श्री आदी कुंडलिनी पूजा

Weilburg (Germany)

1991-08-11 Adi Kundalini Puja: The Power Of Pure Desire, 56' Download subtitles: CS,EN,ES,FR,NL,PTView subtitles: Add subtitles:
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श्री आदी कुंडलिनी पूजा, वील्बर्ग (जर्मनी), 11 अगस्त 1991।

आज हम यहां आदी कुंडलिनी के साथ ही अपनी कुंडलिनी की पूजा करने के लिए यहां इकट्ठे हुए हैं।

सबसे पहले, मुझे लगता है कि सबसे महत्वपूर्ण बात है, स्वयं की कुंडलिनी के बारे में समझना, क्योंकि आत्मसाक्षात्कार ही आत्म-ज्ञान है। और जो आपको आत्म-ज्ञान देता है वह है, आपकी अपनी कुंडलिनी , क्योंकि जब वह उठती है तो, वह इंगित करती है कि आपके चक्रों पर क्या समस्याएं हैं।

अब, हम कहते हैं कि यह शुद्ध इच्छा है, लेकिन हम नहीं जानते कि शुद्धता क्या है|इसका तात्पर्य है तुम्हारी पवित्र इच्छा,| इसका अर्थ है कि इसमें कोई वासना, लालच, कुछ भी नहीं है। यह शक्ति तुम्हारी माँ है और आपकी त्रिकोणीय हड्डी में बस जाती है। वह आपकी मां है वह तुम्हारे बारे में सब कुछ जानती है, यह एक टेप रिकॉर्डर की तरह है वह आपके बारे में सबकुछ जानती है और वह पूर्ण ज्ञान है – क्योंकि वह बहुत शुद्ध है और जो भी चक्र वह छूती है, वह यह भी जानती है कि उस चक्र में क्या गलत है – पहले से ही। तो वह काफी तैयार है, और वह खुद को पूरी तरह से समायोजित करती है ताकि आपको उसके जागरूकता से कोई समस्या न हो जाए। यदि कोई चक्र संकुचित है, वह प्रतीक्षा करती है और धीरे धीरे उस चक्र को खोलती है।

अब, यह कुंडलिनी मौलिक शक्ति है जो आपके भीतर परिलक्षित होती है। और तुम्हारे भीतर, एक इंसान में यह ऊर्जा के कई रेशों की तरह है तो यह एक रस्सी की तरह है और ये सारी ऊर्जा इस कुंडलिनी बनाने के लिए एक साथ गुंकुंडलिनी कितनी दूरथी जाती है। इंसान में यह रेशे (3×7)गुणा108 बार होता है| लेकिन जब आपकी कुंडलिनी बढ़ती है, इस से बाहर एक या दो रेशे ही आते हैं और फंटनेल हड्डी क्षेत्र को छेदते हैं – केवल एक या दो क्योंकि इसे अंदरूनी नाड़ी से गुजरना पड़ता है, जिसे ब्रह्म नाडी कहा जाता है यह सब सर्पिल है क्योंकि कुंडलिनी एक सर्पिल है और ये नाड़ी भी – इस तरह की सर्पिल की तरह हैं तो सबसे अंदरूनी नाड़ी ब्रह्मा नाड़ी है सबसे बाहरी नंदी दाहिना पक्ष है और दूसरी अंतरतम इडा नाडी है।

इसप्रकार, ब्रह्म नाडी के माध्यम से वह उन रेशों को भेजने शुरू कर देती हैं। इससे वे केंद्र को आराम देते हैं। केंद्र के शिथिलता से अनुकम्पी तंत्रिका तंत्र भी आराम पाना शुरू कर देता है। और जब यह आज्ञा चक्र को जाता है, तो आपकी आंखों में आराम आना शुरू हो जाता है, आपके आँखों की पुतलियाँ का फैलना शुरू हो जाता है, और आपकी आंखें मेरी आँखों जैसी हो सकती हैं, बहुत काली, बिलकुल तनाव मुक्त।

तो, आप आसानी से एक व्यक्ति में देख सकते हैं की कुंडलिनी कंहा तक गयी है यदि उसने आज्ञा में छेद किया है, तो आंखें पूरी तरह से फैली हुई होंगी और चमक जाएगी। और फिर वह सहस्त्र्र में प्रवेश करती है

अब, यह ज्ञान, प्रेम, करुणा और ध्यान का बिल्कुल शुद्ध प्रकाश है ये तीन चीजें उस ऊर्जा में हैं हम कई ऊर्जा के बारे में जानते हैं – जैसे विद्युत ऊर्जा, हम प्रकाश ऊर्जा के बारे में जानते हैं, हम अन्य ऊर्जा के बारे में जानते हैं लेकिन ये ऊर्जा विचार नही कर सकती है, वे समायोजित नहीं कर सकती हैं, वे स्वयम संचालित नही हो सकती। उन्हें हमारे द्वारा संभाला जाना होता है। लेकिन यह ऊर्जा, स्वयम जीवित ऊर्जा है और खुद को कैसे संभालना जानती है। यह सोचती है|

यदि आप बीज को अंकुरित होना देखते हैं, तो आप बीज की नोक पर पाएंगे कि वहां एक छोटा सा सेल(कोशिका) है जो जानता है कि नरम जगहों में से कैसे निकलना है और फिर पत्थरों के आस पास घेरा बनाते हुए कैसे निकलना है, फिर स्रोत तक पहुँचने का कैसे अपना रास्ता खोजना है।जिस तरह से यह चलती है, मै कहूंगी की,उस सेल को प्राप्त हुई है उसके अन्दर एक छोटीसी कुंडलिन| लेकिन, आपके भीतर – कुंडलिनी का एक जबरदस्त बल मौजूद है।

तो, आपके पास करुणा का भंडार है, जो आत्मा द्वारा प्रकाशित हो सकता है आपके पास प्यार, करुणा और ज्ञान का एक भंडार और क्षमा का सागर है। जब लोगों को आत्मसाक्षात्कार मिलता है, तो वे यह नहीं समझ पाते है कि, उन्हें अब विकसित होना है। और वे क्यों विकसित नहीं होते? क्योंकि वे इन ऊर्जाओं को पाने के लिए प्रार्थना नहीं करते| एक आत्मसाक्षात्कारी व्यक्ति यदि कहता है, “मै और अधिक करुणावान होना चाहता हूँ,मेरा करुणा का गुण ठीक नहीं है,मेरी दूसरों के प्रति दिलचस्पी पर्याप्त नहीं है,,मेरी उदारता पर्याप्त नहीं है,मै दूसरों का शोषण कर रहा हूँ, उनके प्यार का शोषण कर रहा हूँ|, “फिर , आपको प्यार और करुणा का बड़ा आयाम देते हुए यह ऊर्जा कार्यरत होना शुरू होती है। लेकिन, अगर आप अपनी जागरूकता में विकसित नहीं होना चाहते हैं, तो वह कहती है, “ठीक है, वह अधपके सहज योगी है, इसे जाने दो।” वह उस ऊर्जा की आपूर्ति नहीं करती जो आप ही के अंदर जमा है। मैंने आपको बताया, 3×7 याने की इक्कीस के 108 बार गुणा।

तो आपके भीतर कितना बड़ा भंडार है| लेकिन सोचने और पूछने की आपकी सांसारिक शैली की वजह से – शुरुआत में, जब मैंने सहज योग शुरू किया, लोग आदी थे अपनी नौकरी ,अपने माता पिता की बिमारियों ,पैसा या वैसा ही कुछ के बारे में पूछने के। तो ये इच्छाएँ शुद्ध इच्छाएं नहीं हैं जैसा कि हम अर्थशास्त्र में जानते हैं, वे शुद्ध इच्छा नहीं हैं। वे अशुद्ध इच्छाएं हैं, क्योंकि वे सामान्य रूप से कभी भी तृप्त नहीं होती हैं।

तो यह कुंडलिनी आपकी मां है, वह आपको एक उच्च व्यक्तित्व देकर आपके उत्थान के लिए, आपकी देखभाल करने के लिए, आपको पोषित करने के लिए वहां है। उच्च व्यक्तित्व, व्यापक व्यक्तित्व, गहरा व्यक्तित्व। अब, हम सोचते हैं कि, अगर कोई अच्छी तरह से पढ़ालिखा है, तो हमें लगता है कि वह एक उच्च व्यक्तित्व है। कभी-कभी जो व्यक्ति अमीर होता है, हमें लगता है कि वह एक उच्च व्यक्तित्व है। कभी-कभी हम सोचते हैं कि जो व्यक्ति बहुत मेहनत कर रहा है वह एक उच्च व्यक्तित्व है। कभी-कभी हम सोचते हैं कि एक व्यक्ति जो , मेरा मतलब है भ्रामक रूप से धार्मिक है, हमें लगता है कि वह एक उच्च व्यक्तित्व है उच्च व्यक्तित्व के बारे में हमारे विचार स्वयं गलत हैं। लोग उच्च हैं क्योंकि वे आध्यात्मिक रूप से विकसित हुए हैं – अन्यथा, वे नहीं हैं, वे अधम के समान हैं। कोई उन्हें सम्मान नहीं करता है

अब हम जर्मनी में है,और जर्मनी में – ‘जर्म’ का अर्थ है ‘कुंडलिनी’। जर्म का मतलब संस्कृत में होता है, जैसा कि आप कहते हैं, ‘अंकुर’ अंकुर ही जर्म है। और जर्मनी वह जगह है जहां हम कुंडलिनी पूजा कर सकते हैं, वास्तव में एक महान संयोग है या मुझे लगता है कि यह सिर्फ परमचेतन्य की व्यवस्था है।

तो, एक बीज को देखने के लिए, एक साधारण चीज़ की तरह दिखता है, कुछ विशेष नहीं – बहुत कठोर अखरोट भी हो सकता है – ज्यादातर बीज नट्स में होते हैं, ज्यादातर। अगर वे नट्स में नहीं हैं, तो उनमें कम से कम कुछ आवरण या कुछ हो सकता है। लेकिन आपको एक पेड़ पर कहीं से लटका हुआ बीज नहीं मिलेगा।

इसके पास कुछ सुरक्षा होनी चाहिए, किसी प्रकार किया बाहरी कड़ा पन। अब, वह कठोरता है, लेकिन जर्म में उस कठोरता को तोड़ने की क्षमता है। बस एक जीवाणु की कल्पना करें, जो ऐसी नाजुक चीज है, जो कि अगर आप स्पर्श करते हैं तो यह टूट सकता है क्या यह कवर, या कठोर खोल तोड़ सकता है? यह कैसे कर सकता है? क्या यह शानदार नहीं है कि इतना कठोर खोल, जिसे हम इसे अपने दांतों से भी नहीं तोड़ सकते हैं, आसानी से नाज़ुक जर्म द्वारा तोड़ दिया जा सकता है। तो उस समय, क्या होता है कि खोल स्वयं जीवंत नहीं होता है। उसे जीवन नहीं मिलता है,स्वयम खोल की कोई हलचल नहीं होती है, लेकिन उसमे घटित होता है और वह खुलता है। तो,वह नाजुक चीज,जीवाणु,जब वह पनपता है, तो शेल को टूटना होगा।

उसी तरह, यह कुंडलिनी, जो एक नाजुक चीज है – यदि आप एक दयालु व्यक्ति को देखते हैं “ओह,” वे कहते हैं, “माँ, वह रत्न जैसा है, आप जानते हैं।” हर किसी को उस व्यक्ति के लिए सहानुभूति, सुरक्षा की भावना है। “वह बस है, माँ, वह सिर्फ करुणा है, आप जानते हैं, यह बहुत अधिक है।” हम हमेशा ऐसे व्यक्ति को महसूस करते हैं – एक कमजोर, कमजोर व्यक्तित्व और उसे संरक्षित किया जाना चाहिए। “ओह, माँ, वह यह भी नहीं जानता कि लोगों का दुरुपयोग कैसे करें। वह किसी को कैसे हरा देगा? वह इस सड़क पर चींटी भी नहीं मार सकता। वह कुछ भी कैसे कर सकता है जब की वह कुछ भी करने में समर्थ नहीं है? ”

यह हमारी अवधारणा है, क्योंकि हमें लगता है कि हमें किन्ही भी चीजों को संभालने के लिए वास्तव में एक अत्याचारी व्यक्ति होना चाहिए। लेकिन सिर्फ एक बीज में देखते हैं, यह नाजुक जीवाणु बढ़ता है और खोल को तोड़ता है। इसी तरह, जब हम वास्तव में एक जीवाणु की तरह नाजुक हो जाते हैं और हमारी मृदुता , हमारी करुणा की खूबसूरती ,प्यार और ज्ञान जो की हमें विनम्र बना देता है, में विकसित होते है, तो ये कठोर आवरण टूट जाएंगे।

लेकिन यह सामान्य रूप से इस दौर में दूसरा तरीका चल रहा है। सहज योग में अब हमारे पास नेता हैं। हमारे पास नेता और नेता और नेता है उनमें से कुछ बाघों की तरह आते हैं मुझे नहीं पता था कि उनके साथ क्या करना है। यहां तक कि देवी कुंडलिनी तो बाघों की भी सवारी कर सकती है, क्योंकि इस प्रेम में किसी भी कठोर आवरण को तोड़ने की शक्ति है।

तो हमें क्या मांगना चाहिए ? वह सुंदर, मृदु, दयालु स्वभाव है, और फिर कुंडलिनी वही प्रदान करेगी, क्योंकि देने के लिए उसके पास केवल यही है। कुंडलिनी के पास कुछ और नहीं है। उसकी सारी शक्ति प्यार की है, प्यार के अलावा कुछ नहीं। तो वह तुम्हें कुछ और कैसे दे सकती है जो की उसके पास नहीं है? माना की आप किसी से नफरत करते हैं, वह क्या कर सकती हैं? वह कुछ भी नहीं कर सकती क्योंकि वह आपको नफरत करने की शक्ति नहीं दे सकती है। तो वह क्या कहती है, “आप किसी से नफरत करते हैं। करते रहें या क्षमा करें। “वह आपको क्षमा करने की शक्ति देती है।

जैसे एक तलवार को, एक ढाल से लड़ना पड़ता है, एक तलवार से नहीं |, जैसा कि कहते हैं, हिंसा का सामना केवल अहिंसा से किया जा सकता हैं। इसी तरह, अगर हमें विकसित होना है, तो सहज योगियों को विकसित होना हो, सबसे पहले हमें यह देखना होगा कि हम कितने मधुरता से बात करते हैं, हम कितनी दयालुता से बात करते हैं, हम कितना लिहाज करते हैं। अब यह बाह्य रूप से है, लेकिन जब आप बाहरी रूप से ऐसा करना शुरू करते हैं तो आंतरिक रूप से ऊर्जा अन्दर आना शुरू हो जाती है।

आप कह सकते हैं, “माँ, भले ही आप सोचें -” तो यह हमारी सोच है। नहीं, आप उस समय सोच रहे हैं। उस सोच के लिए, ऊर्जा कुंडलिनी से आएगी, क्योंकि आप उसकी मदद मांग रहे हैं| जो भी उसके पास है, वह देने को तैयार है, लेकिन जो भी उसके पास नहीं है, वह कैसे दे सकती है?

अब, मान लीजिए कि आप गुस्सा होना चाहते हैं, उसे क्रोध दिखाने की शक्ति नहीं मिली है। तो वह आपको क्रोध और गुस्सा कैसे दे सकती है? मेरा मतलब है, कभी-कभी मैं कोशिश करती हूं, “चलो देखते हैं कि मैं अहंकार में जा सकती हूं।” कैसे करें, मुझे नहीं पता। चूंकि यह कुंडलिनी (श्री माताजी हंसते हुए) को नहीं पता यह अहंकार क्या है,?कैसे अहंकार को सहलाया जाये?और कैसे आपको हवा में उड़ाया जाए?। नहीं, तो वह जिस तरह की ऊर्जा है, वही आपको वह देगी।

तो कृपया याद रखें, जो भी लोग जिद,आदतें और अहंकार और इन सभी को लाने की कोशिश करते हैं वे विकसित नहीं होने वाले हैं क्योंकि उन्हें उर्जा कुंडलिनी से नर्ही मिल रही है, बल्कि बाहर से मिल रही है, जो की बिल्कुल व्यर्थ है।

तो कुंडलिनी की शक्ति पूर्णत: शुद्धता, शुभता, पवित्रता, शुद्धता, आत्म सम्मान, शुद्ध प्रेम, निर्लिप्तता, सरोकार, प्रबुद्ध ध्यान – आपको आनंद देने के लिए है। जैसे ही हर मां चाहती है कि उसके बच्चे को आनंद मिलना चाहिए। जिस तरह से संभव है, वह अपने बच्चों को आनंद देने की कोशिश करेगी। इसी तरह, इस कुंडलिनी में केवल एक शक्ति है – अपने बच्चों को आनंद कैसे दें, और वह वह करती है।

मान लीजिए – मेरा मतलब है, मुझे आधुनिक माताओं के बारे में पता नहीं है, लेकिन आम तौर पर, अगर मैं जाऊँ और मेरी मां से कहूं, “मुझे गुस्सा कैसे करें सिखाएं,” वह कहेंगी, “तुम जाओ और अपनी नाक काट दो।” अगर मैं उसे कहूं, “मुझे बताओ कि झूठ कैसे कहें,” वह कहेंगे, “जाओ और अपनी जीभ काट दो।” अगर मैं कहूं, “मुझे बताओ कि दूसरों में बुरी चीजें कैसे देखें,” वह कहेंगे, ” आपकी आंखें बाहर निकल देना बेहतर है। “ये सभी विचारों जो हम अपने भीतर पाले रहते हैं,एक बड़ी समस्या है कुंडलिनी के आपके ध्यान में प्रवेश करने में ।

अब, लोग हमेशा पूछते हैं, “माँ, हम कैसे विकसित हों? हमें क्या करना चाहिए? “यही कारण है कि मैं आत्मनिरीक्षण कहती हूं। आत्मनिरीक्षण होना चाहिए, “मैं इस जीवन में क्या चाहता हूं? मुझे बिना किसी वासना या लालच या उम्मीदों के कई लोगों को प्यार करने में सक्षम होना चाहिए। “ठीक है। तब अमूर्त प्रेम की बाढ़ आ जाएगी।

वह आपको साक्षी अवस्था देती है। वह आपको शांति देती है। उसे आपको कितनी चीजें देना है जिससे आप इतने शक्तिशाली, इतने आधिक शक्तिशाली हो जाते हैं। कोई भी आपको परेशान नहीं कर सकता है। वह आपको सुरक्षा देती है। वह आपको शांति देती है। वह आपको ज्ञान देती है। लेकिन अगर आप मूर्खता चाहते हैं, तो वह ऐसा नहीं कर सकती है। यह असंभव है उसके पास यह नहीं है। तो हर सहज योगी जिसे विकसित होना है, उसे पता होना चाहिए कि अपनी कुंडलिनी में क्या संग्रहित है।

तो अब, यदि आप किसी दूसरे तरीके से करने की कोशिश करते हैं, तो आप बाएं या दाएं तरफ कूदते हैं। बाईं तरफ कूदे,तो फिर आप बाईं ओर आगे बढ़ना शुरू करते हैं, फिर आप कुछ भी बन सकते हैं।

जो भी हम लोगों के बारे में सुनते हैं, जिस तरह से वे हत्या करते हैं और बलात्कार करते हैं और यह और वह और ये सभी चीजें बहुत आसानी से आती हैं, क्योंकि वह ऊर्जा कुंडलिनी से परे है। क्योंकि आप उस तरफ चले जाते हैं – ठीक है, आप भूतों को चाहते हैं, वही मिल जाएगे। आप बीमारियां चाहते हैं, हो जाएगी। आप गंदी चीजों में शामिल होना चाहते हैं, गंदगी हो जाएगी। जो कुछ भी आप चाहते हैं वह हो सकता है। यह भी उपलब्ध है। कोई भी आपको रोक नहीं सकता है। आप बेवकूफ बनना चाहते हैं, आप पीठ के पीछे बात करना चाहते हैं, ठीक है, आगे बढ़ो। यह भी बहुत आम है, मैंने सुना है कि सहज योगी, विशेष रूप से महिलाएं, दूसरों के बारे में पीछे से बात करती है , चर्चा करती हैं। इस तरह हम कभी विकसित नहीं हो सकते हैं। अगर आपको बात करनी है, तो केवल दूसरों के बारे में अच्छी बात करें। अन्यथा बात मत करो, सबसे अच्छा है। ये चीजें हमारी मदद करने वाली नहीं हैं।

अब हम,इस दुनिया में, इस चरण में, उन के लिए अधिक चर्च या मंदिर या मस्जिद बनाने के लिए नहीं हैं। नहीं – ये सब पर्याप्त हो चुके , पर्याप्त समस्याएं हो चुकि है। तो अब हम अपने लिए प्यार और शुद्धता का निवास बनाना चाहते हैं, लेकिन जो लोग निवासी हैं वे ऐसे नहीं हैं, तो आप कैसे प्यार पा सकते हैं? यह हमेशा ईर्ष्या और स्वार्थीता और सभी चीजें हमेशा होगी।

तो जब हम कुंडलिनी के प्रकाश की बात करते हैं, तो हमें यह समझना होगा कि यह प्रकाश आपके “जीवन में” , आपके “जीवन के बाहर”फैलता है| और स्वयं को बहुत ही सुंदर तरीके से व्यक्त करता है। हर कोई कहता है कि सहज योगी दूसरों से बहुत अलग दिखते हैं। “उनके चेहरे पर एक चमक है। वहाँ है – वे फूलों की तरह दिखते हैं “, बहुत तनावमुक्त “, वे बहुत सुंदर लोग हैं।” उदाहरण के लिए, कैबेला में लोग बहुत प्रभावित हुए थे। उन्होंने कहा, “ये युवा लोग हैं और वे यहां आये हैं, वे आपस में लड़ते नहीं हैं, उनमें से कोई गुस्सा नहीं है।” वे आश्चर्यचकित हैं कि आप इतने समझदार कैसे हो सकते हैं, आप में से कई। बहुत से लोग अगर वे कहीं भी इकट्ठे होते हैं तो , वे कभी भी उन्मत्त हो सकते हैं। मेरा मतलब है, यहां तक कि एक छोटा सा समूह भी पागल हो सकता है, बिना कारण वे पागल हो जाते तो आपके उन सामूहिक व्यवहारों को उन साधारण गांव लोगों द्वारा स्पष्ट रूप से देखा गया था। इसके लिए, आपको बस इच्छा रखना है। आपको बस इच्छा करना है और यह शुद्ध इच्छा सही दिशा में काम करती है, अन्यथा जो कुछ भी आप चाहते हैं उसे प्राप्त नहीं कर सकते हैं। आपको पैसा चाहिए? ठीक है, इसे पा लो। दाएं तरफ चले जाएं। इस तरह पैसे पाएं। उस तरह पैसे पाएं। जो अच्छा लगे वो करें। तो आप किसी को मारना चाहते हैं – ठीक है, दाएं तरफ जाओ। आप कई लोगों को प्राप्त कर सकते हैं जो जायेंगे और किसी को भी मार डालेंगे। फिर आप कुछ प्रचार या कुछ चाहते हैं। ठीक है, दाएं तरफ जाओ।

ये सभी चीजें हो सकती हैं, जो भी आप चाहते हैं आप की हरकतों के अनुसार। लेकिन उत्थान के लिए, आपकी इच्छा ,उस बड़े प्यारे व्यक्तित्वऔर सुंदर रिश्ते को प्राप्त करने की शुद्ध इच्छा होनी चाहिए।

आज आप अपनी कुंडलिनी की पूजा कर रहे हैं। आप आदि कुंडलिनी की भी पूजा कर रहे हैं। अब, आपको यह पता लगाना होगा कि,जहाँ तक कि आदि कुंडलिनी का संबंध है,हम क्या कर रहे हैं । जब आप आदि कुंडलिनी की पूजा करते हैं, तो आप में जो उनका प्रतिबिंब, है जो आपकी स्वयं की कुंडलिनी है, बहुत प्रसन्न महसूस करती है। इसके अलावा देवता प्रसन्न होते हैं। उस सुखद मूड में आप एक बहुत गहरा अनुभव प्राप्त कर सकते हैं, यह एक तथ्य है। लेकिन, इसे बनाए रखने के लिए, आपको ध्यान करना होगा, अन्यथा ये सभी रेशे वापस जाएंगे, नीचे फिसल जाएंगे, जो की पूजाके दौरान बाहर आ गए हैं।

मुझे पता है कि हर कोई पूजा करना पसंद करता है, वे इसका आनंद लेते हैं। लेकिन आपको यह समझना चाहिए कि, “हम इस पूजा में क्या प्राप्त करते हैं?” आप यहां आते हैं – उस उच्च जीवन की इच्छा करते है। लेकिन रोजाना के निस्सार जीवन से बाहर निकलने का प्रयास करें। यदि आप चाहें,तो आप इसे कर सकते हैं। यह फिर से आपकी इच्छा का सवाल है। तो पूरी तरह से यह चाहत है, आपकी इच्छा क्या है? हमें ‘बच्चों’ की इच्छा है। कुछ लोग बच्चे पाना चाहते हैं। बच्चों के जन्म के बाद वे कहते हैं, “वाह, ये कैसे बच्चे हैं! भगवान मुझे बचाओ! “(श्री माताजी हंसते हुए)

फिर आप पैसे चाहते हैं और उनमें से अधिकतर पैसे वाले लोग अब जेल में हैं। फिर आप प्रसिद्धि चाहते हैं। लोगों की प्रसिद्धि कभी उनकी मदद नहीं करती है, केवल यह ईर्ष्या और सभी प्रकार की चीजों के कारण समस्याएं देती है। अगर प्रसिद्धि इतनी अच्छी बात थी, तो लोगों को ईर्ष्या क्यों होनी चाहिए?

तो कुंडलिनी की शक्ति, जो आपकी अपनी मां है, जिसे उत्थान पाना है, जिसे उपर उठना है, जिसे आपकी शुद्ध इच्छा के कारण खुद को प्रकट करना है। तो अपने आत्मनिरीक्षण में, अपने पूजा में, अपने ध्यान में, यदि आप स्वयं देखे की आप ध्यान क्यों कर रहे हैं – यह करुणा और प्यार की शुद्ध इच्छा हमारे भीतर जागृत करने के लिए है। आप पहलेसे ही ध्यान में हैं, आप पहले ही बढ़ रहे हैं, विकास शुरू हो गया है। और आप इतनी तेजी से बढ़ेंगे कि यह आवरण, जो की मानव कंडीशनिंग और अहंकार का है, टूट कर खुल जाएगा। और फिर यह नन्ही, छोटी सी चीज जो त्रिकोणीय हड्डी में है – कल्पना करें – इस त्रिकोणीय हड्डी में बहुत कम जगह है – यह बाहर आती है और प्रकट होती है और पूरी दुनिया को बचा सकती है। बस इस कुंडलिनी की भव्यता, विस्तार, और महानता देखें जो आपके भीतर थी और जो पूरी ताकत में आइ और उसने जबरदस्त चीजें दिखायीं।

ऐसे लोग वास्तव में महान लोग हैं, न कि वे लोग जो किसी भी प्रकार के ब्रांड कपड़े पहनते हैं या पहनने की कोशिश कर रहे हैं, और दिखाने का प्रयास करते हैं। सहज योगियों को इन सभी मूर्ख विचारों और मूर्खताओं को छोड़ना होगा। ताकि यह कुंडलिनी सुंदर फूल पहनती है, आपके शब्द सुगंधित हो जाते हैं, आपकी नज़र सुखदायक हो जाती है, आपकी मुस्कुराहट संतोषजनक हो जाती है। सब कुछ,तुम्हारा अस्तित्व अन्य कुछ भी नहीं, लेकिन ईमानदारी, धार्मिकता, शांति – सब से ऊपर, खुशी प्रसारित करता है। और जो आनंद आप अब महसूस करते हैं – एक साथ जब हम कल तालियाँ बजाते हुए गा रहे थे एक बहुत ही साधारण ,साधारण से संगीत समागम में, बिना नशे के, बिना चीखे चिल्लाये ,और कुछ नहीं बिलकुल साधारण और। जो खुशी हम महसूस कर रहे थे, ऐसा इसलिए था क्योंकि हमारी कुंडलिनी नाच रही थी। वह बहुत खुश थी, क्योंकि तुम वहाँ क्या मांग रहे थे? कुछ भी नहीं, लेकिन सामूहिकता का आनंद।

सामूहिकता का यह मतलब नहीं है कि हम सभी को कुछ गोंद या कुछ के साथ आपस में अटक जाना चाहिए या हम सभी जिब्राल्टर, रॉक ऑफ जिब्राल्टर की तरह बन जाते हैं। नहीं, इसका मतलब यह नहीं है। इसका मतलब है कि आप जहां भी हैं, आप जुड़े हुए हैं। वह सामूहिकता है। कनेक्ट का मतलब यह नहीं है कि आप उस व्यक्ति से नफरत करते हैं। नहीं, आप जुड़े हुए हैं मतलब है कि आप उस व्यक्ति से प्यार करते हैं, आप को उस व्यक्ति के बारे में सरोकार हैं। जुड़ाव, कनेक्टिंग लाइन प्यार का है और घृणा का नहीं है। इसलिए, जब आप किसी अन्य व्यक्ति या व्यक्ति से जुड़े होते हैं, तो आप सामूहिकता में हैं।

लेकिन लोग एक साथ रहेंगे और हर रोज एक-दूसरे के सिर तोड़ेंगे। उनमें से कुछ वास्तव में मुझे सिरदर्द देते हैं, मैं आपको कभी-कभी बताती हूं, क्योंकि वे सहज योग के वास्तविक विकास के करीब कहीं नहीं हैं। तो आप अमेरिका में हो सकते हैं, आप भारत में हो सकते हैं, आप कहीं भी हो सकते हैं। तुम बस जुड़े हुए हो और आप सम्बंधित हैं। जैसे ही किसी भी हिस्से में,दुनिया के किसी भी हिस्से में, आप जुड़े हुए हैं और आप प्रभावी हैं, आप प्रबंधित कर सकते हैं।

लेकिन अगर आप जुड़े नहीं हैं और आप सिर्फ एक साथ चिपके हुए हैं, तो ऐसी परिस्थितियों में रहना बहुत असुविधाजनक है। मुझे लगता है कि लोग सामूहिकता के अर्थ को भी समझ नहीं पाते हैं, जहां दूसरा नहीं है, अनन्य। जहां दूसरा नहीं है, वहां कोई अन्य व्यक्तित्व नहीं है। बाएं और दाएं या दोनों हो सकता है, कारण से ये व्यक्तित्व आपसे अलग हो गए हैं। लेकिन जब आप पूरी तरह से निर्लिप्त हो जाते हैं तब आप पूर्णत:आत्मस्वरूप होते है| और आपकी कुंडलिनी नाच रही है – आप अकेले हैं और कभी अकेले नहीं हैं।

पूर्ण से यह एककारिता आपको वह सारी सुरक्षा देता है जो आप चाहते हैं, जो आनंद आप चाहते हैं। और यही कारण है कि कुंडलिनी जागृति का मतलब सामूहिकता है। जब तक आप अपने अस्तित्व में शुद्ध सामूहिकता नहीं ले लेते, तब तक कुंडलिनी नहीं उठेगी।

मुझे कभी-कभी दुःख होता है जब लोग मुझे बताते हैं, “यह सज्जन इस तरह है, यह महिला उस तरह है और वह बस ऐसी चीजें कहती है और वह अपने आदेश मनवाने की कोशिश करती है”, या उसके जैसे कुछ आदमी। तब मैं वास्तव में समझ नहीं पा रही हूं कि वे यहाँ क्या कर रहे हैं? हम हिटलर नहीं चाहते हैं।

हमारा यह दृष्टिकोण अब तक एक अलग स्तर पर रहा है, जैसे अधिक पैसा हासिल करना, अधिक धन हासिल करना, अधिक घरों का अधिग्रहण करना, और कारें हासिल करना, और पत्नियों, पतियों, जो भी हो, बच्चों को प्राप्त करना। लेकिन यह पूरी बात सहज योग में बदल जाती है। आप सब चीज का आनंद लें। ठीक है, यह आपका हॉल है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि किसीने भी भुगतान किया है, मैं आनंद ले रहा हूं। इसके लिए भुगतान ना करना और अन्य लोगों के पैसे का आनंद लेना बेहतर नहीं है! (श्री माताजी हंसते हुए) यह कालीन मेरा नहीं है, बहुत अच्छा है। वह तो बहुत ही बढ़िया है। यह सुंदर है, मैं आनंद ले रहा हूँ। (हंसी) शायद वह जिसने इसे खरीदा है, वह किसी चीज़ के बारे में चिंतित हो सकता है। यह खराब हो सकता है या कुछ हो सकता है, लेकिन मैं आनंद ले रहा हूं।

तो जब यह निर्लिप्तता आती है, तो वास्तव में सब कुछ का आनंद लें। और उस अलगाव में केवल आप दूसरों का भी आनंद लेते हैं क्योंकि आप इसके बारे में बहुत निर्लिप्त हैं, किसी के साथ कुछ भी नहीं चाहते हैं। आप जिस व्यक्ति का आनंद लेते हैं उसके लिए केवल व्यक्ति। इसका मतलब है कि आप अपनी आत्मा के माध्यम से किसी अन्य व्यक्ति की आत्मा का आनंद लेते हैं, “आत्ममानी मानेता” केवल आत्मा के माध्यम से आप किसी और की आत्मा का आनंद लेते हैं। और फिर आत्मा स्वयं ही ,जैसा कि आप जानते हैं, ज्ञान का स्रोत है। आत्मा का प्रकाश प्रेम, करुणा, क्षमा, इन सभी का प्रकाश है। जो की आपके चेहरों से चमकते हैं। मेरा मतलब है, चेहरे से आप एक सहज योगी को पहचान सकते हैं। हाथो पर देखने की कोई ज़रूरत नहीं है। आप जानते हैं कि यह एक सहज योगी है, और कुछ भी नहीं हो सकता है।

तो आदि कुंडलिनी के साथ संबंध यह है कि यह कुंडलिनी जो है वह,आदि कुंडलिनी का प्रतिबिंब है। अब प्रतिबिंब – मान लीजिए कि आप एक भारतीय दर्पण लेते हैं; आप दर्पण में देखते हैं और आप पाएंगेकी आप विचित्र दिखाई दे रहे है, यह आपको केवल तीन टुकड़ों, शायद, या कुछ भी में काट देगा। लेकिन यदि आप बेल्जियन दर्पण लेते हैं, तो प्रतिबिंब सही है, पूर्ण है – लेकिन फिर भी तीन आयामी नहीं है। लेकिन यह आदि कुंडलिनी का एक चार आयामी प्रतिबिंब है – यह चार आयामी है, जिसे तुर्या अवस्था कहा जाता है। और वह चार आयामी व्यक्तित्व जिसे आपने अपनी इच्छा के प्रतिबिंबक के कारण प्रतिबिंबित किया है। इच्छा परावर्तक है और प्रतिबिंब पूरा हो गया है।

तो जब आप आदि कुंडलिनी की पूजा करते हैं, तो आप अपनी कुंडलिनी को साफ करने के साथ-साथ देवताओं को प्रसन्न करने की कोशिश कर रहे हैं। क्योंकि यह एक वस्तु है, यह वस्तु है, इसे बदला नहीं जाना है – लेकिन प्रतिबिंब बदल सकता है।

कुंडलिनी की गतिविधि भी व्यक्ति के स्वभाव पर निर्भर करती है, उसकी कुंडलिनी के उत्थान के लिए इच्छा कितनी बलवती है। सबसे पहले, ऐसे लोग हैं जो संदेह करते हैं। यहाँ तक की वे यह भी नहीं मानते कि कुंडलिनी है। ठीक है, भले ही वे विश्वास कर भी ले, तो भी हैं, वे कहते हैं, “ओह, हवा किसी और कारण से बाहर आ रही है।” वे विश्वास नहीं करना चाहते हैं। तो यह बेईमानी है। कुंडलिनी आपको बेईमानी नहीं दे सकती है। यह आपको ईमानदारी और ईमानदारी में विश्वास दे सकती है। इसलिए वह वास्तव में अनुभव को वास्तविक बनाकर विश्वास देती है, अच्छाई में विश्वास, ईमानदारी में विश्वास, न की उपदेश या व्याख्यान द्वारा, बाइबल या कुछ भी पढ़कर नहीं,

अब, मान लीजिए – आप बगीचे में जाना चाहते हैं, मान लीजिए। बस आप बगीचे में जाना चाहते हैं और अचानक आप स्वयम को बगीचे में पाएंगे। तब आप जान लेंगे कि आपकी इच्छा शुद्ध है। यही कारण है कि यह कार्यान्वित हुआ। “मैं बगीचे में कैसे हूँ? क्या बगीचा मेरे पास आ गया है या मैं बगीचे में चला गया हूं? “ऐसी सभी चीजें आपके भीतर हो रही हैं। ये चमत्कार हैं, क्योंकि वे इसे , सहज योग के चमत्कार कहते है। दरअसल ऐसा नहीं है। यह शुद्ध इच्छा यह काम करती है क्योंकि यह शक्तिशाली है। सिर्फ यह काम करता है। और जब यह पूरा कार्यान्वित होता है, तो आप अपने भीतर उस विश्वास को विकसित करते हैं। तो विश्वास, यदि यह आपके भीतर है, तो कोई भी उस विश्वास को चुनौती नहीं दे सकता है, जो अंधविश्वास नहीं है बल्कि खुली आंखें, अनुभवी विश्वास जो आपके भीतर स्थापित है – को चुनौती नहीं दी जा सकती है। यदि आपके पास विश्वास है, तो यह किया जाएगा। यही कारण है कि मैं हमेशा कहती हूं कि असावधानीवश कुछ तो भी नहीं बोला करें , क्योंकि आप सहज योगी हैं, आप जुड़े हुए हैं। यदि आप कहते हैं, “उस विमान को देर हो जाए”, यह होगा। ऐसी चीजों को कहने की कोई जरूरत नहीं है। हमारे पास इस तरह के कई अनुभव हैं। मैं सहज योगियों को कुछ भी यूँ ही ना बोलने को कहती रही हूँ, क्योंकि आपको पता होना चाहिए कि अब आप जुड़े हुए हैं। आपकी शुद्ध इच्छा अब पूरी हो रही है और अब आप जुड़े हुए हैं, अब आप दिव्य हैं, आप आत्मसाक्षात्कारी हैं, आप दूसरों से बहुत अलग हैं। आप कल्पना नहीं कर सकते, मैं इस तरह किसी से बात नहीं कर सकती।

उदाहरण के लिए, किसी को भी ले लो जैसे की फ्रांस , [हंसी] मैं उन्हें कुछ भी समझा नहीं सकती या उनसे बात नहीं कर सकती। यह उनके दिमाग से परे है। लेकिन आपको, यह सब सूक्ष्म ज्ञान अवशोषित हो रहा है क्योंकि आपकी कुंडलिनी इसे अवशोषित कर रही है।

अब, जैसा कि यह है, आप जानते हैं कि मुझे पसीना हो जाता है । क्यूं कर? क्योंकि मैं आपकी गर्मी को अवशोषित करती हूं। मैं इतना अवशोषित करती हूं कि मैंपसीना _पसीना हूं। इस तथ्य के बावजूद कि आप लोगों को अच्छी ठंडी हवा आ रही है, और मैं गर्म महसूस कर रही हूं।

तो ऐसा है, आपकी कुंडलिनी भी अवशोषित करती है। लेकिन जो भी आप अवशोषित करते हैं वह मेरे द्वारा पुन: अवशोषित होता है। लेकिन यह एक दबाव मापक की तरह बन जाता है। तुरंत आप जानने लगते हैं, “यह ऐसा है। यह वैसा है। वह बहुत गर्म है। वह इस तरह है। “आप बिना किसी इच्छा के, बिना किसी सोच के, बिना मांगे , जानते हैं ,कि आप जानते हैं कि यह ऐसा ही है। लेकिन वही साथी दूसरों के साथ काफी अनुकूल होगा, यह ठीक है, लेकिन आप इस का साथ नहीं दे सकते हैं, क्योंकि आपकी कुंडलिनी एक बैरोमीटर है और वह आपको बताती है कि दूसरों के साथऔर आप के साथ क्या गलत है।

अब, उदाहरण के लिए, आज्ञा एक समस्या है, आज्ञा। सब लोग,कहते है की “माँ, आज्ञा एक समस्या है। आज्ञा एक समस्या है। “मतलब, मैं अहंकारी हूं। सामान्यत: कोई भी ऐसा नहीं कहता – इसका मतलब है।

तो अब आप वह हैं, जो स्वयं के बारे में जान सकते हैं – यह आत्मज्ञान है – और आप कुंडलिनी की शुद्धता के कारण दूसरों के बारे में भी जान सकते हैं, यह परावर्तक है। और जितना अधिक आप एक बेहतर परावर्तक बन जाते हैं, उतना अधिक कुंडलिनी दिखाती है।

इसलिए, हमारे लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि हमारी कुंडलिनी जागृत है, वह शुद्ध इच्छा है, यह हमारी पवित्र मां है। प्रत्येक व्यक्ति को एक अलग मां, व्यक्तिगत मां मिलती है, और यह कुंडलिनी, जो की, हमारे पास अलग , दूसरों से अलग है क्योकि कि उसकी जागरूकता हमारे बारे में अलग है। लेकिन, उसके कार्य , उसकी विधियों की दृष्टि से , वह हर किसी में समान ही है। वह मेरे बारे में जानती है, वह तुम्हारे बारे में जानती है, वह आपके बारे में जानती है, [श्री माताजी अलग-अलग व्यक्तियों को दिखाती हैं] इसलिए वह, अलग है, ज्ञान की दृष्टि से। लेकिन, जिस तरह से,वह हर किसी में काम करती है, वह वही है। आपको किसी की कुंडलिनीपेट में नहीं मिलेगी, ना किसी की गले में । यह एक ही स्थान पर है और यह समान ढंग से ही चलती है। यह एक समान ढंग से ही उपचार करती है। यह समान काम करती है, सिवाय इसके कि इसमें ज्ञान है। उदाहरण के लिए, यदि आपके पास दो मर्सिडीज कार हैं, तो वे वैसे ही काम करती हैं – बिल्कुल वही। लेकिन मुझे लगता है कि अगर मुझे यहां से जाना है, जैसे फ्रैंकफर्ट , तो सड़क सर्कल में है, इसलिए उसे गोलाकार तरीके से जाना है। लेकिन एक अन्य मर्सिडीज, जिसे सीधे रास्ते पर जाना है, यह सीधे रास्ते पर जायेगी। लेकिन काम एक ही है।

केवल आपके बारे ज्ञान ही विशिष्ट है – वह आपको बहुत अच्छी तरह से जानती है पूर्णत:। यह याद रखना। आप उसे धोखा नहीं दे सकते। वह आपको बहुत अच्छी तरह से जानती है और यही कारण है कि आज हम अपनी कुंडलिनी की पूजा करने के लिए यहां हैं, ताकि हम उसे सभी श्रेय दे सकें, “ओह, माँ, आपने हमें ये सभी महान शक्तियां दी हैं। आपने हमें अपने भीतर यह सूक्ष्म ज्ञान दिया है। आपने हमें वह विश्वव्यापी प्यार दिया है । “और जितना अधिक आप उसके संबंधों से अवगत हो जाते हैं – बहुत, बहुत नाजुक सम्बन्ध – तो आप चकित होंगे। मेरी तस्वीरों में से एक में, आपने देखा होगा, ऐसी कई रेखाएं चल रही हैं, लेकिन बहुत पतली रेखाएं, तेज, पतली हैं। इस तरह से हम हैं।

अब हम सभी आत्मसाक्षात्कारी हैं। केवल एक चीज, अगर हमें खुद को विकसित करना और बढ़ना है,हमें कुछ बहुत ही सुंदर मांगना है और इच्छा करना है । लेकिन हमारा ध्यान बकवास चीजों पर चल रहा है,तो, आप कैसे उत्थान पायेगे? यही कारण है कि मैंने कहा कि, हमें ध्यान करना है, ताकि, हम विचारहीन जागरूकता प्राप्त कर सकें जिसके द्वारा हम कुंडलिनी को उत्थान का अवसर देते हैं।

मुझे उम्मीद है कि आज के कार्यक्रम के बाद, लोग, अपने स्वयं के कुंडलिनी पर ध्यान देंगे, न कि अन्य लोगों के दोषों के लिए। सबसे पहले आपको करुणा, प्यार और सब कुछ के उस व्यक्तित्व को विकसित करना होगा। तब आप चकित होंगे। आप वास्तविकता में कुछ उठ जाएंगे – एक इंसान के रूप में पूर्णता की एक सुंदर तस्वीर।

परमात्मा आपको आशीर्वादित करें!

मैं साढ़े तीन के गणित के विवरण,और यह और वह, में नहीं जाना चाहती – इसे भूल जाओ। उन सभी गणितीय गणनाओं और चीजों में जाने की कोई ज़रूरत नहीं है। कोई जरूरत नहीं है। मेरा मतलब है कि यह प्यार का गणित है, और प्यार का क्या कोई गणित होता है?लेकिन मैं एक किताब लिख रही हूँ। यदि आप इसके बारे में जानना चाहते हैं, तो आप इसे बाद में पढ़ सकते हैं, लेकिन पहले आप कुछ ऊँचे बन जाते है उसके बा, अन्यथा यह फिर से आपके अहंकार में जाएगा।आज्ञा बहुत अधिक है। आपको इतनी आज्ञा क्यो आ रही है? मैंने तुम्हें चोट पहुंचाने के लिए कुछ भी नहीं कहा, क्या मैंने किया?बेहतर? मुझे लगता है कि आपको सभी को अपनी अंगुली को अपनी आज्ञा पर रखना चाहिए और इसे थोड़ा सा स्थानांतरित करना चाहिए। यहां हम वास्तव में निर्विचार जागरूक और निर्लिप्त हो जाते हैं। इसे धीरे-धीरे ले जाएं। बेहतर, बहुत तनाव मुक्त ।