Shri Fatima Puja

Saint-George (Switzerland)

1988-08-14 Fatimabai Puja Talk, St George, Switzerland, 62' Download subtitles: EN,PL,PT,TR,ZH-HANS,ZH-HANTView subtitles: Add subtitles:
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                                 श्री फातिमा पूजा

सेंट जॉर्जेस, स्विट्जरलैंड, 14 अगस्त 1988।

आज हम फातिमा बी की पूजा करने के लिए इकट्ठे हुए हैं, जो कि गृह लक्ष्मी का प्रतीक थी, और इसलिए हम अपने भीतर गृह लक्ष्मी सिद्धांत की पूजा करने जा रहे हैं। जिस तरह गृहिणी को हर काम, घर की हर चीज पूरी करना होती है और फिर वह नहाने के लिए जाती है, उसी तरह आज सुबह ,मुझे भी बहुत सारे काम करने थे और फिर मैं आपकी पूजा के लिए आ सकती थी, क्योंकि आज घर पर पत्नी के कई काम थे । इसलिए मुझे उन्हें एक अच्छी गृहणी की तरह खत्म करना था। अब,गृहलक्ष्मी का सिद्धांत ईश्वर द्वारा उतपन्न और विकसित किया गया है, यह किसी इंसान का निर्माण नहीं है और जैसा कि आप जानते हैं कि यह लेफ्ट नाभी में रहता है। गृह लक्ष्मी वह है जो फातिमा के जीवन द्वारा प्रस्तुत है जो मोहम्मद साहब की बेटी थी। अब वह हमेशा एक गुरु के रिश्तेदार के रूप में पैदा होती है, जो कि कोमार्य का,पवित्रता का रिश्ता हो । इसलिए वह बहन के रूप में आती है या वह बेटी के रूप में आती है। अब फातिमा के जीवन की सुंदरता यह है कि मोहम्मद साहब की मृत्यु के बाद, हमेशा की तरह, कट्टरपंथी लोग थे जिन्होंने सोचा था कि वे धर्म को अपने हाथों में ले सकते हैं और इसे एक बहुत ही कट्टर चीज बना सकते हैं। व्यक्ति के उत्थान की ओर इतना ध्यान नहीं दिया गया।

यहां तक कि मोहम्मद साहब ने अपने दामाद का कई तरह से वर्णन किया है। और वह केवल एक ही है – या ब्रह्मदेव का एक और अवतार है, जो इस धरती पर आया है। अली इस धरती पर आए, वह ब्रह्मदेव के अवतार थे और उनका एक और अवतार सोपान्देव था (ज्ञानेश्वर के भाई (जब, आप पुणे जाए , आप सोपांदेव का मंदिर देख सकते हैं)।

श्री माताजी: [माइक ठीक करने वाले योगी के लिए],यह इस वजन के कारण नीचे आता है। इसलिए हमारे पास अली और उनकी पत्नी फातिमा हैं जिन्होंने लेफ्ट नाभी के सिद्धांत पर अवतार लिया। वह अपने घर में, अपनी गृहस्थी में रही और उसने उस मर्यादा का पालन किया कि जिसे आप पर्दा कहती हैं? पर्दा: घूंघट] या नकाब के रूप में वे इसे कहते हैं, उसके चेहरे को कवर करने के लिए। यह एक प्रतीक है कि एक महिला जो एक गृहिणी भी  है, उसे अपना चेहरा ढंक कर अपनी शुद्धता को बचाना होगा क्योंकि वह एक सुंदर महिला थी और वे एक ऐसे देश में पैदा हुई थीं जो बहुत हिंसक था, और निश्चित रूप से उस मामले में उस पर हमला हुआ होता यदि वे उस प्रकार के वस्त्रों में नहीं रहती। जैसा कि आप जानते हैं, मसीह के समय में, हालांकि मैरी महालक्ष्मी का अवतार थीं,  बहुत ही सशक्त व्यक्तित्व वाली होनी ही थीं और, मसीह नहीं चाहते थे कि कोई भी यह जाने कि वह क्या थीं।

लेकिन यद्यपि वह घर में थी, वह शक्ति थी, इसलिए उसने अपने बेटों को अनुमति दी या वास्तव में उन्हें उन कट्टरपंथियों से लड़ने का आदेश दिया जो उनके पति के अधिकार को अस्वीकार करने की कोशिश कर रहे थे। और आप जानते हैं, हसन और हुसैन, वे वहां मारे गए थे। यह एक बहुत ही सुंदर बात है कि कैसे एक गृहिणी के सुंदर सिद्धांत को स्थापित करने के लिए सीता के महालक्ष्मी तत्व ने विष्णुमाया का रूप धारण किया। अब, वह बहुत शक्तिशाली थी, इसमें कोई संदेह नहीं था, और वह जानती थी कि उसके बच्चों को मार दिया जाएगा। लेकिन ये लोग कभी मारे नहीं जाते, न कभी मरते हैं और न ही पीड़ित होते हैं। यह एक नाटक है जो उन्हें लोगों को दिखाने के लिए खेलना पड़ता है कि वे कितने मूर्ख हैं। उसी के परिणामस्वरूप, एक और प्रणाली शुरू हुई जहां वे संतों का सम्मान करते थे; जैसे भारत में शिया लोग औलियाओं का सम्मान करते हैं या हम उन्हें ऐसे लोग कह सकते हैं जो निज़ामुद्दीन साहब की तरह आत्मसाक्षात्कारी आत्मा हैं। फिर, अजमेर में, हमें हज़रत चिश्ती मिले हैं। इन सभी महान संतों का शियाओं द्वारा सम्मान किया गया था।लेकिन फिर भी वे पंथो की सीमा को पार नहीं कर सके थे। इसलिए वे भी बेहद कट्टर बन गए।सबसे पहले वे दूसरे धर्म को नहीं देखेंगे जहां उनके संत थे। वे उन संतों का सम्मान नहीं करेंगे जो दूसरे धर्म के थे और यहां तक कि जब हमारे पास शिरडी के साईं नाथ जैसे महान संत थे, जो की शुरू में एक मुस्लिम थे, और कहा जाता है कि खुद फातिमा उनकी गोद में एक बच्चे के रूप में लायी और उसे किसी महिला को दिया था ।जहां तक हिंदुओं का संबंध था, उनकी संतत्व को उन लोगों ने इनकार नहीं किया, लेकिन मुसलमानों ने इसे स्वीकार नहीं किया।

एक और है जिसे हाजी मलंग कहा जाता है, जो बॉम्बे के पास है, जो एक आत्मसाक्षात्कारी आत्मा थे । उन्हें भी शियाओं की कट्टरता का एहसास हुआ। `शिया” शब्द सिया से आया है; उत्तर प्रदेश में सीता को सिया कहा जाता है। सीताजी को ‘सिया’ कहा जाता है। उन्होंने यह भी नहीं समझा की ऐसे भी संत है हो तथाकथित मुस्लिम नहीं हैं वरन वे संत हैं। इसलिए वे इससे बाहर नहीं निकल सके। इसलिए हमारे पास एक और हाजी मलंग है जिसे हिंदुओं द्वारा पूजा जाता है। कुछ मुसलमान भी वहां जाते हैं, इसमें कोई शक नहीं। यह हाजी मलंग शियाओं की कट्टरता से काफी चिंतित थे, इसलिए उन्होंने कुछ हिंदुओं को उनकी पूजा करने के लिए नियुक्त किया, बस संतुलन कायम करने के लिए। उन्होंने हर तरह की चीजें कीं।

ऐसे ही कई संत हैं। मैं भोपाल गयी थी । एक और बडे संत है जिन्हें [वहाँ] दफनाया गया था। लेकिन उनके सभी शिष्य सिर्फ उस जगह की कमाई पर निर्भर थे, जो बहुत बुरा था। यहां तक कि हजरत निजामुद्दीन की चीजें भी उसी तरह से हैं जैसे हिंदू करते हैं। वे सभी एक कमाई करते हैं, मेरा मतलब है कि यह एक तरह का व्यावसायिक क्रियाकलाप है। तो जब  यह संत मर गये और उन्हें वहीं दफना दिया गया। कई लोग थे जो इस पर निर्भर थे। जब मैं वहां गयी, तो मैंने, वैसे ही, उनसे पूछा, “तुम्हारा धर्म क्या है?” तो वे कहते हैं, “हम मुसलमान हैं।” मैंने कहा, “उन संत का धर्म क्या था जो मर गये?” उन्होंने कहा, “संतों  का कोई धर्म नहीं होता|” तो मैंने कहा, “फिर आप धर्म का पालन क्यों करना चाहते हैं? आप उनके धर्म का पालन क्यों नहीं करते? ” उनका कोई धर्म नहीं है। यहां तक कि,संस्कृत में, यह कहा जाता है, कि सन्यासियों का कोई धर्म नहीं होता है। वे धर्मातित हैं, वे धर्म से परे हैं। लेकिन जैसा कि हर अवतार के साथ हुआ है, शिया लोगों के साथ भी हुआ है, सुन्नियों के साथ, हिंदुओं के साथ, मुसलमानों और सभी के साथ, कि उन्होंने एक कट्टर समूह बना लिया। अब कट्टरता अपने आप में पूरी तरह धर्म के खिलाफ है,  आप के अंतर्निहित धर्म के खिलाफ अपने आप में है क्योंकि यह विष पैदा करता है। यह एक विषैली चीज है। यह आपको दूसरों से नफरत कराता है। जब आप दूसरों से घृणा करने लगते हैं, तो यह आप में भयानक जहर के रूप में प्रतिक्रिया करता है, जो आपके भीतर की सभी सुंदरता को खा जाता है। किसी एक से नफरत करना जो इंसान कर सकता है, सबसे बुरा काम है , लेकिन वो कर सकता है। वे जो चाहें कर सकते हैं। जानवर किसी से नफरत नहीं करते। क्या तुम कल्पना कर सकती हो? वे नफरत करना नहीं जानते। वे किसी एक को इसलिए काटते हैं क्योंकि वह उनका स्वभाव है। उन्होंने कुछ को काट दिया क्योंकि उनकी प्रकृति। वे कभी किसी से नफरत नहीं करते। वे किसी को पसंद नहीं कर सकते हैं लेकिन यह घृणा, जो की एक जहर है, मानव कल्पना और मानव शोषण की विशेषता है। सिर्फ इंसान ही नफरत कर सकता है। और यह भयानक चीज़ घृणा मुसलमानों के बीच भी स्थापित हो गई जो उचित नहीं किया गया था। यह कर्बला नफरत के लिए नहीं, बल्कि प्यार के लिए बनाया गया था।

 हर धर्म में,जो कुछ भी प्यार के लिए किया गया वह नफरत में बदल गया। अब पूरी बात का सबसे बुरा हिस्सा यह है कि एक धड़ा जो नफरत करता है वह सोचता है कि दूसरा धड़ा बुरा है, और दूसरा धड़ा सोचता है कि पहला वाला सबसे बुरा है। वे किस नियम, कानून या तर्क के तहत निर्णय लेते हैं – यह उनका अपना दृष्टिकोण है। इसलिए वे एक दूसरे के साथ संगठित होते  हैं।

जबकि गृहलक्ष्मी का यह सिद्धांत विशेष रूप से उस घृणा को दूर करने के लिए बनाया गया था, उस बर्फीली चीज को जिसे घृणा कहा जाता था को नियंत्रित करने के लिए , जिसे लोगों के दिमाग से, घृणा को दूर करने के लिए, यह गृहलक्ष्मी सिद्धांत बनाया गया था। कैसे?  परिवार में जब आपके पास एक घर होता है, तो गृहलक्ष्मी सिद्धांत को बच्चों के बीच, पति और बच्चों के बीच की घृणा को वश में करना पड़ता है। लेकिन अगर वह खुद अपनी नफरत का आनंद लेती है तो वह उसे कैसे मात दे सकती है?  वह स्वयं उस शांति का स्रोत है जो घृणा को वश में करती है।

अब भारत में हमारा संयुक्त परिवार [सिस्टम] है। आपके भी चाचा, चाची, जैसे रिश्ते हैं। लेकिन गृहिणी का काम लोगों की सभी चुभन को शांत करना है जो टकराव पैदा करते हैं। आदमी को अब एक गृहिणी की पूजा करनी होगी। ऐसा कहा जाता है, “यत्र नार्या पूज्यन्ते, तत्र रमन्ते देवता” – “जहाँ गृहिणी का सम्मान किया जाता है,  केवल वहाँ देवता निवास करते हैं”। हमारे देश में, मुझे कहना होगा कि श्रेय गृहिणियों को जाना चाहिए क्योंकि हम अर्थशास्त्र के लिए अच्छे नहीं हैं, राजनीति, प्रशासन के लिए अच्छे नहीं हैं। निराशाजनक। पुरुष लोग बेकार हैं, वे किसी भी घरेलू काम या किसी भी चीज़ को नहीं जानते हैं, महिलाओं ने इसे खुद पर रखा है, लेकिन हमारा समाज पहली श्रेणी का है, इसे घर की महिलाओं द्वारा बनाए रखा जाता है।

तो आदमी को गृहिणी का सम्मान करना होगा, यह बहुत महत्वपूर्ण है। यदि वह अपनी गृहिणी का सम्मान नहीं करता है, तो किसी भी गृहलक्ष्मी तत्व के बने रहने की कोई संभावना नहीं है। यह एक गृहिणी के उस सिद्धांत के संरक्षण की तरह है। लेकिन कुछ पुरुष, मेरा मतलब है कि उनमें से कई, सोचते हैं कि यह उनका जन्म सिद्ध अधिकार  है कि वे अपनी पत्नियों (अगर वह एक अच्छी महिला हैं, तो) के साथ बुरा व्यवहार करें, उन्हें प्रताड़ित करें, हर तरह की बातें कहें, नाराज हो,। लेकिन अगर वह एक पीछे पड़ने वाली  है, अगर वह एक भूत है, तो वे उसके नियंत्रण में हैं, पूरी तरह से वश में हैं। अगर पत्नी एक भूत है, तो पति हमेशा  उसे एक तरह से खुश करने की कोशिश करता है ,उसके प्रति अत्यधिक दयालु होता है । वह जानता है कि वह एक भूत है, आखिरकार, आप जानते हैं, सावधान रहें [आप] यह नहीं जानते हैं कि किस समय भूत आप पर सांप की तरह आएगा! और अगर वह जानती है कि उसे कैसे परेशान करना या बहस करना है, तो वे भी डरते हैं। कोई प्यार नहीं है, उनके पास एक-दूसरे के लिए कोई प्यार या सम्मान नहीं है लेकिन उनके मन में रौब या डर है। और वे ऐसी महिला से डरते हैं। अब कुछ महिलाएं सोचती हैं कि अगर वे चुलबुली हो जाती हैं तो पतियों पर बेहतर नियंत्रण होता है। लेकिन वे उनका मूल सिद्धांत खो देती हैं। उनके पास जो मूल शक्ती है,  उसे वे खो देती हैं, और कठिनाइयों में उतर जाती हैं।

तो एक गृहलक्ष्मी का मूल सिद्धांत उसकी पवित्रता का सम्मान करना है, बाहर भीतर उसकी शुद्धता का सम्मान करना है। यही उस की स्थिरता है। बेशक ज्यादातर पुरुष इसका फायदा उठाते हैं। यदि पत्नी दब्बू या आज्ञाकारी है, तो वे इसे एक निशाना बना लेते हैं कि वे सिर्फ पत्नी पर शासन करते हैं, बाएं और दाएं। ठीक है!

लेकिन इस महिला, गृहिणी को यह जानना होगा कि वह दब्बू नहीं है। वह अपनी धार्मिकता, अपने उदारता के प्रति, अपने गुणों के प्रति आज्ञाकारी है। अगर पति बेवकूफ है, ठीक है, वह एक बच्चे की तरह बेवकूफ है, समाप्त! लेकिन पति को यह जानना होगा कि उसे सम्मान देना चाहिए, अन्यथा वह एक गया गुजरा व्यक्ति है, वह बेकार हो गया है, वह अनुपयोगी है। पहली बात तो यह है कि उसे यह सुनिश्चित करना होगा कि गृहस्थी में स्त्री गृहलक्ष्मी के रूप में प्रतिष्ठित हो । तब आशीर्वाद बहता है।

लेकिन किसी भी तरह से उसे अपमान नहीं करना चाहिए या उसके प्रति निर्दयी नहीं होना चाहिए और अपनी ऊँची आवाज नहीं करना चाहिए या उसे बातें  नहीं सुनाना चाहिए। लेकिन पत्नी को भी ऐसा ही बनना पड़ता है जिसका सम्मान किया जाए। मैंने कई बार कहा है कि,यदि आपकी पत्नी हावी हो रही है, उसके चेहरे पर दो थप्पड़ दें, ज़ाहिर है, कोई शक नहीं। उसे हावी होने वाली नहीं होना है, उसे तो  दूसरों की हावी होने वाली शक्तियों को दूर करना  है। वह शांति का स्रोत है, वह आनंद का स्रोत है और वह शांति दूत है। यदि वह ऐसी है जो, समस्याएं पैदा करती है, तो आप उसे अच्छी तरह से थप्पड़ मार सकते हैं, उसे उसके सही रूप में ला सकते हैं, सब ठीक है।

अतः यह गृहलक्ष्मी तत्व परस्पर है। यह केवल पत्नी या पति पर नहीं बल्कि दोनों पर निर्भर करता है। तो एक बार अगर आप अपनी पत्नी को पीड़ित कर रहे हैं, तो आपकी बाईं नाभी कभी नहीं सुधर सकती। या यदि आप एक बुरी पत्नी हैं तो आपकी बाईं नाभी सुधर नहीं सकती।

अब पश्चिम में महिलाओं के साथ समस्या यह है कि वे महसूस  ही नहीं करती हैं कि उनकी शक्ति क्या है। अस्सी साल की महिला भी दुल्हन की तरह दिखना चाहेगी। वे अपनी गरिमा को महसूस नहीं करती हैं और अपने भीतर अपनी गरिमा का आनंद नहीं लेती हैं। वे घर की रानी हैं, लेकिन वे एक सस्ती , बचकाना, युवा तुच्छ लड़की की तरह व्यवहार करना चाहती हैं। वे अपने व्यक्तित्व की गरिमा को महसूस नहीं करती हैं, वे बहुत अधिक बात करती हैं, वे इस तरह से व्यवहार करती हैं जो कि, एक गृहिणी को शोभा नहीं देता है। जैसे वे इस तरह अपना हाथ निकालेंगी, इस तरह से बात करेंगी, जैसे मछुआरे अपनी मछली किसी को बेचते समय करते हैं और जब उन्हें लड़ना होता है। या वे कभी-कभी चिल्लाती हैं, वे चिल्लाती भी हैं, मेरा मतलब है, मैंने सुना है कि वे चिल्लाती हैं और कभी-कभी वे अपने पति को मारती हैं, यह अति है! शुरुआत इससे होती है की वे हमेशा खुद की तुलना पति से करने लगती हैं । जैसे मैं ऐसे अमीर आदमी की बेटी हूँ, मैं ऐसे और ऐसे परिवार से हूँ, मेरे पति इतने हल्के परिवार से हैं, उनके पास पैसे नहीं हैं, कुछ भी नहीं है, वे शिक्षित नहीं हैं, इसलिए उनके साथ बुरा व्यवहार करती हैं। उसके साथ ऐसा व्यवहार करती है , जिसमें कोई सम्मान न हो। ऐसी स्त्री अपनी सारी शक्तियाँ खो देगी। अपने स्वयं के तरीकों से भी वह दोषी महसूस करेगी, वह दोषी महसूस करेगी, क्योंकि सबसे पहले, किसी को भी सहज योग में किसी दुसरे को नीचा देखने का अधिकार नहीं है। फिर, अपने पति को नीचा देखना , कुछ अविश्वसनीय है। वह सहज योगी नहीं भी हो। ठीक है। वह इस समय तक नहीं भी हो , लेकिन आपके व्यवहार से, आपकी ताकत से, हर चीज से आप उसे बचा सकती हैं। लेकिन आप दूसरों पर हावी होकर, दूसरों को दबा कर , अपने पति को, कुएं का मेंढक बनाकर, खुद का नुकसान क्यों कर रही हैं। उससे कहती हैं , “ओह, हम दोनों को आनंद लेना चाहिए। चलो हमारा अलग से घर बनायें , अन्य किसी को भी हमारे घर में नहीं आना चाहिए। ‘ यहां तक कि एक चूहा उस घर में नहीं आता है। यहां तक कि कहने लगती हैं , “ओह, ये ‘मेरे’ बच्चे हैं, ‘मेरे” पति, खुद’,  यह सहज योग के विपरीत है, समझ का नकारात्मक रूप है। ये बिल्कुल बेतुकी बातें हैं, ये किसी सहज योगी या किसी सहज योगिनी की तरह नहीं दिखतीं है ।इस तरह का स्वार्थ, इस तरह एकल खोरी , सहज योग के खिलाफ है। 

लेकिन एक सदगृहिणी  के तरीके की बात है,

 ओह, अब मुझे कितनी तैयारी करनी चाहिए? ” शायद उदाहरण के लिए, “आने वाले 50 व्यक्ति होंगे।”

तो पति कहता है, ” लेकिन 10 ही आ रहे हैं। आप 50 व्यक्तियों के लिए क्यों तैयारी करना चाहती हैं? 

‘पत्नी : लेकिन हो सकता है कि वे ज्यादा खाना पसंद करें।

 ‘पति : लेकिन फिर  भी 50 प्लेटें क्यों हैं?

 ‘‘हो सकता है कि वे वहाँ दोस्त लाएँ। 

‘तो वह अपनी उदारता में सोचती है। वह अपनी उदारता का आनंद लेती है। वह अपनी उदारता का आनंद लेती है। मैंने बहुतों को जाना है। हालांकि वे सहज योगिनियां भी नहीं हैं।

वे कहेंगी, “क्या तुम आओगे, भाभी, तुम रात के खाने के लिए आओगे?”

मैं : ओह, मैं नहीं आ रही हूं, आप बहुत सी चीजें पकाती हैं।

 ”नहीं आ रहे हैं? नहीं, नहीं, मैं बहुत कम चीजें पकाऊंगी लेकिन कृपया आइए।

 ‘फिर वह तुरंत सोचने लगती है। “क्या सब्जियां बाजार में उपलब्ध हैं? मुझे क्या लाना चाहिए? सर्वश्रेष्ठ क्या है?’मेरा मतलब है, मैं उनकी गुरु नहीं हूं, मैं उनकी मां नहीं हूं, मैं सिर्फ एक रिश्तेदार हूं, लेकिन वे भोजन के माध्यम से अपने प्यार का इजहार करना चाहती हैं, वे भोजन की दाता हैं -अन्नधा। वे अन्नपूर्णा हैं और यही एक गुण है, यदि स्त्री के पास यह उदारता नहीं है तो वह किसी भी तरह सहज योगिनी नहीं है। निश्चित ही ,मुझसे जान लो । पति थोड़ा कंजूस हो सकता है, कोई बात नहीं, लेकिन पत्नी को बहुत उदार होना पड़ता है और कभी-कभी, वह चुपके से पैसे देती है, अपने बच्चों को नहीं बल्कि दूसरों को।  सहज योग में ऐसी सुंदर महिलाओं को होना चाहिए। लेकिन मुझे बहुत अफ़सोस होता है, कभी-कभी मुझ पर सहज योग की महिलाओं से हमला  होता है, ना की पुरुषों से। मैं खुद एक महिला हूं, और मुझे धक्का लगता है कि महिलाओं को इस तरह से मुझ पर क्यों हमला करना चाहिए? सहज योग में किसी भी प्रकार का कोई वर्चस्व नहीं है, लेकिन यह सभी तथाकथित दासता या वर्चस्व के विचार आपके अपने स्वयं की गरिमा  और समझ के बारे में,गलत धारणा के कारण आते हैं | आपको खुद के बारे में पता नहीं है। आपको पता नहीं है कि आप रानी हैं, कोई भी आप पर हावी नहीं हो सकता। घर पर राज करने वाली महिला पर कौन हावी हो सकता है? अगर पति का कहना है, “मुझे यह रंग पसंद  नहीं है!” ठीक है, थोड़ी देर के लिए इस बात को  छोड़ दें। फिर कोई आकर कहेगा, ” कितना अच्छा रंग है !” [तब] वह कहता है, “आह, इतना अच्छा रंग, ओह, इसे मत बदलो।”

महिलाओं को पुरुषों को समझना चाहिए। उनकी दृष्टी बड़ी होती हैं। वे बारीक़ नहीं देख पाते  हैं। वे बड़े पैमाने पर सब कुछ देखते हैं, आप समझें । इसलिए आज वे कुछ कहेंगे, कल वे इसके बारे में भूल जाएंगे और उनकी सूक्ष्मदर्शी आँखें नहीं होंगी। वे इन चीजों से बहुत ऊपर हैं। वे इन चीजों से ऊपर हैं। आपको  यह बात समझना चाहिए ! लेकिन,अगर वह घोड़े पर बैठता है तो, “मुझे भी घोड़े पर बैठना है , और नीचे गिरना चाहिए। यदि वह स्कीइंग के लिए जाता है तो  – मैं भी स्कीइंग के लिए जाऊंगी। यदि वह अपनी मांसपेशियों को विकसित करता है – तो मैं भी अपनी मांसपेशियों को विकसित करूंगी। ” यह उस स्तर पर आ रहा है। मेरा मतलब है कि महिलाएं कोई धरती पर ना हो ऐसी दिखने लगती हैं | आप यह नहीं जानते हैं कि इस तरह बिना किसी मूंछ के बड़ी, बड़ी मांसपेशियों वाली महिलाएं कैसी होती हैं। तो  हमारे इस तरह के मुर्खता पूर्ण  विचार हैं।

लेकिन किसी भी तरह की कोई अधीनता नहीं है। आप अपनी खुद की गरिमा, अपनी खुद की पवित्रता के लिए, सम्मान की अपनी भावना के लिए और सबसे बढ़कर, अपनी धार्मिकता के अधीनस्थ हैं क्योंकि आप उस के प्रभारी हैं। जो व्यक्ति मी प्रभारी है, उसे उसकी जिम्मेदारी लेना होगी |आप कितने झगड़े पैदा करती हैं? जब आप शांतिदूत बनने वाली हैं तो आप कैसे झगड़ालू हो सकती हैं? मान लीजिए कि हम दो शांतिदूतों को किसी देश में शांति बनाने के लिए भेजते हैं और वे एक-दूसरे का गला काटते हैं, तो आप ऐसी चीज के लिए क्या कहेंगे?

आप  तो वह हैं जिसे हर बात को सहज  बनाना है, आप वह हैं जिसे प्यार की ऐसी अभिव्यक्ति, ऐसी मीठी चीजें लानी पड़ती हैं, की पूरा परिवार खुद आप में समा कर आराम और ,सुरक्षा  महसूस करता है, क्योंकि आप माँ हैं।

परिवार को आपके भीतर सुरक्षित महसूस करना चाहिए और यह प्यार आपकी शक्ति है। यह आपकी शक्ति है की आप प्यार दे सकती हैं और प्यार देते हुए आप को पता लगेगा की आप हमेशा खुद को समृद्ध बनाएंगे। मेरा मतलब है कि कल्पना करें  जो मुझे मिलता है उसकी तुलना में मैं जो भी उपहार देती हूँ । मुझे नहीं पता कि शायद इसके लिए  मुझे दूसरा घर बनाना होगा! मैं उन्हें कह रही हूं “मुझे व्यक्तिगत रूप से उपहार मत दो। मैं कोई व्यक्तिगत उपहार नहीं लूंगी। ”तब भी उसके बावजूद। मुझे नहीं पता, सिर्फ प्यार के साथ अगर मुझे देखभाल के साथ कुछ मिलता है, तो वह प्यार है, आप जानते हैं, जो खुद को प्रकट करता है और एक कविता की तरह आपके पास वापस आता है। आप कुछ बार हैरान हो गए। मैं आपको अपने स्वयं के जीवन का एक सरल उदाहरण दूंगी जो आपको बताएगा कि प्यार कैसे काम कर सकता है।

मुझे लगता है कि शुरू से आखिर तक मैं एक गृहिणी थी। एक बार जब मैं दिल्ली में थी, मेरी बेटी का जन्म होना था, इसलिए मैं उसके लिए कुछ बुन रही थी,  बाहर लॉन में बैठी थी, जब तीन व्यक्ति घर में घुसे, एक महिला और दो आदमी थे और उन्होंने आकर कहा, “देखिये हम हैं … मैं एक गृहिणी हूं और ये दोनों हैं, एक मेरा पति है और वह मेरे पति के दोस्त है और वह एक मुस्लिम है, और हम आपके पास शरण के लिए आए हैं क्योंकि हम शरणार्थी हैं। ” मैंने उन्हें देखा, वे मुझे बहुत अच्छे लगे थे, वे बिलकुल ठीक थे। मैंने कहा, “ठीक है, तुम मेरे घर में बस जाओ।” तो मैंने उन्हें बाहर का कमरा दिया जिसमें एक रसोई और एक बाथरूम था और यह बात, और दुसरे सज्जन के लिए, मैंने कहा, “एक और अतिरिक्त कमरा है, आप वहाँ रह सकते हैं, और पति पत्नी यहाँ रह सकते हैं।”

शाम को मेरा भाई अंदर आया। उसने अपनी ऊँची आवाज़ में चिल्लाना शुरू किया, उसने कहा “यह क्या है? आप इन लोगों को जानते नहीं , वे चोर हो सकते हैं, वे यह हो सकते हैं, वे ऐसा कर सकते हैं … ”और फिर मेरे पति आए, उन्होंने भी उनका साथ दिया क्योंकि आप देखते हैं, वे दोस्त थे! सभी पुरुष सिर्फ एक जैसे ही हैं, आप देखते हैं, तो उन्होंने कहा, “आप देखते हैं, वह नहीं समझती है कि उसने इन तीन व्यक्तियों को यहां रखा है। भगवान ही जानता है, वे क्या हैं, कह रहे है की शरणार्थी हैं, यह बात। वह नहीं जानती, वह एक मुसलमान है, वह एक हिंदू है। ईश्वर ही जानता है, उसके दो पति है या, एक पति है ”, सभी तरह की चीजें। अगली सुबह वे उस बारे में भूल गए। मैंने कहा, “ठीक है। उन्हें एक रात के लिए वहीं रहने दो। सब ठीक है? मैं उन्हें आज, एक रात बाहर नहीं धकेल सकती। अगली सुबह वे भूल गए कि वे वहाँ रहते हैं। यह पुरुषों का तरीका  है! पहला दिन, इस तरह का विस्फोट , इस तरह का विस्फोट, मैंने कहा, “सब ठीक है, एक रात। अब चिल्लाओ मत। वे आहत महसूस करेंगे। इसलिए उन्हें एक रात रुकने दें, वे राहत पा लेंगे । अगली सुबह वे अपने काम के लिए चले गए। उनके पास समय नहीं था। यह, आप देखो, केवल एक सप्ताह के अंत में वे लोग घर में सक्रिय हो जाते हैं, अन्यथा वे निष्क्रिय ही रहते हैं। इसलिए वे चले गए। ऐसा हुआ कि ये लोग मेरे साथ एक महीने तक रहे। तब इस महिला को नौकरी मिल गई और वह अपने पति और इस मुस्लिम के साथ चली गई। लेकिन इस बीच दिल्ली में एक बड़ा दंगा हुआ, बहुत बड़ा दंगा , क्योंकि बहुत से हिंदू और पंजाब में सिख लोग मारे गए। इसकी दिल्ली में प्रतिक्रिया थी और, उन्होंने वहां सभी मुसलमानों को मारना शुरू कर दिया। तो, तीन, चार सिख लोग और एक या दो हिंदू मेरे घर आए और उन्होंने कहा, “हमें बताया गया है कि आपके साथ एक मुस्लिम व्यक्ति रहता है।” मैंने कहा नहीं। मेरे पास कैसे हो सकता है? ” उन्होंने कहा, “एक मुसलमान है। हमें उसे मारना होगा।” मैंने कहा “देखिए मैं इतनी बड़ी टीका (बिंदी) पहन रही हूं, क्या आप यकीन कर सकते हैं कि मेरे घर में मुसलमान हो सकता है?” उन्होंने सोचा कि मुझे असली हिंदू कट्टरपंथी होना चाहिए, आप देखिए! इसलिए उन्होंने मुझ पर विश्वास किया। मैंने कहा, “अब देखिए, अगर आपको मेरे घर  के अंदर जाना है, तो आप मेरे शव पर से ही जा सकते हैं क्योंकि मैं आपको अनुमति नहीं दूंगी!” इसलिए उन्हें काफी डर लगा। वे चले गए। तो इस साथी ने मेरी बातें सुनीं और वह आया और उसने कहा, “मुझे आश्चर्य हुआ। आपने अपना जीवन कैसे जोखिम में डाला? “मैंने कहा, “कुछ नहीं है। कुछ भी तो नहीं।” उसकी जान बच गई।

अब यह सज्जन, यह मुस्लिम सज्जन, साहिर लुधियानवी नामक एक महान कवि बन गए, और यह महिला एक महान अभिनेत्री बन गई,( काई नऊ एहे तेनज़ा) ? (उसका नाम क्या है?)… .. जो एक माँ की तरह अभिनय करती थी? हा, सचदेव, अचला सचदेव।  और ,मुझे यह पता था कि वह सब बन गये है। लेकिन मैंने इसके बारे में किसी को नहीं बताया। मैंने कहा “अब यदि उन्हें पता चल गया कि मैं बॉम्बे में हूं, वे मेरे बारे में दीवाने हो जाएंगे,” और मैंने सोचा की  “मेरे पास उस सब के लिए समय नहीं है।”

तो, हमने युवा लोगों के लिए एक फिल्म केंद्र शुरू किया, ताकि उन्हें कुछ अच्छी फिल्में दी जा सकें। लेकिन यह सब आगे चलकर मजाक बना। उन्होंने कभी मेरी बात नहीं सुनी, लेकिन जो भी हो। तो उन्होंने कहा, “हमें माँ के रूप में अभिनय कार्य करने के लिए इस अचला सचदेव को लेना चाहिए।” मैंने कहा, “सब ठीक है, लेकिन मैंने कहा उसे नहीं बताना कि मैंने कहा है, मुझे इससे कोई लेना-देना नहीं है।” तो, सालों बीत गए, मैं बारह साल या उससे अधिक शायद सोचती हूँ । तो उन्होंने जाकर उसे बताया। तो वह एक अभिनेत्री की तरह उपद्रव कर रही थी। “नहीं, नहीं – आप मुझे कितना भुगतान करने जा रहे हैं? मैं मुफ्त अभिनय नहीं कर सकती। हर कोई मुफ्त में मांगेगा। फिर मैं तुम्हें कैसे मुफ्त दे सकती हूं। तुम्हें मुझे साड़ी देनी होगी। आपको इतना पैसा देना होगा यह चीज।” उन्होंने कहा “सब कम से कम मुहूर्त पर तो आइये। मुहूर्त में आओ ”, शुरुआत में, बड़ा मुहूर्त वह होता है जहां आप इसे शुरू करते हैं।

तो वह आई और मैं वहां थी। उसने मुझे देखा और बस, तुम जानती हो, उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि उसने बारह साल बाद मुझे देखा है। आँसू उसकी आँखों को सूजाने लगे । बिल्कुल वह कुछ नहीं कह सकी थी, बस वह आकर मेरी बाँहों में गिर गई और उसने कहा “आप इन दिनों कहाँ थे? मैं आपको तलाश करने की कोशिश कर रही हूं। ” फिर उसने मुझे और सभी का वर्णन करना शुरू कर दिया। तब साहिर लुधियानवी वहाँ थे और उन्होंने कहा, “यह महिला यहाँ कैसे है?” लोगोंने कहा, “यह उनका ही काम है।” “हे भगवान, आपने हमें क्यों नहीं बताया? आप देखें, हम उनके लिए अपनी जान भी दे देंगे! ” और वे सभी चकित थे, वे कैसे बदल दिया गया। “कोई पैसा नहीं, कुछ भी नहीं, मैं इस परियोजना के लिए पैसा देने जा रहा हूं। ऐसा नहीं चलेगा। “अब देखिए, मैं एक गृहिणी थी, बस एक साधारण गृहिणी । मुझे अपने पति की संपत्ति, या किसी भी चीज़ पर इतने अधिकार नहीं थे, और मेरा भाई  एक और हावी साथी, दोनों एक साथ , बस उस रात मुझे उनके स्वभाव और गुस्से के साथ मारने वाले थे। मैंने उन्हें शांत किया और तब आप जानो कि जब मैंने अपने पति और अपने भाई को बताया तो वे चकित रह गए। मैंने कहा, ” ये वो लोग है और अब इस तरह के बन गए हैं और परिवर्तन देखो, उनके पास कितना है …”, और उन्होंने कहा, “और नहीं, अब हम किसी भी धर्मार्थ संस्थान के लिए ना नहीं कहेंगे। यह आखिरी गलती है जो हमने की है! ” और … कमाई और पैसे का सारा विचार ही खत्म हो गया। और उसने कई फिल्मों में परोपकार के लिए काम किया है और इस लुधियानवी ने दान के लिए कई चीज़े भी लिखी हैं।

तो एक महिला एक पुरुष को धर्मार्थ व्यक्तित्व बना सकती है – क्योंकि वह खुद धर्मार्थ है। उसके पास बहुत सारी सुंदरता हैं..वह एक कलाकार है! और वह अपने आसपास, अपने घर में, अपने परिवार में, अपने समाज में सुंदरता बना सकती है। हर जगह। लेकिन नहीं! महिलाएं पुरुषों की तरह लड़ना चाहती हैं ,उनका संगठन होगा । वे अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना चाहती हैं! मैं मानती हूं कि कुछ पुरुष बेहद क्रूर रहे हैं, कुछ कानून बेहद क्रूर रहे हैं, यह बात, वह बात, और यह कि उन्हें समझाना होगा। लेकिन यह तरीका नहीं है!

इन पुरुषों को जो महिलाओं को नष्ट करने की कोशिश करते हैं, सुधारने का एक और तरीका है,  क्योंकि महिलाओं में एक बहुत बड़ा गुण है कि गण उनके साथ हैं और श्री गणपति उनके साथ हैं। यदि वे पवित्र हैं और अपने शरीर को दिखाने और अपनी सुंदरता को प्रदर्शित करने और उसका पूंजी की तरह उपयोग करने की कोशिश नहीं करती तो वे कभी पुरुषों की तरफदारी नहीं करेंगे। ऐसी महिलाएं बेहद शक्तिशाली, बेहद शक्तिशाली होती हैं, और वे  अवसर आने पर अपनी वीरता दिखाती हैं, जब हमारे पास झांसी की रानी जैसा कोई मौका आता है। वह एक साधारण गृहिणी थी। उसने अंग्रेजों से लड़ाई लड़ी। और अंग्रेज भी उसकी वीरता पर हैरान थे और उन्होंने कहा कि झांसी हमें मिल गयी,  ठीक है, लेकिन गौरव झांसी की रानी को जाता है। ऐसे हमारे पास कई थे, नूरजहाँ हमारे पास थी, हमारे पास अहिल्या बाई थी। इन संस्थाओं की वजह से भारत में कई महान महिलाएं थीं। पद्मिनी हमारे पास थी, चाँद बीबी। ऐसी कई महिलाएं हैं जिनका उल्लेख हम कर सकते हैं  जो की महान महिलाएं थीं, जो गृहिणी थीं।

इसलिए महिला के जो गुण हैं वो, पृथ्वी माँ या किसी अन्य ऊर्जा की क्षमता की तरह है। जैसे बिजली की अपनी क्षमता कहीं और स्थित है। आप यहां रोशनी देखते हैं, कोई फर्क नहीं पड़ता, एक लट्टू है या दो , लेकिन क्षमता महत्वपूर्ण है। तो स्त्री को यह समझना होगा कि हम क्षमता हैं और अपनी क्षमता को बनाए रखने के लिए हमें अपने भीतर गरिमा, सम्मान और धार्मिकता की भावना होनी चाहिए।

अब पुरुषों को इस तरह के गुण वाली अपनी महिलाओं का सम्मान करना चाहिए। लेकिन पुरुष एक और ही प्रकार के मूर्ख हैं क्योंकि वे उस महिला का सम्मान नहीं करेंगे जो उनसे प्यार करती है, जो पवित्र है, जो अच्छी है, जो उन्हें सामूहिक बनाना चाहती है, जो चाहती है की वो देने वाले बने , जो धर्मार्थ हो, जो चाहती है कि सहज योग को बढ़ावा दिया जाए और जो चाहती है कि उसका पति खुश और आनंदित हो और उसे सहज योग में आना चाहिए।

इसके बजाय वे कुछ विचित्र, बेवकूफ महिलाओं के पीछे  भागते हैं। भूतिया महिलाओं की ओर इतना आकर्षित होने जैसा क्या है,  जरुर उनमें कुछ न कुछ भूत होना चाहिए, मुझे नहीं पता, जिस तरह से वे आकर्षित होते हैं। पुरुषों के इस सभी दुर्व्यवहार के परिणामस्वरूप, महिलाएं बहुत असुरक्षित हो जाती हैं और वे असुरक्षित हो जाती हैं। परिणामस्वरूप, पुरुष पीड़ित होते हैं और महिलाएं पीड़ित होती हैं। एक आदमी जो अपनी पत्नी की उपेक्षा करता है, और उसके साथ ऐसा व्यवहार करता है, जिसके परिणामस्वरूप उसे रक्त कैंसर हो जाएगा।

और जो महिला इस तरह से व्यवहार करती है, और अगर वह अपने पति के साथ बुरा व्यवहार करती है, तो उसे अस्थमा हो जाएगा या बहुत गंभीर प्रकार का सिरोसिस हो सकता है, मस्तिष्क क्षति हो सकती है, लकवा हो सकता है, शरीर का पूरा निर्जलीकरण हो सकता है। क्योंकि बायां नाभी इतनी महत्वपूर्ण है। यदि बाईं नाभी को अति सक्रिय बनाया जाता है, जैसा कि आप जानते हैं कि आपके दौड़ने और कूदने के बारे में और अति व्यस्त होने के कारण, नाभी की अति सक्रियता से आप रक्त कैंसर विकसित करते हैं।

मैंने हमेशा देखा है कि जो महिलाएं पतली होती हैं, उनके पति चिड़चिड़े होते हैं – क्यों? क्योंकि पत्नी हर समय उसे ऊपर-नीचे करती रहती है। “यह करो, वह करो, तुम मेरे लिए यह चीज नहीं लाए हो! मैंने आपसे कोका-कोला लाने के लिए कहा था जो आप नहीं लाए! आपने ऐसा नहीं किया! ” हर समय जैसे की वह ही पापी है। और आदमी हर वक्त उछल-कूद करने वाला हो जाता है, उसे कूदने के लिए कुछ मिलता रहता है और पत्नी को यातना देने के लिए कुछ मिलता रहता है। कोई प्यार नहीं है। कोई आनंद नहीं है। कोई खुशी नहीं है।

यह तथाकथित देह यष्टि का पागलपन, जो अब कम हो रहा है, भगवान का शुक्र है। अब यह अमेरिका से आया है। यह अब कम हो रहा है। यह देह यष्टि पागलपन आपको विचित्र बनाता है।

महिलाओं को महिलाओं की तरह स्थिर हो जाना चाहिए ,उन्हें गृहस्थित बनना चाहिए|  यानि जो यही घर गृहस्थी में जम जाए ; कहा जाए की उसके घर से संतुष्ट होने के लिए। यदि वह हर समय भाग दौड़ कर रही है, वह घर में नहीं रहना चाहती है, फिर वह एक गृहिणी नहीं है, बल्कि वह एक नौकर है। एक कहावत है कि एक महिला थी, जो एक नौकरानी थी, और फिर उसे एक गृहिणी बना दिया गया था, लेकिन वह स्वयं को  नौकरानी के रूप में भाग दौड़ करने से रोक  नहीं सकती थी। वह घर में नहीं रमती है। अब घर किसके लिए है, वह न केवल अपने लिए, न अपने पति के लिए, न अपने बच्चों के लिए, बल्कि दूसरों के स्वागत के लिए है ।

जैसे धरती माता ने आपके आने, बैठने और, आनंद लेने के लिए इन सभी खूबसूरत चीजों को फैलाया है। लेकिन सहज योग में,एक बहुत ही सामान्य बात, यह भी कि हम पाते हैं कि लोग, शादी के बाद, एक-दूसरे में पूरी तरह से तल्लीन हो जाते हैं और सहज योग ही खो देते हैं। तब उनके बच्चे पीड़ित होते हैं। उनके बच्चे उधम मचाते, शैतान,विचित्र, अवज्ञाकारी और, यातनापूर्ण हो जाते हैं। उनको कुछ शारीरिक समस्याएं भी हैं -जो की एक सजा है। ऐसा नहीं है कि मैं इसे दंडित करती हूं, लेकिन यह तुम्हारा अपना स्वभाव है जो दंड देता है, मान लेना कि जैसे तुमने अपना हाथ आग में डाल दिया, वह जल जाएगा। मेरा मतलब है कि कौन सजा दे रहा है? आप खुद को सजा दे रहे हैं! फिर बच्चे विचित्र हो जाते हैं।

सिर्फ अपने परिवार के लिए, सिर्फ अपने भोजन के लिए, सिर्फ अपने घर के लिए, इस स्वार्थ के लिए, अगर यह मनुष्य में आ जाता है, तो भगवान  ही इस परिवार को बचाए। यदि यह एक महिला है, तो फिर भी यह ठीक है, कम से कम थोड़ा सा लेकिन अगर आदमी ऐसा गया गुजरा मामला है, कि ‘मेरा’ एक घर होना चाहिए, ‘मेरे’ पास एक नौकरी होनी चाहिए, ‘मुझे’ मेरे बच्चों की देखभाल करनी चाहिए, यह ‘मेरे’ परिवार के लिए है।

हमारा परिवार एक पुरुष एक महिला का नहीं है, बल्कि पूरा ब्रह्मांड हमारा परिवार है। हम केवल अपने दम पर नहीं हैं, और यदि आप मनमानी करते हैं, और यदि आप अलग-थलग हो जाते हैं। मुझे आपको एक बात बतानी चाहिए और आपको आज चेतावनी देनी चाहिए कि – वे लोग जो खुद को अलग-थलग में रखने की कोशिश करेंगे, एक दिन आएगा, जब उनको भयानक बीमारियाँ होंगी – सहज योग को दोष मत दो! सहज योग में भगवान के राज्य का अपना सुंदर क्षेत्र है। लेकिन परमेश्वर के राज्य में, आपको सामूहिक रहना होगा। लेकिन एक ख़राब पत्नी समस्याएँ खड़ी कर सकती है क्योंकि वह है ..और वह एक समस्या पैदा करेगी, वह लोगों का एक समूह, महिलाओं के समूह बनाएगी , वह अपने भूतों के साथ हर किसी को गिराती चली जाएगी। या वह अपनी शिक्षा के प्रति बहुत सचेत हो सकती है, अपनी स्थिति या अपने धन के प्रति सचेत हो सकती है और यह भी कि तब वह पति को अलग रखने की कोशिश करेगी। ऐसे लोगों को जो भी उन्होंने किया है, भुगतान करना होगा। इसलिए नहीं कि यह ईश्वर की ओर से एक दंड है।

अतः सहज योग में गृहलक्ष्मी तत्व बहुत महत्वपूर्ण है। जिन लोगों को सहज योग आने के बाद समस्या हुई है, उनमें से ज्यादातर ने अपने गृहलक्ष्मी सिद्धांत की उपेक्षा की है | क्योंकि अगर  यह गृहलक्ष्मी, बाहर जाती है, तो मध्य हृदय  पकड़ता है। जिन महिलाओं ने इस तरह की चालाकी की है, उन्हें तुरंत इसे छोड़ देना चाहिए क्योंकि यह बहुत ही अपमानजनक है। कोई भी ऐसी महिला का सम्मान नहीं करता है। यह नेताओं की पत्नियों और नेताओं के बारे में बहुत सत्य  है। नेता की पत्नी या नेतृत्व छोटी से छोटी और बहुत ही छोटी स्थिति है  ,सबसे नगण्य स्थिति है । आपको जो मिला है, वह इससे बहुत अधिक है। अगर आप संत को राजा बनने के लिए कहते हैं। वह  क्या कहेगा? आप महासागर को एक कप में डालना चाहते हैं?  छोटे से भी छोटा कम से कम है। सबसे कम है।

जो लोग सोचते हैं कि उनका जीवन सेवापूर्ण है वे दूसरे मूर्ख लोग हैं। उनका जीवन आनंद है, सेवा नहीं। वरन, वह सेवा ही आनंद है। लेकिन अगर आप सिर्फ सेवा करने के लिए रहते हैं। “ओह, मैं बलिदान कर रहा हूं, यह मेरी तपस्या है!” ख़त्म ! फिर आप एक तपस्वी की तरह समाप्त हो जाते हैं, जैसे सुखी लकड़ी [आकृति] – पतली। आप का एक क्रॉस के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है!

तो, सहज योग में यह आनंद है लेकिन, जब तक और जब तक आप हर चीज में आनंद का सार नहीं रखते हैं, तब तक यह आनंद नहीं हो सकता है। यदि आप गन्ने से (जिसे आप गन्ने का बाँस कहते हैं,) सार निकाल लेते है तो क्या बचा ? उसी तरह, सभी तथाकथित काम और सेवा और तपस्या और इन सब में कोई मिठास नहीं है, यह समाप्त हो गया है। यह सब  कुछ मिठास है और जो महिलाओं द्वारा उत्पन्न की जाती है। लेकिन वे बहुत सख्त हैं। “यह खराब मत करो। यह अच्छा रखो, वह अच्छा रखो। ”  आप जानते हैं पति ऐसे घर आता है जैसे कि एक अपराधी,। उसे चीनी मिटटी के बर्तनों की दुकान में एक सांड की तरह लगता है , उसे बनना पड़ता है। यह एक तरह से अच्छी बात है। अच्छा है,  कि वह कुछ नहीं जानता है, आपके लिए और भी बेहतर है। लेकिन उसे हर समय गुलाम बनाना,की “यह करो! आपने मेरे लिए ऐसा नहीं किया! मेरे लिए वही करो!”, यह गृहिणी का काम नहीं है! उसका काम धरती माता की तरह है। क्या वह शिकायत करती है?  कुछ भी तो नहीं। वह आपको सब कुछ देती है। उसका कितना आधार है कितनी गरिमा है । ऐसी शक्तियां उसके पास हैं। वह किसी को कोई भी चीज देने के लिए क्या कभी कुछ परवाह करती है?

अगर आज मैं आपको बताऊं तो आप आश्चर्यचकित हो जाएंगे, आज तक, कल तक, मैंने कभी भी अपने पति से मुझे कुछ भी खरीदने के लिए नहीं कहा। पहली बार मैंने उन्हें एक कैमरा खरीदने के लिए कहा, और शाम को उन्होंने जो कहा, उसका परिणाम आप देखिए। कम से कम ! जीवन में कभी उम्मीद नहीं की थी । वह बोले, “आप को मुझे कहना चाहिये कि आप को क्या चाहिये “। पहली बार, मैंने कुछ कहा और प्रभाव देखा। क्योंकि मैंने उन्हें कभी नहीं कहा! तो ऐसी महिला को आत्मसंतुष्ट होना पड़ता है, स्वयं में संतुष्ट, क्योंकि उसे देना होता है। जिस व्यक्ति को देना है, वह मांग कैसे सकता है? उसे प्यार देना है क्योंकि वह प्यार है। उसे सारी सेवाएं देनी होंती है । उसे सर्वस्व देना होगा, उसे शांति प्रदान करना होता है । क्या जिम्मेदारी है, मैं तुम्हें बताती हूं, क्या जिम्मेदारी है! एक प्रधानमंत्री से अधिक, किसी भी राजा या किसी से भी अधिक, एक महिला की जिम्मेदारी है, और उसे इस पर गर्व महसूस करना चाहिए, कि इस तरह की जिम्मेदारी मेरे पास आई है।

सहज योग के एक नेता की तुलना में एक गृहिणी के पास बहुत अधिक जिम्मेदारी है। लेकिन नेताओं की पत्नियां भयानक हो सकती हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि वे नेता बन गई हैं। मेरा मतलब है, यह घटिया से घटिया है। मेरा मतलब है कि यह ऐसा है, 

 जैसे मैंने कहा, महासागर एक छोटे कप में आ रहा है। और उनका व्यवहार इतना विचित्र और बेतुका हो जाता है, मुझे आश्चर्य होता है। मेरी शादी एक ऐसे परिवार में हुई थी जहाँ हम 100 लोग एक साथ रह रहे थे और उनमें से हर कोई मुझे प्यार करता था। अगर मैं लखनऊ में कहीं  भी जाती हूं, तो वे सभी मुझे मिलने के लिए आएंगे लेकिन मेरे पति जाते हैं, कोई भी उन्हें देखने नहीं आता है। वह हमेशा शिकायत करते है। वह रिश्ता है, मैं रिश्ता नहीं हूँ, और वे आते हैं और मुझे मिलते हैं, उन्हें नहीं! अगर मैंने उन्हें प्यार नहीं दिया होता, अगर मैंने उन्हें जो वे चाहते थे नहीं दिया होता तो वे मेरे पास नहीं आते।

इसलिए वे संरक्षक हैं ,दूसरों की संरक्षक, । उन्हें खुद के लिए चीजों को संरक्षित नहीं करना है। और हमारे साथ कई बेवकूफ महिलाएं हैं, मैं आपको बताती हूं, कई बेवकूफ महिलाएं – हम उन्हें हिंदी भाषा में बुद्धू (बेवकूफ) कहते हैं, बुद्धू – क्योंकि वे नहीं जानती कि उन्हें क्या शक्ति प्राप्त है। उन्हें पता नहीं है कि उनकी क्या जिम्मेदारी है। मैं उनके सामने एक उदाहरण हूं।

और मेरे साथ यह बहुत बड़ी समस्या है कि व्यावहारिक रूप से मुझे लगता है कि 60% नेताओं की पत्नियां भयानक हैं। मुझे कहना होगा, भयानक। और सहज योग में उनके साथ ऐसा ही होता है। वे आश्रम में नहीं रह सकती, उनका अपना भोजन होगा, पति को यह निश्चित करना पड़ेगा कि उनको उनका भोजन मिल जाए। लेकिन दरअसल , वे वह है ,जिसे सभी को खिलाना है, हर किसी की देखभाल करनी है और आखिर में उन्हें खाना चाहिए। हर किसी को बिस्तर मिलना चाहिए, उन्होंने निश्चित कर लिया कि हर कोई अब सो रहा है, उन्हें सभी बच्चों को, सब कुछ को कवर करना चाहिए, फिर उन्हें सोना चाहिए। लेकिन नहीं, वे बैठ जाती हैं, वे मिनी-माताजी या -माताजी से भी बड़ी बन जाती हैं। “मुझे यह चीज ला दो ! मुझे वह ले दो ! बस इतना  करो! यह करो!” उनमें से अधिकांश ,वे खाना बनाना नहीं जानती । हर एक नेता की  पत्नी को खाना बनाना होता है , और बनाना सीखना होता है। अब यह अनिवार्य है उन्हें खाना बनाना पड़ता है। और दिल से। उन्हें खाना बनाना और दूसरों को प्यार से देने में सक्षम होना चाहिए। यह न्यूनतम फ़र्ज़ है अन्नपूर्णा का । और पति को उनके दोष नहीं निकलना चाहिए। शुरुआत में वे गलतियाँ कर सकती हैं ,फिर प्रोत्साहित करें। उनके गुणों को प्रोत्साहित करें, उनकी अच्छाई को प्रोत्साहित करें, उनकी सुंदरता को प्रोत्साहित करें। इसके अलावा मैंने देखा है, कुछ बहुत अच्छी महिलाएं जो सहज योग में बहुत सक्रिय जीवन जी रही थीं।शादी के बाद वे भटक गए। पति भी सहज योगी माने जाते हैं -भटक गए। कभी-कभी वे दिखाई देते हैं, कभी-कभी अगर मैं वहां होती हूं तो वे आते हैं, अन्यथा वे वहां नहीं होते हैं। आज मैं अरनौद से पूछ रही थी, उसने मुझे बताया कि यहाँ ऐसे उनमें से बहुत से लोग यहाँ हैं। इसका मतलब है कि पति के साथ कुछ गड़बड़ है क्योंकि शादी से पहले वे बेहतर थे।

तो हमारे साथ में एक गृह लक्ष्मी सिद्धांत कितना महत्वपूर्ण है, , हमारे एक साथ रहने के लिए, एक साथ बढ़ने के लिए। हर समय, एक जुटता महसूस करने के लिए,  हमारे भीतर की एकता।

इसलिए कल, जैसा कि मैंने आपसे कहा था, कि मैं आपको हमारे रागों के बारे में बताऊंगी। रा ऊर्जा है। गा संस्कृत भाषा में है “गा, गायती” का अर्थ है ‘जो घुस जाता है’, ‘जो हर चीज में प्रवेश कर जाता है’। यह आकाश जैसा है ,आकाश का गुण है। आप आकाश में कुछ भी डालते हैं, आप इसे कहीं भी प्राप्त कर सकते हैं। तो राग, वह ऊर्जा है जो आकाश में जाती है और आपकी आत्मा को छूती है। वह राग है। और ये राग, मैं कहूंगी कि कुछ एक गृहिणी की तरह है। मान लें कि यदि आप एक सैन्य बैंड के साथ खड़े हैं, तो आप तंग आ जाएंगे, “दाएं बाएं, बाएं दाएं, बाएं दाएं”। लेकिन एक सुंदर राग जो एक मधुर चीज है, राग। और यह माधुर्य ही एक सौंदर्यबोध है ।

जिस तरह से गृहिणी घर को सजाती है। वह सभी को सुचारू करती है, उन्हें प्रसन्नता  महसूस कराती है। फिर वह सबकी देखभाल कर रही है। हर कोई जानता है कि वह वहाँ खड़ी है। कल्पना कीजिए, जैसे एक आधुनिक शैली होगी, आप अपने बच्चे के जन्मदिन के केक के लिए कुछ लोगों को बुलाती हैं और खुद आप ही सबसे पहले केक काटती हैं क्योंकि आप गृहिणी हैं। कैसा लगेगा?  मैं आपको बताती हूं,जिस तरह से गृहिणी हमेशा हर किसी के सामने आगे रहती है। यह इतना हास्यास्पद लगता है। उन्हें पीछे रहना होगा ,क्योंकि आपको देखभाल करनी होगी। उन सभी की देखभाल ,और एक राग भी यही है। यह आपकी सभी चुभन में आराम देता  है। माना कि एक व्यक्ति बहुत परेशान और चिंतित है, कार्यालय से आता है, बैठ जाता है, एक राग छेड़ता  है। यह आपको आराम देती है। यह आपको शांत कर देती है। जैसे लोग सप्ताह के पाँच दिन जब घर लौटते हैं तो, इस तरह से जीवन जीते हैं जैसे (मुझे नहीं पता इसे क्या कहा जाए) होटल भी नहीं बल्कि एक तम्बू जैसी चीज़ में रह रहे हों और छठवें दिन वे बाहर समुद्र पर होते है , या वे जाकर के एक होटल में रहते हैं । कोई भी घर में नहीं रहना चाहता है क्योंकि दोनों के बीच कोई गृहलक्ष्मी सिद्धांत नहीं है। लेकिन राग को बैठक,स्थिरता की जरूरत है। जब तक आप शांत नहीं होते, आप राग का आनंद नहीं ले सकते। अब उछल-कूद करते हुए राग सुनने वाले व्यक्ति की कल्पना करें। तो, व्यक्ति को स्थिर होना है और वह स्थिरता देना ही उस महिला का काम है जो एक गृहिणी है, और पुरुष को कार्यरत रहना है स्थिरता पाने के लिए ।

जैसा कि मैंने आपको कई बार बताया है कि आधुनिक समय में आपकी बाईं नाभी कैसे, बहुत अधिक ख़राब जाती है, और कई बच्चे भी ऐसी स्त्रियों से पैदा होते हैं जो कि अति-व्यस्त हैं। आप देखिये, सामान्यतया पहले भारत में,…की वह पत्नी ,पति उठता था, स्नान करता था, हर समय उसकी पत्नी उसके साथ नहीं होती है। वह उसके लिए खाना बना रही होती है। वह बच्चों की देखभाल कर रही होती है।पति से हर समय चिपके रहना भी बोरियत की निशानी है। पति ऊब जाता है, पत्नी ऊब जाती है, फिर उनका तलाक हो जाता है। तो बच्चों की देखरेख, गृहस्थी, सहज योग, जैसी चीजें अन्य रुचि होनी चाहिए। फिर वह स्नान से आता है, वह बैठता है, भारत में जमीन पर बैठता है। अब हम मेज पर बैठे हैं, ठीक है, कम से कम मेज पर बैठो, मेज पर नहीं, कुर्सी पर। तब वह उसे इस समय नहीं कहती कि “आपने ऐसा क्यों किया?” या “यह महिला झगड़ रही थी या मैं दूसरी महिला से मिली, वह मुझसे कह रही थी कि तुम यह हो और तुम वह हो।” नहीं! वह सोचती है, “उन्हें अपना खाना खाने दो”। यही कारण है कि अगर भारत में पति को अपना गुस्सा दिखाना पड़ता है तो वह घर में खाना नहीं खाता है या वह खुद ही अपने अंतर्वस्त्र धोएगा। इस तरह, वे अपना गुस्सा दिखाते हैं।

तो फिर वह धीरे-धीरे पति को पंखा करती है और उसे अच्छी बातें बताती है, आप देखते हैं, आज, आप जानते हैं कि क्या हुआ ? हमारा बेटा जाग गया और उसने कहा “मुझे अपने पिता से बहुत प्यार है”। पति : “वास्तव में?” “हाँ हाँ। उसने कहा, उसने ऐसा कहा। और पति जानता है कि वह भी झूठ ही कह रही है, लेकिन आप देखो सभी अच्छी बातें , आप देखो, और,” मुझे लगता है कि आपकी माँ अब बहुत बेहतर है। मैं सोच रही हूँ की मैं जा कर आपकी मां की देखभाल करूं और, तुम्हारी बहन आ रही है इसलिए मैं सोचती हूँ  कि आप उसके लिए एक साड़ी खरीद रहे हैं। ” ऐसी सभी अच्छी-अच्छी बात वह उससे करेंगी। इसलिए वह अपना खाना अच्छी तरह से खाता है फिर वह अपने हाथों को धोता है और एक बैलगाड़ी में जाता है, न कि उस कार में, जहां हमेशा जाम लगा होता है, सब ठीक है, अब बैलगाड़ी खत्म हो गई है, पंखा खत्म हो गया है। आपको बहुत तेज होना पड़ता है । जीवन अब तेज है।  जैसा कि मैंने आपको बताया है, कि इस तेज़ चीज़ पहिये  में परिधि पर गति है लेकिन धुरी पर नहीं । तो सहज योगियों को धुरी पर होना पड़ता है, और इसलिए पति और पत्नी, एक रथ के बाएँ और दाएं पहिये धुरी पर होना चाहिए और बायां पहिया बाएँ और दायां पहिया  दाएँ है।

अब महिलाओं को हमेशा तैयार होने में अधिक समय लगता है। मुझे नहीं, मैं अपने पति से कम, अपने पति से बहुत कम, लेकिन सामान्य रूप से समय लेती हूं। तो, यह उनकी आदत है। रहने भी दो। अब महिलाओं की अपनी आदतें हैं। वे महिलाएं हैं। महिलाएं महिलाएं रहेंगी, पुरुष पुरुष रहेंगे। पुरुषों को अपनी घड़ियों को दस बार देखना होता है । महिलाएं इसे एक बार देख सकती हैं या हो सकता है कि उनकी घड़ियां खो जाएं या बिगड़ जाएं – अगर वे असली महिला हैं। वे पुरुषों की तरह उछल-कूद नहीं करती हैं, वे अलग प्रकार के होते हैं। लेकिन वे महिलाएं हैं और आप पुरुष हैं, और भगवान ने पुरुषों और महिलाओं को बनाया है। यदि यह एक उभयलिंगी बनाना चाहते थे, तो उन्होंने उभयलिंगी ही बनाए होते, उसने नहीं किया। तो  हमें एक लिंग जिसमे भी आप पैदा हुए हैं ,को स्वीकार करना चाहिए, अनुग्रह और सुंदरता और गरिमा के साथ -दोनों। और आपको पता होना चाहिए कि यह महिलाओं की पार्टी है ! भारत में हमारे पास ऐसी बात है जैसे,  आप जानते हैं, मेरी शादी एक परिवार में हुई थी, बहुत रूढ़िवादी जहां वे यहां तक कि चेहरे और सभी को कवर करते थे। तो ,एक दिन, कलेक्टर,  जो की मेरे पति के दोस्त है, इसलिए, उसने मेरे जेठ जी से कहा कि, मेरे दोस्त की पत्नी क्यों नहीं आती और मुझसे मिलती है। तो उन्होंने कहा, “बिल्कुल! बेशक!” तो बस उसे आसान बनाने के लिए वह अपने कार्यालय से छुट्टी लेकर दूसरे शहर में चले गये और उन्होंने अपनी पत्नी से कहा कि “वह सुनिश्चित करे, की मैं कलेक्टर को मिल लूँ “। देखें कि यह कितना सुंदर था, यह कितना सुंदर था, और मुझे कभी नहीं लगा कि वह मुझ पर हावी हो रहे है क्योंकि आखिरकार उस परिवार की व्यवस्था थी, सब ठीक है, सब ठीक है।

लेकिन इसके लिए आपको जो चाहिए वो है शुद्ध बुद्धि । यदि पति मंद बुद्धि है तो वह अपनी पत्नी को नीचा दिखा देगा। यदि पत्नी एक मंद बुद्धि है तो वह अपने पति को नीचा दिखा देगी । यदि महिला बहुत तेज  है, अच्छी तरह से बात करती है और आप समझो कि यदि वह जानती है कि लोगों से कैसे बात करें और उन्हें प्रभावित करें [तो] इसका मतलब यह नहीं है कि वह बहुत बुद्धिमान है। मैं उस व्यक्ति को सबसे बुद्धिमान कहती हूं जो  भलाई ,उत्थान और, अंतिम लक्ष्य को ध्यान में रखता है।ऐसा व्यक्ति सबसे संवेदनशील है, सबसे बुद्धिमान है, अन्य सभी बुद्धि अविद्या है, व्यर्थ है। अब, इस विषय पर मुझे लगता है कि मैं एक पुस्तक लिख सकती हूं, इसलिए, इसे पुस्तक पर छोड़ना बेहतर है, और आज हमें पूजा करना चाहिए।

परमात्मा आप को आशिर्वादित करें ।

कोई सवाल?

इसका मतलब है, मैं कुछ पैसे खर्च करूंगी? मुझे नहीं पता, कोई मौका नहीं है। मैं नहीं जानती कि कब खर्च होगा। मुझे खर्च करना पसंद है, मेरा मतलब है, हर किसी को खर्च करना प्रिय होना चाहिए ।  पैसा इसीलिए है दूसरों को अवश्य दें, आप देखें। पदार्थ हैं किसलिए है?पदार्थ दूसरों को देने के लिए है। बस दूसरों को देने का आनंद लें।, दूसरों को कुछ देना कितना आनंददायक है ।