दिवाली पूजा

(England)


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दिवाली पूजा चेल्शम रोड आश्रम, लंदन (यूके) – 1 नवंबर, 1981

आज मैंने आपको लक्ष्मी सिद्धांत के महत्व और तीन प्रक्रियाओं के बारे में बताया जिनसे हम गुजरते है । पहला गृह लक्ष्मी है। असल में,अधिकतर यह चंद्रमा के तेरहवें दिन मनाया जाता है, जहां वे कहते हैं कि गृहिणी को कुछ उपहार देना चाहिए। और सबसे अच्छी चीज जो है वह एक बर्तन है। तो लोग उसे कुछ बर्तन देते हैं, वास्तव में यह एक बहुत ही पारस्परिक बात है, क्योंकि यदि आप एक बर्तन देते हैं, तो उसे आपके लिए खाना बनाना चाहिए। यह सुझाव देने का एक बहुत ही प्यारा तरीका है कि आप हमारे लिए कुछ पकाइये।

तब चौदहवा दिन बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि उस दिन देवी शक्ति के रूप में है, क्योंकि यह कार्तिकेय थे जिन्होंने नरकासुर, शैतान को मार डाला था। और वह सबसे बुरों में से एक था, जिसे मारा न जा सका था। इसलिए शिव और पार्वती, इस शक्तिशाली शक्तिपुत्र को उत्पन्न करने के लिए, इस विशेष उद्देश्य के लिए विवाहित हुए थे, जिसका मतलब वह शक्ति का पुत्र है, जिसे कार्तिकेय कहा जाता है। और वह सिर्फ इस भयानक शैतान जिसे नरकासुर कह जाता था , को मारने के लिए पैदा हुआ था। और उसने मारा। वह दिन है, चौदहवें दिन। यह उस दिन हैलोवीन की तरह कुछ है। क्योंकि वह दिन है जब उन्होंने नरक के द्वार खोले और सभी शैतानों को नरक में डाल दिया। और यही कारण है कि उस दिन सुबह को जितना संभव हो सके आराम करना पड़ता है। जिससे सभी शैतानों को अच्छी तरह से रखा जा सके क्योंकि उनमें से कुछ अभी भी चारों ओर लटक रहे हो सकते हैं। उन्हें बाहर निकल जाने की अनुमति दे देना बेहतर है। मेरा मतलब है कि आप इस क्षेत्र में उनके अस्तित्व को महसूस नहीं करते हैं। लेकिन यदि आप अवचेतन क्षेत्र या सामूहिक अवचेतन के क्षेत्र में होते, तो लोग कुछ आत्माओं को भी देखते हैं और उनके अस्तित्व को भी महसूस कर सकते हैं, वे काले धब्बे और वह सब देखते हैं।

तो वह दिन बहुत खतरनाक है, लेकिन क्योंकि नरकासुर मारा गया था , लोग उत्सव मनाते थे। वह उत्सव अगले दिन व्यक्त किया जाता है, जो उस दिन दिवाली का दिन है। यही वह दिन है जब वे लक्ष्मी की भी पूजा करते हैं, क्योंकि वे सोचते हैं कि उस दिन लक्ष्मी का जन्म समुद्र से इस धरती पर हुआ था जैसा कि मैंने आपको पिछली बार बताया था।

तब नए साल का दिन बाद में आता है, क्योंकि उत्तर में भारत में, यही वह समय है जब लोग अपनी फसलों को पूरा करते हैं और उन्होंने पाया कि नये साल का जश्न मनाने के लिए बहुत अच्छा दिन था। और, यह वास्तव में, और अधिकतर, पुरे भारत में एक सामाजिक बात है, हमें इसका उपयोग करना आवश्यक नहीं है, जो हमें उपयुक्त लगता है वह करें । आपका अपना नया साल हो सकता है। क्योंकि दक्षिण में, महाराष्ट्र में कहें कि उनके पास एक और नया साल है, जैसा कि मैंने आपको बताया था कि शालीवाहन ने अपने वंश में एक और कैलेंडर शुरू किया था और वे इसे मनाते हैं।

तो इन सब बातों में कुछ भी कठोर नियम नहीं है, किसी को भी बस पता होना चाहिए। कुछ भी कठोर नहीं है। कठोरता अज्ञान से आती है। यह सब आपकी खुशी और प्रसन्नता के लिए है। संपूर्ण त्यौहार प्रणाली आपकी खुशी के लिए है, न कि समय या तिथि की खुशी के लिए। यह आपके लिए है, इसलिए इसे आपकी जरूरतों और समझ के अनुसार समायोज्य होना चाहिए। और आपके राष्ट्रीय तरीके के अनुसार ,जहाँ आप रहते हैं। उन्हें किसी विशेष प्रकार की संस्कृति, किसी विशेष प्रकार के विचारों के लिए कोई लत नहीं होना चाहिए। यह सब आपके लिए है। ये सभी त्यौहार आपके लिए हैं, न कि देवताओं के लिए। उनके पास ये त्यौहार नहीं हैं। यह केवल आपके लिए है कि ये त्यौहार हैं। और जब आप उन्हें मनाते हैं, यह केवल आपकी खुशी और आपकी प्रसन्नता के लिए होता है। और इस लिएआपको इस तरह से जश्न मनाना चाहिए जिससे आपको सबसे ज्यादा खुशी मिलती है। और त्यौहार, दुनिया के सभी त्यौहार मनाए जाने चाहिए। जितना अधिक आप उत्सव प्रिय हैं, उतना ही आनंद होगा। मौका क्यो खोते है, आप देखे। तो सहज योगी के रूप में आप जश्न मना सकते हैं, आप खुद को [अनक्लेयर: जॉन “यॉन” या “लॉन” की तरह लगता है] में नहीं डाल सकते हैं।

तो एक सहज योगी के रूप में आप अब किसी भी विशेष जाति या समुदाय से संबंधित नहीं हैं, आप सार्वभौमिक जाति के हैं। एक बार जब आप सार्वभौमिक चीज़ से संबंधित हो जाते हैं, तो आप सभी धर्मों के सभी त्योहारों का जश्न मना सकते हैं। और इसमें सबसे अच्छा है। पूरे साल, आप सभी त्योहारों का जश्न मना सकते हैं। उनके बारे में जानें, जितना अधिक आप जानते हैं, उतना बेहतर होगा। और जो भी क्षेत्र और देश और संस्कृतियों में आप जो भी प्रकार का उपयोग करते हैं, जो भी आप उपयोग करते हैं, सभी प्रकार की मिठाइयां हैं। और इस तरह हमें और अधिक उत्सव प्रिय होना है।

अब आखिरी दिन बहुत महत्वपूर्ण है, यह एक बहुत ही सार्वभौमिक दिन है, जिसे भाई दुज कहा जाता है, इस दिन, या वे इसे मराठी वाओ द्विजम, विभिन्न नाम। भाइयों और बहनों का दिन। अब भाइयों और बहनों के रिश्ते बहुत मजबूत होना चाहिए। और उस रिश्ते की शुद्धता को बनाए रखा जाना है। यह जरूरी नहीं है कि आपको भाइयों और बहनों के रूप में पैदा होना चाहिए, जरूरी नहीं। लेकिन आप पैदा हुए हैं, क्योंकि यदि आप आत्मसाक्षात्कारी हैं तो आप भाइयों और बहनों के रूप में ही पैदा हुए हैं। इसलिए सहज योग के समाज में शुद्धता बनाए रखा जाना चाहिए। बहुत महत्वपूर्ण है कि हमें इस स्थिति को विकसित करने की कोशिश करनी चाहिए कि भाई और बहन कुछ बहुत शुद्ध हैं। उनके रिश्ते बहुत शुद्ध हैं। और उन्हें बिल्कुल भी चुनौती नहीं दी जानी चाहिए। यह इतना है कि यदि आप किसी को अपने भाई को बुलाते हैं, तो वह आपका भाई है और जितना अधिक आप इस रिश्ते को विकसित करेंगे उतना ही बेहतर होगा आपका विशुद्ध चक्र। क्योंकि बांयी विशुद्ध अर्थात भगवान के साथ एक भाई के रूप में या देवी के साथ एक बहन के रूप में संबंध है।

तो जैसा कि आप जानते हैं, श्रीकृष्ण की बहन, नंद के घर पैदा हुई थी और श्री कृष्ण स्वयं जेल में पैदा हुए थे। तो एक अदल-बदल हुआ था। उन्हें उसे अपनी जगह में अदल- बदल करना पड़ा। और फिर कृष्णा के चाचा कंस ने उस लड़की को मारने की कोशिश की, वह आकाश में गई और बिजली की तरह, उसने कहा कि “तुमको मारने वाला” अभी भी गोकुल में रह रहा है, अभी भी वहां है।” तो यह बिजली की चमक जो हम देखते हैं, उस शक्ति की प्रतिनिधि है , जिसे हम विष्णुमाया कहते हैं, बहन है। यदि महिलाओं के प्रति आपकी भावनाएं बहन समान अच्छी और मजबूत हैं, तो आपका बायां विशुद्ध बहुत अच्छा होगा।

इसमें कई अन्य गुण हैं। उदाहरण के लिए एक व्यक्ति, जिसकी बहुत अच्छी बाएं विशुद्धि है, एक बहुत ही आत्मविश्वासी व्यक्ति है। इतना ही नहीं, लेकिन जो कुछ भी वह कहता है वह सच हो जाता है। गलती से भी, वह कुछ कहता है, यह सच हो जाता है। यह एक बहुत शक्तिशाली केंद्र है जो बायां विशुद्धि है। ऐसा व्यक्ति, जब भी वह बात करता है, कहता है, किसी चीज की आलोचना करता है या कुछ काटता है या किसी चीज के खिलाफ होता है, तो उसके पास वह सब कुछ नष्ट करने की शक्ति है, जो वह नहीं चाहता है। ऐसा लगता है, आप कह सकते हैं, क्राइस्ट, उनके बाएं विशुद्धी को मैरी मगदलेन के साथ उनके रिश्ते के माध्यम से व्यक्त किया जाता है। जब वह खड़े हुए और कहा कि “जिन लोगों ने कोई पाप नहीं किया है, वे उसे पत्थर मार सकते हैं,” तो यह उनकी शक्ति है। लोगों के पाप ने उन्हें पूरी तरह नष्ट कर दिया; वे समाप्त हो गए, क्योंकि पाप वहां था। और पाप बायीं विशुद्धी का था। कोई शुद्धता नहीं थी। और जब कोई शुद्धता नहीं होती है, तो वह व्यक्ति जो शुद्ध है वह जब ऐसी बात कहता है, तब इन सभी लोगों ने अपनी शक्तियां खो दीं; वे पत्थर भी नहीं मार सके।

जब उसकी बहन का जन्म द्रौपदी के रूप में हुआ था और यह उस स्थान के बहुत पास था जहां हम गये थे,” वणी,” आप जानते हैं, जहां हमने देखा था। , गेविन तो क्या आपको याद है जब आप नागपुर जा रहे थे? वणी के पास वह पैदा हुई थी, वह जगह और उसमें एक बहुत बड़ा मंदिर है। उन्हें द्रौपदी कहा जाता था और आप जानते हैं कि कैसे श्री कृष्ण ने उसकी पवित्रता को बचाने की कोशिश की। अब मैंने सुना है, मैरी मगदलीन और क्रिस्ट के खिलाफ और सभी प्रकार की चीजों के खिलाफ बातें कहने की कोशिश कर रहे हैं। यह हमारे दिमाग और हमारी नैतिकता के विलुप्त होने का संकेत है कि हम किसी भी रिश्ते में शुद्धता को नहीं देख पाते हैं। हम किसी भी रिश्ते में कोई शुद्धता नहीं देख सकते हैं

इसलिए इस बारे में हम सहज योगियों को और अधिक विकसित होना हैं। इसके बजाय, मुझे लगता है , विशेष रूप से पश्चिम में, लोग, यह सोचने की कोशिश करते हैं कि हम किसके साथ शादी करने जा रहे हैं। ये संबंध स्थापित हैं, गलत है। विवाह आयोजित करने और रोमांस के इन खेलों को खेलने और उसके लिए खेलने की कोई जरूरत नहीं है। अगर शादी होनी है, तो यह हो जायेगी । लेकिन वातावरण खराब मत करो। ऐसे कुछ लोग हैं जो नाई की तरह हैं, आपके विवाहों को व्यवस्थित करने का प्रयास करते हैं, और इस का विवाह उसके साथ करने की व्यवस्था करने में बहुत गर्व करते हैं ।यह एक अवांछनीय बात है; ऐसा नहीं करना चाहिए। इन चीजों,जैसे विवाहों का आयोजन करना, में कोई फायदा नहीं है, । जब शादी का समय आता है, तभी यह होती है।

अब मोहम्मद साहिब के समय एक बड़ा सवाल उठ गया, क्योंकि बहुत कम पुरुष और कई उम्र की सभी महिलाएं थीं। और उन्हें नहीं पता था कि क्या करना है, इन लड़कियों को कैसे बचाया जाए| क्योंकि युद्ध में इतने सारे लोग मारे गए थे। तो फिर उन्होंने पूछा, “इस समय में अब इस परिस्थिति में क्या करना है, जब ऐसी आपदा है और इतनी सारी महिलाएं हैं, और बहुत कम पुरुष हैं?”

फिर उन्होंने कहा, “ठीक है, आप चार या पांच महिलाओं से शादी कर सकते हैं और आप किसी भी आयु वर्ग में शादी कर सकते हैं।”क्योंकि अगर आपको साथ रहना है धार्मिक तरीके से , तो शादी, सामूहिक स्वीकृति ,लेकिन शादि के बिना नहीं| तो उसने कहा, “ठीक है, आप पांच बार भी शादी कर सकते हैं, आप शादी कर सकते हैं, लेकिन शादी के बिना, आप साथ जी नहीं सकते।”और यही कारण है कि, वह विशेष था कि प्रत्येक व्यक्ति की शादी होनी चाहिए और शादी के बिना कोई रिश्ता नहीं होना चाहिए,यह पाप था। इसके बजाए मुस्लिम सोचते हैं कि पांच लोगों से शादी करने का अधिकार है। मेरा मतलब है, जब पुरुष अधिक होते हैं और महिलाएं कम होती हैं,तब यह गलत बात है। आपको समाधान पता लगाना है। और उस समय तो बहनों और भाइयों के बीच संबंधों को भी सीमित करना पड़ा था, क्योंकि एक बड़ी समस्या थी।,तो उस समय ,उसने कहा, “ठीक है, उसी माता-पिता से पैदा हुए बच्चे शादी नहीं कर सकते हैं, लेकिन चचेरे शादी कर सकते हैं,” ।अब वह समय बदल गया है, ठीक है, यह वह समय नहीं है। हम युद्ध पर नहीं हैं, ऐसा कुछ भी नहीं हो रहा है। ऐसी कोई समस्या नहीं है। तो आइए अब भाइयों और बहनों के हमारे शुद्ध रिश्ते को विकसित करें। दरअसल, पहली बार जब हमारा यह दिवाली समारोह था, मैंने लोगों से खुद के लिए एक बहन को खोजने के लिए कहा। एक को खोजने के लिए, प्रत्येक सज्जन के पास एक बहन होनी चाहिए। और फिर वह दिन है, मैंने कहा, आइए हम इस तरह से शुरू करें कि अगली बार जब हम राखी पूर्णिमा नामक दूसरे दिन मिलते हैं, तो आप हाथ में राखी बांधते हैं, वही भाई और बहन।

भारत में भी हमने ऐसा किया और यह बहुत अच्छा काम किया। लेकिन वहां संबंध इतने मजबूत हैं एक बार धूमल ने मेरे ख्याल से राउल बाई को बाँधा , आप देखे, और अब अगर मैं राउलबाई से कुछ भी कहती हूं, तो वह पसंद नहीं करता है। यह उस सीमा तक बढ़ गया।आप जानते हैं यह बहुत प्यारा है । और यहां तक कि धूमल की पत्नी, राउलबाई को एक बड़ी बहन के रूप में मानती है। यह बहुत प्यारा है। जैसे कि कई रिश्तों की स्थापना की जाती है। और अगले साल मुझे लगता है कि राउलबाई हमारे ट्रस्टी में से एक की बहन बन गई, जो वहां और नहीं थी। और वह हमेशा उस रिश्ते को निभाती है, और वे भी, मेरा मतलब है कल्पना करो। पूरी बात यह है कि, वह रिश्ता इतना खास, बहुत करीब और शुद्ध है।

और इस तरह का रिश्ता किसी महिला, किसी भी औरत या किसी मित्र के साथ विकसित होना चाहिए यदि आप रखना चाहते हैं। हर किसी को याद रखना चाहिए कि वह एक निश्चित सीमा को पार नहीं कर सकता है, वहां एक मर्यादा होना चाहिए। अन्यथा वे भाई – बहन बन जाएंगे और फिर वे शादी करें, यह संभव नहीं है। तो हमें सीमाएं रखना है; यह बहुत महत्वपूर्ण है। सहज योग में हमें मर्यादाए और सीमाएं रखना होगीं। और उनमें से एक यह है: कि जब आप किसी को भाई या बहन कहते हैं, तो वह बिल्कुल शुद्ध संबंध है। थोड़ा और हम इसे समझेंगे, जैसा कि मैंने आपको पहले बताया है, किसि के भी साथ संबंध, कि आप कहें, पति के छोटे भाई इस तरह हैं कि, वे आपके छोटे भाइयों की तरह हैं, उनमें से सभी, पति के छोटे भाई या अपने पतियों की तुलना में छोटे सहज योगी हैं। दूसरी तरफ ,सभी महिलाओं के लिए यह है कि, हम कह सकते हैं, सभी पुरुषों की पत्नियां, बड़ी महिलाएं, आपकी पत्नियों के लिए,बहनों, बड़ी बहनों की तरह हैं।

मेरा मतलब है कि यह रिश्ता बहुत प्यारा है और आपको यह निश्चित समझ देता है कि किसके साथ कितनी दूरी रखी जाती है, जिसके साथ स्वतंत्र होना चाहिए और किसके साथ दूरी । और यह इस तरह के एक सुंदर तरीके से बनाए रखा जाना चाहिए कि यह शुद्धता दूषित नहीं हो। आप शुद्ध मानकों को मानते हैं।

यह सहज योग का पोषण है, यह आपके विकास, शुद्धता का पोषण है। शुद्धता हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण बात है, हर तरह से शुद्धता। यदि आप शुद्ध हैं, तो आप नकली/ झूठा कुछ भी नहीं करेंगे, यानी, हम कह सकते हैं, यह शुद्ध नहीं है।

तो सबसे पहले आप स्वयं शुद्ध हो जाएंगे और आप शुद्धता स्वीकार करेंगे, आप शुद्धता की सराहना करेंगे, आप शुद्धता से बने रहेंगे। कोई भी अशुद्धता आपके साथ सहयोग नहीं करेगी या आपके साथ समझौता करने का प्रयास नहीं करेगी। यही कारण है कि शुद्धता आपकी मां का नाम है। आप जानते हैं कि मेरा नाम शुद्धता है। और यह शुद्धता ऐसी है कि यह सबकुछ ठीक करती है, यह सिर्फ शुद्ध करती है। शुद्धता ऐसी होनी चाहिए कि इसे शुद्ध करना चाहिए, अन्यथा शुद्धता का कोई मतलब नहीं है। उदाहरण के लिए, एक साबुन शुद्ध करता है, ठीक है? लेकिन आप साबुन को शुद्ध नहीं करते हैं। क्या आप साबुन साफ करते हैं? मेरा मतलब है कि कुछ पागल लोग हो सकते हैं। मैं कुछ लोगों को जानती हूं, जो नल और पानी भी धोते हैं। और, यही कारण है कि यह पानी, जो शोधक है, पानी शोधक है, पानी हमें शारीरिक रूप से शुद्ध करता है। और हमारे जहर भी हमारे यकृत से पानी द्वारा बाहर निकलते हैं। सभी समस्याओं को दूर करने में पानी बहुत ही महत्वपूर्ण तत्व है। आप इतनी सारी चीजों के लिए पानी का उपयोग करते हैं; आप जानते हैं कि यह कैसे काम करता है।

तो यह लक्ष्मी, जो शुद्धिकरण है, पानी से पैदा हुई थी। यही कारण है कि, उसे मैरी पुकारा गया था, जैसा मैंने आपको बताया था। और मुझे नीरा भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है पानी से पैदा हुआ। इसलिए व्यक्ति को यह समझना है कि, आज का संदेश यह है कि, हम मन में शुद्धता बसाते हैं। हमें खुद को धोखा नहीं देना चाहिए। धोखा देना आसान है, लेकिन हमें अपनी खुद की उपलब्धि, अपनी सजावट, अपनी सुंदरता के रूप में स्वयम में पवित्रता बसाना चाहिए| इसे बहुत मेहनत वाली या कठिन बात ना समझते हुए बहुत ही आनंद और प्रसन्नता के साथ हासिल करना चाहिए। जैसे हम स्नान करके साफ़ और प्रस्तुत होने लायक बनते है | इसी तरह हमें अपने विचारों को साफ करने की कोशिश करनी चाहिए। बस उन् पर ध्यान देकर, हम उन्हें साफ कर सकते हैं। विचारों को साफ किया जाना चाहिए। सबसे पहले तो विचार ही क्यों हों? लेकिन यहां तक कि यदि आपको विचार हों , तो स्वच्छ और शुद्ध विचार हों। यहां तक कि यदि आपको विचार भी हों , तो अहंकार, आक्रामकता या भय से भरे विचार नहीं कुछ लोग सोचते हैं कि यदि उनके विचारों में डर हैं तो यह एक बहुत अच्छी बात है; “ओह, मैं डर गया, मुझे डर है।” यह अशुद्धता है। आपको क्यों डरना चाहिए ? इसका मतलब है कि आपका बायां विशुद्धी पकड़ रहा है। किसी भी प्रकार का डर रखने की आवश्यकता नहीं है; किसी भी तरह का डर रखने की जरूरत नहीं है। अगर आप डरा हुआ रहना चाहते है, तो इसका मतलब है कि आपके साथ कुछ गड़बड़ है। अगर आप भगवान् को सबसे ऊपर मानते है तो आप एक आत्मसाक्षात्कारी हैं, और भगवान तुम्हारी देखभाल करते हैं, वह तुम्हारे पिता है, वह अपने द्वार तुम्हारे लिए खोलता है, डरने की क्या बात है? बहुत से लोग इस तरह सोचते हैं कि यदि आप डरे हुए है, तो आप विनम्र हैं। नम्रता, एक डरे हुए व्यक्ति से अलग, गुण है। यह बिल्कुल अलग बात है, इसका नम्रता से कोई लेना-देना नहीं है। तो विनम्र होना अलग है और भयभीत होना अलग है। सहज योगियों के लिए उनके स्पंदनात्मक जागरूकता के माध्यम से पता लगाना बहुत आसान है कि डर क्या है और विनम्रता क्या है। विनम्रता आपको चैतन्य लहरी देगी और डर आपकी पूरी बायीं तरफ पकड़ लेगा।

तो हमारे दिमाग का शुद्धिकरण खुद को समझने की कुछ पद्धतियों से आता है। सबसे पहले यह समझना है कि, हम एक परिवार में,समाज में तथाकथित धार्मिक संप्रदाय में, पैदा हुए हैं। तो इन सभी नियतियो ने हमें कुछ निश्चित अशुद्धियों में डाल दिया है जो हमें अहंकार, प्रतिअहन्कार, कुछ भी दे सकता है ,और हमें दे दिया है। तो इसे शुद्ध और सरल रखने के लिए: जितना संभव हो उतना पानी तत्व अपना लो। यह दोनों तरीकों से मदद करता है, यह अहंकार में मदद करता है, यह प्रतिअहन्कार में भी मदद करता है। पानी के तत्व अपना लो। और यही लक्ष्मी है। लक्ष्मी वह है जो आपको महालक्ष्मी तत्व देता है।महालक्ष्मी का सिद्धांत केवल लक्ष्मी से आता है। और यह लक्ष्मी प्रक्रिया के माध्यम से शुद्धि के बाद होता है।

क्राइस्ट ने कहा है, “यदि आप चाहें तो, मैं आपको सोना, सोने के अंग दूँ, तो आप इसे पा सकते हैं। लेकिन,केवल वही भगवान के राज्य में प्रवेश करेंगे जो लोग मुझसे प्यार करते हैं । और मैं उनके साथ खाऊंगा, “जिसका मतलब है कि केवल वे जो शुद्ध हैं, मैं उनके साथ खाऊंगा। मैं उन लोगों के साथ नहीं खाऊंगा, जो अशुद्ध हैं। वह ऐसे थे, मेरा मतलब है, हर, सभी, अवतार इस बारे में जानते हैं, कि उन्हें शुद्ध लोगों के साथ रहना होगा और उन्हें शुद्ध लोगों की मदद करनी होगी। लेकिन उन्होंने इतना स्पष्ट रूप से कहा कि यदि आप लक्ष्मी चाहते हैं, तो आप इसे प्राप्त कर सकते हैं, वह पैसा है। लेकिन यह महालक्ष्मी नहीं है| इसलिए लक्ष्मी से महालक्ष्मी अवस्था तक। आपको पहले से ही आत्मसाक्षात्कार मिल गया है, आप नहीं जानते कि आपको पहले से ही यह कितना मिला है। आपके पास,आपके अन्दर पहले से ही महालक्ष्मी सिद्धांत है। और महालक्ष्मी सिद्धांत क्या है? यही तो मुख्य बात है।

क्या मैं इस सवाल से पूछ सकती हूं?

आपके भीतर महालक्ष्मी सिद्धांत क्या है?

एक सहज योगी: यह सब आत्मा के लिए है।

श्री माताजी: नहीं, नहीं। लेकिन आपके पास शक्ति है। आपको आपके भीतर महालक्ष्मी की शक्तियां मिली हैं, क्या आप जानते हैं?

एक सहज योगी: यह आपको खुशी देता है।

श्री माताजी: खुशी? नहीं नहीं नहीं।

एक सहज योगी: आत्मसाक्षात्कार देने का आनंद।

श्री माताजी: अभी भी, आगे बढ़ें, थोड़ा और अधिक।

खुशी एक शक्ति नहीं है। खुशी वह है जो आप आनंद लेते हैं। लेकिन आपके पास महालक्ष्मी की शक्ति है।

एक सहज योगी: स्थिर शक्ति।

श्री माताजी: यह कोई शक्ति नहीं है। शक्ति का मतलब है, आपके पास कुछ करने की शक्ति है।

एक योगी से जवाब: सहज योग फैलाने की शक्ति।

श्री माताजी: यह अस्पष्ट है,एक विशेष रूप बताएं । एक सहज योगी: बोध देने की शक्ति।

एक सहज योगी: विकसित होना।

श्री माताजी: लेकिन विकसित होना स्वयम का है। शक्ति वह है जो आप दूसरों के साथ करते हैं।पूरी बात है शुद्धिकरण ,जैसा की मैंने अभी आपको बताया है। आपके पास शुद्ध करने की शक्ति है। आप लोगों को कैसे स्वस्थ करते हो? उन्हें शुद्ध करके। ठीक है? अब सोचें कि आप दूसरों को शुद्ध कैसे करते हैं?,दूसरों को बात करके आप उन्हें शुद्ध कर सकते हैं। दूसरों को छूकर, आप उन्हें शुद्ध कर सकते हैं। उन्हें देखकर, आप उन्हें शुद्ध कर सकते हैं। एक व्यक्ति जो एक बोध प्राप्त आत्मा है, पूरे वातावरण को शुद्ध करता है। वातावरण शुद्ध है। चूंकि मैं आई हूं, यह काफी गर्म रहा है। आप सबकुछ शुद्ध करते हैं। आप इस प्रकाश को शुद्ध करते हैं, क्या आपने इस पर ध्यान दिया हैं? तुम प्रकाश बन गए हो

अब आपके पास अन्य शक्तियां क्या हैं?

एक सहज योगी: कुंडलिनी को उठाना ।

श्री माताजी: यह जागृति है। देखें कुंडलिनी की कई शक्तियां हैं, कई गुना है। आप स्वयं को, दूसरों और स्वयं को शुद्ध करते हैं। कुछ और शक्तियां हैं।

अब साथ आओ, चलो इसे पा लें। आप सभी में वे शक्तियां हैं और आप उनसे अवगत नहीं हैं यह इसका सबसे अच्छी खूबी है। इसे नहीं समझ सकते । अब चलो इसे पा लें ।

एक सहज योगी: समय पर शक्ति। खुद को व्यवस्थित करने के लिए समय व्यवस्थित करना।

श्री माताजी: यह महालक्ष्मी की शक्ति नहीं है। यह एक अन्य है जो मैं आपको बताउंगी कि वह कौन करता है

एक सहज योगी: संतुलन। यह अहंकार और प्रतिअहंकार के बीच संतुलन देता है?

श्री माताजी: यह सच है। वह उनमें से एक है। लेकिन वह गुरु शक्ति है। वह गुरु की शक्ति है। संतुलन गुरु से आता है। देखें महालक्ष्मी पानी है, तो अब तुम मुझे बताओ।

एक सहज योगी: सफाई करने के लिए

श्री माताजी: अब सब कुछ किया गया है, सफाई पूरी हो गई है। पानी पानी है।

एक सहज योगी: स्वयं को तृप्त करना ।

एक सहज योगी: संतुष्टि।

एक सहजा योगी: संतुष्ट।

श्री माताजी: अब उस भाग पर आ रहे हैं। यह प्यास बुझाता है, आध्यात्मिक प्यास। आप लोगों की आध्यात्मिक प्यास बुझा सकते हैं, जबरदस्त शक्ति है, क्योंकि जब आप बोध देते हैं, और हो जाता है , खोज पूरी हो जाती है। ठीक है?

फिर एक और। अब साथ आओ। दूसरी शक्ति क्या है?

पानी के बारे में सोचें – पोषण –

आप पोषण करते हैं। आप अपनी शक्ति के माध्यम से लोगों को आध्यात्मिक पोषण देते हैं; यहां तक कि यदि आप वहां खड़े हैं, तो आप दूसरों को पोषण दे रहे हैं।

फिर यह एक सॉल्वैंट है, आप उनके अहंकार को एवं प्रतिअहन्कार को विघटित कर देते हैं। ये सभी शक्तियां बोध प्राप्ति के बाद आपकी हैं। जरा इसके बारे में विचार तो करो । और क्या?

एक सहज योगी: दिव्यता।

श्री माताजी: यह बहुत अस्पष्ट है क्योंकि दिव्यता है परन्तु इसे पानी से कैसे जोड़ना है? लोग इसे समझ नहीं पाएंगे, इसलिए आइए इसे दूसरे तरीके से रखें। यह क्या है?

एक सहज योगी: लोगों को ठंडा करने के लिऐ|

श्री माताजी: आप एक शांत व्यक्ति बन जाते हैं। बहुत अच्छा -( हंसी )- बहुत अच्छा। आप शांत, शांत व्यक्तित्व बन जाते हैं। आपके पास शीतलन शक्ति है। बहुत अच्छा, और क्या?

एक सहज योगी: आप दूसरों को ले जाते हैं। आप दूसरों को ढो सकते हैं।

श्री माताजी: आप ढो सकते है, बहुत आराम से और उनमें से कुछ को डूबा भी सकते हैं। – हंसी-

प्यार के समुद्र में, प्यार में डूब गया, ठीक है? लेकिन आप उन्हें धकेल भी सकते है दो चलने वाले कूदों से, ठीक है? यह भी किया जा सकता है।

इसमें एक और बहुत अच्छी गुणवत्ता है कि पानी सबसे छोटे कण में भी प्रवेश करता है। यह जड़ों में जाता है, और यह जड़ों के माध्यम से शोषित होता है। तो महालक्ष्मी शक्ति में बस आप व्यक्ति की जड़ों को देखते हैं। आप बस जानते हैं कि समस्या कहां से आती है। आप पहुँच जाते है । असल में यह जागरूकता है, यह बुद्धि है, जो इसके सत्य भाग को ग्रहण करती हैऔर , जो प्रबुद्ध हो जाती है। और आप समझते हैं कि अब समस्या कहां है, आप बस मूल के पास जाते हैं और ग्रहण करते हैं, और आप आसानी से शोषित हो जाते हैं, आप प्रवेश कर लेते है|

आप देखते हैं, जब आप किसी व्यक्ति के पास बैठे होते हैं तो आप मुझे बताते हैं, “माँ, यह पीछे की ओर से पकड़ रही है,वह व्यक्ति नहीं जानता।” की आप प्रविष्ट हो गए हैं। आपका व्यक्तित्व उस व्यक्ति में प्रवेश कर चुका है। वह नहीं जानता। आप उस व्यक्ति में प्रवेश कर चुके हैं और आप जड़ें महसूस कर रहे हैं,की समस्या कहां है। पानी उस के अस्तित्व में बह रहा है। दिव्य जल उसके अस्तित्व में बह रहा है और उस दिव्य पानी के माध्यम से बाधा महसूस होती है और आप कह सकते हैं कि यह पकड़ रहा है वह पकड़ रहा है। तो पारगम्य, पारगम्यता।

और फिर दूसरा, पानी की चमक है। तो आपकी त्वचा चमकना शुरू होती है आपकी त्वचा बहुत चमकदार हो जाती है।

और आखिर में प्रतिबिंब है। एक व्यक्ति, जो आपको देखता है, अपने प्रतिबिंब को देखता है। वह डरता है। मेरे साथ, यह कभी-कभी होता है। मेरा इरादा, किसी के लिए भी, कुछ भी, बुरा नहीं है लेकिन लोग अनावश्यक रूप से डरते हैं क्योंकि वे अपने प्रतिबिंब को देखते हैं। इसलिए जब वे आपसे मिलते हैं तो वे अपने प्रतिबिंब को देखते हैं, वे बहुत आक्रामक हो सकते हैं क्योंकि वे अपने प्रतिबिंब को देखते हैं। वे आपके प्रति बहुत कठोर हो सकते हैं क्योंकि वे अपने प्रतिबिंब को देखते हैं और यदि यह साफ़ पानी है, तो आप उस व्यक्ति की गहराई को देखते हैं।

यदि आप साफसुथरे सहज योगी हैं तो आप गहराई को स्पष्ट रूप से महसूस करते हैं और आध्यात्मिकता के माध्यम से देख सकते हैं। ये पानी के गुण हैं। क्या यह पर्याप्त है?

और भी अधिक, विशेष रूप से मेरे शरीर में, पानी, प्रतिरोध के रूप में है क्योंकि यह चक्रों की रक्षा करता है। अगर मेरे शरीर में पानी नहीं है तो मुझे समस्या हो सकती है। तो यह प्रतिरोधक के रूप में कार्य करताहै| यह आपकी त्वचा की कोशिकाओं को राहत देता है,आप की दृष्टि को राहत देता है । आप देखते हैं, अगर आपको नमी नहीं है तो यह सब कुछ अंधकार / सूखापन में है। यह सबको शांत करता है |

पानी की अन्य प्रकार की शक्तियां होती हैं, जिन्हें हम जानते हैं कि जब यह आपकी आंखों से निकलता है तो यह आपकी करुणा, आपका प्यार, आपकी भावनाओं को व्यक्त करता है। सभी तत्वों में से जल शक्ति ही वह एकमात्र चीज है जो भावनाओं को व्यक्त करता है ।

पानी में अन्य गुण भी हैं, जो, कई लोगों को हाइड्रोस्टैटिक्स पानी, दबाव पता है। यह दबाव/प्रभाव था और एक व्यक्ति जो एक सहज योगी की तरह अस्तित्व में है, निश्चित रूप से दूसरों पर प्रभाव डालेगा। वह डालेगा नहीं, वह आक्रामक नहीं होगा, लेकिन उसका प्रभाव होगा। और सामने वाला व्यक्ति यदि प्रभावित होता है, तो वह आप से लाभ प्राप्त करेगा, , लेकिन अगर वह इसे पाना नहीं चाहता है ,तो वह दबाव और थोड़ा प्रभुत्व महसूस करेगा। आप अपने परिवार और पडोस के लोगों से अवगत हो सकते हैं, शुरुआत में वे दबाव महसूस करते हैं क्योंकि शरीर एक प्रकार का वजन प्राप्त करता है, और इस प्रकार आप का गुरु तत्व आकार लेता है । और यदि नमक है जो की गुरु तत्व है , तो यह और भी अधिक प्रभाव डालेगा।

तो आज, पानी के लिए, वास्तव में पता होना चाहिए कि पानी एक बहुत ही पवित्र चीज़ है, और हमारी पूजा में भी हम उपयोग करते है| विशेष रूप से,” यह कलश” कुंडलिनी का प्रतीक है अर्थात कुण्डलिनी पानी का बर्तन है, मतलब की जल का वाहक है और यह कुम्भ का युग है|

तो यह पानी कितना महत्वपूर्ण है और पानी दिव्य प्रेम का वाहक है, यह सबसे अच्छा वाहक है। और यह कुम्भ का युग है अर्थात कुंडलिनी दिव्य पानी से बना है। तो आज लक्ष्मी के दिन का जश्न मनाने का पूरा विचार, यह समझना है, कि हम में वह महालक्ष्मी बन गई है। इसके द्वारा हमारे पास इतनी सारी शक्तियां हैं जिनके बारे में हमें पता नहीं है, मेरा मतलब है कि हम ( हम में से कुछ)नहीं जानते कि हम बोध प्राप्त आत्मा है ।, हम नहीं जानते और हमारे पास ये शक्तियां हमारे भीतर हैं कि हम दूसरों में प्रवेश कर सकते हैं। हम दूसरों को अपनी व्यक्तित्व प्रोजेक्ट कर सकते हैं। हम पता लगा सकते हैं कि उनके साथ क्या गलत है। हम अपने बारे में पता लगा सकते हैं। हम अपने आप में जा सकते हैं, हम अंदर जा सकते हैं – हमारा पारगम्यता पानी की तरह चल रही है, हर समय बहती रहती है। और यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात है जिसे हमें अवगत होना चाहिए: हमारी शक्तियां जिन्हें हमने हासिल किया है।

तब हम खुद का सम्मान करना शुरू कर देंगे, फिर राजलक्ष्मी आती है और फिर गृहलक्ष्मी आती है और हर बात आती है , जब आत्म सम्मान,और अपनी गरिमा से जो हमने प्राप्त किया है उसके प्रति के प्रति जागरूक होते है। तो यह हमें गरिमा देता है, महालक्ष्मी हमें गरिमा देती है। और इस तरह हम मानव गरिमा के मूल्य को समझना शुरू करते हैं। tतब हमें मानवीय गरिमा का विचार होना चाहिए कि हम मानव गरिमा का अपमान नहीं कर सकते। उन लोगों की तरह जो हर समय दूसरों में दोष निकाल रहे हैं। यह मानव गरिमा के खिलाफ है। या हर समय हर किसी के जीवन को दुखी करने को लगे रहना । यह मानव गरिमा के खिलाफ है। आपको औरो के जीवन को सजाना है, आपको इसे सुंदर बनाना है, आपको उसे सुखद और प्रसन्न करना है, हर किसी को प्रसन्न करना है, हर समय दोषारोपण नहीं करते रहना है। और फिर आप पीछे पड़े रहते है तो फिर यह गृह लक्ष्मी नहीं है। वह गृहलक्ष्मी नहीं है;आप को बडबडाना नहीं चाहिए,, “ऐसा करो, वेसा करो, खड़े हो जाओ, आप क्या कर रहे हैं, इस तरफ खड़े हो जाओ, उस तरफ जाओ।” यह सब बकवास है। आप उस व्यक्ति को कार्य करने के लिए स्वतंत्र कर दें|; मानव गरिमा सबसे महत्वपूर्ण बात है। अब मानव गरिमा का सम्मान करें। और यह संभव है क्योंकि अब आपके पास महालक्ष्मी शक्ति है। जिनके पास गरिमा नहीं है, वे भी आपसे इसको प्राप्त करेंगे क्योंकि अब आप गरिमामय हैं।

यदि आपको आत्मसम्मान की भावना है, तो आप कभी भी दूसरों की गरिमा का अपमान नहीं करेंगे। छोटी, छोटी चीजों के लिए हम अपमान करते हैं: जैसे “आपने साबुन यहाँ क्यों रखा? तुमने ऐसा क्यों किया, तुमने वेसा क्यों किया? “और फिर, एक और पक्ष, यह हो सकता है ,कि दूसरों को कोई गरिमा न हो ताकि वे जानवरों की तरह काम करते जा सकें। दोनों चीजें गलत हैं। लेकिन व्यक्ति को सम्मान करना चाहिए, मैंने देखा है,सम्मान देने से सबसे अच्छे परिणाम आते है। एक बार जब आप सम्मान और प्यार करते हैं, तो यह सबसे अच्छा परिणाम है, फिर भरोसा बढ़ रहा है और किसी को विश्वास रखना चाहिए। इस तरह मानव गरिमा हर जगह विकसित होती है। हमें हर सहज योगी का सम्मान करना है क्योंकि हम सभी संत एक-दूसरे का सम्मान करने के लिए हैं, बिल्कुल सम्मान करते हैं, आप सभी संत हैं। मुझे नहीं पता कि क्या आप महसूस कर रहे हैं कि मैं क्या कह रही हूं। आप में से प्रत्येक पूरी दुनिया को बोध देने में सक्षम है, आप में से प्रत्येक। और अगर हमें एहसास होता है कि हमें अपने आप का सम्मान करना चाहिए और दूसरों का सम्मान करना चाहिए, तो आप दूसरों के बारे में बेछुट बात नहीं करेंगे, मजाक नहीं बनायेगे । और विशेष रूप से आपकी मां, आप उसके साथ स्वतंत्रता नहीं ले सकते हैं। पश्चिम में यह जानना बहुत महत्वपूर्ण है। यह बहुत महत्वपूर्ण है | इसके बारे में जानना बहुत महत्वपूर्ण है ।

एक अन्य दिन मैं किसी को उपचार कर रही थी। तो ह्यूग ने कहा कि “आप बहुत भाग्यशाली व्यक्ति हैं कि मां आपको उपचार कर रही है; आप बहुत भाग्यशाली हैं कि वह आपको कुछ बता रही है, आपको कुछ बता रही है, क्योंकि आप निष्कपट हैं, इसलिए आप स्वतंत्रता लेना शुरू कर देते हैं। “सबसे पहले आपको अपनी मां की दिव्यता का सम्मान करना चाहिए। यह बहुत महत्वपूर्ण है। और यह आपको सबसे बड़ी गरिमा देता है। मैं आपको यह बता रही हूं क्योंकि जब तक आप ऐसा नहीं करते हैं, तो आपका विकास नहीं हो सकता है। तो यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात है अब उदाहरण के लिए, आज वह या, कोई आता है, , वे एक बेहतर अच्छी पोशाक पहनेंगे। आप देखते हैं, जब आप लोग एक मंदिर जाते है तब और वे सभी गहने पहनेंगी, वे सब कुछ पहनेंगी। वह दिन है जब उन्हें अपनी सभी गरिमा पेश करनी होती है।

तो किसी को भी बिखरे हुए बाल या अस्त-व्यस्त चीजों के साथ नहीं आना चाहिए। यह अच्छी बात नहीं है क्योंकि ये सभी चीजें महत्वपूर्ण हैं, आप कैसे सम्मान करते हैं। आपको तैयार होना है और आपको प्रस्तुत करना होगा | – कुछ लोग कहते हैं कि: “ओह मैं आत्मा पर रहूंगा” आप देखे। “हमें व्यवस्थित रहने की जरूरत नहीं है क्योंकि हम आत्मा पर रहते हैं। आत्मा सबसे सुव्यवस्थित चीज है। यह सबकुछ व्यवस्थित करता है, आप देखते हैं। यह सबकुछ स्वच्छ करता है। यह उचित संश्लेषण में जाता है, उचित समन्वय, पूर्ण, सुंदर संगीत बनाया जाता है। एक अराजक व्यक्ति को आध्यात्मिक आदमी कैसे कहा जा सकता है? आप नहीं कह सकते, कोई भी जो अराजक है, उनका घर अराजक है, उनकी चीजें अराजक हैं, आपको पता होना चाहिए कि उनमें कुछ भूतिया है, बिल्कुल। लेकिन आपको दूसरे तरीके का भी नहीं होना चाहिए, कि आप इतने सटीक हैं कि आप दूसरों के सिर खाते हैं। यह एक और तरफ है। तो दोनों चीजें नहीं की जानी चाहिए। और मैं इस बिंदु पर जोर दे रही हूं क्योंकि अहंकार उन्मुख लोगों के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि वे कैसे भी बन सकते हैं।

एक दिन मैं किंग्स रोड पर जा रही थी, और मुझे आश्चर्य हुआ कि लोग किस तरह के कपड़े पहने हुए हैं, और वे सोचते हैं कि “जो भी हम पहनते हैं, हम हैं।” इसका मतलब है कि अगर आप ऐसे कपड़े पहनते हैं और जाते हैं तो आपको बंदर होना चाहिए। यदि आप इस बात पर विश्वास करते हैं तो आपको सभ्य लोग होना चाहिए, इसके बारे में रखरखाव होनी चाहिए।

तो आज हमने लक्ष्मी के विकसित हो कर महालक्ष्मी बनाने के बारे में सीखा है, लेकिन ऐसा नहीं है कि जब आप किसी रूप में विकसित होते , हैं तो बाकी खत्म हो जाता है, ऐसा नहीं है कि कुछ लोग सोचते हैं कि वे आध्यात्मिक व्यक्तित्व बन गए हैं, लक्ष्मी तत्व वहाँ नहीं हैं, यह सच नहीं है। जीवन में अपनी स्थिति के अनुसार, आप जिस तरह से रहते हैं, उसके अनुसार आपको व्यवस्थित कपडे पहने , सभ्य व्यक्ति होना चाहिए। वहां कोई पाखंड नहीं होना चाहिए। किसी भी बैकायदे की बात करके, कुछ लोगों को लगता है कि एक आदिम या कुछ भी बन कर , आप दूसरों को प्रभावित करेंगे। आप कभी प्रभावित नहीं कर सकेंगे, आप देखे। यह भिखारीयों की बाते है। आप देखे, भिखारीपन करके आप में कुछ भिखारी भूत आएंगे। इसलिए हमें भिखारी नहीं बनना हैं, न ही हमें एक प्रकार का अलबेला या छैला बनना है, लेकिन हम सहज योगी हैं, सम्मानित लोग हैं।

हमारे पास अपना आत्म सम्मान है और हम अपनी गरिमा के साथ रहते हैं, और इस तरह हम अपने भीतर शुद्ध, पारदर्शी, ईमानदार होना चाहिए, हमें अपने आप में ईमानदार, बिल्कुल ईमानदार होना चाहिए। पानी अपने आप से बहुत ईमानदार है। हम इस में जो भी डाल दें यह उसे प्रदर्शित कर देगा। इसमें कोई रंग डालें, यह दिखाएगा। यह मिटटी डालो तो मिटटी दिखायेगा। आपको अपने लिए ईमानदार, ईमानदार होना होगा। और पूरी बात एक व्यक्तित्व बनने के लिए काम करनी चाहिए जो बहुत ही सुन्दर, सुंदर, पारगम्य है, निसंदेह, लेकिन बहुत ही खूबसूरती से प्रबुद्ध , क्योंकि महालक्ष्मी तत्व स्वयं ही प्रकाशित जागरूकता है। ऐसा व्यक्ति मूर्ख नहीं हो सकता है। यदि कोई बेवकूफ है तो वह सहज योगी नहीं है, निश्चित रूप से वह नहीं है। एक बेवकूफ व्यक्ति सहज योगी नहीं हो सकता है, निकम्मा ,अनुपस्थित मनोदशा, सब कुछ चले जाना है। अगर आपको सहज योगी होना है तो आप ऐसे नहीं हो सकते, “ओह, मुझे पता है, मुझे पता है, मुझे पता है।” वह सब बकवास नहीं होती है, और न होना चाहिए। लक्ष्ण [संकेत, लक्षण] या आप लक्षणों को क्या कहते हैं या आप कह सकते हैं- [एक तरफ] लक्ष्ण के लिए आप क्या कह सकते हैं – यही वह तरीका है जिससे आप सहजयोगी को पहचान सकते हैं,उन्हें लक्ष्मी पुत्र होना चाहिए, लक्ष्मी के प्रतीकों की तरह, वह एक राजा की तरह रहता है। इसका मतलब यह नहीं है कि उसके पास हर चीज है, नहीं। इसका मतलब यह नहीं है। राजा उदारता के साथ देता है, उसे उसकी उदारता के लिए जाना जाता है। राजा इस बात के लिए नही जाना जाता की वह कितना झपट लेता है,, है ना? वह एक राजा है जिसका मतलब है वह दे रहा है। फिर उसे शांत व्यक्तित्व होना चाहिए, उसे जड नहीं होना चाहिए, उसे शांत व्यक्तित्व होना चाहिए, गर्म नहीं होना चाहिए। जो लोग गर्म मिजाज होते हैं, मैंने लोगों को देखा है, आप देखते हैं, वे पहले हिंसा का सहारा लेते हैं। मेरा मतलब है कि सहज योगी के लिए हिंसा कुछ सवाल नहीं है, कोई सवाल नहीं। अगर किसी ने तुम्हें पीटा तो भी आप उसे वापस नहीं मारेंगे। हमारे पास उन्हें मारने के तरीके हैं, लेकिन आपको उन्हें वापस मारना नहीं हैं। आप को उनका विरोध नहीं करना हैं, बल्कि यदि आप सहज योगी हैं तो आपके पास अपनी जीभ से भी किसी के लिए हिंसक होने का कोई काम नहीं है। कुछ लोग उन्हें अधिकतर अपनी जीभ से उकसाते हैं। आपको पता होना चाहिए कि आपको इन सभी बिंदुओं को सही करना होगा। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि कल, आप दुनिया को, ना की मुझे दिखाने जा रहे हैं कि सहज योग क्या है।

47:19

इसलिए हमें अपने शुद्धिकरण, अपने गौरव के लिए समर्पण करना है क्योंकि पानी गौरव देता है, आपको महिमा देता है। आप सभी चेहरे पर बहुत अच्छे और चमकीले दिख रहे हैं और मैं कांती रूपेण संस्थिता देख सकती हूँ । उन्होंने कहा कि “या देवी सर्व भूतेषु कांती रूपेण ,” चमक, प्रकाश और वहां मैं आपको सभी को, सभी में यह देख सकती हूं, , यह पहले से ही आ चुका है। लेकिन यह हमारे अंदर भी होना चाहिए। और आत्मसाक्षात्कारी व्यक्ति को इसे बताना नहीं पड़ता , बस,आप आत्मसाक्षात्कार दे सकते है। आपको किसी को भी यह कहना नहीं है | बस आप तरीका जानते है ,कि यह किस तरह से है।

आज हमने कितने मुद्दे सम्मिलित कर लिए हैं। मुझे उम्मीद है कि आप उन्हें फिर से सुनेंगे क्योंकि, देखें, माताजी का व्याख्यान एक कान से जाता है और दूसरे से बाहर आता है। और भगवान के पास सीमीत करने का तरीका है। मुझे आशा है कि आप लोग इन टेपों को लेंगे और रोज़ाना एक-एक करके सुनेंगे और कार्य करेंगे, कागज में या कान में योजना नहीं बनायेंगे। लेकिन यह दिल में जाना चाहिए। इस तरह हम सभी सुंदर बच्चों को परिपक्व करने जा रहे हैं। मैं बस गिन रही हूँ| अब फिर से सीपी चार साल के लिए चुने जाएंगे,तब मुझे जाना होगा। मुश्किल से तीन साल है, यह गुजर जाएगें ,और मैं यूके में इतनी ज़्यादा नहीं जा पाऊंगी, | ज़िम्मेदारी, नए लोगों पर इतनी सारी है। मुझे उम्मीद है कि हम और भी दिवालीयाँ एक साथ मनाएंगे।

भगवान आपको आशिर्वादित करे!

योगी: माँ, क्या मैं आपसे एक प्रश्न पूछ सकता हूं?

श्री माताजी: हाँ, हाँ, कृपया, कृपया।

योगी: हमें अक्सर हिंसा का विरोध न करने के लिए कहा जाता है, और यह ठीक है जब कोई आपके प्रति हिंसक हो रहा है। क्या होता है जब कोई किसी और के लिए हिंसक होता है, तो आप तब क्या करें?

श्री माताजी: यह क्या कह रहे है?

योगी: अगर कोई किसी और के प्रति हिंसक है, तो कोई क्या करे ? क्या कोई खड़ा रहे और इसे अनुमति दे दे, या कोई क्या करे?

श्री माताजी: उन्हें एक बंधन दें। हमारे पास इन चीजों का मुकाबला करने के हमारे तरीके हैं। उन्हें एक बंधन दें, उन्हें इस तरह के एक बंधन दें (वृत खंड ), उनकी कुंडलिनी उठाओ।

योगी: धन्यवाद। हालांकि यह मेरे लिए कोई चिंता नहीं है, यह मेरे लिए ठीक है (…) लेकिन एक बच्चे के बारे में क्या …

श्री माताजी: दर्शक बन कर ,मजाक को देखें।

योगी: हाँ।

श्री माताजी: ठीक है?

योगी: हाँ, धन्यवाद।

श्री माताजी: उन्हें लड़ने दो: आप क्या कर सकते हैं? उन्हें अपने आपस में फैसला करने दो, देखो?

अन्य योगी: विकसित देशों में सैन्य सेवा के बारे में क्या, माँ?

श्री माताजी: क्या । उसने क्या कहा?

योगी: वह सैन्य सेवा के बारे में पूछ रहा है।

श्री माताजी: वह बेवकूफ चीज जो आपको करना है (हंसी)। क्योंकि आप ऐसे बेवकूफ देश में पैदा हुए हैं (हंसी)। यह आपका अपना बेवकूफ निर्णय (सामान्य हंसी) था जिससे आपने इस देश में जन्म लिया था। इस तरह की मूर्खताएं आपको अपने देश के अनुसार करना है। भारत में हमें भी कुछ मूर्खताएं करनी पड़ती हैं। ऐसी नहीं परन्तु,दुसरे प्रकार की । इसलिए, यदि आप फ्रांस जैसे बेवकूफ देश में पैदा हुए हैं, तो बेहतर है की आप इसे करते रहे| दूसरा स्विट्जरलैंड है, जिसे ऐसा मिला है … अब तक इस स्विट्ज़रलैंड पर किसी ने भी हमला नहीं किया है, लेकिन उनके पासअभी भी यह सैन्य चीज हैं, क्योंकि वे लोगों का पैसा लूट रहे हैं और उनके पास वे बैंके है , इसलिए उन्हें दिखाना होगा कि उनके पास सेना है पैसे की रक्षा के लिए।

योगी: हमारे पास एक विकल्प है, हम सरकार को लिख सकते हैं। इस के लिए……

श्री माताजी: नहीं, नहीं, बेहतर उन्हें एक बंधन दें, लिखना उपयोगी नहीं है|। यह फिर मानसिक ढंग है| उन्हें जूते मारो। आपकी सरकार अब बदल रही है।

योगी: हाँ।

श्री माताजी: बहुत बदल गया।

योगी: अच्छा …

श्री माताजी: अब बहुत बेहतर है।

योगी: शायद हाँ।

श्री माताजी: अधिक समझदार, ठीक है?

योगी: ठीक है।

श्री माताजी: अब, अन्य सरकारों के लिए प्रार्थना करें। यह सब काम कर रहा है। ये सभी बेवकूफ चीजें जो हमारे आस पास है , क्या करना है? क्या आप को अब सैन्य सेवा के लिए जाना पड़ रहा है ?

योगी: हाँ, शायद, मां (…) (एक और योगी सिविल सेवा का सुझाव देता है)।

श्री माताजी: मैं एक बात सुझाऊंगी। देखें, जब, अगर आपको सैन्य सेवा या अन्य कुछ भी करना पड़े, तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। आप वहां किसी को भी मार नहीं रहे हैं, सिर्फ एक मजाक है। नाटक की तरह है! तो कोई नुकसान नहीं। अपना ध्यान करो, सब कुछ करो। इसके बारे में कोई गंभीरता नहीं है, यह सब मजाक चल रहा है। कुछ छुट्टियां लें (हंसी)! आप लोग इसे इतनी गंभीरता से लेते हैं: आप युद्ध के लिए नहीं जा रहे हैं! अब कोई युद्ध नहीं होगा। उन्हें सभी मजाक करने दो।

कोई और सवाल? (चुप्पी)

यह काफी स्थिर हो चूका है। आपकी पीठ के पीछे जल शक्ति उठ रही है।

(लंबा अंतराल)। अब । तो अब हमें पूजा करनी चाहिए। अब आज की पूजा, आपको अपने महालक्ष्मी तंत्र को अपने मन मस्तिष्क में समझना होगा । उन सभी शक्तियों को प्रमाणित किया जाना चाहिए, यही कारण है कि यह पूजा की जाती है। सही? मैंने आपको पहले ही समझाया है कि महालक्ष्मी सिद्धांत क्या है, और इन सभी शक्तियों का आप में उत्थान होना चा क्या यह स्थायी है? (शायद कैमरा)

(…)

कहींपर महालक्ष्मी स्त्रोत्र होना चाहिए। मैं अंग्रेजी नहीं समझ सकती। (योगी पढ़ना शुरू कर देता है) सही! तो आज कौन धोएगा? आज कितने नए लोग हैं जिन्होंने पहले पूजा नहीं की है? चलो देखते हैं कि कितने, बहुत से होना चाहिए। सुसान, आपने नहीं किया है? आपने नहीं किया ठीक है, फिर साथ आओ। मुझे लगता है कि आपको सभी को आगे आना होगा। कुमकुम (…) कुमकुम के साथ।

राम, आप किसी को वहां रखें , आसानी से उपलब्ध, सभी कुमकुम कौन करता है।

राम, मुझे लगता है कि आप चीजों को संभाल सकते हैं, आप ये सब जानते हैं? इसे यहां आसान उपलब्ध रखें, इसलिए जिसे पढ़ना है वह एक अलगसे है उससे , जिसे करना है। अब यह कौन कर सकता है? (हिंदी) (…) और चाया प्रबंधन कर सकती हैं, मुझे लगता है। हां मुझे माफ कर दो।

(नामों का पाठ)

श्री माताजी: आप अनुवाद नहीं करेंगे?

गेविन: मेरे पास इनके अनुवाद नहीं हैं, माँ। यह महागणपति की आराधना है और हम सभी देवताओं के नाम ले रहे हैं …

श्री माताजी: और फिर आप पढ़ सकते हैं कि वे अंग्रेजी में क्या हैं (?)।

गेविन: हाँ, भी।

(संस्कृत में नामों का पाठ जारी है। श्री माताजी लोगों को अपने पैरों को अच्छे से रगड़ कर साफ़ करने को कहती है)।

गेविन: तो हम समर्पण करते हैं। 1 नवंबर को, सर्दियों के मौसम में, चंद्रमा की 20 वीं रात में, जब सूर्य वृश्चिक में है, और चंद्रमा भी वृश्चिक में है, सभी सहज योगियों की तरफ से इस आश्रम में,जो की लंदन में हमारी मां का पहला केंद्र है , यह पूजा करते हैं, …

श्री माताजी: पूरी दुनिया में!

योगी: … पूरी दुनिया में जीवित देवता का पहला मंदिर।

श्री माताजी: पहली बार।

योगी: थेम्स नदी पर और लंदन की घाटी में।

(धोने वाले व्यक्ति को)

आपके हाथों की आवश्यकता है, मेरा नहीं, ठीक है? आपके हाथ अब धोए जाने हैं। अब अपने चैतन्य देखें। देखो, क्या वे बेहतर हैं? अब बेहतर है? ठीक है। अब तुम देखो (…)। बेहतर विचार

गेविन: सभी धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, हम सभी हमारे परिवारों के साथ, सहज योगियों के सभी बाधाओं के निरर्थक होने के लिए, आध्यात्मिक कल्याण के लिए, विजय, निडरता, दीर्घायु, स्वास्थ्य, धन के लिए, भलाई के लिए प्रार्थना करते हैं, आठ सिद्धि के मालिक हो जाने के लिए …

श्री माताजी: देखें, आठ सिद्धि के मालिक को देखें। अब मुझे आपको किसी समय, किसी और समय यह बताना होगा। हम्म।

गेविन: …. दो पैरों और चार पैरों वाले सभी प्राणियों सभी को शांति प्राप्त करने के लिए। हम मदद, संतुष्टि, और सभी शुभकामनाओं के लिए प्रार्थना करते हैं। उन सभी के लिए जो विकलांग हैं। सभी लोगों के मुक्ति के लिए, उन्हें उच्चतम ज्ञान प्राप्त करने के लिए। और जो कुछ भी हमारी शक्ति है, जो कुछ भी हमारा ज्ञान है, ध्यान के माध्यम से जो भी समर्पित कर सकते है या 16 प्रकार के किसी भी साधन से, हम पूजा में आत्मसमर्पण करते हैं। माँ के आसन को कुंभ, शंख को और घंटी की, हम उन सभी की पूजा करते हैं।

श्री माताजी: अब अपने चैतन्य देखें। बेहतर।

गेविन: हम सभी नदियों से हमारे शरीर को शुद्ध करने का अनुरोध करते हैं। और सबसे ऊपर हम महागणपति की पूजा करते हैं और बिना किसी बाधा के इस पूजा को जारी रखने के लिए प्रार्थना करते हैं।

(पैरों की धुलाई जारी है)

श्री माताजी: इस पानी को बाहर निकालें (…) अच्छा, इसे अच्छे से धोये।

योगी: अब हम निमंत्रण करते हैं। हे देवी, जिसके पास सभी सहज (?) और पुरुषा हैं, जिनकी हजार आंखें हैं, जिनके पास हजार शक्तियां हैं, हम आपसे अनुरोध करते हैं, हम आपको पूजा के इस अवसर के लिए उपस्थित होने के लिए बहुत विनम्रतापूर्वक आमंत्रित करते हैं।

श्री माताजी: अच्छा। अब अपने चैतन्य देखें। ठीक है। इसलिए। (…)

(श्री माताजी लोगों को अपने पैरों को धोने, उन्हें आशीर्वाद देने, उन पर काम करने और उनके पकड़े गए चक्रों आदि पर सलाह देने के लिए आते रहने की अनुमति देती हैं)

ठीक है? (हंसते हैं) जवाब वहाँ है। ठीक है? भगवान आपका भला करे। मैं कह रही थी, कि इस तरह आप अपनी समस्याओं को हल करते हैं। आह। हो गया। अच्छा (हंसी) भगवान आपको आशीर्वाद दे । आह। चले चलो। अब, क्या तुम ठीक हो? इस तरह अपना दाहिना हाथ रखो। सही। सब ठीक है। (…) आपका क्या मामला है? उन्हें एक समस्या है, कहें, देखें, यह उनकी शक्ति का बहुत अधिक उपयोग है। हमें उसकी आंखें बनाना है … हमें यह जानना है कि कब कहना है, क्या कहना है। ठीक है। भगवान आपका भला करे। बेहतर? ठीक है।

श्री माताजी: (उनके हाथ ऊपर उठाए गए हैं और हथेली के साथ खुले हैं) और इसके लिए दोनों हाथ महालक्ष्मी के लिए बाहर होना चाहिए। ताकि आप मध्य में आएं। इस तरह आपका उत्थान होता है यह विकासपरक है

(तत्वों की पेशकश की जाती है। उसके हाथों पर मक्खन लगाया जाता है)

मुझे आशा है कि आप सभी थोड़ा मक्खन ले रहे हैं, आप सभी। आखिरकार, देखें, मस्तिष्क वसा से बना है। यदि आप थोड़ा भी वसा नहीं लेते है, तो आपके मस्तिष्क और आपके तंत्रिकाओं के साथ क्या होगा? आप देखते हैं, जो बिलकुल भी मक्खन नहीं खा रहे हैं तो,वह एक गलत बात है। आपको रंग और उसके साथ खाने की ज़रूरत नहीं है, लेकिन आपको मक्खन लेना चाहिए ।(वह दिखाती है कि उसके हाथ मक्खन से स्निग्ध हैं) उन पर देखो। (…) गर्मी। क्या आप विश्वास कर सकते हैं? मक्खन अभी भी पिघल रहा है (…)। कुछ पानी डाल सकते हैं

(शहद, दूध, चीनी उसके हाथों पर पेश की जाती है)

अभी भी गहराई को छूने की स्थिति नहीं है । मैं कभी-कभी कहती हूं, कि किसी के पास दांत हैं लेकिन उनके पास चना खाने के लिए नहीं है। और कुछ लोगों को चना खाने के लिए उनके पास है, दांत नहीं होते हैं। यह बहुत जटिल है (हंसी)। आपके पास गहराई है, आप साधक हैं, आप बस वहां हैं, लेकिन आपके पास श्रद्धा नहीं है, आप देखते हैं, आपके पास श्रद्धा की पृष्ठभूमि नहीं है। आप को श्रद्धा जैसा कुछ तभी होता है ,जब आप सम्मोहित किये जाते है|, वे … यह एक सनसनीखेज किया जाना है। अगर कोई आपको जहाँ आप बैठे है वहीं उछलकूद करवाता है, तो आप बहुत खुश होंगे (हंसी) सभी उल्टी सीधी बातें।

लक्ष्ण, लक्ष्ण के लिए एक शब्द होना चाहिए। लक्षण …

योगी: विशिष्ट चिन्ह।

श्री माताजी: नहीं, लक्ष्ण वह है जो बीमारी का लक्षण है। लेकिन एक अच्छी क्या है? यह एक संकेत है।

योगी: हाँ, विशिष्ट पहचान।

श्री माताजी: विशिष्ट पहचान। हाँ, हम कह सकते हैं …. (योगिनी कुछ कहती है) शब्द लक्ष्ण शब्द मतलब स्वस्फूर्त है, शब्द लक्ष्ण स्वस्फूर्त है। स्वचालित रूप से आप इसे देख सकते हैं, इसलिए संवेदनशीलता वहां होनी चाहिए। मैं न्यू यॉर्क (?) में एक भारतीय दुकान में गयी थी। यह काफी समय पहले। और हर कोई “माताजी, माताजी” कह रहा था, दुकानदार आया और मेरे पैरों को छुआ। तो उसने कहा: “मैं इसे आपके चेहरे से देख सकता हूं,वहाँ प्रकाश है। मुझे पता है कि आप माताजी हैं “। जैसे ही उसने अपने भाई को बुलाया और वह सभी दुकानदारों को फोन करने वाला था … (हंसी)। बहुत आसान।

भगवान आपका भला करे।

(तत्वों की पेशकश जारी है)

श्री माताजी: आह, बेहतर।

(चूड़ियों की पेशकश की जाती है। फिर एक अंगूठी की पेशकश की जाती है): योगी कहता है: “… यह तुम्हारा ताज का गहना है। यह लंदन का प्रतीक भी है।)

पकड़ो, ताकि … इसे खोलें, साड़ी खोलें। इसे उस तरफ पकड़ो। साड़ी की किनारी पकड़ो, बस इतना ही। दोनों तरफ, किनारी पकड़ो। बस आप सब पकड़ो।

अब आप महालक्ष्मी स्त्रोत्र को पढ़ लेंगे। इसे पकड़ो।थोडा और। इसे पकड़ो, इसे ठीक से पकड़ो। साथ आओ, साथ आओ, महिलाओं कहाँ हैं, साथ आओ।

(सहस्त्रार के मंत्रों को निम्नानुसार पढ़ा जाता है 🙂

ओम त्वमेव साक्षात्, श्री महालक्ष्मी। महासरस्वती, महाकाली, त्रिगुणात्मिका , कुंडलिनी साक्षात, श्री आदि शक्ति साक्षात, श्री भगवती साक्षात्, श्री माताजी, श्री निर्मला देवी नमोह नमहा।

ओम त्वमेव साक्षात्, श्री कल्कि साक्षात्, श्री आदिशक्ति साक्षात्, श्री भगवती साक्षात, श्री माताजी, श्री निर्मला देवी नमोह नमहा।

ओम त्वमेव साक्षात्, श्री कल्कि साक्षात, श्री सहस्त्रार स्वामीनी मोक्षप्रदयानी माताजी, श्री निर्मला देवी नमोह नमहा।

(गुलाबी साड़ी माँ पर रखी गई है।) मेरे पास गुलाबी वाली नहीं थी , देखते हैं? यह समय था, क्योंकि लक्ष्मी गुलाबी पहनती है। प्रयत्न।

(…) श्री माताजी: आप सभी देवियों को अमेरिका भेज चुके हैं। यह बड़ी कृपा है है। वे सभी वहाँ हैं। वास्तव में।

योगी और योगिनी: वे हमसे अर्थात अपनी माँ के देश से आजादी की घोषणा कर रहे हैं।

श्री माताजी: हाँ …। योगी: विशुद्ध मनमानी कैसे कर सकता हैं?

श्री माताजी: नहीं,यह इसका सबसे बुरा भाग है, आप देखो, वे इन आयरलैंड के लोगों की मदद कर रहे हैं, यह सबसे बुरा हिस्सा है। ज़रा कल्पना करें। ये आयरलैंड के लोग अपनी बुद्धि से दूर हैं, वे नहीं जानते कि वे क्या चाहते हैं। और लोगों को मारना, और हिंसा, इस तरह सबकुछ। यदि वे कैथोलिक हैं तो कोई हिंसा नहीं होनी चाहिए। हर दिन कई निर्दोष लोग मारे जाते हैं। किसी भी नाम के तहत, किसी भी नाम पर , हिंसा का भगवान की शैली में कोई स्थान नहीं है, आप देखो। किसी भी चीज़ के लिए हिंसक नहीं हो सकते है।

(योगी को) आपको उन लोगों की सूची बनाना होगा जो भारत आ रहे हैं।

गेविन: ह्यूस्टन के कुछ लोग आना चाहते हैं, माँ।

श्री माताजी: वास्तव में? (योगिनी फूलों के साथ मां के बाल सजाने) अब आप देखते हैं कि महिलाओं का काम कितना मुश्किल है, आप देखते हैं? आप महसूस करते हैं

गेविन: हाँ, माँ …

(बाद में पूजा में, पुरुषों को)

श्री माताजी: अब यह आपकी पत्नियों के प्रति प्रेममय भावनाएं पैदा करेगा, ठीक है? आप सबके लिए। गृह लक्ष्मी आज, आप गृह लक्ष्मी की पूजा कर रहे हैं। (…)

आप में से दो कर सकते हैं … आप में से दो कोशिश कर सकते हैं, और आप में से दो कोशिश कर सकते हैं। साथ चलो (…)। चलो स्विस लोगों में से किसी को भी कॉल करें (…)। आंद्रे, हाँ, आंद्रे, साथ आओ।

गेविन पढ़ता है: “माँ, आप आनंददायनी हैं जो हमारे अंदर मरने वाली हर चीज को मारती है। माँ, आप परामर्शदाता हैं जो हमें अपना ज्ञान देती हैं। माँ, आप उद्धारक हैं जिन्होंने हमें दूसरा जन्म दिया है। माँ, आप हर भविष्यवाणी और हर प्रार्थना का निर्वाह कर रही हैं। माँ, आप वह पूर्णता है जो हर गलत को शुद्ध करती है। माँ, आप शुद्ध विवेक हैं जिसके द्वारा हम प्रबुद्ध हो गए हैं। माँ, आप एकीकरण हैं, आपके द्वारा भगवान की सृष्टि को एक सूत्र में पिरोया गया है । हम आप जो की शुभता है, को नमस्कार करते हैं , हम आप ,जो की स्वयम प्रेम है, की स्तुति करते हैं । आप जो की स्वयम दया है को धन्यवाद देते हैं । हम आप ,जो की सर्व दृष्ट ,सर्व ज्ञाता,सर्व कर्ता, है को दंडवत प्रणाम करते है। हम आपके बच्चे हैं ,चाहे आप की माया के कारण अथवा मर्यादाओं के कारण हमें कभी आप से अलग ना होने दें| ”

(मां मुस्कान)

मेरे पैरों को फोटो, सब कुछ ले लो।

(…) यह भी सुधारता है। (…)

क्या आप फ़्लैश के बिना इसे ले सकते हैं?

आप बेहतर सावधान रहें (…)।

साथ चलो। बहुत सारे फोटोग्राफर, देखें। हमें तस्वीरों की एक प्रदर्शनी रखना है।

भगवान आपको अशिर्वादित करे।

(कुछ योगी माँ के पास जाते हैं)

योगी: माँ, मैं स्कॉटलैंड से हूं।

योगी: माँ, मैं ऑस्ट्रेलिया से हूं। ऑस्ट्रेलिया में ओकर प्रजाति के बदमाश लोगों को नष्ट करें जो गैरजिम्मेदार हैं …, वे बियर पीते हैं और रेस और अन्य जगहों पर जाते हैं …

श्री माताजी: ठीक है, और क्या? नस्लीयवाद भी।

योगी: नस्लीयवाद।

श्री माताजी: और गुरुओं का अभिशाप भी …

योगी: कृपया, कृपया, मेरे देश, ऑस्ट्रेलिया से गुरुओं और नस्लीयवाद के अभिशाप को हटा दें। और इस देश को महालक्ष्मी का आशीर्वाद दें।

श्री माताजी: (नमस्ते करते है) भगवान आपको आशीर्वाद दें। (एक बंधन लेतें है) तो अब पूरी दुनिया के लिए आप माँग सकते हैं कि “नकारात्मकता के अभिशाप को हटाएं और उन्हें महालक्ष्मी के सिद्धांत के साथ आशीर्वाद दें”।

योगी: हम सभी?

श्री माताजी: आप सभी।

(सहज योगी दोहराना)

श्री माताजी: भगवान आपको आशीर्वाद दे ।

तो हमें बहुत कुछ करना है, हम सभी को यह करना है। तुम मेरे हाथ हो, तुम मेरी आंखें हो, तुम मेरे कान हो। आप को करना पड़ेगा। जो भी आप मांग रहे हैं, आपको खुद करना है। मैं सिर्फ आपको शक्ति दे सकती हूं, लेकिन आपको अपने हाथ चलाने है, आपको अपनी जीभ चलाना है, आपको सब कुछ करना है।

यदि आप अपनी जीभ नही चलाते हैं और यदि आप इसके बारे में लोगों से बात नहीं करते हैं, तो मैं आपकी मदद कैसे कर सकती हूं? तो आपको यही करना है, कि, यह जानना है, कि जो भी आप मांगते हैं, केवल प्रार्थना न करें, बल्कि आपके उपकरण का उपयोग भी करें।

भगवान आप सबको आशीर्वाद दें।

अब वह सब क्या है? (…) (एक महालक्ष्मी तस्वीर की पेशकश की जाती है)

वाहन हाथी है। हाथी वाहन है, उसका वाहन , हाथी है। क्योंकि यह गरिमा का प्रतीक है, उसकी महिमा का। और यह भी बुद्धिमान पशु, बहुत बुद्धिमान पशु है, और बहुत क्षमाशील, अत्यंत उदार है। यह गज लक्ष्मी दिवस का प्रतीक है। राज लक्ष्मी देवी का एक धारण किया हुआ एक गुण है| । यह गज का तात्पर्य है।

(पूजा आरती के साथ जारी है)।