Put me in your Heart

Chelsham Road Ashram, London (England)

Feedback
Share

                 “मुझे अपने दिल में रखो”

चेल्शम रोड, लंदन (यूके), 5 अक्टूबर 1984

श्री माताजी : कृपया बैठ जाइए। ठीक है।

योगी: क्योंकि आज हम कुछ समय के लिए अपनी मां को और ऑस्ट्रेलिया के अपने आदरणीय भाई डॉ वारेन को भी विदाई दे रहे हैं, जिन्होंने यहां रहते हुए अथक परिश्रम किया है। हमारी माँ की ओर से और हमारी ओर से, और इस देश में काम करने में मदद करने के लिए पर्दे के पीछे जबरदस्त काम किया; और हम चाहते हैं कि इसे सिर्फ यह बताने का एक विशेष अवसर हो कि हम उनसे बहुत प्यार करते हैं और वह है, जो कुछ भी वह हमसे कहते है, वह हमारे हृदय का भला करता है।

डॉ वारेन: श्री माताजी, यह वास्तव में मेरे लिए आश्चर्य की बात है।

श्री माताजी : कृपया थोड़ा और आगे आएं।

डॉ वारेन: मुझे लगता है कि सबसे महत्वपूर्ण बात मैं यह कह सकता हूं कि मुझे यहां रहने में कितना आनंद आ रहा है। यह बहुत महत्वपूर्ण है कि हम सभी हृदय में आए, हम सभी को प्रसारित करना है और जब भी मुझे पता चलता है कि मैं यहां आया हूं तो मुझे बहुत खुशी होती है। क्योंकि मैं इस तरह से नहीं सोचता कि मैं कुछ कर रहा हूं। जब आप श्री माताजी की उपस्थिति में होते हैं, जैसा कि आप में से कई लोग महसूस करते हैं, यह समर्पण की ऐसी अभिव्यक्ति है। लेकिन समर्पण जो आपको मानसिक आशंका से परे ले जाता है कि समर्पण क्या है, क्योंकि यह सिर्फ काम करता है। समर्पण एक ऐसी चीज है जिसके बारे में मां ने करीब दो साल पहले एक गुरु पूजा में बात की थी। और एक चीज जो बहुत ही उत्कृष्ट है वह है – यह सबसे उल्लेखनीय तरीके से कार्य करता है कि मैं एक पल में उस पर वापस आऊंगा। क्योंकि मैं अच्छे और बुरे के दो स्तर या शायद या दोनों छोर के बारे में बात करना चाहता हूं क्योंकि जब मैं यहां दुनिया भर के अपने भाइयों और बहनों से कुछ कहने के लिए आशीर्वाद लेकर आता हूं। थोड़ी सी तुलना करना संभव है जो उपयोगी हो सकता है और कृपया समझें कि यह केवल इस अर्थ में उपयोगी है कि अगर यह मेरे दिल से आता है तो इसलिए कि, मैं सामूहिकता का अधिक आनंद लेना चाहता हूं, मैं मां के प्रति समर्पण का अधिक आनंद लेना चाहता हूं, मैं सहज योग का अधिक आनंद लेना चाहता हूँ। इसलिए अगर मैं कुछ भी कहता हूं जो थोड़ा तीखा या आलोचनात्मक है, नंबर १, मैं पूरी तरह से संपूर्ण का हिस्सा हूं और किसी भी तरह से अलग महसूस नहीं करना चाहता, और फिर भी कभी-कभी मेरा दिल दुखता है कि इस खूबसूरत देश में चीजें इतनी तेजी से आगे नहीं बढ़ रही हैं। तो बहुत ही सकारात्मक पक्ष में, इस बार अपने इंग्लैंड आने पर मैंने श्री माताजी से एक बात कही थी कि आज्ञा चक्र इतना स्पष्ट प्रतीत होता है, पूरे सिर पर इतना अधिक हल्का लगता है, आप सुबह उठकर महसूस करते हैं इतना चैतन्य आप अधिक ध्यान की प्रतीक्षा करते हुए ध्यान में जाते हैं। और मुझे आश्चर्य है कि ऐसा क्यों था। बेशक यह मुख्यतः इसलिए है क्योंकि श्री माताजी यहाँ हैं। वे यहाँ कितने वर्षों से भलाई के लिए है और यह इस पर कार्यान्वित हो रही है और इसे पूरा कर रही है। लेकिन मैं मानता हूँ, अगर मैं कर सकूं कि,  श्री माताजी इंग्लैंड के सहज योगियों द्वारा हिदायतों पर अमल और कड़ी मेहनत को कुछ श्रेय देते हैं क्योंकि वे सुबह उठ रहे हैं और वे सुबह जल्दी ध्यान कर रहे हैं और इस तरह वे उनके चक्रों को साफ कर रहे हैं, जो प्रकट होने लगा है। हर कोई सिर में हल्कापन महसूस कर रहा है जो उन्होंने पहले कभी नहीं सोचा था। और यह बहुत अच्छा है! यह जबरदस्त है! इसका मतलब है कि किसी तरह से अहंकार नीचे आ रहा है, इसका मतलब है कि कुंडलिनी कहीं अधिक बल के साथ उठ सकती है और हम अपनी दिव्य मां से अधिक सुरक्षित रूप से जुड़े रह सकते हैं। और यह एक ऐसा आशीर्वाद और इतना महत्वपूर्ण बिंदु है कि हम सभी को उस जबरदस्त भावना या प्रगति का आनंद लेना है जिसे हमने स्थापित किया है। लेकिन दूसरे स्तर पर हम सभी जानते हैं कि समस्याएं हैं और मुझे लगता है कि समस्याएं मेरे कहने के लगभग विपरीत हैं। एक लगभग दूसरे का विलोम है। यदि कुण्डलिनी आज्ञा से आगे नहीं बढ़ती और सहस्रार तक नहीं पहुँचती और हमारी माता के प्रति वह समर्पण जबरदस्त पूर्ण शक्ति के साथ नहीं आता है। तब कुंडलिनी वहीं रुक जाती है। और ईश्वर के राज्य की ओर हमारा प्रवेश कमजोर है। हम कमजोर लोग हो जाते हैं। हम वैसे ही बन जाते हैं जैसे क्राइस्ट ने कहा ‘कम भरोसेमंद ‘ और हमें सहस्रार का आशीर्वाद पूरी तरह से नहीं मिलता है। यह थोड़ा-सा हिलता-डुलता कनेक्शन, कमजोर कनेक्शन, ऑन-ऑफ ऑन-ऑफ, और इसलिए उस स्तर पर कुंडलिनी कहीं न कहीं मंडराती है। हमें इसमें जबरदस्त सुधार करना होगा। तो यह सब बहुत कुछ पता होना चाहिए मुझे यकीन है कि हम मानसिक रूप से समझ सकते हैं। लेकिन हमें अपने दिल में यह जानना होगा कि हमारी दिव्य मां के साथ संबंध बिल्कुल मजबूत होना चाहिए। यह ढीली-ढाली बात नहीं हो सकती। यह हमारे अहंकार और प्रति अहंकार की वजह से नियंत्रित कोई बात जैसा कुछ नहीं हो सकता। इसे मानसिक रूप से अनुभव नहीं किया जा सकता है।सर्वशक्तिमान ईश्वर के इस प्रतिबिंब आत्मा को हमारी मां के प्रति पूर्ण समर्पण की वास्तविकता बनना है और इसलिए पूरी तरह से मां का अंग बनकर; हम धीरे-धीरे और निश्चित रूप से परमेश्वर के राज्य में और प्रभु के साथ एकाकारिता में उत्थान कर जाते हैं। यह मैंने अनुभव किया है। अगर मैंने सहज योग में कोई प्रगति की है तो वह एक ही चीज के कारण है – यह श्री माताजी के प्रति पूर्ण समर्पण है, कोई दूसरी चीज नहीं है, जो मैंने की हो जो कि मैं किसी अन्य सहज योगी से कुछ अलग कह सकता हूं, लेकिन मां के प्रति समर्पण करने के लिए, मुझे विश्वास है कि मैंने वास्तव में कड़ी मेहनत की है; और मुझे विश्वास है कि इसने मेरे आध्यात्मिक उत्थान में मेरी मदद की थी। और मुझे यह मौका देने के लिए मुझे मां का शुक्रिया अदा करना है। यहाँ सबसे बड़ी समस्या यह है कि हमारा समर्पण डगमगाता है, हमारा विश्वास अस्थिर है। आपको ईश्वरीय कार्य की सूक्ष्मता देखनी चाहिए। श्री माताजी ने जन्म लिया है, आदि शक्ति ने जन्म लिया है, पवित्र आत्मा ने जन्म लिया है, जिसे हम मानसिक रूप से समझ सकते हैं लेकिन क्या हम इसका अर्थ जानते हैं; क्या हम जानते हैं कि ईश्वर ने अपनी उदार भलाई में प्रत्येक साधक को इस पृथ्वी पर माताजी की सशरीर उपस्थिति का आशीर्वाद दिया है। ताकि परमात्मा को अभिव्यक्त करने वाला मुख हो, ताकि सभी बच्चे मां के प्रेम को प्रकट होते देख सकें, ताकि उनके सभी बच्चे करुणा को देख सकें और इसे अपने हृदय में महसूस कर सकें। और फिर भी, वह अक्सर कहती है कि वह एक बुलबुला है। श्री माताजी के बारे में कुछ ऐसा है जिसके बारे में हम पूरी तरह से नहीं जान सकते हैं। हम उन्हें महसूस नहीं कर सकते, हम नहीं जानते कि वह कौन है! क्या हम जानते हैं कि वह इस धरती पर सर्वशक्तिमान ईश्वर की अपने संपूर्ण रूप में ईश्वर की शक्ति के रूप में, ईश्वर की इच्छा के रूप में अवतरण  हैं। आपको उनके अवतार की घोषणा याद है- “मैं इस धरती पर परमात्मा की इच्छा के रूप में, आदि शक्ति के रूप में आयी हूं, जो अतीत के सभी महान साधकों की मांग को पूरा करने आयी है।” मुझे आश्चर्य है कि हम में से कितने लोग वास्तव में अपने हृदय में इतने समर्पण के साथ जानते हैं कि यह एक वास्तविकता है, दिमाग में नहीं समझी जाती, बल्कि दिल में महसूस की जाती है, हृदय में जानी जाती है। और निश्चित रूप से जब हृदय खुलता है तो आप सहस्रार की तृप्ति का आनंद लेते हैं। लेकिन हम क्या करते हैं; हम आज्ञा के बीच लड़खड़ाते हैं। हमें विश्वास नहीं है। चमत्कारों को  देखो। मेरा मतलब है कि अतीत में मेरे साथ हुए छोटे से चमत्कार कुछ भी नहीं है कि, मैंने बिना पेट्रोल के तीन सप्ताह तक मोटर कार चलाई और तीन सप्ताह के अंत में टैंक भर गया। ये कुछ नहीं है! क्या आपने कोई अन्य चमत्कार देखा है जो श्री माताजी ने किया है? वह कोई चमत्कार नहीं कर सकती, यदि आप अपने अहंकार या अपने प्रति-अहंकार द्वारा ,अपने चक्र द्वारा चमत्कार में बाधा डाल रहे हैं, बल्कि आपके विश्वास की कमी को देखते हुए, वह हम में से किसी में भी कोई चमत्कार नहीं कर सकती है। आइए सामूहिक रूप से जानते हैं। यह हमारे ऊपर है और वह है समर्पण! यह समर्पण से बढ़कर है। समर्पण में एक निश्चित स्तर की मानसिक समझ होती है। मैं समर्पण करता हूं, लेकिन इसका मतलब क्या है? समर्पण एक दिल की बात है। यह अंदर है। यह सहस्रार को छूता है और यह इसे खोलता है और आप उस जबरदस्त शक्ति, उस जबरदस्त प्रकाश को महसूस करने लगते हैं। तो आइए हम उस श्रेणी में फिट न हों जिसके बारे में ईसा-मसीह ने बात की थी। क्या उन्होंने बड़बड़ाने वाली आत्मा के बारे में नहीं बताया। उन्होंने यह भी बात की कि उन्हें बहुत कम विश्वास है। इंग्लैंड में, हमें इस बिंदु पर परखा गया है। सेंटर क्या है। यह आदि शक्ति का सेंटर है। यह ईश्वर की इच्छा का सेंटर है, यह हमारी दिव्य माता का सेंटर है, यह पवित्र आत्मा की अभिव्यक्ति का सेंटर है। क्या आप जानते हैं कि इटली में वे उन्हें ‘ग्रांडे माद्रे’ कहते हैं जिसका अर्थ है महान माता। उन्हें इसका आभास हो गया है। अखबार वाला, हमने उसे नहीं बताया। वे यही है! हे ईश्वर ! एक पुजारी, एक फ्रांसिस्कन पुजारी ग्यारह सौ लोगों के सामने खड़े होकर घोषणा कर रहा है कि, वे वह है और चर्च के नाम पर उन्हें धन्यवाद दे रहा है। हम जो कर रहे हैं, लड़खड़ा रहे हैं, उसी के साथ ब्लैक लिस्ट की बात कर रहे हैं, वो सब बकवास। मेरा मतलब है कि इंग्लैंड दिल है। मुझे ऐसा लगता है कि इटली में ज्यादा हृदय है। इसलिए हमें निश्चित रूप से यह जानना होगा कि, वे (श्रीमाताजी)कौन है। हमें उस दिव्यता को प्राप्त करना है,  हम सभी जानते हैं कि हम प्राप्त कर सकते हैं। अब, हाँ आज्ञा चक्र साफ़ हो रहा है। लेकिन नहीं, हम सहस्रार नहीं पहुँच रहे हैं, हम अभी तक सहस्रार में स्थापित नहीं हुए हैं। 

चलो सामना करते हैं! हम परमेश्वर के राज्य के अंदर केवल एक पैर से हैं। कई अन्य, चलो पूरी तरह से ठीक वहीं अन्दर बसें। और दूसरी चीज जो हासिल करनी है वह है, माताजी को सामूहिकता से हासिल करना है। मेरे और श्री माताजी के बीच अन्य कोई नहीं ऐसा यह रास्ता है। कुछ भी हो यह ऐसा ही है|  वह स्वचालित है; हम में से प्रत्येक के लिए यह समान मूलभूत सामान्य सिद्धांत  है। सामूहिक के माध्यम से उसकी दिव्यता के करीब पहुंचकर ही हम पूरी तरह से अपनी दिव्यता प्राप्त कर सकते हैं। अगर हम सोचते हैं कि श्री माताजी के साथ हमारा विशेष संबंध है, तो हम समाप्त हो गए। यदि हम सोचते हैं कि अन्य सहज योगियों के मुकाबले माँ के साथ हमें कुछ विशिष्ट सुविधा है, तो हमने समाप्त कर दिया। अगर हम सोचते हैं कि हम किसी और से ज्यादा माँ का समय ले सकते हैं, तो हमारा काम समाप्त हो गया।  श्री माताजी के इस स्वरुप से पूरी तरह से संपर्क किया जा सकता है, सामूहिक अस्तित्व के माध्यम से, सहज योग के माध्यम से, निर्विकल्प की आंतरिक स्थिति के माध्यम से, निर्विचार जागरूकता नहीं बल्कि निस्संदेह जागरूकता में ; और हम सभी को उनसे उसी तरह संपर्क करना होगा। अब अगर श्री माताजी आपको थोड़ा सा कोई संकेत दें, तो हमें उन पर सवाल नहीं उठाना चाहिए, हमें किन्तु, परन्तु नहीं कहना चाहिए, लेकिन समस्या ऐसी है और ऐसी और ऐसी है ऐसा नहीं करना चाहिए, जोकि, ऐसा हम सब करते हैं, मैं करता हूं और हम सब करते हैं| वह ईश्वर की इच्छा का अवतार हैं और इस प्रकार इस तरह का संकेत है कि, जिस तरह से मनुष्य जो ईश्वर के राज्य में सिर्फ बच्चे हैं, उन्हें पूरी सख्ती और पूरी स्पष्टता और समर्पण के साथ पालन करना चाहिए। यदि आप उसके द्वारा दिए गए संकेतों का पालन करते हैं, तो सब कुछ कार्यान्वित होना चाहिए। यदि आप इसका विरोध करते हैं, यदि आप कहते हैं लेकिन, या कहते हैं कि समस्या है, तो कुछ भी कार्यान्वित नहीं होगा, और मुझे डर है कि, इस देश में यह कहने की सबसे बड़ी प्रवृत्ति है कि, ‘समस्या है’, ‘लेकिन क्या होगा यदि’, ‘कैसे’; ये सभी प्रश्न हमारे उत्थान के लिए हैं। श्री माताजी हमारे विकास और आध्यात्मिक उत्थान के निर्देश के रूप में जो भी कहते हैं यदि, हम सब कुछ ले लेते हैं, हम बस विकसित, अधिक विकसित होंगे|  

भारत के लोगों को देखें, खासकर महाराष्ट्र के लोगों को। मैं दिल्ली नहीं कहूंगा। दिल्ली के लोग बहुत कुछ हमारे जैसे हैं, वे बहुत ग्रसित हैं, अभी भी लिप्त हैं, आप जानते हैं- माताजी क्या मैं बैठक कर सकता हूं, क्या मैं यह कर सकता हूं, क्या मैं वह कर सकता हूं। लेकिन महाराष्ट्र के लोग, वे उन्हें जानते हैं, वे उनके स्वभाव को जानते हैं, वह आदि शक्ति है। हे ईश्वर ! वह आदि शक्ति है, वह एक है। मैं उसकी पूजा कैसे कर सकता हूं? मैं उसे कैसे प्रसन्न कर सकता हूं? इसके बजाय,  माँ यहाँ है, मैं उसे खुश करने के लिए क्या कर सकता हूँ। इसके बजाय, माँ यहाँ है, मैं उन्हें खुश करने के लिए क्या कर सकता हूँ। ऐसा नहीं है, ‘हम’ उसे खुश करने के लिए क्या कर सकते हैं। पहले तो महाराष्ट्र में लोगों को यह बताने की जरूरत नहीं है। तो हम में से प्रत्येक को एक हाथ होना चाहिए सामूहिक कार्य का, वास्तव में उस उपलब्धि का सार महसूस करना चाहिए जिसने निश्चित रूप से हमारे इस आज्ञा चक्र को मजबूत और मजबूत बनाया है, जो प्रभु यीशु मसीह और उनकी माँ का केंद्र है। लेकिन हम अभी तक परमेश्वर के राज्य में मजबूत नहीं हैं। मैं कह सकता हूं कि यूरोप के अन्य शहरों और देशों ने उस समर्पण में इंग्लैंड को पीछे छोड़ दिया है। परमेश्वर के राज्य में वह पैर मजबूत है। भारत बेशक निर्विवाद है लेकिन इन यूरोपीय शहरों में चमत्कार भी पीछे नहीं है। आइए हम श्री माताजी में यह कहते हुए प्रवाहित हों कि “हम सामूहिकता के प्रति जिम्मेदार होना चाहते हैं। हम अपनी जिम्मेदारी निभाना चाहते हैं और खुश हैं कि हम इसे करने जा रहे हैं। क्या हम जानते हैं कि 40 अमेरिकी भारत जा रहे हैं? ये महत्वपूर्ण बिंदु हैं। आप जानते हैं कि जब मैं आपसे ये बातें कहता हूं, अगर मैं वास्तव में आलोचनात्मक हूं, तो कृपया मुझे क्षमा करें, माँ, मुझे और सभी को क्षमा करें, लेकिन मैं इसे यहाँ करने की कोशिश कर रहा हूँ। मैं इसका इतना भार महसूस करता हूं। मुझे लगता है कि मैं श्री गणेश की भूमि से आता हूं। मेरी मां के प्रति अगाध भक्ति है। मेरा उसके प्रति जबरदस्त समर्पण है, लेकिन मैं अभी भी उसे नहीं जानता। मैं मुश्किल से ही उनसे संपर्क कर सकूं। लेकिन मैं उन तक पहुंचना चाहता हूं। मैं पूरी तरह से परमात्मा के राज्य में प्रवेश करना चाहता हूं, तो सहस्रार के स्थान पर दृढ़ता से रहने के लिए कृपया,  आप सभी समर्पण के जबरदस्त कार्य के रूप में, आइए अगले वर्ष, जब वह वापस आती है, हमारी आत्मा को शक्ति प्रदान करने, हमारी श्रद्धा को मजबूत करें; हमारे स्व को पूर्णता प्रदान करें ; हमारे अहंकार को नीचे रखें; कंडीशनिंग से छुटकारा पायें, सभी कल्पनाओं और हमारी मानसिक गतिविधि से छुटकारा पायें और सिर्फ माँ के प्यार का आनंद लेते रहें । जय श्री माताजी। [सब] जय श्री माताजी!

वारेन के शब्दों ने वास्तव में मेरे दिल को हिला दिया है, और अगर इंग्लैंड मेरा दिल है, तो इंग्लैंड को भी महसूस करना चाहिए: यह श्री गणेश की आत्मा है।

और मुझे कहना होगा कि मैंने वॉरेन में इतनी सारी चीजें देखी हैं, जो बहुत दिलकश हैं। जब भी मैंने चीजों को लेकर हताशा महसूस की है, आप देखिए, उसे देखकर मुझे लगा कि मुझे कुछ और करना चाहिए, क्योंकि वह वास्तव में मुझसे बहुत प्यार करता है, मैंने देखा है, पूरे निस्वार्थ समर्पण के साथ। लेकिन समर्पण एक ऐसा शब्द है जिसमें प्रेम की वह सुंदरता नहीं है। मेरा मतलब है कि अगर मैं नीचे बैठी हूं तो वह तुरंत चिंता करेगा कि मुझे चाय मिल गई है, या अगर मुझे कुछ गर्म करने की जरूरत है, या यहां और वहां छोटी चीजें हैं, और मैं देखती हूं – मुझे आश्चर्य होता है। किसी भी अन्य सहज योगी की तरह वह इधर-उधर उछल-कूद कर रहा होगा और चीजों को समायोजित करने के लिए खोज रहा होगा। और यहां तक ​​​​कि अगर मैं वास्तव में एक बार भी कहती हूं, “हो सकता है,” वह ऐसा नहीं करता है, बस नहीं करता है। वह बोला, “बस यह, हो गया, बस गया!” मैंने उसे कभी मुझसे मिलने के लिए समय देने की मांग करते नहीं देखा, कभी नहीं। उसने एक बार भी नहीं कहा, “माँ, मुझे आकर तुमसे मिलना चाहिए!” कुछ नहीं, कभी नहीं!

मुझे नहीं पता कि उसने अपनी पूरी यात्रा में कितना पैसा खर्च किया। मुझे नहीं पता, सच में। और मैं चाहती थी कि, कोई यह कहे कि, “माँ, हमें उसकी यात्रा के लिए भुगतान करना होगा!” क्योंकि उसने वास्तव में अपना सारा पैसा खर्च कर दिया है। और मैं खुश थी कि,  डेविड मेरे लिए यह बात लाया, मैं बहुत खुश थी।

एक चीज जो मुझे लगता है कि, आप प्यार की मांग नहीं कर सकते, वह कुछ ऐसा है जो आप नहीं कर सकते। किसी को प्यार करने के लिए कहना बहुत मुश्किल है, लेकिन मुझे लगता है कि यही वह बिंदु है जिसे किसी व्यक्ति को देखना चाहिए। जब आप श्री गणेश के बारे में सोचते हैं, तो आपको बस इतना पता होना चाहिए कि वे माँ से इतना प्यार करते हैं कि एक छोटा सा इशारा भी, वह जानता है कि मुझे क्या चाहिए, वह जानता है। वह मुझे भी अच्छी तरह जानता है। वह मेरे जैसा दयालु बिल्कुल भी नहीं है, क्योंकि वह उन लोगों को माफ नहीं कर सकता जो मेरा अपमान करने की कोशिश करते हैं, वह नहीं कर सकते। जो मुझे धोखा देने की कोशिश करते हैं, वे जो घमंडी या अहंकारी होने की कोशिश करते हैं। वह नहीं मानता, वह उस पर विश्वास नहीं करता, वह नहीं कर सकता। वह दंड देना चाहता है। वह दंडित करने के लिए तैयार है, ऐसे लोगों को दंडित करने के लिए बहुत उत्सुक है। लेकिन अगर मैं कहूं, “नहीं। उसे बख्श दो,” वह मेरी बात सुनता है।

यह उनका गुण है: वह मेरे खिलाफ कुछ भी सहन नहीं कर सकते, सहन नहीं कर सकते! और अगर उन पर छोड़ दिया जाता, मुझे लगता है कि मुझे नहीं पता कि कितने सहजयोगी रहते। यहाँ तक की ऐसा कहने पर भी कि, “नहीं माँ!” स्वयं, वह आपको उस बिंदु पर काट देते है। लेकिन मैं नहीं चाहती कि ऐसा हो, क्योंकि वह नहीं जानते कि, आपको अभी भी मदद, ध्यान, और जबरदस्त करुणा की आवश्यकता है।

लेकिन तुम अपनी माता को केवल श्रद्धा के द्वारा, विश्वास के द्वारा ही जान सकते हो। और वह जो कहता है वह सच है। और यह श्रद्धा क्यों? मेरा मतलब है कि आप हर दिन चमत्कार देखते हैं, न केवल आज: ऐसे खेल, ऐसे खेल, ऐसी चीजें चल रही हैं; किस तरह मैं अपने आप को धीरे-धीरे व्यक्त कर पायी। मैं आपको कोई झटके नहीं देना चाहती। तो बहुत सुन्दर ढंग से मैंने परमात्मा के नाटक को सामने लाने का प्रयास किया है। लेकिन मुझे लगता है कि, अब भी, लोग बहस में पड़ जाते हैं: अगर मैं कहती हूं, “नहीं, यह काम नहीं करेगा। यह अच्छा नहीं है,”

मुझे कम से कम चार, पांच घंटे इधर-उधर घूमने और लोगों के दिमाग में इस बिंदु को लाने में बिताने होंगे कि, “नहीं, यह अच्छा नहीं है, इससे आपकी कोई मदद नहीं होगी।” लेकिन एक बार मैंने उससे पूछा, “तुम इतने आज्ञाकारी कैसे हो?” मेरा मतलब है, मैं जो कुछ भी कहती हूं वह, बस उसे एक इशारा भी मिलता है, वह मान जाएगा। उसने कहा, “माँ मैंने एक बार सबक सीखा: वह मेरी अपनी शादी है। और आपने ना नहीं कहा, लेकिन आपने मुझसे कहा, ‘अगर यह आपको प्रसन्नता देता है।’ आपने यह नहीं कहा, ‘यह आपको आनंदित करेगा,’ और मैंने इससे एक सबक सीखा है।”

लेकिन बात यह है कि, हम हमारे सबक नहीं सीखते हैं। हम अपना सबक नहीं सीखते। हम तर्क देते हैं: यह अहंकार से आता है। यदि हमारे पास प्रति- अहंकार है, तो हम दूसरों को पागल बनाते हैं! जैसे कोई अमेरिका से आया और, वह दीवाना था कि उसे आकर मुझे मिलना ही चाहिए। और मैं बहुत व्यस्त हूँ, मेरे पास समय नहीं है, आप जानते हैं। मुझे इस किताब को ठीक करना है, मुझे उस किताब को ठीक करना है। अब हमें यह एडवेंट (किताब)करना है, और यह करना ही है। मुझे अपने घर की देखभाल करनी है, और यह और वह। मैं बहुत व्यस्त हूँ। लेकिन उस व्यक्ति ने वास्तव में उन्हें पागल कर दिया, कि वह मुझे अवश्य मिले ! अब यदि आप अमेरिका से आते हैं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि आप मुझे अवश्य मिलें, क्योंकि आपने कभी मेरे साथ समय तय नहीं किया था| मैं अभी यहाँ व्यस्त हूँ। जब मैं अमेरिका गयी थी, तो सब ठीक है, जो सच है।

और  हम जो बर्ताव कर रहे हैं, हमें इस बात का एहसास नहीं है कि, हम माँ से प्यार नहीं करते, हम उससे प्यार नहीं करते। हम अपनी जरूरतों के बारे में सोचते हैं, हमारे प्रभाव, हमारी बातें, यह एक सच्चाई है। जैसे किसी को मैंने कहा, “ठीक है, आप बोलिये, आप एक अच्छे वक्ता हैं।” ठीक है, व्यक्ति बोलना शुरू करता है, और वह अहंकारी हो जाता है। आप कैसे हो सकते हैं? अगर आप सिर्फ एक अच्छा भाषण देना शुरू करते हैं, तो आप अहंकारी हो जाते हैं। किसी ने अच्छी तस्वीरें खिंची,  तो मैंने कहा, “ये अच्छी तस्वीरें हैं।” अहंकारी हो जाता है! आप इस देश में किसी की प्रशंसा नहीं कर सकते – यह उनके लिए सबसे बुरी बात है। वे कहता हैं, “आज्ञा स्वच्छ है।” मैं नहीं जानती कि यहाँ आज्ञा स्वच्छ किस प्रकार से है! आप प्रशंसा नहीं कर सकते। मेरा मतलब है कि मैं भला बनने की कोशिश करती हूं। मैं कहती हूं, “ओह, आपकी तस्वीरें बहुत अच्छी हैं।” व्यक्ति तुरंत अहंकारी हो जाता है। आप किसी को कुछ काम देते हैं, “ठीक है आप यह काम करिए, पोस्टरिंग।” कोई ऐसा कर रहा है : उसका अहंकार बढ़ जाता है! यह क्या है? गुब्बारे की तरह?

कोई गहराई नहीं है। कोई गुरुत्वाकर्षण नहीं है। अब क्यों? ये है प्रश्न। उसने मुझसे कई बार पूछा, “ऐसा क्यों होता है माँ?” कारण यह है – मैंने एक अन्य  दिन उनसे कहा, मुझे लगता है कि उनके पास इस पर एक टेप है; आप इसे सुन सकते हैं – एक साधारण बात यह है कि हमने यहां एक सतही जीवन जिया है। हम सतही लोग हैं। क्योंकि समाज ऐसा है, इस मशीन ने हमें ऐसा बनाया है, और हमने किताबें पढ़ी हैं। हमने अहंकार को बढ़ावा दिया है। हमारे पूर्वज जा कर लड़े दूसरे देशों में, यह सोचकर कि उनका कोई अंत नहीं है। तब हमें यह युद्ध मिले। युद्ध के साथ हम भी बेतुके हो गए, या तो आक्रामक, या हम प्रति-अहंकार के साथ हो गए हैं। हम भूतों से ग्रसित हैं। हमारे पास कंडीशनिंग है। ये सब चीजें हैं। बात यह है कि, हम अपने वास्तविक स्व नहीं हैं।

इसलिए मुझे लगता है कि वह अस्तित्व जो आपकी आत्मा से प्रबुद्ध होने वाला है, अहंकार से आच्छादित है, और ऊपर से उस सतही सत्ता की चमक है जो आप हैं। तो माँ कुछ कहती है – “ठीक है!” माँ ने ऐसा किया – “ठीक है!” अंदर कुछ नहीं जाता मुझे लगता है। कोई प्यार नहीं है।

यदि आप किसी से प्रेम करते हैं, भले ही वह व्यक्ति कहीं आस-पास भी हो… आप जानते हैं कि माँ लंदन में हैं, जरा सोचिए, “माँ लंदन में हैं।” जरा सोचो! अगर तुम मुझसे प्यार करते हो, तो सोचो। यह कितना सुखद विचार है: “वह इंग्लैंड में है!” यह एक सुखद विचार है। उन पंक्तियों पर विचार करें। लेकिन यह काम नहीं करता है क्योंकि वह असली चीज, जो असली चीज अंदर है, वह अहंकार या प्रति-अहंकार से ढकी हुई है। तुम्हारे भूत बीच में हैं। तो क्या होता है कि, आप उस सतही बकवास के साथ रहते हैं। अंदर कुछ नहीं जाता। यह सब उस स्तर पर है। आप किसी से भी पूछें, वे कहेंगे, “मैं ठीक हूँ। मैं ऐसा ही हूं।” क्यों? अंदर कुछ नहीं जाता, क्यों? क्योंकि, वास्तविक आत्म खो गया है। जो आपको प्रबुद्ध करने वाली है, वह आपकी कृत्रिम चीज नहीं है। आप कृत्रिम फाइबर जानते हैं, यदि आपके पास कृत्रिम फाइबर है, तो यह किसी भी चीज में प्रवेश नहीं करता है। वह (आत्मा)हर चीज में प्रवेश कर सकता है, लेकिन कुछ भी उसमें प्रवेश नहीं कर सकता। इस तरह, वह कृत्रिम चीज हम पर, और हम हर समय उसके साथ रहते हैं।

अब उन्होंने महाराष्ट्र के बारे में क्यों कहा है क्योंकि,  महाराष्ट्रियन कृत्रिमता के संपर्क में नहीं हैं, वे नहीं जानते कि कृत्रिमता क्या है। लोग सोचते हैं कि वे बेवकूफ हैं, वे मूर्ख हैं, वे व्यापार के लिए अच्छे नहीं हैं, वे इसके लिए अच्छे नहीं हैं, वे उसके लिए अच्छे नहीं हैं। लेकिन मुख्य बात यह है कि उनका वास्तविक अस्तित्व किसी भी ऐसी बकवास से नहीं ढका है कि: “मैं कुछ हूं!”

मैंने वारेन को ऐसा महसूस करते हुए कभी नहीं देखा, और यह आश्चर्यजनक बात है। मैंने उसे कभी यह महसूस करते नहीं देखा कि वह महत्वपूर्ण है, कि वह मेरे पास हो, वह मेरी संगती में ही रहे – कभी नहीं! यहां तक ​​कि मैंने उसे कहीं आसपास भी नहीं सुना। मुझे उसे बुलाना पड़ता है। जब तक मैं उसे बुलाती नहीं, वह मेरे सामने कभी नहीं आएगा। वह देखना चाहता है कि क्या मुझे उसकी जरूरत है, नहीं तो उसे कोई फर्क नहीं पड़ता। उसे बस यही लगता है कि मैं आसपास ही हूं, ”मां यहीं कहीं है।” जहाँ तक और जब तक मैं उसे नहीं बुलाती। लेकिन अगर मैं उससे कहूं, “वॉरेन मुझे …..चाहिए,” वह जहां भी हो, वह बस दौड़कर आ जाएगा|

यह आपके लिए बहुत अच्छा उदाहरण है। मुझे खुशी है कि इस तरह के कुछ उदाहरण हैं। कई अन्य हैं; मैं यह नहीं कह रही हूं कि ऐसा केवल वॉरेन है।

और फिर, यदि आप सहज योग में कोई जिम्मेदारी लेते हैं, तो आप सोचने लगते हैं कि आप महान हैं, आप एक महान सहज योगी हैं: आपने यह किया है, आपने पोस्टर लगाया है, आपने यह किया है। यह क्षमता प्रदर्शित करता है, कैलिबर दिखाता है। पूरी तरह से मृत परिस्थितियों के लोग इतने ऊंचे उठ गए हैं, और जबकि सामान्य परिस्थितियों के लोग कहीं नहीं हैं, बस वे वहीं हैं, क्यों? क्षमता। अब सभी के पास वह क्षमता है। मैं जो कहना चाह रही हूं: हम में से प्रत्येक के पास क्षमता है। लेकिन यह सभी में स्पष्ट अभिव्यक्त नहीं होती क्योंकि उनके पास कितनी मात्रा में आवरण होता है। हर किसी में प्यार करने की क्षमता होती है, सभी में क्षमता होती है। लेकिन अगर तुमने अपने आप को पूरी तरह कृत्रिमता से ढक लिया है तो तुम प्रेम नहीं कर सकते।

अब अगर आप मुझसे पूछें, “माँ, प्यार कैसे करें?” मैं तुमसे क्या कहूं? मैं तुमसे प्यार करती हूँ, बेशक। मैं तुम सब से प्यार करती हूँ। मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं। मैं तुम्हारे बारे में परवाह करती हूँ। लेकिन फिर जो मैं पाता हूं, जब मुझे किसी की चिंता होती है, तो वह व्यक्ति फायदा उठाने लगता है। मुझे कोई आपत्ति नहीं है यदि आप फायदा उठाते हैं, लेकिन फायदा उठाकर वह व्यक्ति पूरी तरह से नीचे चला जाता है। अगर मुझे किसी बात की परवाह होती है, तो वह तुरंत सोचने लगता है कि वे बहुत महत्वपूर्ण हैं, कि, “माँ मेरे बारे में बहुत परेशान है!”

अब समझने की कोशिश करो कि यह एक ऐसा देश है जो मेरा हृदय है, मेरा दिल ही है। और सहस्रार और कुछ नहीं बल्कि हृदय है। क्या आपने देखा है कि यह पहले से ही अच्छी तरह से कैसे प्रबंधित किया जाता है कि, अगर कुंडलिनी को भेदन करना है, तो उसे हृदय चक्र को भेदना होगा? अगर आपका हृदय ठीक नहीं है, तो कुंडलिनी यह भेदन कर सहस्त्रार में नहीं जा सकती। क्या आपने यह देखा है कि, ब्रह्मरंध्र, अंतिम दरवाजा, हृदय चक्र पर है।

मैं सबको अच्छी तरह जानती हूं। ऐसे लोग हैं जो हमारे साथ माध्यम हैं। मुझे पता है। लेकिन वे नहीं जानते कि वे नर्क में जाएंगे। यह एक बहुत ही खतरनाक समय है जिसमें आप हैं – सावधान रहें! और इससे मुझे और भी बुरा लगता है जब मुझे लगता है कि वे नहीं जानते कि आपके पैर किस भयानक समय पर लड़खड़ा रहे हैं। तो खेल मत खेलो!

मुझे पता है कि अंग्रेजी भाषा की अपनी शैली और चीजें हैं, अंग्रेजी शिष्टाचारों के अपने तौर-तरीके हैं। भूल जाओ कि तुम अंग्रेज हो!| यही सबसे अच्छा तरीका है।

अंग्रेज सोचते हैं कि, “हमलोग भिन्न हैं। हम हृदय के हैं, देखिये – महान लोग!” इटली में मैंने वहां आई एक पत्रकार महिला, बहुत अच्छी महिला से कहा इंग्लैंड हृदय है, । उसने कहा, “माँ एक बात जो आपने कही थी, वह वाक्य मुझे पसंद नहीं आया, ‘इंग्लैंड हृदय है।’ आह, यह कैसे हो सकता है? भयानक?” उसे विश्वास नहीं हो रहा था। उसने कहा, “केवल इसलिए कि आपने कहा है तो मैं इसे बर्दाश्त करती हूं, लेकिन कोई और यह कह रहा होता तो मैं बर्दाश्त नहीं कर पाती!” तो हम अंग्रेज के रूप में कितने नीचे चले गए हैं, आपको विदेशों में अंग्रेजों की प्रतिष्ठा देखनी चाहिए। और हमने अपनी घूमते हुए गुंडों जैसी प्रतिष्ठा तक प्रगति की है!

इसलिए जब किसी देश में ऐसी स्थिति है, तो हमें इसे लेकर कितना गंभीर होना चाहिए।चूँकि, यह देश दुनिया को बचाने वाला है या दुनिया को क्षति करने वाला है, क्योंकि यह सहस्रार पर है। जहां मां को स्वीकार किया जाना चाहिए। जहाँ माँ को बसाना तथा पूजा और आराधना करना है। लेकिन क्या हमारे पास यह समझने की गंभीरता है कि हम ऐसे समय में पैदा हुए हैं जब जिम्मेदारी हमारे ऊपर बहुत अधिक है? हमें यह एहसास नहीं होता कि हम हृदय में पैदा हुए हैं, इसका मतलब है कि हमारी जिम्मेदारी बहुत अधिक है, अन्य लोगों की तुलना में बहुत अधिक है। इसके विपरीत, “हम हृदय से पैदा हुए हैं, इसलिए हम महान लोग हैं!” – सब ख़त्म !

कुछ चीजें हैं जिनका आप पालन करें, साधारण चीजें, आपकी मदद करने वाली हैं। एक अन्य दिन मैं किसी ऐसे व्यक्ति से मिली, जिसके पास हंसा चक्र की पकड़ जैसी बेतुकी चीज़ थी। मैंने कहा, “आप हंसा चक्र, पर ग्रसित  कैसे हो सकते हैं? क्या आप रोज तेल डाल रहे हैं? रोज घी डाल रहे हो?” वह बोला, नहीं!” मैंने कहा क्यों? क्या यह एक साधारण सी बात है, आप रोज क्यों नहीं करते?” “माँ यहाँ है। वह हमारा ध्यान रखेगी।” जिम्मेदारी महसूस नहीं होती क्योंकि इसमें गंभीरता नहीं है! आप नहीं जानते! काम बहुत ऊँचा है, आप इसे कर सकते हैं, आपके पास क्षमता है। अपने आप का सामना करो, आप में से हर एक। यह दूसरों का सामना करना नहीं है। अपने आप का सामना करो!

और मुझे लगता है, वास्तव में मुझे इटालियंस कहना चाहिए, वास्तव में मुझे वही कहना चाहिए जो वॉरेन कहते हैं, यह सच है, यह सच है। घर में हमारे साथ एंटोनियो है, मैं देखती हूं: वह अन्य सभी अंग्रेज लोगों से बहुत अलग है। वह बहुत अलग है। वह बहुत संतुलित है, वह वहां इतना अधिक  है।

फिर, फिर कुछ लोग हैं, अज़ीब लोग, मैंने देखा है, वे हमारे साथ रहे हैं, अब तक, इसलिए: वे जाएंगे और यह कोर्स करेंगे, वे इस या उस पर जाएंगे। यह हर समय बकवास चल रहा है! और ऐसा एक व्यक्ति उन सभी को खराब कर सकता है। इंग्लैंड में सहज योग की परिधि पर हमारे पास बहुत से मूर्ख लोग हैं। परिधि पर हमारे पास इतनी संख्या में लोग और कहीं नहीं है। हमारे पास जबरदस्त लोग हैं, साथ ही कुछ लोग जो वास्तव में भयानक हैं। मैं हर जगह एक काली सूची बनाने की कोशिश कर रही थी, और हमारे पास इंग्लैंड में सबसे ज्यादा संख्या थी! इंग्लैंड में अधिकतम संख्या।

अब जब मैं जा रही हूं और आपको यहां छोड़ रही हूं, तो देखिये, कभी-कभी मेरे दिल में ऐंठन होती है, क्योंकि मैं जानती हूं कि आप अभी तक परिपक्व नहीं हुए हैं। लेकिन परिपक्व क्यों नहीं? क्योंकि इस बारे में कोई गंभीरता नहीं है।

तब वे आएंगे, “हमें किसी भी एक नेता की जरूरत है।” क्यों? आप क्यों चाहते हैं कि कोई आपके सिर पर हर समय ठोके, आपको ऐसी बातें बताए? क्यों नहीं अपनी गरिमा के साथ विकसित होते?

अब मैं जा रही हूँ, आप सभी को यह काम करना है। इसलिए जब आप भारत जाते हैं तो भारतीय भी कहते हैं कि अंग्रेज सबसे खराब है। प्रमाण पत्र है। और आपको सबसे अच्छे लोग बनना है, यहां तक ​​कि आस्ट्रेलियाई लोगों से भी बेहतर! वे बहुत सरल हैं। चूँकि अब हम सहस्रार में हैं, सहस्रार में काम कर रहे हैं। क्या तुम देखते हो? मुझे ये सब बातें क्यों कहनी पड़ रही हैं? क्योंकि आप पैदा हुए हैं, आप इस देश में पैदा हुए हैं। आप लोग हैं। लेकिन मैं जो कुछ भी कहती हूं, ऐसा होता है, “मां बहुत अच्छा बोलती हैं। चलो एक टेप रखें| ठीक है, सुनकर बहुत अच्छा लगा! बहुत बढ़िया मनोरंजन है आप जानते हैं, माँ बोल रही हैं! वह बहुत अच्छी बात करती है।” लेकिन यह कुछ भी अंदर नहीं जाता, ! यह नहीं जाता है। यह सिर पर रखे प्लास्टिक की तरह है, पूरा प्लास्टिक कवर।

तो व्यक्ति को कुछ चीजें सीखनी पड़ती हैं, कुछ चीजें, जैसे विशुद्धि चक्र: अब अंग्रेज बात नहीं करते है, लेकिन वे अपना सिर बहुत ज्यादा हिलाते हैं। अगर वे हां कहते हैं, तो वे हां, हां, हां, हां, हां, हां, हां कहते रहेंगे। हर समय उनकी गर्दन हिल रही है। मेरा मतलब है कि उनकी गर्दन लंबी है, और उन्हें हर समय अपनी गर्दन हिलाते रहने को चाहिए। कोई जरूरत नहीं है। अपनी गर्दन को इतना क्यों मोड़ें? भले ही वे कुछ कहें, “हाँ, हाँ, हाँ, हाँ।” जैसे वे कहेंगे, “आज का कार्यक्रम बहुत अच्छा चला।” “हां हां हां!” खुद प्रमाणित कर रहे हैं। लेकिन वे नहीं देखते, क्योंकि वे इसे देखना नहीं चाहते, यह विशुद्धि चक्र है। आप बात नहीं करते हैं, क्योंकि जब आप बात करते हैं, तो भयानक चीजें सामने आती हैं, इसलिए आप बात करने से इतना डरते हैं कि आप बात ही नहीं करते हैं। लेकिन आईने पर खुद से बात करो, खुद से बात करो। देखें कि आप कैसे सम्मान कर सकते हैं, आप कैसे दयालु हो सकते हैं, आप कैसे अच्छे हो सकते हैं। लेकिन नहीं, अभ्यास व्यंग्य का अधिक है, कठोर बातें, भयानक बातें, कहने का अधिक और बस इतना ही। मुझे पता है कि यह एक स्वभाव है, इसमें एक सुंदर चीज होनी चाहिए। यह गंभीर उपदेश नहीं होना चाहिए, नहीं। लेकिन कुछ मीठा और अच्छा कहो।

जब मैं कुछ मधुर कहती हूं तो यह बहुत स्पष्ट होता है। जैसे, एक अन्य दिन , हम फ्रांस में थे, और मैंने गुइडो से पूछा, “तुम्हें इतालवी में बोलना बेहतर होगा और कोई तुम्हारा अनुवाद करेगा।” रास्ते में मैं बस यही सोच रही थी, “गुइडो का अनुवाद कौन करेगा, क्योंकि कोई व्यक्ति जो फ्रेंच और इतालवी अच्छी तरह जानता है, वह कौन करेगा?” और जब मैंने हॉल में प्रवेश किया तो मैंने देखा कि रूत उसके साथ खड़ी है। मैंने उसे नहीं देखा था। मुझे नहीं पता था कि वह वहां थी। वह पूरे रास्ते आई थी। और पूरे रास्ते वह वहाँ से भागती है, और अब वह अपने हाथ में यह माइक पकड़े हुए है, और वह मोर्चा संभाले हुए है। तुम्हें पता है, मेरा दिल इतना बड़ा हो गया था, और मुझे सचमुच उसे गले लगाने का मन कर रहा था। और आप देखिये, जो मैंने महसूस किया वह आँखों ने कह दिया | जिस तरह से वह इधर-उधर कर वहां  आई, आप देखिए, वह वहीं थी। मैं चिंतित थी कि, कौन अनुवाद करेगा और वह वहीं थी।

आप देखिए मुझे भी ऐसे ही मदद मिलती है, जब लोग मुझे प्यार करते हैं तो मुझे पता होता है कि मुझे मदद मिलती है। लेकिन अगर वे मुझसे प्यार नहीं करते हैं तो बाधाएं, समस्याएं, यह, वह हैं। आप इतने ऊब जाते हैं कि आप उन्हें देखना नहीं चाहते, कभी-कभी ऐसा होता है। लेकिन अगर प्रेम है, तो आप जानते हैं कि सारा संचार प्रेम के माध्यम से काम करता है, यह सूक्ष्म प्रेम। पूरे ईथर(आकाश) को यह सूक्ष्म प्रेम प्राप्त है, हर पदार्थ को यह सूक्ष्म प्रेम प्राप्त है, सब कुछ है। और पूरी बात तरंगो में चली जाती है और आपको बस संदेश मिल जाता है।

लेकिन अगर आप उस ग्रहण करने वाले reception point बिंदु पर नहीं हैं या अगर आप नहीं हैं तो कुछ भी काम नहीं करता है: न तो आप और न ही मैं। यह आपसी बात है। मैं आपकी मदद करती हूं, लेकिन आप भी मेरी मदद करते हैं। जो मैं हूँ वो तुम हो।

लेकिन तुम उस स्तर पर नहीं हो क्योंकि तुम सतहीपन पर हो। और इस सतहीपन के कारण भी, तुम सामूहिक नहीं हो। लेकिन सामूहिकता की भावना बहुत, बहुत पेचीदा भी है, इसे समझना चाहिए। कुछ लोग समूह बनाने लगते हैं और उन्हें लगता है कि वे सामूहिक रहे हैं। समूह बनाना सर्वाधिक गैर सामूहिक व्यवहार का संकेत है। लेकिन वे सोचते हैं, “हम बहुत सामूहिक रहे हैं, हम बहुत अच्छे रहे हैं, आप देखिए!” बहुत खुश लोग!

तो मुझे आपको जो कहना है वह यह है कि, आप को चाहिए की अपनी जिम्मेदारी समझें।

आप प्रधान कार्यालय में, प्रधान कार्यालय में हैं। और जो लोग प्रधान कार्यालय में नहीं हैं, वे आपसे बहुत बेहतर कर रहे हैं। तो पूरे ऑफिस को गिरना पड़ता है

अचानक मुझे खबर सुनाई देती है कि कोई किसी से लड़ रहा है। फिर से वह अपने सामान्य स्व में वापस चला गया है। केवल इंग्लैंड में। वह फिर से ग्रसित हो जाता है। फिर से उसे छोड़ दिया जाता है, फिर से उस पर पकड़ हो जाती है। फिर से वह निरंजित किया जाता है, फिर से उस पर पकड़ आ जाती  है। क्योंकि इसमें कोई गंभीरता नहीं है। जो गंभीर श्रद्धा है वह आपको श्रद्धा युक्त भय देता है।

यह आपको आनंद की अनुभूति देता है, लेकिन विस्मय है। तुम उस श्रद्धा युक्त भय से प्रेम करते हो, उस विस्मय का आनंद लेते हो। माँ आसपास है। हम क्या कर रहे हैं? हम कहाँ है? और वह पहला संकेत है, वह पहला संकेत है, कि आप यह जान रहे हैं कि आपकी माता कौन है – पहला संकेत है। इसमें कूदना बहुत आसान है, जैसे आपकी कुंडलिनी जागरण, मैं आपको बता सकती हूं।

और आप अमेरिकियों को जानते हैं वे तेज़ लोग हैं। मुझे पता था कि अगर वे शुरू करते हैं, तो उन्हें बस शुरुआत भर करना है बस यही शेष बिंदु है। मुझे पता है। अमेरिकियों को बस शुरू करना है, और वे गोली की गति से चल देंगे, बहुत तेजी से चलेंगे। उनके पास गति है। यदि वे गति लेते हैं तो आपको पता होना चाहिए कि वे क्या करने में सक्षम है|

एक और बात है जो बहुत अच्छी तरह से सामने आ रही है, जो मुझे आपको बताना चाहिए, वह है म्यूनिख। मैं वहां नहीं जाना चाहती थी। एक पोलिश, बेवकूफ, महिला थी, उसने मुझे म्यूनिख के लोगों के बारे में सब गलत बताया। तो मैंने सोचा, “अगर यह नमूना है, तो बेहतर होगा कि मैं न जाऊं।” तब मैंने वायब्रेशन महसूस किये: और जबरदस्त चैतन्य ! और जिस गंभीरता से वे मुझे सुन रहे थे, तन्मयता, मानो कोई गणित की कक्षा हो या किसी प्रकार की विज्ञान की कक्षा हो, जिसकी मैं बात कर रही थी, पूरे ध्यान से, बिना पलक झपकाए। मेरे कहे हर शब्द का पूर्ण अवशोषण। मैं इन लोगों पर चकित थी। और एक बार जब जर्मन सहज योग में आ गए, तो ईश्वर आप सभी की रक्षा करें! मैं आपको आश्वस्त कर सकती हूं, आप उनके स्तर तक नहीं आ सकते, क्योंकि उन्होंने खुद को ऐसे ही बनाया है। वे निर्मित लोग हैं। वे अनुशासन के लोग हैं। और जब वे सहज योग में आएंगे तो आप देखेंगे कि क्या होगा।

तो यह सब डांवाडौल तरीके, और इस तरह का जिसे आप कहते हैं, मुझे अंग्रेजी शब्द में नहीं पता कि आप क्या कहते हैं।

सहज योगी: विश्य-वॉशी।

श्री माताजी : विशी-वॉशी की बात अलग है। मैं जो कह रही हूं वह एक ऐसा व्यक्ति है जो न तो यहां है और न ही वहां, हर समय इसी तरह झुकता रहता है। लेचा-पेचा जिसे हम हिंदी भाषा में कहते हैं। और मुझे यह भी बता रहे हैं, “मैं ऐसा ही हूं!” यह सब बकवास! कितने छूट जाएंगे? मुझें नहीं पता।

इसलिए, अगर मैं कुछ भी कहूं, तो बस इतना जान लो कि मैं जानती हूं कि वह क्या है। मुझे पता है कि क्या होने वाला है। लेकिन आप अपने सबक नहीं सीखेंगे, मुझे पता है। अगर मैंने किसी से कहा, “वापस मत जाओ!” या, “रुके रहो!” वह व्यक्ति अंततः सीखता है कि, “यह बात सही थी। माँ ने कहा था।” लेकिन कितनी बार? अब बात यह है।

तो अब, मैं दूर जा रही हूँ। मैं आपको बताना चाहती हूं कि हम सभी को गंभीर इंसान बनना होगा। आपने जो भी गलतियाँ की हैं, उसे भूल जाइए। गंभीर लोग बनो! जो अहंकारी हैं, समूह बनाने की कोशिश कर रहे हैं, माध्यम हैं, वे बेवकूफ लोगों की तरह बात करते हैं, बेवकूफ तरीके से कार्यक्रम आयोजित करने की कोशिश कर रहे हैं, बड़े व्याख्यान दे रहे हैं, अब सामान्य हो जाना चाहिए! नहीं चलेगा! गंभीर रहो! हमें सतर्क रहना होगा। जो अभी सोएंगे वे पूरी तरह से हार जाएंगे। मुझे तुम्हे चेतावनी देनी पड़ेगी। यह महत्वपूर्ण है। समय कम है। आप महत्वपूर्ण लोग हैं, इसमें कोई संदेह नहीं है। लेकिन अगर आप अच्छे नहीं हैं, तो आप अपनी स्थिति पूरी तरह से खो देंगे।

उस दिन, जब मैं भारत जाने की सोच रही हूं, एक मां के लिए, वह उन लोगों के बारे में अधिक चिंतित है जो अभी भी उस स्थिति में नहीं हैं। वह हमेशा चिंतित रहती है। जैसे नाव जा रही है, इंग्लैंड से भी बहुत से लोगों को नाव में बैठाया है, लेकिन बहुत से लोग हैं जो अभी भी पानी में ही आधे रास्ते हैं, ऊपर आ रहे हैं, नीचे जा रहे हैं। आप उन लोगों के बारे में चिंतित नहीं हैं जो नाव पर हैं, लेकिन आप उन लोगों के बारे में चिंतित हैं जो अभी भी आधे रास्ते में हैं। और वह चिंता मेरे सिर पर है।

मैं गंभीर हूँ। जलवायु गंभीर है। मौसम गंभीर है। आज कैसे बारिश हुई और बारिश हुई और बारिश हुई। सारी प्रकृति परेशान है। यह मत सोचो कि केवल अगर तुम शिक्षित हो, या अशिक्षित हो, तुम इस तरह के जीवन से आते हो या उस तरह के – यह कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं है। आत्मा इन सब चीजों से ऊपर है। लेकिन आत्मा को चमकने के लिए, आपकी नसों पर कार्यान्वित होने के लिए, उस कृत्रिम झलक को दूर करना होगा, अन्यथा यह कभी काम नहीं करेगा। आप जो कुछ भी करते हैं, उसने मुझे प्रसन्न करना चाहिए, यह उन तरीकों में से एक है। यह मुझे खुश करना चाहिए। यह संकेतों में से एक है।

तो हम ऐसा कैसे करें? 

मुझे अपने दिल में बसाओ!

बस मुझे अपने दिल में बसाने की कोशिश करो, यह बहुत आसान है। मैं अब आपके सामने हूं। मैं व्यक्तिगत रूप से हूं।

मैं आज ही अपने एक रिश्तेदार को आत्मसाक्षात्कार देने की कोशिश कर रही थी। और मैंने कहा कि, “तुम अपनी आँखें बंद मत करो।” उसने कहा, “नहीं, मैं आपका चेहरा नहीं देख रहा हूं क्योंकि जब मैं आपको देखता हूं, तो मुझे लगता है कि आप मेरी चाची हो। लेकिन मैं तो बस आपके चरणों की ओर देख रहा हूं, ताकि अब मुझे ऐसा न लगे कि आप मेरी चाची हो। आप बहुत महान हो। और आपका चेहरा ही मुझे भ्रम में डालता है।” वह देख पाया था कि यह एक महामाया है। उन्होंने कहा, “मैं केवल आपके चरणों में देखता हूं। और आपके चरणों से ही मैं इस बाधा, इस भावना को पार कर सकता हूं।” उसी तरह जब मैं महामाया हूं, मैं जानती हूं कि मैं हूं, मुझे होना ही था, लेकिन आपको मेरे चरण अपने हृदय में रखना है, बस मेरे चरण अपने हृदय में रखना होगा।

क्योंकि फोटो, चेहरा, सब कुछ एक भ्रम हो सकता है। हो सकता है कि मेरा चेहरा देखकर आप अपनी बाधाओं को पार न करें। कहने के लिए, “मुझे माँ को देखना ही चाहिए।” “मुझे यह करना ही चाहिए।” “माँ को मेरे घर आना ही चाहिए।” “उसे मेरे स्थान पर भोजन करना ही चाहिए।” “उसे मेरे घर आना चाहिए।” यह सब कितना बेवकूफी भरा है, मुझे समझ नहीं आ रहा है कि इन लोगों को क्या हो गया है!

माँ, मेरे हृदय में आओ।

मुझे अपना हृदय स्वच्छ करने दो ताकि आप वहाँ रहो। अपने चरण मेरे हृदय में रख दो।

मेरे हृदय में आपके चरणों की पूजा हो।

मुझे भ्रम में न रहने दें।

मुझे भ्रम से दूर करो।

मुझे हकीकत में रखो।

सतहीपन की झलक को दूर करें।

मुझे अपने हृदय में आपके चरणों का आनंद लेने दो।

मुझे अपने हृदय में आपके चरण देखने दो।

केवल ऐसे लोग। ब्रह्मा, विष्णु, महेश ने भी किया है। तो क्या आपको नहीं लगता कि आपको यह करना है?

तो अपने आप को विनम्र बनाओ! अपने आप को अपने हृदय में नम्र करें। अपने दिल में नम्र हो जाओ। अपनी विनम्रता का आनंद लें। अपने गुणों का आनंद लें। सहज योगी का सबसे बड़ा गुण विनम्रता है।

अब, आपने बहुत सी चीजें देखी हैं जो आपको आश्वस्त करती हैं। लेकिन किसी भी तरह से इसका मतलब किसी भी तरह की अधीनता नहीं हो सकता, क्योंकि तुम मेरे अधीन क्या  दे सकते हो? इसके बारे में सोचो। जब हर अधीनता वरदान है, तो फिर मेरे अधीन क्या दे रहे हो? हृदय में हर एहसास एक आशीर्वाद है। अभी आप इसे महसूस करें और आप अपने हृदय में आनंद महसूस करते हैं। फिर आपकी अधीनता क्या है? किस बारे मेँ?

मैं उन लोगों को समझ सकती हूं जो अभी-अभी आए हैं, जो किसी काम के नहीं हैं। लेकिन तुम परिधि पर नहीं हो। लेकिन उनमें से कुछ एकदम से परिधि में चले जाते हैं।

आप उन्हें कुछ काम दें – समाप्त!

अगर मैं किसी के लिए मधुर हो जाती हूँ – समाप्त!

अगर मैं किसी को देखती हूँ – समाप्त!

मेरा मतलब है, यह बहुत ज्यादा है। क्या मैं तुमसे मधुर भी नहीं हो सकती।

यदि आप कोई गलती या कुछ भी करते हैं, तो आपको अपनी बाईं विशुद्धि की पकड़ मिलती है। आपने अपनी गलती की , ठीक है, इसे खत्म करो। तुम मुझे प्यार करते हो। हो सकता है कि प्यार में कुछ गड़बड़ हो या हो सकता है कि कुछ हो गया हो, कोई फर्क नहीं पड़ता। “अब, मैं सावधान रहने वाला हूँ। अब आगे से मैं कोई गलती नहीं करने वाला हूं। मैं यह गलती कैसे कर सकता था? क्योंकि मैं पूरी तरह से प्यार में नहीं था। अगर मुझे किसी चीज से प्यार होता, तो मैं ऐसी गलती नहीं करता!”

ठीक है, तो अपने प्यार को विकसित करो। नहीं, तुम ऐसा करोगे कि, “मैं दोषी महसूस करता हूं क्योंकि मैंने ऐसा काम किया है।” तो तुम यह और वह दोनों चूक जाते हो। तो आपकी गलती फिर से बाधा बन जाती है।

इसके बारे में दोषी महसूस न करें। हमें और आगे बढ़ना है। अतीत को भूल जाएं। अतीत को भूल जाएं। अतीत को भूल जाएं। हमें और आगे जाना है। हमें गंभीर लोग बनना होगा। जब हम बात करते हैं तो हमें उस श्रद्धा युक्त भय, उस गरिमा के साथ बात करनी चाहिए। यह बहुत महत्वपूर्ण है और एक बार जब आप उस श्रद्धा युक्त भय को विकसित कर लेंगे तो आपकी एकादश की समस्या गायब हो जाएगी। एकादश की बाधा का नाश होगा। जरा श्रद्धा युक्त भय के बारे में सोचो।

मौन और आनंद को देखें, और श्रद्धा युक्त भय का आनंद समुद्र की तरह गहरा, बहुत गहरा है। सतही स्तर पर समुद्र बहुत अशांत है, लेकिन भीतर खामोश है, बिल्कुल खामोश है। उस गहराई को महसूस करो। श्रद्धा युक्त भय के बिना, आप गहराई में नहीं जा सकते।

मैंने कभी-कभी वारेन से कुछ बातें जोर से भी कही हैं, मुझे पता है, लेकिन यह उसके साथ कभी महसूस नहीं हुआ। लेकिन कुछ लोगों के साथ मैंने कभी नहीं कहा क्योंकि मैं जानती हूं कि वह व्यक्ति इसे मुझसे ग्रहण नहीं करेगा। लेकिन उसे कभी नहीं लगता कि मैंने कुछ गलत कहा है या उसे किसी भी तरह से ठेस पहुंचाई है, यह पूर्ण श्रद्धा युक्त भय का संकेत है। और यह केवल थोड़ी सी पैठ है, बहुत थोड़ी सी तीक्ष्णता जो आवश्यक है। आत्म-महत्व को भूल जाओ। उस महानता को भूल जाइए जो आप खुद के बारे में सोचते हैं। जब तुम शून्य हो जाते हो तो तुम निर्मला हो जाते हो।

जब तक आप प्याले की तरह हैं, तब तक आप छोटे हैं। जब कपों की सीमाएं टूट जाती हैं, तो प्याला नहीं रह जाता।

और यही आज मुझे आपको बताना है।

आज ग्यारहवाँ दिन और दस दिन,  जिनमें से नौ दिन संघर्ष के काल थे। दसवां दिन विजय की अवधि है। अब ग्यारहवां दिन आनंद का है। लेकिन जिन लोगों में श्रद्धा युक्त भय नहीं है, वे आनंद कैसे ले सकते हैं? मैं समझ नहीं पाती। क्योंकि एकादश रुकावट बना देते है। और एकादश की बाधा, आप जानते हैं कि यह क्या है। श्रद्धा युक्त भय को महसूस करो और तुम अपने हृदय की गहराई में, अपने हृदय की गहराई में उतर जाओगे। क्योंकि आप एक ऐसे बिंदु पर हैं जहां गहराई में जाने के लिए आप में गुरुत्वाकर्षण होना चाहिए। यह काम कर रहा है: इसे रखने की कोशिश करें।

धीरे-धीरे और धीरे-धीरे आप सभी एक बिंदु पर आ गए हैं केवल एक चीज है अब अपनी गहराई विकसित करें। गहरे उतरो।

मुझे पता है कि तुच्छ लोग हैं, लेकिन वे सभी कुछ ही समय में बाहर हो जाएंगे। उनकी चिंता मत करो। मुझे पता है कि लोग क्या कर रहे हैं, कैसे व्यवहार कर रहे हैं। मैं आप में से प्रत्येक को, आप में से प्रत्येक को बहुत अच्छी तरह से जानती हूं।

इसलिए, अपने शरीर का सम्मान करें, अपना सम्मान करें, कम से कम अपने हंसा चक्र को तो ठीक रखें। और मुझे यकीन है, अगर आप इसके बारे में गंभीर हो जाते हैं … आपको पूरी बात की गंभीर समझ की जरूरत है, यही है जो कमी है। क्योंकि अगर तुम किसी से प्रेम करते हो, तो पूरी चीज एक संपूर्ण अधिकार भावना की तरह बन जाती है, पूरा अस्तित्व इसमें इतनी गंभीरता से शामिल हो जाता है कि आप कुछ भी चूकने का जोखिम नहीं उठा सकते। और यही आपकी मदद करने वाला है। लेकिन गंभीरता का मतलब यह नहीं है कि आप आनंद नहीं ले रहे हैं। आनंद इतना गहरा है कि:यह आप के हृदय में उमड़ रहा है|

मैं तुम्हारे साथ खेलती हूँ। मैं हमेशा ऐसी बातें कहने की कोशिश करती हूं जो आपको प्रसन्न करें। और इस बात ने आपको और अधिक प्रसन्न करना चाहिए जो मैंने आज बताया है –  वह क्या है –  उस गुरुत्वाकर्षण तक पहुंचने के लिए जो आपको गुरु बनाएगा, अपनी गहराई कैसे पायें।

आज मुझे आपसे गुरु की तरह बात करनी पड़ी, क्योंकि मुझे लगता है कि अब समय आ गया है कि आप सभी सही प्रकार के गुरु बनें। अहंकार के साथ या बड़ी बात करने और आप में से एक बड़ी प्रदर्शनी बनाने के लिए नहीं। लेकिन आपके भीतर एक निश्चित गहराई के साथ कि, लोग देखें कि, “यहाँ है माँ का एक प्रकाश स्तंभ ।” और यह इतना शानदार है! वैसा होना, पूरी ही बात इतनी महान है।

गुरु यही तो करते थे, सबसे पहले, लोगों को शुद्ध करना, उन्हें स्वच्छ करना, उनकी बाधाओं को दूर करना, उनके अहंकार को बाहर निकालना, उन्हें गोल लटकाकर, एक कुएं के ऊपर रखना, उन्हें नीचे रखना। पाँच, छह बार, उन्हें नीचे डुबकियाँ लगवाते हुए। वे यह सब किस लिए करते थे? पर अब तुम कर सकते हो क्योंकि मैं तुम्हारे सामने हूँ! चूँकि मैं आ गयी हूँ। यही कारण है।

समझें कि वारेन ने क्या कहा है, ठीक ही कहा है। आप कह सकते हैं कि “माँ उसके माध्यम से काम कर रही थी।” हो सकता है। लेकिन, अगर आप मेरे साथ एकाकार हैं तो मैं हमेशा आपके माध्यम से काम करती हूं। जब मैं बोल रही हूं तब भी तुम बोल रहे हो। और जब तुम बोल रहे हो तो मैं ही बोल रही हूं। यह आप जानते हैं।

लेकिन इन सबके साथ वह श्रद्धा युक्त भय बहुत जरूरी है। और यह आपको वो प्रेम देता है जो सोचता है: आपके दिल और दिमाग का पूर्ण एकीकरण। जो प्रेम सोचता है वह विचारशील है, वह प्रेम जो सोचता है। और फिर तीसरा एकीकरण: वह प्रेम जो कार्य करता है। लेकिन पहले ऐसा एकीकरण लाया जाना चाहिए: वह प्रेम जो सोचता है, जो समझता है, जो महसूस करता है। और फिर वह प्रेम जो कार्य करता है।

लेकिन मूल प्रेम है – जो हृदय से शुरू होता है – प्रेम है।

मुझे लगता है कि बेहतर होगा कि आप आज मेरा टेप लें और इसे सुनें। ध्यान करो। उस पर ध्यान करो।

मैं इंग्लैंड में अपने बच्चों को भाषा में, भाषण में, भावनाओं में, भावों में, व्यक्तित्व में गहराई से विकसित होते देखना चाहती हूं। यह केवल श्रद्धा युक्त भय है जो इसे बना देगा। लेकिन श्रद्धा युक्त भय जो डरावना नहीं है, बल्कि ऐसा विस्मय है जो आनंद देने वाला है। यही इसका एकीकरण है। जो विस्मय आनंददायी है वह भयावह नहीं है।

अपने हृदय खोलो! लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आपको छिछोरा होना चाहिए, लेकिन पूरी सावधानी के साथ। क्या आपने कमल को खुलते देखा है? यह कितनी खूबसूरती से खुलता है: धीरे-धीरे, हर पंखुड़ी इतनी सावधान रहती है कि एक दूसरे से न टकराएं। धीरे-धीरे यह खुल जाता है। और फिर सुगंध सबसे गरिमापूर्ण ढंग से उमड़ने लगती है। ऐसा फूल केवल आदि शक्ति के चरण कमलों में ही चढ़ाया जा सकता है, है ना?

परमात्मा आपको आशिर्वादित करें!