Navaratri Puja

Hampstead Town Hall Centre, Hampstead (England)


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नवरात्रि पूजा, हैंपस्टड, लंदन 23 सितंबर)

हम नवरात्रि का त्योहार क्यों मनाते हैं? हृदय में देवी की शक्तियों को जागृत करना ही नवरात्रि मनाना है… जो शक्ति इन सभी 9 चक्रों में है उसको जानना और जब वे जागृत हो जांय तो आप स्वयं के अंदर उन 9 चक्रों की शक्तियों को किस प्रकार से अभिव्यक्त करना हैं। सात चक्र और हृदय और चांद मिलाकर ये 9 चक्र हुये। परंतु मैं कहूंगी कि ये सात और इनके ऊपर दो अन्य चक्र जिनको विलियम ब्लेक ने भी आश्चर्यजनक व स्पष्ट रूप से 9 ही कहा था। इस समय मैं आपको उन दो ऊपर के चक्रों के विषय में नहीं बता सकती। क्या इन चक्रों की शक्तियों को हमने अपने अंदर जागृत कर लिया है? किस तरह से आप ये कर सकते हैं? आपके पास तो समय ही नहीं है। आप सब लोग तो अत्यंत व्यस्त और अहंवादी लोग हैं
इन शक्तियों को जागृत करने के लिये हमें इन चक्रों पर ध्यान केंद्रित करना पड़ता है। जहां भी मैं गई, मुझे आश्चर्य हुआ….. जो प्रश्न उन्होंने मुझसे पूछे …..किसी ने भी मुझसे अपने परिवार, घर, नौकरी या अन्य किसी बेकार बात के बारे में नहीं पूछा …… उन सबने मुझसे पूछा कि माँ हम इन चक्रों की शक्तियों को किस प्रकार से विकसित करें। मैंने उऩसे पूछा कि आप किसी एक चक्र विशेष के बारे में कैसे पूछ रहे हैं तो उन्होंने कहा कि हमारे अंदर अभी बहुत कमियां है … या मेरे अंदर यही चक्र ठीक नहीं है।
अब किसी साक्षात्कारी आत्मा को मुझे ये बाताने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है या आपको अनुशासित करने की भी जरूरत नहीं है। मुझे आपको इस तरह से ये सब बातें बिल्कुल भी बताने की जरूरत नहीं है। मैं आपसे इस तरह से बात भी नहीं करना चाहती परंतु मुझे लगा कि यदि मैंने अभी आपको नहीं चेताया तो कल को आप मुझे ही दोष देने लगेंगे कि मैंने आपको चेताया नहीं। इसको एक गंभीर चेतावनी की तरह से ले लीजिये। आत्मसाक्षात्कार के बाद आपके अंदर प्रकाश आ गया है…. आपको मालूम है कि साक्षात्कार क्या है …… आपने इससे क्या क्या प्राप्त किया है…… आपके व्यक्तित्व में कितना सुधार आ गया है?
लेकिन अभी इससे भी अधिक किया जाना है । आपको स्वयं देखना होगा कि आपने स्वयं को अनुशासित किया है या नहीं। किसी भी लीडर को आपको कुछ बताने की जरूरत नहीं । किसी भी आश्रम के व्यक्ति को आपको कुछ भी बताने की जरूरत नहीं है। आप आत्म साक्षात्कारी हैं … स्वयं के गुरू हैं। कल्पना कीजिये कि आप सब गुरू हैं …. महान गुरू और सद्गुरू हैं, आदरणीय संत हैं … सभी देवदूतों को आपके ऊपर पुष्पवर्षा करनी है। जरा सोचिये और आप हैं कि आप अहंवश भाषण दिये चले जा रहे हैं …. अहंचालित होकर बातें कर रहे हैं। आप को देखकर तो देवता भी संकोच में पड़ जांय। उनको समझ में ही नहीं आता कि वे आपका क्या करें आपको हार पहनायें या आपको मुंह बंद करें । आपको आत्मसाक्षात्कर जैसा महान पद दे दिया गया है। आपको केवल यही करना है कि इस योग की सुंदरता को पहचानना है और अपनी उन शक्तियों को जागृत करना है जो आपके इन सातों चक्रों में समाई हैं।
पहला चक्र माँ गौरी का है जो साक्षात श्री गणेश की माँ की शक्ति हैं। गौरी की शक्तियां अपार है … अतुलनीय हैं… हैं कि नहीं? उनकी शक्तियों से ही आपको आत्मसाक्षात्कार मिला है। लेकिन उन शक्तियों को आत्मसात करने के हमने किया ही क्या है? क्या हमने अपनी अबोधिता को स्थापित किया है? यदि ये नवरात्रि का पहला दिन है तो देखें कि हमने क्या किया है। क्या हम अबोधिता को अपने अंदर स्थापित कर पाये हैं? लोग जब बात करते हैं तो बहुत ही तेजी से करते हैं। पर यदि आप अबोध हैं तो फिर इतनी तेजी से बातें कैसे कर सकते हैं? अगर आप अबोध हैं तो किस प्रकार से अंहकार पूर्वक बातें कर सकते हैं? लोग चालें चलते हैं … पर आप ऐसा कैसे कर सकते हैं जब आप अबोध हैं? एक दूसरे को हानि पंहुचाते हैं … ऐसा कैसे हो सकता है जब आप अबोध हैं तो? सबसे पहले आपको देखना पड़ेगा कि यदि अबोधिता को बनाये रखना है तो फिर अन्य बेकार की बातों को आपको छोड़ना पड़ेगा। अबोधिता के लिये जो कुछ भी अबोधिता के विरोध में है उसे आपको छोड़ना पड़ेगा। जो अज्ञानी है उनको मैं समझ सकती हूं कि वे अज्ञान हैं। परंतु आप तो अज्ञानी नहीं हैं। आपको प्रकाश मिल चुका है। अबोधिता की शक्ति महान है। इससे आप निडर व निर्भय बन जाते हैं …. अहंकारी नहीं परंतु पूर्णतया निर्भय। अबोधिता की सबसे बड़ी बात है कि आप सम्माननीय हो जाते हैं। यदि आपके अंदर दूसरे सहजयोगियों के लिये, आश्रम के लिये, अनुशासन के लिये और अपने स्वाभिमान के लिये सम्मान की भावना नहीं है तो फिर इसका कोई फायदा नहीं है …. सहज के बारे में बात करने का भी कोई फायदा नहीं है क्योंकि यही सहज की आधारभूत बात है। पहले तो आप किसी का सम्मान ही नहीं करते हैं … ठीक है, फिर आप अहंकारी भी हैं … ठीक है … तो फिर आप आप बहुत बडे भ्रम में जी रहे हैं … परंतु आपको माफ किया। लेकिन यदि आपके अंदर प्रकाश आ गया हो तो आपको बुरी आदतों के इन सर्पों से छुटकारा पाना होगा …. ये अत्यंत ही सरल है ।