसलिए किया गया है क्योंकि आप लोगों को परमात्मा द्वारा निर्देशित धर्म की स्थापना के लिए चुना गया है। आपको बताया गया है कि मानव के क्या धर्म हैं। वैसे इसके लिए आपको एक गुरु की आवश्यकता नहीं है। आप किसी भी पुस्तक को पढ़कर जान सकते हैं कि परमात्मा द्वारा निर्देशित धर्म क्या हैं। परंतु गुरु को यह देखना चाहिए कि आप इनका पालन करें।  इन धर्मों का पालन करना होगा, अपने जीवन में उतारना होगा, जो एक कठिन चीज़ है और बिना गुरु के, सुधारक शक्ति के, इन धर्मों का पालन करना बहुत कठिन है क्योंकि मानव चेतना और परमात्मा की चेतना में एक अंतर है, बहुत बड़ा अंतर। और इस अंतर की पूर्ति एक गुरु ही कर सकते हैं जो स्वयं संपूर्ण है। आज पूर्णिमा का दिन है। “पूर्णिमा” का अर्थ है पूर्ण चंद्रमा। गुरु को एक संपूर्ण व्यक्तित्व होना चाहिए; इन धर्मों के विषय में बात करने के लिए और अपने शिष्यों को समझ के Read More …