Talk to Sahaja Yogis, Open Your Heart, Seminar 4th Session

(भारत)

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योगीयों से बातचीत लोनावाला (भारत), 25 जनवरी 1982

सारी दुनिया से इतने सारे सहज योगियों से मिलने और उनसे बात कर पा कर बहुत खुशी है। वे मुझे विश्व में सबसे अच्छी समझते हैं|, इस पूरे विश्व में एक ऐसे व्यक्ति के साथ जो की सहज योगी नहीं है तालमेल होना असंभव है| यहां तक कि अगर आप उन्हें आत्मसाक्षात्कार भी देते हैं, यदि वे सहज योगी नहीं बनते हैं, तो उन्हें अपने स्वयं के अस्तित्व की सूक्ष्मता भी समझने में मुश्किल हो सकती है। आज, जैसा कि हम यहां सभी सहज योगी हैं, मै तम्हे अस्तित्व का\\का सूक्ष्मता के धरातल पर विकास के बारे में बताउंगी।
हर समय, जैसा कि हम कुछ भी कर रहे होते हैं, हम सोच रहे होतेहैं कि क्या और कैसे करें । “आत्मबोध करने के लिए क्या करना चाहिए?”यह पहला प्रश्न लोगों ने मुझसे पूछा, जब उन्हें आत्मबोध नहीं हुआ था| “माँ हमें आत्मसाक्षात्कार पाने के लिए क्या करना है ?” तो फिर मुझे कहना पड़ा “कुछ भी नहीं, बस मेरी और अपने हाथ फैला दें है, और यह काम होजावेगा।” यह सच है, यह इस तरह से ही काम करता है। अब प्राप्ति के बाद, आपको कुछ करना होता है, जैसा कि वे कहते हैं। लेकिन फिर भी सवाल आता है आपको क्या करना है “इस चक्र को हटाने के लिए, इस चक्र के लिए हमें क्या करना चाहिए? तकनीक क्या है, क्या बात है? “आज के समय में सहज योगी के साथ परेशानी ये है कि वे सभी पहले से टेक्नोक्रेट हैं। उन्होंने पहले से ही बहुत अधिक तकनीकी चीजों को किया है, तो यह बेहतर है कि वे तकनीक के बारे में भूल जाएं और सहजता के बारे में अधिक चिंता करें। तकनीक इतनी है कि तकनीक ने सहजता को मार दिया है, और तंत्र और सहजता के बीच एक संतुलन को स्थपित किया जाना चाहिए
पहले आप सहजता से अपनी आत्मबोध प्राप्ति प्राप्त करते हैं -तब आपको इसे धारण करना होता है प्राकृतिक एवं स्वभावगत रूप से | स्वभाव से आप टेक्नोक्रेट हैं – एक तकनीक,एक तंत्र, बनाना चाहते हैं, तंत्र कि कैसे काम करना है| शुक्र है हम अब इतने बुरे नहीं है , अन्यथा साधारण तरीके से मैंने देखा है, मैं व्याख्यान दे रही थी और लोग,अपने को बंधन दे रहे थे कुंडलिनी उठा रहे थे , – सभी पागल लोग| अन्य जो नए चेहरे थे ऐसे सहज योगियों से डर ही जाएगे कि, “इन लोगों के साथ क्या बात है? वे इतने असामान्य हैं। “और अगर आप उनसे कहती हूं कि,” आप को यह नहीं करना चाहिए, आप सिर्फ व्याख्यान सुने “, वे कहते ,” नहीं, नहीं, मा हमें बाधा पकड़ रही है तो हम स्वयम को ठीक कर रहे है? “
अब आपको यह महसूस करना होगा कि आपको सूक्ष्म होना चाहिए। फिर एक बार फिर सवाल, “कैसे बनें?” सूक्ष्म बनना कैसे, समस्या है? उदाहरण के लिए, आज, सुबह सुबह पूजा करने का सवाल था – आज। उन्होंने कहा कि आज ‘सूर्य ग्रहण’ है और एक महान विशेष तारीख है, कि आप पूजा करते है, सूर्य के ग्रहण के दिन पर इस तरह की पूजा से हजारों पूजा का आशीर्वाद प्राप्त होता हैं। अब, अगर आप इसे देखते हैं, तो यह बहुत ही अच्छा लग रहा है, अच्छा है, हां, यह सच है, यह ज्योतिषीय सर्वेक्षण में लिखा गया है और यह सब – एक बहुत बड़ी बात है, और हम इसका अनुसरण करना शुरू करते हैं। आप सहज योगी हैं, आपको इस पर एक सूक्ष्म दृष्टी कोण से विचार करना चाहिए। इसी तरह आपका विवेक भी सूक्ष्म हो जाएगा; आपका दृष्टिकोण भी सूक्ष्म हो जाएगा सूक्ष्म दृष्टिकोण से इस तरह के एक प्रश्न पर गौर करने के लिए, हमें सबसे पहले पता होना चाहिए कि हम सहज योगी हैं कोई तकनीक की आवश्यकता नहीं है, बस इस प्रश्न पर अपने चैतन्य लहरिया देखना शुरू करें – यह बहुत सरल है| सूक्ष्म चीजें सरल चीजें हैं; स्थूल चीजें जटिल हैं – यह बहुत सरल, बहुत सरल समीकरण है साधारण बात यह है कि इस मुद्दे पर चैतन्य को महसूस करना – चाहे आज की पूजा,क्या यह वास्तव में कुछ श्रेयस्कर है या नहीं | आप इस बात पर हैरान होंगे कि आपका दाहिना पक्ष इस मुद्दे//प्रश्न पर गर्म हो जाएगा।

इसलिए, यह बुद्धि, जिसे अब प्रबुद्ध किया जा रहा हैऔर, प्रबुद्ध आप बन गए हैं, आपको इसे एक सूक्ष्म तरीके से इस्तेमाल करना चाहिए। सहज योगियों के लिए, आज पूजा करना क्यो आवश्यक नहीं है? आप पहले से ही निर्विचार हो गए हैं, इसलिए मैं आपको सवाल का जवाब देने के लिए नहीं कहूँगी। इसका कारण यह है, क्योंकि आप सभी टेक्नोक्रेट हैं, आप अतिक्रियाशील हैं। यह सब हजारों साल पहले ठीक था, जब वेदों ने शुरू किया, और वेदों ने हमें विज्ञान दिया है। वेदों के बारे में सभी उत्साह उस समय ठीक थे जब वे सूर्य की पूजा करते थे या दाएं नाडीपर काम करते थे। ग्रीस में, ये चीजें ऐसी ऊंचाई पर पहुंच गईं कि सभी देवताओं को मनुष्यों की तरह ही बनना पड़ा और मनुष्यों की तरह हो गऐ। उनके लिए अब, सभी में कमजोरियां हैं; हर भगवान में भी कमजोरी है| यह कमजोरी है, वो दूसरी कमजोरी है|, वे अब ग्रीस में ईश्वर को नहीं समझते हैं। वे सिर्फ सोचते हैं कि समस्त मानवीय कमजोरी के बोझ के साथ वे किसीप्रकार की संस्था हैं। इसलिए, यह दाएं नाडी पर आंदोलन बहुत ज्यादा हो गया है – वेदों के समय से सूर्य की पूजा बहुत ज्यादा है; आपने बहुत पूजा की है यह इतना था, कि क्रिस्ट को इस धरती पर आना और लोगों को बतान पड़ा कि आप बेहतर है की सब को माफ कर दें उनके आगमन से और अधिक लोंगो को मध्य में आ जाना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके विपरीत, सभी ईसाई राष्ट्र अतिक्रिया पर चले गए और हम भारतीय भी आपका अनुसरण कर रहे हैं। इसलिए, हम बहुत अतिक्रियावादी लोग हैं आज सभी सहज योगी – 99.9 प्रतिशत , यहां तक कि भारतीय भी अतिक्रियावादी लोग हैं। भक्ति वाले लोग खो गये हैं; वे अब तक यहाँ नहीं हैं |वे एक और तरहके पागल लोग हैं| वे इस पंढरी मंदिर जा रहे हैं, भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं, वे चर्चों में हैं, वे मंदिरों में हैं, वे मस्जिदों में हैं – हर इन जगह में वे खो गए हैं। इसलिए, परमात्मा के तथाकथित प्रेम में, जो चंद्रमा की पूजा करते हैं, भक्ति पूजा करते हैं, इस तरह के लोग अभी सहज योग के लिए प्रस्तुत ही नहीं है। अधिक बुद्धिजीवि यहाँ हैं क्योंकि वे वास्तव में अन्य लोगों को दूसरी दिशा में ले जाते हैं … वे अन्य की तुलना में अधिक समझदार लगते हैं। लेकिन अतिक्रियावाद का आंदोलन खत्म हो गया है। तो अब, सहज योगियों को सामान्य स्थिति में लाने के लिए उन्हें बाएं ओर ले जाने के लिए, जैसा कि वे आज हैं – आज के दिन के रूप में। यही कारण है कि मैं आपको गांवों में ले गयी, जहां लोग बहुत ही सरल, बहुत प्यारे, बहुत भावुक हैं। अतिक्रियावादी लोगों का, मस्तिष्क बहुत अस्थिर होता है, कि आप किसी भी परेशानी का सामना नहीं कर सकते – आप किसी भी परेशानी को सहन नहीं कर सकते। यदि कोई परेशानी है, तो आप इसे सहन नहीं कर सकते, क्योंकि आपकी सभी ऊर्जाएं आपके मस्तिष्क की गतिविधि में बितती हैं, जो बेकार है, और पूरी तरह से बकवास है, बिल्कुल – रचनात्मक नहीं है| लेकिन यह आपको इतना थका देता है कि शरीर में मामूली असुविधा आपको बहुत परेशान करती है, और आप शारीरिक अशांति को सहन नहीं कर सकते। अब हम भारतीय भी आपकी प्रगति से बहुत उत्साहित हैं ,कि हम आपकी नक़ल करने की कोशिश भी कर रहे हैं, और दुगनी गती के साथ।
इन परिस्थितियों में, उन लोगों के बारे में सोचना होगा जो वास्तव में भगवान से प्यार करते हैं। वहाँ भक्ति है, श्रधा है वे नहीं सोचते, वे चिंता नहीं करते; वे आँख बंद करके भगवान का अनुसरण कर रहे हैं वे जानते हैं कि ईश्वर है और उन्होंने कहा, “हम कभी तो भगवान से मिलेंगे”| जो भी गलतियाँ वे कर रहे हैं, वैसे ही जैसे आपने अपने अतिक्रिया व्यवहार में गलतीयां की है, बाएं ओर वे भी बहुत गलती कर रहे हैं, इसमें कोई शक नहीं है। लेकिन उन्हें अंदर लाया जाना है। आपको उनसे मिलना होगा, और उन्हें आपको मिलना होगा। उनका आपके उपर अच्छा असर होगा, मुझे पता है कि उनका होगा। अब चंद्रमा बनना- इतना आसान नहीं है, क्योंकि एक बार आप सूर्य बन गए हैं, बल्कि मुश्किल – आप थोड़ा आगे बढ़ चुके हैं। लेकिन चंद्रमा बनने के लिए, आपको उस श्रद्धा, उस विश्वास को विकसित करना है, जो कि निर्विचार श्रद्धा, है, वह प्रेम।
कोई पूछ सकता है, “जब आप ध्यान के लिए बैठते हैं तब से आप कहाँ से शुरू करते हैं?” मैंने पूछा कि मोदी क्या सवाल थे? “कहां से शुरू करें और कहाँ खत्म करना है?” यह सब फिर से तकनीक है |मैं केवल एक ही तरीका आप लोगो के लिए पेश करुँगी(-वैसे हर समूह को अलग तरह की तकनीक की जरूरत होती है – कि वे किस तरह की समस्याओं का सामना करते हैं) – यह है कि आप अपने दिल से शुरू करते हैं और वहीं केवल अंत करते हैं। यह आपके दिल से शुरू होता है, आपके आत्मा से, और आपके आत्मा में समाप्त होता है |बस इसके बारे में बाते करना छोड़ दो, बस अपना दिल महसूस करना शुरू करो; बस अपने दिल को महसूस करना शुरू करें, इसे खोलकर| – अपना मुंह इतना नहीं जितना की आपका दिल| |जब हम प्यार करते हैं तो हम क्या करते हैं? संकेत और लक्षण क्या है? मैं नहीं जानती, पश्चिम में, प्रेम की झलक भी वहां है या नहीं। लेकिन अभी भी आप इस देश में देख सकते हैं, जैसे की – एक माँ , अगर उसका बच्चा बीमार है मैं अपनी माँ का जानती हूँ की;, जब मेरा भाई टाइफाइड से बहुत बीमार था, इक्कीस दिन और रात के लिए वह एक पलक झपकने तक भी नहीं सोती थी, नहीं सोई। अगर आपने उस तरह के प्यार को देखा है, तो आप समझ सकते हैं कि कौन से चमत्कार हैं … उसने कभी सोचा नहीं खुदके आरामको, कुछ नहीं – वह कब सोती थी, वह कितनी बार उठ गई उसने अपने भोजन के बारे में नही सोचा था, कुछ भी नहीं। वह सिर्फ इतना चाहती थी कि उसके बेटे को ठीक होना चाहिए। अब, चिकित्सको ने कहा कि इक्कीस दिन के लिए उपचार है है जो कुछ भी हो; यदि आप इसे जल्दबाजीसे पहले इलाज करने की कोशिश करते हैं, तो फिर कुछ समस्या हो जाएगी। तो, इक्कीस दिन, वास्तव में मैंने देखा है, कि उसने भोजन नहीं किया। वह नहीं जानती थी कि वह क्या खा रही थी; जो कोई उसे भोजन प्रदान करता है, वह थोड़ा खाएगी और फिर बस ; उसे कोई इच्छा शेष नहीं थी बस उसका बच्चा ठीक होजाए।
सहज योग के लिए हम कितना बलिदान कर सकते हैं?
तब मैं आपको एक और उदाहरण देती हूं, जोकि मैंने स्वयं अपने बचपन में देखा है|अब के भारतीय लोग बहुत अलग लोग हैं – लेकिन मैंने इस देश में बहुत महान भारतीयों को देखा है। जब अंग्रेज यहां थे, तो वे भी एक और ही प्रकार के ब्रिटिश थे – अब आप ऐसे कहीं भी नहीं पाते। केवल एक चीज, गांधीजी ने कहा कि, “आप स्वराज प्राप्त करेंगे – आप स्वतंत्रता प्राप्त करेंगे।” स्वराज वास्तव में – “स्व ‘का अर्थ है’ तुम्हारी आत्मा ‘और’ आत्मा का शासन ‘। लेकिन जब उन्होंने ‘स्वराज’ कहा, उनका मतलब था ‘राजनीतिक स्वतंत्रता’ और इसके लिए कितना लोगों ने बलिदान किया – कि, उन्होंने स्वयं का आनंद त्याग दिया? मेरे अपने परिवार में, मेरे खुद के पिता घर, कार, सब कुछ, वह एक पदवीधारी थे, उनके कपड़े इंग्लैंड में सिलते थे, सब कुछ उनका छीन गया था और हम मिट्टी पर बहुत ही साधारण झोपडी में ही रहे। हमारे और मिटटी के बीच कुछ भी न था। लेकिन हम महसूस करते, कि हमारे पिता इस तरह के एक महान उद्देश्य के लिए यह कर रहे थे – हमें इस बारे में बहुत गर्व था। हमें कभी नहीं लगा कि हम कुछ भी त्याग रहे थे; हम हर जगह बहुत सम्मान प्राप्त करते थे और लोगों ने हमें मुफ्त चीजों की पेशकश की लेकिन हम स्वीकार नहीं करते|| इस तरह का अभिमान लिए कि हम ऐसा कर रहे हैं, कोई बड़ी बात है, हमारे देश के लिए, हमारे देशवासियों के लिए, इस तरह के व्यापक हित के लिए।
सहजयोग योग में, आपको कुछ भी बलिदान नहीं करना पड़ता है, न धन, और न ही आपकी नींद, जो की बहुत महत्वपूर्ण है, न ही आपके सुख, कुछ नहीं। सब कुछ आपको सस्ता मिलता है – आप इस आशीर्वाद को देखते हैं। और आपसे जो वादा किया जाता है, वह वास्तविक अर्थ में स्वराज है, यह आपकी आत्मा का क्षेत्र है उच्चतम प्रकार की मुक्ति का वादा किया गया और, जिसे आपने प्राप्त किया है। और बलिदान शून्य है आप अपना समय भी बलिदान नहीं कर सकते| इसके बावजूद, कुछ लोग सोचते हैं कि वे सहज योग पर अहसान कर रहे हैं, विशेष रूप से मुझ पर, यह पूरी बात ही व्यर्थ है|उस वक्त यह निश्चित भी नहीं था ,कि , स्वतंत्रता मिलेगी – निश्चित कुछ भी नहीं। वे जेल गए – मेरी माँ 5 बार जेल गई – परिवार में केवल हम 11 बच्चे और हमारे रिश्तेदर, सब लोग, घर में रह रहे हैं, जो अब तक शिक्षित भी नहीं थे। अब हम दुसरे ढंग के हो गये हैं, आप देख रहे हैं, आज के राजनेता पैसे बनाने में व्यस्त हैं – यह दुसरे ही ढंग की प्रणाली हो गयी है, मेरा मतलब है, मुझे ये समझ नहीं आ रहा है कि ये लोग कहाँ से आए हैं। तो, आपको कोई बलिदान करने की ज़रूरत नहीं है – कुछ भी बलिदान नहीं करना है। हमेशा, आपको इस तरह से या उस तरह से एक अतिरिक्त लाभ मिलता है – आप को हर पल आशीर्वाद मिलते हैं|| अपने आशीर्वाद गिनो, आभारी हो। और फिर, हमें यह समझना चाहिए कि, ये आशीर्वाद, हमारे लिए हमें अधिक प्यार करने वाले, अधिक उदार और बलिदानी बनाने के लिए हैं।
यह विचार है कि हम त्याग कर रहे हैं एक अहंकार उन्मुख विचार है। तुम क्या बलिदान करते हो? मैरे पास क्या है बलिदान करने को? मेरा मतलब है, मैं कहती हूं, “मैं त्याग करती हूं,” यह बकवास है क्योंकि यह मेरा स्वभाव है। मुझे हंसकर अच्छी तरह से करना पड़ेगा;मैं इसे रोक नहीं सकती, मैं भाग नहीं सकती, अगर मैं तुमसे भाग जाती हूं, तो चैत्न्य लहरिया मुझ से करवा लेंगी या मुझे इस तरह खिंच लेंगी कि – मैं चलने में भी सक्षम नहीं हो पाऊँगी। मुझे यह देना पडेगा है। उसी तरह, आपको आत्मानुभूति देना पड़ती है| यदि आपको लगता है कि, “मेरे घर में, ओह, मैं बहुत सारा ध्यान करता हूं, माँ, मैं विशेष रूप से देता हूं, मैं अनन्य हूं” – समाप्त, आप आगे नहीं जा सकते आप की अपनी अवधारणा हो सकती हैं कि आप इसके साथ आगे जा रहे हैं – आप बिल्कुल गलत हैं, मैं आपको अपने बनाये मिथकों के साथ जारी रहने की अनुमति देती हूं| इसका मतलब यह नहीं है कि यह सच है। लोग मुझसे पूछते हैं, “हमें कितनी बार इस कार्यक्रम में शामिल होना चाहिए? हमें कितनी बार ध्यान करना चाहिए? “”हर पल”!
अब आपको सहज योग की ज़िम्मेदारी लेनी होगी। आपको अपने तरीके से इसके लिए जिम्मेदार होना पड़ेगा, आपको ऐसा करना है क्योंकि, आप इसे अधिक अच्छे के लिए कर रहे हैं। जितना अधिक आप सोचते है उस बेहतरी के बारे में जो यह कर रहा हैं, उतना ही यह आपके लिए बेहतर होगा, । ये सब बायीं ओर, दिल – आत्मा का गुण हैं। आत्मा हर समय दे रही है, आत्मा ले नहीं सकती। यही कारण है कि यह अक्षय है, यह अजेय है| इसे कौन हरा सकता है? क्योंकि यह स्वयं का राजा है|, कोई भी हावी नहीं हो सकता, कुछ भी नहीं, कोई भौतिक संपत्ति नहीं। कुछ भी हावी नहीं हो सकता, यह ऊपर है। तो, सूक्ष्मता का जीवन पाने के लिए, “आध्यात्मिक जीवन को चुन लो,” वे कहते हैं|| लेकिन आध्यात्मिक जीवन का अर्थ क्या है – वे समझ नहीं पाते हैं। और अंग्रेजी भाषा में ‘आत्मा’, यह ऐसा भ्रामक नाम है कि तीन चीजों के लिए वे एक शब्द ‘स्प्रिट का प्रयोग करते हैं, क्या आप कल्पना कर सकते हैं? – एक मरे हुओं के लिए, दुसरा जो स्प्रिट वे पीते हैं, और तीसरा जो आत्मा कहा जाता है,यानि जो, उनके भीतर मौजूद है। यह बेतुका है, ऐसा नाम देना, तीन चीजों को एक ही नाम देंना जो पूरी तरह एक दूसरे के विरोधाभासी हैं? तो, सूक्ष्मता की जिंदगी पाने के लिए, आत्मा तक और , हर बात की सूक्ष्मता तक पहुंचना पड़ता है।
अब, मैं आपको एक ठोस उदाहरण देती हूं।और आपको इसके लिए अपने कानों को खींचने की आवश्यकता नहीं है – सूक्ष्मता को देखें पुणे में, लोग आपको कुछ उपहार देना चाहते थे। उन्होंने कहा, “हमें क्या देना चाहिए?” मैंने कहा, “उन्हें महाराष्ट्र की मिट्टी दीजिए।” हर कण यहाँ चैत्न्यित है- महाराष्ट्र की मिट्टी। आखिरी बार अगर आपको याद है, तो उन्होंने आपको धूप-बत्ती दिया – क्या हम मराठी में धुप कहते हैं। मुझे नहीं पता है कि आप अंग्रेजी में क्या कहते है ऐसा कोई शब्द ही नहीं है |- लेकिन आप, जानते हैं कि उन्होंने आपको क्या दिया था। इस बार, मैंने कहा, कि कुछ प्रतीकात्मक दे और मैंने ,आपके लिए यह चुना। मैं आपकी प्रतिक्रियाओं को देखना चाहती थी, आपकी क्या प्रतिक्रियाएं हैं। इसे एक उद्देश्य के साथ चुना गया था यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण चीज है जो आप के साथ ले जा रहे हैं| एक बहुत ही महत्वपूर्ण चीज है, जो कि महाराष्ट्र से चैत्न्यित मिट्टी है- यह बहुत बड़ी बात है। हालांकि पुणे में, माना की, लोग बहुत कंजूस हैं – ; वे हमेशा कई चीजों की गड़बड़ी करते हैं – सहमत हूँ; लेकिन मिट्टी चैतन्यित है – उसमे पुण्य है और उस मिटटी से मैं कुछ पाना चाहती हूँ , जो प्रतीकात्मक होगा। मैं स्वयं इसे चुनने के लिए पूजा से पहले गयी थी। अब, आपने इस का जो कुछ किया है वह इतना संतोषजनक नहीं है| जो आप यहां से ले रहे हैं उसमे यह सबसे खास बात है। अन्य सभी चीजें बहुत ही स्थूल प्रकृति की उपयोगिता हैं| आप कोशिश कर सकते हैं; आप उसमें एक पौधा रख सकते हैं जो चैतन्य देगा। , मुझे बताया गया था कि इसे उन्हें जहाज द्वारा भेजने को कहा गया था। यह बहुत गलत है| लेकिन अगर मैं आपको एक चांदी की वस्तु देती हूं, तो आप इसे अपने साथ ले जाएंगे| क्या आप इसे जहाज से भेज देंगे? आपके कानों को खींचने की जरूरत नहीं।
लेकिन सूक्ष्म चीजों को पाने के लिए हर बात में निहित सूक्ष्म मूल्यों को समझना है। इसे धन के माध्यम से तौला या समझा नहीं जा सकता है क्योंकि पश्चिम में, आप जानते हैं कि लोग सब कुछ एक निवेश के रूप में खरीदते हैं, सब कुछ। मुझे नहीं पता कि वे किसी निवेश के लिए अपनी नाक को भी तो नहीं खरीदते हैं। सब कुछ -मानकीकृत होना चाहिए, क्योंकि इसमें पुनर्विक्रय मूल्य होना चाहिए। मेरा मतलब है, सोचोकि सब कुछ बिक्री योग्य है – किसी चीज़ के लिए कोई भावना नहीं है। वे उसी तरह एक प्रमाण पत्र भी लेंगे; यहां तक कि वह बिस्तर जिसमे में सोते हैं, सब कुछ बिक्री योग्य होना चाहिए,मेरा मतलब है पुन्र्विक्रियोग्य । और यह उस देश का अभिशाप है| इस देश में, ऐसा नहीं है। उनके लिए, चांदी को इतना मानकीकृत होना और सोने को इतना मानकीकृत होना जरूरी नहीं है। वे शुद्ध सोना पसंद कर सकते हैं क्योंकि यह चैतन्य के लिए अच्छा है। लेकिन इन बातों में ऐसे मानकीकरण!? यह कहना सही है की, बाथरूम पाइप आपका मानक होना चाहिए; लेकिन इन छोटी-छोटी चीज़ों के लिए कोई मानकीकरण नहीं होना चाहिए। क्योंकि वे चैतन्य महसूस नहीं करते हैं यदि आप चीजों को चैतन्य के माध्यम से समझना शुरू कर देते हैं, , तो आप आश्चर्यचकित हो जाएंगे कि वे चीजें जो इतनी फीकी दिखती हैं, बेकार , फिर से बिक्री योग्य नहीं – आप बेकार कह सकते हैं, आप इसे हमारे सभी मानकों से बिल्कुल बेकार कह सकते हैं – वे इतनी उपयोगी हो सकती है? मोहम्मद साहिब के एक बाल की तरह, मोहम्मद साहिब के एक बाल की कल्पना करो! क्रिस्ट के कफन! मसीह के कफन, लेकिन वह भी अब बेच रहे हैं, वे उस से पैसे भी कमा रहे हैं। मेरा मतलब है, इन पश्चिमी लोगों के लिए धन्यवाद, यंहा सब कुछ बिक्री योग्य है
इसलिए, एक बार जब आप भौतिक चीज़ों की सूक्ष्म पहलू की तरफ जा रहे हैं,न केवल – सौंदर्य ,क्योकि सोंदर्य भी बिक्री योग्य है – लेकिन ऐसी चीजें जिन्हें बेचा नहीं जा सकता है – आप अपनी आत्मा को नहीं बेच सकते हैं – वे आपके लिए सबसे कीमती एवं उर्जावान चीजें होना चाहिए| हमारे मूल्यों में बदलाव आया है, हम अलग- लोग हैं, हमारे लिए सबसे कीमती ऊर्जा कौन सी है? क्या जीवित ऊर्जा है? जीवन उर्जा, सभी ऊर्जाओ की संश्लेषित ऊर्जा है| लेकिन हम पैसा ऊर्जा या विनाशकारी ऊर्जा या परमाणु ऊर्जा, विद्युत ऊर्जा, अब पेट्रोल की ऊर्जा में विश्वास करते हैं| – और इन सभी बिंदुओं पर आघात करना होगा |, यह समझने के लिए कि, आपको बिना इनके करना/ रहना होगा। इसलिए, एक सहज योगी के लिएजीवन उर्जा सबसे बड़ी बात है, और जीवन ऊर्जा का संकेत यह है कि यह विकसित होता है और जो कुछ इसके लिए बेकार है उस सभी को रद्द कर देता है। वह इसे कैसे करना है जानता है। उसी तरह, एक सहज योगी को यह जानना चाहिए कि महत्वपूर्ण क्या है, महत्वहीन क्या है| आप की हर पल निगरानी हो रही है|, स्वाभाविक रूप से क्योंकि आपने परमेश्वर के न्याय के लिए प्रवेश किया है
सूक्ष्म बनने की यह समझ प्यार के माध्यम से आती है प्रेम क्या है, इसका वर्णन करना कठिन है आप केवल इसका आनंद ले सकते हैं |, जब एक गाँववाले कुछ बहुत साधारण चीज़ लातेहै और मुझे खाने देते है ,मै इसका आनंद लेती हूँ| श्री राम को ‘बेर’ नामक छोटे छोटे फल दिए गए थे। श्री राम स्वयं दांयी नाडी पर पैदा हुए थे। आप सभी के लिए महान उदाहरण श्री राम हैं जो दाहिने ओर थे, जो दांयी नाडी को कार्यान्वित करते है जब वह पैदा हुआ था और वह एक बच्चा था … वह एक सूर्यवंशी है, वह सूर्य का पुत्र है। मेरा मतलब सूर्य – सब कुछ सूर्य से उसके पास आता है| जब वह पैदा हए थे, और एक छोटे बच्चे थे, उन्होंने अपनी मां से माँगा, “मुझे चंद्रमा चाहिए ।” वह रोने लगे, और कोई भी नहीं जानता था कि कैसे उन्हें संतुष्ट करना है। उन्होंने कहा, “मुझे चंद्रमा चाहिए।” उन्हे कोई भी खिलौने दिया, वह फेंक दिया था। उन्होंने कहा,कैसा बच्चा है, अजीब बात है वह चाँद लेना चाहता है, अब उसे चंद्रमा कैसे दिलवाए? “उन्हें पता नहीं था कि कैसे, इस समस्या को हल करना है। उन्होंने कहा, “किसी तरह आप मुझे चाँद दे दो, मैं खाना या कुछ भी नहीं करना चाहता, मुझे बस चंद्रमा चाहिए है। “यहां चंद्रमा आत्मा का प्रतिनिधित्व करता है, शीतलन क्षमता। उन्होंने चंद्रमा माँगा |आप सभी दांयी और है, इसलिए चंद्रमा की मांग करें, आत्मा को पुकारें,| और वे यह नहीं जानते थे कि इस श्री राम को कैसे संतुष्ट करना है, जो श्री विष्णु के अवतार थे, सभी चीजों के बजाये चंद्रमा की मांग कर रहें हैं, । इतना क्या कुछ और महत्वपूर्ण है? माँ के पास हमेशा एक अंतर्ज्ञान है। – , यह एक माया है, यह एक सुंदर नाटक है – उसने एक दर्पण लाया और उसे आईने में चंद्रमा दिखाया। उन्होंने कहा, “अब आप यहां चंद्रमा पा सकते हैं।” इतना प्यारा! और वह संतुष्ट था। यहां तक कि उस का प्रतिबिंब भी संतुष्टीदायक हो सकता है| आप दर्पण की तरह हैं और मैं आप में चंद्रमा का प्रतिबिंब देखना चाहती हूं।
प्यार जिसकी हम बात करते हैं, सूक्ष्म होना है। जब आप सचमुच आनंद लेते हैं तो यह वास्तव में सूक्ष्म हो जाता है। किसी को कुछ देना भी इसे पहचानने के तरीकों में से एक है। जब आप देने का आनंद लेना शुरू करते हैं – न लेते हुए, बस देते रहना – तो आपको पता होना चाहिए कि भौतिक स्तर पर आपने महसूस किया है, आपने केवल भौतिक स्तर पर सूक्ष्मता के उस तट को छू लिया है| भारत में इसे आप भावना के स्तर पर महसूस कर सकते हैं – ,| मेरा मतलब है, हर कोई अपने बच्चों को प्यार करता है,| कि यंहा यह बहुत ज्यादा है, बहुत अधिक फ़ैल रहा है। मेरा मतलब है, की वे अपने देश को भी अपने बच्चों के नाम पर बेच सकते हैं। यह बहुत अधिक हो रहा है, उनकी पत्नियों – – उनके पति, यह एक अलग ही यात्रा है दूसरा पक्ष पश्चिम का है, जहां वे इस निरर्थक प्रेम में विश्वास नहीं करते हैं। इनही दोनों के मध्य में, प्यार की सूक्ष्मता, यह है, कि किसी व्यक्ति से प्यार करना, बिना किसी तर्क, लाभ या रिश्ते के चाहे जो हो.|, सिर्फ प्यार का उत्सर्जन करना है चाहे आपको मान्यता मिले या नहीं, सिर्फ प्यार का उत्सर्जन करते रहना हैं यही प्यार का सूक्ष्म तरीका है वह प्यार लोगों को ठीक करता है, प्यार से आराम मिलता है – यह आरामदायक पक्ष है, यह आराम देता है शुरू करने के लिए, हमें दूसरों के सुखों को देखना चाहिए। स्वार्थ पना प्यार के खिलाफ है| लोग मेरा बिस्तर बनाना चाहते हैं ठीक है, वे मुझसे प्यार करते हैं मुझे पता है लेकिन यह प्यार दूसरों तक व्याप्त होना चाहिए |
बस वे मुझसे प्यार करते हैं, और दूसरे वे खुद को प्यार करते हैं यह अच्छा नहीं है।
मेरे और उनके बीच एक बड़ा अंतर है जो पूरी तरह दूसरों के माध्यम से भरा जाना चाहिए | दूसरा कौन हैं? क्या सहज योगी ? हम कभी भी प्यार से किसी अन्य सहज योगी का बिस्तर नहीं लगाते – बहुत ही मुश्किल से – यह तो बहुत अधिक हो गया | लेकिन अन्य सहज योगियों के दोषों को जानने के लिए! कि, “आप बहुत जल्दी उठ गए, आपने जोर की आवाज़ से नल खोला खोला, मैं सो नहीं सका”, यह एक बहुत ही आम शिकायत है “उन्होंने सुबह सुबह दरवाजे को टक्कर मार दिया, उन्होंने एक शोर मचाया।” चूँकि आपके मन अब बाहर हैं, विचारों के साथ, आप यहां इतने तनावपूर्ण हैं कि आप कहीं भी कोई आवाज सह नहीं सकते हैं |मुझे लगता है, अगर यह स्थिति है, तो, मेरा मतलब है, लोग केवल एक चर्च परिसर में खुश रह सकते हैं | भारत में, आप देखते हैं, हम कहीं भी किसी भी तरह के शोर को कष्टप्रद नही मानते हैं| मेरा मतलब है, जैसा कि मैं जहाँ भी रहती हूं, वहां एक रेलवे स्टेशन हमेशा आसपास रहा है। हम सब शंटिंग की आवाज़ सुन सकते थे, सब कुछ चल रहा था और मैं वास्तव में उन सभी का आनंद उठाती थी। इसलिए, जब हम दूसरों को आराम देना शुरू करते है उनके शरीर को ,मन को जो की बहुत दूर की कोडी है ,सुखद और सुन्दर बातें कहना सम्मानित लगता है|क्योकी , पश्चिम में उन लोगों को ढूंढना बहुत कठिन है जो दूसरों को मिठी बातें कहने के लिए शब्द खोज सकते हैं। भारत में, खासकर महाराष्ट्र में मराठी भाषा बहुत कठोर हो सकती है (मराठी।) मीठा शब्द बोलो, कुछ मिठा बोलो, दयालु और सुंदर बनो। यह सुनना बहुत अच्छा लगता है कि आप एक-दूसरे के लिए मधुर है|जब लोग आते हैं और मुझे बताते हैं कि, “अमुक अमुक सहज योगी आए और मुझे आराम दिलाया, और बहुत दयालु थे,” मैं सचमुच महसूस करती हूं कि सहज योग एक बड़े पैमाने पर काम कर रहा है। मैं इसे बहुत बड़े स्तर पर महसूस करती हूं। ऐसे हजारों हो सकते हैं, उसमे क्या है? वहाँ कोई गुणवत्ता नहीं है , मुझे कहना है ,की अपने विशुद्धी को उचित तरीके से ढालने की कोशिश करें, अन्यथा आपको विशुद्धी की परेशानियां होंगी, । वह भाषा का उपयोग करने की कोशिश करें जो अत्यंत मीठी है इसका अर्थ पाखंड नहीं है, नहीं। आप अंदर से महान हैं, आप प्यार करना चाहते हैं। लेकिन आपके अहंकार का एक अवरोध है। जब आपके प्रेम के प्रकाश उस अहंकार से गुजरते हैं, तो यह खोटा साबित हो जाता है, यह बर्बाद हो जाता है, यह खराब हो जाता है और परिणामस्वरूप आप दूसरों को कड़े शब्द कहते हैं। अपने विशुद्ध चक्र के माध्यम से मीठा होने की कोशिश करें एक बार जब आप ऐसा करते हैं, तो आप अपने साक्षी भाव को बहुत अच्छी तरह विकसित करेंगे। क्योंकि, सब से पहले आप स्वयं को देखते हैं जो दूसरों के लिए बुरा होने की कोशिश कर रहा है, और उस घृणितता का आनंद लेने की कोशिश कर रहा है। आपके विशुद्ध में एक हिटलर बैठे हैं और उस हिटलर कोआप देखना शुरू कर देते हैं, “ठीक है, मि. हिटलर।” देखिये, क्योंकि यह आपके अहंकार को बहुत अनुकूल लगता है,और जिसे हम बुद्धिमत्ता कहते हैं। यह कुछ बहुत ही कठोर कहना चाहता है, आप हमारी ग़लतियों को देखते हैं, आप देखते हैं, “आप बहुत बुद्धिमान हैं, बहुत तेज हैं।” यह केवल अहंकार है, अहंकार के एजेंटों में से एक। तो अपनी जीभ से मीठा होने का प्रयास करें| यहां, वहां छोटी चीज़ों के लिए लोगों का मजाक बनाना आसान है, कुछ भी जो आसानी से बन रहा है (मराठी।) महाराष्ट्र में, लोग इस बात के लिए जाने जाते हैं – हर किसी का मजाक कैसे बनाये| लेकिन जब हम दूसरों का मजाक बनाना शुरू करते हैं, तो हम स्वयं भी मजाक का लक्ष्य बन जाते हैं। अंग्रेज भी ऐसे ही हैं, बहुत ज्यादा हर कोई, मुझे कहना चाहिए, लेकिन अंग्रेज हर किसी का मज़ाकिया बनाने के लिए काफी विशिष्ट है |बेशक, सहज योगी अब महसूस कर रहे हैं। हर किसी के पास ऐसे मसलों में पेश आने की की अपनी शैली है जैसे, मैं कहूंगी, कि ,अमेरिकी हैं – उन्हें कोई आत्मसम्मान नहीं है|, खुद के लिए कोई सम्मान नहीं हैं| मेरा मतलब है, उनको खुद या किसी और के जीवन या किसी के लिए कोई भी सम्मान नहीं है … उनमें किसी भी प्रकार का सम्मान नहीं है। भारतीय पाखंडी, बहुत दमनकारी लोग हैं। उस तरह, हर कोई की समस्या है|
अब आप सहज योगी बन गए हैं, आप अंग्रेज नहीं हैं, भारतीय, अमेरिकी – कुछ नहीं। आप सहज योगी हैं आप भगवान के एक महान – बहुत, बहुत महान संगठन से संबंधित हैं। और सहज योग एक ऐसी जगह है जहां आपको हर तरह से सीखना है। भारतीयों को सीखना होगा कि कैसे ईमानदार होना चाहिए और अंग्रेजो को प्यार करना सीखना होगा। अमेरिकियों को सीखना होगा कि कैसे आत्मसम्मान होना चाहिए। हम सभी को सीखना है, त्यागो अपनी झूठी पहचान, और सूक्ष्म और सार्वभौमिक बनना होगा और ऐसे मूल्यों के लोग,कि जो भी देखे वह कहेंगे कि अमेरिका में माँ ने अब्राहम लिंकनओ, रूस में टॉल्स्तायों , महाराष्ट्र में शिवाजीयों को बनाया है । मैं बहुत महत्वाकांक्षी हूँ, मुझे कहना चाहिए। लेकिन मैं अपने आप में और आप में वास्तविकता देखती हूं। उस आधार पर, मैं कहती हूं, किसी को उस विशेष गुण के लोगों को बनाना पड़ेगा, जिनके गुण उत्कृष्ट आध्यात्मिक गुण हैं जो इतने सूक्ष्म हैं, इतने खूबसूरत हैं, इतने प्यारे हैं, समझदार हैं। और फिर भी, स्टील की तरह, कोई भी उन्हें अपने सिद्धांतों से ,तत्वों से नहीं हिला सकता है, , यह ऐसा ही है, इतना सरल है और फिर आप अपने प्यार का आनंद लेना शुरू करते हैं, अपने गुणों का आनंद ले रहे हैं, हर चीज का आनंद ले रहे हैं और दूसरों के लिए करुणा रखते हैं।
तो आप शिकार नहीं हो सकते, आप शिकार होते है क्योंकि आप में सम्वेदना नहीं है करुणा में तुम कभी नहीं पकड़ोगे, कभी नहीं। एक माँ को कभी भी उसके बच्चे से कोई बीमारी नहीं होती है उसे अपने बच्चे से कभी भी बीमारी नहीं होती है, यह एक तथ्य है। बच्चा एक तपेदिक रोगी हो सकता है या अन्य कोई रोगी हो सकता है, वह कभी शिकार नहीं होती , क्योंकि वह प्यार करती है।
उसी तरह, जब आप वास्तव में प्यार करते हैं, तो आप कभी भी कैसे भी शिकार न होंगे। तो फिर क्या साफ़ करना है? किस चीज को साफ करना है, क्या करना है – इस से क्या फर्क पड़ता है? आप अपने भाव को बहा रहे हैं इस समय, मेरे बच्चे, मेरी सहज योगी उस स्तर पर हैं कि वे बिना किसी भय के अपना दिल खोल सकते हैं। यह एक बहुत अलग अवस्था है जन्हा आप पंहुच गये है|; आप एक अलग चरण में हैं बस अपनी ताकतों को जान लें, पता हो कि आप ये हो बस अपना दिल खोलो
जैसे, एक दिन मैंने किसी को देखा, वह सभी पक्ष से बहुत बुरी तरह से पकड़ा हुआ था – सहज योगी नहीं था, कोई और । और मैंने उससे पूछा, “आपने अपने आप में इतने भूतों का प्रबंधन कैसे किया हुआ है?” हर, हर गुरु का नाम, वह वहां है। मैंने पूछा, “तुमने कैसे व्यवस्था कि?” उन्होंने कहा, “मेरे पास बहुत खुला दिल है।” (हंसी।) “हे भगवान,” मैंने कहा। मैंने कहा, “यह एक गंदी जगह में एक खुली खिड़की की तरह है आपको हर गंध, हर मच्छर और कीटाणु मिलते हैं। “
इसलिए, उस हद तक आपका दिल खोलने का डर, उस अनुभव से, उस से आता है लेकिन अब, आप ऐसे स्तर पर हैं, कि अपना दिल खोलें कोई डर नहीं होना चाहिए; कोई समस्या नहीं होगी। भौतिक समस्याओं का समाधान करना मुश्किल नहीं है। जैसे, कोई मेरी तस्वीर ले जा रहा था जो एक चांदी के फ्रेम में था, और वह बल्कि चिंतित थी क्योंकि सीमा शुल्क वाले उसे रोक नहीं सकते हैं। बेशक, वे तस्वीर रोक नहीं सकते हैं, लेकिन शायद चांदी के फ्रेम को ? और इस सज्जन ने मुझे बताया कि वह उसे एक फ्रेम, चांदी के फ्रेम के साथ ले जा रहा था और उसने सोचा कि लोग आपत्ति करेंगे लेकिन जैसे ही उन्होंने फोटो को देखा, उन्होंने तस्वीर को नमस्कार किया,और फ्रेम के बारे में भूल गया।
इतनी सारी समस्याओं का समाधान किया जा सकता है, भौतिक समस्या – इतने सरल हैं, हल करने के लिए| इतना आसान है। सबसे आसान है, शारीरिक समस्याएं भी | मुझे कुछ सहज योगियों के बारे में पता है जो सहज योग में हैं, सात साल से। लेकिन फिर भी वे अपने शरीर, उनके भौतिक शरीर, उनकी मुसीबतों से डरे हुए हैं और ये और ये। अगर वे उस भय को छोड़ सकते हैं, तो वे इससे बाहर निकल जाएँगे| यह ऐसा एक दुष्चक्र अंदर बना हुआ है। और यही बात रही हमारे दिल खोलने की, जैसा की हम कहते है शल्य-चिकित्सा पर काम करती है, । हमें डर है कि हमारे दिल फिर से व्यर्थ की चीजों के शिकार हो जाएंगे, इसलिए हम अपना र्ह्दय नहीं खोलना चाहते हैं उस डर को मैं समझ सकती हूँ लेकिन अब आप सहज योगी हैं, तो बात समाप्त । ऐसे सभी लोगों को, सभी डर को, चले जाने के लिए कहें ये। आपको अवश्य कहना चाहिए|
जब आपको पता चलता है कि आप आत्मा हैं, आप उतनी शक्तिशाली आत्मा हैं, बस इसे स्थिर रखने की कोशिश करें। यह कैसे प्रसन्न महसूस करती है? बहुत सरल है। कब आप वास्तव में प्रसन्न महसूस करते हैं| जब आप कुछ देते हैं, केवल माताजी को ही नहीं। मेरे लिए, मैं जानती हूँ।मै जानती हूँ, की यदि मै आपसे कुछ लेती हूँ तो आप बहुत प्रसन्न होते है| लेकिन किसी और को; कुछ प्यार, आराम दें| यह आवाज और यह वाणी कितनी महान शक्ति है, ताकि आप अच्छी चीजें कहकर दूसरों को सुखी कर सकें। क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि परमेश्वर ने आपको कितनी शक्ति दी है? आप दूसरों को एक भी पाई दिए बिना, खुश कर सकते हैं, केवल अच्छी बातें कह कर| यदि आप एक मंत्र कहते हैं, तो आप उन्हें एक सूक्ष्म तरीके से सुखी करेंगे। यदि आप उनके भीतर ईश्वर से प्रेम पैदा करते हैं, तो यहऔर भी अधिक अच्छा है। और उस का आनन्द इतना है क्योंकि आत्मा आनन्द है जितना अधिक आप उसे खोलते हैं, उतना ही प्रकाश आता है, उतना ही यह काम करता है। तो उस डर को छोड़ दें जो आपके अनुभवों के कारण आपके भीतर है। अब, यह एक नये जीवन का एक नया अनुभव है, जहां आपकी उर्जा आत्मा से आती है, जो प्रेम है। एक शब्द में यह प्रेम है। और तीन शब्दों में, यह सत्य है, यह चित्त है और यह आनंद है। सब एक साथ रखो तो यह प्यार है| जब आप उन्हें मिश्रित करते हैं, तो यह प्रेम बन जाता है और यही तुम्हारे पास है – यह प्रेम की महान शक्ति है आपके चित्त से, आप दूसरों से प्यार करते हैं ध्यान देने योग्य, ध्यान देना भी, पर्याप्त है! देखो, मुझे रूमाल की ज़रूरत थी, ठीक है यह सच है। मुझे रूमाल की जरूरत थी। मेरा मतलब है, आम तौर पर मैं इन सभी चीजों को भूल जाती हूं। फिर उन्होंने जरूरत महसूस की, “माँ को सिर्फ रूमाल की जरूरत है।” वे रूमाल लेकर आए बहुत सरल क्रिया है, आप जानते हैं, लेकिन ध्यान मुझ पर है रूमाल जैसी छोटी चीज़ों के साथ आप लोगों को सुखी कर सकते हैं एक सहज योगी के लिए, रूमाल भी देना, अपने आप में चैत्न्यदायी है|।
दयालू रहना भी एक तरीका है लोगों को जितने का |। लेकिन उन्हें आत्मसाक्षात्कार देना सर्वोच्च चीज है |अब, जब आप सूक्ष्म और अधिक सूक्ष्म बन जाते हैं, तो आप देखेंगे कि आपको उन लोगों के साथ सहानुभूति नहीं होगी जो पीड़ित हैं, सहानुभूति नहीं, लेकिन आप उनके लिए प्यार रखेंगे। सहानुभूति और प्रेम के बीच एक बड़ा अंतर है| जब आप सहानुभूति रखते है उसका क्या अर्थ है? आप भद्दे साझा करें करुणा। आप दुःख साझा करते है|दुःख,…यदि आप दुःख साझा करना चाहते है कीजिये;, लेकिन अगर आप आनन्द साझा करना चाहते हैं, तो आपको सहानुभूति नहीं होगी, आपके पास प्रेम होगा। आप अपनी आत्मा के अपने आनंद को किसी अन्य व्यक्ति के साथ साझा करना चाहते हैं, तो हो सकता है की आप उस व्यक्ति से ऐसे तरीके से बात करें जो की बहुत मोंजू जैसे की आप उसके पैरो में गिर रहे है ,प्रतीत न हो । देखिए, यह राजनेताओं या व्यापारिक लोगों का काम है, न कि आपका ;आप उनमें से किसी भी व्यवसाय की तलाश नहीं कर रहे हैं; आप चाहते हैं कि वे आत्मानुभूति लिए आएँ। तो, जरूरत है उन चीजों को बताने की जो गलत हैं। आपको दृढ़ता से कहना होगा की, “यह बिल्कुल गलत है, बेतुका है।” आपको उस बिंदु, पर उस बिंदु को समझाना होगा |, यदि आप इस तरह से कहते रहेंगे, जैसे, यह या वो ,तो यह कभी उनके सिर में नहीं जायेगा क्योंकि वे भूत हैं और आपको उन्हें कठोरता से मारना पड़ता है यह भी प्यार है।
तो, प्यार सबसे मजबूत बात है और मधुर बात है। इस तरह का एक सुंदर संयोजन और एकाकारिता है विवेक ,सूक्ष्म विवेक से है , वही उसे प्राप्त कर सकता है। अब फिर यह मन काम करेगा, “यह कैसे करे?” तो, मुझे लगता है कि आप सभी को इस शब्द “कैसे” को समुद्र में फेंक देना चाहिए। अंग्रेजी भाषा में एक और बहुत अच्छा शब्द है जिसे आप का उपयोग करना चाहिए: “क्यों नहीं?” इस तरह से आप अपने आप को आश्वस्त कर सकते हैं, निश्चितकर सकते हैं, इस तरह से परमात्मा के आशीर्वाद में इसे कार्यान्वित करो|। आपको उन आशीर्वादों को दूसरों तक पास करना है बस, ये सब कुछ है कुछ और नही करना है, बस उस प्रकाश को दूसरों को पास करें इसके लिए, आपको एक ऐसे व्यक्ति की आवश्यकता है जो प्यार को अपने करियर के रूप में स्वीकार कर लेता है, वह व्यक्ति जो प्रेम की पूजा करता है, जो व्यक्ति सोचता है कि प्रेम सब से ऊपर है
तो आज, सूर्य को ग्रहण से बचाने के लिए, हम उसके प्रति अपना प्यार बढ़ाते हैं और उनसे आग्रह हैं कि उनकी पूजा करने वाले लोगों के दिल में प्रेम पैदा करें। जो लोग सूर्य की पूजा करते हैं, उन्हें पता होना चाहिए कि क्रिस्ट उस केंद्र में रहते है, जो और कुछ नहीं बस प्रेम था। उसके सारे जीवन उसने प्रेम किया उसने खुद को त्याग दिया क्योंकि वह आपको इतना प्यार करता था कि वह आप सभी को भगवान के राज्य में शामिल करना चाहता था। उसने भगवान के वर्जित क्षेत्रों की वेदी पर खुद को बलिदान किया| । उसने आपके अहंकार और प्रतिह्न्कार को शोषितकर आपका वंहा पहुंचना संभव बनाया। वह प्रेम का दूत है जो सूर्य पर उत्पन्न हुआ था। तो, सूर्य के प्रति सबसे बड़ा न्याय करने के लिए आज फैसला करना है कि आप अपनी पूजा के रूप में प्रेम को अपनाएँगे, आप की आराधना के स्वरूप में|
भगवान आप सबको आशीर्वाद दें!
कोई सवाल? हाँ।
प्रश्न: ऑस्ट्रेलियाई के बारे में, माँ? आपने कहा था कि अमरीकी … (अश्रव्य।) (हंसी।)
श्री माताजी: वे तुलनात्मक रूप से भलेचंगे लोग हैं, लेकिन उन्हें गहरा होना चाहिए। वे अभी भी एक संघर्ष में हैं, मैं कहूंगी कि उन्हें लगता है कि वे पूरी दुनिया से दूर हैं, अलग हैं, और उन्हें जिंदगी के गहरे तरीकों तक जाना होगा। वे अन्य देशों की तुलना में लोगों को प्यार करने वाले हैं, इसमें कोई संदेह नहीं है, लेकिन उन्हें गहरे , गहराई में जाना होगा। आपको बहुत गहरा, बहुत गहरा होना चाहिए। आपको पता होना चाहिए कि ऑस्ट्रेलिया को एक बार अफ्रीका और भारत के बीच रखा गया था। मैं पर्थ, अफ्रीकी पक्ष और फिर सिडनी भारतीय पक्ष के लिए जा रही और उन सभी स्थान पर जा रही हूँ| हूं। लेकिन आपको उन सभी पश्चिमी संस्कृति से संतुष्ट नहीं होना चाहिए जिन्हें आपने आत्मसात किया है, आपके पास पश्चिमी चीजें हैं, लेकिन आप पश्चिम में नहीं हैं, आप पूर्व में हैं| चूँकि आप पश्चिम में नहीं हैं, अगर आप उनकाअनुसरण करने की कोशिश करते हैं, तो यह सिर्फ नकल है, यह बहुत सतही है| इसलिए, मैं कह रही हूं कि, सहज योगी नहीं, वरन अन्य,ऑस्ट्रेलियाई लोग बहुत सतही लोग हैं। वे स्कॉटलैंड के लोगों से शराब पीने में बहुत ज्यादा पीते हैं|, मेरा मतलब है हर तरह से, वे बहुत, बहुत … बहुत ज्यादा,| मै कहती हूँ ,वे कैसे अभद्र है।
इसलिए उन्हें सुरुचिपूर्ण जीवन की गहरी समझ विकसित कर सूक्ष्म पक्ष को प्राप्त करना चाहिए|, जीवन की सुंदरता, भाषा की सुंदरता, ठीक है| ऐसा है कि यदि वे इस प्रकार चलते हैं, तो यह एक बढ़िया स्थान होगा। अंग्रेज इस मायने में बहुत ही विकसित हैं। उनके पास बहुत सुरुचि हैं, सुंदरता की समझ, यह बात, वह बात लेकिन वे ऐसे बन गए हैं, की वे सोचते हैं कि वे सब से ज्यादा अक्लमंद हैं, वे बेवकूफ हैं। और उन्हें लगता है कि वे विवेकवान हैं, आप देखिए ऑस्ट्रेलियाई सामान्यत नहीं सोचते है कि वे सबसे बुद्धिमान हैं, लेकिन उन्हें पता होना चाहिए कि वे सबसे बुद्धिमान बन सकते हैं |चूँकि आप सतही स्तर पर रहते हैं, आपको लगता है कि सब कुछ सतही स्तर पर हो जाना चाहिए, पर यह बात नहीं है। आप सबसे विवेकवान हो सकते हैं जैसा कि अंग्रेज हो सकते थे, आप हो सकते हैं, कोई भी हो सकता है। और जैसा कि, यह मूलाधार है, आपको विवेकवान बनने वाले, पहले होना चाहिए। हो सकता है कि सहज योग का संदेश ऑस्ट्रेलिया से अधिक शुरू करना चाहिए। तो, अपने आप में गहराई में जाओ, गहराई विकसित होना चाहिए। वे अभी भी समुद्र और सूरज के बहुत शौकीन हैं, ऐसा वे अपने पुरे जीवन करेंगे। ऐसी किसी चीज़ की परवाह करने की कोई आवश्यकता नहीं है, यह कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं है। समुद्र तुम्हारे भीतर है, सूरज तुम्हारे अन्दर है, आत्मा तुम्हारे भीतर है, सब कुछ तुम्हारे भीतर है। भीतर का आनंद लेने की कोशिश करो इसके लिए या कहीं भी प्रकृति में जाने का विचार छोड़ दें|, यह आपके अन्दर है, यह सभी के भीतर है| यही मेरा क्या मतलब है, कि, अगर आप चीजों को बनावटी रूप से देखते हैं, तो आप इसे अन्य लोगों से सीख लेते हैं। अब इंग्लैंड में बाहर जाने की दीवानगी पूरी समाप्त हो गइ है, व्यावहारिक रूप से लोग इस तरह से बाहर नहीं जाते। या वे उस हद तक समुद्र के पास भी नहीं जाते हैं ,लेकिन ऑस्ट्रेलिया में अभी भी यह है |, आपको यह सब सीखना होगा। मुश्किल तरीके से सीखने के बजाय, इसे कम करना बेहतर है, गहरा और गहरा होना है। अपनी गतिविधियों को कम करें, गहरे हो जाएं, समुद्र पर जाने से अधिक ध्यान करे| मुझे लगता है,सागर यात्राए बहुत, सूरज स्नान भी बहुत अधिक है, यह सभी बहुत सतही है। उन सभी को यकृत की समस्याएं हैं| आपको अब सूरज में नहीं जाना चाहिए, आपको अपने घरों को बंद करना चाहिए और अंदर बैठकर ध्यान करना चाहिए। हमें जो समस्या है वो लीवर की है|
अतः, किसी भी सवाल का उपेक्षा मत करो क्योंकि भगवान ने तुम्हें, मूल रूप से आप विवेकवान बनाया है| जानते हैं, इस पूरी मिट्टी में ज्ञान है। लेकिन कहां है, क्या आप इसे ऑस्ट्रेलिया में कहीं भी पाते हैं? विवेकवान लोगों को ढूंढना मुश्किल है, है ना? सहज योगी अन्य आस्ट्रेलियाई लोगों से बात नहीं कर सकते, कितनी खराब बात है| इसका कारण यह है, आप अन्य लोगों का अनुसरण कर रहे हैं जो खुद बिलकुल ठीक नहीं हैं। केवल स्वयम के अनुसार चलें| घरे में जाना ही एकमात्र विवेक है, स्वयं को खोजो। क्योंकि आप विवेक हैं, इसलिए आप सारी दुनिया को विवेक देंगे |यह सब ऐसा ही है, आप जानते हैं, हर जगह उल्टी पुल्टी स्थिति। ऑस्ट्रेलिया में, साकार विवेक होना चाहिए; पर वे सबसे मूर्ख लोग हैं वे हमेशा अपने कूटनीति में गलत प्रकार के लोगों का समर्थन करेंगे। मेरा मतलब है कि वे सभी तरह के मूर्खतापूर्ण काम करते हैं। क्यूं कर? क्योंकि वे यह जानने की अपनी गहराई में नहीं गए हैं कि वे स्वयं विवेक है| महाराष्ट्रीयनों की तरह , जिनके पास कुंडलिनी है, वे सो रहे हैं। वे इस मंदिर में जाने के आंदोलन में व्यस्त हैं, एक महीने के लिए वे उस मंदिर तक पैदल चल कर जाएँगे और वहां श्रीकृष्ण की पूजा करेंगे। वे समझना नहीं चाहते|और इस के अलावा, वे अलग-अलग तरीकों से तंबाकू का सेवन करते हैं आप देखते हैं, यहां तक कि वे इस्तेमाल करते हैं – जो आप (हिंदी या मराठी) को कहते हैं – तंबाकू से बने एक तरह का पाउडर, अपने दांतों को रगड़ने के लिए, क्या आप इस पर विश्वास कर सकते हैं? मेरा मतलब” दांत “, जो श्री कृष्ण की जगह है। वे इस उंगली से अच्छी तरह से रगड़ते हैं और श्रीकृष्ण की पूजा में जाते हैं, बेतुके लोग। वे इस तम्बाकू का एक छोटा सा हिस्सा लेंगे, इसे तेज़ बनाने के लिए, एक प्रकार की चूने के साथ मिश्रण करें, आप क्या कहते हैं, कैल्शियम कार्बोनेट,, एक तरह की चीज और इन मसूड़ों जो स्वयम श्रीक्रष्ण है के पास रखते है| एक महीने के लिए गायन पर जाते हैं, कोई भी खाना नहीं खाते हैं, कुछ भी करके जाते हैं और वहां जाते हैं और इन भयानक ब्राह्मणों द्वारा सर फुट्वाते हैं। और यह कुंडलिनी का स्थान है, जरा सोचो।
यूरोप में भी ऐसा ही है जो की जिगर है, जो नाभी है और ये ,वे लोग हैं जो पीते हैं और खाते हैं वे पूरी दुनिया में किसी और की तुलना में अधिक भोजन का उपभोग कर सकते हैं। आप स्पेन जाते हैं, आप चकित होते हैं, वे सभी को खा सकते हैं (हंसी।) फिर अमेरिकि, वे भी बहुत खाते हैं। लेकिन अमेरिकियों, जैसा कि मैंने आपको बताया था, उनके पास कोई आत्म सम्मान नहीं है। कोई आत्म सम्मान नहीं वे आपको पांच रुपये देंगे और आपको सौ बार बताएंगे, हमने आपको पांच रुपये, पांच रुपये दिए हैं, यह भयानक है। जिनके आत्म सम्मान नहीं हैं, वे किसी दूसरे व्यक्ति का सम्मान नहीं कर सकते हैं। और वे खुद परजीवी हो सकते हैं, बहुत परजीवी, अत्यंत परजीवी लोग~ एक संगठन था जिसने गाविन को लिखा था,और वह उनसे बहुत गुस्सा था, क्योकि उन्होंने कहा, “माँ एक ऐसी अमीर महिला है, वह अमेरिका की यात्रा के लिए क्यों भुगतान नहीं करती और उन्हें अपने हॉल का भुगतान भी करना चाहिए? हम उसे केवल खाना देंगे। “तो गाविन को बहुत गुस्सा था। मैंने कहा, “नहीं, उन्हें भी बताओ, ‘मैं अपना भोजन और तुम्हारे का भी भुगतान करूंगा। और आप के लिए कुछ अच्छा उपहार भी दूंगा । ‘यह ठीक है, मेरा मतलब है।’ और उन्होंने मुझसे पूछा कि – मैं एक चर्च गयी- और उन्होंने कहा, “नहीं, नहीं, हमें आपको कुछ पैसे देने होंगे।” मैने कहा, “क्यों?” उन्होंने कहा, “यंहा संग्रह करने के लिए एक रिवाज है।” मैंने कहा, “नहीं, कृपया नहीं करें”। उनका एक संग्रह था, मुझे लगता था कि तीन डॉलर और दो – आगे क्या है डॉलर के लिए? (योगी: सेंट) – दो सेंट, तीन डॉलर-दो सेंट जो उन्होंने एकत्र किए थे। मेरा मतलब है, किसी भी प्रकार का कोई आत्म सम्मान नहीं है, आप जानते हैं? वे सोचते हैं कि जो भी वे करते हैं वह सब ठीक है इतना अहंकार उन्मुख, भयानक। हमेशा गलत देशों का समर्थन करें, हमेशा गलत नीतियों का समर्थन करें जैसे वे अर्जेंटीना, चिलीस का समर्थन करेंगे, जो बहुत ही दमनकारी लोग हैं उन्होंने हजारों और अपने हजारों नागरिकों, सरल लोगों को मार दिया है, और सिर्फ वे आटोक्रेट हैं सभी जर्मन वहां पहुंच गए हैं और जर्मन लोग उन्हें फासीवाद सिखा रहे हैं। फासीवाद इन देशों में बढ़ने वाला है और इन तथाकथित मूंगफली लोगों को ले लो। लेकिन वे क्यूबा के समर्थन में नहीं होंगे, क्योंकि यह साम्यवाद है ठीक है, साम्यवाद बुरा है, लोकतंत्र अच्छा है। लेकिन आप डेमोक्रेट के रूप में क्या कर रहे हैं? आप आटोक्रेट का समर्थन कर रहे हैं, हमेशा गलत चीजों का समर्थन करते हैं। वियतनाम में एक गड़बड़ किया, वहाँ और हरजगह एक गड़बड़ की। उन्हें पता नहीं कि कैसे चीजों को साक्षी भावसे देखा जाए,लेकिन उनके पास अब्राहम लिंकन थे, इसलिए आपको पूरे देश को क्षमा देना होगा। लेकिन आप एक अब्राहम लिंकन के बल पर साथ नहीं रह सकते!
इन दिनों भारतीय भयानक हैं मेरा मतलब है, आप किसी को यहाँ मार सकते हैं और कुछ पैसे दे कर इससे बाहर निकल सकते हैं। यह ऐसा ही है । जब राजनेताओं को चुनाव करना पड़ता है, तो पैसे डालते हैं, इसलिए सभी बकवास, सभी बेकार लोग यहां व्यापारीयों द्वारा समर्थित होते हैं। व्यापारिक लोग पैसे देते हैं, राजनेता चुनाव लड़ते हैं और सब कुछ व्यापारिक लोगों के नियंत्रण में होते हैं जो कि कंजूस बुरी तरह, भयानक, बिल्कुल बेकार, आत्म-कृपालु लोग हैं। और ये राजनेता सत्ता लेते हैं, वे विध्वंसक होते हैं, भ्रष्टवकील , विध्वंसक, बेकार लोगों के पास कोई दिमाग नहीं होता है, वे मंत्री बन जाते हैं। यह ऐसी गड़बड़ है, पैसे के लिए सब कोई, कुछ भी |
कोई व्यक्ति बुद्धिमान है, उसके पास कोई पैसा नहीं हो सकता है, एक तथ्य है। उसे हाथों हाथ नहींलिया जाता है|हमेशा, आप पाएंगे, एक व्यक्ति जो सरस्वती का भक्त हैउसे इतनी लक्ष्मी नहीं मिलती है। आप एक व्यापारी से बात करते हैं, तुरंत आपको पता चल जाता है, कुछ दिमाग थोडा ढीला है (हंसी।) यह अमेरिकियों के साथ भी सच है, थोड़ा ढीला है। और अगर आप किसी बौद्धिक से बात करते हैं, तो दिमाग कुछ बहुत तंग मिलते हैं। (हंसी।) यह समस्या है। और इस वजह से, इस देश के पैसा उन्मुख लोगों में बेवकूफ लोग हैं। तो आपको बेवकूफ लोगों के हाथों में खेलना होगा
अब, यह वह देश है जहां योगेश्वर रहते थे। महान संत रहते थे, उन्होंने सभी पद्धति की परवाह नहीं की थी और ये सभी इन सभी पद्धतियों की भारतीयों को क्या जरूरत है? उन्हें अच्छी तरह से रहना चाहिए, उन्हें साफ होना चाहिए, साफ होना चाहिए, उन्हें भद्दा नहीं होना चाहिए, क्योंकि लक्ष्मी यहां रहती हैं। लेकिन जिस तरह से वे आधुनिक होते जा रहे हैं, आप देखते हैं, नायलॉन पहनते हैं और घर में स्टेनलेस स्टील होते हैं। उनके लिए, जब मैंने उन्हें बताया कि मैं आपके आश्रम के लिए झोपड़ियां बनाने जा रहा हूं, तो वे थोड़ा सा घबरा रहे थे। (हंसी।) उन्हें सीमेंट नहीं मिलने जा रही|, मुझे पता है कि ऑस्ट्रेलियाई सीमेंट से नफरत करते हैं। हम सीमेंट उपयोग करने नहीं जा रहे हैं, यह एक बात है जो मुझे यकीन है। हमारे पास पत्थर हो सकते हैं, लेकिन कोई सीमेंट नहीं। आप देखेंगे, हमारा आश्रम सभी के लिए आदर्श होगा। यह किसी भी अन्य की तरह नहीं हो सकता इसलिए मुझे अन्य आश्रमों के उदाहरण देने की कोशिश मत करो। मैं किसी से कोई मार्गदर्शन नहीं लेने जा रही हूं। हम सुंदर झोपड़ी में रहने जा रहे हैं, बहुत आराम से माँ के प्यार की सुरक्षा के तहत।
तो, कोई अन्य प्रश्न? ऑस्ट्रेलियाई लोगों से, मुझे हर किसी को घसीटना पड़ा, क्योंकि मैं नहीं चाहती कि किसी को चोट लग जाए। (हंसी।) कभी भी एक व्यक्ति को नही डांटते हैं, कम से कम दस को डांटते हैं तो यह ठीक रहता है। (हंसी।) मैं उससे कुछ नहीं कहने वाली हूँ। अब यह क्या है, दूसरा प्रश्न क्या है?
प्रश्न: फ्रांस के साथ क्या करना है, माँ?
श्री माताजी: एह? क्या है …
प्रश्न: फ्रांस …
श्री माताजी: फ्रांस क्या है? मैंने आपको पहले ही बताया है, फ्रांस एक शराबी है और सभी मद्यियों में उनके पास कोई मूल्य नहीं रह जाता है। उनके पास नैतिकता के बारे में कोई मूल्य नहीं है, कोई भी मूल्य नहीं है मेरा मतलब है, वे आप देख रहे शराबी हैं, कोई चेतन नहीं है, उन्हें संवेदना नहीं है, वे इंसान नहीं हैं, वे नशे में हैं। वे यही हैं वे शराबी हैं और ये नाभि मने जाते है , यकृत हैं। कल्पना करो, जिगर नशे में, भयानक है। लेकिन आप फ्रांस से भाग नहीं ले, ठीक है ना? मुझे पता है कि उन्होंने यह सवाल क्यों पूछा, वे सब भागना चाहते हैं। (हंसी।) यदि आप एक असली फ्रेंच हैं, तो आपको फ़्रेंच लोगों की देखभाल करना होगा; यह आपका कर्तव्य है, आप कर्तव्यबद्ध हैं। यदि आप ब्राह्मण हैं, तो आप सभी ब्राह्मणों को सही करना होगा, यदि आप मराठा हैं, तो आपको सभी मराठों को सही करना होगा। यदि आप वास्तव में हैं कि यदि मैं एक भारतीय हूं, तो मुझे भारतीयों को सही करना होगा। मुझे उन्हें सही करना है; मुझे उन्हें सही रास्ते पर ले जाना है| या फिर उन्हें नरक में जाने में भी मदद करनी चाहिए? हमें उनकी देखभाल करनी है; वे अपने ही लोग हैं उन्हें बाहर खींचने के लिए, भले ही आपके पास थोडा सा हिस्सा ही साड़ी का है, तो आप पूरी साड़ी निकाल सकते हैं। अपनी पकड़ वहाँ रखो यह बुद्धिमानी है| किसी को भी कहीं से बाहर निकलना नहीं है; आप हर जगह बसते हैं, मैंने कुछ उद्देश्यों के लिए आपको कंहीपर बसाया है बदलाव करने की आवश्यकता नहीं है; बदलाव की कोई जरूरत नहीं है। किसी को भी बदलाव करना नहीं पड़ता है
प्रश्न: माँ, क्या आप हमें अपने रहस्य बताएंगे? आप राज्यों, यूरोप में, भारत में, ऑस्ट्रेलिया तक रहे हैं। क्या दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका, चीन के बारे में? इनके सन्दर्भ में क्या है?
श्री माताजी: आप देखें, मैं समझाइश दूंगी की इन सब देशो के गुण दोष है? वैसे भी, हमारे शरीर में कई केंद्र हैं, है ना? न केवल सात, लेकिन हमें पहले सात प्रमुख पर ध्यान देना होगा। तो आइए हम इन सातों पर ध्यान दें क्योंकि हम वहां काम भी कर सकते हैं, जो पहले से मिल चुके हैं, आप देखते हैं? एक बार उन देशों में काम शुरू करने के बाद, मैं इसके बारे में भी बात करूंगी। क्योंकि उनकी पीठ पर मुझे कुछ नहीं कहना चाहिए। जब वे यहां होंगे, मैं आपको उन सभी के बारे में बताऊंगी। अफ्रीका है, भगवान उन्हें बचाए। मुझे नहीं पता। जैसा कि वे बहुत अच्छे थे, लेकिन आप लोग गए और अपने विचारों को उनके सिर में डाल दिया। तो, वे बिगड़े बुरी तरह बिगड़े मामले हो गये है|। वे आदिम लोगों के लिए ऐसे संगठित धर्म हैं, यदि आप उन्हें किसी भी तरह का संगठित धर्म देते हैं! भारतीय ईसाइयों की तरह, वे सबसे बुरे लोग हैं जो हम सोच सकते हैं; यहूदियों, भारतीय यहूदी, भारतीय मुस्लिम, वे बहुत ही कट्टरपंथी हैं, मेरा मतलब बेहद कट्टरपंथी है। यहां तक कि आप सभी ईसाई सहज योगी बन जाते हैं, लेकिन भारतीय ईसाई नहीं बनेगे। उनके लिए, मिशनरी का कुत्ता भी पूज्य है|, हाँ, यह मामला है यही कारण है कि मैंने उस समुदाय में जन्म लिया तो यह ऐसा ही है ,जो है। आप वंहाचले गए , और उन्हें ईसाई धर्म में बदल दिया है। और वहां, अन्य मुसलमान भी हैं वे बहुत कट्टरपंथी हैं, जो आप देखते हैं, एक नया मुसलमान, कहते हैं ज्यादा प्याज खाते हैं, क्योंकि भारतीयों इतने प्याज नहीं खाते हैं जो आप देख रहे हैं, इसलिए वह साबित करने के लिए ज्यादा प्याज खाता है कि वह एक अच्छा मुस्लिम है। यह वही बात है। और आपने उन्हें तथाकथित ईसाइयत दे कर उन्हें बहुत नुकसान पहुंचाया है, । मुझे उम्मीद है कि वे महसूस करेंगे ,और चीजें बाहर काम करेंगी। हम अल्जीरिया के माध्यम से काम कर रहे हैं; अल्जीरिया आकार ले रहा है, लेकिन यह एक निरंकुश देश है, सभी प्रकार की चीजें हैं। देखते हैं, हमें सहज योग और सहज योगियों पर निर्भर होना चाहिए। कुछ अन्य से अधिक सहज योगी ठीक है?
भगवान आपका भला करे!
प्रश्न (हिंदी में एक योगी) अनादी और अनहद क्या है? मैं रंग देख पाता हूँ
श्री माताजी: हाँ। बैठ जाओ।
मैं हिंदी में कहूंगी? उसने एक अच्छा सवाल पूछा है, “अनादी और अनहद क्या है?” अन्हादा एक आवाज है जो आप सुनते हैं; और वह कुछ रंग देखता है
(श्री माताजी हिंदी में जवाब देते हैं: जब आप आत्मा बन जाते हैं, तो आप को कुछ भी नहीं दिखना चाहिए, आप ऐसा बन जाते हैं, जब आप अंदर आते हैं, तो आप को बाहर कुछ भी नहीं दिखाई देगा। रंगों का दिखना, जब कोई हलचल होती है अग्न्या के दाहिनी ओर, फिर आप रंगों को देखना शुरू करते हैं। ध्वनि या अनहदा की सुनवाई, जिसके बारे में बात की जाती है, उसे समझना भी है। अनहद की सुनवाई इन कानों के माध्यम से नहीं होती [बाहरी कान] जब हमारे अंदर के कान खुले होते हैं, तो उस की आवाज मधुर संगीत की आवाज़ की तरह होती है और जो बाहरी कानों से सुना जाता है वह अनहद नहीं है, इसका मतलब है कि किसी प्रकार की समस्या है। इसका मतलब यह है कि ,आप या तो, उदाहरण के लिए, गायत्री मंत्र का जप करने की तरह बहुत पूजा की है, तो आप उस ध्वनि को सुनेंगे, क्योंकि गायत्री मंत्र का जप करते हुए, आपकी हलचल दांयी तरफ है। दाईं तरफ की हलचल आप में गर्मी उत्पन्न करती है इस गर्मी के कारण, आपकी नसें सूखी होने लगती हैं। और जब कान और नाक की नसें शुष्क हो जाती हैं, इस सुखने के कारण, इस प्रकार ककी आवाज़ आने लगती हैं। यह पूरी तरह से शारीरिक है, और इसमें कोई आनंद नहीं है। लेकिन जब अनहद आंतरिक रूप से सुना जाता है, तो एक तरह से, यह कानो से नहीं सुना जाता है, लेकिन यह महसूस किया जाता है। सभी चीजों के लिए ताल स्वयं प्रकट होता है यह नहीं सुना जाता है। उस कारण के भीतर एक प्रकार की शांति महसूस की जाती है, एक प्रकार की लय महसूस होती है। जब आप कुछ संगीत सुनते हैं, तो आप एक प्रकार की लय के साथ चलना शुरू करते हैं। उसी तरह, जब संगीत शुरू होता है, तो यह आपके लिए दिखाई नहीं देता है, लेकिन यह वास्तव में आप में होता है लय आपके बात करने और बोलने में प्रकट होता है, मिठास प्रकट होता है। यह अंतर है [अस्पष्ट]। रंग भी दिखाई नहीं देनी चाहिए। कुछ भी नहीं दिखना चाहिए समझ आया क्या? इसे सही किया जाना चाहिए यह होगा – मैं आपको बताउगी |, यह अगन्य चक्र के कारण है – यह अगन्य चक्र को ठीक करके होगा।)
उसका प्रश्न मैंने उत्तर दिया है … (योगी जारी है और श्री माताजी हिंदी में संक्षेप में उत्तर देते हैं।)
उसने मुझसे एक सवाल पूछा, कि उसने कहा; कि वह सुनते है आवाज़े| वह उसके कानों, नाक और सब कुछ में शोर सुनती है, और वह रंग देखती है और फिर उसने कहा, “यह क्या है? क्या इसका अर्थ श्रद्धा है [सच] अनहता को सुनना है?
अब अनहद आप वास्तव सुनते है आत्मानुभूति के बाद| दरअसल, पूरी व्यवस्था ताल में होती है। आप ताल में बात करते हैं, आप ताल में चलते हैं सब कुछ बहुत लयबद्ध है, शिव के ताल के साथ लयबद्ध। आपका व्यवहार ऐसा है, आपकी हर चीज ऐसी है कि लोगों को ऐसा लगता है कि जैसे-जैसे कोई वह व्यक्ति संगीत सुन रहा है आप उस के साथ रहते हैं| समझो कि आप कुछ अच्छा संगीत सुन रहे हैं, आप देखते हैं कि आपका मन कैसे चलता है, आप देखते हैं, उस क्षण में जाते हैं। कभी-कभी यह अचानक सब शांतहो जाता है और [आप] ऐसा महसूस करना शुरू करते हैं। इन कानों से ये नहीं सुना है, लेकिन आंतरिक कानों से, हम कह सकते हैं, सूक्ष्म कानों से जो आपके व्यवहार में, आपके स्वभाव में, हर चीज में कार्य करता है। लेकिन यह ध्वनि वास्तव में आप सब में श्वास लेने में “लुब-डब” महसूस कर सकते हैं, सब कुछ स्पंदन कर रहा है आप ये देखते हैं, लेकिन इन आंखों के साथ नहीं। आपके भीतर और उस गुजरते व्यक्ति से आप स्पन्दन महसूस करते है| जब आप मेरे पैरों पर होते हैं, तो आप देखेंगे – मैं यह भी सुझाव दूंगी- मुझे अचानक लगता है, तो मुझे पता होता है कि यह हो गया [आत्मसाक्षात्कार]। लेकिन मेरा बहुत ज्यादा है, मेरा मतलब है, जब मैं कहती हूं, “हा, आपको अपना आत्मसाक्षात्कार मिल गया है”, मुझे लगता है कि चैतन्यलहरी और एक झटके में सब कुछ। आप देखते हैं, मुझे सोचने की ज़रूरत नहीं है, तर्कसंगत बनाने, कुछ भी नहीं। यह बहुत सहज है, उसी में क्षणिक कार्रवाई है जिसे आप कह सकते हैं; पूरी तरह से एक प्रतिवर्त कार्रवाई है~ लेकिन इसलिए, कुछ भी सुनें -समझे की आप ये सब बात कैसे सुनते हैं कि अगर आप अतिकर्मी हैं, , उदाहरण के लिए आप गायत्री मंत्र कहते हैं, दाए नाडी की क्रिया है आप कोई भी अतिक्रिया करते हैं,, दाहिनी ओर की गर्मी विकसित होती है, सबकुछ सूख जाता है, कोई नमी नहीं बचती यह सूख जाती है |फिर शुष्क त्वचा और सूखी चीजों के साथ आप शुष्क नसों जैसी सभी चीजों को विकसित करते हैं,। वे नसें सूखी हैं कोई आर्द्रता नहीं है और फिर आप इन सभी चीजों को सुनना शुरू कर देते हैं। लेकिन वे बहुत परेशान करने वाली हैं और आप इससे बहुत कष्ट महसूस करते हैं। यह संगीत नहीं है|
अग्न्य चक्र के साथ, अगन्य और विशुद्ध का संयोजन – जो कार्यान्वित है, और इसे कैसे करना चाहिए आप को सीखना चाहिए। अग्न्या और विशुद्धी के साथ इसे सुधारा जा सकता है और सही किया जा सकता है।
दरअसल, जो लोग आत्मसाक्षात्कारी थे, महान आत्मसाक्षात्कारी लोग उन्हें , यह नहीं पता था कि लोग इस बात को, इस बारे में गलत समझेंगे। कुत्ते के भौंकने से भी कोई कह सकता है, “मैंने अनाहत सुना है। अब” आप इसके बारे में क्या कर सकते हैं? सूक्ष्म चीजें आप वास्तव में इन अंगों से नही सुन सकते , या आंखों से नहीं देखते हैं, आपको कुछ भी नहीं दिखाई देता है। वे कार्य करते है। जैसा कि, आपने देखा है, आपके हाथ कुंडलिनी को ऊपर ले जाते है। आप वहां कुछ भी नहीं देखते हैं, है ना? यह कार्य करता है – ‘कल्याण’ का अर्थ है सूक्ष्म; इसका मतलब है कि यह मौजूद है, यह कार्य करता है, लेकिन आप नहीं देखते हैं यही वह सूक्ष्म है |मगर यदि हम देख सकते तो फिर , यह स्थूल है। क्या ऐसा नहीं है? मेरा मतलब है, यह कहना मेरे लिए इतना सरल है की जो भी सूक्ष्म है उसे आप देख नहीं सकते है। ‘सुक्ष्म’ का मतलब है कि आप उस चीज़ को नहीं देखते हैं, है ना? आप इसे नहीं सुनते| यदि आप कुछ देखते हैं, यह सूक्ष्म नहीं है, बस

कोई अन्य प्रश्न? यदि आप एक शब्द “कैसे”, को हटा दें नब्बे प्रतिशत सवाल छुट जाएगे |
[सहज योगी “त्रिगुना” के अर्थ के बारे में हिंदी या मराठी में पूछ रहे हैं माता इसे “त्रिगुणात्मिका” (ठीक उसी भाषा का प्रयोग करके) ठीक करती है – जिसका अर्थ है तम-रज-सत्व गुण, जहां बाएं तरफ “तमस” है, दांयापक्ष “रज” है और केंद्र “सत्व” है, और “त्रिगुणात्मिका” एक संतुलित स्थिति में केन्द्रित है
प्रश्नः (हिंदी या मराठी में सहज योगी): बन्धन का असर कब तक चलता है?
श्री माताजी: उन्होंने मुझसे एक सवाल पूछा, “जब हम एक” बंधन “लगाते हैं तो यह कितने समय तक प्रभावी होगा? मैंने कहा,” आपकी तीव्रता पर निर्भर करता है। मैंने अपने आप को कोई बंधन कभी नहीं लगाया। “(हंसी।) यह तुम्हारी तीव्रता है कुछ समय बाद, आपको किसी भी बंधन की जरूरत नहीं होगी। जब आप वहां जाते हैं तो दूसरों को बंधन लेना होगा। (हँसी।) माँ तीव्रता के बारे में हिंदी या मराठी में बोलती है]
प्रश्न (हिंदी या मराठी में सहज योगी): हम्सा चक्र कहां है?
श्री माताजी: हम्सा यह हम्सा चक्र है यह एक बहुत ही भौतिक चीज़ है, मुझे लगता है, यह चक्र, यह बहुत ही भौतिक है, और इस पर केवल भौतिक स्तर पर ही कार्य करना है। यहां एक केंद्र है जहां बाएं और दाएं और के ज्यादातर हिस्से यहां एक भौतिक स्तर पर पार करते हैं, भौतिक स्तर, मैं फिर से कहती हूं, एक भौतिक स्तर पर वे यहां से आगे बढ़ते हैं। और जब यह खराब हो जाता है, तो आपको साइनस जैसी परेशानी होती है और सर्दी और खांसी जैसी समस्याएं होती हैं और ये सब कुछ। इसलिए, मैंने खुद के ऊपर इस संकट को लाने की कोशिश की, यह पता लगाने के लिए कि मुझे क्या करना चाहिए, क्योंकि अगर मैं उस तरह जिऊ जो की मै हूं, तो मैं कभी भी आपकी सहायता करने में सक्षम नहीं हो पाऊँगी। तो, मैंने कहा, ” क्या होता है यह जानने के लिए मैं खुद बीमार हो जाती हूं।”
दरअसल, इस चक्र के पकड़ने से क्या होता है, एक ही बात , नाक की नमी का सूखना केंद्रीय ताप नियन्त्रण की वजह से। भारतीयों , विशेषकर महाराष्ट्रीयन कडक स्नान लेते हैं, यहीं है – बहुत गर्म पानी का मतलब है; वे अपने स्नान लेने के लिए काफी गर्म पानी का उपयोग करते हैं उनके हिसाब से यह बहुत आरादायक है, जो एक बिल्कुल गलत विचार है। आमतौर पर ठंडा स्नान सबसे अच्छा है। यदि संभव नहीं है, तो गुनगुना लो, थोड़ा गर्म और फिर गुनगुना और फिर , बिल्कुल गुनगुने पानी ले सकते हैं। यह उन समस्याओं में से एक, को हल करेगा जबकी आप बहुत ज्यादा ठंड या गर्मी में बाहर नहीं निकल सकते हैं| इसकेलिए पानी के तापमान को कमरे के तापमान के समान रखा जाता है|
चूँकि आप बहुत गर्म स्नान करते हैं और फिर आप बाहर आ जाते हैं।लंदन में लोगों की मृत्यु हो गई है, कई भारतीय अपने फेफड़ों के कैंसर से मर गये है क्योंकि वे इस सुबह स्नान करने की बुरी आदत नहीं छोड़ पते। मैं इसे भारतीयों के लिए बुरी आदत कहती हूं, अंग्रेजो के लिए नहीं, हे? (हंसी) क्योंकि वे भारतीय अपना स्नान लेते हैं और तुरंत काम पर जाते हैं और बहुत से भारतीयों को फेफड़े का कैंसर मिला , वे मारे गए| अगर आप उनसे पूछते हैं, “क्यों?” “हम सब ठीक नहीं लगता यदि हम जल्दी स्नान न करें यह उनका उत्तर होता है।” तो सुबह में चार बजे स्नान करें, घर में रहें, जलवायु के अनुकूल हो जाने दो शरीर कों और फिर जाओ। या रात में स्नान ले लो~ सभी चरम व्यवहार बाएं या दाएं और के , से हम्सा चक्र की समस्याएं पैदा होती है|
मेरा मतलब है, हम इन सब बातों को जानते थे लेकिन अब हम आधुनिक हैं, आप देखिए, हम भूल गए हैं। जैसा कि, आप भारत में एक केला खाते हैं, इसके बाद आपको पानी नहीं लेना चाहिए पुराने लोग जानते हैं| लेकिन युवा जीन्स-उन्मुख हो रहे हैं। तो, पूरे चित्त जीन्स में चले गए हैं ,जैसे की वे एक फल लेंगे, वे केले खाएंगे और पानी ले लेंगे। अब ये दो चरम सीमाएं हैं आप फल लेते हैं और उसके बाद आप पानी लेते हैं, आप हंसा चक्र की समस्या प्राप्त करेंगे। तो, आपको कुछ कार्बोहाइड्रेट के बाद पानी लेना चाहिए। आप कुछ पापड ले सकते हैं, पर फ्राइड नहीं। आप कोई भी चीज़ को तला हुआ लेते हैं तो फिर उस पर, आप को पानी नहीं लेना चाहिए । लो, आप एक बिस्किट ले सकते हैं या आप एक रोटी, कुछ सूखा की तरह; सर्वश्रेष्ठ चना है अपने गले को सूखाए और फिर पानी ले लो|
गर्म और ठंडा, अब जैसे कॉफी ले लो, और फिर पानी ले लो – बिल्कुल गलत है पानी लेना चाहिए, फिर धीरे-धीरे गर्म हो जाएँ और तब फिर कॉफी ले लो, और फिर तब तक पानी न लें जब तक आप कुछ कार्बोहाइड्रेट नहीं लेते हैं। मेरा मतलब है, ये ,यही सही तरीका है; यह गर्म और ठंडा है गर्मी और ठंड का संयोजन समझा जाना चाहिए।
अब आप वास्तव में प्रकृति के कुछ नियमों की उपेक्षा करते हैं| लंदन या उसके जैसे और भी कंही , कमरे के अंदर गर्म होता है, बहुत गर्म हो, और बहुत शुष्क है मेरा मतलब है, हम सभी जानते हैं कि इंग्लैंड में आपको आर्द्र होना चाहिए |, है ना? स्नान घर में कुछ पानी या कुछ या टब को भरना चाहिए और इसे खुले रखना चाहिए ताकि कमरे में नमी हो। इस सबकी क्षतिपूर्ति करने के लिए, दाँत को ब्रश करने के बाद कोई ऐसा कर सकता है ,इसे आज़माएं, कि, कुछ पानी लेना और नाक के द्वारा घूंट करना है और इसे बाहर निकालने का प्रयास करें, |इस पानी में थोडा नमक डालें पानी न ठंडा हो ना अधिक गर्म गुनगुना होना चाहिए |,, , । इन उंगलियों को लगाकर, इन कानों में अंगूठे और इसे बाहर ले जाओ इसके द्वारा आप अपने साइनस को साफ कर देंगे, आप इसे नरम बना देंगे। या इन भागों में नाक की झिल्ली में, आप कुछ तेल डाल सकते हैं, या कुछ घी, बहुत अच्छा है|
थोडा गर्म खाना, भारत में प्रथा बहुत गर्म खाना खाने की है – गरम गरम खाओ, गरम गरम खाओ। मेरा मतलब है, हम बहुत गरम हैं (हंसी) वे वाकई गर्म लोग हैं मुझे पता नहीं क्यों? महिलाए – आदमी भोजन पर बैठेगा और उस महिला को उसी समय गरम गरम पकाना चाहिए, उसी समय रोटियां बनायी जानी चाहिए ,और फूलको को गरम गरम में लाया जाना चाहिए और पति को गरम गरम खाना चाहिए और कार्यालय या काम पर जाने से पहले उन्हें गर्म गरम मिलना चाहिए।स्वभाव भी ऐसा ही, तब| (हंसी) तब भी वे इसे छोड़ देंगे, नकार देंगे की , “यह गर्म नहीं है| महिला कहेगी;, हम आपके लिए गर्म लाएंगे” और पूरी तरह से जलते हुए, आप देखिए वे अपनी , जीभ जला रहे हैं,। इस तरह के एक गरम गरम खाने की कोई जरूरत नहीं है।
इसके विपरीत, इंग्लैंड में वे इतने ठंडे खाद्य पदार्थ खा रहे हैं कि मैं चकित हूँ मेरा मतलब बर्फ , पश्चिमी लोगों को खाने वाले बर्फ की मात्रा, हम समझ नहीं सकते हैं। मेरा मतलब है कि कैसे – सुबह बर्फ, हर बार बर्फ , यह चीज़ आप लीजिये बर्फ के साथ, और “आन द रोक्स” है, क्योंकि वे इसे कहते हैं। (हंसी) तो आप चट्टानों पर होंगे। इतना बर्फ वे लेते है। भगवान जानता है क्यों इतना बर्फ लेने की आवश्यकता क्या है? अंधाधुंध रूप से |आइसक्रीम के बाद आइसक्रीम लेंगे, वे, या कॉफी के बाद वे आइसक्रीम लेंगे। मेरा मतलब है, यह एक राष्ट्रीय पकवान है, बर्फ है आइसिंग, ………. – हर समय इतना बर्फ मेरा मतलब है, उनके पास बाहर बहुत अधिक बर्फ है, तो फिर अंदर बर्फ क्यों चाहिए? (हंसी।) यहां तक कि हम वहां प्रधान मंत्री के स्थान पर गए। उन्होंने हमें खाने के लिए रूबर्ब आइस दिया। कल्पना करो, मिठाई पकवान के रूप में। और वे बहुत कंजूस हैं, इसमें कोई शक नहीं है, लेकिन इस हद तक! (हंसी।) हमें खाने के लिए हिमपात की बर्फ देने के लिए कल्पना करो, यह भयंकर था! (माँ हिंदी या मराठी में बोलती है) श्रीमती थैचर, आप देखते हैं, वह सब कुछ “थोप रही है”! (हँसी।)
तो, यह ऐसाही है, आप देखते हैं, वे सुबह से शाम तक बर्फ खाते हैं। और वे यह नहीं जानते कि इतनी बर्फ क्यों खाया जाए और उस बर्फ को खाने के बाद, अचानक उसके पास कुछ गर्म होगा, उसके बाद या पहले। बर्फ खाने से पहले, वे गर्म लेंगे, यह सबसे खराब है। तो, वे कॉफी और बर्फ लेते हैं कल्पना कीजिए। तो, यह वही है जो हम समझते नहीं हैं, गर्म और ठंडे के बीच भेद करे/ समझें। गुनगुना खाना भी लो |ओवन झिलमिलाहट से तुरंत खाने की ज़रूरत नहीं है झलझला खाना आपको खाने नहीं चाहिए मुझे नहीं पता कि ऐसे शैतानी विचार क्यों आ रहे हैं, जलता हुआ खाना लेना | थोड़ा समय ले लो कुछ धीरज ले लो |पचाने के लिए अपने रस को बाहर निकलने दो और फिर इसे खाएं अन्यथा आप अपनी जीभ को जला लेंगे, आप अपना तालू जला लेंगे, आप सब कुछ जलाएंगे – आपके दांतों को छोड़कर हर हाल में नकली हैं! (हँसी।)
तो, सबसे अच्छी बात यह है कि भोजन की गहरी समझ रखना भी है