Shri Hanumana Puja: You Are All Angels

Butlins Grand Hotel, Margate (England)

1989-04-23 Hanumana Puja Talk, Margate, UK, DP, 48' Download subtitles: CS,EN,ES,HU,NL,PL,PT,RU,ZH-HANS,ZH-HANTView subtitles:
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श्री हनुमान पूजा: ‘आप सभी देवदूत है’, मार्गेट (यूके), 23 अप्रैल 1989

ऐसा आनंद हो रहा है, और पूरा वातावरण इस से गूंजता लग रहा है, मानो देव-दूत गा रहे हों। और हनुमान की ख़ासियत यह थी कि वह एक देव-दूत थे। देव-दूत, देव-दूतों की तरह पैदा होते हैं। वे देव-दूत हैं, और वे इंसान नहीं हैं। वे दैवीय गुणों के साथ पैदा हुए हैं। लेकिन अब, आप सभी इंसान से देव-दूत बन गए हैं। यह सहज योग की एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। वे गुण जो देव-दूतों के साथ पैदा हुए हैं, उन्हें बचपन से देखा जाता है।

तो बायें तरफ हमारे पास गण हैं, दायीं तरफ देवदूत हैं। और संस्कृत भाषा में या किसी भी भारतीय भाषा में देवदूत के रूप में अनुवाद है – जिसका का मतलब है कि वे देवताओं के राजदूत हैं। तो अब आप वही हैं, अब आप सभी देवदूत हैं। केवल एक फर्क है की आप अवगत नहीं हैं कि आप देवदूत हैं, जबकि वे बचपन से जानते थे। यदि आप जानते हैं कि आप देवदूत हैं, तो आपके सभी गुण चमकने लगेंगे, और आप आश्चर्यचकित होंगे कि किसी भी कीमत पर सच्चाई से खड़े होने की गुणवत्ता आपके लिए इतनी आसानी से उपलब्ध है, क्योंकि आपको अधिकार दिया गया है, आपके पास विशेष आशीर्वाद है, देव लोक की विशेष सुरक्षा है कि यदि आप सही के लिए खड़े हैं, और यदि आप सत्यवादी के लिए खड़े हैं, और यदि आप सत्य के लिए खड़े हैं, तो आपकी रक्षा के लिए सभी प्रकार की सहायता दी जाएगी।

देवदूत इस बारे में जानते हैं, वे इसके बारे में निश्चित हैं, वे निश्चित हैं, इसके बारे में एक निश्चितता है, लेकिन आप नहीं हैं। आप अभी भी कभी-कभी सोचते हैं कि [आप] हो सकते है या नहीं भी, ऐसी ही शैली चलती रहती है। लेकिन मेरा विश्वास करो कि आप देवदूत हैं, आपके पास सभी शक्तियां हैं, और आपके पास इतने अधिकार हैं की कोई भी मानव आप के उपर नहीं हो सकता है, यह देवदूतों की विशेषता है, संतों की नहीं। संत को छला जा सकता था, उन्हें प्रताड़ित किया जा सकता था, उन्हें परेशान किया जा सकता था। अवतार भी ऐसा ही कर सकते हैं। अवतार इसे स्वीकार करते हैं, वे ये सभी तप से गुजरना चाहते हैं, ताकि वे अपने जीवन में एक घटना का निर्माण करें ताकि वे खुद को अधिक सक्रिय तरीके से व्यक्त कर सकें। यदि रावण नहीं होता, तो रामायण नहीं होती। अगर कंस न होता, तो कृष्ण न होते। तो अवतार स्वयं समस्याओं को उठाते हैं और बुराई से भी लड़ते हैं। इसलिए कभी-कभी ऐसा लगता है, महसूस होता है, कि वे पीड़ित हैं – लेकिन ऐसा नहीं है ।

लेकिन देवदूत एक विशेष श्रेणी हैं, वे अपने ऊपर कोई समस्या नहीं रखते हैं, वे बस उन्हें हल करते हैं। यदि कोई समस्या है, तो यह देवदूत ही हैं जो संतों और अवतारों के लिए भी हल करते हैं। और कभी-कभी उन्हें कहना पड़ता है कि “ इस अवस्था पर अभी केवल हम काम कर रहे हैं, इसलिए आप नहीं कूदें बल्कि जब हम आप से कहें तभी आप कूदें।” वे दरवाज़े पर तैयार खड़े है, कूदने के लिए, इतने आतुर है। और वे निश्चित संख्या में हैं। आप उन पर पूरी तरह से भरोसा कर सकते हैं।

उदाहरण के लिए, श्री हनुमान, जैसा कि आप उन्हें एक देवदूत के रूप में जानते हैं, उनमें महान क्षमताएं, महान शक्तियां हैं, और उनका उपयोग करने का अधिकार भी है, और वह इसके बारे में बहुत जागरूक हैं। वह सब कुछ बहुत ही मनोरंजक तरीके से करते हैं, अपनी शक्तियों का बहुत ही मनोरंजक तरीके से उपयोग करते हैं। जैसे उन्होंने पूरी लंका जला दी और वह उस पर हस रहे थे। फिर उन्होंने अपनी पूंछ को बढ़ाया और उसे कई राक्षसों के गले में डाल दिया। और वह बस उनके साथ खेल रहे थे, और फिर हवा में उड़ गए और वे सभी हवा में झूल रहे थे।

इसलिए यह देवदूतों की एक चंचलता भी है क्योंकि वे इतने आत्मविश्वासी हैं, वे पूरी तरह से जागरूक हैं, बिल्कुल अपने व्यक्तित्व के साथ, अपनी शक्तियों से, अपने आप से पहचाने जाते हैं। यहाँ पर सहज योगी कभी-कभी यह नहीं समझते हैं कि मैंने आपको देवदूत बना दिया है। मैंने आपको संत नहीं देवदूत बनाया है, और आप हमेशा संरक्षित रहते हैं। मैं केवल देवदूत बना सकती हूं, मैं संत नहीं बना सकती।

संत अपने प्रयास से बनते हैं। गणेश, कार्तिकेय और हनुमान की तरह प्रयास रहित कार्य करना। उसी तरह वैसी ही शैली में आप बनाये गए हैं । इसलिए यह समझने की कोशिश करें कि मैं आपके बारे में जो कहती हूं वह सच है। सभी प्रकार की आदतें भी आप लोगों के माध्यम से काम करती हैं, हालांकि आप संत (देवदूत) हैं फिर भी आप नहीं जानते कि आपके पंख कैसे फैलाने हैं। फिर भी, कभी-कभी, मुझे लगता है कि पुनर्जन्म हुआ है और वे सभी पंखों के साथ देवदूत की तरह हो गए हैं, लेकिन छोटे पक्षियों के रूप में, उड़ना उन्हें अभी भी सीखना है। लेकिन आपको अपना आत्मविश्वास अपने सहज योग के अनुभवों से प्राप्त करना चाहिए। जैसा कि आप कल गा रहे थे – हर दिन चमत्कार, आपके चारों ओर चमत्कार। ये देवदूतों द्वारा किए गए हैं और वे आपको समझाने की कोशिश करते हैं कि “आप हम में से एक हैं, बस हमारी कंपनी में शामिल हों।” इसलिए हमारे यहाँ अब बहुत सारे देवदूत बैठे हैं, तो क्यों नहीं हमें इस दुनिया को बदलने के बारे में सोचना चाहिए ? और एक और चीज़ जो देवदूतों के अलावा आपके पास है,  क्योंकि देवदूत कुंडलिनी को नहीं उठाते, वे नहीं कर सकते, वे इसके बारे में परेशान नहीं होते। वे आपके चारों ओर के सभी बुरे लोगों को मारने, जलाने, दबाने, खत्म करने के लिए हैं। वे परिवर्तित नहीं कर सकते, देवदूत नहीं बदल सकते। इसलिए आपके पास परमात्मा के दायरे में रहने का उनसे ज्यादा अधिकार है –  चूँकि आप लोगों की कुंडलिनी उठा सकते हैं और आप आत्मसाक्षात्कार दिला सकते हैं। लेकिन इंसान की हालत अभी भी जस की तस है। उदाहरण के लिए, मैंने एक दिन एक अंगूठी पहनी थी, और फिर मेरी बेटी ने मुझे परेशान करना शुरू कर दिया कि “अब आपको लोगों को हर समय केवल इस उंगली को दिखाना होगा ताकि वे आपकी अंगूठी देखें।” इसलिए, सांसारिक मानव जीवन में, हमारे पास जो कुछ भी है, संपत्ति है, शायद शक्तियां – उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति जो की किसी न किसी पद पर है। तुरंत आप उसे पहचान सकते है, उसके नाक और होंठ, हाव- भाव से। लेकिन आपके पास जो शक्तियां आपके काबू में हैं – आप उन्हें प्रकट करने, और इसके बारे में बात करने, उनका उपयोग करने से डरते हैं।

कल्पना कीजिए, इतने सारे देवदूतों के साथ पूरे इंग्लैंड को कुछ ही समय में आत्मसाक्षात्कार मिल जाना चाहिए, लेकिन हम अभी भी यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि हम क्या हैं। हनुमान को कोई समस्या नहीं थी क्योंकि बचपन से ही उन्हें पता था कि वह एक देवदूत हैं और उन्हें एक देवदूत का काम करना है। लेकिन, क्योंकि हम मनुष्य के रूप में पैदा हुए थे और अब हम देवदूत बन गए हैं, इसलिए हमें अन्य देवदूतों की तरह गतिशील होना मुश्किल लगता है। यहां तक कि आपका विचार, सामूहिक विचार, यहां तक कि आपका व्यक्तिगत विचार भी शक्तिशाली है, और आपका ध्यान शक्तिशाली है। इस डर के कारण, या शायद  आदतें कह सकते हैं, या शायद अहंकार का हिस्सा जो अभी भी आप पर चिपका हुआ है, आप अभी भी कृत्रिम चीजों में लिप्त रहते हैं, और वह बल, उस गतिशीलता को व्यक्त नहीं कर पाते है।

हम कुछ भी दोषारोपण कर सकते हैं, जैसे हम आलस्य का कारण किसी देश को, अहंकार का कारण किसी देश को बता सकते हैं, लेकिन अब आप अपने देशों से पूरी तरह से मुक्त हो चुके हैं, अब आपने परमात्मा के राज्य में प्रवेश किया है। आप ऐसे देश में हैं जिसकी कोई सीमा नहीं है, जिसकी कोई सीमा नहीं है। और फिर, ये सभी जड़ताएँ जो अभी भी आप में व्याप्त हैं, आपको बिलकुल भी परेशान नहीं करना चाहिए, और जो भी आपका काम है, उसे करने से आपको परेशान या आपको भटकना नहीं चाहिए। अब कल्पना कीजिए कि हनुमान को गेब्रियल के रूप में जाना था और मारिया को बताना था कि एक बच्चा है जो अवतार है। उद्धारकर्ता आप के द्वारा पैदा होने जा रहा है। वह एक युवा कुंवारी थी। उस ज़माने में ऐसी भयानक ख़बरों को देना कठिन था। उन्होने किया, “मुझे यह करना है, इसलिए मैं इसे करूँगा। यदि यही आदेश है, तो मैं इसे करुंगा। “ क्योंकि वह जानते थे कि उनका स्वभाव ही है, आदेश का पालन करना, वह उन्ही की आतंरिक बनावट है निस्संदेह। वह इंतजार करने वाला नहीं है, तुरंत करते है |

इसलिए एक बड़ी समझ हमारे भीतर होनी चाहिए, कि हम अपने भीतर बढ़ रहे हैं, लेकिन अगर हम गुणों को प्रकट नहीं करते हैं, अगर हम अपने गुणों को नहीं दिखाते हैं, और अगर हम इसे अपने जीवन में, अपने काम में, अपनी वस्तु में व्यक्त नहीं करते हैं, हमारे जीवन के अर्थ में, तो सहज योग फैलने वाला नहीं है। न ही यह आपकी बहुत मदद करने वाला है।

जिस तरह का काम आपको करना है, उससे कोई समस्या नहीं है। समस्या मुझे है, आपको नहीं। आपको समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा। आप जाकर किसी से भी बात करें, जो भी आपका मन करे। मुझे कहना चाहिए उनको आप को अच्छी तरह से सुनना होगा । लेकिन अगर वे नहीं करते हैं, तो वे आपको नुकसान नहीं पहुंचा सकते। वे आपको कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकते यह आपके पास एक बहुत बड़ी सुरक्षा है। वे आपके काम में बाधा नहीं डाल सकते।

सहज योग में आने का तात्पर्य यह नहीं है कि हमें क्या मिला है? क्या पाया है? देखिए ऐसे लोग हैं जो कहते हैं, “हमने सहज योग के लिए बहुत कुछ किया है और सहज योग ने हमें क्या दिया है?” इसने आपको आत्मसाक्षात्कार दिया है। इसने आपको देवदूत का दर्जा दिया है। मेरा मतलब है कि तुम कुछ और प्रयोग कर के देखो , क्या आपको देवदूत का दर्जा मिल सकता है? नहीं। सहज योग ने आपको वह दर्जा दिया है, तो आप और क्या चाहते हैं? पहले कभी यह संभव नहीं था, मुझे विश्वास है, असंभव स्थिति।

यदि यह किसी भी तरह से संभव होता, तो ज्ञानेश्वर ने इतनी कम उम्र में अपनी समाधि नहीं ली होती, और कबीर ने यह नहीं कहा होता, “हे भगवान, मैं क्या करूँ, यह दुनिया अंधी है।”

तो आपके भीतर वह सूक्ष्म शक्ति है कि आप लोगों की कुंडलिनी पर काम कर सकते हैं,  उनकी जानकारी में आए बिना। परन्तु ध्यान में जब आप बैठते हैं, तो आपको अपने आप में स्वीकार करना चाहिए, “मैं एक देवदूत हूं और एक देवदूत होने के नाते, मुझे किसी और चीज के साथ नहीं बल्कि परमात्मा के काम से कोई लगाव है।”

आसक्ति बहुत हैं। सहज योग में अभी भी मैंने देखा है कि लोगों को लगाव पसंद है, क्योंकि अब उन्होंने शादी कर ली है, इसलिए वे पत्नियों से लिप्त हुए हैं। और कई तो अपनी पत्नियों के लगाव के कारण बाहर हो गए हैं। फिर उनके बच्चों के साथ लगाव होता है, और अगर वे अपने बच्चों के साथ लगाव रखते हैं, तो कई बाहर हो जाएंगे। जैसा कि मैंने कल आपको बताया था कि दुनिया के सभी बच्चे जो सहज योगी हैं, आपके बच्चे हैं। आप सभी बच्चों के माता-पिता हैं। ऐसा नहीं है कि यदि आपका बच्चा सो रहा है तो आप उस बच्चे को कवर करेंगे। नहीं, आप सभी बच्चों को कवर करें। आपको उन सभी बच्चों की देखभाल करनी होगी जो लेटे हुए हैं। क्या आप हनुमान के बारे में सोच सकते हैं, अगर वह यहाँ होते और तब बच्चे सो रहे हों, तो वह सिर्फ एक बच्चे के शरीर को ढँकेंगे? क्योंकि वह एक सार्वभौमिक प्राणी है। इसलिए हर बच्चे को, जिसकी देखभाल आपको करनी है, सामान तरह से प्यार करना होगा। फिर संपत्ति, पद, नौकरी जैसे अन्य लगाव हैं| मेरे पास कोई सा भी नहीं है इसलिए मुझे नहीं पता कि दूसरों के पास कौन -कौन से है, सिवाय इसके कि जब मैं आपको देखती हूं कि आप इतने प्यार से स्टेशन पर आ रहे हैं, तो पूरा दिल एक महासागर की तरह हो जाता है, मुझे लगता है, और बस जैसे एक ज्वार की एक बड़ी प्रफुल्लता की तरह शुरू होता है, और मैं वह देखती हूं। और फिर जब मुझे तुम से जुदा होना होगा यह फिर से एक घटते हुए समुद्र की तरह अब उतर रहा है। यह कुछ ऐसा है, जैसा कि आप चन्द्रमा को देखते हैं| समुद्र चंद्रमा की सुंदरता, खुशी और प्यार पर प्रतिक्रिया करना शुरू कर देते हैं। फिर मैं प्रेम को देखती हूं, वह प्रेम जो एक घोंसले में है, जहां एक पक्षी अपने चूजो को खिला रहा है। और तुम इस प्रेम को आकाश में देखते हो, तब तुम इस प्रेम को अपने हृदय में देखते हो, और केवल एक चीज जिसका तुम वर्णन कर सकते हो, वह है तुम्हारे भीतर बहता हुआ आनंद का अथाह सागर |

लिप्तता आपको उस महासागर का आनंद लेने की क्षमता नहीं देती हैं। अगर आप किनारे पर खड़े हैं, तो आप महासागर का आनंद कैसे लेंगे? आपको इसमें कूदना होगा। लेकिन आपने अलग-अलग चीजों पर अपना लंगर डाल रखा है, इसलिए आप अंदर कूद नहीं पाते हैं| आप बहुत सुरक्षित हैं। आप तैरना जानते हैं, आप शार्क को मारना जानते हैं, यहाँ तक कि आपकी एक दृष्टि पर्याप्त है। लेकिन क्योंकि आप जागरूक नहीं हैं, यह सक्रिय नहीं है। बिल्कुल यही मामला है।

मैंने ऐसे लोगों को देखा है जिन्हें जीवन में छोटे पद मिलते हैं और वे इसके बारे में शेखी बघारने लगते हैं – “मैं इस आदमी से मिला, और मैं उस आदमी से मिला, और यह हुआ और ऐसा हुआ” – आपको हंसी आ रही है उस व्यक्ति पर। लेकिन आप सहज योग से जुड़े हैं, जिससे आप विकसित हुए हैं, आपका पोषण हुआ है, आप इतने महान हो गए हैं।

इन सबके साथ हमें हनुमान के प्रकाश का पालन करना होगा। उन्होंने सोचा कि सूरज बहुत अहंकारी है, लोगों को जलाने की कोशिश करता है, कभी-कभी बहुत अधिक गर्मी होती है, और सूर्य उपासक भी अहंकारी होते हैं। उनमें इतना अहंकार है। कोई भी शब्द यदि आप उनकी भाषा में, या उनके रीति-रिवाज़ों में गलत कहते हैं। कहते हैं कि आपने गलत हाथ में कांटा पकड़ रखा है – समाप्त – आप पूरी दुनिया में सबसे बेकार व्यक्ति हैं, सबसे बड़ा पाप किया है। ऐसे सभी घटिया, बेवकूफ़ विचार एक बहुत ही दुष्ट अहंकार से निकलते हैं। अहंकार इतना  भ्रष्ट होता है, जब आप अपने आप से बेहतर किसी को नहीं मानते हैं कि “मैं ही सब कुछ हूं और मैं सब कुछ जानता हूं,” और “यह रिवाज सबसे अच्छा है,” या “वह क़ालीन सबसे अच्छा है।” मैं, मैं, मुझे पसंद नहीं है।” खैर, आप कौन हैं? आपको किसने पूछा, यह पसंद करने के लिए या नहीं? “मैं इस तरह से नहीं हूँ, मैं इस तरह से नहीं हूँ।

दूसरी तरफ, उन देशों को जो कुछ मानदंड का पालन कर रहे हैं, जानने के बाद (मानदंड जो अहंकार के प्रतीक हैं।)मुझे यह कहना चाहिए कि,” अहंकारी हमेशा ग़ुलाम भी बन जाते हैं।”अब एक कलाकार का उदाहरण, एक कलाकार अपने आनंद के लिए कुछ बनाता है, लेकिन  हर कोई उसकी आलोचना करना चाहता है। आलोचना इस तरह से होती है , “ मुझे यह पसंद नहीं है , यह रंग अच्छा नहीं है, यह नहीं है।” और ऐसा करने वाले आपके पास पेशेवर हैं , वे एक पेंसिल लाइन को ठीक से खींचना भी नहीं जानते है, ना केवल पेंटिंग वरन कुछ भी, तुरंत वे कहते हैं, “मुझे लगता है, यह है …” आप देखते हैं, उन्होंने पुस्तकों को छापा है यह, शोध और सिद्धांत। मेरा मतलब है कि कला का आपके दिल से लेना-देना है, ना की, आपके दिमाग से। यह कि आपने कितने कलाकारों को खत्म किया है। और पेंटिंग करने वाले हर व्यक्ति को सोचना पड़ता है कि, लोग इस बारे में क्या कहेंगे। लेकिन इसके परिणामस्वरूप कुछ बिल्कुल बेतुका बिना किसी सूक्ष्म अभिव्यक्ति का विकसित होता है, जिसकी, आज सराहना की जाती है।

हमारे अहंकार के कारण हमारे विचार, कला और जीवन के हर उचित सहज विकास को दबा दिया है। मुझे लगता है कि यह उन सभी प्रदूषणों अथवा पर्यावरण समस्या से भी बदतर है, जिनके बारे में हम बात करते हैं। मानव मन ने इस घुटन वाले क्षेत्रों का निर्माण किया है जहां कोई भी कुछ भी व्यक्त नहीं कर सकता है, और बड़ा अहंकारी व्यक्ति अधिक हावी हो जाता है। “यह पुस्तक अमुक-अमुक व्यक्ति द्वारा लिखी गई है।” आप उस व्यक्ति से मिलें तो आपको समुद्र में कूदने का मन करता है। तो हर कुछ भी जो भी लिख दिया गया है वह सब कोई बाइबिल नहीं है, और जो लोग लिखते हैं वे ज्यादातर ऐसे लोग होते हैं जिनसे आपको कभी भी बिना किसी डंडे को हाथ में लिए मिलना नहीं चाहिए। तो जो कुछ भी अभिव्यक्ति है, जैसे की, एक पोशाक, या अपने बच्चों, या शिक्षक, अथवा अन्य के साथ रिश्ते में ऐसा, और इसी तरह, और इसलिए होना चाहिए, और आपको कई बार ज़रुर धन्यवाद, सॉरी ’कहना होगा । इसलिए हम कृत्रिम अभिव्यक्तियों में इतना अधिक उलझ गए हैं, मुझे लगता है कि कुछ समय बाद कोई कला उत्पन्न ही नहीं होगी। कोई उल्लास नहीं है वे डरे हुए हैं।

मुझे नहीं पता कि आपने इस पर ध्यान दिया है या नहीं, लेकिन जो लोग किसी भी संग्रहालय, प्रदर्शनी, या किसी भी चीज़ को देखने के लिए जाते हैं, सोचते हैं की वे स्वयं], वे सभी महान, दिव्य व्यक्तित्व है जो की हर बात की आलोचना कर सकते हैं| यह आलोचना हम उस आज्ञा चक्र के माध्यम से करते हैं, जिसे की एक बार हनुमान सभी के लिए खाना चाहते थे। आप देखें की आज्ञा की गति बाएँ से दायें चलती रहती है, जो हमारे निरर्थक अहंकार की अभिव्यक्ति करवाता है| इसी को हनुमान ने नियंत्रित करने और खाने की कोशिश की थी, जैसा कि मैं भूतों को खाती हूं, शायद वह इस सूरज को खा रहे थे। लेकिन एक देवदूत के लिए यह जानना जरूरी है कि आपके भीतर कोई अहंकार नहीं है। कुछ सहज योगी हैं, जो कहते हैं, “माँ, मैं बहुत से सहज योग कार्य नहीं करना चाहता क्योंकि मेरे अहंकार में वृद्धि होगी” – कई “मैं नहीं चाहता कि मेरा अहंकार खुद को व्यक्त करे।” लेकिन तुम क्यों चाहते हो कि तुम्हारा अहंकार नष्ट हो जाए, किस लिए? सहज योग कार्य के लिए? क्या ऐसा नहीं है? यह एक दुष्चक्र है, कि हम कहते हैं कि हम खुद को पृष्ठभूमि में रखना चाहते हैं क्योंकि हमारे अहंकार को विकसित नहीं होना चाहिए। आप सिर्फ अपने बारे में सोच रहे हैं। सहज योग के बारे में क्या? तो आजकल का चलन है “ओह बेहतर है की सुरक्षित रहो।” क्योंकि उन्होंने कुछ लोगों को देखा है जो बहुत ही अहंकारी थे, जो सहज योग के बारे में बहुत उतावले थे, जिन्होंने दिखाने की कोशिश की – गिरना पड़ा। तो एक और प्रवृत्ति शुरू हुई है, मुझे लगता है, सहज योग में कि “सुरक्षित पक्ष में रहना ही बेहतर है “ – आप देखते हैं। इन दोनों के बीच, सहज योग खो जाएगा।

इसलिए यदि आप जानते हैं कि आप देवदूत हैं तो आपको कोई अहंकार नहीं होगा। जो कोई भी जानता है कि कुछ करना उसकी प्रकृति है।

जैसे, आज ही मेरे पति मुझे यह कहते हुए सराह रहे थे कि “यह तुमने ही किया है।”

मैंने कहा,  मैंने नहीं, वो मैं नहीं।

“उन्होंने कहा, “आप कैसे कहती हैं कि यह आप नहीं हैं?”

मैंने कहा, “क्योंकि, यह सहज रूप से उनमें बनाया गया है। एक बीज को अगर धरती माता में लगाया जाता है, तो यह अंकुरित होता है। उसी तरह से उन के अंदर नैसर्गिक निर्मित उनकी कुंडलिनियां है, जो अंकुरित होती है। तो यह मैंने कैसे किया है?” “लेकिन उन्होंने कहा, “लेकिन धरती माता ने किया है।”

मैंने कहा, “नहीं, यह धरती माता की अंतर्निहित गुणवत्ता है जिसने यह किया है |” उन्होंने कहा, “फिर यह सब किसने किया?”

तो मैंने कहा, “यह आदि शक्ति द्वारा किया गया है – सहमत!”

लेकिन, सहज योग आदि शक्ति द्वारा नहीं किया जाता है। उसने उन शक्तियों को हर एक में बनाया है जो काम करती हैं, लेकिन सहज योग नहीं। सहज योग उन अंतर्जात गुणों के माध्यम से काम करता है जो पृथ्वी माँ में हैं और जो बीज में हैं। इसलिए मैं यहां आदि शक्ति के रूप में नहीं हूं। मैं यहाँ उनकी माँ के रूप में, उनकी पवित्र माँ के रूप में हूँ, और पवित्र माँ के रूप में मैंने उनका मार्गदर्शन किया है। आप कह सकते हैं कि मैं धरती माता की तरह हूं जो बीज अंकुरित करती है, इसलिए फिर एक और निर्लिप्तता आपके अंदर आ सकती है। कि ये आपके भीतर आपकी शक्तियां हैं जो आपकी कुंडलिनी के सहज स्वभाव से ही प्रबुद्ध हो गई हैं। और यह कि आप स्वयं सशक्त हैं। और यह सारी शक्ति जो आपके भीतर है, उसे केवल मेरे द्वारा बताया गया है कि यह आपके भीतर है, आप अपने लिए देखें,  मैं तो केवल एक दर्पण की तरह हूँ, जो आपको बता रही हूं कि, “आप यह हैं, स्वयं देखें।” तो मैं इसका कोई श्रेय कैसे ले सकती हूं?

तो आप यह समझने के लिए भी निर्लिप्त रह सकते हैं कि, हमारे पास जो शक्तियां हैं, वे सहज योग के लिए हैं। चूंकि माता के पास सहज योग के लिए काम करने की शक्तियां हैं, इसलिए हमारे पास भी सहज योग के लिए काम करने की शक्तियां हैं, और जैसे वह काम करती हैं, हमें भी काम करना होगा। लेकिन इस तरह के मोह भी है कि: “माँ सब कुछ कर रही है, हम क्या कर सकते हैं?” नहीं! आपको यह करना है। यह एक बहुत महत्वपूर्ण तटस्थता है जिसमें मैं यह कहने की कोशिश कर रही हूं कि आपको यह स्वयं करना होगा। ऐसा नहीं है कि माँ करेगी – “आखिर माँ सब कुछ कर रही है।” यह सही है, यह एक तरह से सही है, लेकिन आप साधन हैं। बिजली यहां सब कुछ कर रही है लेकिन इस उपकरण को काम करना है।

तो संभव है की स्रोत हो, लेकिन साधन वह है जो माल पहुंचाता है। और, हनुमान की तरह, आप साधन हैं, और आपको काम करना है, आपको कर्तव्य करना है। यह एक बहुत ही गतिशील तरह से हमें प्राप्त करना चाहिए। हनुमान का एक और बड़ा गुण यह था कि वह बहुत सतर्क थे और वह समय से परे थे। जब आप सूरज को खा जाते हैं तो समय कहाँ है? वह समय से परे थे। उसकी वजह से, उन्होंने सब कुछ बहुत तेजी से किया। उदाहरण के लिए, अब हम पिछले सोलह वर्षों से सहज योग की एक पुस्तक तैयार कर रहे हैं। “यह काम चल रहा है, माँ, काम कर रहे है।” फिर, बीमार लोगों की सहज योग से ठीक होने के बारे में रिकॉर्डिंग की कुछ व्यवस्था करने की हम कोशिश कर रहे हैं। “यह हो रहा है, बहुत अच्छा, हो रहा है, हो रहा है।

“फिर हम सहज योग का प्रसार करने के लिए रूस जाने वाले हैं। “आह,  काम चल रहा है।” सभी शैतान वहां पहुंच गए हैं, लेकिन देवदूत अभी भी इस पर काम कर रहे हैं। बहुत धैर्य वान, बहुत ही धीमे देवदूत। तो श्री हनुमान के गुणों में से एक यह था कि वे एक तेज़ व्यक्ति थे। इससे पहले कि कोई अन्य ऐसा कर पाता, वह काम कर देते हैं। वह सबको मात दे देंगे। ट्राफलगर में लड़ना और जीतना नेपोलियन को हराना ठीक है, लेकिन धर्म के क्षेत्र में, और सहज योग के क्षेत्र में, मुझे लगता है कि लोग समय के महत्व को नहीं समझते हैं। हम देरी करने में होशियार है, और हमारे पास कमजोर आदतें हैं, “ठीक है मैं टेलीफोन कर लूँगा,  मैं पता लगा लूँगा और हो जाएगा|” यह हमारे पास सबसे बड़ा दोष है, जो हमें हनुमान से सीखना है, कि राम सन्देश भेजना चाहते थे, इसलिए उन्होंने हनुमान के साथ अपनी अंगूठी भेजी। राम इतना जल्दी नहीं कर सकते थे, इसलिए हनुमान ने जाकर यह किया।

तब राम यह संजीवनी, इस तरह की जड़ी-बूटी चाहते थे। इसलिए उन्होंने उसे एक विशेष पर्वत से प्राप्त करने के लिए भेजा। उन्होंने कहा, “अब इसे ढूंढने में समय क्यों बर्बाद किया जाए, बेहतर है कि पूरी चीज़ ही लें लें।” इसलिए उसने पूरे पहाड़ को वहाँ पहुँचाया। बेहतर यह है कि जल्दी करो, तुरंत, इसे करने का यही समय है। लेकिन, “अगले साल हम देखेंगे। माँ, आप जानते हैं, गणपतिपुले के बाद हम विचार कर सकते हैं। हमारे बीच विचार-विमर्श होगा, और फिर हमारे पास तर्क होंगे, “और यह और वह। आज, जब हम हनुमान की पूजा कर रहे हैं, तो उनके चरित्र के बारे में एक बात है जो यह बताती है कि हमें अपने भीतर उस शीघ्रता को प्राप्त करना चाहिए। यह अभी किया जाना है। हम अब इसे स्थगित नहीं कर सकते। पहले से ही हम बहुत विलंब पर चल रहे हैं। मैंने देखा कि जो लड़कियां फ्रॉक या छोटी छोटी चीजें पहन रही थीं, अब बड़ी लड़कियां हो गई हैं, शादी के लायक। इसलिए मुझे लगता है कि मैं अपना सारा जीवन केवल सहज योगियों की शादी करूंगी।

परिणाम देखने के लिए आपको त्वरित लोग बनना होगा। ढील पोल और अन्य चीजों से संतुष्ट नहीं रहें। लेकिन सकारात्मक बातें, हम क्या कर रहे हैं? उदाहरण के लिए यह अच्छा है, बच्चे बड़े हो गए हैं, उनके पास इतना अच्छा नाटक, नाटक था, जो मुझे बहुत अच्छा लगा, यह हर किसी के आनंद के लिए बहुत अच्छा था, लेकिन कर्तव्य है जो, हमें करना है। हमें काम करना है।

तो काम पर ध्यान देना चाहिए, और यह क्या है, हम इसके बारे में क्या कर रहे हैं? मैं खुश थी कि अमेरिका से एक वीडियो फिल्म बनाने और इस तरह की चीजों के बारे में एक सुझाव आया है। और फिर रुकावटें हैं, हम पैसे की व्यवस्था कैसे करेंगे? क्या होने वाला है? आप इसे शुरू कर दें, आप को मिल जाएगा , आपके पास शक्तियां हैं। सब तालमेल ठीक से हो जाएगा, आप बस इसे करना शुरू कर दें, लेकिन अगर आप इंसानों की तरह व्यवहार करते हैं – तो जैसे पहले सोचें कि फिर इसकी योजना बनाए, और फिर इसे रद्द करें – ऐसे काम होने वाला नहीं है।

हालाँकि हनुमान हर समय पिंगला नाड़ी पर चल रहे है, लेकिन वह हमारी योजनाओं को बिगाड़ने के लिए कार्य करते है। क्योंकि उनके बजाय हम पिंगला पर भागते हैं। “ठीक है, आप इसे चला रहे हैं? मैं तुम्हें सही कर दूँगा!“ इसलिए वह हर समय हमारी सारी योजनाओं को दरकिनार कर देता है, और इस तरह है कि हमारी सारी योजना विफल हो जाती है हम घडी के अनुसार चलने में, बिना किसी महत्व की चीजों के बारे में, विशेष है, लेकिन हम सहज योग में अपनी प्रगति के समय के बारे में सतर्क नहीं हैं।

हमारे पास लक्ष्य होना चाहिए, हमारे पास निश्चित समय होना चाहिए – ठीक है इस समय तक हमें प्राप्त करना है, लेकिन यह थोड़ा तेज़ हो तो बेहतर है। अन्य सभी चीजों को प्रबंधित किया जा सकता है, लेकिन यह आपका काम है, कोई दूसरा ऐसा करने वाला नहीं है। कोई भी इसे करने वाला नहीं है, यह आपका काम है। मेरा मतलब है कि आप ट्रेन नहीं चलाने वाले हैं, आप हवाई जहाज़ नहीं चलाने वाले हैं और आपको कोई प्रशासन और यह बेवकूफी भरी राजनीति नहीं करनी है, लेकिन आपको सहज योग करना है। आपको इसे फैलाना होगा, आपको इसे एक ऐसे स्तर पर लाना होगा कि लोग इसे देख सकें।

अब अठारह साल हो गए, यह उन्नीसवां साल है। इसलिए आज हनुमान की पूजा के पहले दिन मुझे कहना होगा कि आपको उद्यम करना होगा। आपको सामूहिक रूप से और व्यक्तिगत रूप से किसी भी भय के बिना उद्यम करना होगा, यह भूलकर कि क्या होगा, मेरा मतलब है कि आप जेल नहीं जाएँगे, आपको सूली पर नहीं चढ़ाया जाएगा, उस पर सुनिश्चित रहें। मेरा मतलब है कि यदि आप अपनी नौकरी खो देते हैं, तो आप एक और प्राप्त कर सकते हैं, और यदि आपको नौकरी नहीं मिलती है, तो आप एक उपहार प्राप्त कर सकते हैं। इसलिए आपको उन सभी बेकार चीज़ों के बारे में चिंता करने की ज़रूरत नहीं है, जिन के बारे में मनुष्य बैठ कर चिंता करते हैं | लेकिन इसके बावजूद कि वे काम हासिल करते हैं, वे अपना काम करते हैं, और वे इससे कितना लिप्त होते हैं, मुझे आश्चर्य होता है। मैंने इसे अपने परिवार में देखा है, उन्होंने कितना काम किया है, उन्हें यह काम करना होगा, उन्हें सुबह उठना होगा, यह करना होगा, ऐसा करना होगा।

लेकिन आपको पता नहीं है कि आप देवदूत हैं और यह आपका काम है। आपको यह करना होगा और अन्य कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं है। मुझे उम्मीद है कि आज की पूजा से, वह उत्साह, कि उत्साहपूर्ण प्रकृति आपके पिंगला को चैतन्यित करेगी, और इसके बारे में कोई अहंकार महसूस किए बिना, सबसे विनम्र तरीके से हनुमान के रूप में, आप कर्तव्य करेंगे।

हनुमान, कल्पना करें, उन्हें सीता द्वारा सोने का एक सुंदर हार दिया गया था – पहनने के लिए बड़ी, बड़ी गेंदों के साथ। और उन्होने उन सभी को एक-एक करके खोल दिया, उन्होने कहा, “इसमें राम नहीं है, मैं इस सोने का क्या करुंगा?”

तो सीता ने कहा, “राम कहाँ है?”

उन्होने अपना दिल खोलकर दिखाया, “देखो, राम यहां हैं।”

अगर राम हैं, तो तुम अहंकार नहीं कर सकते। तो, इतनी गतिशीलता और इतनी विनम्रता – यह एक संयोजन क्या था। और केवल यही आपको प्रकट करना है। जितना अधिक आप काम करेंगे, जितना अधिक डटे रहेंगे, आप पाएंगे कि विनम्रता ही एकमात्र ऐसी चीज है जो मदद करती है। आज्ञाकारिता ही एक ऐसी चीज है जो आपके काम को पूरा करने में मदद करती है और आप विनम्र और विनम्र बनेंगे। लेकिन अगर आपको लगा कि, “ओह मैं यह कर रहा हूँ” – तो समाप्त हो जाएगा। लेकिन अगर आपको समझ है कि यह दिव्य द्वारा किया गया है – “परम चैतन्य सब कुछ कर रहा है, मैं तो सिर्फ एक साधन हूं” –  वहाँ विनम्रता होगी और आप एक प्रभावी साधन होंगे। आज इस देश में, यह बहुत आवश्यक था और यह इतना समय पर था। यह सब देवदूतों द्वारा आयोजित किया गया था कि हमारे यहाँ यह पूजा होनी चाहिए। लेकिन यह आप सभी के लिए अच्छा है। आपको वास्तव में मीडिया के लोगों को मिलना चाहिए, इन मंत्रियों को मिलें और देखें, वेल्स के राजकुमार और अन्य लोगों से मिलें, समितियां बनाए, देखें कि आप क्या कर सकते हैं। अपना दिमाग लगाओ, “हमें क्या करना है?

“लेकिन यहाँ केवल “मेरी माँ बीमार है, मेरा बच्चा बीमार है, मेरी यह फलां बीमार है, मेरा दोस्त बीमार है मेरा …” – अभी भी इसके साथ चल रहा है। यदि आप परमात्मा का काम करना शुरू कर देते हैं, तो आपकी चिंताएं खत्म हो जाती हैं, आपको किसी भी चीज के बारे में चिंता करने की ज़रूरत नहीं है – बस हर ली गयी। लेकिन यह स्व प्रसार नहीं है, यह नहीं है! यह सामूहिक का प्रचार है।

मुझे उम्मीद है कि आज आप अपने होने के सूक्ष्म पक्ष को समझ गए हैं, जो कि प्रदर्शित हो रहा है, जिसे मैं स्पष्ट रूप से देख सकती हूं और आप देखेंगे, आप सभी अपने ध्यान में इस बात से अवगत होंगे कि आपके भीतर क्या है। वह सबसे बड़ी चीज है जो ईश्वर को प्रसन्न करेगी, और परमात्मा आपकी पूरी तरह से देखभाल करेगा। हनुमान जैसे देवदूतों के समान आत्मविश्वास के साथ आपको आगे जाकर इसे पूरा करना होगा।

भगवान आप सबको आशीर्वाद दें।

मुझे अहंकार वाले हिस्से के बारे में कहना है कि यह वास्तव में पश्चिम में समस्या है, लोगों को भारतीय लोगों की तुलना में इतना अहंकार क्यों है। चीजों में से एक यह है कि दाईं ओर, जैसा कि मैंने आपको कई बार बताया है, एक एक्सीलेटर की तरह है। लेफ्ट साइड ब्रेक की तरह है। इसलिए यदि मूलाधार नियंत्रण में नहीं है, यदि ब्रेक ठीक नहीं है, तो स्वाभाविक रूप से उस एक्सीलेटर से नियंत्रित नहीं किया जा सकता है। इसलिए मूल रूप से हमारे मूलाधार को घेर कर लाया जाना चाहिए और उसे सही रखना चाहिए। आपको ऐसा करने के लिए बहुत मेहनत करनी चाहिए। यदि आपका ब्रेक स्थापित है, तो आप सहज योग के लिए जो भी काम करते हैं, आप अहंकार में नहीं पड़ेंगे, और अहंकार आपको रोक नहीं सकता है।

इसलिए यह खासकर पश्चिम में बहुत महत्वपूर्ण है, जहां यह शुभता और पवित्रता का विचार वास्तव में खतरनाक रूप से नष्ट हो रहा है। तो यह किसी भी देवदूत की शक्ति है और जिसे हमारे भीतर पूरी तरह से स्थापित किया जाना है, और फिर उस शक्ति पर काम करना होगा, जो आपको विवेक देती है, जो आपको अहंकारहीन करता है। मुझे उम्मीद है कि आज ये दोनों चीजें हमारे भीतर इस तरह से काम करेंगी कि हम वास्तव में पूरी तरह आत्मविश्वासी  आत्मसाक्षात्कारी बन जाएं, जिन्हें मैं आधुनिक समय का देवदूत कहती हूं।

प. पू. श्री माताजी निर्मला देवी