Shri Bhairavnath Puja: Bhairava and Left Side

Garlate (Italy)

1989-08-06 Bhairava Puja Talk, Italy, DP-RAW, 26' Download subtitles: CS,EN,FI,FR,JA,LT,NL,PL,PT,RO,RU,TR,UKView subtitles:
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श्री भैरवनाथ पूजा

 गारलेट, मिलान (इटली), 6 अगस्त 1989

आज हम यहां भैरवनाथ की पूजा करने के लिए एकत्रित हुए हैं। मुझे लगता है कि हमने भैरवनाथ के महत्व को नहीं समझा है जो इड़ा नाड़ी पर ऊपर-नीचे चलते हैं। इड़ा नाडी चंद्रमा की नाडी है, चंद्रमा की है। तो यह हमारे लिए ठंडा करने की एक प्रणाली है। तो भैरवनाथजी का काम हमें ठंडा करना है।

उदाहरण के लिए, लोगों का अहंकार के साथ एक गर्म स्वभाव होता है, अपने जिगर के साथ, चाहे वह कुछ भी हो, और यदि कोई व्यक्ति बड़े गुस्से में है, तो भैरवनाथ उसे शांत करने के लिए उस व्यक्ति से शरारत करते हैं। वह गणों की मदद से, गणपति की मदद से, आपके स्वभाव को ठंडा करने के लिए, आपको संतुलन प्रदान करने के लिए अपने नियंत्रण में सब कुछ आयोजित करते है। इसलिए यदि कोई बहुत गर्म स्वभाव का व्यक्ति है और वह अपने स्वभाव की सभी सीमाओं को पार कर जाता है, तो किसी न किसी तरह से, भैरवनाथ , हनुमान की मदद से, यह दिखाने के लिए कि क्रोध की यह मूर्खता अच्छी नहीं है, उसका प्रबंध करेंगे।

इसलिए, उदाहरण के लिए, जो लोग उदास हैं या जो लेफ्ट साइडेड हो गए हैं, हनुमान उन्हें इससे बाहर आने में मदद करने की कोशिश करते है, इसमें कोई संदेह नहीं है, लेकिन भैरवनाथ भी इससे बाहर आने में उनकी बहुत मदद करते हैं। अब एक व्यक्ति जो लेफ्ट साइडेड है सामूहिक नहीं हो सकता है। ऐसे व्यक्ति के लिए यह बहुत मुश्किल है जो बहुत ही लेफ्ट साइडेड है, जो हर समय बहुत दुखी, अप्रसन्न और चिंतित महसूस कर रहा है, सामूहिकता का मज़ा नहीं ले सकता है … जबकि एक गर्म स्वभाव वाला, एक राईट साइडेड व्यक्ति तो किसी भी सामूहिकता का आनंद नहीं लेता है तथा किसी को भी सामूहिकता का आनंद लेने भी नहीं देता है, इसमें कोई संदेह नहीं है, लेकिन सामूहिक में रहने की कोशिश करता है, कि वह दिखावा कर सकता है की वह कुछ श्रेष्ठ है  – क्योंकि ऐसा व्यक्ति श्रेष्ठता दिखाने की कोशिश करता है, – स्वाभाविक रूप से वह सामूहिक का आनंद नहीं ले सकता है।

इसके विपरीत, वह व्यक्ति जो उदास है, हर समय सोचता है: “कोई भी मुझे प्यार नहीं करता है, कोई भी मेरी परवाह नहीं करता है, मैं बहुत उदास हूं, ऐसा वैसा ,” – हर समय दूसरों से कुछ उम्मीद करना, वह भी सामूहिकता का आनंद नहीं ले सकता है। इस तरह का एक बाएं तरफा व्यक्ति को सब कुछ कष्टदायी महसूस होगा।

एक अन्य दिन की तरह, मैं मास्को गयी। हमारे साथ एक महिला थी जो सहज योगिनी थी –  लेफ्ट साइडेड सहज योगिनी। तो हम अपना भोजन करने गए और बारिश होने लगी और उन्हें टैक्सी नहीं मिल सकी , लेकिन तभी एक कार आई और हम वहाँ गए। फिर उन्होंने कहा कि आपको बहुत देर हो चुकी है इसलिए आपको दूसरी तरफ बैठना होगा, आपको अधिक महंगी सीटें लेनी होंगी। तो इस महिला ने कहना शुरू किया: “क्या सभी तरफ समस्याएं हैं, कोई टैक्सी नहीं, बारिश हो रही है और हमें एक सीट नहीं मिल सकती है।

मैंने कहा: “यह सब मज़ेदार है; यह कोई समस्या नहीं है। ”इस ‘समस्या’ शब्द को छोड़ देना चाहिए यह एक नया शब्द है जिसे मैंने सीखा है, क्योंकि ‘समस्या ’ शब्द का उपयोग हम अपनी युवावस्था में केवल ज्यामिति के लिए करते थे!

अब इस तरह का रवैया, नकारात्मक रवैया – हर बात में कुछ नकारात्मक खोजना – इस तरह से हम वास्तव में अपनी बाईं ओर को खराब करते हैं। लेकिन फिर एक सज्जन व्यक्ति जिन्होंने हमें आमंत्रित किया था, वे आए और उन्होंने कहा: “हम दूसरी तरफ बैठे हैं, और आपकी प्रतीक्षा कर रहे हैं।” तो हम दूसरी तरफ गए, अच्छा भोजन किया, सब कुछ ठीक था। 

मेंने कहा: “अब देखिए, आप केवल जितनी नकारात्मक चीजें हो सकती है उन्हें गिन रहे थे , और आप मस्ती नहीं देख रहे थे।”

तो उसने मुझसे पूछा: “मुझे क्या करना चाहिए?”

 मैंने कहा: “आप भैरव का नाम लें, अपने बाएं हाथ को तस्वीर की ओर तथा दाहिने हाथ  धरती पर रख कर बैठे और इस तरह आपकी नकारात्मकता के सभी भूत दूर हो जाएगें।”

इसलिए भैरव के हाथ में हमेशा प्रकाश होता है – उनके हाथ में हमेशा प्रकाश होता है – और वे इडा नाड़ी पर ऊपर और नीचे चलते हैं ताकि आप निश्चित कर सकें कि कुछ भी नकारात्मक नहीं रह जाए। और यह नकारात्मकता कई तरीकों से हमारे सामने आती है। नकारात्मकताओं में से एक यह है कि: “यह मेरा है”, जैसे: “मेरा बच्चा, मेरा पति, मेरी संपत्ति,” – ‘मेरा।

तो, आप देखते हैं, एक बार जब आप इस तरीके से लिप्त हो जाते हैं, तो आप क्या पाते हैं, कि आपके बच्चे भी नकारात्मक हो जाते हैं।

लेकिन अगर आप सकारात्मक होना चाहते हैं, तो यह बहुत आसान है और इसके लिए आपको यह देखना चाहिए: आपका चित्त कहाँ है? क्या आप केवल समस्या देख रहे हैं या आप इसमें कुछ मजा देख रहे हैं? ऐसे लोग हैं जो किसी भी चीज़ का मज़ा नहीं ले सकते। यदि यह एक धूप वाला दिन है तो वे रोएंगे: “हे भगवान, क्या धूप वाला दिन है,” और यदि यह बादलों वाला दिन है तो वे कहेंगे: “ओह, क्या दिन है।” उन्हें कुछ भी खुश नहीं कर सकता! लेकिन हर नकारात्मकता में सकारात्मकता का आनंद लेना सहज योगी की क्षमता है। नकारात्मकता का अस्तित्व है ही नहीं – यह एक अज्ञानता है। इसके अलावा यह अज्ञानता भी नहीं है क्योंकि अज्ञानता भी मौजूद नहीं है। यदि सर्वव्यापी शक्ति ही सब कुछ है, तो अज्ञान भी कैसे हो सकता है?

लेकिन मन की इस शक्ति की परतों में, अगर आप छिपते हैं, भागते हैं, तो आप कहेंगे कि नकारात्मकता है। जैसे, आप खुद को एक गुफा में छिपाते लेते हैं, ठीक से बंद कर लेते हैं, और फिर कहते हैं कि सूरज नहीं है।

इसलिए वे लोग जो सामूहिक नहीं बन सकते हैं वे या तो राईट साइडेड हैं या लेफ्ट साइडेड हैं लेकिन ज्यादातर लेफ्ट साइडेड हैं। लेकिन लेफ्ट साइडेड लोग नकारात्मकता में सामूहिक हो सकते हैं। भूतों की एक बहुत बड़ी बिरादरी है। आप देखिए कुछ शराबी एक साथ बैठे हैं। वे कह रहे हैं: “देखो कई समस्याए हैं, पर्यावरण की समस्याए ।” वे शराबी हैं, सभी नशे में हैं, और: “अन्य प्रकार की समस्याएं हैं – यह कब खत्म होगा?”

तो एक और कहता है: “रुको, रुको, रुको – मैंने सुना है कि पूरी दुनिया बहुत जल्द नष्ट होने वाली है।”

फिर तीसरा कहता है: “भगवान का शुक्र है कि हम खत्म होने वाले हैं, झंझट समाप्त।”

फिर चौथा कहता है: “लेकिन हमारे पब का क्या होगा?”

 वे कहते हैं: “यह ठीक है – अगर हम नहीं रहते हैं, तो इससे क्या फर्क पड़ता है?”

इस तरह यह भूतों का भाईचारा काम करता है । वे मस्ती बिल्कुल भी देख नहीं पाते, वे बिल्कुल भी आनंद नहीं ले सकते हैं, और वे बहुत ही इस प्रकार के सोच वाले बन जाते हैं की वे बहुत ध्यानी हैं, वे कुछ उच्च लोग हैं, वे कुछ बेहतर हैं … नकारात्मकता में। लेकिन इन लोगों का अंजाम यह होता है कि, वे पागल बन जाते हैं, जबकि राईट साइड के लोगों का अंजाम होता है की वे मूर्ख हो जाते हैं।

एक बार जब मैं एक मानसिक चिकित्सालय में गयी और वहाँ घुमते समय मैं एक महिला से मिली और वह काफी ठीक थी, मेरा मतलब है कि मुझे लगा कि वह काफी ठीक है, इसलिए मैंने उससे बात करना शुरू कर दिया। और वह बहुत समझदारी से बात करने लगी: “देखो मेरे जीजा वहाँ हैं, और क्या यह आवश्यक नहीं है कि उनकी मदद की जाए, और हमें ऐसा नहीं करना चाहिए,” … – वह सभी प्रकार की बातें जो वह मुझसे कह रही थीं, मुझे दिखा रही थीं, जैसे कि वह बहुत अच्छी और दयालु थी और कोई भी उससे प्यार नहीं करता था। और उसने कहा: “मैं बहुत असुरक्षित हूं” और यह और वह।

अचानक डॉक्टर अंदर आया और उसने उसे गाली देना और उस पर चिल्लाना शुरू कर दिया।

 मैंने कहा: “यह क्या है?”

 तो डॉक्टर ने ऐसे लोगों को भेजा जो इस महिला को पकड़ते|

 उसने मुझसे कहा: “वह सबसे ज्यादा हिंसक है और आप उससे क्यों बात कर रहे हैं?”

मुझे सिरदर्द था लेकिन मुझे नहीं पता था कि वह एक पागल थी। हो सकता है कि मेरी मौजूदगी में उसके भूत भाग गए हों और चालें खेल रहे हों, लेकिन आप उसे साफ देख सकते हैं।

तो यह बहुत अधिक भावनात्मक जुड़ाव और किसी के बारे में भावनात्मक रूप से चिंता करना, जैसे कि देखिये, यह मेरा बच्चा है, यह मेरी बात है, यह यह है और यह वह है – और हर समय इन चीजों में अपना कीमती जीवन बर्बाद करते रहना एक सहज योगी के जीवन का तरीका नहीं है ।

यदि एक सहज योगी सामूहिक नहीं बन सकता है, तो जान लें कि वह सहज योगी नहीं है।

तो व्यक्ति को यह जानना होगा कि यह हमारे भीतर भैरवनाथ का काम है। एक और काम यह की वह हमें अंधकार में प्रकाश देते है, वह हमारे भीतर सभी भूतों और सभी प्रकार के भूतिया और अजीब लिप्तता की सोच और अवसाद को भी नष्ट कर देते है|

इसलिए आज मैं बहुत खुश हूं कि हम श्री भैरव की पूजा कर रहे हैं क्योंकि वह गणेश से बहुत जुड़े हुए हैं। जैसा कि आप जानते हैं, श्री गणेश मूलाधार में हैं और भैरव लेफ्ट साइड पर चलते हैं और राईट साइड की ओर जाते हैं। तो भैरवनाथ की सहायता से सभी प्रकार की जड़ताओं , सभी प्रकार की आदतों पर विजय प्राप्त की जा सकती है। नेपाल में हमारे पास एक बहुत बड़ी, बड़ी भैरवनाथ की प्रतिमा है, जो वास्तव में एक स्वयंभू है, और लोग अधिक लेफ्ट साइडेड हैं, इसलिए वे भैरवनाथ से डरते हैं। इसलिए अगर किसी को बुरी आदत है, जैसे , चोरी करने की , वे उसे भैरवनाथ के सामने ले जाते हैं और उनका प्रकाश उस पर डालते हैं, एक लौ के द्वारा। मेरा मतलब है कि पुलिस उन्हें ले जाती है और उनसे पूछती है: “अब, भैरवनाथ के सामने इसे कबूल करो।”और वे कबूल करते हैं कि उन्होंने क्या गलत किया है।

इस प्रकार वह हमें गलत काम करने से रोकते है, धूर्तता जैसी चीजें। जो कुछ भी हम सोचते हैं कि हम गुप्त रूप से कर सकते हैं, छिपाया जा सकता है, लेकिन आप इसे भैरवनाथ से छिपा नहीं सकते।

यदि आप नहीं बदलते हैं तो वह आपको पूरी तरह से उजागर करता है। इस तरह उन्होंने सभी भयानक झूठे गुरुओं को उजागर किया है।

तो आज हम यहाँ भैरवनाथ इन महान देवता की पूजा करने वाले हैं जिन्होंने बाद में इस धरती पर अवतार लिया, अंततः महावीर के रूप में भी। इसलिए वह नरक के द्वार पर खडे है और लोगों को नरक में गिरने से रोकते है। लेकिन अगर आप नरक में जाना चाहते हैं, अगर यह आपकी इच्छा है, तो आपकी इच्छाशक्ति उस तरह काम कर रही है  – कि मुझे नरक में जाना चाहिए-वह कहते है: “ठीक है, तुम जा सकते हो।”

लेकिन जैसा कि आप जानते हैं, अब नरक भी लोगों से भरा हुआ है, इसलिए बेहतर है कि हम अपनी नकारात्मकता से लड़ने की कोशिश करें और आनंद्ग्राही बनें, दूसरों का आनंद लें, दूसरों से प्यार करें, इस बात की चिंता न करें कि दूसरे आपके साथ क्या कर रहे हैं बल्कि केवल यह सोचें कि आप दूसरों के लिए क्या अच्छा कर सकते हैं। तो आज की विशेष पूजा हम भैरवनाथ की करते हैं, जो की हमें हँसने, आनंद लेने, मौज-मस्ती करने की भावना प्रदान करते हैं।

परमात्मा आप को आशिर्वादित करें |