Mahashivaratri Puja

New Delhi (भारत)

Mahashivaratri Puja Date : 17th February 1985 Place Delhi Туре Puja Speech Language Hindi

ORIGINAL TRANSCRIPT HINDI TALK Scanned from Hindi Chaitanya Lahari अपनी कुण्डलिनी को नीचे नहीं गिरने दें । आज शिवरात्रि के इस शुभ अवसर पे हम लोग एकत्रित हुए हैं और ये बड़ी भारी बात है कि हर बार जब भी शिवरात्रि होती है मैं तो दिल्ली में रहती हूँ। हमारे सारे शरीर, मन, बुद्धि, अहंकार, सारे चीजों में सबसे महत्वपूर्ण चीज है आत्मा और बाकी सब कुण्डलिनी इसलिए नीचे गिरती है क्योंकि हमारे अन्दर बहुत से पुराने विचार, पुराने conditionings है और इसलिए भी गिरती है कि हम futuristic बहुत हैं। जैसे हम अपने दिल्ली का विचार करें तो दिल्ली में कुछ लोग तो बहुत पुराने विचार के, पुराने व्यवस्था के अनुसार रहते रहे हैं। उनके अन्दर ऐसी-ऐसी भावनाएँ बनी हुई हैं कि जिनको निकालना भी बहुत मुश्किल है क्योंकि वो धर्म के ही नाम पर ये सब चीजें करते है कि यही धर्म है, इसी में रहना चाहिए। यही सत्य है, यही सब कुछ बाह्य के उसके अवलम्बन है। आत्मा में हम अपने पिता प्रभु का प्रतिबिम्ब देखते हैं। कल आपको आत्मा के बारे में मैंने बताया था। वही आत्मा शिव स्वरूप है। शिव माने जो बदलता नहीं, जो अवतरित नहीं होता, जो अपने स्थान में पूरी तरह से जमा रहता है, जो अचल, अटूट, अनल, ऐसा वर्णित है उस शिव की आज हम अपने अन्दर पूजा कर रहे है वो हमारे अन्दर प्रतिबिम्बित हैं कुण्डलिनी के जागरण से हमने उसे हमें परमात्मा की ओर ले जाएगा। ऐसे जो लोग विश्वास लेकर चले हैं उनकी भी कुण्डलिनी बहुत देर ऊपर नहीं ठहर पाती, बो खिंच खिंच जाती है Left की ओर। इसलिए सबसे पहले याद रखना चाहिए कि हमारी जो पुरानी धारणाएं हैं उन्हें हमें बहुत कुछ तोड़ना जाना है और उसका प्रकाश जितना-जितना प्रज्जवलित होगा उतना हमारा चित्त भी प्रकाशमय होता जाएगा। लेकिन इस शिव की ओर ध्यान देने की बहुत जरूरत है। शिव के प्रति पूर्णतयां उन्मुख पड़ेगा। जो गलत चीजें हैं, जो सही है उसे जरूर लेना होने के लिए, उस तरफ अपने को पूरी तरह से ले है लेकिन जो गलत हैं उसे तोड़ना पड़ेगा, गुर हमने जाने के लिए. हमें जरूरी है कि ये समझ लेना चाहिए उसे तोड़ा नहीं तो कुण्डलिनी ऊपर ठहर नहीं सकती वो खिंच जाएगी। कि उसकी तैयारी क्या हो? जैसे एक कंदिल में आपने ज्योत बार दी लेकिन कंदिल इस योग्य न हुआ कि दूसरी बात जो दिल्ली में ज्यादा है, क्योंकि यहाँ लोग सरकारी हैं, कार्य ज्यादा करते हैं उस ज्योत को अपने अन्दर समा ले तो ये सब व्यर्थ है, ये सारा कार्य व्यर्थ हो जाएगा। वो चीज़ जो हम झेल ही नहीं सकेंगे गर हमारे अन्दर आकर गुजर गई Industries है, सब कुछ Right Sidedness बहुत तो इसके दोषी हम हो जाएंगे। इसके बारे में हम लोग है। उनमें बहुत सी चीजें हमारे लिए बन्धनकारी हैं। अभी बहुत सारे संसार को प्रभावित करता है और सारे संसार में इसकी महिमा इतने जोरों में फैलती है कि उसके लिए कोई भी ऊपरी तरह बताने की जरूरत नहीं। अन्दर हो सकती, किसी ने कहा कि चार बजे कर लो इससे ही अन्दर इसकी लौ बढ़ती रहती है। बस उस लौ को जीवित रखने के लिए सबसे पहली चीजू है कि हम अनभिज्ञ हैं कि इसका तेज़, इसका सौन्दर्य एक तो हर चीज़ में हम जैसे कोई Millitary के तरीके से चलते हैं। जैसे समय की बात है। अब बहुत से लोगों ने मुझ से कहा कि माँ शिवरात्रि पाँच बजे नहीं बस हमको मिल जाएगी। अब मैंने कहा कि भई ये सब ठीक नहीं, ये कैसे किया जाए। आप शिवजी को 2

Original Transcript : Hindi modern तो नहीं बना सकते शिवजी के हाथ में हूँ, दिल्ली में खासकर मैं ये चीज़ देखती हूँ कि लोगों घड़ी तो बन्धी नहीं है। तो इस तरह से सबने हमसे में साधना बहुत कम है। घ्यान कैसे करना चाहिए, ध्यान में कैसे बैठना चाहिए, ध्यान का कार्य कैसा होना चाहिए, ये सब जानने के प्रति बहुत कम लोग कहा कि माँ किसी तरह से आप जो है आप ऐसा करें कि हमारी जो समस्या है वो सुलझ जाए, तो मैंने कहा कि क्या समस्या है? कहने लगे कि हमारी बस जो है रहते हैं । ज्यादातर मेरी बीवी ठीक हो जाए. मेरा लड़का वो Time से नहीं आएगी। तो आप ऐसा तो कर दीजिए कि बस Time से आ जाए. रात को बारह बजे की शादी हो जाए और मेरा घर बन जाए। और अगर ठीक हो जाए, मेरी लड़की की शादी हो जाए, लड़के ज्यादा से ज्यादा कि एक आश्रम बन जाए। आ जाए। इस तरह के अनेक अनेक प्रश्न इस तरह उथली। आपने की बातें, ये बहुत उथली बातें हैं बहुत अभी तक किया ही क्या है धर्म के लिए? शिव को हम अपने अन्दर गर शिव को जागृत रखना चाहते हैं तो पहले हमें आश्रम बनना चाहिए। उसके लिए तपस्या होती है, उसके लिए मेहनत होती है, बगैर मेहनत के कार्य नहीं होता, बगैर मेहनत के मैंने आपकी कुण्डलिनी नहीं जगाई है, ये समझ लेना चाहिए। कहने को तो ठीक है कि स्वभाव है। स्वभाव तो हजारों वर्षों से रहा है लेकिन कुण्डलिनी जो जगाई है बड़ी मेहनत की, मैंने भी बड़ी तपस्या की है। उस मेहनत की वजह से ही आज आप हज़ारों के तादाद में पार हो रहे हैं। और उतना ही नहीं अब भी मैं बहुत मेहनत कर रही हूँ बहुत मेहनत करती हूँ, इतनी मेहनत करती हूँ कि कभी-कभी लोग घबड़ा जाते हैं लेकिन आप लोगों को मैं देखती हूँ कि साल में मैं दो-तीन दिन के लिए आती हूँ तो उस दिन भी आप यही कहते हैं कि माँ चार बजे आप शिवरात्रि करिए। कुछ भी अपने अन्दर discipline नहीं होगी. हम अपने शरीर को जब तक इसमें जीतेंगे नहीं तबतक इसमें मन्दिर कैसे बनेगा? प्राप्त करने के लिए पार्वती जी ने कितने वर्षों तक तप किया था. पार्वती जी ने जो स्वयं साक्षात् आदिशक्ति हैं। आपने कौन सा तप किया, कौन सी मेहनत उठाई. एक रात की चलो कहीं जागरण ही हो जाए शिवजी के नाम पर। आपने ऐसा कौन सा त्याग किया है शिवजी के नाम पर या कौन सी विशेष आपने कार्य प्रणाली की है जिससे आप चाहते हैं कि शिवरात्रि भी बदल जाएं? जो चीज़ अटूट है उसको दिन में कैसे माना जाएगा ये मेरी समझ में नहीं आ रहा था तो मैंने कहा कि किसी तरह से सो जाएं तब तो कोई जगाएगा नहीं शिवजी को लेकिन समझने की बात है कि हम लोग इतने उथले, उथले ढंग से परमात्मा को जानने की कोशिश करते है, ये बड़ी गहन चीज है। आपको पार तो करा दिया जैसे बड़े-बड़़े कुछ पहुँचे हुए लोग हमसे मिले तो कहने लगे माँ आपने इनको क्यों पार कराया? हमको तो हजारों वर्ष लगे, मेहनत की, कितने जन्मों से हमने मेहनत की तब कहीं हमें Viberation फूटे और आपने इनको ऐसे ही पार करा दिया ऐसा क्यों किया? हमने कहा भई समय आ गया है, ऐसा समय है इस वक्त बहुतों को पार करने का इसका मतलब ये नहीं कि आप लोग उदासीन तरीके से इसकी ओर देखें और अपनी साधना ऐसी कर लें जो कि माँ Sunday के दिन न करिए शिवरात्रि क्योकि बिल्कुल ही निम्न स्तर की है। सहजयोग उथले लोगों के लिए नहीं है, गहनता इसमें चाहिए, और गहनता ऐसी चाहिए कि गम्भीरता से ठहरेपन से रोज़ आपको ध्यान करना चाहिए. रोजू। हमें Time नहीं मिलता, किसी ने कहा सिनेमा होता है तो बहुत कम लोग आएगे। मैंने कहा और इसी पर मैं आज आपसे कहना चाहती बहुत अच्छा है जो लोग सिनेमा की वजह से नहीं 3

Original Transcript : Hindi पड़ेगी। पहले तम्बाकू खाने से दुनिया भर की चीजें सुन-सुनकर के कभी कभी मुझे लगता है कि सहजयोग करने से हमारी जीभ खराब हो गई है। दूसरे जो आज सबके सम्मुख खड़ा हुआ है उसकी कोई गुस्सा-वुस्सा करने से भी हमारी जीभ खराब हो गई कीमत लोगों ने की है या नहीं। जब तक आप इसकी है और जीभ में खाने की भी बड़ी लालसा है। जीभू कीमत नहीं करेंगे तब तक ये कार्य निष्पन्न नहीं होने गर ठीक हो गई तो मैं सोचती हूँ कि पचास फीसदी वाला और ये बात बनने ही नहीं वाली हम लोग बहुत काम हमारा हो जाएगा। जीभ का मतलब ये है कि हर समय खाने की लालसा करना, दूसरों से बुरी तरह से बात करना, दूसरों को झाड़ूना, गन्दी बाते मुँह से निकालना, ज्यादा वाचालता करना। ये सब बातें सहजयोगियों को शोभा नहीं देती। और खाने के मामले गए थे वहाँ किसी में भी लोगों में मैं देखती हूँ कि इतनी ज्यादा रुचि है। खाने में कि रात दिन विचार यही के क्या खाना है। आएंगे वो बड़ा अच्छा होगा हमारी बला टली। ये सब बड़ी-बड़ी बातें करते है कि हमने विश्व धंर्म बना लिया और सारे विश्व का उत्थान होने वाला है। आप लोग अपनी आदतें कम से कम बदल दीजिए । आज बारह साल से मै देख रही हूँ कि बहुत कम आदत हम लोग अपनी बदल पाए है। हम….. सज्जन के बारे में किसी ने हमसे कहा कि वो तो सहजयोगी है और अपनी माँ को सताते हैं माँ मुझे तक खिला खिला कर आप लोग मुझे मार डालते का बिल्कुल ख्याल नहीं करते उनकी कोई इज्जत नहीं करते और माँ बिचारी बहुत सीधी सरल औरत मुझे तो कोई चीज का कोई शौक ही नहीं कि ये चीज़, हैं। सुनकर सकता है? कितनी बदनामी की बात है कि माँ गुर खाने की कोई रूचि नहीं कुछ समझ नहीं आता है कि सहज सरल है और लड़के की माँ है. तो लड़के पर तो माँ का हक होता ही है, लड़की की माँ हो तो दूसरी बनाती हूँ लेकिन खाने की रुचि नहीं। तो आपके लिए बात है पर लड़के की माँ है उसको तो सम्भालना ही मैं सामने बैठी हूँ। योलते वक्त जो भी हो आप ऐसी पड़ेगा. उसको कहाँ फेंक दीजिएगा? और अब वो सहज सरल है तब । जब उसकी इतनी सी भी छोटी सी भी त्रुटि सहजयोगियों को होती है तो दुनिया उसे. देखती है सहजयोगियों को जरा सी भी गलती हो तो बहुत हैं। मुझे तो अब कोई रुचि नहीं खाने में आप जानते है मेरा एकदम जी बैठ गया कि कैसे हो बस चना मिल जाए काफी है, आप तो जानते हैं मुझे इतनी क्या रूचि खाने की? चाहे मैं खाना बहुत अच्छा बात करे दूसरों का हित हो। लेकिन नहीं है. ऐसा नहीं होता है। और एक उथलेपन में पहले तो अपनी जीभ को ही बिल्कुल ठीक करना चाहिए। अपनी जीभ जो है एक मधुर स्वरों में, मधुर शब्दों में बाँधनी चाहिए, उसका एक तरीका है कोशिश करें आप शीशे में दुनिया उसे देखती है और बहुत बार मैंने ये देखा है कि लोग कहते हैं आश्रम में जाओ तो ऐसे लगता है बैठकर अपने से ही मीठी-मीटी बातें करें क्या आप कि सहज योग नहीं करना चाहिए क्योंकि यहाँ के लोग बहुत उद्दाम है, बहुत बदतमीज़ी से बात करते गलौज करते हैं। आप पहले अपने को प्यार करना है, बहुत अहंकारी लोग हैं, बड़े अभिमानी है और इस तरह से हमको Treat करते है कि हमको अच्छा नहीं अपने तक से मीठी मीठी बातें कर सकते हैं या गाली सीखे । फिर Time व Time जो आप लोगों में बड़ी बीमारी है कि टाइम यहाँ तक कि ये अब शिवरात्रि का लगता। उनमें कोई प्रेम ही नहीं है। क्योंकि आपसी की बात है मैं आपसे कह रही हूँ कि अब इसको सुव्यवस्थित शिवजी के ऊपर में आपकी Government नहीं चल कर लीजिए प्रथम तो हमें अपनी रसना जो होती है सकती। और इसलिए हमको समझ लेना चाहिए कि जो कि जीभ हमारी है उसको बहुत ही Training देनी भी टाइम अब बाँधना पड़ा! तो ये बहुत देर हो गई। हम कहाँ तक ऊपर पहुँचे कि हम भगवान पर भी 4

Original Transcript : Hindi Time लगा रहे हैं! जिन्होने टाइम बनाया उन्हीं पर किया तो काफी लोग सहज योगी हो गए. कोई नई हम Time लगा रहे हैं और सारा Time बचाके करते चीज़ आती है तो आ गए उसमें लेकिन उथले लोग क्या हैं यही मेरी समझ में नहीं आता । कितनी देर थे। वहाँ पर एक साहब हमारे Programme में आए आप ध्यान करते हैं. कितनी देर आप प्रगति करते हैं? उनका नाम था माइकल वाइकल ऐसे ही बेकार आदमी थे और आकर के बहुत ज्यादा बोलने लग गए. माँ ये जो Right Sided Attitude है ये भी बहुत गन्दी चीज़ है। इससे भी आदमी इतना Aggressive हो तुम ये हो और वो हो, तो हम समझ गए ये तो भूत आदमी है बेकार में आए हुए हैं। तो हमने कहा जाता है कि उसको ये भी नहीं अन्दाज रहता कि हम साक्षात परमात्मा से ही झगड़ा लिए हुए है । इसको भी अच्छा-अच्छा आइए आप हमारे घर पर आइए हमें आपको घटाना चाहिए। धीरे-धीरे इसको Discipline करना चाहिए. इससे आप अनेक काम कर लें. अनेक मिलिए यहाँ नहीं। यहाँ शान्त रहिए। उसके बाद में वो आए नही घर वर पर कुंछ। उन्होने सारे लोगों से काम आपके हाथ से हो जाएंगे और अगर आप Time जाकर बताया कि देखों माँ मुझे कितना मानती है मैं की पाबन्दी रखेगे तो आपके काम होगे ही नहीं, कभी कितना शक्तिशाली हूँ कि माँ ने मुझे अपने घर पर नहीं हो सकते, और खासकर के इस देश में तो बुलाया। और विशेष रूप से मुझे घर पर बुलाया है। सब लोग उससे अभिभूत हो गए और इस कदर अभिभूत हो गए कि वो दूसरी कोई बात सुनने को ही तैयार नहीं। एक वहाँ पर साहब थे उन्होंने कहा कि नहीं भई ये तो कुछ अजीब ही आदमी लगता है, तुम माँ से तो जाकर पूछ लो। बोले माँ तो अभी India में बिल्कुल ही नहीं हो सकते और जिन देशों में इतना Time बाँधा था वो सिर्फ युद्ध के लिए। कि वो युद्ध में आ रहे है गर ।। बजे तो 1030 बजे जाकर हम उनको कत्ल कर दें। सहजयोग में कोई युद्ध नही है ये तो प्रेम की बात है। प्रेम में Time किसको याद रहता है । आपको पता नहीं पहले शिवरात्रि की पूजा करीबन है जब माँ आएगी तब पूछेंगे, वैसे ये है बहुत अच्छा। कुछ नहीं तो आठ-आठ घण्टे होती थी, और कभी-कभी उसने कहा कि सबको आपस में प्यार करना चाहिए. दुलार करना चाहिए और खूब आपस में घण्टों बातें करें और इधर-उधर की औरतों से दोस्ती और सब शुरु हो गया और उसको लोग मोहब्बत कहने लगे। करते करते जब हम वापिस लौटे तो एक दम से मुझे हम नौ घण्टे एक जगह बैठें हैं नौ घण्टे। एक बार भी उठे नहीं ऐसा भी रिकार्ड आपकी दिल्ली में है। नौ qut Continuous I इसलिए आपसे मुझे कहना है कि पहले आप समर्थ हो जाइए। जब तक आप समर्थ नही होते हैं तब तक मुझे डर ये लगता है कि कोई भी गर बड़ा भूत यहाँ आजाए, या कोई भी तान्त्रिक यहाँ आ जाए या कोई ऐसा आदमी आ जाए जो कि ज़रा सा भी आपसे लगा कि ब्राइटन में हो क्या रहा है पता करें। तो मैंने खबुर करी वहाँ पर एक थे उनको तो दो आए उन्होंने कहा माँ यहाँ क्या हो रहा है, एक आदमी आया हुआ है उसमे सब फँसे हुए हैं। तो मैने फौरन फोन करके वहाँ से एक जो Lady थी, जो संचालन करती थी उसको खबर करी कि तुम यहाँ आओ। उससे मैने बताया ये आदमी एक दम झूठा है, गलत है और इसके चक्कर में नहीं आना। नहीं नहीं माँ वो तो प्यार है, वो तो फलाना है, उसने तो हमसे कहा कि माँ का जीवन अब उसकी वजह से जब ब्राइटन में हमने Centre शुरु कुछ रहा नहीं है ज्यादा दिन, मैं ही उनकी जगह आया ज़ोरदार Negative हो तो आपको खा जाएगा सबको। मैं इसका आपको एक उदाहरण देती हूँ, ब्राइटन एक भी लोग बहुत समुद्र होते Trendy जिसे कहते है, उथले लोग होते हैं। और जगह है, जहाँ पर कि हुए 5

Original Transcript : Hindi अपनी मेहनत नहीं की तो हम आपका सहारा कहाँ हूँ। सब बातों पर हमने विश्वास कर लिया। मैने कहा अच्छा ऐसा कहता है। मैंने कहा बिल्कुल आप इसे छोड़ दीजिए, इसकी कोई जरूरत नहीं, अबं तो मैं जीवित हूँ आपके सामने, आप मेहरबानी से इसे छोड़ कि एक दम से आप समझ सकतें हैं कि कितना क्षुद्र दीजिए और इसको आप पूरी तरह से कह दीजिए कि तक दे सकते हैं। मुझे कभी-कभी बड़ा डर लगता है कि एक साधारण सा मनुष्य जो कि क्षुद्र सा है, जो है उसीको आप खोपड़ी पर बिठा लेते हैं और फिर आप चले जाए। लेकिन वो चक्कर ऐसा चल पड़ा कि मुझसे argue भी करते है कि नहीं ये आदमी ठीक है। वो उसको छोड़ न पाएँ। वो वापिस गई तो भी वही | कितनी दुखदायी बात है, मुझे आश्चर्य भी होता है चक्कर चलता था। अन्त में फिर, तुम तो जानते हो और दूख भी लगता है कि कब ये लोग अपनी संवेदना कि तुम्हारी माँ योगमाया है, हमने अपना चक्कर चलाया तो वो एक रात एक औरत को लेकर उन लोगों का को बढ़ाएंगे। तो आज इस विशेष दिन पर हमें अपने शिवजी सबका सामान उठाकर भाग गया। तब उनकी खोपड़ी ठीक हुई। पर तब भी जो औरत थी जिसने सारा को साक्षी रखकर कहना है कि हम अपने अन्दर इस organize किया था इतना महत्व किया था अब भी वो सहजयोग में जम नहीं पाई, अब भी, अब सहजयोग से निकल ही गई है हमने कहा अब तुम आया न शक्ति को पूरी तरह से ऐसे सम्भालेंगे कि हम शक्तिशाली हो जाएं। रोज़ ध्यान करेंगे, रोज़ मेहनत करेंगे। गर ये वचन हो जाए तो मेरे ख्याल से किसी की मजाल नहीं कि आपके ऊपर हाथ चलाए या….. करो। तो गर आप कमज़ोर हो जाएंगे तो सारे के सारे पकड़ में आ जाएंगे। और आपकी जब तक हमारे अन्दर जो दोष हैं वो कोई इतने बड़े नहीं, लेकिन सबसे बड़ा जो हमारा दोष है वो है इच्छा। जब तक संवेदना बढ़ेगी नहीं तब तक कैसे होगा? और दिल्ली वालों की संवेदना बड़ी कमजोर है। सबसे कमजोर, सारे सहजयोगियों में सबसे कमजोर दिल्ली वालों की हमारे अन्दर शुद्ध इच्छा परमात्मा को पाने की तीव्र न हो जाए तब तक कोई भी नहीं काम कर सकते। हम कुछ भी कहें सब बेकार जाएगा, और कुछ भी बोलें सब बेकार जाएगा। सिर्फ तीव्र इच्छा होनी चाहिए। और आदमी को इस तरह से कहना चाहिए कि ये मेरा है संवेदना है, उनको कुछ महसूस ही नहीं होता, वो कुछ जान ही नहीं पाते कि कौन आदमी अच्छा है बुरा किसी की viberations ही नहीं जानते और कोई भी ऐसा आदमी आ जाए तो उसके चक्कर में आ जाते कर्म नहीं है ये मेरा जीवन नहीं है, ये मेरा बीज नहीं है पर एकमेव लक्ष्य ही मेरा ये है और मेरे लिए कुछ नहीं। मैं एकमेव आत्मा के सिवाय और मैं कुछ नहीं हूँ। ऐसा अपने अन्दर आपको विचार लाने हैं। मैं जहाँ तक समझा सकती हूँ मैंने आपको समझाया। आशा है हैं। और गलत धारणा को ही मानकर के उसके चक्कर में आकर के गर कोई यहाँ पक्का तान्त्रिक आ जाए तो आपको तो बेवकूफ बना जाएगा इसलिए अपनी जो है सत्ता बनानी पड़ेगी अपनी सम्पदा बनानी पड़ेगी, इतना ही नहीं अपनी अवस्था अपनी ही जमानी पड़ेगी नहीं तो काम नहीं होने वाला। इस चीज़ पर मैं आपसे आप लोग इसको समझने की पूरी कोशिश करेंगे । अब हम लोग सबसे पहले श्री गणेश का करेंगे श्री गणेश का पूजन थोड़ी सी देर पूजन बहुत करने का है ज्यादा देर नहीं, उसके बाद देवी का इतना ही कहूँगी कि हमसे जितनी मेहनत बनी हमने कर दी है और अब आपके लिए उचित है कि आप इससे आगे की जो मेहनत है वो करें। गर आपने जिसको कि फिर कहना चाहिए कि शिवरात्रि का पूजन पूजन होगा और उसके बाद फिर हम पूजन करेंगे

Original Transcript : Hindi है क्योंकि शिव ही हमारे गुरु हैं, आत्मा की हमारा शिव है। इसलिए उनकी आप पूजा आज कर रहे हैं और इसलिए वो दोनों ही पूजा एक तरह से एक ही हो जाती हैं क्योंकि ओंकार स्वरूप गणेश हैं, देवीं आत्मा की शक्ति है और आत्मा शिव हैं। इस तरह से तीनों चीज एकाकार हैं। आज का दिन बहुत ही शुभ है, उसमें आपका इलाज है आप गेरू बदन पर लगाएं या आप चाहे थोड़ा सा गेरु घिस कर लें। जिसको allergies होती हैं, उन सबको गेरु घिस कर लगाना चाहिए। गेरु घिस कर बदन पर लगा ले या उसको खा भी सकते है। सात मर्तबा उसको गर। घिसा जाए और घिसकर के चन्दन के जैसे उसको खाया जाए बहुत शुभ महूरत पर शुरु हुआ है और आपके अन्दर भी सब कुछ शुभ करेगा। तो आपकी allergies ठीक हो जाती है। क्योंकि फिर वो गेरू गरम होता है, कैल्शियम है। यही भस्म है, भस्म भी जो हैं वो गर व्यवस्थित रूप से बनाया गया पूजन में सभी चीज़ गरम इस्तेमाल होती हैं अधिकतर और उसके बाद ठण्डाई दी जाती शिवजी के है वजह ये है कि शिव जो है वो हिम से भी ज्यादा ठण्डे हैं। और उनको गरम रखने के लिए उनको सब तरह की गरम चीजें दी जाती हैं। हम लोग गरम हैं इसलिए हमें ठण्डे करने की चीजें लेनी पड़ती हैं और जो आप हो किसी हवन में से निकाला गया हो तो उसको भी गर आप इस्तेमाल करें तो आपकी allergies ठीक हो जाएंगी। इस वक्त माँ को भी इसलिए चढ़ाया जाता है, शिवजी को, क्योंकि उनके अन्दर भी इतनी शीत है आपकी गर्मी से हो सकता है कि उनके ऊपर allergies आ जाएं और उनके बदन में उस तरह की चीजें न हो जाएं इसलिए उनको गरम रखा जाता है। एकदम कल बहुत लोग एकदम से ठण्डक बहुत आ गई बहुत लोगों को बहुत ठण्डक सी लगी लेकिन फिर गरम हो गए । फिर ठण्डे गर्म, ठण्डे गर्म चलते ही गए और जब ठण्डे हो जाएंगे मामले तब सोचना चाहिए कि शिव का तत्व हमारे अन्दर जागृत हो गया है। तो आपको गर्म लेने की जरूरत नहीं हैं। अब कोई कहने Allergy तो नहीं होती लेकिन गर पूरी तरह से गेरू और भस्म नहीं रखा जाए तो हमारे तक हमने देखा है कि हमारे पैर में एकदम articaria सा हो जाता है माने ये कि उसकी जरूरत होती है उस वक्त Temperature एकदम low होता है, इसलिए गेरू की जरूरत होती है, गेरू और भस्म की जरूरत होती लगा कि शिवजी जी तो भंग पीते थे तो हम भी भंग पीएंगे। आप कोई शिवजी नहीं है। तो फिर आप है। धतूरा भी खाइए और वो नहीं होता तो जहर भी पीकर दिखाइए क्योंकि शिवजी ये काम करते थे तो हम भी करेंगे, ये जो लोग कहते हैं उनको पहले करेंगे कभी। अब सब लोग आकर जम जाएंगे जैसे ये नए लोगों में होता है, पुराने लोग नहीं हम अब अन्दर गए सब लोग लाइन से खड़े हो गए। ये चीजू दिल्ली में ही होती है ये भी बताऊं, कहीं और नहीं, माने नहीं। क्योंकि जो चीज़ भी हम कहते हैं बड़ा गहरा अर्थ होता है उसका मै नहीं चाहती कि आप देखना चाहिए कि आप क्या शिवजी हैं? आप क्या हलाहल पी सकते हैं? नहीं पी सकते। जब वो नहीं हो सकता है तो फिर उनके साथ में मुकाबला करने में क्या अर्थ है? इतना ही हो सकता है कि उनके चरणों में हम शरणागत हो सकते हैं और यही होना चाहिए। कोई चीज़ ठण्डी ले ली और फिर उसके बाद गर्म चीज ले ली तो बदन पे शीत हो सकता है। वो शीत हमने उससे कहा कि ये देखों हम जा रहे हैं लेकिन जिसे articaria कहते हैं, या इस तरह की जितनी हमारे पलंग पर तीन दिन तक किसी को सोने मत भी allergy है वो शिवजी के दोष से होती है और पर गणों का परिणाम आ जाए। एक बार हम अहमदाबाद गए तो वहाँ पर किसी के घर ठहरे। तो देना। उनको लगा ऐसे ही माँ ने कहा होगा। तो उनकी 7

Original Transcript : Hindi लड़की सोई, उसने कहा कि रातभर तो मुझे नींद नहीं होना चाहिए। जो आगे लोग आ चुके हैं, वो किस तरह रह रहे है, किस तरह बैठ रहे हैं, कहाँ तक हैं। ये देखें। और फिर किसी को कहो- वर्मा साहब तो कहते हैं कि आई, कोई मुझे गुदगुदी-गुदगुदी कर रहा था जैसे… | दूसरे दिन उनकी नौकरानी सोई। तो उस नौकरानी को एक दम से ऐसे लगा जैसे कोई चीज मैं किसी को कुछ कहना ही नहीं चाहता, लोग मुझही को दोष देते हैं। अरे भाई उनको क्या दोष दे रहे हैं, ऊपर से आकर उस पर गिर गई। उसने उठकर देखा, कोई चीज थी नहीं, वो भी उठ कर भाग गई। मैंने ही कहा है। ये तो समझने की बात है कि आपसे तीसरे दिन फिर उन्होंने क्षमा माँगी कि माँ हमने गलती कितनी ज्यादा discipline है. कितना कायदा है। कायदा होना चाहिए, परमात्मा का कायदा होना चाहिए। कर दी, हमको नहीं करना-चाहिए। गणों का हाथ बड़ा खराब होता है। ऐसा हाथ मारते है, झपट्टा मारते हैं, मैं ध्यान देती रहती हूँ हर समय। उनको सब हमारा अब ऊपर गए वहाँ पच्चीस आदमी खड़े हुए थे। बाहर निकले तो दस। कायदे में जहाँ बैठे है वहाँ बैठे हैं। स्थान पे, स्थान पे। अपना तकिया नहीं छोड़ना चाहिए। जहाँ बैठे हैं, आराम से माँ के साथ ही सम्बन्धित बैठे प्रोटोकॉल मालूम है, कहाँ-कहाँ जाना है, कहाँ नहीं जाना। अब फट से बीच में आप पैर लेते हैं, फट से। फिर रास्ते में खड़े हो गए, ‘साँ ये बात है। ऐसे हुए हैं। ये समझना चाहिए। नहीं करना चाहिए। एक नियमबद्ध तरीकों से चलना है, देखिए अब आप विराट के शरीर में जा रहे हैं । अब विराट को ही परवांह है, वो आपको सब देगा। अपनी बात लेकर रोना नहीं ‘माँ, देखो मेरे ऐसे बैठे हैं वहीं से माँ को पा रहे हैं आप। माँ से वहीं हो रहा है, मेरे बाप का ऐसा हो रहा है, माँ का ऐसा से बातचीत हो रही है । वहाँ सबकुछ है। आपको छू अगर आपका सम्बन्ध पूरा बना हुआ है तो कोई जरूरत नहीं दौड़ने की, जिसका नहीं बना वही दौड़ता है। ये पहली. पहचान है । जहाँ भी हो रहा है, भाई का ऐसा हो रहा है मेरे घर- का ऐसा हो रहा है । जिसने ऐसी बातें शुरु कर दीं उसको तकलीफ ही होने वाली है। अब शान्ति में, छने की जरूरत क्या है? कोई जरूरत नहीं है। जहाँ विश्वास पूरा करके कि हाँ मैंने माँ को कह दिया है, बैठे हैं वहीं माँ हैं। अपने दिल में ही हैं न तो ये जरा ठीक हो जाएगा. ऐसे लोगों का भला होता है, मैं पहले गहराई आनी चाहिए। उससे बड़ा सुशोभित लगता बता रही हूँ। और जो लोग बहुत सामने सामने बैठ है। अब- तो हम देहात में भी जाते हैं तो वहाँ भी लोगों करके और आगे आगे दौड़ते हैं, उनका बड़ा कोई हिलने की जरूरत क्या है? सामने आने की जरूरत क्या है? वहीं बैठने की जरूरत क्या है, पैर बुराहाल होता है। मैं पहले बता दें। एक तो सहजयोग में धर्म के बारे में, देवताओं के बारें में, से ऐसे लोग निकल ही जाते हैं सहज में, आगे गणों के बारे में, गन्धर्वों के बारे में कुछ मालूमात ही को इसकी समझ है, प्रोटोकॉल है। एक तो उत्तरी हिन्दुस्तान पीछे करने की कोई जरूरत नहीं, आप जब आ नहीं है। एकदम हम लोग तो एकदम इधर के रहे न गए समुद्र में तो तैरते रहिए आराम से। आपको तैरना सिखा दिया है। अब उसमें क्या जबरदस्ती? कुछ मालूम होगा, तो हमको तो वो भी मालूम नहीं है उधर के रहे। मुसलमानों को भी उनके धर्म के बारे में अब् दिल्ली की खास चीज मैंने देखी है, अभी तक ठीक ही नहीं हो रही, पता नहीं क्यों? और जो लोग ह पहले के हैं उनको कोई देखते ही नहीं दिल्ली वाले, जितने भी होते हैं ये सब एक रात मेरे सिराहने जो नए आते हैं वो घोड़े पे ही सवार आते हैं। ऐसा नहीं एक भी बात। कुछ तो जानना चाहिए न कि क्या चीज है, गण क्या होते हैं? माँ एक फूल दे दो हमको। अब ये फूल रखने पड़ते हैं क्योंकि गणों का अधिकार होता है, गर 8.

Original Transcript : Hindi आपने इनमें से कोई फूल ले लिया तो गण आपको कुछ न कुछ चुहुल करेंगे, फिर मुझे मत कहना। इसलिए शक्ति कार्य कैसे करेगी? सीधा हिसाब । यहाँ पर माँ मुझे बिन्दी लगा दीजिए । मैं कोई पुजारी थोड़े ही बैठी हूँ, आपको सबको बिन्दी लगाती फिरूं। किसी ग्र आप शक्ति को स्वीकार्य ही नहीं करिएगा तो से लोग ऐसे हैं जो पुराने हैं जो जानते हैं सहजयोग बहुत क्या है, आप उसको प्यार से समझिए बात क्या है ये तो एक नवीन अनुभव आया है, इसमें गर चलना है तो उस नवीनता को लेकर चलें। अपने ही मन से का आज्ञा मैंने घूमा दिया तो अपना भी माथा लेकर के सामने खड़े हैं। ये बचपना है। जहाँ बैठे हैं वंही पाने की एक अपनी सिद्धता अपनी एक ताकत, अपनी बहुत लोग चलते हैं। अपने ही मन से कोई साहब भाषण देने खड़े हो गए, अपने ही मन से। ऐसे नहीं एक समझ बना लेना चाहिए, कहीं भी आप रहे हमारा चित्त तो वहाँ लगा रहता है। आप रहें। लेकिन पहले करना। फिर ये कि जो Verma साहब है समझ हमसे connection ते पूरा जम जाए। कहीं भी, लीजिए कि हम गर इन्हें यहाँ का लीडर मानते हैं समझ लीजिए। तो हम सबसे तो सम्बन्धं नहीं रख सकते है, हम तो सिर्फ वर्मा साहब से कर सकते हैं या कोई हमें बताने की जरूरत नहीं, हमें सबके बारे में सबकुछ मालूम रहता है। लेकिन गर आपसे हमारा connection नहीं है तो बेकार है। पहले अपना कोई एक आदमी होगा उसी से कंर सकते हैं। अब connection जोड़िए.. इसलिए जो नए लोग होते हैं उसी को हर बार परेशान करना ये कोई सहजयोग नहीं है। सहजयोग में लीडर को बिल्कुल नहीं वो ज्यादा दौड़ते है। पुरानों को देखिए ये कैसे जमे बैठे हैं। इनको ये नहीं माँ चली गईं हैं ऊपर, बैठे हैं challenge किया जा सकता। और जो करते हैं वो गिर जाते हैं। क्योंकि हम लीडर को जानते हैं ये कितने जहाँ के तहाँ। अपना ध्यान कर रहे है, है ना? अब आज से समझना चाहिए जो भी बात कही जाती है गहरे पानी में है। हम हमारा उनसे सम्बन्ध है, हम उसको मानना चाहिए। अब गर Verma साहंब कोई जानते हैं, और हर आदमी यहाँ लीडर होने वाला नहीं बात कहें उसका बुरा मानना बिल्कुल ही पागलपन है है, सहजयोग में लीडर का मतलब ये नहीं कि वो ऊँचे मेरे विचार से। उनको तो मैं ही कहती हैँ जो कुछ भी हो गए या कुछ. पर वो जानते हैं जानकार हैं उनका वो कहते हैं। वो कोई अपने मन से थोड़े ही बिचारे हमारे से सम्बन्ध बना हुआ है, कोई बात हो तो वो Directly हमसे कहते हैं। इसका ये मतलब नहीं कि ही नहीं है। आपको सिर पर बिठा लीजिए, यहाँ कोई वो कोई आपकी खोपड़ी पर बैठे हुए हैं, ये बात नहीं है, वोटिंग थोड़े होने वाला है कि आपकी कोई चापलूसी लेकिन अगर वो गलती करेंगे तो मैं तो ऐसे पकडूंगी करेगा। आइए जी. बैठिए जी, कुर्सी पर बैठिए, आपके उनको कि बस। जो भी वो कोई करे, जैसे कोई हमारे हाथ हैं, ऐसे कर रहे हैं इसलिए कोई भी आदमी से नहीं रहेंगे तो बताया जाएगा। यहाँ कोई बड़ा छोटा उनको challenge न करे। वो जो ठीक समझेंगे जो उचित समझेंगे वो करेंगे। और आप उनकी बात सुना चीज देखी जाती है। कौन कायदे से है कौन कायदे से. करें। ये बात बहुत जरूरी है। फिर दूसरा ये भी है कि छोटे-छोटें उम्र के लड़के भी आ जाएं वो अपने को कहते है। सबकुछ अब आते ही साथ वहाँ तो कोई प्रेम लिए तख्त लगाते हैं। ऐसा नहीं होगा आप गर कायदे नहीं देखा जाता। कायदे से.रहना और न रहना ये नहीं वो बताया जाता है। ये कारयदा। क्योंकि गर परमात्मा के साम्राज्य में आए तो वहाँ कायदा भी समझना चाहिए। और सबसे ज्यादा उसी जगह मदद एकदम अफलातून समझने लगते हैं। ये बेकार की बात है। बड़ों का मान रखना अपने देश की संस्कृति का एक लक्षण है। ये नहीं कि एक छोटे से कल खड़े होती है जहाँ लोग नम्रता पूर्वक सर्व स्वीकार्य करते हैं । 9.

Original Transcript : Hindi बता रही हूँ। जैसे कि कोई बड़ी गुरु पूजा यहाँ निकालें. जन्माष्टमी. वो नहीं हो सकती। मुझे मालूम है। क्योंकि अकेले चार आदमी इधर दौड़ेंगे, ऐसा और जगह नहीं है। हालांकि वहाँ मैने मेहनत ज्यादा करी है मैं मानती हो गए और बकना शुरु कर दिया उससे सारा तहस-नहस हो जाता है। हो सकता है कि जो यहाँ के बड़े लोग हैं वो भी अपना confidence खो दें। आप गर अपने बड़ो पर हँसना शुरु कर दें उनका मजाक शुरु कर दे तो वो कुछ भी नहीं कर सकते। उनको हूँ। आप लोग भी गर मेहनत करें तो उनसे भी आगे जा सकते हैं। आपस में एक दूसरे का आदर करना चाहिए. आप सब सन्त साधू बड़ा एक दूसरों का आदर करते हैं। सन्त को गर पता हो दूसरे सन्त आए चाहिए। जैसे Brain है Brain से आपका सम्बन्ध है है तो बहुत आदर से उनसे मिलते हैं आप वाकई में सन्त साधू हैं, आप पहुँचे हुए हैं। आपको उसी जरह से रहना चाहिए, उसी शान से रहना चाहिए जैसे सन्त रहते हैं। वो बोलते ज्यादा नहीं हैं किसी पर आक्रमण नहीं करते हैं। जहाँ बैठे हैं वहीं आराम से, अपना कुछ भी न समझे अपने मन से जो चाहें वो करने लग जाएं। और फिर ये सोचना है कि collective जो आदमी होता है उसका सम्बन्ध जो है एक पूरे से होना बीच में सब चीजों से जुड़ा है। अगर आपका Brain से ही सम्बन्ध टूट गया तो हो नहीं सकता। Brain जिससे सम्बन्ध है उससे आपका फिर गर सम्बन्ध टूट गया तो हो नहीं सकता। इसका मतलब आप malignant हो गए, कैसर हो गए। on your own नहीं हो सकते आप सहजयोग में, सब एक के साथ, तकिया तक तो वो छोड़ते नहीं है। अगर जंगल में कही बैठे हैं तो वहीं बैठे रहेंगे, और सेवा में तत्पर होना एक सब जुड़े हुए हैं। इस तरह से। इसके लिए थोड़ा चाहिए सा आपका थोड़ी नम्रता चाहिए। अभी कोई गर बड़ा काम यहाँ निकालें तो बनेगा नहीं सहजयोग का मैं परमात्मा आप पर कृपा करें (Checked Transcription) 10