Talk to Sahaja Yogis, Money, Sleep, Bhoots, Lethargy

Surbiton Ashram, Surbiton (England)

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                                             पैसा-भूत-नींद-आलस्य

आश्रम में बात, दीवाली पर माँ के साथ अलाव रात

सर्बिटन (यूके), 5 नवंबर 1983।

मैंने पुरे अमेरिका की एक अति व्यस्त, कठिन यात्रा की है और यह मेरी अपेक्षा से बहुत अधिक था, इसने बहुत अच्छा काम किया और मैं इसके बारे में बहुत खुश हूं। सभी अमेरिकी इंग्लैंड और अन्य देशों के सहज योगियों के बहुत आभारी हैं जिन्होंने इस दौरे में योगदान दिया है और विशेष रूप से उन लोगों के लिए जिन्होंने यात्रा की और चक्कर लगाया और उन्हें व्यवस्थित किया। इसलिए मैं आपको बताती हूं कि वे बहुत आभारी हैं, लेकिन आप लोगों के लिए यह संभव नहीं होगा। यह एक बहुत ही कठिन यात्रा थी, निस्संदेह, और ज़ोरदार दौरा और यूरोप के दौरे के बाद यह सब कुछ बहुत अधिक ही था। लेकिन जिस तरह से लोग यहां से गए और उन्हें लिया और आपने पैसे भेजे, उन पर बहुत कम दबाव था और वे इसे बहुत अच्छी तरह से प्रबंधित कर सके और जैसा कि आप जानते हैं कि हमने सहज योग के बीज बोने के संबंध में बहुत अच्छा किया है। .

तो मुझे लगता है कि सहज योग का बीज अब बोया जा चुका है और यह एक बड़ी उड़ान ले सकता है, मुझे यकीन है क्योंकि अमेरिकियों को पता है कि वे बहुत, जड़ों से उखड़े हुए प्रकार के लोग हैं और काफी उथले लोग हैं और कोई यह भी कह सकता है कि वे उनके गुरु हर तीसरे दिन और उनकी कारें हर चौथे दिन और उनकी पत्नियां पांचवें दिन बदलते रहते हैं। जब उन्होंने उनमें से बहुतों को बदल दिया है कि उन्हें अपने पास लाना और उनसे वास्तविकता के बारे में बात करना आसान हो जाता है।  इसका सबसे बड़ा हिस्सा यही है और उनमें से अधिकांश, किसी न किसी गुरु या किसी के पास रहे हैं और उस सबका परिणाम यह है कि वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि यदि वास्तविकता को आना है, तो वो उसी तरीके से आ सकती है जिस पर सहज योग है।

इसलिए सहज योग के बारे में उनसे बात करना कोई मुश्किल काम नहीं है। लेकिन इसका सबसे अच्छा हिस्सा उन सभी गुरुओं के लिए रहा है जिन्होंने उन्हें एक अच्छी चोट, असली अच्छी चोट दी है। उन्होंने अपना सारा पैसा खो दिया है, उन्हें इतना प्रशिक्षित किया गया है, उन्हें हर तरह की चीजें करनी पड़ीं, और उन्हें खुद को भूखा रहना पड़ा और कोई भोजन नहीं और कभी-कभी उन्हें कई मीलों तक दौड़ना पड़ा, हर तरह की कलाबाजी और हर तरह की बातें करनी पड़ी। उन्होंने जो कुछ किया है और उसके परिणामस्वरूप उनके लिए सहज योग बहुत कीमती है। यह एक अंतर है जो मुझे लगता है कि दूसरों और अमेरिकियों के साथ है, क्योंकि आप उन तकलीफदायक प्रकार के गुरुओं को नहीं जानते हैं जो उनके पास रहे है जो उनके जीवन को हर समय यातना देते हैं कि “आपको ये चीजें सिर्फ अपने पापों से छुटकारा पाने के लिए करना है और यही किया जाना है, अपने पापों के कारण तुम ऐसे हो।”

और मुख्य बात जो कि मुझे वहां पता चला यह थी कि, अचेतन के बारे में लिखने वाले दार्शनिकों या लेखकों ने भी बहुत बड़ी गलती की थी और उन्होंने कहा कि अगर आपको अचेतन में जाना है तो आपको अवचेतन से गुजरना होगा। और जब मैंने इस चित्रण को देखा तो मैं हैरान रह गयी। युंग ने अचेतन और अचेतन के चेतन हो जाने के साथ चित्रण किया था और उसके ऊपर अवचेतन और फिर चेतन मन और फिर अहंकार था। तो यह एक ऐसा घालमेल मामला था। तो मैंने उनसे कहा कि परमात्मा सबसे महान योजनाकार हैं और उन्होंने आपके लिए मध्य मार्ग बिल्कुल खुला रखा है जो सुषुम्ना पथ है और अवचेतन बाईं ओर है और अतिचेतन दाईं ओर है। तो आपको इन सब चीज़ों से गुज़रने की ज़रूरत नहीं है, हवाईअड्डे में भी मान लीजिए कि हवाई जहाज़ में जाने के लिए आपको रखे हुए सामान से गुज़रना पड़ेगा, तो क्या होगा? और जब इस बात को मनुष्य भी समझ सकते हैं तो परमात्मा की तो बात ही क्या है? वे निश्चित ही हमसे बड़े संगठनकर्ता, हमसे बड़े विचारक होना चाहिए। और वह हमारे लिए ऐसे घालमेल के बारे में नहीं सोच सकता था कि जब हमें उत्थान करना है तो हमें अपने अवचेतन से गुजरना होगा और फिर अचेतन में जाना होगा।

तो पूरी बात यह है कि उनके पास कोई स्पष्ट विचार नहीं था, यह सब एक मानसिक प्रक्षेपण था और इसी कारण उन्होंने वहां सभी गलतियां कीं और जब उन्होंने इन चीजों को प्रकाशित किया, तो शायद गुरु जो अगुरु हैं, उन्होंने एक सुराग लगाया होगा और इसी तरह उन्होंने बात करना शुरू कर दिया कि, तुम्हें अपने अचेतन में जाना है। और इस तरह से पूरी बात तैयार की गई है कि लोगों को लगा कि हमें अवचेतन के माध्यम से अचेतन में जाना है। और जब ऐसा हुआ तो उन्होंने कहा कि अगर आपको अवचेतन में जाना है तो हमें सब कुछ सहना होगा, हमें किसी के वर्चस्व में आना होगा, हमें भूत ग्रस्त होना होगा, हमें नशा करना होगा, हमें वह सब करना होगा जो पागल लोग कर रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने उस उद्देश्य के लिए बाइबल का इस्तेमाल किया, क्योंकि बाइबल में कहा गया है कि जब होली घोस्ट (पवित्र आत्मा) आई तो वे सभी पागलों की तरह व्यवहार करने लगे। यह मिस्टर पॉल की शरारत थी। और इस तरह उन्होंने इसे सही ठहराया कि आध्यात्मिक बनने के लिए हम सभी को पागल होना होगा। तो इस तरह के एक बेवकूफी भरे विचार को भारत के असली ठगों ने अपने कब्जे में ले लिया और उसका फायदा उठाया। फिर इसे अब अमेरिकियों के ठगों ने भी अपने कब्जे में ले लिया है। तो अमेरिकी भी वहां कुछ समूह बना रहे हैं, वे भी गुरु बन गए हैं और वे लोगों को यह भी सिखा रहे हैं कि साक्षात्कारी आत्मा बनने से पहले तुम्हें पागल होना होगा।

यह ऐसी बात है कि उन्होंने कभी यह नहीं समझा कि हमारे उत्थान के लिए स्वयं परमात्मा द्वारा बनाया गया कोई रास्ता होना चाहिए। वह इसे इतना कठिन क्यों बना देंगे, उन्होने कभी बीज के अंकुरण को भी कठिन नहीं बनाया है, वह हमारे विकास को इतना कठिन क्यों बना देंगे? और यही कारण है कि ये बेचारे, आप देखते हैं, उनमें से आधे पागल हैं। सचमुच पागल लोग, जब वे सहज योग में आए, तब उनके हाथों पर छाले पड़े हुए थे। बायीं ओर सभी छाले, आप देख सकते थे कि उनके सारे हाथ जल रहे थे। मेरे सामने हर समय कांपते हुए, यह भयानक था मेरा मतलब है, मुझे उनके भूतों का मुकाबला करना पड़ा और मैं वास्तव में इससे थक गयी, बिल्कुल थक गयी, मैं जहां भी गयी वहां ऐसे लोग थे जिनको बहुत सारी भूत बाधा  थी। लेकिन उनकी सुंदरता, जो उनसे सीखनी चाहिए, वह यह है कि एक बार जब उन्हें एहसास हुआ कि यही सच है, वे बहुत मेहनत कर रहे हैं, बहुत मेहनत कर रहे हैं और वे बहुत अनुशासित लोग हैं, वे सुबह उठते हैं, स्नान करते हैं, ध्यान के लिए बैठते हैं, वे इसे पूरा करते हैं। वे हमारे जैसे नहीं हैं, आप देखते हैं, हम ‘ओह बहुत खुश हैं’, आप देखिए, हवा में उड़ते हुए, “माँ हमारी देखभाल कर रही है, यह ठीक है, हम नौ बजे उठ सकते हैं और फिर सब ठीक है, हम माँ को नमस्कार कहते हैं, उनके बारे में एक अच्छी कविता लिखो”, बस समाप्त! वे ऐसे नहीं हैं; वे इस पर काम कर रहे हैं क्योंकि उन्होंने जो कहा वह बहुत ही उल्लेखनीय बात थी, उन्होंने जो कहा कि “माँ, हम वास्तव में नरक में गए हैं। और हमें वास्तव में बहुत तेजी से बाहर निकलना होगा, अगर आपको इससे बाहर निकलना है अन्यथा हम कभी वहां नहीं पहुंचेंगे जहाँ हमें होना है”, जो एक सच्चाई है। और यही वह है जिसे समझना होगा कि अगर आपको अपनी आत्मा के साथ कोई संबंध बनाना है तो आपको वास्तव में बहुत मेहनत करनी होगी।

अब हमारा, अब तक पश्चिम में हमारा सहज योग, अब तक, मैं कहूंगी, आगे नहीं क्योंकि आज नए साल का दिन है, हमें नए साल के दिन कुछ संकल्प लेने हैं, है ना? तो, अब तक एक आसान कुर्सी रही है, जैसा कि आप इसे राजनेता कहते हैं। और एक और बात मुझे वहां बहुत अजीब लगी, जो अब मुझे समझ में आ रही है कि इस देश में लोग ऐसे क्यों हैं, हर जगह भी, जिसे आप तब देख पाते हैं, जब आप उस जगह से थोड़ा दूर होते हैं तो आप इसे बेहतर समझते हैं। तो एक और चीज जो मैंने खोजी वह यह थी कि यह तथाकथित ईसाई नैतिकता आप कह सकते हैं।

[माँ एक सहज योगी से अलग बोलती हैं: मुझे आशा है कि आपने बात नहीं की है, है ना? ठीक है।]

अब उन्होंने मुझे जो ईसाई नैतिकता बताई थी, वह वास्तव में बहुत सी चीजों की व्याख्या की गई थी कि आप ऐसा क्यों व्यवहार करते हैं। जैसे, एक महिला ने मुझे एक कहानी सुनाई कि एक साथी था जिसका अपना एक स्टोर था और उसने इसे सुरक्षित करने के लिए बहुत अच्छे ताले का इस्तेमाल किया था। तो लोगों ने यह कहते हुए विरोध किया कि आपने अपनी चीजों को इतनी अच्छी तरह से ताला बंद क्यों कर दिया, आपको एक  मौका चोर को भी देना चाहिए था, आप देखिए, आप अपना बीमा करा सकते हैं लेकिन आपने चोर का मौका क्यों छीन लिया? उस तरह की ईसाई नैतिकता हमारे दिमाग में काम करती है, आप देखिए। तो हम क्या करते हैं, हम हमेशा एक भूत के साथ हर समय सहानुभूति रखते हैं। तुम देखो। ”ओह! वह है, माँ, इतनी बुरी तरह से, वह ऐसी है ”। “अरे बाबा! वह एक भूत है!” क्या मोदी ने आपको रामदास की बात नहीं बताई? संगेतला तुम्रीही? (क्या आपने उन्हें बताया?)

तो मोदी ने यह कहा, वहीं जो रामदास स्वामी ने कहा है। ‘पिशाच’ का अर्थ है एक शैली का भूत, आप देखते हैं कि जो लोगों पर चिपक जाता है, वह है पिशाच। तो वे कहते हैं “पिशाचा मगे पिशाच गेले” (भूत के पीछे भूत चला गया है), एक भूत के पीछे दूसरा भूत चला गया है। तो उसके पीछे कौन जा सकता है? इसे कौन बचा सकता है? मेरा मतलब है कि अगर वे भूत के पीछे जा रहे हैं, और सार्थक का क्या मतलब है – वे इससे क्या हासिल करेंगे? पूरी बात यह है कि हमारा मन माँ, “ओह वह बहुत परेशान है, माँ, हमें उस व्यक्ति की मदद करनी चाहिए, उस व्यक्ति के लिए हमें यह करना चाहिए।” यह सब ईसाई नैतिकता है, निरर्थक है। लेकिन क्राइस्ट ने कभी नहीं कहा, उन्होंने एक बड़ा कौड़ा हाथ में लिया और उन सभी लोगों को पीटा, जो भूतग्रस्त थे और उन्हें निकाल कर समुद्र में डाल दिया। तो यह ईसाई उस प्रकार के है जो ईसा-मसीह से भिन्न है, इसलिए ईसाई नैतिकता यह है कि हमेशा एक ऐसे व्यक्ति के साथ सहानुभूति रखें जो एक भूतिया व्यक्ति हो। हमेशा! एक भूतिया व्यक्ति के पास सहानुभूति पैदा करने का भी एक तरीका होता है।

इसलिए आज नए साल के दिन, मुझे लगता है कि मैं आपको कुछ ऐसी बातों से आगाह कर दूं जो मुझे अमेरिका जाने के बाद महसूस हुई हैं। मेरी मानव के बारे में समझ में सुधार हो रहा है (योगी और माता जोर से हंसते हैं)। मैंने एक बार देखा था, आप देखिए, एक महिला थी जो एक रेस्तरां चला रही थी। और एक चोर ने एक रेस्तरां से एक कोट चुराया था और उसके रेस्तरां में आया था और पैसे नहीं देगा और उसने पुलिस को सूचित किया। तो पुलिस ने कहा, “क्या उसके पास बहुत अच्छा कोट है?” “हाँ,” [उसने] कहा “उसके पास है”। “वह दूसरे रेस्तरां से चोरी हो गया है जो हमें रिपोर्ट मिली है”। तो पुलिस आ गई। इसलिए उन्होंने इस आदमी के खिलाफ मुकदमा दायर किया कि यह चोर है, उसने वहां से एक कोट चुरा लिया है और यहां खाना खाया है, कभी भी कुछ भी भुगतान नहीं किया है। तो इन लोगों को, दोनों रेस्तरां के लोगों को अदालत में जाकर सबूत देना पड़ा कि, आप देखिए, इस आदमी ने कोट चुरा लिया है और उसने कुछ भी भुगतान नहीं किया है और वह झगड़ा कर रहा था। और उन्हें दो दिन बिताने पड़े और अपना पैसा बर्बाद करना पड़ा क्योंकि वे अपने रेस्तरां से कमाई कर रहे थे। तो न्यायाधीश ने कहा: “कोई बात नहीं, वह उस समय नशे में था। इसलिए उसे माफ कर दिया जाना चाहिए क्योंकि वह नशे में था”, सबसे पहले। और दूसरी बात उसे पैसे दिए गए क्योंकि उसने कहा कि “मेरे पास अब घूमने के लिए पैसे नहीं हैं”, जबकि इन लोगों ने दो दिनों के लिए अपना पैसा गंवाया| और पुलिस ऐसे ही हाथ पर हाथ रखे बैठी रही।

तो इस तरह की नैतिकता जो हमारे पास है, आप देखिए, हमेशा भूतों के प्रति, गलत करने वालों के प्रति सहानुभूति रखना, जो आप देखते हैं। अगर आप अखबार पढ़ते हैं तो भी आप चौंक जाते हैं। उन्हें एक बिंदु पर कैसे छोड़ दिया गया कि वे असंतुलन में थे। चूँकि वे असंतुलन में थे, इसलिए उन्हें छोड़ दिया गया। उन्हें पैरोल पर भेजा जाता है; ऐसा आदमी जाता है और दस लोगों को फिर से मारता है, लेकिन क्योंकि वह असंतुलित था। इसलिए ज्यादा जरूरी है कि आप उसे रखें, अगर वह असंतुलित है तो ज्यादा जरूरी है। असंतुलित होना अपने आप में पाप है, स्वयं अपराधी है। अगर कोई असंतुलित है, तो इसका मतलब है कि वह एक आपराधिक व्यक्तित्व है और ऐसे आपराधिक व्यक्तित्व को ताला और चाबी में बंद रखा जाना चाहिए।

जैसे फ्रांस में मैंने देखा, मैं बस से जा रही थी; अब मैं बहुत सी बातें समझती हूं, मुझे कहना चाहिए पहले मैं उन्हें समझ नहीं पायी थी। तो फ्रांस में हम बस से जा रहे थे और एक व्यक्ति बॉक्सिंग कर रहा था, वह हर तरह की बातें कर रहा था। मैंने कहा हे भगवान! यह तो उसके मुंह से केवल भूत ही बोल रहा  है, वह कौन है? उन्होंने कहा कि वह एक आदमी है जो युद्ध के बारे में बात कर रहा है। मैं इतना चौंक गयी थी, मैंने कहा कि यह आदमी युद्ध और इन चीजों के बारे में बात कर रहा है, उसे बस में क्यों आने दिया जाता है? फिर दूसरा आया, फिर एक महिला आई, वे सब बात कर रहे थे, कुछ अप्रासंगिक बाते कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ये सभी लोग हैं जिन्होंने बहुत कष्ट सहे हैं और वे बस में आ रहे हैं और इसलिए वे ऐसे हैं। तो मैंने कहा “लेकिन इन लोगों को अंदर क्यों आने दो, भारत में कोई भी ऐसे व्यक्ति को अंदर नहीं आने देगा।” तो मुझे लगता है कि ‘मैरी’ वहां थीं, उन्होंने कहा, “आप देखिए कि,  हमारी सरकार बहुत सहानुभूतिपूर्ण है, आप देखिए, ऐसे लोगों के प्रति।” मैंने कहा, “लेकिन बाकी लोगों का क्या? वे दूसरे लोगों के प्रति सहानुभूति नहीं रखते हैं, परिवर्तन के लिए ही सही कम से कम उन्हें कभी-कभी समझदार लोगों के साथ सहानुभूतिपूर्ण होना चाहिए!

पागलपन के साथ हमेशा सहानुभूति रखना यह भी दर्शाता है कि आप सभी भूतिया लोगों को विकसित होने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं, जो उन्हें पसंद है वैसा कर के। मेरा मतलब है कि यह बिल्कुल भी सहानुभूति नहीं है। इस तरह यह काम करता है और मैंने देखा है कि ऐसी भूतिया सहानुभूति ने मुझे भी बहुत परेशान किया है। इसलिए आपको अपनी गरीब मां के प्रति थोड़ी सहानुभूति रखनी होगी। अब तुम्हारी भूतों के प्रति सारी सहानुभूति छोड़ देनी चाहिए। क्योंकि इसने मुझे हर समय बहुत परेशानी दी है और अब मुझे समझ में आया कि तुम लोग हमेशा भूत लोगों के प्रति सहानुभूति क्यों रखते हो।

अब, जैसा कि इंग्लैंड में है, सुबह किसी को जगाना पाप है। मेरा मतलब है कि हम ने बड़े झगड़े, लड़ाई-झगड़े, नाक-भौं सिकोड़ना पाया है, सब कुछ हुआ है क्योंकि सुबह के समय किसी ने किसी को जगाया। और लोगों ने हमदर्दी जताते हुए आकर कहा, “माँ, आखिर आप देखो इन सज्जन ने जा कर उन्हें जगाया या बच्चा सुबह रोने लगा और वह व्यक्ति सुबह उठ गया”। तो पश्चिम में यह पाप है कि अगर तुम किसी को जगाते हो। लेकिन, आप देखिए, आपको अब खुद को बदलना होगा, अगर आपको योगी बनना है, तो आपको पता होना चाहिए कि आपको बैठे-बैठे, योगी की स्थिति नहीं मिल सकती है। आम तौर पर आपको हिमालय जाना पड़ता है, उस ठंड में रहना पड़ता है, लगातार कई दिनों तक कुछ नहीं खाना है, अपनी सभी इच्छाओं को साफ़ कर देना है, अपनी पत्नी, अपने बच्चों, सभी को त्याग देना है। लेकिन सहज योग, जैसा अब तक रहा है, आपकी पत्नी हो सकती है, भले ही वह थोड़ी भूतिया हो, ठीक है। लेकिन अगर वह बहुत ज्यादा भूतिया है, तो भी मुझे उस भूतिया महिला की चिंता करनी पड़ेगी। भले ही वह सहज योग को नष्ट कर दे, कोई बात नहीं, सहानुभूति है। अगर वह कुछ भी करती है, तो वह पत्नी है, आखिर। या एक पति जो एक भूतिया है, मुझे हर बार एक पत्र मिलता है कि मेरा पति एक भूतिया आदमी है, वह मुझे मारता है, वह ऐसा करता है। अब मैं क्या बताऊँ? तुम अपने पति को तलाक दे दो, मैं क्या कहूँ? मेरा मतलब है, अगर वह भूतिश है, तो आप भूत के साथ कैसे हो सकते हैं? आप एक साक्षात्कारी आत्मा हैं और धीरे-धीरे ऐसा कुछ होता है कि आप भूत के साथ ऐसी प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेते हैं कि आपको पता ही नहीं चलता कि आप स्वयं एक बड़े भूत बन गए हैं? और आप यह और इसके साथ चलते चले जाते हैं। क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि हम यहां योगियों की, शुद्ध लोगों की एक जाति बना रहे हैं।

अब लोग हिमालय क्यों जा रहे थे? क्योंकि वहां भूत नहीं थे। आप देखिए, वहां बहुत कम लोग गए, पागल करने वाली भीड़ से दूर रहे। आप इस भयानक, नारकीय वातावरण में रह रहे हैं, जहाँ भूत और भूत हैं, और भूत हैं, सभी प्रकार के। अब यहाँ अधिक आवश्यक है कि आप बहुत सावधान रहें, मान लीजिए, आप देखते हैं, प्लेग का रोग फूटता है, किसी भी देश में, फिर लोग कैसे सतर्क हो जाते हैं? वे इतने डरे हुए होते हैं कि प्लेग से हमें कोई भी पकड़ नहीं आना चाहिए, है ना? उसी तरह हमें अवश्य पता होना चाहिए, अब आप इसके प्रति सचेत हैं। लेकिन इसके विपरीत यह भूतिया लगाव इतना महान है कि मुझे नहीं पता कि इससे कैसे लड़ना है।

और इसका सबसे जोरदार हिस्सा, आप देखिए, यदि आप किसी को बताते हैं कि, आपने ऐसा क्यों किया, वे कहते हैं कि यह भूत है जिसने किया। लेकिन कैसे? वह रह कहां रहा है? आपके अपने ही घर में। मान लीजिए कि इस घर में कोई रहता है और वह पूरे घर को उड़ा देता है, क्या तुम ऐसा कहोगे कि रहनेवाले ने यह किया है? दोष आपको खुद को देना होगा। आप एक भूत को अपने अंदर क्यों रहने देते हैं? तो आज एक दिन है, मेरा मतलब है कि कल का दिन लक्ष्मी पूजा का एक विशेष दिन था। और आपको आश्चर्य होगा कि हमारे घर में हम सभी लाइटें जलाते हैं। और मोमबत्तियां जलाई गईं। जैसे ही मोमबत्तियां जलाई गईं, मेरा यह, मेरा पैर, बिल्कुल विकृत होने लगे। इसे सामान्य स्थिति में नहीं लाया जा सका। कम से कम आधे घंटे तक हम इससे जूझते रहे। कारण यह है कि लंदन के सभी भूतों ने शायद मेरे पैर छुए। और वे वहां पहुंच गए … कि “हमें बचाओ”। तो स्थिति यह है। जबकि आपको इसकी बिलकुल भी जानकारी नहीं है। अब लोग सोचते हैं कि तुम धार्मिकता के साथ, परमेश्वर के साथ समझौता कर सकते हो। तुम नहीं कर सकते। आप समझौता नहीं कर सकते। जो कुछ भी शुद्ध है, उसे उसकी पवित्रता में, उसकी महिमा में स्वीकार करना पड़ता है, और उसके लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। आप बस नहीं कर सकते … आपके पास आपकी नौकरी होगी, आपकी पत्नियां होंगी, आप अपना खाना खाएंगे, विशेष प्रकार की चीजें, आपके पास आराम होना चाहिए, आपके पास सबकुछ होना चाहिए। यह ईश्वर की तरफ यह प्रथम श्रेणी की यात्रा है, और इसके साथ-साथ भूत ईश्वर की ओर जा रहे हैं। यात्री सामान में हर कोई है।

व्यक्ति को यही समझना है कि, हम योगी हैं और हम लोग हैं जो विशेष रूप से पूरी दुनिया को ऊपर उठाने के लिए आशिर्वादित हैं। हम पूरी पश्चिमी दुनिया के लिए जिम्मेदार हैं। और हम इसके बारे में क्या कर रहे हैं? और मैंने उन लोगों से पूछा जो झूठे गुरु के पास गए हैं, मैं चकित थी। बेशक, धन संबंधी हिस्सा था, एक-एक हजार रुपये। और उन्होंने कहा कि हमें ऐसा खाना दिया जाता है जिसे कोई नहीं खा सकता। आप बीमार हो जाओगे। एक महिला ने मुझसे कहा कि उसने ऐसा खाना खाया कि उसे एक भयानक बीमारी हो गई और – डॉक्टरों ने मुझसे कहा कि मैं सबसे पहले यह खाना छोड़ दीजिये। और आपको वह खाना खाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। और आपको बहुत पतले कपड़े पहनना है और सड़कों पर खड़े हो जाओ, गीत गाओ, जुलूस में चलो, पागल की तरह नाचो, हर तरह की चीजें करो जो वे करते हैं।

यहाँ सहज योग में उन्होंने कुछ नहीं कहा, यह एक ड्राइंग रूम आवभगत है। लेकिन ड्राइंग रूम में अगर आप अपने भूत भी अपने साथ ले जाते हैं तो इसकी अनुमति नहीं है। इसकी अनुमति नहीं है। इसलिए हमें यह समझना होगा कि यद्यपि हमें अपना साक्षात्कार मिल गया है, हमारे ऊपर एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है और हमें उस जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ना है। सबसे बड़ी समस्या अब ब्रिटेन, फ्रांस की भी है, मैंने देखा है। पीने की आदतों के कारण या जो कुछ भी रहा है, वह है – सुस्ती। बहाने बाज़ी, दिमाग बहुत है… मैं आपको बताती हूं कि हमारे सहजयोगियों के पास भी जबरदस्त दिमाग है। मेरा मतलब है कि कभी-कभी मुझे नहीं पता होता कि उनके बहाने बाज़ी  पर कैसे काम करूँ। “हमारी एक जनसभा थी जो ग्यारह बजे समाप्त हुई, इसलिए हम अगले दिन ग्यारह बजे तक जाग नहीं सके”। आपको बारह घंटे की नींद जरूर चाहिए। बहुत मेहनती लोग! लेकिन तुम्हारी माँ एक ही समय सोती है और मैं मैराथन दौड़ धावक हूं, हर रात, चाहे जब भी, मेरा मतलब है कि, आपका केवल एक कार्यक्रम है, लेकिन फिर मैं इटली जाती हूं, मैं किसी भी स्थान पर जाती हूं, मेरे पास नियमित रूप से ऐसा है , पूरे साल मैं यह कर रही हूं . फिर भी मैं सुबह जल्दी उठती हूँ तो तुम उठ क्यों नहीं पाते?

सब बहाने वहां हैं, ये बहाना है और दूसरा बहाना है और फिर मैंने इतने लोगों से कहा है कि सुबह करीब चार बजे उठ जाओ। बस उठो, कोशिश करो और देखो और करो। यह बहुत अच्छा है, चार बजे मैं पिछले दस वर्षों से कह रही हूं। मैं नहीं जानती कि आप में से कितने लोगों ने यह कोशिश की है। स्नान करो, तैयार हो जाओ, स्नान करो और फिर ध्यान के लिए बैठ जाओ। पूरा दिन बहुत अच्छे से गुजरेगा और करीब 8 बजे सो जाएँ।

यह अंग्रेजी कहावत है कि ‘जल्दी सोना और जल्दी उठना’। लेकिन मैंने आज तक किसी अंग्रेज को ऐसा नहीं देखा। यह दूसरा रास्ता है। वे एक बजे रात तक जागते रहेंगे और लगभग ग्यारह बजे या दस बजे उठेंगे; अपने दाँत ब्रश भी नहीं करेंगे और बाहर निकलेंगे। ये आदतें आपको बदलनी होंगी, हम योगी हैं और हमें सूर्य की उपासना करनी है। इसलिए हमें सूरज उगने से बहुत पहले उठना पड़ता है। यह बहुत महत्वपूर्ण है। लेकिन मुझे लगता है कि ऐसा यहाँ नहीं है। लोग नहीं समझते। वे सहज योग को बहुत धीमी गति से लेना चाहते हैं और आप बहुत धीमी गति से आगे बढ़ेंगे और आप में से बहुत से लोग बाहर निकल जाएंगे मैं आपको बताती हूं। व्यक्ति को समझना चाहिए! आज नए साल का दिन है और हमें समझना चाहिए कि हम क्या कर रहे हैं। यह आप सभी के लिए एक वास्तविक चेतावनी है। तुम बस कोशिश करो, यह कोई बहुत बड़ी बात नहीं है। अब तुम चकित हो जाओगे। सर सी पी बीस दिनों के लिए एक सम्मेलन कर रहे है, हर दिन वह साढ़े चार बजे उठते है, हर दिन बारह बजे सोते है, हर दिन पूरे दिन काम करते है। बीस दिन बाद वह कहते हैं, “कभी-कभी मुझे कड़ी मेहनत करनी पड़ती है”। हमारा सेवक प्रतिदिन साढ़े पाँच बजे उठता है, जो बहुत मेहनत करता है। तुम उठ क्यों नहीं सकते? आप लोग सोचते हैं कि आप सबसे अस्वस्थ लोग हैं अथवा अन्य क्या कारण है? हर बार [आप कहते हैं] ‘हाहा’। तुम्हारे साथ गलत क्या है? कुछ भी गलत नहीं है, आप आलसी गांठ हैं बस इतना ही, आपको समझना चाहिए।

बस अपने आप को बताएं कि आप आलसी हैं, बेहद आलसी हैं और हमें ऐसे ही पाला गया है और आपकी जानकारी के लिए यह आपके अहंकार से आता है। अहंकार सोचता है, सोचता है, सोचता है, हर बात को न्यायोचित ठहराता है, आपको कमजोर बनाता है और फिर आप लक्कड़ जैसे सोते हैं। क्या होने वाला है? यह तमस है, पूर्ण तमस; अहंकार तुम्हें तमस में ले जा रहा है। या जब आप निष्क्रिय नहीं होते हैं, तो हम क्या करते हैं? एक बड़े घोड़े पर सवार होते हैं, जॉन गिलपिन (एक दौड़ते घोड़े पर सवार कामिक्स का हीरो पात्र), हम बहुतों से मिले। मैं टोरंटो गयी थी, वहां भी एक जॉन गिलपिन है। श्री पैट्रिक, जो एक असली जॉन गिलपिन था, बिना एक पाई के वह पैसे का एक बड़ा प्रशासक बन गया, ऐसा वैसा। फिर मैं यहाँ पाती हूँ, मिस्टर जेसन उनसे प्रभावित है। यह एक और जॉन गिलपिन है, मैं उन्हें वही कहती हूं जिसे आप कहते हैं… जेम्स बॉन्ड। वे ऐसे घोड़ों की सवारी कर रहे हैं। तो एक ऐसा समूह है जो आलस्य को लेकर बेहद कट्टरवादी है। तुम देखो, वे सब बहाने जानते हैं कि, माँ से कैसे कहें “ओह! ऐसा है, हमें यह समस्या यह है कि”। दूसरा समूह ऐसा है, जो ऊँचे घोड़े पर सवार है। “माँ मुझे अभी भी सफाई करना है, यह समस्या है”।  इस बारे में आप कर क्या रहे हैं?

आइए हम खुद का सामना करें! क्या हम पिछड़ने वाले हैं? तुम्हें पता है, एक जहाज पर चढ़ने के लिए आपको कम से कम गैंगवे (जमीन और जहाज़ के बीच का पुल )पर जाना होगा। यदि आप इतनी धीमी गति से चलते हैं, तो गैंगवे उठा लिया जाएगा और जहाज आप को छोड़ कर सफ़र पर बाहर निकल जाएगा, मैं आपको बता रही हूं। तो किसी को समझना होगा और हमें सहज के लिए कुछ काम करना होगा। सहज योग पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। नौकरी पहली प्राथमिकता है, पैसा कमाना पहली प्राथमिकता है, या पत्नी या बच्चे, ये सब बहुत अधिक महत्वपूर्ण हैं। फिर इनके साथ आगे बढ़ें। शादियां, दूसरी बात है शादी।” मां मैं कब विवाहित होने जा रहा हूं।” उसके लिए भी लोग मेरा सिर खायेंगे। “मेरी शादी कब होने वाली है, मैं क्या करूँ, किससे शादी करूँ, ऐसा कर लूँ” इन बातें से आपकी प्रगति नहीं होने वाली हैं। आपका चित्त कहाँ होना चाहिए? जो शादीशुदा हैं दुःख दायक है, जिनकी शादी नहीं होती है वे भी दुःख दायक है। (माँ हंसती हैं)। जिनकी शादी हो चुकी होती है उन्हें परेशानी होती है और जिनकी शादी नहीं होती है उन्हें भी। तो विवाह सहज योग की समस्या का समाधान नहीं है। अब वे कहेंगे “लेकिन हम…” वहां भी बहाने है। “हमें बच्चे पैदा करने चाहिए”। ठीक है। कौन से बच्चे? “बच्चे,जो साक्षात्कारी आत्मा होंगे”। क्या आपको लगता है कि साक्षात्कारी आत्माएं आलसी गांठों से पैदा होंगी? वे उन्हें सुबह से शाम तक रखेंगे, अगर वे पैदा हुए हैं, तो मैं आपको बताती हूं!

तो किसी भी व्यक्ति को यह समझना होगा कि या तो आप आलसी हैं और जब आप सक्रिय होते हैं तो आप जेम्स बॉन्ड होते हैं। बीच में कुछ भी नहीं। और इसी तरह लोग जिम्मेदारी लेने से बचते रहे हैं। बहाने। सारा मस्तिष्क तंत्र ऐसा है कि कैसे बहाना दिया जाए जोकि हमारी प्रगति के विरुद्ध है। यह विनाशकारी है, यह तुम्हें नष्ट कर देगा। यह विनाशकारी है। और इस तमस को इच्छाशक्ति से जीतना है। लेकिन अगर मैं इच्छाशक्ति कहूं तो अचानक मुझे दस जेम्स बॉन्ड मेरे सामने खड़े दिखाई देते हैं – “अब क्या?” (हँसी) बेचारी, तुम्हारी माँ फट गई है। हे भगवान्! अब क्या करें?

इसलिए मुझे नहीं पता कि किस रास्ते पर जाना है। अब अगर आप किसी से कहते हैं कि आपको कुछ पकड़ हैं, तो आप जाकर अपना ख्याल रखें, यहां से चले जाएं। तब वह व्यक्ति सोचने लगता है कि “मैं वह व्यक्ति हूं जिसे बहिष्कृत होना है” और सभी प्रकार के दुखी आत्माओं में लिप्त हो जाता है। ऐसा कहने का तात्पर्य है कि तुम जाओ और अपने आप को ठीक करो, और सफाई करो। इसके बजाय, ऐसा व्यक्ति सबसे दुखी व्यक्ति होता है और थोड़ा सा भी बहाना मिले तो, आप देखियेगा, आप पाते हैं कि वह व्यक्ति सोचता है कि वह नरक में है। अब क्या करें ऐसे लोगों का। आप ही बताइए इन लोगों के लिए क्या उपाय है।

अब मैं पहले से ही साठ साल की हूँ, आप क्या चाहते हैं मुझे कब तक जीना चाहिये,  मुझे नहीं पता। लेकिन अब जो भी हो उठना है। न आक्रामक होना और न ही सोना। और इस नींद के धंधे को जाना ही होगा। अब आश्रम में लोग यहीं रहते हैं। कहीं भी। हमारे आश्रम में कोई अनुशासन नहीं है। आप जाकर उनसे पूछें कि उनके [अमेरिका में] किस तरह के आश्रम हैं। [पर] ३.३० किसी को उठना होता है और फिर वे क्या करते हैं? आपको न्यूयॉर्क में सुबह साढ़े तीन बजे सारे परिसर की सफाई करनी है, जो कि सबसे ठंडी जगह है। आप देखिए एक महिला ने मुझसे कहा, वह बहुत अमीर महिला है। उसने मुझसे कहा “३.३० मुझे उठकर पूरे परिसर की सफाई करनी थी और सारी चीजें लगानी थी और वह गुरु ने बेच दिया था और सारा पैसा गुरु ने ही ले लिया था।” तो सारा काम यह था कि गुरु को कैसे समृद्ध बनाया जाए और उन्हें सुबह जल्दी उठकर एक के बाद एक काम करते रहना था। दो लोग थे जो रजनीश से एक ही प्रकार की ड्रेस लेकर आए थे, आप देखिए। तो इन लोगों ने उनसे कहा कि आप इस पोशाख में मां के कार्यक्रम में नहीं आ सकते. तो उन्होंने कहा कि हमारे पास केवल दो जोड़े इसी पोशाख के हैं और एक माला हमारे पास बची है। बाकी सब गुरु के पास उसकी रोल्स रायस के लिए गया है. तो हमारे पास कुछ भी नहीं बचा है। इतना ही हमारे पास बचा है। तो मैंने कहा “ठीक है बाबा, हम आपको अभी पैसे देंगे, लेकिन यह ड्रेस बदल लो”। यही स्थिति है। इस प्रकार गुरु उनसे ऐंठते हैं।

लेकिन हम कोशिश नहीं करते। हम कहाँ तक पहुंचे हैं? अब आपको सोचना चाहिए, कोई ऐसा व्यक्ति जो बाएं तरफा है, उसे सोचना चाहिए कि हम अब कहाँ पहुँच पाए हैं, क्योंकि हमारे बाएं पक्ष का संबंध है। जो लोग राइट साइडेड हैं उन्हें सोचना चाहिए कि हम कितनी दूर चले गए हैं, मध्य में कहाँ तक आये हैं और फिर उत्थान के बारे में सोचें। सहज योग सरल है, आसान बना दिया गया है, ठीक है। मान लीजिए मैंने आपके लिए पकाया है, ठीक है, आपको इसे खाना है, इसे पचाना है और इसे किसी चीज़ के लिए इस्तेमाल करना है। यह खाना दूसरों की भलाई के लिए किया जाता है। लेकिन लोग अपने परिवार, घर, बच्चों को यह, वह, इन सभी सुख-सुविधाओं के बारे में सोचते हैं। तो किसी को वास्तव में, समर्पित रूप से, पूरी तरह से समझना चाहिए कि हमारा मूल्य इन लोगों में से किसी एक से भी अधिक है।

मैं कहूंगी कि मेरे पति इस तरह काम कर रहे हैं, मैं इसे देख रही हूं और मैं हैरान हूं। 4.30 वह उठ जाते है और कल हमने 12 बजे तक रात का खाना खाया। वह इतने सतर्क थे और उनसे इतने सतर्क तरीके से बात कर रहे थे, इन चीनियों से। और वह हर दिन ऐसा कर रहे है। वह इसे कैसे करते है? तुम जानते हो कि जब मैं सोती हूं तब भी मैं काम करती हूं। जब मैं जाग रही होती हूं तो काम कर रही होती हूं। हर समय मैं काम कर रही हूं। ठीक है! आप कह सकते हैं कि माँ आप आदि शक्ति हैं। लेकिन यह मेरे पति तो आप लोगों की तरह साक्षात्कारी आत्मा भी नहीं हैं। ऐसे बहुत सारे हैं। और वह किसी भी तरह से आक्रामक नहीं है। तो एक बार जब ऐसे लोग काम करना शुरू कर देते हैं, तो वे सोचने लगते हैं कि सहज योग से पैसा कैसे कमाया जाए, जरा सोचिए! मोमबत्तियां बेचना, इसे बेचना। इसके दूसरे पक्ष क्या हैं? मेरा मतलब है कि आप सहज योग नहीं बेच सकते। यही एक बात मैं आपको बताना चाहती हूं और आज घोषणा करना चाहती हूं कि कोई भी ऐसा करने की कोशिश करता है, मैं उस व्यक्ति को नष्ट कर दूंगी और उसे पक्का कंगाल बना दूंगी। सहज योग को बेचने की कोशिश करने पर सबसे पहले आप बीमार पड़ेंगे। ऐसी बातें किसी को नहीं करनी हैं। आपको उस पक्ष को बेहद स्पष्ट रखना होगा, आप कुछ भी नहीं बेच सकते। साथ ही मैं जो भी बात कर रही हूं उसे आप बाजार में नहीं बेच सकते। बहुत से लोगों को इसे बेचने की आदत होती है।

अब कोई राम के बारे में एक कविता लिख ​​रहा है, उस कविता को प्रकाशित करने की क्या जरूरत है? इसका सहज योग से क्या लेना-देना है? मैं यहाँ रह रही हूँ। आप राम के बारे में लिख रहे हैं। क्या ज़रुरत है? और उसे कौन सुनना चाहता है? जरा इस बारे में विचार करें। 

ग्रेगोइरे ने कहा, “माँ हम आपके व्याख्यान प्रकाशित करना चाहते हैं और वे राम के बारे में किसी की कविता क्यों प्रकाशित कर रहे हैं?”

 क्या यही वह काम है जो हम करने जा रहे हैं? उच्च स्तर पर ऐसे महान व्यक्ति बनें, जिन्हें आप देखते हैं, जिन्होंने कुछ हासिल किया है। संगीत सीखें। मैंने तुमसे कहा था कि तुम संगीत सीखो, नृत्य सीखो, कुछ सीखो जिससे तुम सहज योग प्रकट कर सको। अन्यथा, मुझे नहीं पता कि पश्चिम में आपका और सहज योग का क्या होने वाला है क्योंकि यहां कोई शिक्षा या अनुशासन नहीं है। हम स्वतंत्र लोग हैं, हमें जो अच्छा लगे वो करो। हमें खुद को अनुशासित करना होगा। और अब जैसा कि आप नवजात हैं, आप ऐसा  कर सकते हैं। आपको अनुशासित होना होगा, “मैंने इन चीजों को करने की हिम्मत कैसे की, मैं एक सहज योगी हूं”।

 सबसे पहले हमें खुद को काम पर लगाना होगा। यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात है और मुझे लगता है कि इसकी बहुत कमी है। और आप जानते हैं कि सुस्ती या मनमानी की यह बीमारी कितनी संक्रामक होती है। मिस्टर पैट्रिक पांच मिनट के लिए जेसन से मिले, उन्होंने उसे क्लिक किया, मिस्टर जेसन ने एक और से मुलाकात की, उन्होंने उसे क्लिक किया और अगर मुझे कोई लिंक मिल जाए, तो आप जानते हैं, यह वहां है। जेन जैसी एक महिला, वह किसी से मिलती है, वह भूतिया बन जाती है। वह भूतिश हो जाती है, फिर कोई और… आप इसे वापस लिंक कर सकते हैं। आपको आश्चर्य होगा कि ये चीजें कैसे काम करती हैं। उनके पास एक श्रृंखला प्रतिक्रिया  chain reaction है।

इसलिए व्यक्ति को सावधान रहना होगा। लेकिन उस व्यक्ति को क्यों न देखें जो इसके बारे में कुछ कर रहा है, जो ऊंचा उठ रहा है, जो गतिशील है। मुझे पता है कि वहां कौन हैं। ये वे लोग हैं जिन के बारे में मैंने अभी कहा है कि ये आपके नेता हैं, लेकिन उनमें से कुछ अभी भी ऐसे ही चलते हैं। आपको अपनी शक्तियों को धारण करना चाहिए; यही वह बिंदु है जो मैं कह रही हूं। हमें अपनी शक्तियों को धारण करना है, हमें विवेकवान व्यक्ति बनना है, विकसित, परिपक्व होना है; हम खुद के साथ बच्चों की तरह खिलवाड़ नहीं कर सकते। और यह बात कई बार कही गई है, लेकिन अब जो कुछ मैंने कहा है, उसे तुम अपने व्यवहार में ढालो। अपने आप से लड़ो। बहाने मत दो। बहाने और बहाने हैं जो आप मुझे बताते हैं मैंने कहा “ठीक है”। लेकिन, आप देखिए, मेरा एक और स्वभाव है जिसे आपने महसूस नहीं किया है – मैं पीछे हट सकती हूं! मेरी रुचि एक बिंदु तक है। मैं क्या कर सकती हूं? कुछ समय बाद, किसी गोंद की तरह यह गिर जाता है, आप जानते हैं। एक गोंद आपको एक बिंदु पर चिपका सकता है। अगर आप अच्छी तरह से चिपक गए हैं तो ठीक है, अन्यथा यह गिर जाएगा। ताकि मेरे मन में पीछे हटने का विचार  शुरू न हो जाए। तो कृपया सतर्क रहें और इस बात की चिंता न करें कि आपको और क्या समस्याएं हैं।

साथ ही मैंने देखा है कि इस तरह की ताकतें काम कर रही हैं। अब, कोई व्यक्ति कुछ करना चाहता है, चूँकि वह करना चाहता है इसलिए, आपको उसे रद्द नहीं करना चाहिए। सिद्धांत रूप में यदि यह अच्छा है तो आपको कहना चाहिए “आगे बढ़ो, हम तुम्हारे साथ हैं”। और इसलिए, मैं देखती हूं, लोग काम नहीं करते हैं। जैसे कोई आश्रम प्राप्त करना – कोई भी स्थान काम करेगा यदि सभी का दृष्टिकोण सकारात्मक हो, यदि कोई उसके लिए प्रयास कर रहा हो। हर सामूहिक बात। लेकिन हर कोई कहेगा: “लेकिन, आप देखिए, यदि आप आश्रम लेते हैं तो इसका भुगतान कौन करेगा? हम सिर्फ पांच लोग हैं।” लेकिन माँ तो तुम्हारी देखभाल करने के लिए है। फिर एक और बहाना होगा कि कुछ आ रहा है: “आप देखते हैं, यदि आप आश्रम लेते हैं तो ऐसा हो सकता है और …” लेकिन आप पहले इसे लें और खुद देखें। जैसे आप गाड़ी चलाना शुरू करते हैं और कहते हैं: “ठीक है। हम इस तरफ जा रहे हैं, लेकिन जाम लग सकता है।” लेकिन देखते हैं कि ऐसा होता है या नहीं। पहले से आप कैसे कह रहे हैं? मेरा मतलब है कि स्थिति का सामना करने से पहले ही मुर्गे की तरह तुरंत दस सुझाव आएंगे। सोया व्यक्ति अचानक जाग कर शुरू हो जाएगा, अपनी बुद्धिमान सलाह देते हुए, आप देखिए,  जो लोग कुछ करने की कोशिश कर रहे हैं, उन लोगों के पैर काटते हुए। यह एक बहुत ही सामान्य अनुभव है जो मैंने खुद के साथ भी किया है। अब हम कहीं जा रहे हैं, देखिए, कार में; मेरा मतलब है कि सारे समय अमेरिका में मैं लोगों से कहती रही हूं कि, “क्या अब आप कृपया चुप रहेंगे। क्या आप कृपया अब समझेंगे, चलिए करते हैं।”

उन्होंने इस कार्यक्रम के समाप्त होने के बाद एक कार्यक्रम करने का फैसला किया। मुझे लगता है, यह वैंकूवर में था। और मैंने कहा, ठीक है, तो उन्हें भी पूजा के लिए बुलाओ, क्योंकि हमारे पास उनके विकसित होने वगैरह तक प्रतीक्षा करने का समय नहीं है; उन्हें पूजा के लिए बुलाओ। और मैंने कहा कि आओ और दोपहर का भोजन भी करो। उन्हें डर था! कि,

 “माँ हमने कोई व्यवस्था नहीं की है”। 

मैंने कहा, “इसमें क्या समस्या है, हम छोले बनाएंगे”। 

हमारे पास छोले नहीं हैं, इसे कैसे भिगोएँ?

 मैंने कहा “चिंता मत करो।” मैंने उनसे कहा, “चलो यहां किसी भारतीय रेस्तरां में चलते हैं और हम छोले लाएंगे।

 उन्होंने कहा, “यह संभव नहीं है माँ, कौन करेगा…?”।

 मैंने कहा “लेकिन चलो चलते हैं, मैं कह रही हूं कि चलो हम चल कर देखते हैं”। इसको लेकर करीब आधे घंटे तक चर्चा होती रही।

 “ओह! माँ कह रही है पर कैसे करे..?”

 मैंने कहा, “क्या आप कृपया मुझे किसी भारतीय रेस्तरां में कहीं भी ले जाएंगे?” 

“ओह, हमें लगभग 3 मील ड्राइव करना है।” 

मैंने कहा, “कोई बात नहीं”।

 “यह पहले से ही 11.30 है, जब तक हम वहां जाते हैं, तब तक 12 बज चुके होंगे, कोई नहीं मिलेगा”। 

मैंने कहा, “मैं कह रही हूँ कि तुम मुझे किसी भारतीय रेस्तरां में ले चलो, तुम क्यों नहीं ले चलते?” और बहस चलती रही। मैंने कहा, “अब, क्या तुम मुझे ले जाओगे…?” मेरा मन पिस्तौल हाथ में लेने का कर रहा था। और अब कहूँ , “हाथ ऊपर करो। चलो…” (हँसी)

और जब मैंने बहुत जोर दिया तो बहुत अनिच्छा से उन्होंने मुझे गाड़ी चला कर वहां पहुँचा दिया। वहाँ एक रेस्तरां था, मैंने कहा, “अब अंदर जाओ और इस आदमी से कहो कि अगर तुम्हारे पास चना है तो हम पाँच किलो छोले चाहते हैं।” 

तो उसने कहा “मेरे पास है।”

 उन्होंने कहा, “बेहतर है कि यह हमें दीजिये”।

 तो उसने हमें बेच दिया। और उसने कहा, “मुझे नहीं पता कि मैं इसे आपको क्यों बेच रहा हूं, मैं ऐसा कभी नहीं करता, लेकिन मैं इसे आपको बेच रहा हूं”। और उसने हमें दिया। और फिर उसने कहा “यहाँ एक दुकान भी है” और उसने उस व्यक्ति को दुकान खोलने के लिए कहा और उसने बाकी सब सामान भी हमें दे दिया और अगले दिन हमारे पास एक अच्छा छोले थे। मैंने वे छोले उनके लिए पकाए है। तो हमने वे खाये। लेकिन शुरू करने से पहले, मैं आपको बताती हूं, उन्होंने मेरा सिर खा लिया। टोरंटो में भी ऐसा ही, टोरंटो बहुत बुरा था। बहुत बुरा। हर जगह मैंने पाया यही बात है। आप कुछ करने की कोशिश करें। अब तुम्हें यह आश्रम लेना है। दस बुद्धिमान लोग तुरंत बैठे होंगे “लेकिन इसके लिए हम यह कैसे कर सकते हैं?” तब आप को यह प्राप्त नहीं होता है।

ये सभी स्पष्टीकरण और इन सभी चीजों की जरूरत नहीं हैं। यदि आपके पास करने के लिए कोई सकारात्मक चीजें हैं, तो आप उसे करें। बात यह है कि बातें ज्यादा और काम कम,  ही बात है। उस अकर्मण्यता के स्थान पर कर्म करना है ना कि वह केवल विचार, विचार, विचार, विचार, विचार और हर 

 किसी की बात हो। बल्कि जिस प्रणाली में एक व्यक्ति बात करता है और बाकी सब सुनते हैं वह हमेशा काम करता है, जैसे जापान में, भारत में अगर कोई बुजुर्ग बात कर रहा है, तो कोई भी बात नहीं करता है। ठीक है! अगर माँ ऐसा कहती है, “ठीक है। आगे बढ़ो”।

मेरा मतलब गगनगढ़  महाराज ने इन लोगों से मोदी और सभी से पूछा कि “क्या आप समुद्र में कूदेंगे यदि माँ ऐसा कहती हैं? क्या तुम उसके लिए मरने को तैयार हो?” मेरा मतलब है कि यह पहला सवाल है जो एक गुरु पूछता है, आप देखिए? यहाँ, मरना? केवल तीन मील तक गाड़ी चलाकर जाने के लिए आपको उनसे अपनी गर्दन तोड़नी पड़ती है होगी। मरना बहुत बड़ी बात है! मैं इसके बारे में बात भी नहीं कर सकती। लेकिन हर बात के लिए भी ऐसा ही हो रहा है और इसीलिए सहज योग कारगर नहीं होता है। और वे लोग जो कुछ करने की कोशिश करते हैं, या तो ईर्ष्या होती है या उसे नीचे खींचा जाना होता है या बुद्धिमान परामर्श देती है। “यदि आप ऐसा करते हैं तो इसके लिए कौन भुगतान करेगा?” माँ बैठी हैं, देख-भाल करेंगी। “आप आश्रम को किराए पर न लें, यह हमारे लिए बहुत अधिक होगा”। सब कुछ, अगर यह मुफ़्त है तो बहुत अच्छा है। 

अब ये दो बिंदु हैं जो मैं कह रही हूं तीसरा बिंदु भी मुझे आपको बताना है और फिर मैं आपको खुशखबरी सुनाऊंगी। (हँसी)

अब तीसरा बिंदु जो बहुत महत्वपूर्ण है व्यक्ति को  तीसरे बिंदु के बारे में समझना होगा। यह बहुत छोटी बात है लेकिन हर किसी के जीवन में बड़े पैमाने पर व्यक्त होती है। अब, आप लोग भारतीयों की तुलना में बहुत अधिक संपन्न हैं, लेकिन  पैसे के बारे में सहजयोगियों के साथ मुझे जो सिरदर्द है, वह भारत में कभी भी मेरे पास नहीं था, यह बात मुझे आपको बहुत स्पष्ट रूप से बताना चाहिए। पहले हमारे पास आश्रम था, आप जानते हैं डॉलिस हिल में जिसके लिए मुझे नहीं पता कि मुझे कितने पैसे,  बेचना पड़ा। मुझे लगता है कि हजार पांच सौ या कुछ और। हमारे पास दूसरा आश्रम था, हमें फिर से वहीं बेचना पड़ा। अब हमारा तीसरा आश्रम था मुझे लगता है कि यहाँ भी मुझे करना ही था। कारण यह है कि कोई उचित खाता नहीं है। बैंक में कितना पैसा है यह कोई नहीं जानता। और हर कोई सहज योग की कीमत पर यदि संभव हो तो बचाने की कोशिश कर रहा है। मेरा मतलब है कि बात करने के लिए यह इतनी घटिया बात है लेकिन ऐसा है।

हर कोई अपने निजी आराम को देखता है लेकिन सहज योग के पूरे कामकाज को नहीं देखता। जैसे कई लोगों ने किराया भी नहीं दिया है। मेरा मतलब है कि क्या हम अब मुकदमेबाजी करने जा रहे हैं, मेरा मतलब है, ये लोग जिन्होंने किराया भी नहीं दिया है? मेरा मतलब है कि जरा सोचिए, आपने किराया भी नहीं दिया है। जैसे, डॉलिस हिल में उन्होंने कभी बिजली का भुगतान नहीं किया, फिर भुगतान कौन करेगा? माँ भुगतान करेगी, वह हमारे लिए सब कुछ करती है। तुम देखो माँ हमारी देखभाल कर रही है, है ना? तो उसे बिजली के लिए भुगतान करने दें। अब यहां यह है कि लोगों ने किराया नहीं दिया है। लेकिन धर्म के लिए,  इस महान कार्य के लिए, आपको दान देना होगा। आपके किराए के भुगतान का कोई सवाल ही नहीं है, आपको दान करना होगा । क्या तुम समझ रहे हो? यह लक्ष्मी के सिद्धांतों में से एक है। ये लोग यह नहीं समझ पाए हैं। इस काम के लिए आपको दान देना होगा।

आप बस यह सोचते हैं कि सहज योग आपके लाभ के लिए है, ठीक है, आध्यात्मिक लाभ के लिए। लेकिन आप सहज योग से वैसा लाभ नहीं उठाते। भारत में मुझे पैसे की यह समस्या कभी नहीं हुई, मैं आपको बता सकती हूं, इस तरह, कभी नहीं। इसके विपरीत जब भी कोई समस्या आती थी तो वे मेरे साथ खड़े रहते थे। ऑस्ट्रेलिया, मुझे एक ही बात कहनी चाहिए, ऑस्ट्रेलिया ने मुझे कभी भी पैसे की कोई समस्या नहीं दी है कि मुझे अपनी जेब से भुगतान करना पड़े। यहां लोगों ने किराया नहीं दिया है। अब जिन्होंने किराया नहीं दिया है, चलो… हाथ उठाओ। ईमानदारी से। अब तक। आश्रम में। सभी ने भुगतान किया है?

श्री माताजी : कितना?

सहज योगी: सात पाउंड

श्री माताजी : बस इतना ही, इतना ही नहीं; लेकिन यह आठ सौ पाउंड है।

सहज योग के लिए भुगतान करना होगा। भव्यता से। आप यहां रह रहे हैं, इसके लिए भुगतान करें। तुम देखो, मैंने लोगों को देखा है, बस मुँह फेर लेते हैं। आप यहीं रह रहे हैं। मुफ्त भोजन बहुत अच्छा विचार है, अगर आपको मुफ्त आवास भी मिल जाए, तो लंदन बहुत अच्छा है। आप प्रोग्राम के लिए आए हैं, तो क्या? तुम यहाँ आए हो, अब खाना है, सब कुछ है, उसके लिए भुगतान करो। आपको भुगतान करना होगा। आप नहीं समझते [कि] आज दिवाली का दिन है जहां लोगों को ईश्वरीय काम के लिए भुगतान करना पड़ता है। क्योंकि लक्ष्मी तत्व ऐसा ही है। आपको गुरु को भुगतान करने की आवश्यकता नहीं है। शक्र है! आपके यहाँ गुरु “मुफ्त” है। इस बार मैंने केवल 5p (£ 0.05) लिया, है ना? लेकिन आपको न केवल अपने लिए बल्कि अपने काम के लिए भुगतान करना होगा। आप अपने लिए भी भुगतान नहीं करते हैं, आप यहां मुफ्त भोजन करते हैं। सोचें कि लोगों ने भोजन के लिए भी भुगतान नहीं किया है। कई बार ऐसा हुआ। वे हॉल के लिए भी भुगतान नहीं करते हैं, एक पाउंड क्या आप कल्पना कर सकते हैं? आप उस एक पाउंड को बचाने की कोशिश करते हैं और आप हजारों पाउंड खो देंगे, मैं आपको बताती हूं। ऐसा मत करो। यह ईश्वर का कार्य है, इसका लाभ न उठाएं। और यह बहुत दूर था, बहुत दूर तक मैंने देखा है।

हमारे पास एक भारतीय हुआ करता था जो हमारी पूजा में आता था और वह पूजा के लिए चीजें खरीदता था। इस साल आकर वह आपको बताएगा। और उस पूजा सामग्री के लिए जो उसने खरीदा था, उस पैसे का भुगतान करना असंभव था। उसने कहा इतना मेरा पुण्य। सीपी भी इसे अच्छी तरह समझते हैं। वह कहते हैं कि यही एकमात्र तरीका है जिससे मैं कुछ पुण्य कर रहा हूं। आखिर मैं और क्या पुण्य कर पा रहा हूं। जबकि हम सहज योग से पैसे बचाने की कोशिश करते हैं – यह एक बहुत ही खतरनाक चीज है। अब, अब तक सब कुछ माफ कर दिया गया है।

मैं अपने आप को आदि शक्ति क्यों नहीं घोषित करती क्योंकि एक बार जब मैं अपने आप को आदि शक्ति घोषित कर देती हूं, तो कोई भी पाप क्षमा नहीं किया जाएगा, यह मेरी घोषणा है। बहुत गंभीर बात है। वे सभी सतर्क रहेंगे, पहले ही कहा जा चुका है। इसलिए मैं यह नहीं कहती कि ‘मैं आदि शक्ति हूं, बेहतर है कि निचले स्तर पर रहूँ, ताकि कम से कम तुम्हे एक मौका तो मिले। हर तरफ पैसे का संकट है। यह आप सभी के साथ इतना अच्छा, इतना बुद्धिमान, हर जगह बुद्धिमानी से सलाह देने वाला कैसे हो सकता है? और इसमें से अधिकांश कंजूसी है। तुम जानते हो, संत को कंजूस देखना कितना कष्टदायक है, मैं सौ बार कह चुकी हूं कि संत कंजूस नहीं हो सकते। संत का एक लक्षण यह है कि वह कंजूस नहीं हो सकता। पैसे के बारे में  इतनी सोच। “यदि आप इस तरह से जा सकते हैं तो आप एक पाउंड बचा सकते हैं”। पैसे की मानसिकता इतनी है। मैंने इसे हर दिन देखा है, आप देखते हैं कि लोग मेरे साथ काम करते थे। “हम वह पेंट नहीं खरीद रहे हैं क्योंकि अगर हम पूरी बोतल का उपयोग करते हैं तो हम उसे वापस नहीं कर सकते”। मेरा मतलब उस हद तक परवाह करने की क्या जरूरत थी? मेरा मतलब है कि मन ही ऐसा है।

तो उस तरह की चीज़ की बचत न करें। श्रम – बचाने वाले डिवाइस, पैसे बचाने वाले उपकरण, आप देखिए, बहुत अच्छी तरह से निर्मित, बहुत चतुर लोग हैं। लेकिन वे सब तुम्हारे खिलाफ हैं। तुम इतने चतुर हो कि तुम स्वयं को धोखा दे रहे हो। अपने आप को धोखा मत दो। सावधान रहे। आप विशेष लोग हैं, आपको खुद के साथ विशेष परिणाम प्राप्त करने होंगे; आप बहुत कुछ कर सकते हैं लेकिन ये चीजें हैं जिनका आपको ध्यान रखना चाहिए।

हिसाब रखने वाले, पैसे भेजने वाले, पैसे देने वाले हर किसी को भी सावधान रहने की जरूरत है। और जो लोग सहज योग का लाभ उठा रहे हैं उन्हें भी सावधान होना चाहिए। ऐसी कई किताबें हैं जो मैंने लोगों को दी हैं, मुझे नहीं पता कि वे कब बिकीं। गेविन को छोड़कर मुझे नहीं लगता कि किसी ने मुझे उन किताबों का सही हिसाब दिया है जो उन्हें दी गई थीं। किसी ने मुझसे दस, बीस मांगी, मैंने बस भरोसा किया, मैं लोगों पर भरोसा करती हूँ। या अगर वे खरीद सकते हैं, आप देखिए, एक निर्मला योग। “ओह, हम माँ को साझा कर सकते हैं लगभग सौ लोग एक ही किताब ‘निर्मला योग’ उपयोग कर सकते हैं, यह ठीक है”। हाँ, यह बहुत सामान्य है, कल्पना कीजिए कि निर्मला योग की कीमत आपको प्रति वर्ष तीन पाउंड है, जिसका उपयोग सौ लोग करते हैं, किफायती। लेकिन वह बाइबिल है। किसी को समझ नहीं है  कि,  हम इकट्ठा क्या चीज़ करने जा रहे हैं।

वे सिक्के एकत्र करेंगे, मुझे नहीं पता वे क्या इकट्ठा करते हैं, टिकटें, मुझे नहीं पता कि वे यहां और क्या एकत्र कर रहे हैं, काफी पागल लोग। लेकिन क्यों न निर्मला योग जमा रखें? मेरा मतलब है, मैं इसे पढ़ती हूं, खुद मैं अपने लेख पढ़ती हूं, हर बार मुझे एक नया संदेश मिलता है। क्यों लोगों में एक ही ‘निर्मला योग’  गोल-गोल घूम रही है। एक ‘निर्मला योग’ मैंने एक बार देखा था, यहाँ [?], सब फटे हुए, इस चीज़ को फाड़ दिया और मैं उन सभी हाथों को देख सकती था जो इस पर लगे थे। क्योंकि यदि आप प्रति वर्ष तीन पाउंड बचा सकते हैं तो क्यों न करें, और हमारे पास निर्मला योग भी होगा। टेप के बारे में भी वही बात, माँ के टेप, ठीक है! “यदि आपके पास एक है, तो क्या आप मुझे उधार दे सकते हैं?” जब तक यह समाप्त होता है, टेप पर कुछ भी नहीं बचा है। क्या यही रास्ता है परमात्मा के नज़दीक आने का? उदार के लिए उदार। ऐसे लोगों के लिए कोई जगह नहीं है। परमेश्वर कंजूस लोगों को उनके राज्य में प्रवेश करना पसंद नहीं करता है। और वह भी तब जब आपके पास पैसा हो। मैं ऐसा तब मंज़ूर कर लुंगी अगर आप गरीब लोग हैं जो भूखे मर रहे हैं।

जब मैंने बंबई में अपना काम शुरू किया तो वे सब कहने लगे, “माँ, आप अकेले कैसे करेंगी?” मैंने कहा “मैं संभाल लूंगी आप चिंता न करें।” और उन्होंने कहा “हम आपको पैसे देना चाहते हैं”। मैंने कहा “मैं नहीं चाहती। अभी कोई ट्रस्ट नहीं बना है, कुछ नहीं, चलो एक ट्रस्ट बनाते हैं”। जब ट्रस्ट शुरू हुआ तो आपको भी पता होना चाहिए कि मैंने खुद ट्रस्ट के लिए बहुत पैसा दिया है। हमने ट्रस्ट शुरू किया, ट्रस्ट में हमने पैसा देना शुरू किया। फिर, जब हमने ठीक से स्थापित किया था तो मैंने कहा था कि अब आप भुगतान दे सकते हैं। उस साल जब मैं वहां बैठी थी तो मैंने कहा था कि अब मुझे पैसा चाहिए, तुम इतने सहजयोगी नहीं हो, उसी पल पंद्रह हजार रुपये,  मैं वहां बैठी थी। “तुमने क्या किया?” “माँ, हमने कुछ नहीं किया।” “क्या तुमने कोई आभूषण बेचा?” “कुछ नहीं।” “फिर कैसे?” “हमने एकत्र किया था, क्योंकि आपने कहा था कि आप कुछ समय बाद मांगेंगी। हमें मिल गया है।”

नकद, वे लाए। पंद्रह हजार। एक बैठक में,  मैं वैसे ही बात कर रही थी, पंद्रह हजार कहा। और उन्होंने इसे सुनिश्चित किया कि, भुगतान किया। यहाँ यह सिर्फ बैठक में है, वे कहेंगे, ठीक है, हम कल पंद्रह हजार का भुगतान करेंगे, परसों। एक टैक्स कलेक्टर की तरह पैसे मांगने के लिए एक व्यक्ति को आपके पीछे जाना पड़ता है। यह बेतुका है। “माँ मेरे पास एक बहुत अच्छा घर है, मेरी एक बहुत अच्छी पत्नी है, आओ और मेरे घर आओ, मुझे बहुत खुशी होगी”। आपने बड़े घर के लिए क्या किया है? अपना घर मिला, सब आशीर्वाद, बिग हाउस के लिए आपने क्या किया?

यह समझना चाहिए कि ये प्रतीकात्मक चीजें हैं जो आपके स्वभाव, आपके स्वभाव को व्यक्त करती हैं। जब आप ड्रग्स ले रहे होते हैं तो आप ड्रग्स के लिए इतना पैसा खर्च कर रहे होते हैं क्योंकि आप इसके आदी होते हैं। सहज योग के आदी क्यों न हों? आप में से कितने लोग सहज योग के आदी हैं? अपने हाथ बढ़ाएं। अपने हाथ बढ़ाएं। कम से कम आज से मुझसे वादा करो कि तुम सब सहज योग के आदी हो जाओगे। आप सब आइए, हाथ बढ़ाइए। तो यह अच्छी खबर है [हँसी]।

तो, नया साल शुरू हो गया है और यह एक खूबसूरत बात है, इस साल कुछ खास होना चाहिए। सबसे पहले मैं उस स्कूल के बारे में सोच रही थी जिसे आप स्थापित करने जा रहे हैं और जो आपकी और आपके बच्चों की बहुत मदद करने वाला है, शुरुआत में। और फिर हमारे पास अलग-अलग आश्रम और अलग-अलग स्थान होंगे।

एक और अच्छी खबर यह है कि हमें अब नीरा नदी के पास की जमीन मिल गई है जहां आप उस नदी में कूद गए थे और उस समय की तस्वीर जब आप कूदे थे, आकाश में उसी तरह से है, आप पाते हैं, रोशनी सभी तरफ जा रही है किरणों के साथ, यह अद्भुत है – जैसा कि आप पवित्र आत्मा को देखते हैं, बिल्कुल वैसा ही। यह एक तस्वीर है, [मराठी में बोलती है]: “अरे का फोटो के लिए?” (क्या आपके पास वह फोटो है?) मुझे लगता है कि यह धूमल के पास  यह एक तत्काल तस्वीर थी। तो वह भूमि हमें मिली है, जहां आप सभी के लिए अपनी झोपड़ियां बना सकते हैं, अच्छी तरह से तैयार की गई हैं। यह पहले से ही व्यवस्थित किया जा चुका है। यह एक खूबसूरत जगह है, हम सभी के लिए वह एक अच्छा समय होगा। और हमारा बुढ़ापा अब पूरी तरह से सुरक्षित हो रहा है, इसलिए बुढ़ापे की चिंता मत करो, अपने बुढ़ापे के लिए बचत करने की कोशिश मत करो।

अब हम भारत जा रहे हैं जिसके लिए हमारे पास दो कार्यक्रम हैं और कृपया मेरे लिए इसे आसान बनाने का प्रयास करें। इसे मुश्किल मत बनाओ। और अगर आप मेरे लिए इसे आसान बनाते हैं तो यह मेरे लिए बेहतर है क्योंकि अगर मुझे हर चीज की चिंता करनी पड़े तो भी यह मुश्किल है। जैसे, हम आपको एक ऐसे विमान में ले जाने की सोच रहे हैं जो आपको समय पर वहां पहुंचा देगा। अब आप कल्पना कर सकते हैं कि आप मनचाहे समय पर आयें, आप मनचाहे समय पर वापस जाना चाहते हैं। कुछ समझ होनी चाहिए कि आपको किसी भी जगह से हवाई अड्डे तक ले जाने में कभी-कभी लगभग हजार रुपये लगते हैं और इस अतिरिक्त का भुगतान कौन करने वाला है? लेकिन आप हवाई जहाज तक पहुंचना चाहते हैं। तुम्हे माँ से कहना होगा, “मुझे जाना है, मुझे विमान पकड़ना है, मुझे क्या करना होगा?” अब, वह ठीक तरीका नहीं है। इस बार आप सभी एक विमान से जा रहे हैं और एक विमान से वापस आ रहे हैं। हमारे पास हर व्यक्ति के लिए बसें नहीं हो सकती हैं और आप जानते हैं कि भारत में टैक्सियाँ कितनी महंगी हैं। हम इसकी व्यवस्था नहीं कर सकते। हम आप में से अधिकांश को ऐसे समय पर पहुंचाने की कोशिश करेंगे जब एक बस होगी। इसके अलावा, यदि ऐसी कोई व्यवस्था है जो संभव है तो हम एयर इंडिया से उचित रियायत प्राप्त करने में सक्षम हो सकते हैं ताकि जब आप वापस आएं, तो ज्यादातर दिल्ली हम नहीं जा रहे हैं, इसलिए यह उस हद तक नहीं होगा, मुझे यकीन है। आप देखिये, आप व्यापारियों की तरह सामान ले जाते हैं, हर व्यक्ति दो सौ किलो भी कम हो जाएगा, एयर इंडिया भी थोड़ा अतिरिक्त सामान के साथ हमारी मदद करने के लिए पर्याप्त होगी। लेकिन जिस तरह से लोग अपना सामान कभी-कभी ले जाते हैं… मुझे समझ नहीं आ रहा है। सी पी की स्थिति के कारण एयर इंडिया द्वारा मुझे एक बार में दो सौ किलो अतिरिक्त दिए गए थे और वह भी सहज योगियों द्वारा इस्तेमाल किया गया था। फिर मेरा सारा सामान वहीं रह गया और वे बस मेरे सामान की रियायत के साथ चले गए और उन चीजों को जहाज से या कुछ अन्य लोगों के माध्यम से लाना पड़ा, जिनके लिए मुझे बहुत अधिक भुगतान करना पड़ा, कोई फर्क नहीं पड़ता।

जो कुछ हुआ वह अतीत है इसलिए अतीत को भूल जाओ। लेकिन नए जीवन में आपको पुराने जीवन की सारी गंदगी नहीं रखनी चाहिए। इसलिए हर साल एक बेहतर जीवन की ओर बढ़ना होता है, एक महानता का जीवन, उदात्तता का, आध्यात्मिकता का। और अध्यात्म का मतलब किसी भूत के लिए बिल्कुल भी सहानुभूति नहीं होना है! यह एक बात पक्की है, कोई सहानुभूति नहीं! यह आज ही तय कर लेना चाहिए कि किसी भी भूतिया व्यक्ति के प्रति आपकी कोई हमदर्दी नहीं होगी। क्योंकि जब वह आपके सिर पर बैठता है तो आप कहने लगते हैं कि माँ यह हो गया है, लेकिन जब आप उस व्यक्ति को सहानुभूति देते हैं तो आप यह नहीं समझते हैं कि आप एक ऐसे व्यक्ति के साथ ऐसा कर रहे हैं जो ईश्वर विरोधी है। सभी भूत ईश्वर विरोधी हैं चाहे वे आप में हों या बाहर। इसलिए उनसे अपने अंदर या बाहर लड़ें। किसी भी भूत को हावी न होने दें, और एक बार जब आप इस बात को समझ लेते हैं कि वे परमात्मा के खिलाफ हैं और आप परमात्मा के उपकरण हैं, तो आपका उनसे कोई लेना-देना नहीं है, आप उनसे छुटकारा पा लेंगे। एक बार जब आप दृढ़ हो जाते हैं, तो वे भाग जाते हैं|

इसलिए आज यह दूसरा प्रस्ताव पारित करना है कि हमें भूत ग्रस्त लोगों से कोई हमदर्दी नहीं होगी और कोई अजीब सलाह नहीं देंगे जिससे आप काम रोक दें। बहुत से लोग इस तरह से भूतिया होते हैं, मुझे यह पता है। जो कुछ भी आप उन्हें बताते हैं, जैसे [से] चन्ने [?], मैंने कहा कि चलो एक स्कूल शुरू करते हैं। “ओह, हम यह कैसे कर सकते हैं, यह ऐसा है, वह वैसा है”। मैंने जिनेवा में कहा, “तुम उस बड़ी जगह को लेना शुरू कर दो।” बहुत से लोग महान सलाह के साथ आए, मुझे सब कुछ पता है कि क्या हुआ है, आप मुझे नहीं बता सकते। मैं वहां नहीं हूं, लेकिन मैं वहां हूं। मैं उन सभी लोगों को जानती हूं जिन्होंने ये तरकीबें आजमाईं, क्योंकि उन्हें लगता है कि वे बहुत बुद्धिमान हैं। इस समय मैं तुम्हारी निगरानी करने और देखने के लिए वहां हूं, लेकिन मैं तुम्हें साक्षी देती हूं। लेकिन तुम छूट जाओगे। यह सही बात है। सब कुछ दर्ज है। तुम जो भी कर रहे हो। ईश्वर का एक पंजीकरण कार्यालय है और आपको कितने अंक मिलते हैं यह बहुत महत्वपूर्ण है। तुम यह नहीं सोचते कि तुमको साक्षात्कार, इतना बड़ा पद दिया गया है। तो क्या परमात्मा आपको नहीं देख रहे हैं। वह आपके हर कदम पर नजर रख रहा है। आपकी मदद के लिए आपके साथ देवदूत हैं और आपके साथ गण भी हैं, लेकिन पंजीकरण कार्यालय भी पंजीकृत है। तो सावधान रहो।

फिर बाद में तुम कहोगे कि मां मेरी बस छूट गई। मैं आपको बताती हूं कि, उस समय वहां मैं कोई हंकी पैंकी नहीं कर सकती। मेँ कुछ नहीँ कर सकती। केवल एक चीज, अभी जो कुछ भी संभव है मैं कर सकती हूं, इसलिए कृपया इसे इस तरह से करें कि आप वास्तव में तेजी से उत्थान करें और यह आज आप तय करते हैं। आज रात। कितने लोग कल चार बजे उठेंगे, हाथ उठाओ। और पूजा से पहले निश्चित रूप से स्नान आदि सब कुछ करें। न केवल स्नान, अन्यथा वे कहेंगे “हमने स्नान किया था, तो यह ठीक है”। नहीं, बल्कि उचित पोशाक में आपको समय पर पहुंचना होगा। वास्तव में मैं कई बार देर से आती हूं क्योंकि मैं जानती हूं कि वे अभी तक नहीं उठे होंगे। वहाँ पहुँचने का क्या फायदा? फिर जब मैं पहुंचती हूं तो वे कहते हैं “माँ रुको, अभी भी नहीं हुआ है, हमने व्यवस्था नहीं की है।” ऐसा कई बार हुआ है, इसलिए आप मुझे देर से आने के लिए दोष नहीं दें, यह सिर्फ आपको सुविधाएं देने के लिए है। मुझे लगता है कि देर से जाना बेहतर है ताकि कोई समस्या न हो।

तो खुशखबरी मैंने आपको पहले ही बता दी है कि हम अपने लिए खूबसूरत झोपड़ियाँ पाने जा रहे हैं। मैं चाहती हूं कि आप लोग मुझे कुछ अच्छे डिजाइन दें अपनी झोपड़ियों के लिए जिसे आप खरीदना चाहते हैं। यह बहुत ही मामूली कीमत पर होगा, लेकिन वहां बचत करने की कोशिश न करें। आप देखिए, बचत की बचत है। जैसे यह  $400 वास्तव में मैंने इसे गलत धारणा के तहत किया था। मुझे नहीं पता था कि यह पिछले साल 375 डॉलर था। मुझे लगा कि यह केवल ३०० था इसलिए मैंने कहा कि सौ रुपये (डॉलर?) बढ़ाने के लिए पर्याप्त हैं। अब कहा जाता हैं कि वे, चौंक जाते हैं, “माँ, तुम क्या कर रही हो, यह कैसे हो सकता है? कीमतें अब दोगुनी हो गई हैं।” मैंने कहा “किसी न किसी तरह मैं मैनेज कर लूंगी। आप चिंता न करें।” लेकिन झोंपड़ी के मामले में भी आपको पता होना चाहिए कि आपको अपनी झोपड़ी के लिए भुगतान करना होगा, वहां आप इसे मुफ्त में नहीं पा सकते हैं। या, “माँ सब ठीक है, एक व्यक्ति निर्माण करेगा और हम हर साल आएंगे, हम साझा कर सकते हैं। यह ठीक है, आप हमारे लिए एक झोंपड़ी बनाएं, दस लोग इसे साझा कर सकते हैं”। इस तरह की भिक्षावृत्ति वहां व्यक्त नहीं की जानी चाहिए। यहाँ ऐसा काफी सामान्य है कि, “हम इसे साझा करेंगे, यह ठीक है”। लेकिन आप अपना पैसा कहां खर्च करने जा रहे हैं जो यह सब बच रहा है? आपने शेव नहीं किया क्योंकि आप पैसे बचाना चाहते हैं, आप उस हेयरड्रेसर के पास नहीं जाएंगे ताकि आप पैसे बचाना चाहते हैं, ठीक है! अब आप अपने भोजन के लिए भुगतान नहीं करना चाहते हैं, क्योंकि आप पैसे बचाना चाहते हैं, आप अपना किराया नहीं देना चाहते हैं क्योंकि आप पैसे बचाना चाहते हैं, लेकिन किस लिए? मैं समझ सकती हूँ कि शराबी ऐसा कर रहे हैं, क्योंकि आप देखिए, कंजूस लोग आसपास हैं क्योंकि वे शराबी हैं जिन्हें आप जानते हैं। पियक्कड़ों को हमेशा पैसा बचाना होता है क्योंकि उन्हें पीना पड़ता है। लेकिन अब तुम शराबी नहीं हो? तो आपको क्यों बचाना चाहिए? ऐसा तो शराबी ही करते हैं, आप देखिए यह कंजूसी इंग्लैण्ड और सभी जगहों पर बहुत है। इसका कारण है, क्योंकि उन्हें पीना है, आप जानते हैं, उन्हें पीने के लिए पैसे कहां से मिलेंगे। इसलिए वे अपना सारा पैसा पीने के लिए बचा लेते हैं। लेकिन तुम अब शराबी नहीं हो। और जो चीज तुम पी रहे हो वह अमृत है जो मुफ़्त है। तो आप हर समय अपना पैसा क्यों बचा रहे हैं?

तो पैसा बनाने के प्रस्ताव और पैसे बचाने के प्रस्ताव अगर वे थोड़ा नी नीचे  लाए हैं तो आप चकित होंगे कि ये सभी आनंद की हत्या कर रहे हैं। भूत खुशी मारने वाली चीजें हैं। एक भूतिया औरत अगर वह मेरे बगल में है, तुम देखो, मैं भागना चाहती हूं, उसे सहन नहीं कर सकती। इसका कारण यह है कि वह आनंद की इतनी हत्या कर रही है, वह कहती रहती है “माँ, अब मेरी शादी के बारे में क्या हो रहा है? मेरे पति ने मुझे कोई पत्र नहीं लिखा है।” ख़त्म । मैं कह रही हूँ – “अब, उससे तंग आ चुकी हूँ।” फिर दूसरा बोलेगा “माँ मेरा घर ठीक नहीं है, मैं क्या करूँ? मेरा काम नहीं चल रहा है, मैं क्या करूँ?” वे सभी बहुत ही व्यक्तिगत छोटी-छोटी बातों पर चर्चा करेंगे। ऊंची बातों की नहीं। लेकिन अमेरिका में मैं इतना अधिक खुश थी कि उन्होंने कभी मुझसे व्यक्तिगत समस्याओं के बारे में नहीं पूछा – किसी ने नहीं। हमेशा ऊंची बात की बात करते हैं। “लेकिन ऐसा कैसे है, माँ? यह तो आत्मा है, जब यह तुम्हारे भीतर आती है, तो प्रकाश इतनी अच्छी तरह क्यों नहीं फैला है?” उन्होंने आत्मा, आत्मा, आत्मा के बारे में बात की। किसी ने नहीं कहा “मेरे पति ऐसे हैं, मेरा घर डूब रहा है, मैं क्या करूँ? मुझे परेशानी है”। उन्होंने कभी इस तरह से बात नहीं की, इसलिए वे बहुत तेजी से आगे बढ़ेंगे और आप अपनी पत्नियों, बच्चों और अपने घर से चिपके रहेंगे और शायद मुझे नहीं पता कि यहाँ और क्या है। तो सावधान रहो। अपना चित्त उच्च स्तर पर ले जाएं।

जब तक और जब तक आप अपना ध्यान ऊँचे स्तरों की ओर नहीं ले जाते, तब तक आप बाहर कैसे निकलेंगे? और यह एक और तरीका है जिससे आप नए लोगों को भी उत्थान दे सकते हैं। आप देखिए, कई नवागंतुक सहजयोगियों द्वारा वैसे ही हैरान होते हैं जैसे वे हैं। वे बताते हैं कि, “कोई अंतर नहीं है। वे भी झूठ बोलते हैं, वे हमारी कीमत पर पैसे बचाने की कोशिश करते हैं।” नए लोग आए हैं, ठीक है! क्या आप शादीशुदा आदमी हैं? तब वे कहते हैं, “ठीक है! आप आज के लिए भुगतान करें।” हम एक होटल में जाते हैं, वह उनके लिए भुगतान करता है। नया आदमी हैरान है। सारे सहजयोगी वहाँ खाते हैं, बेचारा पैसे देता हैं। वह बिना किसी पैसे के है; फिर वह सोचता है कि ये किस तरह के सहज योगी हैं, वे मुझ से भुगतान करवा रहे हैं। जब कोई नया व्यक्ति आता है तो आप सभी को भुगतान करना चाहिए। लेकिन अगर उन्हें पता होता है कि किसी के पास पैसा है तो वो पैसे निकाल लेते हैं. यह सुनने में भयानक बात है। और सारी समस्या पैसे की है, “मेरे पति मुझे पैसे नहीं देते, वह पैसे बैंक में रखते हैं, मेरी पत्नी मुझे पैसे नहीं देती”। मैं इन सब बातों से तंग आ चुकी हूं। अब इसके बाद और नहीं, कम से कम मुझे तो मत बताना।

अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हें दो लाठी दे सकती हूं, तुम अपने पति या पत्नी को मारो, इस बात को खत्म करो। मेरे पास कहने के लिए कुछ नहीं है, लेकिन मुझे उनके बारे में मत बताना। और अगर तुम्हारी पत्नी भूत है या पति भूत है तो उसे बाहर रखो। अपने ऊपर सिरदर्द न लें। और जो लोग इसलिए शादी कर रहे हैं क्योंकि उन्हें भूतों से प्यार करते हैं, बेहतर है कि वे छोड़ दें। अन्यथा, उनके प्रेम प्रसंग, और यह और वह, हर तरह की बातें, मैं इससे बहुत तंग आ चुकी हूँ! हम अनंत जीवन के बारे में कब बात करने जा रहे हैं? ठीक है?

इसलिए, मुझे लगता है कि नए साल के लिए हमारे बीच एक छोटी सी बात हुई है और एक प्रेम वार्ता और अच्छी खबर है, हो सकता है कि हमें यहां रहने की अनुमति दी जाए, यदि आप सभी की इच्छा है, यदि आप कुछ बुद्धिमान परामर्श नहीं देते हैं, तो मुझे यकीन है कि हम रहेंगे यहां। ठीक है, यहाँ शिफ्ट करते समय भी बहुत सारी बुद्धिमानी से सलाह दी जाती थी कि, “यह बहुत दूर है, हमें क्या करना चाहिए, यह, वह” यह कार्यान्वित हुआ। अपनी बुद्धि को अपने पास रखो, इससे अपने ऊपर काम करो। अपने स्वयं के ज्ञान के माध्यम से अपने बारे में जानने का प्रयास करें – “मैं क्या कर रहा हूँ?” और आपको आश्चर्य होगा कि किस प्रकार यह आपकी मदद करेगा।

आपको चमकना है। आप कल के नेता हैं। आपको अपने पंख चालू रखने होंगे। आप क्या कर रहे हो? ये सभी भारी वजन आप उन्हें फेंक दीजिये – कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं! हल्का महसूस करें। तुमने वह सब छोड़ दिया है।

अब हम योगी हैं, सन्यासी हैं, हमें क्या फ़र्क पड़ेगा, खाना न भी मिले तो क्या? परमात्मा हमारी देखभाल करने जा रहे हैं। वह हमारी देखभाल करते है। और लोगों के साथ ऐसा हुआ है कि, जो लोग अपने योग में विश्वास रखते हैं, वे सब बहुत अच्छी तरह से स्थापित हो गए हैं, उनका क्षेम ठीक हो जाता है। सबसे पहले अपने योग की देखभाल करें, महत्वपूर्ण है। अपने योग की देखभाल करना यही सबसे महत्वपूर्ण बात है जिससे आप इस लालच और वासना की खाई में और उन सभी चीजों में नहीं गिरते जो हमारे आसपास हैं।

एक ऐसा जीवन जीने की कोशिश करें जो वीतरागी हो। निर्लिप्तता को विकसित करना होगा। निर्लिप्तता। पूर्ण निर्लिप्तता की जरूरत है। आज मेरे मन में तुम्हारे लिए कुछ तोहफा लाने का मन था, क्योंकि तुम देखो, मुझे यह पसंद है, मुझे तुम्हें उपहार देना अच्छा लगता है। मुझे नहीं पता क्यों? यह मेरा लगाव है। [माँ और योगी हँसते हैं]। लेकिन मैंने आज यह कहा था कि मैं इसके बारे में थोड़ा और वैराग्य रखूंगी, क्योंकि अगर मैं इसे कुछ ही लोगों को दूंगी तो वे नाराज होंगे। लेकिन मेरा मन था कि आपको कुछ उपहार विशेष रूप से दे दूं, लेकिन आज मैं आपको कुछ विशेष शुभकामनाएं दूंगी कि – आपकी इच्छा शक्ति प्रबुद्ध हो जाए, आप महान प्रबुद्ध श्रद्धा और प्रबुद्ध शक्ति वाले लोग बनें। आप अतीत की इन सभी चीजों को त्याग दें, अपने खोल से बाहर निकल आयें, अपने पिछले संस्कारों से बाहर आ जाएँ और अपने अहंकार की ओर जाए बिना अपने आप को पूरी तरह से शुद्ध कर लें। अपने पंख फैलाओ और एक प्रतिष्ठित पक्षी की तरह तुम परमात्मा के आनंद के सागर का आनंद प्राप्त करो।” यही मैं तुम्हें आशीर्वाद देती हूं। आकाश, आकाश सीमा है। आपके आनंद की कोई सीमा नहीं है, लेकिन इन सभी बेतुकी बातों को छोड़ दें। बस छोड़ दो। आप संत हैं, आप योगी हैं, आप सभी हैं। आप सड़क छाप साधारण सांसारिक लोग नहीं हैं। सबके चरणों की पूजा की जाए, तुम उस स्तर के हो। गणेश के बाद तुम्हारी माँ ने तुम्हें ऐसा बनाया है। और तुम क्या कर रहे हो ? कहाँ खो गये? जिम्मेदारी लो।

परमात्मा आप सबको आशीर्वादित करे!

तो, मुझे बताया गया है कि आप आज मुझे कोई संगीत कार्यक्रम देने जा रहे हैं। तो क्यों न नीचे जाएं, यह एक बड़ा कमरा है। क्या आपने उस बड़े कमरे को साफ कर दिया है? नीचे। लोग सीढ़ियों पर भी बैठ सकते हैं। क्या आपने साफ़ कर दिया है? निक? [माँ एक योगी से बात करती है]। वह बड़ा कमरा है। क्या यह साफ है? मैंने निक से कहा है, आगे बढ़ो। अच्छा, दो, चार। कौन उठने वाला है? एक व्यक्ति उठेगा, थोड़ा सा हिलना। श्रम की बचत। तीन, चार व्यक्ति जाएं और मदद करें और करें, जल्दी करें, साथ आएं। युवा लोग, आ.. साथ आओ, आगे आओ। आगे बढ़ो। हम्म। बस करो, सारा सामान इस पीछे के कमरे में रख दो। हां, अच्छा। श्रम की बचत नहीं।

आप कैसे हैं? ठीक है? आप वहां जा सकते हैं और संगीत की व्यवस्था कर सकते हैं, सब कुछ। भोजन वाले भाग के बारे में क्या? आपने नहीं लिया था?  पहले हमारा संगीत होगा या पहले खाना? मुझे लगता है कि पहले संगीत बेहतर होगा अन्यथा वे सभी सो जाएंगे। [माँ योगियों से बात करने लगती हैं]

सहज योगी: आप देखिए, वे आपके लिए क्या करना चाहते थे कि आपको अपने कमरे में बैठने दें, आतिशबाजी का प्रदर्शन और अलाव देखें,

श्री माताजी : और फिर संगीत लो।

सहज योगी : तो फिर जो चाहो लो, आतिशबाजी, संगीत…

श्री माताजी : संगीत हमारे पास होगा। ठीक है! और आतिशबाजी। और तब तक नीचे संगीत की व्यवस्था करें और आतिशबाजी चालू है, ठीक है? तो चलिए नीचे चलते हैं। पैर थोड़ा नीचे बैठने से | और नीचे बैठने का यह अभ्यास भी अवश्य करना चाहिए। यह कुछ अभ्यास हैं, हम आपको देंगे, यह धरती माता पर बैठना बहुत अच्छा है। यही सीखने वाली बात है। आप इन लोगों को जानते हैं जो गुरुओं के पास गए हैं, वे इतनी अच्छी तरह से बैठते हैं, मुझे आश्चर्य हुआ। मजबूर थे। और उनके गुरुओं ने उनसे कहा कि अगर वे बैठ नहीं सकते तो उन्हें एक कंटीली चीज पर बैठना होगा। तो वे डर गए।

चलिए चलते हैं। मुझे लगता है कि अब आगे बढ़ो, दामले, क्या यह नीचे तैयार है? लेकिन आप सबसे पहले आतिशबाजी के लिए बाहर जा रहे हैं, ठीक है? खुले में, आतिशबाजी के लिए। तो मैं क्या सोच रही थी कि, हमारे पास संगीत कब होगा, यह बात है, ना?

सहज योगी : अच्छा, जब भी आप चाहो, माँ। आप इसे कब पसंद करेंगे।

श्री माताजी: मैं सोच रही थी कि पहले संगीत लो और फिर बाहर जाओ; अपना डिनर भी वहीं करें और फिर आतिशबाजी करें। आपके पास जो चीज हो सकती है, उसके सामने बैठकर। पहले संगीत लो। ठीक है?

सहज योगी: हाँ, क्या देबू चौधरी यहाँ पहले से ही हैं? क्या कोई देबू को व्यवस्था बताएगा?

श्री माताजी : और फिर जब हम बाहर जाते हैं……