Shri Durga Puja: Mind is just like a donkey

Vienna (Austria)

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                श्री दुर्गा पूजा

                 ‘मन बिलकुल एक गधे जैसा है’

 वियना(ऑस्ट्रिया)                                                         26सितंबर 1982

आप सभी को बंधन लेना चाहिए। पूजा से पहले यह बेहतर है| आज पहला दिन है, हम इस देश ऑस्ट्रिया में पूजा कर रहे हैं। यह देश एक ऐतिहासिक देश है, जो की विभिन्न उथल-पुथल से जीवन के इतने सारे सबक सीखने को गुजरा है। लेकिन इंसान ऐसे होते हैं जो की आपदाओं का अपनी गलतियों से संबंध नहीं देखते हैं। यही कारण है कि वे एक ही गलतियों को बार-बार दोहराते हैं।

वियना से मुलाकात बाकी थी और मैं उस दिन आयी जब हमने मचिन्द्रनाथ का जन्मदिन ([वह एक सहज योगी शिशु है) मनाया । आप सभी के लिए यह बहुत शुभ है कि वह आज अपने जीवन का एक वर्ष पूरा कर लें। मैं उसे सभी फूल, सबसे सुंदर फूल, सुंदरता और उस पर आनंद, और उसके परिवार, उसके सभी संबंधों और उसके परिवार के साथ आशीर्वाद देती हूं। बहुत सारी चीजें हैं जो पहली बार की गई हैं। मुझे कहना चाहिए, मैं पहली बार ऑस्ट्रिया में वियना आयी हूं, और मैं पहली बार जन्मदिन पर एक बच्चे के पहले जन्मदिन पर आई हूं।

और एक अष्टमी पर, जो की आज है, चंद्रमा का आठवाँ दिन, चन्द्रमा का, जो बढ़ रहा है, शुक्लपक्ष; उस समय पहली बार देवी के सभी अस्त्रों की पूजा की जानी है। यह एक महान विचार था क्योंकि ये हथियार जो हर समय काम करते हैं, न केवल बुराई को मारने के लिए बल्कि अच्छे की रक्षा के लिए, पहले कभी भी पूजा नहीं की गई थी; और आज, अगर मानव को उनके महत्व और अर्थ का एहसास है, तो परमाणु बमों तथा अन्य वैसी ही सभी चीजों की बहुत सारी समस्याएं जो बनाई गई हैं, उन्हें सही दिशा में मोड़कर,  अच्छाई के बजाए बुरी ताक़तों के विनाश के लिए उपयोग करके हल किया जा सकता है; मानव जीवन की रक्षा के लिए, मानव जीवन का पोषण करने के लिए भी। उन्ही हथियारों का गलत दिशा में उपयोग किया जा सकता है; लेकिन, सही रूप से उपयोग किया जाता है तो, वे परमात्मा के काम के उपयोग के लिए समर्पित हो सकते हैं।

वह सब मानव द्वारा बनाया गया है, जो विनाश का एक साधन प्रतीत होता है, लेकिन अगर मानव अपने ज्ञान का उपयोग करता है, तो उन्हें पता चलेगा कि ये सभी आविष्कार जो उन्हें अचेतन के संकेत से आए हैं, परमात्मा के काम के लिए हैं। सभी वैज्ञानिक अनुसंधान, जो कुछ भी किया गया है, ये सभी उपकरण जो आपने उत्पादित किए हैं, वे परमात्मा के उपयोग के लिए हैं। एक तरह से हम कह सकते हैं कि मनुष्य ने परमात्मा के कार्य के तंत्र को आगे बढ़ाने के लिए सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक संस्थानों के रूप में उपकरण बनाने का काम किया है।

अचेतन ने मनुष्य के माध्यम से काम किया है। ये सभी संस्थाएं, यदि उनकी गति विधि को नारकीय गतिविधि के बजाय सही प्रारूप में रखा जाता है , तो वे सभी मिलकर दैवीय काम को पूरा कर सकती हैं। जैसे, पूरब के लोगों का मानना है कि परमेश्वर ने मनुष्यों के इस सुंदर शरीर का निर्माण किया है और मनुष्य के लिए यह है कि, वह परमेश्वर की बनाई हुई सुंदरता को बढ़ाने के लिए सुंदर कलात्मक वस्त्रों का निर्माण करे, जो परमेश्वर ने बनाया है, उसके सौंदर्य को महिमा देने के लिए,  परमात्मा ने जो सुंदरता बनाई है उसके सम्मान के लिए। और अगर वे अपने विवेक का उपयोग करते तो जो परिणाम मानवीय गतिविधियों का जीवन के कई क्षेत्रों में हुआ वह सभी क्षेत्रों में होना चाहिए था |

ज्ञान का प्रश्न जिसपर मैंने पहले चर्चा की थी, उसे समझना बहुत महत्वपूर्ण है। आदम और हव्वा के रूप में पहले ज़माने में जो ज्ञान निषिद्ध था, वह मनुष्य के लिए समझना एक बड़ी समस्या रहा है।

यह मामला था जब परमात्मा ने पहली बार इंसानों को बनाया था – आकाशीय प्राणियों के अलावा, जो परिपूर्ण थे – कि वह देखना चाहते थे कि क्या ये मनुष्य अपनी आबादी में, अपनी जागरूकता में, और अपनी अबोधिता में विकसित हो कर आत्मसाक्षात्कारी हो जाएंगे। लेकिन यह एक प्रयोग था, और मनुष्य ने उस समय ईश्वर को विफल कर दिया , क्योंकि उसने ओछी प्रेरणा और उकसावे पर ध्यान दिया| इस प्रकार वे विफल हुए और उन्होंने अपनी अबोधिता खो दी। और अबोधिता की हानि ही वह पाप है जो, सबसे पहले किया गया था, और उस पाप ने मनुष्य के लिए एक अलग मोड़ ले लिया। अब, यह ज्ञान, जो मैंने कहा है, यह वास्तविक ज्ञान नहीं है। वह अविद्या, कृत्रिम ज्ञान था, ज्ञान कि “मैं कुछ हूँ,” कि “मैं कर्ता हूँ” – अहंकार। पशु अवस्था तक अहंकार नहीं था, और फिर अहंकार बढ़ने लगा। हम कह सकते हैं कि मूल पाप की शुरुआत: “मैं कुछ हूं। में कुछ कर रहा हूं। यह मैं ही कर सकता हूं ”। ठीक है? तो परमात्मा ने कहा, “चलो देखते हैं। आइए उनके छोटे साहस को देखें, और उन्हें निर्णय लेने दें। इसलिए योजनाओं को बदल दिया गया; अब यह सोचना पड़ा कि हमें इस धरती पर अवतार लेना चाहिए ताकि इन लोगों की मदद कर सकें, उनका मार्गदर्शन कर सकें, उन्हें संतुलन में ला सकें, उन्हें धर्म की उचित समझ में डाल सकें, ताकि वे उस संतुलन को बनाए रखें। लेकिन हर बार इस “मैं” ने संतुलन स्वीकार करने से इनकार कर दिया। और यह “मैं” वास्तविकता से बहुत दूर जाता है। आज भी, जब हम सहज योग में आते हैं, तो मैं लोगों को देखती हूं, वे बहुत तेजी से नहीं बढ़ते हैं। इस “मैं” के कारण उनके पास प्रश्न हैं, उन्हें संदेह है, उन्हें समस्या है। इस मूल पाप के कारण लोग बहुत तेजी से नहीं बढ़ सकते हैं।  कि, “ बस मैं ही हूँ, मैं स्वतंत्र हूँ। यह क्यों? यह क्यों है?” प्रश्न पूछने वाले आप कौन होते हैं? आपको किसने बनाया है? क्या आपने खुद बनाया है? आपने इंसान बनने के लिए क्या किया?  ईश्वर के प्रति इस तरह का अहंकारपूर्ण व्यवहार क्यों? “परमात्मा ने हमें क्यों बनाया है?  यह बात क्यों? ” आप कोई प्रश्न पूछने वाले कौन हैं?  लेकिन ऐसा है, सवाल उठता है, और ऐसे लोग सहज योग के लिए बहुत खतरनाक हैं। अगर उन्हें पूजा के लिए आना है, तो मुझे चिंता है, इसलिए नहीं कि पूजा को कुछ भी होगा, लेकिन हम उन्हें पूरी तरह से खो सकते हैं। ऐसे अहंकारी मूर्ख लोग खो जाते हैं। एक माँ के रूप में मुझे उनके लिए सरल करुणा और प्यार है, और मुझे दुख है कि उन्हें बचाया जा सकता था। लेकिन उनका यह सवालिया दिमाग उनको डूबा सकता है। यह असली मौलिक पाप है जिसे मानव ने बनाया है।

इसके अलावा, हमें समस्या थी कि हम पशु अवस्था से इस अवस्था में आए हैं। तो आपके भीतर पाशविक क्रूर जड़ताएँ हैं। फिर हम अन्य परिस्थितियों से गुज़रे हैं, जो इतिहास में एक ही मिस्टर “मैं” द्वारा बनाई गई थीं, जिन्होंने संस्थानों की शुरुआत की है, जिन्होंने धर्मों का आयोजन शुरू किया है। उदाहरण के लिए, ईसाई धर्म को लें। ईसा मसीह आपके अहंकार को तोड़ने के लिए यहां आए थे। इसके विपरीत, लोगों ने इससे एक बड़ा अहंकार निर्मित किया। अब, कुछ सहज योगी हैं जो मानते हैं कि सहज योग एक ईसाई सहज योग या हिंदू सहज योग है। अब भी यह चलता रहता है कि यह एक ईसाई सहज योग है। ईसाईयों के लिए यह ईसाई सहज योग होना चाहिए; हिंदुओं के लिए यह एक हिंदू सहज योग होना चाहिए। मुसलमानों के लिए यह एक मुस्लिम सहज योग है; यह इस्लाम से संबंधित होना चाहिए, क्योंकि वे अपनी खुद की कंडीशनिंग से बाहर नहीं निकल सकते हैं, इसलिए इसे उसी से संबंधित होना चाहिए, इसे वहां मौजूद हर चीज को समझाना होगा। वे बाहर नहीं निकल सकते, आप देखें? यह एक कैथोलिक सहज योग या एक प्रोटेस्टेंट सहज योग भी हो सकता है। उससे भी गहरा हो सकता है।

इस प्रकार ,आप देखें , वैसा ही चलता जाता है। तो, आप सहज योग को अपनी श्रेणियों में खींचते हैं, अपने छोटे छोटे कपों में। लेकिन यह दूसरे तरीके का है। सहज योग महासागर है, एक सार्वभौमिक चीज है, यह एक महायोग है। यह ईसाई, हिंदू, मुस्लिम के लिए नहीं है; यह मनुष्य के लिए है जैसा कि वे थे। क्या आपको ऐसे जानवर मिले हैं जो ईसाई, हिंदू या मुसलमान हैं? यह सब केवल मूल पाप के कारण आता है, कि हम कुछ हैं – हम ईसाई हैं, हम हिंदू हैं, हम मुसलमान हैं। सहज योग में, व्यक्ति को यह समझना होगा कि सभी नदियाँ, चाहे वह गंगा नदी हो या यमुना नदी या यह नदी टेम्स या नदी डेन्यूब, कोई भी नदी हो, कि सभी एक ही महासागर में मिलती हैं और सागर बन जाती हैं। वे कहते हैं कि जब सभी उप नदियाँ गंगा नदी में मिलती हैं, तो वे सभी सुर सरी कहलाती हैं, जिसका अर्थ है “देवताओं की नदी।” कोई और लोग उन्हें वहां मौजूद सहायक नदियों के विभिन्न नामों से नहीं पुकारते। उसी तरह सहज योग महासागर है। आप इसका नाम करण कर नहीं सकते। अन्य चीजों के साथ इसकी पहचान खोजने की कोशिश न करें। अगर आप ऐसा करना शुरू कर देंगे, तो आपका मन छोटे से छोटे प्याला बनना शुरू हो जाएगा। और इसके अलावा, यदि आप कुछ संगठित धर्मों से आ रहे हैं, तो यह समझना बहुत महत्वपूर्ण है कि संगठित धर्म आपके कप को और भी मजबूत बनाते हैं, यह घुलता नहीं है। यदि यह एक अव्यवस्थित धर्म है, तो यह एक मिट्टी का कप है, जो इस महासागर में घुल सकता है। लेकिन अगर यह एक ठोस, अच्छा चीनी मिट्टी का बरतन है -तब घुलने की  कोई संभावना नहीं है। फिर आप उस सभी कंडीशनिंग, उस सभी ठोसपन का पालन कर रहे हैं, और फिर यह बहुत मुश्किल है। हर समय आपको ईसा मसीह को लाना है या आपको मोहम्मद को लाना है या आपको जोरोस्टर को लाना है, या कोई ऐसा व्यक्ति जो आपके मार्गदर्शन के लिए वहां होना चाहिए। अब आपका मार्गदर्शक आपकी आत्मा है, जो असीमित है, इसलिए आपको उनमें से किसी एक को भी लाना नहीं पड़ता है। वे सब तुम्हारे भीतर ही हैं। वे आप के अंग प्रत्यंग  हैं। लेकिन एक व्यक्ति पर चिपकने का अर्थ है की आप विस्तृत नहीं हो रहे हैं |

तुम्हें पता है कि तुम सब हो। श्रीकृष्ण तुम्हारे भीतर हैं, जो जागृत हैं, तुम्हारे भीतर क्राइस्ट हैं, तुम्हारे भीतर गणेश हैं, तुम्हारे भीतर ब्रह्मदेव हैं, और तुम्हारे भीतर मोहम्मद मिल गए हैं। और वे सब तुम्हें अपने अंदर मिल गए है: मूसा, सब लोग, तुम्हारे भीतर; तो कैसे आप एक व्यक्ति के साथ पहचाने जा सकते हैं? कारण यह है, आप अभी भी जड़ता पर  हैं, और आप इसे अपनी  शर्तों में खींचना चाहते हैं। इसलिए इसे ऐसी स्थिति में लाने की कोशिश करें जहां कोई शर्त न हो। हम अपनी जड़ताओं को अपनी शैली  में कार्य करते हुए बहुत अधिक देख सकते हैं क्योंकि मनुष्य के रूप में, हमें एक बंद संप्रदाय बनाने की आदत है, चाहे वह हम स्वयं ही हो – पहले हम खुद को संकीर्ण करते है “मैं”। “मैं XYZ हूँ। फिर हम संगठित कर सकते हैं, कह सकते हैं, “हम वे लोग हैं जो कांटे और चाकू का उपयोग करते हैं”। ऐसे लोग हो सकते हैं जो सिर्फ ‘इस तरह’ से कांटे और चाकू का उपयोग करते हैं, उन्हें एक साथ संगठित किया जा सकता है, जो अन्य लोग ‘उस तरह’ से उपयोग करते हैं वे एक अन्य तरीका हो सकते हैं। देखिए, यह उस तरह से चलता है, जिस तरह की मूर्खता इंसान को संगठित करने के किये करना होती है । ठीक है, आप जिस तरह से चाहें, कोई फर्क नहीं पड़ता। आप वही खाना खाते हैं, यह उसी तरह पचता है, यह काम करता है। लेकिन जहां तक बाहर की बात है, जब यह मानव गतिविधि की बात आती है, तो वे कांटे और चम्मच का उपयोग एक अलग तरीके से करेंगे, कोई व्यक्ति अपने हाथों, उंगलियों और किसी का उपयोग करेगा, मुझे नहीं पता है, खंज़र का उपयोग कर सकता है। मुझे नहीं पता कि वे किस सीमा तक जाने का प्रबंधन कर सकते हैं। तो, यह ऐसा ही है । कुछ करने में, किसी भी गतिविधि को करने में, तब केवल मनुष्य ही इसे एक बंद परिसर बनाते हैं, कि “हम ऐसा करते हैं। यह है कि वे इसे कैसे करते हैं, “यह कैसा है – किसी अन्य पार्टी या लोगों की विधि। यह समूहवाद सबसे बुरा है, और प्रकृति के नियमों के खिलाफ है। आप एक व्यक्ति हो सकते हैं, जहां तक आपकी उपस्थिति का संबंध है, जहां तक आपके बालों के रंग का संबंध है, या आपकी आंखों के रंग का संबंध है; परमात्मा ने आपको जिस तरह से बनाया है। लेकिन आपके द्वारा बनाई गई अन्य सभी चीजें मृत हैं। आपके द्वारा संघ बनाने की अन्य सभी विधियां व्यर्थ हैं। वे सिर्फ पाखंड हैं। इसमें कुछ भी सत्य नहीं है, ना ही ऐसा कुछ भी है जो विचार करने योग्य हो। यह सिर्फ एक मिथक है!तो हर किसी को यह समझना होगा कि ऐसा कोई भी सहज योग,  जैसे एक ईसाई सहज योग, सहज योग जो एक प्रोटेस्टेंट सहज योग या एक कैथोलिक सहज योग नहीं है। मुझे यह बहुत ही सूक्ष्म बिंदु पर लगता है, जहां लोग सामूहिकता की बात करते हैं, कि वे यह नहीं समझते हैं कि हम सामूहिक नहीं हैं, क्योंकि हमारे पास बहुत सारे उप नाम  हैं, आप देखते हैं, हमारी स्वयं की बनायीं हुई जड़ताएँ । यह स्विट्जरलैंड में हो सकता है, यह ऑस्ट्रिया में हो सकता है, यह रोम में हो सकता है, या यह भारत में, कहीं भी हो सकता है। इन शर्तो से हमें छुटकारा पाना होगा। हमें पता होना चाहिए कि हम मनुष्य हैं, ईश्वर द्वारा बनाए गए हैं, और जो कुछ भी हमारे भीतर है, जो भी वास्तविक है, उसी के द्वारा निर्मित है, केवल वही चीज है जो हमें बनना है; और बाकी सभी शर्तो को हमें छोड़ देना चाहिए। सब कुछ पूरक है। इस जगह से आपको कुछ सीखना है, उस जगह से आपको कुछ सीखना है। हर जगह कुछ न कुछ सीखने और समझने के लिए है। और ऐसा कुछ भी नहीं है जो कुछ लोगों द्वारा कुछ उच्च या निम्न के रूप में रखा जा सकता है। लेकिन निश्चित रूप से, जहां यह अहंकार अधिक विकसित हुआ है, यह मूल पाप अधिक विकसित हुआ है, ऐसी संभावना है कि ऐसे मनुष्यों ने अधिक कंडीशनिंग बना ली होगी। स्वाभाविक रूप से कंडीशनिंग बहुत अधिक है। या, जहां वे धर्म के बारे में, ईश्वर के बारे में, इस तरह चिपके हुए नहीं हैं – जैसे, आप अफ्रीका और इन सभी स्थानों पर कह सकते हैं – यह हो सकता है कि अन्य शक्तियों द्वारा कंडीशनिंग हो , जिसे आदि भौतिक कहा जा सकता है जिसका अर्थ है, जो भी ईश्वर कृत है, उससे बनी वस्तु से हैं। जैसे, अगर वे चाँद को देखते हैं, तो वे चाँद से डरते हैं, अगर वे पेड़ो को देखते हैं, तो वे पेड़ो से डरते हैं। प्रकृति के बारे में एक मिथकीय विचारों की तरह। देखें, इसलिए दो शैलियाँ हैं, जैसा कि आप हमेशा जानते हैं। एक ‘आदि भौतिक’ है जहां वे प्रकृति के बारे में काल्पनिक विचारों का निर्माण करते हैं, प्रकृति का काल्पनिक पक्ष है |   जो भी आप उत्पन्न कर सकते हैं उसकी कल्पना ‘आदि दैविक’ हैं , आप परमात्मा हैं, आप देवता हैं, और आप इसे बनाना चाहते हैं। “मैं यह हूं, मैं वह हूं। इसलिए दो प्रकार की स्थितियां हैं जो काम करती हैं, और आधुनिक समय में यह एक ऐसी उलझन वाली बात है कि इन दोनों पक्षों – मुझे नहीं पता कि वे कहां काम करते हैं। उदाहरण के लिए, दूसरे दिन मैं वियना में कब्रिस्तान के पास से आ रही थी, और मैं चकित थी कि यह एक कब्रिस्तान था लेकिन यह दायें स्वाधिष्ठान पर पकड़ बना रहा था। तो मैंने कहा, “सभी  भूत ज़रुर कार्यरत होना चाहिए, क्योंकि मैं यह नहीं समझ सकती कि एक कब्रिस्तान में एक दायाँ स्वाधिष्ठान कैसे हो सकता है?” यह इस तरह से समझाया जा सकता है, कि सभी भूत अब सक्रिय हैं; या हो सकता है कि वे फिर से पैदा हों गए हों , आप देखें। वे सैकड़ों बार मरे होंगे, उन्होंने क़ब्रों के बाद कब्रें बनाई होंगी और केवल खाली कब्रें थीं, और वे अब सक्रिय हैं। या हो सकता है कि भूत खुद सक्रिय हों, वे अब वहां नहीं हैं, वे सभी वहां से ग़ायब हो गए हैं। यह हो सकता है। इसलिए हमें अब चैतन्य पर समझना है न कि हमारी समझ पर या इस मस्तिष्क के माध्यम से हम क्या सोचते हैं या क्या समझते हैं। सवाल पूछ कर और इसके बारे में बहुत अधिक बातें करके आप सहज योग को नहीं समझ सकते। सहज योग के लिए आपके पास मन की वह उच्च स्थिति होना होगी , जहां आप चैतन्य प्राप्त कर सकते हैं,चैतन्य महसूस कर सकते हैं और उन पर पूरी तरह से निर्भर करना होगा। यदि अभी भी उस अहंकार का लेबल इतना है कि आप अभी भी सहज योग पर सवाल उठाते हैं और खुद का कोई पार नहीं पाते हैं, तो बेहतर है कि ऐसे व्यक्ति को पूजा में शामिल नहीं होना चाहिए, पूजा में शामिल नहीं होना चाहिए। यह खुद पर ही  मेहरबानी होगी । यह स्वयं उसके लिए अच्छा है कि जिस व्यक्ति को संदेह है, उसे पूजा में शामिल नहीं होना चाहिए, क्योंकि पूजा केवल उन लोगों के लिए होती है जिन्होंने उपलब्धि की है, मन की उस स्थिति को प्राप्त किया है जिसे निर्विकल्प कहा जाता है, जहां कोई विकल्प नहीं है, जहां है आपके मन में कोई संदेह नहीं है। यदि आपके मन में अभी भी संदेह हैं, तो आपका मन अभी भी बहुत शक्तिशाली है, और यह आपको नीचे रखने वाला है।

इसलिए या तो पूजा से पहले आप अपने मन को शांत रहने के लिए कहें। उससे कहें कि अब बात न करें, “बेहतर है शांत रहो, अब मुझे विकसित होना है और मुझे दैवीय आशीर्वाद प्राप्त करना है। तो बस शांत रहो, और अगर तुम शांत नहीं रह सकते तो मैं नहीं विकसित नहीं हो सकता।

 ”मैंने आपको कई बार कहा है कि यह गधे की तरह है, मन गधे की तरह है। यदि आप गधे के पीछे जाते हैं, तो यह आपको दुलत्ती मारता है, यह आपको बताएगा, कि आप बुरे आदमी हैं, आप सबसे बुरे आदमी हैं; सभी आत्म-दया आपके अंदर आ जाएगी। यदि आप गधे के साथ आगे बढ़ते हैं, तो वह अपने कान आपके पास रख देगा, आप उसे एक अहंकार की तरह पकड़ सकते हैं, आप देख सकते हैं। आप जहां चाहें वहां जा सकते हैं, वही करें जो आपको पसंद है, “क्या गलत है?” यह आपको नियंत्रित नहीं करेगा। यदि आप गधे के ऊपर बैठते हैं तब भी यह आपके साथ खेलता है, यह देखने के लिए कि आप कैसे काम करते हैं। इसलिए यदि आप मन को इधर-उधर, अपनी आंखों के माध्यम से या अपने ध्यान से, या कहीं भी, या अपनी जीभ या अपनी इंद्रियों के माध्यम से जाने देते हैं, तो यह कहेगा, “ठीक है।” यह दोनों बाजु पर घास खाएगा, यह नहीं चलेगा। यह बढ़ेगा एक ओर, कुछ घास खाएगा  दूसरी तरफ ।

ग्रीगोइरे: इस स्थिति में , जब कि आप इसके बारे में बोलती हैं, क्या मुझे जल्दी से अंग्रेजी ना समझने वाले फ्रांसीसी के लिए अनुवाद करना चाहिए?

श्री माताजी: ओह, आप पूरी बात का अनुवाद करना चाहते हैं?

ग्रीगोयर: मैं दो मिनट में कर सकता हूं।

श्री माताजी: मुझे लगता है कि बाद में, ग्रीगोइरे, बेहतर होगा, अगर आप अनुवाद कर सकें, क्योंकि अभी बेहतर प्रवाह है, ठीक है?

तो यह गधा, गधा घास खाना चाहता है। वह जानता है कि आप उसके घास खाने की परवाह नहीं करेंगे। सब ठीक है, यह चलता रहता है, घास खाता है, हर तरह की गंदगी, भद्द, जो भी है। आप जो भी खाने की अनुमति देते हैं, वह खाते जाता है, सभी गंदी चीजें, सभी भद्दे विचार, सभी गंदे विचार और हर तरह की चीजें, बिना सवाल किए, आप देखते हैं? केवल सहज योग में वे यहाँ आते हैं और सवाल करते हैं, लेकिन तब नहीं जब उन्हें भद्दी और गन्दी और हर तरह की अपवित्र चीज़ों और पापी चीजों को खाना पड़ता है, वे कभी सवाल नहीं करते। तब वे कहेंगे, “क्या गलत है?” लेकिन जब सहज योग की बात आती है, तो वे सवाल करेंगे। जो पवित्रतम है, जो महानतम है। केवल ये द्वार आपके लिए खुले हैं। इसीलिए आप इसे प्राप्त कर सकते हैं; अन्यथा नहीं, यह अन्य सभी लोगों को प्राप्त करना निषिद्ध है।

 जिस पानी से मेरे पैर धोये गए वह अमृत है , तीर्थ है, यह पुराने दिनों में तो डॉक्टरों के लिए भी निषिद्ध था। वैद्यों को अनुमति नहीं थी, और उन्हें इसके लिए लड़ना पड़ा। केवल देवताओं को इसे पीने की अनुमति थी। केवल देवताओं को इसे पीने की अनुमति थी।

आज आपको देवताओं की स्थिति में रखा गया है। लेकिन क्या आप इसके लिए सक्षम हैं? क्या आप इसके लायक हैं? या आप अभी भी सवाल कर रहे हैं, आपको अभी भी समस्याएं हैं? तब बेहतर है कि आप निषिद्ध हैं। यह एक दुर्लभ बात है कि आपको उस अमृत को लेना चाहिए। यह देवी पुराण भागवतम में है, यदि आप पढ़ते हैं, कि उनके लिए इसे लेना निषिद्ध था। तो यह ऐसा ही है, की मन गधे की तरह चलता है। लेकिन अगर गधा सवार को जानता है , उसके तरीके जानता है, और वह जानता है कि मन को कैसे नियंत्रित किया जाए और वह जानता है कि उसे कहाँ काम करना है,  तब वही गधा, वही उपकरण, वही संस्थाएँ, वही चीज़ें जो आपके पास हैं , आपको बहुत तेजी के साथ,बहुत आरामदायक ढंग से वहाँ ले जाएगा। तो आज अपने मन को बताएं, कि हमने यह मन का खेल काफी भुगत लिया है , अब हम ईश्वर के दायरे में रहना चाहते हैं। अपने मन को कह दें ,पूरी तरह से, अपने मन को कह दें। यह महत्वपूर्ण है। यह वह मन है जो आपको सभी प्रकार की चीजों तक ले गया है; इसने तुम्हें सारी भद्दी और गंदगी दी है। तो बस अपने मन की बात बताइए।

परमात्मा आपको आशिर्वादित करे!

तो आज के विषय के लिए, हमें यह कहना चाहिए कि हमें अपने भीतर अपनी अबोधिता को उपलब्ध करना है, और विराट की अबोधिता को महसूस करना है। गणेश विराट या विराट गणेश का सवाल है , हम कह सकते हैं, , जहां, विराट में, जिस अबोधिता को हमें महसूस करना है, ताकि हम अबोध हो जाएं, हमारे पाप धुल जाएं, कि हम उस भोलेपन से स्वच्छ हो जाएं, ताकि यह “मैं-पन” आप से समाप्त हो  जाता है,  हमारा यह मूल पाप धुल जाता है, और हम ऐसे सुंदर प्राणी बन जाते हैं जो ईश्वर का गौरवपूर्ण बच्चा है, और जो इस रचना का उपहार है।

परमात्मा आपको आशिर्वादित करे!! ग्रेगोइरे अब आप  अनुवाद कर सकते हैं। सब ठीक है। आप अनुवाद कर सकते हो। मुझे पता है कि यह लंबा है, लेकिन कभी-कभी मुझे लगता है कि यदि प्रवाह नहीं रखा गया है …

ग्रीगोइरे: मुझे खेद है, माँ, मुझे बाधित नहीं करना चाहिए था।

श्री माताजी: नहीं, यह सब ठीक है, यह सब ठीक है।

श्री माताजी: आप री-प्ले कर सकते हैं, और उस पृष्ठभूमि में आप कर पाएंगे – इसे धीमा रखें – ताकि आप त्वरित कर सकें। क्या यह सब ठीक होगा? री-प्ले करना? यह आपके लिए उचित

…ग्रीगोइरे: मैं सिर्फ फ्रांसीसी के लिए तीन मिनट और इतालवी के लिए तीन मिनट बहुत ही संक्षिप्त में सोच रहा था।

श्री माताजी: आप कर सकते हैं?

ग्रेगोइरे: मैं कर सकता हूँ, हाँ।

श्री माताजी: बिलकुल ठीक।

ग्रेगोइरे:( अनुवाद जारी है]

श्री माताजी: बहुत से लोग मुझसे पूछते हैं, इससे पहले भी, कि, “माँ, हम ऐसे क्यों हो गए?क्यों परमेश्वर ने हमें स्वयं के बारे में,  इन सभी गलतियों को किए बिना,  जागरूक नहीं किया? और क्यों हमें इस सभी दुष्चक्र से गुजरना पड़ा? ”

उस समय, मैं यह नहीं कहना चाहती थी कि आपने मूल पाप किया है, कि आपने ईश्वर की अवज्ञा की है। अन्यथा चीजें अलग तरीके से काम करतीं, इतनी लंबी नहीं होतीं। क्योंकि अगर आप उन्हें बताते हैं, तो उनके साथ एक और बात होती है कि वे लेफ्ट साइड से ग्रस्त हो जाते हैं, और वे मूल पाप के बारे में दोषी महसूस करने लगते हैं, आप देखते हैं। इसलिए हमें अहंकार से उनके मूल पाप वाले भाग पर कूदना होगा। लेकिन उस हिस्से को यदि आप छोड़ देते हैं,कहने के लिए, शुरुआत में,इस स्वतंत्रता के बिना,जो आपको दी जा रही है यह विकास नहीं हो सकता है, , आप देखते हैं, क्योंकि पहले स्वतंत्रता का परीक्षण किया गया था। कि आपको एक स्वतंत्रता दी गई थी, आपके पास रहने के लिए एक अच्छी जगह थी, आप परमात्मा की पूरी सुरक्षा में रहते थे, ईडन के बगीचे में, आप कह सकते हैं, सुंदरता में … सब कुछ अद्भुत था। वहां कुछ भी कमी नहीं थी। लेकिन, इसके बावजूद, मनुष्य, आप देखते हैं, जब उनके पास स्वतंत्रता थी, बस स्वतंत्रता का परीक्षण होने ही वाला था, तुरंत उन्होंने इन ओछी चीजों को ले लिया, आप देखें।और यही कारण है कि परमात्मा को तब पूरी योजनाओं को बदलना पड़ा, क्योंकि उन्हें जीवन की ओछी चीजें आकर्षक लगी थीं, यहां तक कि सभी आशीर्वाद के बावजूद भी।, हम कह सकते हैं, सभी कटुता और, सभी पाशविकता अभी भी मानव के लिए आकर्षण थे, और जो सबसे आश्चर्यजनक था। और जब ये चीजें हुईं, तो स्वाभाविक रूप से स्वतंत्रता को सुधार की परीक्षा से गुजरना पड़ा। और मनुष्य की यह सारी रचना ही वह परीक्षा थी जो घटित हुई थी। लेकिन उन सभी को बताने के लिए कि यह केवल मूल पाप है जिसने समस्या पैदा की है। ” तब उन्हें लगता है: “हे परमात्मा, आपने मूल पाप क्यों बनाया?” इसलिए उन्हें यह बताना बेहतर है कि आपकी विकास प्रक्रिया के लिए आपकी स्वतंत्रता का परीक्षण किया जाना अपरिहार्य है, क्योंकि यदि आपको सर्वोच्च स्वतंत्रता में प्रवेश करना है, तो आपको पहले यह पता होना चाहिए कि आप इसे वहन कर सकते हैं या नहीं। और यह देखने में … तो, मनुष्य को इसमें विकसित होने में,यह समझने में इतने साल लग गए,कि आदमी कुछ भी सहन नहीं कर सकता है। वह स्वतंत्रता को सहन नहीं कर सकता, वह धन को सहन नहीं कर सकता, वह पदवी को सहन नहीं कर सकता, वह आराम नहीं सह सकता, वह कुछ भी सहन नहीं कर सकता।

और यही अब हम सहज योग में भी देख रहे हैं: जब उन्हें सुविधा मिलती है, तो वे फिर से बैठ जाते हैं। जब उन्हें भौतिक संपदा का कोई आशीर्वाद मिलता है, तो ऐसा ही होता है – फिर से वही – ईडन का गार्डन आपके पास वापस आ रहा है, और जब यह आपके पास वापस आना शुरू होता है, तो आप फिर से उसी अवस्था में वापस आ जाते हैं। अच्छी बात नहीं है। अब आपको यह समझना चाहिए कि आपको सर्वोच्च बनना है, इसलिए आपको इस सब पर प्रभुत्व करना चाहिए। अन्य कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं है, कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं है, केवल आत्मा महत्वपूर्ण है। केवल तभी आप इससे बाहर निकल सकते हैं … यह भी आपके लिए एक प्रलोभन के रूप में कार्य कर सकता है, आप देख सकते हैं। आपको मिलने वाले सभी आशीर्वाद प्रलोभन हैं। इसलिए आपको तैयार रहना चाहिए। आत्मा से ज्यादा महत्वपूर्ण कुछ भी नहीं है, आप देखते हैं। हम आत्मा को प्राप्त करने के लिए किसी भी तरह की चीज के लिए तैयार हैं। हम इस बात से परेशान नहीं हैं कि हमें क्या आशीर्वाद मिले या कुछ भी मिले, लेकिन हम जो चाहते हैं वह है आत्मा की वह स्वतंत्रता जिसमे किसी भी चीज की चाहत नहीं रही है, भौतिक चीजों की चाहत नहीं है, ताकि आप उस दीपक की तरह होंगे जो प्रकाश दे रहा है, बिना दीपक में लिप्त हुए चाहे वह सोने या चाँदी का हो या किसी अन्य चीज का, वह जल कर प्रकाशित कर सकता है, चाहे वह मिट्टी का बना |यही सहज योगियों द्वारा हासिल किया जाना है, जिसे समझा जाना चाहिए क्योंकि यह एक बहुत ही जोखिम की स्थिति है जहां, मुझे लगता है, लोग फिर से गिर रहे हैं ।

तो अब हमें अपने आप को विनम्र करना होगा, कहने के लिए, “ अब तक मुझे कुछ भी पता नहीं है, माँ, मुझे जानना है।” क्योंकि, यह मूल का ज्ञान है, जिसे आप नहीं जानते हैं। यह आपके लिए एक नया ज्ञान है। आप किस बारे में सवाल कर सकते हैं? आप कुछ भी नहीं जानते आपको मूल के ज्ञान के बारे में जानना होगा। इसलिए खुद को नम्र करें, और उसके बाद ही आप इस नवीन विकास का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। वह आतंरिक विकास है, जो भीतर, अंतःयोग है। जब तक आप नम्र नहीं होते हैं, तब तक यह काम नहीं करता है। आपको विनम्र होना होगा, क्योंकि जैसे ही आप प्रश्न पूछना शुरू करते हैं, यह आपका अहंकार है जो प्रश्न पूछ रहा है। तो उसमें बढ़ने के लिए, और जड़ों के ज्ञान के साथ आगे बढ़ने के लिए विनम्र रहें। यह आश्चर्य की बात है कि केवल भारत में ही इस ज्ञान की वास्तव में इच्छा की गई, और लोग बहुत गहराई तक चले गए। इसीलिए उनमें से हर एक को भारत आना पड़ा। यहां तक कि ईसा मसीह यह जानने के लिए भारत आए थे कि लोग इसे कैसे खोज रहे हैं, उनका समर्थन करने के लिए, उनकी मदद करने के लिए। इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि मूल का ज्ञान उस क्षेत्र में किया जाना है जहां यह अधिक संभव है। यह करना आसान है जहां जड़ें छेड़ी नहीं गयी हैं; और वह कौन सा देश था , भारत , जहां लोगों ने इसे खोजा था।

लेकिन जब वे फिर से विकसित होने  लगे, तो वे बैवकुफ और मूर्ख बन गए; और जब हम उन्हें देखते हैं, हम उन्हें देखते हैं, वे बहिर्मुखी हैं। लेकिन हम यह नहीं देखते हैं कि भारत में द्रष्टाओं ने कितना ज़बरदस्त काम किया है। मेरा मतलब है, आप उनमें से किसी एक को भी लेते हैं तो वह आपको सहज योग का पूरी समझ देने के लिए पर्याप्त है।

आप एक साधारण व्यक्ति को लें, एक बहुत ही सरल व्यक्ति, जैसे, साईं नाथ, जो कि देखने के लिए, बहुत ही सरल, लेकिन ज्ञान का ज़बरदस्त सागर।जो शिक्षित या कुछ भी नहीं थे। कोई नहीं जानता कि वह कहां पैदा हुए, क्या हुआ था, वह कहां से आए और कहां रहते थे, और वह उस उम्र तक कैसे आए। उनकी पृष्ठभूमि के बारे में कोई नहीं जानता। या आप आदि शंकराचार्य को लेते हैं, या आप कबीर, या किसी को भी ले सकते हैं। उदाहरण के लिए, आप मच्छिंद्रनाथ को लेते हैं। यदि मच्छिंद्रनाथ के बारे में पढ़ते हैं, तो आप नहीं जानते हैं, आपको लगता है कि वह किसी रहस्यमय ज्ञान दे रहे है। यह एक ज़बरदस्त काम है! वे सभी बाएँ और दाएँ गए, और उन्होंने सब कुछ किया, सभी प्रकार के प्रयोग किए। यदि आप उन किताबों को देखें जो उन्होंने नवनाथों, नौ नाथों और मच्छिंद्रनाथ के जीवन के बारे में लिखी हैं। मच्छिंद्रनाथ इतनी गहराई में चले गए, और उन्हें उन जगहों के बारे में पता लगाया जहां महिलाएं शासक थीं। मुझे लगता है कि वह जगह बेल्जियम रही होगी, जहां वह महिलाएं शासक थीं और पति सिर्फ बंद गोभी की तरह थे; और यह और वह और सभी प्रकार की चीजें जो उन्होंने खोजी और फिर क्या हुआ और कैसे उन्होंने इसे ठीक करने की कोशिश की।

यह एक अन्य दिशा में आंदोलन है, आप देखते हैं, मूल की दिशा में, कि ये जड़ें कैसे चली गई हैं और यहां और वहां इस तरह के भयानक पेड़ो को जन्म दिया है और उन्होंने कैसे काम किया । और यह एक ऐसी प्रतीकात्मक बात है कि उनके काम को समझने के लिए, आपको वास्तव में बहुत गहरा और बहुत मर्मज्ञ होना होगा, जिसके लिए मानव मन अभी तक उनके द्वारा किए गए काम की मात्रा को देखने में सक्षम नहीं है। यह देखना संभव नहीं है। जैसे, यदि आप आदि शंकराचार्य का विवरण देखते हैं यहां तक की आपकी माँ के बारे में मार्कंडेय का वर्णन देखते हैं, तो यह उल्लेखनीय है कि वे कितनी छोटी-छोटी चीजें देख सके। कहाँ से, किस कोण से। और माँ की हर छोटी बात को वह देख सकता था, जैसा कि एक बच्चा देखता है, आप देखें, बिल्कुल माँ के करीब।

इसका मतलब है कि अबोधिता पूर्ण और सिद्ध थी। अन्यथा आप इन बिंदुओं को नहीं देख सकते हैं जो उन्होंने देखे हैं, सभी छोटी चीजें जैसे कि माता के तीन आवृत। कोई कैसे देख सकता है, लेकिन बच्चा देख सकता है कि माता की तीन सतह हैं, कि उसके शरीर में तीन सतह हैं। केवल एक बच्चा देख सकता है। यह ज़बरदस्त है, वह अबोधिता, उनकी पैठ और उनका साहस मैं आपको कहती हूँ यह ज़बरदस्त है | उस पैठ तक विकसित होने के लिए वास्तविक साहस चाहिए। तो सबसे पहले किसी को भी अबोधिता हासिल करना चाहिए, लेकिन यह प्राप्ति ईसा मसीह के माध्यम से या गणेश के माध्यम से हासिल नहीं होना चाहिए,  इसे स्वयं आप को पाना चाहिए । मतलब तुम हो, तुम अबोध हो। आपको यह कहना नहीं है ना ही आपको किसी के माध्यम से आना है। आप वह हैं, आप सीधे सीधे हो सकते हैं। यह कार्य उन लोगों के लिए है, जिन्हें आत्मसाक्षात्कार नहीं है, उन लोगों के लिए है जो मूर्ख हैं, उन लोगों के लिए हैं जो सीधे प्राप्त नहीं कर सकते हैं। आप सभी इसे सीधे प्राप्त कर सकते हैं। यह आपका आशीर्वाद है, यही सबसे बड़ी बात है कि आप सीधे वह सब हासिल कर सकते हैं। लेकिन आपको उस अबोधिता की उस स्थिति तक पहुँचना है जिसके द्वारा आप इतने सूक्ष्म, इतने सूक्ष्मतम हो जाते हैं, क्योंकि अबोधिता वह सूक्ष्मता है जो आप सभी क्षेत्रों में प्रवेश करते हैं जड़ों का तथा जीवन वृक्ष का ज्ञान। और यह बेवकूफ़ अहंकारी बकवास लोगों के लिए नहीं है। वे राक्षस बन जाते हैं, मैं तुमसे कहती हूं, वे राक्षस हैं।इसलिए हम उनके रास्ते पर नहीं जा रहे हैं, हमें दूसरे रास्ते पर जाना होगा।

 इसलिए हमें अपने भीतर विनम्र होना चाहिए और एक बार अपनी अबोधिता पवित्र निर्दोषता,आपके भीतर की मासूमियत को जगाने की कोशिश करनी चाहिए । संस्कृत भाषा में अबोधिता के लिए कोई शब्द नहीं है, तो आपको आश्चर्य होगा। क्योंकि उनके लिए जो कुछ भी पवित्र है, शुभ है, सब कुछ उसमें है। निर्दोषता के लिए कोई शब्द अलग नहीं है, क्योंकि वे यह नहीं सोच सकते हैं कि हवा में मौजूद निर्दोषता उस तरह हो सकती है। यह किसी चीज के अंदर होना है, आप देखते हैं, यह हमेशा एक कप में ही पानी हो सकता है । इसलिए वे सोच भी नहीं सकते थे , कि वे पानी को हवा में लटकने के बारे में सोच भी नहीं सकते। इसके लिए कुछ कप होना चाहिए। तो वे कहेंगे “शुभ समय,” “शुभ व्यक्ति” या “शुभ बात,” “शुभ रात्रि,” “शुभ दिन।” सब कुछ निहित है, पात्र या धारक में जैसे ।धारक जो अबोधिता को धारण कर सके , आप देखें। तो शुभता। फिर से, शुभ। यह एक विशेषण है। यह कहने जैसा कुछ नहीं है कि यह एक ठोस अबोधिता है, शुभ। शुभ अपने आप में एक विशेषण है, मासूमियत के लिए कोई संज्ञा नहीं है। निर्दोष यह हो सकता है, लेकिन निर्दोषता उनके लिए मौजूद नहीं है क्योंकि यह हर जगह मौजूद है जो निर्दोष है। यह एक ऐसा व्यापक विचार है, यह विराट गणेश का एक व्यापक विचार है। जब वह पूरे विराट में हो, तो आप उसे ‘निर्दोष’ कैसे कह सकते हैं? इतनी सूक्ष्मता है कि किसी संज्ञा में नहीं समा सकती। बहुत सूक्ष्म चीज है, और हमें वैसा सूक्ष्म बनना है।

परमात्मा आप को आशिर्वादित करें !

परमात्मा आप सबको आशीर्वाद दें!

(अब, पूजा प्रोटोकॉल शुरू होता है। पूजा प्रोटोकॉल के दौरान श्री माताजी की कुछ टिप्पणियाँ नीचे दी गई हैं।)

आप मेरे पैर को धोना शुरू कर सकते हैं। सबसे पहले, हम क्या कर सकते हैं कि जिन लोगों ने मेरे पैर को धोया नहीं है वे कृपया अपने हाथों को उठाए – अब तक। … वह धोया है? (s.y.: “हर कोई है।”) हर कोई है। उसने धोया नहीं है? ठीक है, आओ।

पहले उस तरह। जब वे पूजा शुरू करेंगे तब आप इसे हटा सकते हैं। आज मैं सबसे पहले यह सोचती हूं कि जो लोग मेरी पूजा करना चाहते हैं जिन्होंने (फैसला किया?) सबसे पहले मेरे पैर धोएं। और फिर आप सब मेरे पैर धो सकते हैं।

कौन लोग हैं जो पूजा करना चाहते हैं? आप। और कौन? तुम्हारी पत्नी। गणेश की पूजा के लिए मचिन्द्रनाथ को सबसे पहले आने दो। और कौन? उसने पूजा की है, इस महिला ने? वह कर चुकी है। इसलिए हम एक स्विट्जरलैंड से, दूसरा रोम से, दो व्यक्ति अन्य से ले सकते हैं। यह आपकी सहायता करने के लिए है, ठीक है। उसे स्विट्जरलैंड से आने दो। और हम गुइडो को बुला सकते  हैं … गुइडो, क्या आप ज़मीन पर बैठ सकते हैं? क्या आप ज़मीन पर बैठ पाएंगे? आप बैठ पाएंगे? ठीक है। इसलिए हमारे पास दो व्यक्ति होंगे। ठीक है? 

अब आपको यहां मदद करनी चाहिए। इन सभी चीजों को बाहर निकालना है, अब (…)हां, साथ चलो। सबसे पहले आप अपने पैरों को धोने के लिए क्या करते हैं। तब (जाने?) आप मेरे पैर धोते हैं और चले जाते हैं, और आप सभी एक-एक करके जा सकते हैं। ठीक है?आप बेहतर हो की  अपनी घड़ी खोल लें … आपका नाम क्या है? (s.y.: Giovanni)। बहुत अच्छा।

परमात्मा आपका भला करे।

 अब अपने चैतन्य देखें। अपने हाथों में देखें सब ठीक है, अच्छा। 

परमात्मा आपका भला करे।

उसे थोड़ा पानी दो।वह पानी धोने के लिए वहाँ हो सकता है। (…) यह उस एक में जा सकता है। या आपके पास कुछ और है, एक जग या कुछ है? या हम इसे  वैसे ही बाहर ले जा सकते हैं । यदि आप (…)। तो आप इसे बाहर निकाल सकते हैं और इसे वहां फेंक सकते हैं, आप देख सकते हैं। उन्हें बगीचे में फेंकने के लिए कहें। फिर कोई भी इसे बगीचे में फेंक सकता है, और इसे धो सकता है और ला सकता है। तो आप (?) उसे धो कर लाओ।मछिन्द्रनाथ, तुम यहाँ आओ। तुम इधर आओ। तुम्हें काम करना पड़ेगा। (…) अब अच्छा। अब यह बात है। उसने अपना काम कर दिया है (…) साथ आओ, मेरे पैर रगड़ो। आह अच्छा। ठीक है। अब यह खत्म हो गया है, यह ठीक है, यह किया है उसको ले जाइये।वे आनंद लेते हैं, वे आनंद लेते हैं। आह येस! अब कुंडलिनी कहां है? सब ठीक है, अब उसे जाने दो, अब बस ले जाओ। अब आप क्या कर सकते हैं कि मेरे पैरों को पानी से धोना है, या आप कुछ और पानी लेते हैं, (क्योंकि) मछिंद्रनाथ ने पहले ही इसे बिखेर दिया है। आप इसे सभी के सहस्रार पर रख सकते हैं। आपने इसे सभी के सहस्रार पर डाल दिया। अब तुम मेरे पैर धो लो। तुम अपने हाथ रगडो फिर मेरे, , तुम इसे ऐसे ही रगड़ते हो। अपने हाथों को रगड़ना चाहिए। अपने बाएं हाथ को रगड़ें क्योंकि … बाएं तरफ़ा, अपने बाएं को अधिक रगड़ें …(मंत्रों का पाठ शुरू)(श्री विष्णु के नामों का सस्वर पाठ)ये इक्कीस नाम हैं, ये श्री विष्णु के इक्कीस नाम हैं जो आपके धर्म का, आपके विकास का पहलू है। पहले निर्वाह और फिर विकास। तुम्हारे भीतर वह पिता है और इसलिए पहले क्योंकि आप सभी अपने विकास की मांग कर रहे हैं, हम इक्कीस शक्तियों, ईश्वर के इस पिता पहलू की इक्कीस शक्तियों को आह्वान करते हैं। इक्कीस शक्तियाँ। ये इक्कीस नाम हैं जो हमारे भीतर विकास की इक्कीस शक्तियों का प्रतिनिधित्व करते हैं। सुषुम्ना चैनल को इक्कीस शक्तियाँ मिली हैं। आप अनुवाद कर सकते हैं, फ़्रेंच में यह बेहतर है।विष्णु, विष्णु, यह विष्णु शक्ति है या, हम कह सकते हैं, नारायण। विष्णु, पिता।यह आपके दाईं ओर को बढ़ाने के लिए  है क्योंकि यह अब कार्यान्वित हो रहा है। ( बाद में गायत्री मंत्र पढ़ा गया)(देवी महात्म्य से श्री दुर्गा के मंत्रों का पाठ)कृत युग। यही कृत युग है। कृति  का अर्थ है कि यह कब प्रभावी होगा, कब प्रभावी होगा। काम हो जाएगा। यह युग है, जहां यह किया जाएगा। कृत युग। यह वह विशेष समय है, जो कलयुग और सत्य युग के बीच है, यह कृत युग है जहां चीजें की जाएंगी, काम किया जाएगा। पुनरुत्थान समय जहां आपके हाथ बोलेंगे। यह बात है। आप समझ सकते हैं। अनुवाद करो। कृत युग। “क्रि” का अर्थ है “करना”।(मछिन्द्रनाथ से: यहाँ आओ, तुम बैठ जाओ। तुम्हें पूजा करनी है। आओ, साथ आओ, यहाँ आओ। इस तरफ आओ। आपको पूजा करनी होगी। ठीक है?

माँ बच्चे को नीचे रखती है: “ठीक है। वह फूलों से, इस बच्चे से उत्साहित हो जाता है। ”गणेश अथर्व शीर्ष 

त्वमेव भूमि रापो…। मां ने अथर्व शीर्ष को समझाने के लिए रोका …देखिए, तत्वों जायते, का अर्थ है सिद्धांत, आप पूरे ब्रह्मांड के सिद्धांत को जागृत करते हैं, र प्रत्येति का अर्थ है कि आप उस का अनुभव भी देते हैं , ताकि वह वह हैं जो सिद्धांत को उत्पन्न करे और वह आपको अनुभव भी दे। (इतालवी में अनुवाद)? प्रत्ये, प्रत्ये वह अनुभव है जो सिद्ध होता है, जो आपके अस्तित्व को सिद्ध करता है, आप देखते हैं। आप अपनी खुद की प्रत्ये देते हैं, मतलब आप अपना अनुभव देते हैं जिससे यह साबित होता है कि आप मौजूद हैं।

(योगी जी .अथर्व शीर्ष का अनुवाद पढ़ रहा है)।

श्री माताजी: तो अनुवाद, किसी को पढ़ना चाहिए। ग्रीगोइरे संस्कृत पढ़ सकते हैं। तो, जब यह शुरू होता है, तो ब्रह्म तत्व, यह क्या है?

 (Sy: त्वम ब्रह्मा,त्वम विष्णु,त्वम रुद्रस …) तो उसे रुद्र कहा जाता है, देखिए? लेकिन सदाशिव के रूप में नहीं, आप देखते हैं, क्योंकि रुद्र अवस्था में, क्योंकि वह हर चीज का तत्व है, वह सिद्धांत है। रुद्र… (एकादश रुद्र को इंगित करता है)।(वे तब श्री गणेश को प्रार्थना का दिव्य सार पढ़ते हैं)

श्री माताजी: यह होना चाहिए आप मनुष्य में ईश्वर हैं, यह बेहतर होगा। मनुष्य में परमात्मा…। वह आदमी नहीं है, किसी भी तरह से, आप उसे कैसे कह सकते हैं?

(श्री माताजी ने मंगल सूत्र मांगा।)

श्री माताजी से मच्छिंद्रनाथ:  उसे मंगल सूत्र पहनाने दो। वह एक है … श्री गणेश में मंगल सूत्र देने की शक्ति है। मुझे यह पहनने दो। साथ चलो। धन्यवाद।

आपके पास सबसे बड़ा अधिकार है (मंगल सूत्र दिखाता है)। उन्होंने दूसरा रास्ता  कर दिया, यह इस तरह से प्रयोग किया जाता है जब शादी का पहला साल होता है – आप देखते हैं, यह सही है, यह कैसे डाला जाता है।सिर्फ विवाहित महिलाएं। विवाहित महिलाओं को ऐसा करना पड़ता है। ठीक है? सभी विवाहित महिलाओं और फिर कन्या (अविवाहित महिलाओं) को कुछ और करना पड़ता है। आप सभी, हमें दो दो अन्यथा यह सब ठीक नहीं होगा। आप उन्हें मिला सकते हैं, कोई नुकसान नहीं। सभी विवाहित महिलाओं की प्रतीक्षा करें। तुम साथ चलो। तो अब हम शुरू करें। मैंने अपने सभी गहने नहीं लाए श्री माताजी: यह अच्छा है। परमात्मा आप सबको आशीर्वाद दें। अखण्ड सौभाग्य। यह उन सभी विवाहित महिलाओं को दिया गया आशीर्वाद है जो आपके सौभाग्‍य को बिना किसी बाधा के आपके जीवन भर बनी रहने देती हैं। आपके दांपत्य जीवन में हर समय  आप के जीवनकाल में कोई बाधा नहीं होगी ।

परमात्मा आपका भला करे।

श्री माताजी: अब कुमकुम के लिए। आप लोग आ सकते हैं, और शादीशुदा लड़कियां पानी के साथ आ सकती हैं …(श्री माताजी अपने हाथों में कुछ रगड़ रही हैं, हालांकि हम यह नहीं देख सकते कि क्या वीडियो केवल ऊपरी तौर पर दिखाता है, फिर वह कहती है)

श्री माताजी: सबके लिए थोड़ा सा रखें और इसे सब लें और वे इसे अपने हाथों पर रख सकते हैं। यह उनके लिए अच्छा है। गुइडो, आप इसे घूमा दें। और इसे सभी के हाथों में दें, ताकि वे थोड़ा कम रगड़ें, ताकि…ग्रीगोइरे, आप अपने नाम पढ़े हैं जो आपने बनाए हैं, आपके नाम कहां हैं?

(ग्रीगोइरे पूछता है “श्री शिव या श्री महाकाली के लिए?”)श्री माताजी: हाँ… .श्री शिव… यह सब केवल उनके आनंद के लिए है, क्या नहीं है?

योगी: ओम त्वमेव साक्षात श्री नव यरुशलमेश्वर

 -श्री माताजी: फिर!

योगी: ओम त्वमेव साक्षात श्री नव जेरुलेश्वर – वह न्यू यरुशलम के परमात्मा हैं(ओम त्वमेव साक्षात श्री आदि निर्मलतम) – वे श्री माताजी के आदिम स्व हैं।(ओम त्वमेव साक्षात श्री सहज योगी प्रिया) – वह सहज योगियों के पसंदीदा हैं |

श्री माताजी: तो इसका मतलब है कि वह सहज योगियों के प्रिय हैं।

योगी: यह एक और नाम है, एक और नाम है, माँ, इसके लिए, सहज योगी वत्सला,श्री माताजी: सहज योगी वत्सला।

योगी: प्रिया भक्त, वह भक्तों की पसंदीदा है।

श्री माताजी: प्रिया भक्त; इसलिए प्रिया पहले है, लेकिन यदि आप इसे अंतिम रूप देते हैं, तो आप देखते हैं – भक्त प्रिया का अर्थ है, वह भक्तों के शौकीन हैं, आप भक्त प्रिया को देखते हैं। लेकिन आपको यह कहते हुए कि वह प्रिय है, आप देखते हैं क्योंकि प्रिया, जहां आप इसे डालते हैं, आप देखते हैं, तो यह मेरा नाम है, इसलिए मैं प्रिय हूं। आप इसे प्रेमी से बदल सकते हैं, बेहतर होगा – यदि आप इसे प्रेमी कहते हैं तो यह सब ठीक होगा।आप इसे कह सकते हैं, प्रिय – ग्रीगोइरे – सहज योगी प्रिय यह सब ठीक है, लेकिन अगर आप इसे ‘प्रिया’ कहते हैं, तो तुरंत इसका दूसरा  मतलब है दूसरा तरीका  है क्योंकि आप संबोधित कर रहे हैं, आप मेरे अनुसार यह बात कर रहे हैं। वह देवी हो जाती हूँ , तुम देखते हो? संस्कृत ज़बरदस्त है, यहाँ और वहाँ थोड़ा परिवर्तन होता है और ऐसा काम करता है क्योंकि हर व्यंजन, प्रत्येक स्वर का एक अर्थ होता है, क्या आप हर व्यंजन की कल्पना कर सकते हैं और प्रत्येक स्वर का एक अर्थ होता है और एक मंत्र होता है क्योंकि यह एक देवानंद है, इसे समझा जाता है केवल देवों द्वारा, देवों द्वारा निर्मित देवानंद, इसलिए इन सभी का इतना ज़बरदस्त प्रभाव है जब आप इन सभी चीजों को जोड़ते हैं, तो आप देखते हैं।

सहज योगी: मैं आपके लिए श्री माताजी के कुछ नाम पढूंगा हैं?

श्री माताजी: बिलकुल ठीक।

(अधिक नाम, सभी शुरुआत निर्मला के साथ)

श्री माताजी: सुंदर।

उस तस्वीर में वही कंघी प्रकाश के रूप में सामने आई है, क्या आपने देखा है? एक लौ की तरह, यह कंघी। क्या आपने वो तस्वीर देखी है? आपके, हां, आपके एलबम में।तेल, आंवला, आंवला तेल? (बालों के लिए। एक योगी दूसरे नाम से जवाब देता है)।(मां ने मांगा खस इत्र )

माताजी: मैंने कुछ खस, ग्रीगोइरे , आपके बाथरूम में मैंने कुछ खस देखे,खस इत्र है। । मैंने एक देखा, यह “अतहर” होना चाहिए,  भारत से आप देखें क्योंकि देखते हैं कि यह “मोगरा” भी है …यहां जिस तरह के इत्र का लोग उपयोग करते हैं, वे बहुत खतरनाक हैं, विशेष रूप से यह ‘तबैक’ और कुछ नहीं वरन तंबाकू से है, आप देखते हैं कि लोगों को इसकी लत लग जाती है, क्योंकि यह एक लत है।हाँ, यह सब ठीक है, यह सब ठीक है। यह हिना है – क्या उस पर हिना ’लिखा है? “खस, एक ही बात। जैसा था वैसा ही। यह सब ठीक है। जैसा था वैसा ही।आप सभी सहज योगियों के लिए इस इत्र की खस को लगा सकते हैं। यह आपकी सभी विशुद्धि को साफ करता है, विशेष रूप से दायीं विशुद्धि को। यद्यपि यदि आपके पास हिना सबसे अच्छा है, क्योंकि यह आपके दाहिने विशुद्धि को बहुत साफ करता है, लेकिन यह उन लोगों के लिए अच्छा है, जो लिवर के रोगियों के लिए तेज़, गर्म होते हैं।

(सहज योगी मन्त्र कह रहा है)

श्री माताजी:  (उसे यह करते रहने दो),अब मुझे तलवार रखने दो,। मैं इस हाथ में तलवार धारण करूंगी|

(ललिता सहस्रनाम पढ़ने के लिए कह रहे हैं सहज योगी)

श्री माताजी: १०८ नाम। क्या हमें 108 नामों की प्रतियाँ मिली हैं? 

(sy: नहीं)

 लेकिन आप इसका अनुवाद कर सकते हैं।

योगी: (श्री माताजी को साड़ी दिखाते हुए)यह मेरी पत्नी है जिसने इसे चुना है, मैं निर्दोष हूं। 

(श्री माताजी: उसने चुना और आपने दोष उस पर डाल दिया। यही कारण है कि , सभी दोष लेने के लिए पत्नियाँ हैं।

(श्री माताजी बता रही हैं कि योगिनीयों को इसे कैसे मोड़ना चाहिए और साड़ी को उनके चारों ओर रखना चाहिए)आपको इसे दूसरे तरीके से खोलना होगा, जैसे कि, आधा रास्ता – आधा खुला, आप देखें? यह है कि आपको इसे कैसे लेना चाहिए, हां, इसे उस तरफ मोड़ो। (…) अभी। आपको इसे घुमाव देना होगा, यही समस्या है।

श्री कृष्ण के समय उनके पास यही तरीका था (सामने पल्लू)मेरे बालों को पीछे से हटा दें और मेरे बालों को बाहर निकालें।आधुनिक घड़ी नहीं थी। लेकिन मैं समय पर विश्वास नहीं करती!

(माला अर्पित की जाती है)

सबसे अच्छा संयोजन हरा, नारंगी और पीला है।

(नारंगी फूल का ताज दिया जाता है)फूल सबसे ऊपर / आसपास सबसे अच्छे हैं? प्रमुख, वे कहते हैं।सुंदरता का संकेत यह है कि आप अब किसी भी अपूर्णता को बर्दाश्त नहीं कर सकते। यह [मुकुट] बहुत सुंदर है इसलिए आपको उसके संबंध में सब कुछ बनाना होगा, किया जाना है। यह किया है, यह बहुत अच्छा किया है।

परमात्मा आपका भला करे।

पूरी तस्वीरें भी लेने की कोशिश करें।

(हथियार श्री दुर्गा को दिए गए हैं। श्री माताजी तलवार लेती हैं, लेकिन क्लब नहीं, कहते हुए)

मुझे इसकी आवश्यकता नहीं है! 

(तब वह शंख माँगती है)तुम पढ़ सकते हो

…(आरती) खड़े हो जाओ, इसे नीचे जाना है

परमात्मा आप सभी का भला करे

 अपने आप को एक बंधन दे

(योगी कहते हैं जगदम्बे,)

लॉर्ड्स प्रेयर कहते है 

  माताजी: एक बार और।

श्री माताजी: एक बार और।

प.। पु.। श्री माताजी निर्मला देवी