Workshop in the Park, Mother Are You The Holy Ghost?

Adelaide (Australia)

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                                               पार्क में कार्यशाला

 एडिलेड, ऑस्ट्रेलिया, 5 मार्च, 1983।

श्री माताजी : इस केंद्र को हम “बायीं विशुद्धि” कहते हैं। अब क्या आपने उन्हें बायीं विशुद्धि के बारे में बताया है?

सहज योगी : नहीं, विशिष्ट पहलू नहीं, केवल इसकी सामान्य बातें।

श्री माताजी : ठीक है।

अब, यह बायीं विशुद्धि की पकड़ आपको तब आती है जब कि आपने मंत्रों को गलत तरीके से कहा है। देखिए, मन्त्र तभी कहे जाने चाहिए जब कोई आत्म ज्ञानी हो जो यह जानता हो कि कौन से मन्त्रों को बोलना है। और यदि आप को इसके बारे में ज्ञान नहीं हैं, फिर भी आप मंत्रों को स्वीकार करने लगते हैं। चाहे जो कोई भी आपको कहे कि, “यह मंत्र बोलो”, आप इसे बिना समझे ही कहना शुरू कर देते हैं भले ही यह किसी अधिकृत द्वारा दिया गया हो अथवा   नहीं। आप यह भी ज्ञान नहीं होते है कि यह आपके लिए है या नहीं। शायद कुछ के लिए इसकी आवश्यकता नहीं है। किसी विशेष मंत्र की आवश्यकता नहीं भी हो सकती है। और कुछ मंत्र बिल्कुल बेतुकी बातें हैं। तो ‘मन्त्र’, यह भी बहुत बड़ा विज्ञान है। और अभी-अभी मुझे बायीं विशुद्धि की पकड़ का अनुभव हो रहा है। इसे कोई व्यक्ति तब भी महसूस करता है, भले ही आपने मंत्र नहीं लिया हो लेकिन, आप दोषी महसूस कर रहे हैं। जैसे, आप देखिए, यदि आप दोष स्वीकारोक्ति और इसी तरह की चीजों के अभ्यस्त हैं, यदि आप ऐसी स्थिति के आदी हैं जहां आपको लगता रहता है कि “मैं अमुक बात ,इसके लिए दोषी हूं”। तुम्हें पता है, आज के आधुनिक जीवन के मानदंड इतने मज़ेदार हैं, कि छोटी-छोटी बातों के लिए भी आपको दोषी महसूस करना पड़ता है। उदाहरण के लिए यदि आप कांटा गलत तरीके से रखते हैं, तो आप दोषी महसूस करते हैं कि: “हे भगवान, मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था।” उस तरह, जीवन बहुत जटिल है, लेकिन बहुत, बहुत छोटी चीजें भी आपको दोषी महसूस करा सकती हैं। तो अगर आप भी दोषी महसूस कर रहे हैं तो आप इस चक्र पर बहुत ज्यादा पकड़ महसूस करते हैं।

अब, यह केंद्र बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि अगर यह केंद्र ठीक नहीं है, तो कुंडलिनी नहीं उठती है। वह इसे खींचती है, इस बिंदु पर। इसका आधा हिस्सा खींच कर निकाल लिया जाता है। और एक रुकावट है। और इसलिए कुंडलिनी नहीं उठती है। अब, किसी को भी किसी भी चीज़ के लिए दोषी महसूस नहीं करना चाहिए! दोषी महसूस करने या दोष स्वीकारोक्ति के लिए जाने और हर समय ऐसा कहने योग्य कुछ भी नहीं है कि, “मैं ऐसा पापी हूं” और मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था और मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था। क्योंकि, जैसा कि मैंने कल तुमसे कहा था, ईश्वर प्रेम का सागर है, वह करुणा का सागर है और वह क्षमा का सागर है। इसलिए हमें अनावश्यक रूप से अपनी निंदा नहीं करनी चाहिए। इसके अलावा आप परमात्मा के मंदिर हैं। और अगर आप खुद की इस तरह निंदा करते हैं कि,  “मैं व्यर्थ हूं, मैं बेकार हूं”, तो आप उस मंदिर की निंदा कर रहे हैं जिसे ईश्वर ने बनाया है। आपने खुद को नहीं बनाया है। इसलिए आपको अपनी निंदा करने का कोई अधिकार नहीं है। अब छोटी-मोटी गलतियाँ अगर आपने की हैं तो कोई बात नहीं। क्योंकि मैं सागर की बात कर रही हूं। इधर-उधर की इतनी छोटी गलतियाँ हमेशा सुधारी जा सकती हैं। इसलिए किसी को दोषी नहीं मानना ​​चाहिए।

अब देखिए, क्या आप हाथों में चैतन्य महसूस कर रहे हैं? आइए देखते हैं।

सहज योगी: क्या मैं पूछ सकता हूँ, क्या तुम वहाँ माँ को सुन सकती हो?

श्री माताजी : आगे आओ, अगर तुम सुन नहीं सकते तो यहाँ आओ।

सहज योगी: क्या आप आ सकते हैं? अगर पीछे कोई है जो सुन नहीं सकता है, तो यहाँ चारों ओर कुछ अच्छी जगह है। ट्रैफिक के शोर के साथ यह थोड़ा मुश्किल है। माँ इस चक्र के बारे में बात कर रही हैं जो यहाँ इस तर्जनी उंगली पर दर्शाया गया है। और यह बताया गया कि यदि अनुपयुक्त मन्त्र बोले जाते हैं तो यह पकड़ में आ सकता है। यदि बोले जा रहे मंत्र या जाप गलत हैं, अनुपयुक्त हैं या उन मंत्रों का उपयोग करने के लिए अधिकृत नहीं है, तो बायीं विशुद्धि बिगड़ जाती है। और इस समय माँ को लग रहा है कि बायीं विशुद्धि पकड़ गई। इसका एक और कारण अपराध बोध भी है। यदि आप अपराध की भावना महसूस करते हैंआपने जो कुछ भी किया है उसके लिए अपराध बोध। और माँ उस अपराधबोध की तरफ इशारा कर रही है कि…  मेरा मतलब, हमने क्या किया है? छोटी-छोटी बातें, जो भी पाप हमने किए हैं। हम कैसे दोषी महसूस कर सकते हैं जब भगवान पूर्ण करुणा, पूर्ण प्रेम, सम्पूर्ण क्षमा हैं? तो यह दूसरों को क्षमा करना और खुद को क्षमा करना है और अनधिकृत मंत्रों के उपयोग को रोकना है, जो उस पकड़ को साफ कर सकते हैं, इस पर, जो यहां इस बायीं तर्जनी उंगली पर दर्शाया गया है, बाईं विशुद्धि।

श्री माताजी : इसका मतलब है कि आपको खुशमिजाज इंसान बनना है। जब आप परमेश्वर के राज्य में प्रवेश कर रहे हैं तो आपको आनंदित लोग होना चाहिए। अब, बहुत सारे लोग जिन्हें हृदय की समस्या है, वे इस रुकावट से बहुत अधिक प्रभावित हैं। अगर वहाँ है, यह रुकावट है, तो ऐसे व्यक्ति के दिल का इलाज करना मुश्किल है। तो सबसे पहले हमें यह कहना चाहिए कि, “हम बिल्कुल भी दोषी नहीं हैं।” मेरा विश्वास करो, तुम दोषी नहीं हो। यदि आप मुझ पर विश्वास करते हैं, तो यह काम करेगा।

अब बेहतर है? (सामने बैठे योगी की ओर)

सहज योगी: वही।

श्री माताजी: वही? कुछ महसूस नहीं हो रहा। ? ऊपर रखो। यह तुम्हे मदद करेगा। अब बेहतर। क्या आप दोषी महसूस कर रहे हैं?

सहज योगिनी : मुझे कुछ भी महसूस नहीं हो रहा है।

श्री माताजी : लेकिन क्या आप दोषी महसूस कर रहे हैं?

सहज योगिनी: मैं कोशिश करता हूँ कि ऐसा न हो।

श्री माताजी: हाँ, तुम हो,

सहज योगी: वह ऐसा नहीं करने की कोशिश करती है। [हँसी]

श्री माताजी: लेकिन क्यों? बस कहो, “मैं दोषी नहीं हूँ।” क्या आप ऐसा कह सकते हैं: “माँ, मैं दोषी नहीं हूँ।” अपने भीतर कहो। बस इसे ईमानदारी से कहो, कहो कि तुम दोषी नहीं हो, बस।

अब बेहतर है, कार्यान्वित हो रहा है।

बस एक छोटी सी बात कहो, “माँ मैं दोषी नहीं हूँ”। यह इस चक्र पर विजय पाने का मंत्र है। [श्री माताजी हंसते हैं] ऐसा कहना एक सरल मंत्र है।

सहज योगी: “माँ मैं दोषी नहीं हूँ” यह बायीं विशुद्धि का मंत्र है।

श्री माताजी : बस अपने हाथ सीधे करो।

हंसा से।

ठीक हो तुम?

सहज योगी: हाँ।

श्री माताजी: [हिंदी/मराठी]

आप लोगों के बारे में क्या, आप इसे महसूस कर रहे हैं? अच्छा।

(सामने वाले से) क्या आप अभी भी महसूस नहीं कर पा रहे हैं?

सहज योगी : थोड़ा गर्म।

श्री माताजी : गरम, ठीक है, कोई बात नहीं, गरम सुधर जायेगा।

अब सबसे पहले सुधार इस धारणा के साथ करें कि कुछ अहसास होना चाहिए  जो कि शुरू हो रही है; हो सकता है कि यह थोड़ा गर्म हो, ठीक है।

अब यह वाली, यह उंगली (सबसे छोटी उंगली) थोड़ी छू रही है। अब यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण उंगली है क्योंकि यह हृदय, अंग, हृदय का प्रतिनिधित्व करती है। इसका मतलब है कि आपको यह स्वीकार करना होगा कि आप आत्मा हैं, क्योंकि आत्मा आपके हृदय में निवास करती है। तो आपको यह स्वीकार करना होगा कि आप दिल हैं और आत्मा कोई गलती नहीं कर सकती है। तो दोनों चीजें साथ साथ चलती हैं। आपको यह स्वीकार करना होगा कि आप आत्मा हैं। तो आप फिर से अपना दाहिना हाथ अपने हृदय पर रख सकते हैं।

सहज योगी: यहाँ यह उंगली कनिष्ठा जो कि बायाँ हृदय है जो आत्मा का स्रोत है।

श्री माताजी: नहीं-

सहज योगी: आत्मा ही है।

श्री माताजी: तो आपको कहना होगा: “मैं आत्मा हूँ।” पूरे विश्वास के साथ कहो: “मैं आत्मा हूँ।” स्पिरिट का अर्थ है “आत्मा” न कि वह स्पिरिट जिसे हम प्रेतात्माओं के रूप में जानते हैं [श्री माताजी हंसते हैं] जिसके बारे में मैं आज रात आपको बताने जा रही हूं।

श्री माताजी: अब बेहतर? [आगे बैठे योगी की ओर]

सहज योगी: [अश्रव्य]

श्री माताजी : यह हंसा को भी पार नहीं कर पाती।

क्या आप ऐसा कहकर बेहतर महसूस कर रहे हैं? क्या आप ठंडी हवा महसूस कर रहे हैं?

सहज योगिनी: [अश्रव्य]

श्री माताजी : आपके कोई गुरु थे या कोई?

सहज योगिनी: नहीं।

श्री माताजी : कोई बात नहीं। [श्री माताजी एक बंधन बनाते हैं]

श्री माताजी : चिंता मत करो, सब ठीक हो जाएगा। [आगे बैठे योगी को]

मैं सभी को व्यक्तिगत रूप से देखने जा रही हूं। ठीक है? लेकिन देखते हैं कि यह कहाँ तक जाता है हम इसे कर सकते हैं।

ओह बेहतर, इसमें सुधार हो रहा है।

धरती माता बहुत प्यारी है।

[श्री माताजी ने जमीन को छुआ और उसके माथे पर उंगलियां रखीं]

मुझे आपकी समस्याओं को खींचने के लिए ऑस्ट्रेलिया की इस भूमि को नमन करना होगा।

शोषित होने लगा।

तो अब यह ठंडा हो गया है।

ठीक है? तुम आज आए या तुम कल आए थे। कल या आज? अब, यदि आप गर्म महसूस कर रहे हैं, बहुत गर्म है, बात ऐसी है, गर्म का अहसास है यानि सबसे पहली संभावना है कि, आपको लीवर की समस्या होनी चाहिए। यदि नहीं, तो आप किसी गुरु के पास रहे हुए हो सकते थे और इसलिए अवरोध है। तो अब, आप क्या करते हैं, अपने बाएं हाथ को अपने जिगर पर रखना है।  बायां हाथ आपके लीवर पर रखें। अपने जिगर पर बायाँ हाथ।

उहूं ठीक है। क्या यह अभी भी गर्म है? अब बेहतर?

बेहतर।

बस इसे अपनी गोद में आराम से रखें।

त्वचा संबंधी सभी समस्याएं लीवर से होती हैं। सुस्त लीवर से एलर्जी होती है। और जिनको लीवर की अन्य परेशानी है, जैसे कभी-कभी आपको उल्टी, जी मिचलाना जैसा महसूस होता है, आपका चित्त ठीक नहीं है, यह सब खराब लीवर से आता है।

तो उसके लिए हमें यह समझना होगा कि, आप जो अत्यधिक गतिविधि कर रहे हैं, उसकी भरपाई के लिए कार्बोहाइड्रेट की आवश्यकता होती है। अब, अगर आज रात आपको थोड़ी चीनी और नमक मिल जाए, तो मैं इसे आपके लिए चैतन्यित कर दूंगी और आप इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। जिससे आपके लीवर की समस्या दूर हो जाएगी।

यह अब बेहतर है, बस इसे ऐसे ही सीधा रखें। तबियत पहले से कैसी है?

सहज योगिनी : ठंडा है।

श्री माताजी : देखिए, यह ठंडा हो गया। अब शक मत करो, यह अच्छा है। मेरा मतलब है, ठंडा या गर्म, एक बच्चा भी बता सकता है। इसलिए संदेह की कोई बात नहीं है।

सहज योगी : मुलाकात, कल रात को है मां |

श्री माताजी: आई एम सॉरी, कल रात। मुलाकात कल रात है।

सहज योगी : तो जिन लोगों ने माँ की कही हुई बात नहीं सुनी, चावल और चीनी और नमक, आप सोमवार की रात को कार्यक्रम में लाएँ और वे चैतन्यित करेंगी। आप इसे अपनी घरेलू आपूर्ति के साथ मिलाएं और फिर यह चैतन्यित हो जायेगा और इन समस्याओं को दूर कर देगा जिनके बारे में हम बात कर रहे हैं। तो थोड़ी सी मात्रा ले आओ, शायद आधा किलो, कुछ ऐसा ही।

श्री माताजी : पानी भी, अगर आपके पास झरने का पानी है, तो आप झरने का पानी ला सकते हैं क्योंकि यह पानी बहुत तकलीफदेह है।

सहज योगी : हाँ, झरने का पानी बेहतर है।

श्री माताजी: [श्री माताजी हंसते हैं] बाढ़ के लिए धन्यवाद।

बैठ जाओ।

आज आप कैसे हैं, ठीक है ? सुप्रभात!

यह बेहतर है।

अब यह जानना होगा कि बीज का अंकुरण हो चुका है। लेकिन इसे और अधिक विकसित करने के लिए आपको अन्य लोगों पर काम करना होगा। आपको इसे दूसरों को देना होगा। यदि आप इसे साझा करना नहीं सीखते हैं, तो यह विकसित नहीं होता है। यह फिर से कम हो जाएगा। और ऐसा होगा, आपको लगेगा कि आपने अपने वायब्रेशन खो दिए हैं। तो सबसे अच्छी बात यह होगी कि आप इसे दूसरों को देना सीखें।

अब आप में से जो ठंडी हवा महसूस कर रहा है वह आ सकता है और अब इस सज्जन पर कोशिश करें। आइए देखें, एक या दो व्यक्ति, आइए देखें कि यह कैसे काम करता है। कोई कोशिश करना चाहेगा? ठीक है।

सहज योगी : माँ आपको एक तरह से यह प्रदर्शित करना चाह रही हैं कि इसे कैसे करना है। अगर आप ठंडी हवा महसूस कर रहे हैं तो आगे बढ़ें।

श्री माताजी : एक या दो व्यक्ति, अब आगे आइये। अब आगे आओ। तुम यहीं बैठ जाओ। साथ चलो। ऐसे ही बैठो, ठीक है? तो आप सभी उन्हें देख सकते हैं। अब वारेन, क्या आप काम पर आ सकते हैं?

वॉरेन: हाँ।

श्री माताजी : अभी तो तुम दोनों हाथ मेरी ओर रख रहे हो। ठीक है? सबसे पहले। अब जब मैं वहां नहीं हूं, तो आप मेरी तस्वीर का उपयोग कर सकते हैं क्योंकि फोटोग्राफ में भी चैतन्य होता है। जब तक आप ठीक महसूस न करें तब तक आप इस फोटोग्राफ का उपयोग कर सकते हैं,

वह बहुत पीली है और लीवर बहुत खराब है।

सहज योगी: मुझे लगता है कि वह… क्या आप इस दिव्य प्रकाश वाले धंधे के लिए गई हैं?

लेडी: ओह, मुझे इसका नहीं पता। मैं बस इसे नहीं जानती।

सहज योगी: वह गुरु महाराज की शिष्या रही हैं

लेडी: नहीं, मुझे ज्ञान नहीं  मिला है, मैं बस अभी इसकी मीटिंग्स में जा रही हूं।

सहज योगी : सभाओं में जाना, वही बात है।

श्री माताजी : ज्ञान, ईश्वर का ज्ञान कभी न हो।

सहज योगी: वैसे भी आपको यह कभी नहीं मिलेगा।

श्री माताजी : ठीक है, अब, हाँ, ठीक है, अब अपना हाथ रखो। आपको ज्ञान कभी नहीं मिलता, आप मंत्रमुग्ध हो जाते है। ठीक है, इसे लगाओ। देखते हैं, अब देखते हैं।

[एक खड़े योगी को] तुम बस मुझे बताओ। कृपया अपना बायां हाथ मेरी ओर, दाहिना हाथ बैठे हुए आदमी के सिर के उपर रखें और मुझे बताएं कि आप अपनी उंगलियों पर क्या महसूस करते हैं।

सहज योगी: मुझे उस बाएं हाथ पर गर्मी आती है।

श्री माताजी : ठीक है,

आप किसी गुरु के पास भी गए हैं। क्या आप नहीं रहे?

आप देखिए, अगर यह बाईं ओर पकड़ रहा है, तो इसका मतलब है कि या तो आपको कोई भावनात्मक समस्या है या आप किसी गलत गुरु के पास गए हैं। ठीक है? इतना ही

उसे भी यही समस्या है। ठीक है?

सहज योगी : वही बात, बायीं ओर गरम है।

श्री माताजी : अब तुम ऐसा करो किहाथ वहां नीचे रख लेते हो और कहना पड़ता है कि “माँ, मैं अपना गुरु हूँ!” बस यही कहो। अपना गुरु सिद्धांत स्थापित करें, बस।

सहज योगी: इसे अभी अपने दिल में कहो।

श्री माताजी: “मैं अपना स्वामी हूँ”। “मैं अपना गुरु हूँ”।

आप सभी ऐसा कर सकते हैं, जो गुरु के पास गए हैं, आप सभी कर सकते हैं। कृपया, अपना-जैसा कि उन्होंने बायाँ हाथ मेरी ओर और दाहिना हाथ यहाँ बाएँ नाभी पर रखा है।

सहज योगी : यहां आएं और इसे यहां करें। आप में से कोई एक यहां आएं और करें।

श्री माताजी: बेहतर?

सहज योगी: तो आप इसे महसूस कर सकते हैं

श्री माताजी: देखिए। ऐसा कहते चले जाओ। बस आंखे बंद करके कहो। बस अपनी आँखें बंद करो और कहो “माँ, मैं अपना गुरु हूँ।” बस यही कहो।

हालात सुधरेंगे, आप देखेंगे।

सहजयोगी : यह बायें हाथ पर ठंडी होने लगती है।

श्री माताजी : अब तो बेहतर है, देखो।

सहज योगी: हाँ, यह है।

श्री माताजी : देखिए यह है।

अब बेहतर।

[एक खड़े योगी को] ठीक है।

[बैठे आदमी को] ठीक है? अच्छा। सब ठीक है अब? ठीक है।

फिलहाल के लिए यही आपका मंत्र है। कहने का तात्पर्य है: “माँ मैं अपना गुरु हूँ”, मेरी तस्वीर का उपयोग करें और आपको यह कहना होगा और यह सुधर जायेगा। अभी देखें, यह बेहतर है। क्या आप अपनी उंगली में देख सकते हैं? अपनी उंगलियां देखें; आप देखिए कि उंगलियां कैसी हैं,उंगली के सिरे ज्ञान से प्रकाशित है, लेकिन यह हिस्सा इतना अच्छा नहीं है, ठीक है?

अब इस तरह का हाथ , आप देखिये, पीला ,

सहज योगी: यह लीवर है।

श्री माताजी : इसका अर्थ है लीवर। यह लीवर का मरीज है, जरूर लिवर का मरीज है। अब ऐसे हाथ के लिए आपको क्या करना चाहिए कि जो पानी मैंने आपको दिया है उसे लेकर मूली के पत्तों से उबाल लें। और इसके साथ मूली के पत्ते और चीनी भी लें। वह पानी आपको कुछ समय तक लेना है। खासकर जब आपके उपयोग में ऐसा बाढ़ का पानी हो। उसके बाद आपको सावधान रहना चाहिए, क्योंकि लोगों को पीलिया हो सकता है। देखिए, यह बाढ़ ऐसी आपदा नहीं है। बाढ़ के बाद के प्रभाव कष्टदायक हैं। यह पानी अच्छा नहीं है, आपको कोई और पानी नहीं बल्कि झरने का पानी लेना चाहिए। आपको बहता हुआ पानी पीना चाहिए और जहां तक ​​हो सके पीलिया से सावधान रहें। अगर पीलिया हो जाए तो इसका एक ही उपाय है कि आप मूली के पत्ते लें, ढेर सारी मूली खाएं और उस पानी में उबाल लें जो आज मैं आपको दूंगी और उसमें थोड़ी सी चीनी डाल दें और बस वह पानी पिए, और कुछ नहीं।

क्योंकि जब ऐसी बाढ़ आती है तो एक बात का ध्यान रखना पड़ता है, क्योंकि बाढ़ के बाद के प्रभावों को महसूस किया जा सकता है। ठीक है? तो हमें साक्षात्कारी आत्माओं को बचाना होगा। वे परमात्मा के लिए बहुत कीमती हैं। और आपको पता होना चाहिए कि इन सभी समस्याओं से खुद को कैसे बचाया जाए। तो आप हैं- आपको जाना चाहिए जब आप पानी पीते हैं तो आज आप मूली के पत्ते भी ले लें। उन्हें उबाल लें। ठीक है? इसका स्वाद बहुत अच्छा नहीं लगता, इसमें चीनी डाल दीजिये. और आप उस पानी को कुछ समय के लिए लें और जहां तक ​​हो सके कोई दूसरा पानी नहीं लें, जैसे 2 दिन या 3 दिन। तुरंत आप पाएंगे, यह दूर हो जाएगा और आप बेहतर महसूस करेंगे। अब, यह अब बेहतर है। इसका रंग बहुत बेहतर है, क्या आप इसे देख सकते हैं? यह अब बहुत बेहतर रंग है?

सहज योगी: लाल वापस आ रहा है।

श्री माताजी : अब लाल आ रहा है, देखो? यह बहुत बेहतर है, देखिए, लेकिन इसे इस तरह से करना होगा कि यह स्थापित हो जाए। अब उसका हाथ देखें। अब देखिए, उसका हाथ बेहतर है, समझे? सहज योगी: यह सामान्य रंग है, वह लाली, ठीक है?

श्री माताजी: (दूसरे हाथ की ओर देखते हुए) अभी भी पीला है,

महिला: हाँ

श्री माताजी : फिर भी पीला, फिर भी पीला, लेकिन इतना नहीं। यह बहुत पीली चीज है, ठीक है?

पीलिया। क्या आपको इस देश में पीलिया होता है?

सहज योगी: हाँ, बहुत।

श्री माताजी : तो आपको पता होना चाहिए कि पीलिया का इलाज कैसे करें और अपना ख्याल रखें। पीलिया वास्तव में घातक हो सकता है और यह बहुत खतरनाक है, क्योंकि यह आपके लीवर को बहुत बुरी तरह खराब करता है। तो, सुरक्षित रहने के लिए, बहुत सारी मूली खाओ और उस पानी को भी ले लो जैसा मैंने तुम्हे बताया था, अपने पीलिया के लिए। क्या अब आप ठीक हैं? अब हम दो अन्य लोगों को देखते हैं।

सहज योगी: ठीक है, आओ। कुछ और लोग आगे आते हैं।

श्री माताजी : अब तुम यहाँ आओ। आप दोनों। चलो शुरू करते हैं। अब कौन कोशिश करेगा? [हिंदी/मराठी] एक और व्यक्ति जो काम करना चाहता है। कोई भी जो कार्यान्वित होना चाहता है?

तुम देखो, वे यहाँ हैं। तुम क्यों नहीं आते?

यहाँ आओ, बस।

आप कुछ गुरुओं के पास गए हैं?

आदमी: हाँ।

श्री माताजी: कौन सा?

आदमी: कोई विशेष नहीं।

श्री माताजी: हम?

आदमी: विशेष रूप से कोई नहीं।

श्री माताजी : सभी को।

आदमी: नहीं, मैं बस इधर-उधर घूमा हूँ।

श्री माताजी : आप साधक हैं। ठीक है, कोई बात नहीं! तो आपके लिए सबसे अच्छा यही है कि सबसे पहले इस हाथ को सामने रखें। और आपको कहना होगा, कि “माँ, मैं अपना गुरु हूँ।” क्या उसके सिर पर ठंडी हवा चल रही है?

सहज योगी: कूल। आप यहां काम करते हैं।

श्री माताजी: यहाँ, तुम बस उस पर काम करो। वह एक कठिन

क्या यह उसके सिर पर ठंडा है?

सहज योगी: हाँ।

श्री माताजी: सब ठीक है। क्या तुम ठीक महसूस कर रहे हो, मेरे बच्चे?

सहजयोगी : अपना बायाँ हाथ माँ की तरफ और अपना दाहिना हाथ और बायाँ हाथ रखो। आप उन्हें बताएं जो कि आप महसूस करते हैं।

श्री माताजी: [एक आदमी पर काम कर रहे भारतीय साधक को], उसे एक बंधन दे दो।

सहज योगी : हम इसकी रक्षा के लिए ऐसा करते हैं-

श्री माताजी: [हिंदी/मराठी]

देखिए उसके हाथ दाहिनी ओर कांप रहे हैं। [हिंदी/मराठी]

सहज योगी: अभी भी काँप रहे है।

श्री माताजी: काँप रहे हैं। [हिंदी/मराठी] [हिंदी/मराठी; भारतीय साधक चला जाता है]

सहज योगी : कोई और यहां आ जाओ।

श्री माताजी : मैं बस अभी आपको बताती हूँ कि क्या करना है। अब, यदि आपका दाहिना हाथ तस्वीर के सामने कांपता है। आप देखिए, बहुत सारे क्रम परिवर्तन और संयोजन हैं, लेकिन उनमें से कुछ प्रमुख हैं, मैं आपको बताती हूँ। अगर दाहिना हाथ काँपता है तो इसका मतलब है कि आप बहुत मेहनत करते हैं, सबसे पहले, आप भविष्य के बारे में बहुत ज्यादा सोचते हैं, आप अपनी दाहिनी ओर की ऊर्जा का बहुत अधिक उपयोग कर रहे हैं, जो मैं दिखाऊंगी। परिवार के लिए समय नहीं है! 

इन परिस्थितियों में आपको अपना दाहिना हाथ फोटोग्राफ की ओर या अभी मेरी ओर रखना है और अपना बायां हाथ रखना है – यदि आपका दाहिना हाथ कांप रहा है। क्या यह अब भी काँप रहा है? अपने आप को देखो।

सहज योगी : फोटो के सामने अगर आपका दाहिना हाथ कांप रहा है तो आप अपना दाहिना हाथ मां के सामने रख दें-

श्री माताजी : और दूसरी धरती माता पर!

सहज योगी : यदि आपका दाहिना हाथ गर्म या कांप रहा है तो अपना दाहिना हाथ माता की तरफ और अपना बायां हाथ पृथ्वी पर रखें। सिर्फ उन लोगों के लिए।

बाईं ओर गर्म या अधिक गर्म या काँपता हो।

श्री माताजी: मध्य हृदय।

सहजयोगी : इसे माता की तरफ और दूसरा हाथ पृथ्वी पर रख दें।

श्री माताजी : आपको दमा हो जाता है?

सहज योगी: आप जो कर रहे हैं वह एक ट्रांसमीटर या बैटरी के रूप में काम कर रहे है, और अच्छा है।

श्री माताजी: अब, क्या वे ठीक हैं?

सहज योगी: क्या वह ठंडा हो रहा है?

श्री माताजी : अब आप कहेंगे कि “माँ, मैं खुद अपना गुरु हूँ”, “मैं अपना गुरु हूँ” हमें कोई गुरु खोजने की आवश्यकता नहीं है। क्या किसी का दाहिना हाथ कांप रहा है? बस देखो। बैठ जाओ।

सहज योगी: अभी चेक करो। हर कोई बस इसे जांचें, यह देखने के लिए कि दाहिना हाथ कैसा है।

श्री माताजी: [हिंदी/मराठी]

सहज योगी : इस पर काम करें। यह थोड़ा अवरुद्ध है। यह वाकई बहुत गर्म है, माँ, जब वह महसूस कर रही होती है।

श्री माताजी: ठीक है? इसे जोर से दबाएं।

सहज योगी : वह वहां भीषण गर्मी महसूस कर रही है।

श्री माताजी : जोर से दबाओ। उसने कुछ नशीले पदार्थ भी लिए होंगे, यहाँ बायीं नाभि भी है।

क्या आपने कुछ ड्रग्स लीं?

सहज योगी: इतना नहीं।

श्री माताजी: लेकिन आपने कभी-कभी किया। क्योंकि आप देखिए, हर चीज का असर होता है।

थोड़ा सा। अब देखते हैं, क्या बेहतर है?

आपकी शादी हो गयी है?

आदमी: नहीं।

श्री माताजी : तो तुम विवाह करोगे। आपने शादी नहीं करने का फैसला नहीं किया है, है ना?

आदमी: यह सही है!

श्री माताजी : तब तो , आप विवाह करेंगे?

आदमी: मैं करूँगा।

सहज योगी: आप शादी करके काफी खुश हैं, है ना?

आदमी: हाँ।

श्री माताजी : हाँ, ठीक है।

अब देखें, बेहतर?

सहजयोगी: क्या आपको बायीं तरफ गर्म कम लग रहा है?

लेडी: गर्म कम है। यह पूरी तरह से गई नहीं है, लेकिन यह कम है।

सहज योगी: कम। ठीक है, तब यह स्पष्ट है।

श्री माताजी : देखिए आप कैसा महसूस कर रहे हैं। आप देखिए, अब आप खुद महसूस कर रहे हैं। कल तुमको आत्मसाक्षात्कार हुआ, आज तुम उसे अनुभव कर रहे हो!

अब उन्हें बताओ कि कुंडलिनी को कैसे ऊपर उठाना है! आप सभी देख सकते हैं कि दूसरे लोगों की कुंडलिनी को कैसे ऊपर उठाया जाता है। क्या आप उन्हें देख पा रहे हैं? उन्हें बताएं कि यह कैसे करना है! वहां आप हैं।

[श्री माताजी 2 अन्य लोगों से बात करते हैं जबकि एक सहज योगी कुंडलिनी के उत्थान की व्याख्या करते हैं]

खड़े हुए सहजयोगी: अपना हाथ सबसे निचले चक्र के नीचे रखें। और आप इस तरह से काम करते हैं। अपना चित्त यहां लगाएं।

श्री माताजी : यह बायाँ स्वाधिष्ठान है। यानी आप पहले भी किसी गुरु के पास जा चुके हैं।

महिला: ईसाई धर्म

श्री माताजी: हम?

सहज योगी: ईसाई धर्म

श्री माताजी: ईसाई धर्म।

खड़ा हुआ सहजयोगी: सबसे पहले अपना चित्त अंदर ही रखने के लिए आँखे  बंद करके, फिर इसे लगभग सात बार घुमाएँ और एक बार गाँठ बाँध लें। इस तरह ही नीचे उतारो। और फिर उसी तरह। अपना चित्त अपने अंदर रखें।

श्री माताजी : अब उन्हें भी बता दो।

हम्म, ठीक है, अब बेहतर है।

सहज योगी: इसे पलटें

श्री माताजी: यहाँ तक की, आप भी देखिए, हम जिस ईसाई धर्म का पालन करते हैं, वह वास्तविक नहीं है, क्योंकि वे आपको वास्तव में बपतिस्मा नहीं देते हैं। ईसाई धर्म में यह सब कृत्रिम चीजें चल रही हैं। ठीक है? और मैं बेहतर देखूंगी। अब बेहतर? हां। [अश्रव्य]

खड़े हुए सहज योगी : तीन बार, और अब नीचे ले आओ। अब वायब्रेशन को परखें और आप पाएंगे कि वायब्रेशन में थोड़ी वृद्धि हो सकती है।

अपनी आँखें बंद रखो।

श्री माताजी : सचमुच, तुम बहुत महान हो! उसे चैतन्य की अनुभूति हो रही है।

खड़े हुए सहज योगी: इस समय अपना चित्त ना बिखरने दें, जब आप वायब्रेशन को परख रहे हों और अपना चित्त अपने अंदर रखें।

श्री माताजी : आप कैथोलिक रहे हैं?

लेडी: हाँ।

श्री माताजी : इसीलिए। कैथोलिक धर्म ने अपराध बोध दिया है, इस तरह उन्होंने आपको नीचा दिखाया है।

लेडी: मुझे कैथोलिक धर्म में परिवर्तित कर दिया गया था। मुझे परिवर्तित किया गया था।

सहज योगी: एक परिवर्तित, माँ, वह कह रही है कि वह एक परिवर्तित कैथोलिक थी।

श्री माताजी: की –

सहज योगी: वह कैथोलिक पैदा नहीं हुई थीं।

श्री माताजी : ओह, मैं देख रही हूँ। वह एक गलती थी। लेकिन गलती के बारे में मत सोचो। सब ठीक है। तुम इसे अनुभव कर सकते हो। अब बेहतर?

खड़े हुए सहज योगी: और दूसरी बात आप इसे संतुलित कर सकते हैं।

सहज योगी [महिला के लिए]: ईसा-मसीह ईसाई धर्म का सार है, लेकिन आवश्यक नहीं कि तब से जो कुछ हुआ वह भी सार रूप है।

श्री माताजी : वह इसे समझती है।

अब बेहतर? काफी बेहतर? क्या वह अब बेहतर नहीं है?

सहज योगी: हाँ।

श्री माताजी: हाँ। अब यह महिला एक धर्मांतरित थी, जैसे, कैथोलिक धर्म की। वह कैथोलिक धर्म में गई। और आप जानते हैं कि जिस ईसाई धर्म का पालन किया जाता है वह सच्चा ईसाई धर्म नहीं है, इस अर्थ में कि, वे आपको वास्तविक बपतिस्मा नहीं देते, कृत्रिम है। अब सहज योग में आपको वास्तविक बपतिस्मा मिलता है: आप इसे अपने सिर पर महसूस करने लगते हैं। और अपनी खोज़ में वह बाहर निकली।

भारतीय साधक को श्री माताजी : ठीक है?

श्री माताजी महिला से : बेहतर हैं। तो अब, यह अब बेहतर है?

एक साधक से सहज योगी : क्या आप दोनों हाथों पर इसे संतुलित महसूस कर रहे हैं?

श्री माताजी एक सहज योगी को : बस यहाँ आओ। उसे मुझसे होली घोस्ट (पवित्र आत्मा) वाला प्रश्न पूछने के लिए कहें। यहाँ आओ, तुम्हें अच्छा लगेगा। आओ, इधर आओ।

श्री माताजी महिला से : वे आपको कुछ बताएंगे।

श्री माताजी एक साधक से : क्या आप बेहतर हैं ? क्या आपको ठंडी हवा महसूस हुई?

साधक : मुझे कोई अनुभूति नहीं हुई।

सहज योगी उन्हें हाथों में कुछ महसूस नहीं हुआ।

श्री माताजी : बस उस पर काम करो। रॉबर्ट, आगे आओ, उस पर काम करो।

श्री माताजी एक साधक से : जाओ, वहाँ नीचे जाओ, वे काम करेंगे।

महिला से सहज योगी: अब आप तीन बार यह प्रश्न पूछें। क्या आप को चैतन्य प्राप्त हो रहे हैं? सत्य होने के नाते प्राप्त वायब्रेशन, ठीक है?

श्री माताजी [स्त्री के आज्ञा चक्र को स्पंदन देते हुए]: यह अच्छा है। ठीक है? यह बहुत अच्छा है!

ईश्वर आप पर कृपा करे। स्वयं आनंद करो! अपनी आँखें बंद करें। लेकिन आपको थोड़ी परेशानी है। मुड़ो, मैं तुम्हारा [अस्पष्ट] रखना चाहूंगा।

सहज योगी : बस घूमो।

श्री माताजी : मुड़ो। वापस आओ, क्या मैं तुम्हारी जिप थोड़ी खोल सकती हूँ।

अब अपनी सांस को एक मिनट के लिए रोक कर रखें।

[श्री माताजी महिला के हृदय केंद्र पर कार्यरत हैं]

श्वास को छोड़ो।

श्री माताजी: ठीक है? अब बेहतर महसूस कर रहे हो?

लेडी: मैं आज़ाद हूँ।

सहज योगी: मैं आज़ाद हूँ।

[श्री माताजी हंसते हैं]: ओह, ओह, ओह।

ठीक है? अच्छा। परमात्मा आप पर कृपा करे!

श्री माताजी : अब दो और लोग आ जाएं, यदि वे आ सकें। 

सहज योगी: चलो। अब वह दोनों थे।

श्री माताजी : वे पति-पत्नी हैं, आप देखिए, यह भारतीय शैली है।

सहज योगी: क्या आप एक तरफ बैठ सकते हैं, ताकि कैमरा इसे रिकॉर्ड कर सके। इतना ही।

[श्री माताजी भारतीय साधक से हिन्दी में बात करते हैं।]

सहज योगी : कुछ और लोग जो इसे महसूस नहीं कर रहे हैं। चलो, तुम आओ और इसे महसूस करो और फिर तुम अगली बार आ सकते हो।

आओ !

श्री माताजी : अब आओ, दो लोग इसे महसूस करें और दो लोग बैठ कर स्वयं महसूस करें।

सहज योगी : कृपया यहीं खड़े रहें। बायां हाथ माता की तरफ दाहिना हाथ वायब्रेशन देता है।

[श्री माताजी भारतीय साधक से हिन्दी में बात करते हैं।]

सहज योगी : आप अपने हाथ पर, अपने बाएं हाथ पर क्या महसूस कर रहे हैं, इसका विवरण दें।

तो, आप अपने दाहिने हाथ पर या अपने बाएं हाथ पर क्या महसूस करते हैं?

पहले, अपने दाहिने हाथ पर। गर्म?

क्या आप यहाँ ठंडक या गर्मी महसूस कर रहे हैं या यहाँ ठंडक महसूस कर रहे हैं? यहाँ गर्म या ठंडा?

साधक खड़ा : यहाँ ठंड है ।

सहज योगी: और यहाँ?

श्री माताजी : यह गरम है, निःसंदेह अब, वह गणित का प्रोफेसर है, और वह बहुत मेहनत करता है। दोहरी समस्या देखें। तो वह बहुत मेहनत करता है, वह दाहिनी बाजु का बहुत अधिक उपयोग करता है इसलिए उसे बायें से उठा कर दायें डालना पड़ता है, ठीक है?

अब बेहतर?

साधक खड़ा : यह मामला ठंडा है ।

श्री माताजी : कूलर?

सहज योगी : क्या यह अधिक ठंडा होता जा रहा है?

साधक खड़ा : हाँ।

श्री माताजी : हाँ, बस। देखिए बस संतुलन देकर, यह और भी शीतल होता जा रहा है।

साधक खड़ा : अधिक, अधिक, हाँ ।

श्री माताजी: है ना? अधिक से अधिक। यह सच है।

जरा देखिए, यह अभी भी गर्म है।

खड़ा हुआ साधक : हाँ।

श्री माताजी: क्या यह ठीक है?

बच्चे पर काम कर रहे सहज योगी: [अस्पष्ट] मेरा बायां हाथ तरफ …

श्री माताजी: बाईं ओर?

[श्री माताजी भारतीय साधक से हिन्दी में बात करते हैं।]

सहज योगी: यह शीतल है! बहुत जोर से आता है। हम इसे सिर से ऊपर आते हुए महसूस कर सकते हैं।

सहज योगी खड़े साधक से : चलो इसे ऐसे ही सुलझाते हैं, हम इसे ठीक कर देंगे।

[श्री माताजी ने भारतीय साधक और उनकी पत्नी से हिन्दी में बातचीत की।]

सहज योगी : अब बहुत ठंडा है, माँ। उन्होंने [खड़े साधक] महसूस किया कि यह था

श्री माताजी : वह ठीक है। वह ठीक है। वह अभी ठीक है।

[श्री माताजी भारतीय साधक को सहज योग के लाभों के बारे में बताते हुए।]

श्री माताजी: अब, ठीक है? अच्छा।

सहज योगी : यह सज्जन अपनी दायीं बाजू अधिक महसूस कर रहे हैं और अपने बायीं ओर बहुत अधिक नहीं महसूस कर रहे हैं। बाएं हाथ को बहुत ज्यादा संवेदना नहीं मिल रही है।

श्री माताजी: तुम्हारा? आप स्वयं। ठीक है, हम आप को देखेंगे।

[श्री माताजी भारतीय साधक से हिन्दी में बात करते हैं।]

प्रमाणित!

सहज योगी : बस बैठ जाओ और माँ तुम पर काम करेंगी। अभी आगे आओ। दो-दो में आओ।

श्री माताजी : अब और कौन? अब कौन महसूस करना चाहेगा?

सहज योगी: क्या आप आ सकते हैं?

श्री माताजी : हाँ, हाँ, उसे आने दो। आगे आओ। लेकिन पत्नी को पति का इलाज नहीं करना चाहिए। यह बहुत अच्छा विचार नहीं है।

सहज योगी: तो तुम इस आदमी पर काम करो।

श्री माताजी : हाँ, आप इस आदमी पर काम करो।

सहज योगी: वह इस पर काम कर सकती है।

श्री माताजी : चलो, देखते हैं बायीं बाजु क्यों पीड़ित होती है। अब आप कुछ गुरुओं के पास गए हैं या कुछ और?

साधक: हाँ

श्री माताजी: कौन सा? कोई संख्या।

साधक : अनेक।

श्री माताजी : ठीक है। अब अपने दाहिने हाथ को नीचे करें। ठीक है?

[खड़े हुए साधकों की तरफ ]: अब देखो। क्या हो रहा है? क्या आप इसे बाईं ओर गर्म महसूस कर सकते हैं?

[बैठे साधकों को] और आपको कहना है कि, “माँ, मैं अपना गुरु हूँ।” बस जोर से बोलो।

साधक : माँ, मैं अपना गुरु हूँ।

श्री माताजी: फिर से। आपको 10 बार कहना है, ठीक है?

साधक : माँ, मैं अपना गुरु हूँ। [x10]

श्री माताजी: भवसागर। ठंडा?

खड़ा हुआ साधक : हाँ।

सहज योगी: मुझे लगता है कि यह भवसागर है।

श्री माताजी : यह ठंडा हो रहा है। ठीक है? अब बेहतर?

पेट बहुत पकड़ा हुआ है।

साधक :  मैं बच्चा था, मुझे लगता है कि तभी से मुझे यहाँ तनाव था।

श्री माताजी : ठीक है, कोई बात नहीं।

सहज योगी एक साधक से : जरा स्थिर रहो, हम तुम पर काम कर रहे हैं, तुम देखो। माँ को देखते रहो। बस उन्हें देखो, ठीक है?

श्री माताजी : कल तुमने वहाँ की बात महसूस की, है ना?

आप देखिए, इन गुरुओं के पास जाना बहुत खतरनाक है क्योंकि पेट में दस केंद्र होते हैं। उस नाभी चक्र पर दस पंखुड़ियाँ हैं, जैसा कि आप कहते हैं। नाभी का अर्थ है सौर जाल (सोलर प्लेक्सस)। अब क्या होता है, कि यदि आप इन गुरुओं के पास जाते हैं, तो यह अवरोध बनता है और यह यहाँ काम करती है, जिसे हम एकादश कहते हैं। और जब यह काम करना शुरू कर देता है तो यहां कैंसर हो सकता है, कुछ भी रोग हो सकता है। तो ये गुरु बहुत खतरनाक हो सकते हैं। उन्हें कभी भी गंभीरता से नहीं लेना चाहिए। भयानक लोग हैं वे।

सहज योगी : माँ तो बस इशारा कर रही हैं कि, इस क्षेत्र में, हरित क्षेत्र में दस गुरु हैं।

श्री माताजी: क्या आप मेरे पैरों पर आना चाहेंगे और यह इसे बेहतर तरीके से कार्यान्वित करेगा, ठीक है? चलिये देखते हैं। अब अपने दोनों हाथों को ऐसे ही मेरे पैरों के नीचे रख दो। अब अपने सिर को थोड़ा नीचे करें। अब आप कुंडलिनी देख सकते हैं। यदि आप कुंडलिनी को देखना चाहते हैं, तो आप उसके दर्शन कर सकते हैं।

सहज योगी : अपने घुटनों को आगे की ओर लाएं और उन्हें फैलाएं। सिर्फ अपने घुटने लाओ। हां, यही तो है।

श्री माताजी : जहाँ तक आप आराम से कर सके, आप पीछे चले जायें।

सहज योगी: हाँ, इस तरह ।

श्री माताजी: क्या आप इसे देखना चाहते हैं?

सहज योगी : कपड़े को थोड़ा नीचे की ओर खींचे।

[श्री माताजी साधक के सिर पर तीन गांठें लगाती हैं।]

श्री माताजी: अब बेहतर?

सहज योगी: जब आप झूठे गुरु के पास जाते हैं तो यह नुकसान पहुंचाता है क्योंकि यह यहाँ है लेकिन यह यहाँ भी प्रतिबिंबित होता है, इसे एकादश रुद्र कहा जाता है। और एक बार ऐसा हो जाए तो कैंसर जैसी चीजें भी स्थापित हो सकती हैं। तो यह बेहद खतरनाक है।

श्री माताजी : मेरा मतलब है कि आप वहां ऐसी बीमारियों की चपेट में हैं। एक शिकार होने की स्थिति आ जाती है। अब जरा देखिए, क्या आपको कोई ठंडक महसूस हो रही है?

जरा देखो, एक हाथ मेरी ओर।

बस खुद देखें। कुंडलिनी को ऊपर उठाने के लिए बस घूमें।

आप इसे उठायें।

सहज योगी : ऐसे, ऐसे। चलो, इसे ऊपर लाओ।

श्री माताजी : देखिए, आमतौर पर ये गुरु बिल्कुल काम नहीं करते। वे आपसे पैसे लेते हैं, आपसे काम करवाते हैं, जबकि मुझे जाकर निरंजित करना होता है।

आह, आह, आह, उठ गई।

ठीक है, यह बेहतर होगा।

सहज योगी : यह अब दिल में उतर आया है।

श्री माताजी: आह।

सहज योगी: आ रहा है।

श्री माताजी : ऐसे ही। फिर भी तुम उसकी विशुद्धि ठीक करो।

आप बिल्कुल ठीक हैं।

ठीक है? अब बेहतर महसूस कर रहे हो?

साधक : हाँ।

सहज योगी: अपने हाथ स्थिर रखो।

श्री माताजी: ठीक है? बेहतर? परमात्मा आप पर कृपा करे।

मुझे लगता है कि वह इस दायीं विशुद्धि को ठीक करेंगे, क्योंकि संवेदनशीलता बढ़ेगी।

साधक: हाँ

सहज योगी : यहाँ आकर बैठो।

श्री माताजी : हाँ, बस तुम उस तरफ जाओ।

श्री माताजी: क्या तुम ठीक हो? तुम्हे कैसा लग रहा है?

सहज योगी : उसने कहा कि उसके हाथ थोड़े और भी ठन्डे होने लगे हैं, माँ। दूसरा यह थोड़ा जाने लगा [अश्रव्य]

श्री माताजी: हम्म, हम्म।

मुझे लगता है, उसका बायाँ हाथ धरती माँ पर रख दो। ठीक है? ऐसे ही।

इसे धरती माता पर दबाएं।

उसे धरती माता पर लगाने को कहो।

सहज योगी: जमीन पर?

श्री माताजी: जमीन पर। इसे छूओ

अन्य सहज योगी: लॉक अप करने की कोई आवश्यकता नहीं

श्री माताजी: अब। [श्री माताजी उसका दाहिना हाथ पकड़कर अपनी ओर रखते हैं।]

अपनी जो चीज़ आप देखते हैं उसे बंद न करें।

सहज योगी: उन्होंने कहा, वह इसे अधिक सहज महसूस करते हैं।

श्री माताजी: है ना? ठीक।

बेहतर?

वह अब बेहतर है?

सहज योगिनी : मैं इसे ज्यादा महसूस नहीं कर सकती।

श्री माताजी : आपने ज्यादा महसूस नहीं किया, ठीक है, आइए, कोशिश करते हैं।

सहज योगी : क्या कोई यहाँ इस महिला पर काम करने वाला है?

श्री माताजी : बस इसी औरत पर यहाँ।

अब आगे आओ, मैं आप पर काम करना चाहूंगी।

अब बेहतर है? क्या यह ठंडा हो रहा है?

साधक: [अश्रव्य]

श्री माताजी : यह क्या कह रहे हैं?

सहज योगी : क्या आपकी पीठ में दर्द है?

श्री माताजी: हर समय?

सहज योगी: हमेशा?

साधक : कभी मैं जागता हूँ, कभी मैं [अस्पष्ट] ।

सहज योगी: तो ज्यादातर समय, लगभग हर समय।

इसके बारे में कहाँ है? ऐसी बात है? यह हृदय में है, हृदय क्षेत्र में है। नीचे नहीं?

साधक : हाँ।

सहज योगी : कहाँ हैं?.. नीचे नहीं? ओह, दोनों नीचे की ओरस्वाधिष्ठान और आत्मा दोनों में।

बहुत गर्म हाथ।

अन्य सहज योगी: शारीरिक प्रकार का व्यायाम।

सहज योगी : स्वाधिष्ठान महसूस होता है।

श्री माताजी: यह [अश्रव्य] है

तुम यूं ही कहते चले जाओ, “माँ, मैं अपना गुरु हूँ”। और “मैं ही अपना स्वामी हूँ”। ठीक है?

साधक : मैं मालिक हूँ।

श्री माताजी : आप स्वयं अपने स्वामी हैं।

सहज योगी: “मैं अपना स्वामी हूँ”।

श्री माताजी : कल तुमने कभी कुछ महसूस नहीं किया?

लेडी: नहीं।

श्री माताजी: कुछ नहीं?

सहज योगी : बस अब अपने दिल में कहो। अपने मन में बस चुपचाप तुम कहते रहो।

एक और सहज योगी: तू पार्ले ले फ़्रैंकैस? [क्या आप फ्रेंच बोलते हो ?]

साधक : नहीं।

मैं अपना स्वामी हूं।

एक और सहज योगी: मैं अपना मालिक हूं।

श्री माताजी : आप क्या काम करती हैं?

महिला: घर का काम।

सहज योगी : घर का काम।

श्री माताजी : घर का काम? बहुत कठिन श्रम।

लेडी: हाँ।

श्री माताजी : आप सब कुछ कर रहे हैं। विशेषज्ञ।

सहज योगी: क्या यह ठंडा हो रहा है?

श्री माताजी: क्या वह गर्म है? [श्री माताजी महिला की कुंडलिनी को ऊपर उठा रही हैं।]

सहज योगी: [साधक से] बेहतर? वापस जाओ और तुम बस इस तरह उस हाथ को जमीन पर रख बैठ जाओ। वैसी ही मुद्रा में।

श्री माताजी:  नहीं। कोई भी मुद्रा जो आप लेना चाहते हैं। उसे दूसरी मुद्रा लेने दें। मुझे लगता है कि यह बेहतर होगा, क्योंकि-

सहज योगी : नहीं, मेरा मतलब है कि बायां हाथ आपके तरफ और दायां हाथ जमीन पर हो।

श्री माताजी : हाँ, हाँ, सही। नीचे बैठकर, आप दूसरी तरह बैठ सकते हैं।

सहज योगी: अधिक सही ढंग से बैठो। ठीक है, मेरे साथ आओ।

श्री माताजी : आप जिस भी तरफ बैठना चाहें।

उसे खड़े होने दो, वरना।

सहज योगी: शायद अगर तुम खड़े रहो तो। इस तरह खड़े हो जाओ।

[श्री माताजी महिला की कुंडलिनी को ऊपर उठा रही हैं।]

श्री माताजी: अब बेहतर? क्या यह अधिक शीतल है? क्या आपको महसूस हो रहा है?

लेडी: नहीं।

श्री माताजी : गृहस्थी की योजना बहुत अधिक करती हो, है ना? [श्री माताजी अपनी आज्ञा अंगुली महिला के माथे पर रख कर दबाती रहती हैं।]

लेडी: आह। [हंसती है]

श्री माताजी: [हंसते हुए] मुझे तुम्हारी सारी चाबियां पता हैं, है ना?

माँ को पता होना चाहिए, है ना? ठीक है? अब बेहतर है? देखिए, यहां एक पेंच है जो बहुत अधिक योजना बनाने पर ढीला हो जाता है।

[सहज योगी हंसते हुए]

मैं पेंच ठीक करना चाहता हूं। आप बहुत ज्यादा योजना बनाने की कोशिश करती हैं। आप कैसे योजना बना सकती हैं? आप देखिए, एक गृहिणी के काम काज़ में मुझे नहीं लगता कि आप योजना बना सकती हैं, लेकिन बाजार में जो कुछ भी उपलब्ध है, वह सब आप पका सकती हैं, आप देखिए। आप पहले से योजना कैसे बना सकते हैं? यदि आप योजना बनाते हैं और यदि वो उपलब्ध नहीं है, तो यह सिरदर्द है। ठीक है? बेहतर? क्या आप कुछ महसूस कर रही हैं? अपनी आँखें बंद करें।

क्या आपको कुछ महसूस होता है?

सहज योगिनी: हाँ।

श्री माताजी: सहस्रार।

बेहतर?

अब, क्या आप हाथ में कुछ महसूस कर रहे हैं? मुझे देखने दो। ठीक है। अब तुम क्षमा करो। सभी को क्षमा करें। बस माफ कर दो, तुम्हारे पति को, सब लोग को! और खुद को भी। क्षमा करने का प्रयास करें। अभी भी बेहतर। [अस्पष्ट-हर समय यह ठंडा होता जा रहा है।] बेहतर। यह ज्यादा शीतल है। अब अपना बायाँ हाथ मेरी ओर और दाहिना हाथ धरती माता पर रखें, बस वहाँ धरती माँ को स्पर्श करते हुए। ठीक है। बेहतर? आप कुछ महसूस कर रहे हैं या नहीं? कुछ भी तो नहीं? थोड़ा बहुत? बस मत सोचो और माफ कर दो। क्षमा करो। क्षमा करो। क्षमा करो। क्षमा करो। क्षमा करो। क्षमा करो। क्षमा करो। बस माफ कर दो। क्षमा करो। बेहतर? अधिक महसूस हो रहा है? इसका मतलब है कि आप क्षमा नहीं कर रहे हैं, इसलिए आप इतना महसूस नहीं कर पा रहे हैं। अब क्षमा करते जाओ। ठीक है? बेहतर। बैठ जाओ और कहो “मैं सभी को क्षमा करता हूं”। ” बस बैठ जाओ और कहो।

 परमात्मा आपको आशिर्वादित करें! 

अब आप आगे आ सकते हैं। आइए देखते हैं। तुम उस पर कोशिश करो। – आप? – 

माँ, वह उसका पति है।

 ओह, मैं देखती हूँ, तुम्हारे पति। अब, तो तुम आ जाओ। अब, चलो… क्या वह ठीक है? मुझे नहीं लगता कि मैं बहुत संवेदनशील हूं। अभी तक नहीं? कुछ महसूस नहीं हो रहा

कभी-कभी मुझे यहां जलन का अहसास होता था।

 – हो जाएगा। – क्षमा करें क्या कहा कार्यान्वित हो जाएगा। और बताओ। तुम क्या काम करती हो? गृहिणी हो? बेरोजगार। लेकिन आपको एक गृहिणी होना चाहिए? एक क्लर्क। में काम करता हैलिपिक का काम,

 माँ: गरम। क्या आप किन्ही गुरुओं के पास गए हैं? क्या आप गए है? –योगीजी! – कौन हैं योगीजी? धर्मशाला स्कूल में

योगी महाजन।

 योगी महाजन? ओह मैं समझी! उसने तुम्हारी नाभी को कभी ठीक नहीं किया, हाँ? ठीक है। आगे आओ। और मुझे तुम्हारी नाभी को ठीक करना है। बहुत गरम है! ठीक है। बस आगे आओ! यह नाभी पर बहुत ज्यादा है। बस बायां हाथ तरफ। क्या यह संभव है? क्या हम इस हिस्से को हटा सकते हैं? उसे धरती माँ पर हाथ रखने दो। अब यह सब ठीक है। अब इन लोगों का क्या

मुझे लगता है कि मुझे यहीं जलन महसूस हो रही है। बस यहाँ। 

ठीक है! क्या कोई उसकी मदद कर सकता है? कोई नीचे आ रहा है? अब, आप देखिए, जो चीज हमारे पास है… क्या वह होना चाहिए?… यह रिले नहीं करता है, है ना?

 नहीं, ऐसा नहीं है

 माँ: मुझे डर है। हम अब यात्रियों की तरह हैं, यहाँ नीचे आओ, तुम देखो, हमारे सभी कारवां के साथ। और हम जा रहे होंगे… लेकिन पर्थ में एक केंद्र शुरू करना आपके लिए अच्छा होगा, आप देखिए। -एडिलेड में. – आई एम सॉरी, मेरा मतलब एडिलेड है! पर्थ कुछ दिन पहले आखिरी बार था। मैं बहुत ज्यादा बात कर रही हूँ। तो एडिलेड में। एडिलेड में… हो सकता है कि कुछ लोग यहां नीचे आना चाहें, और शुरुआत में किराए पर जगह लेना चाहें। और अगर आप में से कुछ उनके साथ भी जुड़ सकते हैं, तो उनके साथ रहने के लिए, आप शुरुआत में एक केंद्र बना सकते हैं। फिर धीरे-धीरे, जैसे-जैसे आप अधिक बढ़ते हैं, तब आप अपनी उचित स्थान को स्थापित कर सकते हैं। शुरूआत करने के लिए, मुझे लगता है कि, सबसे अच्छी बात यह होगी कि कोई जगह किराए पर ली जाए और उनमें से कुछ यहां आ सकें। और आप में से कुछ, जो अकेले हैं वे भी वहाँ रह सकते हैं और अपने किराए का भुगतान एक साथ कर सकते हैं, मुझे कुछ नहीं चाहिए। ठीक है? अपना ख्याल रखना और इस जगह की भी देखभाल करना। यही हम करने की योजना बना रहे हैं। लेकिन एडिलेड से ताल्लुक रखने वाले सभी लोगों को इस काम में मदद करनी चाहिए। ठीक है? इसलिए, यदि आप किसी ऐसी जगह के बारे में जानते हैं जो काफी विशाल है, तो कृपया हमें बताएं और अधिक किराया न दें, क्योंकि हर किसी के पास इतना पैसा नहीं होता है। और साथ ही, यदि आप में से कुछ अन्य सहजयोगियों के साथ रहना चाहते हैं, ताकि आप सभी सीख सकें, तो आपके लिए एक नियमित जगह हो सकती है जहां आप जाकर मिल सकें। क्योंकि सहज योग में सीखने और आनंद लेने के लिए काफी कुछ है। बेहतर? मैं यहाँ एडिलेड के बारे में ही बात कर रही थी| हम यहाँ एक केंद्र खोलने की कोशिश कर रहे हैं और अगर किसी के पास कोई विचार है, जहाँ किराए से एक बड़ा और उपयुक्त घर हो सकता है, तो हमें बताना एक अच्छा विचार होगा। अब बेहतर? क्या वह है? तबियत पहले से कैसी है? वह पेट से पीड़ित था? -…यहाँ एडिलेड के लिए शायद इसे स्थापित करने के लिए अन्य केंद्रों से मदद करने के लिए और वे लोग जो कुछ समय के लिए सहज योगियों के साथ जुड़ना और रहना पसंद कर सकते हैं, किराए का भुगतान करते हुए, अन्य सहजी के साथ रह सकते हैं। एक दूसरे के साथ रहने वाले योगी, फैलने में मदद करने लगे, दूसरे लोगों से बात करने लगे इसी तरह ऑस्ट्रेलिया के अन्य केंद्रों में सहज योग का विकास हुआ है। और, मुझे लगता है कि लगभग साठ लोग हैं, जो सिडनी में विभिन्न स्थानों पर एक साथ रहते हैं, सहज योगी जो वहां एक साथ जीवन व्यतीत करते हैं। और मेलबर्न में भी ऐसा ही है। और अब, जब हम यहां एक केंद्र शुरू कर रहे हैं, तो अगर किसी के पास कोई विचार है कि, जहां इसे स्थापित किया जा सकता है, तो इसे प्राप्त किया जा सकता है, कृपया हमें बताएं। क्या आप बेहतर महसूस कर रहे हैं? क्या वह अब बेहतर है? ठंडी हवा लग रही है? … यह जानना कि सहज योग क्या है और एक दूसरे को जानना। अब आप कैसे हैं? परेशानी होती है।

 मुझे सिज़ोफ्रेनिया हो गया है। 

और कैसे?

 मैं दवा पर हूँ।

क्या सिज़ोफ्रेनिया? आपको बिलकुल कुछ नहीं है। किसने कहा तुमसे ये?

 चिकित्सक ने।

 उसके लिए आप क्या करती हैं? किस तरह से? आपको इसके क्या लक्षण है

अहसास होता है, इन दिनों मेरे हाथों में, शक्तियों की तरह, [अस्पष्ट] शक्तियां।

 शक्तियां? कैसी शक्तियां? –शैतानी शक्तियाँ। सच में?

 अब और नहीं, दवा के कारण यह वास्तव में बेहतर हो गया है।

 शैतानों की शक्तियाँ?

 हां। मेरी बाईं ओर। मेरी बाईं ओर। मेरी बाईं ओर ऊपर और नीचे। और अब हाथों में [अस्पष्ट] जिम्मेदार… 

तो वे तुम पर हावी हो जाते थे। या आप हिंसक हो जाते थे

मुझे नहीं पता कि मैं [अस्पष्ट] एक हिंसक, भयानक, आक्रामक मूड क्या हूं। वह अभी भी हिंसक है, वह मुझे यह काली आंख देती है। और फिर आप नहीं जानते कि आप क्या कर रहे हैं? मुझे नहीं पता। मुझे अभी, मुझे ठीक होने की जरूरत है, बस। 

अब तुम कहाँ गई थी? क्या आप किसी गुरु या किसी के पास गई थी?

 मैंने ड्रग्स लिया है। एलएसडी, और अब मैं [अस्पष्ट] हूं।

 और भी क्या? आप किसी गुरु के पास गई थी?

 हां। एक मानसिक उपचारक के पास, उन्होंने कहा कि मुझ पर गंगालिनी सवार है मेरे सिर के ऊपर सांप थे [अस्पष्ट]। 

अब, लेकिन आप किसी अन्य भारतीय गुरु के पास गई थी?

 नहीं

 तुम कल रात कैसे सोई?

 बहुत अच्छी तरह से नहीं। मैं कई बार उठी, बहुत तनाव में। तनाव महसूस हुआ।

 नहीं, उसे वहीं बैठने दो। अपना बायाँ हाथ मेरी ओर और दाहिना हाथ धरती माँ पर रखो। ठीक है? वह बाईं बाजू मेरी तरफ।

अब कल उन्होंने मुझे बताया कि किसी लैंग नामक सज्जन ने एक किताब लिखी है कि उच्च व्यक्तित्व बनने के लिए आपको सिज़ोफ्रेनिक बनना होगा। यह बेतुका है, बिल्कुल बेतुका है। मुझे नहीं पता। मुझे आशंका है कि, यह वही शख्स है, उस डॉ लैंग वाला। क्या यह … उस लंदन वाले आर डी लैंग सम है? भयानक शख्स ! तुमने उसे पढ़ा, है ना? क्या तुमने उसे पढ़ा?

 हाँ, मैंने पढ़ा। मुझे लगा कि आत्मज्ञान का अर्थ है सिज़ोफ्रेनिया। 

उसने सोचा कि यह एक सिज़ोफ्रेनिक होना बोध था। अपना बायां हाथ रखो। यह बेतुका है। तुम देखो, ये सब राक्षस हैं, मैं तुमसे कहती हूं। ऐसे विचार वे सभी मनुष्यों और सभी साधकों को नष्ट करने के लिए देते हैं। -चूँकि वो सुनने में बहुत सच्चे लगते हैं|

माँ: कैसे?

 कभी-कभी वे इतने प्रशंसनीय लगते हैं।

 पर कैसे? फिर अपने दिमाग का इस्तेमाल करो! क्या परमात्मा आपको पागल कर देंगे? आपको सर्वोच्च देने से पहले? मैं आपको बताती हूं कि क्या हुआ होगा। सेंट पॉल, वह जिम्मेदार है।

 कौन है, माँ

बाइबिल में सेंट पॉल, आपने पढ़ा। हाँ यह भयानक सज्जन है। वह था… मुझे नहीं पता कि वह बाइबल में कैसे है। सबसे पहले, क्योंकि यही वह है जो सभी ईसाइयों को ख़त्म कर रहा था, वह हर तरह की चीजें कर रहा था, अचानक उसे एक क्रॉस दिखाई दिया। सहज योग के अनुसार यह एक अग्रचेतन क्रिया है। अतिचेतन। और इस अतिचेतन गतिविधि में आप देखते हैं, आप क्रॉस को देखना शुरू करते हैं, आप क्राइस्ट को भी देख सकते हैं, आप कुछ भी देख सकते हैं। देखना मुद्दा नहीं है। बनना ही बात है, समझे? और फिर अचानक उन्होंने ईसाई धर्म को संगठित करने का कार्यभार संभाल लिया। और फिर उसने जिस तरह से आयोजन किया, वह सब बिल्कुल शैतानी था। क्योंकि उसने जो कहा, उसने ये कार्य, भूमिका ईसा-मसीह के चेलों के बारे में लिखी। वह उनसे कभी नहीं मिला था, उसने उन्हें कभी नहीं देखा था। अपने मन से  उसने लिखा, ऐसा कहते हुए कि वे पागल हो गए और (होली घोस्ट)पवित्र आत्मा उनमें आ गई, वे पागलों की तरह बात कर रहे थे और ऐसी ही सभी बातें .. माँ, मैं एक शख्स के पास गया … जिसे वे कहते हैं … भिन्न ही भाषा में बोलते हुए। करिश्माई। करिश्माई? – हाँ, मैं वहाँ गया था।वो वही कर रहे हैं। मेरा मतलब है, वे अपने दिमाग का उपयोग नहीं करते, आप देखिए। 

क्षमा करें, माँ। इस बात का क्या तात्पर्य है कि, वे “भिन्न भाषा में बोल रहे हैं”?

 तो फिर, क्या हुआ, कि इस सज्जन ने वहां इन अध्यायों को लिखा। बाइबिल में अध्यायों में से एक है, जिसमें उन्होंने इन लोगों का वर्णन किया है, ईसा-मसीह के शिष्यों में (होली घोस्ट) पवित्र आत्मा आ गई। (होली घोस्ट पवित्र भूत उन्हें पागल बना रहा थे। और वे हर तरह की भाषाएं बोल रहे थे, हर तरह की बातें कर रहे थे और इस तरह पवित्र आत्मा अंदर आई। कल्पना कीजिए। क्या वह इस तरह आने वाली है कि, वह तुम्हें पागल बनाती है? और ऐसा कैसे हो सकता है? ऐसा (होली घोस्ट) पवित्र भूत कौन चाहता है? आपको समझना चाहिए, यह ईश्वर है, जो दयालु है, जो कोमल है, जो हमारा उपकारक है। वह कल्याणकारी है। वह कैसे हमें पागल कर सकता है? और सभी ईसाई बाइबिल के उस भाग को मानते हैं। सब गलत है, बिल्कुल! आपने देखा होगा, जब लोग बाधित होते हैं तो तरह-तरह की भाषाएं बोलने लगते हैं। यहां तक ​​कि आपने एक फिल्म भी देखी होगी इस कलाकार पर… क्या थी? वैन गॉग, वैन गॉग! जो पागल हो गया और मर गया। वान गाग। उन्होंने ऐसा चित्रित करते हुए दिखाया कि, वैन गॉग किसी व्यक्ति में आता है और पूरी चीज़ को उसकी तरह ही चित्रित करता, और उसी तरह से पेंटिंग भी करते हुए … आप जानते हैं कि वैन गॉग की पेंटिंग किस तरह की हैं। विभिन्न रंगों की बहुत मजबूत रेखाएँ हैं। उसी स्टाइल से उसने किया, फ्री हैंड में उसने किया। और उसने कहा कि “वान गाग मेरे शरीर में आ गया है।” तो, आपको जो परमेश्वर से प्राप्त करना है, वो यह सब और, ऐसा नहीं है। यह कुछ बहुत अच्छा और अत्यंत महत्वपूर्ण है! ये इस प्रकार की सस्ती चीजें नहीं, जैसे दूसरी भाषा में बात करना… अब अपनी अंगूठियां निकाल डालो, ठीक है? कृपया। उन सभी को निकाल लें। 

बहुत अधिक अंगूठियां पहनना उचित नहीं है। ऐसा मेरी मां कहती है। 

क्या तुम्हारी माँ ने दी है। ठीक है। तब आप उन्हें कुछ समय के लिए पानी में डाल दें। ठीक है? उन सभी को निकाल लें। साथ ले जाएं। ओह, बेहतर, वह ठीक है! तुम ठीक हो? यह तार्किक होना चाहिए, तुम्हें पता है? हर चीज़। यह खासतौर पर। – यह शादी की अंगूठी है।शादी की सब ठीक है। अपना दाहिना हाथ इस तरह रखें। क्या इनका मद्यपान …. माफ़ कीजिए? मद्यपान, माँ, वह पूछ रहा है। यह बिल्कुल समाप्त हो जाता है, कुछ ही समय में। ड्रग्स ही की तरह। तुम आज मेरे लिए थोड़ा पानी लाओ? पानी लाओ। मैं इसे चैतन्यित करूंगी। तुम वह लो। इसे अपनी शराब में डालें। जब भी पीने का मन करे तो देख लो, बस मेरे बारे में सोचो। 

मां, ऑस्ट्रेलियाई समाज अपेक्षा करता है कि पुरुष हर दिन पंद्रह पिंट लड़कों के साथ बाहर जाकर शराब पीएगा और एक पुरुष होने के नाते ऐसा  

 करना ऑस्ट्रेलियाई संस्कृति में है। यही वह छवि है जिसकी वे एक आदमी से अपेक्षा करते हैं। और चूँकि वह ऐसा नहीं करता है, आप जानते हैं, वह उसके लिए सोचता है,  “क्या मैं समलैंगिक हूं या मैं फ़ालतू हूं, या ऐसा ही कुछ?” क्योंकि वह ऐसा नहीं करता, आपकी जानकारी के लिए? क्योंकि वह शराब पीने बाहर नहीं जाता है। आप देखिए ऐसा होता है, कि

उसे रोज पीना पड़ता है।-

 नहीं

 लेकिन आत्मसाक्षात्कार के बाद, मतलब अब आपका दूसरा जन्म है, तो आप ऑस्ट्रेलिया में पैदा नहीं हुए हैं, आप परमात्मा के राज्य में पैदा हुए हैं। ठीक है? तो आप अब ऑस्ट्रेलियाई नहीं हैं, आप योगी हैं। जन्म से आपको जो कुछ मिला है वह सब अब समाप्त हो गया है। अब और नहीं, तुम योगी हो! पूरी दुनिया में ऐसे बहुत से हैं। वे सभी योगी हैं! तो ये स्थिति उन लोगों के लिए हो सकती हैं जिनका पुनर्जन्म नहीं हुआ है। लेकिन जो लोग पुनर्जन्म लेते हैं, वे परमेश्वर के राज्य में पैदा होते हैं। वे परमेश्वर की इच्छा और परमेश्वर के नियमों द्वारा शासित होते हैं, ठीक है? कृपया अपनी अंगूठियां भी निकाल लें। क्या वह बेहतर है

कुछ महसूस नहीं हो रहा?

 क्या आपने पहले महसूस किया था? अब अपने बाएं हाथ को लीवर पर रखें। ठीक है? अब बेहतर? वह कहाँ पकड़ रहा है? बायीं विशुद्धि।

मुझे एक लेफ्ट विशुद्धि और थोड़ा स्वाधिष्ठान है।

 दोषी महसूस करने की सजा के रूप में! यहां अपनी आंखें खुली रखें। यह दोषी महसूस करने की सजा है, ठीक है? बेहतर।

 क्या बात है? यह कांपना बंद कर दिया। धरती माता पर अपना दायाँ हाथ रखो। उसे धरती माता पर दायाँ हाथ करने दो। धरती माता पर ही। और इस बाएं हाथ को माँ की तरफ रख लो। बेहतर? ठीक है? यह सजा मदद करती है! अब बेहतर हुआ क्या ?

 अभी नहीं?

 अब भी हृदय पर। ठीक है।  बेहतर तरीके से, पवित्र आत्मा के प्रश्न को पूछें कि, “क्या आप पवित्र आत्मा हैं?”

 ठंडा। हाँ, मुझे वहाँ अच्छा लग रहा है। 

यही उत्तर है। ठीक है? अच्छा! अब उसे भी वही सवाल पूछने दीजिए।

 “माँ, क्या आप पवित्र आत्मा हैं?” 

श्री माताजी: फिर! 

माँ, क्या आप पवित्र आत्मा हैं?” “माँ, क्या आप पवित्र आत्मा हैं?” “माँ आप पवित्र आत्मा हैं?” मुझे अच्छा लग रहा है! 

ठंडा लगने का मतलब यह बात सत्य है, है ना? अच्छा।  आप भी वही सवाल पूछें।

 “माँ, क्या आप पवित्र आत्मा हैं? माँ, क्या आप पवित्र आत्मा हैं?” “माँ, क्या आप पवित्र आत्मा हैं?” 

ठीक है? यह बेहतर है! ठीक है? सब ठीक है अब? कुछ भी तो नहीं? ठीक है, हमें आपको देखना है। अच्छा! अब सब कुछ भूल जाओ! अतीत अतीत है, समाप्त! आप एक नवजात व्यक्ति हैं। 

परमात्मा आप को आशिर्वादित करे!

क्या अब आप बेहतर हैं

मां आपका शुक्रिया! 

परमात्मा आप को आशिर्वादित करे! अब आपको और आगे बढ़ना है और कुछ समय के बाद अपनी सारी ड्रग्स और सब कुछ छोड़ देना है। तुम बिलकुल ठीक हो जाओगे। अच्छा। इसे खुद वहीं बांधें, ऊपर। इसे बांधकर गांठ बांध लें। हम इसे फिर से करेंगे। दो बार। माँ भी बंधन लेती हैं| अच्छा। हम उसे बताएंगे। अभी। आइए दो अन्य लोगों को देखें। – इस महिला।- इन  सज्जन को भी, हमें देखना चाहिए। अभी भी यहीं। थोड़ा आगे आओ। तुम साथ आओ, यहाँ। थोड़ा आगे आओ। आगे आओ [अस्पष्ट]। मुझे याद है। ऊर्जा को ऊपर उठाने के बाद, कुंडलिनी को इस तरह उठाने के बाद, आप [अस्पष्ट] चैतन्य महसूस करने लगते हैं। और एक बंधन है, जो [अस्पष्ट] है। बेहतर? अभी भी है। बहुत कठिन। आपके चारों ओर एक सुरक्षा कवच की तरह है। सात बार। सात एक शुभ अंक है। 

हर्बर्ट? क्या आप, क्या आप इसे मेरे लिए जला सकते हैं, कृपया? बंधन बहुत उपयोगी है, किसी भी समय, जब भी आपको आवश्यकता हो। तो, आपको कैसा लगा?

 – पहले से अधिक ठंडा।-

 पहले से अधिक ठंडा।

 हाँ

ठंडी हवा-, ठीक है, देखते हैं। इस महिला के बारे में क्या? क्या वह ऑस्ट्रेलियाई है? आधी भारतीय भी

कोई नहीं माँ, आधी भूमध्यसागरीय, ना की ऑस्ट्रेलियाई। आधी-भूमध्यसागरीय, माँ। मिस्र। मिस्र की |

मिस्र? मिस्र बहुत अच्छा है। इसलिए। अच्छा? बेहतर? सर, आपको लीवर की समस्या है। एक बहुत ख़राब वाला। ज़रूर? आपको है। ठीक है। अब तुम वहीं बैठ जाओ और अपना दाहिना हाथ मेरी और बायाँ धरती माँ पर रख दो| आप भी! आपको लीवर की खराबी है। क्या तुम जानते हो? ठीक है। आप अपना दाहिना हाथ मेरी ओर और बायां हाथ धरती माता पर रख दें। दाहिना हाथ इस तरह मेरी तरफ और बायां हाथ धरती माता पर। वह ठीक है। ह: बस अपने दोनों हाथ माँ की ओर रखो। क्या आप ठंडी हवा महसूस कर रहे हैं? थोड़ा ठंडा।

 थोड़ा ठंडा। अपनी आँखें बंद करें! आइए देखते हैं। 

अभी भी काँप रहे है, माँ।

हंसा। बेहतर? आप अपना बायाँ हाथ पृथ्वी पर और दाहिना हाथ मेरी ओर रखो। क्या आपने खुद को सूर्य स्नान से त्वचा का रंग गहरा किया है या क्या किया है? आप ऐसा नहीं करते, ऐसा करना अच्छा नहीं है! आपके लीवर के लिए बहुत बुरा होता है, आपकी त्वचा के लिए बहुत बुरा। और लंबे समय में यह बहुत, बहुत बुरा है। यह बहुत गंभीर समस्या पैदा कर सकता है। ठीक है? इसकी कोई जरूरत नहीं है! आप इसके बिना अच्छे लगते हैं, है ना? मुझे आश्चर्य है कि एक तरफ तो वे जातिवाद की बात करते हैं और वे काले लोगों को पसंद नहीं करते हैं। और यहां वे खुद को काला बना रहे हैं। आप इसे कैसे समझा सकेंगे? क्या यह बेतुका नहीं है? काले लोगों के साथ यह भेदभाव बहुत ही बेतुका है। हर कोई काला होने की कोशिश कर रहा है, फिर क्यों? या तो आपके पास यह है या वह। इस के बारे में ज्यादा मत सोचो। बस, बस इसे महसूस करो, बस। वहां थोड़ी गर्मी है, वह यही कह रहा है, वहां थोड़ा गर्म है लेकिन वहां ठंडा है। तो अगर आपको फर्क महसूस होता है, तो इसका मतलब है [अस्पष्ट]। क्या वह इतनी तनाव में है? क्या वह पूरी तरह ठीक नहीं है? मुझे लगता है कि वह ठीक है। यह सब ठीक है। अब बेहतर? [अस्पष्ट] वह कैसी है? मुझे लगता है कि वह ठीक है। वह ठीक है। तुम उसकी देखभाल करो। यह बेहतर है। अब तुम बैठ जाओ। अब बेहतर? यह सज्जन, बाएँ से दाएँ, बस इसे रखें। क्या अब आप बेहतर हैं? ठीक से बैठो। बैठ जाओ। वैसे ही जैसे तुम बैठे हो। वह कैसी है? मैं बस चिंतित हूँ। और क्या कल तुमने ठंडी हवा का अनुभव किया?

मुझे हाथों में बहुत गर्मी लग रही थी। दाहिने हाथ में बहुत गर्मी और दाहिनी ओर थोड़ा सा कंपन, माँ। 

अब अपना बायां हाथ धरती माता पर रखें। हाँ, बाहर, हाँ। आप क्या काम करते हो?

 शिक्षक। बेहतर है सवाल पूछें। वह एक शिक्षिका है। “माँ, क्या आप शिक्षकों की शिक्षिका हैं?” केवल यह प्रश्न पूछें, “क्या आप सभी शिक्षकों की गुरु हैं?” “माँ, क्या आप सभी शिक्षकों की शिक्षिका हैं?” अपना हाथ वहाँ रखो, धरती माँ पर। यह महत्वपूर्ण है। प्रश्न पूछें? “क्या आप सभी शिक्षकों के शिक्षक हैं?” फिर से। “माँ…”माँ, क्या आप सभी शिक्षकों की शिक्षिका हैं?” “क्या आप सभी शिक्षकों की शिक्षक हैं?” क्या चैतन्य मिल रहा?

 यह [अस्पष्ट] असंभव है, माँ।ऐसा है

अब दस बार पूछें, ताकि यह स्पष्ट हो जाए। “माँ, क्या आप सभी शिक्षकों की शिक्षिका हैं?” “माँ, क्या आप सभी शिक्षकों की शिक्षिका हैं?” ठीक है? यही उत्तर है। पूछो। सब ठीक है। हो गया, यह चैतन्य बह रहा है। अपनी आँखें बंद करें! क्षमा करें। सबसे पहले अपने सभी छात्रों को क्षमा करें। यही बात है जिस पर मेरा ख्याल है। बस उन्हें माफ कर दो! वे अच्छे हैं।

अब भी मेरे पेट में गांठ है।

 हाँ मैं जानती हूँ। हो सकता हैं वे भयानक उपद्रवी हों| अब आप देखिए, चूँकि माता-पिता अपने बच्चों की देखभाल नहीं करते हैं, कोई प्रशिक्षण नहीं है, कोई अनुशासन नहीं है, वे सिर्फ शिक्षकों पर हंसना और उनका मजाक उड़ाना जानते हैं। भारत में नहीं। भारत में ऐसा नहीं है। लेकिन अन्यथा… – धन्यवाद! -परमात्मा आप को आशिर्वादित करे! अब आप जानते हैं कि यह काम कितना महत्वपूर्ण है, आप देखिए? हमें बच्चों को भी परिवर्तित करना  है, ताकि वे अच्छे बनें, प्रसन्न बच्चे बनें, सुरक्षित रहें, ईश्वर के प्यार को महसूस करें। देखिए, उनमें बहुत सुधार होगा। ठीक है? ईश्वर आप पर कृपा करे! यह महिला, वह कैसी है? बस देखो! साथ चलो! यह सब ठीक है? वह अच्छा है! वह वास्तव में अच्छा है। आप किसी गुरु के पास नहीं गए, किसी के पास

नहीं, वास्तव में नहीं, नहीं।मैंने कुछ पढ़ा है। 

श्री माताजी : केवल पढ़ना। 

योगी: नहीं, मिले नही, किसी आश्रम में नहीं गये।

 भगवान का शुक्र है। नहीं तो मुझे सबको साफ़ करना होगा… अब, आप किसी के पास गए हैं? वह योगी महाजन के पास भी गए हैं। हां? और कौन? – और कोई नहीं है।सिर्फ योगी महाजन?! योगी महाजन मुझे परेशानी दे रहे हैं। उन्होंने सभी प्रकार की चीजें कीं

योगी, शुरुआत में। 

अब, आप कर सकते हैं… उसने अन्य सभी प्रकार के कार्य किए। आप योगी महाजन के पास कब गए थे? उनके आत्मसाक्षात्कार पाने से पहले या बाद में? आप उसके पास कब गए?

 लगभग दो साल पहले, माँ।

 क्या उन्होंने उस समय सहज योग की बात की थी?

 पृष्ठभूमि मिस्र है। पृष्ठभूमि मिस्र की है, माँ। लगभग आधा आधा। 

यह कैसा है? अब आप किस गुरु के पास गए हैं? क्या तुम किसी के पास गए?

 कहीं नहीं। मिस्रवासी ममियों और उस सब पर विश्वास करते हैं। मैं धर्म से यहूदी हूँ

यहूदी। यही बात है! यदि आप यहूदियों हों तो आपको एक सवाल पूछना है, ठीक है, अगर आपको कोई आपत्ति नहीं हो तो कहो कि, “माँ, क्या ईसा-मसीह परमेश्वर का पुत्र था?” टच. ठीक है, बस मुझसे पूछो! पूछने में कोई बुराई नहीं है! ठीक है? अगर मैं सच्ची हूं तो आप को पता चल जायेगा। ठीक है? आइए जानते हैं इसका जवाब। “माँ, क्या ईसा-मसीह परमेश्वर के पुत्र थे?” ठीक है, बस लगाओ। फिर से! “माँ, क्या ईसा-मसीह परमेश्वर के पुत्र थे?” “माँ, क्या ईसा-मसीह परमेश्वर के पुत्र थे?” ठीक है। समझ लिया। ठीक है? हाथों में ठंडक महसूस हो रही है? मैं कहती हूं कि क्या फर्क पड़ता है। हाथ में आ रहा है?

 मुझे नहीं पता कि मुझे क्या महसूस करना चाहिए।

 क्या आप हाथों में ठंडी हवा महसूस कर रहे हैं?

 नहीं, मैं दोनों हथेलियों के मध्य में सघन गर्मी महसूस कर रहा हूं। बहुत तेज तीखा। 

आपको ईसा-मसीह में विश्वास करना होगा। वह था! आप इस सत्य का कुछ  कर नहीं सकते! आप सच्चाई को नकार नहीं सकते। वह था! देखिए, यहूदियों ने कहा, उन्होंने मानने से इनकार नहीं किया चूँकि, उनका मानना ​​​​था कि “हमें कष्ट उठाना चाहिए”, ठीक है? इसलिए उन्होंने कष्ट उठाये। अब कम से कम, उस पर विश्वास करो! 

मैं कष्ट भोगने में विश्वास करता हूं। 

अब भी? तब आपके पास एक और हिटलर होगा। क्या आप चाहते हैं कि एक और हिटलर आए? मुझे लगता है कि हर यहूदी खुद ही अपना हिटलर है। ऐसा ही है। तो क्या? अपने खिलाफ मत बनो। ईश्वर ने आपको प्रसन्न रहने के लिए बनाया है, कष्ट के लिए नहीं। परमात्मा के बारे में गलत विचार। बिल्कुल गलत विचार। यह आपके बहुत ही गलत विचार हैं। ईश्वर आपको कैसे कष्ट दे सकते हैं? मुझे नहीं पता कि ये विचार आपके पास कैसे आए। मानो जल रहा हो! [अस्पष्ट]। अब चूँकि तुम दुख भोगना चाहते हो, इसलिए जलन है। अब बस इतना ही कहो कि: “माँ, मैं अब और कष्ट नहीं सहना चाहता!” मैं अब और दुःख नहीं सहना चाहता। 

फिर से, कहो।

 “मैं अब और पीड़ित नहीं होना चाहता।” “माँ, मैं अब और कष्ट नहीं सहना चाहता।” “माँ, मैं अब और कष्ट नहीं सहना चाहता।”

 बेहतर है, देखा? अब अधिक शीतल है? बेहतर? यह वाला बहुत, बहुत गर्म है। बस देखो। आप अपने सामने स्पष्ट, सच्चाई देख सकते हैं। देखिए, आपको ऐसी गर्मी की अनुभूति होना चाहिए। यह दुख माँगना ईश्वर विरोधी गतिविधि है। मान लीजिए किआपकी एक माँ है अथवा आप स्वयं एक माँ हैं और यदि आपका बच्चा कहता है: “ओह, मैं पीड़ित होना चाहता हूँ।” बच्चे को पीड़ित देखना एक माँ के लिए बहुत अति है। बच्चे की तुलना में अधिक पीड़ा है। यह किसी प्रकार की परपीड़न है, मुझे लगता है, ईश्वर को यातना देना। है ना? आपको क्यों भुगतना चाहिए? यह बेतुका है! ईश्वर कभी नहीं चाहेंगे कि आप पीड़ित हों। वह क्यों ऐसा करेंगे? उसने तुम्हें इस धरती पर दुख उठाने के लिए नहीं बनाया था। क्या आपको इंसान बनने का कष्ट हुआ?

 नहीं, मुझे बिल्कुल नहीं हुआ।

 फिर अब क्यों भुगतें? यह सब मानसिक गतिविधि है। कुछ ऐसा ढूंढ लेना जो आपको खुद को चोट पहुँचाने वाला हो, है ना? ठीक है। बेहतर। स्वयं पर विश्वास रखें। यदि आप पूरी बाइबल भी पढ़ते हैं, तो मुझे कहीं भी ऐसा लिखा नहीं मिला है, कि आपको कष्ट उठाना चाहिए। क्या अब आप हाथ में ठंडक जैसा महसूस कर रहे हैं? ओह, यह वहाँ है। बेटे के बारे में क्या? “तू मेरा चरवाहा है।” ऐसा बाइबिल में है। “प्रभु मेरे रक्षक है।” ऐसा तोरा में है। तो कैसे? डेविड ने क्या कहा? क्या उसने कहा “मैं पीड़ित होना चाहता हूँ”? इन यहूदियों को ऐसा विचार कहाँ से आया? यह बहुत बुरा है! ईश्वर को और अधिक कष्ट देता है। ठीक है?

 – यहाँ बहुत विशुद्धि है|

माँ: बहुत ज्यादा। ख़ासकर बाईं ओर।- अब इस बात के लिए दोषी मत समझो की आपने दुख माँगा। अब दोषी मत समझो। ठीक है। आप कैसे हैं? क्या आप भी यहूदी हैं? [अस्पष्ट] अब, हमारे पास बहुत से यहूदी हैं जो योगी हैं, आप देखते हैं? हमारे पास कई यहूदी हैं जो योगी हैं। उन्होंने वह सब गँवा दिया। और फिर बाद में क्या हुआ, देखिए, उन्हें भुगतना पड़ा। लेकिन पीड़ा ने यहूदियों को परिवर्तित नहीं किया। जरा इसे देखो!  आखिरकार वह निर्वासन और उन सभी समस्याओं के कारण वे और अधिक क्रूर लोग बन गए। वे अब कैसे व्यवहार करते हैं? हाल ही में आपने उन्हें देखा? जहां उन्होंने मार डाला। कोई परिवर्तन नहीं है। इस पीड़ा ने उन्हें एक ऐसी स्थिति दी है जो बहुत ही आसानी से भड़कने वाले अस्थिर और अत्यंत हिंसक है। और प्रतिक्रियावादी। उन्हें शांतिपूर्ण लोग, दयालु लोग, कृपालु लोग बनाने के बजाय, है ना? उन्होंने कैसा व्यवहार किया? इस दुख के माध्यम से कोई परिवर्तन नहीं होता है। इसके विपरीत, पीड़ित होना बहुत खतरनाक है। जो पीड़ित होते हैं वे प्रतिक्रियावादी बन जाते हैं। और कड़वे। 

आह, बेहतर। – यह अच्छा है!आगे आओ! अब, क्या आप यहूदी हैं

तो क्या हो तुम?

 – कुछ भी तो नहीं। – कुछ भी तो नहीं। 

आप को ये सारी खरोंचे कैसे हुई हैं?

 – मशीनों की वजह से।

अब, बेहतर। अपनी आँखें बंद करें! इस देश में 10% 

कोई कहता है: माँ, यह उठ रही है। 

आपके पूर्वजों ने इस तरह आपके लिए काम किया है, मुझे लगता है।

 वह कैसी है

थोड़ा नाभी है, यह दिखाता है। हाथों पर भी हल्का पीला। 

आप क्या काम करती हो?

 – मैं एक शिक्षिका हूँ।

उसे अपने पेट पर बायाँ हाथ रखने दो। उसे पूछने को कहो। “माँ, क्या आप शिक्षकों की शिक्षिका हैं?” हां

माँ, क्या आप शिक्षकों की शिक्षिका हैं?” “माँ, क्या आप शिक्षकों की शिक्षिका हैं?”

 इसे फिर से कहना! कहो, दस बार कहना पड़ेगा! “माँ, क्या आप शिक्षकों की शिक्षिका हैं?” ठीक है? बेहतर। क्या आप [अस्पष्ट] हैं? थोड़ा सा हाथ में? दाईं ओर? दो बार कोशिश करो। अपना बायां हाथ रखो। सब ठीक है? माफ कर दो, बस माफ कर दो। 

वॉरेन? जरा इन सज्जन को देखिए!