Shri Mahakali Puja: Purity and Collectivity

Centre Culturel Thierry Le Luron, Le Raincy (France)

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                              श्री महाकाली पूजा, “सामूहिकता और पवित्रता”

 ले रेनसी (फ्रांस), 12 सितंबर 1990।

हमने बेल्जियम में भैरव पूजा करी थी और अब मैंने सोचा कि चलो आज हम महाकाली पूजा करें क्योंकि कल रात का अनुभव, कल रात का अनुभव महाकाली का काम था।

 हर समय उनकी दोहरी भूमिका है, वे दो चरम सीमाओं पर है। एक तरफ वह आनंद से भरी है, आनंद की दाता, वह बहुत प्रसन्न होती हैं जब वह अपने शिष्यों को खुश देखती है। आनंद उसका अपना गुण है, उसकी ऊर्जा है। और कल आप फ्रांस की इतनी अधेड़ उम्र की महिलाओं को मुस्कुराते और हंसते देखकर चकित रह गए होंगे। मैंने उन्हें कभी मुस्कुराते हुए नहीं देखा था! यह बहुत आश्चर्य की बात है कि वे इतनी आनंदित और इतनी खुश कैसे थी। और यह महाकाली की ऊर्जा है, जो आपको आत्मसाक्षात्कार के बाद खुशी प्रदान करती है, और प्रसन्नता जिसका आप सब लोगों के बीच आनंद लेते हैं। ये सभी महाकाली के गुण हैं और जब वे महाकाली के नाम पढ़ेंगे, तो आप जानेंगे कि सहज-योग में उनकी शक्तियां कैसे प्रकट होती हैं और किस तरह से इसने आप सभी को आनंद के सागर में डूबने में मदद की है।

शुरुआत में मुझे आपको एक बात बतानी है कि: महाकाली पूजा, जब आप कर रहे होते हैं, तो आपको अपने भीतर, और दूसरे सहज योगियों से एक आनंद तथा खुशी महसूस करनी होती है। यदि आप ऐसा महसूस नहीं कर सकते हैं, तो इसका मतलब है कि आप अभी तक विकसित नहीं हुए हैं और कुछ समस्या है: हो सकता है कि आपके माता-पिता के साथ, शायद आपके बच्चों के साथ, शायद आपके परिवार के साथ, आपके देश के साथ, जो भी हो, लेकिन वहाँ किसी प्रकार के कुसंस्कार हैं जो काम कर रहे हैं जो आपको प्रसन्नता नहीं देता है।

और सहज योग में विकसित होना बहुत महत्वपूर्ण है – जो मुझे लगता है कि लोग भले ही आश्रम में रहें फिर भी समझ न पाए। वे एक बात नहीं समझते हैं: कि आपको सामूहिक होना है। यदि आप सामूहिक नहीं हैं तो आपको धीरे-धीरे बाहर निकाल दिया जाता है।

अब आप कह सकते हैं कि,  इस महाकाली शक्ति को सात तार मिले हैं। और ये तार आपको सामूहिक अवचेतन क्षेत्रों में फेंकने के लिए हैं। जैसे सितार में आपने देखा है, अनुनाद के लिए, अन्य तार भी हैं। इसलिए, एक बार जब आप सामूहिकता से बाहर निकलने लगते हैं तो यह स्वयं महाकाली ही है जो आपको उठाकर धीरे-धीरे अवचेतन क्षेत्र में बाहर फेंकना शुरू करती है, और जहां आप बस गुम हो जाते हैं। और सभी तरह की समस्याएं वहां से शुरू होती हैं। मैंने हर देश में ऐसा होते देखा है – कि लोग सामूहिक ध्यान में नहीं जाते हैं। फ्रांस के लिए भी मेरे पास यही रिपोर्ट है। और मुझे लगता है कि जो विकसित नहीं होते हैं उन्हें बाहर निकाल दिया जाएगा।

सहज योग, जैसा कि आप जानते हैं, एक दो तरफ़ा कार्रवाई है, जैसा कि महाकाली की दो तरफ़ा कार्रवाई है: वह बेहद प्यार, आनंद और प्रसन्नता से भरी हैं और वह बहुत क्रूर, क्रोधी है। वह वह है जो लोगो का बुरा करने वाले सभी राक्षसों और दुष्टों की हंता है।

इसलिए, एक बार जब आप लेफ्ट साइड में फेंक दिए जाते हैं, तो आप कल्पना कर सकते हैं, आप किसी भी प्रकार के लेफ्ट साइड रोगों से ग्रसित हो सकते हैं, उनमे मूलाधार के रोग सबसे खराब होते हैं, आप मेलाइलिटस जैसी बीमारियों से ग्रसित हो सकते हैं। आपने मांसपेशियों के क्षय होने के कारण होने वाली अक्षमताओं के बारे में सुना होगा। सभी पेशी विकृति इस समस्या से आती है। इसलिए किसी भी कीमत पर इससे बचना चाहिए।

लेकिन अगर आप सामूहिक में नहीं हैं, अगर आप सामूहिकता नहीं समझते हैं, और यदि आप सामूहिकता से बाहर हैं, तो आपको आश्चर्य होगा कि नकारात्मक शक्तियां एक साथ जुड़ जाएंगी और वे आपको खींच कर बाहर निकाल देंगे। तो यह होने वाली उन चीजों में से एक है, इसलिए बहुत सावधान रहें: सामूहिक कार्यक्रमों को टालें नहीं।

महाकाली के बारे में एक और समस्या यह है कि वह वह है जो आपको आपकी पत्नी के लिए, आपके पति के लिए भाव प्रदान करती है: उनकी खासियत है। अब वहाँ भी वही समस्या है: यदि वे दोनों ठीक हैं, तो वह ठीक है। लेकिन अगर वह उनमें से किसी एक को भटका हुआ पाती हैं तो,  वह उस व्यक्ति को बाहर कि तरफ फेंकती जायेंगी। और दूसरा व्यक्ति, यदि वह व्यक्ति भी उस व्यक्ति से लिप्त है, तो उसे भी  बाहर निकाल दिया जाएगा।

तो प्यार में पड़ने का यह तरीका, यह बकवास जो हमारे यहाँ है, कि आप प्यार में पड़ते हैं … लेकिन शब्द बिलकुल ठीक है क्योंकि आप गिरते हैं, वास्तव में, प्यार में। एक वास्तविक गिरावट होती है तो क्या होता है, जब आप प्यार में पड़ने लगते हैं, तो इस महाकाली की एक तरह की माया होती है। और तुम बस मोहित हो जाते हो, तुम्हारा अहंकार सहलाया जाता है, या ऐसा ही कुछ हो जाता है, या तुम्हारे पास पत्नी, या पति से संबंधित कुछ के कुछ विचार हैं। और फिर आप सोचते हैं, “ओह,  मेरे लिए तो वही एक है!” तो इन मामलों में केवल दो चीजें हो सकती हैं: या तो आप अपनी पत्नी या अपने पति जिन्हें आप स्वीकार करते हैं और प्रशंसा करते हैं, के कारण पूरी तरह से खो सकते हैं! और तुम समाप्त हो गए, मेरा मतलब है, तुम्हारा व्यक्तित्व समाप्त हो गया। या फिर, एक और बात जो और भी गंभीर है, वह यह है, कि आप हमेशा के लिए टूट जाएंगे और एक-दूसरे से नफरत करेंगे। इसलिए वे कहते हैं कि एक प्रेम और घृणा का रिश्ता है। प्यार कैसे नफरत हो सकता है? लेकिन देवी के इस गुण के कारण यह ऐसा हो जाता है, : कि एक तरफ तो वह है बेहद प्यारी बेहद दयालु, बेहद नरम, वह एक बिंदु तक जाती है, और फिर वह आपको दूसरी तरफ फेंक देती है। और इसीलिए इन देशों में जहाँ लोग हमेशा प्यार में पड़ते हैं, वे तब तक शादी नहीं करते, जब तक कि वे प्यार में नहीं पड़ जाते। उसमें वे सभी मर्यादाओं को भी पार कर जाते हैं। प्यार में पड़ने से वे शादी करेंगे जो पहले से शादीशुदा है या वे किसी ऐसे व्यक्ति के साथ रहते हैं जिसका अभी तक तलाक नहीं हुआ है। या फिर वे एक ही घर में या कुछ आपस में ही विवाह करेंगे। सभी प्रकार की चीजें वे करते हैं! और एक बूढ़ी औरत एक जवान आदमी से शादी करती है, या एक बूढ़ा आदमी एक जवान लड़की से शादी करता है, ऐसी: सभी निरर्थक बातें, बिना किसी मर्यादा के। और वे आपस में जुड़े नहीं रहते हैं, उनके पास कोई मर्यादाएं नहीं है। शादी करने का अर्थ ही मर्यादा बनाना है: अपने व्यवहार की  मर्यादा। और यही वह मर्यादा है, जिसे अगर आप नहीं रखते हैं, तो फिर यह महाकाली इस मामले में प्रवेश कर जाती है। तो, सबसे पहले, एक सामूहिक व्यक्तित्व होना होगा। जो लोग सामूहिक नहीं हैं, जो हर बार एक सामूहिक कार्यक्रम में शामिल नहीं होते हैं … आप सुझाव दे सकते हैं, कि आप ऐसी और ऐसी बातों \चीजों के लिए आना चाहेंगे।

उदाहरण के लिए, मैंने पहले ही समझाया है, कि आपको बात नहीं करनी चाहिए – मेरे टेप चलायें। बहुत सारे टेप हैं जो उन्होंने कभी नहीं सुने हैं। उन्हें मेरा टेप सुनने दो फिर ध्यान में जाओ और फिर आरती करो और इसे खत्म करो। क्योंकि इन टेपों को बार-बार सुना जाना है।

अब जो लोग उन टेपों में से कोई भी प्रश्न प्राप्त करते हैं, अगली बार, टेपों को शुरू करने से पहले इस पर चर्चा कर सकते हैं। यह बहुत अच्छी बात है और यह काम करता है भारत में कोई भी नहीं बोलता है, वे सिर्फ मेरा टेप लगाते हैं या मेरा वीडियो दिखाते हैं। उसके बाद वे सिर्फ ध्यान और आरती करते हैं – समाप्त। उसके बाद कोई बात नहीं करता। लेकिन इसे शुरू करने से पहले, एक-दूसरे से उन विषयों पर बात करना और समस्याओं पर चर्चा करना या किसी भी चीज़ पर चर्चा करना, जो उन्होंने पिछले कार्यक्रम के बारे में महसूस किया हो,  वे ऐसा करते हैं।

क्योंकि आप यहां किसी से शादी करने या किसी से प्यार करने के लिए नहीं आए हैं। आप किसी महिला के पीछे यहाँ नहीं आए हैं क्योंकि वह आपकी पत्नी है या कोई पुरुष के पीछे क्योंकि वह आपके पति हैं। पिछले जन्मों में आपके बहुत से पति-पत्नी थे। लेकिन आप अपने उत्थान के लिए यहां आए हैं। और अगर आप अपने उत्थान के लिए यहाँ आए हैं तो आपको एक नज़र रखनी होगी कि, – आपका दिमाग कैसे काम कर रहा है?

मान लीजिए कि मैं कहती हूं कि आपकी शादीशुदा ज़िंदगी अच्छी होनी चाहिए, तो बेशक, मैं कहती हूँ, आपको शादीशुदा ज़िंदगी अच्छी होनी ही चाहिए, लेकिन अपने उत्थान को खोने की कीमत पर नहीं! यह लोगों के साथ हुआ है। और इस तरह से हमने एक पूरा शहर खो दिया है। ऐसी मूर्खता लोगों के ऊपर आती है। इसलिए सावधान रहें कि कहीं खो न जाएं। आप यहाँ केवल एक सुखी वैवाहिक जीवन बिताने के लिए नहीं आए हैं बल्कि सुखी वैवाहिक जीवन केवल एक कदम है। लेकिन अगर वह कदम आपको अपने उत्थान के वास्तविक रास्ते से दूर ले जा रहा है तो सावधान रहना बेहतर है।

हमें यह भी समझना चाहिए कि निर्दोषता का अर्थ है पवित्रता, विचार की पवित्रता, जैसा कि मैंने कल समझाया था। मुझे आशा है कि आप शुद्धता का अर्थ समझ गए होंगे। शुद्धता को यूरोपीय लोगों द्वारा बहुत अधिक समझा जाना चाहिए – बहुत महत्वपूर्ण – विशेष रूप से फ्रेंच। क्योंकि पूरा समाज पीड़ित है। समाज तभी शुद्ध हो सकता है जब पारिवारिक जीवन शुद्ध हो, केवल इतना ही नहीं बल्कि एक दूसरे के साथ भी आपके संबंध शुद्ध हों।

जैसे मुझे बताया गया कि गणपतिपुले में किसी को प्यार हो गया। मेरा मतलब है, वहाँ आप तीर्थ यात्रा के लिए जाते हैं! यह तो ऐसा हो गया है कि आप एक साड़ी खरीदने जाते है और आप एक शेविंग किट ले आते हैं। यह बेवकूफी है। आप किसलिए गणपतिपुले आ रहे हैं? आप अपने उत्थान के लिए वहाँ आ रहे हैं – यह एक तीर्थयात्रा है। लेकिन तीर्थयात्रा में मैंने कभी नहीं सुना कि कोई भी एक-दूसरे के प्यार में पड़ जाए और शादी कर ले।

तो सहज योग में प्यार में पड़ने का यह भाव छोड़ दिया जाना चाहिए। वह सबसे बड़े बोझ में से एक है। और, और समझना चाहिए कि पवित्रता का मतलब शुद्धता है। अबोधिता का मतलब शुद्धता है, न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक शुद्धता भी। आपको मानसिक शुद्धता रखनी होगी। यदि आपके पास मानसिक शुद्धता नहीं है तो आपका उत्थान नहीं हो सकता।

वास्तव में पश्चिम में यह शारीरिक से अधिक मानसिक है, यह एक तथ्य है। और यही कारण है कि उनके दिमाग बंद हो गए हैं, और मुझे लगता है कि, वे अभी आलू की तरह बन रहे हैं। क्योंकि यदि आप मानसिक रूप से कल्पना करने और उसके चारों ओर खेलने और इसे उसी तरह से काम करने लगते हैं, तो यह बिल्कुल खतरनाक है क्योंकि यह सभी कल्पना है: इसका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है। जितना अधिक आप इस तरह की बकवास में आते हैं, उतना ही अधिक आप वास्तविकता से दूर होते जाते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि आपको शुष्क होना चाहिए, इसका मतलब यह नहीं है कि आपको अपनी जिम्मेदारी के प्रति लापरवाही बरतनी चाहिए। इसका मतलब यह नहीं है।

(मां खांसी करती हैं और अपने पर्स से खादिरादी वटी की गोली मांगती हैं: “मझी पर्स मढ़ै, खादिरदी बटी ये ती काढ “)

जैसा कि मैंने कहा है कि पेड़ में रस प्रसारित होता है तो वह शुद्ध करता है, यह पौधे के हर हिस्से को अलग तरीके से पोषण देता है। जैसे यह एक माँ है, इसलिए माँ, पिता एक पिता है, बहन एक बहन है, भाई एक भाई है। भाई-बहन के रिश्ते पति-पत्नी के रिश्ते नहीं बन सकते! यह कैसे हो सकता है?

“दौन दे! हा खादिरादि बटी। ” 

अब वास्तव में क्या होता है कि मन में इस तरह का भ्रम और इसने हमारे लिए जबरदस्त समस्याएँ खड़ी कर दी हैं।

तब सैप (पेड़ का रस)इन सभी चीजों का पोषण करता है और वापस आता है। यह किसी एक के साथ लिप्त नहीं होता है, “ओह, वह मेरी पत्नी है। इसलिए पहली प्राथमिकता मेरी पत्नी है। ” चूँकि मैंने कहा है, निश्चित रूप से, कि पारिवारिक जीवन सब ठीक होना चाहिए, आपको अपने पारिवारिक जीवन की देखभाल करनी चाहिए। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अन्य सभी चीज़ें बिगड़ने लगें, इसका मतलब यह भी नहीं है कि आपकी उन्नति समाप्त होनी चाहिए। इसका मतलब यह नहीं हो सकता।

आप आम लोगों की तरह नहीं हैं, आप संत हैं। और संतों के लिए मुख्य चीज उनका उत्थान है, उनका पारिवारिक जीवन नहीं, उनकी भौतिक संपत्ति नहीं। और न ही उनके बच्चे, लेकिन उनका उत्थान, एक बार जब उनका उत्थान होता है तो इसके साथ सब की उन्नति होगी। अब पवित्रता की समझ होनी चाहिए। यदि आप उत्थान करते हैं तो यह पवित्रता बहुत आसानी से आपके पास आ सकती है: यह एक ऐसा दुष्चक्र है। यह एक ऐसा दुष्चक्र है।

अब सबसे पहले आप अपना आत्मसाक्षात्कार प्राप्त करें, ठीक है। अब आप जानते होंगे कि कुण्डलिनी स्वयं महाकाली है क्योंकि वही ‘आदि’ है। महाकाली शक्‍ति हमारे भीतर की आदिम शक्‍ति है। और यह कुण्डलिनी है जो कि महाकाली शक्ति है। और वह आपके भीतर एक कुंवारी के रूप में बनी हुई है – इसका मतलब है कि वह पवित्रता है। उसमे शुद्ध करने की शक्ति है।

यह सब तभी होता है जब आपको अपना बोध मिलता है। वह आप पर अपने सभी खूबसूरत पहलुओं को अभिव्यक्त करना शुरू कर देती है। अब जो वहां बैठा है वह श्री गणेश है। अब लोग समझ नहीं पाते हैं कि अबोधिता क्या है। श्री गणेश वहीं बैठे हैं और वे ही हैं, जो सभी के मूलाधार के अधिष्ठाता है: यहां तक ​​कि अपनी माता की भी अध्यक्षता करते हैं, क्योंकि वे एक रक्षक की तरह हैं। और वही हैं जो बताते है कि वह उठ सकती है या नहीं। जहाँ तक और जब तक वह अनुमति न दे वह चढ़ नहीं सकती।

अतः श्री गणेश एक प्रकार से आरोहण की स्वीकृति देते हैं: “सब अनुकूल है, तुम उठ सकती हो।” और वह अपना सारा काम बंद कर देते हैं। तुमने मुझे लगातार कई घंटों बैठे देखा है। मुझे बाथरूम या कहीं भी नहीं जाना होता है क्योंकि गणेश अपना सारा काम बंद कर देते हैं। वह केवल इस बात कि परवाह करते हैं कि अब उत्थान और हर चक्र पर वह आपकी पवित्रता की जाँच करेंगे और फिर, तदनुसार, कुंडलिनी आपको शुद्ध करने का प्रयास करती है।

लेकिन जब यह मानसिक स्तर तक पहुँच जाता है:  रोमांस के ये सभी अजीब विचार मानसिक स्तर पर होते हैं; यह बकवास, वह बकवास। एक अन्य दिन मुझे आश्चर्य हुआ, एक लड़की थी जिसे शादी के बाद अपने पति से अपने प्यार का इजहार करने में परेशानी थी। शादी से पहले वह बिलकुल ठीक थी। इसलिए मैंने उससे कहा, “कुछ किताब पढ़ें जहां उन्होंने पति और पत्नी के बीच रोमांस का वर्णन किया है।” तो उसने कहा, “मुझे ऐसी कोई पुस्तक नहीं पता है।” फिर मैंने एक प्रोफेसर से पता लगाने के लिए कहा, उन्होंने कहा, “ऐसी कोई किताब नहीं है!”

सहज योग में विवाह के बाद रोमांस शुरू होता है, लेकिन मर्यादा के साथ : सहज योग की कीमत पर नहीं, आपके उत्थान की कीमत पर नहीं। तो इन सभी विचारों को लोगों ने पश्चिम में जाना है, मुझे पता है कि आप इसके बारे में बहुत आदी हो चुके हैं। तो, अब आप कहते हैं, “चलिए हम देखते हैं, आखिर यह समयाचार है। इसके बाद हमें उन्हें सभी लाभ देने होंगे।”

अब हम लोगों का चयन करते हैं,  सब कुछ हम करते हैं: यह महाकाली का काम है। क्योंकि आपको वायब्रेशन पर काम करना होगा। यह महाकाली का काम है। और विवाह के बाद भी कुछ शादियां असफल हो जाती हैं। इसका कारण यह है कि, उन्हें  नहीं पता है कि उनके विवाह का उद्देश्य क्या है।

तो महाकाली की पहली और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वह पवित्रता, पूर्ण पवित्रता है। और वह पवित्रता यदि हम अपने भीतर नहीं जगा सकते, तो हम सहज योगी नहीं हो सकते।

अब यह मन बहुत आदतों का शिकार है, मुझे पता है। हमारे बच्चे हम से बहुत बेहतर होंगे क्योंकि उनके पास ये ऐसी आदतें नहीं हैं जैसा कि हमारे पास है। और बहुत सारी समस्याओं से बचा जा सकता है यदि आप वास्तव में शुद्ध लोग बन जाते हैं।

मैं देख रही हूं, जिस दूसरे समाज में मैं जाती हूं, कोई भी सुरक्षित नहीं लगता है! किसी की पत्नी किसी के पति के साथ भाग रही है, किसी की बेटी किसी के पिता के साथ भाग रही है, कोई लड़का किसी की मां के साथ भाग रहा है। अगले दिन आपको पता चलता है कि कोई और वहां पति या पत्नी के रूप में खड़ा है। या कभी-कभी यह इतना मज़ेदार होता है कि आप इस पर विश्वास नहीं कर सकते कि: ऐसा कैसे हो सकता है? और हर कोई खतरे में है: एक आदमी घर में जाता है, वह पाता है कि उसकी पत्नी किसी अन्य पुरुष के साथ भाग गई, या एक आदमी अपने काम के लिए चला गया, वह दूसरी महिला के साथ भाग गया।

तो , वह आपको स्थिति  – अवस्था देती है। स्थिति का अर्थ है स्थापित होना । आपके आपकी पवित्रता में, ना कि आप के रोमांटिक जीवन में उचित स्थापना के बिना — आप उन्नत नहीं हो सकते। जैसे जब हम हवाई जहाज बनाते हैं, तो पहले हमें इसे कसना होता है – इसके तरीके से पुर्जे बिठाना, इस काम को करना – ताकि जब यह हवा में चले, तो इसके सभी हिस्से यात्रियों के साथ बिखर कर उड़ न जाएं। उसी तरह जब हम उत्थान कर रहे होते हैं, श्री गणेश यह करते हैं , तो वे मलत्याग की क्रिया को बस पूरी तरह से रोक देते हैं और उत्थान शुरू हो जाता है|

वे अपना काम ठीक से कर रहे हैं, इस तथ्य के बावजूद कि उनका अपमान किया गया है, उनकी उपेक्षा की गई है, हमने गलत व्यवहार किया है, जो कुछ भी हमने किया हो सकता है। वे अपना काम बिलकुल ठीक कर रहे हैं। आप इसे देख सकते हैं, इतने सारे लोग आत्मसाक्षात्कार पा रहे हैं। लेकिन हम इसके बारे में क्या कर रहे हैं? यहाँ तक कि, हम सामूहिक भी नहीं हो सकते! हम सामूहिक चीजों में शामिल नहीं हो सकते। और उन्हें देखो कि वे कितने उदार हैं! वे बेहद सामूहिक हैं। वे बेहद सामूहिक हैं। इस हद तक कि, अगर मान लो कोई सिर्फ श्री कृष्ण की पूजा करता है  – उसका दिल पकड़ लेगा। क्यों? क्योंकि आपको शिव की भी पूजा करनी चाहिए। वे बहुत सामूहिक हैं और मेरे साथ इतने जुड़े हुए हैं।

तो वे सभी सामूहिक हैं: उसी तरह आप भी देव हैं, आपको भी सामूहिक होना चाहिए। जैसे ही आप सामूहिक हो जाएंगे ये सभी निरर्थक चीजें बाहर गिर जाएंगी। ये सभी विचार छूट जायेंगे। आप सामूहिक नहीं हो पाते हैं क्योंकि आपने इन सभी चीजों को छोड़ा नहीं है, या फिर आप उन्हें बाहर छोड़ने से डरते हैं। तो आइए जानते हैं कि हमारा उद्देश्य क्या है: हमारा उद्देश्य उत्थान है।

और महाकाली शक्ति हमारे लिए क्या कर रही है? वह आपको कुंडलिनी के माध्यम से उत्थान दे रहा है। वह आपको शुद्ध कर रही है। वह तुम्हें सारी शक्तियाँ दे रही है। वह हर समय आपकी रक्षा कर रही है। वह तुम्हें आनंद दे रही है। लेकिन हम उसके लिए क्या कर रहे हैं? उसकी केवल, मात्र यही इच्छा है कि मेरे बच्चे संत हों, कि उनके पास संत के सुंदर गुण हों, कि वह हर स्त्री पर न गिरें, हर पुरुष पर न गिरें। वह इतना सस्ता नहीं है, आप देखें। और विशेषत: मानसिक रूप से, मेरा मतलब है कि अगर सहस्रार खराब हो जाता है, तो सहज योग कैसे काम कर सकता है? पूरा खेल सहस्रार का है। और वह पवित्रता अभिव्यक्त होनाचाहिए। आपके माध्यम से हम दुनिया को परिवर्तित करने जा रहे हैं, कोई और नहीं – यह सहज योगी हैं जो इसे बदलने जा रहे हैं।

अब उदारता की तरफ देखो, यहाँ तक कि मेरा शरीर भी इतना उदार है। कल एक महिला आई थी, मुझे लगता है कि उसका लीवर बहुत खराब था। वह आयी और मेरे लीवर ने वायब्रेशन फेंकना शुरू कर दिया – बहुत ज्यादा। हालांकि उसका बहुत खराब लीवर था; वह ड्रग्स ले चुकी थी,  मेरा मतलब है कि उसने ड्रग्स वगैरह लिया था लेकिन कष्ट मुझे मेरे इस जिगर से हुआ था। इसने (मेरे जिगर ने)यह नहीं सोचा  कि, “गरीब माँ, वह इतना दुख सहने के बाद हर तरह से आती है।” उसने बस उस महिला के लिए पंप करना शुरू किया। इतना उदार है। और वे स्वयं इतने उदार हैं जिस तरह से वे आप लोगों पर आशीर्वाद प्रदान करते हैं। जिस तरह वे कड़ी मेहनत  कर रहे हैं, जिस तरह वे दौड़ रहे हैं। हम उन्हें क्या दे रहे हैं? वे हमें खुशी देते हैं, वे हमारी देखभाल करते हैं, वे हमारे बच्चों की देखभाल करते हैं, वे सब कुछ देखते हैं, वे सब कुछ संभालते हैं। अब हम उनके लिए क्या कर रहे हैं?

यह भी मैंने सुना है कि जब लोग पोस्टर चिपकाते हैं तो कई लोग मदद नहीं करते हैं। बहुत कम लोग आते हैं। यह उन लोगों के प्रति बड़ी कृतघ्नता है। सभी देवता तब उपस्थित होते हैं जब आप उन सामूहिक कार्यक्रमों में शामिल होते हैं और आश्चर्यजनक रूप से पुराने सहज योगी नए लोगों की तुलना में अधिक कठिन होते हैं। मेरा मतलब है कि यह आश्चर्यजनक है। मेरा मतलब है कि वे अब पुराने हो कर प्रचलन के बाहर हो रहे हैं क्या या कुछ और बात है? ईसा-मसीह ने कहा है कि, “जो पहला है वह आखिरी होगा।” मुझे उम्मीद है कि ऐसा नहीं होगा। वे एक विश्वास जैसा विकसित कर लेते हैं कि, “ओह, हम पुराने सहज योगी हैं!” लन्दन में हमें इस चेतना कि “हम बूढ़े हैं” के भयानक परिणाम मिले हैं । हम जो चाहें वो करेंगे। हम सामूहिक में शामिल हो भी सकते हैं अथवा नहीं! ” : एक प्रकार का अहंकार। कृपया सावधान रहें। ईसा-मसीह ने स्पष्ट रूप से कहा है, “पहला अंतिम होगा।” और मैंने उनमें से बहुतों को देखा है, बस ऐसे ही बाहर हो जा रहे हैं। यहां तक ​​कि मुझे भी नहीं पता कि कैसे वे बाहर निकलते हैं: इतने मूर्खतापूर्ण तरीकों से कि, यह किसी के लिए भी अकल्पनीय है! 

जैसे इटली में एक सज्जन एक पुराने सहज योगी थे, उन्होंने कहा, “मैं महा माताजी हूँ!”

 सब उसकी ओर देखने लगे। “तुम्हारा मतलब क्या है?”

 “मैं महा माताजी हूँ!” और “मैं खुद यह सब करने जा रहा हूं! “

 तो शेष लोगों ने कहा, “फिर ठीक है,  हम आश्रम से बाहर जा रहे हैं!”

 “नहीं, नहीं, नहीं, मैं आश्रम का प्रबंधन नहीं कर सकता, मैं बाहर निकल रहा हूं!” 

और वह चला गया और किसी उस महिला,के साथ रहने लगा, जिसने मेरे खिलाफ उस कि बात सुनी, और कैंसर हो गया और मर गया।

 माना कि, आपको एक समस्या है, किसी अन्य को कुछ दूसरी समस्या है: सामूहिकता इसे बस कार्यान्वित करती है, संतुलित करती है। जैसे कि एक उंगली काट कर अलग कर दी जाती है, तब वह बेकार हो जाती है, या एक कील जो निकाल दी जाती है, वह बेकार हो जाती है। तो इस तरह तो हम अपनी आध्यात्मिक मृत्यु का आयोजन कर रहे हैं और अंततः मुझे नहीं पता कि और क्या है। और फिर वे वापस आते हैं कि, “माँ मुझे अब यह परेशानी हो गई है इसलिए मैं वापस आ गया हूँ। मैं तीन साल से सहज योग से बाहर था। ” 

मैं कहती हूं, “आपका मतलब क्या है: ‘सहज योग से बाहर’?”

 “मैंने किसी सामूहिक कार्यक्रम में भाग नहीं लिया।” 

मैं पूरी दुनिया की सामूहिकता के बारे में सोच रही हूं, यह मेरा दृष्टिकोण है, और अगर सहज योगी सामूहिक नहीं हो सकते तो फिर कौन सामूहिक हो सकता है? मेरी मिशन को कौन पूरा करने वाला है?

तो आप सभी – जो स्वयं को सहज योगी कहते हैं – कार्यक्रम में अवश्य शामिल होना चाहिए। और दूसरी बात यह है कि लोगों की उदारता की थोड़ी समस्या थी। बेशक, वह भी महालक्ष्मी का एक चरित्र है: वह बहुत उदार है। और जब आप लोगों को वायब्रेशन देने में, लोगों कि देखभाल करने में  उदार होते हैं तब महालक्ष्मी का सिद्धांत काम करता है। लेकिन महालक्ष्मी उन लोगों को पैसा नहीं देतीं जो कंजूस हैं – कभी नहीं देंगी। उनके पास बैंक में पैसा हो सकता है लेकिन वे कभी आनंद नहीं ले सकते।

इसलिए अगर जरूरत है तो लोगों को सहज योग को पैसा देना होगा। जैसा कि आप जानते हैं, बहुत शुरुआत से, मैं बहुत पैसे की आपूर्ति करती रही हूं। जो लोग शुरूआती सहज योगी हैं, उन्हें पता होगा कि मैं कितना भुगतान कर चुकी हूं। लेकिन अब हम विकसित हो रहे हैं, और हर किसी को पता होना चाहिए कि हमें भुगतान करना होगा। आखिर यह हमारी जिम्मेदारी है। हम अपना पैसा कहां खर्च करने वाले हैं? किस मद में ? मेरा मतलब है, मेरे परिवार को लगता है कि, मैं सहज योग के लिए जो भी पैसा खर्च कर रही हूं वह सबसे अच्छा है: उन्हें पुण्य मिलता है, उनके लिए सबसे अच्छा है। केवल पुण्य से आपको अधिक धन, स्वास्थ्य और समृद्धि मिलती है। यदि आपके पास पुण्य नहीं है तो आप इसे प्राप्त नहीं कर सकते। यह आएगा, और चला जाएगा। यह हवा में गायब हो जाएगा।

इसलिए, मुझे आश्चर्य हुआ कि लोग उदार नहीं हैं। हमें यह जानना होगा कि हम अन्य कई लोगों की तुलना में बहुत बेहतर संपन्न हैं: पूर्वी ब्लॉक कि दुनिया के लोग अभी पैसे के मामले में इतने अच्छे नहीं हैं। मैं यह नहीं कह रही हूं कि हमें उनकी मदद करनी है, लेकिन हमें सोचना होगा, “क्या हम उनके लिए कुछ उपहार के रूप में भेज सकते हैं? क्या हम उनके लिए कुछ कर सकते हैं? ” भौतिक चीज़ो का मूल्य है, जो फिर से महाकाली की शक्ति है, महाकाली की शक्ति है, कि पदार्थ प्रेम को धारण कर, व्यक्त कर सकता है।

 कई बार मैंने देखा कि कैसे, बहुत मीठे ढंग से, उन्होंने मुझे कुछ दिया। मेरा मतलब है, मैं वास्तव में कुछ भी नहीं लेती हूं और मुझे कुछ भी नहीं चाहिए। लेकिन कुछ खास बातें जो इस तरह की परवाह, ऐसी समझ, ऐसा प्यार प्रकट करती हैं। आप उन लोगों से अपने प्यार का इजहार कैसे करेंगे जो अभी तक दूर हैं? तुम बस कोशिश करो, देने की कोशिश करो। सहज योग के लिए भी देने की कोशिश करें और आप आश्चर्यचकित होंगे कि यह कैसे काम करेगा।

सामूहिकता के लिए हमें जानना होगा कि श्री भैरवनाथ और श्री हनुमान और श्री गणेश – ये तीन सिद्धांत जो हमारे भीतर काम करते हैं – उन सभी को समानांतर काम करना है, समानांतर: वे एक-दूसरे के बीच हस्तक्षेप नहीं करते हैं। लेकिन जब मदद करने की बात आती है, तो वे सभी करेंगे, उनके बीच  कोई झगड़ा नहीं है, दोनों के बीच कोई झगड़ा नहीं, बिलकुल नहीं। यदि हनुमान को भैरव की आवश्यकता है, तो वे वहाँ हैं। अगर भैरव को हनुमान की जरूरत है तो वे वहां प्रस्तुत हैं।

इसलिए यह सामूहिकता केवल एक चीज को समझ लेने से आती है कि: आज हम एक महान काम कर रहे हैं।

लोग इस बारे में जागरूक नहीं है, वे इसे वैसे ही हलके में लेते हैं। आपने देखा होगा कि, युद्ध में लोग कैसे लड़ते हैं, भले ही उन्हें मरने का डर हो। पुराने ज़माने में किसी को भी सेना में भुगतान नहीं किया जाता था। लेकिन वे गए और लड़े, शायद अपने देश के लिए, किसी भी चीज़ के लिए। और वे लड़ने के लिए एक साथ शामिल होते थे, उन्होंने खुद को मृत्यु के लिए भी प्रस्तुत का दिया, उन्होंने एक दूसरे की मदद की, उन्होंने ऐसा किया। ये सभी गुण तब होते हैं जब हम किसी से नफरत करना चाहते हैं। लेकिन जब हम किसी से प्यार करना चाहते हैं तो क्यों नहीं वे सारे गुण हमारे अन्दर से अभिव्यक्त होने चाहिए।

ये महाकाली के गुण हैं क्योंकि वह युद्ध मामलों की विशेषज्ञ हैं। वही हैं जो लोगों को एक बनाती है, और वही है जो उन्हें लड़ाई कि शक्ति देती है, क्योंकि यह इच्छा है। उनके पास अन्य कुछ नहीं वरन कुछ करने की इच्छा है, और फिर वे एक साथ जुड़ जाते हैं और फिर महासरस्वती उन्हें कार्य करने में मदद करती हैं। लेकिन इससे पहले इच्छा इतनी प्रबल है। अब हमारे भीतर इच्छा बहुत, बहुत मजबूत होनी चाहिए, कि हमें पूरी दुनिया के उद्धार के लिए प्रस्तुत होना चाहिए: हम वे लोग हैं, हम विशेष लोग हैं, हम नींव में हैं। सहज योग के लिए हमारे अपने व्यक्तित्व के पूर्ण समर्पण से ज्यादा  

यह इच्छा अत्यंत प्रबल और बहुत शुद्ध होनी चाहिए। जो लोग वास्तव में इसकी इच्छा रखते हैं, वास्तव में, उन्हें अपना आत्मसाक्षात्कार आसानी से मिलता है, वे सरलता से अपनी गहराई तक पहुंचते हैं। और उन्हें सहज का काम करने में मज़ा आता है – वे हर समय इसका आनंद लेते हैं: उनके लिए कुछ भी अधिक महत्वपूर्ण नहीं है।

जैसा कि हम भारत में कहते हैं – एक कहावत है कि – जब आपको पीने के लिए गंगा का पानी मिलता है, तो आपको गंदी नदियों का पानी क्यों लेना चाहिए? तो सारा ध्यान उस तरफ है। इस रोमांस और इस प्यार से मिलने वाला सारा मज़ा वगैरह इसके समक्ष नगण्य हो जाता है क्योकि, यह निरानंद है-केवल आनंद| विवाहित जीवन में आप देखते हैं, अगर पत्नी ऐसा कहती है, वैसा कहती है तो यह सब ऐसी जड़ता है जिसमे कोई आनंद नहीं।

आपके विभिन्न चक्रों पर अलग-अलग आनंद हैं, वे सभी महाकाली द्वारा प्रदत्त हैं। लेकिन आत्मसाक्षात्कार के बाद आपको जो सबसे बड़ा मिला है वह निरानंद है। उस अवस्था तक पहुँचना चाहिए: निरानंद अवस्था में। यदि आप निरानंद की अवस्था में हैं तो अन्य सभी सुख और आनंद नगण्य हैं। मेरा मतलब है, भारत में कई लोगों ने मुझे बताया कि वे क्रिकेट के बहुत शौकीन थे, उन्होंने कहा, “माँ, हम आजकल क्रिकेट नहीं देखते हैं।”

 मैंने बोला क्यों?”

 “क्योंकि अब इसमें आनंद नहीं है। देखिये कि, उस तरह का मज़ा खो गया है। ” वरना भारतीय क्रिकेट के पीछे पागल हैं! यहां तक ​​कि अगर आप जंगल में भी जाते हैं तो वे क्रिकेट सुन रहे होंगे। यह अंग्रेजों द्वारा खेला जाने वाला एक खेल है, जो अब इसमें इतने अधिक इच्छुक नहीं है, लेकिन भारतीय हैं। और अब अगर आप उनसे पूछें तो वे कहते हैं, “नहीं, हमें अब इसमें कोई दिलचस्पी नहीं रही है।”

कई लोग जो रोज़ सात, आठ अखबार पढ़ते थे, उन्होंने कहा, “हम अब कभी अखबार नहीं पढते। यह कभी अच्छी खबर नहीं लाते है – समाप्त हो गया। और अभी भी उनका काम चल रहा हैं। क्योंकि आपके चित्त का पूरा ध्यान अब सहज योग पर है क्योंकि आप केवल सहज योग का आनंद लेते हैं। आपको सहज योगियों से मिलना पसंद है, आपको सहज योगियों के साथ रहना होगा।

हमारे पास इंग्लैंड में एक पूजा थी, बारिश हो रही थी और श्री गणेश की काफी जीवंत पूजा थी। लेकिन किसी को परवाह नहीं हुई। पानी उनके द्वारा लगाये गए पंडाल से भीतर गिरने लगा था, कोई परेशान नहीं हुआ था। “सब ठीक है, पानी आ गया है, पानी को इस तरफ से गुजरने दो, हम उस तरफ बैठेंगे।” हर किसी ने समायोजित किया, क्योंकि प्राथमिकता आनंद लेना था। वे किसी भी कीमत पर आनंद का भोग नहीं छोड़ना चाहते थे। और यह जारी रहा, पूरी रात। एक व्यक्ति चिंतित था क्योंकि किसी ने धमकी दी थी कि पुलिस आएगी। मैंने पुलिस को भी सोने दिया और जिस आदमी को रिपोर्ट करना था वह भी सो रहा था। तो पूरी रात हमने अपना आनंद लिया।  अब यदि आपके पास अपने मन की शुद्धता नहीं है – यह आनंद आपके पास नहीं आ सकता है,  निरानंद। आप अन्य चीजों, अन्य चक्रों के अन्य आनंद प्राप्त कर सकते हैं।

शुद्धता कैसे लायें? बस निर्विचार जागरूकता विकसित करके और बातों \चीजों को निर्विचारिता में देखना। उसके लिए आपको सामूहिक होना होगा। अगर आप सामूहिक हैं, तो मैं वहां हूं। जहां भी तुम सामूहिक हो, जहां भी तुम इकट्ठा हो, मैं वहां हूं।  आप सभी इस कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं इससे अधिक प्रसन्नता मुझे किसी अन्य बात से नहीं मिलती है|। आपको आश्चर्य होगा कि, ऑस्ट्रेलिया में, हमारे पास हर शहर में बहुत सारे केंद्र हैं, लेकिन वे सभी सामूहिकता के कार्यक्रमों में भाग लेते हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि सामूहिकता पोषण का महासागर है।

यह सबसे आसान काम है जो हमें करना है। लेकिन भूत अधिक सामूहिक हैं, बहुत अधिक सामूहिक। भूत इतनी तादाद में जा सकते हैं कि आप हैरान रह जाएंगे।  फ्रांस में एक महिला थी, वह एक बूढ़ी महिला थी और उसकी बेटी सहज योग में थी। वह बिलकुल पागल हो गई थी, मेरा मतलब बिलकुल भुतिया, और इसलिए उसने उसे बुजुर्ग आश्रम में रख दिया। और बुजुर्ग आश्रम में वो बस रविवार को चर्च में जाना जानती थी। वह तैयार हो कर चर्च जाती। यही एकमात्र समझदारी की बात है जो वह करती थी। इसलिए उसने उसे वृद्धाश्रम में डाल दिया और एक चर्च था, और उसने मुझे यह बताया, उसकी बेटी ने मुझसे कहा, “यह बहुत आश्चर्यजनक है कि सभी सुबह उठते हैं, अच्छी तरह से तैयार होते हैं और चर्च जाते हैं। और चर्च के अंदर  उन आधे पागल या पूर्ण-पागल बुजुर्ग लोगों में से, उन लोगों की कब्रें हैं जो मर गए हैं। अन्यथा वे अपनी पोशाक पहनना भी नहीं जानते थे, वे अपना भोजन करना नहीं जानते थे, वे कुछ भी नहीं जानते थे, लेकिन जब यह चर्च में उस जगह पर जाने की बात आई, जहां सभी भूत थे, वे सभी सुबह उठेंगे, ठीक से कपड़े पहनेंगे और चर्च में जायेंगे, बैठेंगे, भजन गाएँगे और वापस आएँगे, जैसे कि कोई सब ग्रसित हो। इस तरह की भूतों कि एकताबद्धता है। जैसे ही एक भूत आता है … एक भूत अब ऑस्ट्रेलिया से हाल ही में आया था। अब वह अपने चारों तरफ भूत इकट्ठे कर रहा है| वह पुणे गया, वहां उसने इकट्ठा किया, सभी भूतों को  – तुरंत। फिर वह यहां आया, अब वह उन भूतों को इकट्ठा कर रहा है। लोग उसके साथ दोस्ताना व्यवहार कर रहे हैं। वास्तव में कौन भूत हैं, इसे आप यह  देख कर पहचान सकते हैं कि, कौन उसके पास बैठा है| वे इस तरह आकर्षित होते हैं जैसे की चुम्बक। हालांकि चुंबक महाकाली का गुण है। मुझे किसी और की तुलना में भूत मुझे बेहतर पहचानते हैं क्योंकि वे मेरे अतीत को जानते हैं, वे अतीत में हैं। और वे जानते हैं कि किस में भूत है और कैसे वे एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं, और वे किस तरह से एक भूत ग्रस्त व्यक्ति पर कार्रवाई करते हैं। इसलिए सकारात्मक सामूहिकता का होना आवश्यक है।

लेकिन जब सकारात्मकता की बात आती है, तो वे लोग सामूहिक नहीं होते हैं। जो लोग सामूहिक नहीं होते हैं वे क्रमशः भूतों के समूह में शामिल हो जाते हैं। चूँकि आज हम महाकाली के बारे में बता रहे हैं। वह है जो इन भूतिया चीजों के बारे में सब कुछ जानती है। वह प्रभारी है, मेरा मतलब है वह इन सभी भूतों की भगवान है और वह जानती है और वह उनकी देखभाल करती है और वह उनका प्रबंधन करती है। लेकिन जब सहज योगी उस दायरे में जाना चाहते हैं, तो वह क्या कर सकती है? उसने उन्हें एक तरफ बंद कर दिया है। लेकिन सहज योगी वहां जाना चाहते हैं, बस उस क्षेत्र में पीछे के दरवाजे से प्रवेश करते हैं, आप क्या कर सकते हैं?

बेशक, वह रक्षा करती है, वह नहीं चाहती कि कोई वहां जाए। उसने बस उन्हें बाहर ही रखा है और कहा है कि, इस तरफ न आएं। लेकिन खुद सहज योगी वहां चले जाते हैं। यह बताया गया है।

इन परिस्थितियों में, सहज योग बहुत आगे चला गया है, बहुत सारे अन्य देशों में बहुत अधिक है। फ्रांस में, आपने कल देखा है कि कैसे माँ की इस आनंद शक्ति ने लोगों पर काम किया। यह देखना अद्भुत था। हर कोई मेरे पास आया और वे मुस्कुराहट से भरे हुए थे, मैंने उस उम्र की किसी भी फ्रेंच महिला को कभी मुस्कुराते नहीं देखा! कभी नहीं, कोई सवाल नहीं, भले ही आपने उन्हें गुदगुदी की हो, भले ही आप यह प्रमाणित करें कि यह एक चुटकुला है फिर भी वे इस तरह मुस्कुराएंगे नहीं। [हँसी]

मैंने कभी उनके दांत नहीं देखे। उनमें से बहुत से लोगों के कल पूरे चेहरे खिले हुए थे,  ऐसा कुछ चमत्कारी था। महाकाली की यह आनंदिनी शक्ति कल बहुत खूबसूरती से कार्यरत थी और आप लोग हैं जो अब उनका मार्गदर्शन करेंगे या उन्हें गुमराह करेंगे। यदि आप बन जाते हैं,  आप सभी उच्च व्यक्तित्व बन जाते हैं, यदि आप सभी सामूहिक हो जाते हैं, और यदि आप उदार हो जाते हैं, और यदि आप बिल्कुल शुद्ध हो जाते हैं, तो वे कहेंगे, ‘अब इन लोगों को देखो, वे कितने सुंदर दिखते हैं।’

आप पहले से ही बहुत सुंदर दिखते हैं, आपके चेहरे चमकते हैं, लेकिन यह सब गायब हो जाएगा। और गायब होने का प्रभाव बहुत सरल नहीं है। इसलिए सावधान रहें, मैं आपको भैरव के सभी गुणों का आशीर्वाद देती हूं, क्योंकि वह महाकाली के सबसे बड़े शिष्य हैं। और वह वही है जो ऊपर-नीचे दौड़ लगा रहे हैं, सुबह से शाम तक हर समय, विशेष रूप से रात में, वह बहुत ही कठिन काम कर रहे हैं,  इन भयानक राक्षसों का वध करना वगैरह, और इस तरह के परिणाम प्राप्त कर रहे हैं। हमें, हम सब को उन के साथ मिलकर कार्यरत होना होगा।

परमात्मा आपको आशिर्वादित करें !