How To Know Where You Are

Chelsham Road Ashram, London (England)

1980-09-07 How to know where you are, Chelsham Road, UK, 56' Download subtitles: EN,ESView subtitles:
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                  सलाह, कैसे पता करें कि आप कहां हैं     

 चेल्सीम रोड आश्रम, क्लैफम, लंदन (यूके) , 7 सितंबर 1980

… तस्वीरों के सम्मुख चैतन्य, जो की, बहुत महत्वपूर्ण है। जहां तक परमात्मा का संबंध है, कैसे जाने की आपकी स्थिति कहाँ है। यह मुख्य बात है, क्या ऐसा नहीं है? हम इसी के लिए यहां हैं: ईश्वर से एकाकारिता के लिए, उसकी शक्ति के साथ एकाकार  होने के लिए, उसका उपकरण बनने के लिए। , हमें इसे समझने की कोशिश करनी चाहिए की हमारे कनेक्शन कैसे ढीले हो जाते हैं, और हम इसे कैसे ठीक कर सकते हैं।

सबसे पहले, हमें समझना चाहिए कि आपको इसके बारे में सोचना नहीं हैं। यदि आप इसके बारे में बहुत अधिक सोचने लगते हैं, तो आपने देखा है कि आप कुछ अजीब करते हैं जो आपको नहीं करना चाहिए था। इसके बारे में बहुत अधिक योजना न करें, क्योंकि, इस देश में, यदि लोग योजना बनाना शुरू करते हैं, तो वे सभी पूर्ण नियोजन कर लेंगे। उदाहरण के लिए, यदि उन्हें टहलने जाना होगा: तब फिर उनके पास उचित जूते होना चाहिए, उनके पास उचित छड़ें होनी चाहिए, उनके पास यह होना चाहिए, उनके पास वह होना चाहिए, और उनके पास दस्ताने होना चाहिए, और उनके पास सब कुछ होना चाहिए, और वे कभी बाहर नहीं जाएंगे ! योजना के साथ वे बहुत थक गए हैं। (हँसी)

उसी तरह, यह सहज योग के साथ होता है। सहज योग के साथ भी ऐसा ही होता है, मैंने देखा है कि, यद्यपि मैंने आपसे कहा है कि आप इसकी योजना न बनाएं, इसके बारे में न सोचें, फिर भी आप इसे करते चले जाते हैं और इसी तरह आप समस्याओं में पड़ जाते हैं; की सोच-सोच कर आप अपने आप को सही नहीं कर सकते। जो आप कर सकते हैं यह जानना कि आप बंधन डाल सकते हैं या आप अपने हाथों से खुद को संतुलन दे सकते हैं। आपको अपने हाथों को हिलाना है, न कि आपके मस्तिष्क को। ठीक है? हमारा दिमाग घूम रहा है और हाथ-पैर कभी नहीं हिलते! और बे-हिसाब हमारा दिमाग घूम रहा है लेकिन हमारे हाथ और पैर नहीं चलते हैं। यह वह समाज है जैसा की एच. जी. वेल्स ने वर्णन किया था, मैं इसे बहुत स्पष्ट रूप से देख सकती हूं, कि आपकी गहराई और समझ से ज्यादा आपका दिमाग है। आपकी उंगलियां इतनी संवेदनशील नहीं हैं और मस्तिष्क आपको कृत्रिमता की ओर ले जाता है। तो, आपको  अपने चक्रों को सही करने के लिए अपनी सोच-विचार का उपयोग नहीं करना हैं। अब क्या मुझे इसे सुनहरे शब्दों में लिखना पड़ेगा ? की, “आप इसको सुलझाने के लिए इसके बारे में सोच नहीं सकते हैं।” यह एक ऐसी बात है जिसे लोग नहीं समझते हैं।अब हमें विभिन्न चक्रों के लिए मंत्र मिल गए हैं। हर चक्र के लिए एक मंत्र मिला है जिसे आप जानते हैं। यदि आप नहीं जानते हैं, तो आपको पता लगाना चाहिए। अब, यदि एक चक्र पकड़ रहा है, तो आप केवल उस चक्र पर काम करते हैं और उस पर अपना मंत्र विकसित करते हैं। उदाहरण के लिए, माना की आप को अपने ह्रदय के लिए कुछ कहना है: तो, सबसे पहले, आपको भगवान से क्षमा मांगनी चाहिए। इसका मतलब है कि जितना आपका ध्यान अपनी आत्मा पर होना चाहिए था उतना नहीं है| या, अगर आपने कोई गलती की है, तो माफी मांगें, आप क्षमा मांगें। अब, आप अपने दिल से क्षमा मांगे। यहां तक कि हाथ से करना भी कृत्रिम हो सकता है, आप समझे? यह सिर्फ कर्मकांड हो सकता है – लेकिन आपके दिल से। आपको जो कुछ भी कहना है, आप उसे अपने दिल से कहें। अपने दिल से क्षमा मांगे, न कि इसके बारे में सोचें। आप देखिए, यही मुसीबत है। अगर मैं कुछ कहती हूं तो आप इसके बारे में सोचना शुरू कर देते हैं, और फिर आपने सोचा, “अब, मुझे अपना चित्त केंद्र से बाहर निकालना है,” और फिर आप अपना चित्त हटाना शुरू करते हैं। आप नहीं कर सकते। अपने दिमाग से , आप अपना चित्त कहीं से भी नहीं निकाल सकते। यह केवल आपके हाथों से, या आपके हाथों की गतिशीलता से, या आपके द्वारा पाए गए मंत्रों को कहकर है। क्या आप इस मुद्दे को समझे हैं? बिल्कुल स्पष्ट है। बहुत से लोग सोचते हैं कि अगर वे किसी चीज़ पर ध्यान देते हैं और अपना चित्त खींचते हैं – तो आप ऐसा नहीं कर सकेंगे। लेकिन जब आप मंत्र कह रहे हैं,ऐसा आप कर सकते हैं की, उस विशेष चक्र पर अपना ध्यान, निर्विचारिता में डालें। तो अंतत:आप उस चक्र पर निपुणता हासिल करते हैं, जो आपकी एक कमजोरी थी उस पर आपकी महारत बन सकती है। लेकिन अगर आप सोचते हैं, तो आप फिर से ह्रदय को और अधिक पकड़ रहे हैं। आपने जाना हैं कि, विचार कर के आप अपने दाहिने हिस्से को इस तरह पकड़ते हैं क्योंकि, यह अतिसक्रिय होना शुरू हो जाता है, यह अति सक्रिय हो जाता है, और बाईं बाजू जम जाती है, जिससे ह्रदय पकड़ता है। आपका अहंकार विकसित होता है जो आपके ह्रदय को घेर लेता है। तो जितना अधिक आप इसके बारे में सोचते हैं की, अपने अहंकार को कैसे ठीक करें, उतना ही ख़राब यह होता है। तुम इससे लड़ो।

तो फिर हम जानते हैं कि आपको एक संतुलन लाना है, अपने अहंकार को अपने हाथ से, मालिश कर के, नीचे लाना है -आप इसे नीचे ला सकते हैं, क्योंकि आपके हाथ में यह चैतन्य बह रहा है, चाहे आप पकड़े हुए हों या नहीं, वहां आप के हाथ से यह चैतन्य बह रहा है  –  आपके हाथ से वहां प्रवाह है। हो सकता है कि आपको मुझसे प्राप्त न भी हों रहा हो, लेकिन प्रवाह पहले से ही शुरू हो गया है, यह अंकुरित है, वहां थोड़ा सा हमेशा रहता है। अपने सिर की मालिश कर, अपने अहंकार को नीचे लाने के लिए इसका उपयोग करें।फिर ह्रदय के लिए भी, इसके बारे में सोचो मत लेकिन इसे दो, या आप अपना हाथ इस ओर रख दें। चैतन्य को निर्देशित करें लेकिन उस समय सोचें नहीं। यह महत्वपूर्ण बात है। यदि आप सोच रहे हैं और निर्देशन कर रहे हैं, तो इसे निर्देशित नहीं किया जा सकता है क्योंकि आपका चित्त सोचने की प्रक्रिया में लगा हुआ है। क्या आप उस बिंदु को समझते हैं? और यहाँ, समस्या यह है कि लोग बहुत अधिक सोचते हैं और बहुत अधिक बात करते हैं। मेरा मतलब है, वे हर चीज के बारे में बात करते हैं। उन्हें सब पता है। यह सोचने और फिर इसके बारे में बात करने की इतनी बेकार आदत है। अहंकार के कारण यहाँ हर कोई सम्राट है।तो अब कृपया अपने अहंकार को कह दें की, “आप कृपया चुप रहो-अब मैं तुमको  अच्छी तरह से जानता हूँ!”  कभी-कभी बल पूर्वक जितना हो सके उसे पीछे धकेलने की कोशिश करें, उसे इस तरह ठिकाने लाएं। इसे अपनी सामान्य स्थिति में लाने का प्रयास करें और एक बार इसके सामान्य स्थिति में जाते ही आप बहुत आश्चर्यचकित हो जाएंगे, आप बहुत हल्का महसूस करेंगे। तो यह आपके हाथ से किया जाना है। आप अपने शरीर पर रगड़ने के लिए तेल का उपयोग कर सकते हैं, यदि आपको रगड़ना है, तो आप कम घर्षण करने के लिए पाउडर या किसी भी चीज़ का उपयोग कर सकते हैं, लेकिन यह मालिश के माध्यम से, बंधन देने के माध्यम से, इसे बाहर निकालें या निम्बु के माध्यम से होता है, या आप एक नारंगी या ऐसा कुछ भी उपयोग कर सकते हैं, इन माध्यमों के माध्यम से इन चैतन्य को बाहर निकालने की कोशिश करें, न कि सोच के माध्यम से। सोच के माध्यम से, आप ऐसा नहीं कर सकते। एक बार जब आप इसके बारे में सोचते हैं, तो आपका खुद पर कोई बस नहीं होता है। आत्मा और आपके बीच एक अवरोध है, क्योंकि आप अपने अहंकार के माध्यम से सोच रहे हैं।आपने कई बार देखा होगा, जब मैं आपको बताती हूं कि, ” आपको ऐसा नहीं करना चाहिए था!” आप कहते हो की “मुझे पता है।” आप देखें, यह कुछ ऐसा है जिसे मैं समझ नहीं पाती की, जब आप जानते हैं कि ऐसा नहीं करना चाहिए था, तो आप ऐसा क्यों कर रहे हैं? (हँसते हुए) अब यह कौन सा ‘मैं ‘है जो जानता है? क्या यह आपकी आत्मा है? या यह वो है जो की इसके विरोध में काम कर रहा है ? तुम्हारा अहंकार है? तो, पहचान आत्मा के साथ होनी चाहिए, और आत्मा सोचता नहीं है-यह प्रकट होता है।

इसलिए आप इसे अपनी सोच के माध्यम से सुलझा नहीं सकते। यह सब गलत और दोषपूर्ण जीवन है। आप जो भी सोच-समझकर करेंगे, वह सब दोषपूर्ण होगा। अब आप इस देश के लोग अपने हाथों से अपनी गहराई क्यों खो चुके हैं? एक ही कारण से। जैसे की, अगर मैं एक सवाल पूछूँ,  किसी कला के बारे में, लोग मुझे कला के बारे में बहुत कुछ बता सकते हैं, लेकिन अगर आप उन्हें अपने हाथों में ब्रश भी रखने के लिए कहेंगे, तो वे नहीं कर पायेंगे! किसी भी कला, किसी भी चतुराई या किसी भी चीज़ में, वे सोचते हैं। कैसे यह रचनात्मकता, सहजता, समाप्त हो गयी है: सोच से।

और यही कारण है कि आपने देखा होगा, इन दिनों कला उत्पन्न करने वाले लोग भी इतने भयानक हैं, कि बीस साल के भीतर ये सभी कलात्मक रचनाएँ मर जाएंगी। जिन सभी का उत्पादन इन के द्वारा किया जाता है, जिन्हें मैं तथाकथित “आधुनिक कला” में देखती हूं और वह सब, उनका कोई मूल्य नहीं होगा। वास्तविक आधुनिक कला केवल उसी व्यक्ति द्वारा की जा सकती है जिसने अपनी आत्मा को विलियम ब्लेक की तरह प्रकट किया है। वह व्यक्ति जिसकी आत्मा प्रकट नहीं हो रही है, चाहे वह कवि हो या चाहे वह कलाकार हो या कुछ भी, जो भी वह कर रहा है वह कुछ ही समय में समाप्त होने जा रहा है, इसका कोई मूल्य नहीं है, क्योंकि यह आत्मा को प्रसन्नता नहीं दे सकता है। यह केवल बाहरी खुशी दे सकता है।

तो सब कुछ मौन में करो – विचार नहीं – विचारहीन जागरूकता में। यह मुख्य बिंदु है आप अपने अहंकार को कितना लाड़ करते हैं, आप सिर्फ सुबह से शाम तक देखते हैं। यह जीवन में देखने के लिए बहुत सरल है। बस उस अहंकार को ना की स्वयम को जो आत्मा है, खुश करने के लिए – हम क्रोध में और भी गुस्सा करने की कोशिश करते हैं, या कभी-कभी बहुत, बहुत कोमल, और कभी-कभी बहुत, बहुत विनम्र दिखने की कोशिश करते हैं।

अब सिर्फ अपने अहंकार से लड़ कर, आप बहुत कुछ हासिल करने वाले नहीं हैं, जैसा कि मैंने आपको बताया है। आप बस इसके अस्तित्व को स्वीकार ही नहीं करें। यह आपके लिए अब मौजूद नहीं है, मौजूद नहीं है। अहंकार केवल ईश्वर में विद्यमान है क्योंकि वह कुछ करता है, आप नहीं करते हैं। यही कारण है कि यह एक मिथक है। तुम्हारा अहंकार एक कल्पना मात्र है, तुम्हारा कोई अहंकार नहीं है। यह एक अवास्तविकता  है और आप मिथ्या के साथ आगे बढ़ रहे हैं। अब एक आदमी में अहंकार अर्थहीन है। ईश्वर में अहंकार समझदारी है।अब जब आप तस्वीर के सामने हैं, तो बस अपने आप को जांचने के लिए, अपने आप को विनम्र करें। सबसे पहले, उस व्यक्ति की तरह नम्र बनो जो अपने आप को परिपूर्ण बनाना चाहता है। फोटोग्राफ के सामने पहले, आप अपने आप को विनम्र करते हैं और यह पता लगाने की कोशिश करते हैं कि आपके साथ क्या गलत है। सबसे अच्छी बात होगी कि अपने आप को एक बंधन दें। फिर विचार ना करें। “विनम्र होने” का मतलब है कि अपना चित्त अपने ह्रदय में लाने की कोशिश करें। विनम्र होना। इसे अपने दिल में उतारो। मत सोचो।

अब आप बिना सोचे फोटो पर ध्यान दें और खुद देखें कि कौनसे चक्र पकड़ रहे हैं। किसी को तुरंत निष्कर्ष में नहीं कूदना चाहिए, “ओह हां, मैं इस लिए पकड़ रहा हूं, मैं उस कारण पकड़ रहा हूं, मैं किसी अन्य व्यक्ति के लिए पकड़ रहा हूं,” और यह सब बकवास की जरूरत नहीं है। आपको इसे पहचानने के लिए तर्कसंगतता की आवश्यकता नहीं है कि आप इसे क्यों पकड़ रहे हैं, यह हमारे लिए महत्वपूर्ण नहीं है। यह पकड़ रहा है, ठीक है। इसलिए सोच की यात्रा पर न जाएं। मैं पूछ सकती हूं, आपको जरूरत नहीं है।

यदि आप अन्य लोगों की जाँच कर रहे हैं, तो यह ठीक है क्योंकि आप उन्हें बता सकते हैं कि क्या किया जाना है। लेकिन तब तुम कुछ पाते हो – अब बायां पकड़ रहा है। तो, अब आप जानते हैं कि यह आपके अपराध बोध के कारण है, जो भी आपके अचेतन में निर्मित होता है, वह आप बाईं ओर पकड़ रहे हैं। यह किसी भी वजह से हो सकता है क्योंकि आपके पास नैतिकता की उचित समझ नहीं है। यह मूल बातें है। बायीं विशुद्धि अनैतिक है। यदि आप अनैतिक रहे हैं तो आपको यह मिलेगा। मूल बातें। फिर, बहनों का रिश्ता। फिर, अवचेतन में निर्मित अपराध बोध। यदि आप अनैतिक हो जाते हैं, तो अचेतन में अपराधबोध निर्मित होता है। ऐसा कोई भी अपराधबोध किसी भी अन्य दोषी भाव के रूप में आ सकता है। जैसा कि आप देखते हैं, असली अपराध कुछ और कारण से होता है, लेकिन लोग इसे कुछ और के रूप में व्यक्त करते हैं। ठीक है?

इसलिए, यह चिंता न करें कि आपको क्या दोषी भाव है। अगर आप इसे सही तरीके से याद करें की, मैं आपको कभी नहीं बताती कि आपको क्या अपराध बोध है। मैं आपको कभी यह नहीं कहती कि आपको यह बताना चाहिए कि आपको यह दोषी भाव है। बहुत से लोग मुझे बताते हैं कि, “मुझे यह अपराध बोध है कि वियतनाम में युद्ध हो रहा है,” या ऐसी ही कोई बकवास, या “मेरे पूर्वजों ने अर्जेंटीना में जाकर कई इंडियन को मार डाला।” यह सब बकवास है, आप देख रहे हैं? दोषी भाव एक अचेतन क्रिया है, जिसे आप बाईं ओर की कंडीशनिंग कहते हैं। जब किसी प्रकार का अनैतिक व्यवहार किया जाता है। यहां तक कि आप यह नहीं जान पा रहे हैं कि नैतिकता क्या है, आप देखिए, यदि आप धर्मों को नहीं जानते हैं, तो हो सकता है कि आप कुछ ऐसा कर रहे हों जो आपको नहीं करना चाहिए था। तो इसके बारे में भूल जाओ, अपने आप को इस से अलग करें। जिसने गलती की है वह आपका अहंकार है, आप नहीं।आप पवित्र हैं क्योंकि आप आत्मा हैं। तो उसके लिए खुद की निंदा न करें। आपको परेशान नहीं होना है। उदाहरण के लिए, यदि साधन में दोष है, तो बिजली का कोई दोष नहीं है। बिजली शुद्ध है। चूँकि साधन में दोष है इसलिए ये बह नहीं पा रही है। इसलिए हमें साधन को सही करना होगा। अब, यदि आपको लगता है कि आप बिजली हैं तो आप इसे ठीक कर सकते हैं, लेकिन अगर आपको लगता है कि आप उपकरण हैं, तो आप इसे कभी भी ठीक नहीं कर सकते क्योंकि फिर से आप अपने अचेतन में चले जाते हैं, यह पता लगाने की कोशिश करते हैं, “ओह, मुझे क्या करना चाहिए। ? “यह आपके पिछले जन्मों से भी हो सकता है। यह हो सकता है कि आपने इसे बहुत गंदी बात कहकर पकड़ा हो जो आपको याद न हो।

इसलिए अपने दिमाग पर जोर न लगाएं। हम बिल्कुल भी मनोविश्लेषक नहीं हैं, जो की मनोवैज्ञानिक तरीके से सवाल पूछ कर यह पता लगायें कि हमारे साथ क्या गलत है , फिर अहंकार के द्वारा अपने आप को बहुत परेशान करना। मनोवैज्ञानिक केवल बाएं [पक्ष] के बारे में सोचते हैं, लेकिन वे यह नहीं जानते कि जब आप ऐसा करने की कोशिश करते हैं तो आप अपना अहंकार विकसित करते हैं। जब आप इसके बारे में सोचना शुरू करते हैं की, यह कहां से आया है, तुरंत आप एक व्यक्ति के अहंकार को विकसित करते हैं और व्यक्ति अहंकार यात्रा पर जाता है और जो अचेतन समस्या से भी अधिक खतरनाक है। क्योंकि जिन लोगों को अहंकार होता है वे पूरे समुदाय को परेशान करते हैं, जबकि जो लोग प्रति-अहंकार से ग्रसित होते हैं वे केवल खुद को ही परेशान करते हैं। अहं वाले लोग प्रति-अहंकारी लोगों की तुलना में बहुत अधिक खतरनाक और परेशान करने वाले होते हैं।

 तो आप बस, सबसे पहले यह देखें कि आपके साथ क्या मामला है। अब, बायाँ विशुद्धी पकड़ रहा है। ठीक है, तो इसका मतलब है कि कुंडलिनी बायीं विशुद्धी से ठीक से नहीं चल रही है। ठीक है? तब तुम अपनी आत्मा से जुड़ जाओ। अपनी आत्मा से खुद को जोड़ने की कोशिश करें। फिर आप इसे साफ़ करें। मैं इसे वैसा ही देखती हूं। माना कि मैं आत्मा हूं और तुम शरीर हो। मैं अपनी आत्मा को देखती हूं और मैं आपकी आत्मा को देखती हूं। मैं परेशान नहीं हूं कि आपको क्या मिला है। उसी तरह, आप खुद को दो तरह से देखें: कि आप आत्मा हैं, और आप शरीर या मन या अन्य कुछ भी नहीं हैं। इसलिए हमें इसे साफ करना होगा। वे पराए हैं, वे अलग हैं, वे दूसरे हैं। हमें इसे सुधारना होगा। जैसे बिजली इस यंत्र (माइक्रोफोन) से अलग हो जाती है, उसी तरह आप अपनी आत्मा से अलग हो जाते हैं, लेकिन इस अलगाव को ध्यान में समझा जाना चाहिए, इसीलिए ध्यान आवश्यक है।

ध्यान करने के लिए, आपको यह कहना चाहिए कि, “माँ, मुझे आत्मा बनाओ। मैं आत्मा हूं। माँ, मैं आत्मा हूँ। ” आप सब कुछ आत्मा की आंखों से देखना शुरू करते हैं, तब आपको बुरा नहीं लगता। आप खुद पर हंसते हैं, खुद का मजाक बनाते हैं, और फिर आप खुद का आनंद लेते हैं, केवल अपने साथ। तुम अपने से खेलते हो। आप खुद के साथ मजाक करते हैं। और सारी बात मजाक बन जाती है।

लेकिन इसके लिए, जब आप ध्यान करते हैं, तो आप सबसे पहले पता लगाते है कि आपके साथ क्या मामला है। लेकिन इसे मानसिक रूप से नहीं बल्कि आप इसे अपने चैतन्य और मंत्र के माध्यम से हल करें। सहज योगियों के लिए मंत्र बहुत महत्वपूर्ण हैं। यदि इन मंत्रों को कहा जा सकता है, तो शुरुआत में ऊँची आवाज़ में बेहतर है। इसलिए, गोपनीयता में, आप इन सभी चीजों को कर सकते हैं, अपने कमरे में आप इसे कर सकते हैं। अब आप नींबू का उपयोग कर सकते हैं, आप पानी का उपयोग कर सकते हैं, आप प्रकाश का उपयोग कर सकते हैं, आप ईथर, आकाश का उपयोग कर सकते हैं, आप समुद्र का उपयोग कर सकते हैं – इन सभी चीजों का उपयोग आप खुद को शुद्ध करने के लिए कर सकते हैं।

एक बार जब आप अपनी आत्मा के माध्यम से खुद का सामना करना शुरू करते हैं, तो आप इतने भयभीत नहीं होंगे। क्योंकि आप खुद का सामना नहीं करना चाहते हैं, आप हर समय भयभीत, भय के मूड में हैं। लेकिन एक बार जब आप [अपने आप] का सामना करना शुरू करते हैं, तो आप आश्चर्यचकित होंगे कि, वास्तव में, आप सुंदर हैं, और ये सभी चीजें बाहर हो जाएंगी। इसलिए किसी भी तरह से खुद की निंदा करने की या उत्तेजित होने की जरूरत नहीं है, बल्कि सिर्फ अपनी आत्मा बनो।

अपनी आत्मा के साथ रहने का सबसे अच्छा तरीका है, माफ करना, क्षमा करना, क्योंकि तब आपके विचार चले जाएंगे। मेरा मतलब है, यहां प्रति-अहंकारी लोग हैं, लेकिन जैसे ही आप उनके प्रति-अहंकार को हटाते हैं, वे बहुत तेजी से अहंकार में उतर जाते हैं, मैंने इसे देखा है। मेरा मतलब है, वे वास्तव में मूल रूप से अहंकारी ही हैं, वास्तव में, जैसे कि, घोड़े से वे थोड़ी देर के लिए गिर गए हैं और जैसे ही आप उन्हें दूर ले जाते हैं, फिर उन्हें उठाते हैं, वे बस फिर से घोड़े पर चढ़ जाते हैं, यह ऐसा ही है। तो इस बिंदु के बारे में बहुत सावधान रहना होगा। अब जब आप ध्यान करते हैं, तो कितना समय, फिर से, आप सोच रहे हैं? यह सब सतर्कता, यदि आप कोशिश करते हैं, तो फिर से आप सोच रहे हैं। आप बस बैठने के लिए उचित स्थान लें, आपके सामने तस्वीर रखें और सिर्फ अपने चैतन्य को महसूस करें – आप कहाँ पकड़ रहे हैं?

ठीक है। फिर आप अपने कैच को निकालना जानते हैं। बिना सोचे समझे ऐसा करने की कोशिश करें, सबसे पहले,जहां भी आप पकड़ रहे हैं, अलग-अलग चक्रों पर मंत्र बोलें। सबसे पहले यह पता लगायें कौन से चक्र हैं जो पकड़ रहे हैं, सभी मंत्रों को कहने की आवश्यकता नहीं है। केवल उस हिस्से में मंत्रों को अपने दिल से कहें। अपने हाथ और गतिविधि द्वारा अपनी बाधा को हटा दें, जैसा कि आप जानते हैं कि, और यह काम करेगा।(बच्चा रोने लगता है)

आप उसे अब बाहर ले जा सकते हैं क्योंकि बच्चों के लिए अब बहुत भीड़भाड़ है, वह बेहतर नहीं होगा। उसके सहन करने के लिए बहुत ज्यादा है।जितना कम आप सोचते हैं, उतनी ही तेजी से आप अपने  आत्मसाक्षात्कार के साथ आगे बढ़ते हैं। यह भारतीयों को आशीर्वाद है। यही कारण है कि आप” रे “से पूछ सकते हैं कि सहज योग के बारे में उनका क्या कहना है। वे ज्यादा सोचते नहीं हैं। अब मेरा रसोइया देखिए जिसे मैं खाना बनाना सिखाना चाहती था। एक महीने में उन्होंने सीखा: बहुत अच्छी तरह से पकाना। लेकिन मैं आपको बता सकती हूं कि मैं आप लोगों को छह महीने तक नहीं सिखा सकती। यहां तक कि मुझे नहीं पता कि क्या मैं आपको एक साल में भी इतना सिखा सकती हूं। क्योंकि बहुत कम चीजें दिमाग में जाएंगी, और फिर हाथ में कला आना और भी मुश्किल है|आप कुछ भी चर्चा करें, जैसे, कमरे की सज्जा, हर कोई बिना सोचे समझे बहस कर रहा होगा, “जरा चीज़ आने तो दें, देखते हैं कि यह क्या है,” हर कोई बहस करना शुरू कर देगा। उसी तरह, अगर आपको सीखना है कि आत्मा कैसे बनना है, तो इस पर बहस न करें। इसके बारे में मत सोचो। बस बनने की कोशिश करो, बनने के लिए, तुम्हें बनना है।

अब मुझे समझ में आ गया है,  आपकी मूल समस्या क्या है:की आप सब कुछ अपने मस्तिष्क से सुलझाना चाहते हैं और अपने हाथों का उपयोग नहीं करना चाहते हैं, और इसीलिए जड़ता स्थापित हो रही हैं।

लोग सुस्त होते जा रहे हैं, आप देखिए। जहाँ तक और जब तक आप शारीरिक रूप से आगे नहीं बढ़ेंगे, तब तक जड़ता कैसे बाहर जाने वाली है? आपके मस्तिष्क के माध्यम से नहीं। इसलिए अपनी सोच को कम करें।।अपनी सोच के जरिए मामलों को सुलझाने की कोशिश न करें। यह आपको एक निस्तब्धता, एक प्रकार का शांतिपूर्ण अस्तित्व प्रदान करेगा। एक दूसरे बात करते समय बेहतर हो की मद्धिम स्वर में, धीरे-धीरे बात करें। मेरी उपस्थिति में, आपको चिल्लाना नहीं चाहिए और जोर से नहीं लेकिन बहुत मद्धिम आवाज़ में  बात करनी चाहिए, आप यहां एक मौन में हैं। आम तौर पर, लोग इस तरह बात करते हैं जैसे कि, मैं सिर्फ एक गृहिणी या कुछ और हूं। यह समझना चाहिए कि यह बात करने का तरीका नहीं है, क्योंकि देखिये,तब आप मुख्य बात को भूल जा रहे है| आप मेरी माया के साथ खेल रहे हैं, जिसमें आपको नहीं आना चाहिए। एक दूसरे के साथ भी ऐसा ही बर्ताव करने की कोशिश करें। क्योंकि आप संत हैं। झगड़ा और बहस न करें। अपने तर्कों को कम से कम करें।

इसके अलावा, उन सभी कारणों का पता लगाएं, जिनके द्वारा आपका मन बाहर जाता है और इसे रोकें। उसे रोकने की कोशिश करें, क्योंकि अब आपके मन ने कम से कम अगले सात जन्मों तक के लिए सोचा है। आपको कुछ भी अधिक सोच की आवश्यकता नहीं है, आपने पर्याप्त सोच लिया है। ईश्वर ने आपको जितना भी दिमाग दिया है, आपने उसे बहुत ज्यादा दुरूपयोग कर लिया है, कि अब इसे अकेले छोड़ना बेहतर होगा और अब मत सोचो। तब प्रेरणा आपके भीतर से आएगी। और जब प्रेरणा आ रही होगी, तब तुम पाओगे यह बहुत भिन्न होगी; यह बहुत सुंदर होगी, पूर्णत: सुंदर होगी।

मुझे लगता है कि अगर आप ज़ेन पढ़ें – मैं यह नहीं कह रही कि जाओ और पढ़ो क्योंकि तुम  तुरंत दस किताबें खरीदोगे और पढ़ना शुरू करोगे !! भगवान के लिए, ऐसा मत करो! मैं सिर्फ आपको बता रही हूं कि यदि आप ज़ेन पढ़ें, तो आप साधारणतया समझ नहीं पायेंगे। लोग समझ नहीं पाए। वे इस तरह वर्णन करते हैं जैसे की एक छोटा सा फूल अकेला तन्हाई में वन में खड़ा है। वे जाते हैं,देखते हैं और इसका आनंद लेते हैं, और देखते हैं कि तन्हाई पहचान है कि: ईश्वर अकेला है, उनका कोई साथी नहीं है, वह साझा नहीं कर सकता है। पर तुम ऐसा नहीं कर सकते। आप इसके बारे में सोचेंगे, इस पर शब्द डालेंगे और इसमें से कुछ फालतू का बना देंगे। लेकिन वे आनंद लेंगे, बस आनंद। वे कुछ पत्थरों और कुछ रेत से एक पैटर्न बना लेंगे, और मैंने सभी अमेरिकियों और अन्य सभी लोगों को देखा है जो वहां जाते हैं, वे पूछते हैं, “यह क्या है? यह क्या है? यह क्या है?” यह आपके विचारों को बेअसर करने के लिए एक पैटर्न है, कि आप निर्विचार जागरूकता में चले जायें, आप बस बिना सोचे समझे पैटर्न को देखिए। आप कम से कम मेरा चेहरा निर्विचारिता में देखिये, यूँ की मेरा चेहरा, खुद, आपको निर्विचार बनाता है। यदि आप मेरा चेहरा देखते हैं, तो यह आपको निर्विचार बनाता है।

तो, तुम निर्विचार मेरा चेहरा देखो। मेरी तस्वीर पर आप निर्विचार चेहरा देख सकते हैं और यह काम करेगा। खुद को निर्विचार बनाने की कोशिश करें। यह पहला चरण है जिसे आपने हासिल नहीं किया है, और आप उसी पर कूदते हैं। बिना कोई तुकबंदी और कारण के, आप उस सोच-विचार में कूद पड़ते हैं। आपके और भारतीयों के बीच 

यही एकमात्र गुणवत्ता का अंतर है। वे इसके बारे में नहीं सोचते हैं, वे सिर्फ आत्मसात करते हैं। क्या आपने किसी बच्चे को माँ का दूध पीते हुए देखा है? वह सोच-विचार नहीं करता है, यह सिर्फ चूसता है, और आनंद ले रहा है। वे जो कहते हैं, वह चित्त को अंदर ले जाने के लिए है, लेकिन अगर आप यहाँ किसी को बताएँगे तो वे कहेंगे, “हम अपना चित्त अंदर खींच रहे हैं!” अपने दिमाग से आप और कुछ नहीं सभी तरकीबें आजमा रहे होंगे। अपने आप को मौन करना है, अपने मन को निशब्द करना है, और एक निस्तब्ध वातावरण है जो आप आसपास महसूस करते हैं, जिसे मैं भारत में बहुत महसूस करती हूं। यहाँ, कभी-कभी, यह आपके भीतर, पूजा के समय और उस सब के दौरान स्थापित होता है। पूजा के समय, अब यह बहुत बेहतर है [लेकिन] इससे पहले वे झगड़ा करते थे, सुबह-सुबह पूजा से पहले एक बड़ा झगड़ा होता है, और फिर पूजा शुरू हो जाती और मुझे समझ नहीं आता कि ऐसी पूजा का क्या करना है!

और, मुख्य बात यह है कि हमें अपने आप के साथ एक होना होगा। आत्मा को जाने बिना आप भगवान को नहीं जान सकते। आपको अपनी आत्मा को जानना होगा। एक बार जब आपके भीतर सुंदर व्यक्तित्व विकसित हो जाएगा, तो लोग जान जाएंगे कि आप आत्मा हैं।

अगर आप कम सोचते हैं, तो आपका हर काम अच्छा होगा। मैंने देखा है, आप किसी से एक पाइप से दुसरे पाइप को जोड़ने के लिए कहते हैं, वे नहीं कर सकते। रिसाव होगा, कुछ समस्या होगी, क्योंकि आप इसे बिना सोचे-समझे जोड़ नहीं रहे हैं। आप देखिए कि डगलस के पास अब, क्षमता है: वह सोचता नहीं है। आपने देखा है कि उसने कितना सुधार किया है। वह ज्यादा नहीं सोचता, वह बस करता है, और यही कारण है कि वह सहज योग उत्थान पा गया है। हालांकि वह बहुत नीचे चला गया था, वह यह बहुत अच्छी तरह से जानता है । लेकिन कैसे, निर्विचार रह कर वह ऊपर आ गया है!आप लोग अति-विकसित हैं, इसलिए अपने मस्तिष्क को किसी भी अति कर्म  से रोकने की कोशिश करें और इसे केवल विनम्र बनाएं। देखिये, ये सभी, हिप्पीवाद के विचार और वह सब, वास्तव में इस अति विकसित मन की चेतना, जागरूकता है। लेकिन सिर्फ कपड़े पहनकर, या हिप्पी की तरह रहने से, या ड्रग्स लेने से आप इस दिमागी सोच को रोक नहीं सकते। सहज योग एकमात्र तरीका है, और अपने आप को संतुलित करना।

साथ ही, कई अन्य चीजें आपकी मदद करती हैं। उदाहरण के लिए, शारीरिक चीजें – आपको डाइटिंग सीखना चाहिए। किस प्रकार की चीज़ के लिए किस आहार की आवश्यकता है, किस प्रकार के व्यायाम की आवश्यकता है। यह आप जान लो !अब मैं एक महीने के लिए जा रही हूं, आपको इसे पूरा करना होगा। दरअसल,  जिन्हें आप संबोधित कर रहे हैं या जिन्हें आप मिल रहे है जब तक आप उनको उस तरह के प्यार और उस तरह की शांति के साथ प्रभावित नहीं करते हैं, कोई भी विश्वास करने वाला नहीं है! दूसरे, क्या तुम जानते हो? लोगों को क्या, सबसे ज्यादा प्रभावित करता है? वह क्या है जो प्रभावित करता है, भले ही यह गलत हो लेकिन, लोगों को बहुत प्रभावित करता है? सादगी। चरित्र की सादगी, बातचीत की और कपड़ों की सादगी। यहां तक कि, यह भी कहें कि यदि आप एक सुव्यवस्थित कपड़े पहने व्यक्ति हैं, तो लोग जानते हैं कि आप अच्छे कपड़े पहने हुए हैं। यहां तक कि अगर आप एक जीन पहने है और ऐसा प्रदर्शित करते हैं जैसे कि आप एक सूट और उस सब की परवाह नहीं करते हैं,तो फिर भी आप कुछ जताने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन अगर आप एक सामान्य, साधारण पोशाक पहनते हैं, यदि आप एक साधारण तरीके से तैयार होते हैं, बिल्कुल सामान्य तरीके से, लोग चकित होते हैं की : आप कैसे इतने सामान्य, सरल हो सकते हैं?और दूसरी बात जो लोगों को प्रभावित करती है वह यह है कि जो कुछ भी आप कर रहे हैं,सहज योग आपने उसके लिए बलिदान किया है। आपने खुद को कितना समर्पित किया हैं। आपने इससे क्या हासिल किया है,  उस चीज से नहीं बल्कि आपने जो त्याग किया है। यह बहुत महत्वपूर्ण है। यह दूसरा बिंदु बहुत महत्वपूर्ण है: आपने जो त्याग किया है।

आप देखिए, यदि आप वह सब पढ़ें जो की भारतीय या आप लोग भी लिखते हैं: माँ के पास अपनी साड़ी सहूलियत हैं, उनका अपना परिवार है, उनके पास उनके पोते हैं, लेकिन वह अभी भी , वह बहुत कुछ हम में रुचि रखती हैं। वह यहां आती है और उन्हें कुछ भी बुरा नहीं लगता है, और वह हर समय हमारे लिए अपने सभी भोगों का त्याग करती है। वह हमारी संगत का आनंद लेती है, वह हमारे साथ रहना चाहती है। मेरे पास कई तरीके हैं जिनसे लोग प्रभावित होते हैं, लेकिन आप लोग: अपने आप से कुछ त्याग करने की कोशिश करो। जबकि, आपने ध्यान दिया होगा कि आप में से कुछ वास्तव में परजीवी रहे हैं। यह एक और बात है जिससे लोग हैरान होंगे! तथाकथित गुरु भी, जाहिर है, वे नहीं दिखाते हैं। शुरुआत में वे दिखाएंगे कि वे बहुत त्याग कर रहे हैं, उन्होंने अपने परिवारों का बलिदान किया है, उन्होंने एक काषाय वस्त्र (भिक्षु के कपड़े) पहने हैं, वे एक साधु बन गए हैं और उन्होंने अपना सब कुछ त्याग दिया है। इन सभी लामाओं ने लोगों को इसी तरह प्रभावित किया ! निस्संदेह, यह असत्य है और हम असत्य अपनाने नहीं जा रहे हैं। लेकिन हमारे जीवन में, यदि हम त्याग कर रहे हैं, दूसरों के लिए काम कर रहे हैं, तो हर बार अगर आप तौले की उन्होंने कितना किया है  … तो उदाहरण के लिए, अगर मैं तौलना  शुरू कर दूं, तो “अंग्रेज लोगों ने दूसरों की तुलना में सहज योग 

 में कितना काम किया है?” ” और फिर मैं जो कुछ किया है, उसके अनुसार आपको भुगतान करना शुरू कर दूं, उतना समय आप को देते हुए जितना की आपको दिया जाना चाहिए,  तुरंत मेरे काम से मुझे संतुष्टि नहीं मिलेगी। मैं ऐसा नहीं कर सकती, मैं बहुत ईमानदार हूँ, मैं बहुत सच्ची हूँ, मैं सिर्फ अपनी वास्तविकता या ईमानदारी से बाहर नहीं निकल सकती, बस मैं ऐसा नहीं कर सकती। आप लोगों को इतनी स्वतंत्रता है, लेकिन मुझे इनमें से कोई भी आज़ादी नहीं है, यह मेरा स्वभाव है, मैं इसमें खुद की कोई मदद नहीं कर सकती। चाहे आप ऊपर उठे या न उठें, जब तक कि मेरे जीवन की अंतिम सांस है तक आप पर कड़ी मेहनत होगी, लेकिन इसे  मेरे लिए आसान और आपके लिए सुखद बनाने के लिए, आपको उस तरीके से काम करने की कोशिश करनी चाहिए, जहां निर्विचारिता हो। आप मुझे सोच-विचार कर समझ नहीं  सकते? आप सोच के साथ कितनी दूर जा सकते हैं? लेकिन तुम पागल हो जाओगे! तो बस इसके बारे में मत सोचो। अपने भीतर शांति का विकास करें। और किसी श्रेष्ठता बोध पालने की जरूरत नहीं है। तुम्हें बोध हो गया है, दूसरों को भी मिल जाएगा। हो सकता है कि दूसरे लोग, जैसे तुम आज हो,  उससे भी बेहतर हों।

आप देख सकते हैं कि आप के अंदर गरिमा और शांति आ रही है जब एक बार आप महसूस करते हैं कि आप आत्मा हैं। बोध का अर्थ कभी ऐसा नहीं होता की , आपके मस्तिष्क से। आप देखिए, मेरे दिमाग के साथ अगर मुझे महसूस होता है कि मैं इंग्लैंड की रानी हूं, तो मैं बन नहीं सकती! मुझे अपने भीतर महसूस करना होगा, अर्थात मेरे भीतर यह यह वास्तव्य होना चाहिए कि मैं रानी हूं। यह सिर्फ सोच या किसी चीज पर विश्वास करना नहीं है, यह वास्तविक में हो जाना है। यह स्वभाव है, स्वभाव , आपको, ऐसा होना चाहिए क्योंकि वास्तव में आप आत्मा हैं, आपका स्वभाव आत्मा है। आप आत्मा के अलावा कुछ भी नहीं हैं।

आत्मा के सभी प्रकट होने का समय आ गया है, और ये सभी सतही, सनकी,और मूर्खतापूर्ण चीजें जो आप अपने मस्तिष्क के माध्यम से कर रहे हैं: इसे बाहर छोड़ दें! अपनी ऊर्जा बर्बाद मत करो। ज्यादा समय नहीं बचा है।

और इसके साथ मैं आप सभी को आशीर्वाद देना चाहती हूं कि आप अपने भीतर उस शांति और अपने लिए स्नेह और गौरव और सम्मान को विकसित करें, और वह बन जाएं। जिस तरह से मैं आपका सम्मान करती हूं, आप खुद को सम्मान दें और खुद को प्यार करें और खुद को समझें।

ईश्वर आप सबको आशीर्वादित करें।

भारत में वे कहते हैं, ‘चैतन्य को शोषित करो’। अब आप कहेंगे, “ठीक है, कैसे करना  है?” बस निर्विचार हो जाओ, भीतर चला जाएगा! बस निर्विचार हो जाओ यह अंदर जाएगा। बस निर्विचार होने की कोशिश करो, आप इसे प्राप्त करेंगे। यदि विचार अहंकार से आ रहे हैं, तो उसे बताएं, “विनम्र रहें, विनम्र रहें, विनम्र रहें” और वे गायब हो जाएंगे। क्योंकि आपका मस्तिष्क आपको कुछ भी समझदारी नहीं सुझा सकता है। केवल आपकी आत्मा प्रकट कर सकती है। बस अपने मन को कहो, “विनम्र बनो।” तब यह तुलना करने की आदत दूर हो जाएगी कि आपको विशिष्ट होना है, आप कुछ उच्च आत्मा या और कुछ हैं। वह सब बकवास है। आपको पूर्ण होना है, आपको मध्य में होना है।

आप देखें, क्या होता है कि आप मध्य में हैं, इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, ठीक है? इस तरह मध्य में। और एक बार जब आप कुछ भी असाधारण करने की कोशिश करते हैं, तो आप स्पर्शरेखा की तरह बाहर की ओर जाते हैं। आप देखिए आप बाहर की तरफ फेंकने वाले बल [केंद्र त्यागी बल ]की चपेट में आ जाते हैं  वहाँ भी एक केंद्र त्यागी बल कार्यरत  है। अब जब आप कहीं भी बाहर निकलने की कोशिश करते हैं, कुछ असाधारण या बेहतर अथवा मिलता-जुलता करने की कोशिश करते हैं, और प्रदर्शित करने की कोशिश करते हैं या किसी तरह से विराट से बाहर निकलने का प्रयास करते हैं, आप बस एक स्पर्शरेखा की तरह जाते हैं: और इतने बड़े ढंग से की आप चकित रह जाते हैं कि आप कैसे बाहर छुट गए हैं! और ऐसे लोग फिर चलन से बाहर हो जाते हैं। बेहतर है अब मत सोचो!

लेकिन कुछ लोग जल क्रिया तक नहीं करते ध्यान भी नहीं करते। मेरा मतलब है, मुझे नहीं पता कि कैसे वे सहज योगी हैं, मैं अभी समझ नहीं पा रही हूं। हर दिन आपको अपने पैरों को पानी में रखना चाहिए! हर सुबह आपको जूते से खुद को पीटना चाहिए। यह सहज योग का एक अनुष्ठान है। लेकिन अगर आप ऐसा नहीं कर पाते हैं, तो आपको इसके लिए खुद को सजा भी नहीं देना चाहिए, लेकिन अगर आपके पास ऐसा करने का मौका है, तो जरुर करें |इसलिए कि आप इस प्रकार सफाई करते हैं। वह एक जीवन का हिस्सा है। यह सोच-विचार कर नहीं कि मैंने अपने पैरों को भिगोया है! मैं चकित हूँ कि कुछ लोग ना केवल जल क्रिया नहीं करते हैं, यहां तक कि बिल्कुल भी ध्यान नहीं करते हैं, कुछ भी नहीं करते हैं। फिर भी उन्हें सहज योगी मान लिया जाता है। आप देखें, सहज योगियों का निर्णय ईश्वर द्वारा लिया जाना है, न कि कोई आप सहज योग की किसी सदस्यता से आप सहज योगी बन जाते हैं। यह दिव्य द्वारा तय किया जाना है।

लोग सोचते हैं, हम जो भी करें, हम सहज योगी हैं। जो ध्यान नहीं करते हैं, वे बिलकुल सहज योगी नहीं बनते हैं । यह हमारा जीवन जीने का तरीका है। आप देखें, जैसे कि इस्लामिक नियमों में कहा गया है कि शरीयत है। शरीयत का अर्थ है जीवन की शैली। यह हमारे जीवन का तरीका है, अपने आप को साफ रखना है, हम अपने आप को कैसे साफ करते हैं, यह खुद स्नान करना और हमारे अंदर की सभी गन्दी चीज़ों को बाहर निकालना हैं। यह मुख्य बात है तब आप आश्चर्यचकित होंगे कि आपने अपना काम करते समय अपनी ऊर्जा बर्बाद नहीं की। आप अपना काम बहुत बेहतर करेंगे क्योंकि 

 अन्यथा  आप अपनी सारी ऊर्जा अपने दिमाग के माध्यम से बर्बाद कर रहे हैं।

एक बार आप आत्मा हो जाते हैं तो फिर मुझे आप को समझाना नहीं पड़ेगा|  तुम बस आनंद लो। ठीक है? अब यह अच्छा है, यह काम कर रहा है इसे स्थापित होने दो, अपना चित्त आत्मा पर होने दो।

हम्म। बस देखो। आज्ञा बहुत ज्यादा हैं। क्या आप मेरी आज्ञा से ले सकते हैं, ठीक है। आप सोच रहे हैं, मुख्य बिंदु यह है: बहुत ज्यादा! क्या तुम एक….. में जाओगे? या कुछ और। बेहतर बात होगी।यहाँ तक पहुँच गया। यह यहाँ अटक गया है!

आप देखिए, आपकी सोच अब कम हो रही है। अपने विचारों को देखने की कोशिश करें। एक दूसरे का हाथ पकड़ें और एक हाथ बाहर होना चाहिए। एक हाथ ढीला छोड़ देना चाहिए। और आप क्या कर सकते हैं उसके हाथ, एक हाथ, और एक हाथ … अच्छा है। बेहतर है, सोच कम होती जा रही है।आज्ञा इतनी चिपकी हैं।

क्या आप यहां दरवाजा नहीं खोल सकते हैं? हां, आप खोलने का प्रयास करें। उन्होंने यहां किस तरह की व्यवस्था की है? यह सब सोचने का परिणाम है! दरवाजा खोलो, यह आज बहुत गर्म है, बहुत गर्म है, इसे खोलो!

कुली को क्या हो गया है, वह इतने बड़े अहंकार में क्यों पड़ रहा है?

सहज योगी: वह पहले भी आ सकते थे, लेकिन उन्होंने कोशिश की …

श्री माताजी: मुझे पता है, वह अब मुझसे बचने की कोशिश कर रहा है। आप देखिए, यही समस्या है। उसके पास अहंकार है और आपके पास भी अहंकार है। आप झगड़ा कर रहे थे? आप उसके साथ हाथ नहीं मिलाते हैं, वह ठीक हो जाएगा। वह अपने काम की उपेक्षा करता रहा है। यदि आप ठीक से काम नहीं कर रहे हैं, तो लोग आपको क्यों स्वीकार करेंगे? आपको इसमें काम और भागीदारी के बारे में अधिक ईमानदारी दिखानी होगी। अगर आप सोच-विचार नहीं करते तो आप इसे बेहतर करेंगे। कुली कभी ऐसा नहीं करता था। अब अचानक, मुझे नहीं पता कि उसके साथ क्या हुआ है। उसने बहुत ज्यादा सोचना शुरू कर दिया है। डॉन ने वास्तव में उसके साथ अच्छा नहीं किया है। डॉन, कृपया अब उस के प्रति दयालु बन कर उसे साथ लाने की कोशिश करें, ठीक है? वह बहुत पुराने सहज योगी हैं और उन्हें बिलकुल भी प्रचलन से बाहर नहीं जाना चाहिए। यदि आप काम नहीं करते … आप देखिए, यदि आप एक अच्छे कार्यकर्ता हैं तो कोई भी सोचता है, कोई भी नहीं चाहेगा की आप बाहर निकलें। इसके विपरीत वे कहेंगे की, “कृपया हमारे लिए काम करें” लेकिन अगर आप एक बुरे कार्यकर्ता हैं तो वे आपको बाहर फेंकने के तरीके खोज निकालेंगे। ऐसा ही सहज योग में भी है। यदि आप वास्तविक हैं, आप सरल हैं। भगवान जानता है कि आप एकदम ठीक हैं, आप वहां होंगे। यदि नहीं तो वह आपको बाहर निकाल देगा। उन्हें सब कुछ पता है। तुम बाहर जाओगे| आप चकित होंगे कि आपको कैसे बाहर फेंका जाएगा।

आप को एक-दूसरे के साथ लड़ना नहीं हैं। और यह समझने की कोशिश करें कि जहाँ तक और जब तक आप पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ काम न करें, कोई भी किसी भी काम के लिए आपको स्वीकार नहीं करेगा। वे सभी लोग जो काम के क्षेत्र में भी उभर कर आए हैं, चीजों को ठीक से करते रहे हैं। जॉन आप तो उसके दोस्त हैं यदि आप उसे बाहर खींचने की कोशिश करते हैं, एक दूसरे को यह बता कर मदद करने की कोशिश करें की, “आपा न खोएं, गुस्सा न हों, सब ठीक हो जाएगा। इसे सरलता में लो ।” इसके विपरीत यदि कोई व्यक्ति दुसरे व्यक्ति को कोई बात कहता है , तो दूसरा व्यक्ति और भी अधिक जोर से जबाव देता है। देखिये, मुख्य बात यह है की ,आप सभी को अभी तक अपने आत्मसम्मान का पता नहीं है, क्योंकि, यदि आप एक मान लें की, शाही परिवार में पैदा हुए हैं, तो आपको एक प्रकार का कृत्रिम आत्म-सम्मान रहा होगा। अब आप उस तरह के परिवार में पैदा नहीं हुए हैं, आप सामान्य लोग साधारण परिवार हैं। तो क्या? आप कहीं भी पैदा हो सकते हैं। ईसा-मसीह का जन्म एक अस्तबल में हुआ था। तो क्या? उन्होंने कभी अपना आत्म-सम्मान नहीं खोया। सहज योगी इस तरह कैसे लड़ सकते हैं? मैंने इसे पसंद नहीं किया, कुली को बताएं, और शांत रहें और विनम्र रहें। भगवान के नियमों को अपने हाथ में मत लो। लडो मत। ठीक है?

पीटर कहाँ है? वह कहां गया है? सब अहंकार। वह कहां है, पीटर?

सहज योगी: मां, वह किसी ना किसी बात के लिए के ऊपर गया है।

श्री माताजी: जरा उसे बुलाओ। उसे यहाँ ले आओ। बहुत अहंकारी व्यक्ति है। वह बहुत जल्द प्रचलन से बाहर हो जाएगा। जब लोग ध्यान कर रहे हैं उस समय वह ऊपर क्या कर रहा है? और वह लोगों का नेता बनना चाहता है!

पीटर पियर्स: हाँ माँ?

श्री माताजी: बैठो, और लोगों का हाथ थामो! और आपको हर दिन जल क्रिया करना चाहिए, और जब आप ध्यान कर रहे हों…बेहतर हो तुम यहाँ बैठो । और उन सभी को, जिन्हें सहज योगी होना है और इस आश्रम में रहना है, उन्हें वहाँ हर रात पानी पैर क्रिया करना है, और ध्यान करना है! क्योंकि आपका अहंकार एक दूसरे से गुजरता है। यह संपर्क प्रभाव है, पूर्ण संदूषण है।विनम्र होने का प्रयास करें। अब इसे ले लो। इसे पास होने दो। ऐसा अति अहंकार जिसकी आप कल्पना नहीं कर सकते। देखो। इसे देखो कि? Uk Huk, huk, huk, huk ‘यह चल रहा है!

तुम बस यही कहते रहो, “माँ, आप ही हमारे अहंकार हो। आप अहंकार हैं। ” मैं हूं, तुम नहीं हो। आप कुछ भी नहीं करते|  ऐसा कहना, यह समस्या का समाधान करेगा। “हम कुछ भी नहीं करते हैं, आप सब कुछ करती हैं,” आप ऐसा कहिये, अन्यथा यह नहीं होगा। विनम्र होना। और इसीलिए कोई भावनाएं नहीं हैं, कुछ भी नहीं। बस बातें, बातें, बातें, !!! कोई भावना नहीं, कुछ उत्थान नहीं होता है।विनम्र बनो!ह्रदय से नम्र बनो।

आह, यह सब यहाँ अटक गया है। देखो? कोई अंदर आता है मैं नहीं जानती। यह सब गर्म है। देख? इसे देखो? बीमार करने वाला है, बिल्कुल। और इस प्रकार आप,एकादश रुद्र पकड़ते हैं। आप जानते हैं, जब अहंकार बहुत अधिक विकसित हो जाता है तो आप एकादश रुद्र समस्या बन जाते हैं और यह वह चीज है जो कैंसर के लिए वास्तविक जगह बनाती है।

अब इसकी चिंता न करें और ना ही सोचें कि, … जब मैंने कहा कि ‘कैंसर’ हर कोई सोचने लगता है, “क्या मुझे हो गया है?” आप में से किसी को भी नहीं हो सकता है! आप देखिए, मुझे पता है कि आप हर समय क्या सोचते हैं: असली मूर्खतापूर्ण चीजें, कुछ भी समझदारी का नहीं! यदि आपको कैंसर है, तो क्या आपको लगता है कि मैं शांति से आराम करूंगी?

हम्म, देखते हैं? देखें कि मस्तिष्क में कितना अहंकार और बेकार गतिविधि और मस्तिष्क में इस भयानक अहंकार का धुआं। ऐसा बहुत कुछ, अभी भी चिपका हुआ है।देखिये आपका जिगर पोषित है।

आपको जो समर्पण करना है वह आपका अहंकार है, मतलब आपकी सोच। यदि आप सोच रहे हैं, तो अपनी आँखें खोलो और कहो “मैं क्षमा करता हूँ, मैं क्षमा करता हूँ”। आप देखें, अपने विचारों को बेअसर करने के लिए, मंत्रों का उपयोग करें। “ओह माँ, मैं माफ़ करता हूँ” भले ही आप मेरा नाम भी लेते हैं, यह आपके लिए पर्याप्त हो सकता है… आपके द्वारा नाम लेना बहुत अच्छा है, इससे आपको बहुत मदद मिलती है। हम्म, आपके अहंकार को मारने का सबसे अच्छा तरीका, जो मुझे लगता है,  मेरा नाम लेना! अहा, मैं अब देख सकती हूं! आप देखिये? सूक्ष्म तरीके से,  हर कोई सोचता है कि, “माताजी भी हमारी तरह हैं, इसलिए उनका नाम क्यों लिया जाए?”

मैं तुम्हें बताती हूं,मेरा नाम लो, तुम अपने अहंकार को बहुत अच्छी तरह से समाप्त कर सकते हो। मैं आप की तरह नहीं हूं, मैं बहुत अलग हूं, बिल्कुल अलग व्यक्ति हूं। मैं आपको बार-बार बता रही हूं: आप मुझसे भ्रमित नहीं हों। आप समझें? मैं वास्तव में एक भ्रम हूँ, आपके लिए पूर्ण भ्रम, आप मुझे समझ नहीं सकते। बस मेरा नाम ले लो और यह काम करेगा। बेहतर? अभी भी यहाँ पर चिपके हुए हैं! अब यह बेहतर है, क्या नहीं है आह, बेहतर? सारी गर्मी बाहर निकल रही है। यह बेहतर है। आंखों की रोशनी में सुधार होगा।

अब बाईं ओर, यह बाईं ओर अधिक आ रहा है। हम्म 

ईश्वर आपको आशीर्वाद देते हैं।

बस एक चीज जो आपको करनी चाहिए: यह देखना कि आप सोचते नहीं हैं।

क्या बाहर बहुत ठंड है?

योगी: हाँ माँ

श्री माताजी: क्या आपको यकीन है? फिलिप, बाला सिंगापुर कब जा रहा है?

फिलिप: मुझे पक्का पता नहीं है माँ।

श्री माताजी: आप पता लगा लें। ठीक है? मेरे जाने से पहले उसे फोन करने को कहें क्योंकि मुझे उसे उन लोगों के पते देने हैं, जिनसे उसे सिंगापुर में मिलना है।

फिलिप: हाँ

श्री माताजी: क्योंकि मैं गुरुवार को चली जाऊंगी। उससे कहो कि आ कर 

और उससे पहले मुझे मिल ले।

फिलिप: इस गुरुवार से पहले?

श्री माताजी: हम्म 

फिलिप : हाँ माँ

श्री माताजी: इसका मतलब बुधवार या कुछ और होना चाहिए अगर वह आ सके। हा। देखो? यह शुद्ध हो रहा है। बेहतर?

देखिये, स्वयम को दोषी न ठहराएँ, प्रफुल्लता होनी चाहिए कि यह साफ हो रहा है …|